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गुरुवार, 29 अगस्त 2013

आ के फिर ना जायेगी जवानी

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स्रोत फोटो : गूगल 
आ के  फिर ना जायेगी जवानी  जवानी जो तीनो पड़ाव मे मे सबसे  लुभावनी है  | कब सरक जाती है पता नहीं चलता  मगर ईधर पश्चिम  देशो मे  कयी ऐसी चौकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है | जो आई जवानी के वापस न जाने की बात कही है, यानी की सदाबहार जवानी का दावा  इस संदर्भ मे पिछले दिनो हावर्ड विश्विद्यालय से आई रिपोर्ट अपने आप मे पहली रिपोर्ट कही जा सकती है | जो जवानी की चाभी कही जाने वाली टेलोमियर्स को राह पे आने मे सफल हुई है |

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स्रोत फोटो : गूगल 
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 स्रोत फोटो : गूगल 

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      साभार : हिंदुस्तान दैनिक 

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कैमरे के सामने आई युवती, दिया जवाब, कैसे बीते आसाराम के वो 7 घंटे!

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कैमरे के सामने आई युवती, दिया जवाब, कैसे बीते आसाराम के वो 7 घंटे!

इंदौर. पुलिस चली गई। आसाराम सामने आसन पर बैठे थे। सामने समर्थकों का हुजूम। प्रवचन शुरू हुए। इतने में एक टीवी चैनल का संवाददाता आ पहुंचा। सवाल पर सवाल। आप पर गंभीर आरोप हैं। आसाराम ने कहा - सब झूठ है। जोधपुर की उस कुटिया में ऐसा कुछ हो ही नहीं सकता। आपस में बोलो तो वहां से दूर तक आवाज जाती है। मैंने डेढ़ घंटे मुंह दबाया और किसी को आवाज ही नहीं आई! ऐसे कैसे हो सकता है? मिला होगा। कई लोगों से मिलता हूं। लेकिन वैसा नहीं मिला, जैसा कहा जा रहा है। सवाल तीखे हुए। आपको गिरफ्तार किया जा सकता है? जवाब - 7 नहीं, 17 साल के लिए जेल में डाल दो। सांच को आंच नहीं। संवाददाता ने पूछा - आप खुद को निर्दोष कैसे साबित करेंगे? भक्तों ने जयघोष शुरू किया। आसाराम ने कहा-थोड़ा कैमरा उधर भी घुमा दो। मुझे तो रोज 20 देश के लोग देखते और सुनते हैं। गुस्सा चेहरे पर साफ था। संवाददाता ने फिर सवाल किया। आसाराम ने कहा-अब जरा भक्तों से बात कर लो। बोलने लगे- सुबह उठकर पानी पीना बहुत जरूरी है। सुबह 9 से 12 के बीच भोजन सर्वोत्तम। संवाददाता का सवाल-गुस्से के बावजूद हंसते हुए आसाराम ने भक्तों से कहा-रात को 1 से 3 बजे के बीच जागना खतरनाक है। संवाददाता ने कहा-जवाब तो दीजिए। अनसुना करते हुए भक्तों से फिर कहा-टेंशन 3 प्रकार के होते हैं। शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक। संवाददाता ने फिर तेज आवाज में सवाल किया। आसाराम ने माइक से ही शुरू किया-ओम..ओम..ओम..। भक्त भी यही दोहराने लगे। संवाददाता ने फिर जवाब मांगा। आसाराम ने फिर कहा-हसंते रहिए। हंसने से ऊपर बताए सारे टेंशन भाग जाते हैं। फ्लाइट का टाइम हो गया है। चलो एयरपोर्ट। और आसाराम मुंबई होते हुए सूरत की फ्लाइट के लिए निकल गए।
 नाबालिग किशोरी के यौन शोषण के मामले में मंगलवार सुबह जोधपुर पुलिस का दल खंडवा रोड स्थित आसाराम आश्रम में पहुंचा। पुलिस दल को पहले आश्रम में दाखिल होने से ही रोक दिया गया। जब पुलिस वाले अंदर पहुंचे तो आसाराम योग कर रहे थे। बाद में ध्यान में लीन हो गए।
कैमरे के सामने आई युवती, दिया जवाब, कैसे बीते आसाराम के वो 7 घंटे!

ऐसे चला पूरा घटनाक्रम
 - सुबह सवा सात बजे जोधपुर पुलिस के सब इंस्पेक्टर भंवरसिंह और हेड कांस्टेबल सुरेंद्रसिंह नोटिस लेकर खंडवा रोड स्थित आश्रम पहुंचे।
 - पुलिस को देख सेवादारों ने आश्रम का मुख्यद्वार बंद रखते हुए पुलिस को अंदर जाने से मना कर दिया।
 - जोधपुर पुलिस करीब आधे घंटे तक आश्रम के बाहर ही खड़ी रही।
 - सुबह 8 बजे भंवरकुआं थाने से टीआई अशोक तिवारी पुलिस दल के साथ आश्रम पहुंचे।
 - कुछ देर तक बातचीत के बाद टीआई ने जोधपुर पुलिस के जवानों को अंदर दाखिल करवाया। करीब आधे घंटे तक आश्रम के भीतर पुलिस से न ही किसी ने बात की और न ही कोई नोटिस लेने आया। वे यहां इंतजार करते रहे।
 - काफी देत तक इंतजार के बाद करीब 8.30 बजे पुलिसवालों को आसाराम के सेवादारों ने बापू के योग में बैठे होने की जानकारी दी।
 - सुबह नौ बजे आसाराम की ओर से एक वकील ने जोधपुर पुलिस से चर्चा की।
 - सवा नौ बजे पुलिस को सचिव ने जानकारी दी कि बापू ध्यान में लीन हो गए हैं।
 - साढ़े 10 बजे के करीब इंदौर पुलिस आश्रम से बाहर आ गई, जबकि जोधपुर पुलिस वहीं बापू के बाहर आने का इंतजार करती रही।
 - दोपहर साढ़े बारह बजे के करीब विधायक रमेश मेंदोला कुछ लोगों के साथ आश्रम पहुंचे।
 - दोपहर करीब एक बजे बजे जोधपुर पुलिस ने नोटिस तामील करवाया। इसके बाद पुलिस जवान आश्रम से बाहर आ गए।
 - दोपहर करीब चार बजे आसाराम ने चर्चा के लिए मीडिया को आश्रम में बुलाया।
 - सफाई देने के बाद करीब सवा चार बजे मीडिया के सामने एक युवती आई, जिसका परिचय पीडि़ता की सहेली के रूप में करवाया गया। युवती ने बापू के बचाव में मीडिया से बातें की।
 - इसके बाद बापू आश्रम से निकलकर सीधे एयरपोर्ट पहुंचे।
कैमरे के सामने आई युवती, दिया जवाब, कैसे बीते आसाराम के वो 7 घंटे!

 आश्रम वालों ने पीडि़ता की कथित सहेली से कहलवाया- सब साजिश है।
 आसाराम के सत्संग के बाद आश्रम से जुड़े पदाधिकारी एक युवती को मीडिया के सामने लाए। युवती ने कहा-मैं पीडि़ता (जिसने दुष्कर्म का आरोप लगाया है) की सहेली हूं। पिछले साल हम दोनों आसाराम बापू के छिंदवाड़ा आश्रम में साथ-साथ रहते थे। ताजा मामला सामने आया तो दो दिन पहले मैंने उससे फोन पर बात की। उसने कहा कि माता-पिता के दबाव में उसने आसाराम बापू पर दुष्कर्म का झूठा आरोप लगाया है। युवती से जब मीडिया ने नाम पूछा तो उसने नाम बताने से इनकार किया। हालांकि, आश्रम से जुड़े लोगों का कहना है कि उसका नाम अश्विनी है। sabhar : bhaskar.com


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जब-जब हिन्दुस्तान में महंगा होता पेट्रोल-डीजल, यहां लोग मनाते हैं ईद-दिवाली

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जब-जब हिन्दुस्तान में महंगा होता पेट्रोल-डीजल, यहां लोग मनाते हैं ईद-दिवाली

डॉलर के लगातार आसमान पर पहुंचने के चलते अब देश में डीजल और पेट्रोल की कीमतें 5 रुपए तक बढ़ाए जाने की बात होने लगी है। सरकार इसके पीछे तर्क दे रही है कि कंपनियों को नुकसान हो रहा है। लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि आखिर ये कंपनियां हैं कौन, हर बार जिनका हवाला देकर तेल के दाम बढ़ा दिए जाते हैं। 
 
दिलचस्प है कि दुनियाभर में तेल कंपनियों की अलग ही धाक है। इनके मुनाफों के बारे में सुनोगे तो आपके होश उड़ जाएंगे। भारत की प्रमुख तेल कंपनियों के बारे में तो आप जानते ही होंगे। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ऐसी कौनसी तेल कंपनियां हैं जो दुनियाभर में अपने कारोबार का सिक्का जमा चुकी हैं।
जब-जब हिन्दुस्तान में महंगा होता पेट्रोल-डीजल, यहां लोग मनाते हैं ईद-दिवाली

एक्सॉन
यह अमेरिकी तेल कंपनी दुनिया की टॉप तेल कंपनियों में पहले नंबर पर है।
एसेट्स- 331 बिलियन डॉलर
रेवेन्यू- 434 बिलियन डॉलर
प्रॉफिट- 41 बिलियन डॉलर
पूर्व रैंक- 1
जब-जब हिन्दुस्तान में महंगा होता पेट्रोल-डीजल, यहां लोग मनाते हैं ईद-दिवाली
शेल
नीदरलैंड की यह कंपनी दूसरे स्थान पर है। इसका कारोबार दुनियाभर में फैला हुआ है।
ऐसेट्स- 345 बिलियन डॉलर
रेवेन्यू- 470 बिलियन डॉलर
प्रॉफिट- 31 बिलियन डॉलर
पूर्व रैंक- 6
जब-जब हिन्दुस्तान में महंगा होता पेट्रोल-डीजल, यहां लोग मनाते हैं ईद-दिवाली
शेवरॉन
अमेरिका की यह कंपनी दुनिया में तीसरे स्थान पर है।
ऐसेट्स- 209 बिलियन डॉलर
रेवेन्यू- 236 बिलियन डॉलर
प्रॉफिट- 27 बिलियन डॉलर
पूर्व रैंक- 3

जब-जब हिन्दुस्तान में महंगा होता पेट्रोल-डीजल, यहां लोग मनाते हैं ईद-दिवाली

बीपी
यह ब्रिटिश कंपनी दुनिया में चौथे स्थान पर है।
ऐसेट्स- 293 बिलियन डॉलर
रेवेन्यू- 376 बिलियन डॉलर
प्रॉफिट- 26 बिलियन डॉलर
पूर्व रैंक- 118

जब-जब हिन्दुस्तान में महंगा होता पेट्रोल-डीजल, यहां लोग मनाते हैं ईद-दिवाली

गेजप्रॉम
यह रशियन कंपनी दुनिया में 5वें स्थान पर है।
ऐसेट्स- 328 बिलियन
रेवेन्यू- 139 बिलियन
प्रॉफिट- 39 बिलियन
पूर्व रैंक- 3
जब-जब हिन्दुस्तान में महंगा होता पेट्रोल-डीजल, यहां लोग मनाते हैं ईद-दिवाली

स्टेटॉयल
नार्वे की यह कंपनी दुनिया में 6वें स्थान पर है।
ऐसेट्स- 129 बिलियन डॉलर
रेवेन्यू- 108 बिलियन डॉलर
प्रॉफिट- 13 बिलियन डॉलर
पूर्व रैंक- 11

जब-जब हिन्दुस्तान में महंगा होता पेट्रोल-डीजल, यहां लोग मनाते हैं ईद-दिवाली
टोटल
यह फ्रांसीसी कंपनी दुनिया में 7वें स्थान पर है।
ऐसेट्स- 205 बिलियन डॉलर
रेवेन्यू- 209 बिलियन डॉलर
प्रॉफिट- 15 बिलियन डॉलर
पूर्व रैंक- 5

जब-जब हिन्दुस्तान में महंगा होता पेट्रोल-डीजल, यहां लोग मनाते हैं ईद-दिवाली

कोनोको फिलिप्स
यह ब्रिटिश कंपनी दुनिया में 8वें नंबर पर है।
ऐसेट्स- 153 बिलियन डॉलर
रेवेन्यू- 235 बिलियन डॉलर
प्रॉफिट- 12 बिलियन डॉलर
पूर्व रैंक- 7
जब-जब हिन्दुस्तान में महंगा होता पेट्रोल-डीजल, यहां लोग मनाते हैं ईद-दिवाली
पेट्रो चाइना
यह चाइनीस कंपनी दुनिया में 9वें नंबर पर है।
ऐसेट्स- 301 बिलियन डॉलर
रेवेन्यू- 310 बिलियन डॉलर
प्रॉफिट- 21 बिलियन डॉलर
पूर्व रैंक- 4                                                        sabhar : bhaskar.com



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बुधवार, 28 अगस्त 2013

कर्ज में डूबे अमेरिका के पास नहीं हैं वेतन तक के पैसे, बचेगा सिर्फ चार दिन का खर्च

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कर्ज में डूबे अमेरिका के पास नहीं हैं वेतन तक के पैसे, बचेगा सिर्फ चार दिन का खर्च

अमेरिका की हालत खस्‍ता है। दुनिया का सबसे ताकतवर मुल्‍क गहरे वित्तीय संकट की ओर बढ़ रहा है। मध्य अक्टूबर तक उसके पास केवल तीन-चार दिन के खर्च के लिए 50 अरब डॉलर (लगभग 3.31 लाख करोड़ रुपए) का कैश ही बचेगा। इसके बाद वह अपने सैनिकों को न तो वेतन दे पाएगा और न लोगों को सामाजिक सुरक्षा के मद में दी जाने वाली रकम।
 
 
ओबामा प्रशासन ने सोमवार को साफ तौर पर आर्थिक संकट की बात स्वीकार की। साथ ही कहा कि देश अब और ज्यादा कर्ज लेने की स्थिति में भी नहीं है। उस पर पहले से 16.7 लाख करोड़ डॉलर का कर्ज है। खर्चों में कटौती की जा रही है। लोगों को नौकरियों से निकाला जा रहा है। वेतन कम किए जा रहे हैं। खुद ओबामा और उनकी सरकार के कई मंत्री भी अपनी सैलरी कटवा रहे हैं।

कर्ज में डूबे अमेरिका के पास नहीं हैं वेतन तक के पैसे, बचेगा सिर्फ चार दिन का खर्च

कर्मचारियों को जबरन अवैतनिक छुट्टी 
कर्मचारियों को जबरन अवैतनिक छुट्टी पर भेजा जा रहा है। अब नए सिरे से कटौतियां करनी होंगीं। राष्ट्रपति बराक ओबामा ने देश की कर्ज सीमा बढ़ाने या इस संबंध में कोई मध्यस्थता करने से इनकार कर दिया। उन्होंने संकट के लिए देश की संसद (कांग्रेस) खासकर रिपब्लिकन पार्टी को दोषी ठहराया। अमेरिकी संसद के निचले सदन में रिपब्लिकन का बहुमत है। व्हाइट हाउस के प्रेस सचिव जे. कार्नी ने साफ कहा कि रिपब्लिकन पार्टी के सांसदों से इस मामले में कोई बात नहीं की जाएगी। कई महीनों से प्रस्ताव उनके पास है। हम केवल उनके जवाब का इंतजार करेंगे। 
कर्ज में डूबे अमेरिका के पास नहीं हैं वेतन तक के पैसे, बचेगा सिर्फ चार दिन का खर्च
कर्ज की सीमा बढ़ाए कांग्रेस : वित्त मंत्री 
वित्त मंत्री जैक ल्यू ने सोमवार को सांसदों को पत्र लिखा है। इसमें कहा है कि अगर कर्ज की सीमा नहीं बढ़ाई गई तो निवेशक सरकारी बॉन्ड्स में रकम लगाने से मना कर सकते हैं। वे पहले ही लाख करोड़ डॉलर के सरकारी बांड खरीद चुके हैं। कर्ज लेने की वर्तमान सीमा मई में तय की गई थी। वित्त विभाग कर्ज लेने के लिए नई तकनीक खोज रहा है। 
 
ओबामा के ड्रीम प्रोजेक्ट पर भी खतरा 
ओबामा प्रशासन ने सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में महत्वाकांक्षी मेडिकेयर योजना चला रखी है। इस पर भी संकट मंडरा रहा है। इस योजना के लिए एक दिन में 30 अरब डॉलर (करीब 1.98 लाख करोड़ रुपए) की रकम विभिन्न विभागों को ट्रांसफर करनी होती है। 
कर्ज में डूबे अमेरिका के पास नहीं हैं वेतन तक के पैसे, बचेगा सिर्फ चार दिन का खर्च

अमेरिका और उसके मित्र देश मंगलवार को सीरिया पर सैन्य कार्रवाई की योजना बनाने में जुट गए। अमरीकी रक्षा मंत्री चक हेगेल ने कहा है कि अगर राष्ट्रपति बराक ओबामा हमले का आदेश देते हैं तो अमरीकी सेनाएं सीरिया पर हमले के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा है कि हमने साजो-सामान को उचित जगह पर पहुंचा दिया है ताकि जो भी फैसला राष्ट्रपति लें उस पर तुरंत अमल किया जा सके। सीरियाई विद्रोहियों को संकेत दिए गए हैं कि कुछ दिन में अमेरिका सीरिया पर हमला कर सकता है। अमेरिका ने यूरोप और मध्यपूर्व के अपने मित्र देशों के शीर्ष फौजी अफसरों से जॉर्डन में बातचीत की है।  इसे ‘युद्ध परिषद’ कहा गया है। राष्ट्रपति ओबामा ने ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरन तथा फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री केविन रड से बातचीत की है। फिलहाल रूस से बातचीत स्थगित कर दी गई है क्योंकि उसने सीरिया में अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप में सहयोग करने से इनकार कर दिया है। चीन भी रूस के साथ है। ये दोनों संयुक्त राष्ट्र में असद के खिलाफ कार्रवाई को वीटो करने को तैयार हैं। ईरान पहले से असद के साथ है। 

 कर्ज में डूबे अमेरिका के पास नहीं हैं वेतन तक के पैसे, बचेगा सिर्फ चार दिन का खर्च
विद्रोहियों का खनासीर पर कब्जा, 53 सैनिक मारे गए 
 
सीरिया के विद्रोहियों ने सोमवार को अलेप्पो से लगे खनासीर शहर पर कब्जा कर लिया। इसमें 53 सरकारी सैनिक मारे गए। विद्रोहियों ने राष्ट्रपति असद को जहरीली गैस का हमला करने की धमकी दी है। सीरिया में तैनात ब्रिटेन के मानवाधिकार पर्यवेक्षक अब्दुल रहमान ने बताया कि विद्रोहियों ने खनासीर शहर पर कब्जा किया। उत्तरी हमा प्रांत को जोड़ने वाला सड़क संपर्क काट दिया। इससे पहले लेबनान की सीमा से लगे तालखलाख शहर पर भी विद्रोहियों ने कब्जा करने का प्रयास किया।
कर्ज में डूबे अमेरिका के पास नहीं हैं वेतन तक के पैसे, बचेगा सिर्फ चार दिन का खर्च

आज फिर शुरू होगी जांच
 
सीरिया पहुंचे संयुक्त राष्ट्र जांच दल ने दूसरी बार जांच बुधवार तक टाल दी है। सोमवार को उनके काफिले और होटल पर हमले के बावजूद उन्होंने जांच की थी। सीरियाई विदेश मंत्री वालिद अल-मुआलम ने साफ कहा है कि सीरिया सरकार ने रासायनिक हथियारों या पदार्थ का इस्तेमाल नहीं किया है। जबकि अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन केरी ने कहा कि इसमें कोई शक नहीं कि राष्ट्रपति असद की सेना ने ही रासायनिक पदार्थ का इस्तेमाल किया है। sabhar : bhaskar.com



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बेटी के न्यूड होने पर पीएम को गर्व

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पेरिस : न्यूजीलैंड के पीएम जॉन अपनी बेटी स्टेफेनी के न्यूड फोटोशूट से काफी खुश हैं. बताया जा रहा है कि पीएम की 20 वर्षीय बेटी स्टेफेनी ने पेरिस डिजाइन वीक में अपनी फोटो प्रदर्शनी के लिए न्यूड फोटोशूट करवाया है. इस फोटोशूट पर न्यूजीलैंड के पीएम ने गर्व जताया है.
 
मलेशिया क्रॉनिकल्स के मुताबिक पीएम जॉन अपनी बेटी के इस फोटोशूट से शर्मिंदा नहीं हैं. उन्हें अपनी बेटी पर गर्व है. वहीं एक न्यूजपेपर के मुताबिक पीएम का माना है कि ये फोटोज स्टेफेनी के काम का हिस्सा है और वो इससे खुश हैं.   
 
कहा जा रहा है कि पेरिस डिजाइन वीक को प्रमोट करने के लिए स्टेफेनी की पिक्चर्स प्रमोशन के लिए इस्तेमाल की गई हैं. ये प्रदर्शनी सितंबर माह में सार्वजिनक तौर पर सभी देख सकते हैं.
 
वहीं न्यूजीलैंड के फोटोग्राफर क्रिस ने स्टेफेनी को बहुत टैलेंटेड बताया है. स्टेफेनी पेरिस कॉलेज ऑफ आर्ट की स्टूडेंट हैं.

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सोमवार, 26 अगस्त 2013

ब्रमांड का सृजक कौन

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वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंस का कहना है की  ब्रमांड संग्रचना के पीछे भौतिक नियम है ना की  ईश्वर जैसी कोई सर्वशक्ति इस पर हर इंसान की अपनी राय हो सकती है लेकिन सदी सबसे बड़े वैज्ञानिक की राय को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता है | बेसक इस बयान से धर्मावलंबी सहमत नहीं हो परंतु वैज्ञानिक  युग मे लोग बुनियादी सवालो पे बिचार करते ही हैं | 



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गुरुवार, 22 अगस्त 2013

कभी शिव तो कभी कृष्ण बनकर सेक्स करता था यह बाबा

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कभी शिव तो कभी कृष्ण बनकर सेक्स करता था यह बाबा
अपने आप को भगवान का करीबी बताने वाले आसाराम बापू पर एक नाबालिग लड़की को बंधक बना बलात्कार करने का आरोप लगा है। उत्तर प्रदेश की एक नाबालिग लड़की ने आसाराम पर जोधपुर में अनुष्ठान के बहाने दुष्कर्म करने का मामला दिल्ली में दर्ज कराया है। आसाराम अक्सर विवादों में रहते हैं।
 
 
 
आसाराम ऐसे अकेले संत नहीं हैं जिनपर इस तरह का सनसनीखेज आरोप लगे हैं। ऐसे कई संत हैं जो विवादों में रह चुके हैं| आइये आपको बताते हैं एक ऐसे संत के बारे में जिसे सेक्स स्कैंडल में सामने आने के बाद ही दुनिया उसे पहचाने लगी। इतना ही नहीं इस बाबा को तो स्कैंडल स्वामी तक कहा जाता है।
 कभी शिव तो कभी कृष्ण बनकर सेक्स करता था यह बाबा
स्कैंडल स्वामी कहे जाने इस बाबा का नाम है नित्यानंद स्वामी। नित्यानंद सबसे पहले तब चर्चा में आए जब 2010 में दक्षिण की एक चर्चित अभिनेत्री के साथ उनका आपत्तिजनक वीडियो एक निजी चैनल ने टेलिकास्ट किया गया। इस मामले में कर्नाटक पुलिस ने उनके खिलाफ केस भी दर्ज किया। 
 कभी शिव तो कभी कृष्ण बनकर सेक्स करता था यह बाबा
पुलिस से पीछा छुड़ाकर यहां से वहां भागने वाले स्वामी नित्यानंद को  बैंगलुरु पुलिस ने हिमाचल प्रदेश से गिरफ्तार कर उन्हें जेल भेज दिया। 52 दिन जेल में बिताने के बाद नित्यानंद बेल मिलने के बाद जेल से बाहर आए।
 कर्नाटक पुलिस की सीआईडी द्वारा तैयार की गई चार्जशीट में नित्यानंद की ज़िंदगी के कई पहलू सामने आए। 430 पेज की चार्जशीट में नित्यानंद ने एक महिला भक्त को यह कहते हुए सेक्स के लिए राजी किया था कि वह शिव है और महिला पार्वती। नित्यानंद ने महिला को राजी करते हुए यह भी कहा था कि वे एक दैवीय कार्य कर रहे हैं और इसमें कुछ भी अनैतिक नहीं है। चार्जशीट में महिला का बयान भी दर्ज है जिसमें कहा गया है कि स्वयंभू स्वामी नित्यानंद ने मोक्ष पाने का लालच देकर उनसे शारीरिक संबंध बनाए।


कभी शिव तो कभी कृष्ण बनकर सेक्स करता था यह बाबा

अभी सेक्स स्कैंडल से स्वामी नित्यानंद का पीछा छूटा भी नहीं था कि एक एनआरआई महिला ने स्वामी पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगा दिए। इस शादीशुदा महिला के अनुसार बाबा ने उसे पर्सनल कामों के लिए चुना, फिर सेक्शुअल एब्यूज किया। 

कभी शिव तो कभी कृष्ण बनकर सेक्स करता था यह बाबा
बाबा ने अपने कुकर्म को सही ठहराने के लिए श्रीकृष्ण और राधा के प्रेम का उदाहरण दिया। बाबा ने कहा कि तुम लकी हो जो बाबा के पर्सनल काम के लिए चुनी गई हो। महिला का दावा है कि नित्यानंद ने 6 साल तक उसका यौन शोषण किया। 
कभी शिव तो कभी कृष्ण बनकर सेक्स करता था यह बाबा

नित्यानंद की लीलाएं लगातार जारी थी। नया मामला किसी महिला के यौन शोषण का न होकर पुरुष से जुड़ा था। इस बार बाबा के एक पुरुष अनुयायी ने उन पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया और बाबा पर इस संबंध में भी मामला दर्ज कर लिया गया।  

कभी शिव तो कभी कृष्ण बनकर सेक्स करता था यह बाबा

इसी दौरान स्वामी नित्यानंद पर एक अजीबो गरीब आरोप लगा, जिसके मुताबिक नित्यानंद पवित्र जल में नशे की दवाएं मिलाकर भक्तों को देते थे। नित्यानंद पर अधीनम मठ के गलत इस्तेमाल के भी आरोप लगे।
कभी शिव तो कभी कृष्ण बनकर सेक्स करता था यह बाबा

स्वामी नित्यानंद पर एक और सनसनीखेज आरोप उन्हीं के भक्त ने लगाया जिसके मुताबिक नित्यानंद के आश्रम में बाघ की खाल और हाथी के दांतों का इस्तेमाल किया जाता है। इस आरोप के बाद नित्यानंद पर वन्य जीवन संरक्षण कानून के तहत आरोप दर्ज कर लिया गया।

स्वामी के सेक्स स्कैंडल के बाद अगर उनकी किसी हरकत की चर्चा सबसे ज्यादा होती है तो वो है 2011 में गुरु पूर्णिमा के मौके पर उनकी अनोखी हरकत की। इस दौरान नित्यानंद ने भक्तों को अपने इशारे पर हवा में उछालने का दावा किया। हैरानी की बात यह है कि इन लोगों में दक्षिण की वो अभिनेत्री भी शामिल थीं जिसके साथ स्वामी को स्कैंडल स्वामी बनाया था।


2013 में स्कैंडल स्वामी महाकुंभ पहुंचे और यहां भी विवादों ने उनका पीछा नहीं छोड़ा। महानिर्वाणी अखाड़े ने उन्हे महमंडलेश्वर बनाया और बाकियों ने उनका विरोध शुरु कर दिया और बसंत पंचमी के दिन उनका शाही स्नान सवालों के घेरे में आ गया।

आखिरकार नित्यानंद स्वामी ने खुद को शाही स्नान से दूर ही रखा और वो महानिर्वाणी अखाड़े के शाही स्नान और जुलूस में नजर नहीं आए । sabhae : bhaskar.com






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भारत की डूबती अर्थव्यवस्था के सामने हैं दस बड़े खतरे

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भारत की डूबती अर्थव्यवस्था के सामने हैं दस बड़े खतरे

नई दिल्ली. भारत के प्रधानमंत्री और वित्तमंत्री भले ही अर्थशास्त्री हों लेकिन वे भी इन दिनों अर्थव्‍यवस्‍था की हालत ठीक करने का उपाय नहीं खोज पा रहे हैं। डॉलर के मुकाबले रुपया नीचे गिरने का नोज नया रिकॉर्ड बना रहा है। गुरुवार को एक डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की कीमत 65 तक पहुंच गई। हाल के महीनों में डालर के मुकाबले रुपए में सबसे अधिक गिरावट देखी जा रही है। पिछले दो माह के दौरान ही डालर की तुलना में रुपया करीब 15 प्रतिशत से ज्यादा गिर चुका है। इसके बावजूद ऐसी कोई तस्वीर सामने नहीं आ रही कि रुपए का गिरना कहां जाकर रुकेगा। जानकार तो यहां तक कह रहे हैं कि डालर-रुपया की विनिमय दर 70 रुपए का स्तर भी छू ले तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए। 
 
रुपए की गिरावट से अर्थव्यवस्था पर पड़ रहे प्रभाव से पीएम, वित्त मंत्री, वित्त मंत्रालय के आला अधिकारी से लेकर रिजर्व बैंक के गवर्नर सभी उलझन में हैं। इसके बावजूद उन्हें राह नहीं सूढ रही है कि रुपए को कैसे मजबूती दी जाए। सरकार की ओर से बार-बार कहा जा रहा है कि अर्थव्यवस्था पहले की तरह मजबूत है और 1980 या 1990 के हालात पैदा होने का खतरा नहीं है। रुपए में गिरावट भले ही अस्थायी दौर हो लेकिन अर्थव्यवस्था की जो हालत है उसे लेकर सरकार के उपाय और आश्वासन घरेलू और बाहरी निवेशकों में विश्वास पैदा करने में नाकाम साबित हो रहे हैं। आइए आपको बताते हैं भारतीय अर्थव्यवस्था पर इस समय कौन से दस बड़े खतरे मंडरा रहे हैं। 
भारत की डूबती अर्थव्यवस्था के सामने हैं दस बड़े खतरे

राजकोषीय घाटा बढ़ा
 
सरकार की कुल आय और व्यय में अंतर को ही राजकोषीय घाटा कहा जाता है। इससे पता चलता है कि सरकार को कामकाज चलाने के लिए कितनी उधारी की जरूरत पड़ेगी। कुल राजस्व का हिसाब-किताब लगाने में उधारी को शामिल नहीं किया जाता है। राजकोषीय घाटा आमतौर पर राजस्व में कमी या पूंजीगत व्यय में काफी बढ़ोत्तरी से होता है। राजकोषीय घाटे की भरपाई आमतौर पर केंद्रीय बैंक ( भारत में रिजर्व बैंक) से उधार लेकर की जाती है या इसके लिए छोटी और लंबी अवधि के बॉन्ड के जरिए पूंजी बाजार से फंड जुटाया जाता है। विदेशी मुद्रा भंडार घटकर महज इतना रह गया है कि वह सात महीने का ही काम चला सकता है जबकि 2007-08 में यह मुद्रा भंडार डेढ़ साल की आयात जरूरत पूरी करने के लिए काफी था।
 
भारत का राजकोषीय घाटा 2007-2008 में 3.5 फीसदी था जो बढ़कर 2011-12 में 5.8 फीसदी हो गया था। एक आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक, केन्द्र सरकार पर कुल कर्ज 44.69 करोड़ रूपए है जो जीडीपी का 50 फीसदी के करीब है। केंद्र का लक्ष्य सरकारी घाटे को इस वित्तीय वर्ष में 4.8 फीसद तक करना है लेकिन ऐसा होने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। केंद्र सरकार का राजकोषीय घाटा चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 2.63 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया था जो 2013-14 के बजट अनुमान का 48.4 फीसदी है। वर्ष 2012-13 की अप्रैल-जून तिमाही में राजकोषीय घाटा बजट अनुमान का 37.1 प्रतिशत था। 
 
रिजर्व बैंक के गवर्नर डी सुब्बाराव ने हबाल ही में वित्त वर्ष 2013-14 की ऋण एवं मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए कहा था कि भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बढता चालू खाता घाटा सबसे बड़ा और पहला खतरा बन रहा है। यह ऐतिहासिक रूप से उच्चतम पर बना हुआ है। आरबीआई के अनुसार चालू खाता घाटा जीडीपी का 2.5 प्रतिशत होना चाहिए जो कि अनुमानित 5.2 प्रतिशत पर बना हुआ हुआ है। इससे पूंजी के आंतरिक स्रोतों पर दबाव पड़ता है और बाजार तरलता के संकट की ओर बढ़ता है। आने वाले समय में भी सरकार के घाटे से उबरने के आसार नहीं नजर आ रहे हैं। आइए जानते हैं कि इसकी क्या वजहें है-

भारत की डूबती अर्थव्यवस्था के सामने हैं दस बड़े खतरे

खाद्य सुरक्षा विधेयक से बढ़ेगा खजाने पर बोझ
 
केंद्र सरकार के खाद्य सुरक्षा विधेयक को लागू करने के फैसले से सरकारी खजाने पर बोझ बढ़ेगा। बड़ी आबादी को सस्ती दरों पर अनाज उपलब्ध कराने के लिए सरकार को पहले महंगे दामों पर अनाज खरीदना होगा और फिर इसके बाद इसे सब्सिडाइज रेट पर बेचा जाएगा। डीबीएस बैंक ने अनुमान जाहिर किया था कि इस विधेयक के लागू होने के बाद चालू वित्त वर्ष में सरकार का राजकोषीय घाटा 4.8 प्रतिशत के अनुमानित लक्ष्य से आधा प्रतिशत और आगे बढ़ सकता है। इससे डंवाडोल चल रही भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए और समस्याएं खड़ी हो सकती हैं। 
 
सिंगापुर स्थित इस ब्रोकरेज फर्म ने एक रिपोर्ट में कहा था, ‘इस साल राजकोषीय घाटा तय लक्ष्य से कम से कम आधा प्रतिशत ऊपर जा सकता है।’ रिपोर्ट में कहा गया है कि सब्सिडी बिल बढ़कर जीडीपी के 2.3 प्रतिशत तक पहुंच सकता है जो 1.9 प्रतिशत के लक्ष्य से काफी ऊपर है। सब्सिडी बिल में बढ़ोतरी की मुख्य वजह व्यापक स्तर पर खाद्य सब्सिडी होगी। राजकोषीय मोर्चे पर रुपये में गिरावट और बाद में कच्चे तेल में तेजी, आग में घी डालने जैसा काम करेगी। मंत्रिमंडल ने खाद्य सुरक्षा विधेयक को लागू करने के लिए अध्यादेश लाने का निर्णय किया है। खाद्य सुरक्षा विधेयक के जरिए देश की दो तिहाई आबादी को 1 से 3 रुपये प्रति किलो की दर पर हर महीने 5 किलो खाद्यान्न का कानूनी अधिकार मिल जाएगा। इसके अलावा जानिए, अगले साल होने वाले चुनाव क्या असर डालेंगे अर्थव्यवस्था पर- अगले साल होंगे चुनाव और पड़ेगा खजाने पर बोझ 
 
2014 में होने वाले लोकसभा चुनावों से भी सरकारी खजाने पर कमरतोड़ बोझ पड़ेगा। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक अगले साल मार्च से पहले ही चुनावों की घोषणा हगो सकती है। ऐसे में अर्थव्यवस्था के तब तक वांछित लक्ष्य पाने की उम्मीद कम है। अर्थव्यवस्था तब तक बढ़ते राजकोषीय घाटे की भरपाई भी कर लेगी तो आने वाले समय में इन चुनावों से सरकारी खजाने पर बड़ा बोझ पड़ेगा। चुनावों के पास आने से पहले सरकार ने लोकलुभावनी नीतियों के तहत ही खाद्य सुरक्षा विधेयक लागू किया है। इसके अलावा आने वाले महीनों में सरकार की ओर से कुछ और ऐसी घोषणाएं हो सकती हैं जो चुनावों के मद्देनजर की जाएं। लेकिन इसका बुरा असर अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा और राजकोषीय घाटा आने वाले समय में और बढ़ता दिखाई दे सकता है। 
 
अगले साल फरवरी में अंतरिम बजट पेश किया जाना है। नियमों के तहत आम चुनाव से पहले सरकार महज लेखानुदान बजट पेश कर सकती है। निवेशकों को यह इंतजार थोड़ा लंबा लग सकता है और मुमकिन है कि वे निवेश के लिए कहीं और बेहतर बाजार तलाशने में जुट जाएं। खतरा सिर्फ निवेशकों का ही नहीं बल्कि और भी बड़ा है। जैसे-जैसे अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें पढ़ेंगी वैसे ही सरकार का घाटा बढ़ेगा, जानिए कैसे-



 तेल महंगा होने से बढ़ेगा सरकारी घाटा
 
रुपए की कीमत अंतर्राष्ट्रीय बाजार में गिरने से कच्चा तेल बढ़ी हुई कीमतों में मिल रहा है। कमजोर रुपये की सबसे ज्यादा मार पेट्रेालियम पदार्थों पर ही पड़ रही है। देश में पेट्रोलियम पदार्थो की जितनी खपत है, उसका 80 फीसदी भारत को आयात करना पड़ता है। पेट्रोलियम मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक डालर के मुकाबले रुपए के कमजोर होने से इस क्षेत्र की कंपनियों पर एक साल में 8200 करोड़ रुपए का अधिभार बढ़ जाता है। इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) के निदेशक (वित्त) पी.के. गोयल ने बताया कि कमजोर रुपए से इस वर्ष अप्रैल से जून तक 840 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। अब नुकसान और होगा क्योंकि रुपया 64 के पार जा चुका है। लेकिन महंगी कीमतों में मिले कच्चे माल के बावजूद पेट्रोल को छोड़ कर अन्य पेट्रोलियम उत्पादों को तेल कंपनियां सरकार द्वारा तय कीमतों पर ही बेच सकती हैं। हालांकि इस प्रक्रिया में घाटे की भरपाई सरकार करती है लेकिन सब्सिडी कब मिलेगी, इसका कोई पता नहीं होता। 
 
वैसे भी चुनाव पास आने की वजह से सरकार की ओर से तेल कंपनियों पर दाम न बढ़ाने या न्यूनतम बढ़ाने का दबाव होगा। ऐसे में खरीद और बिक्री रेट में होने वाले अंतर को भी सरकार को ही भरना होगा। इससे आने वाले समय में सरकार की जेब पर और बोझ पड़ सकता है और यह अर्थव्यवस्था के लिए नुकसानदायक होगा। आगे पढ़ें, वैश्विक अर्थव्यवस्था में संकट से आई तरलता में कमी

वैश्विक अर्थव्यवस्था में संकट से तरलता में कमी
 
वैश्विक अर्थव्यवस्था की पतली हालत के कारण देश में विदेशी पूंजी का प्रवाह भी मंद है। इससे अर्थव्यवस्था में तरलता का संकट भी बन रहा है। इसे दूर करने के लिए निवेश का माहौल बनाने की जरूरत है। इसके साथ ही घटता निवेश भी अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम है। आरबीआई गर्वनर डी सुब्बाराव ने कहा है कि विकास दर को पटरी पर लाना निवेश के बिना संभव नहीं है। लेकिन देश में निवेश का माहौल बिगड़ रहा है। बीते समय में कारोबारी भरोसा डगमगाया है। व्यापार में सुस्ती से निवेश की धारणा भी कमजोर बनी हुई है। ऋणदाता और कर्ज लेने वाले दोनों ही जोखिम उठाने की स्थिति में नहीं हैं। आरबीआई ने सरकार से निवेश के अनुकूल बनाने का अनुरोध किया है। रिजर्व बैंक ने उच्च मुद्रास्फीति को भी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम वाला तत्व बताया है और कहा कि आपूर्ति बढ़ाकर इस पर काबू पाने का प्रयास करना चाहिए। आरबीआई ने मौद्रिक उपायों के माध्यम से मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने की कोशिश की है, लेकिन खाद्य वस्तुओं की कीमतों का दबाव दिख रहा है। न्यूनतम समर्थन मूल्यों में बढ़ोतरी, वेतन में लगातार वृद्धि से मुद्रा स्फीति के और बढ़ने का खतरा है। आगे जानें, भारत के सामने हैं 1991 के दौर से से ज्यादा खतरनाक हालात
भारत की डूबती अर्थव्यवस्था के सामने हैं दस बड़े खतरे

1991 के दौर से से ज्यादा खतरनाक हैं हालात
 
1991 का समय भारतीय अर्थव्यवस्था में आमूल-चूल बदलाव के तौर पर याद किया जाता है। देश के सामने मुंह बाए खड़े संकट से निपटने के लिए सरकार ने तब निवेश, विदेश पूंजी, औद्योगीकरण के लिए अर्थव्यवस्था के दरवाजे खोल दिए थे। लेकिन इस समय संकट पहले से काफी बड़ा है। आईएमएफ ने भी चेतावनी दी है कि भारत और चीन में 2008 के बाद ग्रोथ में आने वाली गिरावट भविष्य के खतरे का संकेत है। आईएमएफ ने ग्रोथ में आई इस गिरावट को तकनीकी विकास के धीमे होने से जोड़ा है। इसके मुताबिक भारत लगभग उसी जाल में फस रहा है (मध्यम आय जाल), जिसमें पहले लैटिन अमेरिकी देश और बाद में दक्षिण-पूर्व एशियाई देश फंसे थे। 1997-98 में दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों पर आया आर्थिक संकट मुख्त तौर पर विदेशी भुगतान संकट था। जिसके चलते इन देशों को अपनी मुद्रा का अवमूल्यन करना पड़ा था। जायदाद की कीमतें घटने के कारण बैंकों इत्यादि पर संकट तो आया ही, रोजगार के अवसर भारी मात्रा में कम हुए। इसका असर भारत पर पड़ सकता था, लेकिन भारत इससे लगभग अछूता रहा और उसके बाद इसकी ग्रोथ रेट भी पहले से ज्यादा बढ़ गई। 1998 के बाद 2011-12 तक भारत में औसत ग्रोथ रेट 7 प्रतिशत को भी पार कर गई थी। 
 
तब भारत इसलिए बच पाया, क्योंकि रुपया पूंजी खाते पर परिवर्तनीय नहीं था। हालांकि, तत्कालीन सरकार रुपए को पूर्णतया परिवर्तनीय बनाने की कोशिश में थी। लेकिन इस आर्थिक संकट के चलते और विभिन्न एजेंसियों की चेतावनी के कारण सरकार को इसे टालना पड़ा था। वहीं दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों से विदेशी मुद्रा का इसलिए भारी रूप से वापस लौटी क्योंकि उनकी करेंसियां पूर्णतया परिवर्तनशील थीं। भारत में रुपया पूर्णतया परिवर्तनशील नहीं था और अभी भी काफी हद तक नियंत्रण में है। भारत के बचने का दूसरा कारण विदेशी विनिमय दर पर रिर्जव बैंक का काफी नियंत्रण था। तीसरे, हमारी अर्थव्यवस्था निर्यात आधारित नहीं थी और देश में घरेलू मांग में वृद्घि के फलस्वरूप हमारे उद्योगों की ग्रोथ तेज थी। एक कारण विदेशी ऋण-जीडीपी अनुमात बहुत कम होना भी था। उस समय भारत पर विदेशी ऋण 100 अरब डालर के आसपास ही था। 2008 में अमेरिकी संकट से भी भारत काफी हद तक बचा रहा, जिसका मूल कारण यह था कि देश शेष दुनिया पर बहुत ज्यादा निर्भर नहीं था। आज देश में विदेशी मुद्रा भंडार, जो कभी तीन साल के आयातों के लिए काफी थे, अब घटकर मात्र 6 महीनों के आयात के लिए ही है। इसलिए संकट पहले से ज्यादा है। आगे पढ़ें, प्रशिक्षित कामगारों की कमी पड़ रही भारी 
 प्रशिक्षित कामगारों की कमी 
 
भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए प्रशिक्षित कामगारों की कमी सबसे बड़ा खतरा बनकर उभर रही है। योजना आयोग के एक अनुमान के अनुसार हर साल कामगारों की श्रेणी में शामिल होने वाले 1.28 करोड़ लोगों में से केवल 20 फीसदी को ही औपचारिक प्रशिक्षण प्राप्त होता है। योजना आयोग का कहना है कि जिस अर्थव्यवस्था में विकास की दर नौ प्रतिशत से भी ऊपर रही हो वहां मजदूरों को प्रशिक्षत करना सबसे बड़ी चुनौती है। योजना आयोग के मुताबिक प्रशिक्षित कामगारों की ताकत भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए संभावनाओं के नए दरवाजे खोल सकती है तो इसकी कमी भारी पड़ सकती है। योजना आयोग का अनुमान है कि पूरी दुनिया में 2020 तक चार करोड़ 60 लाख प्रशिक्षित कामगारों की जरूरत होगी। कोशिश करे तो भारत के पास भी 4.7 करोड़ प्रशिक्षित कामगार तैयार हो सकते हैं। 
 
भारतीय उद्योग संघ (सीआईआई) के कौशल विकास निदेशक हरमीत सेठी के मुताबिक भारत के पास 2022 तक 50 करोड़ प्रशिक्षित टेक्निशियन तैयार हो सकते हैं। यह लक्ष्य बड़ा तो है पर असंभव नहीं है। इसके लिए असंगठित क्षेत्र के मजदूरों की कौशल क्षमता बढ़ाने के लिए दीर्घकालिक प्रयत्न करने होंगे। प्रशिक्षत कामगारों से अर्थव्यवस्था को ऐसे फायदा होता है कि इससे न केवल उत्पादन क्षमता बढ़ती है बल्कि उनकी आमदनी भी बढ़ती है। प्रशिक्षित कामगार विदेशों में भी जा सकते हैं, जिससे भारत को विदेशी मुद्रा प्राप्त होगी। प्रशिक्षत कामगार चाहे तो खुद का कारोबार स्थापित कर सकता है। इन सबसे बाजार में पूंजी की तरलता बनी रहती है। इसके अलावा आरतीय अर्थव्यवस्था 2008 की मंदी के बाद से युवाओं की बढञती फौज के लिए रोजगार पैदा करने में नाकाम रही है। यह भी निराशा का माहौल बना रहा है। आगे पढ़ें, काले धन से हो रहा अर्थव्यवस्था को नुकसान

काले धन से अर्थव्यवस्था को नुकसान
 
काले धन से भारतीय अर्थव्यवस्था को जो नुकसान पहुंचा है उसका सही अनुमान लगाना तो मुश्किल है क्योंकि काले धन की सही-सही मात्रा का पता नहीं लगाया जा सकता है। काले धन के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था को पिछले एक दशक में करीब 123 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है। अकेले वर्ष 2010 में 1.6 अरब डॉलर की अवैध राशि देश से बाहर गई है। यह खुलासा वाशिंगटन स्थित शोध संगठन ‘ग्लोबल फाइनेंशियल इंटेग्रिटी’ (जीएफआई) की रिपोर्ट से हुआ है। रिपोर्ट में भारत को आठवां सबसे बड़ा ऐसा देश बताया गया है, जहां से सबसे अधिक अवैध पूंजी बाहर गई है। इस मामले में भारत का स्थान चीन, मेक्सिको, मलेशिया, सऊदी अरब, रूस, फिलीपीन्स तथा नाइजीरिया के बाद आता है।
 
हाल ही में कोबरा पोस्ट ने खुलासा किया था कि कुछ बड़े निजी बैंक काला धन नकद लेते हैं और उसे बीमा और सोने में निवेश करते हैं। ये बैंक काले धन को अपनी निवेश योजनाओं में डालते हैं। इसके लिए वे रिजर्व बैंक की शर्तो का उल्लंघन करते हुए बिना पैन कार्ड के ही खाता खोला जाता है। इस हवाला कारोबार में बैंक काला धन देने वाले ग्राहकों की पहचान गुप्त रखते हैं और जरूरत के हिसाब उनके अकाउंट खोले और बंद किए जाते हैं। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि बैंक ग्राहकों को अवैध नगदी रखने के लिए लॉकर देता है, जिसमें करोड़ों रुपये कैश रखे जाते हैं। इसके साथ ही बताया गया है कि काले धन को विदेश भेजने में भी बैंक मदद करता है। बैंकों के मैनेजमेंट जानबूझ कर सुनियोजित तरीके से इनकम टैक्स ऐक्ट, फेमा, रिजर्व बैक के मानदंडों, केवाईसी के नियमों, बैंकिंग ऐक्ट, प्रिवेंशन ऑफ मनी लाउन्ड्रिंग ऐक्ट (पीएमएलए) की धज्जियां उड़ा रहे हैं। लेकिन केंद्र सरकार कावेधन को लेकर गंभीर नजर नहीं आ रही है। आगे पढ़ें, बेकार की चीजों में बढ़ा निवेश 
बेकार की चीजों में बढ़ा निवेश 
 
भारतीयों का सोने से प्रेम जगजाहिर है। हर साल दुनिया में तराशे जाने वाले सोने का बड़ा हिस्सा भारत में आकर जमा हो जाता है। लेकिन इसका एक बड़ा नुकसान यह होता है कि बड़ी पूंजी बेकार पड़ी रहती है और बाजार की कोई मदद नहीं करती है। हाल ही में एक प्रेस कांफ्रेंस में अर्थशास्त्री पीएम मनमोहन सिंह ने भारत के फिर से 1991 जैसे संकट में घिरने के सवाल को तो नकार दिया लेकिन उन्होंने कहा कि भारतीयों का निवेश ऐसी चीजों में बढ़ रहा है जो तरलता बढ़ाने में मददगार नहीं हो रही हैं। 1991 के संकट के समय भारत को सोना गिरवी रखना पड़ा था और पहली बार व्यापक स्तर पर आर्थिक सुधार लागू करने पड़े थे। मनमोहन सिंह ने माना है कि आयात घाटे की बड़ी वजह सोने का ज्यादा आयात है। उन्होंने कहा, “लगता है कि हम काफी निवेश व्यर्थ की संपत्तियों में कर रहे हैं।” आगे पढ़ें, निवेशकों को नहीं मिल पा रही प्रेरणा

 
गहरे संकट में फंसे रुपए को मजबूती दो तरह से मिल सकती है। एक तो भारतीय निर्यात को बढ़ाया जाए और विदेशी निवेशक भी देश की प्रगति के हिस्सेदार बनें। लेकिन मौजूदा समय में दोनों ही मोर्चों पर कुछ खास नहीं हो रहा है। रुपए की कमजोरी को थामने के लिए रिजर्व बैंक के उपायों से देश का उद्योग जगत भी खासा नाराज है। उद्योग प्रमुखों का कहना है कि रिजर्व बैंक ने विदेश में निवेश के लिए जो पूंजी सीमाएं लगाई हैं, उससे देश 80 के दशक की तरफ लौट सकता है। तब भारतीय कंपनियों का विदेशों में निवेश शून्य था। आर्थिक जानकारों का कहना है कि हाल में देखा जाए तो सरकार ने घरेलू अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में खास प्रयास नहीं किए हैं। जब तक घरेलू अर्थव्यवस्था को फिर से मजबूती नहीं मिलेगी वर्तमान माहौल से निजात पाना मुश्किल है। देश में विदेशी निवेश को फिर से आकर्षित करना है तो पहले घरेलू अर्थव्यवस्था को मजबूत करना होगा, जो फिलहाल पिछले एक दशक के निचले स्तर पर है। विदेशी निवेश का प्रवाह बढ़ाने में तभी सफलता मिलेगी जब घरेलू अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। विदेशी निवेश का जुड़ाव मूल तौर पर अर्थव्यवस्था की मजबूती से है। इसलिए जरुरी है कि सरकार जब तक अर्थव्यवस्था को कुछ साल पहले की स्थिति में लाने की दिशा में कदम उठाए।  sabhae : bhaskar.com
 



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पार्टनर पर रख सकते हैं ऐसे नजर, शक्की लोगों के लिए मजेदार खबर

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पार्टनर पर रख सकते हैं ऐसे नजर, शक्की लोगों के लिए मजेदार खबर

अमेरिका और चीन जैसे देशों की जासूसी करना एक हद तक आसान है। किसी भी देश की खुफिया एजेंसी इस काम के लिए काफी तत्पर रहती है। लेकिन अगर बात अपने ब्वॉयफ्रेंड की जासूसी की हो तो मामला उलटा पड़ जाता है। आसानी से झूठ बोलने वाले लोगों को पकड़ पाना मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन हो जाता है। 
जरा सोचिए, अगर आपका ब्वॉयफ्रेंड कहे कि वो जिम में है और असलियत कुछ और ही हो तो कितना बुरा लगेगा। अब ऐसे ही झूठे लोगों का पता लगाने के लिए एक सीक्रेट ऐप आ गया है। इस ऐप का नाम है 'ब्वॉयफ्रेंड ट्रैकर'। यह ऐप गूगल प्ले पर उपलब्ध है।
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इस नए ऐप की मदद से आप अपने ब्वॉयफ्रेंड या गर्लफ्रेंड का पता आसानी से लगा सकते हैं। अगर अपने साथी पर शक है तो इस ऐप को डाउनलोड करना शायद आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।
यह ऐप स्मार्टफोन के GPS ट्रैकिंग सिस्टम का इस्तेमाल करता है। इस ऐप को डाउनलोड करने के बाद जिस भी इंसान का पता लगाना हो, उसका फोन नंबर इसमें एंटर करना होता है।गूगल प्ले पर यह ऐप कुछ समय के लिए फ्री में उपलब्ध है। इसके बाद इसे फिर से अपग्रेड करना होगा। यह ऐप एंड्रॉइड 2.1 और उसके बाद के ऑपरेटिंग सिस्टम पर काम करता है।इस ऐप में सिर्फ ट्रैकिंग की ही नहीं, बल्कि कई और तरह के गेम्स भी मिलते हैं। इस ऐप में लव क्विज भी है, जिसके जरिए आपसे कई तरह के सवाल पूछे जाएंगे और इसके बाद रिजल्ट बताया जाएगा।

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इसके अलावा, नेम एनेलाइजर और चीट मीटर जैसे कुछ सर्विसेस और हैं, जो इसे एक धांसू ऐप बनाती हैं। इस ऐप का साइज 214 किलोबाइट है। इसे अब तक 50000 लोग डाउनलोड कर चुके हैं। ब्राजील में इस ऐप की वजह से काफी बवाल भी मचा है। ब्राजील के कई लोगों का कहना है कि इस ऐप की वजह से उनकी प्राइवेसी को काफी नुकसान पहुंचा है। इतना ही नहीं, ट्रेंड में आते ही हजारों ब्राजीली लोगों ने इसे डाउनलोड भी कर लिया था।  sabhar : bhaskar.com





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डेल इंडिया में जाएगी1000 लोगों की नौकरी

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अनुमेहा चतुर्वेदी
नई दिल्ली।। अमेरिकी एमएनसी डेल के करीब 1000 कर्मचारियों की जॉब जा सकती है। सूत्रों का कहना है कि कंपनी अगले 6 महीनों में अपने इंटरनैशनल सर्विसेज बिजनस में राइटसाइजिंग कर सकती है। सूत्रों का कहना है कि कंपनी के मोहाली स्थित अपने इंटरनैशनल सर्विसेज ऑपरेशंस को बंद किया जा सकता है। यहां करीब 1300 लोग काम करते हैं। हालांकि कंपनी ने इन खबरों को कयास बताते हुए इन पर किसी टिप्पणी से इनकार कर दिया है।

सूत्रों का यह भी कहना है कि डेल के कुछ सीनियर स्टाफ की भी छुट्टी हो सकती है। कहा जा रहा है कि डेल में कार्यकारी डायरेक्टर आदिल कात्रक और डेल इंटरनैशनल सर्विसेज में डायरेक्टर (ट्रेनिंग) विख्यात सिंह को जाने के लिए कह दिया गया है।

मोहाली में कंपनी का इंटरनैशनल सर्विसेज ऑफिस 2005 में शुरू किया गया था। यह अमेरिका में कंज्यूजर टेक सपोर्ट और कस्टमर केयर की सर्विसेज देता है। फिलहाल डेल के भारत में करीब 10 हजार कर्मचारी हैं और मोहाली के अलावा गुड़गांव, हैदराबाद और बेंगलुरू में उसके दफ्तर हैं। सूत्रों के मुताबिक, यह डेल में ग्लोबल राइटसाइजिंग प्रक्रिया का हिस्सा है। डेल में फिलहाल इसके फाउंडर व सीईओ माइकल डेल और इंवेस्टर कार्ल इकान के बीच टेकओवर की लड़ाई चल रही है। इस वजह कंपनी अच्छी हालत में नहीं है और उसकी सेल्स में भारी कमी आई है। sabhar : http://navbharattimes.indiatimes.com

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