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शनिवार, 21 नवंबर 2020

कोरोना में सफलता की कहानी:15 हजार से शुरू किया था कारोबार, IT कंपनी खड़ी की, अब अमेरिका के 3.5 लाख करोड़ टर्नओवर वाले ग्रुप में शामिल

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(गीतेश द्विवेदी) कोविड दौर में आईटी सेक्टर से बड़ी खबर आई है। इंदौर की आईटी कंपनी नार्थआउट को अमेरिका के बड़े ग्रुप एचआईजी की सहयोगी कंपनी ईज कैसल इंटीग्रेशन ने अधिग्रहित किया है। साढ़े तीन लाख करोड़ के टर्नओवर वाले एचआईजी ग्रुुप की तीन साल से नार्थआउट पर नजर थी। आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन में नार्थआउट का काम देख एचआईजी ने हाल ही में डील फाइनल कर दी। अब कंपनी अमेरिका और यूरोप के साथ इंदौर कैम्पस का भी विस्तार करेगी। अहम बात ये है कि नार्थआउट सिर्फ 6 साल पहले शुरू हुई थी और इसे इंदौर के मोनेश जैन ने शुरू किया था। इतने कम समय में कंपनी ने अमेरिका और यूरोप में कई बड़ी इंश्योरेंस, फाइनेंस और हेल्थ केयर कंपनियों को सेवाएं दीं। नार्थआउट अमेरिका की टॉप 5 इंश्योरेंस कंपनियों के साथ काम कर रही है। कंपनी के इंदौर कैम्पस में 160 और बोस्टन में 25 आईटी प्रोफेशनल्स काम करते हैं। जिस एचआईजी ग्रुप का हिस्सा नार्थआउट बनी है, उसके अधीन 100 आईटी, इंश्योरेंस, बैंकिंग सेवाएं देने वाली कंपनियां काम करती हैं। साइकिल पर रखकर खजूरी बाजार में कॉपियां पहुंचातेे थे अब मल्टीनेशनल कंपनी एसजीएसआईटीएस से इंजीनियरिंग करने वाले मोनेश ने भाई आशीष के साथ नोटबुक प्रिंट कर बेचने से कारोबार की शुरुआत की थी। मोनेश अखबारी कागज के वेस्ट मटेरियल से नोटबुक बनाकर बेचते। इसमें उन्होंने पिता पारसमल जैन से 15 हजार रु. उधार लिए थे। मोनेश खुद साइकिल से खजूरी बाजार जाते, पीछे कैरियर पर माल लदा होता था। पहले महीने ही उन्होंने 12 हजार रु. कमाए। हालांकि पढ़ाई के चलते काम को बीच में छोड़ दिया। इंजीनियरिंग पूरी करने के बाद वे मास्टर्स डिग्री के लिए टेक्सास गए। 2012-13 में दुनिया की एक बड़ी ग्रोसरी चेन कंपनी के सीईओ बिजनेस चेंज कर सॉफ्टवेयर कंपनी शुरू करने के लिए मददगार कंपनी या स्टार्टअप की तलाश कर रहे थे। उनसे मुलाकात में मोनेश ने सोचा कि ऐसे स्टार्टअप की जरूरत कई कंपनियों को होगी, जो आईटी सेक्टर में शिफ्ट होना चाह रहे हैं। उन्होंने नौकरी छोड़ी और इंदौर में आशीष के साथ स्टार्टअप शुरू कर दिया। मोनेश बताते हैं कि शुरुआत में कई बड़ी सप्लाय चेन, ग्रोसरी कंपनियों के सीईओ से मिले, सब हमारी बातें सुनते थे, पर काम देने में पीछे हट जाते थे। वे बोलते- तुम लोग अभी छोटे हो, इतना बड़ा काम नहीं कर पाओगे। धीरे-धीरे कुछ लोगों ने काम करवाया, उन्हें देख अमेरिका की कुछ और कंपनियों में भरोसा जागा। इस तरह दो लोगों का स्टार्टअप आईटी सेक्टर की कंपनी बन गई। इसके बाद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में अमेरिका व यूरोप की कई बड़ी कंपनियों के लिए काम किया। सुपर कॉरिडोर व सिंहासा में देखी जमीनें, पांच गुना बढ़ेगा कंपनी का कैम्पस इंदौर के लिहाज से ये करार इसलिए खास है कि ईज कैसल ने विस्तार में यहां के कैम्पस को 5 गुना तक बढ़ाने की बात कही है। मोनेश बताते हैं कि कंपनी के सीईओ जॉन काहले ने आठ महीने में इंदौर के आईटी सेक्टर ग्रोथ की पूरी जानकारी ली है। कंपनी सुपर कॉरिडोर या सिंहासा में नए कैम्पस की प्लानिंग कर रही है। इसमें कम से कम 1 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा। इससे आने वाले दिनों में इंदौर में एक और बड़ी मल्टीशनेशनल कंपनी की इंट्री होगी। sabhar bhaskar.com

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मंगलवार, 7 जुलाई 2020

किशमिश के साथ शादीशुदा पुरुषों को बेहतरीन फायदा

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किशमिश के फायदे के बारे में आपने पहले भी जरूर पढ़ा होगा लेकिन यहां पर वैज्ञानिक रिसर्च पर आधारित कुछ ऐसे बेहतरीन फैक्ट बताए जा रहे हैं जो शादीशुदा पुरुषों की जिंदगी को खुशनुमा बना सकते हमारे घर में कई ऐसे खाद्य पदार्थ मौजूद होते हैं जिनका हम किसी विशेष पकवान के जरिए ही सेवन करते हैं। इन्हीं में से एक ऐसा ही खाद्य पदार्थ किशमिश है जो ड्राई फ्रूट की श्रेणी में आता है। इसका सेवन आमतौर पर लोग दूध के साथ ज्यादा करते हैं। जबकि शादीशुदा पुरुषों के द्वारा अगर किशमिश का सेवन एक अन्य फूड के साथ किया जाए तो यह बेहतरीन और जबर्दस्त फायदे पहुंचा सकता है। देखा जाए तो ज्यादातर घरों में यह चीज हमेशा मौजूद रहती है और लोग उसे अलग-अलग तरह से खाने में इस्तेमाल करते हैं।आइए अब सबसे पहले यह जानते हैं कि किशमिश का किस चीज के साथ सेवन करना है जिससे शादीशुदा पुरुषों को बेहतरीन फायदे मिल सकते हैं।: शादीशुदा पुरुष किशमिश के साथ करें इस 1 चीज का सेवन, होते हैं ये जबर्दस्त 6 फायदे" किशमिश के साथ शहद का सेवन किया जाए तो शादीशुदा पुरुषों को बेहतरीन फायदा मिल सकता है। इसके वैज्ञानिक कारण को अगर समझने की कोशिश की जाए तो यह और भी आसान हो जाएगा। दरअसल, किशमिश और शहद दोनों ही टेस्टोस्टोरोन बूस्टिंग फूड्स की श्रेणी में गिने जाते हैं। यह एक ऐसा हार्मोन है जो पुरुषों की सेक्सुअल समस्याओं को दूर करने और उनकी विभिन्न शारीरिक समस्याओं को दूर करने के लिए प्रभावी रूप से कार्य करता है। इसी गुण के कारण यह शादीशुदा पुरुषों के लिए और भी बेहतरीन साबित हो जाता है ऑफिस का वर्क लोड और कई सारी जिम्मेदारियां कुछ पुरुषों पर भारी पड़ जाती है। इसका असर न केवल शारीरिक स्वास्थ्य पर बढ़ता है बल्कि पौरुष शक्ति कमजोर हो जाने के कारण रोमांटिक लाइफ में भी खलल बढ़ जाता है। इस समस्या को दूर करने के लिए शहद और किशमिश के साथ आप चाहे तो दूध का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। एक हफ्ते तक लगातार इसका सेवन करने के बाद आपको खुद ही इससे होने वाले फायदे को महसूस करने लगेंगे। स्पर्म काउंट को बढ़ाने में जिन पुरुषों को लो स्पर्म काउंट की शिकायत है उन्हें सबसे पहले अल्कोहल और स्मोकिंग को पूरी तरह से छोड़ देना चाहिए। इसके बाद उन्हें अपने खाने पीने पर विशेष ध्यान देने की भी जरूरत होती है। वहीं, शहद और किशमिश का एक साथ किया गया सेवन प्रभावी रूप से स्पर्म काउंट को बढ़ाने में सक्रियरूप से अपना असर दिखाता है। आपको यह जानकर हैरानी होगी लेकिन यह सच है कि इसकी कई प्रकार की क्वालिटी भी होती है। पतला स्पर्म मोटेलिटी की क्रिया में काफी धीमा होता है और इससे प्रजनन क्षमता पर भी विपरीत असर पड़ सकता है। जबकि शहद और किशमिश में ऐसे विशेष औषधीय गुण पाए जाते हैं जो स्पर्म की क्वालिटी को बेहतरीन बनाने में प्रभावी रूप से मददगार हो सकते हैं।पुरुषों को प्रोस्टेट कैंसर का खतरा सबसे ज्यादा होता है और इसकी चपेट में कई सारे लोग आ भी जाते हैं। जबकि वैज्ञानिक अध्ययन के अनुसार शहद और किशमिश दोनों में एंटी कैंसर गुण पाया जाता है। एंटी कैंसर गुण शरीर के किसी भी अंग में कैंसर सेल्स को विकसित होने से रोकती हैं और आपको कैंसर की चपेट में आने से बचाए भी रख सकती हैं। इस कैंसर से बचने के लिए भी आपको किशमिश और शहद के फायदे काफी लाभ पहुंचा सकते हैं।शरीर के विभिन्न अंगों का विकास होना बहुत जरूरी है। मांसपेशियों और कोशिकाओं के निर्माण के लिए हमें बेहद जरूरी और पावरफुल पौष्टिक तत्वों की जरूरत होती है। सेहतमंद बने रहने के लिए शहद और किशमिश का सेवन काफी लंबे समय से किया जा रहा है। जबकि इनमें मौजूद टेस्टोस्टेरोन हार्मोन बूस्टिंग का गुण शारीरिक विकास को बढ़ावा देने में भी विशेष रूप से सहयोग प्रदान कर सकता है ब्लड प्रेशर की समस्या महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों को ज्यादा परेशान करती है और यह उनकी दिनचर्या में शामिल खराब आदत व खानपान पर ठीक तरह से ध्यान न देने के कारण भी होता है। इससे बचे रहने के लिए शहद और किशमिश में मैग्नीशियम की मात्रा पाई जाती है जो ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में बेहतरीन पोषक तत्व की भूमिका निभाती है। आप इसे नियमित रूप से भी अपनी डायट में शामिल कर सकते हैं। sabhar : navbharattaimes.com

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शुक्रवार, 10 अप्रैल 2020

एक तस्वीर ने बदली जिंदगी / 4 साल पहले सड़क पर भीख मांगने वाली रीता आज हैं सेलिब्रिटी, इंस्टाग्राम पर हैं एक लाख से अधिक फॉलोवर

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2016 में लुकबान के एक फेस्टिवल में शामिल होने पहुंचे फोटोग्राफर टोफर क्वींटो रीता की खूबसूरती से प्रभावित हुए
टोफर ने तस्वीर खींचकर सोशल मीडिया पर डाली, तस्वीर वायरल हुई जिसने रीता की जिंदगी बदल दी​​​​​​
दैनिक भास्करApr 09, 2020, 10:16 AM IST
मनीला. इंसान की तकदीर बदलने के लिए एक तस्वीर ही काफी है। 13 की रीता गैवियोला इसकी उदाहरण हैं। 4 साल पहले रीता फिलीपींस की सड़कों पर भीख मांगती नजर आती थीं लेकिन आज फैशन मॉडल और ऑनलाइन सेलेब्रिटी हैं। इंस्टाग्राम पर एक लाख से अधिक फॉलोवर हैं। कहानी 2016 में शुरू हुई जब फिलीपींस के लुकबान शहर में फोटोग्राफर टोफर क्वींटो पहुंचे। टोफर रीता की नेचुरल ब्यूटी से प्रभावित हुए और तस्वीर ली। उन्होंने तस्वीर को सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, यह वायरल हो गई और रीता की जिंदगी बदल गई। रीता के 5 भाई-बहन हैं। मां घरों में काम करती हैं और पिता कबाड़ इकट्‌ठा करते हैं।

मॉडलिंग के साथ एक्टिंग में भी बनाया करियर
4 साल पहले जब फोटोग्राफर टोफर क्वींटो ने रीता तस्वीर को सोशल मीडिया पर पोस्ट किया तो उसे कई ब्यूटी क्वींन ने पसंद किया और आर्थिक रूप से मदद भी की। तस्वीर वायरल हुई तो कई फैशन ब्रांड ने रीता को मॉडलिंग असानमेंट ऑफर किए। कुछ समय बाद रीता टीवी शोज में भी नजर आईं। रीता बेडजाओ नाम की अल्पसंख्यक समुदाय हैं इसलिए सोशल मीडिया यूजर ने उनका नाम बेडजाओ गर्ल रखा। रियल्टी शो बिग ब्रदर में काम किया
मिस वर्ल्ड फिलीपींस 2015, मिस इंटरनेशनल फिलीपींस 2014 और मिस अर्थ 2015 ने सोशल मीडिया पर रीता के फिगर और नेचुरल ब्यूटी की तारीफ की। रीता जब चर्चा में आईं तो उन्हें रियल्टी शो बिग ब्रदर ऑफर किया गया। इस शो ने उन्हें नई ऊंचाइयां दीं और परिवार को आर्थिकतौर पर मजबूत बनाया।
अमेरिकी फैन ने गिफ्ट किया नया घर
2018 में रीता ने यूट्यूब पर एक वीडियो अपलोड किया था। जिसमें उन्होंने अपने नए घर की जानकारी दी थी। इस घर को बनवाने में उनके अमेरिकी फैन ग्रेस ने आर्थिक मदद की थी। रीता इन दिनों सोशल मीडिया पर अपनी तस्वीरों से चर्चा में बनी रहती हैं। फिलहाल उनकी प्राथमिकता पढ़ाई पूरी करना है। sahar : bhaskar.com





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सोमवार, 6 अप्रैल 2020

कोरोनावायरस / महामारी से लड़ने में रोबोट्स की मदद लेगा भारत, यह संक्रमितों तक खाना-दवा पहुंचाएंगे, टेम्परेचर और सैंपल लेने का काम भी करेंगे

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दैनिक भास्कर

Apr 06, 2020, 02:05 PM IST
नई दिल्ली.. कोरोना से लड़ने के लिए चीन समेत दुनियाभर के कई देश रोबोट्स की मदद ले रहे हैं। यह न सिर्फ हॉस्पिटल्स को सैनेटाइज का काम कर रहे हैं बल्कि पीड़ितों तक खाना और दवा भी पहुंचा रहे हैं। भारत में कोरोना के अबतक 4 हजार से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं और 130 लोगों की मौत हो चुकी है। ऐसे में भारत भी कोरोना को हराने में इन रोबोट्स की मदद लेने की तैयारी कर रहा है, ताकि जल्द से जल्द इस महामारी पर काबू पाया जा सके।
दुनियाभर के हेल्थ वर्कर, शोधकर्ता और सरकारें इस महामारी पर काबू पाने की कोशिश में लगी हैं। कोरोना अबतक 200 से ज्यादा देशों को अपनी चपेट में ले चुका है। अबतक 12 लाख से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं और 69 हजार से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन संक्रमण से बचने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग रखने की सलाह दे चुका है। इंसानों के लिए घरों तक जरूरी सामान पहुंचाना और हाई रिस्क एरिया में पीड़ितों का इलाज करना एक बड़ी चुनौती बन गई है, ऐसे में यह रोबोट्स संक्रमितों का बेहतर तरीके से ट्रीटमेंट करने में काफी मददगार साबित हो रहे हैं।
महामारी को रोकने के लिए चीन के वुहान शहर में होंगशैन स्पोर्ट्स सेंटर में 14 फील्ड हॉस्पिटल स्टॉफ के साथ 14 रोबोट तैनात किए गए। इन रोबोट्स को बीजिंग की रोबोटिक्स कंपनी क्लाउडमाइंड ने बनाया है। यह न सिर्फ साफ-सफाई करते हैं बल्कि पीड़ितों तक दवाईयां पहुंचाते हैं और उनके शरीर का तापमान भी चेक करते हैं।
क्लाउमाइंड कंपनी का रोबोट जो कोरोना से लड़ने में चीन की मदद कर रहा है
क्लाउमाइंड कंपनी का रोबोट जो कोरोना से लड़ने में चीन की मदद कर रहा है
देश के कई हिस्सो में चल रही टेस्टिंग, स्टार्टअप कंपनियां बना रही रोबोट
  • भारत में भी कोरोना से लड़ने के लिए रोबोट्स की मदद लेने की तैयारी चल रही है। जयपुर के सरकारी हॉस्पिटल सवाई मान सिंह में भी ह्यूमनोइड रोबोट को लेकर ट्रायल चल रहा है, जिसमें यह देखा जा रहा है कि यहां एडमिट कोरोना संक्रमितों तक दवाई और खाना पहुंचाने के लिए इन रोबोट्स का इस्तेमाल किया जा सकता है या नहीं। आधिकारियों का कहना है कि इससे हॉस्पिटल स्टाफ को संक्रमित होने से बचाया जा सकेगा।
  • इसके अलावा केरल की स्टार्टअप कंपनी एसिमोव रोबोटिक्स ने तीन पहियों वाला रोबोट तैयार किया है। कंपनी का कहना है कि यह रोबोट आइसोलेशन वार्ड में संक्रमितों के सहायक की तरह काम करेंगे। यह पीड़ितों तक खाना और दवाईयां पहुंचाएंगे जो अबतक नर्स और डॉक्टर कर रहे हैं थे, जिससे उनके संक्रमित होने का खतरा बढ़ जाता है।
  • हालांकि, इंसानों की जगह रोबोट्स की मदद लेना लोगों को नौकरी के प्रति असुरक्षित महसूस करवा सकता है लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि रोबोट के इस्तेमाल से न सिर्फ मेडिकल स्टॉफ को थोड़ा आराम मिलेगा बल्कि उनके संक्रमित होने के खतरे को भी कम किया जा सकेगा।
  • साइंस रोबोटिक्स जर्नल में पब्लिश हु्ए एक लेख के मुताबिक, रोबोट्स न सिर्फ जगहों को संक्रमण रहित करने का काम कर रहे हैं, बल्कि पब्लिक एरिया में जाकर लोगों का टेम्परेचर चेक करने का भी काम कर रहे हैं। इसके अलावा क्वारैंटाइन व्यक्ति को अकेलापन महसूस ने हो इसके लिए उन्हें सोशल सपोर्ट भी दे रहे हैं। शोधकर्ताओं के मुताबिक, यह टेस्टिंग के लिए लोगों के नाक और गले का सैंपल भी कलेक्ट काम भी कर रहे हैं।

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शुक्रवार, 3 अप्रैल 2020

क्या है क्लोरोक्विन जिसमें कोरोना वायरस का इलाज खोजा जा रहा है?

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फ्रांस और चीन में शुरूआती अध्ययनों में कोविड-19 के खिलाफ इन दवाओं से काफी उम्मीद बंधी है, जिसकी वजह से अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने इसी हफ्ते इन्हें भगवान की तरफ से एक तोहफा बताया.
क्या एक दशक पुरानी सस्ती दवाओं की जोड़ी नई कोरोना वायरस महामारी का इलाज हो सकती है? दुनिया भर के देशों के शोधकर्ता हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन (ऐछसीक्यू) और क्लोरोक्विन (सीक्यू) तक पहुंच बढ़ा रहे हैं. ये दोनों सम्बंधित कंपाउंड हैं और क्विनीन के सिंथेटिक रूप हैं. क्विनीन सिनकोना पेड़ों से आने वाला एक पदार्थ है जिसका सैकड़ों सालों से मलेरिया के इलाज के लिए इस्तेमाल होता आया है.

ऐछसीक्यू दोनों में से कम जहरीला है और इसका इस्तेमाल एंटी-इंफ्लेमेटरी दवा के रूप में गठिया और ल्यूपस के इलाज के लिए भी किया जाता है.

फ्रांस और चीन में शुरूआती अध्ययनों में कोविड-19 के खिलाफ इन दवाओं से काफी उम्मीद बंधी है, जिसकी वजह से अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने इसी हफ्ते इन्हें भगवान की तरफ से एक तोहफा बताया. हालांकि विशेषज्ञ तब तक सावधानी बरतने को कह रहे हैं जब तक ट्रायल में इनकी प्रभावकारिता की पुष्टि नहीं हो जाती.

चीन ने सीक्यू का इस्तेमाल फरवरी में एक ट्रायल के दौरान 134 मरीजों पर किया था और अधिकारियों का कहना है कि वो बीमारी की तीव्रता कम करने में प्रभावकारी सिद्ध हुई थी. लेकिन इन नतीजों को अभी छापा नहीं गया है. चीन में सांस के विशेषज्ञ जौंग नानशान ने पिछले सप्ताह एक प्रेस वार्ता में कहा था कि इस ट्रायल के डाटा को व्यापक रूप से सार्वजनिक किया जाएगा. नानशान महामारी की रोकथाम के तरीकों पर काम करने के लिए गठित एक सरकारी टास्क फोर्स का नेतृत्व कर रहे हैं.
फ्रांस में शोधकर्ताओं की एक टीम ने पिछले सप्ताह बताया कि उन्होंने कोविड-19 के 36 मरीजों का अध्ययन किया और पाया कि एक समूह को देने के बाद उस समूह में वायरल लोड भारी मात्रा में गिर गया. इस टीम का नेतृत्व मार्सेल स्थित आईऐछयू-मेडितेरानी इन्फेक्शन के दिदिएर राऊल कर रहे हैं. टीम ने पाया कि परिणाम विशेष रूप से साफ तब थे जब इसका इस्तेमाल एजिथ्रोमाइसिन के साथ किया गया. एजिथ्रोमाइसिन एक आम एंटीबायोटिक है जिसका इस्तेमाल दूसरे दर्जे के बैक्टीरियल संक्रमण का अंत करने के लिए किया जाता है.

यह भी साबित हो चुका है कि ऐछसीक्यू और सीक्यू एसएआरएस-सीओवी-2 वायरस के खिलाफ लैब में कारगर साबित हुए थे और पिछले सप्ताह सेल डिस्कवरी में छपे एक लेख में चीन की एक टीम ने एक संभावित कार्य विधि भी बताई.
Marburg Virus (picture alliance/dpa/CDC)
रिवरसाइड में कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय में सेल बायोलॉजी के प्रोफेसर करीन ल रोक ने समझाया कि ऐछसीक्यू और सीक्यू दोनों मिलकर वायर की सेल में घुसने की क्षमता पर असर डालने की कोशिश करते हैं और उन्हें बढ़ने से भी रोकते हैं. लेकिन उन्होंने यह भी कहा, "मैं अभी भी बड़े क्लीनिकल ट्रायल के परिणामों के छपने का इन्तजार कर रही हूं जिनमें ऐछसीक्यू की प्रभावकारिता साबित की गई हो."

अमेरिका के राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान के संक्रामक बीमारियों के विभाग के मुखिया एंथोनी फॉसी का कहना है, "उम्मीद का मतलब सबूत नहीं होता है और जो छोटे अध्ययन अभी तक किये गए हैं उनसे सिर्फ "ऐनिकडोटल" सबूत निकला है."

इसके अलावा चीन में 30 मरीजों पर हुए एक छोटे अध्ययन ने दिखाया कि ऐछसीक्यू सामान्य देख-रेख से कुछ भी बेहतर नहीं था.वैज्ञानिकों का कहना है कि पक्के तौर पर जानने का एकमात्र तरीका है रैंडमाइज्ड क्लीनिकल ट्रायल करना.

सीके/एए (एएफपी)
sabhar : dw.de

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शुक्रवार, 24 जनवरी 2020

नेशनल बिजनेस रजिस्टर बनेगा, जिले के हर छोटे-बड़े व्यापार की इसमें डिटेल होगी

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नई दिल्ली. एनआरसी और एनपीआर को लेकर देशभर में जारी विरोध के बीच सरकार एक और रजिस्टर बनाने जा रही है। यह नेशनल बिजनेस रजिस्टर होगा। इसमें हर जिले के सभी छोटे-बड़े बिजनेस की जानकारी होगी। वर्तमान में जारी सातवीं आर्थिक जनगणना के आधार पर इस रजिस्टर के लिए जानकारी जुटाई जाएगी। इस रजिस्टर में माल, सेवा के उत्पादन/वितरण में लगी सभी बिजनेस इकाइयों और संस्थानों की जिलेवार जानकारी होगी। इसको जीएसटी नेटवर्क, कर्मचारी राज्य बीमा निगम, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन और कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय से मिलने वाले आंकड़ों से नियमित आधार पर अपडेट किया जाएगा। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि इस रजिस्टर में जुटाए गए डिजिटल डेटा से नेशनल अकाउंट्स की गुणवत्ता में सुधार आएगा। 


ये जानकारियां रहेंगी रजिस्टर में:


बिजनेस एंटरप्राइजेज का नाम

उसकी लोकेशन

गतिविधियां

स्वामित्व का प्रकार

कर्मचारियों की संख्या

पैन/टैन


sabhar : bhaskar.com

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शनिवार, 18 जनवरी 2020

कैसी होंगी भविष्य की दवाएं

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सोमवार, 10 जून 2019

नपुंसकता

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बुधवार, 14 नवंबर 2018

Suchira singh ki kalam se

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आदरणीय मेयर उमेश गौतम जी (बरेली), ( भूड़ मोहल्ले में भी कोई बंदर किसी मां का आंचल सूना ना कर दे)

.................आज दैनिक जागरण बरेली के अखबार में एक खबर पढ़कर दिल दहल गया। खबर थी कि एक बंदर मां की गोद से नवजात बच्चा छीनकर ले गया, इससे पहले मां कुछ करती बंदर ने बच्चे को जमीन पर पटक दिया और बच्चे का चेहरा नोच दिया।बच्चे की मौत हो गई। कुछ ऐसा ही आतंक हमारे भूड़ मोहल्ले में बंदरों ने मचा रखा है। यहां छतों पर बंदर हर समय डटे रहते हैं।सड़क पर फैले कूडे के ढेर पर ना जाने कितने बंदर खाने का सामान टटोलते रहते हैं। सड़क से गुजरने वाले राहगीर और बच्चों को बंदर काट खाने को दोड़ते हैं।

स्कूली बच्चे हैं दहशत में
........पास ही छोटे बच्चों का स्कूल है, जिनको बंदर कई बार काट चुके हैं। साथ ही कन्या डिग्री कालेज हैं जहां छात्राएं बंदरों से बचती-बचाती कालेज तक पहुंचती है। मोहल्ले की घर की खिड़की व दरवाजों के सामने बंदर खाने की चीजों को छीनने के लिए बैठे रहते है। जिसके चलते वह घरों में हर समय दरवाजा बंद कर रहने को मजबूर हैं।

माएं अपने नवजातों को आंचल में छुपा लेती हैं
.........मोहल्ले में कुछ नवजात बच्चे हैं जिनकी माएं हमेशा डर के साए में रहती हैं। ना जाने कब बंदर उनके बच्चे को नुकसान पहुंचा दें। काट लें, या उठाकर ले जाएं।

दीवाली पर न हो सकी सजावट
........बंदरों के आतंक के चलते इस बार मोहल्ले के घर दीवाली की सजावट से महरूम रह गए। लोगों ने घरों को अंदर से सजाया, बाहर से नहीं। क्योंकि बंदर सारी सजावट उधेड़ देते हैं।इस बार मोहल्ले वालों की दीवाली फीकी रही। लोगों ने खुद को सुरक्षित करने के लिए जाल लगवा रखे हैं।इंसान पिंजरे में और बंदर खुलेआम घूम रहे हैं।

पूर्व मेयर से काफी बार शिकायत की जा चुकी है।
........पूर्व मेयर डा. आई एस तोमर व सुप्रिया ऐरन से भी इस बावत कई बार शिकायत की जा चुकी है। मगर कोई एक्शन-रिएक्शन या कारवाई नहीं हुई। इस बार मोहल्ले वालों ने आपको मेयर के रूप में चुना है, वो आपसे उम्मीद कर रहे हैं कि शायद आप उनके इस डर को काबू में कर सकें। जिस समस्या का हल पूर्व मेयर ना निकाल सके, आप निकाल लें।

कहीं उपर्युक्त घटना की तरह कोई बंदर किसी मां के आंचल से उसका दुलारा ना छीन जाए और आंचल सूना ना कर दे। (फोटो अगली पोस्ट में)

धन्यवाद
सुचित्रा सिंह
(पत्रकार व एक्ट्रेस)

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24 घंटे' असर करेगी गोली

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  समाचार
'चौबीस घंटे' असर करेगी गोली
यह नई दवाई चौबीस घंटे तक अपना असर बरक़रार रखेगी
यह नई दवाई चौबीस घंटे तक अपना असर बरक़रार रखेगी

नपुंसकता के शिकार पुरुष अब एक नई दवाई की बदौलत रात दिन जब चाहें यौन संबंध क़ायम करने में सक्षम रहेंगे.

सियालिस नाम की इस दवाई को बनाने वालों का दावा है कि इसका असर चौबीस घंटे तक रहेगा.

अब तक काम आने वाली गोली वायग्रा यौन क्रिया शुरू करने से एक घंटे पहले लेनी होती थी और वह सिर्फ़ चार घंटे ही प्रभावी रहती थी.


अब तक इस बाज़ार पर वायग्रा का ही एकाधिकार था
लेकिन वायग्रा की तरह ही यह दवाई भी नुस्ख़े से ही मिलेगी, जो चाहे उसे नहीं.

इस दवाई की निर्माता कंपनी लिली यूके का कहना है कि इससे दम्पत्ति अधिक सहज और स्वाभाविक रूप से यौन क्रिया का आनंद ले सकते हैं.

जब चाहे...

उनके लिए कोई समय के बंधन नहीं होंगे.

एक ख़ास बात और. इस दवा का असर तो पूरे दिन रहेगा लेकिन यौन क्रिया की ज़रूरत उत्तेजित होने पर ही महसूस होगी.

पुरुष आमतौर पर तभी उत्तेजित होते हैं जब शारीरिक संपर्क या इस तरह के विचार उनके दिमाग़ में आते हैं.

उस समय एक रासायनिक तत्व पैदा होता है जो उनकी यौनेंद्रिय की रक्त वाहिकाओं को फैला देता है.

एक ख़ास एंज़ाइम

यह रासायनिक तत्व एक विशिष्ट एंज़ाइम से नियंत्रित होते हैं और इस एंज़ाइम की कमी से ही यह नपुंसकता पैदा होती है.


लंबे समय तक असर करने वाली इस गोली की वजह से लोग उन्मुक्त भाव से यौन क्रिया का आनंद ले पाएँगे.
डॉक्टर पैट ग्रिफ़िथ
सियालिस गोली इसी एंज़ाइम को जीवित रखती है और उसकी वजह से रक्त का प्रवाह रुकने नहीं पाता.

डरहम के एक चिकित्सक डॉक्टर पैट ग्रिफ़िथ कहते हैं कि इस गोली की वजह से लोग उन्मुक्त भाव से यौन क्रिया का आनंद ले पाएँगे.

उनका कहना है, "लंबे समय तक असर करने वाली इस गोली का यह फ़ायदा है कि लोग यह भूल जाएँगे कि उन्होंने दवा ली हुई है. इससे यौन संबंधों की स्वाभाविकता बनी रहेगी".

एक मनोचिकित्सक डॉक्टर सिंथिया मैकवी कहती हैं, "किसी हड़बड़ी की ज़रूरत नहीं होगी. लोग आराम से रोमांस कर सकते हैं. पार्क में टहल सकते हैं या साथ बैठ कर भोजन का आनंद ले सकते हैं".

जिन मरीज़ों पर इसका परीक्षण हुआ है उनमें से एक ऐलेन का कहना है, "मेरी उम्र साठ साल से ज़्यादा है लेकिन मुझे लगता है कि मुझे अपनी पत्नी के साथ यौन संबंध क़ायम रखने चाहिए".

"इस दवाई से मनोवैज्ञानिक रूप से मैं बेहतर महसूस कर रहा हूँ".

ब्रिटेन में ही देखा जाए तो लगभग तेइस लाख लोग नपुसंकता से पीड़ित हैं. लेकिन इलाज दस में से एक का ही हो पाता है.
 
 

 असर
बोतल बंद पानी कितना सुरक्षित
?
बिगफ़ुट है या नहीं?


Sabar bbchindi.com

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शनिवार, 3 नवंबर 2018

चीन / दुनिया का पहला फोल्डेबल स्मार्टफोन लॉन्च, 7.8 इंच के टैबलेट को बना सकते हैं 4 इंच का फोन

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worlds first foldable smartphone flexpai launched in china

फोल्डेबल स्मार्टफोन की कीमत 95,400 रुपए से शुरू
अमेरिकी स्टार्टअप कंपनी रोयॉल ने फोल्डेबल स्मार्टफोन लॉन्च किया
सैमसंग और हुवावे जैसी बड़ी कंपनियों से यह उम्मीद थी
Dainik Bhaskar
Nov 02, 2018, 11:16 AM IST
गैजेट डेस्क. अमेरिकी कंपनी रोयॉल ने दुनिया का पहला फोल्डेबल स्मार्टफोन गुरुवार को चीन में हुए एक ईवेंट में लॉन्च कर दिया। इस स्मार्टफोन का नाम 'Flexpai' रखा गया है। तकनीकी तौर पर ये फोन एक टैबलेट की तरह ही है क्योंकि इसमें 7.8 इंच की स्क्रीन दी गई है, लेकिन इसे मोड़कर 4 इंच का फोन बनाया जा सकता है।

सैमसंग, हुवावे जो नहीं कर पाए वह स्टार्टअप ने कर दिखाया
सैमसंग पहली और हुवावे दुनिया की दूसरी बड़ी स्मार्टफोन कंपनी है। यह उम्मीद की जा रही थी कि इन दोनों में से कोई एक दुनिया का पहला फोल्डेबल स्मार्टफोन पेश करेगी। लेकिन, 6 साल पुरानी अमेरिकी स्टार्टअप कंपनी रॉयोल ने ऐसा कर दिखाया।

पहला फोन जिसमें 7nm स्नैपड्रैगन 8150 प्रोसेसर का इस्तेमाल
Flexpai न सिर्फ दुनिया का पहला फोल्डेबल स्मार्टफोन है बल्कि ये दुनिया का ऐसा पहला फोन भी है जिसमें 7nm स्नैपड्रैगन 8150 प्रोसेसर का इस्तेमाल हुआ है।
इसके अलावा इसमें कंपनी की आरओ-चार्जिंग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है और कंपनी का दावा है कि इसकी मदद से बैटरी को 0-80% तक चार्ज होने में सिर्फ एक घंटे का समय लगेगा।



सिर्फ फ्रंट में ही कैमरा, उसी से ले सकेंगे फोटो : इसके फ्रंट में ड्युअल कैमरा दिया गया है जिसका प्राइमरी सेंसर 16 मेगापिक्सल और सेकेंडरी सेंसर 20 मेगापिक्सल का है। इसके जरिए ही सेल्फी और फोटो ले सकते हैं।

95,400 रुपए से शुरू है इसकी कीमत
Flexpai को तीन वैरिएंट में लॉन्च किया गया है, जिसका 6 जीबी रैम, 128 जीबी स्टोरेज वाला वैरिएंट 8,999 युआन (करीब 95,400 रुपए) से शुरू होता है।
वहीं 8 जीबी रैम, 128 जीबी स्टोरेज वैरिएंट की कीमत 9,998 युआन (करीब 1.06 लाख रुपए) और 8 जीबी रैम, 512 जीबी स्टोरेज वाले वैरिएंट की कीमत 12,999 युआन (करीब 1.38 लाख रुपए) रखी गई है।

स्पेसिफिकेशन
डिस्प्ले 7.8 इंच
प्रोसेसर 7nm स्नैपड्रैगन 8150
रैम 6 जीबी/ 8 जीबी
स्टोरेज 128 जीबी/ 512 जीबी
कैमरा 16+20 मेगापिक्सल
बैटरी 3,800mAh
ओएस एंड्रॉयड 9.0
सिक्योरिटी फिंगरप्रिंट सेंसर
sabhar :bhaskar.com

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