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बुधवार, 4 दिसंबर 2013

पेड़ :जिसको छूने मात्र से ही आपकी सारी थकान गायब हो जाए

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PICS: हजारों साल पुराने चमत्कारी पेड़ के बारे में जान, रह जाएंगे हैरान!

अभी तक आपने कई पेड़ पौधों के बारे में सुना होगा। उनकी चमत्कारिक शक्तियों के बारे में भी जानते होंगे। पर क्या किसी ऐसे पेड़ के बारे में भी सुना है जिसको छूने मात्र से ही आपकी सारी थकान गायब हो जाए। आपकी मांगी हुई सारी मन्नतें भी पूरी हो जाए जी हां बाराबंकी जिले में एक ऐसा ही पेड़ है जो कई सालों से श्रद्धा और आस्था का केंद्र बिंदु बना हुआ है। उसका नाम है परिजात। आइए पहले हम आपको परिजात की विशेषताओं के बारे में बता दें। राजधानी लखनऊ से 28 किमी दूर बाराबंकी के रामनगर क्षेत्र में बोरोलिया गांव में परिजात वृक्ष स्थित है। करीब पैंतालिस फीट ऊंचे और पचास फीट मोटे इस परिजात की अधिकांश शाखाएं धरती की और मुड़ जाती हैं। धरती छूते ही यह शाखाएं अपने आप सूख जाती है। यह भी कहा जाता है कि परिजात वृक्ष की प्रजाति भारत में नहीं मिलती। पूरे भारत में एक मात्र यही परिजात है। इसकी आयु करीब पांच हज़ार से एक हज़ार साल तक होती हैमान्यता है की परिजात पेड़ की उत्पत्ति समुद्र मंथन से हुई थी। जिसे भगवान इंद्रा ने अपनी वाटिका में रोप दिया था। माना जाता है जब पांडव पुत्र कुंती के साथ अज्ञातवास कर रहे थे, तब उन्होंने ही सत्यभामा की वाटिका से उसे लाकर बोरोलिया गांव में रोपित किया था। तब से ही यह वृक्ष आस्था का केंद्र बना हुआ है। यह भी मान्यता है कि अर्जुन परिजात को स्वर्ग से लेकर आए थे।यह भी कहा जाता है समुद्र मंथन के बाद स्वर्गलोक के राजा इंद्र ने नारद ऋषि को पारिजात के कुछ फूल भेंट में दिए थे। नारद जी ने उन फूलों में से एक भगवान कृष्ण को दिया। जिसे उन्होंने अपनी पत्नी रुकमणी को भेंट कर दिया। यह देख नारद जी श्रीकृष्ण की दूसरी पत्नी सत्यभामा के पास गए और सारा हाल उन्हे बतलाया। यह सुनकर सत्यभामा के मन में द्वेष की भावना आ गई। नारद जी ने उन्हें सुझाव दिया कि वह भी श्रीकृष्ण से वैसा ही फूल ला कर देने का अनुरोध करें। साथ ही नारद जी ने इंद्र को भी सावधान कर दिया। भगवान श्रीकृष्ण और सत्यभामा परिजात वृक्ष की एक डाल ले जा रहे थे तभी वहां इंद्र आ गए और कृष्ण से वृक्ष न ले जाने का अनुरोध किया। कृष्ण के ना मानने पर युद्ध छिड़ गया और इंद्र को हार का मुंह देखना पड़ा।परिजात वृक्ष को कल्प वृक्ष भी कहा जाता है। मान्यता है कि यह सभी की कामनाओं को पूर्ण करता है। यह वृक्ष उन 14 रत्नों में से एक है जो समुद्र मंथन द्वारा देवताओं और असुरों ने प्राप्त किए थे। यह वृक्ष महाभारत काल से मौजूद हैबाराबंकी के बोरोलिया में यह पेड़ पिछले कई वर्षों से कई लोगों की जहां थकान दूर कर रहा है। वहीं कईयों की मनौतियां भी पूरी कर रहा है। ऐसे में यदि आप लखनऊ घूमने आ रहे हैं, तो आप की भी कोई इच्छा हो तो बोरोलिया गांव आकर स्वर्ग से आए इस पेड़ से अपनी मनौतियों को मान सकते हैं। sabhar : bhaskar.com

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पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के सामने ऐसे चमत्कार दिखाए कि वह अचंभित रह गए

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सच्ची घटना-6: इस बाबा के चमत्कारों को जान, पूर्व प्रधानमंत्री भी हो गए थे हैरान!





 एक संत ने गांधीवादी नेता और देश के पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के सामने ऐसे चमत्कार दिखाए कि वह अचंभित रह गए। आगे चलकर मोरारजी देसाई ने इन घटनाओं के वर्णन अपने लेखों में भी किया।
 
मोरारजी देसाई रामचरित मानस में भगवान राम और गीता में श्रीकृष्ण की बातों का आत्मसात करने वाले धार्मिक प्रवृत्ति के व्यक्ति थे। उन्होंने अपने लेखों में रामचरित मानस का जिक्र करते हुए लिखा है कि विज्ञान उस समय जिन बुलंदियों पर था, वहां पहुंचने में इस पीढ़ी को अभी वक़्त लगेगा। उन्हें संत महात्माओं की सिद्धि पर यकीन था और अपनी आंखों से इन सिद्धियों का चमत्कार उन्होंने भी देखा था।मोरारजी देसाई ने 1956 की एक घटना का जिक्र करते हुए अपने एक लेख में कहा है कि एक कन्नड़ संत उनके पास आए और बातचीत के दौरान उनके प्रश्नों का उत्तर देने की बात कही। (घटना के वर्णन के अनुसार उन्होंने संत के नाम का जिक्र अपने लेख में नहीं किया) उस संत ने मोरारजी देसाई से कहा कि आप जिस भाषा में लिखित प्रश्न करेंगे, उसी भाषा में वह लिखित जवाब देंगे, वह भी बिना प्रश्नों को देखे। 


सच्ची घटना-6: इस बाबा के चमत्कारों को जान, पूर्व प्रधानमंत्री भी हो गए थे हैरान!

पहले तो मोरारजी भाई ने इस पर विश्वास नहीं किया। फिर उन्होंने के कागज पर गुजराती में तीन प्रश्न लिखकर उस कागज को उलटकर रख दिया। इसके बाद संत ने भी अपनी जगह बैठे-बैठे ही प्रश्नों के उत्तर एक कागज पर लिख मोरारजी देसाई को सौंप दिए। उन्होंने देखा कि उत्तर भी गुजराती में थे और उन्हीं प्रश्नों से सम्बंधित उत्तर थे जो उन्होंने अपने पास रखे कागज़ पर लिखे थे।मोरारजी देसाई ने आश्चर्यचकित हो उन संत से पूछा कि आखिर यह सिद्धि उनको कहां से मिली। इस पर संत ने जवाब दिया कि परीक्षा में फेल होने पर उन्होंने कुएं में कूदकर आत्महत्या का प्रयास किया था। अचानक एक हाथ ने उन्हें कुएं से खींचकर निकाला। देखा तो वह एक साधू थे। उन्होंने उनको अपना शिष्य बना लिया।एक दिन गुरु देव बोले चलो हिमालय चलते हैं। उन्होंने कहा वह बहुत दूर है, वहां जाने में तो समय लगेगा। इस पार उन्होंने उनकी आंखों पर काली पट्टी बांध दी। दो मिनट बाद जब पट्टी खोली तो देखा चारों तरफ बर्फ ही बर्फ थी, ध्यान से देखा तो वह हिमालय पहुचं चुके थे। वहां उन्होंने उनको कई विद्याएं सिखाई, जिनमें से यह भी एक थी। एक दिन उन्होंने घर वापस जाने की इच्छा जाहिर की तो उनके गुरू ने एक बार फिर आंखों पर पट्टी बांधी और जब उन्होंने पट्टी खोली तो वह घर पर थे। sabhar : bhaskar.com


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नर सूअर और मादा चिंपैंजी के मिलन से जन्मा मानव!

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नर सूअर और मादा चिंपैंजी के मिलन से जन्मा मानव!

ज़ी मीडिया ब्यूरो

नई दिल्ली : एक ताजे अध्ययन में दावा किया गया है कि मनुष्य का जन्म नर सूअर और मादा चिंपैंजी के मिलन से हुआ। इस बात का दावा जॉर्जिया विश्वविद्यालय के जेनेसिस्ट यूजिन मैकार्थी ने अपने शोध में किया है। मैकार्थी पशुओं के संकर नस्ल पर विशेषज्ञता रखते हैं।

मैकार्थी ने अपने शोध में कहा है कि चिंपैंजी और मनुष्य में असमानताओं के साथ-साथ ढेर सारी समानताएं भी पाई जाती हैं। मैकार्थी के मुताबिक मनुष्य में चिंपैंजी और सूअर दोनों के लक्षण पाए जाते हैं। बंदरों और मनुष्य के बीच जो मुख्य अंतर है, वह सूअर के साथ वर्ण संकर की वजह से है। 

चिंपैंजी और मनुष्य के जीन में बहुत सारी समानताएं होने के बावजूद दोनों की शारीरिक संरचना में मूलभूत अंतर पाया जाता है। इन अंतरों के कारण ही चिंपैंजी और मनुष्य अलग-अलग हैं और चिंपैंजी एवं मनुष्य के बीच अंतर की भरपाई सूअर के जीन द्वारा होती है। 

मैकार्थी के मुताबिक रोंआहीन त्वचा, उसके नीचे सबक्यूटेनियस वसा का आवरण, हल्के रंग की आंखें, उभरी हुईं नाक, घनी भौंहें आदि सारी शारीरिक विशेषताएं सूअर से मिलती-जुलती हैं। मनुष्य की जो शारीरिक संरचनाएं चिंपैंजी से मेल नहीं खातीं, वे संरचनाएं सूअर से मेल खाती हैं। 

मैकार्थी का दावा है कि सूअर के चमड़े का कोष और हृदय दोनों मनुष्य से मेल खाते हैं और चिकित्सा क्षेत्र मंृ भी इस बात के पर्याप्त प्रमाण मिलते हैं।

मैकार्थी के अनुसार यह ‘संकरायन प्रक्रिया’ कई प्रजन्मों से चलती आ रही है। मैकार्थी का दावा है कि सूअर और चिंपैंजी के बीच ‘बैक-क्रासिंग’ भी चली और इसी प्रक्रिया में संततियों में जीन्स का जोड़-घटाव चलता रहा। कालांतर में यह नई प्रजाति जनन में सक्षम में हो गई और मानव जाति का उदय हुआ। sabhar :Zeenews.india.com

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मंगलवार, 3 दिसंबर 2013

बोरे के अंदर थी 25 साल की युवती की लाश

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बोरे के खुलते ही फैली सनसनी, अंदर थी 25 साल की युवती!
इंदौर. सुबह आठ बजे रोज की तरह लोगों की हाईवे पर आवाजाही लगी हुई थी। इसी बीच हीरानगर से पुलिस का एक दल रोड से काफी तेजी से गुजरा। यहां से गुजरने वालों को ऐसा तो आभास हुआ कि कोई मामला हुआ है। पुलिस कुछ ही दूर जाकर सुखलिया चौराहे के पास से निरंजनपुर जाने वाले रास्ते पर ईश्वर नगर के समीप रुक गई। यहां एक बोरा पड़ा हुआ था। बोरे के पास पहुंचकर जब पुलिस ने इसे खोला तो एक 25-२6 साल की गोरे रंग के हुलिए वाली युवती बोरे के अंदर थी। युवती के गले पर धारदार हथियार से चोट का निशान था और उसके दोनों पैर मुड़े हुए थे। इससे ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो उसके पैर टूटे हों। पुलिस को किसी ने यहां पर लावारिस बोरा पड़ा होने की जानकारी दी थी, जिसमें कुछ होने का अंदेशा जताया गया था। युवती के हुलिए को देखकर लग रहा था कि वह संभ्रांत परिवार से ताल्लुक रखती है। लसुडिया पुलिस भी मौके पर पहुंच गई थी।बोरे में युवती की लाश होने की जानकारी मिलते ही पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई। हर कोई वहां पहुंचने की जल्दी में दिखा। देखते ही देखते सैकड़ों की तादात में लोग घटना स्थल पर पहुंच गए। यहां पहुंचे लोगों ने युवती को पहचानने की कोशिश की, लेकिन कोई भी उसे पहचान नहीं पाया। प्रारंभिक जांच में ऐसा माना गया कि युवती की हत्या सुबह-सुबह ही हुई है और उसके साथ दुष्कर्म जैसी घटना नहीं हुई है।
बोरे के खुलते ही फैली सनसनी, अंदर थी 25 साल की युवती!

sabhar : bhaskar.com

 

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रविवार, 1 दिसंबर 2013

इसके पेट में धड़कता था दिल

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चीन का अनोखा शख्स, इसके पेट में धड़कता था दिल, देखें तस्वीरें

चीन के हो झिलियांग का दिल सीने में नहीं बल्कि पेट में है। 24 वर्षीय झिलियांग को कोनजेनिटल कार्डियक एक्सपोजर सिन्ड्रोम नाम की बीमारी है। एक ओर जहां सामान्य स्थिति में दिल, सीने में होता है और नजर नहीं आता वहीं इस शख्स का दिल त्वचा के नीचे धड़कता हुआ दिखाई देता है।
चीन का अनोखा शख्स, इसके सीने की जगह पेट में धड़कता था दिल

झिलियांग बताते हैं कि उनके मां-बाप को भरोसा भी नहीं था कि वो इतने साल जिंदा रहेंगे। वो जिंदा तो रहे लेकिन अब उन्हें सर्जरी की जरूरत है।अमूमन इस सिन्ड्रोम से पीडि़त 90 फीसदी लोग जिंदा नहीं रह पाते हैं, लेकिन झिलियांग उन 10 फीसद खुशकिस्मत लोगों में से एक हैं।

चीन का अनोखा शख्स, इसके सीने की जगह पेट में धड़कता था दिल

डॉक्टरों ने 10 घंटे चली सर्जरी के बाद उनके दिल को ठीक जगह फिट कर दिया और अब उनके दिल में किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं है। 
 sabhar : bhaskar.com

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शनिवार, 30 नवंबर 2013

मुखमैथुन की ही जिद बना दिया मुंह के कैंसर का मरीज

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पत्नी की सेक्स की लत ने पति को बना दिया मुंह के कैंसर का मरीज

अहमदाबाद। शहर में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां रहने वाले एक धनाढ्य परिवार का युवक मुंंह के कैंसर की बीमारी से पीड़ित हो गया है। चिकित्सकों के बताए अनुसार उसे यह कैंसर मुखमैथुन के चलते हुआ है। चिकित्सकों ने जब युवक से पूछताछ की तो युवक ने बताया कि उसकी पत्नी हमेशा उससे मुखमैथुन की ही जिद करती थी।

यह घटना उन लोगों के लिए सबक है, जो अब तक सिर्फ यही सोचते हैं कि कैंसर बीड़ी-तंबाकू-सिगरेट या शराब के सेवन से ही होता है। वर्तमान समय में जिस तरह शारीरिक संबंधों के दौरान मुखमैथुन का प्रवत्ति बढ़ रही है, वह पूरे समाज के लिए एक चिंता का विषय है। अहमदाबाद के पॉश इलाके में रहने वाले प्रतीक शाह (परिवर्तित नाम) कुछ दिन पहले अचानक ही मुंह की एक अज्ञात बीमारी से पीड़ित हो गए। चिकित्सकों ने जब जांच की तो पाया कि उन्हें भी यह मामला शंकास्पद लगा। इसके बाद कैंसर स्पेशलिस्ट ने जांच की तो पता चला कि प्रतीक के मुंह में कैंसर हो चुका है।कैंसर स्पेशलिस्ट ने इसके तमाम कारणों की जांच की तो पाया कि इस कैंसर की वजह सिगरेट या शराब नहीं थी। जब उन्होंने प्रतीक से इस बारे में खुलकर बात करने की समझाइश दी तो प्रतीक ने उन्हें बताया कि उसकी पत्नी अक्सर उससे मुखमैथुन के लिए ही कहा करती थी। मुख-मैथुन की क्रिया पति-पत्नी में आम हो चुकी थी। इसका दुष्परिणाम यह रहा कि उसके मुंह में कैंसर हो गया।इस बारे में एचसीजी कैंसर इंस्टीट्यूट (गुजरात) के डायरेक्टर और मुंह व गले के कैंसर के स्पेशलिस्ट डॉ. कौस्तूभ पटेल ने बताया कि कुछ साल पहले तक मुख-मैथुन से कैंसर के 100 में से 2-3 मामले ही सामने आते थे, लेकिन अब यह आंकड़ा तेजी से बढ़ रहा है।
पत्नी की सेक्स की लत ने पति को बना दिया मुंह के कैंसर का मरीज
डॉ. कौस्तूभ के बताए अनुसार योनि में ह्यूमन पैपीलोमा वायरस यानि एच पी वी होते हैं। मुथमैथुन के दौरान ये वायरस पुरष के शरीर में तेजी से प्रवेश कर जाते हैं। और यही मुंह के कैंसर का कारण बनते हैं। हालांकि बीड़ी-तंबाकू-सिगरेट या शराब से होने वाले कैंसर की तुलना में इसका उपचार संभव है। हां, अगर सही समय पर इसका उपचार शुरू हो जाए तो।शोध से पता चला है कि तम्बाकू की तुलना में ओरल सेक्स से मुंह का कैंसर होने का खतरा कहीं ज्यादा होता है। वैज्ञानिकों ने भी चेताया है कि 50 से कम उम्र के लोगों में मुंह का कैंसर फैलने का सबसे मुख्य कारण ह्यूमन पैपीलोमा वायरस यानि एच पी वी है, जो ओरल सेक्स की वजह से होता है। पिछले कुछ दशकों में कैंसर के बढ़ने का कारण यही वायरस रहा है। 

पत्नी की सेक्स की लत ने पति को बना दिया मुंह के कैंसर का मरीज

इस सम्बंध में कोलम्बस के ओहियो स्टेट यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर गिलीसन का कहना है कि ओरल कैंसर के फैलने के लिए तम्बाकू से ज्यादा जिम्मेदार मौखिक सेक्स है। 
 
गौरतलब है कि ब्रिटेन में 12 और 13 वर्ष के बच्चों को इस घातक बीमारी से बचाने के लिए वैक्सीन का वितरण किया जा रहा है। यहां हर साल लगभग 1000 महिलाओं की मौत का कारण ये वायरस ही रहा है।असुरक्षित यौन संबंध एचआईवी/एड्स की वजह तो है ही, अब वह लिंग, गुदा और मुंह कैंसर का कारण भी बनता जा रहा है। महिलाओं में तेजी से बढ़ रहे सर्वाइकल कैंसर के रिवर्स इफेक्ट से पुरुष भी प्रभावित होने लगे हैं। महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर के लिए जिम्मेदार ह्यूमन पेपिलोमा वायरस पुरुषों में मुंह कैंसर, गुदा कैंसर  के अलावा  लिंग कैंसर की वजह बन रहा है।

असुरक्षित यौन संबंध एचआईवी/एड्स की वजह तो है ही, अब वह लिंग, गुदा और मुंह कैंसर का कारण भी बनता जा रहा है। महिलाओं में तेजी से बढ़ रहे सर्वाइकल कैंसर के रिवर्स इफेक्ट से पुरुष भी प्रभावित होने लगे हैं। महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर के लिए जिम्मेदार ह्यूमन पेपिलोमा वायरस पुरुषों में मुंह कैंसर, गुदा कैंसर  के अलावा  लिंग कैंसर की वजह बन रहा है।

पत्नी की सेक्स की लत ने पति को बना दिया मुंह के कैंसर का मरीज

पत्नी की सेक्स की लत ने पति को बना दिया मुंह के कैंसर का मरीज

कैंसर रजिस्ट्री के अनुसार वर्ष 2009 तक भारत में लिंग कैंसर के 755 मामले सामने आ चुके थे। इसमें सबसे अधिक 211 मामले दिल्ली से हैं। दिल्ली में प्रति एक लाख पुरुष पर लिंग कैंसर के शिकार लोगों की संख्या 0.9 है, जबकि पूरे देश में इससे कम केवल 0.5 है. लिंग कैंसर से मरने वाले लोगों की संख्या सबसे अधिक चेन्नई में है। वहां एक लाख लोगों में प्रति वर्ष 1.5 फीसदी लोग पेनाइल कैंसर से मरते हैं जबकि दिल्ली में इसकी संख्या 0.6 है। पश्चिमी देशों में एक लाख लोगों पर एक व्यक्ति को पेनाइल कैंसर होता है।
 
पत्नी की सेक्स की लत ने पति को बना दिया मुंह के कैंसर का मरीज

कैंसर विशेषज्ञों के अनुसार लिंग कैंसर की और भी वजहें हैं, लेकिन सबसे बड़ी वजह एचपीवी का प्रसार है। एचपीवी एक डीएनए आधारित वायरस है। यह पुरुषों के वीर्य में पाया जाता है। करीब 100 तरह के एचपीवी होते हैं, जिसमें एचपीवी 16 व एचपीवी 18 जैसे वायरस कैंसर रोग जनित हैं। भारत में एचपीवी से होने वाले सभी कैंसरों में एचपीवी 16 के अधिक सक्रिय होने का मामला सामने आया है।  sabhar : bhaskar.com

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भारतवंशी सत्या नडेला करेगा दुनिया पर राज, बनेगा 8800 अरब का 'मालिक'!

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हैदराबाद का ये लड़का करेगा दुनिया पर राज, बनेगा 8800 अरब का 'मालिक'!

 माइक्रोसॉफ्ट के मौजूदा सीईओ स्टीव बॉल्मर रिटायर होना चाहते हैं।माइक्रोसॉफ्ट के मौजूदा सीईओ स्टीव बॉल्मर ने दो माह पहले कहा था कि वे 2014 में पद छोड़ देंगे। कंपनी एक साल के भीतर नया सीईओ अपॉइंट कर ले। इसलिए माइक्रोसॉफ्ट की सर्च कमेटी नए सीईओ की तलाश में है। कमेटी दुनिया भर में अलग अलग सेक्टर्स के सीईओ के संपर्क में है। माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ के पद की दौड़ में भारतवंशी सत्या नडेला आगे चल रहे हैं। फोर्ड मोटर कंपनी के सीईओ एलन मुलाली का नाम भी चर्चा में है। शुक्रवार को ब्लूमबर्ग ने इस संबंध में नंबंरिंग जारी की। ब्लूमबर्ग के मुताबिक कंपनी इन दोनों के नाम पर प्रमुखता से विचार कर रही है सत्या नादेला माइक्रोसॉफ्ट में 21 सालों से कार्यरत शीर्ष पदस्थ भारतवंशी हैं । कंपनी के क्लाउड और एंटरप्राइज समूह के लीडर हैं । इनकी टीम ऑनलाइन/मोबाइल कंप्यूटिंग के क्षेत्र में संघर्ष कर रही है।सत्य नाडेला की उम्मीदवारी की बात इसलिए भी हो रही है कि उन्हें बिजनेस क्लाइंट के साथ डीलिंग का पुराना अनुभव है। एक और गौर करने की बात है कि यही वो शख्स हैं जो कंपनी की आय में सबसे बड़ी भूमिका निभाते हैं। इन्हीं की बदौलत कंपनी को सबसे ज्यादा पैसा मिलता है। फोर्ड मोटो कॉर्प के को-चीफ एलन मुलाली (68) के नेतृत्व में कंपनी घाटे से उभरकर आज फायदे में है। एलन ने 2006 में जॉइन किया था। हालांकि 2014 तक उनका कंपनी से एग्रीमेंट हुआ है लेकिन वे पद छोड़ सकते हैं। 
 हैदराबाद का ये लड़का करेगा दुनिया पर राज, बनेगा 8800 अरब का 'मालिक'!
हैदराबाद का ये लड़का करेगा दुनिया पर राज, बनेगा 8800 अरब का 'मालिक'!
फोर्ड के एलन मुलाली के अलावा कंप्यूटर साइंसेज कॉर्पोरेशन के सीईओ माइक लॉरी भी दावेदारी में नंबर वन पर हैं।

हैदराबाद का ये लड़का करेगा दुनिया पर राज, बनेगा 8800 अरब का 'मालिक'!

नोकिया के पूर्व सीईओ स्टीफन एलोप
 2010 में नोकिया में जाने से पहले स्टीफन एलोप माइक्रोसॉफ्ट के बिजनेस डेवलपमेंट विंग का काम देखते थे


स्काइप के सीईओ टोनी बेट्स
 हैदराबाद का ये लड़का करेगा दुनिया पर राज, बनेगा 8800 अरब का 'मालिक'!
माइक्रोसॉफ्ट की मैसेजिंग सर्विस स्काइप के सीईओ टोनी बेट्स का नाम भी रेस में शामिल लोगों में है। बेट्स के पास अब माइक्रोसॉफ्ट के बिनजेस डेवलपमेंट विंग का कार्यभार है। बेट्स ने 2011 में ही स्काइप के सीईओ का कार्यभार संभाला था। 
हैदराबाद का ये लड़का करेगा दुनिया पर राज, बनेगा 8800 अरब का 'मालिक'!

क्यों पिछड़ी माइक्रोसॉफ्ट 
 
बीते माह वॉल स्ट्रीट की रिपेार्ट में बताया गया था कि माइक्रोसॉफ्ट अब भी फायदे में है। लेकिन मोबाइल फोन कंपनी एप्पल और सैंमसंग ने माइक्रोसॉफ्ट को बिजनेस के मामले में काफी पीछे धकेल दिया है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि पीसी की बजाय अब लोग एप्पल और सैमसंग के स्मार्टफोन खरीदना पंसद कर रहे हैं। वहीं टैबलेट ने तो पीसी की मार्केट को पूरी तह से खत्म ही कर दिया है। sabhar : bhaskar.com


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शुक्रवार, 29 नवंबर 2013

गुड़हल रोगों की अचूक दवा

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एक साधारण फूल, जो है इन बड़े रोगों की अचूक दवा


गुड़हल एक सामान्य पौधा है। जिसके फूल बहुत उपयोगी होते हैं आयुर्वेद में इसे कई रोगों में रामबाण दवा माना गया है। भारतीय पारंपरिक चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद के अनुसार सफेद गुड़हल की जड़ों को पीस कर कई दवाएं बनाई जाती हैं। मेक्सिको में गुड़हल के सूखे फूलों को उबालकर बनाया गया पेय एगुआ डे जमाई का अपने रंग और तीखे स्वाद के लिये काफी लोकप्रिय है। आयुर्वेद में इस फूल के कई प्रयोग बताएं गए हैं।
 मुंह के छाले में गुड़हल के पत्ते चबाने से लाभ होता है।गुड़हल का शर्बत दिल और दिमाग को शक्ति प्रदान करता है तथा बुखार व प्रदर में भी लाभकारी होता है। यह शर्बत बनाने के लिए गुड़हल के सौ फूल लेकर कांच के पात्र में डालकर इसमें 20 नीबू का रस डालें व ढक दें। रात भर बंद रखने के बाद सुबह इसे हाथ से मसलकर कपड़े से इस रस को छान लें। इसमें 80 ग्राम मिश्री, 20 ग्राम गुले गाजबान का अर्क, 20 ग्राम अनार का रस, 20 ग्राम संतरे का रस मिलाकर मंद आंच पर पका लें।मैथीदाना, गुड़हल और बेर की पत्तियां पीसकर पेस्ट बना लें। इसे 15 मिनट तक बालों में लगाएं। इससे आपके बालों की जड़ें मजबूत होंगी और स्वस्थ भी।मैथीदाना, गुड़हल और बेर की पत्तियां पीसकर पेस्ट बना लें। इसे 15 मिनट तक बालों में लगाएं। इससे आपके बालों की जड़ें मजबूत होंगी और स्वस्थ भी।गुड़हल के लाल फूल की 25 पत्तियां नियमित खाएं। ये डायबिटीज का पक्का इलाज है।गुड़हल की पत्ती से बनी चाय का इस्तेमाल कई देशों में औषधि के रूप में किया जाता है। अगर आपको किडनी की समस्या है तो इससे बनी चाय बिना शक्कर के लें। साथ ही इससे डिप्रेशन के समय मूड भी ठीक हो जाएगा। sabhar : WWW.bhaskar.com

 

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गुरुवार, 28 नवंबर 2013

3डी प्रिंटर छापेगा पकवान

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बर्सिलोना स्टार्टअप नेचुरल मशीन एक ऐसा 3डी प्रिंटर का प्रोटोटाइप है जो मनचाहा डिश बना सकता है. इसे फूडिनी ने विकसित किया है.
इससे चॉकलेट, कुकीज़ आदि इंस्टेंट खाद्य पदार्थ बनाया जा सकता है.
तकनीकी रूप से यह प्रिंटिंग नहीं है. एक पाइप के मार्फ़त इससे कई तरह की खाने की चीज़ें बनाई जा सकती हैं.
इसमें छह अलग-अलग तत्वों के लिए हौज़ पाइप लगे होते हैं. इससे डिज़ाइन किए गए डिश का निर्माण होता है.
अंतरिक्षयात्रियों को भोजन मुहैया कराने के लिए नासा भी इस तरह के प्रोटोटाइप का परीक्षण कर रहा है.सियोभान एंड्र्यूज़ ने एक ऐसा टच स्क्रीन चॉपिंग ब्लॉक बनाया है जो टुकड़ों के आकार के आधार पर आपको बता देता है कि खाने वालों की तय संख्या के लिए पर्याप्त है.
इसे 'गेटइटडाउनऑनपेपर' प्रतियोगिता में पुरस्कार भी मिल चुका है. इसका विकास शार्प लेबोरेटरीज़ ऑफ़ यूरोप एंड ह्यूमन इनवेंट द्वारा प्रायोजित था.
टफेंड ग्लास से बना यह चॉप सिंक आपकी ऑनलाइन ख़रीदारी लिस्ट में से रेसिपी सुझा सकता है और सुपर मार्केट को ऑर्डर भी भेज सकता है.
2013 के इलेक्ट्रोलक्स डिज़ाइन लैब प्रतियोगिता में न्यूट्रिमा फ़ूड एनॉलिसिस मैट का प्रोटोटाइप अंतिम विजेताओं में शामिल रहा.
इसे फ़िनलैंड की जेन पालोवूरी ने बनाया है. यह मैट खाद्य पदार्थ का भार, इसमें मौजूद विषैले प्रदूषण के साथ ही इसके पोषण तत्व के बारे में भी बताता है.
इसे उर्ध्वार्धर या क्षैतिज किसी भी तरह से रखा जा सकता है.
ये किचन गैजेट भविष्य में स्मार्ट फ़्रिज जैसे उपकरणों से सीधे सूचनाएं साझा करने लगेंगे. sabhar :http://www.bbc.co.uk

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मार्कोस रॉड्रिग्ज पेंटोजा :जिसे बाप ने बेचा और भेड़ियों सांपो ने बचाया

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मार्कोस रॉड्रिग्ज पेंटोजा


मार्कोस को याद है वह बहुत छोटे थे, क़रीब छह या सात साल के, जब उनके पिता ने उन्हें एक किसान को बेच दिया था.
वह किसान उन्हें एक बूढ़े चरवाहे की मदद करने के लिए सिएरा मोरेना के पहाड़ों में ले गया. जल्द ही उस बूढ़े व्यक्ति की मौत हो गई और मार्कोस अकेला रह गए.
कई सालों तक अपनी सौतेली मां से पिटने के डर से मार्कोस ने भी इंसानों की संगत के बजाए पहाड़ों में एकांत में रहने की ठान ली और वहां से जाने की कोई कोशिश नहीं की.
मरने से पहले उस बूढ़े चरवाहे ने एक बात मार्कोस को ज़रूर सीखा दी थी की कभी भी भूखे मत रहो.
मार्कोस लकड़ियों और पत्तियों का जाल बना कर ख़रग़ोश और तीतरों का शिकार करना सीख चुके थे.मार्कोस के अनुसार "जानवरों ने मुझे सिखाया की क्या खाना है. जो कुछ भी वह खाते थे, मैं भी वही खाता था. जंगलीसुअर 
ज़मीन के नीचे दबे हुए कंद खाते थे. सुअर उनका पता लगा पाते थे क्योंकि उनको उसकी गंध आ जाती थी. जब सुअर कंद-मूल के लिए ज़मीन खोदते थे तो मैं उन्हें पत्थर मार कर भगा देता था और सुअर वहां से भाग जाते थे और मैं कंद चुरा लेता था."
मार्कोस ने कहा कि बहुत से जानवरों के साथ उनके एक तरह के ख़ास रिश्ते बन गए थे.
यहां तक की भेड़ियों के एक परिवार के साथ उनके संबंधों की बात पर कई लोग विश्वास भी नहीं कर पाते हैं.उन्होंने बताया, "एक दिन मैं एक गुफ़ा में गया. मैं वहां रह रहे भेड़ियों के बच्चों के साथ खेलने लगा और सो गया. कुछ देर में बच्चों की मां उनके लिए खाना लेकर आई और मैं जाग उठा. वह मेरी ओर ग़ुस्से के साथ देखने लगी. भेड़िए ने मांस के टुकड़े अलग करने शुरू किए. भेड़िए का एक बच्चा मेरे क़रीब आया और भूखा होने की वजह से मैंने उससे मांस का टुकड़ा चुराने की कोशिश की. भेड़िए ने तभी मेरी तरफ़ पंजा उठाया और मैं पीछे की ओर हट गया. अपने बच्चों को खिलाने के बाद भेड़िए ने मांस का एक टुकड़ा मेरी ओर फेंका."
मार्कोस बताते हैं, "मैं उसे छूना नहीं चाहता था, क्योंकि मुझे लगा की वह मुझ पर हमला करने वाली है. लेकिन वह अपनी नाक से उस मांस के टुकड़े को मेरी ओर सरकाने लगी. मैंने टुकड़ा उठाया और खाने लगा. मुझे लगा की वह मुझे काटने वाली है, लेकिन उसने अपनी जीभ बाहर की ओर की और मुझे चाटने लगी. इसके बाद से मैं भी उस भेड़िए के परिवार का एक हिस्सा बन चुका था."
मार्कोस यह भी बताते हैं,"पहाड़ों में वह एक नागिन के साथ रहा करते थे. यह नागिन एक सूनसान खान के एक हिस्से में बनी गुफ़ा में मेरे साथ रहा करती थी. मैंने उसके लिए एक घोंसला बनाया और उसे बकरियों का दूध पिलाया करता था."
मार्कोस कहते हैं, "मैं जहां भी जाता था वह मेरे पीछे-पीछे आ जाती थी और मेरी रक्षा करती थी."मार्कोस कहते हैं, "यही रिश्ते थे, जो मेरा अकेलापन दूर करते थे, मैं अकेला उसी समय महसूस करते थे जब कोई जानवर मेरे क़रीब नहीं होता था. ऐसे समय में जानवरों की आवाज़ निकालता था. अभी भी मैं हिरण, लोमड़ी और चील की आवाज़ निकाल सकता हूँ. और जब जानवर मेरी आवाज़ का जवाब देते तभी मैं सो पाता था."
मार्कोस के जीवन में धीरे-धीरे शब्दों की जगह आवाज़ और टर्रटर्राहटों ने ले ली थी.
मार्कोस का बोलना पूरी तरह से बंद हो चुका होता अगर गॉर्डिया सिविल (पुलिस) ने उन्हें ढूंढ़ निकाला न होता. पुलिस उन्हें जबरन पहाड़ों की तलहटी में बसे छोटे से गांव फुएनकालेंटे में ले गई. यहां मार्कोस की पहचान के लिए उनके पिता को बुलाया गया.
मार्कोस बताते हैं, "जब मैंने अपने पिता को देखा तो मुझे कुछ भी महसूस नहीं हुआ. मेरे पिता ने मुझसे केवल एक चीज़ पूछी. तुम्हारा जैकेट कहां है? मानो इतने सालों तक मैं वही जैकेट पहन रहा था."
समाज में वापसी को मार्कोस अपने जीवन का सबसे भयावह लम्हा बताते हैं.
पहली बार नाई की दुकान में जाने से लेकर बिस्तर में सोने तक सब कुछ उनके लिए सदमे भरा था. नाई के हाथों में उस्तरा देखकर उन्हें लगा था कि वो उनका गला काट देगा.
इन चीज़ों को स्वीकार करने में उन्हें लंबा समय लगा. sabhar : http://www.bbc.co.uk

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मैक्सिको में नशीले पदार्थो से जुड़े ड्रग वार और मानव बलि

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मौज-मस्ती के नाम पर हर जगह मौत नाच रही है अब इस देश में..


मैक्सिको में सेंट डेथ– संप्रदाय के अनुयायियों की संख्या भी लगातार बढ़ती जा रही है। इस संप्रदाय के अनुयायी शादी के जोड़े वाली स्त्री के कपाल की पूजा करते हैं। देश में इसके 80 लाख अनुयायी हैं। अमेरिका और कनाडा में भी इसके अनुयायी हैं। नशीले पदार्थो के तस्कर भी गिरफ्तारी से बचने और अधिक से अधिक पैसा बनाने के लिए इस देवी की पूजा करते हैं और मानव बलि देते हैंमैक्सिको के फादर कैरो ने कहा, उन्होंने एक व्यक्ति के लिए पूजा करवाई। वह जिंदा लोगों को टुकड़ों में काटने वाले गिरोह का मुखिया था
मौज-मस्ती के नाम पर हर जगह मौत नाच रही है अब इस देश में..
ईश्वर और शैतान होते हैं या नहीं इस पर सदियों से विवाद है। लेकिन मैक्सिको के धर्मगुरुओं ने दावा किया है कि मैक्सिको पर शैतान ने हमला कर दिया है। उनका दावा है कि ईश्वर उनसे लड़ रहा है। अब लोगों को भी उनसे लड़ने की जरूरत है।धर्मगुरुओं के अनुसार मैक्सिको में नशीले पदार्थो से जुड़े ड्रग वार और मानव बलि इस हमले की पहचान है। मैक्सिको 2006 से इसकी गिरफ्त में है और आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक इसमें 70,000 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं। सड़क किनारे लगभग रोज मिलने वाले स्कूली बच्चों के शव इसके सबूत हैं। व्यस्त सड़कों के किनारे पुलों और पेड़ों पर लटके शव देखे जा सकते हैं।
मौज-मस्ती के नाम पर हर जगह मौत नाच रही है अब इस देश में..

मैक्सिको में सेंट डेथ– संप्रदाय के अनुयायियों की संख्या भी लगातार बढ़ती जा रही है। इस संप्रदाय के अनुयायी शादी के जोड़े वाली स्त्री के कपाल की पूजा करते हैं। देश में इसके 80 लाख अनुयायी हैं। अमेरिका और कनाडा में भी इसके अनुयायी हैं। नशीले पदार्थो के तस्कर भी गिरफ्तारी से बचने और अधिक से अधिक पैसा बनाने के लिए इस देवी की पूजा करते हैं और मानव बलि देते हैंमैक्सिको के फादर कैरो ने कहा, उन्होंने एक व्यक्ति के लिए पूजा करवाई। वह जिंदा लोगों को टुकड़ों में काटने वाले गिरोह का मुखिया था। उन्हें लोगों की चीत्कार सुनकर मजा आता था। वह लोगों को जिंदा जलते देखकर भी खुश होता था।मैक्सिको में पिछले कुछ सालों से ड्रग वॉर चल रहा है। मैक्सिको की सरकार मादक द्रव्यों की तस्करी और वर्चस्व की लड़ाई में हो रही मौतों से का़फी चिंतित है। सरकार इन तस्करों पर अंकुश लगाने में सफल नहीं हो पा रही है। यहां के लोग भी इस ड्रग वॉर से बहुत घबराए हुए हैं। माफियाओं के बीच चल रही इस जंग का शिकार आम आदमी बन रहा है। गोलीबारी में अक्सर निर्दोष लोग भी मारे जाते हैं।सरकारी आंकड़े बताते हैं कि इस ड्रग वॉर में 2006 से अब तक 28,000 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि अन्य स्रोत इससे भी बड़े आंकड़े पेश करते हैं। उनके अनुसार, इस ड्रग वॉर में अब तक लगभग 70.000 हज़ार लोगों की जानें जा चुकी हैं। खुफिया विभाग के प्रमुख वॉल्डेस का कहना है कि राष्ट्रपति फिलिप कालडेरॉन के पद संभालने के बाद इन गिरोहों के साथ सुरक्षाबलों की 963 मुठभेड़ें हुईं। आंकड़े बताते हैं कि इस दौरान प्रतिदिन एक मुठभेड़ दर्ज की गई। पुलिस और सेना ने मिलकर 84 हज़ार हथियार, 35 हजार वाहन और 40 करोड़ डॉलर से ज़्यादा धनराशि ज़ब्त की। पुलिस का अनुमान है कि यह रकम नशीली दवाओं के व्यापार से कमाई गई थी। इससे इस बात का अनुमान लगाया जा सकता है कि मैक्सिको में नशीली दवाओं का कारोबार कितनी तेज़ी से बढ़ रहा है। sabhar : bhaskar.com

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