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रविवार, 6 अगस्त 2023

देखें: चंद्रयान-3 अंतरिक्ष यान द्वारा ली गई चंद्रमा की पहली तस्वीरें

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देखें: चंद्रयान-3 अंतरिक्ष यान द्वारा ली गई चंद्रमा की पहली तस्वीरें

शनिवार को चंद्रमा की कक्षा में प्रवेश करने के बाद चंद्रयान-3 ने चंद्रमा की गड्ढायुक्त सतह पर कब्जा कर लिया।

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शनिवार, 5 अगस्त 2023

UP News : गिफ्ट डीड में केवल आवासीय-कृषि भूमि, फर्म, कंपनी या ट्रस्ट को नहीं मिलेगी पांच हजार में प्रापर्टी

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UP News : गिफ्ट डीड में केवल आवासीय-कृषि भूमि, फर्म, कंपनी या ट्रस्ट को नहीं मिलेगी पांच हजार में प्रापर्टी 

पांच हजार रुपये में संपत्ति का हस्तांतरण केवल रक्त संबंधों में ही मान्य होगा। संस्था, कंपनी, ट्रस्ट आदि पर गिफ्ट डीड लागू नहीं होगी। इसके तहत केवल आवासीय और कृषि संपत्ति को ही दान में दिया जा सकेगा।

पांच हजार रुपये में संपत्ति का हस्तांतरण केवल रक्त संबंधों में ही मान्य होगा। संस्था, कंपनी, ट्रस्ट आदि पर गिफ्ट डीड लागू नहीं होगी। इसके तहत केवल आवासीय और कृषि संपत्ति को ही दान में दिया जा सकेगा। औद्योगिक, व्यवसायिक और संस्थागत संपत्ति इसके दायरे से बाहर रहेंगी। गुरुवार को इस संबंध में शासनादेश जारी कर दिया गया।

स्टांप एवं पंजीयन में प्रमुख सचिव लीना जौहरी द्वारा जारी शासनादेश में कहा गया है कि पांच हजार रुपये में गिफ्ट डीड के तहत संपत्ति का हस्तांतरण केवल पुत्र, पुत्री, पिता, माता, पति, पत्नी, पुत्रवधू, सगा भाई, सगे भाई के मृतक होने की स्थिति में उनकी पत्नी, सगी बहन, दामाद और पुत्र-पुत्री के बेटा-बेटी को ही किया जा सकता है।

शासनादेश के मुताबिक दान में मिली संपत्ति रजिस्ट्री की तारीख से पांच साल के अंदर उपहार में दी गई तो ये नियम लागू नहीं होगा। यानी पांच साल तक संपत्ति का हस्तांतरण नहीं किया जा सकेगा। गिफ्ट डीड के तहत व्यक्ति से व्यक्ति को संपत्ति का हस्तांतरण किया जाएगा। फर्म, कंपनी, ट्रस्ट या संस्था इसके दायरे में नहीं आएंगे। sabhar https://www.amarujala.com

गिफ्ट डीड में केवल आवासीय-कृषि भूमि, फर्म, कंपनी या ट्रस्ट को नहीं मिलेगी पांच हजार में प्रापर्टी

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Bharatnet package को कैबिनेट से मंजूरी, फर्स्ट फेज में होगा 1.3 ट्रिलियन रुपये का निवेश

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Bharatnet package को कैबिनेट से मंजूरी, फर्स्ट फेज में होगा 1.3 ट्रिलियन रुपये का निवेश 

भारतनेट पैकेज (Bharatnet package) को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने शनिवार को मंजूरी दे दी है. दूरसंचार विभाग (DoT) के एक शीर्ष अधिकारी ने इस बारे में जानकारी देते हुए कहा कि सरकार की महत्वाकांक्षी भारतनेट प्रोजेक्ट (Bharatnet Project) के अगले फेज को आगे बढ़ाने के लिए 1.3 ट्रिलियन ($ 17 बिलियन) का निवेश किया जाएगा. बिजनेस स्टैंडर्ड की खबर के मुताबिक, भारतनेट (Bharatnet) का मकसद हर भारतीय गांव को फिक्स्ड-लाइन ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी (fixed-line broadband connectivity) उपलब्ध करना है.

भारतनेट का मकसद


खबर के मुताबिक, कैबिनेट मीटिंग में भारतनेट (Bharatnet) के नेक्स्ट फेज को आगे बढ़ाने के लिए एक नए ऑपरेशन मॉडल को भी अपनाया गया, जिसका मकसद अगले दो महीनों के भीतर देश भर में 250,000 ग्राम पंचायतों के तहत 674,000 गांवों को कवर करना है. बता दें, अगस्त 2020 में, सरकार ने देश के हर गांव को इंटरनेट की कम से कम 100 एमबीपीएस बैंडविड्थ उपलब्ध करने के लिए ऑप्टिकल फाइबर केबल के जरिये जोड़ने की अनाउंसमेंट की थी. फिलहाल 194,000 गांव अभी तक बिछाई गई 584,000 किमी फाइबर ऑप्टिक केबल से जुड़े हैं.



ग्राम पंचायतों को जोड़ने का मॉडल


भारतनेट (Bharatnet package) ग्राम पंचायतों को राज्य-आधारित मॉडल, निजी क्षेत्र मॉडल और सीपीएसयू मॉडल जैसे कई मॉडल के जरिये जोड़ता है. अगले फेज में इसे अब एक ऐसा सिस्टम द्वारा सेटअप किया जाएगा जहां व्यक्तिगत घरों में केबल बिछाने और उनके रखरखाव के लिए हर गांव में ग्रामीण उद्यमियों (जिन्हें उद्यमी कहा जाता है) को चुना जाएगा.


खबर के मुताबिक, ऑप्टिकल फाइबर केबल (optical fiber cable) को ग्रामीण स्तर तक लाने की पूंजीगत लागत सरकार द्वारा वहन की जाएगी, लेकिन उद्यमी इसे आगे बढ़ाने के लिए जिम्मेदार होगा. भारतनेट (Bharatnet)  के जरिये ग्रामीण भारत में ई-गवर्नेंस (e-governance), ई-स्वास्थ्य, ई-शिक्षा, ई-बैंकिंग, इंटरनेट और दूसरी सर्विस के डिस्ट्रीब्यूशन को आसान बनाना है. Sabhar https://www.abplive.com

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Modi Surname Case: 'जज साहब को मालूम है...' राहुल गांधी की सजा पर 'सुप्रीम' रोक के बाद सामने आया कपिल सिब्बल का पहला बयान

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 Delhi News: पीएम नरेंद्र मोदी सरनेम मामले में चार जुलाई को सुप्रीम कोर्ट द्वारा कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) की सजा पर रोक लगने के बाद राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल (Kapil sibal) ने लोकसभा स्पीकर को नेक सलाह दी है. उन्होंने कहा है कि मोदी सरनेम का मामला एक राजनीतिक एजेंडा है. इस मामले को कानूनी प्रक्रिया में लाना अदालतों का दुरुपयोग है. राहुल गांधी ने मोदी सरनेम को लेकर भाषण कर्नाटक में दिया था. जबकि याचिका गुजरात में दायर की गई. यहां तक की न्यायाधीश को भी पता था कि यदि सजा दो साल से कम होती तो उनकी लोकसभा सदस्यता समाप्त नहीं होती. 

इस मसले पर कपिल सिब्बल ने स्पीकर साबह से कहा है कि सोमवार को राहुल गांधी की सदस्यता बहाल कर देनी चाहिए. अदालतों का दुरुपयोग केवल राहुल गांधी के केस में नहीं हो रहा है. अभी तक ऐसा कई मामले में हो चुका है. सपा नेता आजम खान का उदाहरण देते हुए कहा कि उनके मामले में भी यही हुआ. कोर्ट का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए. क्रिमिनल डिफेमेशन खत्म होना चाहिए. किसी को जेल में भेजने का कोई मतलब नहीं है. 

सरनेम सियासी मसला


कपिल सिब्ब्ल का कहना है कि यह एक राजनीतिक मसला है. जज साहब ने भी सजा दो साल का दिया. अगर एक दिन भी कम की सजा देते तो राहुल गांधी की सदस्यता समाप्त नहीं होती, पर उन्होंने वैसा नहीं किया. दरअसल, याचिका डालने वाले कोर्ट के जरिए सियासी लाभ उठाना चाहते हैं, ताकि प्रभावी नेताओं को अदालती चक्कर में उलझाकर में बिजी रखा जा सके. साथ ही इसका चुनावी फायदा उठाना संभव हो सके. बता दें कि दो दिन पहले कपिल सिब्बल ने हरियाणा के नूंह हिंसा मसले पर हिंदूवादी संगठनों के नेताओं पर तंज कसा था. उन्होंने कहा था कि नूंह हिंसा को लेकर सभी को ​विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल से सवाल पूछने की जरूरत है? उन्होंने पूछा है कि क्या विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल सांप्रदायिक हिंसा के एक समान फैक्टर हैं? बीजेपी के शीर्ष अधिकारी सांप्रदायिक नरसंहार के ऐसे कृत्यों पर चुप क्यों रहते हैं? आखिरी सवाल यह पूछा था कि इससे किसका लाभ होता है? Modi Surname Case: 'जज साहब को मालूम है...' राहुल गांधी की सजा पर 'सुप्रीम' रोक के बाद सामने आया कपिल सिब्बल का पहला बयान. Sabhar www.abplive.com

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