शनिवार, 16 जनवरी 2021
क्या इस ब्रह्मांड में हमारे सिवा भी कोई और है
0गुजरे वर्ष में यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया तथा कार्नेजी इंस्टिट्यूट ऑफ़ वाशिंगटन से संबंध का गोल विद के एक दल को एक जीवन अनुकूल ग्रह की खोज करने में सफलता मिली जिसे ग्लास 510 नाम दिया गया है हालांकि अब तक सौरमंडल के बाहर सैकड़ों ग्रहों की को खोजा जा चुका है लेकिन इस नए खोजे गए ग्रह के बारे में यह कहा जा रहा है कि जीवन के पनपने योग्य तमाम परिस्थितियों की दृष्टि से यह सर्वाधिक अनुकूल है ग्लास 581 ग्रह का मूल तारा है लाइफ 581 जो एक लाल बोना तारा है यह ग्रह 37 दिन में अपने मूल तारीख की एक प्रतिमा पूरी करता है गौर मतलब है कि लाइफ 581 की ग्रह मालिका प्लेनेटरी सिस्टम में भी और भी ग्रह पाए गए हैं लेकिन ग्लास 581 जी को ही जीवन के अनुकूल पाया गया है हवाई स्थित टेलीस्कोप की मदद से लगातार 11 वर्षों के परीक्षण के बाद लाइफ 58 15 मालिका में आईसीटी ग्रह की खोज करने में सफलता मिली पृथ्वी से 20 प्रकाश वर्ष की दूरी पर तुला तारामंडल में स्थित यह ग्रह पृथ्वी से 3 गुना बड़ा है लेकिन इसका ग्रुप टेबल पृथ्वी के मुकाबले कहीं कम है अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के अनुसंधानकर्ताओं को बीते वर्ष में कैलीफोर्निया की एक झील में arsanik पर पलटने वाले जीवाणुओं यानी बैटरी या की एक प्रजाति की खोज करने में सफलता मिली सौरमंडल से बाहर जीवन अनुकूल ग्रह की खोज के साथ बैक्टीरिया की इस नई प्रजाति की खोज में फिर से इस तथ्य को रेखांकित किया है कि दुर्गम से दुर्गम और कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी जीवन पनप सकता है तो क्या इस ब्रह्मांड में हम अकेले नहीं यानी हमारे सिवा भी कोई और है
इस डिवाइस के आते ही बदल जाएगा सेक्स लाइफ
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जनवरी 16, 2021 in इस डिवाइस के आते ही बदल जाएगा सेक्स लाइफ
वायग्रा और सेक्स पिल्स के साइड इफेक्ट को देखते हुए वैज्ञानिकों ने इन दिनों एक ऐसा डिवाइस बनाया है जो सेक्स लाइफ को लंबे समय तक स्पाइसी बनाए रखता है। वैज्ञानिक इन दिनों एक ऐसे डिवाइस पर काम कर रहे हैं जिसे दिमाग में फिट किया जा सकेगा और इससे सेक्स का आनंद कई गुना बढ़ जाएगा। वैज्ञानिकों ने इसका नाम सेक्स चिप रखा है। प्रयोग के तौर पर वैज्ञानिकों ने इस चिप को एक ऐसे महिला के दिमाग में इंप्लांट कर दिया जिसे सेक्स में कोई इंटरेस्ट नही था। मगर इस चिप के इंप्लांट के बाद उसकी सेक्स रिलेटेड इच्छाएं तेजी से बढ़ गईं। बाद में इस चिप को निकाल दिया गया, क्योंकि वह सामान्य लाइफ और सेक्स लाइफ के साथ सामंजस्य नहीं बिठा पा रही थीं। ऑक्सफर्ड में जॉन रेडक्लिफ हॉस्पिटल के प्रोफेसर टीपू अजीज का कहना है कि सेक्स चिप 10 सालों के भीतर एक सचाई बन सकती है। उनका कहना है कि इस चिप की सफलता के सबूत भी हैं। उनका कहना है कि यह तकनीक वायरलेस होगी और सेल्फ पावर्ड ब्रेन चिप्स के सहारे चले sabhar baskar.com
गुरुवार, 14 जनवरी 2021
दिल की धड़कन से चलेंगे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण
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जनवरी 14, 2021 in दिल. की धड़कन. से चलेंगे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण
चीन के वैज्ञानिक एक ऐसी सुरक्षा तकनीक विकसित कर रहे हैं जिसमें दिल की धड़कन की मदद से इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को संचालित किया जा सकेगा ताइवान के टाइम है है सिंह यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों का कहना है कि हर एक इंसान का दिल अलग तरीके से धड़कता है वैज्ञानिकों का कहना है जब तक व्यक्ति जीवित रहता है उसके दिल की धड़कन ए चालू रहती है ऐसे में धड़कनों को करती है प्रणाली में बदलकर कंप्यूटर सुरक्षा तकनीकी हथियार के रूप में विकसित किया जा सकता है दिल अलग तरीके से धड़कने के कारण हर एक व्यक्ति का की दिल की धड़कन का इलेक्ट्रोकॉर्डियोग्राम संकेत भी अलग होता है वास्तव में किन्ही दो व्यक्तियों को इलेक्ट्रोकॉर्डियोग्राम संकेत एक जैसे नहीं होते इसी विशेषता को नए बायोमेट्रिक हथियार के रूप में विकसित किया जा रहा है प्रमुख शोधकर्ता सुन लिया मैंने कहा है कि इस तकनीकी योग्यता जांचने के लिए हमने 2 लोगों के ; इलेक्ट्रोकॉर्डियोग्राम अर्थात ईसीजी संकेतों को उनकी हथेलियों के माध्यम से प्राप्त किया फिर उन्हें गणितीय आंकड़ों में परिवर्तित किया लिन ने कहा हमने पाया कि इन आंकड़ों का इस्तेमाल पासवर्ड के रूप में किया जा सकता है उनका दावा है कि यह अन्य प्राणियों के मुकाबले कहीं अधिक सुरक्षित है अब तक बायोमेट्रिक पहचान सुनिश्चित करने के लिए उंगलियों के निशान आंखों की पुतली का इस्तेमाल होता था इसके बावजूद लोग तस्वीर में से इसे धावली करते हुए पाए गए लेकिन इस तकनीकी में हथेलियों से रिकॉर्ड की गई है दोनों को एक बार करने के बाद हमेशा पासवर्ड के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है इसमें धोखाधड़ी किए जाने की आशंका नहीं होगी
कुत्ते से हुआ प्यार, साइंस की छात्रा ने कर दी सारी हदें पार!
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जनवरी 14, 2021 in
अहमदाबाद।शहर के पॉश इलाके में रहने वाली और साइंस (कक्षा 12वीं) की एक छात्रा का एक अजीबो-गरीब मामला सामने आया है। छात्रा को अपने घर पर पले कुत्ते से इस कदर
प्यार हो गया कि अब वह उसे अपना ब्वॉयफ्रेंड मानने लगी है। छात्रा कुत्ते को लेकर सारी हदें पार कर चुकी है। बताया जाता है कि छात्रा के कमरे से उसके परिजनों को अश्लील साहित्य भी मिले हैं। मजबूरीवश अब परिजनों को मनोचिकित्सक की मदद लेनी पड़ी है। लगभग 5 वर्ष पहले छात्रा के पिता जर्मन शैफर्ड ब्रीड के एक कुत्ते को घर लाए थे। जैसे-जैसे कुत्ता बड़ा होता गया, छात्रा का उससे प्रेम उतना ही बढ़ता गया। अब तो स्थिति यहां तक पहुंच चुकी है कि छात्रा रात-दिन कुत्ते के साथ ही रहती थी और उसे कुत्ते से एक पल के लिए भी दूर रहना पसंद नहीं। कुत्ते को लेकर छात्रा का पागलपन इस कदर बढ़ चुका था कि यह बात उसकी सहेलियों तक को पता थी। इन्हीं में से एक सहेली ने यह बात परिजनों बता दी, तब जाकर इस मामले का खुलासा हुआ। पिता ने यह बात सुनते ही कुत्ते को एक स्वैच्छिक संस्था को सौंप दिया। लेकिन छात्रा कुत्ते के प्यार में इस कदर पागल थी कि उसने परिजनों को धमकी दे दी कि अगर कुत्ते को वापस नहीं लाया गया तो वह आत्महत्या कर लेगी। इकलौती बेटी की इस हरकत से परिजन भी घबरा गए और कुत्ते को घर वापस ले आए। परिजन कुत्ते को वापस तो ले आए लेकिन अब उन्होंने कुत्ते को एक पिंजरे में रखना शुरू कर दिया है और उसकी देखभाल के लिए एक वॉचमैन भी रखना पड़ा है।इधर, कुत्ते से अलग रहने पर छात्रा की मानसिक हालत बिगड़ गई और वह डिप्रेशन में चली गई। अन्य चिकित्सकों की सलाह पर पिता ने उसे शहर के जाने-माने मनोचिकित्सक को दिखाया है।
छात्रा के कमरे से मिले अश्लील साहित्य: पुत्री के कुत्ते से इस कदर प्रेम के चलते परिजनों ने जब उसके कमरे और सामानों की तलाशी ली तो काफी मात्रा में अश्लील साहित्य भी बरामद हुआ है।
यह बीमारी ‘जूफिलिया’ कहलाती है: चिकित्सीय भाषा में इस बीमारी को जूफिलिया (जानवरों से अत्यधिक प्रेम व संभोग की स्थिति) कहा जाता है। इसकी शुरुआत ‘अनकंडिशन लव’ के रूप में होती है जो धीरे-धीरे बढ़ते हुए अंत तक ‘अनकंडिशनल फिजिकलिटी’ में बदल जाती है। पशु के प्रति बढ़ता प्रेम, संभोग तक पहुंच जाता है, जिसे ‘सैक्सुअल परवरजन’ भी कहा जाता है। विज्ञान में इस समस्या का निदान सिर्फ मनोवैज्ञानिक तरीके से ही संभव है।
sabhar : http://rashtriyaujala.com
विशिष्ट गुणों वाली जीएम फसलों का विकास
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जनवरी 14, 2021 in विशिष्ट. गुणों वाली .जीएम फसलों का विकास
आईसीएआर और दिल्ली विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने विशिष्ट गुणों वाली जीएम फसलों का विकास किया है फसलों में विभिन्न रोगों की रोकथाम में जीन संपादन द्वारा सफलता प्राप्त करने के बाद वैज्ञानिक अब सूखा
चार पाला और लवण रोड़ी फसलों के विकास के साथ ही खनिज संपदा से भरपूर प्रजातियों के विकास के लिए कार्य कर रहे हैं भारत में सूखा रोधी धान और सरसों की किस्मों पर जीनों के फेरबदल के प्रयोग भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और दिल्ली विश्वविद्यालय में किए जा रहे हैं पूसा में डीएम चोपड़ा और उनकी टीम ने सरसों की जय किसान नामक प्रजाति का विकास सोमैक्लोनल वेरिएशन तकनीक
से किया सरसों की फसल सुखा रोटी और अगेती होने के कारण किसानों द्वारा पसंद की गई इसी प्रकार चेन्नई के एम एस स्वामीनाथन रिसर्च फाऊंडेशन की प्रयोगशाला में समुद्र के खारे पानी को चाहने वाले जीन को समुद्री maigro tree से अलग करके तंबाकू में सफलतापूर्वक प्रवेश किया गया अब उसे paddy में प्रविष्ट करा दिया गया है इस प्रकार समुद्र के खारे पानी से धान पैदा होने की संभावनाएं बढ़ गई हैं भारत में कोल्ड स्टोरेज कोल्ड चीन की सुविधा की कमी और अनियमित बिजली आपूर्ति के कारण फल फूल और सब्जियों को अधिक समय तक सुरक्षित नहीं रखा जा सकता ऐसी स्थिति में यदि जिलों के फेरबदल से इन फसलों को अधिक देर तक टिकाऊ ताजा और सुरक्षित बना दिया जाए तो किसानों के साथ-साथ वक्ताओं को भी लाभ होगा वैज्ञानिक इस दिशा में कार्य कर रहे हैं स्विस फेडरल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के वैज्ञानिकों ने रॉकफेलर प्रतिष्ठान की सहायता से धान की गोल्डन राइस किस्म को विकसित किया है इसमें विटामिन ए पैदा करने वाला जीन डाला गया है फिलीपींस स्थित अंतरराष्ट्रीय धान अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिकों ने अधिक लोहे और जस्टिस से युक्त धान के बीजों का विकास किया है यह बी एनीमिया से ग्रस्त बच्चों और महिलाओं के लिए वरदान सिद्ध होगा जीएम फसलों के उत्पादन बढ़ाया जा सकता है वैज्ञानिक शोध पर आधारित विश्व बैंक की एक रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि विकासशील देशों में जीएम तकनीक से प्रायः सभी फसलों का उत्पादन 25% बढ़ाया जा सकता है चीन के किसानों ने 1997 से बीटी कपास हुआ कर कपास उत्पादन लागत को 8% कम किया है दुनिया में एक तिहाई सिंचित क्षेत्र सिर्फ इस लिए खेती के लिए अनुपयुक्त हो गया है क्योंकि वहां की जमीन छारीय हो चुकी है ऐसी जमीन पर जीएम फसलों को उगाया जा सकता है यह फसलें सूखे को भी काफी हद तक सहन करने के योग्य होती हैं सबसे बड़ी बात है कि हम जीएम फसलों को पूर्णता कृतिम वातावरण में उगने लायक बना सकते हैं
कया ब्रमांड पहले से था और रहेगा
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जनवरी 14, 2021 in
वैसे तो ब्रह्मांड के निर्माण के संबंध में कई सिद्धांत और और धारणाएं प्रचलित है लेकिन महा विस्फोट के संबंधी अवधारणा को सबसे ज्यादा मान्यता मिली है और आप सभी आमतौर पर इसे स्वीकारते हैं बिग बैंग थ्योरी के अनुसार अरबों साल पहले यह ब्रह्मांड अत्यधिक घनीभूत अवस्था में था और एक बिंदु के रूप में था इस बिंदु को वैज्ञानिकों ने विलक्षणता का बिंदु कहा इस बिंदु में एक महा विस्फोट हुआ इसका विस्तार होना शुरू हो गया इस महा विस्फोट ने अति सघन बिंदु बिंदु को छिन्न-भिन्न कर दिया और इस पिंड के टूटे हुए हंस अंतरिक्ष में दूर-दूर तक छुट्टी है अभी भी हजारों किलो मीटर प्रति सेकेंड की दर से गतिमान है इन्हीं गतिशील आंसुओं से अकाश गंगा निर्मित हुई है और ब्रह्मांड का वर्तमान स्वरूप सामने आया हरमन बॉडी गोल्ड पायल नाम के तीन सिद्धांत दिया इस सिद्धांत में एक सी फील्ड वहां से फील्ड का मतलब क्रिएशन यानी निर्माण से है कि कल्पना की गई बहुत ही घने हो मुझे द्रव्यमान वालों के आसपास मौजूद इस फील्ड की ऊर्जा को और बना देता है जिससे पदार्थ का निर्माण होता है इस प्रक्रिया में उर्जा में बढ़ोतरी के साथ में भी बढ़ोतरी होती है जिससे तेज गति के साथ बाहर करता है इससे छोटे स्तर पर विस्फोट की होती है छोटे छोटे बड़े विस्तार होता है इस प्रकार की संरचना होती है हरमन बॉडी थम्स गोल्ड रेट हायर नामक के तीन ब्रिटिश वैज्ञानिकों ने महा विस्फोट के इस सिद्धांत को चुनौती दी उन्होंने 1948 में ब्रह्मांड की उत्पत्ति के एक नए सिद्धांत को प्रस्तुत किया जिसे अस्थाई अवस्था सिद्धांत कहा जाता है इस सिद्धांत के अनुसार ब्रह्मांड का ना तो महा विस्फोट के साथ आरंभ हुआ ना ही कभी इसका अंत होगा यानी इस विशाल ब्रह्मांड का ना आदि है न अंत इस सिद्धांत के अनुसार आकाशगंगा ए आपस में दूर तो हो जाती है
रविवार, 10 जनवरी 2021
चीनी वैज्ञानिकों ने खोजा ब्रह्मपुत्र और सिंधु नदियों का उद्गम
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जनवरी 10, 2021 in
ब्रह्मपुत्र पर बांध बनाने समेत तिब्बत में कई जल परियोजनाओं को अंजाम देने के लिए तैयार बैठे चीन के वैज्ञानिकों ने तिब्बत की सीमा से बहने वाली नदियों के उद्गम स्थल और उनके मार्ग की लंबाई का व्यापक उपग्रह अध्ययन पूरा कर लिया है चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेज के वैज्ञानिकों ने ब्रह्मपुत्र के मार्ग की उपग्रह से ली गई तस्वीरों का विश्लेषण करने के साथ भारत पाकिस्तान से बहने वाली सिंधु और म्यांमार के रास्ते बहने वाली सालवीन और इरावडी के बहाव के बारे में भी पूरा विवरण उठा लिया है सी ए एस के तहत आने वाली इंस्टीट्यूट आफ रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन के शोधकर्ता न्यू साउथ शिवांग ने बताया कि इसके बाद पहले 4 नदियों के उद्गम कभी स्पष्ट नहीं हुए थे और इनकी लंबाई क्षेत्र के बारे में आ रहे विभिन्न जानकारियों ने शोधकर्ताओं को कई साल तक भ्रम में रखा था क्योंकि इस कार्य में प्राकृतिक परिस्थितियों से जुड़ी कई बाधाएं आती थी और सर्वेक्षण की तकनीक भी सीमित थी न्यू ने अपने विश्लेषण के आधार पर बताया कि ब्रह्मपुत्र का उद्गम स्थल तिब्बत के दौरान काउंटी स्थित हिमालय पर्वत के उत्तरी क्षेत्र में स्थित सांसी ग्लेशियर है न कि सीमा युंग डुंग ग्लेशियर इसे भूगोल विद स्वामी प्रणवानंद ने 1930 के दशक में ब्रह्मपुत्र का उद्गम बताया था
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