शनिवार, 19 अप्रैल 2014
भारत के 6 अनसुलझे रहस्य...रात को इस मंदिर में रुकने वाले जीवित नहीं बचते !
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भोपाल। भारत यूं तो विविधताओं का देश है, लेकिन इस धरा पर भी कई ऐसी जगह हैं, जो आश्चर्यचकित करने के साथ-साथ डराती भी हैं। इन जगहों में छिपे रहस्यों का अभी तक खुलासा नहीं हो सका है। रहस्य भी ऐसे, जिस पर एकबारगी विश्वास करना मुश्किल होता है। इनमें कई स्थान ऐसे हैं जो विज्ञान को भी चुनौती देते हैं।
पौराणिक मान्यताएं हों या प्रकृति के अनूठी रचना, इन स्थानों को देश के रहस्यमयी इलाकों में गिना जाता है। समय-समय पर इनकी चर्चाएं भी होती हैं, लेकिन आखिरकार नतीजा कुछ नहीं निकल पाता। वास्तविक सच अनसुलझा ही रहता है। आइए जाने कुछ ऐसी ही जगहों के बारे में-
तिब्बत का यमद्वार- जहां रात में रुकने वाला नहीं मिलता जिंदा
चीन के स्वायत्त क्षेत्र तिब्बत में दारचेन से 30 मिनट की दूरी पर है यह यम का द्वार। ये पवित्र कैलाश पर्वत के रास्ते में पड़ता है। हिंदू मान्यता अनुसार, इसे मृत्यु के देवता यमराज के घर का प्रवेश द्वार माना जाता है। यह कैलाश पर्वत की परिक्रमा यात्रा के शुरुआती प्वाइंट पर है। तिब्बती लोग इसे चोरटेन कांग नग्यी के नाम से जानते हैं, जिसका मतलब होता है दो पैर वाले स्तूप।
ऐसा कहा जाता है कि यहां रात में रुकने वाला जीवित नहीं रह पाता। ऐसी कई घटनाएं हो भी चुकी हैं, लेकिन इसके पीछे के कारणों का खुलासा आज तक नहीं हो पाया है। साथ ही यह मंदिर नुमा द्वार किसने और कब बनाया, इसका कोई प्रमाण नहीं है। ढेरों शोध हुए, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकल सका।
अंधेरा होते ही खुद-ब-खुद बंद हो जाता है यह मंदिर-
वृंदावन का यह मंदिर अपने आप में आज भी रहस्य समेटे हुए हैं। मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण एवं श्रीराधा आज भी आधी रात के बाद रास रचाते हैं। रास के बाद निधिवन परिसर में स्थापित रंग महल में शयन करते हैं। रंग महल में आज भी प्रसाद के तौर पर माखन मिश्री रोजाना रखा जाता है। सोने के लिए पलंग भी लगाया जाता है। सुबह जब आप इन बिस्तरों को देखें, तो साफ पता चलेगा कि रात में यहां जरूर कोई सोया है और प्रसाद भी ग्रहण कर चुका है। इतना ही नहीं, अंधेरा होते ही इस मंदिर के दरवाजे अपने आप बंद हो जाते हैं। इसलिए मंदिर के पुजारी अंधेरा होने से पहले ही मंदिर में पलंग और प्रसाद की व्यवस्था कर देते हैं।
मान्यता के अनुसार, यहां रात के समय कोई नहीं रहता है, इंसान छोड़िए, पशु-पक्षी भी नहीं। ऐसा बरसों से लोग देखते आए हैं, लेकिन रहस्य के पीछे का सच धार्मिक मान्यताओं के सामने छुप-सा गया है। यहां के लोगों का मानना है कि अगर कोई व्यक्ति इस परिसर में रात में रुक जाता है, तो वह तमाम सासारिक बंधनों से मुक्त होकर मृत्यु को प्राप्त हो जाता है।
क्या अब भी जिंदा भटक रहे हैं अश्वत्थामा-
महाभारत के अश्वत्थामा याद हैं आपको। कहा जाता है कि अश्वत्थामा का वजूद आज भी है। दरअसल, पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, अपने पिता की मृत्यु का बदला लेने निकले अश्वत्थामा को उनकी एक चूक भारी पड़ी और भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें युगों-युगों तक भटकने का श्राप दे दिया। ऐसा कहा जाता है कि पिछले लगभग पांच हजार वर्षों से अश्वत्थामा भटक रहे हैं।
मध्यप्रदेश के बुरहानपुर शहर से 20 किमी दूर असीरगढ़ का किला है। कहा जाता है कि इस किले में स्थित शिव मंदिर में अश्वत्थामा आज भी पूजा करने आते हैं। स्थानीय निवासी अश्वत्थामा से जुड़ी कई कहानियां सुनाते हैं। वे बताते हैं कि अश्वत्थामा को जिसने भी देखा, उसकी मानसिक स्थिति हमेशा के लिए खराब हो गई। इसके अलावा कहा जाता है कि अश्वत्थामा पूजा से पहले किले में स्थित तालाब में नहाते भी हैं।
बुरहानपुर के अलावा मप्र के ही जबलपुर शहर के गौरीघाट (नर्मदा नदी) के किनारे भी अश्वत्थामा के भटकने का उल्लेख मिलता है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, कभी-कभी वे अपने मस्तक के घाव से बहते खून को रोकने के लिए हल्दी और तेल की मांग भी करते हैं। इस संबंध में हालांकि स्पष्ट और प्रमाणिक आज तक कुछ भी नहीं मिला है।
समुद्र के नीचे श्रीकृष्ण की नगरी द्वारिका-
गुजरात के तट पर भगवान श्रीकृष्ण की बसाई हुई नगरी यानी द्वारिका। इस जगह का धार्मिक महत्व तो है ही, रहस्य भी कम नहीं है। कहा जाता है कि कृष्ण की मृत्यु के साथ उनकी बसाई हुई यह नगरी समुद्र में डूब गई। आज भी यहां उस नगरी के अवशेष मौजूद हैं। लेकिन प्रमाण आज तक नहीं मिल सका कि यह क्या है। विज्ञान इसे महाभारतकालीन निर्माण नहीं मानता।
काफी समय से जाने-माने शोधकर्ताओं ने यहां पुराणों में वर्णित द्वारिका के रहस्य का पता लगाने का प्रयास किया, लेकिन वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित कोई भी अध्ययन कार्य अभी तक पूरा नहीं किया गया है। 2005 में द्वारिका के रहस्यों से पर्दा उठाने के लिए अभियान शुरू किया गया था। इस अभियान में भारतीय नौसेना ने भी मदद की।अभियान के दौरान समुद्र की गहराई में कटे-छटे पत्थर मिले और यहां से लगभग 200 अन्य नमूने भी एकत्र किए, लेकिन आज तक यह तय नहीं हो पाया कि यह वही नगरी है अथवा नहीं जिसे भगवान श्रीकृष्ण ने बसाया था। आज भी यहां वैज्ञानिक स्कूबा डायविंग के जरिए समंदर की गहराइयों में कैद इस रहस्य को सुलझाने में लगे हैं।
बंगाल में भूतों की रहस्यमयी रोशनी-
प.बंगाल के दलदली इलाकों में कई बार रहस्यमयी रोशनी देखे जाने की जानकारी मिली थी। स्थानीय लोगों के मुताबिक, यह उन मछुआरों की आत्माएं हैं, जो मछली पकड़ते वक्त किसी वजह से मर गए थे। लोग इन्हें भूतों की रोशनी भी कहते हैं। ऐसा भी कहा जाता है कि जिन मछुआरों को यह रोशनी दिखती है, वे या तो रास्ता भटक जाते हैं या ज्यादा दिन जिंदा नहीं रह पाते। इन दलदली क्षेत्रों से कई मछुआरों की लाशें भी मिली हैं, लेकिन स्थानीय प्रशासन यह मानने को तैयार नहीं कि यह भूतों के चलते ऐसा हुआ। उनके मुताबिक, मछुआरों के साथ अक्सर ऐसी दुर्घटनाएं होती रहती हैं। हालांकि अभी तक इस रहस्य से भरी गुत्थी सुलझ नहीं पाई है।
वैज्ञानिकों को अंदेशा है कि दलदली क्षेत्रों में अक्सर मीथेन गैस बनती है और वे किसी तत्व के संपर्क में आने से रोशनी पैदा करती हैं।
लेह-लद्दाख का मैग्नेटिक हिल-
लेह-लद्दाख के क्षेत्र में स्थित इस जगह को 'ग्रैविटी हिल' भी कहा जाता है। लेह-कारगिल, श्रीनगर नेशनल हाईवे पर स्थित यह जगह लेह से 50 किमी दूर है और समुद्र तल से 11 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित है। मैग्नेटिक हिल लेह आने वाले पर्यटकों के बीच काफी मशहूर है। इस पहाड़ी की खासियत है कि यहां से गुजरने वाली हर कार खुद-ब-खुद रास्ते पर जमी रहती है। सामान्य भाषा में कहें, तो आमतौर पर पहाड़ी रास्तों में हम गाड़ी गियर में खड़ी करते है, लेकिन यहां अगर आप अपनी गाड़ी न्यूट्रल में भी खड़ा कर दें, तो भी गाड़ी घाटी से नीचे नहीं फिसलेगी।
हालांकि यह लोगों का भ्रम है कि पहाड़ी के ऊपर गाड़ियां घूमने लगती हैं, लेकिन वैज्ञानिक रूप से इसके पीछे जो कारण छिपा है, उसके मुताबिक, यह विशुद्ध रूप से 'ऑप्टिकल इफेक्ट' के चलते होता है, जो पहाड़ी की वास्तविक और विशिष्ट बनावट के चलते उत्पन्न होता है। sabhar :http://www.bhaskar.com/
मंगलवार, 15 अप्रैल 2014
रोबोटों की दुनिया
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अप्रैल 15, 2014 in रोबोटों की दुनिया
जर्मनी के हनोवर शहर में जारी उद्योग मेले में दिखाए गए रोबोट कारोबारियों के लिए ही नहीं आम दर्शकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं. देखिए एक झलक.

कुचालें भरता कंगारू
कंगारू ऊर्जा के कुशल उपयोग का रोल मॉडल हैं. फेस्टो नामकी कंपनी ने कंगारू के जैसा दिखने वाला और उसी की तरह छलांगें लगाने वाला एक रोबोट बनाया है जो हाथ के इशारे पर कूदता या रुकता है.

टूर गाइड 'फ्रॉग'
ट्विनी यूनिवर्सिटी ने 'फ्रॉग' नामका एक ऐसा रोबोट तैयार किया है जो अपनी मनमोहक बातों, तस्वीरों और वीडियो से पर्यटकों को अपने साथ बांधे रखता है. इसे परखने के लिए इसका इस्तेमाल कुछ चिड़ियाघरों में किया जा चुका है.
ट्व
कुचालें भरता कंगारू
कंगारू ऊर्जा के कुशल उपयोग का रोल मॉडल हैं. फेस्टो नामकी कंपनी ने कंगारू के जैसा दिखने वाला और उसी की तरह छलांगें लगाने वाला एक रोबोट बनाया है जो हाथ के इशारे पर कूदता या रुकता है.
टूर गाइड 'फ्रॉग'
ट्विनी यूनिवर्सिटी ने 'फ्रॉग' नामका एक ऐसा रोबोट तैयार किया है जो अपनी मनमोहक बातों, तस्वीरों और वीडियो से पर्यटकों को अपने साथ बांधे रखता है. इसे परखने के लिए इसका इस्तेमाल कुछ चिड़ियाघरों में किया जा चुका है.
टूर गाटूर गाइड 'फ्रॉग'
ट्व
ये हैं रोबो 'रोडरनर'
इस 12 पैरों वाले चलते फिरते और दोड़ते रोबोट को बनाया है ब्रेमेन यूनिवर्सिटी के रिसर्चरों ने. केकड़ों, कीड़ों और मकड़ियों जैसे जीवों से प्रेरणा लेकर इस रोबोट को चलाने का तरीका विकसित किया गया
ड्यूटी भी निभाते हैं
हॉलैंड में बनी यह खास उड़ने वाली रोबोटिक चिड़िया हवाई अड्डों पर एक खास भूमिका निभाती है. अपनी खतरनाक शक्ल से यह बाकी पक्षियों को डराती है जिससे वे एयरक्राफ्ट के टरबाइन में फंसने से बच जाते हैं और हवाई अड्डों का खर्च भी बचता है.
मुश्किल काम चुटकियों में
कहीं तार लगाना हो या कनेक्शन जोड़ना हो, आपको सिर्फ आदेश देना है और बड़ी बड़ी फैक्ट्रियों में भी रोबोट सही जगह जाकर काम को तुरंत अंजाम दे पाते हैं. इससे उत्पादन की प्रक्रिया तो तेज होनी ही है.
हाथी सूंड जैसा रोबोआर्म
फेस्टो कंपनी का बनाया रोबोटिक हाथ, हाथी की सूंड से प्रेरित है. ऐसा हाथ जो चीजों को बड़ी ही मजबूती से पकड़ता है और उतनी ही खूबी से एक जगह से दूसरी जगह तक पहुंचाता भी है.
तेज और किफायती
बड़ी बड़ी कार फैक्ट्रियों में तेज काम करने के साथ साथ पर्यावरण को नुकसान ना पहुंचाने वाले तरीके अपनाए जा रहे हैं. रोबोटों के इस्तेमाल से इन चीजों के साथ साथ, खर्च भी कम आ रहा है. sabhar :http://www.dw.de/
ड्यूटी भी निभाते हैं
हॉलैंड में बनी यह खास उड़ने वाली रोबोटिक चिड़िया हवाई अड्डों पर एक खास भूमिका निभाती है. अपनी खतरनाक शक्ल
से यह बाकी पक्षियों को डराती है जिससे वे एयरक्राफ्ट के टरबाइन में फंसने से बच जाते हैं और हवाई अड्डों का खर्च भी बचता है.
ये हैं रोबो 'रोडरनर'
इस 12 पैरों वाले चलते फिरते और दोड़ते रोबोट को बनाया है ब्रेमेन यूनिवर्सिटी के रिसर्चरों ने. केकड़ों, कीड़ों और मकड़ियों जैसे जीवों से प्रेरणा लेकर इस रोबोट को चलाने का तरीका विकसित किया गया
वर्सिटी ने
'फ्रॉग' नामका एक ऐसा रोबोट तैयार किया है जो अपनी मनमोहक बातों,टूर गाइड 'फ्रॉग'
ट्विनी यूनिवर्सिटी ने 'फ्रॉग' नामका एक ऐसा रोबोट तैयार किया है जो अपनी मनमोहक बातों, तस्वीरों और वीडियो से पर्यटकों को अपने साथ बांधे रखता है. इसे परखने के लिए इसका इस्तेमाल कुछ चिड़ियाघरों में किया जा चुका है. तस्वीरों और वीडियो से पर्यटकों को अपने साथ बांधे रखता है. इसे परखने के लिए इसका इस्तेमाल कुछ चिड़ियाघरों में किया जा चुका है.इड 'फ्रॉग'
ट्विनी यूनिवर्सिटी ने 'फ्रॉग' नामका एक ऐसा रोबोट तैयार किया है जो अपनी मनमोहक बातों, तस्वीरों और वीडियो से पर्यटकों को अपने साथ बांधे रखता है. इसे परखने के लिए इसका इस्तेमाल कुछ चिड़ियाघरों में किया जा चुका है.
सूरत को 'स्मार्ट सिटी' बनाएगी माइक्रोसॉफ्ट
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अप्रैल 15, 2014 in सूरत को 'स्मार्ट सिटी' बनाएगी माइक्रोसॉफ्ट

सूरत। दुनिया की दिग्गज सॉफ्टवेयर कंपनी माइक्रोसॉफ्ट कॉरपोरेशन ने भारत में पहली 'स्मार्ट सिटी' बनाने के लिए सूरत शहर को चुना है। कंपनी ने 'सिटी नेक्स्ट'़ पहल पिछले साल लांच की थी। सिटी नेक्स्ट पहल के तहत माइक्रोसॉफ्ट क्लाउड टेक्नोलॉजी, मोबाइल एप्लीकेशन, डाटा ऐनालिटिक्स और सोशल नेटवर्क को एक साथ मिलाकर नागरिक सेवाओं को रियल टाइम में डाटा उपलब्ध कराना चाहती है।
सिस्टम को इस तरह विकसित किया जाएगा कि सूचना प्रौद्योगिकी की मदद से प्राकृतिक आपदा के दौरान हालात अच्छे से संभालने का काम कर सके। सूरत नगर निगम के उपायुक्त सीवाय भट्ट ने इसका उदाहरण देते हुए बताया कि अगर किसी को शहर में डॉक्टर का पता लगाना हो तो, वह आसानी से माइक्रोसॉफ्ट द्वारा बनाए गए मोबाइल एप की मदद से यह जानकारी जुटा सकेगा। यह प्रोजेक्ट मई के अंत तक शुरू होगा।
विज्ञान केंद्र में आभासी दुनिया बनाने में भी माइक्रोसॉफ्ट सूरत नगर पालिका की मदद करेगा। इसमें एक आभासी दीवार भी बनाई जाएगी। नगर निगम के आयुक्त मनोज दास का कहना है कि यह प्रोजेक्ट सूरत को देश की पहली स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने के लिए तैयार किया जाएगा। दास का कहना है कि नगर निकाय आभासी दुनिया और असली दुनिया के बीच सभी पहलुओं को जोड़ने की योजना बना रहा है।
आसान हो जाएंगे काम
माइक्रोसॉफ्ट की टीम सूरत नगर निगम के सभी विभागों में ई-गवर्नेस की स्थिति देखने आ चुकी है, ताकि इस प्रोजेक्ट को ज्यादा उपयोगी बनाया जा सके। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में टाउन प्लानिंग डिपार्टमेंट का काम और भी आसान हो जाएगा। फिलहाल डेवलपर टीपी डिपार्टमेंट में लगातार आ रहे हैं, ताकि उनका प्लान जल्द मंजूर हो जाए। योजना के डायरेक्टर जीवन पटेल का कहना है कि जब तक नया एप बनता है, एक वास्तुकार ऑनलाइन योजना पेश कर सकता है और प्रगति पर नजर रख सकता है। इससे दोनों तरफ से समय, पैसे और ऊर्जा की बचत होगी। sabhar :http://www.jagran.com/
मच्छरों को मारेंगे, वाईफाई से चलेंगे ये स्मार्ट एसी
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अप्रैल 15, 2014 in मच्छरों को मारेंगे, वाईफाई से चलेंगे ये स्मार्ट एसी

नई दिल्ली। इन दिनों बाजार इनोवेटिव और हाईटेक एसी से पट गया है। गर्मियों के सीजन का फायदा उठाने के लिए कंपनियों ने एसी के आकर्षक मॉडल उतारे हैं।
वोल्टास, सैमसंग, एलजी और हायर समेत करीब-करीब सभी बड़ी कंपनियों ने स्मार्ट एसी की नई रेंज उतारी है। वोल्टास ने 68 नए मॉडल उतारे हैं। क्लासिक, डीलक्स, ऐलिगेंट, लग्जरी और प्रीमिया की ये खास सीरीज 16,000 से लेकर 45,000 रपए तक की है।
सैमसंग ने डिजिटल इंवर्टर एयरकंडीशनर, वायरस डॉक्टर और ईजी फिल्टर जैसी टेक्नोलॉजी वाली एसी उतारी है। कंपनी का दावा है कि ये एसी में हवा में फैली धूल-मिट्टी को साफ कर देती हैं। कंपनी के मुताबिक, 100 फीसद शुद्ध हवा मिलती है।
ज्यादा कूलिंग, मच्छरों से मुक्ति
सैमसंग के मुताबिक डिजिटल इंवर्टर एसी दूसरे एसी के मुकाबले 26 फीसद ज्यादा कूलिंग करेगी। कंपनी की नॉर्मल स्प्लीट के मुकाबले डिजिटल इंवर्टर एसी की कीमत करीब 12,000 रपए ज्यादा है। इस मुकाबले एलजी ने मॉस्क्यूटो अवे यानी ठंडी हवा के साथ-साथ मच्छरों से छुटकारा दिलाने वाले एयरकंडीशनर पेश किए हैं।
वाई-फाई सुविधा
हायर ने आई कूल विद वाई--फाई फैसिलिटी पेश की है। इसके जरिए एंड्राइड फोन से किसी भी जगह से कमरे की एसी चलाई जा सकती है। इसमें नैनो टेक्नोलॉजी है, जिससे त्वचा को पर्याप्त मात्रा में नमी मिलेगी। इसकी कीमत 45,000 रपए से 60,000 रपए के बीच है। कंपनियों ने उम्मीद जताई है कि नई लांच के सहारे वे इस गर्मी में पिछले साल के मुकाबले 15 प्रतिशत ज्यादा बिक्री कर पाएंगी।
sabhar :http://www.jagran.com/
झुर्रियां दूर भगाना चाहते हैं आपके लिए खुशखबरी है
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अप्रैल 15, 2014 in झुर्रियां दूर भगाना चाहते हैं आपके लिए खुशखबरी है

झुर्रियां दूर भगाना चाहते हैं और लंबे समय तरह जवां दिखना चाहते हैं तो आपके लिए खुशखबरी है।
स्किन फार्माकोलॉजी एंड फीजियोलॉजी जर्नल में प्रकाशित दो नए शोधों में नए किस्म के कोलॉजन प्रोटीन सप्लीमेंट की खोज की गई है जिसके सेवन से झुर्रियों को घटाया जा सकता है।शोधकर्ताओं का दावा है कि इस प्रोटीन युक्त सप्लीमेंट के सेवन से झुर्रियों को महन आठ सप्ताह में 20 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है।शोध के दौरान 200 महिलाओं को वेरिजोल नामक कोलाजन सप्लीमेंट की डोज दी गई। पाया गया कि 45 से 65 वर्ष की 114 महिलाओं के चेहरे पर आठ सप्ताह से भीतर झुर्रियां 20 प्रतिशत तक कम हुईं और कुछ महिलाओं की आंखों के नीचे स्थित झुर्रियां 50 प्रतिशत तक कम हुई हैं।
झुर्रियां दूर भगाना चाहते हैं और लंबे समय तरह जवां दिखना चाहते हैं तो आपके लिए खुशखबरी है।
स्किन फार्माकोलॉजी एंड फीजियोलॉजी जर्नल में प्रकाशित दो नए शोधों में नए किस्म के कोलॉजन प्रोटीन सप्लीमेंट की खोज की गई है जिसके सेवन से झुर्रियों को घटाया जा सकता है।शोधकर्ताओं का दावा है कि इस प्रोटीन युक्त सप्लीमेंट के सेवन से झुर्रियों को महन आठ सप्ताह में 20 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है।शोध के दौरान 200 महिलाओं को वेरिजोल नामक कोलाजन सप्लीमेंट की डोज दी गई। पाया गया कि 45 से 65 वर्ष की 114 महिलाओं के चेहरे पर आठ सप्ताह से भीतर झुर्रियां 20 प्रतिशत तक कम हुईं और कुछ महिलाओं की आंखों के नीचे स्थित झुर्रियां 50 प्रतिशत तक कम हुई हैं।
शोधकर्ताओं का मानना है कि कोलाजन पेप्टाइड नामक शरीर में तेजी से प्रवेश करता है इसलिए इस सप्लीमेंट का इस्तेमाल कई एंटीरिंकल उत्पादों में इसका इस्तेमाल होता है और इस नई खोज के बाद इसको अधिक प्रभावी बनाना आसान हो सकता है। sabhar :http://www.amarujala.com/
कृत्रिम तरीके से विकसित हो सकेंगे महिलाओं के जननांग
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अप्रैल 15, 2014 in कृत्रिम तरीके से विकसित हो सकेंगे महिलाओं के जननांग

अमरीका में डॉक्टरों ने प्रयोगशाला में स्त्री जननांगों को विकसित कर उसे चार महिलाओं में प्रत्यारोपित किया है।
इन चारों महिलाओं के जननांग माँ के गर्भ में पर्याप्त रूप से विकसित नहीं हो पाए थे। यह एक तरह का शारीरिक विकार होता है जिसमें स्त्री जननांग का विकास जन्म से ही अधूरा रहता है।प्रत्येक महिला के लिए सही आकार का स्त्री जननांग विकसित करने के लिए अच्छी तरह से ऊतकों का मिलान करना ज़रूरी था इसके लिए एक ऊतक के नमूने का इस्तेमाल किया गया।प्रत्यारोपण के बाद सभी महिलाओं में "इच्छा, कामोत्तेजना, गीलापन, संभोग सुख, संतुष्टि" और दर्द रहित संभोग के सामान्य लक्षण देखे गए।
इस उपचार में शल्य चिकित्सा की मदद से तैयार किए गए कटोरे की तरह के छेद का इस्तेमाल किया जाता है जो तो आंत की त्वचा से बना था।स्त्री जननांग प्रत्यारोपण
उत्तरी केरोलिना के वेक फॉरेस्ट बैपटिस्ट मेडिकल सेंटर के डॉक्टरों ने इन चारों महिलाओं के स्त्री जननांग के निर्माण में उत्कृष्ट तकनीक का इस्तेमाल किया। ये चारों महिलाएँ किशोरावस्था की थी।
चिकित्सकीय प्रक्रिया के तहत पेड़ू क्षेत्र का स्कैन किया गया और उसका इस्तेमाल प्रत्येक रोगी के लिए 3 डी परत वाली एक ट्यूब डिजाइन करने के लिए किया गया।
एक छोटा सा ऊतक कम विकसित स्त्री जननांग से लिया गया और प्रयोगशाला में कोशिकाओं को बड़े पैमाने पर विकसित किया गया।
मांसपेशियों की कोशिकाएँ बाहर की तरफ से परत के साथ और अंदर की तरफ से स्त्री जननांग की कोशिकाओं के साथ जुड़ी थीं।
स्त्री जननांगों को एक बायोरिएक्टर में बड़े ही सावधानी से उस समय तक विकसित किया गया जब तक वे शल्य चिकित्सा के माध्यम से प्रत्यारोपित करने के लिए लायक नहीं हो गए।
सभी महिलाओं में यौन क्रियाएँ अब समान्य है।
असामान्यताएँ
स्त्री जननांग के विकास में अवरोध प्रजनन अंगों में अन्य असामान्यताएँ पैदा कर सकते हैं। इनमें से दो महिलाओं में स्त्री जननांग गर्भाशय से जुड़ा था।
गर्भधारण का कोई मामला नहीं था लेकिन उन महिलाओं में यह सैद्धांतिक रूप से संभव है।
वेक फॉरेस्ट बैपटिस्ट मेडिकल सेंटर में निदेशक डॉ. एंथोनी एटाला ने बीबीसी समाचार वेबसाइट को बताया, "वास्तव में हमने पहली बार पूरे अंग को बनाया है यह एक चुनौती थी।"
उन्होंने कहा कि एक क्रियाशील स्त्री जननांग इन महिलाओं के जीवन के लिए एक बहुत महत्वपूर्ण बात है और इससे उनके जीवन में होने वाली तब्दीली देखना "पुरस्कृत होने जैसा" था।
यह पहली दफा है जब प्रत्यारोपण के परिणाम की रिपोर्ट आई है हालांकि, पहला प्रत्यारोपण आठ साल पहले हुआ था। sabhar :http://www.amarujala.com/
अमरीका में डॉक्टरों ने प्रयोगशाला में स्त्री जननांगों को विकसित कर उसे चार महिलाओं में प्रत्यारोपित किया है।
इन चारों महिलाओं के जननांग माँ के गर्भ में पर्याप्त रूप से विकसित नहीं हो पाए थे। यह एक तरह का शारीरिक विकार होता है जिसमें स्त्री जननांग का विकास जन्म से ही अधूरा रहता है।प्रत्येक महिला के लिए सही आकार का स्त्री जननांग विकसित करने के लिए अच्छी तरह से ऊतकों का मिलान करना ज़रूरी था इसके लिए एक ऊतक के नमूने का इस्तेमाल किया गया।प्रत्यारोपण के बाद सभी महिलाओं में "इच्छा, कामोत्तेजना, गीलापन, संभोग सुख, संतुष्टि" और दर्द रहित संभोग के सामान्य लक्षण देखे गए।
इस उपचार में शल्य चिकित्सा की मदद से तैयार किए गए कटोरे की तरह के छेद का इस्तेमाल किया जाता है जो तो आंत की त्वचा से बना था।स्त्री जननांग प्रत्यारोपण
उत्तरी केरोलिना के वेक फॉरेस्ट बैपटिस्ट मेडिकल सेंटर के डॉक्टरों ने इन चारों महिलाओं के स्त्री जननांग के निर्माण में उत्कृष्ट तकनीक का इस्तेमाल किया। ये चारों महिलाएँ किशोरावस्था की थी।
चिकित्सकीय प्रक्रिया के तहत पेड़ू क्षेत्र का स्कैन किया गया और उसका इस्तेमाल प्रत्येक रोगी के लिए 3 डी परत वाली एक ट्यूब डिजाइन करने के लिए किया गया।
एक छोटा सा ऊतक कम विकसित स्त्री जननांग से लिया गया और प्रयोगशाला में कोशिकाओं को बड़े पैमाने पर विकसित किया गया।
मांसपेशियों की कोशिकाएँ बाहर की तरफ से परत के साथ और अंदर की तरफ से स्त्री जननांग की कोशिकाओं के साथ जुड़ी थीं।
स्त्री जननांगों को एक बायोरिएक्टर में बड़े ही सावधानी से उस समय तक विकसित किया गया जब तक वे शल्य चिकित्सा के माध्यम से प्रत्यारोपित करने के लिए लायक नहीं हो गए।
सभी महिलाओं में यौन क्रियाएँ अब समान्य है।
असामान्यताएँ
स्त्री जननांग के विकास में अवरोध प्रजनन अंगों में अन्य असामान्यताएँ पैदा कर सकते हैं। इनमें से दो महिलाओं में स्त्री जननांग गर्भाशय से जुड़ा था।
गर्भधारण का कोई मामला नहीं था लेकिन उन महिलाओं में यह सैद्धांतिक रूप से संभव है।
वेक फॉरेस्ट बैपटिस्ट मेडिकल सेंटर में निदेशक डॉ. एंथोनी एटाला ने बीबीसी समाचार वेबसाइट को बताया, "वास्तव में हमने पहली बार पूरे अंग को बनाया है यह एक चुनौती थी।"
उन्होंने कहा कि एक क्रियाशील स्त्री जननांग इन महिलाओं के जीवन के लिए एक बहुत महत्वपूर्ण बात है और इससे उनके जीवन में होने वाली तब्दीली देखना "पुरस्कृत होने जैसा" था।
यह पहली दफा है जब प्रत्यारोपण के परिणाम की रिपोर्ट आई है हालांकि, पहला प्रत्यारोपण आठ साल पहले हुआ था। sabhar :http://www.amarujala.com/
तीन मिनट तक दिखा यूएफओ, लड़की ने कैमरे में किया कैद!
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अप्रैल 15, 2014 in तीन मिनट तक दिखा यूएफओ, लड़की ने कैमरे में किया कैद!

ये रिंग क्या है?
हर रोज की तरह उस दिन भी 16 साल की जॉर्जीना हीप अपनी मां के साथ अपने घर के बाहर टेनिस खेल रही थी।
टेनिस खेलते हुए कुछ वक्त बीता ही था कि जॉर्जीना को आसमान में एक काले रंग की रिंग जैसी कोई चीज नजर आई।
काले रिंग जैसी दिखने वाली वो चीज क्या थी, ये जॉर्जीना और उसकी मां समझ ही नहीं पा रहे थे।
टेनिस खेलते हुए कुछ वक्त बीता ही था कि जॉर्जीना को आसमान में एक काले रंग की रिंग जैसी कोई चीज नजर आई।
काले रिंग जैसी दिखने वाली वो चीज क्या थी, ये जॉर्जीना और उसकी मां समझ ही नहीं पा रहे थे।
दोनों ने गौर से देखा कि वो कोई चिड़िया या फिर आमतौर पर दिखने वाली चीज नहीं थी।
वो जो भी कुछ था पूरे तीन मिनट तक रहा और फिर धीरे-धीरे और ऊपर की तरफ जाते-जाते गुम हो गया।
इस पूरे घटनाक्रम को जॉर्जीना ने अपने कैमरे में कैद किया। जॉर्जिना का कहना है कि उसने यूएफओ को देखा है।
वो जो भी कुछ था पूरे तीन मिनट तक रहा और फिर धीरे-धीरे और ऊपर की तरफ जाते-जाते गुम हो गया।
इस पूरे घटनाक्रम को जॉर्जीना ने अपने कैमरे में कैद किया। जॉर्जिना का कहना है कि उसने यूएफओ को देखा है।
मौसम विभाग हो गया परेशान
जॉर्जीना की तस्वीरें देखकर मौसम विभाग भी परेशान हो गया। जॉर्जीना का कहना था कि उस दिन मौसम भी सामान्य था और आस-पास कहीं आग लगने की भी खबर नहीं थी।
इसलिए आसमान में काले धुंए जैसी चीज बनने की वजह क्या थी, ये कहना अभी भी मुश्किल है।
ब्रिटेन के वॉर्कविकशायर के लीमिंगटन स्पा में ही इस यूएफओ जैसी चीज को देखा गया और फिर वो पूरी तरह से गायब ही हो गया। sabhar :http://www.amarujala.com/
इसलिए आसमान में काले धुंए जैसी चीज बनने की वजह क्या थी, ये कहना अभी भी मुश्किल है।
ब्रिटेन के वॉर्कविकशायर के लीमिंगटन स्पा में ही इस यूएफओ जैसी चीज को देखा गया और फिर वो पूरी तरह से गायब ही हो गया। sabhar :http://www.amarujala.com/
सोमवार, 14 अप्रैल 2014
आप अपनी जेब में रख सकते हैं मोबाइल प्रिंटर
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अप्रैल 14, 2014 in आप अपनी जेब में रख सकते हैं मोबाइल प्रिंटर
इसराइल आधारित Zuta लैब्स एक वायरलेस मुक्त घूम मोबाइल प्रिंटर का अनावरण किया जेब के आकार के रोबोट एक पृष्ठ प्रिंट करने के लिए एक मिनट के बारे में लेता है यह अपने हाथ में फिट करने के लिए काफी छोटा है और यह किसी भी कागज पर मुद्रित कर सकते हैं यह गैजेट जनवरी 2015 में बिक्री के लिए होगा



मिनी प्रिंटर एक रिचार्जेबल बैटरी है और smartphones और पीसी के साथ कनेक्ट कर सकते हैं.
यह भी उपयोगकर्ता कागज के किसी भी आकार पर मुद्रित करने के लिए अनुमति देता है.
डिवाइस के नीचे एक रपट हैच का उपयोग करके काम करता है. प्रिंटर सक्रिय होता है, इस इंकजेट का पता चलता है.
आयाम: उच्च 4 इंच (10 सेमी) और व्यास में 4.5 इंच (11.5 सेमी).
वजन: 300 ग्राम (0.66 पाउंड)
प्रति मिनट 1.2 पृष्ठों: स्पीड प्रिंट.
मुद्रण गुणवत्ता: 96x192 डीपीआई (और अंततः उच्च)
इंक: एक काले कारतूस.
संपर्क: वायरलेस.
इंटरफ़ेस: ब्लूटूथ
बैटरी: 1 घंटा.
ऑपरेटिंग सिस्टम: एंड्रॉयड, आईओएस, लिनक्स, OSX, Windows.
sabhar :
/www.dailymail.co.uk
मिनी प्रिंटर एक रिचार्जेबल बैटरी है और smartphones और पीसी के साथ कनेक्ट कर सकते हैं.
यह भी उपयोगकर्ता कागज के किसी भी आकार पर मुद्रित करने के लिए अनुमति देता है.
डिवाइस के नीचे एक रपट हैच का उपयोग करके काम करता है. प्रिंटर सक्रिय होता है, इस इंकजेट का पता चलता है.
आयाम: उच्च 4 इंच (10 सेमी) और व्यास में 4.5 इंच (11.5 सेमी).
वजन: 300 ग्राम (0.66 पाउंड)
प्रति मिनट 1.2 पृष्ठों: स्पीड प्रिंट.
मुद्रण गुणवत्ता: 96x192 डीपीआई (और अंततः उच्च)
इंक: एक काले कारतूस.
संपर्क: वायरलेस.
इंटरफ़ेस: ब्लूटूथ
बैटरी: 1 घंटा.
ऑपरेटिंग सिस्टम: एंड्रॉयड, आईओएस, लिनक्स, OSX, Windows.
sabhar :
/www.dailymail.co.uk
दिन भर में 50 बार ऑर्गज़्म फील करती है अमांडा
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अप्रैल 14, 2014 in दिन भर में 50 बार ऑर्गज़्म फील करती है अमांडा

फ्लोरिडा. अनेक सेक्स सर्वे ये बता चुके हैं कि हर संभोग के बाद महिला को ऑर्गज़्म (चरम सुख) हासिल हो यह जरूरी नहीं. बल्कि इन सर्वे के मुताबिक बहुसंख्यक महिलाएं जीवन भर इसके लिए तरसती रहती हैं और कई तो जानती तक नहीं कि ये सुख होता क्या है. ऐसे में एक ऐसी लड़की के बारे में जानना दिलचस्प होगा जिसे दिन भर में 50 बार ऑर्गज़्म का अहसास होता है.
यह जानकार अगर कोई ये सोचे कि यह लड़की बेहद कामुक होगी तो ग़लत होगा. यह 24 साल की लड़की एक ऐसे बीमारी से ग्रस्त है जिसके कारण यह एक दिन में 50 बार उत्तेजित हो जाती है और उसे ऑर्गज्म का अहसास होता है.
अमेरिका के फ्लोरिडा की रहने वाली 24 साल की अमांडा ग्रेस बीते एक दशक से पर्सिस्टेंट जेनिटल अरॉउजल डिसऑर्डर (पीजीएडी) से ग्रस्त है. अपनी इस बीमारी से परेशान अमांडा अपनी जिंदगी बदलना चाहती है. इसके लिए अमांडा का ब्वायफ्रेंड उसका साथ दे रहा हैं तथा उसकी चिकित्सीय देखभाल भी करता है. हालांकि, अमांडा और उसके 22 साल के ब्वायफ्रेंड स्टुअर्ट ट्रिपलेट डॉक्टरों की सलाह पर एक-दूसरे से यौन संबंध बनाने से दूर ही रहते हैं.
अपनी बीमारी के बारे में अमांडा कहती हैं कि कई ऐसी बातें हैं जो मेरे पीजीएडी को बढ़ा देते हैं जिनमें वाइब्रेशंस, कार या ट्रेन में सवारी शामिल हैं. अमांडा का कहना है कि यह कभी भी हो सकती है और कभी-कभी तो एक के बाद एक पांच बार मुझे इस समस्या का सामना पड़ता है.
यह कहीं से भी आनंददायक नहीं होता और यह मेरे लिए एक टॉर्चर की तरह होता है. इस संबंध में अमांडा का इलाज कर रहे एक पेल्विक पेन एक्सपर्ट से पूछा गया तो उसने बताया कि बहुत जल्द ही अमांडा अपने ऑर्गज्म पर नियंत्रण पा लेंगी.sabhar :http://www.palpalindia.com/
रविवार, 13 अप्रैल 2014
कैसे होता है क्वांटम टेलीपोर्टेशन
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अप्रैल 13, 2014 in क्वांटम टेलीपोर्टेशन
टेलीपोर्टेशन एक आदर्श प्रतिरूप कहीं और दिखाई देता है , जबकि एक वस्तु या व्यक्ति एक ही स्थान पर बिखर बनाने के करतब करने के लिए विज्ञान कथा लेखकों द्वारा दिया गया नाम है . कैसे यह आमतौर पर विस्तार से समझाया नहीं है पूरा किया , लेकिन सामान्य विचार मूल उद्देश्य से सभी जानकारी निकालने के लिए इस तरह के रूप में स्कैन किया जाता है कि प्रतीत हो रहा है , तो यह जानकारी प्राप्त स्थान के लिए प्रेषित किया और निर्माण करने के लिए प्रयोग किया जाता है प्रतिकृति , जरूरी नहीं कि मूल के वास्तविक सामग्री है, लेकिन शायद मूल रूप में बिल्कुल एक ही पैटर्न में व्यवस्था की एक ही प्रकार के परमाणुओं से से . एक टेलीपोर्टेशन मशीन यह 3 आयामी वस्तुओं के साथ ही दस्तावेजों पर काम करेगा , सिवाय इसके कि यह एक सटीक प्रतिलिपि बजाय एक अनुमानित प्रतिकृति का उत्पादन होगा , और यह कि यह स्कैनिंग की प्रक्रिया में मूल को नष्ट करेगा , एक फैक्स मशीन की तरह होगा . कुछ विज्ञान कथा लेखकों के मूल को संरक्षित कि teleporters पर विचार , और साजिश जटिल हो जाता है जब एक ही व्यक्ति से मिलने का मूल और teleported संस्करणों ; लेकिन teleporter के अधिक आम प्रकार नहीं आत्मा और शरीर के लिए एक आदर्श प्रतिलिपिकार के रूप में , एक सुपर परिवहन उपकरण के रूप में कार्य कर रहा है, मूल नष्ट कर देता है .
छह वैज्ञानिकों
\
1993 में आईबीएम बंदे चार्ल्स एच. बेनेट सहित छह वैज्ञानिकों की एक अंतरराष्ट्रीय समूह , उत्तम टेलीपोर्टेशन सिद्धांत रूप में वास्तव में संभव है कि दिखाकर विज्ञान कथा लेखकों के बहुमत के intuitions की पुष्टि की , लेकिन मूल नष्ट हो जाता है तभी. बाद के वर्षों में , अन्य वैज्ञानिकों फोटॉनों , सुसंगत प्रकाश क्षेत्रों , परमाणु spins, और फंस आयनों सहित प्रणालियों की एक किस्म में प्रयोगात्मक टेलीपोर्टेशन का प्रदर्शन किया है . टेलीपोर्टेशन ( शायद unltimately एक "मात्रा इंटरनेट " के प्रमुख) लंबी दूरी क्वांटम संचार की सुविधा है, और यह बहुत आसान काम कर रहे एक क्वांटम कंप्यूटर का निर्माण कर रही है, आदिम संसाधित करने में कोई जानकारी के रूप में काफी उपयोगी हो वादा किया है . लेकिन विज्ञान कथा प्रशंसकों कोई इसे ऐसा करने के लिए किसी भी मौलिक कानून का उल्लंघन नहीं होता है, भले ही इंजीनियरिंग के कारणों की एक किस्म के लिए , निकट भविष्य में लोगों को या अन्य macroscopic वस्तुओं teleport करने में सक्षम होने की उम्मीद है कि जानने के लिए निराश हो जाएगा .
यह एक परमाणु या अन्य वस्तु में सभी जानकारी निकालने से किसी को मापने या स्कैनिंग प्रक्रिया मनाही जो क्वांटम यांत्रिकी की अनिश्चितता सिद्धांत का उल्लंघन माना गया था क्योंकि अतीत में, टेलीपोर्टेशन का विचार है, वैज्ञानिकों ने बहुत गंभीरता से नहीं लिया गया था . एक वस्तु की मूल स्थिति पूरी तरह से एक आदर्श प्रतिरूप बनाने के लिए पर्याप्त जानकारी निकाले बिना अभी भी बाधित किया गया है , जहां एक बिंदु तक पहुँच जाता है जब तक अनिश्चितता सिद्धांत के अनुसार, अधिक सही एक वस्तु , और यह प्रक्रिया स्कैनिंग से परेशान है , जांच होती है . इस टेलीपोर्टेशन के खिलाफ एक ठोस तर्क की तरह लगता है : एक एक सही प्रतिलिपि बनाने के लिए एक वस्तु से पर्याप्त जानकारी नहीं निकाल सकते हैं, यह एक सही प्रतिलिपि नहीं बनाया जा सकता है कि प्रतीत होता है. लेकिन छह वैज्ञानिकों आइंस्टीन - Podolsky - रोजेन प्रभाव के रूप में जाना जाता है क्वांटम यांत्रिकी के एक मशहूर और उलटी सुविधा का उपयोग कर , इस तर्क के आसपास चलाने के लिए एक अंत करने के लिए एक रास्ता मिल गया. दूसरे में , आइंस्टीन - Podolsky - रोजेन प्रभाव के माध्यम से पारित करने के लिए जानकारी का शेष , unscanned , भाग खड़ी कर रहा है, जबकि संक्षेप में , वे , एक teleport करना चाहती है जो एक वस्तु एक से जानकारी का हिस्सा बाहर स्कैन करने के लिए एक रास्ता मिल गया ए के साथ संपर्क में कभी नहीं किया गया है, जो वस्तु सी
आंकड़ा

बाद में, सी के लिए स्कैन से बाहर जानकारी के आधार पर एक उपचार लागू करने से , यह यह स्कैन किया गया था पहले एक में था के रूप में बिल्कुल एक ही राज्य में सी पैंतरेबाज़ी करने के लिए संभव है . एक ही अच्छी तरह से तो क्या हासिल किया गया है टेलीपोर्टेशन , नहीं प्रतिकृति है , स्कैनिंग से बाधित कर रहा है, उस राज्य में नहीं रह गया है .
चित्रा पता चलता है, जानकारी के unscanned भाग ए क्या साथ फिर सी के साथ पहले सूचना का आदान प्रदान और जो एक मध्यस्थ वस्तु बी , सी के लिए एक से अवगत करा दिया है ? यह वास्तव में "पहले सी के साथ और फिर एक साथ " कहने के लिए सही हो सकता है? निश्चित रूप से, सी के लिए एक से कुछ व्यक्त करने के क्रम में , प्रसव वाहन के आसपास के अन्य रास्ता नहीं , सी से पहले एक का दौरा करना चाहिए . लेकिन किसी भी सामग्री कार्गो के विपरीत , और यहां तक कि साधारण जानकारी के विपरीत , वास्तव में इस तरह के एक पिछड़े फैशन में दिया जा सकता है , कि जानकारी का एक सूक्ष्म , बिना स्कैन योग्य तरह है . यह अल्बर्ट आइंस्टीन , बोरिस Podolsky , और नाथन द्वारा एक प्रसिद्ध अखबार में चर्चा की गई है, जब भी "आइंस्टीन - Podolsky - रोजेन ( EPR ) सहसंबंध " या " उलझन " नामक सूचना के इस सूक्ष्म प्रकार , कम से कम आंशिक रूप से 1930 के दशक के बाद से समझ में आ गया है रोजेन . 1960 में जॉन बेल संपर्क में एक बार किया गया लेकिन बाद में सीधे बातचीत करने के लिए बहुत दूर ले जाने के जो उलझ कण, की एक जोड़ी भी मानना है कि शास्त्रीय आंकड़े से समझाया जा करने के लिए सहसंबद्ध है कि व्यक्तिगत रूप से यादृच्छिक व्यवहार प्रदर्शित कर सकते हैं कि पता चला है . फोटॉनों और अन्य कणों पर प्रयोग बार बार इस तरह बड़े करीने से उन्हें जो बताते हैं कि क्वांटम यांत्रिकी , की वैधता के लिए पुख्ता सबूत उपलब्ध कराने , इन सहसंबंध की पुष्टि की है . EPR सहसंबंध के बारे में एक और अच्छी तरह से ज्ञात तथ्य यह है कि वे खुद के द्वारा एक सार्थक और चलाया संदेश उद्धार नहीं हो सकता है . यह उनकी ही उपयोगिता क्वांटम यांत्रिकी की वैधता साबित करने में लगा था. लेकिन अब यह क्वांटम टेलीपोर्टेशन का घटना के माध्यम से , वे बाहर स्कैन और परंपरागत तरीके से वितरित किया जाना बहुत नाजुक है जो एक वस्तु में जानकारी की है कि वास्तव में हिस्सा वितरित कर सकते हैं , कि जाना जाता है.
आंकड़ा

यह आंकड़ा क्वांटम टेलीपोर्टेशन (ऊपर देखें) के साथ पारंपरिक प्रतिकृति संचरण तुलना . पारंपरिक प्रतिकृति संचरण में मूल इसके बारे में आंशिक जानकारी निकालने , स्कैन , लेकिन कम या ज्यादा अक्षुण्ण स्कैनिंग प्रक्रिया के बाद बनी हुई है . स्कैन किए गए जानकारी यह मूल की एक अनुमानित नकल का उत्पादन करने के लिए कुछ कच्चे माल (जैसे पेपर) पर अंकित है जहां प्राप्त स्टेशन , के लिए भेजा है . इसके विपरीत, क्वांटम टेलीपोर्टेशन में , दो वस्तुओं बी और सी के पहले से संपर्क में लाया जाता है और फिर अलग हो रहे हैं . वस्तु सी प्राप्त स्टेशन पर ले जाया गया है, जबकि वस्तु बी , भेजने के स्टेशन पर ले जाया जाता है . भेजने स्टेशन वस्तु बी पर एक जानकारी यह किसी एक का चयन करने के लिए प्रयोग किया जाता है जहां प्राप्त स्टेशन के लिए भेजा जाता है स्कैन किया पूरी तरह से एक और बीके राज्य में खलल न डालें कुछ जानकारी और उपज , teleport करना चाहती है जो एक मूल वस्तु के साथ एक साथ स्कैन किया जाता है जिससे ए के पूर्व राज्य के एक सटीक प्रतिकृति में सी डाल , सी वस्तु को लागू करने के लिए कई उपचार की
sabhar :http://researcher.watson.ibm.com/
टेलीपोर्टेशन एक आदर्श प्रतिरूप कहीं और दिखाई देता है , जबकि एक वस्तु या व्यक्ति एक ही स्थान पर बिखर बनाने के करतब करने के लिए विज्ञान कथा लेखकों द्वारा दिया गया नाम है . कैसे यह आमतौर पर विस्तार से समझाया नहीं है पूरा किया , लेकिन सामान्य विचार मूल उद्देश्य से सभी जानकारी निकालने के लिए इस तरह के रूप में स्कैन किया जाता है कि प्रतीत हो रहा है , तो यह जानकारी प्राप्त स्थान के लिए प्रेषित किया और निर्माण करने के लिए प्रयोग किया जाता है प्रतिकृति , जरूरी नहीं कि मूल के वास्तविक सामग्री है, लेकिन शायद मूल रूप में बिल्कुल एक ही पैटर्न में व्यवस्था की एक ही प्रकार के परमाणुओं से से . एक टेलीपोर्टेशन मशीन यह 3 आयामी वस्तुओं के साथ ही दस्तावेजों पर काम करेगा , सिवाय इसके कि यह एक सटीक प्रतिलिपि बजाय एक अनुमानित प्रतिकृति का उत्पादन होगा , और यह कि यह स्कैनिंग की प्रक्रिया में मूल को नष्ट करेगा , एक फैक्स मशीन की तरह होगा . कुछ विज्ञान कथा लेखकों के मूल को संरक्षित कि teleporters पर विचार , और साजिश जटिल हो जाता है जब एक ही व्यक्ति से मिलने का मूल और teleported संस्करणों ; लेकिन teleporter के अधिक आम प्रकार नहीं आत्मा और शरीर के लिए एक आदर्श प्रतिलिपिकार के रूप में , एक सुपर परिवहन उपकरण के रूप में कार्य कर रहा है, मूल नष्ट कर देता है .
छह वैज्ञानिकों
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1993 में आईबीएम बंदे चार्ल्स एच. बेनेट सहित छह वैज्ञानिकों की एक अंतरराष्ट्रीय समूह , उत्तम टेलीपोर्टेशन सिद्धांत रूप में वास्तव में संभव है कि दिखाकर विज्ञान कथा लेखकों के बहुमत के intuitions की पुष्टि की , लेकिन मूल नष्ट हो जाता है तभी. बाद के वर्षों में , अन्य वैज्ञानिकों फोटॉनों , सुसंगत प्रकाश क्षेत्रों , परमाणु spins, और फंस आयनों सहित प्रणालियों की एक किस्म में प्रयोगात्मक टेलीपोर्टेशन का प्रदर्शन किया है . टेलीपोर्टेशन ( शायद unltimately एक "मात्रा इंटरनेट " के प्रमुख) लंबी दूरी क्वांटम संचार की सुविधा है, और यह बहुत आसान काम कर रहे एक क्वांटम कंप्यूटर का निर्माण कर रही है, आदिम संसाधित करने में कोई जानकारी के रूप में काफी उपयोगी हो वादा किया है . लेकिन विज्ञान कथा प्रशंसकों कोई इसे ऐसा करने के लिए किसी भी मौलिक कानून का उल्लंघन नहीं होता है, भले ही इंजीनियरिंग के कारणों की एक किस्म के लिए , निकट भविष्य में लोगों को या अन्य macroscopic वस्तुओं teleport करने में सक्षम होने की उम्मीद है कि जानने के लिए निराश हो जाएगा .
यह एक परमाणु या अन्य वस्तु में सभी जानकारी निकालने से किसी को मापने या स्कैनिंग प्रक्रिया मनाही जो क्वांटम यांत्रिकी की अनिश्चितता सिद्धांत का उल्लंघन माना गया था क्योंकि अतीत में, टेलीपोर्टेशन का विचार है, वैज्ञानिकों ने बहुत गंभीरता से नहीं लिया गया था . एक वस्तु की मूल स्थिति पूरी तरह से एक आदर्श प्रतिरूप बनाने के लिए पर्याप्त जानकारी निकाले बिना अभी भी बाधित किया गया है , जहां एक बिंदु तक पहुँच जाता है जब तक अनिश्चितता सिद्धांत के अनुसार, अधिक सही एक वस्तु , और यह प्रक्रिया स्कैनिंग से परेशान है , जांच होती है . इस टेलीपोर्टेशन के खिलाफ एक ठोस तर्क की तरह लगता है : एक एक सही प्रतिलिपि बनाने के लिए एक वस्तु से पर्याप्त जानकारी नहीं निकाल सकते हैं, यह एक सही प्रतिलिपि नहीं बनाया जा सकता है कि प्रतीत होता है. लेकिन छह वैज्ञानिकों आइंस्टीन - Podolsky - रोजेन प्रभाव के रूप में जाना जाता है क्वांटम यांत्रिकी के एक मशहूर और उलटी सुविधा का उपयोग कर , इस तर्क के आसपास चलाने के लिए एक अंत करने के लिए एक रास्ता मिल गया. दूसरे में , आइंस्टीन - Podolsky - रोजेन प्रभाव के माध्यम से पारित करने के लिए जानकारी का शेष , unscanned , भाग खड़ी कर रहा है, जबकि संक्षेप में , वे , एक teleport करना चाहती है जो एक वस्तु एक से जानकारी का हिस्सा बाहर स्कैन करने के लिए एक रास्ता मिल गया ए के साथ संपर्क में कभी नहीं किया गया है, जो वस्तु सी
आंकड़ा
बाद में, सी के लिए स्कैन से बाहर जानकारी के आधार पर एक उपचार लागू करने से , यह यह स्कैन किया गया था पहले एक में था के रूप में बिल्कुल एक ही राज्य में सी पैंतरेबाज़ी करने के लिए संभव है . एक ही अच्छी तरह से तो क्या हासिल किया गया है टेलीपोर्टेशन , नहीं प्रतिकृति है , स्कैनिंग से बाधित कर रहा है, उस राज्य में नहीं रह गया है .
चित्रा पता चलता है, जानकारी के unscanned भाग ए क्या साथ फिर सी के साथ पहले सूचना का आदान प्रदान और जो एक मध्यस्थ वस्तु बी , सी के लिए एक से अवगत करा दिया है ? यह वास्तव में "पहले सी के साथ और फिर एक साथ " कहने के लिए सही हो सकता है? निश्चित रूप से, सी के लिए एक से कुछ व्यक्त करने के क्रम में , प्रसव वाहन के आसपास के अन्य रास्ता नहीं , सी से पहले एक का दौरा करना चाहिए . लेकिन किसी भी सामग्री कार्गो के विपरीत , और यहां तक कि साधारण जानकारी के विपरीत , वास्तव में इस तरह के एक पिछड़े फैशन में दिया जा सकता है , कि जानकारी का एक सूक्ष्म , बिना स्कैन योग्य तरह है . यह अल्बर्ट आइंस्टीन , बोरिस Podolsky , और नाथन द्वारा एक प्रसिद्ध अखबार में चर्चा की गई है, जब भी "आइंस्टीन - Podolsky - रोजेन ( EPR ) सहसंबंध " या " उलझन " नामक सूचना के इस सूक्ष्म प्रकार , कम से कम आंशिक रूप से 1930 के दशक के बाद से समझ में आ गया है रोजेन . 1960 में जॉन बेल संपर्क में एक बार किया गया लेकिन बाद में सीधे बातचीत करने के लिए बहुत दूर ले जाने के जो उलझ कण, की एक जोड़ी भी मानना है कि शास्त्रीय आंकड़े से समझाया जा करने के लिए सहसंबद्ध है कि व्यक्तिगत रूप से यादृच्छिक व्यवहार प्रदर्शित कर सकते हैं कि पता चला है . फोटॉनों और अन्य कणों पर प्रयोग बार बार इस तरह बड़े करीने से उन्हें जो बताते हैं कि क्वांटम यांत्रिकी , की वैधता के लिए पुख्ता सबूत उपलब्ध कराने , इन सहसंबंध की पुष्टि की है . EPR सहसंबंध के बारे में एक और अच्छी तरह से ज्ञात तथ्य यह है कि वे खुद के द्वारा एक सार्थक और चलाया संदेश उद्धार नहीं हो सकता है . यह उनकी ही उपयोगिता क्वांटम यांत्रिकी की वैधता साबित करने में लगा था. लेकिन अब यह क्वांटम टेलीपोर्टेशन का घटना के माध्यम से , वे बाहर स्कैन और परंपरागत तरीके से वितरित किया जाना बहुत नाजुक है जो एक वस्तु में जानकारी की है कि वास्तव में हिस्सा वितरित कर सकते हैं , कि जाना जाता है.
आंकड़ा
यह आंकड़ा क्वांटम टेलीपोर्टेशन (ऊपर देखें) के साथ पारंपरिक प्रतिकृति संचरण तुलना . पारंपरिक प्रतिकृति संचरण में मूल इसके बारे में आंशिक जानकारी निकालने , स्कैन , लेकिन कम या ज्यादा अक्षुण्ण स्कैनिंग प्रक्रिया के बाद बनी हुई है . स्कैन किए गए जानकारी यह मूल की एक अनुमानित नकल का उत्पादन करने के लिए कुछ कच्चे माल (जैसे पेपर) पर अंकित है जहां प्राप्त स्टेशन , के लिए भेजा है . इसके विपरीत, क्वांटम टेलीपोर्टेशन में , दो वस्तुओं बी और सी के पहले से संपर्क में लाया जाता है और फिर अलग हो रहे हैं . वस्तु सी प्राप्त स्टेशन पर ले जाया गया है, जबकि वस्तु बी , भेजने के स्टेशन पर ले जाया जाता है . भेजने स्टेशन वस्तु बी पर एक जानकारी यह किसी एक का चयन करने के लिए प्रयोग किया जाता है जहां प्राप्त स्टेशन के लिए भेजा जाता है स्कैन किया पूरी तरह से एक और बीके राज्य में खलल न डालें कुछ जानकारी और उपज , teleport करना चाहती है जो एक मूल वस्तु के साथ एक साथ स्कैन किया जाता है जिससे ए के पूर्व राज्य के एक सटीक प्रतिकृति में सी डाल , सी वस्तु को लागू करने के लिए कई उपचार की
sabhar :http://researcher.watson.ibm.com/
युवा IAS, कभी कम्प्यूटर गेम बनाते थे, आज संभालते हैं सारा शहर!
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अप्रैल 13, 2014 in आज संभालते हैं सारा शहर!, कभी कम्प्यूटर गेम बनाते थे, युवा IAS

भोपाल। यह कोई बहुत पुरानी बात नहीं है। 1984 की गैस त्रासदी ही अब तक भोपाल की अंतरराष्ट्रीय पहचान रही है। लेकिन यह पहचान भोपालियों के लिए कोई गौरव की बात नहीं; बल्कि आजन्म-कष्ट और शताब्दियों तक भोगने वाली जिंदगी का फलसफा भर है।
वर्ष, 2009 में भोपाल में बस रेपिड ट्रांजिट सिस्टम (बीआरटीएस) का सफर शुरू हुआ। तब तक शायद ही किसी को ऐसी उम्मीद रही होगी, कि बीआरटीएस न सिर्फ भोपाल; बल्कि देश में एक नई पहचान स्थापित करेगा। भोपाल शहर की जीवनशैली और स्तर दोनों के लिए यह विशेषताओं भरा साबित होगा।
भोपाल बीआरटीएस तमाम तकनीकी और व्यावहारिक दिक्कतों को सुलझाते हुए भोपाल की एक अलग पहचान बना है। इसे विशेषज्ञों ने तुलनात्मक रूप से अहमदाबाद(गुजरात) से बेहतर माना है।
बीएमसी कमिश्नर विशेष गढ़पाले बगैर लाग-लपेट के स्वीकारते हैं-मैं मानता हूं कि, बीआरटीएस में खामियां रही होंगी या अब भी दिखाई दे रही हों, लेकिन शुरुआत तो कहीं से करनी ही होती है। काम होगा, तभी परेशानियां और त्रुटियां सामने आएंगी। अगर हम रुकें नहीं; थकें नहीं और बगैर निराश हुए बराबर उस कार्य में जुटे रहें, तो सारी समस्याएं एक-एक करके खत्म हो जाती हैं।
विशेष को हाल में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने विधानसभा चुनाव में प्रदेशस्तर पर उल्लेखनीय कार्य के लिए प्रशंसा पत्र से नवाजा है। विशेष कहते हैं, मेरा मानना है कि जिंदगी की तमाम जिम्मेदारियों में 100 प्रतिशत नंबर लाने वाले ही सफल नहीं हैं, 33 प्रतिशत वाले भी उतने ही बेहतर हैं। क्योंकि उन्होंने पास होने का जतन किया और असफलता की लाइन को पार किया। अगर आपको कुछ अच्छा हासिल करना है, तो सबकी सुनो, क्योंकि एक अच्छा श्रोता ही समस्याओं का समाधान ढूंढ पाता है।
यह हैं भोपाल म्यूनिसिपल कार्पोरेशन (बीएमसी) के कमिश्नर विशेष गढ़पाले। उम्र 32 वर्ष; और बैच वर्ष 2008! यानी प्रशासनिक अनुभव करीब 6 वर्ष। लेकिन इतने अल्प समय में भी विशेष अपनी विशेषताओं के लिए पहचाने जाने लगे हैं। पढि़ए एक युवा आईएएस की जुबानी; उसके जीवन, संघर्ष और कार्यशैली की कहानी।
भोपाल। यह कोई बहुत पुरानी बात नहीं है। 1984 की गैस त्रासदी ही अब तक भोपाल की अंतरराष्ट्रीय पहचान रही है। लेकिन यह पहचान भोपालियों के लिए कोई गौरव की बात नहीं; बल्कि आजन्म-कष्ट और शताब्दियों तक भोगने वाली जिंदगी का फलसफा भर है।
वर्ष, 2009 में भोपाल में बस रेपिड ट्रांजिट सिस्टम (बीआरटीएस) का सफर शुरू हुआ। तब तक शायद ही किसी को ऐसी उम्मीद रही होगी, कि बीआरटीएस न सिर्फ भोपाल; बल्कि देश में एक नई पहचान स्थापित करेगा। भोपाल शहर की जीवनशैली और स्तर दोनों के लिए यह विशेषताओं भरा साबित होगा।
भोपाल बीआरटीएस तमाम तकनीकी और व्यावहारिक दिक्कतों को सुलझाते हुए भोपाल की एक अलग पहचान बना है। इसे विशेषज्ञों ने तुलनात्मक रूप से अहमदाबाद(गुजरात) से बेहतर माना है।
बीएमसी कमिश्नर विशेष गढ़पाले बगैर लाग-लपेट के स्वीकारते हैं-मैं मानता हूं कि, बीआरटीएस में खामियां रही होंगी या अब भी दिखाई दे रही हों, लेकिन शुरुआत तो कहीं से करनी ही होती है। काम होगा, तभी परेशानियां और त्रुटियां सामने आएंगी। अगर हम रुकें नहीं; थकें नहीं और बगैर निराश हुए बराबर उस कार्य में जुटे रहें, तो सारी समस्याएं एक-एक करके खत्म हो जाती हैं।
विशेष को हाल में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने विधानसभा चुनाव में प्रदेशस्तर पर उल्लेखनीय कार्य के लिए प्रशंसा पत्र से नवाजा है। विशेष कहते हैं, मेरा मानना है कि जिंदगी की तमाम जिम्मेदारियों में 100 प्रतिशत नंबर लाने वाले ही सफल नहीं हैं, 33 प्रतिशत वाले भी उतने ही बेहतर हैं। क्योंकि उन्होंने पास होने का जतन किया और असफलता की लाइन को पार किया। अगर आपको कुछ अच्छा हासिल करना है, तो सबकी सुनो, क्योंकि एक अच्छा श्रोता ही समस्याओं का समाधान ढूंढ पाता है।
मैं सदैव अपने आसपास सबकुछ अच्छा देखना चाहता हूं
मूलत: मैं बालाघाट से हूं। मेरे पापा स्व. आईडी गढ़पाले स्टेट बैंक आफ इंडिया(एसबीआई) में थे। उनका ट्रांसफर होता, तो मेरा भी स्कूल बदल जाता। यानी मेरी स्कूलिंग कई शहरों में हुई। मैं संवेदनशील व्यक्तित्व का हूं। हर चीज मुझे छू जाती है। मैं अपने आसपास एक बेहतर जिंदगी देखना चाहता था। उस वक्त सोचता था कि कलेक्टर ही एक ऐसा व्यक्ति है, जो अपने शहर में सबकुछ करता है। उसके पास वो सारे अधिकार हैं, जो एक शहर को बेहतर बना सकते हैं। साफ-सुथरा बना सकते हैं। वह करप्शन पर कंट्रोल कर सकता है। वो जनता के दु:ख-दर्द और उनकी समस्याओं का समाधान करने की ताकत रखता है, अधिकार रखता है। बस मैं भी कलेक्टर बनने का सपना देखने लगा।
हालांकि उस वक्त तक रास्ता कुछ अलग था। मैं राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय(आरजीपीवी) से कम्प्यूटर साइंस में ग्रेजुएशन कर रहा था। उसी दौरान अहमदाबाद बेस्ड एक इंस्टीट्यूट से कम्प्यूटर ग्राफिक्स का कोर्स भी किया। मैंने एक गेम डिजाइन किया था, जो काफी पसंद किया गया। उस प्रोत्साहन ने ग्राफिक्स डिजाइनर बनने की ओर प्रेरित किया। लेकिन ऐसा नहीं हो सका(हंसते हुए)। यह भी दिलचस्प है कि एक(अपनी ओर इशारा करते हुए) कम्प्यूटर गेम डिजाइनर स्पोट्र्स पर्सन कभी नहीं रहा।
मेरे बड़े भाई इच्छित का राज्य प्रशासनिक सेवा में चयन हो चुका था। तब लगा कि अब शायद कलेक्टर बनने का मेरा सपना भी उनकी सहायता से साकार हो सकता है। उन्होंने प्रेरणा दी और मैंने दिल्ली जाकर कोचिंग शुरू कर दी। वर्ष, 2008 में मेरा एक साथ आईएएस और एमपीपीएससी में चयन हुआ। एमपीपीएससी में रैंक 48 थी।
अधिकार मिलने से सबकुछ संभव नहीं होता...
जब मैं प्रोविशनल पीरियड में पन्ना में सहायक कलेक्टर और एसडीएम था, तब महसूस हुआ कि एक अधिकारी होना कोई गौरव की बात नहीं; बल्कि अपने अधिकारों का लोगों के हितों में ठीक से इस्तेमाल करना ही सही मायने में गौरवान्वित करता है।
बुंदेलखंड मप्र के पिछड़े क्षेत्रों में शुमार है। गरीबी, बेरोजगारी और शिक्षा का अभाव ये तमाम चीजें जीवनशैली को बेहतर नहीं होने देतीं। भौगोलिक दृष्टि से भी वो क्षेत्र मेरे लिए एक चुनौती था। 64 प्रतिशत जंगल और बाकी भूमि अस्तव्यस्त। स्कूलों में टायलेट बनवाना भी कोई सरल काम नहीं था। वहां मैंने तीन कलेक्टरों एम सेलवेंद्रम, अजीत कुमार और केसी जैन के अधीनस्थ रहकर बहुत सीखा।
संघर्ष कभी खत्म नहीं होते
दो महीने पन्ना जिले की गुनौर जनपद में सीईओ रहा। यहां एक नदी को पुनर्जीवन योजना के तहत फिर से जीवित करना था। यह कार्य मनरेगा के तहत होना था। मैं घंटों धूप में पैदल घूमा, सर्वे किया, कार्य मंजूर कराए। तभी मेरा ट्रांसफर हो गया। अफसोस उस नदी को जीवित नहीं कर पाया। इसने सिखाया कि यह जरूरी नहीं कि; आपका परिश्रम हर बार कामयाब हो, हां; वो आपको एक अनुभव अवश्य दे जाता है कि आगे कोई कार्य कैसे करना है।
यहां मैं नदी को भले ही नहीं जिला पाया, लेकिन अपने प्रोविशनल पीरियड के दौरान मैं यहां का पहला ऐसा अधिकारी था, जो मुख्यालय में ठहरता था। बाकी पन्ना से अपडाउन करते रहे। मुझे संतोष मिला कि मैंने बड़ी संख्या में जनता के प्रकरणों का निपटारा किया।
अड़चनें तो आती रहेंगी...
मैं आपको एक किस्सा सुनाता हूं, जिससे यह साबित होगा कि अधिकारी होना ही सारी समस्याओं की एकमेव चाबी नहीं है। आम पब्लिक की समस्याओं को निपटाने आपको आम आदमी बनकर रहना होगा। जब मैं खजुराहो में पदस्थ था, तब वहां वर्ष, 1978 से कूटनी बांध का कार्य चल रहा था। एनटीपीसी का बिजली प्रोजेक्ट शुरू होने जा रहा था। मेरे कार्यकाल में बांध को भरा जाना था। भू-अर्जन की प्रक्रिया लगातार चल रही थी। पथरिया और एक समीपवर्ती गांव के लोग किसी भी कीमत पर जमीन छोडऩे को राजी नहीं थे। हमने 7 दिन कैंपिंग की। रात-रातभर गांव में जाकर बैठा। लोगों को बांध से मिलने वाले फायदे समझाए।
दरअसल, हमने इन गांवों में जाकर पाया कि कुछेक व्यक्ति गांववालों को भड़का रहे हैं। तब मैंने तय किया कि जब तक इन लोगों को नहीं समझाया जाएगा, तब तक वे बांध में अड़चन डालते रहेंगे। वे बात-बात पर बंदूक निकाल लेते थे। कैंपिंग के कुछ महीने पहले गोलियां भी चल चुकी थीं। अधिकारी डरे हुए थे।
मेरा गनमैन गन सहित बगैर सूचना दिए छुट्टी पर चला गया। मेरे लिए यह एक बड़ी चुनौती थी। बगैर सुरक्षा के गांववालों के बीच जाना, खासकर तब; जब वे बांध में पानी आता देख उग्र हो रहे थे। हम डरे नहीं। मैं, एक नायब तहसीलदार और ड्राइवर तीनों जन उन्हीं लोगों के घर के सामने चबूतरे पर खटिया बिछाकर बैठे, जो बांध को लेकर लोगों को भड़का रहे थे। सबसे पहले हमने उन्हें समझाया और फिर धीरे-धीरे गांव वालों को राजी किया। आखिरकार गांव खाली हुआ। हमने संतोष की सांस ली।
मुझे अच्छी तरह याद है। रात के 12 बजे पानी गिरना शुरू हुआ। मुझे एक सज्जन ने फोन पर सूचना दी कि बांध में पानी भरना शुरू हो गया है। अगले दिन सुबह 7 बजे हम बांध पर खड़े होकर धीरे-धीरे पानी भरने का नजारा देख रहे थे। वो मेरे लिए एक अत्यंत सुखद अनुभव था।
भोपाल मेरे सपनों का शहर...
वर्ष, 2012 में इंदौर ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीट के लिए मुझे और मेरे मित्र किरण गोपाल को लाया गया। किरण अभी बालाघाट में कलेक्टर है। तब मैं यहां उद्योग विभाग में डिप्टी सेक्रेट्री था। इस मीट से हमें सीखने को मिला कि, अपने प्रदेश को विकास की ओर ले जाने की दिशा में कौन-कौन से उपाय सार्थक साबित हो सकते हैं। उसके बाद मुझे जनवरी 2013 में नगर निगम कमिश्नर की चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई।
मुश्किलें और चुनौतियां हर जगह पोस्टिंग के दौरान रहीं, लेकिन बीएमसी का कमिश्नर होना इसलिए भी अत्यंत चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि यह सरकारी संस्थान एक पालक की भूमिका निभाता है। सारे शहर की समस्याएं चाहे वो पानी हो, सड़क हो, स्ट्रीट लाइट, ट्रैफिक, साफ-सफाई या इन्फ्रास्ट्रक्चर; सभी को सबकी आवश्यकताओं के अनुसार तैयार करना, व्यवस्थित करना, साकार करना नगर निगम का ही दायित्व है। यहां जरा-सी लापरवाही, गलतियां या चूक एकदम छवि खराब कर देती है।
दो अचीवमेंट हमारी टीम के खाते में हैं, लेकिन करना अभी बहुत कुछ बाकी है। जब मैंने बीएमसी कमिश्नर का दायित्व संभाला, तो सबसे पहले मेरे सामने बीआरटीएस को बगैर किसी रुकावट और त्रुटियों के साकार करना था।
बीआरटीएस का जिक्र यहां इसलिए भी कर रहा हूं क्योंकि, इसने भोपाल को एक नई गति दी है, दिशा दी है। देश में कई जगह बीआरटी कॉरिडोर में बसें दौड़ रही हैं, सबकी अपनी-अपनी तकनीकी और व्यावहारिक दिक्कतें हैं। भोपाल भी इससे अछूता नहीं हो सकता, बावजूद हमें संतुष्टि है, गर्व है कि भोपाल का बीआरटीएस अहमदाबाद से श्रेष्ठ साबित हुआ है। ऐसा मैं नहीं कहता, तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है। सिर्फ हमारा बीआरटी कॉरिडोर ऐसा है, जिसमें हमने जगह और जरूरतों के हिसाब से एडिशनल फीचर जोड़े हैं। यानी हमारे कॉरिडोर में छोटी-बड़ीं, हर तरह की बस आसानी से संचालित हो सकती है।
भोपाल में 225 बसें संचालित हो रही हैं। इनमें 68 एसी और नॉन एसी बसें बीआरटी कॉरिडोर में चल रही हैं। बैरागढ़ से मिसरोद तक करीब 24 किलोमीटर बीआरटी कॉरिडोर को बनाना अत्यंत टेड़ी खीर रहा। कहीं विरोध हुआ, तो कहीं व्यावहारिक दिक्कतें आईं, लेकिन एक दृढ़ निश्चय था कि इसे करना है बस। मैं खुद सड़कों पर घूमा ताकि, इस योजना से जुड़ा हर व्यक्ति, चाहे वो छोटा कर्मचारी हो या अन्य कोई अफसर; हर रुकावट को पार करते हुए भोपाल को एक सौगात सौंपे।
बीआरटीएस को भोपालवासियों ने सराहा। अब मेरा प्रयास इसे इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम से जोडऩा है। बोर्ड आफिस बस डिपो पर हमने इसका डेमो किया था, जिसके अच्छे परिणाम निकले। इसके लिए ताइवान से मशीनों के रूप में तकनीकी सहायता ली जा रही है। इस सिस्टम से सारी बसें ऑनलाइन सिस्टम से जुड़ जाएंगी। यानी बस में कितनी सवारी हैं, कितना फेयर कलेक्ट हुआ(रियल टाइम फंड ट्रांसफर), बस की मौजूदा स्थिति आदि सबकी जानकारी मिनटों में सर्वर कम्प्यूटर तक पहुंच जाएगी।
इसके अलावा वेंडिंग मशीनें भी लगने जा रही हैं। बसों में स्लाइडिंग गेट, सीसीटीवी कैमरे भी प्रस्तावित हैं। इन सबके बाद भोपाल बीआरटीएस निश्चय ही अर्बन डेवलपमेंट के मामले में इस शहर को एक नई पहचान देगा।
बीएमसी के 100 प्रतिशत कम्प्यूटराइजेशन का जिक्र करना भी चाहूंगा। मैं कम्प्यूटर साइंस ग्रेजुएट हूं, इसलिए बीएमसी को ऑनलाइन करने में बहुत ज्यादा दिक्कतें नहीं आईं। इससे हमें दो तरफा फायदा हुआ। पहला अंदरुनी समस्याओं और गड़बडिय़ों पर अंकुश लगा। दूसरा; बीएमसी के सारे टैक्स की रसीदें कम्प्यूटराइज्ड मिलने से लोगों को सहूलियत हुई। हमने 7 सुविधा केंद्र खोले, जहां जाकर भी लोग बीएमसी की सेवाएं ले सकते हैं। बिल्डिंग परमिशन, नक्शे ऑनलाइन मिलने से पब्लिक को दफ्तर के चक्कर काटने से छुटकारा मिला।
बीएमसी के कम्प्यूटराइजेशन से और भी कई फायदे हुए। करप्शन रुका और हमारा राजस्व 33.8 प्रतिशत बढ़ गया। अब हम मोबाइल एप लाने जा रहे हैं। यानी घर बैठे बीएमसी आपको सेवाएं देगा। हमारा प्रयास बीएमसी को पेपरलेस करना है। इससे पर्यावरण भी बचेगा और कागजों पर होने वाला बेवजह खर्चा भी। हालांकि कुछ दिक्कतें हैं, जैसे विशेषज्ञों की कमी आदि। फिर भी जो होगा, बेहतर होगा।
लोग कहें, वाकई यह नवाबी शहर है...
झीलों के इस शहर को खूबसूरत और व्यवस्थित बनाना अकेले किसी एक व्यक्ति के बस की बात नहीं है। यह तो एक सामूहिक सामाजिक जिम्मेदारी है। बीएमसी ने बोट क्लब संवारा, पार्क संवारे, ट्रैफिक व्यवस्थाएं बेहतर कीं, बैरागढ़, न्यूमार्केट और एमपी नगर में मल्टीलेवल पार्किंग पर कार्य शुरू हो गया है। अब इन्हें और बेहतर बनाने या दुरुस्त रखने की जिम्मेदारी हम सबकी है।
बीएमसी ने 26 जनवरी, 2013 से घरों से कचरा उठाने की योजना शुरू की। 15 अगस्त, 2013 से सॉलिड बेस्ट मैनेजमेंट के तहत अलग-अलग तरह का कचरा उठाने का इंतजाम किया। भानपुर खंती की शिफ्टिंग चल रही है। नई जगह वेस्ट एनर्जी प्लांट लगने जा रहा है। यह सब हमारी टीम के लिए उपलब्धि हैं। मेरी ख्वाहिश है कि हमारा गौरव भोपाल शहर और बेहतर बने।
व्यक्तिगत जीवनशैली...
निश्चय ही लोगों को लगता होगा कि अफसरों की जीवनशैली शान-ओ-शौकत से भरी होती होगी, लेकिन यह अधूरा सच है। नगर निगम में आकर मेरी रातों की नींद उड़ गई है। न कोई छुट्टी और न कोई तीज-त्यौहार। दिन की फाइलें उसी रात निपटाना कोशिश होती है, ताकि अगले दिन नई चर्चा, नई शुरुआत हो सके। वर्ष, 2011 में मेरी शादी रशिम से हुई। वो बैंक मैनेजर है। दोनों व्यस्त। लेकिन दोनों को इसका कोई मलाल नहीं। क्योंकि हम दोनों ही अपनी नैतिक, पारिवारिक, सामाजिक और प्रशासनिक जिम्मेदारियां समझते हैं।
वो जो खिला देती है, बगैर ना-नुकूर खा लेता हूं। मुझे सबकुछ पसंद है। हां, उसके हाथ के छोला-पुलाव की कुछ बात अलग है। शुद्ध शाकाहारी हूं, इसलिए हरी सब्जियां अधिक लेता हूं। घर का खाना पसंद करता हूं। आपको ताज्जुब होगा, शादी या अन्य समारोह में भी घर से खाना खाकर जाता हूं। वहां थोड़ा-बहुत ले लेता हूं। जैसे आइसक्रीम आदि (हंसते हुए)। मैं किसी का दिल नहीं दु:खा सकता, इसलिए आमंत्रण अस्वीकार नहीं करता।
शादी से पहले फिल्में देखता था, लेकिन अब आमतौर पर संभव नहीं हो पाता। शादी के पहले अकेले टॉकीज चला जाता था, लेकिन अब उसके पास समय नहीं है और अब अकेले जा नहीं सकते(हंसते हुए)। वैसे परिणीता चोपड़ा की फिल्म हंसी तो फंसी देखी। शाहरुख का अभिनय अच्छा लगता है। sabhar :http://www.bhaskar.com/
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