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बुधवार, 2 अप्रैल 2014

ट्रांसजेंडर्स के लिए भगवान है यह डॉक्टर, बौद्ध भिक्षु की भी कर चुका है सेक्स चेंज सर्जरी

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ट्रांसजेंडर्स के लिए भगवान है यह डॉक्टर, बौद्ध भिक्षु की भी कर चुका है सेक्स चेंज सर्जरी

सियोल। ट्रांसप्लांट सर्जरी, मेडिकल क्षेत्र में एक बहुत बड़ा कदम है। इसे ना सिर्फ लोगों की खोई हुई पहचान लौटाई, बल्कि तमाम मौकों पर नई जिंदगी भी दी। इस सर्जरी के मामले में दक्षिण कोरिया काफी तेजी से आगे निकल गया है। यहां आम सर्जरी के साथ ही लिंग परिवर्तन सर्जरी का चलन भी तेज़ी से बढ़ है। ऑपरेशन के जरिए लिंग परिवर्तन करने वाले डॉ. किम सियोक यहां ट्रांसजेंडर लोगों के लिए किसी भगवान से कम नहीं हैं। 
 
बौद्ध भिक्षु और जानी-मानी अभिनेत्री का लिंग परिवर्तन करने वाले डॉ. किम जानते हैं कि रूढ़ियों में फंसे इस देश में उनका काम बैचेनी पैदा कर देगा। एक बौद्ध भिक्षु को सर्जरी के जरिए पुरुष बनाने से पहले किम ने एक इंटरव्यू में कहा था कि उन्होंने ईश्वरीय शक्ति को चुनौती देने का फैसला किया है। 
 
किम ने बताया कि उन्हें बहुत दर्दनाक लगा कि ये ऑपरेशन करना चाहिए या नहीं क्योंकि उन्हें इस बात का डर था कि वो कहीं भगवान को चुनौती तो नहीं दे रहे। किम ने कहा कि किसी तरह से उन्होंने शर्म की भावना से खुद को निकाला। उनके मरीजों के लिए ये सर्जरी बहुत जरूरी थी। बिना इसके वो अपनी ही जान ले लेते। 
 
28 वर्षों में किए 320 ऑपरेशन
 
डॉ. किम दक्षिण कोरिया में लैंगिकता और लिंग को लेकर धीरे-धीरे बदल रहे विचारों के प्रवर्तक हैं। दक्षिण कोरिया में लैंगिकता जैसे विषय पर विचार-विमर्श वर्जित माना जाता है। डॉ किम ने 28 बरसों में लिंग परिवर्तन के 320 ऑपरेशन किए हैं। देश में शायद ही किसी डॉक्टर ने इतने ऑपरेशन किए हों। 
 
डॉ किम ने बताया 11 घंटे की सर्जरी कराने वाले बौद्ध भिक्षु इंटरव्यू के जरिए दुनिया के सामने नहीं आना चाहते, क्योंकि उन्हें डर है कि इस बात से उनके मंदिर के बौद्ध भिक्षुओं को ठेस ना पहुंचे। डॉ किम ने बताया कि बौद्ध भिक्षु हार्मोन थैरेपी ले रहे हैं और वो लंबे समय तक एक पुरुष की तरह जिंदगी जी सकते हैं।
ट्रांसजेंडर्स के लिए भगवान है यह डॉक्टर, बौद्ध भिक्षु की भी कर चुका है सेक्स चेंज सर्जरी

डॉ किम कब से कर रहे हैं सर्जरी
 
डॉ किम एक प्लास्टिक सर्जन के तौर पर बुसान के डॉन्ग-ए यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल में काम कर रहे हैं। इन्हें सर्जरी के जरिए चेहरे की विकृतियां दूर करने में महारथ हासिल है। उन्होंने लिंग परिवर्तन ऑपरेशन करने की शुरुआत 1986 में की, जब बहुत से ट्रांसजेंडर लोगों ने उनसे जननांग के निर्माण की बात कही। किम ने बताया कि सबसे पहले आने वाले शख्स ने भी अपना लिंग परिवर्तन कराया था।
 
डॉ किम उन्हें समझा-बुझाकर वापस भेज देते, क्योंकि उन्हें लिंग परिवर्तन सर्जरी की ज्यादा जानकारी नहीं थी। हालांकि, उन्होंने इस बारे में सोचना शुरू किया और इस बारे में जानकारी जुटानी शुरू की। कुछ साल बाद उन्होंने सर्जरी करने की शुरुआत कर दी। 
 
किम कहते हैं कि कुछ लोग बिना जननांगों या फिर कटे हुए कान, ओंठ और अंगुलियों के साथ पैदा होते हैं। ईश्वर क्यों लोगों को ऐसे बनाता है, क्या ये ईश्वर की गलती नहीं? क्या ट्रांसजेंडर लोग ईश्वर की गलती नहीं? डॉ किम को इस बात की बहुत खुशी है कि उन्हें ऐसे लोगों की मदद करने का मौका मिला, जिन्हें लगता है कि उन्हें गलत शरीर मिल गया। किम का विश्वास है कि वो भगवान से हुई गलतियों को दुरुस्त कर रहे हैं।

ट्रांसजेंडर्स के लिए भगवान है यह डॉक्टर, बौद्ध भिक्षु की भी कर चुका है सेक्स चेंज सर्जरी


किम ने कैसे विरोध का किया सामना
 
डॉ किम ने जब पहली बार इस तरह की सर्जरी करनी शुरू की, तो उनके पादरी ने इसका विरोध किया। उनके दोस्तों और सहयोगी डॉक्टरों ने तो यहां तक कह डाला कि अगर उन्होंने ये काम बंद नहीं किया तो वो नरक में जाएंगे। 
 
दक्षिण कोरिया में यौन अलपसंख्यकों के खिलाफ बहुत जबरदस्त पूर्वाग्रह है। कन्फ्यूशियस मत के मुताबिक ऐसे बच्चों को कभी भी अपने शरीर को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए, जो उन्हें उनके माता-पिता से मिला है। देश में रुढ़िवादी ईसाई समुदाय और पिछले सेना समर्थित तानाशाह यौन अल्पसंख्यकों की आवाज को अनसुना करते हैं। 
 
सियोल में क्रिश्चियन काउंसिल के अध्यक्ष हॉन्ग जे चुल ने कहा कि लिंग परिवर्तन ऑपरेशन ईश्वर की निंदा है और ये दुनिया को बेहद तकलीफदेह जगह बनाती है। उन्होंने डॉ किम को घृणा योग्य और बेचारा करार दिया।

ट्रांसजेंडर्स के लिए भगवान है यह डॉक्टर, बौद्ध भिक्षु की भी कर चुका है सेक्स चेंज सर्जरी

डॉ किम की खास मरीज एक्ट्रेस हरिसु
 
डॉ किम की सबसे बेहतरीन मरीजों में दक्षिण कोरिया की सबसे लोकप्रिय ट्रांससेक्सुअल इंटरटेनर हरिसु हैं, जिन्होंने 2007 में मेल सिंगर से शादी कर ली। सियोल में एक इंटरव्यू के दौरान हरिसु ने बताया कि 1995 में जब उन्होंने सर्जरी कराई थी, तो वो दौर उनके बेहद दर्द से भरा रहा। कुछ दिनों बाद हॉस्पिटल से बाहर आने पर हरिसु को ऐसा लगा कि जैसे उन्हें दूसरा जन्म मिल गया हो। डॉ किम से सर्जरी कराने वाले ज्यादातर मरीज इस वक्त अपनी जिंदगी के 40 से 50 से दशक में हैं। 
 
शुरुआती दौर में कभी-कभी मां-बाप सर्जरी से पहले गुस्सा करते हैं और उन्हें स्वीकार करने से मना कर देते हैं। हालांकि, आज के वक्त में लिंग परिवर्तन ऑपरेशन करवाने वालों में 20 साल में उम्र के लोग भी शामिल हैं और उनके माता-पिता सर्जरी के लिए उनकी हर तरह की मदद भी करते हैं। पुरुष से महिला बनने के क्रम में करीब 10,210 से 13,920 डॉलर तक का खर्च है। वहीं, महिला से पुरुष बनने की प्रक्रिया में करीब 28,760 डॉलर का खर्च आता है। sabhar :http://www.bhaskar.com/

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मंगलवार, 1 अप्रैल 2014

यहां कैमरे में सामने सेक्स करना पसंद करती हैं लड़कियां: सर्वे

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क्या कहता है सर्वे


क्या कहता है सर्वे


एक सर्वे के मुताबिक, एक ऐसा देश है जहां 40 से कम उम्र की लड़कियां कैमरे के सामने सेक्स करती हैं। जानिए, और क्या कहता है ये सर्वे।

डेली मेल पर प्रकाशित, एक ताजा जानकारी के अनुसार ब्रिटेन की 40 साल की कम उम्र की 21 फीसदी महिलाओं किसी न किसी तरीके से कैमरे के सामने सेक्स किया है, जबकि दस में से तीन ने खुद की न्यूड तस्वीर खींचती हैं।

किस उम्र की लड़कियां करती हैं कैमरे के सामने सेक्स

यूगोव के एक सर्वे में 15 फीसदी महिलाओं ने स्वीकार किया कि वे वेबकेम के सामने न्यूड हुई है जबकि तीस फीसदी लोगों ने बताया कि उन्‍होंने पारंपरिक या मोबाइल कैमरे से अपनी न्यूड तस्वीर ली है।

दिलचस्प बात यह है कैमरे के सामने न्यूड होने का चलन बड़ी महिलाओं में नहीं पाया गया। चालीस साल की उम्र से बड़ी केवल आठ फीसदी महिलाओं ने इस बात को स्वीकार किया कि वो कैमरे के सामने न्यूड हुई हैं।

अंजान लोग कर रहे हैं ऑनलाइन सेक्स

सर्वे में पाया गया साइबर सेक्स के लिए 34 फीसदी पुरुषों ने सेक्सी और अश्लील फोटोज वेबकेम या वीडियो फ़ोन के माध्यम से भेजे हैं।

स्टडी में यह भी पाया गया कि 60 फीसदी लोगों ने वैसे लोगों के साथ ऑनलाइन सेक्स में हिस्सा लिया है जिन्हे वे पहले से नहीं जानते थे।

ऑनलाइन सेक्स का जरिया क्या है

कुल मिलकर 18 की उम्र से ज्यादा 1612 पुरुषों और महिलाओं ने स्वीकार किया कि वे नियमित रूप से सेक्सुअली सक्रिय हैं।

डिजिटल सेक्स का सबसे लोकप्रिय माध्यम है सेक्सटिंग(37 फीसदी), दूसरे नंबर पर आता है वीडियोफोन (30 ) फीसदी और तीसरे नंबर पर था वेबकेम सेक्स (26 फीसदी)।

छह फीसदी लोगों ने बताया कि वे ऐसे लोगों के साथ इंटरैक्ट करते है जो उनके मौजूदा पार्टनर नहीं हैं और ऑनलाइन सेक्सुअल रिलेशनशिप एकमात्र जरिया है जिसके माध्यम से वे एक दूसरे से बात कर सकते हैं या देख सकते हैं। sabhar :http://www.amarujala.com/


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ऐप बचाएगा अनचाही मुलाकातों से

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चाहे पूर्व प्रेमी हो या पुराना दुश्मन, अगर कोई आप को फूटी आंख नहीं सुहाता या कोई आपको नापसंद करता है तो अब एक ऐप आपको ऐसे लोगों से मुलाकातें रोकने में मदद कर सकता है.
frau im boot Handy


कभी न कभी आपके साथ भी ऐसा हुआ होगा जब दफ्तर या मुहल्ले में आपकी किसी से बहस या काफी तेज झड़प हुई हो और मजबूरी में हर दिन जाना वहीं पड़ता हो. ऐसी अटपटी स्थिति से निकलने में मदद करने के लिए अब तकनीक आ गई है. अब किसी ऐसे इंसान के सामने आकर अपना मूड खराब करने की कोई जरूरत नहीं जिससे आप नहीं मिलना चाहते. इसमें तकनीक आपकी मदद कर सकती है. करना सिर्फ यह होगा कि अपने स्मार्टफोन के फेसबुक या ऐसे किसी दूसरी सोशल नेटवर्किंग साइट का इस्तेमाल करते हुए आपको फोन में अपनी लोकेशन बताने वाला बटन ऑन रखना होगा. इसके अलावा इस ऐप में आपको उस इंसान का नाम और संबंधित जानकारियां भी देनी होगी जिसे आप देखना भी नहीं चाहते.
आपकी सही लोकेशन पता होने के कारण आपके फोन का ऐप न सिर्फ आपको आगाह कर देगा कि वह व्यक्ति आपके आसपास है. बल्कि उस जगह के नक्शे का इस्तेमाल कर आपको वहां से निकलने का रास्ता भी बता देगा. इस तरह आप एक ऐसे अनुभव से खुद को बचा पाएंगे जो आपके लिए बहुत सुखद नहीं होता. लेकिन यह भी जाहिर है कि ऐसे व्यक्ति के बारे में कुछ जानकारियां आपके पास होनी चाहिए. वह इंसान जिससे आप मिलना नहीं चाहते, वह आपके सोशल नेटवर्क का हिस्सा होना चाहिए. यह एक दुविधा भी है कि अगर आप किसी से दूर रहना चाहते हैं तो भला उसे फेसबुक या किसी अन्य साइट पर जुड़े क्यों रहेंगे.
बाजार में एक से बढ़ कर एक नए नए ऐप आ रहे हैं. पिछले दिनों लंदन की एक कंपनी ने एएसएपी54 नाम का एक बहुत दिलचस्प ऐप बनाया है. मान लीजिए कि आपने सड़क पर जा रहे किसी के कपड़े या जूते पसंद आते हैं लेकिन आप उस अनजान व्यक्ति से जाकर पूछ नहीं सकते कि उसने वह चीज कहां से खरीदी. ऐसे में यह एएसएपी54 ऐप आपको बता देगा कि उसे कहां से खरीदा जा सकता है और वह आपके लिए उस कपड़े या जूते को ऑनलाइन बुक भी कर सकता है. जाहिर है कि ऐप चीजों को तभी पहचान सकता है अगर आपके फोन का कैमरा अच्छा है और तस्वीर साफ आई हो.
रिपोर्ट: ऋतिका राय (रॉयटर्स)
संपादन: आभा मोंढे
 sabhar :http://www.dw.de/

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क्रिस गोपालकृष्णन : पहले शख्स जिन्होंने साइंस के लिए दिए 225 करोड़ रुपए

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क्रिस गोपालकृष्णन : पहले शख्स जिन्होंने साइंस के लिए दिए 225 करोड़ रुपए

परिवार : पिता- पीजी सेनापति (प्लंबिंग का बिज़नेस), पत्नी- सुधा (‘प्रतीक्षा’ ट्रस्ट की सह-संस्थापक), 14 वर्षीय बेटी मेघना
 
क्यों चर्चा में- उनके ट्रस्ट ‘प्रतीक्षा’ ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस को ब्रेन रिसर्च सेंटर बनाने के लिए 225 करोड़ रु. दिए हैं। आईआईएससी के 105 सालों के इतिहास में पहली बार किसी एक व्यक्ति ने इतनी बड़ी राशि दान दी। 
 
क्रिस का सांइस से लगाव बचपन से था। जिस उम्र में बच्चे खेलते-कूदते, वे चीज़ें बनाते, बिगाड़ते और दोबारा बनाने लगते। ऐसा करने से उनके अभिभावकों ने न कभी रोका, न प्रोत्साहित किया। वे इंजीनियर बनना चाहते थे। परिवार में कोई डॉक्टर नहीं था, इसलिए पिता ने मेडिसिन पढ़ने को कहा।
 
उन्होंने मेडिकल एंट्रेंस पास करने के लिए जी-जान लगा दी, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। मात्र दो नंबरों से मेडिकल सीट हाथ से निकल गई। पिता का मामूली बिज़नेस था। उनके पास डॉक्टरी की सीट खरीदने के लिए पैसे नहीं थे। खुद पर पूरा यकीन था कि डॉक्टर ही बनेंगे इसलिए कोई प्लान-बी था ही नहीं। किसी इंजीनयरिंग कॉलेज का फॉर्म नहीं भरा था। डॉक्टरी की तैयारी में दो साल बर्बाद हो चुके थे। 
 
इस विफलता के बाद पिता ने उन्हें कुछ कहना छोड़ दिया। उनका आत्मविश्वास कांपने लगा, पर संघर्ष जारी रहा। काफी जद्दोजहद के बाद सब्जेक्ट बदल पाए। लोकल कॉलेज से फिजिक्स में बीएससी किया। गणित उनकी समझ से बाहर था। उनका आत्मविश्वास दोबारा डगमगाया।
 
ट्यूशन टीचर सीसी फिलिप्स ने गणित में मदद की। खोया हुआ आत्मविश्वास लौटने लगा और वे यूनिवर्सिटी में पांचवें स्थान पर आए। इसी दौरान किसी ने उन्हें आईआईएम में पढ़ने की सलाह दी और वे फॉर्म भर आए। तैयारी शुरू कर दी। एंट्रेंस टेस्ट पास कर लिया। इंटरव्यू तक पहुंचे। अंग्रेज़ी कमजोर होने के कारण बात नहीं बनीं। किसे मालूम था कि जिस आईआईएम ने उन्हें नकार दिया था, वे एक दिन उसके बोर्ड ऑफ गवर्नर्स में होंगे। 

21 साल की उम्र में उन्होंने आईआईटी मद्रास से फिजिक्स में एमएससी और 23वें साल में कंप्यूटर साइंस में एमटेक किया। कैंपस प्लेसमेंट में पटनी कंप्यूटर के संस्थापक नरेंद्र पटनी ने नौकरी दी और कहा, ‘मुझे शांत और मेहनती व्यक्ति की तलाश थी। ये दोनों बातें तुममें हैं’। इंट्रोवर्ट नेचर उनकी ताकत बना। वे पटनी कंप्यूटर्स में कोर टीम के सदस्य बने। एनआर नारायण मूर्ति भी इस टीम में थे जिन्होंने बाद में इन्फोसिस की स्थापना की। 1981 में इन्फोसिस की स्थापना हुई। वे सात संस्थापकों में से एक थे। इन्फोसिस और अमेरिकी कंपनी केएसए के जॉइंट वेंचर की जिम्मेदारी संभालने के लिए 1987 में अमेरिका चले गए और 1994 में भारत लौट आए। उन्हें डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर बनाया गया। इन्फोसिस बनने के २६ साल के बाद वे सीईओ बने। 51 वर्षीय क्रिस ने जुलाई 2007 में सीईओ का पद संभाला। इससे पहले वे सीओओ और प्रेसीडेंट थे।
वे गैजेट फ्रीक हैं। यहां तक कि हर महीने लेटेस्ट स्मार्टफोन खरीद सकते हैं। 2009-10 में उन्होंने पत्नी के साथ ‘प्रतीक्षा’ ट्रस्ट बनाया जो पढ़ाई में जरूरतमंद बच्चों की आर्थिक मदद करता है। जनवरी 2011 में उन्हें पद्मभूषण से सम्मानित किया गया था और इसी साल अगस्त से मई 2013 तक एग्ज़ीक्यूटिव को-चेयरमैन रहे और जून 2013 में एग्ज़ीक्यूटिव वाइस चेयरमैन बना दिया गया। हाल ही में प्रतीक्षा ट्रस्ट ने आईआईएससी को ब्रेन रिसर्च सेंटर बनाने के लिए 225 करोड़ रुपए डोनेट किए हैं
sabhar : bhaskar.com



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दुनिया की वो अविश्वसनीय जगहें, जहां आप जरूर जाना चाहेंगे

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दुनिया में कई ऐसी जगहें हैं जिनके बारे में हमने सुना भी नहीं होगा. यहां हम बता रहे हैं ऐसी ही कुछ अविश्वसनीय जगहें जो देखने में आपको एक पेंटिंग या किसी साइंस फिक्शन फिल्म के सीन की तरह लगेंगी.

झांगे डेक्सिया लैंडफोर्म (Zhangye Danxia Landform), गांसू, चीन
ये रंग-बिरंगी चट्टानें यहां 24 मिलियन सालों से ज्यादा समय से मौजूद लाल बलुआ पत्थर और खनिज भंडारों का नतीजा हैं. हवा और बारिश के कारण इन चट्टानों की आकृति हैरान कर देने वाली हो गई.




युआनयंग काउंटी (Yuanyang County), चीन
ये हैं धान के खेत, जो कि एलाओ माउंटेंस की ढलानों पर दिखते हैं. यहां की खेती की तकनीक और हवाओं के कारण इस तरह का दृश्य बनता है.


फोटो: स्त्रोत : wikimedia.org




वाटरफाल, मोरिशियस आइसलैंड
समुद्री लहरें और उनके साथ आने वाली रेत के कारण ये आकृति बनी. ऐसा लगता है जैसे समंदर में ही झरना हो.
फोटो: स्त्रोत: whenonearth.net



अंडरवाटर रिवर, (Underwater River, Cenote Angelita) मेक्सिको
सीनोट एंजेलिटा के पानी के अंदर भी पानी. ये नदी हाइड्रोजन सल्फेट से लबालब भरी है जो कि सामान्य नमक वाले पानी से भारी होता है.
फोटो: स्त्रोत: anatoly.pro


टरक्वाइज आइस (Turquoise Ice), लेक बैकल, रूस
बैकल झील दुनिया की सबसे पुरानी मीठे पानी की झीलों में से एक है. सर्दियों में ये झील जम जाती है. लेकिन पानी इतना साफ होता है कि बर्फ के अंदर 130 फीट तक आप देख सकते हैं.

फोटो: स्त्रोत: reddit.com





टनल ऑफ लव (Tunnel of Love), क्लेवन, यूक्रेन
यहां के घने पेड़ों से होकर दिन में तीन बार ट्रेन गुजरती थीं. कई सालों बाद इस जगह ने ये आकार ले लिया. अब यहां ट्रेन नहीं आती लेकिन ये एक रोमांटिक स्पॉट है.
फोटो: स्त्रोत: 500px.org



दि ई ऑफ अफ्रीका, मॉरितानिया
ये जगह सहारा रेगिस्तान के बीचोबीच है. इसका व्यास 24 मील का है. वैज्ञानिकों का मानना है कि ऐसा क्षुद्रगह के कारण हुआ.
फोटो: स्त्रोत : abduzeedo.com



सोकोट्रा, यमन
यहां के ड्रैगन ब्लड पेड़ छतरी जैसे शेप ले लेते हैं.
फोटो: स्त्रोत: mymodernmet.com


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82 वर्ष की उम्र का जवान

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केलिफोर्निया से आये 82 वर्ष के प्रो. सांचेज इन दिनों बनारस में विश्वविध्यालय के छात्र-छात्राओ को लम्बा जीवन जीने की कला बता रहे हैं, देखिये यह वीडियो...


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विज्ञान की नई शाखा सिंथेटिक बायोलॉजी

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हाल के सालों के दौरान विज्ञान की एक नई शाखा का विकास हुआ है, जिसे सिंथेटिक बायोलॉजी कहा जा रहा है. बायोलॉजिस्ट, केमिस्ट और इंजिनीयर इस क्षेत्र में एक साथ काम करते हैं.
 खुलेंगे कुछ और राज़
यूं कहा जा सकता है कि पहले जीवजगत के सूक्ष्म विश्लेषण के ज़रिए उनके छोटे से छोटे हिस्से - अणु तक पहुंचा जा रहा था. इस नए विषय के तहत इन सूक्ष्म हिस्सों को जोड़ने व उनके नए यौगिक के निर्माण पर ध्यान दिया जा रहा है. कुछ वैज्ञानिक तो नए जीवन के विकास का सपना तक देख रहे हैं. लेकिन सिंथेटिक बायोलॉजी का दायरा परंपरागत जीन तकनीक से कहीं परे तक जाता है. यह सिर्फ़ जीन्स का स्थानांतरण नहीं है, बल्कि यूं कहा जा सकता है कि इसके अंतर्गत टेबल पर या कंप्युटर में नए जीवों की संरचनाएं तैयार की जाती है.
इस सिलसिले में सबसे महत्वपूर्ण हैं जेनेटिक या आनुवंशिक अणु, जिन्हें डीएनए कहा जाता है. त्स्युरिष के तकनीकी महाविद्यालय के इंजीनियर स्वेन पांके का कहना है कि यह एक जटिल प्रक्रिया है. वह कहते हैं, "हमें सोचना पड़ेगा कि कैसे बड़ी मात्रा में डीएनए के नए सिंथेसिस बनाए जाएं. कैसे उन्हें जोड़ा जाए और कोशिका में उन्हें डाला जाए. यानी दो काम हैं - पहले डीएनए को जोड़ना और फिर उन्हें कोशिका में डालना. क्या हम डीएनए को पर्याप्त रूप से समझते हैं, ताकि उनके नए कोड तैयार किए जा सकें? ये ऐसे सवाल हैं, जिनका संबंध सिंथेसिस से है."
प्रयोगशालों में तैयार डीएनए के ज़रिए कभी न कभी नए टीके या नई दवाइयां बनाई जा सकेंगी, जैविक कूड़े से उर्जा का उत्पादन संभव होगा. कभी न कभी सिंथेटिक बायोलॉजी के आधार पर बिल्कुल नए जीव भी बनाए जा सकेंगे. यह अमेरिका के क्रेग वेंटर का घोषित लक्ष्य है. वह बायो तकनीक के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उद्योगपति हैं, और सिंथेटिक बायोलॉजी के क्षेत्र में काफ़ी कुछ हासिल करना चाहते हैं. वह कहते हैं, "अगर हम पूरी तरह से सिंथेटिक क्रोमोसोम बना सकें और उसके जीन्स का सेट अलग हो, तो यह पूरी तरह से सिंथेटिक जीव होगा."
क्रेग वेटर इस नए जीव के लिए एक नाम भी ढूंढ़ चुके हैं. इसका नाम होगा माइकोबैक्टेरियम लैबोरेटोरियम. एक प्राकृतिक जीव माइकोबैक्टेरियम जेनिटालियम के साथ इसका रिश्ता होगा. वेंटर की टीम प्रयोगशाला में इस आनुवंशिक तत्व के निर्माण में सफल रही है. अब इसी विधि से कृत्रिम जीव भी तैयार किया जाएगा. वेंटर का दावा है कि इससे कोई ख़तरा नहीं पैदा होगा. वह कहते हैं, "जो कुछ भी हम तैयार करते हैं, हम उसे ख़ास तरीके से तैयार करते हैं और प्रयोगशाला के बाहर वह जी नहीं सकता."
वैज्ञानिकों के बीच इस बात पर मतभेद है कि इन्हें कृत्रिम जीव कहा जा सकता है या नहीं. मिसाल के तौर विटोर मार्टिन्स डोस सांतोस इससे सहमत नहीं हैं. संक्रमण पर शोध के लिए जर्मनी के हेल्महोल्त्ज़ संस्थान के वैज्ञानिक कहते हैं, "कृत्रिम जीवन नहीं हो सकता है, क्योंकि परिभाषा के अनुसार जीवन कृत्रिम नहीं होता. करोड़ों साल की प्रक्रिया से बैक्टेरिया बने हैं. अब सिंथेटिक बायोलॉजी के ज़रिए प्राकृतिक विकास की प्रक्रिया को किसी ख़ास दिशा में तेज़ किया जा रहा है. लेकिन यह कृत्रिम जीवन नहीं है."
विज्ञान की इस नई शाखा पर बहस जारी है. सिर्फ़ वैज्ञानिकों के बीच ही नहीं. अगर ये तकनीकें आतंकवादियों के हाथ आ जाएं? साथ ही यह सवाल भी कि क्या इंसान को खुद सृष्टिकर्ता बनना चाहिए.
रिपोर्टः मिशाएल लांगे/उज्ज्वल भट्टाचार्य
संपादनः ए कुमार sabhar :http://jamanadekhega.blogspot.in/

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योग से रोमांस का आनंद

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प्रेमी-प्रेमिकाओं में यदि वैचारिक और समझ के मतभेद हैं तो तकरारें कभी भी अलगाव में बदल सकती हैं। योग हमारे प्यारभरे जीवन को नए-नए आयाम देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। पति या पत्नी से चल रही तकरार को भी आनंदायक बनाया जा सकता है। जरूरी नहीं है कि रोमांस सिर्फ प्रेमिका के साथ ही होता है यह तो आपके यौगिकव्यवहार पर निर्भर करता है

योग हमारे विचारों और भावनाओं को एक नए रूप में प्रस्तुत करने में सक्षम है। योग के माध्यम से आप अपने प्रेमी या प्रेमिका के प्रति और अधिक संवेदनशील होकर उससे तालमेल बैठाने में सक्षम हो जाते हैं। यह आपसी विश्वास और देखभाल को बढ़ाकर जीवन के प्रति आपके सकारात्मक व्यवहार को जगाता है साथ ही यह हास्य प्रधान जीवन शैली का विकास करता है।

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कल्पना करना सीखें : 
योग की ताकत इतनी है कि आप अलग-अलग परिप्रेक्ष्य में चीजों को देखना शुरू कर देते हैं। योग की मदद से आप एक पूरी 'नई दुनिया' की कल्पना कर सकते हैं। एक ऐसी दुनिया जिसमें प्यार और आनंद के अलावा कुछ न हो। योग आपके अहंकार को पिघलाकर उसे समर्पण में बदल सकता है। यह आपको गलती करने से तो रोकता ही है, साथ ही आपके साथी द्वारा की गई गलती को माफ करने की क्षमता देता है। आप क्यों नहीं अच्छे जीवन की कल्पना करते हैं? यह कल्पना करना भी योगा टिप्स ही है। कल्पना तो ज्ञान से भी महत्वपूर्ण होती है। करके तो देंखे। कल्पना करें की आप प्यार करना सीख रहे हैं।

प्यार करना सीखें : 
सबसे महत्वपूर्ण प्राथमिक विषय प्यार करने के लिए प्यार होना और सीखना आवश्यक है। जरूरी नहीं कि किसी लड़की या लड़के के प्रति प्रेम से हो। दरअसल योग आपके व्यक्तित्व को प्रेमपूर्ण बना सकता है। इस प्रेमपूर्ण व्यक्तित्व की आज दुनिया को बहुत जरूरत है। प्रत्येक व्यक्ति स्वयं को इस दुनिया में असहाय या अकेला पाता है। ऐसे में जरूरत है सभी को प्रेम की। तो कहें, 'ऑल इज वेल एंड ऑल इज वन।'

कैसे होगा यह संभव:
योग का प्रथम अंग यम के प्रथम सूत्र 'सत्य' को समझें। सत्य की ताकत ही प्यार को जोड़े रखती है। कथनी, करनी और व्यवहार में समानता ही सत्य की ताकत है। दूसरा सूत्र अपरिग्रह इसे अनासक्ति भी कहते हैं अर्थात किसी भी विचार, वस्तु और व्यक्ति के प्रति मोह न रखना ही अपरिग्रह है। मोह और प्यार में फर्क को समझें। प्यार स्वतंत्रता देता है किंतु मोह अप्रत्यक्ष गुलामी है जिससे दुख का जन्म होता है।

अब तीसरे सूत्र को समझें। शरीर और मन की पवित्रता ही शौच है। तन और मन को स्वच्छ रखें। इससे आपके साथी को भी अच्छा अनुभव होगा। प्यार में पवित्रता का बहुत महत्व है। स्वाध्याय का अर्थ है स्वयं का अध्ययन करना। हम क्या सोचते हैं, क्या करते हैं और क्या कहते हैं, इस सब पर सतर्क निगाहें रखने से एक ईमानदार और दृढ़ व्यक्तित्व का निर्माण होता है। क्या आप अपनों के प्रति ईमानदार नहीं रहना चाहते?

प्राणायाम : प्राणायाम आपके मन और मस्तिष्क को स्वस्थ बनाता है। यह आपके व्यक्तित्व को और प्रेमपूर्ण तथा समझपूर्ण बनाने के लिए बहुत ही लाभदायक है। दो लोगों को जोड़ने के लिए इ‍तना काफी है। इतना ही कर लें तो बहुत है और इतना भी नहीं कर पाएँ तो फिर किसी योग और मनोचिकित्सक से मिलें। धन्यवाद जो आपने यह आलेख पढ़ा।
sabhar  :http://hindi.webdunia.com/

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आया था वह मंदिर तोड़ने, माता ने दिखाया चमत्कार

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माता का चमत्कारी मंदिर

माता का चमत्कारी मंदिर


राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र में सीकर से करीब 30 किलोमीटर दूर माता का एक चमत्कारी स्थान है। कहते हैं यह माता देवी रुप में प्रकट नहीं हुई थी बल्कि मनुष्य से देवी रुप में परिवर्तित हुई थी। इनकी चमत्कारी शक्ति ऐसी है कि इन्हें शक्तिपीठ की तरह पूजनीय माना जाता 


सामान्य नारी से देवी रुप में प्रकट हुई माता

सामान्य नारी से देवी रुप में प्रकट हुई माता

लोक मान्यता के अनुसार चौहान वंश के राजपूत परिवार में जीण माता का जन्म हुआ था। इनके बड़े भाई का नाम हर्ष था। भाई बहन दोनों एक दूसरे से खूब स्नेह करते थे।

एक बार की बात है जीण अपनी भाभी के साथ सरोवर से जल लेने गई। वहीं भाभी के और ननद में इस बात को लेकर विवाद हो गया कि हर्ष किसे अधिक स्नेह करता है। यह तय हुआ कि हर्ष पानी का मटका जिसके सिर से पहले उतारेगा वही हर्ष का अधिक प्रिय होगा।

दोनों जब घर पहुंचे तो शर्त से अनजान हर्ष ने पहले अपनी पत्नी के सिर से मटका उतारा। इससे जीण नाराज हो गई और उसे लगा कि भाई उससे कम स्नेह करता है। इससे उसका मोह खत्म हो गया और आरावली के "काजल शिखर" पर पहुंच कर तपस्या करने लगी। तप के प्रभाव से चुरु में देवी का वास हो गया।

दूसरी ओर जब चुरु के भाई हर्ष को शर्त की बात पता चली तो वह बहन को मनाने काजल शिखर पर पहुंचा। लेकिन बहन ने घर लौटने से मना कर दिया। इससे हर्ष भी वहीं पहाड़ी पर तप भैरो की तपस्या करने लगा और उसने भैरो पद प्राप्त कर लिया।

देवी ने दिखाए चमत्कार

देवी ने दिखाए चमत्कार

लोककथा के अनुसार मुगल बादशाह औरंगजेब ने जीण माता और भैरो के मंदिर को तोड़ने के लिए सैनिकों को भेजा। बादशाह के इस व्यवहार से दुःखी लोग जीण माता की प्रार्थना करने लगे।

माता ने चमत्कार दिखाया, मधुमक्खियों के झुंड ने मुगल सेना पर धावा बोल दिया। मुगल सेना जान बचाकर भागी। औरंगजेब भी गंभीर रुप से बीमार हो गया। कोई उपाय न देखकर औरंगजेब माता के मंदिर में आया और माफी मांगी।

औरंगजेब ने माता को वचन दिया कि वह हर महीने सवा मण अखंड तेल दीप के लिए भेंट करेगा। इसके बाद उसके स्वास्थ्य में सुधार होने लगा। sabhar ;
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लड़की ने कराया अपना रेप, फिर ब्लैकमेल भी किया

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युवती और उसके चार दोस्तों पर मामला दर्ज


युवती और उसके चार दोस्तों पर मामला दर्ज


तमंचे की नोक पर एक युवक से युवती ने सेक्स करवाया फिर युवती के दोस्तों ने उसका एमएमएस बनाया। एमएमएस के बाद शुरू हुआ ब्लैकमेल करने का सिलसिला।

पीड़ित युवक ने अबतक 4 लाख रुपए आरोपियों को दे दिए है। बावजूद उनकी डिमांड खत्म नहीं हो रही है। थक-हारकर मामला पुलिस के पास पहुच गया है।

प्यार के जाल में फंसाकर जबरन सेक्स और फिर ब्लैकमेल करने का यह अनोखा मामला हरियाणा के फतेहाबाद की है। वहां गांव सिरढान निवासी धर्मपाल पुत्र कन्नीराम की शिकायत पर पुलिस ने एक महिला, उसके सहयोगी राज व विजय नेलसन उर्फ एमसी सहित चार अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

मोबाइल पर की थी दोस्ती

फतेहाबाद के सिरढान गांव निवासी धर्मपाल ने बताया कि 26 मार्च को उसके मोबाइल पर एक लड़की का फोन आया। हालांकि वह उस लड़की को जानता नहीं था लेकिन कई दिनों की बातचीत के बाद दोनों के बीच दोस्ती हो गई।

धीरे-धीरे दोनों की दोस्ती प्यार में बदल गई। इस बीच लड़की ने धर्मपाल से शादी का प्रस्ताव भी रख दिया।

लड़की ने अपने माता-पिता से मिलवाने के बहाने धर्मपाल को 28 मार्च के दिन फोन कर 12 बजे हुड्डा चौक पर मिलने के लिए बुलाया। माता-पिता से मिलवाने की बात कहकर लड़की उसे लेकर एमआइटीसी कॉलोनी पहुंची।

जबरन करवाया सेक्स, बनाया MMS

वह युवती धर्मपाल को एक घर में ले गई, वहां पहले से तीन लोग मौजूद थे। आरोप है कि उन लोगों ने धर्मपाल पर तमंचा तान दी और उसे अपने कपड़े उतारने को कहा। फिर उस युवती के साथ जबरन सेक्स करवाया।

इस दौरान उस युवती को दोस्तों ने दोनों का सेक्स विडियो भी बनाया। उसके बाद से युवती और उसके दोस्त उसे ब्लेकमेल करने लगे।

इस बीच युवक ने चार लाख रूपए युवती और उसके दोस्तों को दे दिए। जब उनका हौसला और बढ़ने लगा तो धर्मपाल ने पुलिस को सबकुछ बताने में ही भलाई समझी।

महिला के पत्र से मामले में नया मोड़

इस बीच एक ताजा मामले में उस युवती ने पुलिस अधीक्षक को सौंपे शिकायत पत्र में बताया कि वह रानियां रोड निवासी है। वह 25 मार्च को हिसार से सिरसा बस में आ रही थी। जब बस फतेहाबाद पहुंची तो उसकी साथ वाली सीट पर एक युवक आकर बैठ गया।

बाईं बाजू में टीका लगा होने के कारण दर्द हो रहा था,इसीलिए उसने उक्त युवक को थोड़ा दूर बैठने के लिए कहा। तभी उसने एक दर्द निवारक गोली दी और स्वयं को डॉक्टर बताया। फिर उसने बताया कि वह फतेहाबाद जिले के गांव सिरढान का रहने वाला है।

महिला ने बताया कि उसने जेबीटी और बीकॉम की है। महिला का कहना है कि दो दिन बाद आरोपी ने उसे फोन किया और दस्तावेज मंगवाए। वह स्कूटी पर दस्तावेज लेकर हुडा चौक पर आ गई, जहां उक्त व्यक्ति गाड़ी लेकर खड़ा था।

पैसे वालों को फांसकर रुपये ऐंठने वाला गिरोह'

इसके बाद उसने स्कूटी वहीं खड़ी करवाकर उसे गाड़ी में बैठाकर सुनसान जगह पर ले गया और नौकरी के बहाने गाड़ी में ही उसके साथ दुराचार किया।

हालांकि जांच अधिकारी रामनिवास का कहना है कि पैसे वालों को फांसकर रुपये ऐंठने वाले गिरोह के सरगना और लड़कियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है। हो सकता है कि गिरफ्तारी से बचने के लिए अब यह आरोप लगाए जा रहे हो।

जांच अधिकारी के अनुसार इस गिरोह का सरगना विजय एमसी है जो इस महिला का सहयोगी है। उसके खिलाफ पहले से कई आपराधिक केस दर्ज हैं। जल्द ही इस मामले का खुलासा हो जाएगा। sabhar ;http://www.amarujala.com/

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सोमवार, 31 मार्च 2014

राधे मां के भक्तों ने अपने बच्चों को मारा, फिर कर ली आत्महत्या

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अहमदाबाद. गुजरात के कच्छ क्षेत्र के अंजार जिले में एक भयंकर घटना सामने आई है. राधे मां के चार भक्तों ने तीन बच्चों को जहर देकर मार दिया. बाद में चारों ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. आत्महत्या करने वाले एक ही परिवार के हैं. दो बच्चियां बच गई क्योंकि वे स्कूल गई हुई थी.
घटना को लेकर कई तरह से कयास लगाए जा रहे हैं. कुछ लोगों का कहना है कि अंधविश्वास के चलते परिवार ने यह कदम उठाया. वहीं कुछ का कहना है कि राधू और लाखू ने पैतृक जमीन बेची थी. उन्हें 1.5 करोड़ रूपए मिले थे. यह राशि उन्होंने राधे मां को दान कर दी थी. राधे मां का आश्रम यूपी के बरसाना में है.
घटना के वक्त दो बेटियां 15 साल की पायल और 7 साल की सोनल स्कूल गई थी. संयुक्त परिवार में अब वे दोनों ही जिंदा बची है. पुलिस अधिकारियों के मुताबिक वे इस मामले में जामनगर की एक महिला की भूमिका की जांच कर रहे हैं.
पुलिस सूत्रों के मुताबिक बच्चों की हत्या कर आत्महत्या करने वाले खाते पीते परिवार से थे. 32 साल का राधू पत्नी लक्ष्मी और 30 साल का लाखू पत्नी कांकू बेन के साथ एक ही घर में रह रहे थे. राधू और लाखू सगे भाई थे. सभी निंगल गांव में रहते थे. चारों राधे मां के भक्त थे. सभी के शव घर में फंसे से लटके हुए पाए गए.
सामान्यतया पूरा परिवार सुबह-सुबह भजन सुनता था लेकिन बुधवार को जब भजन सुनाई नहीं दिए तो पड़ोसियों ने परिवार से संपर्क करने की कोशिश की. जब संपर्क नहीं हुआ तो पड़ोसियों ने पुलिस को बुला लिया. पुलिस ने घर का दरवाजा तोड़ा तो चारों को फंखे से लटका हुआ पाया. राधू और लाखू और उनकी बीवियों ने 4 साल के शाश्वत लाखू, 5 साल की प्राची लाखू और 7 साल के श्याम को जहर देकर मारा डाला.
रिश्तेदारों और पड़ोसियों ने पुलिस को बताया कि परिवार भगवान कृष्ण का भक्त था. परिवार दूर की रिश्तेदार सोनल अहीर के संपर्क में था. सोनल जामनगर जिले के आलियाबाड़ा में रहती है. सोनल खुद को कृष्ण भक्त बताती sabhar http://www.palpalindia.com/

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