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गुरुवार, 5 सितंबर 2013

अश्लील रैकेट' चलाता था आसाराम, पूरी टीम करती थी मदद, CD से होगा भंडाफोड़ और भी...

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आसाराम

आप शायद चौंक जाएंगे यह जानकर कि आसाराम अपने आश्रम में एक अश्लील रैकेट चलाता था और उसकी पूरी टीम इस काम में मदद करती थी. अभी तक की जांच में सबूत मिले हैं कि एक साजिश के तहत मासूम बच्चियों को फंसाया जाता था. सूत्रों के मुताबिक, आसाराम के सेवादार शिवा ने जोधपुर पुलिस को 'सेक्स और सम्मोहन' से जुड़ी एक सीडी के बारे में बताया है, जो आसाराम के आश्रमों में दिखाई जाती थी. सीडी बरामद करने के लिए पुलिस शिवा को लेकर आसाराम के अहमदाबाद आश्रम जाने वाली है.
सूत्रों के मुताबिक, पुलिस को आसाराम और उसके सहयोगियों शिल्पी, शिवा और शरतचंद्र राही के कॉल डिटेल से कई अहम सुराग मिले हैं. 5 अगस्त से लेकर घटना के दिन यानी 15 अगस्त तक चारों आरोपी लगातार बातचीत करते रहे. जबकि 5 अगस्त से पहले और 15 अगस्त के बाद इन चारों के बीच बेहद कम बातचीत होती थी. पुलिस के मुताबिक, शिल्पी और शिवा आसाराम के सबसे ख़ास लोगों में से थे. शिल्पी छिंदवाड़ा आश्रम की वॉर्डन है और शरद राही डायरेक्टर है.

हालांकि आधिकारिक रूप से पुलिस ने अभी ज्यादा जानकारी नहीं दी है. डीसीपी अजय लांबा ने बताया कि शिवा ने कई अहम खुलासे किए हैं, जिनके बारे में अभी बताना मुनासिब नहीं होगा. उसी की निशानदेही पर पुलिस की टीम अहमदाबाद जाएगी.

आसाराम का निजी सेवादार शिवा पुलिस को बता चुका है कि 'अनुष्ठान' के नाम पर आसाराम अपनी 'ध्यान की कुटिया' में महिलाओं से अकेले मिलता था. इस दौरान किसी को वहां जाने की इजाज़त नहीं होती थी.

शिल्पी ने बहकाया था लड़की को
आसाराम के खिलाफ जो FIR दर्ज हुई थी उसमें शिल्पी और शरद दोनों सहआरोपी हैं. 25 और 26 अगस्त को शुरुआती पूछताछ के बाद उन्हें समन देकर 29 अगस्त तक पुलिस के सामने पेश होने को कहा गया था. बताया जाता है कि छिंदवाड़ा से दोनों जोधपुर के लिए रवाना भी हुए थे, लेकिन अब तक नहीं पहुंचे. शिल्पी ने ही लड़की से कहा था कि तुम्हारे ऊपर भूत-प्रेत का साया है और बापू तुम्हें ठीक कर देंगे.

4-5 बच्चियों को आसाराम के पास भेज चुकी है शिल्पी
संभवत: अहमदाबाद की रहने वाली 25-26 साल की शिल्पी पिछले साल ही छिंदवाड़ा आई थी. वह आसाराम की करीबी मानी जाती है. शिल्पी ही पीड़ित लड़की को आसाराम के पास जोधपुर छोड़ कर आई थी. सूत्रों के मुताबिक, शिल्पी पहले भी 4-5 बच्चियों को आसाराम के पास भेज चुकी है. इसी तरह 38-40 साल के शरतचंद्र राही को साल भर पहले ही छिंदवाडा आश्रम में डायरेक्टर बनाया गया था. वह अमेरिका से आया हुआ बताया जाता है.

रसोइया प्रकाश जानता है सब कुछ
आसाराम का खास रसोइया प्रकाश भी अभी फरार है. वह वारदात की रात का अहम गवाह है. बताया जाता है कि उसे मालूम है कि उस रात लड़की के साथ क्या हुआ था. शिवा ने यह भी बताया है कि आसाराम कई प्रदेश के मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों के संपर्क में थे.

जेल में झल्लाता रहा आसाराम
उधर, जमानत की अर्जी खारिज होने के बाद आसाराम को लगातार तीसरी रात जेल में काटनी पड़ी. जेल में वकील ने उससे मुलाकात की, जिसके बाद उसके स्वभाव में चिड़चिड़ापन देखा गया. जेल में आसाराम को एक-एक पल काटना मुश्किल हो रहा है. कानूनी पहलू के डर से पैदा हुए डिप्रेशन के अलावा वह जेल में मच्‍छरों से भी खासा परेशान है. जानकारी के मुताबिक, मच्‍छरों ने आसाराम की नींद हराम कर रखी है. बुधवार रात आसाराम ने जेल का खाना ठुकरा दिया और सिर्फ दूध पीकर सो गया.



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हॉलीवुड फिल्मों में NUDE SCENE के लिए यूज होती है यह टेक्नीक

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हॉलीवुड फिल्मों में NUDE SCENE के लिए यूज होती है यह टेक्नीक

तकनीक ने बहुत कुछ असान कर दिया है और अब कई एक्शन सीन रियल बनाने के लिए कंप्यूटराइज्ड सॉफ्टवेयर्स का इस्तेमाल किया जाता है। ठीक वैसे ही हॉलीवुड में एक्सपोजर के लिए भी ऐसा किया जाता है।
 
कई हॉलीवुड फिल्मों में एंजेलिना जोली और लिंडसे लोहान को भी एक्सपोजर करते दिखाई दी हैं पर हकीकत यह है कि जब हीरोइन खुद को इस तरह के सीन करने में कंफर्ट नहीं पातीं या ऐसे सीन करना नहीं चाहतीं पर फिल्म की जरूरत हो तब वहां यह काम भी बड़ी आसानी से कंप्यूटर से हो जाता है। इस तकनीक को CGI तकनीक कहा जाता है।
NUDE SCENE के लिए यूज होती है यह टेक्नीक हॉलीवुड फिल्मों में
यह दृश्य फिल्म Machete का है इस फिल्म में लिंडसे लोहान को न्यूड सीन देना था। लेकिन उनकी जगह बॉडी डबल का उपयोग कर बाद में कंप्यूटर से लोहान के चेहरे को उसमें फिट कर दिया गया और कोई इस सीन के फेक होने का पता नहीं लगा पाया।

NUDE SCENE के लिए यूज होती है यह टेक्नीक हॉलीवुड फिल्मों में

Jessica Alba को भी  Machete फिल्म में इस तकनीक से मदद मिली थी...

NUDE SCENE के लिए यूज होती है यह टेक्नीक हॉलीवुड फिल्मों में
फिल्म Forgetting Sarah Marshall के दृश्य में मिला कुनिस के सिर को दूसरे की बॉडी में सीजीआई टेक्नीक से जोडक़र इस तरह एक्सपोजर सीन क्रिएट किया गया था।

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बुधवार, 4 सितंबर 2013

ये है गूगल का शानदार ऑफिस, कर्मचारियों के लिए है जन्नत

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ये है गूगल का शानदार ऑफिस, कर्मचारियों के लिए है जन्नत

हाल ही में स्कॉटलैंड में गूगल ने अपना 15वां जनमदिन मनाया है। दुनिया का सबसे फेमस सर्च इंजन गूगल की शुरुआत एक गैराज से हुई थी। अब दुनिया की सबसे दिग्गज कंपनियों में से एक गूगल अपने कर्मचारियों को बड़ी सैलरी तो देती है, लेकिन अगर इसकी सुविधाओं को देखा जाए तो यह किसी जन्नत से कम नहीं है। सुविधाओं को देखकर लाखों पढ़े-लिखे युवा यहां नौकरी पाने के लिए लाइन लगाए हुए हैं। गूगल को हर 25 सेकंड में एक रिज्यूमे मिल रहा है। कंपनी में 40,000 से अधिक युवा इंटर्नशिप करेंगे।
कंपनी सफल अभ्यर्थियों को तमाम ऐसी सुविधाएं देंगी, जिनके बारे में आमतौर पर लोग सोचते ही नहीं हैं। गूगल में इंटर्नशिप करने वाले कई युवाओं का कहना है कि कंपनी भले ही हमें सैलरी नहीं दे, लेकिन वे यहां लंबे समय तक मुफ्त में काम करना चाहते हैं, क्योंकि कंपनी इतनी सुविधाएं देती है कि किसी अन्य चीज या पैसे की अधिक जरूरत पड़ती ही नहीं। 
ये है गूगल का शानदार ऑफिस, कर्मचारियों के लिए है जन्नत
गूगल कंपनी में कर्मचारियों के लिए वेब पूल बनाए गए हैं, जहां कर्मचारी जब चाहे पानी के लहरों के साथ स्वीमिंग का लुत्फ उठा सकते हैं।

ये है गूगल का शानदार ऑफिस, कर्मचारियों के लिए है जन्नत

 गूगल के ऑफिस में काम करते हुए जब भी कोई कर्मचारी वीडियो गेम खेलना चाहे तो वह इसका भी आनंद उठा सकता है।

ये है गूगल का शानदार ऑफिस, कर्मचारियों के लिए है जन्नत

गूगल में काम करते हुए जब कोई कर्मचारी थकान महसूस करे तो वह मसाज रूम में जाकर मसाज करवा सकता है। खूबसूरत और प्रोफेशनल युवतियां यहां मसाज करने के लिए तैयार रहती हैं।

ये है गूगल का शानदार ऑफिस, कर्मचारियों के लिए है जन्नत

गूगल में 40,000 हजार से अधिक नए प्रोफेशनल्स को ट्रेनिंग मिलेगी। ट्रेनिंग के दौरान वे कंपनी की तमाम सुविधाओं का उपयोग कर सकेंगे।

ये है गूगल का शानदार ऑफिस, कर्मचारियों के लिए है जन्नत

कंपनी में जब भी आपका मन कॉफी पीने का हो तो लैपटॉप लिए हुए आप  मिनी किचन में पहुंच जाइए। यहां कॉफी तो आपको मिलेगी ही, साथ ही स्नैक्स का भी आनंद आप ले सकते हैं। मुफ्त में मनपसंद खाना भी यहां मिलता है।

ये है गूगल का शानदार ऑफिस, कर्मचारियों के लिए है जन्नत

गूगल में काम करना कर्मचारियों के लिए बेहद सुविधाजनक होता है। 

ये है गूगल का शानदार ऑफिस, कर्मचारियों के लिए है जन्नत
गूगल के कर्मचारी फूजबॉल भी खेल सकते हैं

ये है गूगल का शानदार ऑफिस, कर्मचारियों के लिए है जन्नत

भले ही अधिकतर लोग मोबाइल आदि का प्रयोग करते हैं, लेकिन कंपनी में ब्रिटिश स्टाइल के टेलीफोन बूथ भी लगे हुए हैं।

ये है गूगल का शानदार ऑफिस, कर्मचारियों के लिए है जन्नत

कंपनी के अंदर का दृश्य। सीढ़ियां लकड़ी की और सिर के ऊपर अटलांटिक वर्जिन के डेमो प्लेन। कंपनी के अंदर का कुछ ऐसा नजारा है।
ये है गूगल का शानदार ऑफिस, कर्मचारियों के लिए है जन्नत


कंपनी के स्टाफ प्ले पूल पर जब चाहे खेलने के लिए ब्रेक ले सकते हैं।

- मसाज और जिम कंपनी के कर्मचारियों को रिलैक्स और हेल्दी रखता है। कंपनी में डे्रस कोड कैज्युअल-जींस, टी-शर्ट है। एक मीडिया विशेषज्ञ का कहना है कि शायद ही ऐसा कोई पर्क हो, गूगल में नहीं दिया जाता है। यह एक ऐसा वर्कप्लेस है, जहां आप काम करते हैं लेकिन यहां पूरे समय आप मौज मस्ती करते हुए काम करते हैं।
 
गूगल में आप अन्य सुविधाओं में फ्री हेयरकटिंग, ड्रायक्लीनिंग, लॉन्ड्री, चाइच्ड केयर, कार सर्विसेस, काम के दौरान डॉक्टर आपका चेक-अप भी करते हैं।यह सब कुछ फ्री में होता है।
कर्मचारी अपना कुत्ता भी कंपनी में ला सकता है, जिनके रखने के लिए चार पैर वाली कैन ऑफिस में उपलब्ध हैं। लंबे समय से काम कर रहे एक कर्मचारी का कहना है कि यहां हर कोई हार्ड वर्क करता है, हर कोई यहां इस तरह से खुश भी है। यहां किसी कॉलेज की तरह का माहौल नहीं होता है। यह बहुत ही रिलैक्स है। गूगल के कर्मचारी उत्सुक, क्रिएटिव और स्मार्ट है। एक कर्मचारी का कहना है कि कंपनी सिर्फ अच्छे प्रोडक्ट ही नहीं चाहती है, बल्कि वह यह भी चाहती है कि वह कर्मचारी दिल भी जीत ले। यदि आप काम करना चाहते हैं तो यहां से अधिक एक्साइटिंग कुछ भी नहीं होगा। इस कंपनी की स्थापना लैरी पेज ने सितंबर 1988 में की थी, तब से आज यह कंपनी 54 बिलियन डॉलर की हो गई है। दुनिया में कंपनी के 30,000 से अधिक कर्मचारी मौजूद हैं।


ये है गूगल का शानदार ऑफिस, कर्मचारियों के लिए है जन्नत

गूगल के मुख्यालय में यदि कर्मचारी को ऑफिस के अंदर ही एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाना है, तो वह बाइक रैक्स, इलेक्ट्रिक कार और मोटराइज स्कूटर से जा सकता है।
 ये है गूगल का शानदार ऑफिस, कर्मचारियों के लिए है जन्नत

यदि आपको काम करते हुए झपकियां आ रही हैं तो आप ऑफिस के उस स्थान पर बैठकर आराम कर सकते हैं, जहां से खूबसूरत हिल्स दिखाई देती हैं। 

ये है गूगल का शानदार ऑफिस, कर्मचारियों के लिए है जन्नत

कंपनी मीटिंग के दौरान भी अपने कर्मचारियों को रेस्ट लेने का मौका देती है।

ये है गूगल का शानदार ऑफिस, कर्मचारियों के लिए है जन्नत

कंपनी के ऑफिस के रास्तों में धूप से भी बचाव की सुविधा रहती है और खुले में भी पूल बने हुए हैं।
 ये है गूगल का शानदार ऑफिस, कर्मचारियों के लिए है जन्नत
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ये है गूगल का शानदार ऑफिस, कर्मचारियों के लिए है जन्नत









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एक महिला रिपोर्टर के जरिए आजतक ने जानने की कोशिश की आसाराम की असलियत

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अंधेरे कमरे में बिना कपड़ों के थे आसाराम- 'रेप' की शिकार लड़की की खौफनाक आपबीती

16 साल की लड़की के यौन शोषण के आरोपों से घिरे आसाराम पर आजतक कर रहा है सबसे बड़ा खुलासा. आज हम आपको बताएंगे कि कैसे पाखंड के पर्दे तले आसाराम अपने भक्तों को गुमराह करते आ रहे हैं. आसाराम का असली सच सामने आया था आजतक के एक स्टिंग ऑपरेशन में. एक महिला रिपोर्टर के जरिए आजतक ने जानने की कोशिश की आसाराम की असलियत.


और भी... http://aajtak.intoday.in/video/-aaj-tak-sting-operation-exposes-asaram-1-740789.html

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सुहागरात में पत्नी ने मारी लात, युवक ने जिद पकड़ ली लड़की बनने की

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सुहागरात में पत्नी ने मारी लात, युवक ने जिद पकड़ ली लड़की बनने की

अहमदाबाद। बीते शुक्रवार को अहमदाबाद के सिविल हॉस्पिटल में सेक्स चेंज का ऑपरेशन कराने पहुंचा युवक कौन था? आखिर क्यों उसने लड़की बनने की जिद ठानी? पुरुष से स्त्री बनने के लिए इसने क्या-क्या किया?  
बातचीत में पता चला कि इसके पीछे उसका दर्द था। वह विवाहित होने के बाद भी अब तक सेक्स से वंचित है। इतना ही नहीं, अब वह पत्नी से इतना त्रस्त हो चुका है कि उसने स्त्री बनकर रहने का दृढ़ निश्चय कर लिया है।
सुहागरात में पत्नी ने मारी लात, युवक ने जिद पकड़ ली लड़की बनने की
गत 28 अक्टूबर की रात मेरी सुहागरात थी। मैं कमरे में पहुंचा, जहां मेरी पत्नी प्रियंका घूंघट में बैठी हुई थी। मैंने उसका घूंघट उठाया, लेकिन उसके चेहरे के भाव चौंका देने वाले थे। मैंने उससे बातें करनी शुरू की, लेकिन वह अच्छे मूंड में नहीं थी। जैसे ही मैंने उसे स्पर्श किया, उसने मेरे पेट पर लात मार दी। प्रियंका यहीं नहीं रुकी, बल्कि उसने मेरे चेहरे को अपने नाखूनों से नोंचना शुरू कर दिया। पहली रात में ही मैं उसका यह व्यवहार देखकर चौंक उठा।
सुहागरात में पत्नी ने मारी लात, युवक ने जिद पकड़ ली लड़की बनने की

मैंने उसे अकेला छोड़ दिया और कमरे की लॉबी में आकर बैठ गया। सुबह के लगभग साढ़े चार बजे मेरे पिता की नींद खुली। जैसे ही मैंने उनके कमरे का दरवाजा खुलने की आवाज सुनी, मैं तुरंत कमरे में आ गया कि कहीं वे मुझे इस तरह न देख लें। 
 
मैंने देखा कि प्रियंका सो रही थी। वैवाहिक जीवन की पहली रात ही ऐसी होगी, मैंने ऐसा बिल्कुल नहीं सोचा था। मुझे इसका बहुत आघात लगा। सुबह मैंने अपने माता-पिता और भाई-भाई को यह बात बता दी। वे भी यह बात जानकर दंग रह गए और अब पूरे घर में प्रियंका विरोधी माहौल बन गया।मैं महाराष्ट्र में एक एग्रो इंडस्ट्रीज में नौकरी करता था और शादी के लिए सिर्फ चार दिनों की ही छुट्टी मिली थी। पति-पत्नी के इसी झगड़े में ही मेरे चार दिन बीत गए। मुझे लगा कि मेरा वैवाहिक जीवन शुरू होने से पहले ही बर्बाद हो चुका है। मैं वापस महाराष्ट्र आ गया। लगभग साढ़े तीन महीनों बाद मेरे माता-पिता प्रियंका को लेकर मेरे पास आ गए। काफी वाद-विवादा और समझाइश के बाद तय हुआ कि अब प्रियंका मेरे साथ ही रहेगी।प्रियंका मेरे साथ 6 महीनों तक रही। अब मेरे अच्छे दिन आ गए थे। हमारे यहां बेटी का जन्म हुआ। कुछ समय बाद मेरा ट्रांसफर अहमदाबाद हो गया। लेकिन बेटी के जन्म के बाद फिर से प्रियंका का स्वभाव पहले की तरह हो गया। मैंने उसे समझाने के काफी प्रयास किए, लेकिन प्रियंका मानने के लिए तैयार नहीं थीइस दरमियान प्रियंका के पिता का निधन हो गया। प्रियंका ससुराल आ गई। प्रियंका यहां से जाने के लिए तैयार नहीं थी, इसलिए मैं भी ससुराल में ही रहने लगा। ससुराल में मै एक-दो दिन नहीं, बल्कि पूरे दो साल तक रहा। यहां भी प्रियंका का स्वभाव में परिवर्तन नहीं आया था। घर में हमारे लिए अलग रूम था, फिर भी प्रियंका अपने घरवालों के साथ ही सोया करती थी। इसके बाद भी अगर मैं उससे कोशिश करता तो जोर-जोर से चिल्लाने लगती। वह अपने परिजनों से मेरे बारे में यही कहती कि मैं सेक्स का भूखा हूं। जबकि वह मेरे साथ सेक्स करने के लिए तैयार ही नहीं थी। हकीकत में सेक्स एक पुरुष की आवश्यकता है, लेकिन प्रियंका के कारण मेरा जीवन अधर में लटक गया है। इसलिए अब मैंने निश्चय किया है कि मैं उसे कभी स्पर्श नहीं करूंगा। अब तो मुझे पुरुष के रूप में जीना ही नहीं, मैं स्त्री बनकर पूरी जिंदगी गुजारना चाहता हूं।इसके बाद मैंने शारीरिक परिवर्तन के लिए इंटरनेट पर जानकारी जुटाईं और शारीरिक परिवर्तन के लिए दवाएं लेनी शुरू कर दीं। इसके लिए मुझे हर महीने एक इंजेक्शन भी लेना पड़ता था। लगभग 6-8 महीनों में ही दवाईयों का मेरे शरीर पर असर होने लगा। मेरे लिंग का उत्थान रुक गया और मुझे सेक्स में कोई रुचि नहीं रही। अब मेरी चाल और बोली भी बदल गई थी। सीने का आकार भी काफी परिवर्तित हो गया था।इसके बाद मैंने स्त्रियों के कपड़े पहनने शुरू कर दिए। शुरुआत में तो प्रियंका ने इसका विरोध किया, लेकिन मेरी जिद के आगे उसे हार माननी पड़ी। मेरी पत्नी को थायराइड की समस्या है। जो डॉक्टर उसका इलाज करते हैं, वही स्त्री हॉर्मोंस के भी विशेषज्ञ हैं। मैंने उनसे ही हॉमोर्ंस के इंजेक्शन लेने शुरू कर दिए। 
 
पिछले सात महीनों से मैं मेमको स्थित स्वीमिंग पुल जा रहा हूं। यहां मैं महिलाओं के साथ ही स्वीमिंग शूट में स्वीमिंग करता हूं। शुरुआत में तो युवक मुझे देखने के लिए उमड़ पड़ते थे, वहीं यहां आने वाली महिलाएं भी मुझे देखकर चौंक उठती थीं, लेकिन अब सबकुछ सामान्य होने लगा है।
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'मर्दानगी' की जांच को राजी नहीं थे आसाराम, फिर बोले- कर लो इस नश्‍वर शरीर के साथ जो करना है

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'मर्दानगी' की जांच को राजी नहीं थे आसाराम, फिर बोले- कर लो इस नश्‍वर शरीर के साथ जो करना है

नाबालिग लड़की के साथ यौन उत्पीड़न के आरोप में गिरफ्तार विवादास्पद कथावाचक 74 साल के आसाराम बापू की जमानत पर अब बुधवार को  सुनवाई होगी। इस समय वे 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जोधपुर सेंट्रल जेल में हैं। लेकिन आसाराम का 'पुरुषत्व' देखकर तीन डॉक्टरों की टीम ने दांतों तले उंगलियां दबा लीं। आसाराम ने पोटेंसी टेस्ट (पुरुषत्व परीक्षण) के पहले चरण यानी फिजिकल स्टीमुलेशन में ही अपना दमखम साबित कर दिया। आसाराम के पोटेंसी टेस्ट के लिए दवा की जरूरत ही नहीं पड़ी।   
 डॉक्टरों के मुताबिक, 'पहले चरण में शरीर के प्राइवेट पार्ट्स को हाथों से छूकर उनमें किसी हरकत के बारे में पता किया जाता है। आसाराम के प्राइवेट पार्ट्स को मैनुअली छूने पर ही हरकत हुई और इस तरह उन्होंने अपनी पोटेंसी साबित कर दी।' जब तीन डॉक्टरों ने टीम ने पोटेंसी टेस्ट के लिए आसाराम से संपर्क साधा तो उन्होंने टेस्ट करवाने से इनकार कर दिया। हालांकि, बाद में आसाराम ने अपना मन बदल लिया और डॉक्टरों से कहा कि शरीर नश्वर है इसलिए वे जो चाहें इसके साथ कर सकते हैं। जोधपुर के मथुरा दास माथुर अस्पताल के डॉक्टरों को आसाराम का पोटेंसी टेस्ट करने में दो घंटे लगे।   

 पोटेंसी टेस्ट 
 
पोटेंसी टेस्ट उन मामलों में किया जाता है जिनमें यौन उत्पीड़न या रेप के आरोप हों। इस टेस्ट में डॉक्टर यह पता लगाते हैं कि संबंधित शख्स सेक्स करने के काबिल है या नहीं। पोटेंसी टेस्ट के तहत कोर्ट में पेश होने वाली रिपोर्ट में सीमेन एनालिसिस, पेनिस डॉप्लर स्कैन और विजुअल एग्जामिनेशन शामिल होता है। sabhar : bhaskar.com
 

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सेवादार का खुलासा : महिलाओं से अकेले में मिलते थे आसाराम, कोर्ट ने बेल पर सुरक्षित रखा फैसला

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सेवादार का खुलासा : महिलाओं से अकेले में मिलते थे आसाराम, कोर्ट ने बेल पर सुरक्षित रखा फैसला
जोधपुर. आसाराम के प्रमुख सेवादार शिवा ने पुलिस की आरंभिक पूछताछ में कई अहम खुलासे किए हैं। उसने बताया कि आसाराम कई महिलाओं से अकेले में मिलते थे। उत्तरप्रदेश के शाहजहांपुर से अपने शिष्य और उसकी बेटी के जोधपुर आने की पूर्व सूचना भी शिवा ने आसाराम को दी थी। पुलिस सूत्रों के अनुसार शिवा ने यह भी माना कि छात्रा पर किसी पुरुष का प्रेत होने की बात कहते हुए उसे भगाने के लिए ही उसे यहां बुलाया गया था।

आसाराम का सबसे करीबी सेवादार शिवा ही वह शख्स है, जिसके जरिए कई प्रदेशों के मुख्यमंत्री, जज, आईएएस, आईपीएस अधिकारियों के साथ बड़े-बड़े लोग आसाराम से मोबाइल पर बात करते थे। पुलिस के अनुसार शिवा से विस्तृत पूछताछ के दौरान और भी कई राज खुलने की संभावना है। इसे देखते हुए पुलिस कोर्ट से आसाराम की रिमांड  दुबारा मांग सकती है। बुधवार को कोर्ट ने आसाराम की जमानत याचिका पर सुनवाई पूरी करने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया। सेशन कोर्ट में आसाराम की जमानत अर्जी पर बुधवार को बचाव व आरोप पक्ष की बहस पूरी हो गई। अभियोजन पक्ष की ओर से बुधवार सुबह जवाब पेश किया गया। आसाराम के वकील केके मनन ने कहा कि आसाराम को झूठा फंसाया जा रहा है। उधर अभियोजन पक्ष के वकील का कहना है कि कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुना जिससे यह साफ हो गया है कि आसाराम के खिलाफ सभी आरोप मजबूत साबित हो रहे हैं। अभियोजन पक्ष ने दलील थी कि यदि आसाराम को जमानत दे दी गई तो वह केस को कमजोर कर सकते हैं। इसके अलावा यह भी कहा गया कि इस मामले में अभी दो और आरोपी को गिरफ्तार करना बाकी है, ऐसे में आसाराम को बेल देने से केस के साथ छेड़छाड़ की जा सकती है। अभियोजन पक्ष का कहना है कोर्ट बुधवार शाम तक भी अपना फैसला सुना सकती है।
सूत्रों के अनुसार आसाराम अपने नजदीक ऐसे सेवादारों को रखता था जो दिखने में कम आकर्षक हों। अच्छी सेहत व आकर्षक साधकों को वह अपने बहुत करीब नहीं आने देते। इसकी वजह यह बताई जा रही है कि वे डरते थे, कहीं उनके प्रति समर्पित हो चुकी युवतियां सेवादारों के आकर्षण में उनसे दूर ना हो जाएं।
जमानत पर सुनवाई, वकील बोले- छात्रा बालिग
सेशन कोर्ट में आसाराम की जमानत पर बुधवार को बचाव व आरोप पक्ष की बहस पूरी हो गई। अभियोजन पक्ष की ओर से बुधवार सुबह जवाब पेश किया गया। आसाराम के वकील केके मनन ने कहा कि आसाराम को झूठा फंसाया जा रहा है। उधर अभियोजन पक्ष के वकील का कहना है कि कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुना जिससे यह साफ हो गया है कि आसाराम के खिलाफ सभी आरोप मजबूत साबित हो रहे हैं। अभियोजन पक्ष ने दलील थी कि यदि आसाराम को जमानत दे दी गई तो वह केस को कमजोर कर सकते हैं। इसके अलावा यह भी कहा गया कि इस मामले में अभी दो और आरोपी को गिरफ्तार करना बाकी है, ऐसे में आसाराम को बेल देने से केस के साथ छेड़छाड़ की जा सकती है। अभियोजन पक्ष का कहना है कोर्ट बुधवार शाम तक भी अपना फैसला सुना सकती है।
ये प्रमुख दलीलें-
बालिका पर धारा 376 का सेक्शन 8 लागू नहीं होता क्योंकि वह बालिग है। शैक्षणिक संस्थान में भर्ती करवाते समय उसकी उम्र का सही अंकन नहीं करवाया गया।
यदि घटना सही है तो बालिका मौके पर क्यों नहीं चिल्लाई?
जोधपुर शहर में ही रिपोर्ट क्यों नहीं दर्ज करवाई? क्या कारण रहा कि रिपोर्ट दिल्ली में दर्ज करवाई गई? एमएलसी पुलिस रिक्वेस्ट पर क्यों नहीं हुई?
जोधपुर शहर में ही रिपोर्ट क्यों नहीं दर्ज करवाई? क्या कारण रहा कि रिपोर्ट दिल्ली में दर्ज करवाई गई? एमएलसी पुलिस रिक्वेस्ट पर क्यों नहीं हुई?
आसाराम ने मांगा मेडिकेटेड फूड और पूजन सामग्री
आसाराम की ओर से उनके वकील ने एक आवेदन पेश कर अदालत से कहा कि आसाराम बापू की दिनचर्या लंबे समय से निर्धारित है।
 और वे इसी अनुरूप अपना दिन व्यतीत करते हैं। उनका कहना था कि जेल में बंद आसाराम बापू को मेडिकेटेड फूड, पूजन सामग्री व वस्त्र उपलब्ध करवाने की सुविधा प्रदान की जाए। इस आवेदन पर भी बुधवार को बहस होगी।
 मुकदमे को मीडिया ट्रायल बताया
बचाव पक्ष के वकीलों ने अदालत में मीडिया पर आरोप लगाते हुए कहा कि आसाराम बापू के खिलाफ यह मुकदमा और कुछ नहीं, सिर्फ मीडिया ट्रायल है। इसी धारणा के चलते उनके समर्थकों ने मीडिया कर्मियों से कहीं अभद्र व्यवहार भी किया हो सकता है, जिसका इस मुकदमे पर प्रभाव नहीं होना चाहिए।
बचाव पक्ष की ओर से करीब ढाई बजे शुरू की गई बहस साढ़े चार बजे तक चली। अदालत ने समय की कमी के कारण अदालत में मौजूद अतिरिक्त महाधिवक्ता आनंद पुरोहित, उनके सहयोगी प्रद्युम्न सिंह आदि से बहस के लिए बुधवार को सुबह 11 बजे का समय निर्धारित किया।
खुद को धोने पड़ेंगे झूठे बर्तन
ऐशोआराम से जीने के आदी आसाराम को जेल में कई मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। जेल नियमों के अनुसार किसी भी सजायाफ्ता या विचाराधीन बंदी को खाना खाने के बाद अपने खुद के झूठे बर्तन खुद ही साफ करने पड़ते हैं।
यही आसाराम को भी करना पड़ेगा। इसके अलावा पहनने के कपड़े भी उन्हें खुद को ही धोने पड़ेंगे।
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मंगलवार, 3 सितंबर 2013

फलस्तीन में बूढ़ों को पीछे छोड़ कर, 16 बरस की लड़की बनी मंत्री

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PHOTOS: फलस्तीन में बूढ़ों को पीछे छोड़ कर, 16 बरस की लड़की बनी मंत्री

फलस्तीनी. क्या आपने कभी सुना है कि कम उम्र में कोई मंत्री पद हासिल कर लें। पर यह सिर्फ एक मजाक नहीं, बल्की हकीकत है। फलस्तीनी इलाके में महज 16 साल में एक लड़की को मंत्री बना दिया गया। वहां के एक मंत्री ने इस 16 वर्षीय लड़की को एक दिन के लिए मंत्री पद की जिम्मेदारी दी और उसे खुद की कुर्सी पर बैठा दिया। 
 
फलस्तीनी के दैनिक अखबार के मुताबिक एक दिन के लिए मंत्री बनीं बशाएर ओथमन ने फलस्तीनी प्राधिकरण की सरकार में स्थानीय प्रशासन के महकमे के मुखिया की हैसियत से संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की मून के सामने कई स्थानीय मुद्दे भी रखे थे। 
PHOTOS: फलस्तीन में बूढ़ों को पीछे छोड़ कर, 16 बरस की लड़की बनी मंत्री

खबर के मुताबिक स्थानीय प्रशासन विभाग के मंत्री ने ओथमन को उसके जन्मदिन के अवसर पर यह मौका दिया था। इतना ही नहीं ओथमन पिछले साल भी दो माह के लिए अपने गृह क्षेत्र में नगरपालिका के चेयरमैन के तौर पर काम कर चुकी है।

PHOTOS: फलस्तीन में बूढ़ों को पीछे छोड़ कर, 16 बरस की लड़की बनी मंत्री

वहीं, मंत्री सईद अल कावनी के मुताबिक इन अनुभवों से फलीस्तीनी नौजवानों को अपनी जिम्मेदारियों के प्रति आगे आने का मौका मिलेगा और वे अपनी जिम्मेदारियां निभाएंगे। sabhar : bhaskar.com


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डॉक्‍टर का प्राइवेट पार्ट कूरियर करने की आरोपी लड़की ने कहा- 'तेरहवीं का भोज खाना चाहती हूं'

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डॉक्‍टर का प्राइवेट पार्ट कूरियर करने की आरोपी लड़की ने कहा- 'तेरहवीं का भोज खाना चाहती हूं'

कानपुर. अमरौधा पीएचसी प्रभारी डॉ. सतीश चंद्रा की हत्या में पुलिस को अभी ठोस सबूत नहीं मिला है। आरोपी प्रीतिलता को रिमांड पर लेकर पुलिस ने होटल व कानपुर में खाक छाना, लेकिन हत्या में इस्‍तेमाल किया गया हथियार नहीं मिला।
 
शुक्रवार को कानपुर की कच्ची बस्ती निवासी प्रीतिलता ने गोविंदनगर थाने में समर्पण कर डॉ. चंद्रा की हत्या की सनसनीखेज स्वीकारोक्ति की थी। शनिवार को उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। रविवार को देर शाम तक पुलिस उसे लेकर पूरे शहर की खाक छानती रही, लेकिन पुलिस के हाथ कुछ नहीं लगा। उसने पुलिस को गोविंदनगर के एक नाले में हत्या में प्रयुक्त हथियार फेंकने की बात बताई थी। लेकिन तलाश करवाने पर पुलिस को कुछ नहीं मिला।
 
रविवार को पुलिस जब उसे होटल के कमरे में ले गई और कत्‍ल वाली रात के घटनाक्रम के बारे में पूछा तो उसने बेबाकी से सवाल किया- डेमो के लिए डॉक्टर कौन बनेगा? उसने डाक्टर की तेरहवीं में शामिल होकर भोजन करने की इच्‍छा भी जताई है। 
 
उसका कहना है कि लड़की के मुताबिक डाक्टर उसे करीब तेरह सालों से (जब वह हाई स्कूल की छात्रा थी) शारीरिक और मानसिक रूप से परेशान कर रहा था। 
एमए, बीएड और टीईटी पास प्रीति ने इसी से आजिज आकर डॉक्‍टर को मौत के घाट उतार दिया। फिर डॉक्टर का प्राइवेट पार्ट काट कर पत्‍नी को कूरियर कर दिया। हत्या के बाद दीवार पर उसी ने लिखा था कि मनुष्य जब भी प्रकृति से छेड़छाड़ करता है तो प्रकृति स्वयं को संतुलित कर लेती है। उसका आरोप है कि डॉक्टर की पत्नी को भी पति की हरकतों के बारे में जानकारी थी। बताया जाता है कि डॉक्टर के सबंध कई और महिलाओं के साथ भी थे। इनमें उनके परिवार की कई महिलाएं भी शामिल हैं।अमरौधा पीएचसी प्रभारी डॉक्टर सतीश चन्द्रा एक बार प्रीति के बीमार पिता को देखने उसके घर आए थे। उसके बाद से ही वह उसका यौन शोषण कर रहे थे। उसके मुताबिक डॉक्‍टर ने उसकी बहन को भी नहीं बख्‍शा था। पुलिस के मुताबिक उसने बताया कि डॉक्‍टर उसे बेहोश करके उसके साथ सेक्‍स किया करता था। इसलिए उसने भी कत्‍ल से पहले डॉक्‍टर को बेहोश कर दिया था। फिर हाथ-पैर बांध कर सर्जिकल नाइफ से उसकी गर्दन काटी। इसके बाद उसका प्राइवेट पार्ट काटा और उसे पैक कर डॉक्‍टर की पत्‍नी को कूरियर कर दिया। डॉक्‍टर को बेहोश करने के लिए वोदका में नशीली गोली मिलाई गई थी। पीड़ित लड़की ने बताया कि वह भगत सिंह और चन्द्रशेखर को अपना आदर्श मानती है और उसे अपने किये पर कोई पछतावा नहीं है। उसके अनुसार अभी एक डॉक्टर और है जिसकी हत्या उसे करनी थी क्योंकि उसने 7 साल की एक बच्ची के साथ दुष्कर्म किया था।

डॉक्‍टर का प्राइवेट पार्ट कूरियर करने की आरोपी लड़की ने कहा- 'तेरहवीं का भोज खाना चाहती हूं'

1 जुलाई को डॉ.चंद्रा की कानपुर देहात के रनियां क्षेत्र में स्थित पर्यटन विभाग के गेस्ट हाउस (राही पर्यटन आवास) में निर्मम तरीके से हत्या कर दी गई थी। हत्यारे उनका मुंह स्टेपलर से सिल कर प्राइवेट पार्ट काटकर ले गए थे और उसे डाक्टर की पत्‍नी के पास कूरियर कर दिया गया था।
 
डिलीवरी से पहले कूरियर वाले ने इसकी जानकारी पुलिस को दे दी थी। इसके बाद कूरियर पुलिस ने अपने कब्‍जे में ले लिया था। गुरुवार को डॉक्‍टर के प्राइवेट पार्ट का पोस्‍टमार्टम करवाया गया। पोस्‍टमार्टम की पूरी कार्रवाई की वीडियोग्राफी की गई।अब प्राइवेट पार्ट को डीएनए जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला लखनऊ भेजा जाएगा।
 मंजू के घर पूछताछ में पुलिस को प्रीति नाम की एक युवती की जानकारी मिली है। डॉक्टर के प्राइवेट पार्ट को कूरियर करने से पहले प्रीति उसके घर पहुंची थी। परिजनों के मुताबिक 4.30 से 5.00 बजे के बीच आई युवती ने हल्के नीले रंग की जींस, मटमैले रंग के जूते, सफेद रंग का इनर और नीले रंग का टॉप पहन रखा था। उसके बाल घुंघराले थे। वह खुद को मंजू की पुरानी सहेली बता रही थी। परिजनों का कहना है कि वह सामान्य कद और थोड़ी मोटी सी थी। चेहरे पर बायीं ओर काला दाग था। वह काले और हल्के हरे रंग का लांग बैग भी लिए थे। घरवालों का कहना है कि उसने बेटी का नंबर लेने के साथ शादी का कार्ड भेजने की बात कहते हुए कई बार उसके सुल्तानपुर का पता बताने के लिए उन पर दबाव डाला। 
 
काम हो गया, मैं भी पहुंच रही हूं
मंजू की भाभी के अनुसार घर आई युवती बाथरूम गई थी। अंदर जाने से पहले उसने बैग उनके सात साल के बेटे को दे दिया। युवती बाथरूम से निकलकर बैग लेने के बाद नीचे जा रही थी तो किसी से मोबाइल पर बात करते हुए उसने कहा था कि काम हो गया है। मैं भी पहुंच ही रही हूं।मृतक डॉ के बड़े भाई महेश का आरोप है कि पुलिस उन लोगों को कुछ भी नहीं बता रही है, और ना ही उनकी बातों को सुन रही है। उन्होंने ये आरोप लगाया है-
 
1. घटना के दिन इन्हें बॉडी को देखने के लिए पुलिस ने पहले रानिया चौकी भेजा वहां से अकबरपुर कोतवाली भेजा गया, फिर वहां से पोस्टमार्टम हाउस भेजा गया। पुलिस उनके चक्कर लगवाती रही।
 
2. घटना के बाद होटल के सभी कर्मचारी भाग क्यों गए थे।
 
3. घटना दिन की थी और इन्हें पुलिस ने रात 11:30 पर इसकी सूचना क्यों दी गई। 
 
4. सबसे महत्वपूर्ण कि होटल के रजिस्टर में सिर्फ डॉ सतीश चंद्रा प्लस एक महिला लिखा था। उसमें ना तो डॉ साहब का पता लिखा था और ना ही उस महिला का नाम लिखा था, जबकि ये जरुरी था।
 
5. परिजनों ने एक अज्ञात डॉ के साथ एक दुसरे डॉक्टर विवेक गुप्ता का भी नाम लिया था, मगर पुलिस डॉ विवेक गुप्ता से कोई पूछताछ नहीं कर रही है।
परिजनों को शक है कि डॉ विवेक गुप्ता ने ही डॉ सतीश चंद्रा का हत्या करवाया है। डॉ सतीश चंद्रा जहां एमओआईसी थे वहीं पहले डॉ विवेक गुप्ता भी थे। करीब दो साल पहले विवेक गुप्ता किसी ट्रेनिंग की वजह से बाहर चले गए थे। तब कानपुर देहात के सीएमओ ने डॉ सतीश चंद्रा को ये चार्ज दिया था। डॉ गुप्ता के लौटने के बाद सीएमओ ने पुनः ये चार्ज डॉ चंद्रा से लेकर डॉ गुप्ता को दे दिया था। अस्पताल के कर्मचारियों ने इसका जमकर विरोध किया। इससे सीएमओ ने डॉ चंद्रा को ये चार्ज पुनः दे दिया। इसको लेकर डॉ गुप्ता और डॉ चंद्रा में जमकर झड़प हुई थी। तब से ये टशन चली आ रही थी। डॉ गुप्ता ने डॉ चंद्रा को देख लेने की धमकी भी दी थी।मृतक डॉ के परिजनों ने होटल के चार पुलिस पूछताछ कर रही है। पुलिस उस युवती की भी तलाश कर रही है, मगर अभी तक पुलिस को कोई सफलता हाथ नहीं नहीं लगी है।  पुलिस ने जिन होटल के कर्मचारियो को उठाया है, उसमें अनूप श्रीवास्तव (मैनेजर), राम सफल (कूक), सुनील (सफाई कर्मचारी), और दिलीप (वेटर) शामिल हैं। 
 
क्या चाहते हैं व्यापार बंद कर आत्महत्या कर लूं'
 
'आखिर क्या चाहते हैं आप लोग। दुकान बंदकर सड़क पर आ जाऊं। जिसे देखो वही सवाल पूछने चला आता है। जवाब दे-देकर मैं थक चुका हूं। लगता तो यही है कि बस आत्महत्या कर लूं।’ यह बातें पुलिसिया पूछताछ से परेशान हो चुके कूरियर का काम करने वाले रजनीश सचदेवा ने झल्लाते हुए कही। उनका कहना है कि शायद उन्होंने पुलिस का सहयोग करके गलती कर दी। सादे कपड़ों में आने वाले लोग घूम फिर कर वही सवाल कर रहे हैं, जिससे वह परेशान हो चुके हैं। वर्दी में न होने की वजह से पता ही नहीं चलता कि पुलिस है या कोई और। 
डॉक्‍टर का प्राइवेट पार्ट कूरियर करने की आरोपी लड़की ने कहा- 'तेरहवीं का भोज खाना चाहती हूं'
राही पर्यटन आवास के कर्मचारियों से पूछताछ के बाद पुलिस एक सांवले रंग की युवती की तलाश में जुट गई थी। इसके बाद बर्रा छह की मंजू नाम की युवती टारगेट पर आई जो तीन साल पहले डाक्टर के बर्रा स्थित क्लीनिक पर कुछ दिन के लिए काम पर आई थी। कोरियर कंपनी के मालिक और होटल कर्मचारियों से पूछताछ के बाद पुलिस ने स्केच तैयार कराया। गुरुवार को क्राइम ब्रांच की टीम राही पर्यटक आवास के कर्मचारी रामसुफल को लेकर मंजू के घर पहुंची। मंजू सुल्तानपुर में काम करती है। होटल कर्मचारी ने मंजू के फोटो को पहचानने से इन्कार कर दिया। कर्मचारी ने बताया कि यह वो युवती नहीं है जो घटना वाले दिन डाक्टर के साथ होटल में आई थी। इसके बाद टीम ने बर्रा व गोविंद नगर क्षेत्र में कई स्थानों पर दबिश दी।

होटल में अक्सर महिलाओं के साथ आते थे डॉक्टर
 
कानपुर देहात के पुलिस कप्तान कृपाशंकर की मानें तो डॉक्‍टर अक्सर अपनी महिला मित्र के साथ उस गेस्‍ट हाउस  में आते थे। दो चार घंटे बिताने के बाद चले जाते थे। उनकी जिस तरह से हत्या हुई है, उनके गुप्तांग को काटा गया है, उससे तो साफ़ है कि डॉ के साथ जो महिला थी वह उनसे आजिज आ चुकी थी। मृतक डॉ के परिजनों ने होटल के चार कर्मचारी सहित एक अज्ञात डॉक्टर के खिलाफ रिपोर्ट लिखवाई है। sabhar : bhaskar.com


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एक और बाबा गिरफ्तार, 4 महीने से शादीशुदा महिला का कर रहा था बलात्‍कार!

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एक और बाबा गिरफ्तार, 4 महीने से शादीशुदा महिला का कर रहा था बलात्‍कार!

नसरुल्लागंज (मध्य प्रदेश). कथावाचक आसाराम पर रेप का आरोप अभी सुर्खियों में है ही कि एक और बाबा पुलिस गिरफ्त में आया है जिसने एक महिला को चार माह तक बंधक बनाकर उसके साथ ज्यादती की। इसमें उसके पति और सास की सहमति भी थी। पुलिस ने बाबा, सास और पति के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। 
जानकारी के अनुसार एक महिला ने 1 सितंबर को पुलिस को फोन लगाकर सूचना दी थी कि नर्मदा मंदिर नीलकंठ के पुजारी ने चार महीने से कैद कर रखा है। इस पर पुलिस ने दबिश दी तो वहां पीड़िता, सास, पति और बाबा मिले। महिला की गंभीर स्थिति देखते हुए उसे भोपाल रेफर कर दिया गया। यहां उसका तीन दिन तक उपचार चला। इसके बाद मंगलवार को महिला नसरुल्लागंज आई और 55 साल के टुन्नी बाबा उर्फ महेंद्र गिरी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। टीआई सीएम द्विवेदी ने बताया कि बाबा के विरुद्ध ज्यादती का मुकदमा दर्ज कर पूछताछ की जा रही है। पति और सास के खिलाफ भी मारपीट और दहेज प्रताड़ना का मामला दर्ज किया गया है। 
 
फरियादी विवाहिता निवासी नीलकंठ ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई कि मेरी शादी बीते चार माह पूर्व नीलकंठ निवासी विश्राम बंजारा के साथ हुई थी। शादी के बाद से मुझे मेरी सास मन्नू पत्नी गेंदालाल व पति विश्राम दहेज के लिए प्रताड़ित करते थे। दस दिन के बाद ही मुझे नीलकंठ में पौराणिक नर्मदा मंदिर की पूजा करने वाले टुन्नी बाबा उर्फ महेंद्र गिरी उम्र 55 वर्ष के पास छोड़ दिया गया। यह पिछले चार माह से मुझे बंधक बनाकर मेरे साथ मारपीट व दुष्कर्म करता चला आ रहा है। 
एक बार फिर थाने पहुंची महिला 
 
3 सिंतबर को महिला की हालत में सुधार होने व पुलिस के सहयोग मिलने से महिला एक बार फिर थाने पहुंची और पूरा घटनाक्रम बताया। उसके अनुसार मेरे साथ बीते चार माह से नीलकंठ के पौराणिक मंदिर में पूजा पाठ करने वाले टुन्नी बाबा उर्फ महेन्द्र गिरी पति व सास के सहयोग से ज्यादती करते चले आ रहे हैं। मुझे मारने की धमकी दे रहे हैं। बाबा ने पति व सास के साथ मिलकर मुझे बुरी तरह पीटा है और मेरे साथ ज्यादती की है। महिला के बयान के आधार पर पुलिस ने आरोपी टुन्नी बाबा उर्फ महेन्द्र गिरी पर दुष्कर्म की धारा 376 (2) जी (डी) 506 व 342 के तहत मामला दर्ज कर लिया है। इसी तरह आरोपी विश्राम बंजारा पुत्र गेंदालाल बंजारा उम्र 25 वर्ष व उसकी मां मन्नु बाई पत्नी गेंदालाल के विरुद्ध धारा 498 ए, 323, 506, 34 के विरुद्ध मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस बाबा को थाने लाकर पूछताछ कर रही है। 
 sabhar : bhaskar.com

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सैक्सुअल ग्रूमिंग के खतरे में ब्रिटिश सिख किशोरियां

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सैक्सुअल ग्रूमिंग के खतरे में ब्रिटिश सिख किशोरियां

ब्रिटेन में नाबालिग सिख किशोरियां एशियाई लोगों के एक समूह द्वारा यौन उत्पीड़न का शिकार हो रही हैं.
ब्रिटेन में नाबालिग सिख किशोरियां एशियाई लोगों के एक समूह द्वारा यौन उत्पीड़न का शिकार हो रही है और अधिक चिंताजनक बात यह है कि वे इस प्रकार के मामलों की प्रशासन को रिपोर्ट करने में भी हिचक रही हैं.
   
बीबीसी द्वारा की गयी एक जांच में खुलासा हुआ है कि कई मामलों में इन एशियाई लोगों ने किशोरियों को यह भरोसा दिलाया कि वे सिख हैं और इस आड़ में उनका भरोसा जीता.
   
बीबीसी के ‘‘इनसाइड आउट’’ कार्यक्रम में बताया गया कि अपने परिवारों की बदनामी होने के डर से ये किशोरियां इस प्रकार के मामलों की सूचना प्रशासन या परिवार किसी को नहीं देतीं और अक्सर ऐसे मामलों में उन्हें घर छोड़ना पड़ता है.
   
रिपोर्टर क्रिस रोजर्स एक 16 वर्षीय ब्रिटिश सिख किशोरी से मुलाकात के लिए अमेरिका के एक दूरवर्ती इलाके में गए. इस किशोरी का मुस्लिम युवकों के एक समूह ने लंबी अवधि तक यौन शोषण किया.
   
यह किशोरी उन दर्जनों ब्रिटिश सिख किशोरियों में से एक थी जो उनके राज को छुपाने के लिए विदेश में रह रही हैं.
  
परिवार कल्याण मामलों को देखने वाली द सिख एवेयरनेस सोसायटी यूके (एसएएस) ने दावा किया है कि उसने पांच साल की अवधि में ब्रिटेन में बाल यौन शोषण की 200 से अधिक रिपोटरे की जांच की है.
   
हालांकि इस दावे की पुष्टि के लिए कोई आधिकारिक आंकड़ें उपलब्ध नहीं हैं क्योंकि नाबालिग सिख किशोरियों के यौन उत्पीड़न के मामले दुर्लभ ही प्रशासन को रिपोर्ट किए जाते हैं. sabhar :http://www.samaylive.com

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