Sakshatkar.com : Sakshatkartv.com

.

Item Post Navigation Display

Home Recent Posts Display

Related Posts Display

सोमवार, 6 अप्रैल 2020

कोरोनावायरस / महामारी से लड़ने में रोबोट्स की मदद लेगा भारत, यह संक्रमितों तक खाना-दवा पहुंचाएंगे, टेम्परेचर और सैंपल लेने का काम भी करेंगे

0

दैनिक भास्कर

Apr 06, 2020, 02:05 PM IST
नई दिल्ली.. कोरोना से लड़ने के लिए चीन समेत दुनियाभर के कई देश रोबोट्स की मदद ले रहे हैं। यह न सिर्फ हॉस्पिटल्स को सैनेटाइज का काम कर रहे हैं बल्कि पीड़ितों तक खाना और दवा भी पहुंचा रहे हैं। भारत में कोरोना के अबतक 4 हजार से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं और 130 लोगों की मौत हो चुकी है। ऐसे में भारत भी कोरोना को हराने में इन रोबोट्स की मदद लेने की तैयारी कर रहा है, ताकि जल्द से जल्द इस महामारी पर काबू पाया जा सके।
दुनियाभर के हेल्थ वर्कर, शोधकर्ता और सरकारें इस महामारी पर काबू पाने की कोशिश में लगी हैं। कोरोना अबतक 200 से ज्यादा देशों को अपनी चपेट में ले चुका है। अबतक 12 लाख से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं और 69 हजार से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन संक्रमण से बचने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग रखने की सलाह दे चुका है। इंसानों के लिए घरों तक जरूरी सामान पहुंचाना और हाई रिस्क एरिया में पीड़ितों का इलाज करना एक बड़ी चुनौती बन गई है, ऐसे में यह रोबोट्स संक्रमितों का बेहतर तरीके से ट्रीटमेंट करने में काफी मददगार साबित हो रहे हैं।
महामारी को रोकने के लिए चीन के वुहान शहर में होंगशैन स्पोर्ट्स सेंटर में 14 फील्ड हॉस्पिटल स्टॉफ के साथ 14 रोबोट तैनात किए गए। इन रोबोट्स को बीजिंग की रोबोटिक्स कंपनी क्लाउडमाइंड ने बनाया है। यह न सिर्फ साफ-सफाई करते हैं बल्कि पीड़ितों तक दवाईयां पहुंचाते हैं और उनके शरीर का तापमान भी चेक करते हैं।
क्लाउमाइंड कंपनी का रोबोट जो कोरोना से लड़ने में चीन की मदद कर रहा है
क्लाउमाइंड कंपनी का रोबोट जो कोरोना से लड़ने में चीन की मदद कर रहा है
देश के कई हिस्सो में चल रही टेस्टिंग, स्टार्टअप कंपनियां बना रही रोबोट
  • भारत में भी कोरोना से लड़ने के लिए रोबोट्स की मदद लेने की तैयारी चल रही है। जयपुर के सरकारी हॉस्पिटल सवाई मान सिंह में भी ह्यूमनोइड रोबोट को लेकर ट्रायल चल रहा है, जिसमें यह देखा जा रहा है कि यहां एडमिट कोरोना संक्रमितों तक दवाई और खाना पहुंचाने के लिए इन रोबोट्स का इस्तेमाल किया जा सकता है या नहीं। आधिकारियों का कहना है कि इससे हॉस्पिटल स्टाफ को संक्रमित होने से बचाया जा सकेगा।
  • इसके अलावा केरल की स्टार्टअप कंपनी एसिमोव रोबोटिक्स ने तीन पहियों वाला रोबोट तैयार किया है। कंपनी का कहना है कि यह रोबोट आइसोलेशन वार्ड में संक्रमितों के सहायक की तरह काम करेंगे। यह पीड़ितों तक खाना और दवाईयां पहुंचाएंगे जो अबतक नर्स और डॉक्टर कर रहे हैं थे, जिससे उनके संक्रमित होने का खतरा बढ़ जाता है।
  • हालांकि, इंसानों की जगह रोबोट्स की मदद लेना लोगों को नौकरी के प्रति असुरक्षित महसूस करवा सकता है लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि रोबोट के इस्तेमाल से न सिर्फ मेडिकल स्टॉफ को थोड़ा आराम मिलेगा बल्कि उनके संक्रमित होने के खतरे को भी कम किया जा सकेगा।
  • साइंस रोबोटिक्स जर्नल में पब्लिश हु्ए एक लेख के मुताबिक, रोबोट्स न सिर्फ जगहों को संक्रमण रहित करने का काम कर रहे हैं, बल्कि पब्लिक एरिया में जाकर लोगों का टेम्परेचर चेक करने का भी काम कर रहे हैं। इसके अलावा क्वारैंटाइन व्यक्ति को अकेलापन महसूस ने हो इसके लिए उन्हें सोशल सपोर्ट भी दे रहे हैं। शोधकर्ताओं के मुताबिक, यह टेस्टिंग के लिए लोगों के नाक और गले का सैंपल भी कलेक्ट काम भी कर रहे हैं।

Read more

शुक्रवार, 3 अप्रैल 2020

क्या है क्लोरोक्विन जिसमें कोरोना वायरस का इलाज खोजा जा रहा है?

0

फ्रांस और चीन में शुरूआती अध्ययनों में कोविड-19 के खिलाफ इन दवाओं से काफी उम्मीद बंधी है, जिसकी वजह से अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने इसी हफ्ते इन्हें भगवान की तरफ से एक तोहफा बताया.
क्या एक दशक पुरानी सस्ती दवाओं की जोड़ी नई कोरोना वायरस महामारी का इलाज हो सकती है? दुनिया भर के देशों के शोधकर्ता हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन (ऐछसीक्यू) और क्लोरोक्विन (सीक्यू) तक पहुंच बढ़ा रहे हैं. ये दोनों सम्बंधित कंपाउंड हैं और क्विनीन के सिंथेटिक रूप हैं. क्विनीन सिनकोना पेड़ों से आने वाला एक पदार्थ है जिसका सैकड़ों सालों से मलेरिया के इलाज के लिए इस्तेमाल होता आया है.

ऐछसीक्यू दोनों में से कम जहरीला है और इसका इस्तेमाल एंटी-इंफ्लेमेटरी दवा के रूप में गठिया और ल्यूपस के इलाज के लिए भी किया जाता है.

फ्रांस और चीन में शुरूआती अध्ययनों में कोविड-19 के खिलाफ इन दवाओं से काफी उम्मीद बंधी है, जिसकी वजह से अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने इसी हफ्ते इन्हें भगवान की तरफ से एक तोहफा बताया. हालांकि विशेषज्ञ तब तक सावधानी बरतने को कह रहे हैं जब तक ट्रायल में इनकी प्रभावकारिता की पुष्टि नहीं हो जाती.

चीन ने सीक्यू का इस्तेमाल फरवरी में एक ट्रायल के दौरान 134 मरीजों पर किया था और अधिकारियों का कहना है कि वो बीमारी की तीव्रता कम करने में प्रभावकारी सिद्ध हुई थी. लेकिन इन नतीजों को अभी छापा नहीं गया है. चीन में सांस के विशेषज्ञ जौंग नानशान ने पिछले सप्ताह एक प्रेस वार्ता में कहा था कि इस ट्रायल के डाटा को व्यापक रूप से सार्वजनिक किया जाएगा. नानशान महामारी की रोकथाम के तरीकों पर काम करने के लिए गठित एक सरकारी टास्क फोर्स का नेतृत्व कर रहे हैं.
फ्रांस में शोधकर्ताओं की एक टीम ने पिछले सप्ताह बताया कि उन्होंने कोविड-19 के 36 मरीजों का अध्ययन किया और पाया कि एक समूह को देने के बाद उस समूह में वायरल लोड भारी मात्रा में गिर गया. इस टीम का नेतृत्व मार्सेल स्थित आईऐछयू-मेडितेरानी इन्फेक्शन के दिदिएर राऊल कर रहे हैं. टीम ने पाया कि परिणाम विशेष रूप से साफ तब थे जब इसका इस्तेमाल एजिथ्रोमाइसिन के साथ किया गया. एजिथ्रोमाइसिन एक आम एंटीबायोटिक है जिसका इस्तेमाल दूसरे दर्जे के बैक्टीरियल संक्रमण का अंत करने के लिए किया जाता है.

यह भी साबित हो चुका है कि ऐछसीक्यू और सीक्यू एसएआरएस-सीओवी-2 वायरस के खिलाफ लैब में कारगर साबित हुए थे और पिछले सप्ताह सेल डिस्कवरी में छपे एक लेख में चीन की एक टीम ने एक संभावित कार्य विधि भी बताई.
Marburg Virus (picture alliance/dpa/CDC)
रिवरसाइड में कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय में सेल बायोलॉजी के प्रोफेसर करीन ल रोक ने समझाया कि ऐछसीक्यू और सीक्यू दोनों मिलकर वायर की सेल में घुसने की क्षमता पर असर डालने की कोशिश करते हैं और उन्हें बढ़ने से भी रोकते हैं. लेकिन उन्होंने यह भी कहा, "मैं अभी भी बड़े क्लीनिकल ट्रायल के परिणामों के छपने का इन्तजार कर रही हूं जिनमें ऐछसीक्यू की प्रभावकारिता साबित की गई हो."

अमेरिका के राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान के संक्रामक बीमारियों के विभाग के मुखिया एंथोनी फॉसी का कहना है, "उम्मीद का मतलब सबूत नहीं होता है और जो छोटे अध्ययन अभी तक किये गए हैं उनसे सिर्फ "ऐनिकडोटल" सबूत निकला है."

इसके अलावा चीन में 30 मरीजों पर हुए एक छोटे अध्ययन ने दिखाया कि ऐछसीक्यू सामान्य देख-रेख से कुछ भी बेहतर नहीं था.वैज्ञानिकों का कहना है कि पक्के तौर पर जानने का एकमात्र तरीका है रैंडमाइज्ड क्लीनिकल ट्रायल करना.

सीके/एए (एएफपी)
sabhar : dw.de

Read more

शुक्रवार, 24 जनवरी 2020

नेशनल बिजनेस रजिस्टर बनेगा, जिले के हर छोटे-बड़े व्यापार की इसमें डिटेल होगी

0

नई दिल्ली. एनआरसी और एनपीआर को लेकर देशभर में जारी विरोध के बीच सरकार एक और रजिस्टर बनाने जा रही है। यह नेशनल बिजनेस रजिस्टर होगा। इसमें हर जिले के सभी छोटे-बड़े बिजनेस की जानकारी होगी। वर्तमान में जारी सातवीं आर्थिक जनगणना के आधार पर इस रजिस्टर के लिए जानकारी जुटाई जाएगी। इस रजिस्टर में माल, सेवा के उत्पादन/वितरण में लगी सभी बिजनेस इकाइयों और संस्थानों की जिलेवार जानकारी होगी। इसको जीएसटी नेटवर्क, कर्मचारी राज्य बीमा निगम, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन और कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय से मिलने वाले आंकड़ों से नियमित आधार पर अपडेट किया जाएगा। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि इस रजिस्टर में जुटाए गए डिजिटल डेटा से नेशनल अकाउंट्स की गुणवत्ता में सुधार आएगा। 


ये जानकारियां रहेंगी रजिस्टर में:


बिजनेस एंटरप्राइजेज का नाम

उसकी लोकेशन

गतिविधियां

स्वामित्व का प्रकार

कर्मचारियों की संख्या

पैन/टैन


sabhar : bhaskar.com

Read more

शनिवार, 18 जनवरी 2020

कैसी होंगी भविष्य की दवाएं

0

Read more

सोमवार, 10 जून 2019

नपुंसकता

0

Read more

बुधवार, 14 नवंबर 2018

Suchira singh ki kalam se

0

आदरणीय मेयर उमेश गौतम जी (बरेली), ( भूड़ मोहल्ले में भी कोई बंदर किसी मां का आंचल सूना ना कर दे)

.................आज दैनिक जागरण बरेली के अखबार में एक खबर पढ़कर दिल दहल गया। खबर थी कि एक बंदर मां की गोद से नवजात बच्चा छीनकर ले गया, इससे पहले मां कुछ करती बंदर ने बच्चे को जमीन पर पटक दिया और बच्चे का चेहरा नोच दिया।बच्चे की मौत हो गई। कुछ ऐसा ही आतंक हमारे भूड़ मोहल्ले में बंदरों ने मचा रखा है। यहां छतों पर बंदर हर समय डटे रहते हैं।सड़क पर फैले कूडे के ढेर पर ना जाने कितने बंदर खाने का सामान टटोलते रहते हैं। सड़क से गुजरने वाले राहगीर और बच्चों को बंदर काट खाने को दोड़ते हैं।

स्कूली बच्चे हैं दहशत में
........पास ही छोटे बच्चों का स्कूल है, जिनको बंदर कई बार काट चुके हैं। साथ ही कन्या डिग्री कालेज हैं जहां छात्राएं बंदरों से बचती-बचाती कालेज तक पहुंचती है। मोहल्ले की घर की खिड़की व दरवाजों के सामने बंदर खाने की चीजों को छीनने के लिए बैठे रहते है। जिसके चलते वह घरों में हर समय दरवाजा बंद कर रहने को मजबूर हैं।

माएं अपने नवजातों को आंचल में छुपा लेती हैं
.........मोहल्ले में कुछ नवजात बच्चे हैं जिनकी माएं हमेशा डर के साए में रहती हैं। ना जाने कब बंदर उनके बच्चे को नुकसान पहुंचा दें। काट लें, या उठाकर ले जाएं।

दीवाली पर न हो सकी सजावट
........बंदरों के आतंक के चलते इस बार मोहल्ले के घर दीवाली की सजावट से महरूम रह गए। लोगों ने घरों को अंदर से सजाया, बाहर से नहीं। क्योंकि बंदर सारी सजावट उधेड़ देते हैं।इस बार मोहल्ले वालों की दीवाली फीकी रही। लोगों ने खुद को सुरक्षित करने के लिए जाल लगवा रखे हैं।इंसान पिंजरे में और बंदर खुलेआम घूम रहे हैं।

पूर्व मेयर से काफी बार शिकायत की जा चुकी है।
........पूर्व मेयर डा. आई एस तोमर व सुप्रिया ऐरन से भी इस बावत कई बार शिकायत की जा चुकी है। मगर कोई एक्शन-रिएक्शन या कारवाई नहीं हुई। इस बार मोहल्ले वालों ने आपको मेयर के रूप में चुना है, वो आपसे उम्मीद कर रहे हैं कि शायद आप उनके इस डर को काबू में कर सकें। जिस समस्या का हल पूर्व मेयर ना निकाल सके, आप निकाल लें।

कहीं उपर्युक्त घटना की तरह कोई बंदर किसी मां के आंचल से उसका दुलारा ना छीन जाए और आंचल सूना ना कर दे। (फोटो अगली पोस्ट में)

धन्यवाद
सुचित्रा सिंह
(पत्रकार व एक्ट्रेस)

Read more

24 घंटे' असर करेगी गोली

0

  समाचार
'चौबीस घंटे' असर करेगी गोली
यह नई दवाई चौबीस घंटे तक अपना असर बरक़रार रखेगी
यह नई दवाई चौबीस घंटे तक अपना असर बरक़रार रखेगी

नपुंसकता के शिकार पुरुष अब एक नई दवाई की बदौलत रात दिन जब चाहें यौन संबंध क़ायम करने में सक्षम रहेंगे.

सियालिस नाम की इस दवाई को बनाने वालों का दावा है कि इसका असर चौबीस घंटे तक रहेगा.

अब तक काम आने वाली गोली वायग्रा यौन क्रिया शुरू करने से एक घंटे पहले लेनी होती थी और वह सिर्फ़ चार घंटे ही प्रभावी रहती थी.


अब तक इस बाज़ार पर वायग्रा का ही एकाधिकार था
लेकिन वायग्रा की तरह ही यह दवाई भी नुस्ख़े से ही मिलेगी, जो चाहे उसे नहीं.

इस दवाई की निर्माता कंपनी लिली यूके का कहना है कि इससे दम्पत्ति अधिक सहज और स्वाभाविक रूप से यौन क्रिया का आनंद ले सकते हैं.

जब चाहे...

उनके लिए कोई समय के बंधन नहीं होंगे.

एक ख़ास बात और. इस दवा का असर तो पूरे दिन रहेगा लेकिन यौन क्रिया की ज़रूरत उत्तेजित होने पर ही महसूस होगी.

पुरुष आमतौर पर तभी उत्तेजित होते हैं जब शारीरिक संपर्क या इस तरह के विचार उनके दिमाग़ में आते हैं.

उस समय एक रासायनिक तत्व पैदा होता है जो उनकी यौनेंद्रिय की रक्त वाहिकाओं को फैला देता है.

एक ख़ास एंज़ाइम

यह रासायनिक तत्व एक विशिष्ट एंज़ाइम से नियंत्रित होते हैं और इस एंज़ाइम की कमी से ही यह नपुंसकता पैदा होती है.


लंबे समय तक असर करने वाली इस गोली की वजह से लोग उन्मुक्त भाव से यौन क्रिया का आनंद ले पाएँगे.
डॉक्टर पैट ग्रिफ़िथ
सियालिस गोली इसी एंज़ाइम को जीवित रखती है और उसकी वजह से रक्त का प्रवाह रुकने नहीं पाता.

डरहम के एक चिकित्सक डॉक्टर पैट ग्रिफ़िथ कहते हैं कि इस गोली की वजह से लोग उन्मुक्त भाव से यौन क्रिया का आनंद ले पाएँगे.

उनका कहना है, "लंबे समय तक असर करने वाली इस गोली का यह फ़ायदा है कि लोग यह भूल जाएँगे कि उन्होंने दवा ली हुई है. इससे यौन संबंधों की स्वाभाविकता बनी रहेगी".

एक मनोचिकित्सक डॉक्टर सिंथिया मैकवी कहती हैं, "किसी हड़बड़ी की ज़रूरत नहीं होगी. लोग आराम से रोमांस कर सकते हैं. पार्क में टहल सकते हैं या साथ बैठ कर भोजन का आनंद ले सकते हैं".

जिन मरीज़ों पर इसका परीक्षण हुआ है उनमें से एक ऐलेन का कहना है, "मेरी उम्र साठ साल से ज़्यादा है लेकिन मुझे लगता है कि मुझे अपनी पत्नी के साथ यौन संबंध क़ायम रखने चाहिए".

"इस दवाई से मनोवैज्ञानिक रूप से मैं बेहतर महसूस कर रहा हूँ".

ब्रिटेन में ही देखा जाए तो लगभग तेइस लाख लोग नपुसंकता से पीड़ित हैं. लेकिन इलाज दस में से एक का ही हो पाता है.
 
 

 असर
बोतल बंद पानी कितना सुरक्षित
?
बिगफ़ुट है या नहीं?


Sabar bbchindi.com

Read more

Ads

 
Design by Sakshatkar.com | Sakshatkartv.com Bollywoodkhabar.com - Adtimes.co.uk | Varta.tv