शनिवार, 20 मार्च 2021
जैविक खाद से ज्यादा उत्पादन
0आप जानते है फसलों के उत्पादन में जैव उर्वरक की महत्वपूर्ण भूमिका है, लेकिन अभी भी किसान, फसलों में रासायनिक उर्वरक का उपयोग कर रहे हैं। जिससे फसलों की लागत तो बढ़ रही है लेकिन किसानों के अपेक्षानुसार उपज नहीं बढ़ रही है। किसानों को इस नई उपज और जैविक खाद के माध्यम से इसकी उपज बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है। दरअसल जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञानी ने गेहूं की ऐसी फसल (सीड) तैयार की है, जो रासायनिक उर्वरक की बजाए जैविक उर्वरक के उपयोग से अधिक उपज देती है। विवि के कृषि विज्ञान केंद्र जबलपुर एवं नेशनल फर्टीलाइजर्स लिमिटेड द्वारा इन दिनों ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को इस नई उपज और जैविक खाद के माध्यम से इसकी उपज बढ़ाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
जैविक खाद से ज्यादा उत्पादन: शहपुरा के अंतर्गत आने वाले पिपरिया कला में गेहूं के दो प्रयोग का किसानों को प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण देते हुए मृदा विज्ञानी डॉ.एके सिंह ने बताया कि खेतों पर पीएसबी एवं जेडएसबी जैविक उर्वरक एक तरह उर्वरक एवं बेंटोनाइट सल्फर के उपचार के साथ प्रयोग किए गए, जिनके अच्छे परिणाम सामने आए।
जैव उर्वरक से उपज बढ़ती और लागत घटती है: कृषि विज्ञानी डॉ.यतिराज खरे ने बताया कि जेडब्ल्यू 3288 एक ऐसी प्रजाति है, जो जैव उर्वरक के साथ अच्छी उपज देती है। किसानों ने बताया कि जैव उर्वरक से उपज बढ़ती और लागत घटती है, लेकिन इसके सही उपयोग के बारे में विज्ञानियों ने उन्हें जानकारी दी है।
रविवार, 14 मार्च 2021
भारत की पहली लिथियम रिफाइनरी
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मार्च 14, 2021 in
गुजरात में भारत की पहली लिटियम रिफाइनरी स्थापित की जाएगी इस रिफाइनरी को स्थापित करने के लिए देश की सबसे बड़ी नवीकरण ऊर्जा कंपनियों में से एक मणिकरण पावर लिमिटेड लगभग ₹1000 का निवेश करेगी इस रिफाइनरी के लिए लिथियम आयन को ऑस्ट्रेलिया से आयात किया जाएगा क्योंकि लिथियम एक दुर्लभ तत्व है जो आमतौर पर भारत में नहीं पाया जाता वर्तमान में भारत सबसे बड़े इलेक्ट्रिक कार बाजार के रूप में उभर रहा है ऐसे में देश को बैटरी का उत्पादन करने के लिए कच्चे माल के रूप में लिथियम की आवश्यकता है भारत अपनी लिथियम संबंधित आवश्यकता ओं का अधिकांश हिस्सा आयात करता है भारत में बोलीबीआई लिथियम भंडार भंडार तक पहुंच प्राप्त की है भारत ने साल 2030 तक इलेक्ट्रिक वाहन संख्या को 36 परसेंट तक बढ़ाने का एक महत्वकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है
शुक्रवार, 12 मार्च 2021
यूपी में खुलेगा देश का पहला वर्चुअल माल
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मार्च 12, 2021 in
उत्तर प्रदेश में सरकार देश का पहला वर्चुअल एग्जीबिशन माल की योजना पर काम कर रही है यह माल ऑनलाइन कारोबार का एक ऐसा फोरम होगा जहां पर क्रेता विक्रेता अपनी सुविधा के मुताबिक किसी भी समय उत्पादों की खरीद बिक्री कर सकेंगे इस माल में एक बार में 500 स्टाल लगेंगे क्रेता विक्रेता ऑनलाइन संवाद भी स्थापित कर सकेंगे में स्टालों के आवंटन में चक्रीय व्यवस्था लागू की जाएगी
गुरुवार, 11 मार्च 2021
कोविड-19 और भारत की वैक्सीन कूटनीति
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मार्च 11, 2021 in
हाल ही में भारत ने कोविड-19 के खिलाफ टीकाकरण शुरू करने के कुछ दिनों बाद अपने अपने दक्षिण एशियाई पड़ोसियों और प्रमुख साझेदार देशों को स्वदेशी रूप से निर्मित कोविड-19 वैक्सीन की लाखों पूरा भेजना शुरू कर दिया है कोविड-19 महामारी से लड़ने में मदद करने के लिए परीक्षण किट व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण वेंटिलेटर और अन्य देशों को दवाओं की खेत भेजे जाने के बाद भारत अब वैक्सीन कूटनीति के साथ उन तक पहुंच बढ़ा रहा है इसी परिपेक्ष में भारत में अपने पड़ोसी और प्रमुख साझेदार देशों को कोविड-19 वैक्सीन प्रदान करने का निर्णय लिया है नेबरहुड फर्स्ट पहल को ध्यान में रखते हुए भारत द्वारा वैक्सीन को अपने निकटतम पड़ोसी बांग्लादेश भूटान मालदीव म्यानमार नेपाल और श्रीलंका तथा मारीशस और से सेल्स जैसे महत्वपूर्ण हिंद महासागरीय भागीदार देशो ko विशेष विमान द्वारा भेजा गया है भारत में सार्क देशों को भी वैक्सीन प्रदान करने का निर्णय लिया भारत की वैक्सीन मैत्री पहल कोविड-19 टीका को विकासशील देशों के लिए अधिक सुलभ बनाकर दुनिया में टीका असमानता को कम करने में मदद मिलेगी भारतीय टीका ने कम दुष्प्रभाव दिखाए हैं तथा यह कम लागत के साथ-साथ स्टोर करने वह परिवहन में भी आसान है मों ने कम दुष्प्रभाव दिखाए हैं तथा भारतीय टीमों ने कम दुष्प्रभाव दिखाए हैं तथा यह कम लागत के साथ-साथ स्टोर करने व परिवहन में भी आसान है भारत के कोविड-19 टीका की वैश्विक मांग बढ़ रही है तथा 90 देशों ने इसकी खरीद के लिए समझौता किया है ऐसे में टीका की व्यवसायिक आपूर्ति से भारतीय फार्मास्यूटिकल व्यवसायों को लंबे समय तक लाभ होगा भारत का वैक्सीन का उपहार अपने विशेष रूप से दक्षिण एशिया में जहां भारत की बड़े भाई व्यवहार वाली छवि के लिए अक्सर आलोचना की जाती है छवि को बेहतर बनाने और सद्भावना अर्जित करने के लिए महत्वपूर्ण हैं भारत की यह वैक्सीन कूटनीति दक्षिण एशिया अफ्रीका और अन्य जगहों पर चीन के व्यापक प्रभाव का मुकाबला करने के लिए एक शक्तिशाली सॉफ्ट पावर उपकरण के रूप में काम करेगी भारत के पड़ोसी देशों में सैन्य उपकरणों के निर्देशक और आपूर्तिकर्ता के रूप में चीन की भूमिका बड़ी है विशेष रूप से उसके बेल्ट वन रोड इनीशिएटिव के बाद यह नीति भारत और चीन दोनों ने महामारी के दौरान सुरक्षात्मक उपकरणों और दवाओं की एशियाई और अफ्रीकी देशों को आपूर्ति की थी भारत को एशियाई देशों के मध्य चीनी प्रभाव को कम करने में सक्षम बनाएंगे asia me इसका लाभ मिलेगा
मंगलवार, 2 फ़रवरी 2021
पूर्वजन्म की घटना
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फ़रवरी 02, 2021 in
वर्ष 1930 में एक संपन्न और भले परिवार में शांति देवी का जन्म हुआ था। लेकिन जब वे महज 4 साल की थीं तभी उन्होंने अपने माता-पिता को पहचानने से इनकार कर दिया और यह कहने लगीं कि ये उनके असली अभिभावक नहीं हैं। उनका कहना था कि उनका नाम लुग्दी देवी है और बच्चे को जन्म देते समय उनकी मौत हो गई थी। इतना ही नहीं वह अपने पति और परिवार से संबंधित कई और जानकारियां भी देने लगीं।जब उन्हें, उनके कहे हुए स्थान पर ले जाया गया तो उनकी कही गई हर बात सच निकलने लगी। उन्होंने अपने पति को पहचान लिया और अपने पुत्र को देखकर उसे प्यार करने लगीं। कई समाचार पत्रों, पत्रिकाओं में भी शांति देवी की कहानी प्रकाशित हुई। यहां तक कि महात्मा गांधी भी शांति देवी से मिले।
शांति देवी को ना सिर्फ अपना पूर्वजन्म याद था बल्कि उन्हें यह भी याद था कि मृत्यु के बाद और जन्म से पहले भगवान कृष्ण के साथ बिताया गया उनका समय कैसा था। उनका कहना था कि वह कृष्ण से मिली थीं और कृष्ण चाहते थे कि वह अपने पूर्वजन्म की घटना सबको बताएं इसलिए शांति देवी को हर घटना याद है। बहुत से लोगों ने प्रयास किया लेकिन कोई भी शांति देवी को झूठा साबित नहीं कर पाया।
sabhar :http://www.speakingtree.in/
शांति देवी को ना सिर्फ अपना पूर्वजन्म याद था बल्कि उन्हें यह भी याद था कि मृत्यु के बाद और जन्म से पहले भगवान कृष्ण के साथ बिताया गया उनका समय कैसा था। उनका कहना था कि वह कृष्ण से मिली थीं और कृष्ण चाहते थे कि वह अपने पूर्वजन्म की घटना सबको बताएं इसलिए शांति देवी को हर घटना याद है। बहुत से लोगों ने प्रयास किया लेकिन कोई भी शांति देवी को झूठा साबित नहीं कर पाया।
sabhar :http://www.speakingtree.in/
अद्भुत स्मरणशक्ति
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फ़रवरी 02, 2021 in
;हमें अपने जीवन और आसपास हुई कुछ अहम घटनाओं के अलावा शायद ही कोई बीती बात याद रहती है, लेकिन क्वींसलैंड की रबेका के पास अद्भुत स्मरणशक्ति;है. उनके मुताबिक, 12 दिन की उम्र से लेकर अब तक की हर दिन की बात याद है. यहां तक कि उन्होंने किस दिन क्या पहना था और उस दिन का मौसम कैसा था तक बता देती हैं.रबेका बताती हैं कि उनके जन्म के 12वें दिन उनके माता-पिता ने उन्हें ड्राइविंग सीट पर रखा था और उनकी तस्वीर ली थी. रबेका को अपना पहला जन्मदिन भी याद है. उन्होंने बताया कि वह जन्मदिन पर रोने लगी थीं, क्योंकि उनकी ड्रेस उन्हें असहज लग रही थी.डेली मेल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, रबेका के पास हाइली सुपीरियर ऑटोबायॉग्रफिकल मेमोरी (एचएसएएम) है. ऐसी स्मरणशक्ति वाले लोगों के पास असाधारण यादें संजोकर रखने की क्षमता होती है. बताया जा रहा है कि दुनियाभर में सिर्फ 80 लोगों के पास ऐसी स्मरणशक्ति है. रबेका को हैरी पॉटर बुक का एक-एक शब्द याद है. उनकी अपने जीवन से जुड़ी सबसे पहली बात जो याद है वह उनका जन्म है. उन्हें याद कि उनके पहले जन्मदिन पर उन्हें क्या गिफ्ट मिला था. उन्होंने ये सारी बातें अपने ब्लॉग पर लिखी हैं.
रविवार, 31 जनवरी 2021
भारतीय कृषि की अर्थब्यवस्था में योगदान
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जनवरी 31, 2021 in अर्थव्यवस्था् में योगदान, भारतीय कृषि की
भारतीय कृषि भारतीय कृषि में लगभग 70% से अधिक जनसंख्या अपनी आजीविका के लिए प्रत्यक्ष रूप से कृषि पर निर्भर है भारत की भारत की अर्थव्यवस्था का आधार है इसका सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 14% योगदान है यह देश के लिए खाद्य सामग्री सुनिश्चित करती है और उद्योगों के लिए कच्चा माल पैदा करती है कृषि विकास किस लिए हमारी संपूर्ण खुशहाली की पहली शर्त है एग्रीकल्चर लेकिन भाषा के 2 शब्दों एग्रोस तथा कल्चर से बना है एग्रोस का अर्थ है भूमि और कल्चर का अर्थ है जुताई अर्थात कृषि का अर्थ है भूमि की जुताई कृषि के अंतर्गत पशुपालन मत्स्य अन्य विषय भी आते हैं वर्ष में एक बार बो गई भूमि को शुद्ध बोया क्षेत्र कहते हैं शुद्ध बोये गए क्षेत्र तथा 1 बार से अधिक बोये गए क्षेत्र को कुल मिलाकर कुल बोया गया क्षेत्र कहते हैं भारत में शुद्ध बोया गया क्षेत्र लगभग 17 करोड हेक्टेयर है कुल भौगोलिक क्षेत्र का 52% है पौधों से परिष्कृत उत्पाद तक की रूपांतरण में तीन प्रकार की आर्थिक क्रियाएं सम्मिलित हैं प्रथम द्वितीय तृतीय प्रथम प्राथमिक क्रियाओं के अंतर्गत कौन सभी क्रियाओं को शामिल किया जाता है जिनका संबंध पर आर्थिक प्राकृतिक संसाधन के उत्पादन निष्कर्षण से एक कृषि मत्स्य अच्छे उदाहरण है बुटीक इन संसाधनों के प्रसंस्करण से संबंधित है इस्पात निर्माण डबल रोटी पकाना कपड़ा बोलना तृतीय कन्या प्राथमिक उद्योग क्षेत्र को सेवा द्वारा सहयोग प्रदान करती हैं यातायात व्यापार बैंकिंग बीमा विज्ञापन प्रतिक्रियाओं के उदाहरण है इस प्रकार कृषि कृषि प्राथमिक क्रियाओं के अंतर्गत आता है ऐसी दो प्रकार से की जाती है हाथ निर्वाह कृषि इस प्रकार की कृषि कृषक परिवार की आवश्यकता को पूरा करने के लिए की जाती है पारंपरिक रूप से कम उपज प्राप्त करने के लिए निम्न स्तरीय प्रौद्योगिकी पारिवारिक श्रम का उपयोग किया जाता है निर्वाह कृषि को पुनः निर्वाह कृषि आदि निर्वाह कृषि में वर्गीकृत किया जा सकता है गहन निर्वाह कृषि कृषि में किसान एक छोटे भूखंड प्रसाधन औजार आदिम श्रम से खेती करता है अधिक धूप वाले दिनों में उपायुक्त जलवायु एवं उर्वरक मृदा वाले खेत में 1 वर्ष में 1 से अधिक फसलें उगाई जा सकती हैं चावल मुख्य फसल होती है गहन निर्माण कृषि दक्षिणी दक्षिणी पूर्वी पूर्वी एशिया के सघन जनसंख्या वाले मानसूनी प्रदेशों में प्रचलित है स्थानांतरण शामिल है स्थानांतरित कृषि में सबसे पहले भूमि वन भूमि से पेड़ों को काटकर तरह तन्हा शाखाओं को जलाकर साफ किया जाता है जब उनका टुकड़ा साफ हो जाता है तो उसमें दो या 3 सालों तक फसलें उगाई जाती हैं भूमि की उर्वरा शक्ति के घटने पर भूमि के कुछ टुकड़े को छोड़ दिया जाता है और किसान नए भूखंड पर चला जाता है भारत में स्थानांतरित कृषि पूर्वोत्तर राज्य में की जाती है जैविक कृषि में रासायनिक खादों के स्थान पर जैविक खाद और प्राकृतिक पीड़कनाशी का प्रयोग किया जाता है मक्का को कारण के नाम से भी जाना जाता है विश्व में इसकी रंग बिरंगी प्रजातियां पाई जाती हैं संयुक्त राज्य अमेरिका में जन्मे प्रेशर नार्मल और नेवला को हरित क्रांति का पिता कहा जाता है भारत में हरित क्रांति का श्रेय डॉक्टर एम एस स्वामीनाथन को जाता है भारत में हरित क्रांति की शुरुआत 9768 क्रांति के जनक भारत विश्व में फलों और सब्जियों का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है या आम केला भारत विश्व में फलों और सब्जियों का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है या आम केला नारियल भारत विश्व में फलों और सब्जियों का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है या आम केला नारियल काजू पपीता और भारत विश्व में फलों और सब्जियों का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है या आम केला नारियल काजू पपीता और अनार का सबसे बड़ा उत्पादक है और मसालों का सबसे बड़ा उत्पादक और निर्यातक देश है भारत का दूध उत्पादन मेंं विश्व्व में भारत का मछली उत्पादन मेंं विश्व इस प्रकार भारतीय कृषि देश की अर्थव्यवस्था् में योगदान देती है
मौसम टाइम मशीन का निर्माण
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जनवरी 31, 2021 in
अभी तक मौसम विज्ञानियों को मौसम से संबंधित ऐतिहासिक डेटा नहीं मिल पाता था जिसकी वजह से वह सटीक तौर पर मौसम की भविष्यवाणी नहीं कर पाते थे मौसम वैज्ञानिकों ने ऐसे सॉफ्टवेयर प्रोग्राम का विकास किया है जिससे मौसम पर शोध करने वाले वैज्ञानिकों को पूरे विश्व का ऐतिहासिक मौसम डाटा मिल जाएगा इस सॉफ्टवेयर में महासागरों को भी शामिल किया गया है
शनिवार, 30 जनवरी 2021
हड़प्पा सभ्यता ऋतु परिवर्तन से नष्ट हुई
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जनवरी 30, 2021 in ऋतु, परिवर्तन से नष्ट हुई, हड़प्पा सभ्यता
सिंधु घाटी सभ्यता अथवा हड़प्पा सभ्यता विश्व की प्राचीन सभ्यताओं में से एक है यह विश्व की पहली शहरी सभ्यता थी जो भारतीय महाद्वीप में फली फूली सिंधु सभ्यता का चरम काल लगभग 26 ईसवी पूर्व से उन्नीस सौ ईसवी पूर्व के बीच में था इस सभ्यता के विकसित शहरों की मिसाल आज तक दी जाती है आज भी लोगों के लिए यह रहस्य है कि ऐसी फलती फूलती सभ्यता किसी समय अचानक समाप्त कैसे हो गई थी काफी समय से एक सिद्धांत या प्रस्तुत किया जाता है कि उत्तर-पश्चिम से हुए आर्यों के आक्रमण की वजह से उच्च विकसित सभ्यता नष्ट हो गई थी हालांकि इस सिद्धांत के पक्ष में कोई ठोस प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया जा सका था अब वैज्ञानिकों और पुरातत्व नेताओं ने इसका वास्तविक कारण ऋतु परिवर्तन को बताया है कैंब्रिज यूनिवर्सिटी और बनारस यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए शोध से पता चला है कि सिंधु घाटी क्षेत्र में लगभग 200 वर्ष तक सूखे के प्रकोप की श्रृंखला खेली जिसकी वजह से यह सभ्यता नष्ट हो गई यह बताता है कि 4100 वर्ष पूर्व उत्तर पश्चिम भारत अचानक कमजोर पड़े कृष्ण मानसून से प्रभावित हुआ था जिससे इस क्षेत्र में मरुस्थल जैसी स्थिति बन गई थी पुरातत्व व्यक्तियों ने को इस बात की भी प्रमाण मिले हैं कि लगभग इसी कालखंड के दौरान जो गलियां पहले साफ-सुथरी रहती थी वह गंदगी से भरने लगी थी उनकी हस्तकला की खुशियां धीरे-धीरे घटने लगी थी उनकी लिपि भी लुप्त होने लगी थी उस सीमा तक जनसांख्यिकीय स्थानांतरण भी हुआ इसी दौरान सिंध घाटी के बड़े शहर जिनकी जनसंख्या 100000 तक की तेजी से घटी संख्या घटने के साथ-साथ उनकी सभ्यता नष्ट हो गई
शुक्रवार, 29 जनवरी 2021
घेरता बचपन में बुढ़ापा प्रोजेरिया
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जनवरी 29, 2021 in घेरता, बचपन. में बुढ़ापा प्रोजेरिया
फिल्म पा में जब लोगों ने अमिताभ बच्चन की को प्रोजेरिया नामक बीमारी से पीड़ित बच्चे की भूमिका निभाते देखा तो कई लोगों को यकीन भी नहीं हुआ ऐसी भी कोई बीमारी होती है हमें से शायद ही किसी ने इस बीमारी का नाम सुनाओ भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में शायद कुछ लोग ही इस बीमारी के बारे में जानते होंगे दरअसल यह बीमारी सामान्य नहीं है इसलिए लोग इसकी जानकारी से अनजान है प्रोजेरिया के बारे में सबसे पहले जानकारी 1886 में जो नाथन ने दी थी इसके बाद 18 97 में हिस्ट्री गिलफोर्ड ने इसके बारे में बताया था इसलिए इस बीमारी को हर्ट चिंसन गिलफोर्ड सिंड्रोम भी कहा गया है आज भी देश विदेश में पुरस्कृत वैज्ञानिक किस बीमारी की जड़ का पता लगाने की कोशिश में जुटे हैं वैज्ञानिकों का मानना है कि इस बीमारी के बारे में पता चलने के बाद यह साफ हो जाएगा कि मनुष्य मनुष्य के बूढ़े होने की प्रक्रिया क्या है प्रोजेरिया सामान्य बीमारी की श्रेणी में नहीं आती 40 से 45 लाख बच्चों में से यह बीमारी किसी एक में पाई जाती है अब तक प्रोजेरिया से ग्रसित बच्चों की संख्या 45 से 40 से ज्यादा नहीं है गौर मतलब बिहार में एक ही परिवार के 5 बच्चों में यह बीमारी पाई गई थी इसमें से 3 बच्चों की मृत्यु हो चुकी है प्रोजेरिया नामक बीमारी से ग्रसित बच्चे की उम्र महज महज 17 से 21 वर्ष की होती है यह बीमारी बच्चों के जीवन काल को काफी कम कर देती है प्रोजेरिया से पीड़ित बच्चा 2 वर्ष की उम्र से ही बुरा दिखने लगता है इसकी उम्र 3 गुना रफ्तार से बढ़ने लगती है सिर्फ 13 वर्ष की उम्र में वह पूरी तरह बूढ़ा हो जाता है पीड़ित बच्चों के सिर के सारे बाल झड़ जाए उसके सिर का आकार काफी बड़ा हो जाता है नरसिंह भरकर साफ दिखने लगती हैं और शरीर की बिलकुल रुक जाती है बच्चा बिल्कुल दूसरे ग्रह के प्राणी जैसा दिखने लगता है दरअसल यह बीमारी जींस और कोशिकाओं में बदलाव के कारण पैदा होने लगती है बहुत शोधों के बाद इस बीमारी के बारे में कुछ पता नहीं चल पाया है इस बीमारी के बारे में लोगों में जागरूकता लाना बेहद जरूरी है ऐसे बच्चे नफरत से नहीं बल्कि तैयार के हकदार है ताकि इस बीमारी से लड़ने की हिम्मत मिल सके
अनुमानित समय से भी एक करोड़ वर्ष पहले थे डायनासोर
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जनवरी 29, 2021 in अनुमानित, डायनासोर, समय से भी एक करोड़ वर्ष पहले थे
एक नए शोध के अनुसार डायनासोरों के बारे में जितना माना जाता रहा है डायनासोर उससे भी एक करोड़ वर्ष पहले धरती पर अस्तित्व में थे द नेचर की रिपोर्ट के अनुसार एक अंतरराष्ट्रीय दल ने यह परिणाम तंजानिया में जीवाश्मों के अध्ययन के बाद दी है जीवाश्म विज्ञानियों के मुताबिक डायनासोर और उनके करीबी संबंधी जैसे उससे टीरो सार्स भी पहले अस्तित्व में थे जितना अब तक माना जाता रहा है शोध में बताया गया है कि अब तक माना जाता था कि डायनासोर केवल 23 करोड़ वर्ष पुराने थे लेकिन अब उनके पुराने करीबी सहयोगियों साहिलेसारस के लगभग 1करोड़ वर्ष और पुराने होने की पुष्टि हुई है शोध में यह भी कहा गया है कि धीरे-धीरे सालेसारस के साथ ही डायनासोर की उत्पत्ति हो गई शोधकर्ताओं को दक्षिण तंजानिया से लगभग 14 जीवाश्म हड्डियां मिली है जिन पर शोध किया गया है
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