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गुरुवार, 31 जुलाई 2014

स्मार्टफ़ोन पहचानेगा कैंसर का रोग

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स्मार्टफ़ोन कैंसर

इसराइल में शोधकर्ता एक ऐसा स्मार्टफ़ोन विकसित कर रहे हैं जो शरीर में कैंसर के रोगों की पहचान कर सकेगा.

चार सौ डॉलर (क़रीब 24,000 रुपये) की क़ीमत का यह स्मार्टफ़ोन उपकरण संभावित कैंसर की पहचान और उसका विश्लेषण करने में सक्षम होगा.


स्मार्टफ़ोन से ली गईं तस्वीरें उपयोगकर्ता द्वारा जांची जाती हैं और इसके बाद एक पेशेवर द्वारा पुनरीक्षण के लिए इन्हें अपलोड किया जाता है.

इस उपकरण से हरे रंग का प्रकाश निकलता है, जो कैंसर की कोशिकाओं को अलग रंग में दिखाता है.

इसमें लगा बड़ा लेंस त्वचा पर संभावित कैंसर और रक्त आपूर्ति की जगहों की तस्वीर लेता है.

पेशेवर विश्लेषणकर्ताओं द्वारा इन त्रिआयामी तस्वीरों का विश्लेषण किया जाता है.

मोबाइल ओसीटी के सीईओ एरियल बेरी के अनुसार, ''हम चाहते हैं कि इस उपकरण से दुनिया के किसी भी कोने में स्थित कोई भी व्यक्ति इन तस्वीरों को ले सके और उनका विश्लेषण किया जा सके.''

एरियल बेरी का कहना है कि ''हमारा मकसद है कि लोग अपनी जिंदगी को सुरक्षित रख सकें.''sabhar :http://www.bbc.co.uk/

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कुंडलिनी जागरण से जुड़ा यह रहस्य चौंका देगा आपको

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feeling during kundalini jagaran

बहुत से लोग कहते सुने जाते हैं कि मेरी कुंडलिनी जाग्रत है, या जाग रही है। स्वात्माराम योगी के अनुसार योग साधना में लगे दस में से आठ लोगों को लगता है कि उनकी कुंडलिनी जाग रही है। लेकिन क्या यह सच है? इस विषय में की गई खोज जो यह बताती है कि ज्यादातर दावे खोखले ही हैं। लेकिन वे गलत भी नहीं है।

योगविद्या केंद्र अनुराधापुर (महाराष्ट्र) में शोध प्रयोग और अनुसंधान कर रहे योगी का कहना है कि जिन्हें कुंडलिनी जागरण का अनुभव होता है, वह सही इस मायने में है कि साधना के दौरान सचमुच ऐसा लगता है।

कुछ लोग साधना करने का अभिनय करते या आधे अधूरे मन से इस मार्ग पर चलते हैं। वे भी इस तरह के अनुभवों का दावा करने लगते हैं। लेकिन कई साधकों को अनुभूति होती है, पर वह प्रतीती मायावी ही होती है।
feeling during kundalini jagaran2
योग के पुराने ग्रंथ हठयोगप्रदीपिका के मार्ग पर चलते रहने का आदेश देते हुए गुरु से उस ग्रंथ के लेखक का ही नाम दिए जाने के बाद 1968 में इसी काम में लग गए योगी का कहना है कि जिसकी भी कुंडलिनी जाग्रत हो जाती है, और जब भी होती है तो वह असाधारण घटना होती है।

एक दायरे में साधना कर रहे योगियों को पता चल जाता है कि किसी की कुंडलिनी जागृत हुई है। उस समय योगियों को आकाश में बिजली कौंधने और मेघों के गरजने जैसी अनुभूति होती है।

अनुभूति के दायरे का विस्तार इस बात पर निर्भर है कि वहां का क्षेत्र कितना बड़ा है, यानी कितने साधक साधना का अभ्यास कर रहे हैं।

योगी स्वात्माराम का कहना है कि संयम और सम्यक नियमों का पालन करते हुए ध्यान करते रहने से धीरे धीरे कुंडलिनी जाग्रत होने लगती है और जब यह जाग्रत हो जाती है तो व्यक्ति पहले जैसा नहीं रह जाता। वह दिव्य पुरुष बन जाता है।
feeling during kundalini jagaran3

जब कुंडलिनी जाग्रत होने लगती है तो पहले व्यक्ति को उसके मूलाधार चक्र में स्पंदन का अनुभव होने लगता है। फिर वह कुंडलिनी तेजी से ऊपर उठती है और किसी एक चक्र पर जाकर रुकती है उसके बाद फिर ऊपर उठने लग जाती है।

जिस चक्र पर जाकर वह रुकती है उसको व उससे नीचे के चक्रों में स्थित नकारात्मक उर्जा को हमेशा के लिए नष्ट कर चक्र को स्वस्थ और स्वच्छ कर देती है।

संत ज्ञानेश्वर ने ओबी छंदों में लिखी गीता पर अपनी टीका ज्ञानेश्वरी में इस विषय पर विशद प्रकाश डाला है। उल लक्षणों को आधिकारिक प्रमाण बताते हुए स्वात्माराम योगी ने कहा है कि अपने आसपास जब भी कोई कुंडलिनी जागने का दावा करता या आश्वासन देता दिखाई दे तो यकायक मान नहीं लेना चाहिए।

एक सूत्र याद रखें कि अनुभव जितना भी गहन होगा, उतने ही श्रम और साधन की जरूरत महसूस करेगा।  जब कुंडलिनी जाग्रत होने लगती है तो पहले व्यक्ति को उसके मूलाधार चक्र में स्पंदन का अनुभव होने लगता है। फिर वह कुंडलिनी तेजी से ऊपर उठती है और किसी एक चक्र पर जाकर रुकती है उसके बाद फिर ऊपर उठने लग जाती है।

जिस चक्र पर जाकर वह रुकती है उसको व उससे नीचे के चक्रों में स्थित नकारात्मक उर्जा को हमेशा के लिए नष्ट कर चक्र को स्वस्थ और स्वच्छ कर देती है।

संत ज्ञानेश्वर ने ओबी छंदों में लिखी गीता पर अपनी टीका ज्ञानेश्वरी में इस विषय पर विशद प्रकाश डाला है। उल लक्षणों को आधिकारिक प्रमाण बताते हुए स्वात्माराम योगी ने कहा है कि अपने आसपास जब भी कोई कुंडलिनी जागने का दावा करता या आश्वासन देता दिखाई दे तो यकायक मान नहीं लेना चाहिए।

एक सूत्र याद रखें कि अनुभव जितना भी गहन होगा, उतने ही श्रम और साधन की जरूरत महसूस करेगा। sabhar http://www.amarujala.com/















                     

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फेसबुक की Internet.org सर्विस जाम्बिया में शुरू, मुफ्त मिलेगा इंटरनेट

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फेसबुक की Internet.org सर्विस जाम्बिया में शुरू, मुफ्त मिलेगा इंटरनेट

न्यूयॉर्क। इंटरनेट को दुनिया के कोने-कोने तक पहुंचाने की मुहिम में फेसबुक एक कदम आगे बढ़ गया है। फेसबुक के Internet.org प्रोजेक्ट को जाम्बिया में लॉन्च कर दिया गया है। 
 
Internet.org सर्विस ऐप के जरिए जाम्बिया की एयरटेल यूजर्स को मुफ्त इंटरनेट सुविधा दी जाएगी। इस सर्विस के जरिए इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले यूजर्स को कोई डाटा चार्ज नहीं देना होगा। यह उन इलाकों के लिए फायदेमंद माना जा रहा है, जहां आज भी इंटरनेट उपलब्ध नहीं है। 
फेसबुक, दुनियाभर के कई मोबाइल ऑपरेटर्स के साथ मिलकर इस सर्विस को शुरू करने की दिशा में काम कर रहा है। 
 
इसके जरिए एक्युवैदर, गूगल सर्च, विकीपीडिया, जॉब सर्च और हेल्थ इन्फोर्मेशन जैसी सर्विसेज का इस्तेमाल किया जा सकेगा। फेसबुक ऐप व इसकी मैसेंजर सर्विस भी इसमें शामिल है। यह ऐप एंड्राइड फोन्स के अलावा सामान्य मोबाइल्स में भी इंस्टॉल की जा सकेगी, जिनका इस्तेमाल ज्यादातर जाम्बिया निवासी करते हैं। 
 
13 मुफ्त सर्विसेज के अलावा अगर यूजर्स किसी अन्य लिंक पर क्लिक करता है तो उसकी स्क्रीन पर 'डाटा चार्ज' का मैसेज दिखाई देगा। sabhar :http://www.bhaskar.com/

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साल में एक बार खुलता है नागचंद्रेश्वर महादेव मंदिर, नागदेव के होते हैं दर्शन!

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साल में एक बार खुलता है नागचंद्रेश्वर महादेव मंदिर, नागदेव के होते हैं दर्शन!

इंदौर/उज्जैन.हिंदू धर्म में सदियों से नागों की पूजा करने की परंपरा रही है। हिंदू परंपरा में नागों को भगवान का आभूषण भी माना गया है। भारत में नागों के अनेक मंदिर हैं, इन्हीं में से एक मंदिर है उज्जैन स्थित नागचंद्रेश्वर का। इसकी खास बात यह है कि यह मंदिर साल में सिर्फ एक दिन नागपंचमी पर ही दर्शनों के लिए खोला जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन नागदेव स्वयं मंदिर में मौजूद रहते हैं। नागपंचमी 1 अगस्त को है। ऐसे में 31 जुलाई की रात 12 बजे नागचंद्रेश्वर महादेव मंदिर के पट खुलेंगे तथा 1 अगस्त की रात 12 बजे तक दर्शन होंगे। नागचंद्रेश्वर के दर्शन को आने वाले आम श्रद्धालु रात 10.30 बजे तक ही दर्शन की लाइन में लग सकेंगे।

डेढ़ से दो घंटे में दर्शन : नागपंचमी पर ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर मंदिर में प्राचीन श्री नागचंद्रेश्वर महादेव के सामान्य एवं वीआईपी मार्ग से श्रद्धालु के लिए प्रशासन ऐसी व्यवस्था कर रहा है कि डेढ़ से दो घंटे में दर्शन हो जाएं। वर्ष में एक बार खुलने वाले नागचंद्रेश्वर महादेव मंदिर में दर्शन के लिए इस बार भी प्रशासन को देशभर से करीब दो लाख से अधिक श्रद्धालु के उमडने की संभावना है। प्रशासक जयंत जोशी ने बताया कि इस बार ऐसी व्यवस्था की जा रही है कि आम एवं वीआईपी दोनों ही प्रकार के दर्शनार्थियों को डेढ़ घंटे से दो घंटे में दर्शन कराया जा सके।

रात 12 बजे खुलेंगे पट : नागपंचमी महापर्व पर विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर मंदिर के शिखर पर स्थित प्राचीन श्री नागचंद्रेश्वर महादेव के गुरुवार-शुक्रवार की मध्य रात 12.00 बजे पट खुलेंगे और परंपरा अनुसार पंचायती महानिर्वाणी अखाड़े के महंत भगवान नागचंद्रेश्वर महादेव का प्रथम पूजन करेंगे। पूजन के बाद मंदिर के पट आम श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोल दिए जाएंगे।

नाग आसन पर शिव-पार्वती के दर्शन : नागचंद्रेश्वर मंदिर में श्रद्धालु 11वीं शताब्दी की अद्भुत प्रतिमा के दर्शन करेंगे। इसमें फन फैलाए नाग के आसन पर शिव-पार्वती बैठे हैं। महानिर्वाणी अखाड़े के प्रतिनिधि महंत रामेश्वर दास महाराज ने बताया नागपंचमी पर इस प्रतिमा के दर्शन के बाद श्रद्धालु नागचंद्रेश्वर महादेव के दर्शन करेंगे। कहते हैं यह प्रतिमा नेपाल से यहां लाई गई थी। उज्जैन के अलावा दुनिया में कहीं भी ऐसी प्रतिमा नहीं है। ऐसी मान्यता है कि नागपंचमी के दिन खुद नागदेव मंदिर में मौजूद रहते हैं।

मनमोहक प्रतिमा है नागचंद्रेश्वर की : उज्जैन स्थित ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर के सबसे ऊपरी तल पर बने इस मंदिर के दर्शन करने लाखों लोग यहां नागपंचमी के दिन पहुंचते हैं। नागचंद्रेश्वर के दर्शनों के लिए एक दिन पहले ही यहां श्रद्धालुओं को लंबी कतारें लग जाती हैं। मंदिर में प्रवेश करते ही दाईं ओर भगवान नागचंद्रेश्वर की मनमोहक प्रतिमा के दर्शन होते हैं। शेषनाग के आसन पर विराजित शिव-पार्वती की सुंदर प्रतिमा के दर्शन कर श्रद्धालु स्वयं को धन्य मानते हैं। यह प्रतिमा मराठाकालीन कला का उत्कृष्ट नमूना है। यह प्रतिमा शिव-शक्ति का साकार रूप है।

गतवर्ष 2.5 लाख भक्तों ने किए थे दर्शन : भगवान श्री नागचंद्रेश्वर महादेव के दर्शन के लिए देशभर से ढाई लाख से अधिक श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा। 24 घंटे निरंतर दर्शन के बाद रात 12.30 बजे फिर एक वर्ष के लिए मंदिर के पट बंद कर दिए गए थे जो गुरुवार रात 12 बजे खुलेंगे। गेट बंद करने के पूर्व त्रिकाल पूजा के क्रम में रात 8 बजे महाकाल मंदिर की ओर से परंपरागत पूजन की जाती है।
साल में एक बार खुलता है नागचंद्रेश्वर महादेव मंदिर, नागदेव के होते हैं दर्शन!

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बुधवार, 30 जुलाई 2014

ट्यूमर से लड़ने में सक्षम नैनो पार्टिकल तैयार

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न्यूयॉर्क। प्राण घातक रोग कैंसर से लड़ने के प्रयास में शोधकर्ताओं ने अतिसूक्ष्म कण (नैनोपार्टिकल) तैयार किया है जिसमें कई तरह के एजेंट्स को समाहित किया जा सकता है। ये एजेंट्स शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को सक्रिय और मजबूत कर ट्यूमर पर हमला बोलते हैं।
अमेरिका स्थित डर्टमाउथ कॉलेज के प्रोफेसर स्टीव फीरिंग ने कहा, अब तक के सभी शोध से अलग हमने प्रतिरक्षा प्रणाली को सक्रिय करने के लिए नैनोपार्टिकल का इस्तेमाल किया है। नैनोपार्टिकल की सबसे रोमांचक बात यह है कि छोटा होने के बावजूद इसमें कई एजेंट्स को शामिल किया जा सकता है। ट्यूमर प्रतिरक्षा प्रणाली पर हमला कर यह अपनी वृद्धि करता है।
कैंसरीकृत कोशिकाओं के टूटने और फैलने पर भी प्रतिरक्षा प्रणाली सामान्य रहती है। यह शोध जर्नल नैनोमेडिसिन और नैनोबायोटेक्नोलॉजी में प्रकाशित हुआ है। sabhar :http://www.jagran.com/

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खुशकिस्मत हैं हम कि ज़िंदा हैं, दो साल पहले सोलर फ्लेयर से बची धरती, नासा का खुलासा

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वाशिंगटन. राष्ट्रीय वैमानिकी एवं अंतरिक्ष प्रशासन ( नासा) ने एक सनसनीखेज रहस्योद्धाटन करते हुए कहा है कि 23 जुलाई 2012 को सूर्य पर आई एक शक्तिशाली सौर आंधी के दौरान विशाल सोलर फ्लेयर (सौर ऊर्जा की बहुत बड़ी मात्रा) या कोरोनल मास इजेक्शन (सीएमई) की टक्कर से पृथ्वी बच गई.
पिछले 150 सालों के दौरान यह सबसे बड़ी सौर आंधी मानी जा रही है. अमेरिका के कोलराडो विश्वविद्यालय के डैनियल बेकर ने कहा, यदि ऐसा हुआ होता, तो हम अबतक टुकड़े चुन रहे होते. उत्क्षेपण (इजेक्शन) इतना शक्तिशाली था कि हम फिर से आदिम युग में पहुंच गए होते.
एक अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, एक ऐसी आपदा से बचने में हम भाग्यशाली रहे, जो बिल्कुल हमारे सिर पर थी. सूर्य का रुख पृथ्वी से थोड़ा सा हटने के कारण ही ऐसा संभव हो पाया. अगर ऐसा एक सप्ताह पहले हुआ होता, तो परिणाम कुछ और ही होता.
बेकर कहते हैं, पृथ्वी और इसके निवासी इस बात के लिए खुशकिस्मत हैं कि 2012 का उत्क्षेपण एक सप्ताह पहले नहीं हुआ. वैज्ञानिकों ने कहा कि प्रत्यक्ष सीएमई में इतनी ताकत होती है कि वह संचार के तमाम नेटवर्क, जीपीएस और विद्युत ग्रिड खत्म कर सकता है, जिसके कारण चहुंओर अंधेरा छा जाता.sabhar :http://www.palpalindia.com/

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जिनके एक इशारे से इंद्र देव बादल लेकर आ जाते

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सावन आ चुका है लेकिन आसमान से सूर्य देव आग उगल रहे हैं। प्यासी धरती पानी-पानी चिल्ला रही है लेकिन इन्द्र देव हैं की पानी नहीं बरसाने की कसम खाए बैठे हैं।

ऐसे में उस संत की याद आती है जिनके एक इशारे से इंद्र देव बादल लेकर आ जाते और झमाझम बरसात होने लगती थी।

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इस महान संत का वास्तविक नाम 'शिवरत्न पंडित' था। इनका जन्म गोरखपुर के दीपगढ़ गांव में हुआ था। 15 वर्ष की उम्र में ही इन्होंने गृह त्याग कर दिया और काशी में आकर रहने लगे।

यहीं तप साधना द्वारा इन्होंने ऐसी सिद्घियां हासिल कर ली कि इनके एक संकेत मात्र से खिली हुई धूप में भी बरसात होने लगती थी।यह महान संत काशी में कच्चा बाबा के नाम से प्रसिद्घ हुए। कच्चा बाबा के नाम से मिली प्रसिद्घि का कारण यह था कि इन्हें जो भी चावल, दाल, आटा मिलता उसे बिना पकाए कच्चा ही खा जाते थे।

इस महान संत ने 84 साल की उम्र में 1914 ईश्वी में देहत्याग किया। अगर यह संत आज होते तो जिस तरह से पानी के लिए त्राहि-त्राहि मची है वह हाल नहीं होता।
sabhar :http://www.amarujala.com/

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