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रविवार, 13 अप्रैल 2014

आध्यात्मिक विकास का मंत्र

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आध्यात्मिक विकास का मंत्र

ज्ञान का अर्थ है-विद्या बुद्धिमत्ता, विवेक दूरदर्शिता, सद्भावना, उदारता, न्याय प्रियता. विज्ञान का अर्थ है- योग्यता, साधन, शक्ति, सम्पन्नता, शीघ्र सफलता प्राप्त करने की सामर्थ्य.
आत्मिक और भौतिक दोनों क्षेत्रों में जब संतुलित उन्नति होती है, तभी उसे वास्तविक विकास माना जाता है.
भारत प्राचीन काल में बुद्धिमान बनने के लिए ज्ञान की और बलवान बनने के लिए विज्ञान की उपासना में संलग्न रहता था. योगी लोग जहां भक्ति भावना द्वारा भगवान में संलग्न होते थे, वहां कष्ट साध्य साधनाओं तथा तपश्चर्याओं द्वारा अपने में अनेक प्रकार की सामथ्र्य भी उत्पन्न करते थे. भावना से भगवान और साधना से शक्ति प्राप्त होती है, यह निर्विवाद है.
आज का ज्ञान प्रत्यक्ष दृश्यों, अनुभवों व विज्ञान मशीनों पर अवलंबित है. वैज्ञानिक भौतिक जानकारी तथा शक्तियां पाने के लिए भौतिक उपकरणों का प्रयोग कर रहे हैं. यह तरीका  खर्चीला, श्रमसाध्य, स्वल्पफलदायक एवं अस्थायी है. जो ज्ञान बड़े-बड़े विद्वानों, प्रोफेसरों, द्वारा उत्पन्न किया जा रहा है, वह भौतिक जानकारी तो काफी बढ़ा देता है, पर उससे अंत:करण में आत्मिक महानता, उदार दृष्टि तथा लोकसेवा के लिए आत्म त्याग की भावना पैदा नहीं होती. प्राचीनकाल में ज्ञान और विज्ञान के आधार आज से भिन्न थे.
आज जिस प्रकार हर वस्तु जड़ जगत और भौतिक परमाणुओं में से खोजी और उपलब्ध की जाती है, उसी प्रकार प्राचीन काल में प्रत्येक प्रत्येक शक्ति आत्मिक जगत में से ढूंढ़ी जाती थी. आज का आधार भौतिकता है, प्राचीनकाल का आधार आध्यात्मिकता था.
ज्ञान-विज्ञान का प्राचीन शोध गायत्री और यज्ञ के आधार पर होता था. यही दोनों अध्यात्म विद्या के माता-पिता हैं. गायत्री ज्ञान रुपिणी है, यज्ञ विज्ञान प्रतीक है. गायत्री मंत्र के 24 अक्षरों में मनुष्य जाति का ठीक प्रकार प्रदर्शन करने वाली शिक्षाएं भरी हैं. इन अक्षरों का गुंथन रहस्यमय विद्या के रहस्यमय आधार पर भी है.
इनकी नियमित उपासना से अलौकिक शक्तियां एवं आध्यात्मिक गुणों की तेजी से अभिवृद्धि होती है, बुद्धि तीव्र होती है, जिसके आधार पर जीवन की समस्या की अनेक गुत्थियों को सरल किया जा सकता है. यज्ञ का विज्ञान अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है. सांस्कृतिक पुनर्त्थान ज्ञान-विज्ञान बिना असंभव है. भारतीय संस्कृति के बीज मंत्र गायत्री की शिक्षाओं तथा शक्तियों के आधार पर हमारा सारा ढांचा खड़ा है. यदि हम गायत्री माता और यज्ञ पिता की प्रतिष्ठा और उपासना करें तो और भी उत्तम व महत्त्वपूर्ण वस्तुएं पा सकते हैं.
-गायत्री तीर्थ शांतिकुंज हरिद्वार sabhar :http://www.samaylive.com/

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हर आत्मा में है परमात्मा

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हर आत्मा में है परमात्मा

भौतिक प्रकृति निरन्तर परिवर्तित होती रहती है.
सामान्यत: भौतिक शरीरों को छह अवस्थाओं से निकलना होता है- वे उत्पन्न होते हैं, बढ़ते हैं, कुछ काल तक रहते हैं कुछ गौण पदार्थ उत्पन्न करते हैं, क्षीण होते हैं और अन्त में विलुप्त हो जाते हैं. यह भौतिक प्रकृति अधिभूत कहलाती है. यह किसी निश्चित समय में उत्पन्न की जाती है और किसी निश्चित समय में विनष्ट कर दी जाती है.
परमेश्वर के विराट स्वरूप की धारणा, जिसमें सारे देवता तथा उनके लोक सम्मिलित हैं, अधिदैवत कहलाती है. प्रत्येक शरीर में आत्मा सहित परमात्मा का वास होता है, जो भगवान कृष्ण का अंश स्वरूप है. यह परमात्मा अधियज्ञ कहलाता है और हृदय में स्थित होता है.
परमात्मा प्रत्येक आत्मा के पास आसीन है और आत्मा के कार्यकलापों का साक्षी है तथा आत्मा की विभिन्न चेतनाओं का उद्गम है. यह परमात्मा प्रत्येक आत्मा को मुक्त भाव से कार्य करने की छूट देता है और उसके कार्यों पर निगरानी रखता है. परमेश्वर के इन विविध स्वरूपों के सारे कार्य उस कृष्णभावनाभावित भक्त को स्वत: स्पष्ट हो जाते हैं, जो भगवान की दिव्यसेवा में लगा रहता है.
अधिदैवत नामक भगवान के विराट स्वरूप का चिन्तन उन नवदीक्षितों के लिए है जो भगवान के परमात्म स्वरूप तक नही पहुंच पाते. अत: उन्हें परामर्श दिया जाता है कि वे उस विराट पुरुष का चिन्तन करें जिसके पांव अधोलोक हैं, जिसके नेत्र सूर्य तथा चन्द्र हैं और जिसका सिर उच्चलोक है.
जो कोई भी कृष्णभावनामृत में अपना शरीर छोड़ता है, वह तुरन्त परमेश्वर के दिव्य स्वभाव को प्राप्त होता है. परमेश्वर शुद्धातिशुद्ध है, अत: जो व्यक्ति कृष्णभावनाभावित होता है, वह भी शुद्धातिशुद्ध होता है. श्रीकृष्ण का स्मरण उस अशुद्ध जीव से नहीं हो सकता जिसने भक्ति में रहकर कृष्णभावनामृत का अभ्यास नहीं किया. अत: मनुष्य को चाहिए कि जीवन के प्रारम्भ से ही कृष्णभावनामृत का अभ्यास करे.
(प्रवचन के संपादित अंश श्रीमद्भगवद्गीता से साभार) sabhar :http://www.samaylive.com/

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टीचर का अश्लील MMS बना छात्र कर रहे ब्लैकमेल

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चार छात्रों ने बनाया महिला टीचर का MMS

चार छात्रों ने बनाया महिला टीचर का MMS


ट्यूशन पढऩे वाले छात्रों द्वारा अपनी ही टीचर का अश्लील एमएमएस बनाकर उसे ब्लैकमेल किए जाने का एक मामला प्रकाश में आया है। मामला हरियाणा के जींद का बताया जा रहा है।

पीड़ित टीचर की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और चारों छात्रों को नामजद कर उन्हें गिरफ्तार कर छानबीन शुरू कर दी है।

जानकारी के अनुसार, शहर निवासी चार छात्र तरुण, वरुण, राहुल व धैर्य एक 23 साल की टीचर के पास ट्यूशन पढ़ने आया करते थे

अकेली टीचर के साथ किया यौन शोषण!

टीचर ने शहर थाना पुलिस को दी शिकायत में बताया कि एक दिन जब वह घर पर अकेली थी तो चारों ने लड़के आएं और उसके साथ जोर जबरदस्ती शुरू कर दी।

यहां तक की उसके कपड़े भी फाड़ डाले। इस दौरान उन लड़कों ने उसका मोबाइल से अश्लील एमएमएस भी बनाया।

इसी एमएमएस के आधार पर चारों युवक उसे ब्लैकमेल भी करते रहे। जब उसने चारों का विरोध किया तो उन्होंने उस अश्लील एमएमएस को कई अन्य मोबाइल पर भी भेज दिया।

चारो छात्र गिरफ्तार

युवा टीचर ने जब किसी और के मोबाइल पर अपना एमएमएस देखा तो उसके होश उड़ गए। इस दौरान लड़कों ने उसे जान से मारने की धमकी भी दी।

इस संबंध में थाना प्रभारी कमलदीप ने बताया कि छात्रों द्वारा टीचर का का अश्लील एमएमएस बनाए जाने का मामला उनके संज्ञान में आया है।

उन्होंने पीड़िता के अभिभावकों की शिकायत पर चार युवकों को नामजद किया है। पुलिस ने चारों को गिरफ्तार भी कतर लिया है। आज उन्हें कोर्ट में पेश किया जाएगा।sabhar :http://www.amarujala.com/

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शनिवार, 12 अप्रैल 2014

मध्ययुग में प्रताड़ना के खौफनाक तरीके, देखें तस्वीरें

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मध्ययुग में प्रताड़ना के 10 खौफनाक तरीके, देखें तस्वीरें


मध्ययुग को कभी अच्छा नहीं माना गया। यूं कह लें कि बर्बरता का दूसरा नाम था 'मध्ययुग'। शरीर के अंगों पर जानलेवा प्रहार करने से लेकर उसे छिन्न-भिन्न करने का आदेश देना उन दिनों आम बात हुआ करती थी। किसी ने गलती से भी अगर जुर्म कर दिया और जुर्माना देने में असमर्थ साबित होता, तो उसे खौफनाक अंजाम से गुजरना पड़ता था। व्यक्ति की जीभ-होठ काट दिए जाते थे।
 
प्रताड़ना की ये तो इंतिहा है
 
पीड़ित को बेरहमी से मौत के घाट उतारा जाता था। इस युग के अधिकांश लोग गरीबी व बीमारी के चपेट में थे। उन पर जमींदारों का जोर चलता था। इसके अलावा वे जमींदारों के गुलाम हुआ करते थे। आइए, नजर डालते हैं मध्ययुग में प्रताड़ना के 10 खौफनाक तरीकों पर, जिसे पढ़कर आपकी भी रूह कांप उठेगी। 
 
धारदार पोल घुसेड़ देते
 
15वीं सदी में व्लाद तृतीय वालाशिया का राजकुमार था। व्लाद को ड्रैकुला नाम से भी जाना जाता है। ऐसा इसलिए, क्योंकि वह बेहद निर्दयी था। अपराध सिद्ध होने पर वह धारदार पोल को पीड़ित की शरीर के आर-पार करने का हुक्म सुनाता था। पोल की मोटाई इतनी होती थी कि उसे देख किसी भी इंसान की रूह कांप उठे।
 
जिस शख्स को ये सजा मिलती थी, उसे जबरन धारदार पोल पर बैठने के लिए मजबूर किया जाता था। पोल धीरे-धीरे उसके शरीर को चीरता हुआ निकल जाता था। तीन दिन की असहनीय पीड़ा झेलने के बाद आखिरकार पीड़ित की मौत हो जाती थी। व्लाद इस कदर जालिम इंसान था कि खाना खाते वक्त उसे ऐसा देखने में बड़ा आनंद आता था। जरा सोचिए, तब हैवानियत किस कदर सिर चढ़कर बोलती थी। 

मध्ययुग में प्रताड़ना के 10 खौफनाक तरीके, देखें तस्वीरें

जूडस क्रैडल यानी यहूदी पालना
 
यहूदी पालना एकबारगी देखने में धारदार पोल से जरा कम कष्टदाई लगे, लेकिन ये इंसान को तड़पा-तड़पा कर मारने वाला हथियार था। लोगों को नग्न कर यहूदी पालने में बिठाया जाता था। प्रताड़ना की ये प्रक्रिया बेहद खौफनाक होती थी। पीड़ित को तीन जगह से बंधे एक रिंगनुमा खाली सीट पर लटका दिया जाता था। फिर इसके नीचे यहूदी पालने को लगाया जाता। इस दौरान पीड़ित के पैर को रस्सी से बांध दिया जाता था, जिसे नीचे खड़े कुछ लोग पकड़े होते थे। सजा का आदेश मिलते ही, लोग रस्सी को एकदम से खींच देते। गौरतलब है कि स्त्री को उलटा और पुरुष को सीधे इस जानलेवा हथियार पर बिठा कर सजा दी जाती थी। इस सजा के दौरान लोग घंटों रस्सी को खींचते रहते थे।
 धातु का पिंजड़ा
 
इसे कॉफिन प्रताड़ना कहा जाता था। मध्ययुग में ये काफी प्रचलित था। अगर आपको ध्यान हो तो किसी हॉलीवुड फिल्म में आपने इस तरह से सजा देते हुए देखा होगा। पीड़ित को इस पिंजरे में कैद किया जाता था, ताकि वह अपनी जगह से हिल भी न सके। इसके बाद पिंजड़े को किसी पेड़ से लटका दिया जाता था। इस तरह की सजा ईशनिंदा जैसे गंभीर अपराध के लिए दी जाती थी। पीड़ित को या तो आदमखोर जानवर काट खाते या फिर वह पक्षियों का निवाला बनता था। हालांकि, देखने वाले पीड़ित का दर्द बढ़ाने के लिए उस पर पत्थरों से भी हमला करते थे। 

मध्ययुग में प्रताड़ना के 10 खौफनाक तरीके, देखें तस्वीरें

हड्डीतोड़ शैय्या
 
मध्ययुग में इस प्रताड़ना को सबसे दर्दनाक माना जाता था। हड्डीतोड़ शैय्या एक लकड़ी का फ्रेम है। इसमें लकड़ी के दो पट्टे ऐसे होते थे, जो लीवर के सहारे ऊपर की ओर उठाए जाते थे। लीवर शैय्या के दोनों ओर होता था। दोनों पट्टों पर नुकीली कीलें होती थीं। सजा देते वक्त पीड़ित के हाथ-पांव बांध कर उसे इस पर लिटा दिया जाता था। फिर शुरू होता था प्रताड़ना का खेल। शैय्या के दोनों ओर एक-एक व्यक्ति लीवर को मजबूती से उठाता और जैसे-जैसे पट्टा उठता पीड़ित की हड्डियां कड़कड़ाहट की आवाज के साथ टूटती जातीं। ये खेल तब तक चलता, जब तक पीड़ित दम नहीं तोड़ देता।

मध्ययुग में प्रताड़ना के 10 खौफनाक तरीके, देखें तस्वीरें
ब्रेस्ट रिपर
 
ये प्रताड़ना सिर्फ महिलाओं को दी जाती थी। अगर कोई महिला दूसरे पुरुष के साथ अंतरंग संबंध बनाती पाई जाती या फिर उस पर इस तरह का आरोप साबित होता, तो ब्रेस्ट रिपर के जरिए उसे प्रताड़ना दी जाती थी। रिपर को महिला के ब्रेस्ट से लगाकर जोर से दबा दिया जाता था। हालांकि, हैवानियत की इंतिहा इतनी ही नहीं, चिमटानुमा इस हथियार को आग पर तपाया जाता था। इस प्रताड़ना के दौरान पीड़िता के उभार को पूरी तरह से निकाल बाहर किया जाता था।  

मध्ययुग में प्रताड़ना के 10 खौफनाक तरीके, देखें तस्वीरें

घातक हथियार
 
तस्वीर में देख आप अंदाजा लगा सकते हैं कि छोटा-सा ये हथियार पीड़ित के लिए कितना कष्टदायक साबित हो सकता है। इस हथियार का इस्तेमाल केवल महिलाओं को सजा देने के लिए किया जाता था। ये सजा उन महिलाओं की दी जाती थी, जिन पर समलैंगिक होने या फिर बच्चा गिराने का आरोप सिद्ध होता था। ये नुकीला हथियार दो हिस्सों में बंट जाता है। इस सजा से शायद ही कोई महिला बच पाई थी।

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ब्रेकिंग व्हील
 
ब्रेकिंग व्हील को कैथरीन व्हील के नाम से भी जाना जाता था। इससे पीड़ित जिंदा नहीं बचता था। लेकिन ये उसे इतना तड़पा कर मारता था कि देखने वालों की रूह कांप उठती थी। पीड़ित को व्हील से बांध कर उस पर हथौड़े से तब-तक प्रहार किया जाता था, जब तक उसके शरीर की हड्डियां टूट नहीं जातीं। फिर मरने के लिए उसे छोड़ दिया जाता। ऐसा भी कहा जाता है कि जिन पर दया आ जाती, उनकी सिर्फ छाती और पेट पर ही हथौड़े से वार किया जाता था। हालांकि, पीड़ित किसी भी सूरत में जिंदा नहीं बचता था।
मध्ययुग में प्रताड़ना के 10 खौफनाक तरीके, देखें तस्वीरें
आरी प्रताड़ना
 
ये सजा पीड़ित को घोर व गंभीर अपराध के लिए दी जाती थी। इसमें एक खंभे के सहारे पीड़ित का पैर बांधकर उसे उलटा लटका दिया जाता था। फिर जो होता था, उसे आप तस्वीर में देख सकते हैं। महिलाओं के साथ भी ऐसा ही किया जाता था।

मध्ययुग में प्रताड़ना के 10 खौफनाक तरीके, देखें तस्वीरें

हेड क्रसर
 
तस्वीर में आप देख सकते हैं कि एक टोपीनुमा यंत्र प्रताड़ना के लिए बनाया गया है। पीड़ित का सिर इस टोपी से जकड़ दिया जाता था। इसके बाद एक व्यक्ति धीरे-धीरे लीवर को घुमाने लगता था। जैसे-जैसे लीवर घूमता, टोपी से लगे रॉड पास आते जाते। फिर एक झटके में पीड़ित का सिर आवाज के साथ फट जाता।
 

मध्ययुग में प्रताड़ना के 10 खौफनाक तरीके, देखें तस्वीरें

नी स्प्लिटर
 
इस हथियार को देखते ही आप अंदाजा लगा सकते हैं कि ये कितना खतरनाक होगा। इसे नी स्प्लिटर कहते हैं। मतलब, पैरों को कुचलते हुए बेरहमी से अलग कर देने वाला हथियार। sabhar :http://www.bhaskar.com/


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वजन घटाने से लेकर जवां त्वचा तक, जानें तरबूज के 7 बड़े फायदे

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गर्मियों में फायदों से भरा है खरबूज

गर्मियों में फायदों से भरा है खरबूज


प्यास बुझाने से लेकर पोषण तक, गर्मियों के फल तरबूज के फायदे ढेर सारे हैं।

इसमें मौजूद 92 प्रतिशत पानी न सिर्फ इस मौसम में आपको डीहाइड्रेशन से बचाता है बल्कि इसमें ऐसे कई पोषक तत्व हैं जो आपके लिए सेहत से जुड़े कई फायदों का सबब है।

वजन घटाने में फायदेमंद

तरबूज में मौजूद सिट्रयूलाइन नामक तत्व शरीर से फैट्स कम करने में मददगार है। यह फैट्स बनाने वाली कोशिकाओं की सक्रियता कम करता है। इसके अलावा, इसमें पानी अधिक है जो डाइटिंग के दौरान बेहतरीन विकल्प है।

दिल और हड्डियों के रोग में फायदेमंद

तरबूज में मौजूद लाइकोपीन दिल और हड्डियों, दोनों की सेहत के लिए फायदेमंद है। यह शरीर में रक्त संचार ठीक करता है जिससे दिल से जुड़े रोगों का रिस्क कम होता है।

इसके अलावा, तरबूज में अच्छी मात्रा में पोटेशियम है जो हड्डियों को मजबूत बनाता है।

जवां त्वचा के लिए

तरबूज में भरपूर मात्रा में पानी, फ्लेवनॉयड्स, कैरीटोनॉयड्स आदि तत्व होते हैं जो त्वचा के कसाव को बरकरार रखने और लंबे समय तक एजिंग के निशानों को दूर रखने में मददगार हैं।

किडनी के लिए फायदेमंद

तरबीज युरीन के फ्लो को ठीक रखता है और लिवर की प्रक्रिया सुचारु रखता है। इसके सेवन से पाचन ठीक तरह से होता है और किडनी से जुड़े रोगों का रिस्क कम होता है।

मांसपेशियों के लिए फायदेमंद

तरबूज में पोटैशियम अच्छी मात्रा में होता है जो शरीर में नर्वस सिस्टम और मांसपेशियों की सेहत के लिए जरूरी है। इसके सेवन से मांसपेशियों से जुड़ी समस्याओं से बचा जा सकता है।

प्रतिरोधी क्षमता बढ़ाता है

तरबूज में अल्काइन अधिक मात्रा में होते हैं जो शरीर की प्रतिरोधी क्षमता बढ़ाते हैं और बुखार व संक्रमण से दूर रखने में मददगार होते हैं।

आंखों के लिए फायदेमंद

तरबीज में बीटा कैरोटीन है जो रतौंधी और मोतियाबिंद जैसे रोगों से बचाव में मददगार है। इसका नियमित सेवन आंखों के लिए बेहद फायदेमंद है।

sabhar : http://www.amarujala.com/

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कम खाओ, लंबी उम्र जियो

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कम खाओ, लंबी उम्र जियो

न्यूयॉर्क: बंदर की लंबी उम्र का राज यह है कि वे कम कैलोरी का खाना खाते हैं। जो लोग जी भरकर खाते हैं उनके मुकाबले बंदर ज्यादा समय तक जिंदा रहते हैं। यह बात एक अनुसंधान में सामने आई है। विभिन्न प्रजातियों में जीवित रहने पर किए गए अध्ययन में यह पता लगाया कि इसमें खुराक पर बंदिश का क्या प्रभाव पड़ता है।

विस्कोन्सिन नेशनल प्रीमेट रिसर्च सेंटर मेडिसन में 1989 से किए जा रहे अध्ययन में 38 मैकाकुएस को जो भी खाना चाहते थे, दोगुना खाने दिया गया और 38 बंदरों को 30 प्रतिशत कम कैलोरी दी गई। इसी प्रकार का अध्ययन 2009 में किया गया जिसमें बंदरों को कैलोरी प्रतिबंधित खुराक दी गई जिससे उम्र संबंधी कारणों से उनकी मौत का खतरा कम पाया गया।

अध्ययन का नेतृत्व करने वाले विस्कोन्सिन विश्वविद्यालय में जैवरसायनज्ञ रोजाल्यन एंडर्सन ने कहा, हमने इस अवधारणा की जांच की कि क्या कैलोरी पर प्रतिबंध उम्र की प्रक्रिया को कम करता है? और मैं समझता हूं कि हमने यह दिखाया कि यह होता है। (एजेंसी) sabhar ;http://zeenews.india.com/

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शुक्रवार, 11 अप्रैल 2014

मॉडल पत्‍नी का कोमोत्तेजक फोटो शूट देख पति ने दी मौत की सुपारी ..

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एक मॉडल और दो बेटियों की मां का दावा है कि उसका करोड़पति पति उसके काम करने को लेकर नाराज था. यही नहीं वह अपनी पत्‍नी के कामोत्तेजक फोटो शूट से इतना जल गया था कि उसने एक शूटर को 80,000 अमेरिकी डॉलर यानी कि करीब 48 लाख रुपये की सुपारी देकर उसे मरवाने की साजिश तक रच डाली.
खबर के मुताबिक अमेरिका में रहने वाली 32 साल की मोनिका ने अपनी उम्र से बड़े बिजनेस टाइकून डीनो गुगलिएलमेली से शादी करने के लिए साल 2003 में अपने मॉडलिंग करियर को अलविदा कह दिया. लेकिन दो बेटियों के हो जाने के बाद वह काम पर वापस जाना चाहती थी. उसने साल 2010 के आखिर में फिर से अपना एक्टिंग और मॉडलिंग करियर शुरू करने के बारे में सोचा. लेकिन पति ने इसकी मंजूरी नहीं दी.



जांच से जुड़े एक करीबी सूत्र के मुताबिक जब डीनो को पता चला कि मोनिका ने एक अंडरवियर शूट करवाया है तो वह गुस्‍से से आग बबूला हो गया. उनके रिश्‍ते में दरार आ गई और वे दोनों बेटियों की कस्‍टडी पाने के लिए आपस में झगड़ने लगे. इस बीच, मोनिका को यह पता लग गया था कि उसके पति ने अपने एक दोस्‍त को उसकी हत्‍या की सुपारी दी है.

हत्‍या की कोशिश के आरोप में 52 वर्षीय डीनो को अगले महीने ट्रायल का सामना करना होगा.

 

एक सूत्र के मुताबिक, 'मोनिका का पति जलन से भर गया था. वह इस बात को नहीं पचा पा रहा था कि मैक्सिम जैसी मैगजीन पर लोग उसकी पत्‍नी की कामोत्तेजक तस्‍वीरें देख रहे हैं. जब उसने साल 2012 में केनेथ मेथ्‍यू के साथ मोनिका का फोटो शूट देखा तो वह गुस्‍से से पागल हो गया. वह एक प्रोफेशनल फोटो शूट था, जिसे लॉस एंजेलिस के एक स्‍टूडिया में शूट किया गया था. फोटो शूट के दौरान वहां असिस्‍टेंट, मेकअप आर्टिस्‍ट और स्‍टाइलिस्‍ट मौजूद थे. लेकिन डीनो ने मोनिका पर केनेथ के बेहद करीब होने का आरोप लगाया. हां, फोटो कोमोत्तेजक थीं, जिसे मोनिका ने अंडरवियर पहनकर शूट किया था'.

 

सूत्र ने कहा, 'डीनो ने मोनिका से साफ-साफ कह दिया कि अब वह कोई फोटो शूट नहीं करेगी और घर पर रहकर दोनों बेटियों की देखभाल का जिम्‍मा उठाएगी. लेकिन मोनिका काम करना चाहती थी. हालात और खराब होने लगे. उसने मोनिका पर कई तरह की पाबंदियां लगा दीं. अब मोनिका ने फैसला कर लिया कि वह अपने पति को छोड़ देगी. इस बात पर डीनो पूरी तरह बिगड़ गया. और फिर उसने तथाकथित रूप से एक शख्‍स को मोनिका की हत्‍या की सुपारी दे डाली'.

 

मोनिका को मरवाने के लिए डीनो ने पूर्व सेना अधिकारी रिचर्ड को करीब 48 लाख रुपये की सुपारी दी. लेकिन रिचर्ड ने पुलिस को सारी बात बता दी. फिर एक योजना के तहत रिचर्ड ने चुपचाप लंच के दौरान 90 मिनट तक डीनो की सारी बातें रिकॉर्ड कर लीं, जिसमें उसे यह कहते हुए सुना गया कि जब काम हो जाएगा तब वह बहुत खुश होगा. यही नहीं उसने रिचर्ड से यह भी कहा, 'तुम्‍हें तुम्‍हारे काम की पूरी कीमत मिलेगी. चिंता मत करो, मैं तुम्‍हरा बचाव करूंगा'.




डीनो फिलहाल जेल में है, लेकिन मोनिका का कहना है कि सलाखों के पीछे होने के बावजूद वह उसे मरवाने की कोशिश कर रहा है. बहरहाल, अब मोनिका एक बार फिर एक्टिंग ऑर मॉडलिंग के करियर में अपना ध्‍यान लगाना चाहती हैं.










और भी...sabhar : http://aajtak.intoday.in/

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आपसे बात करेगी कार

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अब जमाना है सुपर स्मार्ट कार का. ऐसी कार, जो आपकी बात सुन ले और समझ ले कि उसे कहां जाना है. कब रुकना है.
जर्मनी की कार्ल्सरूहे यूनिवर्सिटी ने इस तरह की कार तैयार कर ली है. जाहिर सी बात है कि यह इंटरनेट से जुड़ी है और इशारों पर चल सकती है. कार के कैमरे आस पास की चीजें देख सकते हैं और कंप्यूटर खुद स्टीयरिंग घुमाने लगता है. सेंसर इतने कड़े हैं कि अगर पास से ट्रक गुजर रहा हो, तो कार का सेंसर इसे पकड़ लेता है. कार रुक जाती है, या रास्ता बदल लेती है.
कार विकसित करने वाले कार्ल्सरूहे यूनिवर्सिटी के क्रिस्टोफ श्टिलर कहते हैं कि इससे हादसे कम होंगे, "भविष्य की गाड़ी में 100 मेगाबाइट जितना डाटा प्रॉसेस करना होगा. इस वक्त तो यह इतना ज्यादा डाटा है, कि हम इसके बारे में सोच भी नहीं सकते. लेकिन कंप्यूटर तकनीक तेजी से बेहतर हो रही है और जल्द ही आप डाटा प्रॉसेस करके गाड़ी को कमांड दे सकेंगे."
कार बदलेगी तो सड़क पर चलने वाले ट्रैफिक का बर्ताव भी बदल जाएगा. सॉफ्टवेयर कंपनियां इस ताक में हैं कि कब नई गाड़ी बाजार में आए और वे कैसे नए सॉफ्टवेयर तैयार कर लें. इंटरनेट पर भविष्य की ट्रैफिक व्यवस्था की बानगी दिख सकती है. कारें आपस में संपर्क करेंगी, एक दूसरे से जुड़ी होंगी, आपस में सूचनाएं बांटते हुए आगे बढ़ेंगी, ताकि किसी तरह का हादसा न हो.


लेकिन सभी गाड़ियां एक दूसरे से तभी जुड़ेंगी, जब उनके बीच इंटरनेट कनेक्टिविटी हो. इंटरनेट से चलने वाली गाड़ियों का सपना बहुत जल्दी पूरा हो सकता है. जर्मन टेलिकॉम कंपनी के एक्सपर्ट हॉर्स्ट लेओनबर्गर का कहना है, "भविष्य में अलग तरह की कंपनियां भी इस उद्योग में आएंगी. गूगल तो अभी से शामिल है और यह उद्योग और सेवाएं उपलब्ध कराएगा. मेरे हिसाब से क्रांति आती दिख रही है, किस तरह कार उद्योग ऑनलाइन और इंटरनेट जगत में अपने को शामिल करेगा और अपने लिए जगह बनाएगा."

लेकिन सिर्फ सॉफ्टवेयर गाड़ी नहीं चला सकते. उसके लिए एक गाड़ी भी होनी चाहिए. यानी दोनों क्षेत्रों को ज्यादा सहयोग करने की जरूरत है. अगर ऐसा हुआ तो हो सकता है कि सड़कों पर कार अपने आप चलती जाए, और आप पिछली सीट पर बैठ कर दफ्तर के काम निपटा दें या फिर लूडो खेल लें. sabhar :http://www.dw.de/

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लैब में बनेंगे असली हीरे

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अंग्रेजी की एक कहावत है कि हीरा लड़कियों का सबसे अच्छा दोस्त होता है. हीरे के गहनों से सजना संवरना तो ठीक है लेकिन ऑपरेशन थिएटर से लेकर कई और जगहों पर भी हीरा बहुत काम आता है. अब मनचाहे हीरे लैब में भी बनाए जा रहे हैं.

Diamant aus dem Plasmareaktor

हीरों में सिर्फ आंखों को चौंधियाने वाली चमक ही नहीं होती बल्कि बेहद कठोर होने के उसके गुण के कारण विज्ञान और उद्योग जगत में इनकी खासी मांग है. प्रकृति में हीरों का भंडार सीमित है और मांग को पूरा करने में एक नई तकनीक से मदद मिल सकती है.
दरअसल प्रकृति में पाए जाने वाले हीरे बहुत ऊंचे तापमान और दबाव वाली स्थिति में अरबों साल में जाकर बनते हैं. जर्मनी के फ्राउनहोफर इंस्टीट्यूट ने ऐसी तकनीक विकसित की है जिससे वैज्ञानिक बहुत कम समय में हीरे बना पा रहे हैं. इससे मनचाहे आकार, आकृति, रंग और विद्युतीय या ताप की चालकता वाले हीरे बनाना संभव हो गया है.
हीरे के बड़े टुकड़े बनाने हों या उसकी पतली सी परत, इस तकनीक से यह सब संभव है. सीवीडी, यानि केमिकल वेपर डिपोजिशन नाम की इस प्रक्रिया से बहुत कम समय में हीरे तैयार किए जा सकते हैं. हीरे के वेफर के आकार की एक पतली परत बनाने में सिर्फ 100 घंटे लगते हैं. वहीं अगर हीरे के नैनो क्रिस्टल बनाने हों तो केवल कुछ घंटे ही लगेंगे.
 Fraunhofer Institut synthetische Diamanten
हीरे की पतली से पतली परत बनाई जा सकती है
सिर्फ गहनों में ही नहीं
फ्राउनहॉफर आईएएफ की ग्रुप मैनेजर, निकोला हाइड्रिष बताती हैं कि जितनी मोटाई का हीरा चाहिए उतना ही समय लगेगा, "हम केमिकल वेपर डिपोजिशन का तरीका अपनाते हैं जिससे बाकी प्रक्रियाओं के मुकाबले एक काफी बड़ी सतह पर हीरे जमाए जा सकते हैं. इस प्रक्रिया से हम बहुत बढ़ियां क्वालिटी के हीरे बना पा रहे हैं जिनका इस्तेमाल इलेक्ट्रानिक उपकरणों में भी किया जा सकता है."
 Fraunhofer Institut synthetische Diamanten in einer Uhr
घड़ी के डायल में भी इस्तेमाल होता है हीरा
हीरे का इस्तेमाल ऑपरेशन में काम आने वाले डॉक्टरों के कुछ खास उपकरणों में होता है. इसके अलावा ड्रिलिंग और स्टील जैसी कठोर चीज को भी आसानी से काटने में इसका इस्तेमाल होता है. हीरा ताप या गर्मी का भी बहुत अच्छा चालक है.
सभी के लिए हीरा
घड़ी के डायल में भी हीरे का इस्तेमाल होता है. वैज्ञानिक प्रक्रियाओं और मशीनों में इस्तेमाल के अलावा भविष्य में इन कृत्रिम हीरों का इस्तेमाल गहनों में भी किया जा सकेगा. हीरे में अलग अलग तरह के तत्व मिलाकर मनचाहे रंग का हीरा भी पाया जा सकता है. जैसे बोरॉन मिलाने से नीला, नाइट्रोजन मिलाने से पीला और एक खास प्रक्रिया से हीरे में 'नाइट्रोजन वेकेंसी सेंटर' बनाने से गुलाबी रंग का हीरा बन सकता है.
फिलहाल इस कृत्रिम तरीके से बना हीरा प्रकृति में पाए जाने वाले हीरों से भी महंगा पड़ेगा. अगर उद्योग जगत आगे आकर इस वैज्ञानिक तकनीक को अपनाता है और बड़े स्तर पर हीरों का उत्पादन होने लगता है तो वह दिन दूर नहीं जब हीरा सिर्फ सदा के लिए ही नहीं, सभी के लिए भी होगा.
रिपोर्ट: ऋतिका राय
संपादन: ईशा भाटिया

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अब सूरज की रोशनी से ही तैयार हो जाएंगे सोलर सेल

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अब सूरज की रोशनी से ही तैयार हो जाएंगे सोलर सेल

सोलर सेल सूरज से ऊर्जा ग्रहण करते हैं लेकिन क्या हो अगर सूरज के प्रकाश से ही इन सोलर सेल्स को तैयार किया जा सके।

शोधकर्ताओं ने एक ऐसी प्रणाली विकसित कर ली है जिसके जरिये सूरज खुद ब खुद सौर ऊर्जा सामग्री का उत्पादन करेगा। पारंपरिक सिलिकन सेल की तुलना में कम लागत वाले, पहले से ज्यादा पतले इन सेल्स का इस्तेमाल बहुत जल्द ऊर्जा उत्पादन के लिए इमारतों के अंदर कोटिंग के रूप में किया जा सकेगा।
ओरेगन स्टेट यूनिवर्सिटी के केमिकल इंजीनियरों की इस खोज से बहुत ही जल्द सौर ऊर्जा की लागत को कम किया जा सकेगा। इस तकनीक से उत्पादन प्रक्रिया में तेजी भी लाई जा सकेगी और सौर उपकरणों व उन्हें चार्ज करने वाली ऊर्जा दोनों के लिए ही सूरज को साधन बनाया जा सकेगा। यूनिवर्सिटी में केमिकल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर चिह हुंग चांग ने कहा कि यह प्रणाली पर्यावरण के अनुकूल है। इसके जरिये कुछ ही मिनटों में सौर ऊर्जा सामग्री तैयार की जा सकती है जबकि दूसरे प्रक्रियाओं में इसे तैयार करने में 30 मिनट से दो घंटे का समय लगता है। उत्पादन प्रक्रिया में तेजी आने से लागत में कमी आएगी।' इस प्रक्रिया में कॉपर इंडियम डिसेलेनाइड से सौर सामग्री का निर्माण किया गया है। इसके अलावा तांबा, जस्ता, टिन और सल्फाइड के यौगिक का इस्तेमाल भी किया जा सकेगा।sabhar ; bhaskar.com
और पढ़ें: http://hindi.ruvr.ru/news/2014_04_04/270808094/

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पहला सोलर विमान बिना ईंधन भरेगा उड़ान

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दुनिया का पहला सोलर विमान बिना ईंधन भरेगा उड़ान, देखें तस्वीरें

बर्न. स्विट्जरलैंड के दो दिग्गज पायलटों आंद्रे वुर्सबर्ग और बेट्रेंड पैकर्ड ने अपनी टीम के साथ मिलकर दुनिया के एकमात्र ऐसे सोलर प्लेन का निर्माण किया है जो दिन और रात दोनों समय बिना किसी फ्यूल सपोर्ट के उड़ सकेगा। स्विट्जरलैंड के रक्षामंत्री यूली म्यूरर ने बुधवार को एक समारोह में इस सोलर प्लेन (इम्पल्स-2) का अनावरण किया गया। अगले कुछ महीनों में फ्लाइट टेस्टिंग भी शुरू हो जाएगी। इससे पहले भी यह टीम छोटी-छोटी चार यात्राओं पर जा चुकी है। 
भारत से गुजरेगा विमान
 
विश्व भ्रमण मिशन- 2015 की शुरुआत फारस की खाड़ी के रेगिस्तान से होकर भारत, म्यांमार, चीन की विश्व प्रसिद्ध दीवार और अमेरिका, दक्षिणी यूरोप और उतरी अफ्रीका से गुजरेगा जो वापस फारस की खाड़ी में आकर समाप्त हो जाएगा। विमान के रुकने का स्थान अभी तय नहीं हुआ है।
 
यात्रा से देते हैं संदेश
 
स्वीट्जरलैंड के दोनों पायलट पूरी दुनिया को सौर ऊर्जा के उपयोग का संदेश देते हैं। ऊर्जा के इस विकल्प का पुरजोर समर्थन करने वाले ये पायलट अपने आविष्कार और एडवेंचर उड़ानों से इसे और मजबूती के साथ लोगों के समक्ष रखते हैं। युवाओं पर इनका खास जोर रहता है। 

दुनिया का पहला सोलर विमान बिना ईंधन भरेगा उड़ान, देखें तस्वीरें

पायलटों की जरूरतें 
 
> 4 से 5 दिन उड़ सकेगा प्रत्येक पायलट
> 2.4 किलोग्राम खाने की होगी रोजाना जरूरत
> 2.5 लीटर पानी की होगी जरूरत
> 01 लीटर स्पोट्र्स ड्रिंक हर रोज लगेगा 
> इमरजेंसी के दौरान पॉयलट की सीट में पैराशूट और लाइफ रैफ्ट लगे हुए हैं।
sabhar :http://www.bhaskar.com/

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