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सोमवार, 31 जुलाई 2023

आज लोकसभा में पेश होगा दिल्ली सेवा बिल, जानिए पास होने से क्या बदलेगा?

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Mon. Jul 31st, 2023 19:08:51
    आज लोकसभा में पेश होगा दिल्ली सेवा बिल, जानिए पास होने से क्या बदलेगा?

    दिल्ली (Delhi) की आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार के लिए आज का दिन निर्णायक साबित हो सकता है क्योंकि उम्मीद जताई जा रही है कि आज ट्रांसफर पोस्टिंग से जुड़ा बिल लोकसभा (Lok Sabha) में पेश होगा. हालांकि आज ही विपक्षी गठबंधन इंडिया (I.N.D.I.A) की परीक्षा का दिन भी साबित हो सकता है. हालांकि, लोकसभा में एनडीए (NDA) के पास बहुमत है तो वहां आसानी से बिल पास हो सकता है. पर देखना होगा कि विपक्ष एकजुट होकर राज्यसभा में दिल्ली सेवा बिल (Delhi Services Bill) को पास होने से रोक पाता है या नहीं. इस खबर में ये भी जानिए कि अगर दिल्ली सेवा बिल पास हो जाता है तो उससे क्या-क्या बदलाव आएंगे.

    ‘INDIA’ गठबंधन का लिटमस टेस्ट आज

    इस अध्यादेश पर केजरीवाल सरकार बीते एक अरसे से विरोध कर रही है. देश के सर्वोच्च अदालत के बाद ये अध्यादेश सबसे बड़ी पंचायत यानी संसद में है और इस बिल के खिलाफ दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल देशभर के विपक्षी संगठनों से मुलाकात कर इसी बिल को चुनौती देने के लिए समर्थन की मांग कर रहे थे. ऐसे में ये भी माना जा रहा है कि अगर आज केंद्र सरकार ने लोकसभा में यह बिल पेश किया तो ‘INDIA’ गठबंधन के लिए ये एक लिटमस टेस्ट साबित हो जाएगा. हालांकि आम आदमी पार्टी की पूरी शिद्दत के साथ इस बिल को पारित होने से रोकने की कोशिश करेगी.

    AAP सांसद राघव चड्ढा ने साधा निशाना

    आप के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने कहा कि ये लड़ाई सत्य बनाम असत्य की है. बुराई बीजेपी के खेमे में है. ब्रह्मांड की सारी शक्तियां हमारे साथ हैं. हम इसको रोक पाएंगे. मैं तो बीजेबीप के कई सांसदों को कहूंगा कि सत्य का साथ दीजिए.

    बिल पास होने से होंगे क्या बदलाव?

    जान लें कि दिल्ली सेवा बिल गृह मंत्री अमित शाह संसद में पेश कर सकते हैं. केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र सरकार संशोधन अध्यादेश 19 मई को जारी किया था. पीएम मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इस बिल को मंजूरी दे दी गई है. इस अध्यादेश में कहा गया कि राष्ट्रीय राजधानी लोक सेवा प्रधिकरण नाम का एक प्राधिकरण होगा. जो उसे दी गईं शक्तियों का इस्तेमाल करेगा और उसे सौंपी गईं जिम्मेदारियों का निर्वहन करेगा.

    गौरतलब है कि लोकसभा में इस बिल को पास कराने में मोदी सरकार को कोई परेशानी दिखाई नहीं दे रही है क्योंकि सरकार के पास बहुमत है. लेकिन सरकार की भी परीक्षा राज्यसभा में होगी और सीएम केजरीवाल भी राज्यसभा में अपना पूरा ध्यान केंद्रित कर रहे हैं. लिहाजा आम आदमी पार्टी के नेता विपक्षी सांसदों की मदद से राज्यसभा में इसे रोकने की कोशिश में हैं.

    अध्यादेश आने के बाद से आम आदमी पार्टी ने इसके खिलाफ आवाज उठानी शुरू कर दी थी. सीएम केजरीवाल ने इसे दिल्ली के साथ धोखा बताया था. हालांकि आंकड़े इस बात की गवाही दे रहे हैं कि लोकसभा और राज्यसभा में ऑर्डिनेंस पारित होने में कोई खास परेशानी केंद्र सरकार को नहीं होगी क्योंकि लोकसभा में विपक्षी गठबंधन INDIA के 142 सांसद हैं तो वहीं राज्यसभा में INDIA के 96 सांसद हैं. इस गठबंधन में कुल 26 सियासी दल शामिल हैं.

    इधर NDA की स्थिति दोनों ही सदनों में मजबूत है क्योंकि लोकसभा में NDA के 329 सांसद हैं तो राज्यसभा में 101 सदस्य हैं. साथ ही NDA के साथ भी कई सियासी दल शामिल हैं. कांग्रेस समेत दूसरे विपक्षी दलों का AAP को सपोर्ट मिल चुका है. अब जब ये बिल संसद में पेश किया जाएगा तो INDIA गठबंधन के सभी दल इसका विरोध करेंगे. लेकिन राज्यसभा के लिए मोदी सरकार भी खास दांव चलेगी. मोदी सरकार का ये दांव क्या होगा ये तो आने वाले वक्त में ही तय होगा.

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    भारत और जापान के वैज्ञानिकों ने खोजा 60 करोड़ वर्ष पुराना समुद्री पानी, अब बदल जाएगी जीवन की परिकल्पना!

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    भारत और जापान के वैज्ञानिकों ने हिमालय पर्वत पर समुद्री चट्टानों से 60 करोड़ वर्ष पुराना पानी खोज निकाला है। इससे जीवन की परिकल्पना को नए सिरे से पारिभाषित करने में मदद मिल सकती है। इतना ही नहीं, इसके जरिये पूर्व में विलुप्त हुए महासागरों की वजहों का भी पता लगाया जा सकता है।

    भारत और जापान के वैज्ञानिकों ने मिलकर हिमालय में इतने पुराने समुद्री पानी की खोज की है, जिससे जीवन की परिकल्पना नए सिरे से समझने में न सिर्फ मदद मिल सकती है, बल्कि जीवन की पूरी परिकल्पना ही बदल सकती है। भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) और निगाता विश्वविद्यालय, जापान के वैज्ञानिकों ने हिमालय में करीब 60 करोड़ वर्ष पुराने समुद्री जल की खोज की है। समुद्री जल की ये बूंदें खनिज भंडारों के बीच थीं। बेंगलुरु स्थित आईआईएससी ने बृहस्पतिवार को एक विज्ञप्ति में यह जानकारी दी। विज्ञप्ति के अनुसार वहां एकत्र निक्षेपण में कैल्शियम और मैग्नीशियम कार्बोनेट दोनों थे।

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    भारत और जापान के वैज्ञानिकों ने खोजा 60 करोड़ वर्ष पुराना समुद्री पानी, अब बदल जाएगी जीवन की परिकल्पना!

    भारत और जापान के वैज्ञानिकों ने हिमालय पर्वत पर समुद्री चट्टानों से 60 करोड़ वर्ष पुराना पानी खोज निकाला है। इससे जीवन की परिकल्पना को नए सिरे से पारिभाषित करने में मदद मिल सकती है। इतना ही नहीं, इसके जरिये पूर्व में विलुप्त हुए महासागरों की वजहों का भी पता लगाया जा सकता है।

    भारत और जापान के वैज्ञानिकों ने खोजा 60 करोड़ वर्ष पुराना समुद्री पानी, अब बदल जाएगी जीवन की परिकल्पना!Image Source : AP
    Edited By: Dharmendra Kumar Mishra 28 Jul 2023, 14:36:05 IST

    भारत और जापान के वैज्ञानिकों ने मिलकर हिमालय में इतने पुराने समुद्री पानी की खोज की है, जिससे जीवन की परिकल्पना नए सिरे से समझने में न सिर्फ मदद मिल सकती है, बल्कि जीवन की पूरी परिकल्पना ही बदल सकती है। भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) और निगाता विश्वविद्यालय, जापान के वैज्ञानिकों ने हिमालय में करीब 60 करोड़ वर्ष पुराने समुद्री जल की खोज की है। समुद्री जल की ये बूंदें खनिज भंडारों के बीच थीं। बेंगलुरु स्थित आईआईएससी ने बृहस्पतिवार को एक विज्ञप्ति में यह जानकारी दी। विज्ञप्ति के अनुसार वहां एकत्र निक्षेपण में कैल्शियम और मैग्नीशियम कार्बोनेट दोनों थे।

    रिपोर्ट में कहा गया है कि निक्षेपण के विश्लेषण से टीम को उन संभावित घटनाओं की जानकारी मिली, जिनके कारण पृथ्वी के इतिहास में एक बड़ी ऑक्सीजनिकरण की घटना हुई होगी। बयान के अनुसार, वैज्ञानिकों का मानना है कि 70 से 50 करोड़ वर्ष पहले, पृथ्वी बर्फ की मोटी चादरों से ढकी थी। इसमें कहा गया है कि इसके बाद पृथ्वी के वायुमंडल में ऑक्सीजन की मात्रा में वृद्धि हुई जिससे जटिल जीवन रूपों का विकास हुआ। आईआईएससी ने कहा कि वैज्ञानिक अब तक, यह ठीक से नहीं समझ पाए हैं कि अच्छी तरह से संरक्षित जीवाश्मों की कमी और पृथ्वी के इतिहास में मौजूद सभी पुराने महासागरों के लुप्त होने की वजह का आपस में क्या संबंध था।

    पुराने महासागरों के लुप्त होने की वजह का भी चल सकता है पता

    हिमालय में ऐसी समुद्री चट्टानों का पता चलने से कुछ उत्तर मिल सकते हैं। सेंटर फॉर अर्थ साइंसेज (सीईएएस), आईआईएससी के शोधार्थी और 'प्रीकैम्ब्रियन रिसर्च' पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन के पहले लेखक प्रकाश चंद्र आर्य ने कहा, ‘‘ हम पुराने महासागरों के बारे में ज्यादा नहीं जानते हैं। वे वर्तमान महासागरों की तुलना में कितने अलग या समान थे? क्या वे अधिक अम्लीय या क्षारीय, पोषक तत्वों से भरपूर, गर्म या ठंडे थे, उनकी रासायनिक और समस्थानिक संरचना क्या थी?" उन्होंने कहा कि इस तरह के विश्लेषण से पृथ्वी पर प्राचीन जलवायु के बारे में जानकारी मिल सकती है। पुराने महासागरों के विलुप्त होने की वजहों का भी पता लगाया जा सकता है। (भाषा) sabhar India TV.in


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    रविवार, 30 जुलाई 2023

    Artificial Intelligence: इकलौता सेक्टर जहां इंसानों की नौकरी नहीं छीन पाएगा AI, चौंका देगा नाम

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    Artificial Intelligence: इकलौता सेक्टर जहां इंसानों की नौकरी नहीं छीन पाएगा AI, चौंका देगा नाम 

    Artificial Intelligence Replacing Humans: हर जगह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का दखल बढ़ता जा रहा है. आने वाले समय में AI की वजह से लोगों को नौकरियों से हाथ धोना पड़ सकता है. हालांकि, एक सेक्टर ऐसा है जहां AI कुछ नहीं उखाड़ पाएगा.

    Artificial Intelligence Risks: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इस समय की सबसे हॉट इंडस्ट्री है. ChatGPT से लेकर कई एआई टूल्स ने ना केवल हैरान किया बल्कि हमारे लिए चुनौतियां भी बढ़ाई हैं. एआई को लेकर सबसे बड़ा डर यही है कि ये इंसानों की नौकरियां खत्म कर सकता है. हालांकि, एआई टेक्नोलॉजी ने कई जगह अपनी काबिलियत को साबित किया है. इससे सवाल खड़ा हो गया है कि क्या एआई इंसानों से बेहतर काम कर सकता है. लेकिन एक ऐसा सेक्टर है जहां काम करने वालों को ज्यादा टेंशन लेने की जरूरत नहीं है.
    Artificial Intelligence Risks: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इस समय की सबसे हॉट इंडस्ट्री है. ChatGPT से लेकर कई एआई टूल्स ने ना केवल हैरान किया बल्कि हमारे लिए चुनौतियां भी बढ़ाई हैं. एआई को लेकर सबसे बड़ा डर यही है कि ये इंसानों की नौकरियां खत्म कर सकता है. हालांकि, एआई टेक्नोलॉजी ने कई जगह अपनी काबिलियत को साबित किया है. इससे सवाल खड़ा हो गया है कि क्या एआई इंसानों से बेहतर काम कर सकता है. लेकिन एक ऐसा सेक्टर है जहां काम करने वालों को ज्यादा टेंशन लेने की जरूरत नहीं है.

    ऑर्गेनाइजेशन फोर इकोनॉमिक को-ऑपरेशन एंड डेवलपमेंट ने कहा कि 27 फीसदी जॉब के लिए जरूरी स्किल्स के लिए ऑटोमेटेड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल किया जा सकता है. यह तो साफ है कि पिछले काफी समय से रोबोट्स ब्लू कॉलर जॉब खत्म कर रहे हैं. अब नए AI सिस्टम आने के बाद व्हाइट कॉलर जॉब पर भी असर पड़ने का खतरा है.

    इस फील्ड में फेल है AI

    एडवोकेट्स और इकोनॉमिस्ट्स से लेकर राइटर्स और एडमिनिस्ट्रेटिव स्टाफ की जॉब्स पर खतरा आ गया है. हालांकि, एक नई रिसर्च स्टडी में दावा किया गया कि एक इंडस्ट्री ऐसी है जहां AI इंसानों की टक्कर नहीं ले पाएगा. इस फील्ड में इंसानों के स्किल्स रोबोट की तुलना में काफी बेहतर साबित होते हैं. इस इंडस्ट्री की नाम रिलीजन यानी धर्म है.

    इस फील्ड में फेल है AI

    एडवोकेट्स और इकोनॉमिस्ट्स से लेकर राइटर्स और एडमिनिस्ट्रेटिव स्टाफ की जॉब्स पर खतरा आ गया है. हालांकि, एक नई रिसर्च स्टडी में दावा किया गया कि एक इंडस्ट्री ऐसी है जहां AI इंसानों की टक्कर नहीं ले पाएगा. इस फील्ड में इंसानों के स्किल्स रोबोट की तुलना में काफी बेहतर साबित होते हैं. इस इंडस्ट्री की नाम रिलीजन यानी धर्म है.

    हालांकि, रिलीजन को एक इंडस्ट्री या सेक्टर का नाम देना अजीब लगे, लेकिन धार्मिक एक्टिविटी चलाने के लिए हर धार्मिक समूह को इंसानों की जरूरत पड़ती है. पुजारियों से लेकर प्रचारकों तक इंसान की इन जिम्मेदारियों को निभाते हैं, ताकि धर्म बना रहे और इसका प्रचार-प्रसार भी चलता रहे.

    भरोसे लायक नहीं AI

    रोबोट पुजारी या प्रचारक और एआई प्रोग्राम धार्मिक विश्वासों को साझा करने के नए तरीके पेश कर सकते हैं. हालांकि, जर्नल ऑफ एक्सपेरिमेंटल साइकोलॉजी में पब्लिश एक स्टडी में पाया गया कि धर्म में एआई या रोबोट का इस्तेमाल विश्वसनीयता खत्म कर सकता है. अगर धार्मिक कामकाज में इनका इस्तेमाल किया जाए तो धार्मिक समूहों को दिया जाने वाला दान कम होने का खतरा है.

    AI-रोबोट की जगह इंसानों को तरजीह

    जापान के क्योटो शहर स्थित Kodai-Ji बौद्ध टेंपल में Mindar रोबोट उपदेश देता है. इसका चेहरा इंसानों की तरह है और ये उपदेश देते हुए आंखें भी झपकाता है. इस बनाने में करीब 10 लाख डॉलर का खर्च आया है. प्रवचन सुनने वाले 398 लोगों का सर्वे हुआ. इसमें सामने आया कि जिन्होंने Mindar से प्रार्थना सुनी उन्होंने कम दान दिया, जबकि मानव पुजारी से प्रार्थना सुनने वालों ने ज्यादा दान दिया.

    सर्वे में शामिल लोगों ने माना कि एआई प्रोग्राम में इंसानों की तरह सोचने या महसूस करने की क्षमता नहीं है. इसलिए धर्म एक ऐसी जगह है जहां इंसानों की तुलना में एआई फिसड्डी साबित होता है.

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