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शनिवार, 23 नवंबर 2013

बादाम और लंबी उम्र

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एक शोध के मुताबिक़ बादाम खाने वाले लोग लंबी उम्र जीते हैं

न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ़ मेडिसिन में प्रकाशित शोध के अनुसार उन लोगों को सबसे ज़्यादा फ़ायदा होता है जो रोज़ाना चबाकर-चबाकर बादाम खाते हैं.
अमरीकी टीम ने इस शोध में एक लाख 20 हज़ार लोगों पर 30 साल तक नज़र रखी गई.हालांकि ब्रिटिश हार्ट फाउंडेशन का कहना है कि बादाम और लंबी उम्र के बीच के रिश्ते को साबित करने के लिए अभी और ज़्यादा शोध की ज़रूरत होगी.
बादाम का सेवन कोलेस्ट्रॉल और सूजन को कम करता है.डाना-फैबर कैंसर इंस्टीट्यूट और ब्रीगम एंड वीमंस हॉस्पिटल के मुख्य शोधकर्ता डॉ. चार्ल्स फक्स ने कहा, "बादाम खाने से हृद्य रोगों से होने वाली मौतों में 28 प्रतिशत की कमी देखी गई है. इसके अतिरिक्त कैंसर से होने वाली मौतों में 11 प्रतिशत तक की कमी देखी गई."
ब्रिटिश हृद्य संस्थान में वरिष्ठ आहार विशेषज्ञ विक्टोरिया टेलर कहती हैं, "यह अध्ययन नियमित रूप से बादाम के सेवन और हृद्य रोगों से संभावित मौतों के बीच कमी में एक संबंध स्थापित करता है." sabhar  :http://www.bbc.co.uk

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भव्य रॉयल हवेली संत के लिए बनी है

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यह ट्राईसिटी की जानी मानी आर्किटेक्ट रेणु खन्ना का घर है जोकि किसी हवेली के मॉडिफाइड रूप से कम नहीं।



ये रॉयल हवेली बनी है संत के लिए, देखिए इस हवेली की भव्यता




ये रॉयल हवेली बनी है संत के लिए, देखिए इस हवेली की भव्यता
घर की डिजाइनिंग करते हुए लाइटनिंग के खर्च के बारे में सोचा। इसलिए सोलर पॉवर, रेन वॉटर हॉर्वेस्टिंग सिस्टम और वॉटर हीटर को यूज किया। ताकि शाम 6 बजे तक घर में कोई लाइट न जलानी पड़े। घर के सामने पहाड़ साफ नजर आता है। यह नजारा घर के हर कोने से दिख सके चाहे वो गेस्ट का कमरा हो, किचन हो या फिर बेडरूम। इसलिए खिड़कियों को बड़ा बनाया। सब कुछ बहते हुए पानी की तरह बनाया। नेचुरल लाइट पर फोकस करते हुए छतों की डिजाइनिंग की।’

रेणु श्री रविशंकर की फॉलोअर है। उन्होंने अपने गुरू जी के लिए घर में एक खास रूम बनाया है। उसे नीले रंग का इफैक्ट दिया है। यह इसलिए क्योंकि नीला रंग भगवान शिव का प्रतीक है। दीवार पर मोर और उस पर ब्लू लाइटनिंग इस्तेमाल की है।

घर में वास्तु के मुताबिक भी कुछ डिजाइनिंग की गई है। इस पर रेणु बताती हैं, ‘ यहां वास्तु के हर आस्पेक्ट को जोड़ा है। रंगों से लेकर पंच तत्वों को। हर इंसान पंच तत्व से बना है। जल, अग्नि, वायु, धरती और आकाश। घर के कमरों को मैंने इन पांचों तत्वों से जोड़ा है। किसी कमरे ही छत को लाल रंग का इफैक्ट दिया तो किसी को नीला। हर दो कमरों के बाहर एक लॉबी बनाई, जिससे किसी को मिलने में दिक्कत न हो। बेडरूम के बाहर लॉबी में ही फ्रेंड व अन्य 

लोगों से मिल सकें। ड्राइंग रूम से लेकर कोर्टयार्ड और लिविंग एरिया सात रंगों से सजाया।’

ये रॉयल हवेली बनी है संत के लिए, देखिए इस हवेली की भव्यता


sabhar : bhaskar.com

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कहीं स्मार्ट टीवी आपकी ‘जासूसी’ तो नहीं कर रहा?

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lg smart tv spying
इलेक्ट्रॉनिक सामान बनाने वाली कंपनी एलजी पर इंग्लैंड के एक आईटी कंसल्टेंट ने जासूसी करने का आरोप लगाया है।

उनका कहना है कि प्राइवेसी सेटिंग को एक्टिवेट करने के बावजूद एलजी के स्मार्ट टीवी लोगों की टीवी देखने की आदत के बारे में कंपनी को विस्तृत जानकारी भेजते हैं। एलजी इन आरोपों की जांच कर रही है।

हल के आईटी कंसल्टेंट जैसन हंटले ने एक ब्लॉग में लिखा है कि आप कौन से चैनल देख रहे हैं, इसकी जानकारी स्मार्ट टीवी एलजी को भेजता है।
उनकी जांच में यह भी सामने आया कि स्मार्ट टीवी उससे जुड़े अन्य उपकरणों की जानकारी भी कंपनी को देता है।

इसका मतलब यह हो सकता है कि एलजी ने नियमों का उल्लंघन किया है। इस बारे में ब्रिटेन के सूचना आयुक्त कार्यालय ने कहा है कि वो मामले को देख रहे हैं।

एक प्रवक्ता ने कहा, ''हमें हाल ही में जानकारी मिली है कि गोपनीयता का उल्लंघन किया गया, इसमें 
क्लिक करें एलजी का स्मार्ट टीवी भी शामिल हो सकता है।''

ब्रिटेन के सूचना आयुक्त के कार्यालय ने कहा है कि वह आरोपों की जांच कर रहा है। उसके बाद ही कार्रवाई के बारे में 

फैसला किया जाएगा। जैसन हंटले ने कहा कि जब उन्होंने दक्षिण कोरियाई कंपनी एलजी से संपर्क किया तो उनसे 

कहा गया कि वे एलजी टीवी का इस्तेमाल करने से पहले कंपनी के नियमों को स्वीकार कर चुके हैं। अब कोई 

शिकायत है तो उस दुकानदार से संपर्क करें जिससे टीवी खरीदा है। बीबीसी ने लिखा है कि उसे कंपनी ने कहा कि वह 

शिकायत पर कार्रवाई कर रही है। हंटले ने दावा किया कि उसके पास प्राईवेट सेटिंग बदलने के बावजूद जानकारी

भेजे जाने के सबूत हैं। sabhar : http://www.amarujala.com : http://www.bhaskar.com

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शुक्रवार, 22 नवंबर 2013

खजाने की खोजः जेसीबी मशीन लेकर खुदाई करने पहुंचे ओम बाबा

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खजाने की खोजः सरकार हारी तो जेसीबी लेकर खुद खुदाई करने पहुंचे शोभन सरकार के चेले

 डोंडिया खेड़ा में खजाने की खोज में गुरुवार को नया मोड़ आ गया। एएसआई की टीम के खुदाई बंद करने के बाद संत शोभन सरकार के शिष्य ओम बाबा ने खुद मोर्चा संभाल लिया। ओम बाबा खुद जेसीबी मशीन लेकर खुदाई करने पहुंच गए। गौरतलब है कि पिछले दिनों एएसआई की टीम किले में खजाने की खोज के लिए खुदाई बंद कर वापस लौट चुकी है।बृहस्पतिवार सुबह संत शोभन सरकार ने बक्सर आश्रम में विशेष पूजा कर जेसीबी मशीन के साथ किले में खजाने की खुदाई के लिए ओम बाबा को भेज दिया। खुदाई शुरू कराए जाने की खबर से भीड़ के साथ पुलिस भी पहुंच गई। पुलिस जेसीबी को अपने साथ लेकर जाने लगी तो भीड़ आक्रोशित हो उठी। भीड़ के तेवर बिगड़ते देख बैकफुट पर आई पुलिस ने जेसीबी को किला परिसर में खड़ा करा दिया। एसडीएम विजय शंकर दुबे भी मौके पर पहुंचे और हालात को संभालने की कोशिश की। जिसके बाद ओम बाबा बक्सर आश्रम वापस चले गए। उन्होंने पत्रकारों को बताया कि फोन पर प्रशासन से सहमति मिलने के बाद वे लोग आए थे, लेकिन बाद में प्रशासन मुकर गया।

daundiya kheda


sabhar : jagaran.com  : bhaskar.com

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गुरुवार, 21 नवंबर 2013

परामनोविज्ञान द्वारा आत्मा को जाने

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what is parapsychology history

अमर उजाला डाट com मे प्रकाशित खबर के मुताबिक  परामनोविज्ञान  और आत्मा से सम्बन्धित खबर के अनुसार  परामनोविज्ञान का संबंध मनुष्य की उन असामान्य शक्तियों से है, जिनकी व्याख्या अब तक के प्रचलित सामान्य मनोवैज्ञानिक सिद्धांतों से नहीं हो पाती। इन तथाकथित प्राकृति से परे तथा विलक्षण प्रतीत होने वाली घटनाओं या प्रक्रियाओं की व्याख्या में ज्ञात भौतिक तत्वों से भी सहायता नहीं मिलती। 

परिचित ज्ञान, विचार संक्रमण, दूरानुभूति, पूर्वाभास, अतींद्रिय ज्ञान, मनोजनित गति या साइकोकाइनेसिस आदि कुछ ऐसी प्रक्रियाएं हैं, जो एक भिन्न कोटि की मानवीय शक्ति तथा अनुभूति की ओर संकेत करती हैं। इन घटनाओं की वैज्ञानिक स्तर पर घोर उपेक्षा की गई है और इन्हें बहुधा जादू-टोने से जोड़कर, गुह्यविद्या का नाम देकर विज्ञान से अलग समझा गया है।

किंतु ये विलक्षण प्रतीत होने वाली घटनाएं घटित होती हैं। वैज्ञानिक उनकी उपेक्षा कर सकते हैं, पर घटनाओं को घटित होने से नहीं रोक सकते। इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि आज भी परामनोविज्ञान को वैज्ञानिक संदेह तथा उपेक्षा की दृष्टि से देखता है। किंतु वास्तव में परामनोविज्ञान न जादू टोना है, न वह गुह्यविद्या, प्रेतविद्या या तंत्रमंत्र जैसा कोई विषय। इन तथाकथित प्राकृतेतर, पराभौतिक एवं परामानसकीय, विलक्षण प्रतीत होने वाली अधिसामान्य घटनाओं या प्रक्रियाओं का विधिवत् तथा क्रमबद्ध अध्ययन ही परामनोविज्ञान का मुख्य उद्देश्य है।

इन्हें प्रयोगात्मक पद्धति की परिधि में बांधने का प्रयत्न, इसकी मुख्य समस्या है। परामानसकीय अनुसंधान या साइकिकल रिसर्च इन्हीं पराभौतिक विलक्षण घटनाओं के अध्ययन का अपेक्षाकृत प्राचीन नाम है, जिसके अंतर्गत विविध प्रकार की उपांत घटनाएं भी सम्मिलित हैं, मानव का अदृश्य जगत से इंद्रियेतर संपर्क में विश्वास बहुत पुराना है। लोककथाएं, प्राचीन साहित्य, दर्शन तथा धर्मग्रंथ पराभौतिक घटनाओं तथा अद्भुत मानवीय शक्तियों के उदाहरणों से भरे पड़े हैं। परामनोविद्या का इतिहास बहुत पुराना है - विशेष रूप से भारत में।

किंतु वैज्ञानिक स्तर पर इन तथाकथित पराभौतिक विलक्षण घटनाओं का अध्ययन उन्नीसवीं शताब्दी की देन है। इससे पूर्व इन तथाकथित रहस्यमय क्रिया व्यापारों को समझने की दिशा में कोई संगठित वैज्ञानिक प्रयत्न नहीं हुआ। आधुनिक परामनोविज्ञान का प्रारंभ सन् 1882 से ही मानना चाहिए, जिस वर्ष लंदन में परामानसकीय अनुसंधान के लिए सोसाइटी फॉर साइकिकल रिसर्च (एसपीआर) की स्थापना हुई।

यद्यपि इससे पहले भी कैंब्रिज में घोस्ट सोसाइटी, तथा ऑक्सफोर्ड में फैस्मेटोलाजिकल सोसाइटी जैसे संस्थान रह चुके थे, तथापि एक संगठित वैज्ञानिक प्रयत्न का आरंभ एसपीआर की स्थापना से ही हुआ, जिसकी पहली बैठक 17 जुलाई, 1882 ई. में प्रसिद्ध दार्शनिक हेनरी सिजविक की अध्यक्षता में हुई। इसके संस्थापकों में हेनरी सिजविक उनकी पत्नी ईएम सिजविक, आर्थर तथा गेराल्ड बाल्फोर, लार्ड रेले, एफडब्ल्यूएच मायर्स तथा भौतिक शास्त्री सर विलियम बैरेट थे।

भूत होते हैं 

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बुधवार, 20 नवंबर 2013

महिला पत्रकार के यौन उत्पीडऩ के आरोप के बाद 'तहलका' के संपादक ने दिया इस्‍तीफा

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‘तहलका’ पत्रिका के संपादक तरुण तेजपाल पर महिला पत्रकार के यौन उत्पीडऩ के आरोप का मामला तूल पकड़ने लगा है।तेजपाल ने आरोप स्वीकार कर लिया है। उन्‍होंने मेल भेजकर घटना के लिए माफी मांगी है। साथ ही छह महीने के लिए तहलका के संपादक पद से इस्तीफा दे दिया है। बताया जाता है कि तेजपाल इस महिला के पिता के सहकर्मी रह चुके हैं। पीडि़त तेजपाल की बेटी की सहेली भी है।मामले का खुलासा बुधवार देर रात हुआ। हालांकि घटना 8 से 10 नवंबर के बीच गोवा में हुई। उस वक्त वहां तहलका का ही कार्यक्रम ‘थिंक’ चल रहा था। तहलका की मैनेजिंग एडिटर शोमा चौधरी को लिखे पत्र में तेजपाल ने कहा- ‘बीते कुछ दिन बेहद मुश्किल रहे हैं। मैं इसका पूरा दोष खुद पर लेता हूं। गलत निर्णय और स्थिति को गलत तरीके से समझने की वजह से यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई। यह उसके खिलाफ है, जिसके लिए हम लड़ते रहे हैं। मैं संबंधित पत्रकार से दुर्व्‍यवहार के लिए बिना शर्त माफी मांगता हूं। मैं इसका प्रायश्चित भी करना चाहता हूं।’

बेटी की सहेली का यौन शोषण करने के बाद 'तहलका' के संपादक ने दिया इस्‍तीफा



तेजपाल के मेल की सूचना कर्मचारियों को दे दी गई है। चौधरी ने कहा कि यह संस्थान का भीतरी मामला है और महिला पत्रकार इस जवाब और माफीनामे से संतुष्ट है। sabhar : bhaskar.com : http://khabar.ibnlive.in.com

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दिमाग को शार्प बनाने के कुछ तरीके

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आप अपने शरीर को फिट और एक्टिव रखने के लिए व्‍यायाम करते है लेकिन अपने मन को स्‍वस्‍थ और दिमाग को तेज बनाएं रखने के लिए क्‍या करते है। किसी पहेली को सुलझाना या अपने नए गैजेट को पूरा छान मारना और उसके हर फीचर्स को जान लेना आपके दिमाग को शार्प बनाता है लेकिन शायद काम पर्याप्‍त नहीं है। हम आपको बताएंगे कुछ ऐसे तरीकों के बारे में जिनसे आप अपने दिमाग को शार्प बना सकते है।
कई बार बढ़ती उम्र के कारण या उत्‍तेजना की कमी के कारण मस्तिष्‍क सही तरीके से काम नहीं करता है और हम चीजों को भूल जाते है या ज्‍यादा समय तक ध्‍यान नहीं रखते। बताएं जाने वाले सभी काम मजेदार है और इन्‍हे आपको हर दिन की दिनचर्या में शामिल करना चाहिए। इसके बाद खुद में आए परिवर्तनों को देख लें

photo ; Googal photo

एक्सरसाइज है बेस्ट
हाल ही में आई रिसर्च बताती है कि अगर आप अपने ब्रेन को लॉन्ग टर्म के लिए हेल्दी रखना चाहते हैं, तो रेग्युलर ऐरोबिक एक्सरसाइज करें। ट्रेडमिल से जहां आप फिजिकल लेवल पर खुद को फिट कर पाते हैं, वहीं आपका माइंड भी फिट रहता है। मेंटल फिटनेस के लिए वीक में तीन बार तीस मिनट की एक्सरसाइज जरूर करें। बहुत अच्छा होगा कि अगर आप टेनिस और क्रिकेट जैसा कोई खेल डेली खेलें। इसके साथ ही आप सिगरेट और तंबाकू जैसी चीजें बिल्कुल अवॉइड करें।
एन्जॉय करो सिप
अगर आपको कॉफी पीने और सुबह चाय पीने की आदत है, तो परेशान न हों यह आपके लिए नुकसानदेह नहीं है। दरअसल, हाल ही में आई रिसर्च के मुताबिक कैफीन से ब्रेन प्रोटेक्ट होता है। रिसर्च से तो यह तक पता चलता है कि चाय के दो कप अल्जाइमर के रिस्क को भी कम 30 से 60 पर्सेंट तक कम करते हैं। ऐसे में आप अपनी कॉफी जमकर एन्जॉय कर सकते हैं।
खाते रहो
अगर आपका एनर्जी लेवल कम होगा तो आप दिमागी तौर पर भी सुस्त महसूस करेंगे। ऐसे में न्यूट्रिएंट्स भरपूर मात्रा में लेना बेहद जरूरी है। इनसे ब्रेन को एनर्जी मिलती है। इसका असर आपकी हेल्थ और परफॉर्मेंस पर भी पड़ेगा। ऐसे में डाइटिंग आपको नुकसान कर सकती है। इससे ब्रेन फंक्शनिंग में भी प्रॉब्लम आती है। कई स्टडीज में सामने आया है कि डाइटिंग से कन्फयूजन और डिस्ट्रैक्शन जैसी ब्रेन प्रॉब्लम्स हो सकती हैं।

नींद हो पूरी
अगर नींद पूरी न हो, तो इससे कई तरह की प्रॉब्लम्स हो सकती हैं। इससे जहां दिमाग थका हुआ महसूस करता है। वहीं, आप कुछ फ्रेश भी नहीं सोच पाते। ऐसे में नई चीजें सीखना या कुछ नया सोचना मुश्किल होता है। तो बेहद जरूरी है कि आप नींद पूरी लें।

फिश को शामिल करें डाइट में
कई थिअरीज़ ऐसी आ चुकी हैं जिनसे पता चला है कि डायट में फिश लेने से मेंटल और फिजिकल अबिलिटी इंप्रूव होती है। इसमें ओमेगा 3 माइंड के लिए बेहद जरूरी होता है। इससे दिमाग डिप्रेशन जैसी चीजों से दूर रहता है। अगर आप नॉन वेज नहीं खाते, तो यह आपको दूसरे वेज फूड आइटम्स से भी मिल सकता है।

सप्लिमेंट नहीं
आप अपने ब्रेन को हेल्दी बनाने के लिए कुछ भी तरीका अपनाएं लेकिन एक्सपर्ट्स की नजर में आप ब्रेन पिल्स पूरी तरह अवॉइड करें। मेमरी को बूस्ट करने वाली मार्केट में बिक रही किसी भी तरह की पिल लेना अवॉइड करें। इनके साइड इफेक्ट्स बहुत होते हैं। हाई ब्लड प्रेशर, डाइजेशन प्रॉब्लम, फर्टिलिटी प्रॉब्लम और डिप्रेशन तक हो सकता है। आपके लिए बादाम खाना अच्छा साबित हो सकता है।

स्ट्रेस से रहें दूर
सभी की लाइफ में कुछ न कुछ प्रॉब्लम जरूर होती हैं लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आप स्ट्रेस लेंगे। आपको स्ट्रेस लेना बिल्कुल अवॉइड करना चाहिए। इससे कुछ हार्मफुल केमिकल्स रिलीज होते हैं। ऐसे में एक्सपर्ट्स का कहना है कि आप अपनी कोई हॉबी डिवेलप करें। इससे आपका टाइम अच्छा बितेगा। किन्हीं चीजों में आपका इंट्रेस्ट बढ़ेगा। दोस्तों के साथ फिल्म देखने का आइडिया भी बुरा नहीं है। योगा और मेडिटेशन से भी आपको फायदा होगा। अगर आपको इंट्रेस्ट म्यूजिक में है, तो किसी ऐसी एक्टिविटी से जुड़ने की कोशिश करें। sabhar http://navbharattimes.indiatimes.com :http://hindi.boldsky.com

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ज़िंदगी में रोबोट आएंगे काम

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रोबोट, वृद्ध, देखभाल, दोस्त, जापान


रोबोट करेंगे मालिश

टोयोटा कंपनी ऐसी डिवाइस बना रही है, जो वृद्धों के आने-जाने में मददगार है. इसी तरह टोली क्रॉप ने वायरलेस सेंसर वाली चटाई तैयार की है, जो वृद्ध लोगों के चलने-फिरने के दौरान उन पर निगाह रख सकता है और उन्हें फ़ीडबैक दे सकता है
24 अंगुलियों वाले एक विशेष रोबोट का विकास किया गया है, जो बाल धो सकता है और सिर की मालिश कर सकता है. पैनासोनिक ने जापान के हेयर सैलून में ऐसे रोबोट का इस्तेमाल किया है.
वृद्ध लोगों की देखभाल के लिए रोबोट के इस्तेमाल से जुड़े परीक्षण सिंगापुर से लेकर साल्फोर्ड तक सभी जगह किए जा रहे हैं.

बर्मिंघम विश्वविद्यालय की रोबोटिक्स परियोजना स्ट्रैडस को यूरोपीय संघ से 80 लाख यूरो की मदद मिली है.
सेक्स के लिए रोबोट
अच्छी माने जाने वाली महिला रोबोट एचआरपी-4सी का विकास नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ एडवांस्ड इंडस्ट्रियल साइंस एंड टेक्नोलॉजी (एआईएसटी) ने किया है. रॉक्सी का वज़न 27 किलोग्राम और लंबाई पांच फुट सात इंच है. इसके बाल अलग-अलग रंगों में उपलब्ध हैं, त्वचा का रंग इंसानों की तरह है और वो अपने हाथ-पांवों को इंसानों की तरह मोड़ सकती है.
रॉक्सी इलेक्ट्रिक इंजीनियर और कम्प्यूटर वैज्ञानिक हाइंस के दिमाग की उपज है. उन्होंने कहा कि उनकी कंपनी ने सेक्स रोबोट को विकसित करने के पीछे उनका मकसद इस समय उपलब्ध साधनों से आगे जाकर एक साथी का अहसास देना है, हालांकि वह मानते हैं कि प्लास्टिक और धातु से बनी रॉक्सी इंसान की जगह लेने में सक्षम नहीं है.उन्होंने कहा, "हम लगातार उम्मीदों के क़रीब पहुंच रहे हैं. इससे रोबोटिक और मशीनी यंत्र और इंसान की उम्मीदों के बीच अंतर लगातार कम होता जाएगा."
रॉक्सी की कीमत $9,000 है. इसका पुरुष रूप भी उपलब्ध है जिसे रॉकी नाम दिया गया है. कंपनी की योजना इस साल के अंत में रॉक्सी का और आधुनिक अवतार उतारने की है.

रोबोट जो करें अरबों का कारोबार

ऐसा कहने वाले जॉन कोट्स 10 साल पहले वॉल स्ट्रीट पर शेयर की ख़रीद फ़रोख़्त करते थे. अब वो केम्ब्रिज विश्वविद्यालय में न्यूरो साइंटिस्ट हैं. कोट्स शेयर ट्रेडरों के हारमोंस का अध्ययन करते हैं.
वे कहते हैं, “मसलन अगर आप माउस से ‘बॉक्स’ पर क्लिक करके ट्रेड करते हैं तो आपका 'एक क्लिक या सौदा' सौ से 120 मिलीसैंकड्स में होगा. लेकिन मौजूदा मशीनें यही काम सैंकड के दस लाख-वें हिस्से में कर रही हैं. ”
ये ‘बॉक्स’ दरअसल रोबोट ट्रेडर हैं. ऐसे कंप्यूटर जो शेयर ख़रीदने या बेचने का फ़ैसला करते हैं और ये बॉक्स मनुष्य से हज़ारों गुणा तेज़ी से काम करते हैं.
दुनिया भर में ऐसी ट्रेडिंग का प्रचलन बढ़ रहा है. अब आपको कुछ शेयर बाज़ारों के बड़े से हॉल में चीखते-चिल्लाते, मोल-भाव करते ट्रेडर नहीं दिखते हैं.
अब न्यू यॉर्क स्टॉक एक्सचेंज यानि एनवाईएसई को ही लीजिए. इस एक्सचेंज का अधिकतर व्यापार वॉल स्ट्रीट पर नहीं बल्कि न्यू जर्सी में हो रहा है. वहां दस एकड़ में फ़ैला दफ़्तर कंप्यूटर सर्वरों की कतारों से अटा पड़ा है

हर पल देंगे साथ


स्ट्रैडस रोबोट का परीक्षण इस साल मई में आस्ट्रियन सेवा प्रदाता के साथ किया जाएगा. शुरुआत में सामान्य काम करने की इसकी कुशलता परखी जाएगी.
डॉ. निक हॉ बताते हैं, "हम अपने स्टाफ़ के समय को काफ़ी हद तक बचाना चाहते हैं."
वह कहते हैं, "घरेलू सेवा कार्यों में लगे कर्मचारियों के साथ सबसे बड़ी शिकायत यह है कि वो पर्याप्त समय नहीं देते."
उनका कहना है, "हम सामान उठाने और दूसरे सहायक कार्यों पर काम कर रहे हैं. अगर रोबोट दवाओं की ट्रे ला दे, जबकि घर के निवासी आपस में बातें करते रहें, तो इससे मेलजोल बढ़ेगा."

इस परियोजना को उम्मीद है कि रोबोट अधिक सक्रिय और बेहतर देखभाल करने की भूमिका निभा सकते हैं.

खानपान की सलाह

सेवा कंपनियों और आठ यूरोपीय विश्वविद्यालयों की संयुक्त परियोजना मोबीसर्व प्रोजेक्ट के तहत शोध कार्य हाल में खत्म हुए हैं. इसका मक़सद ऐसा रोबोट तैयार करना है जो "दोस्त और साथी" हो.
ये वृद्ध लोगों को स्वास्थ्य देखभाल से लेकर उन्हें खानपान तक की सलाह दे सकता है.
शोधकर्ता एंटोनियो एस्पिंग्रेडेरियो के मुताबिक़ साल्फोर्ड परियोजना के तहत ऐसे रोबोट तैयार किए जा रहे हैं, जो लोगों की दिन में 24 घंटे देखभाल कर सकते हैं.
केयरबोट पी37 एस65 को बाक़ी चीज़ों के अलावा स्पीच थेरेपी के लिए प्रोग्राम किया जा सकता है और पागलपन के शिकार लोगों का उपचार कर सकते हैं.

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मंगलवार, 19 नवंबर 2013

दस साल का बच्चा दो साल तक करता रहा रेप

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पोर्न फिल्में देख दस साल का बच्चा दो साल तक करता रहा रेप!


ब्रिटेन के लेंड्यूडनो में  दस साल का बच्चा इंटरनेट पर पोर्नोग्राफी देखकर सात साल की स्कूलगर्ल से रेप करता रहा। कोर्ट की सुनवाई के दौरान पता चला है कि पोर्नोग्राफी की लत का शिकार यह लड़का, बच्ची को करीब दो सालों तक अपना शिकार बनाता रहा। यहीं न हीं यह स्कूलब्वॉय घंटों अपने घर के कंप्यटर पर पोर्न फिल्में देखता और फिर उन्हीं दृश्यों को लड़की की साथ आजमाता था। बच्चे ने अपने अपराध को स्वीकार किया, हालांकि उसे जेल नहीं भेजा गया। कोर्ट ने पूरे मामले को सुनकर बच्चे को बाल सुधार गृह भेजने का आदेश दे दिया। साथ ही बच्चे को पुलिस रिकॉर्ड में 'सेक्स ओफेंडर' यानी सेक्स से जुड़े अपराधों का आदी होने के तौर पर रजिस्टर्ड किया गया है।कोर्ट में बताया गया था कि बच्चे की इस स्थिति के लिए उसका परिवार भी जिम्मेदार है। बच्चे के परिवार में कोई 'सेक्सुअल बाउंड्रीज' नहीं थी। यहां तक की यह बच्चे ने अपनी मां को भी सेक्स करते हुए देखा था। उसकी मां भी इस बात से भली भांति वाकिफ थी कि उनका बच्चा घंटों बैठकर इंटरनेट पर अश्लील  तस्वीरें देखता था। इसके बावजूद परिवार ने बच्चे को रोकने की कोशिश नहीं की। ऐसे में बच्चे की इस बीमार मानसिकता का लिए परिवार भी जिम्मेदार है। कोर्ट में बताया गया है कि बच्चा नौ साल की उम्र से ही बोल्ड तस्वीरों की ओर आकर्षित होने लगा था। मामले को सुनने के बाद ज ज निकलेस पैरी ने कहा कि बच्चा पोर्न के दुष्प्रभाव का शिकार होकर अपनी वासना की कल्पनाओं को स्कूलगर्ल के साथ महसूस करने की कोशिश करने लगा था। इसके कारण वह स्कूल गर्ल को शारिरिक और मानसिक तौर पर अब्यूज करता था।हाल ही में चाइल्ड पोर्नोग्राफी को रोकने के लिए दुनियाभर में एक नई बहस शुरू हुई है। ब्रिटेन में ऑनलाइन पोर्नोग्राफी का विकल्प अब केवल मांगने पर ही उपलब्ध होगा। ब्रिटेन में करीब दो करोड़ इंटरनेट उपभोक्ता हैं। जिनमें से लाखों लोग पहले ही इंटरनेट पोर्नोग्राफी को अपना यहां ब्लॉक करा चुके हैं। sabhar : bhaskar.com
 

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सिर पर उग आए सींग

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96 years old

जानकारी के अनुसार अमरपुर प्रखंड के सलेमपुर गांव के जगदीश कापरी के सिर पर यह सींग निकला है। कापरी ने बताया कि छह महीने पहले सर्दियों के दौरान उन्हें सिर के बीच में सींग विकसित होने का एहसास हुआ। जगदीश के रिश्तेदार राजीव कापरी ने बताया कि सर्दियों में जगदीश की ऊनी टोपी फाड़कर सींग बाहर निकल आया। इसके बाद सबका ध्यान इस ओर गया। जगदीश का कहना है कि उन्हें सींग से कोई विशेष तकलीफ नहीं है। मगर, सिर पर असामान्य रूप से सींग निकलने से वे सहमे हुए हैं।
स्थानीय चिकित्सकों से भी समस्या पर बात की गई। सभी पसोपेश में पड़ गए। जगदीश की उम्र के मद्देनजर चिकित्सक शल्य क्त्रिया कर सींग हटाने से भी परहेज कर रहे हैं।
इस बाबत सिविल सर्जन डॉ. एनके विद्यार्थी ने बताया कि चिकित्सा विज्ञान में हॉर्न यानी सींग निकलने की बात अभी तक सामने नहीं आई है। कभी-कभी शरीर के किसी हिस्से में मांस का अतिरिक्त हिस्सा निकलने के मामले जरूर सामने आते रहे हैं। मगर, ठोस सींग का निकलना बिल्कुल अनोखा मामला है। जल्द ही मेडिकल टीम भेजकर कापरी की जांच कराई जाएगी। तत्पश्चात उनके इलाज पर विचार किया जाएगा। sabhar : jagaran.com

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LTTE का सफाया ऐसे श्रीलंकाई सेना ने किया था

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ऐसे श्रीलंकाई सेना ने किया था LTTE का सफाया, विचलित कर सकती हैं तस्वीरें


साल 2009 में श्रीलंका से लिट्टे के सफाये के दौरान की तस्वीरें आप आगे की स्लाइड्स में देख सकते हैं। राजपक्षे इन तस्वीरों को भले ही कितना भी झुठला लें, लेकिन ये जाहिर करती हैं कि वहां मानवाधिकारों का किस कदर उल्लंघन किया गया था


ऐसे श्रीलंकाई सेना ने किया था LTTE का सफाया, विचलित कर सकती हैं तस्वीरें


ऐसे श्रीलंकाई सेना ने किया था LTTE का सफाया, विचलित कर सकती हैं तस्वीरें

ऐसे श्रीलंकाई सेना ने किया था LTTE का सफाया, विचलित कर सकती हैं तस्वीरें


ऐसे श्रीलंकाई सेना ने किया था LTTE का सफाया, विचलित कर सकती हैं तस्वीरें


ऐसे श्रीलंकाई सेना ने किया था LTTE का सफाया, विचलित कर सकती हैं तस्वीरें


ऐसे श्रीलंकाई सेना ने किया था LTTE का सफाया, विचलित कर सकती हैं तस्वीरें



ऐसे श्रीलंकाई सेना ने किया था LTTE का सफाया, विचलित कर सकती हैं तस्वीरें

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