रविवार, 16 जुलाई 2023
बदलेगा UPA नए नाम के साथ जनता के बीच जाएंगे विपक्ष के नेता,का नाम
0महिलाओं के शरीर की ये 5 जगह होती हैं सबसे ज्यादा उत्तेजक
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सेक्स बहुत ही रोमांच से भरा अनुभव होता है। लेकिन एक ही तरह से सेक्स करते हुए लोग बोर हो जाते हैं। उन्हें सेक्स करने के नए तरीकों के बारे में भी नहीं पता होता है। ऐसी स्थिति में वह लोग परेशान भी हो जाते हैं। लेकिन समय के साथ लोग काफी कुछ सीख जाते हैं। जैसे बहुत से लोगों को आज भी नहीं पता होगा कि महिलाओं के शरीर के ऐसे कौन से अंग होते हैं जहां छूने से महिलाएं काफी ज्यादा उत्तेजित हो सकती हैं। जैसे पुरुषों के कुछ अंगों को छूने से वह काफी ज्यादा उत्तेजित हो जाते हैं। वैसे ही महिलाओं में भी ऐसे अंग हैं जिन्हें छूने से वह उत्तेजित हो जाती हैं
।पुरुष अपनी पार्टनर को सही से उत्तेजित नहीं कर पाते हैं। इंटरकोर्स से पहले फोरप्ले करना बहुत जरूरी होता है। फोरप्ले भी इस तरीके से करना चाहिए कि आपकी पार्टनर फोरप्ले से काफी ज्यादा उत्तेजित हो जाए। यह तभी होगा जब आप अपनी पार्टनर के उन अंगों को स्पर्श करें जिससे वह काफी उत्तेजित हो जाती हैं। आज हम आपको महिलाओं के कुछ ऐसे अंग बताएंगे जहां छूने से वह उत्तेजित हो जाती हैं। यह उन लोगों के भी बहुत काम आएगा जो अपनी पार्टनर की सेक्स इच्छा नहीं बना पाते।
घुटनों के पीछे
महिलाओं की यह जगह अक्सर अनदेखी की जाती है, यह क्षेत्र तंत्रिका अंत में समृद्ध है और अत्यधिक संवेदनशील है। अगर आप अपनी पार्टनर के इस अंग पर किस करते हैं तो वह काफी ज्यादा उत्तेजित हो जाएगी।
आंतरिक जांघ
यदि आप महिलाओं की जांघ के पीछे वाले हिस्से पर स्पर्श करते हैं तो वह उत्तेजित हो जाएगी। जब आपकी पार्टनर को सेक्स की इच्छा नहीं हो रही है तो आप उनको किस करते हुए उनकी जांघों को छुएं। आपकी पार्टनर उत्तेजित हो जाएगी। साथ ही अगर आप चाहते हैं कि आपकी पार्टनर काफी ज्यादा उत्तेजित हो जाए तो आप उनकी जांघों पर किस भी कर सकते हैं। ऐसा करने से आपकी पार्टनर काफी उत्तेजित हो जाएगी। महिलाओं की जांघों का आंतरिक भाग काफी ज्यादा संवेदनशील होता है।
हाथ
अब आप सोच रहे होंगे कि महिलाओं के हाथ कैसे उत्तेजक अंग हो सकते हैं। लेकिन आपको बता दें कि अगर आप अपनी पार्टनर के हाथों को अच्छे से स्पर्श करते हैं तो आप उसे उत्तेजित कर सकते हैं। महिलाओं के हाथ सबसे महत्वपूर्ण इरोजेनस ज़ोन में से एक हैं। जहां स्पर्श करने के बाद महिलाएं काफी उत्तेजित हो जाती हैं।
गर्दन
महिलाओं की गर्दन पर किस करना उन्हें काफी ज्यादा उत्तेजित कर सकता है। आपने कई फिल्मों में भी देखा होगा जब एक्टर किस करते हुए महिला की गर्दन पर किस करने लगता है और महिला काफी उत्तेजित हो जाती है। जिसके बाद वह सेक्स भी करते हैं। ध्यान रखें के महिलाओं की गर्दन को कभी भी नजरअंदाज न करें। इससे आप बेहद उत्तेजित कर सकते हैं।
कान
महिलाओं का यह हिस्सा काफी संवेदनशील होता है। बहुत से लोगों को लगता है कि महिलाओं के कान संवेदनशील नहीं होते, लेकिन वह गलत सोचते हैं। महिलाओं के कान संवेदनशील होते हैं और जब आप महिलाओं के कान को चूमेंगे तो वह बहुत उत्तेजित भी हो जाएंगी। महिलाओं के कान पर अगर आप कोमल स्पर्श से लेकर चंचल जीभ का प्रयोग करते हैं तो आपकी पार्टनर उत्तेजित हो जाएंगी।
चाहे वह बेडरूम के अंदर हो या बाहर, याद रखें, संचार आवश्यक है। यह बेहतर सेक्स की कुंजी है। और परमानंद के उस शिखर तक पहुंचने के लिए मानसिक रूप से उसके मन को महिलाओं के शरीर की ये 5 जगह होती हैं सबसे ज्यादा उत्तेजक
मानसिक संबंध
महिलाएं सेक्स को अपने पार्टनर के साथ भावनात्मक और मानसिक संबंधों से जोड़ती हैं। महिलाएं सोचती हैं कि अपने पार्टनर की इच्छाओं, चाहतों और जरूरतों को जानने का सेक्स एक प्रभावी तरीका है । जिसके कारण वह अधिक बार सेक्स करने लगती हैं।
ऑर्गेज्म
पुरुषों के विपरीत, महिलाएं लगातार कई ओर्गास्म प्राप्त करने में सक्षम होती हैं। पुरुषों के लिए कई बार चरमोत्कर्ष तक पहुंचना काफी कठिन होता है, लेकिन महिलाओं के लिए ये आसान हो सकता है। अगर बेहतर सेक्स हो तो महिलाओं को अधिकतम आनंद और संतुष्टि का अनुभव होता है। इसलिए महिलाएं अधिक बार सेक्स करने की ओर ध्यान देती हैं।
भारत में नागरिकता दी और छीनी कैसे जाती है?
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नागरिकता क़ानून में संशोधन के बाद से ही पूरे देश में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं और ये माँग उठ रही है कि 'सरकार शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता देने वाले इस नए क़ानून को वापस ले क्योंकि यह संवैधानिक भावना के विपरीत है और भेदभावपूर्ण है'.
इसे लेकर देश के कई शहरों में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं और अलग-अलग प्रदर्शनों में हुई हिंसक घटनाओं में अब तक 20 से ज़्यादा लोग मारे गए हैं.
सोशल मीडिया पर भी नए नागरिकता क़ानून की चर्चा है और गूगल पर लोग 'भारतीय नागरिकता अधिनियम' के बारे में लगातार सर्च कर रहे हैं.
क्या है नागरिकता अधिनियम?
नागरिकता अधिनियम, 1955 संविधान लागू होने के बाद भारतीय नागरिकता हासिल करने, इसके निर्धारण और रद्द करने के संबंध में एक विस्तृत क़ानून है. उसे आसान भाषा में समझाने की कोशिश
यह अधिनियम भारत में एकल नागरिकता का प्रावधान करता है यानी भारत का नागरिक किसी और देश का नागरिक नहीं हो सकता.
इस अधिनियम में वर्ष 2019 से पहले पाँच बार संशोधन (वर्ष 1986, 1992, 2003, 2005 और 2015 में) किया जा चुका है.
नवीनतम संशोधन के बाद इस अधिनियम में बांग्लादेश, अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान के छह अल्पसंख्यक समुदायों (हिंदू, बौद्ध, जैन, पारसी, ईसाई और सिख) से ताल्लुक़ रखने वाले लोगों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान किया गया है.
इसी तरह पिछले संशोधनों में भी नागरिकता दिए जाने की शर्तों में कुछ मामूली बदलाव किए जाते रहे हैं.
भारतीय नागरिकता अधिनियम, 1955 के अनुसार कुछ प्रावधानों के अंतर्गत भारत की नागरिकता ली जा सकती है.
क्या हैं प्रावधान?
पहला प्रावधान जन्म से नागरिकता का है.
भारत का संविधान लागू होने यानी कि 26 जनवरी, 1950 के बाद भारत में जन्मा कोई भी व्यक्ति 'जन्म से भारत का नागरिक' है. इसके एक और प्रावधान के अंतर्गत 1 जुलाई 1987 के बाद भारत में जन्मा कोई भी व्यक्ति भारत का नागरिक है, यदि उसके जन्म के समय उसके माता या पिता (दोनों में से कोई एक) भारत के नागरिक थे.
दूसरा प्रावधान वंशानुक्रम या रक्त संबंध के आधार पर नागरिकता देने का है.
इस प्रावधान के अंतर्गत एक शर्त ये है कि व्यक्ति का जन्म अगर भारत के बाहर हुआ हो तो उसके जन्म के समय उसके माता या पिता में से कोई एक भारत का नागरिक होना चाहिए.
दूसरी शर्त ये है कि विदेश में जन्मे उस बच्चे का पंजीकरण भारतीय दूतावास में एक वर्ष के भीतर कराना अनिवार्य है. अगर वो ऐसा नहीं करते तो उस परिवार को अलग से भारत सरकार की अनुमति लेनी होगी.
इस प्रावधान में माँ की नागरिकता के आधार पर विदेश में जन्म लेने वाले व्यक्ति को नागरिकता देने का प्रावधान नागरिकता संशोधन अधिनियम 1992 के ज़रिए किया गया था.
तीसरा प्रावधान पंजीकरण के ज़रिए नागरिकता देने का है.
अवैध प्रवासी को छोड़कर अगर कोई अन्य व्यक्ति भारत सरकार को आवेदन कर नागरिकता माँगता है, तो ये कुछ विधियाँ हैं जिनके आधार पर उसे नागरिकता दी जा सकती है.
1. भारतीय मूल का वो शख़्स जो देश में नागरिकता के लिए आवेदन देने के पहले भारत में कम से कम 7 साल रह रहा हो.
2. भारतीय मूल का वो व्यक्ति जो अविभाजित भारत के बाहर किसी देश का नागरिक हो. मतलब ये कि व्यक्ति पाकिस्तान और बांग्लादेश से बाहर किसी अन्य देश का नागरिक हो, और उस नागरिकता को छोड़कर भारत की नागरिकता चाहता हो.
3. वो शख़्स जिसकी शादी किसी भारतीय नागरिक से हुई हो और वो नागरिकता के आवेदन करने से पहले कम से कम सात साल तक भारत में रह चुका हो.
4. वो नाबालिग़ बच्चे जिनके माता या पिता भारतीय हों.
5. राष्ट्रमंडल के सदस्य देशों के नागरिक जो भारत में रहते हों या भारत सरकार की नौकरी कर रहें हों, आवेदन पत्र देकर भारत की नागरिकता प्राप्त कर सकते हैं.
चौथा प्रावधान भूमि-विस्तार के ज़रिए नागरिकता देने का है. यदि किसी नए भू-भाग को भारत में शामिल किया जाता है, तो उस क्षेत्र में निवास करने वाले व्यक्तियों को स्वतः भारत की नागरिकता मिल जाएगी. मिसाल के तौर पर 1961 में गोवा को, 1962 में पुद्दुचेरी को भारत में शामिल किया गया तो वहाँ की जनता को भारतीय नागरिकता प्राप्त हो गई थी.
पाँचवां प्रावधान नेचुरलाइज़ेशन के ज़रिए नागरिकता देने का है. यानी देश में रहने के आधार पर भी कोई व्यक्ति भारत में नागरिकता हासिल कर सकता है. बशर्ते वो नागरिकता अधिनियम की तीसरी अनुसूची की सभी योग्यताओं पर खरा उतरता हो.
ज़ाहिर है, यह पूरा क़ानून नहीं है, पूरा क़ानून काफ़ी विस्तृत है और यहाँ मोटे तौर पर जानकारी दी गई है, कई शर्तें और डिस्क्लेमर हैं उनके बारे में जानने के लिए पूरा क़ानून पढ़ें.
नागरिकता की बर्ख़ास्तगी?
नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा-9 में किसी व्यक्ति की नागरिकता ख़त्म करने का भी ज़िक्र किया गया है.
तीन तरीक़े हैं जिनके ज़रिए किसी व्यक्ति की भारतीय नागरिकता समाप्त हो सकती है.
यदि कोई भारतीय नागरिक स्वेच्छा से किसी और देश की नागरिकता ग्रहण कर ले तो उसकी भारतीय नागरिकता स्वयं ही समाप्त हो जाएगी.
यदि कोई भारतीय नागरिक स्वेच्छा से अपनी नागरिकता का त्याग कर दे तो उसकी भारतीय नागरिकता समाप्त हो जाएगी.
भारत सरकार को भी निम्न शर्तों के आधार पर अपने नागरिकों की नागरिकता समाप्त करने का अधिकार है.
नागरिक 7 वर्षों से लगातार भारत से बाहर रह रहा हो.
यदि ये साबित हो जाए कि व्यक्ति ने अवैध तरीक़े से भारतीय नागरिकता प्राप्त की.
यदि कोई व्यक्ति देश विरोधी गतिविधियों में शामिल हो.
यदि व्यक्ति भारतीय संविधान का अनादर करे. Sabhar : dw.deभारत में नागरिकता दी और छीनी कैसे जाती है?
अवैध तरीके से आईं सीमा हैदर कब तक रह सकती हैं, क्या उन्हें मिलेगी भारत की नागरिकता
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पहले जानते हैं आखिर कौन हैं सीमा हैदर?
सीमा हैदर एक पाकिस्तानी महिला हैं जो सिंध प्रांत की निवासी हैं। 27 वर्षीय सीमा का पूरा नाम सीमा गुलाम हैदर है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सीमा अपनी पहली शादी के बाद पति गुलाम हैदर के साथ कराची में रह रहीं थीं। उनका दावा है कि उनके पति ने उन्हें फोन पर तलाक दे दिया था और अब वो संपर्क में नहीं है। जानकारी के मुताबिक, सीमा के पूर्व पति गुलाम हैदर सऊदी अरब में काम करते हैं। सीमा फिलहाल ग्रेटर नोएडा के रबूपुरा के सचिन मीणा के साथ रह रहीं हैं। सीमा ने इस साल की शुरुआत में अपनी दूसरी शादी सचिन के साथ नेपाल के काठमांडू में की थी और हिंदू धर्म अपना लिया था।
भारत कैसे पहुंचीं सीमा और गिरफ्तारी कब हुई?
सीमा और सचिन के बीच पबजी गेम खेलने के दौरान जान-पहचान हुई थी। कोरोना काल में वीडियो कॉलिंग के जरिये नजदीकियां बढ़ने के बाद सीमा इसी साल 13 मई नेपाल के रास्ते पाकिस्तान से भारत आ गईं थीं। उनके साथ उनके चारों बच्चे भी आए हैं। सभी रबूपुरा के आंबेडकर नगर में किराये पर मकान लेकर सचिन के साथ रहने लगी। मामले की भनक पुलिस को लगते ही सीमा चार बच्चों और सचिन के साथ फरार हो गई। पुलिस टीम ने सभी को चार जुलाई को हरियाणा के बल्लभगढ़ से पकड़ा था।
पुलिस ने सीमा को किस आरोप में गिरफ्तार किया था?
नोएडा पुलिस ने सचिन के एक पड़ोसी द्वारा उनकी शादी की वैधता के बारे में शिकायत मिलने के बाद जोड़े की गिरफ्तार की थी। सीमा पर अपने प्रेमी सचिन के साथ रहने के लिए बिना वीजा या नागरिकता के भारत में प्रवेश करने का आरोप लगाया गया।
सीमा पर विदेशी अधिनियम, 1946 की धारा 14 के तहत आरोप लगाया गया है। इस धारा में कहा गया है कि जो कोई भी उस अवधि से अधिक अवधि के लिए भारत में रहता है जिसके लिए उसका वीजा जारी किया गया था या जो कोई भी अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करता है, उसे एक अवधि के लिए कारावास से दंडित किया जाएगा। जिसे पांच साल तक बढ़ाया जा सकता है और जुर्माना भी देना होगा।
सीमा और अन्य आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी के तहत भी आरोप हैं। इसमें कहा गया है कि जो कोई भी अपराध करने की साजिश में भागीदार है, उसे दो साल या उससे अधिक की अवधि के लिए कठोर कारावास की सजा दी जाएगी।
रिहाई कब और क्यों हुई?
गिरफ्तारी के बाद सीमा और अन्य आरोपियों को नोएडा की लुक्सर जेल ले जाया गया। हालांकि, सात जुलाई को जेवर की एक अदालत ने सभी को जमानत दे दी। इसके अलावा, सीमा को 30,000 रुपये के दो निजी मुचलके जमा करने के लिए कहा गया। साथ ही अदालत ने मामला चलने तक सीमा को अपना निवास स्थान नहीं बदलने की शर्त रखी है। बताया गया कि जोड़े को नियमित रूप से अदालत के समक्ष अपनी मौजूदगी दर्ज कराने के लिए कहा गया है। जमानत की शर्तों के अनुसार, सीमा अदालत की पूर्व अनुमति के बिना देश नहीं छोड़ सकती हैं।
इस बीच, सीमा का दावा है कि उनकी पाकिस्तान लौटने की कोई इच्छा नहीं है, क्योंकि अगर वह वापस गई तो उसे मार दिया जाएगा। हालांकि, यह देखना बाकी है कि अपने प्रेमी के साथ रहने के लिए सीमा पार करने वाली महिला के खिलाफ क्या कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
तो क्या सीमा हैदर को भारत की नागरिकता मिल सकती है?
भारतीय कानून की नजर में सीमा हैदर एक ‘अवैध प्रवासी’ हैं। अवैध प्रवासी वह विदेशी होता है जो या तो पासपोर्ट और वीजा जैसे वैध यात्रा दस्तावेजों के बिना देश में प्रवेश करता है। इसके साथ ही वह व्यक्ति भी अवैध प्रवासी कहलाता है जो वैध दस्तावेजों के साथ देश में प्रवेश करता है, लेकिन वीजा की समय सीमा खत्म हो चुकी हो। आम तौर पर अवैध प्रवासियों को भारतीय नागरिकता प्राप्त करने से प्रतिबंधित किया जाता है।अवैध तरीके से आईं सीमा हैदर कब तक रह सकती हैं, क्या उन्हें मिलेगी भारत की नागरिकता
सीमा के पास क्या विकल्प हैं?
नागरिकता मिलने के पहलुओं पर सुप्रीम कोर्ट के वकील विराग गुप्ता कहते हैं, ‘सीमा अभी अवैध रूप से देश में आई हैं। नियम के मुताबिक उन्हें नागरिकता के लिए अप्लाई करना होगा। पुलिस की जांच के बाद संबंधित अधिकारियों की रिपोर्ट के अनुसार केंद्र सरकार इस बारे में फैसला लेगी। नागरिकता देना या नहीं देना, केंद्र सरकार का विशेषाधिकार है, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा और मानवाधिकारों के मद्देनजर फैसला लिया जाता है।’ आगे विराग ने जोड़ा कि अवैध प्रवासी भी शरण मांगने के लिए नागरिकता के लिए अप्लाई कर सकता है। अगर उनका आवेदन खारिज हो जाता है तो उन्हें वापस पाकिस्तान डिपोट किया जा सकता है। इसके साथ ही उन्हें अवैध रूप से देश में दाखिल होने और फर्जी आधार कार्ड बनवाने के आरोप में सजा हो सकती है। sabhar:vartabook.com
देशभर में ₹80/किलो टमाटर बेच रही सरकार:दिल्ली-NCR समेत कई शहरों में बिक्री जारी, थोक कीमतों में कमी के चलते राहत
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बाद सरकार ने टमाटर ₹80/किलो बेचने का फैसला लिया।
केंद्र सरकार ने आम लोगों को राहत देने के लिए आज यानी रविवार से टमाटर 80 रुपए प्रति किलो में बेचना शुरू किया है। पहले इसे 90 रुपए प्रति किलो में बेचा जा रहा था। सरकार ने कहा कि देशभर की 500 से अधिक जगहों पर कीमत का दोबारा आकलन करने के बाद 16 जुलाई से टमाटर ₹80/किलो बेचने का फैसला लिया गया है।
नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर फेडरेशन ऑफ इंडिया (NAFED) और नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (NCCF) के माध्यम से दिल्ली, नोएडा, लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, पटना, मुजफ्फरपुर और आरा में बिक्री आज से शुरू हो गई है।
कल से देश के अन्य शहरों में भी सस्ते टमाटर की बिक्री शुरू होगी। सरकार ने कहा कि थोक कीमतों में कमी आने के कारण कीमतें घटाई गई हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश में अभी टमाटर की एवरेज प्राइस 117 रुपए प्रति किलोग्राम है।
चीन के बाद भारत सबसे बड़ा टमाटर उत्पादक देश
नेशनल हॉर्टिकल्चरल रिसर्च एंड डेवलपमेंट फाउंडेशन के अनुसार चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा टमाटर उत्पादक देश भारत है। ये करीब 7.89 लाख हेक्टेयर क्षेत्र से लगभग 25.05 टन प्रति हेक्टेयर की औसत उपज के साथ करीब 2 करोड़ टन टमाटर का उत्पादन करता है। चीन 5.6 करोड़ टन उत्पादन के साथ टॉप पर है।
भारत में साल 2021-22 में 2 करोड़ टन से ज्यादा टमाटर का उत्पादन हुआ था। यहां मुख्य तौर पर दो तरह के टमाटर उगाए जाते हैं। हाइब्रिड और लोकल। मध्य प्रदेश देश में सबसे बड़ा टमाटर उत्पादक राज्य है। इसके बाद सर्वाधिक टमाटर उगाने वाले राज्यों में आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, ओडिशा और गुजरात हैं। sabhar : Bhaskar.comदेशभर में ₹80/किलो टमाटर बेच रही सरकार:दिल्ली-NCR समेत कई शहरों में बिक्री जारी, थोक कीमतों में कमी के चलते
शनिवार, 15 जुलाई 2023
दहेज के लिए दर्जनों लड़कों ने शादी से किया इनकार तो लड़की ने शुरू की ये मुहिम
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गीता पांडेय
पदनाम,बीबीसी न्यूज़
भारत में दहेज लेना-देना 1961 से ही गैर क़ानूनी है लेकिन आज भी चलन में है. लड़की के परिवार वालों से उम्मीद की जाती है कि वे लड़के के परिवार वालों को नकद, कपड़े और ज्वैलरी वगैराह के रूप में दहेज दें.
इस गैर क़ानूनी प्रथा और सामाजिक बुराई के उन्मूलन के लिए भोपाल की 27 साल की एक शिक्षिका ने मुहिम शुरू की है.
उन्होंने शादी के मंडपों में पुलिस अधिकारियों की निगरानी और छापा मारने के अनुरोध को लेकर एक याचिका दायर की है.
गुंजन तिवारी (बदला हुआ नाम) ने बीबीसी को बताया है कि दहेज के चलते दर्जनों लड़कों के उनके साथ शादी से इनकार करने के बाद उन्होंने भोपाल पुलिस को एक याचिका दी है.
सबसे आख़िरी बार यह वाक़या इसी साल फरवरी में तब हुआ जब गुंजन के पिता ने एक लड़के के परिवार वालों को रिश्ते के लिए आमंत्रित किया था. परिवार वालों के एक दूसरे से मुलाकात के बाद गुंजन मेहमानों के लिए चाय और नाश्ते की ट्रे लेकर आयीं.
गुंजन ने भोपाल से फ़ोन पर बताया, “यह काफी परेशान करने वाला पल था. हर कोई मुझे घूर रहा था, मानो वे मेरे शरीर की नाप-तौल कर रहे हों.”
गुंजन के मुताबिक मेहमानों के सामने किस तरह जाना है, इसको लेकर परिवार में काफी सोच विचार हुआ था.
मां ने हरे रंग की ड्रेस चुनी क्योंकि उनकी बेटी उस ड्रेस में कहीं ज़्यादा सुंदर दिखती. उन्होंने गुंजन को यह सलाह भी दी कि वह ज़्यादा जोर से नहीं हंसे ताकि मेहमानों की नज़र उसके दांतों पर नहीं पड़े. गुंजन के दांत थोड़े ठेढ़े-मेढ़े हैं.
यह सब गुंजन के लिए कोई नयी बात नहीं थी. पिछले छह सालों से यह सिलसिला चल रहा है और कम से कम छह बार गुंजन यह सब दोहराती आयी हैं. इस दौरान पूछे जाने वाले सवाल भी एक जैसे होते हैं- कहां तक पढ़ी हो,
दहेज में डिस्काउंट की बात
गुंजन के कमरे में प्रवेश करने से पहले उनके पिता, लड़के के पिता से दहेज के बारे में बात कर रहे थे.
उन्होंने बताया, “कमरे में जाने से पहले मैंने सुना था कि मेरे पिता उनसे दहेज के बारे में पूछ रहे थे. हमलोगों ने सुन रखा था कि वे पचास से साठ लाख रुपये तक मांग रहे हैं, उन्होंने मेरे पिता को हंसते हुए कहा कि आपकी बेटी सुंदर होगी, तो आपको डिस्काउंट देंगे.”
बातचीत आगे बढ़ने के साथ ही गुंजन को पता चल गया कि उनके पिता को कोई डिस्काउंट नहीं मिलेगा, क्योंकि मेहमानों ने उनके दांतों और माथे पर बने मस्से के बारे में पूछा.
चाय के बाद, गुंजन को अकेले में लड़के से बात करने का मौका मिला. तब गुंजन ने उसे बताया कि वह दहेज के चलते शादी नहीं करेगी. तब उस लड़के ने यह माना कि यह एक सामाजिक बुराई है. गुंजन को लगा कि अब तक वह जितने लड़कों से मिली हैं, उसमें यह अलग है. लेकिन जल्दी ही तिवारी परिवार को पता चला गया कि गुंजन के साथ उन लोगों ने रिश्ता स्वीकार नहीं किया.
गुंजन बताती हैं, “मेरी मां ने मुझे ही दहेज विरोधी स्टैंड के लिए उलाहना दिया. वह काफ़ी गुस्से में थीं और दो सप्ताह से ज़्यादा दिनों तक उन्होंने मुझसे बात नहीं की.”
गुंजन के मुताबिक बीते छह सालों में उनके पिता ने कम से कम 100 से 150 संभावित योग्य वर तलाशे हैं और उनमें से दो दर्जन से ज़्यादा परिवारों से मुलाकात की. गुंजन खुद इनमें छह परिवारों से मिलीं और हर बार बातचीत दहेज के चलते टूट गई.
गणित में स्नातकोत्तर और ऑनलाइन पढ़ाने वाली गुंजन बताती हैं, “इतनी बार खारिज किए जाने से मेरा आत्मविश्वास ख़त्म हो चुका है.”
गुंजन के मुताबिक उन्होंने इस प्रथा पर काफी सोच विचार किया. उन्होंने बताया, “तार्कित तौर पर जब भी सोचती हूं तो मुझे लगता है कि मेरे में कुछ कमी नहीं है. हाल के एक अध्ययन के मुताबिक गैर क़ानूनी होने के बाद भी 90 प्रतिशत भारतीय शादियों में दहेज का लेन-देन होता है.”
“अगर आप 1950 से 1999 के दौरान दहेज में दी गई संपत्ति का आकलन करें तो एक ट्रिलियन डॉलर की चौथाई रकम होगी. लड़कियों के माता-पिता इसके लिए भारी कर्ज लेते हैं या फिर दहेज के लिए ज़मीन या घर बेचते हैं. यही वजह है कि कई बार लगता है कि मैं माता-पिता के लिए बोझ बन गई हूं.”
हालांकि दहेज की मांग पूरी करने के बाद भी कोई भरोसा नहीं दे सकता है कि बेटी का जीवन खुशहाल होगा.
एनसीआरबी के आंकड़े के मुताबिक 2017 से 2022 के बीच दहेज के लिए तक़रीबन 35,493 हत्याएं हुईं हैं.
पुलिस हर जगह नहीं रह सकती मौजूद'
सामाजिक कार्यकर्ताओं के मुताबिक दहेज की वजह से ही भारत में लिंगानुपात की स्थिति बेहतर नहीं हो पा रही है. संयुक्त राष्ट्र के अनुमान के मुताबिक भारत में हर साल करीब चार लाख बच्चियों की भ्रूण हत्या हो जाती है.
भोपाल के पुलिस कमिश्नर हरिनारायण चारी मिश्रा को दी गई अपनी याचिका में गुंजन ने कहा है कि शादी के दौरान छापे और दहेज का लेन देन करने वालों की गिरफ्तारी ही एक मात्र विकल्प है. वह कहती हैं, “सजा के डर से ही इस चलन पर रोक लगेगी."
हरिनारायण चारी मिश्रा ने कहा, “दहेज एक सामाजिक बुराई है. हमलोग इसे समाप्त करने के प्रति प्रतिबद्ध हैं. मैंने सभी पुलिस स्टेशन में इस बारे में निर्देश जारी किया है कि अगर कोई महिला मदद के लिए आती है, तो उनकी तत्काल मदद करें.”
हालांकि वे ये भी मानते हैं कि पुलिस प्रशासन की अपनी सीमाएं हैं. उन्होंने कहा, “पुलिस हर जगह मौजूद नहीं हो सकती. लोगों की मानसिकता में बदलाव आए, इसलिए इस पहलू को लेकर जागरूकता बढ़ाए जाने की ज़रूरत है.”
महिला अधिकार कार्यकर्ता कविता श्रीवास्तव कहती हैं कि पुलिस निश्चित तौर पर मदद कर सकती है लेकिन दहेज को मिटाना एक जटिल समस्या है.
उन्होंने कहा, “भारत पुलिस स्टेट नहीं है. दहेज को लेकर रोकथाम को लेकर क़ानून है और हमें उस क़ानून को सख़्ती से लागू करना होगा.”
कविता श्रीवास्तव के मुताबिक कई लालची परिवार वाले लड़की के परिवार वालों से शादी के बाद भी दहेज मांगते रहते हैं, क्योंकि ये आसानी से मिल सकता है और इससे वे अमीर बन सकते हैं.
वो कई ऐसे महिलाओं का ज़िक्र करती हैं जिन्हें जीवन भर दहेज के चलते घरेलू हिंसा का सामना करना पड़ा या दहेज की मांग को पूरा नहीं करने के लिए माता पिता के घर से भी बाहर निकाल दिया गया. कविता श्रीवास्तव के मुताबिक इस प्रथा पर तभी रोक लगेगी जब युवा दहेज लेने या देने से इनकार करेंगे.
गुंजन ये भी कहती हैं कि वह शादी करना चाहती हैं. उन्होंने बताया, “जिंदगी लंबी है और मैं इसे अकेले नहीं बिताना चाहती. हालांकि ये निश्चित है कि मैं दहेज नहीं दूंगी.”दहेज के लिए दर्जनों लड़कों ने शादी से किया इनकार तो लड़की ने शुरू की ये मुहिम
Sabhar BBC.COM
थायरॉयड से ऑर्गेनिक खेती का सफ़र
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थायरॉयड से ऑर्गेनिक खेती का सफ़र तमिलनाडु में एक महिला धान की पुरानी प्रजातियों को संरक्षित करने और ऑर्गेनिक खेती को बढ़ावा देने के काम में जुटी हैं.
तमिलनाडु के तिरुनेलवेली के अंबा-समुद्रम की रहने वाली लक्ष्मी देवी को थायरॉयड था, जिसके बाद डॉक्टरों ने उन्हें ऑर्गेनिक चावल खाने की सलाह दी.
इसी के बाद शुरू हुआ उनका ऑर्गेनिक खेती का सफ़र. देखिए ये रिपोर्ट.
विंबलडन 2023 परिणाम: मार्केटा वोंद्रोसोवा ने महिलाओं के फाइनल में ओन्स जाबेउर को हराया
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https://www.bbc.co.uk जोनाथन जुरेजको द्वारा
बीबीसी पर विंबलडन 2023
स्थान: ऑल इंग्लैंड क्लब दिनांक: 3-16 जुलाई
कवरेज: बीबीसी आईप्लेयर, रेड बटन, कनेक्टेड टीवी और मोबाइल ऐप पर व्यापक कवरेज के साथ बीबीसी टीवी, रेडियो और ऑनलाइन पर लाइव। अधिक कवरेज विवरण यहां।
मार्केटा वोंद्रोसोवा विंबलडन महिला एकल खिताब जीतने वाली पहली गैरवरीयता प्राप्त खिलाड़ी बन गईं, जबकि ओन्स जाबेउर का बड़े खिताब के लिए इंतजार जारी है।
कलाई की चोट के कारण पिछले सीज़न के छह महीने गायब रहने के बाद 24 वर्षीय वोंद्रोसोवा विश्व में 42वें स्थान पर हैं।
लेकिन चेक ने 2022 के उपविजेता जाबेउर से बेहतर तरीके से मौके की नजाकत को संभालते हुए शनिवार का फाइनल 6-4, 6-4 से जीत लिया।
छठी वरीयता प्राप्त 28 वर्षीय जाबेउर अब अपने खेले गए सभी तीन प्रमुख फाइनल हार चुकी है और अंत में उसकी आंखों में आंसू थे।
वोंद्रोसोवा, जो पिछले साल कलाई की सर्जरी के बाद कास्ट पहनकर एक प्रशंसक के रूप में विंबलडन में आई थी, उसने जो हासिल किया था उसका परिमाण डूब जाने के कारण उसकी पीठ के बल गिर गई।
"मुझे नहीं पता कि क्या हो रहा है - यह एक अद्भुत एहसास है," वोंद्रोसोवा ने कहा, जिसने वीनस रोज़वाटर डिश जीतने के लिए पांच वरीयता प्राप्त खिलाड़ियों को हराया।
नेट पर जाबेउर के साथ गर्मजोशी से आलिंगन साझा करने के बाद, वह फिर से घास पर घुटनों के बल बैठ गई और सेंटर कोर्ट की भीड़ की प्रशंसा को आकर्षित करते हुए आंसुओं के करीब देखा।
फिर, जैसा कि आजकल परंपरा है, वह अपनी टीम और परिवार को गले लगाने के लिए खिलाड़ियों के बॉक्स तक चढ़ गई - जिसमें पति स्टीफन भी शामिल थे, जो पहले अपनी पालतू बिल्ली की देखभाल के लिए प्राग में घर पर रहने के बाद फाइनल देखने के लिए लंदन पहुंचे थे।
इसके विपरीत, जाबेउर अपनी कुर्सी पर सिर झुकाए बैठी हुई उदास लग रही थी।
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"यह बहुत, बहुत कठिन है। मेरे करियर की सबसे दर्दनाक हार," जाबेउर ने कहा, जो ग्रैंड स्लैम एकल खिताब जीतने वाली पहली अफ्रीकी या अरब महिला बनने का लक्ष्य लेकर चल रही थी।
वोंद्रोसोवा 'सबसे असंभावित' विंबलडन चैंपियन बनीं
वोंद्रोसोवा 2019 में किशोरी के रूप में फ्रेंच ओपन के फाइनल में पहुंचीं, जहां वह ऑस्ट्रेलिया की एशले बार्टी से हार गईं, इससे पहले कलाई की दो सर्जरी के कारण उनकी प्रगति बाधित हुई थी।
क्ले कोर्ट को लंबे समय से चेक की सबसे अच्छी सतह माना जाता है और उसने सेमीफाइनल से पहले स्वीकार किया कि उसने "कभी नहीं सोचा था" कि वह घास पर अच्छा प्रदर्शन कर सकती है।
लेकिन उनकी खेल शैली - अच्छे प्रभाव के लिए टॉप-स्पिन फोरहैंड का उपयोग करना, विविधता के साथ खेलने की क्षमता और नियमित रूप से गेंद को खेल में बनाए रखने में सक्षम - ने ग्रास कोर्ट में अनुवाद किया है।
वोंद्रोसोवा अपने करियर में केवल चार ग्रास-कोर्ट मैच जीतकर विंबलडन में आई थीं।
सेंटर कोर्ट की छत के नीचे जीतने के बाद भी - जो 50 मील प्रति घंटे की गति तक चलने वाली हवाओं के कारण बंद था - अभी भी सतह पर 11-11 जीत-हार का रिकॉर्ड रखता है।
इसने अमेरिकी पूर्व विश्व नंबर एक ट्रेसी ऑस्टिन - जो बीबीसी स्पोर्ट के फाइनल के टेलीविजन कवरेज पर काम कर रही थी - का नेतृत्व करते हुए कहा कि वोंद्रोसोवा "सबसे असंभावित" चैंपियन थी।
जाबेउर से नसें बेहतर हो जाती हैं
इतिहास दोनों खिलाड़ियों के लिए दांव पर था, लेकिन विशेष रूप से जाबेउर के लिए, जो अफ्रीकी और अरब महिलाओं के लिए एक पथप्रदर्शक बन गई है।
लेकिन ट्यूनीशियाई, जो मैच से पहले प्रबल दावेदार था, उम्मीद के बोझ से अभिभूत दिख रहा था।
जबकि दोनों खिलाड़ी पारंपरिक प्री-मैच तस्वीर के लिए पोज़ देते हुए कैमरे के सामने मुस्कुराने में कामयाब रहे, विंबलडन फाइनल में खेलने से जुड़ी घबराहट जल्दी ही स्पष्ट हो गई।
तनावपूर्ण शुरूआती सेट में जाबेउर अपने प्रतिद्वंद्वी से अधिक तनावग्रस्त लग रही थी, भले ही उसने शुरुआती ब्रेक लेकर 2-0 की बढ़त बना ली थी।
वह बेसलाइन पर टिकी रही क्योंकि वह लय पाने की कोशिश कर रही थी, उसने शायद ही कभी अपने पसंदीदा ड्रॉप-शॉट का इस्तेमाल किया और सीधे 2-1 से पिछड़ गई।
लगातार तीन सर्विस ब्रेक - वोंद्रोसोवा के पक्ष में - उस तनाव का संकेत था जो नेट के दोनों किनारों पर बना हुआ था, लेकिन विशेष रूप से जाबेउर के लिए, जिसने 4-2 की बढ़त गायब देखी।
उत्साही और आकर्षक व्यक्तित्व वाली जाबेउर को अपने देश में 'खुशी की मंत्री' के रूप में जाना जाता है और वह आमतौर पर चेहरे पर मुस्कान के साथ खेलती हैं।
लेकिन उसकी शारीरिक भाषा लगातार नकारात्मक होती जा रही थी, सिर झुका हुआ था और कंधे झुके हुए थे, स्पष्ट रूप से गणना करने में असमर्थ थी कि क्या हो रहा था।
वोंद्रोसोवा के एक सेट की बढ़त के बाद आउट होने के बाद, जाबेउर ने लॉकर रूम में एक छोटा ब्रेक लिया। जब वह उभरीं, तो अंततः आत्मविश्वास में बढ़ने और 3-1 से आगे बढ़ने के लिए अधिक स्वतंत्र रूप से खेलने से पहले उन्होंने फिर से सर्विस खो दी।
हालाँकि, अनिश्चितता शीघ्र ही पुनः प्रकट हो गई। वोंद्रोसोवा ने मैच के पांचवें गेम में वापसी की जिससे लगातार उतार-चढ़ाव आते रहे।
जाबेउर, जो पिछले साल फाइनल में पहला सेट जीतने के बाद एलेना रयबाकिना से हार गया था, हाल के वर्षों में ऑल इंग्लैंड क्लब में भीड़ का पसंदीदा बन गया है।
5-4 के स्कोर पर फिर से सर्विस गंवाने के बाद समर्थन की उत्साहजनक चीखें सुनाई दीं और अपने पहले मैच प्वाइंट पर डबल फॉल्ट के साथ थोड़ी देर के लिए लड़खड़ाने के बावजूद, वोंद्रोसोवा ने एक प्रसिद्ध जीत हासिल की।
चार ग्रैंड स्लैम चैंपियन को हराकर एक और फाइनल में पहुंचने वाले जाबेउर ने कहा, "यह एक कठिन दिन होने वाला है लेकिन मैं हार नहीं मानने वाला हूं। मैं और मजबूत होकर वापस आऊंगा।"
निवेश के लिए दुनिया की पहली पसंद भारतः रिपोर्ट
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निवेश करने के लिए लगातार दूसरे साल भारत दुनिया की सबसे पहली पसंद के रूप में कायम है. अब सरकारें प्रतिबंधों के डर से अपना सोना विदेशों से वापस ला रही हैं.
दुनिया में ऐसे देशों की संख्या बढ़ रही है जो अपने यहां सोने का भंडार बढ़ा रहे हैं क्योंकि पश्चिमी देशों द्वारा रूस पर लगाये गये प्रतिबंधों के बाद वे खुद को सुरक्षित करना चाहते हैं. सोमवार को प्रकाशित एक सर्वेक्षण में यह बात कही गयी है. इन्वेस्को नामक संस्था ने केंद्रीय बैंकों और वेल्थ फंड्स के सर्वे के आधार पर यह रिपोर्ट तैयार की है.
पिछले साल वित्तीय बाजार में मची उथल-पुथल से सरकारी फंड्स को खासा नुकसान उठाना पड़ा था. लिहाजा अब वे अपनी रणनीतियों में आमूल-चूल बदलाव करने पर विचार कर रहे हैं. ये बदलाव इस बात पर आधारित हैं कि उच्च मुद्रास्फीति और भू-राजनीतिक तनाव लंबे समय तक बना रहेगा.
निवेश के लिए दुनिया की पहली पसंद भारतः रिपोर्ट
निवेश करने के लिए लगातार दूसरे साल भारत दुनिया की सबसे पहली पसंद के रूप में कायम है. अब सरकारें प्रतिबंधों के डर से अपना सोना विदेशों से वापस ला रही
दुनिया में ऐसे देशों की संख्या बढ़ रही है जो अपने यहां सोने का भंडार बढ़ा रहे हैं क्योंकि पश्चिमी देशों द्वारा रूस पर लगाये गये प्रतिबंधों के बाद वे खुद को सुरक्षित करना चाहते हैं. सोमवार को प्रकाशित एक सर्वेक्षण में यह बात कही गयी है. इन्वेस्को नामक संस्था ने केंद्रीय बैंकों और वेल्थ फंड्स के सर्वे के आधार पर यह रिपोर्ट तैयार की है.
पिछले साल वित्तीय बाजार में मची उथल-पुथल से सरकारी फंड्स को खासा नुकसान उठाना पड़ा था. लिहाजा अब वे अपनी रणनीतियों में आमूल-चूल बदलाव करने पर विचार कर रहे हैं. ये बदलाव इस बात पर आधारित हैं कि उच्च मुद्रास्फीति और भू-राजनीतिक तनाव लंबे समय तक बना रहेगा.
इन्वेस्को ग्लोबल सॉवरिन एसेट मैनेजमेंट स्टडी नाम से हुए इस सर्वेक्षण में 57 केंद्रीय बैंकों और 85 सरकारी निवेश फंड शामिल हुए थे. इनमें से 85 फीसदी ने कहा कि उन्हें लगता है कि मुद्रास्फीति इस दशक में तो उच्च स्तर पर बनी रहेगी.
सोना सबसे अच्छा विकल्प
ऐसे माहौल में सोना और उभरते बाजारों के बॉन्ड अच्छा निवेश विकल्प माने जा रहे हैं. लेकिन पिछले साल जब रूस ने यूक्रेन पर हमला किया तो पश्चिमी देशों ने उस पर प्रतिबंध लगाते हुए उसके 640 अरब डॉलर का सोना और विदेशी मुद्रा भंडार फ्रीज कर दिया. इस बात ने भी निवेशकों की रणनीति को प्रभावित किया है.
भारत: विमानन क्षेत्र में एक कंपनी के एकाधिकार का खतरा
सर्वे की रिपोर्ट कहती है कि रूस के मामले में कायम की गई मिसाल से बड़ी संख्या में केंद्रीय बैंक चिंतित हैं. लगभग 60 फीसदी बैंकों ने कहा कि इससे सोने का आकर्षण बढ़ा है जबकि 68 फीसदी ने कहा कि अपने विदेशी मुद्रा भंडार को विदेश में निवेश करने के बजाय घर पर रखना ज्यादा सुरक्षित है. 2020 में ऐसा मानने वालों की संख्या 50 फीसदी थी.
एक केंद्रीय बैंक ने कहा, "हमारा सोना पहले लंदन में था लेकिन हमने उसे वापस स्वदेश भेज दिया है ताकि उसे सुरक्षित रखा जा सके.”
इन्वेस्को में आधिकारिक संस्थानों के प्रमुख रोड रिंगरो कहते हैं कि अब आमतौर पर सरकारें इसी तरह सोच रही हैं. उन्होंने कहा, ”पिछले एक साल का मंत्र यही रहा है कि अगर मेरे पास सोना है तो वो मेरे घर में होना चाहिए.”
डॉलर का आकर्षण घटा
भू-राजनीतिक चिंताएं और उभरते बाजारों में बढ़ते मौके मिलकर केंद्रीय बैंकों को डॉलर से विमुख होकर अन्य निवेश विकल्पों पर विचार के लिए उकसा रहे हैं. इसमें अमेरिका का 7 प्रतिशत की दर से बढ़ता कर्ज और ज्यादा योगदान दे रहा है. हालांकि ज्यादातर मानते हैं कि फिलहाल वैश्विक मुद्रा के तौर पर डॉलर का कोई विकल्प नहीं है. बल्कि युआन को डॉलर के विकल्प के तौर पर देखने वालों की संख्या पिछले साल के 29 फीसदी से घटकर 18 फीसदी रह गयी है.
निवेश करने के लिए लगातार दूसरे साल भारत दुनिया की सबसे पहली पसंद के रूप में कायम है. अब सरकारें प्रतिबंधों के डर से अपना सोना विदेशों से वापस ला रही हैं.
दुनिया में ऐसे देशों की संख्या बढ़ रही है जो अपने यहां सोने का भंडार बढ़ा रहे हैं क्योंकि पश्चिमी देशों द्वारा रूस पर लगाये गये प्रतिबंधों के बाद वे खुद को सुरक्षित करना चाहते हैं. सोमवार को प्रकाशित एक सर्वेक्षण में यह बात कही गयी है. इन्वेस्को नामक संस्था ने केंद्रीय बैंकों और वेल्थ फंड्स के सर्वे के आधार पर यह रिपोर्ट तैयार की है.
पिछले साल वित्तीय बाजार में मची उथल-पुथल से सरकारी फंड्स को खासा नुकसान उठाना पड़ा था. लिहाजा अब वे अपनी रणनीतियों में आमूल-चूल बदलाव करने पर विचार कर रहे हैं. ये बदलाव इस बात पर आधारित हैं कि उच्च मुद्रास्फीति और भू-राजनीतिक तनाव लंबे समय तक बना रहेगा. sabhar Dw.de https://www.dw.com
इन्वेस्को ग्लोबल सॉवरिन एसेट मैनेजमेंट स्टडी नाम से हुए इस सर्वेक्षण में 57 केंद्रीय बैंकों और 85 सरकारी निवेश फंड शामिल हुए थे. इनमें से 85 फीसदी ने कहा कि उन्हें लगता है कि मुद्रास्फीति इस दशक में तो उच्च स्तर पर बनी रहेगी.
सोना सबसे अच्छा विकल्प
ऐसे माहौल में सोना और उभरते बाजारों के बॉन्ड अच्छा निवेश विकल्प माने जा रहे हैं. लेकिन पिछले साल जब रूस ने यूक्रेन पर हमला किया तो पश्चिमी देशों ने उस पर प्रतिबंध लगाते हुए उसके 640 अरब डॉलर का सोना और विदेशी मुद्रा भंडार फ्रीज कर दिया. इस बात ने भी निवेशकों की रणनीति को प्रभावित किया है.
भारत: विमानन क्षेत्र में एक कंपनी के एकाधिकार का खतरा
सर्वे की रिपोर्ट कहती है कि रूस के मामले में कायम की गई मिसाल से बड़ी संख्या में केंद्रीय बैंक चिंतित हैं. लगभग 60 फीसदी बैंकों ने कहा कि इससे सोने का आकर्षण बढ़ा है जबकि 68 फीसदी ने कहा कि अपने विदेशी मुद्रा भंडार को विदेश में निवेश करने के बजाय घर पर रखना ज्यादा सुरक्षित है. 2020 में ऐसा मानने वालों की संख्या 50 फीसदी थी.
एक केंद्रीय बैंक ने कहा, "हमारा सोना पहले लंदन में था लेकिन हमने उसे वापस स्वदेश भेज दिया है ताकि उसे सुरक्षित रखा जा सके.”
इन्वेस्को में आधिकारिक संस्थानों के प्रमुख रोड रिंगरो कहते हैं कि अब आमतौर पर सरकारें इसी तरह सोच रही हैं. उन्होंने कहा, ”पिछले एक साल का मंत्र यही रहा है कि अगर मेरे पास सोना है तो वो मेरे घर में होना चाहिए.”
डॉलर का आकर्षण घटा
भू-राजनीतिक चिंताएं और उभरते बाजारों में बढ़ते मौके मिलकर केंद्रीय बैंकों को डॉलर से विमुख होकर अन्य निवेश विकल्पों पर विचार के लिए उकसा रहे हैं. इसमें अमेरिका का 7 प्रतिशत की दर से बढ़ता कर्ज और ज्यादा योगदान दे रहा है. हालांकि ज्यादातर मानते हैं कि फिलहाल वैश्विक मुद्रा के तौर पर डॉलर का कोई विकल्प नहीं है. बल्कि युआन को डॉलर के विकल्प के तौर पर देखने वालों की संख्या पिछले साल के 29 फीसदी से घटकर 18 फीसदी रह गयी है.
सर्वे में शामिल कुल 142 संस्थानों में से लगभग 80 प्रतिशत ने माना है कि भू-राजनीतिक तनाव अगले दशक तक सबसे बड़ा खतरा बना रहेगा जबकि 83 फीसदी ने इसे अगले 12 महीने के लिए सबसे बड़े खतरे के रूप में देखा है.
इस वक्त विकास ढांचे को सबसे आकर्षक निवेश विकल्प माना जा रहा है, खासतौर पर वे परियोजनाएं जो अक्षय ऊर्जा से जुड़ी हैं.
भारत सबसे ऊपर
चीन को लेकर पश्चिमी जगत की चिंताओं का अर्थ यह है कि लगातार दूसरे साल भारत निवेशकों की पहली पसंद के रूप में कायम है. इस बात का चलन भी बढ़ रहा है कि फैक्ट्रियां वहां लगाई जाएं जहां उत्पाद बेचे जा रहे हैं. इसलिए मेक्सिको, इंडोनेशिया और ब्राजील आदि की ओर आकर्षण भी बढ़ रहा है.
चीन और अमेरिका की अर्थव्यवस्था को अलग करना असंभवः अमेरिका
चीन, ब्रिटेन और इटली को सबसे कम आकर्षक देश माना गया है जबकि कोविड-19 के दौरान ऑनलाइन खरीदारी और घर से काम करने वाले लोगों की संख्या बढ़ने के कारण अब प्रॉपर्टी सबसे कम आकर्षक निजी संपत्ति हो गयी है.
रिंगरो कहते हैं कि पिछले साल जिन वेल्थ फंडों ने अच्छा प्रदर्शन किया वे वही थे जो अपने पोर्टफोलियो की जरूरत से ज्यादा बढ़ी कीमत के खतरों को पहचान पाये और अपने निवेश में विविधता ला पाये. ऐसा आगे भी जारी रहेगा.
रिंगरो कहते हैं, "फंड्स और केंद्रीय बैंक अब ऊंची मुद्रास्फीति दर के साथ जीने की आदत डाल रहे हैं. यह सबसे बड़ा बदलाव है.”
वीके/एए (रॉयटर्स) sabhar Dw.de
शुक्रवार, 14 जुलाई 2023
बुधवार, 12 जुलाई 2023
सैक्स में ज्यादा सुख किसको आता है
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सेक्स ऐसा अनुभव है, जिसकी ओर व्यक्ति बार-बार आकर्षित होता
मानव जाति की पांच इन्द्रियां होती हैं।
1.आंख का काम है रूप या वस्तुओं को देखना। देखने के पश्चात अगर रूप लुभावना है, सुंदर है तो उसमें आनंदित होना। अगर रूप सौंदर्य विहीन है, कुरूप है तो उससे घृणा करना एवं उससे दूरी बनाने की कोशिश करना।
2.कान का काम है शब्दों को सुनना। शब्द अगर मधुर है, मोहक हैं, प्रशंसीय है तो कान उनको बार बार सुनना चाहेगा। अगर शब्द दुर्भावना,क्रोध, कटुता एवं कर्कशता से युक्त हैं तो कान फिर से शब्दों से बचेगा।
3.जिह्य(जीभ) का काम है रस का आस्वादन करना। अगर रस मधुर एवं स्वादिष्ट है तो जीभ उसमें बार बार चखना चाहेगी। कड़वे एवं फीके पदार्थों को जीभ कभी नहीं चाहती है।
4.नाक का काम है सुगंध को ग्रहण करना।सुगंधित महक को ग्रहण करने को लालायित रहती है एवं दुर्गंध से बचाना चाहती है।
5.त्वचा अर्थात मानव शरीर स्पर्श चाहता है।स्पर्श अगर सुखदाई है तो उससे चिपकना चाहता है। स्पर्श अगर सुखद अनुभूति नहीं देता तो व्यक्ति उससे अलगाव चाहता है।
6. मन इन सभी इंद्रियों का राजा का काम करता है। मन के अधीन ये पांचों इन्द्रियां अपना अपना साम्राज्य स्थापित कर अपनी तानाशाही चलाती हैं। मन के भी अपने अपने कई विभाग होते हैं जैसे चित,बुद्धि,अहंकार आदि। इनके फीडबैक के आधार पर ही अपनी अधिनस्थ कर्मचारी अर्थात इंद्रियों से उचित या अनुचित काम संपन्न करवाता है।
अब सवाल यह है कि इंद्रियों द्वारा भीगे गए मनचाहे सुख को अनुभव करने की मात्रा को लिंग अर्थात स्त्री एवं पुरुष के आधार पर मापा जा सकता है?
इसका उत्तर है नही।
इसका उत्तर नही होने का कारण यह है कि मानव शरीर में स्थापित सभी इंद्रियों को संसार का सुख भोगने एवं अनुभव करने के लिए ही निर्मित किया गया है। सभी इंद्रियजनीत सुखों को भोगना ही जीवन का परम उद्देश्य है। इसके लिए जीवन के चार लक्ष्य बताए गए हैं काम,अर्थ,धर्म एवं मोक्ष। यह लक्ष्य तभी हासिल किया जा सकता है जब जीवन में संतुलन हो।
लिंग के आधार पर इंद्रिजनित सुख का विभाजन संभव नहीं। क्यों?
चाहे स्त्री हो या पुरुष सभी इंद्रियों के सुख को प्राप्त करना चाहते हैं। तथा उससे होने वाले दुख से बचाना चाहते हैं। सीमित मात्रा में सुख की चाहत बिलकुल न्यायसंगत एवं तर्कसंगत है परंतु जब इन्द्रियां आनंद की चाहत में उन्मादी एवं व्याकुल हो जाती हैं तो व्यक्ति मर्यादाओं की सारी सीमाओं को त्याग देता है। इस प्रवृति का लिंग के आधार पर वर्गीकरण संभव ही नहीं है।कई बार पुरुष अधिक कामुक होता है तो कई बार स्त्री अधिक। यह पूर्णतया प्रत्येक व्यक्ति पर अलग अलग तरीके से लागू होता है। कुछ पुरुष स्पर्श सुख में पागल तक हो जाते हैं जबकि कुछ के लिए यह साधारण शारीरिक आपूर्ति मात्र है। जो स्त्रियां संयमित एवम मर्यादित होती हैं उनके लिए भी यह आनंद एवं भोग विलास का काम न होकर शुद्ध एवं पवित्र प्राकृतिक आनंद की अनुभूति है।
अब यह प्रत्येक व्यक्ति की मानसिक सोच पर निर्भर करता है की स्पर्श सुख अर्थात स्त्री पुरुष के शारीरिक संबंध में कौन अधिक सुखद अनुभूति करता हैं। यह कोई सार्वभौमिक नियम नही है कि अमुक लिंग को अधिक सुख प्राप्त होता है।
यह अनेक कारकों पर निर्भर है। वैसे इस तरह के कठिन सवाल का उत्तर देने में महान विद्वान शंकराचार्य को भी नाकों चने चबाने पड़े थे। उनकी कहानी अत्यंत ही विस्मयकारी एवं जानने योग्य है।
Sabhar Qwera.com
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