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मंगलवार, 11 जुलाई 2023

पारंपरिक दोना और पत्तल के बारे में

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 पत्तल और दोना के पत्ते प्रकृति में पर्यावरण के अनुकूल हैं जो साल के पत्तों से बने होते हैं । प्लेट एक गोलाकार आकार में होती है जिसमें छह से आठ पत्तियाँ एक संकीर्ण लकड़ी की छड़ियों से जुड़ी होती हैं। इसका उपयोग मुख्य रूप से मंदिरों में भगवान को प्रसाद चढ़ाने के लिए किया जाता है। इस पत्तल और दोना पत्तों का उपयोग प्राचीन काल से ही इसकी पवित्रता के लिए किया जाता रहा है। कागज के दोना पत्तल में भोजन की गुणवत्ता बरकरार रहती है। यह प्लास्टिक का एक आदर्श विकल्प है, स्वास्थ्य और वन्य जीवन के लिए अच्छा है।https://plantsinformation.com/all-you-need-to-know-about-the-traditional-dona-pattal/amp/

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लोगों को नरभक्षी बनाने वाले ड्रग

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इस ड्रग के सेवन से Zombie बन रहे लोग, दे रहा Hulk जैसी ताकत, पुलिस ने जारी की चेतावनी


इंग्लैंड में एक नए तरह के स्ट्रीट ड्रग ने हलचल मचा दी है। कहा जा रहा है कि 'मंकी डस्ट' नाम के इस ड्रग को लेने से लोगों में 'सुपरहीरो हल्क' जैसी शक्तियां आ रही हैं। इस ड्रग का असर लेने वाले पर इस कदर है कि वो जॉम्बी की तरह लोगों पर हमला कर रहा है। बाकी ड्रग्स के मुकाबले 'मंकी डस्ट' काफी सस्ता है और आसानी से लोगों की पहुंच में है। ये कहा जा सकता है कि ये ड्रग लोगों को जानवर बना रहा है। व्यक्ति पर करता है भयावह असर 'मंकी डस्ट' नाम के सिंथेटिक ड्रग ने कई देशों में खौफ पैदा कर दिया है। इसड्रग को 'जॉम्बी डस्ट' और 'कैनिबल डस्ट' भी कहा जाता है, और ये व्यक्ति पर अपने भयावह असर के लिए जाना जाता है। जो भी व्यक्ति इस ड्रग का सेवन करता है, उसे किसी भी तरह का दर्द महसूस नहीं होता, बल्कि वो हैलुसिनेशन, एंग्जाइटी और पैरानोआ महसूस करते हैं। हल्क जैसी शक्तियां देता है ये ड्रग इस ड्रग का सेवन शरीर में खून का तापमान भी बढ़ा देता है, जिससे हाइपोथर्मिया का खतरा बढ़ जाता है। ये ड्रग व्यक्ति को काफी ताकतवर भी बना देता है। डेली मेल की खबर के मुताबिक एक पुलिसवाले ने बताया कि ये ड्रग लेने वाले व्यक्ति को लगता है कि उसमें हल्क जैसी शक्तियां हैं, वो वाकई काफी ताकतवर होते हैं। ब्रिटेन में ये खतरनाक ड्रग्स केवल 176 रुपये में मिल रहा है। ब्रिटेन में ये स्ट्रीट ड्रग दो साल पहले आया था लेकिन हाल ही के दिनों में इसके इस्तेमाल में तेजी देखी गई https://hi.quora.com

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सोमवार, 10 जुलाई 2023

चंद्रयान-3 में ज्यादा फ्यूल और सेफ्टी मेजर्स

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 चंद्रयान-3 में ज्यादा फ्यूल और सेफ्टी मेजर्स:लैंडिंग साइट भी बड़ी होगी, इसरो चीफ ने बताई चंद्रयान-2 के फेल होने की वजह

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) शुक्रवार दोपहर 2:35 बजे चंद्रयान-3 की लॉन्चिंग करेगा। इस बार यान में ज्यादा फ्यूल और कई सेफ्टी मेजर्स किए गए हैं ताकि मिशन नाकाम न हो। साथ ही इस बार लैंडिंग साइट भी बड़ी होगी।

बता दें कि सॉफ्टवेयर में गड़बड़ी के चलते सितंबर 2019 में चंद्रयान-2 की क्रैश-लैंडिंग हो गई थी।

SIA-इंडिया (सेटकॉम इंडस्ट्री एसोसिएशन) की इंडिया स्पेस कांग्रेस के मौके पर इसरो प्रमुख एस सोमनाथ ने बताया कि चंद्रयान-2 का विक्रम लैंडर जब चंद्रमा की सतह पर 500x500 मीटर लैंडिंग स्पॉट की ओर बढ़ रहा था, तब क्या गलत हुआ था।


इंजनों ने अपेक्षा से ज्यादा थ्रस्ट पैदा किया

सोमनाथ ने बताया कि चंद्रयान-2 के विक्रम लैंडर के लिए हमारे पास पांच इंजन थे, जिनका इस्तेमाल वेलॉसिटी को कम करने के लिए किया जाता है, जिसे रिटार्डेशन कहते हैं। इन इंजनों ने अपेक्षा से ज्यादा थ्रस्ट पैदा किया। इसके कारण बहुत सी परेशानियां बढ़ने लगीं।


तेजी से मुड़ना सॉफ्टवेयर से कंट्रोल नहीं हुआ

इसरो प्रमुख ने कहा कि यह दूसरा मुद्दा है। परेशानियां हमारी उम्मीद से कहीं अधिक थीं। लैंडर को बहुत तेजी से मोड़ लेना पड़ा। जब यह बहुत तेजी से मुड़ने लगा, तो सॉफ्टवेयर इसे कंट्रोल नहीं कर सका, क्योंकि हमने कभी इतनी हाई-रेट की उम्मीद नहीं की थी।


लैंडिंग साइट छोटी होना

चंद्रयान 2 के फेल होने का तीसरा कारण अंतरिक्ष यान को उतारने के लिए पहचानी गई 500 मीटर x 500 मीटर की छोटी लैंडिंग साइट थी। उन्होंने कहा- यान की स्पीड बढ़ाकर वहां पहुंचने की कोशिश की जा रही थी। यह चांद की जमीन के करीब था और स्पीड बढ़ती रही।


लैंडिग साइट की साइज इस बार ज्यादा

चंद्रयान-2 में सफलता आधारित डिजाइन के बजाय इसरो ने चंद्रयान-3 में फेल्यूअर बेस्ड डिजाइन का विकल्प चुना है। सोमनाथ ने कहा, 'हमने लैंडिंग साइट को 500 मीटर x 500 मीटर से बढ़ाकर 2.5 किलोमीटर कर दिया है। यह कहीं भी उतर सकता है, इसलिए किसी खास जगह पर नहीं उतरना पड़ेगा। यह उस क्षेत्र के भीतर कहीं भी उतर सकता है।


चंद्रयान-3 को चंद्रमा तक पहुंचाने के तीन हिस्से


इसरो ने स्पेस शिप को चंद्रमा तक पहुंचाने के लिए तीन हिस्से तैयार किए हैं, जिसे टेक्निकल भाषा में मॉड्यूल कहते हैं...

चंद्रयान-2 में इन तीनों के अलावा एक हिस्सा और था, जिसे ऑर्बिटर कहा जाता है। उसे इस बार नहीं भेजा जा रहा है। चंद्रयान-2 का ऑर्बिटर पहले से ही चंद्रमा के चक्कर काट रहा है। अब इसरो उसका इस्तेमाल चंद्रयान-3 में sabhar https://www.bhaskar.com/

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सेबी के नियम केअनुसार, एक Mutual Fund स्कीम में किसी कंपनी का एक्सपोजर 10 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकता है।

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 सेबी के नियम केअनुसार, एक Mutual Fund स्कीम में किसी कंपनी का एक्सपोजर 10 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकता है।


SEBISEBI के इस नियम से HDFC के शेयरों पर आ सकती है आफत, अब क्या करेंगी म्यूचुअल फंड कंपनियां 

सेबी के नियम के अनुसार, एक म्यूचुअल फंड (Mutual Funds) स्कीम में किसी कंपनी का एक्सपोजर 10 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकता है। ऐसे में एचडीएफसी विलय के कारण, यदि सेबी के नियमों को म्यूचुअल फंड कंपनियों को उन्हें 30 दिनों के भीतर स्टॉक में अपनी हिस्सेदारी 10 प्रतिशत तक कम करनी होगी।

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सीमा गुलाम हैदर और सचिन मीणा

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             सीमा गुलाम हैदर और सचिन मीणा
सीमा हैदर के गले में 'राधे-राधे' का दुपट्टा और मंगलसूत्र, सचिन के घर में गूंजते 'जय श्री राम' के नारे- ग्राउंड रिपोर्ट

दो कमरे के घर में चारों तरफ पत्रकारों, कैमरों और माइक से घिरीं सीमा हैदर बहुत आत्मविश्वास के साथ सवालों के जवाब दे रही हैं. पास में ही उनके प्रेमी सचिन मीणा भी कुर्सी पर बैठे हुए हैं.

घर में लगी भीड़ के बीच सीमा के चार बच्चों को आसानी से पहचाना जा सकता है. कुछ पत्रकार इन बच्चों से ‘हिंदुस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगवा रहे हैं और ऐसा करते हुए बच्चों को अपने कैमरे में शूट कर रहे हैं.


बीच-बीच में कस्बे की कुछ महिलाएं और कुछ हिंदूवादी संगठनों के लोग भी मिलने के लिए आ रहे हैं. ये लोग आशीर्वाद देते हुए सीमा के हाथ में कुछ पैसे पकड़ा रहे हैं और अपनी तस्वीरें खिंचवा रहे हैं.


उमस भरे माहौल के बीच घर में ‘जय श्री राम’ के नारे भी सुनाई देते हैं, तो वहीं कुछ लोग सीमा से घर में लगी तुलसी में पानी देने को भी कहते हैं.


ये दृश्य उत्तर प्रदेश में ग्रेटर नोएडा के रबूपुरा स्थित सचिन मीणा के घर के हैं. दोनों को जमानत मिलने के बाद यहां आने जाने वालों की भीड़ लगी हुई है. Sabhar BBC.com 

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चंद्रयान-3: इसरो ने मुंबई स्थित एयरोस्पेस फर्म से उड़ान भरने के लिए तैयार

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चंद्रयान-3: इसरो ने मुंबई स्थित एयरोस्पेस फर्म से महत्वपूर्ण घटकों को सुरक्षित किया


 चंद्रयान-3: इसरो ने मुंबई स्थित एयरोस्पेस फर्म से महत्वपूर्ण घटकों को सुरक्षित किया

  1. चंद्रयान-3, शुक्रवार (14 जुलाई) को दोपहर 2:35 बजे उड़ान भरने के लिए तैयार है, जो सितंबर 2019 में चंद्रयान-2 की क्रैश-लैंडिंग के बाद एक अनुवर्ती मिशन होगा।

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रविवार, 9 जुलाई 2023

अपनी इस गलती की तगड़ी सजा भुगतेंगे FD करवाने वाले, अब देना होगा 20% का डबल टैक्स

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 यदि पैन को आधार से लिंक नहीं किया गया है, तो ऐसा पैन 16 सितंबर से निष्क्रिय हो जाएगा।” 1 जुलाई 2023 और ग्राहक को फॉर्म 15 जी/एच जमा करने की अनुमति नहीं दी जाएगी और निष्क्रिय पैन के लिए उच्च टीडीएस कटौती लागू होगी।

यदि आपने फिक्स डिपॉजिट (Fix Deposite) में निवेश किया है और आप अपने पैन को अपने आधार से लिंक करने में विफल रहे हैं और अब आपका पैन (Pan Card) निष्क्रिय है, तो मान लीजिए आप पर वास्तव में मुश्किलों का पहाड़ टूट चुका है। अब आपको एफडी पर 7 प्रतिशत के मोटे ब्याज का फायदा तो भूल ही जाना होगा, वहीं अब आपको इस पर 20 प्रतिशत के टीडीएस के भुगतान के लिए भी तैयार रहना होगा। नियम के अनुसार पैन कार्ड निष्क्रिय होने पर आपको अपनी फिक्स डिपॉजिट के लिए फॉर्म 15 जी/एच जमा करने की अनुमति नहीं दी जाएगी और इस पर 10 प्रतिशत के बजाय 20 प्रतिशत का टीडीएस लगेगा। 


HDFC बैंक की वेबसाइट के अनुसार, “यदि पैन को आधार से लिंक नहीं किया गया है, तो ऐसा पैन 16 सितंबर से निष्क्रिय हो जाएगा।” 1 जुलाई 2023 और ग्राहक को फॉर्म 15 जी/एच जमा करने की अनुमति नहीं दी जाएगी और निष्क्रिय पैन के लिए उच्च टीडीएस कटौती लागू होगी। फिक्स डिपॉजिट के लिए, यदि आप एक वित्तीय वर्ष में 40,000 रुपये (वरिष्ठ नागरिकों के लिए 50,000 रुपय से अधिक का ब्याज कमाते हैं, तो आप अपने एफडी निवेश पर टीडीएस के लिए उत्तरदायी होंगे।

यदि आपने 30 जून 2023 तक आधार से लिंक नहीं कराया तो पैन निष्क्रिय हो जाएगा। पैन को आधार से लिंक करने की समय सीमा 30 जून, 2023 थी। जिन व्यक्तियों ने इन दोनों को लिंक नहीं किया है, उनका पैन कार्ड 1 जुलाई, 2023 से निष्क्रिय हो गया है। 


आयकर अधिनियम, 1961 ('अधिनियम') के नियमों के अनुसार, प्रत्येक व्यक्ति जिसे 1 जुलाई, 2017 तक पैन सौंपा गया है, और वह आधार संख्या प्राप्त करने का हकदार है, उसे निर्धारित प्राधिकारी को सूचित करना आवश्यक है। निर्धारित शुल्क के भुगतान पर 30 जून 2023 से पहले। sabhar https://www.indiatv.in

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शनिवार, 8 जुलाई 2023

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बुधवार, 5 जुलाई 2023

प्रकृति के तीन कड़वे नियम जो सत्य है

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प्रकृति के तीन कड़वे नियम जो सत्य है....स्वीकारे ना स्वीकारे पर बदले ना जा सके सत्य तो सत्य रहेगा----- 1- प्रकृति का पहला नियम:- यदि खेत में बीज न डालें जाएं तो कुदरत उसे घास-फूस से भर देती हैं !!... ठीक उसी तरह से दिमाग में सकारात्मक विचार न भरे जाएँ तो नकारात्मक विचार अपनी जगह बना ही लेते हैं !!... 2- प्रकृति का दूसरा नियम:- जिसके पास जो होता है वह वही बांटता है !!.... सुखी सुख बांटता है,.. दुःखी दुःख बांटता है,.. ज्ञानी ज्ञान बांटता है,.. भ्रमित भ्रम बांटता है,.. भयभीत भय बांटता हैं !!.... 3- प्रकृति का तीसरा नियम:- आपको जीवन से जो कुछ भी मिलें उसे पचाना सीखो क्योंकि भोजन न पचने पर रोग बढ़ते हैं...! पैसा न पचने पर दिखावा बढ़ता है...! बात न पचने पर चुगली बढ़ती है...! प्रशंसा न पचने पर अंहकार बढ़ता है....! निंदा न पचने पर दुश्मनी बढ़ती है...! राज़ न पचने पर खतरा बढ़ता है...! दुःख न पचने पर निराशा बढ़ती है...! और सुख न पचने पर पाप बढ़ता है...! बात कड़वी बहुत है पर सत्य है------

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मंगलवार, 4 जुलाई 2023

Bramand ki utpatti kaise huyi

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सोमवार, 3 जुलाई 2023

बायजूज़ के 'आकाश' तक पहुंचने और भंवर में फंसने की कहानी

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अंशुल सिंह पदनाम,बीबीसी संवाददाता 29 जून 2023 दुनियाभर की कंपनियों में निवेश करने वाले समूह 'प्रोसस' ने भारत की एडटेक स्टार्ट-अप कंपनी बायजूज़ की वैल्यूएशन को घटाकर 5.1 अरब डॉलर कर दिया है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़, नीदरलैंड में लिस्टेड दुनिया के सबसे बड़े टेक्नोलॉजी निवेशक प्रोसस ने बायजूज़ की वैल्यूशन को 22 अरब डॉलर से घटाकर 5.1 अरब डॉलर कर दिया है. आंकड़ों के लिहाज़ से यह गिरावट 75 फ़ीसद से ज़्यादा है. प्रोसस समूह बायजूज़ का सबसे बड़ा निवेशक है. रॉयटर्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि 31 मार्च को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष में प्रोसस ने बायजूज़ में अपनी 9.6 फ़ीसद हिस्सेदारी का मूल्य घटाकर 493 मिलियन डॉलर कर दिया है. 2011 में बनी बायजू रवींद्रन की कंपनी बायजू के लिए फ़िलहाल सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. भारत में कंपनी छंटनी कर रही है और विदेश में कर्ज़ को लेकर क़ानूनी लड़ाई लड़ रही है. बायजूज़ में क्या चल रहा है? कुछ दिन पहले डेलॉइट हास्किन्स एंड सेल्स ने बायजूज़ के ऑडिटर पद से इस्तीफ़ा दे दिया था, जिसे 2025 तक बायजूज़ का ऑडिट करना था. डेलॉइट की तरफ़ से बताया गया कि वह कंपनी का ऑडिट नहीं कर पा रहे थे क्योंकि उन्हें साल 2021-22 के लिए वित्तीय विवरण नहीं मिले थे. डेलॉइट हास्किन्स एंड सेल्स ने बायजूज़ को लिखे पत्र में कहा, ''हमें आज़ तक ऑडिट पर कोई टिप्पणी नहीं मिली है. इसके चलते ऑडिटिंग मानकों के अनुसार ऑडिट की योजना बनाने, डिज़ाइन करने, प्रदर्शन करने और पूरा करने की हमारी क्षमता पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ेगा. इसी के मद्देनजर, हम तत्काल प्रभाव से कंपनी के ऑडिटर के रूप में अपना इस्तीफ़ा दे रहे हैं.'' रॉयटर्स के मुताबिक़, ऑडिटर के जाने के बाद कंपनी ने निवेशकों से कहा है कि इस साल के सितंबर महीने में साल 2022 की आय और दिसंबर तक 2023 की आय के ब्यौरे दाख़िल करेंगे. फ़िलहाल कंपनी को नया ऑडिटर मिल गया है. कंपनी ने बीडीओ (एमएसकेए एंड एसोसिएट्स) की पांच सालों के लिए ऑडिटर के रूप में नियुक्ति की है. अंग्रेज़ी समाचार पत्र 'द हिन्दू बिजनेस लाइन' की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि बायजूज़ के कई पूर्व कर्मचारियों ने कंपनी पर ईपीएफ जमा नहीं करने का आरोप लगाया है. आरोप है कि कंपनी ने सैलरी से हर महीने पीएफ काटा, लेकिन इस धनराशि को कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) खाते में जमा नहीं कर रही थी. रिपोर्ट सामने आने के बाद बायजूज़ की पैरेंट कंपनी 'थिंक एंड लर्न प्राइवेट लिमिटेड' ने अगस्त 2022 से मई 2023 तक 10 महीने के ईपीएफ का भुगतान किया है. इस भुगतान में 123.1 करोड़ रुपए जमा किए गए जबकि कंपनी ने शेष 3.43 करोड़ रुपए को कुछ दिनों में भुगतान की बात कही है. बीते हफ़्ते अंग्रेज़ी अख़बार 'द इकोनॉमिक टाइम्स' की रिपोर्ट में कंपनी के बोर्ड से तीन डायरेक्टर्स के इस्तीफ़े की पुष्टि की गई थी. रिपोर्ट में लिखा गया कि बोर्ड से पीक एक्सवी पार्टनर्स के जीवी रविशंकर, चैन जुकरबर्ग के विवियन वू और प्रोसस के रसेल ड्रेसेनस्टॉक ने इस्तीफ़ा दिया है. हालांकि, बायजूज़ की ओर से इस तरह की सभी रिपोर्ट्स का खंडन किया गया है. बायजूज़ ने कहा, ''बायजूज़ बोर्ड के सदस्यों के इस्तीफे़ की ख़बर देने वाली एक हालिया मीडिया रिपोर्ट पूरी तरह से काल्पनिक है. बायजूज़ इन दावों का दृढ़ता से खंडन करता है और मीडिया संस्थानों से अनवेरीफ़ाइड जानकारी फैलाने या बताया जा रहा है कि बायजूज़ के फाउंडर शेयरधारकों की बगावत रोकने के लिए निवेशकों से फंड जुटाने की कोशिश में लगे हैं. अमेरिकी मीडिया संस्थान 'ब्लूमबर्ग' की रिपोर्ट के मुताबिक़, बायजूज़ नए शेयरधारकों से एक अरब डॉलर का फंड जुटाने की कोशिश में आख़िरी दौर की बातचीत कर रहा है. कंपनी की कोशिश है कि इससे फाउंडर बायजू रवींद्रन के कंपनी पर नियंत्रण को कम करने के कुछ निवेशकों के प्रयास को रोका जा सकेगा. अंग्रेज़ी अख़बार 'मिंट' में छपी रिपोर्ट के मुताबिक़, इस साल जून के महीने में लगभग एक हज़ार कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया गया. इससे पहले बायजूज़ ने पिछले साल तीन हज़ार कर्मचारियों को नौकरी से निकाला था. फ़िलहाल कंपनी में लगभग पचास हज़ार लोग काम कर रहे हैं. इसके अलावा बायजूज़ अमेरिका की अदालत में कानूनी लड़ाई भी लड़ रही है. अमेरिका में बायजूज़ ने 1.2 अरब डॉलर के कर्ज़ को लेकर एक मामला न्यूयॉर्क सुप्रीम कोर्ट में दायर किया है. कंपनी को इस कर्ज का भुगतान करना था, लेकिन कंपनी फिलहाल इस स्थिति में नहीं हैं. बायजू रवींद्रन का कहना है कि उन पर टर्म लोन बी (टीएलबी) के पुनर्भुगतान में तेजी लाने के लिए अपने ऋणदाता रेडवुड कंपनी द्वारा दबाव बनाया जा रहा है. जब बायजूज़ ने ख़ूब तरक़्क़ी की मार्च 2020 में कोरोना महामारी के चलते भारत में देशव्यापी लॉकडाउन लगा था. स्कूल, कॉलेज से लेकर दुकान और ऑफ़िस सब बंद थे. इस दौरान लोगों की दुनिया अपने घर और इंटरनेट पर सिमट गई थी. महामारी के चलते स्कूल बंद हुए तो बच्चों का दाखिला ऑनलाइन एडटेक कंपनियों में होने लगा और फिर अचानक से बायजूज़ की ग्रोथ होने लगी. कंपनी ने एक साल के भीतर बाजार से एक अरब डॉलर से अधिक धन जुटाया. इस धन से कंपनी ने अपने एक दर्जन प्रतिस्पर्धियों का अधिग्रहण करते हुए उन्हें बाज़ार से हटा दिया है. इसमें आकाश एजुकेशनल सर्विसेस, ग्रेट लर्निंग और व्हाइट हैट जूनियर जैसे अधिग्रहण शामिल हैं. ऐसा करते ही कंपनी बच्चों के लिए कोडिंग क्लास से लेकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाली एक 'अंब्रेला होल्डिंग कंपनी' बन गई. विज्ञापन पर ख़र्च करने के मामले में भी कंपनी पीछे नहीं रही. एक समय बायजूज़ संभवत: भारत के टीवी चैनलों पर सबसे अधिक दिखने वाला ब्रांड था. बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख़ ख़ान कंपनी के ब्रांड एंबेसडर हैं. जबकि बायजूज़ के कोडिंग प्लेटफॉर्म व्हाइट हैट जूनियर के ब्रांड एंबेसडर ऋतिक रोशन थे. कंपनी इतने पर ही नहीं रुकी और फिर नवंबर 2022 में छंटनी के माहौल में बायजूज़ ने जाने-माने फुटबॉल खिलाड़ी लियोनेल मेसी को ग्लोबल ब्रांड एंबेसडर बनाया. इसके अलावा भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई), आईसीसी और फ़ीफा के साथ भी ब्रांडिंग पार्टनरशिप की थी. लगभग तीन सालों तक बायजूज़ बीसीसीआई की लीड स्पॉन्सर रही और फीफा वर्ल्ड कप 2022 को स्पॉन्सर करने वाली पहली भारतीय कंपनी बनी थी. फ़िलहाल बायजूज़ ने तीनों संस्थाओं के साथ अपनी ब्रांडिंग पार्टनरशिप ख़त्म कर दी है.sabhar BBC.com

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