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सर्विक्स क्या है?
गर्भाशय या गर्भाशय का निचला हिस्सा, जहां योनि समाप्त होती है और गर्भाशय शुरू होता है उसे ही सर्वाइकल कहते हैं। यहीं से शुक्राणु गर्भाशय से होकर गुजरते हैं और वहां से फैलोपियन ट्यूब में पहुंच जाते हैं जहां शुक्राणु अंडा से जुड़ जाता है और जाईगोट बन जाता है। गर्भाशय ग्रीवा अर्थ सर्वाइकल का वो ट्यूमर जो फैलता जाए उसे ही कैंसर कहा जाता है।यह धीरे-धीरे बढ़ने वाला कैंसर है जिसमें पहले चरण में गर्भाशय ग्रीवा का आकार बिगड़ जाता है। इसके चार चरण होते हैं। किसी भी स्तर पर इलाज शुरू करने से मरीज की जान बचाई जा सकती है।
महिलाओं के शरीर की यह चौथी सबसे बड़ी जगह है जहां कैंसर ज्यादा देखने को मिलता है
दुनिया भर में हर साल इस कैंसर के 570,000 नए मामले सामने आते हैं, जबकि हर साल 311,000 मौतें इसी कैंसर से हो जाती हैं।
कारण:
90% मामलों में,इस प्रकार के कैंसर का कारण एच पी वी नामक वायरस पाया गया है। यह वही वायरस है जो आपकी त्वचा पर मस्से का कारण बनता है।और इस वायरस की वजह पुरुष या महिला का एक से अधिक संभोग पार्टनर रखना है। महिलाओं में ध्रुमपान की गलत आदत इत्यादि
इलाज :
आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों के काढ़ा और परहेज रख कर हर चरण में फायदा उठाया जा सकता है। मैंने कई पेसेंट को अपने काढ़ा से ठीक किया है ।और दस सालों से मैं ये सेवा कर रहा हूं।
जहां तक मेडिकल का इलाज है वो इस प्रकार है
प्रारंभिक चरणों का इलाज कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी, लेजर सर्जरी और इलेक्ट्रोथेरेपी से किया जा सकता है, जबकि तीसरे और चौथे चरण में, गर्भाशय का सर्जिकल निष्कासन ही एकमात्र उपचार है।
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When the Grizzly Giant sprouted from the ground in what is now Yosemite National Park, the Roman Republic was nearly two centuries away from forming, Buddhism would not develop for at least more than a century, and the geoglyphs making up the Nazca Lines of southern Peru would not be etched for around 200 years.
At an estimated 2,700 years old (and possibly even older), this giant sequoia is one of the oldest trees in the world—a majestic specimen of a remarkable redwood species that has evolved to withstand the flames that periodically sweep through its environment. Some of these trees, which can grow more than 300 feet tall (about as high as a 30-story building) and dozens of feet wide, are the world’s most massive tree and one of the largest organisms on earth.
नारायण मूर्ति व सुधा मूर्ति के दामाद हैं ऋषि सौनक। जिस ब्रिटेन ने ढाई सौ साल भारत पर हुकुमत की। आज वहां का पीएम एक भारतीय बन गया है।
Rishi Sunak (/ˈrɪʃiːˈsuːnæk/; born 12 May 1980) is a British politician who served as Chancellor of the Exchequer from 2020 to 2022, having previously served as Chief Secretary to the Treasury from 2019 to 2020. A member of the Conservative Party, he has been Member of Parliament (MP) for Richmond (Yorks) since 2015. Wikipedia
बधाई एवं शुभकामनाएं। #rishisunakmp
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बायोलॉजिकल क्लाक नियम के अनुसार महिला को एक माह में पुरुष की सैक्स आवश्यकता दो बार होती है पहली बार गर्भाशय के एन्डोमैट्रियम में जमे पिछले महीने के अनिषेचित अण्ड और कार्पसल्यूटियम को उखाड़ ने के लिए , गर्भाशय में पैरिस्टालटिक मूवमेंट /क्रमाकुंचन गति दर शुरू आती दौर में बढ़ाकर मासिक धर्म की शुरुआत अच्छी करने के लिए , जिसमें एंडोमेट्रियल लेयर गर्भाश्य से पूरी तरह तरह से उखड़ जाये । ऐसे में माहवारी की शुरुआत से पहले पति की शिद्दत से जरूरत महसूस होती है ।
दोबारा ओव्यूलेशन /अण्डा निक्षेपण के बाद अण्डा निषेचन के लिए /गर्भ धारण करने के लिए अर्द्ध मास १३ से १६ दिन के समय दौरान एक बार फिर से निषेचन के समय पति की शिद्दत से की आवश्यकता महसूस होती है ।
बाकी सैक्स शरीर के बढ़े हुए सैक्स टैम्प्रेचर / शरीर के काम वासना के भड़क से बढ़े / ऊर्जा स्तर को गिराने /नार्मल करने की प्रक्रिया है जिससे शरीर का बढ़ता तापमान मैथुन से वीर्य और रज के निकल जाने पर शरीर में शान्ति ठंडकता महसूस होती है । शरीर की बढ़ी हुई प्रज्या ऊर्जा से / बढ़ा शरीर का तापमान घटने से सामान्य और मन का मैथुन जनित तनाव दबाव कम से सामान्य तक कम हो जाता है शरीर को शकून मिलता है अच्छा लगता है कुछ सीमित समय के लिए ।
यह मैथुन आनन्द सुख समस्त संसार के सुख और आनंद से सर्वोपरि श्रेष्ठ है जो केवल मानव जाति के पुरुष स्त्री को उपलब्ध है पशुओं में केवल नर पशु इसे प्राप्त करते हैं मादा पशुओं में केवल स्तनधारी वर्ग के आर्डर कार्निवोरा दंतीले मांसाहारी और प्राइमेट्स की कुछ ही सौभाग्यशाली मादाएं पर्याप्त /अनुभव करती है । मैंने अतृप्त बंदरिया और अतृप्त कुतिया को यौनानन्द की प्राप्ती के लिए नर से पुनः आग्रह , अग्रसर , प्रेरण करते हुए फिर से जल्दी दोबारा मैथुन को लेकर फिर से अग्रसर करते देखा था ।
यौनानन्द यौनाघर्षण क्रिया द्वारा पुरुष को हर बार वीर्य स्खलन पर प्राप्त होता है परन्तु यह सैक्स आनन्द स्त्रियों के लिए एक सपने जैसा होता है जो कभी तो मिल जाता है तो कभी पुरुष के समय पूर्व स्खलित हो जाने पर नहीं मिल पाता है । लेकिन यदि किसी स्त्री को यह सैक्स आनन्द की अनुभूति जिस पुरुष से से एक बार भी हो जाती है तो वह स्त्री फिर उस पुरुष के सानिध्य के लिए पुलकित रहती है । वह उस यौनानन्द दाता पुरुष के लिए जाति, कुल , गोत्र , परिवार ,देश काल आयु के नियमों को ताक पर रखकर उससे अलग होने के बारे में सोचने विचार विमर्श करने को पसंद नहीं करती है । समाज परिवार से बगावत पर उतारू हो जाती है । वह तो उसी में खो जाना चाहती है । वैसे आज कल शिक्षा के प्रभाव से जब से यौनानन्द के एच्छिक विकल्प आ गये हैं स्त्रीयों की यौनानन्द के लिए पुरुष पर निर्भरता कम हो गयी है ।स्त्रियों ने भी पुरुष उपलब्ध न होने पर समलैंगिकता , हस्तमैथुन , डिडलू खिलोना मैथुन जैसे यौनानन्द के विकल्प ढूंढ लिए हैं ।अब समर्थ समर्द्ध स्त्री यौनानन्द के लिए पुरुष पर पूरी तरह निर्भर नहीं है । जिससे अब हिस्टीरिया जैसा मनोरोग जो अक्सर अधिकतर कुंठित यौनानन्द भावना से पैदा होता था वह कम हो गया https://hi.quora.com
पुरुषों में यूरीन टपकने की समस्या को यूरिनरी इनकॉन्टिनेंस कहते हैं। आमतौर पर 60 वर्ष से अधिक आयु के पुरूषों में ये समस्या देखी जाती है, पर इससे कम आयु वालों को भी ये समस्या हो सकती।
पुरुषों में यूरिनरी इनकॉन्टिनेंस होने पर ये लक्षण नजर आते हैं -
पुरुषों की जैसे जैसे उम्र बढ़ती है, पेशाब देर से क्यों आने लगता है?
इसका कारण प्रोस्टेट ग्लैण्ड बढ़ना हो सकता है। प्रोस्टेट ग्लैण्ड को पौरुष ग्रंथि भी कहा जाता है।
प्रोस्टेट ग्लैंड ज्यादा बढ़ जाने पर कई लक्षण सामने आने लगते हैं जैसे यूरीन रूक-रूक कर आना, पेशाब करते समय दर्द या जलन और यूरीन ट्रेक्ट इन्फेक्शन बार-बार होना। प्रोस्टेट ग्रंथि बढ़ जाने से मरीज बार-बार पेशाब करने जाता है मगर वह यूरीन पास नहीं कर पाता।
कभी-कभी ऐसा होना सामान्य होता है पर अगर बार-बार यह परेशानी होती है तो ये प्रोस्टेट ग्लैण्ड बढ़ने की संभावना हो सकती है। 50% से भी ज्यादा पुरुष 60 की उम्र में प्रोस्टेट की समस्या से परेशान होते हैं। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, यह ग्रंथि बढ़ने लगती है। इस ग्रंथि का अपने आप में बढ़ना ही हानिकारक होता है और इसे बीपीएच (बीनीग्न प्रोस्टेट हाइपरप्लेसिया) कहते हैं।
इसके बढ़ने से प्रोस्टेट कैंसर भी हो सकता है, जो पुरूषों में सर्वाधिक होने वाले कैंसर का एक प्रकार होता है।
साइकोलॉजी के अनुसार , यदि कोई व्यक्ति आपके सामने किसी और की चुगली करता है, तो निश्चित कही न कही आपकी भी चुगली करता होगा |
* जब आप किसी के मुस्कुराने का कारण बनते हो, तो आप उनके नजर में ज्यादा आकर्षक बन जाते है |
* अगर आपकी दोस्ती 7 साल से अधिक की है, तो इसके जीवन भर चलने की संभावनाएं बहुत अधिक है |
* साइकोलॉजी के अनुसार कॉमेडियन और व्यंग्यकार, आम लोगों की तुलना मे ज्यादा दुखी और अकेले होते है |
* औसत लोगों की तुलना में बुद्धिमान लोग, अधिक भुलक्कड़ होते है|
* 92% True लव स्टोरी स्कूल से शुरू होती है|
* जो इंसान ज्यादा झूठ बोलता है वो दूसरों के झूठ को आसानी से पकड़ लेता है|
* साइकोलॉजी के अनुसार महिलायें पुरुषों के मुकाबले ज्यादा ईमोशनल होती है|
* अगर आप अपने सबसे अच्छे दोस्त (लड़का/लड़की) से शादी करते है, तो आपके बीच तलाक होने की संभावना 70% तक कम हो जाती है|
* यह वैज्ञानिक रूप से सिद्ध हो चुका है, प्यार में होना आपको कम Productive बनाता है|
* Human साइकोलॉजी के अनुसार लोग अपनी रूचि की चीजों के बारे में बोलते समय ज्यादा आकर्षक लगते है|
* आप 1 वक्त पर सिर्फ 2 से 3 बातों को याद रख सकते है|
* अगर आप अपने विचारों को लिखते तो इससे तनाव कम होता है।
* ज्यादा वीडियो गेम खेलने से आप अपने सपनों के मालिक बनने लगते है|
* कार पर स्टिकर लगाने वाले लोग अधिक गुस्से वाले होते हैं।
* आँखों में देख कर बात करना एक वार्तालाप (Conversation)को जारी रखता है।
* नीला रंग आपकी Productivity को बढ़ा सकता है।
* अगर आपके पर्स में बच्चे की तस्वीर है, तो 88% चांस है की पर्स घूमने के बाद लोग आपके पर्स को लौटा देंगे।https://hi.quora.com/
अध्यात्म या विज्ञान: कैसे सामने आएगा जीवन की उत्पत्ति का रहस्य?विज्ञान की निगाह में प्रकृति एक मशीन है जिसे पूरी तरीके से समझ लिया जाए तो इसको बहुत अच्छी तरीके से ऑपरेट किया जा सकता है परंतु आध्यात्मिक की निगाह में सृष्टि एक माया है ईश्वरी परिकल्पना का एक दृश्य मात्र है सभी कुछ ब्रह्म है परंतु अहंकार की वजह से हमें इसका भान नहीं होता हम ईश्वर से अपने आप को पृथक महसूस करते हैं परंतु वास्तव में हम ईश्वर के अंश है विज्ञान क्रम क्रमबद्ध तरीके से विकसित होते हुए गॉड पार्टिकल तक पहुंच गया है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के द्वारा इमोशन पर आधारित रोबोट का भी निर्माण करने लगा सभी कुछ मानव के हाथ में आ गया है सृष्टि से सृष्टि करने वाला बन गया है ऐसा हो भी क्यों नहीं मनुष्य में भी तो परमात्मा का ही अंश है मनुष्य ही परमात्मा की सर्वोत्तम कृति है जिसके अंदर विवेक है और समझ है बाकी किसी के अंदर इस पृथ्वी पर मनुष्य इतना समझ नहीं है अन्य सभी चेतना अपने विकास के दौड़ में हैं आध्यात्मिक दृष्टिकोण से अपनी चेतना को ही परम चेतना से जोड़ देते हैं तो हमें मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है मन के द्वारा मंत्र है मंत्र से फ्रीक्वेंसी है फ्रीक्वेंसी स्ट्रिंग है स्प्रिंग से ही से ही परमाणु का निर्माण हुआ है और परमाणुओं से ही पदार्थ बने जिससे हम और आप मंत्र साधना बहुत पहले भी हमारे आध्यात्मिक करते थे जिसका जिक्र रामायण और महाभारत में आज जो भी साइंस या विज्ञान में घटित हो रहा है हमारे वेद पुराणों में पहले से ही वर्णित है चाहे वह टाइम ट्रेवल की बात हो ब्रह्मास्त्र की बात हो विमान की बात हो इस भारतवर्ष में भी अनेक ऋषि महात्मा हुए हैं आज भी हैं जिनको अष्ट सिद्धियां प्राप्त है अनेक प्रकार के कार्य कर सकते हैं विज्ञान भी उन्हीं बातों को सिद्ध कर रहा प्रकृति का नियम ही परिवर्तन है प्रकृति में परिवर्तन होता रहता है इस प्रकार विज्ञान में अपनी जगह पर है और आध्यात्मिक चेतना अपनी जगह पर विज्ञान की कसौटी पर आध्यात्मिक इतना को तो लेंगे तो निश्चय ही आप सत्य साबित होंगे आध्यात्मिक चेतना ही सर्वोपरि है इसका जिक्र भगवान श्री कृष्ण ने गीता में किया है
#Science and spriculality
Last week at the NATO summit inhttps://www.washingtonpost.com/worlMadrid, President Biden extolled the unity of the moment. Russian President Vladimir Putin “thought he could break the transatlantic alliance,” Biden told reporters, before pointing to how the Russian invasion of Ukraine had only galvanized the West and led to NATO’s imminent expansion with two new Nordic entrants.
“We are going to stick with Ukraine,” he added, “and all of the alliance is going to stick with Ukraine as long as it takes to, in fact, make sure that they are not defeated.”
That was a statement of intent and commitment to the government in Kyiv, one echoed by Biden’s European counterparts. Yet nestled within his remarks was an open question: The United States and its allies may be doing what they can to prevent Ukrainian defeat, but what about facilitating Ukrainian victory?
The Biden administration and its European allies have already poured billions of dollars worth of military aid into Ukraine. They have sourced Soviet-era munitions and equipment best suited for Ukrainian capabilities, flooded the nation with vital tactical arms like antitank Javelin missiles and fast-tracked Ukraine’s military modernization with top-of-the-line artillery and rocket launchers. They have also placed tremendous new pressures on the Russian economy through sanctions.
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अखिलेश बहादुर पाल: अपनी जड़ों की खोज और कत्यूरी-पाल विरासत के संवाहक लेखक: विशेष लेख उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक संबंधों में अखि...
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