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बुधवार, 5 जुलाई 2023

प्रकृति के तीन कड़वे नियम जो सत्य है

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प्रकृति के तीन कड़वे नियम जो सत्य है....स्वीकारे ना स्वीकारे पर बदले ना जा सके सत्य तो सत्य रहेगा----- 1- प्रकृति का पहला नियम:- यदि खेत में बीज न डालें जाएं तो कुदरत उसे घास-फूस से भर देती हैं !!... ठीक उसी तरह से दिमाग में सकारात्मक विचार न भरे जाएँ तो नकारात्मक विचार अपनी जगह बना ही लेते हैं !!... 2- प्रकृति का दूसरा नियम:- जिसके पास जो होता है वह वही बांटता है !!.... सुखी सुख बांटता है,.. दुःखी दुःख बांटता है,.. ज्ञानी ज्ञान बांटता है,.. भ्रमित भ्रम बांटता है,.. भयभीत भय बांटता हैं !!.... 3- प्रकृति का तीसरा नियम:- आपको जीवन से जो कुछ भी मिलें उसे पचाना सीखो क्योंकि भोजन न पचने पर रोग बढ़ते हैं...! पैसा न पचने पर दिखावा बढ़ता है...! बात न पचने पर चुगली बढ़ती है...! प्रशंसा न पचने पर अंहकार बढ़ता है....! निंदा न पचने पर दुश्मनी बढ़ती है...! राज़ न पचने पर खतरा बढ़ता है...! दुःख न पचने पर निराशा बढ़ती है...! और सुख न पचने पर पाप बढ़ता है...! बात कड़वी बहुत है पर सत्य है------

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मंगलवार, 4 जुलाई 2023

Bramand ki utpatti kaise huyi

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सोमवार, 3 जुलाई 2023

बायजूज़ के 'आकाश' तक पहुंचने और भंवर में फंसने की कहानी

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अंशुल सिंह पदनाम,बीबीसी संवाददाता 29 जून 2023 दुनियाभर की कंपनियों में निवेश करने वाले समूह 'प्रोसस' ने भारत की एडटेक स्टार्ट-अप कंपनी बायजूज़ की वैल्यूएशन को घटाकर 5.1 अरब डॉलर कर दिया है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़, नीदरलैंड में लिस्टेड दुनिया के सबसे बड़े टेक्नोलॉजी निवेशक प्रोसस ने बायजूज़ की वैल्यूशन को 22 अरब डॉलर से घटाकर 5.1 अरब डॉलर कर दिया है. आंकड़ों के लिहाज़ से यह गिरावट 75 फ़ीसद से ज़्यादा है. प्रोसस समूह बायजूज़ का सबसे बड़ा निवेशक है. रॉयटर्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि 31 मार्च को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष में प्रोसस ने बायजूज़ में अपनी 9.6 फ़ीसद हिस्सेदारी का मूल्य घटाकर 493 मिलियन डॉलर कर दिया है. 2011 में बनी बायजू रवींद्रन की कंपनी बायजू के लिए फ़िलहाल सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. भारत में कंपनी छंटनी कर रही है और विदेश में कर्ज़ को लेकर क़ानूनी लड़ाई लड़ रही है. बायजूज़ में क्या चल रहा है? कुछ दिन पहले डेलॉइट हास्किन्स एंड सेल्स ने बायजूज़ के ऑडिटर पद से इस्तीफ़ा दे दिया था, जिसे 2025 तक बायजूज़ का ऑडिट करना था. डेलॉइट की तरफ़ से बताया गया कि वह कंपनी का ऑडिट नहीं कर पा रहे थे क्योंकि उन्हें साल 2021-22 के लिए वित्तीय विवरण नहीं मिले थे. डेलॉइट हास्किन्स एंड सेल्स ने बायजूज़ को लिखे पत्र में कहा, ''हमें आज़ तक ऑडिट पर कोई टिप्पणी नहीं मिली है. इसके चलते ऑडिटिंग मानकों के अनुसार ऑडिट की योजना बनाने, डिज़ाइन करने, प्रदर्शन करने और पूरा करने की हमारी क्षमता पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ेगा. इसी के मद्देनजर, हम तत्काल प्रभाव से कंपनी के ऑडिटर के रूप में अपना इस्तीफ़ा दे रहे हैं.'' रॉयटर्स के मुताबिक़, ऑडिटर के जाने के बाद कंपनी ने निवेशकों से कहा है कि इस साल के सितंबर महीने में साल 2022 की आय और दिसंबर तक 2023 की आय के ब्यौरे दाख़िल करेंगे. फ़िलहाल कंपनी को नया ऑडिटर मिल गया है. कंपनी ने बीडीओ (एमएसकेए एंड एसोसिएट्स) की पांच सालों के लिए ऑडिटर के रूप में नियुक्ति की है. अंग्रेज़ी समाचार पत्र 'द हिन्दू बिजनेस लाइन' की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि बायजूज़ के कई पूर्व कर्मचारियों ने कंपनी पर ईपीएफ जमा नहीं करने का आरोप लगाया है. आरोप है कि कंपनी ने सैलरी से हर महीने पीएफ काटा, लेकिन इस धनराशि को कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) खाते में जमा नहीं कर रही थी. रिपोर्ट सामने आने के बाद बायजूज़ की पैरेंट कंपनी 'थिंक एंड लर्न प्राइवेट लिमिटेड' ने अगस्त 2022 से मई 2023 तक 10 महीने के ईपीएफ का भुगतान किया है. इस भुगतान में 123.1 करोड़ रुपए जमा किए गए जबकि कंपनी ने शेष 3.43 करोड़ रुपए को कुछ दिनों में भुगतान की बात कही है. बीते हफ़्ते अंग्रेज़ी अख़बार 'द इकोनॉमिक टाइम्स' की रिपोर्ट में कंपनी के बोर्ड से तीन डायरेक्टर्स के इस्तीफ़े की पुष्टि की गई थी. रिपोर्ट में लिखा गया कि बोर्ड से पीक एक्सवी पार्टनर्स के जीवी रविशंकर, चैन जुकरबर्ग के विवियन वू और प्रोसस के रसेल ड्रेसेनस्टॉक ने इस्तीफ़ा दिया है. हालांकि, बायजूज़ की ओर से इस तरह की सभी रिपोर्ट्स का खंडन किया गया है. बायजूज़ ने कहा, ''बायजूज़ बोर्ड के सदस्यों के इस्तीफे़ की ख़बर देने वाली एक हालिया मीडिया रिपोर्ट पूरी तरह से काल्पनिक है. बायजूज़ इन दावों का दृढ़ता से खंडन करता है और मीडिया संस्थानों से अनवेरीफ़ाइड जानकारी फैलाने या बताया जा रहा है कि बायजूज़ के फाउंडर शेयरधारकों की बगावत रोकने के लिए निवेशकों से फंड जुटाने की कोशिश में लगे हैं. अमेरिकी मीडिया संस्थान 'ब्लूमबर्ग' की रिपोर्ट के मुताबिक़, बायजूज़ नए शेयरधारकों से एक अरब डॉलर का फंड जुटाने की कोशिश में आख़िरी दौर की बातचीत कर रहा है. कंपनी की कोशिश है कि इससे फाउंडर बायजू रवींद्रन के कंपनी पर नियंत्रण को कम करने के कुछ निवेशकों के प्रयास को रोका जा सकेगा. अंग्रेज़ी अख़बार 'मिंट' में छपी रिपोर्ट के मुताबिक़, इस साल जून के महीने में लगभग एक हज़ार कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया गया. इससे पहले बायजूज़ ने पिछले साल तीन हज़ार कर्मचारियों को नौकरी से निकाला था. फ़िलहाल कंपनी में लगभग पचास हज़ार लोग काम कर रहे हैं. इसके अलावा बायजूज़ अमेरिका की अदालत में कानूनी लड़ाई भी लड़ रही है. अमेरिका में बायजूज़ ने 1.2 अरब डॉलर के कर्ज़ को लेकर एक मामला न्यूयॉर्क सुप्रीम कोर्ट में दायर किया है. कंपनी को इस कर्ज का भुगतान करना था, लेकिन कंपनी फिलहाल इस स्थिति में नहीं हैं. बायजू रवींद्रन का कहना है कि उन पर टर्म लोन बी (टीएलबी) के पुनर्भुगतान में तेजी लाने के लिए अपने ऋणदाता रेडवुड कंपनी द्वारा दबाव बनाया जा रहा है. जब बायजूज़ ने ख़ूब तरक़्क़ी की मार्च 2020 में कोरोना महामारी के चलते भारत में देशव्यापी लॉकडाउन लगा था. स्कूल, कॉलेज से लेकर दुकान और ऑफ़िस सब बंद थे. इस दौरान लोगों की दुनिया अपने घर और इंटरनेट पर सिमट गई थी. महामारी के चलते स्कूल बंद हुए तो बच्चों का दाखिला ऑनलाइन एडटेक कंपनियों में होने लगा और फिर अचानक से बायजूज़ की ग्रोथ होने लगी. कंपनी ने एक साल के भीतर बाजार से एक अरब डॉलर से अधिक धन जुटाया. इस धन से कंपनी ने अपने एक दर्जन प्रतिस्पर्धियों का अधिग्रहण करते हुए उन्हें बाज़ार से हटा दिया है. इसमें आकाश एजुकेशनल सर्विसेस, ग्रेट लर्निंग और व्हाइट हैट जूनियर जैसे अधिग्रहण शामिल हैं. ऐसा करते ही कंपनी बच्चों के लिए कोडिंग क्लास से लेकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाली एक 'अंब्रेला होल्डिंग कंपनी' बन गई. विज्ञापन पर ख़र्च करने के मामले में भी कंपनी पीछे नहीं रही. एक समय बायजूज़ संभवत: भारत के टीवी चैनलों पर सबसे अधिक दिखने वाला ब्रांड था. बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख़ ख़ान कंपनी के ब्रांड एंबेसडर हैं. जबकि बायजूज़ के कोडिंग प्लेटफॉर्म व्हाइट हैट जूनियर के ब्रांड एंबेसडर ऋतिक रोशन थे. कंपनी इतने पर ही नहीं रुकी और फिर नवंबर 2022 में छंटनी के माहौल में बायजूज़ ने जाने-माने फुटबॉल खिलाड़ी लियोनेल मेसी को ग्लोबल ब्रांड एंबेसडर बनाया. इसके अलावा भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई), आईसीसी और फ़ीफा के साथ भी ब्रांडिंग पार्टनरशिप की थी. लगभग तीन सालों तक बायजूज़ बीसीसीआई की लीड स्पॉन्सर रही और फीफा वर्ल्ड कप 2022 को स्पॉन्सर करने वाली पहली भारतीय कंपनी बनी थी. फ़िलहाल बायजूज़ ने तीनों संस्थाओं के साथ अपनी ब्रांडिंग पार्टनरशिप ख़त्म कर दी है.sabhar BBC.com

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गैस चूल्हे से है दमे की बीमारी का खतरा

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बहुत तेज आंच पर इस्तेमाल किए गए सिंगल गैस बर्नर चूल्हे से ज्यादा मात्रा में बेंजीन केमिकल निकलता है. बेंजीन कैंसर की एक वजह बन सकता है. बहुत तेज आंच पर इस्तेमाल किए गए सिंगल गैस बर्नर चूल्हे से बहुत ज्यादा मात्रा में बेंजीन रसायन निकलता है. बेंजीन दमा समेत कई तरह की खतरनाक बीमारियों की एक वजह बन सकता है. आमतौर पर घरों में खाना बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाला गैस का चूल्हा दमे समेत कईं बीमारियों को जन्म देता है. इसके बारे में लोगों को जानकारी नहीं है लेकिन अमेरिका में हुआ शोध इसका दावा करता है. स्टैनफर्ड रिसर्चरों द्वारा किए गए एक नए अध्ययन में यह सामने आया है कि इन चूल्हों से निकलने वाले हानिकारक गैसों से सांस की बीमारियों के अलावा भी कई खतरनाक बीमारियां हो सकती हैं. इनमें ल्युकेमिया और लिंफोमा जैसे कैंसर भी शामिल हैं. चूल्हे का एक भी हॉब अगर 45 मिनट तक खुला छोड़ दिया जाए तो वह बेंजीन के स्तर को इतना बढ़ा सकता जिसका असर किसी सिगरेट पीने वाले के बगल में खड़े रहने से भी ज्यादा खतरनाक हो सकता है. लाइफस्टाइलएशिया गैस चूल्हे से है दमे की बीमारी का खतरा 01.07.2023१ जुलाई २०२३ बहुत तेज आंच पर इस्तेमाल किए गए सिंगल गैस बर्नर चूल्हे से ज्यादा मात्रा में बेंजीन केमिकल निकलता है. बेंजीन कैंसर की एक वजह बन सकता है. https://p.dw.com/p/4THYt घरों में खाना बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाला गैस का चूल्हा दमे समेत कईं बीमारियों को जन्म दे सकता है घरों में खाना बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाला गैस का चूल्हा दमे समेत कईं बीमारियों को जन्म दे सकता हैतस्वीर: Robin Utrecht/picture alliance विज्ञापन बहुत तेज आंच पर इस्तेमाल किए गए सिंगल गैस बर्नर चूल्हे से बहुत ज्यादा मात्रा में बेंजीन रसायन निकलता है. बेंजीन दमा समेत कई तरह की खतरनाक बीमारियों की एक वजह बन सकता है. आमतौर पर घरों में खाना बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाला गैस का चूल्हा दमे समेत कईं बीमारियों को जन्म देता है. इसके बारे में लोगों को जानकारी नहीं है लेकिन अमेरिका में हुआ शोध इसका दावा करता है. स्टैनफर्ड रिसर्चरों द्वारा किए गए एक नए अध्ययन में यह सामने आया है कि इन चूल्हों से निकलने वाले हानिकारक गैसों से सांस की बीमारियों के अलावा भी कई खतरनाक बीमारियां हो सकती हैं. इनमें ल्युकेमिया और लिंफोमा जैसे कैंसर भी शामिल हैं. चूल्हे का एक भी हॉब अगर 45 मिनट तक खुला छोड़ दिया जाए तो वह बेंजीन के स्तर को इतना बढ़ा सकता जिसका असर किसी सिगरेट पीने वाले के बगल में खड़े रहने से भी ज्यादा खतरनाक हो सकता है. रसोईघर से निकलने वाली बेंजीन पूरे घर में फैलकर नुकसान पहुंचा सकती हैरसोईघर से निकलने वाली बेंजीन पूरे घर में फैलकर नुकसान पहुंचा सकती है तस्वीर: Action Pictures/IMAGO नशा हो तो खाना बनाने के लिए ये रेसिपी आजमायें बेंजीन का हानिकारक असर इस अध्ययन में चूल्हे से निकलने वाली बेंजीन गैस को काफी हानिकारक बताया गया है. यह केवल रसोईघर तक सीमित नहीं रहती बल्कि धीरे-धीरे पूरे घर में फैलकर, दूसरे कमरों में रह रहे लोगों को भी नुकसान पहुंचा सकती है. उदाहरण के लिए, चूल्हे के बंद होने के बाद भी बेडरूम में बेंजीन खतरनाक मात्रा में घंटों तक हवा में रहता है. इससे पैदा हुए प्रदूषण की तुलना किसी तेल या गैस सयंत्र के नजदीकी इलाकों में होने वाले प्रदूषण से की जा सकती है और यह इलेक्ट्रिक तारों वाले चूल्हे से 10 से 25 फीसदी ज्यादा है. रिसर्चरों का दावा है कि इंडक्शन चूल्हों से इतनी मात्रा में बेंजीन निकलने का कोई सुबूत नहीं है. इस शोध के लिए 2022 में कैलिफोर्निया और कोलोराडो के 87 घरों में गैस और प्रोपेन के चूल्हों का अध्ययन किया गया. पता चला कि 30 प्रतिशत रसोईघरों में एक सिंगल गैस बर्नर चूल्हा जो हाई सेटिंग पर इस्तेमाल किया गया, उससे इतनी ज्यादा बेंजीन निकली जो किसी सिगरेट पीते इंसान के बगल में खड़े होकर धुआं निगलने से कहीं ज्यादा नुकसानदायक है. यह अमेरिका में 'एनवायर्नमेंटल प्रोटेक्शन एजेंसी' (ईपीए) और विश्व स्वस्थ्य संगठन द्वारा तय किए गए स्वास्थ्य मानकों से कहीं ज्यादा है. यह रिसर्च पेपर 'एनवायर्नमेंटल साइंस एंड टेक्नोलॉजी' जर्नल में प्रकाशित हुआ है. गैस चूल्हे या विलेन एक और रिसर्च में अमेरिका में छोटे बच्चों में दमा के लगभग 13 प्रतिशत मामलों को घर में गैस चूल्हे से जोड़ा गया. सेहत के लिए ही नहीं, गैस के चूल्हे जलवायु के लिए भी एक खतरा हैं. स्टैनफर्ड ने पहले एक अध्ययन में यह कहा था कि गैस के चूल्हे से मीथेन और दूसरे हानिकारक गैस का रिसाव होता है, तब भी जब वह बंद हों. मीथेन एक अति-शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैस है जो जलवायु परिवर्तन में योगदान करती है. यह रिसर्च रिपोर्ट लिखने वाले रॉब जैक्सन ने कहा, "जहां घरों में अच्छा वेंटिलेशन प्रदूषक की मात्रा को काम करने में मदद करता है, वहीं एग्जॉस्ट पंखे बेंजीन की मात्रा को घटाने में ज्यादा कारगर साबित नहीं हुए," 2013 में किए गए एक मेटा-विश्लेषण में यह सामने आया कि गैस चूल्हों वाले घरों में रह रहे बच्चों में दमा का खतरा उन बच्चों के मुकाबले 42 प्रतिशत ज्यादा है जो बिना गैस चूल्हे के घरों में रहते हैं. वहीं 2022 के एक विश्लेषण में पता चला कि अमेरिका में लगभग 12.7 प्रतिशत बच्चों में दमा का कारण गैस का चूल्हा है. एचवी/एसबी (रॉयटर्स) sabhar Dw.de

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रविवार, 2 जुलाई 2023

प्रदेश के 16 जनपदों मे खुलेंगे सैनिक स्कूल

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*लखनऊ.... यूपी* *◆प्रदेश के 16 जनपदों मे खुलेंगे सैनिक स्कूल,प्रशासन ने सभी जिलाधिकारियों को भेजा पत्र...* ◆जनपदों मे सभी सैनिक स्कूल पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) के आधार पर खोले जायेंगे... ◆रक्षा मंत्रालय के सैनिक स्कूल सोसायटी की ओर से राज्य सरकार को मिला पत्र... ◆इन जनपदों मे खुलेंगे सैनिक स्कूल,आगरा, अलीगढ़, प्रयागराज, आजमगढ़, बस्ती, बरेली,मुरादाबाद, बाँदा, झांसी, देवीपाटन, अयोध्या, कानपुरनगर,मेरठ,सहारनपुर, मिर्जापुर,एव वाराणसी... ◆बेसिक एव माध्यमिक शिक्षा के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार की तरफ सभी जिलाधिकारियों को भेजे गये पत्र...

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अजित पवार महाराष्ट्र सरकार के नए उप मुख्यमंत्री

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अजित पवार महाराष्ट्र सरकार के नए उप मुख्यमंत्री अजित पवार शरद पवार से बगावत करके महाराष्ट्र के नए उप मुख्यमंत्री बन गये है एकनाथ सिंदे बीजेपी सरकार में शामिल होकर एन डि ए गठबंधन का हिस्सा बन गए है पहले भी अजित पवार बीजेपी के साथ सरकार बना चुके है

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शनिवार, 1 जुलाई 2023

कम पैसे में अपनी कंपनी के मालिक कैसे बने

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प्रधानमंत्री द्वारा स्टार्टअप योजना शुरू की है जिसके लिए रजिस्ट्रेशन कराके अपना कार्य किया जा सकता है जिससे अपने साथ काफी लोगो को रोजगार दिया जा सकता है इस यूट्यूब वीडियो में बताया गया है की आप अपने कंपनी का मालिक कैसे बन सकते है लोगो को रोजगार देने के साथ साथ देश के विकास में अपना योगदान दे सकते

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मंगलवार, 27 जून 2023

महोबा के सेनापति आल्हा और उनके छोटे भाई ऊदल द्वारा बनवाया गया किला आज भी खजुआ गांव में स्थित है

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महोबा के सेनापति आल्हा और उनके छोटे भाई ऊदल द्वारा बनवाया गया किला आज भी खजुआ गांव में स्थित है खजुआ गांव के ग्रमीण द्वारा बताया गया यह किला आल्हा उदल के किले के नाम से जाना जाता है उत्तर की ओर चहारदीवारी में तीन बड़े-बड़े कुएं तैयार किए गए थे, जो हजारों फीट गहरे हैं। ये कुएं आज भी यहां देखे जा सकते हैं। इनमें बड़ी-बड़ी जंजीरें पड़ी हुई हैं। बताया जाता है कि इन कुओं से बगीचे में पानी पहुंचाया जाता था। यहां महोबा के सेनापति आल्हा और उनके छोटे भाई ऊदल द्वारा बनवाया गया किला आज भी खजुआ गांव में स्थित है पश्चिम में एक बड़ा गेट है, जबकि दूसरा गेट खजुहा गांव की ओर है। इन दरवाजों के ऊपर चढ़कर पूरे बागबादशाही का दृश्य देखा जा सकता है। गांव के अंदर चारों ओर दीवारें बनी हुई हैं और बड़े फाटक तैयार किए गए हैं। कहा जाता है कि यहां पर एक बड़ा हॉल हुआ करता था जिसमें घोड़े और सिपाही रहते थे। ​ फतेह पुर जिले के खजुआ कसबे में आल्हा उदल द्वारा बनवाये गए किला मौजूद है जो बाद में औरंगज़ेब के बेटे शाहशुजा के कब्जे में आ गया था शाहशुजा से औरंगज़ेब के कब्जे में आ गया फिर औरंगज़ेब ने इसमें कुछ निर्माण करवाया रहस्यमयी सुरंग’ गांव के ही बृजबिहारी बाजपेयी की मानें तो ये सुरंग कोलकाता से पेशावर तक जाती है। हालांकि, अब इसे बंद करा दिया गया है। जानकार बताते हैं कि उस वक्त यहां पर शाहजहां के बेटे शाहशुजा का राज था। औरंगजेब ने इसे हड़पने को के लिए अनेक बार यहां पर अटैक किया लेकिन पराजित हुआ। इसके बाद 5 जनवरी, 1659 को औरंगजेब ने फिर से यहां पर अटैक किया और शाहशुजा को पराजित कर कब्जा कर लिया। रहस्यमयी सुरंग’ में जो गया वो नहीं आया वापस, सैकड़ों लोग आज भी लापता kile में एक ऐसी रहस्यमयी सुरंग आज भी मौजूद है जहां जाने वाले कभी लौटकर वापस नहीं आये। सुरंग के आसपास रहने वाले लोगों का कहना है कि इस सुरंग को 350 साल पहले मुगल शासक औरंगजेब ने बनवाया था। इसका नाम बागबाद शाही है। फतेहपुर जिले के खजुहा गांव में आज भी ये मौजूद है। आल्हा चन्देल राजा परमर्दिदेव (परमल के रूप में भी जाना जाता है) के एक महान सेनापति थे, जिन्होंने 1182 ई० में पृथ्वीराज चौहान से लड़ाई लड़ी, जो आल्हा-खाण्डबॉल में अमर हो गए ऊदल ने अपनी मातृभूमि की रक्षा हेतु पृथ्वीराज चौहान से युद्ध करते हुए ऊदल वीरगति प्राप्त हुए आल्हा को अपने छोटे भाई की वीरगति की खबर सुनकर अपना अपना आपा खो बैठे और पृथ्वीराज चौहान की सेना पर मौत बनकर टूट पड़े आल्हा के सामने जो आया मारा गया 1 घण्टे के घनघोर युद्ध की के बाद पृथ्वीराज और आल्हा आमने-सामने थे दोनों में भीषण युद्ध हुआ पृथ्वीराज चौहान बुरी तरह घायल हुए आल्हा के गुरु गोरखनाथ के कहने पर आल्हा ने पृथ्वीराज चौहान को जीवनदान दिया और बुन्देलखण्ड के महा योद्धा आल्हा ने नाथ पन्थ स्वीकार कर लिया sabhr vikipidia amarujala.com

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गुरुवार, 22 जून 2023

प्रेम में डूबी बहादुर लड़कियो, हिंसक रिश्ते से बाहर निकलना ज़रूरी है: ब्लॉग

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 मुंबई से एक और लड़की की हत्या की दिल दहला देने वाली ख़बर आई है.


पिछले छह महीनों के दौरान अनेक ख़बरें सामने आई हैं, जहां लिव-इन रिलेशनशिप में रह रही लड़कियों की हत्या उनके ही प्रेमी साथियों ने की है.

इससे पहले अपनी पसंद के लड़कों के साथ ज़िंदगी गुज़ारने का फ़ैसला करने वाली लड़कियों के मां-पिता या रिश्तेदारों द्वारा उनके मारे जाने की ख़बरें ज़्यादा आम हुआ करती थीं. अब उनका साथ देने का वादा करने वाले उनके साथी भी उनका ख़ून कर रहे हैं

.सामने आने वाली हर घटना पहली वाली से ज़्यादा ख़ौफ़नाक और दिल दहला देने वाली है.


पहले लड़की की हत्या. फ़िर शव को काटना. काटने के लिए तरह-तरह के तरीक़े और औज़ारों का इस्तेमाल करना. काटे हुए शरीर के साथ उसी घर में रहना. फ़िर बारी-बारी से शरीर के हिस्सों को ठिकाने लगाना. उन्हें जलाना, उबालना, फेंकना, कुत्ते को खिलाना, सूटकेस में भर देना, फ्रीज़ में डाल देना… और यह सब करते हुए अपनी दुनिया मज़े से रमे रहना.


यह सब उनके साथ किया जा रहा है, जिनके साथ, साथ जीने मरने के क़समें-वादे किये गये थे.


लव-इन यानी सह-जीवन में दो लोग अपनी मर्जी से साथ रहना तय करते हैं. यह जीने का बेहतरीन तरीक़ा हो सकता है, इसलिए उम्मीद की जाती है कि इस रिश्ते में बराबरी और इज़्ज़त होगी, अहिंसा होगी और मोहब्बत तो होगी ही.


मगर अब ये रिश्ते भी दागदार किये जा रहे हैं. हालांकि, ऐसी कुछ कहानियों का इस्तेमाल लिव-इन के विचार के ख़िलाफ़ करना चालाकी होगी. Sabhar BBC.comhttps://www.bbc.com

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बुधवार, 21 जून 2023

बीमा कंपनी रिलायंस निप्पॉन लाइफ इंश्योरेंस ने 344 करोड़ रुपये का सालाना बोनस देने की घोषणा की

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 बीमा कंपनी रिलायंस निप्पॉन लाइफ इंश्योरेंस ने वित्त वर्ष 2022-23 के लिए अपने भागीदार पॉलिसीधारकों को 344 करोड़ रुपये का सालाना बोनस देने की  घोषणा की।

कंपनी के मुख्य कार्यकारी आशीष वोहरा ने कहा कि इस बोनस से 5.69 लाख भागीदार पॉलिसीधारकों को लाभ होगा।


रिलायंस निप्पॉन लाइफ के प्रबंधन के तहत 30,609 करोड़ रुपये की परिसंपत्तियां हैं। मार्च, 2023 तक कंपनी की कुल बीमित राशि 85,950 करोड़ रुपये थी। sabhar https://www.ibc24.in

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रविवार, 11 जून 2023

फतेह सिंह राठौड़

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 एक राजपूत परिवार से थे।

उनका परिवार जोधपुर के पास स्थित शेरगढ़ तहशील के चोरडिया नामक गाँव से निकला हुआ है।


कई अन्य कामों में असफल होने के बाद उनका वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में आना महज एक संयोग था।


उनके एक रिश्तेदार के कहने पर उनको सरिस्का में वन विभाग में रेंजर के रूप में नौकरी मिल गई।

धीरे धीरे उन्हें इस काम में मजा आने लगा। 


यह वह समय था जब फतेह जंगल की बारीकियों को सीख रहे थे। थ्योरी से ज्यादा उनका मन ज़मीनी काम करने में लगता था।


जंगल में उनके बढ़ते प्रभाव के कारण उनके कई विरोधी भी बन गए थे।

उनका मानना था की जमीनी स्तर पर काम करके ही ज्यादा अनुभव हो सकते हैं जो डिग्रियों एवं थ्योरी से नहीं मिलते।


बीसवीं सदी में बाघों की संख्या 40000 थी जो सत्तर के दशक तक आते-आते मात्र 1800  रह गई थी। इसके चलते 1970 में इंदिरा गाँधी के प्रधानमंत्री बनने पर वन्यजीवों के शिकार को पूर्ण रूप से प्रतिबंधित कर दिया गया।


प्रोजेक्ट टाइगर की शुरुआत 1973 में हुई जिसमें रणथम्भौर के साथ आठ अन्य अभ्यारण्य भी शामिल थे। अलग अलग तरह के विभिन्न पर्यावासों में बाघ संरक्षण को प्रोत्साहित करना इस परियोजना का लक्ष्य था। रणथम्भौर एक उष्ण पर्णपाती वन है।


फतेह को इस नए पार्क का विकास करने की जिमेदारी सौंपी गई थी। उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपने के पीछे एस. आर. चौधरी एवं प्रोजेक्ट टाइगर के पहले निदेशक कैलाश सांखला का बहुत योगदान था। 


एस. आर. चौधरी ने फतेह को देहरादून के भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) में पढ़ाया था।


कुल मिलाकर इन दोनों ने फतेह की काबिलियत को समझा और भविष्य में फतेह भी उनकी उम्मीदों पर खरे उतरे। फतेह ने पार्क में ऐसी रोड बनाने का काम किया जो सीधी न होकर घुमावदार हों एवं  पानी के स्त्रोत तक पहुंचती हों। जब फतेह ने काम संभाला तब पार्क की हालत बहुत खराब थी।


पार्क से लगते हुए 16  गांवो के लोग मवेशियों को पार्क में चराने ले आया करते थे। जलाने के लिए पुराने पेड़ काटे जा रहे थे। मवेशियों की बेरोकटोक आवाजाही ने पार्क की बड़ी घास एवं पेड़ पौधों को खत्म कर दिया था। वन्यजीवों के नाम पर कभी कभार बाघ के पगमार्क दिखाई दे जाया करते थे।


फतेह जानते थे की अगर पार्क को जिन्दा रखना है तो ग्रामीणों को पार्क से बाहर विस्थापित करना बहुत जरूरी है। इस काम को फतेह ने बड़ी सूझबूझ के साथ किया, विस्थापित ग्रामीणों को इसके लिए समझाया और उचित मुआवजा दिलवाने का प्रबंध करवाया। मुआवजे में 18 वर्ष से ऊपर के सभी ग्रामीणों को पैसों के अलावा पांच बीघा अतिरिक्त जमीन भी दी गई।


इसके साथ ही घर बनवाने के लिए, कुए खोदने के लिए आर्थिक मदद की गई साथ ही ग्रामीणों के लिए स्कूल और स्वास्थ्य सेवाओं की भी उचित व्यवस्था की गई। कैलाश सांखला के सम्मान में नए गांव का नाम कैलाशपुरी रखा गया। विस्थापन के साथ ही धीरे-धीरे पार्क वापस हरा-भरा होने लगा।


1976  में पहली बार फतेह ने पार्क में एक बाघिन को देखा जिसका नाम उन्होंने अपनी बड़ी बेटी के ऊपर रखा; पद्मिनी। फतेह ने इस बाघिन एवं उसके चार शावकों ( पांचवा शावक जल्द ही मर गया था ) की गतिविधियों पर नजर रखनी शुरू की । फतेह के जमीनी स्तर पर किये गए प्रयासों से यह पार्क बाघ देखने के दुनिया में सबसे उपयुक्त पार्कों में से एक माना जाने लगा।


उन दिनों रणथम्भौर जयपुर महाराज के शिकारगाहों में शामिल था। जनवरी 1961 में रणथम्भौर राष्ट्रीय पार्क के बनने से पहले उन्हें इस पार्क में ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ II के लिए शिकार आयोजन की व्यवस्था करना था


उन दिनों वन्यजीव पर्यटन का मतलब ही शिकार करना होता था और कई महाराजा विदेशी सैलानियों से आय के लिए शिकार का आयोजन करते थे।


फतेह सिंह राठौड़ का एक ही उद्देश्य हुआ करता था बाघों को बचाना और अगर उन्हें लगता की इस काम में कुछ गलत हो रहा है  तो वह उसके खिलाफ आवाज उठाने में कोई कसर नहीं छोड़ते थे।


जब भी वे पार्क से किसी बाघ के गायब होने का मुद्दा उठाते तो वन विभाग इसके विपरीत उनकी बात को गलत साबित करने का प्रयास करते जिसके लिए वन विभाग द्वारा उन्हें कई बार प्रताड़ित भी किया गया। हालाँकि बाद में फतेह का दावा ही सही निकलता था।


अंतिम समय में फतेह को देखना बहुत कठिन समय था। उनका स्वास्थ्य निरंतर गिरता जा रहा था। उन दिनों उन्हें बोलने में भी परेशानी रहने लगी थी। जरा सा भी पानी लेने पर बहुत दर्द होता था।


फिर भी फतेह अपने परिवार जनों एवं दोस्तों के साथ उसी जिंदादिली से रहते थे। एक मार्च की सुबह उन्हें इस पीड़ा से मुक्ति मिली, फतेह अब नहीं थे।अंतिम संस्कार अगले दिन हुआ, पहले उनकी पार्थिव देह रणथम्भौर में पहाड़ियों के किनारे बने उनके घर में रखा गया जहाँ कई गणमान्य हस्तियों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी उसी दिन लगभग चार बजे उनके निवास से महज 50  मीटर की दूरी पर एक बाघ तीन बार दहाड़ा साथ ही दुसरे पशु पक्षियों की कॉल  सुनाई दी। ऐसा लग रहा था मानों ये सब अपने पिता यानि फतेह को श्रद्धांजलि देने आये थे! Sabhar Facebook wall

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