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शनिवार, 18 जून 2022

क्रिप्टोकरेंसी में इन्वेस्ट करने वालों को अब हर रोज नया झटका लग रहा है

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क्रिप्टोकरेंसी में इन्वेस्ट करने वालों को अब हर रोज नया झटका लग रहा है. वजह, कभी इन्वेस्टमेंट पर रिटर्न के मामले में बुलंदियों को छू रही मशहूर क्रिप्ट... https://www.aajtak.in/business/utility/story/cryptocurrency-investors-making-loss-bitcoin-down-20k-dollar-mark-ethereum-decline-too-tutk-1484140-2022-06-18

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गुरुवार, 9 जून 2022

संगीत चिकित्सा का साधन"..

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Copied... #संगीत_चिकित्सा का साधन".. क्योंकि #संगीत भी #चिकित्सा का साधन है.. इसी बात को ध्यान में रखते हुए.. मैं सोच रहा था कि.. क्यों न ग्रुप में.. थोड़ा सा स्थान.. *संगीत चिकित्सा* के लिए भी रखा जाये... इसके लिए मैंने सोचा है कि.. रोज रात्रि में सोने से पहले.. एक मधुर गीत ग्रुप में पेश किया जाये... ताकि उसे सुनकर दिनभर की थकान, दौड़धूप और चिक चिक की वजह से होने वाली मानसिक थकान और टेंशन आदि उड़न छू हो जाये.. और मधुर संगीत को सुनकर.. आप सबको थोड़ा सकून सा भी मिले.. मनुष्य... कामकाज की वजह से शारीरिक रूप से उतना नही थकता.. जितना कि वह मानसिक रूप से थक जाता है... आजकल की जीवन शैली ने हमे शारीरिक रूप से अनेक रोगों का शिकार बना ही दिया है.. लेकिन अगर ध्यान से देखा जाये तो हम शारीरिक रूप से बाद में बीमार हैं.. पहले हम मानसिक रोग का शिकार हैं.. और.. इस तरफ किसी का ध्यान भी नही जा रहा है.. बीमारियों की असली वजह यह है कि हमारा मस्तिष्क ही हमारे पूरे शरीर के कार्यों और अंगों पर नियंत्रण रखता है.. और यही सबसे ज्यादा हताश और निराश रहता है.. यही हमारे शरीर मे रक्तचाप और हार्मोन्स आदि पर भी नियंत्रण रखता है... मस्तिष्क के रिलैक्स न रहने की वजह से ही अन्य शारीरिक रोग पनपते जा रहे हैं.. इसलिए...हमे अपने मस्तिष्क को रिलैक्स करने के लिए योग, प्राणायाम, सात्विक भोजन आदि के साथ - साथ.. *मधुर संगीत* सुनने पर भी ध्यान देना चाहिये... *लेकिन ध्यान रहे...कर्कश ध्वनि या संगीत से भी हमे कोसो दूर रहना चाहिये... क्योंकि कर्कश संगीत भी मानसिक अशांति का ही कारण होता है...* 👉🏻संगीत, मधुर ध्वनि के माध्यम से एक योग प्रणाली की तरह है, जो मानव जीवन के साथ साथ प्रकृति पर भी कार्य करता है.. तथा आत्मज्ञान की हद के लिए उनके उचित कार्यों को जागृत तथा विकसित करती हैं, जोकि हिंदू दर्शन और धर्म का अंतिम लक्ष्य है। मधुर लय भारतीय संगीत का प्रधान तत्व है... *राग* का आधार मधुर लय है... विभिन्न *राग* केन्द्रीय तंत्रिका प्रणाली से संबंधित अनेक रोगों के उपचार में प्रभावी पाये गये हैं.. भारतीय संगीत की प्रमुख विशिष्‍टता *रागदारी संगीत* है.. राग भारतीय संगीत की आधारशिला है.. इसका अर्न्‍तनिहित.. स्‍वर-लय, रस-भाव अपने विशिष्‍ट प्रभाव से व्‍यक्‍ति के मन-मस्‍तिष्‍क को प्रभावित करता है.. जिस प्रकार हर रोग का संबंध किसी ना किसी ग्रह विशेष से होता हैं.. उसी प्रकार संगीत के हर सुर व राग का संबंध भी किसी ना किसी ग्रह से अवश्य होता हैं.. यदि किसी इंसान को किसी ग्रह विशेष से संबन्धित रोग हो और उसे उस ग्रह से संबन्धित राग,सुर अथवा गीत सुनाये जायें तो रोगी बहुत जल्दी ही स्वस्थ हो जाता हैं.. स्‍वर तथा लय की भिन्‍न-भिन्न प्रक्रिया उसकी शारीरिक क्रियाओं, रक्‍त संचार, मान्‍सपेशियों, कंठ ध्‍वनियों आदि में स्‍फूर्ति व उर्जा उत्‍पन्‍न करते हैं तथा व्‍याधियों को दूर करते हैं.. 👉🏻 *संगीत-मकरंद* ग्रंथ में नारद द्वारा रागों की जातियों के आधार पर रोगी के मन और शरीर पर प्रभाव पड़ने का उल्‍लेख किया गया है.. नारद जी ने *संगीताध्‍याय..* के प्रकरण में विभिन्‍न दशाओं में रागों के गायन-वादन का निर्धारण किया है.. *आयुधर्मयशोवृद्धिः धनधान्‍य फलम्‌ लभेत्‌ ।* *रागाभिवृद्धि सन्‍तानं पूर्णभगाः प्रगीयते ॥* *अर्थात्‌...* आयु, धर्म, यश वृद्धि, सन्‍तान की अभिवृद्धि, धनधान्‍य, फल-लाभ इत्‍यादि के लिये पूर्ण रागों का गायन करना चाहिये.. 👉🏻वेदों में संगीत को मोक्ष प्राप्‍ति का सर्वोत्‍कृष्‍ट साधन माना गया है... *ऋग्‍वेद* में... *गाथपति* नामक चिकित्‍सक का उल्‍लेख है.. जिसका तात्‍पर्य संगीत चिकित्‍सक से है.. *सामवेद..* में.. जिसे भारतीय संगीत का वेद माना जाता है.. रोग-निवारण के लिये राग-गायन का विधान मिलता है.. *अथर्ववेद* में.. ऋक, यजुष और साम के ऐसे मंत्र थे, जो जीवन से व्‍यवहार से और स्‍वास्‍थ्‍य से सम्‍बन्‍धित थे... *ब्रह्‍मा जी..* रत्‍न विशेषज्ञ, संगीतज्ञ एवं वैद्य आदि सभी के गुणों को धारण करते थे.. यज्ञों के माध्‍यम से अपने आपको.. शारीरिक, मानसिक व व्‍यवहारिक रूप से संतुलित रखने का प्रावधान था.. *मंत्र-मणि* एवं *औषधि..* तीनों द्वारा अथर्ववेद में उपचार बताया गया है.. मंत्र-संगीत (साम) रत्‍न-मणी, तथा औषधि ने आगे चलकर *आयुर्वेद* का रूप धारण किया.. *आयुर्वेद..* में देह धारण की तीन धातुयें बताई गई हैं... *वात, पित्त और कफ..* अतः इन तीनों धातुओं का सन्‍तुलन बनाये रखने के लिये.. शब्‍द शक्‍ति, मंत्र शक्‍ति और गीत शक्‍ति का भी प्रयोग होता रहा है.. ऋषि-मुनियों द्वारा संगीत व मंत्र साधना ओऽम्‌ द्वारा अनेक प्रकार की सिद्धियों व चमत्‍कारों पर अधिकार प्राप्‍त करना संगीत के प्रभाव का बोध कराता है.. संगीतार्षि.. *तुम्‍बरू* को प्रथम संगीत चिकित्‍सक माना जाता है.. उन्‍होंने अपनी पुस्‍तक.. *संगीत-स्‍वरामृत..* में उल्‍लेख किया है कि ऊँची और असमान ध्‍वनि का *वात्‌* पर.. गम्‍भीर व स्‍थिर ध्‍वनि का *पित्त* पर.. तथा कोमल व मृदु ध्‍वनियों का *कफ़* के गुणों पर प्रभाव पड़ता है... यदि सांगीतिक ध्‍वनियों द्वारा इन तीनों को संतुलित कर लिया जाये तो बीमारियों की सम्‍भावनायें ही खत्‍म हो जायेगी.. 👉🏻योग के सिद्धान्‍त के अनुसार.. श्‍वासों से जुड़ना अर्न्‍तमन से जुड़ना है और व्‍यक्‍ति जब अन्‍तर्मन से जुड़ जाता है तो ऋणात्‍मक संवेग कम हो जाता है और धनात्‍मक संवेग स्‍थायी होने लगते हैं.. ये धनात्‍मक संवेग मनोविकारों से व्‍यक्‍ति को दूर रखते हैं.. 👉🏻किंवदन्‍ती है कि समुद्र गुप्‍त जब वीणा वादन करता था तो उसके उपवन में बसंत ऋतु का आभास होता था.. संगीत द्वारा पेड़ पौधों को रोग-ग्रस्‍त होने से बचाया जा सकता है.. बहेलियों के बीन बजाने पर मृग व सर्प मोहित हो जाते हैं.. आजकल कनाडा में मधुर संगीत सुनाकर गायों से अधिक दूध प्राप्‍त किया जाता है.. 👉🏻विभिन्‍न रोगों के लिये संगीतज्ञों एवं संगीत चिकित्‍सकों तथा मनोवैज्ञानिकों ने कुछ राग निश्‍चित किये हैं, जो उन रोगों को दूर करने में सहायक सिद्ध हुये हैं.. लेकिन उनका वर्णन करने से लेख का विस्तार हो जायेगा... इसलिए इस विषय मे फिर कभी लिखूँगा... फिलहाल तो इतना सब लिखने का मेरा उद्देश्य इतना सा है कि आप सब सोने से पहले मधुर संगीत का आनंद अवश्य लें.. ताकि हर प्रकार के मानसिक व शारीरिक रोगों से बचाव होता रहे.. और अगर कोई मानसिक रोग हो भी तो वह भी धीरे धीरे समाप्त हो जाये.. मेरे अनुसार मधुर संगीत महिलाओं में होने वाले.. हार्मोनल असंतुलन, हिस्टीरिया, डिप्रेशन तथा अन्य बहुत सी मानसिक बीमारियों का सर्वोत्तम उपचार है... ✍🏻... *कौनसा राग किस रोग में लाभदायक है...!* 🌿🍋🥕🍊🥣🍅🌽🍓🍐🍇 विभिन्‍न रोगों के लिये संगीतज्ञों एवं संगीत चिकित्‍सकों तथा मनोवैज्ञानिकों ने कुछ राग निश्‍चित किये हैं, जो उन रोगों को दूर करने में सहायक सिद्ध हुये हैं.. लेकिन उनका वर्णन करने से लेख का विस्तार हो जायेगा... इसलिए इस विषय मे फिर कभी लिखूँगा... फिलहाल आप यह जानिये की कौनसा राग किस रोग के उपचार हेतु प्रयोग में लाया जाता है.. प्रस्तुत है कुछ उदाहरण... 👉🏻 *रक्तचाप...* ऊंचे रक्तचाप मे धीमी गति.. और.. निम्न रक्तचाप मे तीव्र गति का गीत संगीत लाभ देता है.. शास्त्रीय रागों मे.. *राग भूपाली..* को विलंबित व तीव्र गति से सुना या गाया जा सकता है.. *ऊंचे रक्तचाप मे...* 👇🏻 *चल उडजा रे पंछी कि अब ये देश..* (भाभी), *ज्योति कलश छलके..*(भाभी की चूड़ियाँ ), *चलो दिलदार चलो..*(पाकीजा ), *नीले गगन के तले..*(हमराज़) जैसे गीत.. व.. *निम्न रक्तचाप मे..* 👇🏻 *ओ नींद ना मुझको आये..*(पोस्ट बॉक्स न॰ 909), *बेगानी शादी मे अब्दुल्ला दीवाना..* (जिस देश मे गंगा बहती हैं ), *जहां डाल डाल पर..*(सिकंदरे आजम ), *पंख होते तो उड़ आती रे..* (सेहरा) 👉🏻 *हृदय रोग...* इस रोग मे.. *राग दरबारी व राग सारंग..* से संबन्धित संगीत सुनना लाभदायक है.. *इनसे संबन्धित फिल्मी गीत निम्न हैं..* 👇🏻 *तोरा मन दर्पण कहलाये..*(काजल), *राधिके तूने बंसरी चुराई..*(बेटी बेटे), *झनक झनक तोरी बाजे पायलिया..* (मेरे हुज़ूर), *बहुत प्यार करते हैं तुमको सनम..* (साजन), *जादूगर सइयां छोडो मोरी.* (फाल्गुन), *ओ दुनिया के रखवाले..*(बैजू बावरा), *मोहब्बत की झूठी कहानी पे रोये..* (मुगले आजम) 👉🏻 *मनोरोग अथवा डिप्रेसन...* इस रोग मे.. *राग बिहाग व राग मधुवंती...* सुनना लाभदायक होता है.. *इन रागों के प्रमुख गीत इस प्रकार से हैं..* 👇🏻 *तुझे देने को मेरे पास कुछ नहीं..* (कुदरत नई), *तेरे प्यार मे दिलदार..*(मेरे महबूब), *पिया बावरी...*(खूबसूरत पुरानी), *दिल जो ना कह सका...* (भीगी रात), *तुम तो प्यार हो...*(सेहरा), *मेरे सुर और तेरे गीत..* (गूंज उठी शहनाई), *मतवारी नार ठुमक ठुमक चली जाये...*(आम्रपाली), *सखी रे मेरा तन उलझे मन डोले..* (चित्रलेखा) 👉🏻 *याददाश्त..* जिन लोगों की याददाश्त कम हो या कम हो रही हो, उन्हे.. *राग शिवरंजनी..* सुनने से बहुत लाभ मिलता है... *इस राग के प्रमुख गीत इस प्रकार से हैं...* 👇🏻 *ना किसी की आँख का नूर हूँ...* (लालकिला), *मेरे नैना...*(महबूबा), *दिल के झरोखे मे तुझको..*(ब्रह्मचारी), *ओ मेरे सनम ओ मेरे सनम...*(संगम ) *जीता था जिसके..* (दिलवाले), *जाने कहाँ गए वो दिन..*(मेरा नाम जोकर) 👉🏻 *अनिद्रा...* यह रोग हमारे जीवन मे होने वाले सबसे साधारण रोगों में से एक है.. इस रोग के होने पर.. *राग भैरवी व राग सोहनी..* सुनना लाभकारी होता है.. *इसके प्रमुख गीत निम्न प्रकार से हैं..* 👇🏻 *रात भर उनकी याद आती रही..*(गमन), *नाचे मन मोरा..* (कोहिनूर), *मीठे बोल बोले बोले पायलिया..* (सितारा), *तू गंगा की मौज मैं यमुना..* (बैजू बावरा), *ऋतु बसंत आई पवन..*(झनक झनक पायल बाजे), *सावरे सावरे..*(अंनुराधा), *चिंगारी कोई भड़के...*(अमर प्रेम), *छम छम बजे रे पायलिया..*(घूँघट).. *झूमती चली हवा..*(संगीत सम्राट तानसेन), *कुहूु कुहू बोले कोयलिया..*(सुवर्ण सुंदरी ) 👉🏻 *एसिडिटी...* इस रोग के होने पर.. *राग खमाज..* सुनने से लाभ मिलता है... *इस राग के प्रमुख गीत निम्न प्रकार से हैं...* 👇🏻 *ओ रब्बा कोई तो बताये प्यार..* (संगीत), *आयो कहाँ से घनश्याम..*(बुड्ढा मिल गया), *छूकर मेरे मन को..*(याराना), *कैसे बीते दिन कैसे बीती रतिया...* (ठुमरी-अनुराधा), *तकदीर का फसाना गाकर किसे सुनाये..*(सेहरा), *रहते थे कभी जिनके दिल मे..* (ममता), *हमने तुमसे प्यार किया हैं इतना..* (दूल्हा दुल्हन), *तुम कमसिन हो नादां हो..*(आई मिलन की बेला) 👉🏻 *कमजोरी...* यह रोग शारीरिक शक्तिहीनता से संबन्धित है.. इस रोग से पीड़ित व्यक्ति कुछ भी काम कर पाने मे खुद को असमर्थ महसूस करता है... इस रोग के होने पर राग.. *जय जयवंती..* सुनना या गाना लाभदायक होता है.. *इस राग के प्रमुख गीत निम्न हैं..* 👇🏻 *मनमोहना बड़े झूठे..*(सीमा), *बैरन नींद ना आये..*(चाचा ज़िंदाबाद), *मोहब्बत की राहों मे चलना संभलके..* (उड़न खटोला), *साज हो तुम आवाज़ हूँ मैं..* (चन्द्रगुप्त), *ज़िंदगी आज मेरे नाम से शर्माती हैं..* (दिल दिया दर्द लिया), *तुम्हें जो भी देख लेगा किसी का ना..* (बीस साल बाद) 👉🏻 *खून की कमी...* इस रोग से पीड़ित होने पर व्यक्ति का चेहरा निस्तेज व सूखा सा रहता है.. स्वभाव में भी चिड़चिड़ापन होता है.. ऐसे में.. *राग पीलू..* से संबन्धित गीत सुनने से लाभ पाया जा सकता हैं.. *इस राग के प्रमुख गीत निम्न हैं..* 👇🏻 *आज सोचा तो आँसू भर आये...* (हँसते जख्म), *नदिया किनारे...*(अभिमान), *खाली हाथ शाम आई है...*(इजाजत), *तेरे बिन सूने नयन हमारे..*(लता रफी), *मैंने रंग ली आज चुनरिया..*(दुल्हन एक रात की), *मोरे सैयाजी उतरेंगे पार..*(उड़न खटोला), 👉🏻 *अस्थमा...* इस रोग मे आस्था-भक्ति पर आधारित गीत संगीत सुनने व गाने से लाभ होता है.. *राग मालकोस व राग ललित..* से संबन्धित गीत इस रोग मे सुने जा सकते हैं.. *जिनमें प्रमुख गीत निम्न हैं...* 👇🏻 *तू छुपी हैं कहाँ..*(नवरंग), *तू है मेरा प्रेम देवता..*(कल्पना), *एक शहँशाह ने बनवा के हंसी ताजमहल..*(लीडर), *मन तड़पत हरी दर्शन को आज..* (बैजू बावरा ), *आधा है चंद्रमा..*(नवरंग) 👉🏻 *सिरदर्द...* इस रोग के होने पर.. *राग भैरव...* सुनना लाभदायक होता है.. *इस राग के प्रमुख गीत इस प्रकार से हैं...* 👇🏻 *मोहे भूल गए सावरियाँ..* (बैजू बावरा), *राम तेरी गंगा मैली..*(शीर्षक), *पूंछों ना कैसे मैंने रैन बिताई...*(तेरी सूरत मेरी आँखें), *सोलह बरस की बाली उमर को सलाम...*(एक दूजे के लिए) 👉🏻 *नोट:-* रागों के संबंध में मुझे समुचित जानकारी नही है.. इस लेख को लिखने में.. *All India Radio, Delhi* के मेरे मित्र *ज्वाला प्रसाद* और उनके पुत्र.. *माधव..* ने सहायता की है.. इसके लिए ये दोनों विशेष रूप से धन्यवाद के पात्र हैं.. ज्वाला प्रसाद जी *All India Radio..* में.. मुख्य संगीतकए है. भारतीय शास्त्रीय संगीत के विविध राग और उन्हें सुनने से फायदे : 1. राग दुर्गा – आत्मविश्वास बढानेवाला. 2. राग यमन – कार्यशक्ति बढानेवाला. 3. राग देसकार – उत्थान व संतुलन साधनेवाला 4. राग बिलावल – अध्यात्मिक उन्नति व संतुलन साधनेवाला. 5. राग हंसध्वनि – सत्य असत्य को परिभाषित करनेवाला राग. 6. राग शाम कल्याण – मुलाधार उत्तेजित करनेवाला और आत्मविश्वास बढानेवाला. 7. राग हमीर – आक्रामकता बढानेवाला, यश देनेवाला, शक्ति और उर्जा निर्माण करनेवाला. 8. राग केदार – स्वकर्तृत्व पर पूर्ण विश्वास, भरपूर उर्जा निर्माण करनेवाला और मुलाधार उत्तेजित करनेवाला. 9. राग भूप – शांति निर्माण, संतुलन साधकर अहंकार मिटाता है. 10. राग अहिर भैरव – शुद्ध इच्छा, प्रेम एवं भक्ति भाव निर्माण करता है व आध्यात्मिक उन्नति, पोषक वातावरण निर्मित कारक. 11. राग भैरवी – भावना प्रधान राग, सर्व सदिच्छा पूर्ण कर प्रेम सशक्त और वृद्धि करता है. 12. राग मालकौस – अतिशय शांत एवं मधुर राग. प्रेमभाव निर्माण करता है व संसारिक सुख में वृद्धि करेगा. 13. राग भैरव – शांत वृत्ति व शुध्द इच्छा निर्माण करता है. आध्यात्मिक प्रगति के लिये पोषक एवं शिवत्व जागृत करनेवाला राग. 14. राग जयजयवंती – सुख समृद्धि और यश देने वाला राग. समस्या दूर करनेकी क्षमता. 15. राग भीम पलासी - संसार सुख व प्रेम देता है. 16. राग सारंग – अति मधुर राग. कल्पना शक्ति व कार्यकुशलता बढाकर नवनिर्मित ज्ञान प्रदान करता है, आत्मविश्वास बढाकर परिस्थिति का ज्ञान देता है. 17. राग गौरी – गुण वर्घक राग - शुद्ध ईच्छा, मर्यादाशीलता, प्रेम, उत्थान ,समाधान कारक. विविध प्रकार के मकरन्दों (पुष्परस) से आसव, मद्य आदि की ज्ञान कराया जाता था। साभार 🙏🏼 soniya singh Facebook wall

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शनिवार, 21 मई 2022

ध्यान की ताकत

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  *ध्यान की ताकत* 


जब 100 लोग एक साथ साधना करते हैं तो उत्पन्न लहरें 5 कि.मी. तक फैलती हैं और नकारात्मकता नष्ट कर सकारात्मकता का निर्माण करती हैं।

आइंस्टाईन नें वैज्ञानिक दृष्टिकोण से कहा था कि एक अणु के विघटन से लाखों अणुओं का विघटन होता है, इसीको हम अणु विस्फोट कहते है। यही सूत्र हमारे ऋषि, मुनियों ने हमें हजारो साल पहले दिया था।

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आज पृथ्वी पर केवल 4% लोग ही ध्यान करते है लेकिन बचे 96% लोगों को इसका पॉजिटिव इफेक्ट होता है।

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अगर हम लगातार 90 दिनों तक ध्यान करे तो इसका सकारात्मक प्रभाव हमारे और हमारे परिवार पर दिखाई देगा।

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अगर पृथ्वी पर 10% लोग ध्यान करने लगें तो पृथ्वी पर विद्यमान लगभग सभी समस्याओं को नष्ट करने की ताकत ध्यान में है।

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उदाहरण के लिए हम बात करें तो महर्षि महेश योगी जी ने सन् 1993 में वैज्ञानिकों के समक्ष यह सिद्ध किया था।।

हुआ यूं कि उन्होने वॉशिंगटन डी सी में 4000 अध्यापको को बुलाकर एक साथ ध्यान (मेडिटेशन) करने को कहा और चमत्कारिक परिणाम यह था कि शहर का क्राईम रिपोर्ट 50% तक कम हुआ पाया गया।

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वैज्ञानिकों को कारण समझ नहीं आया और उन्होनें इसे`महर्षि इफेक्ट" नाम दिया।

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यह ताकत है ध्यान में 🕉🧘‍♂️🧘‍♀️🕉


*If interested in shaktipat diksha Or Kundalini awakening please msg me on my whatsApp no. +919450220221( only serious seekers)*


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शिव जी भस्म क्यों लगाते हैं

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 शिव जी भस्म क्यों लगाते हैं 

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महादेव जी को एक बार बिना कारण के किसी को प्रणाम करते देखकर पार्वती जी ने पूछा आप किसको प्रणाम करते रहते हैं? 

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शिव जी ने अपनी धर्मपत्नी पार्वती जी से कहते हैं की, हे देवी! जो व्यक्ति एक बार ‘राम’ कहता है उसे मैं तीन बार प्रणाम करता हूं। 

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पार्वती जी ने एक बार शिव जी से पूछा आप श्मशान में क्यूं जाते हैं और ये चिता की भस्म शरीर पे क्यूं लगते हैं? 

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उसी समय शिवजी पार्वती जी को श्मशान ले गए। वहां एक शव अंतिम संस्कार के लिए लाया गया। लोग ‘राम’ नाम सत्य है कहते हुए शव को ला रहे थे। 

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शिव जी ने कहा की देखो पार्वती इस श्मशान की ओर जब लोग आते हैं तो ‘राम’ नाम का स्मरण करते हुए आते हैं। 

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और इस शव के निमित्त से कई लोगों के मुख से मेरा अतिप्रिय दिव्य ‘राम’ नाम निकलता है उसी को सुनने मैं श्मशान में आता हूँ...

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और इतने लोगो के मुख से ‘राम’ नाम का जप करवाने में निमित्त बनने वाले इस शव का मैं सम्मान करता हूँ, प्रणाम करता हूँ, और अग्नि में जलने के बाद उसकी भस्म को अपने शरीर पर लगा लेता हूँ। 

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‘राम’ नाम बुलवाने वाले के प्रति मुझे इतना प्रेम है। 

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एक बार शिवजी कैलाश पर पहुंचे और पार्वती जी से भोजन मांगा। पार्वती जी विष्णु सहस्रनाम का पाठ कर रहीं थी। 

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पार्वती जी ने कहा अभी पाठ पूरा नही हुआ, कृपया थोड़ी देर प्रतीक्षा कीजिए। 

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शिव जी ने कहा की इसमें तो समय और श्रम दोनों लगेंगे। 

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संत लोग जिस तरह से सहस्र नाम को छोटा कर लेते हैं और नित्य जपते हैं वैसा उपाय कर लो। 

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पार्वती जी ने पूछा वो उपाय कैसे करते हैं? मैं सुनना चाहती हूँ। 

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शिव जी ने बताया, केवल एक बार ‘राम’ कह लो तुम्हे सहस्र नाम, भगवान के एक हजार नाम लेने का फल मिल जाएगा। 

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एक ‘राम’ नाम हजार दिव्य नामों के समान है। पार्वती जी ने वैसा ही किया।


जय श्री राम🙏🙏

हर हर महादेव 🙏🙏

#by_शर्मा_जी_कहियो https://www.facebook.com/profile.php?id=100048692481109

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रविवार, 23 जनवरी 2022

तँत्र क्यो महत्वपूर्ण है

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तंत्र कहता है ”जब तक तुम स्वयं प्रकाश से नहीं भर जाते तुम दूसरों को प्रकाशित होने में कैसे सहायक होओगे?” स्वार्थी हो जाओ–तभी, केवल तभी परार्थी हो सकोगे; नहीं तो परार्थ, परोपकार की धारणा मूर्खतापूर्ण है।


आनंदित होओ–तभी तुम दूसरों को आनंदित होने में सहायता दे सकोगे। अगर तुम उदास हो दुखी हो, कड़वाहट से भरे हो, तुम निश्चित ही दूसरे के प्रति हिंसक हो जाओगे और दूसरों के लिए दुख पैदा करोगे।”


स्वयं को प्रसन्न रखने में क्या बुराई है? सुखी होने में क्या बुराई है? अगर कुछ बुराई है तो वह तुम्हारे दुखी होने में है क्योंकि दुखी व्यक्ति अपने चारों ओर दुख की तरंगें निर्मित कर लेता है। 


तंत्र कामुकता नहीं सिखाता। वह तो केवल यही कहता है कि काम सुख का स्रोत हो सकता है। एक बार जब तुम्हें उस सुख का पता चल जाता है तो तुम आगे बढ़ सकते हो, क्योंकि अब तुम सत्य की भूमि पर खड़े हो।


व्यक्ति को सदा काम में नहीं अटके रहना है। बल्कि काम का तालाब में कूदने के लिए जंपिंग बोर्ड की तरह उपयोग किया जा सकता है। तंत्र का यही अभिप्राय है: ”तुम इसे जंपिंग बोर्ड समझो।” 


और जब एक बार तुम्हें काम-सुख का अनुभव हो जाए तुम समझ सकोगे कि रहस्यदर्शी  किस की बात करते रहे हैं–एक परम, एक ब्रह्मांडीय  काम-कृत्य की। मीरा नाच रही है। तुम उसे समझ न पाओगे। 


तुम उसके गीतों को भी समझ न पाओगे। वे कामुकता पूर्ण हैं। ऐसा होगा ही, क्योंकि आदमी के जीवन में काम-कृत्य ही एक ऐसा कृत्य है जिसमें अद्वैत की प्रतीति होती जिसमें तुम एक गहन अनुभव करते हो।


जिसमें अतीत मिट जाता है और भविष्य खो जाता है और बचता केवल वर्तमान–केवल सत्य वास्तविक क्षण।उन सभी रहस्यदर्शियों ने जिन्हें परमात्मा के साथ संपूर्ण अस्तित्व के साथ एक हो जाने की अनुभूति हुई है।


उन्होंने अपनी अनुभूति को अभिव्यक्त करने के लिए काम प्रतीकों का उपयोग किया है। और कोई भी प्रतीक इतने निकट नहीं हैं। काम केवल प्रारंभ है अंत नहीं। लेकिन अगर तुम प्रारंभ को ही चूक गए ।


तो अंत को भी चूक जाओगे। और तुम अंत तक पहुंचने के लिए आरंभ से बच नहीं सकते। तंत्र कहता है ”जीवन को उसके प्राकृतिक रूप में, सत्य रूप में ग्रहण करो। अप्राकृतिक झूठ मत होओ। 


काम-वासना एक गहनतम संभावना है, उसका उपयोग करो। वास्तव में, सभी नैतिकताएं प्रसन्नता-विरोधी हैं। कोई व्यक्ति प्रसन्न है तो तुम्हें लगता है कि जरूर कहीं कुछ गलत है। जब कोई उदास है तब सब ठीक है।


हम एक स्नायु-रोग-ग्रस्त समाज में जीते है जहां हर व्यक्ति उदास है। जब तुम उदास हो ,दुखी हो, तब सब प्रसन्न है; क्योंकि अब सबको तुमसे सहानुभूति प्रकट करने का अवसर मिलेगा। 


जब तुम प्रसन्न हो तो उनको समझ नहीं आएगा कि वे क्या करें? जब कोई तुमसे सहानुभूति प्रकट करता है तब उसका चेहरा देखना। एक सूक्ष्म चमक चेहरे पर आ जाती है। वह सहानुभूति दिखाते समय प्रसन्न है। 


अगर तुम खुश हो, तब कोई संभावना नहीं।तुम्हारी प्रसन्नता दूसरों को उदास कर देती है। यह स्नायुरोग न्यूरोसिस है। इसका आधार ही पागलपन है। तंत्र कहता है ”तुम जो हो, प्रामाणिक रूप से वही हो जाओ। 


तुम्हारी प्रसन्नता बुरी नहीं अच्छी है। वह पाप नहीं। केवल उदासी पाप है केवल दुखी होना पाप है। प्रसन्न होना पुण्य है क्योंकि एक प्रसन्न और प्रफुल्लित व्यक्ति ही दूसरों के लिए दुख पैदा नहीं करेगा। 


केवल प्रफुल्लित और प्रसन्न व्यक्ति ही दूसरों की प्रसन्नता के लिए भूमि तैयार कर सकता है।” तंत्र विज्ञान है। तंत्र कहता है ”पहले जानो कि यथार्थ क्या है वास्तविकता क्या है आदमी क्या है? 


और पहले से मूल्य निर्धारित मत करो और आदर्श मत स्थापित करो पहले उसे जानो जो है। जो होना चाहिए उसके संबंध में मत सोचो, जो है केवल उसके संबंध में सोचो।” 


और जब एक बार उसे जान लिया जाता है जो है तब तुम उसे रूपांतरित भी कर सकते हो। अब तुम रहस्य समझ गए। तंत्र कहता है ”काम के विरुद्ध जाने की चेष्टा मत करो 


अगर तुम काम के विरुद्ध जाकर ब्रह्मचर्य को, साधने की कोशिश करते हो तो यह असंभव है। यह मात्र जादू की भांति है। बिना यह जाने कि काम-ऊर्जा क्या है बिना यह जाने कि काम-वासना की उत्पत्ति किस प्रकार होती है। sabhar tantra shadana kundalni sakti Facebook wall


बिना उसकी प्रकृति की गहराई में गए बिना उसके रहस्य को जाने। तुम ब्रह्मचर्य का एक आदर्श अवश्य स्थापित कर सकते हो लेकिन तुम क्या करोगे?” तुम केवल दमन करोगे। 


और जो व्यक्ति इसका दमन करता है वह उस व्यक्ति से अधिक कामुक है जो इसका भोग करता है। क्योंकि भोग से ऊर्जा शांत हो जाती है क्योंकि दमन से वह तुम्हारे शरीर-तंत्र में निरंतर संचार करती रहती है।


                                                            

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गुरुवार, 20 जनवरी 2022

पपीते के पत्तो की चाय किसी भी स्टेज के कैंसर को सिर्फ 60 से 90* *दिनों में कर देगी* *जड़ से खत्म, *आचार्य डॉक्टर आरपी पांडे

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 *पपीते के पत्तो की चाय किसी भी स्टेज के कैंसर को सिर्फ 60 से 90* *दिनों में कर देगी* *जड़ से खत्म, *आचार्य डॉक्टर आरपी पांडे वैद्य जी अनंत शिखर अयोध्या* 

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पपीते के पत्ते 3rd और 4th स्टेज के कैंसर को सिर्फ 35 से 90 दिन में सही कर सकते हैं। 

अभी तक हम लोगों ने सिर्फ पपीते के पत्तों को बहुत ही सीमित तरीके से उपयोग किया होगा, बहरहाल प्लेटलेट्स के कम हो जाने पर या त्वचा सम्बन्धी या कोई और छोटा मोटा प्रयोग, मगर आज जो हम आपको बताने जा रहें हैं, ये वाकई आपको चौंका देगा, आप सिर्फ 5 हफ्तों में कैंसर जैसी भयंकर रोग को जड़ से ख़त्म कर सकते हैं।

आपके लिए नित नवीन जानकारी कई प्रकार के वैज्ञानिक शोधों से पता लगा है कि पपीता के सभी भागों जैसे फल, तना, बीज, पत्तिया, जड़ सभी के अन्दर कैंसर की कोशिका को नष्ट करने और उसके वृद्धि को रोकने की क्षमता पाई जाती है। 

विशेषकर पपीता की पत्तियों के अन्दर कैंसर की कोशिका को नष्ट करने और उसकी वृद्धि को रोकने का गुण अत्याधिक पाया जाता है। तो आइये जानते हैं उन्ही से। 

University of florida ( 2010) और International doctors and researchers from US and japan में हुए शोधो से पता चला है की पपीता के पत्तो में कैंसर कोशिका को नष्ट करने की क्षमता पाई जाती है। 

 एक शोधकर्ता  के अनुसार पपीता की पत्तियां डायरेक्ट कैंसर को खत्म कर सकती है, उनके अनुसार पपीता कि पत्तिया लगभग 10 प्रकार के कैंसर को खत्म कर सकती है जिनमे मुख्य है।

breast cancer, lung cancer, liver cancer, pancreatic cancer, cervix cancer, इसमें जितनी ज्यादा मात्रा पपीता के पत्तियों की बढ़ाई गयी है, उतना ही अच्छा परिणाम मिला है, अगर पपीता की पत्तिया कैंसर को खत्म नहीं कर सकती है लेकिन कैंसर की प्रोग्रेस को जरुर रोक देती है।। 

तो आइये जाने पपीता की पत्तिया कैंसर को कैसे खत्म करती है?

1. पपीता कैंसर रोधी अणु Th1 cytokines की उत्पादन को ब़ढाता है जो की इम्यून system को शक्ति प्रदान करता है जिससे कैंसर कोशिका को खत्म किया जाता है।

2. पपीता की पत्तियों में papain नमक एक प्रोटीन को तोड़ने (proteolytic) वाला एंजाइम पाया जाता है जो कैंसर कोशिका पर मौजूद प्रोटीन के आवरण को तोड़ देता है जिससे कैंसर कोशिका शरीर में बचा रहना मुश्किल हो जाता है। 

Papain blood में जाकर macrophages को उतेजित करता है जो immune system को उतेजित करके कैंसर कोशिका को नष्ट करना शुरू करती है, chemotheraphy / radiotheraphy और पपीता की पत्तियों के द्वारा ट्रीटमेंट में ये फर्क है कि chemotheraphy में immune system को दबाया जाता है जबकि पपीता immune system को उतेजित करता है, chemotheraphy और radiotheraphy में नार्मल कोशिका भी प्रभावित होती है पपीता सिर्फ कैंसर कोशिका को नष्ट करता है।

सबसे बड़ी बात के कैंसर के इलाज में पपीता का कोई side effect भी नहीं है।।

कैंसर में पपीते के सेवन की विधि :

कैंसर में सबसे बढ़िया है पपीते की चाय। दिन में 3 से 4 बार पपीते की चाय बनायें, ये आपके लिए बहुत फायदेमंद होने वाली है। अब आइये जाने लेते हैं पपीते की चाय बनाने की विधि।

         5 से 7 पपीता के पत्तो को पहले धूप में अच्छी तरह सुखा ले फिर उसको छोटे छोटे टुकड़ों में तोड़ लो आप 500 ml पानी में कुछ पपीता के सूखे हुए पत्ते डाल कर अच्छी तरह उबालें।

इतना उबाले के ये आधा रह जाए। इसको आप 125 ml करके दिन में दो बार पिए। और अगर ज्यादा बनाया है तो इसको आप दिन में 3 से 4 बार पियें। बाकी बचे हुए लिक्विड को फ्रीज में स्टोर का दे जरुरत पड़ने पर इस्तेमाल कर ले। *और ध्यान रहे के इसको दोबारा गर्म मत करें।*

       पपीते के 7 ताज़े पत्ते लें इनको अच्छे से हाथ से मसल लें। अभी इसको 1 Liter पानी में डालकर उबालें, जब यह 250 ml। रह जाए तो इसको छान कर 125 ml. करके दो बार में अर्थात सुबह और शाम को पी लें। यही प्रयोग आप दिन में 3 से 4 बार भी कर सकते हैं।

पपीते के पत्तों का जितना अधिक प्रयोग आप करेंगे उतना ही जल्दी आपको असर मिलेगा। और ये *चाय पीने के आधे से एक घंटे तक आपको कुछ भी खाना पीना नहीं है।

कब तक करें ये प्रयोग वैसे तो ये प्रयोग आपको 5 हफ़्तों में अपना रिजल्ट दिखा देगा, फिर भी हम आपको इसे 3 महीने तक इस्तेमाल करने का निर्देश देंगे। और ये जिन लोगों का अनुभूत किया है उन लोगों ने उन लोगों को भी सही किया है, जिनकी कैंसर में तीसरी और चौथी स्टेज थी।

*_आचार्य डॉक्टर आरपी पांडे अनंत शिखर सद्गुरु औषधालय साकेत पुरी कॉलोनी देवकाली बाईपास अयोध्या मिलने का समय प्रातः 8:00 से1 2:00 तक शाम 5:00 से_ 8:00 बृहस्पतिवार 10:00 से 2:00*9455831300,9670108000*

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रविवार, 28 नवंबर 2021

ब्रिटेन के किसान अब गाय के गोबर से बिजली पैदा कर के अच्छी कमाई कर रहे हैं

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 [28/11, 13:35] Akhilesh Bahadur Pal: ब्रिटेन के किसान अब गाय के गोबर से बिजली पैदा कर के अच्छी कमाई कर रहे हैं। ये किसान गाय के गोबर का इस्तेमाल कर के AA साइज की ‘पैटरी (बैटरी)’ तैयार कर रहे हैं। इन ‘Patteries’ को रिचार्ज भी किया जा सकता है। अब माना जा रहा है कि ये रिचार्जेबल ‘पैटरीज’ ब्रिटेन की रिन्यूवेबल एनर्जी की दिशा में एक बड़ा योगदान दे सकते हैं। अनुसंधान में सामने आया है कि 1 किलो गाय के गोबर से 3.75 kWh (किलोवॉट ऑवर) बिजली पैदा की जा सकती है।

[28/11, 13:35] Akhilesh Bahadur Pal: इसे कुछ यूँ समझिए कि एक किलो गाय के गोबर से पैदा हुई बिजली से एक वैक्यूम क्लीनर को 5 घंटे तक संचालित किया जा सकता है, या फिर 3.5 घंटे तक आप आयरन का इस्तेमाल करते हुए कपड़ों पर इस्त्री कर सकते हैं। इन बैटरियों को ‘Arla’ नाम की डेयरी कोऑपरेटिव संस्था ने बनाया है। इस कार्य में ‘GP बैटरीज’ नाम की बैटरी कंपनी ने किसानों की मदद की है। दोनों कंपनियों ने बताया है कि एक गाय से मिलने वाले गोबर से 1 साल तक 3 घरों को बिजली दी जा सकती है।

[28/11, 13:35] Akhilesh Bahadur Pal: इस हिसाब से देखा जाए तो अगर 4.6 लाख गायों के गोबर को एकत्रित किया जाए और ऊर्जा के उत्पादन में उनका उपयोग किया जाए तो इससे यूनाइटेड किंगडम के (UK) के 12 लाख घरों में साल भर बिजली की कमी नहीं होगी। विशेषज्ञ इसे ‘विश्वसनीय और सुसंगत’ स्रोत बता रहे हैं, जिससे बिजली पैदा हो सकती है। अकेले ‘Arla’ कंपनी की गायों से हर साल 10 लाख टन गोबर मिलता है। ‘Anaerobic Digestion (अवायवीय पाचन)’ की प्रक्रिया द्वारा गोबर से ऊर्जा प्राप्त की जा रही है।

[28/11, 13:36] Akhilesh Bahadur Pal: इस प्रक्रिया के तहत गोबर को बायोगैस और बायो-फर्टिलाइजर में तोड़ दिया जाता है। ब्रिटिश किसानों का कहना है कि ये एक इनोवेटिव प्रयास है, जो प्रचुर मात्रा में उपलब्ध गोबर का सदुपयोग कर के ब्रिटेन की एक बड़ी समस्या का समाधान कर सकता है। उनका कहना है कि अपने खेतों और पूरे एस्टेट में वो इसी ऊर्जा का उपयोग कर रहे हैं, लेकिन इसकी क्षमता इससे कहीं ज्यादा है। यहाँ तक कि गोबर से ऊर्जा बनाने के बाद जो वेस्ट बचता है, उसका उपयोग खेतों में खाद के रूप में किया जाता है। sabhar up india

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शनिवार, 27 नवंबर 2021

छाया पुरुष सिद्ध योगी एक ही समय में कई स्थानों में एक साथ छाया शरीर के माध्यम से प्रकट हो सकता है और अलग अलग कार्य-सम्पादन भी कर सकता है

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----------:छाया पुरुष सिद्ध योगी एक ही समय में कई स्थानों में एक साथ छाया शरीर के माध्यम से प्रकट हो सकता है और अलग अलग कार्य-सम्पादन भी कर सकता है:-------------
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                      भाग--तीन
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परम श्रद्धेय ब्रह्मलीन गुरुदेव पण्डित अरुण कुमार शर्मा काशी की अध्यात्म-ज्ञानगंगा में पावन अवगाहन

पूज्यपाद गुरुदेव के श्रीचरणों में कोटि-कोटि नमन

       
        साधारणतया शारीरिक तथा मानसिक रूप से स्वस्थ व्यक्ति का छाया शरीर बहुत कम ही बाहर निकलता है। यदि कभी किसी कारणवश निकलना पड़ा तो बड़ी कठिनाई का सामना करना पड़ता है छाया शरीर को। धार्मिक, आध्यात्मिक, दार्शनिक व्यक्ति के अलावा उच्च विचार रखने वाले तथा प्रबल इच्छा-शक्ति सम्पन्न व्यक्ति का छाया शरीर शीघ्र अलग नहीं होता और यही कारण है कि इस प्रकार के लोग कभी बीमार नहीं पड़ते।
       यह समझ लेना चाहिए कि स्थूल शरीर और छाया शरीर एक दूसरे के पूरक शरीर हैं। दोनों की भौतिक एकता इतनी घनिष्ठ है कि छाया शरीर में लगी चोट स्थूल शरीर की क्षति के रूप में देखी जा सकती है। इस क्रिया को प्रतिप्रभाव कहते हैं। कमज़ोर, शिथिल, रोगग्रस्त व्यक्ति का छाया शरीर स्थूल शरीर से थोड़ी दूरी  बनाकर रहता है, लेकिन जैसे-जैसे व्यक्ति स्वस्थ होता जाता है, वैसे-ही-वैसे उसका छाया शरीर भी उसके स्थूल शरीर में समाने लग जाता है और जब वह पूरी तरह समा जाता है, तभी रोगी पूर्ण स्वस्थ होता है। कहने का आशय यह है कि मनुष्य की स्वस्थता-अस्वस्थता उसके छाया शरीर पर निर्भर करती है।
       छाया शरीर बिना स्थूल शरीर अधूरा है। छाया शरीर उस समय अलग होता है जब हम मिलन करते हैं, नशा करते हैं, क्रोध या चिन्ता करते हैं, चोरी करते हैं, झूठ बोलते हैं, लड़ाई-झगड़ा करते हैं, आवेश करते हैं, भय की स्थिति में होते हैं या किसी बड़े और प्रभावशाली व्यक्ति के सामने जाते हैं। ऐसी स्थिति में छाया शरीर स्थूल शरीर से थोड़ा अलग हो जाता है। समझ लेना चाहिए कि दोनों शरीरों की सामंजस्यता में कमी होने पर मनुष्य को कमजोरी, मानसिक दुर्बलता का अनुभव तुरंत होने लगता है। दोनों में थोड़ा-सा भी अन्तर होने पर कोई-न कोई-रोग उत्पन्न होता है। सभी प्रकार के रोगों का एकमात्र कारण स्थूल शरीर और छाया शरीर में वैषम्य उत्पन्न हो जाना ही होता है। उचित सामंजस्य होने के लिए उचित आहार, निद्रा, मानसिक सन्तुलन बनाये रखना आवश्यक है। वाणी का कम-से-कम उपयोग ,अधिक-से-अधिक एकान्त का सेवन और अल्प भोजन आवश्यक है।sabhar Shiva ram Tiwari Facebook wall

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तीसरी श्रेणी अपदेवता

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परम श्रद्धेय ब्रह्मलीन गुरुदेव पण्डित अरुण कुमार शर्मा काशी की अध्यात्म-ज्ञानगंगा में पावन अवगाहन


पूज्यपाद गुरुदेव के श्रीचरणों में कोटि-कोटि वन्दन


    (कई दिन पूर्व की पोस्ट में यह बताया जा चुका है कि देवताओं की तीन श्रेणियाँ होती हैं--सात्विक, राजस और तामस। इसी कड़ी में अब आगे--)


      तीसरी श्रेणी में आते हैं--अपदेवता। हाकिनी, डाकिनी, शाकिनी, पिशाच, बेताल आदि गुह्य योनि के अपदेवता हैं। गुह्य्योनि मानव योनि के बाद एक विशिष्ट योनि है। इस योनि की आत्माएं कभी भी मानव योनि में जन्म नहीं लेतीं। वे अपनी योनि में ही जन्म लेती हैं। पिशाच से पिशाच ही जन्म लेगा, दूसरा और कोई नहीं। हाकिनियों, डाकिनियों और शाकिनियों की सोलह-सोलह जातियां हैं। ग्यारह जातियां पिशाचों की हैं और बेतालों की हैं सोलह जातियां। सभी की जातियों के नाम अलग-अलग हैं और प्रत्येक जाति की साधना-उपासना आदि भी भिन्न भिन्न है।

       अपदेवताओं के शरीर का निर्माण अग्नि तत्व से हुआ रहता है। उनके स्वभाव में रजोगुण और तमोगुण --दोनों का मिश्रण रहता है। वे क्रोधी होते हैं और दयालु भी। कल्याण करते हैं और अकल्याण भी। इनमें मनोबल और प्राणबल --दोनों की अधिकता रहती है। कहाँ क्या हो रहा है?--वे अपने मनोबल से तत्काल जान जाते हैं। यही नहीं, कहाँ कौन सी घटना घटने वाली है ?-- यही भी अपने मनोबल से जान जाते हैं वे। उनका स्वभाव अति उग्र होता है। तमोगुणी तांत्रिक विधि से की गयी 'आत्माकर्षिणी विद्या' की साधना से आकर्षित होकर वे भी साधक के मनोमय या प्राणमय शरीर द्वारा उससे संपर्क करते हैं और साधक का मनोरथ पूर्ण करते हैं। कभी-कभी अपने निज रूप में, तो कभी-कभी साधक के इच्छित रूप में प्रत्यक्ष प्रकट भी होते हैं। sabhar Facebook wall dharana dhyan samadi

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गुरुवार, 30 सितंबर 2021

आइये पत्तल की परंपरा को पुनर्जिवित करें

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🍀पत्तलों से लाभ :
सबसे पहले गरीब मजदूर आदिवासी लोगों को रोजगार मिलेगा ...

1. सबसे पहले तो उसे धोना नहीं पड़ेगा, इसको हम सीधा मिटटी में दबा सकते है।
2. न पानी नष्ट होगा।
3. न ही कामवाली रखनी पड़ेगी, मासिक खर्च भी बचेगा।
4. न केमिकल उपयोग करने पड़ेंगे l
5. न केमिकल द्वारा शरीर को आंतरिक हानि पहुंचेगी।
6. अधिक से अधिक वृक्ष उगाये जायेंगे, जिससे कि अधिक आक्सीजन भी मिलेगी।
7. प्रदूषण भी घटेगा।
8. सबसे महत्वपूर्ण झूठे पत्तलों को एक जगह गाड़ने पर, खाद का निर्माण किया जा सकता है, एवं मिट्टी की उपजाऊ क्षमता को भी बढ़ाया जा सकता है।
9. पत्तल बनाने वालों को भी रोजगार प्राप्त होगा।
10. सबसे मुख्य लाभ, आप नदियों को दूषित होने से बहुत बड़े स्तर पर बचा सकते हैं, जैसे कि आप जानते ही हैं कि जो पानी आप बर्तन धोने में उपयोग कर रहे हो, वो #केमिकल वाला पानी, पहले नाले में जायेगा, फिर आगे जाकर #नदियों में ही छोड़ दिया जायेगा। जो #जल #प्रदूषण में आपको सहयोगी बनाता है। sabhar Sonia singh Facebook wall

🍀आजकल हर जगह #भंडारे, #विवाह शादियों, #birthday पार्टियों में #डिस्पोजेबल की जगह इन पत्तलों का प्रचलन करना चाहिए।

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रविवार, 12 सितंबर 2021

motorcycle exident lawyers in us

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As much fun and satisfaction as individuals get from riding bikes, there is consistently the potential for a mishap. At the point when a cruiser rider has a mishap, the rider and traveler's wounds can be disastrous. A mishap between two vehicles may be marked as a "minor collision" without any wounds to the tenants, yet seldom does the rider of a bike escape without a clinic trip for treatment of broke bones cuts, or much more extreme wounds. 

In case you are harmed in a bike mishap, the pay you at last get from a careless driver relies upon the experience and abilities of the cruiser attorney you recruit to address you. This article gives you the data you need to settle on an educated choice and assist you with discovering a lawyer fit for getting you the greatest remuneration for your wounds. 

What to Think about When Recruiting a Cruiser Mishap Attorney 

The method involved with turning into a lawyer is a challenging one. After graduation from graduate school, a candidate wishing to provide legal counsel should beat the bar assessment to show a candidate's lawful information. There is additionally an individual verification and an examination to decide whether the candidate is of acceptable moral person. People who complete the cycle are conceded to the bar, which implies they are legitimately qualified for provide legal counsel inside the state. 

Anybody conceded to provide legal counsel is approved to show up in court to guard somebody accused of perpetrating a wrongdoing or address a cruiser mishap casualty. What separates some lawyers from others is their experience taking care of cases in a particular space of the law. For instance, anybody can take on an individual physical issue case, however in case you are genuinely harmed in a mishap, you need the lawyer taking care of your case to have understanding into the carelessness laws and the court and preliminary abilities that must be created through long stretches of involvement addressing mishap casualties. 

There are three key elements you should consider under the steady gaze of recruiting a legal counselor to deal with your case for harms from a bike mishap: 

Area: You may have seen or heard ads publicizing the administrations of cruiser mishap legal counselors. A portion of the advertisements are for legal advisors from different states (or portions of the express that are hours from your hearing area). Out-of-state law offices as a rule allude your case to one more firm situated inside your state, leaving you with little say over the decision of lawyer. Picking a lawyer situated inside the city or district where your case will go to court implies you are addressed by somebody who knows the neighborhood court methodology and knows about the appointed authorities. 

General Specialists: Numerous legal advisors and law offices work as broad practices. They may deal with land, criminal safeguard, wills and homes, and individual injury. A legal counselor who handles an infrequent bike case won't have a similar degree of experience with the law or have similar preliminary abilities as a lawyer who only focuses on close to home injury law. The most straightforward approach to look into a legal advisor's training is to pose inquiries, including requesting which rate from the lawyer's training is bike law. 

Great Standing and Experience: Discovering a cruiser mishap attorney requires some work to guarantee you are getting somebody who can accomplish the best outcomes. As well as asking the attorney inquiries, you likewise need to do your exploration by really looking at online surveys and tributes from however many sources as could reasonably be expected. 

You need to think about a couple lawyers prior to closing which of them has the three models you need in the lawyer who handles your cruiser guarantee. 

Step by step instructions to Discover a Cruiser Mishap Legal advisor 

The pool of lawyers from which to pick a couple to meeting to choose the bike mishap attorney to deal with your case is gigantic. There are around 1.3 million legal advisors in the U.S., with very nearly 170,000 of them rehearsing in California. Obviously, just a little level of them handle bike law, yet who do you call? There are a couple of approaches to limit your pursuit, including: 

Companions and Family members: Odds are somebody you know, either a your relative or a dear companion, has utilized the administrations of a bike mishap legal counselor. 

Legal counselor Reference: The legal advisor who addressed you in the acquisition of your home or the one addressing your business probably won't deal with bike mishap claims, however they ought to have the option to suggest a lawyer who does. 

Bar Affiliations: Most state and nearby bar affiliations have legal counselor reference administrations you can contact for the name of neighborhood bike mishap legal advisors. For instance, The State Bar of California gives a statewide rundown of nearby lawyer reference administrations coordinated by area. 

Google Search: Everybody appears to depend upon Google while looking for something, so composing "bike mishap legal counselor" and your area into the inquiry box will bring results. One limit of a Google search is you should figure out the outcomes by seeing sites to figure out which of the many firms and lawyers you need to call. 

Legal counselor Indexes: One more source from which you can get the names of attorneys and law offices is at least one of the online legal advisor catalogs. A legal advisor registry permits you to track down a neighborhood legal counselor dependent on their space of training. A portion of the registries, like Martindale-Hubbell and Avvo, offer customer and friend audits and appraisals of the lawyers. Famous catalogs include: 

Cruiser Lawful Establishment 

Avvo 

Martindale-Hubbell 

Justia 

FindLaw 

NOLO 

One source you should be careful about is sales letters from law offices offering their administrations. State bar affiliations set up rules for attorney publicizing, which incorporates sales letters. For example, California necessitates that legal advisors clarify that such letters are a type of publicizing. Remember that the substance of the letter are intended to captivate you to hold the company's administrations.
sabhar https://www.motorcyclelegalfoundation.com/how-to-find-a-motorcycle-personal-injury-lawyer/

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