गुरुवार, 22 अगस्त 2013
नोकियाः लूमिया 925, लूमिया 625 लॉन्च
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नई दिल्ली। नोकिया स्मॉर्टफोन मार्केट में अपनी पकड़ मजबूत करने की लगातार कोशिश कर रही है। इसी मद्देनजर उसने लूमिया 925 और 625 हैंडसेट लॉन्च किए। लूमिया 925 की कीमत 33,500 रुपये रखी गई है, जबकि लूमिया 625 20,000 रुपये में मिलेगा।
लूमिया 925 और लूमिया 625 में लोगों को 1.5 लाख से भी ज्यादा ऐप्स मिलेंगे। कैमरे के हिसाब से लूमिया 925 शानदार फोन है। इससे आप एक साथ 10 फोटोग्राफ्स खींच सकते हैं और ये मोबाइल फोन खुद ब खुद एक्शन शॉट और मोशन फोकस की मदद से फोटोग्राफ्स को एडिट भी कर सकता है।
अपनी लूमिया रेंज को ज्यादा पॉपुलर बनाने के लिए नोकिया लूमिया 625 और 925 के साथ 16,000 रुपये का ऑउट ऑफ द बॉक्स एंटरटेनमेंट पैकेज बिल्कुल फ्री दे रहा है। नोकिया लूमिया 625 पर आपको ईएमआई का भी ऑप्शन मिल जाएगा।
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बुधवार, 21 अगस्त 2013
शोधकर्ताओं ने ऐसा माइंड रीडिंग कम्प्यूटर बनाया है जो कोमा में जा चुके शख्स के दिमाग को पढ़ ता है
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अगस्त 21, 2013 in

कनाडा के कुछ उससे संवाद कर सकशोधकर्ताओं ने ऐसा माइंड रीडिंग कम्प्यूटर बनाया है जो कोमा में जा चुके शख्स के दिमाग को पढ़ ता है। कोमा में जाने के बाद इंसान का मस्तिष्क तो जीवित रहता है लेकिन शरीर के सभी अंग काम करना बंद कर देते हैं। जिस कारण इंसान न तो बोल पाता है और न कोई प्रतिक्रिया दे पाता है। लेकिन इस नए कम्प्यूटर की मदद से कोमा में पड़े इंसान से सीधा संवाद कर कई समस्याओं को सुलझाया जा सकता है।
यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टर्न ओंटारिया के शोधकर्ता न्यूरोइमेजिंग की मदद से इंसानी दिमाग को पढ़ने का दावा कर रहे हैं। मस्तिक में जो भी चल रहा है, उसे हां या नहीं के उत्तर के रूप में कम्प्यूटर की स्क्रीन पर देखा जा सकता है।
शोधकर्ताओं का दावा है कि उनकी यह नई खोज कोमा में जाने के कारण पूरी तरह निष्क्रिय हो चुके लोगों से संवाद करने के लिए एक क्रांतिकारी खोज हो सकती है। इनकी इस खोज के बारे में द जर्नल ऑफ न्यूरोसाइंस में पब्लिश किया गया है।
प्रमुख शोधकर्ता लोरिना नेसी कहती हैं कि उनकी इस नई खोज से किसी भी इंसान के दिमाग में चल रहे किसी भी भाव को बिना एक्शन और बोले हुए कम्प्यूटर के माध्यम से लाया जा सकता है। मॉडर्न न्यूरोसाइंस के लिए यह किसी वरदान से कम नहीं है। अब तक कोमा में जा चुके इंसान से संवाद करने का कोई भी साधन डॉक्टरों के पास मौजूद नहीं है।
जो मरीज पूरी तरह कान्शस हैं लेकिन ब्रेन में नुकसान पहुंचने के कारण कोई भी प्रतिक्रिया नहीं दे पा रहे हैं, उनके लिए यह अविष्कार नई जिंदगी देने वाला है। लेकिन इस अविष्कार से केवल उन्हीं सवालों के जवाब मिलेंगे, जिनके जवाब हां या फिर नहीं में आ सकते हैं। मसलन 'क्या तुम शादीशुदा हो?' या फिर 'क्या तुम्हारे कोई भाई और बहन हैं?' ऐसे सवालों का जवाब कोमा में पड़ा व्यक्ति सिर्फ सोच सकता है, बोल नहीं सकता है। स्कैनर की मदद से व्यक्ति ऐसे सवालों का सही जवाब दे सकता है। इस तकनीक में जब इंसान से कोई प्रश्न पूछा जाता है तो उसका ध्यान सही जवाब पर होता है। कम्प्यूटर स्कैनर की मदद से इस जवाब को स्क्रीन पर शो करेगा। sabhae : bhaskar.com
भारत के चार शहरों की जलसमाधि बनाने का खतरा!
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अगस्त 21, 2013 in

नई दिल्ली. दुनिया भर में तेजी से बदल रहे मौसम से होने वाले खतरे के बारे में अब तक बहुत कुछ कहा जा चुका है। मौसम में इस बदलाव से होने वाले संभावित खतरों पर भी दुनिया भर में चर्चा हो रही है लेकिन असल खतरा दुनिया भर में समुद्र के किनारे बसे शहरों और वहां रह रहे लोगों पर मंडरा रहा है। दुनिया के 20 ऐसे शहर हैं जिनका आने वाले सालों में नामो निशां तक मिट सकता है और उन शहरों की जल समाधि बन सकती है। वर्ल्ड बैंक के नए अध्ययन में कहा गया है कि अगर दुनिया भर की सरकारें इन विनाश की आहट समय रहते नहीं सुनेंगी और बाढ़ से बचने के तरीकों पर गौर नहीं करेंगी तो दुनिया के इन शहरों को बर्बाद होने से नहीं बचाया जा सकता है। 2050 तक इन शहरों में बाढ़ से होने वाला नुकसान 63 लाख करोड़ रुपए होगा। पहले नंबर पर चीन का शहर ग्वांगझू है।
दूसरे नंबर पर भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई है। समुद्र के किनारे बसे होने की वजह से इस पर ज्यादा खतरा है। पिछले कुछ सालों से बाढ़ से मुंबई को काफी नुकसान हुआ है।
मुंबई के बाद भारत का जो दूसरा शहर रिस्क पर है वह कोलकाता है। कोलकाता की बाढ़ का एक दृश्य।
इक्वाडोर का ग्वायाक्विल शहर भी खतरे के निशान पर तैर रहा है।
चीन का शहर शेनझेन खतरे की सूची में पांचवें नंबर पर है।
भारत का शहर चेन्नई भी आने वाले सालों में डूबने के कगार पर है।
नरेंद्र मोदी के गुजरात का शहर सूरत भी ग्लोबल वार्मिंग के खतरे पर है।
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यहां बेटी को मिलती है पिता से खुली छूट, एकांत के लिए देते हैं स्पेशल हट
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अगस्त 21, 2013 in एकांत के लिए देते हैं स्पेशल हट, यहां बेटी को मिलती है पिता से खुली छूट

दुनिया में आज भी अधिकांश देशों में बेटियों को सेक्शुअल फ्रीडम नहीं है, लेकिन कुछ ऐसे देश है जहां परंपरा से ही पिता अपनी बेटी को सेक्स संबंध बनाने के लिए खुली छूट देता है।इतना ही नहीं वह बेटी के लिए अपने फ्रेंड के साथ एकांत में खास पल बिताने के लिए शानदार हट भी उपलब्ध करवाता है।
यह सुनकर हम हैरान हो सकते हैं, लेकिन यह एक देश के समाज विशेष की परंपरा है। दुनिया के कुछ देशों में इससे मिलती-जुलती समाज में प्रचलित सेक्स लाइफ की विचित्र परंपराएं प्रचलित हैं।
गुआम में कुछ लोगों का फुलटाइम प्रोफेशन कौमार्य भंग करना है। इतना ही नहीं इस काम के लिए युवतियां इन लोगों को पैसा भी चुकाती हैं। गुआन के कानून के अनुसार यहां कुंवारी लड़की को शादी करने की मनाही है। पहले उसे अपना कौमार्य भंग करवाना जरूरी है।
कीनिया के लोउ समाज में यह मान्यता प्रचलित है कि परिवार के व्यक्ति मौत होने पर उसकी विधवा को दूसरे पुरुष के साथ हमबिस्तर होना होता है। यह पति की मौत के बाद शुद्धिकरण की प्रक्रिया है। इससे आगे की पीढ़ी बढ़ाई जाती है।
न्योतैमोरी : यह जापान में प्रचलित है, जिसमें महिला या पुरुष के शरीर (बॉडी सुशी) पर व्यंजन (सुशी) रखकर खाए जाते हैं। इसमें महिला या पुरुष के शरीर का अधिकांश हिस्सा नग्न होता है। इसके लिए महिला या पुरुष को तैयार होने के लिए पहले स्थिर रहने का कड़ा अभ्यास करना होता है। जापान की इस परंपरा ने दुनिया के मीडिया का ध्यान अपनी ओर खूब खींचा है।
पापुआ न्यूगिनी में ट्रोब्रिआनडर्स जनजाति है। यहां छह से आठ साल की लड़कियों को सेक्स शुरू करना पड़ता है और लड़कों को 10 से 12 साल की उम्र में। हालांकि साथ में खाना खाने पीने के बावजूद भी उन्हें शादी करने की मनाही रहती है।
फैंग एक अफ्रीकी समाज है, जिनकी तरह-तरह की मान्यताएं प्रचलित हैं। उनकी एक मान्यता यह भी है कि वे दिन में सेक्स नहीं करते हैं और वे इसे अशुभ मानते हैं।
नार्थ कोलंबिया में यह एक कॉमन प्रैक्टिस है कि यहां के किशोर गधी के साथ सेक्स करते हैं। इसे परंपरा और विधान के अनुसार सही माना है। माना जाता है कि एक लड़के का पुरुष बनने के सफर को तय करने के लिए ऐसा करना बेहतर है।
कंबोडिया में केरुंग समुदाय के लोग अपनी बेटियों को भरपूर सेक्शुअल स्वतंत्रता देते हैं। वे अपनी बेटियों को एकांत के पल बिताने के लिए अलग से झोपड़ी तैयार करके देते हैं, ताकि वे इसमें सो सकें और लड़कों से मिल सकें।
6- आयरलैंड में एक समाज जिसे इसि बेआग नाम से जाना जाता है। वे अपने बच्चों का पालन पोषण इस तरह करते हैं कि उसे सेक्स का बिल्कुल भी ज्ञान नहीं हो। यहां तक कि जब शादी हो जाती है तो सेक्स के दौरान पूरी तरह से कपड़े उतारे नहीं जाते हैं। इस समाज में शारीरिक संबंध बनाने के दौरान भी पूरे कपड़े उतारना वर्जित है।
ब्लैक सी के किनारे विवादित क्षेत्र अबखाजियान में अबखाजियान रहते हैं। इनका संबंध काकेसियन एथनिक ग्रुप से है। यहां के युवा जवानी तक ब्रम्हचर्य का पालन करते हैं। शादी होने के बाद देर रात में ही सेक्स करते हैं। यही राज उनकी लंबी उम्र का भी है।
sabhar : bhaskar.com
बॉबी जिंदल अमेरिकी राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार!
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अगस्त 21, 2013 in बॉबी जिंदल अमेरिकी राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार!

वाशिंगटन। अमेरिका के लुइसियाना प्रांत के भारतीय मूल के गवर्नर बॉबी जिंदल रिपब्लिकन पार्टी के 2016 के लिए राष्ट्रपति पद के संभावित उम्मीदवार हो सकते हैं। उनके गृह राज्य में रिपब्लिकन पार्टी के आंतरिक चुनाव में 50 प्रतिशत सदस्यों ने उनकी उम्मीदवारी का समर्थन किया है।
जिंदल 2011 में गवर्नर के पद पर दोबारा चार वर्ष के लिए निर्वाचित हुए थे। अब वह गवर्नर के पद पर दोबारा निर्वाचित नहीं हो सकते।
राजनीतिक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने वाली वाशिंगटनस्थित समाचार वेबसाइट पालिटिको के अनुसार, पिछले सप्ताह करवाए गए रिपब्लिकन सर्वेक्षण में राज्य में ओबामा को 37 प्रतिशत स्वीकार्यता मिली थी।
सर्वेक्षण में पाया गया कि गरीब लोगों के लिए अमेरिकी सरकार के स्वास्थ्य कार्यक्रम का विरोध करने के जिंदल के फैसले का 55 प्रतिशत लोगों ने समर्थन किया, जबकि 37 प्रतिशत उनके इस फैसले के खिलाफ थे।
लुइसियाना के 62 फीसदी लोगों ने ओबामाकेयर का विरोध किया। 53 फीसदी ने इसका कड़ा विरोध किया और सिर्फ 33 फीसदी ने इस कानून का समर्थन किया। 80 फीसदी रिपब्लिकन चिकित्सीय मदद पर जिंदल की राय का समर्थन करते हैं।
जिंदल की मुख्य परामर्श कंपनी ऑनमैसेजइंक पर 12 अगस्त से 15 अगस्त तक 800 वोटरों के बीच यह सर्वे किया गया। इस जनमत संग्रह का संचालन नेशनल रिपब्लिकन सीनेटोरियल कमेटी के लिए किया गया था। sabhar :www.webdunia.com
वाशिंगटन। अमेरिका के लुइसियाना प्रांत के भारतीय मूल के गवर्नर बॉबी जिंदल रिपब्लिकन पार्टी के 2016 के लिए राष्ट्रपति पद के संभावित उम्मीदवार हो सकते हैं। उनके गृह राज्य में रिपब्लिकन पार्टी के आंतरिक चुनाव में 50 प्रतिशत सदस्यों ने उनकी उम्मीदवारी का समर्थन किया है।
जिंदल 2011 में गवर्नर के पद पर दोबारा चार वर्ष के लिए निर्वाचित हुए थे। अब वह गवर्नर के पद पर दोबारा निर्वाचित नहीं हो सकते।
राजनीतिक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने वाली वाशिंगटनस्थित समाचार वेबसाइट पालिटिको के अनुसार, पिछले सप्ताह करवाए गए रिपब्लिकन सर्वेक्षण में राज्य में ओबामा को 37 प्रतिशत स्वीकार्यता मिली थी।
सर्वेक्षण में पाया गया कि गरीब लोगों के लिए अमेरिकी सरकार के स्वास्थ्य कार्यक्रम का विरोध करने के जिंदल के फैसले का 55 प्रतिशत लोगों ने समर्थन किया, जबकि 37 प्रतिशत उनके इस फैसले के खिलाफ थे।
लुइसियाना के 62 फीसदी लोगों ने ओबामाकेयर का विरोध किया। 53 फीसदी ने इसका कड़ा विरोध किया और सिर्फ 33 फीसदी ने इस कानून का समर्थन किया। 80 फीसदी रिपब्लिकन चिकित्सीय मदद पर जिंदल की राय का समर्थन करते हैं।
जिंदल की मुख्य परामर्श कंपनी ऑनमैसेजइंक पर 12 अगस्त से 15 अगस्त तक 800 वोटरों के बीच यह सर्वे किया गया। इस जनमत संग्रह का संचालन नेशनल रिपब्लिकन सीनेटोरियल कमेटी के लिए किया गया था। sabhar :www.webdunia.com
मर चुकी महिला को डॉक्टरों ने जिंदा किया!
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अगस्त 21, 2013 in
मेलबर्न। ऑस्ट्रेलिया के डॉक्टरों ने एक ऐसी महिला की जिंदगी बचा ली जो 42 मिनट पहले मृत घोषित हो चुकी थी। इस महिला को हार्ट अटैक के बाद गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया था जहां शीघ्र ही उसे मृत घोषित कर दिया गया। लेकिन ऐसी हाईटेक मशीनों के जरिए जो दिमाग में खून की सप्लाई जारी रखती हैं, मेलबर्न के डॉक्टर महिला की धमनियों में खून का रास्ता खोलने में कामयाब रहे और इससे महिला के दिल की धड़कनें भी लौट आईं।
अस्पताल ने महिला के बचने को हैरानी भरा बताया है। पीड़ित महिला वैनीसा तानासियो 41 साल की हैं और दो बच्चों की मां हैं। तानासियो को पहली बार ये अटैक आया था और उसी ने उन्हें लगभग मौत के मुंह में पहुंचा दिया लेकिन चमत्कारी मशीन और डॉक्टरों की मेहनत-सूझबूझ से उनकी जान बच गई।
तानासियो ने बताया कि वो बहुत अच्छा महसूस कर रही हैं। किसी ऐसे व्यक्ति के लिए जो इसी हफ्ते तकरीबन एक घंटे तक मृत रहा हो, वाकई इतनी जल्दी उबरना बहुत बड़ी बात है। उन्होंने कहा कि डॉक्टर और नर्स तारीफ के काबिल हैं। वो मशीन भी बेहद शानदार है। sabhar :http://khabar.ibnlive.in.com
मंगलवार, 20 अगस्त 2013
इस तस्वीर खींचने के बाद फोटोग्राफर ने किया था सुसाइड
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अगस्त 20, 2013 in इस तस्वीर खींचने के बाद फोटोग्राफर ने किया था सुसाइड

एक तस्वीर हजार शब्दों को बयां करती है, लेकिन कुछ तस्वीरें ऐसी भी होती हैं, जो देखने वाले को झकझोर कर रख देती हैं। आज वर्ल्ड फोटोग्राफी डे है।
फोटोग्राफरों द्वारा बीते समय में दुनिया के विभिन्न विषयों पर कुछ ऐसी तस्वीरें ली गई हैं, जिन्होंने वैश्विक स्तर पर भूख, त्रासदियों और ऐतिहासिक पलों को दुनिया के सामने व्यक्त किया है।
प्रस्तुत है कुछ ऐसी तस्वीरें, जिन्होंने दुनिया के हर शख़्स को चौंका दिया और कई गंभीर पहलुओं पर दुनियाभर के देशों का ध्यान आकर्षित किया।
तस्वीर में: इस तस्वीर को अवॉर्ड मिलने के बाद भी इसके फोटोग्राफर केविन कार्टर ने आत्महत्या कर ली। अफ्रीका में कुपोषण के शिकार बच्चे के मरने का इंतजार करता एक गिद्ध। इस तस्वीर ने पश्चिमी देशों के कान खड़े कर दिए थे। यह तस्वीर बहस का मुद्दा भी बन गई थी।
लॉरेंस बेटलर यह तस्वीर 7 अगस्त 1930 को इंडियाना के मैरियन में खींची थी। ब्लैक युवकों थॉमस शिप और अब्राम स्मिथ को सरेराह फांसी पर चढ़ा दिया था। दोनों पर अपनी स्थानीय श्वेत लड़की के बलात्कार का आरोप लगाया गया था, जो बाद में झूठ साबित हुआ। तकरीबन दस हजार लोगों की भीड़ ने इन दोनों को सरेआम फांसी पर चढ़ा दिया था। लड़की के अंकल ने किसी तरह तीसरे युवक की जान बचाई थी। इस तस्वीर की हजारों प्रतियां बेची गई थीं।
बौद्ध भिक्षु का आत्मदाह (1963)
इस तस्वीर ने उस दौरान पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया था। यह बौद्ध भिक्षु दक्षिणी वियतनाम में अमेरिकी युद्ध का विरोध कर रहा था। भिक्षु ने खुद को आग लगा ली, लेकिन तकलीफ के इन क्षणों में वह न चिल्लाया और न जरा भी हिला। उसकी चुपचाप मौत हो गई।
यह तस्वीर 1999 की है, जब डॉक्टर्स ने स्पाइना बिफिडा का सफल ऑपरेशन किया था। यह एक तरह का डिसऑर्डर होता है, जिसमें बच्चे का स्पाइनल कॉर्ड पूरी तरह से नहीं बना होता है या फिर वह किसी का काम का नहीं होता। बच्चे ने पैदा होते ही डॉक्टर्स की अंगुलियों को थाम लिया।
इराक युद्ध (2003)
एक इराकी कैदी अपने चार साल के बेटे को दुलारता हुआ। उसका बेटा पिता के ढके हुए चेहरे और हाथों में लगी हथकड़ियों को देख डर जाता है। कैदी सैनिकों से अपील करता है कि उसकी हथकड़ी खोल दी जाए ताकि वह बच्चे को प्यार कर सके। अंतत: सैनिक कैदी के आग्रह को मान लेते हैं।
भोपाल गैस कांड (1984)
भोपाल गैस कांड दुनिया के सबसे बड़े औद्योगिक आपदाओं में से एक है। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में हुई इस त्रासदी में 25 हजार से ज्यादा लोग प्रभावित हुए थे। यह तस्वीर उस वक्त की है, जब एक बच्चे को दफनाया जा रहा था। गैस के कारण बच्चे की आंखें भी बाहर निकल आई थीं।
अमेरिका के नॉर्थ कैरोलिना के हैरी हार्डिंग हाई स्कूल में डोरोथी काउंट सबसे पहली ब्लैक स्टूडेंट थी। स्कूल के पहले ही दिन उसके साथ अभद्र व्यवहार हुआ। मां-बाप ने उसकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पहले ही दिन से उसे स्कूल ने निकाल लिया। यह 1957 की घटना है। तस्वीर में देखा जा सकता है कि कैसे उसके साथी स्टूडेंट उसका मजाक उड़ा रहे हैं।
जंग के कई पहलू भी होते हैं। कई बार बेशुमार गलतियां हो जाती हैं, जिसका खामियाजा आने वाली कई पीढ़ियों को भुगतना पड़ता है। 1972 में दक्षिण वियतनाम में छिड़े युद्ध के दौरान वियतनामी प्लेन ने गलती से नेपाम बम अपने सैनिकों और नागरिकों पर ही गिरा दिया। इलाके में भगदड़ मची गई। नेपाम बम का इस्तेमाल वियतनाम-अमेरिकी युद्ध के दौरान किया जाता था।
कोलंबिया के आर्मिरो में 1985 में फूटे ज्वालामुखी 25 हजार लोगों की मौत हो गई थी। ज्वालामुखी से निकलने वाला मलबा और कीचड़ शहर के निचले इलाकों और आसपास के करीब दस भागों में भर गया था। ऑमयरा सांजेच सिर्फ 13 साल की थी, जब वह इसी तरह की कीचड़ में फंस गई थी। अपना घर बर्बाद होने के बाद वह तीन दिनों तक कीचड़-पानी में फंसी रही। उस दौरान फ्रेंक फॉर्नियर ने उसे कैमरे में कैद किया। इस तस्वीर ने 1985 में वर्ल्ड प्रेस फोटो ऑफ द ईयर का पुरस्कार जीता था। कुछ दिनों बाद ही ऑमयारा की मौत हो गई।
sabhar : bhaskar.com
कुछ यूं होता है धंधा, क्योंकि यहां वेश्यावृत्ति एक धर्म के सामान है
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अगस्त 20, 2013 in

अमेरिका के रूरल नेवादा में प्रॉस्टीट्यूशन लीगल है। उस इलाके में कई ब्रॉथेल हैं। इनमें वेश्याएं बेरोक-टोक जिस्म का व्यापार करती हैं।
फोटोग्राफर मार्क मैक एन्ड्रयूज ने इन ब्रॉथेल्स के बीच 5 साल बिताए और वेश्याओं के जीवन और लाइफ स्टाइल से जुड़ी अनेकों तस्वीरें खींची।
'नेवादा रोज' नाम से एक प्रोजक्ट करते हुए उन्होंने अपने 5 साल यहां बिताए और अपने रिसर्च में इन वेश्याओं की लाइफस्टाइल को करीब से जाना।
बैटल माउंटेन के एक वेश्यालय में कस्टमर्स के आने के पहले एक वेश्या तैयार होती हुई
कार्सन सिटी के लव रॉन्च में निकोल की फीस चुकाने के लिए कस्टमर एटीएम से पैसे निकाल रहा है। निकोल अपने कस्टमर से चिपकी है।
कार्सन सिटी के ही लव रॉन्च ब्रॉथेल के पार्लर में ग्रुप में बैठी वेश्याएं।
बनी रॉन्च की प्रॉस्टीट्यूट्स हॉल में बैठी चाय का आनंद ले रही हैं। sabhar : bhaskar.com
यहां आज भी भटकते हैं अश्वत्थामा, पागल हो जाता है देखने वाला!
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अगस्त 20, 2013 in

इंदौर। महाभारत के बारे में जानने वाले लोग अश्वत्थामा के बारे में निश्चित तौर पर जानते होंगे। महाभारत के कई प्रमुख चरित्रों में से एक अश्वत्थामा का वजूद आज भी है। अगर यह पढ़कर आप हैरान हो रहे हैं, तो हम आपको बता दें कि अपने पिता की मृत्यु का बदला लेने निकले अश्वत्थामा को उनकी एक चूक भारी पड़ी और भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें युगों-युगों तक भटकने का श्राप दे दिया।पिछले लगभग पांच हजार वर्षों से अश्वत्थामा भटक रहे हैं। हम यहां आपको महाभारत काल के अश्वत्थामा से जुड़ी वो खास बातें बताने जा रहे हैं, जिनके बारे में आपको शायद ही मालूम होगा।
अश्वत्थामा महाभारतकाल अर्थात द्वापरयुग में जन्मे थे। उनकी गिनती उस युग के श्रेष्ठ योद्धाओं में होती थी। वे गुरु द्रोणाचार्य के पुत्र व कुरु वंश के राजगुरु कृपाचार्य के भानजे थे। द्रोणाचार्य ने ही कौरवों और पांडवों को शस्त्र विद्या में पारंगत बनाया था।
महाभारत के युद्ध के समय गुरु द्रोण ने हस्तिनापुर राज्य के प्रति निष्ठा होने के कारण कौरवों का साथ देना उचित समझा।अश्वत्थामा भी अपने पिता की भांति शास्त्र व शस्त्र विद्या में निपुण थे। पिता-पुत्र की जोड़ी ने महाभारत के युद्ध के दौरान पांडवों की सेना को छिन्न-भिन्न कर दिया था।
पांडव सेना को हतोत्साहित देख श्रीकृष्ण ने द्रोणाचार्य का वध करने के लिए युधिष्ठिर से कूटनीति का सहारा लेने को कहा। इस योजना के तहत युद्धभूमि में यह बात फैला दी गई कि अश्वत्थामा मारा गया है।
जब द्रोणाचार्य ने धर्मराज युधिष्ठिर से अश्वत्थामा की मृत्यु की सत्यता जाननी चाही तो युधिष्ठिर ने जवाब दिया कि अश्वत्थामा हतो नरो वा कुंजरो वा (अश्वत्थामा मारा गया है, लेकिन मुझे पता नहीं कि वह नर था या हाथी)। यह सुन गुरु द्रोण पुत्र मोह में शस्त्र त्याग कर किंकर्तव्यविमूढ़ युद्धभूमि में बैठ गए और उसी अवसर का लाभ उठाकर पांचाल नरेश द्रुपद के पुत्र धृष्टद्युम्न ने उनका वध कर दिया।
पिता की मृत्यु ने अश्वत्थामा को विचलित कर दिया। महाभारत युद्ध के पश्चात जब अश्वत्थामा ने पिता की मृत्यु का प्रतिशोध लेने के लिए पांडव पुत्रों का वध कर दिया तथा पांडव वंश के समूल नाश के लिए उत्तरा के गर्भ में पल रहे अभिमन्यु पुत्र परीक्षित को मारने के लिए ब्रह्मास्त्र चलाया, तब भगवान श्री कृष्ण ने परीक्षित की रक्षा कर दंड स्वरुप अश्वत्थामा के माथे पर लगी मणि निकालकर उन्हें तेजहीन कर दिया और युगों-युगों तक भटकते रहने का शाप दिया था।
कहा जाता है कि असीरगढ़ के अलावा मध्यप्रदेश के ही जबलपुर शहर के गौरीघाट (नर्मदा नदी) के किनारे भी अश्वत्थामा भटकते रहते हैं। स्थानीय निवासियों के अनुसार कभी-कभी वे अपने मस्तक के घाव से बहते खून को रोकने के लिए हल्दी और तेल की मांग भी करते हैं।मान्यता के अनुसार असीरगढ़ के किले में स्थित शिव मंदिर में महाभारतकाल के अश्वत्थामा आज भी पूजा-अर्चना करने आते हैं। असीरगढ़ का किला बुरहानपुर शहर से 20 किलोमीटर दूर है।
कई लोगों ने इस बारे में अपनी आपबीती भी सुनाई।किसी ने बताया कि उनके दादा ने उन्हें कई बार वहां अश्वत्थामा को देखने का किस्सा सुनाया है। तो किसी ने कहा- जब वे मछली पकडऩे वहां के तालाब में गए थे, तो अंधेरे में उन्हें किसी ने तेजी से धक्का दिया था। शायद धक्का देने वाले को उनका वहां आना पसंद नहीं आया। गांव के कई बुजुर्गों की मानें तो जो एक बार अश्वत्थामा को देख लेता है, उसका मानसिक संतुलन बिगड़ जाता है।
किले में स्थित तालाब में स्नान करके अश्वत्थामा शिव मंदिर में पूजा-अर्चना करने जाते हैं। कुछ लोगों का कहना है कि वे उतावली नदी में स्नान करके पूजा के लिए यहां आते हैं। आश्चर्य कि बात यह है कि पहाड़ की चोटी पर बने किले में स्थित यह तालाब बुरहानपुर की तपती गरमी में भी कभी सूखता नहीं। तालाब के थोड़ा आगे गुप्तेश्वर महादेव का मंदिर है। मंदिर चारो तरफ से खाइयों से घिरा है। किंवदंती के अनुसार इन्हीं खाइयों में से किसी एक में गुप्त रास्ता बना हुआ है, जो खांडव वन (खंडवा जिला) से होता हुआ सीधे इस मंदिर में निकलता है।इसी रास्ते से होते हुए अश्वत्थामा मंदिर के अंदर आते हैं। भले ही इस मंदिर में कोई रोशनी और आधुनिक व्यवस्था न हो, यहां परिंदा भी पर न मारता हो, लेकिन पूजा लगातार जारी है। शिवलिंग पर प्रतिदिन ताजा फूल एवं गुलाल चढ़ा रहता है।
कब से शुरू हुआ यह सिलसिला
बुरहानपुर के इतिहासविद डॉ. मोहम्मद शफी (प्रोफेसर, सेवा सदन महाविद्यालय, बुरहानपुर) ने बताया कि बुरहानपुर का इतिहास महाभारतकाल से जुड़ा हुआ है। पहले यह जगह खांडव वन से जुड़ी हुई थी।
बुरहानपुर के इतिहासविद डॉ. मोहम्मद शफी (प्रोफेसर, सेवा सदन महाविद्यालय, बुरहानपुर) ने बताया कि बुरहानपुर का इतिहास महाभारतकाल से जुड़ा हुआ है। पहले यह जगह खांडव वन से जुड़ी हुई थी।
किले का नाम असीरगढ़ यहां के एक प्रमुख चरवाहे आसा अहीर के नाम पर रखा गया था। किले को यह स्वरूप 1380 ई. में फारूखी वंश के बादशाहों ने दिया था।जहां तक अश्वत्थामा की बात है, तो शफी साहब फरमाते हैं कि मैंने बचपन से ही इन किंवदंतियों को सुना है। मानो तो यह सच है न मानो तो झूठ।लेकिन इतना अवश्य है कि इस किले से कई सुरंगें जुड़ी हुई हैं। इन सुरंगों का दूसरा मुंह कहां है, यह कोई नहीं बता सकता। जब तक इन सुरंगों का राज नहीं खुलेगा, तब तक इस किंवदंती से भी परदा नहीं उठेगा।
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बुधवार, 7 अगस्त 2013
महिलाओं से संबंध के चलते सुर्खियों में आया साधू, फोन पर घंटों करता था बात
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अगस्त 07, 2013 in फोन पर घंटों करता था बात, महिलाओं से संबंध के चलते सुर्खियों में आया साधू

जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट में मंगलवार को पुलिस की ओर से बनाड़ निवासी रामस्नेही महाराज समरथराम के चाल-चलन व पुलिस रिकॉर्ड संबंधित रिपोर्ट पेश की गई। इसमें बताया गया कि घर से भाग कर संन्यासिन बनने जोधपुर आई भीलवाड़ा जिलांतर्गत गंगापुर निवासी 22 वर्षीय युवती से समरथराम ने 13 अगस्त 2012 से 17 जून 2013 के बीच कुल 51 हजार 749 सैकंड बात की।
इसके लिए युवती की मां के फोन पर 98 बार संपर्क साधा गया। इस मामले में महाराज के खिलाफ गंगापुर पुलिस थाने में गत 20 जुलाई को एफआईआर दर्ज की गई है। महाराज के खिलाफ इसी थाने में एक अन्य एफआईआर अनुसूचित जाति, जनजाति अत्याचार मामले के तहत भी दर्ज है। इस मामले में समरथराम पर एक दलित युवती की लज्जाभंग के प्रयास का आरोप है।
संन्यासिन बनने आई युवती के मामले में मंगलवार को राजस्थान हाईकोर्ट में न्यायाधीश एनके जैन व न्यायाधीश अरुण भंसाली की खंडपीठ में पुलिस की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता आनंद पुरोहित व प्रद्युम्न सिंह के माध्यम से केस डायरी व तथ्यात्मक रिपोर्ट पेश की गई।
पुलिस की रिपोर्ट पेश करते हुए सरकारी वकील राजलक्ष्मी सिंह चौधरी ने कहा कि रिपोर्ट में 58 वर्षीय महाराज के युवती से लंबी बातचीत का ब्यौरा कॉल डिटेल में आया है। उनके कई अन्य महिलाओं से बातचीत का भी ब्यौरा उजागर हुआ है।
पुलिस ने 25 वर्षीय एक दलित महिला की उस रिपोर्ट पर भी एफआईआर दायर की है जिसमें महिला ने महाराज पर रामकथा के दौरान उसे एकांत में कमरे में बुला कर लज्जा भंग करने के प्रयास का आरोप लगाया है।
अदालत ने पूछा- एफआईआर के बावजूद गिरफ्तार क्यों नहीं किया
खंडपीठ ने पुलिस की ओर से एफआईआर की जानकारी देने के बाद पूछा कि इसके बावजूद अब तक महाराज को गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया? साथ ही संन्यासिन बनने आई युवती को अदालत में पेश करने के आदेश भी दिए। गौरतलब है कि युवती को हाईकोर्ट के न्यायाधीश पीके लोहरा की एकलपीठ के आदेश पर नारी निकेतन भेज दिया गया था।
खंडपीठ ने पुलिस की ओर से एफआईआर की जानकारी देने के बाद पूछा कि इसके बावजूद अब तक महाराज को गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया? साथ ही संन्यासिन बनने आई युवती को अदालत में पेश करने के आदेश भी दिए। गौरतलब है कि युवती को हाईकोर्ट के न्यायाधीश पीके लोहरा की एकलपीठ के आदेश पर नारी निकेतन भेज दिया गया था।
इस आदेश के खिलाफ युवती की ओर से यह कहते हुए अपील की गई, कि वह बालिग है और अपनी इच्छा से संन्यासिन बन महाराज के साथ रहना चाहती है। इस पर सुनवाई के बाद खंडपीठ ने सरकारी वकील राजलक्ष्मी सिंह से महाराज के चाल-चलन के बारे में अदालत में रिपोर्ट पेश करने को कहा था। sabhar : bhaskar.com
70 वर्ष में सेक्स की तलब, कर बैठा यह गुनाह!
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अगस्त 07, 2013 in 70 वर्ष में सेक्स की तलब, कर बैठा यह गुनाह!

घटना के मुताबिक, एक दिन 70 वर्षीय दशरथ(तब 66) ने अपनी बेटी की ननद को अपने मोहजाल में फंसाया और उसे घर ले गया। ननद की दिमागी हालत ठीक नहीं थी। घर में अकेला पाकर उसने लड़की के संग अपनी वासना मिटा दी। हालांकि इस बारे में लड़की ने किसी को कुछ नहीं बताया, पर एक दिन जब घरवालों को पता चला कि वो गर्भवती है, तो जैसे भूचाल आ गया।

लार्डगंज थानांतर्गत आगा चौक के पास रहने वाले दशरथ बेन की पुत्री प्रसव के लिए वर्ष 2009 में अस्पताल में भर्ती थी। उसकी देखभाल के लिए उसकी ननद भी अस्पताल में थी। वहां पहुंचे आरोपी दशरथ ने बेटी की मानसिक रूप से विक्षिप्त ननद से कहा कि वह अपने घर चली जाए, अस्पताल में वह रुकेगा।

इस मामले में अब 70 साल का दशरथ 7 साल जेल की सजा भुगतेगा। इस घटना ने समाज को स्तब्ध कर दिया है। लोगों का कहना है कि समाज को ऐसी विकृतियों से बचाने के लिए चिंतन करना जरूरी है। sabhar : bhaskkar.com
घटना के मुताबिक, एक दिन 70 वर्षीय दशरथ(तब 66) ने अपनी बेटी की ननद को अपने मोहजाल में फंसाया और उसे घर ले गया। ननद की दिमागी हालत ठीक नहीं थी। घर में अकेला पाकर उसने लड़की के संग अपनी वासना मिटा दी। हालांकि इस बारे में लड़की ने किसी को कुछ नहीं बताया, पर एक दिन जब घरवालों को पता चला कि वो गर्भवती है, तो जैसे भूचाल आ गया।
अपनी बेटी की मानसिक रूप से विक्षिप्त ननद के साथ बलात्कार करने के आरोप में 70 साल का दशरथ अब सात साल कैद भुगतेगा। अदालत ने आरोपी पर 15 हजार रुपयों का जुर्माना भी ठोंका।
लार्डगंज थानांतर्गत आगा चौक के पास रहने वाले दशरथ बेन की पुत्री प्रसव के लिए वर्ष 2009 में अस्पताल में भर्ती थी। उसकी देखभाल के लिए उसकी ननद भी अस्पताल में थी। वहां पहुंचे आरोपी दशरथ ने बेटी की मानसिक रूप से विक्षिप्त ननद से कहा कि वह अपने घर चली जाए, अस्पताल में वह रुकेगा।
इसके बाद जब लड़की अपने घर के लिए रवाना हुई तो कुछ देर बाद आरोपी भी अस्पताल से निकल गया। इसके बाद बेटी की ससुराल पहुंचकर आरोपी दशरथ ने अपने समधी से कहा कि वे अस्पताल चले जाएं, क्योंकि वहां पर कोई नहीं है। यह सुनकर समधी अस्पताल चले गए और तभी आरोपी दशरथ ने पीडि़त लड़की (अपनी बेटी की ननद) को घर में अकेली पाकर उसका बलात्कार कर दिया। साथ ही उसे धमकी भी दी कि वह यह बात किसी को न बताए।
कुछ दिन बाद पीडि़त लड़की की तबियत बिगड़ी। इलाज के दौरान डॉटर ने उसकी सोनोग्राफी कराई, जिसमें उसके गर्भवती होने का पता चला। पहले तो पीडि़त लड़की ने कुछ नहीं बताया, लेकिन जब पिता ने सख्ती की तब उसने पूरी घटना अपने घर वालों को बता दी। तब मामले की शिकायत लार्डगंज थाने में की गई, जहां पर आरोपी के खिलाफ भादंवि की धारा 376, 506बी के तहत प्रकरण दर्ज कर चालान कोर्ट में पेश किया गया। ट्रायल के दौरान मानसिक रूप से विक्षिप्त लड़की ने पूरी घटना का विवरण बताया। हालांकि कुछ समय बाद एक हादसे में उसकी मौत हो गई थी।
इस मामले में अब 70 साल का दशरथ 7 साल जेल की सजा भुगतेगा। इस घटना ने समाज को स्तब्ध कर दिया है। लोगों का कहना है कि समाज को ऐसी विकृतियों से बचाने के लिए चिंतन करना जरूरी है। sabhar : bhaskkar.com
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