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वाशिंगटन। अमेरिका के एक पूर्व अंतरिक्ष यात्री ने दावा किया है कि अमेरिका और रूस के बीच परमाणु युद्ध रोकने और शांति स्थापित करने के लिए एलियन पृथ्वी पर आए थे। डॉ. एडगर मिचेल नामक यह सज्जन चांद पर पहुंचने वाले छठे व्यक्ति थे। वह 1971 में "अपोलो 14" मिशन से वहां गए थे।
84 वर्षीय मिचेल के अनुसार 16 जुलाई 1945 को न्यू मेक्सिको राज्य के वाइट सैंड्स में परमाणु परीक्षण के दौरान वहां यूएफओ (अज्ञात अंतरिक्ष यान) दिखाई दी थीं। उनके अनुसार एलियन हमारे परमाणु परीक्षणों के स्थानों में गहरी रुचि रखते थे और उन्होंने उस समय दोनों महाशक्तियों- रूस और अमेरिका के बीच परमाणु युद्ध के खतरे को समाप्त किया था। वह कहते हैं कि उस समय वहां मौजूद अमेरिकी सेना के कर्मचारियों के दर्ज बयान उनके दावों को सच्चा साबित करते हैं।
इससे पहले भी मिचेल एलियंस से जुड़े कई रोचक बयान दे चुके हैं। उनके अनुसार हमारी तकनीक उनके जैसी विकसित नहीं है, लेकिन यदि वह उग्र होते तो पृथ्वी पर मानवजाति का नामोनिशान ही नहीं बचता। इसके अलावा, वह पहले यह भी अंदाजा लगा चुके हैं कि शायद एलियन देखने में बहुत-कुछ फिल्मी ईटी की तरह दिखते हैं, यानी वह बड़ी आंखें और बड़े सिर वाले होंगे।
सरकारी दावा
एडगर मिचेल के अजीबोगरीब दावों के जवाब में अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के एक पूर्व शोधकर्ता निक पोप का कहना है कि मिचेल के दावे अधकचरी सूचनाओं के आधार पर तैयार किए गए हैं। हालांकि पोप यह जरूर कहते हैं कि परमाणु संयंत्रों और फौजी छावनियों के आसपास अज्ञात यान देखे गए थे, लेकिन वह यूएफओ थे या कुछ और, कहना कठिन है।
पोप के अनुसार मिचेल के दावों पर यकीन करने वाले वही लोग होते हैं जो इंसान के चांद पर पहुंचने को लेकर शंका जताते रहे हैं और दावे करते हैं कि वह किसी सेट पर बनाई गई फिल्म थी। वहीं यूएफओ में यकीन रखने वालों के अनुसार परमाणु तकनीक के विकसित होने पर बाहरी जगत के प्राणी इसलिए धरती पर पहुंचे थे क्योंकि इससे इंसान की शक्ति में कई गुना इजाफा हो गया था।
नासा का बयान
नासा के एक प्रवक्ता के अनुसार नासा यूएफओ की तलाश में समय नहीं बिताता। नासा कहीं भी एलियन को लेकर किसी तथ्य पर पर्दा भी नहीं डालता। नासा के अनुसार डॉ. एडगर मिचेल एक महान अमेरिकी वैज्ञानिक हैं, लेकिन नासा उनके विचारों से सहमत नहीं है।
अनोखे दावे
एक भौतिकशास्त्री डॉ. जॉन ब्रांडेनबर्ग के अनुसार मंगल ग्रह पर स्थित प्राचीन सभ्यता को एलियन ने ही परमाणु धमाके से खत्म कर दिया था। डॉ ब्रांडेनबर्ग के अनुसार इस नरसंहार के निशान आज तक वहां देखे जा सकते हैं। उन्होंने कुछ वर्ष पहले दावा पेश किया था कि मंगल की लाल सतह वहां हुए परमाणु धमाके के कारण है, जिससे वहां के वातावरण में कई रेडियोधर्मी पदार्थ फैल गए थे।
जर्मनी में वैज्ञानिकों ने ऐसा मशीनी परिंदा बनाया है जो हूबहू पक्षियों की तरह उड़ान भरता है. बहुत ही हल्के इस रोबोट को स्मार्टबर्ड का नाम दिया गया है. sabhar ;http://www.dw.com/
भारत के हैदराबाद विश्वविद्यालय और रूस के नोवोसिबिर्स्क राजकीय विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक एक अंतर्राष्ट्रीय परियोजना के अंतर्गत ऐसी दवाइयां तैयार करने के काम में जुटे हुए हैं जिनके लिए हल्दी सहित अन्य पारंपरिक भारतीय मसालों का उपयोग किया जा सकता है।
नोवोसिबिर्स्क राजकीय विश्वविद्यालय द्वारा जारी की गई एक सूचना के अनुसार, "प्रोफेसर अश्विनी नानिया के नेतृत्व में हैदराबाद विश्वविद्यालय के भारतीय वैज्ञानिक इस निष्कर्ष पर पहुँचे हैं कि अगर हल्दी और एंटीबायोटिक्स को मिलाकर क्रिस्टल बनाए जाएं और आगे इन क्रिस्टलों को पीसकर दवाइयां बनाई जाएं तो ऐसी दवाइयों का असर कई गुना बढ़ जाएगा।"
इस परियोजना में शामिल रूसी वैज्ञानिकों का नेतृत्व नोवोसिबिर्स्क राजकीय विश्वविद्यालय के ठोस रसायनिक विज्ञान विभाग की प्रमुख और इस विश्वविद्यालय की एक वरिष्ठ शोधकर्ता, प्रोफेसर ऐलेना बोल्दरेवा कर रही हैं।
क्या आप अपनी बातों को बिना मोबाईल, टेलीफोन या दूसरे भौतिक क्रियाओं और साधनों के दूसरों तक पहुंचा सकते हैं। एक बारगी आप कहेंगे ऐसा संभव नहीं है, लेकिन यह संभव है। आप बिना किसी साधन के दूसरों तक अपनी बात पहुंचा सकते हैं यह संभव है दूरानुभूति से, एफडब्ल्यूएच मायर्स ने इस इस बात का उल्लेख किया है इसे टेलीपैथी भी कहते हैं। इसमें ज्ञानवाहन के ज्ञात माध्यमों से स्वतंत्र एक मस्तिष्क से दूसरे मस्तिष्क में किसी प्रकार का भाव या विचार पहुंचता है। आधुनिक मनोवैज्ञानिक दूसरे व्यक्ति की मानसिक क्रियाओं के बारे में अतींद्रिय ज्ञान को ही दूरानुभूति की संज्ञा देते हैं। परामनोविज्ञान में एक और बातों का प्रयोग होता है। वह है स्पष्ट दृष्टि। इसका प्रयोग देखने वाले से दूर या परोक्ष में घटित होने वाली घटनाओं या दृश्यों को देखने की शक्ति के लिए किया जाता है, जब देखने वाला और दृश्य के बीच कोई भौतिक या ऐंद्रिक संबंध नहीं स्थापित हो पाता। वस्तुओं या वस्तुनिष्ठ घटनाओं की अतींद्रिय अनुभूति होती है यह प्रत्यक्ष टेलीपैथी कहलाती है।टेलीपैथी के जरिए किसी को किसी व्यक्ति को कोई काम करने के लिए मजबूर भी किया जा सकता है। ऐसा ही एक मामला तुर्की में आया है। यहां कुछ लोगों को टेलीपैथी के जरिए इतना विवश कर दिया गया कि उन्होंने आत्म हत्या कर लिया sabhar amarujala.com
नई दिल्ली। माइक्रोसॉफ्ट ने स्मार्टफोन यूजर्स के लिए नया और शानदार एप माइक्रोसॉफ्ट ट्रांसलेटर लॉन्च किया है। फिलहाल इस एप को एंड्रॉयड और आईओएस दोनों के लिए उपलब्ध कराया गया है। यह एप स्मार्टफोन के साथ-साथ स्मार्टवॉच (एप्पल वॉच) पर भी काम करता है। इसके अलावा यह भाषा ट्रांसलेशन का काम भी करता है। इस मामले में यह एप गूगल ट्रांसलेट एप पर भारी पड़ता नजर आ रहा है।
50 भाषाओं को करता है सपोर्ट
माइक्रोसॉफ्ट का यह एप 50 तरह की भाषाओं को सपोर्ट करता है। इसके अलावा इस एप में वॉयस को सुनकर टेक्स्ट टाइप करने का फीचर भी दिया गया है। यानी यूजर्स जो बालेंगे वह यह एप चंद सेकेंड में ही टाइप कर देगा।
गूगल ट्रांसलेट पर भारी
भाषा ट्रांसलेशन के मामले ये माइक्रोसॉफ्ट ट्रांसलेटर एप गूगल ट्रांसलेट पर भारी पड़ सकता है। क्योंकि गूगल ट्रांसलेट सिर्फ 27 भाषाओं को सपोर्ट करता है, जबकि यह एप 50 भाषाओं को सपोर्ट करता है।
पॉपुलर हुआ
माइक्रोसॉफ्ट ट्रांसलेटर को अब तक हजारों लोग लाइक कर चुके हैं। यूजर्स द्वारा इएप को गूगल प्ले स्टोर पर 4.5 रेटिंग दी गई है। इस एप का कुल साइज 5.3 एमबी है तथा इसका मौजूदा वर्जन 0.9.5.009 है। इस एप को एंड्रॉयड 4.3 या उससे ऊपर के वर्जन वाले गैजेट्स में डाउनलोड कर इंस्टॉल किया जा सकता है।
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नई दिल्ली। माइक्रोसॉफ्ट ने स्मार्टफोन यूजर्स के लिए नया और शानदार एप माइक्रोसॉफ्ट ट्रांसलेटर लॉन्च किया है। फिलहाल इस एप को एंड्रॉयड और आईओएस दोनों के लिए उपलब्ध कराया गया है। यह एप स्मार्टफोन के साथ-साथ स्मार्टवॉच (एप्पल वॉच) पर भी काम करता है। इसके अलावा यह भाषा ट्रांसलेशन का काम भी करता है। इस मामले में यह एप गूगल ट्रांसलेट एप पर भारी पड़ता नजर आ रहा है।
50 भाषाओं को करता है सपोर्ट
माइक्रोसॉफ्ट का यह एप 50 तरह की भाषाओं को सपोर्ट करता है। इसके अलावा इस एप में वॉयस को सुनकर टेक्स्ट टाइप करने का फीचर भी दिया गया है। यानी यूजर्स जो बालेंगे वह यह एप चंद सेकेंड में ही टाइप कर देगा।
गूगल ट्रांसलेट पर भारी
भाषा ट्रांसलेशन के मामले ये माइक्रोसॉफ्ट ट्रांसलेटर एप गूगल ट्रांसलेट पर भारी पड़ सकता है। क्योंकि गूगल ट्रांसलेट सिर्फ 27 भाषाओं को सपोर्ट करता है, जबकि यह एप 50 भाषाओं को सपोर्ट करता है।
पॉपुलर हुआ
माइक्रोसॉफ्ट ट्रांसलेटर को अब तक हजारों लोग लाइक कर चुके हैं। यूजर्स द्वारा इएप को गूगल प्ले स्टोर पर 4.5 रेटिंग दी गई है। इस एप का कुल साइज 5.3 एमबी है तथा इसका मौजूदा वर्जन 0.9.5.009 है। इस एप को एंड्रॉयड 4.3 या उससे ऊपर के वर्जन वाले गैजेट्स में डाउनलोड कर इंस्टॉल किया जा सकता है।
वाशिंगटन। एलियन वास्तव में है या नहीं अभी तक यह रहस्य ही है, लेकिन नासा के एक अंतरिक्ष यान द्वारा साल 1960 में ली गई एक तस्वीर में एलियन का यान दिखने की बात कही जा रही है। नासा के इस अंतरिक्ष या न द्वारा ली गई�तस्वीर�में एक अस्पष्ट वस्तु दिखाई गई है जिसे एक वैज्ञानिक ने एलियन का यान होना बताया है।
प्रोजेक्ट मर्करी के दौरान भेजी गई थी तस्वीर-
यह तस्वीर प्रोजेक्ट मर्करी के दौरान भेजी गई थी। स्कॉट सी-वेरिंग का कहना है कि नासा के अंतरिक्ष यान द्वारा 1960 में ली गई इस तस्वीर में दिख रही एक अस्पष्ट वस्तु एलियन का अंतरिक्षयान हो सकती है। वेरिंग का कहना है कि शुरू आत से ही अंतरिक्ष एलियन के प्रेक्षक मनुष्यों के मिशन पूरी निगाह रख रहे हैं। अंतरिक्ष यान मर्करी-रेडस्टोन वन ए द्वारा 19 दिसंबर, 1960 में ली गई इस तस्वीर में तस्वीर में उन्होंने यह विसंगति देखी थी।
ब्लॉग के जरिए दी जानकारी-
वेरिंग ने अपने ब्लॉग पर लिखा है कि मर्करी मिशन की कुछ तस्वीरों में उन्होंने एक तस्तरीनुमा वस्तु पाई है। यह मिशन मर्करी था जो दिसंबर 1960 में शुरू हुआ था। उनका कहना है कि हो सकता है मानव इतिहास के इस ऎतिहासिक पल को देखने में एलियन दिलचस्पी ले रहे हों। हालांकि अंतरिक्षयान मानवरहित था इसलिए एलियन यह चिंता नहीं थी कि कोई उन्हें देख लेगा, इसलिए पृथ्वी के काफी नजदीक आ गए थे। गौरतलब है कि प्रोजेक्ट मर्करी अमरीका का पहला अंतरिक्ष मिशन था।
पेट्रोल और डीजल के लगातार बढ़ते दामों से हर व्यक्ति परेशान है। काश! कुछ ऐसा हो कि पानी से ही सब वाहन चलने लगे। तो खुश हो जाइये क्योंकि ऐसा हो चुका है, ब्राजील के साओ पोलो में रहने वाले एक व्यक्ति ने यह कारनामा कर दिखाया है।
साओ पोलो में रहने वाले रिकार्डो एजवेडोइस नाम के व्यक्ति ने एक ऐसी बाइक का निर्माण किया है जो एक लीटर पानी में 500 किमी. तक की दूरी तय कर सकती है। इसका एक वीडियो भी यूट्यूब पर अपलोड किया गया है।
रिकार्डो ने अपनी इस बाइक का नाम टी पॉवर एच2ओ रखा है। इस बाइक में एक बैटरी लगी है। पानी डालने पर इस बैटरी के जरिए हाइड्रोजन बनती है। इसी हाइड्रोजन से बाइक चलती है। बाइक के इंजन में इस हाइड्रोजन को ईधन के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। रिकार्डो अपनी बाइक की टेस्टिंग के लिए तैयार हैं।
यदि आप सेथ व्हाल के हाथ में अपना मोबाइल दें, तो वो क्षण भर में अपकी तस्वीरें, फ़ोटो, पासवर्ड चोरी कर लेते हैं. लेकिन ये कैसे संभव है?
सेथ व्हाल उन लोगों में से हैं जिनके शरीर में चिप लगा हुआ. व्हाल अमरीकी नेवी के पूर्व अधिकारी हैं. लेकिन अब वे एपीए वायरलेस कंपनी के साथ इंजीनियर हैं और उनका काम बायो-हैंकिंग है.
व्हाल की बात आगे बढ़ाने से पहले एक सवाल. क्या आपको पिछले दिनों आई फ़िल्म पीके याद है? इसमें एलियन का रोल कर रहे आमिर किसी लड़की का हाथ पकड़कर उसके मन की सारी बातें, भाषा-बोली, दिमाग में मौजूद हर बात जान लेते हैं ! ये भी कुछ ऐसा ही है.
व्हाल अब साइबर सिक्योरिटी पर काम कर रहे हैं. वो अपने साथी रॉड सोटो के साथ दिखाते हैं कि केवल टच करते ही वे फ़ोन को हैक कर सकते हैं.
ये दोनों अपने चिप का इस्तेमाल किसी आपराधिक काम के लिए नहीं, बल्कि जागरूकता फैलाने के लिए कर रहे हैं.
उनका मक़सद ये बताया है कि किस तरह से आने वाले दिनों में हमारे फोन और कंप्यूटर की जानकारी आसानी से हैक होगी और हमें इसका एहसास तक नहीं होगा.
हैकमियामी में प्रदर्शन
इसकी शुरुआत हुई जब सिक्यूरिटी रिसर्चर और इवेंट हैकमियामी के दौरान व्हाल आयोजक सोटो के साथ पिज्जा खा रहे थे. सोटो ने बताया, "सेथ उस वक्त पिज्जा खा रहे थे. मैंने उनसे ऐसे ही कहा कि आप कंप्यूटर पसंद करने वाले दिखते हो, और पाया कि उनके हाथ में तो चिप लगा हुआ है."
सेथ व्हाल के हाथ में आरएफआईडी चिप लगा हुआ है, जो अपने पास आने वाले उपकरणों से डाटा हैक कर सकता है. सोटो मुख्य तौर पर सॉफ़्टवेयर और हार्डवेयर हैकिंग से जुड़े हैं. उन्होंने व्हाल को 2014 में हैकमियामी में अपनी प्रिजेंटेशन देने को कहा.
दोनों ने तय किया कि किसी मैलवेयर यानी वायरस वाले सॉफ़्टवेयर को वो किसी मोबाइल में भेजने का प्रयोग करेंगे.
कुछ महीनों के अंदर दोनों ने मिलकर पूरी व्यवस्था डिज़ाइन कर ली और जैसे ही किसी का फ़ोन व्हाल के हाथ में दिया गया, उन्होंने वायरस वाला सॉफ़्टवेयर उसमें आसानी से भेज दिया.
व्हाल ने बताया, "अमूमन ऐसी चीजें पहली बार कामयाब नहीं होतीं." इनका हैकिंग सिस्टम कुछ इस तरह से काम करता है- व्हाल के हाथ में लगे आरएफआईडी चिप में एक नियर फ़ील्ड कम्यूनिकेशन (एनएफसी) एंटीना लगा होता है, जिससे निकलनी वाली रेडियो फ्रीक्वेंसी एनएफसी एनेब्लड डिवाइस जैसे मोबाइल से बात कर सकती हैं.
एनएफसी डिवाइस पर कमाल
ऐसे में जब व्हाल के हाथ में किसी का फोन आता है तो उनका चिप डिवाइस को एक संकेत देता है. अगर फोन इस्तेमाल करने वाला हां करता है तो, तो फोन एक दूर स्थित सर्वर से कनेक्ट हो जाता है. व्हाल बताते हैं, "यूज़र से संकेत मिलने पर वह फ़ोन जैसे मेरे काबू में आ जाता है."
सोटो के मुताबिक व्हाल के हाथ में कुछ देर तक फोन रहने पर उसकी सारी फ़ाइल हम डाउनलोड कर सकते हैं. व्हाल और सोटो आपस में मिलकर डिवाइस को और ज़्यादा प्रभावी बनाने की कोशिशों में जुटे हैं ताकि डिवाइस में आने वाला पॉपअप किसी सिस्टम अपडेट जैसा लगे या फिर कैंडी क्रश नोटिफ़िकेशन जैसा. ऐसे फोन को हैक करना आसान हो जाता है.
दरअसल बायो-हैकिंग समुदाय, सॉफ़्टवेयर और हार्डवेयर हैकिंग समुदाय में अभी लिंक्डअप नहीं हैं. लेकिन हैकमियामी 2015 में कुछ ही बायो हैकर नज़र आए, जबकि सॉफ़्टवेयर और हार्डवेयर हैकिंग करने वाले सैकड़ों हैकर मौजूद थे.
हैकरों की अलग दुनिया
व्हाल कहते हैं, "निश्चित तौर पर दो दुनिया है. बायो-हैकर कोई नुकसान नहीं पहुंचाते, उनमें उतनी तकनीकी कुशलता भी नहीं होती. वहीं दूसरी ओर हैकिंग करने वाला समुदाय में काफी प्रतिभाशाली लोग होते हैं. कुछ तो बहुत स्मार्ट लोग होते हैं, वे क्रेज़ी चीजें कर लेते हैं."
हालांकि व्हाल और सोटो के प्रयोग एक तरह से शरीर के अंदर इम्पलांट करके हैकिंग करने की शुरुआत है. फोन के अलावा क्रेडिट कार्ड सिस्टम, मोबाइल पेमेंट्स, एप्पल पे, गूगल वेलेट, कीकार्ड और मेडिकल डिवाइस के साथ भी यह संभव हो सकता है.
एनएफसी एनेब्लड कम्यूनिकेशन उपकरणों को चिप से हैक करने के लिए आपको बस उस डिवाइस के नजदीक पहुंचना होता है.
वैसे बायो-हैकिंग इतनी आसान भी नहीं है. हाथ में आरएफआईडी चिप को इमप्लांट कराना मुश्किल काम है. आप इसे झटके से नहीं करा सकते और हर दूसरा आदमी बायो हैकर भी नहीं होता.
व्हाल ने एक टैटू आर्टिस्ट से चिप अपने हाथ में इंप्लांट करवाया है. अंगूठे और उसकी बगल वाली अंगुली के बीच में.
कानून का उल्लंघन नहीं
व्हाल कहते हैं, "काफ़ी तकलीफ़ हुई थी, थोड़े समय तक काफी दर्द हुआ था."
अपने प्रदर्शन के दौरान सोटो और व्हाल की जोड़ी किसी कानून का उल्लंघन नहीं करती. वे व्हाल के फ़ोन का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन प्रिंस्टन के सेंटर फॉर इन्फोर्मेशन टेक्नोलॉजी पॉलिसी की प्रोफ़ेसर और कानूनी जानकार आंद्रेया मात्वाश्यान कहती हैं कि अगर इन लोगों ने किसी को अपना शिकार बनाया तो ये मुश्किल में फंस सकते हैं.
अमरीका में हाल ही में कंप्यूटर फ्रॉड एंड एब्यूज़ एक्ट लागू किया गया है. लेकिन सोटो और व्हाल के लिए मामला लोगों के फोन से तस्वीरें और जानकारियां चुराने भर का नहीं है. उनका उद्देश्य उन ख़तरों पर ध्यान आकर्षित करना है जो लोगों के रोजमर्रा के उपयोग के उपकरणों से जुड़े हैं.
दोनों का कहना है कि तकनीक के इस्तेमाल से वे दिखाना चाहते हैं कि कोई भी आपके उपकरण से सारी जानकारियां उड़ा सकता है.
न्यूयॉर्क। वैज्ञानिकों ने ऐसी नई तकनीक ईजाद की है जिसके जरिए गुरुत्वीय तरंगों का पता लगाना संभव होगा। गुरुत्वीय तरंगें ऐसी अदृश्य तरंगें हैं, जिनका जिक्र अल्बर्ट आइंस्टीन ने अपने सापेक्षता के सिद्धांत में किया था।
न्यूयॉर्क में अमेरिकन म्यूजियम ऑफ नैचुरल हिस्ट्री के भौतिकविद् बैरी मैक करनन ने कहा, ‘गुरुत्वीय तरंगें त्वरित द्रव्यों से निकलती हैं।’ इन गुरुत्वीय तरंगों को सीधे तौर पर पहचानने का कोई माध्यम नहीं है। मैक करनन और उनके सहयोगियों का कहना है कि गुरुत्वीय तरंगों का पदार्थ पर उससे ज्यादा प्रभाव पड़ता है, जितना पहले माना जाता था। शोधकर्ताओं का कहना है कि ऐसे तारे जो अपने करीब से गुजरने वाली गुरुत्वीय तरंगों के समान आवृत्ति पर कंपन करते हैं वे इन हलचलों से बड़ी मात्रा में ऊर्जा ग्रहण कर सकते हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि चुनौती इस बात का पता लगाने की है कि चिह्नित किए गए तारे की चमक गुरुत्वीय तरंगों के कारण है या इसका कोई अन्य कारण है।
क्या है उम्मीद
उन्होंने कहा, ‘जब ब्लैक होल्स करीब आएंगे तो उनके द्वारा उत्पन्न होने वाली गुरुत्वीय तरंगों की आवृत्ति बढ़ेगी। ऐसे में हम छोटे तारों के चमकने की उम्मीद करते हैं।’ वैज्ञानिकों का मानना है कि कई तारों के बीच में अगर बड़े तारों के बाद छोटे तारों में चमक दिखाई देती है तो यह गुरुत्वीय तरंग के कारण हो सकता है। इस स्थिति में गुरुत्वीय तरंग का अध्ययन संभव होगा। साभार :http://virsachannel.com/
मानव - मस्तिष्क इतनी विलक्षणताओं का केंद्र है जिसके आगे वर्तमान में अविष्कृत हुए समस्त मानवकृत उपकरण एवं यंत्रों का एकत्रीकरण भी हल्का पड़ेगा. अभी तक मस्तिष्क के 1/10 भाग की ही जानकारी मिल सकी है, 9 /10 भाग अभी तक शरीर शास्त्रियों और वैज्ञानिकों के लिए चुनौती बना हुआ है. मस्तिष्क के इस 9/10 भाग में असीमित क्षमताएं भरी पड़ी हैं. मस्तिष्क में अगणित चुम्बकीय केंद्र हैं जो विविध-विधि रिसीवरों और ट्रांसफ़ॉर्मरों का कार्य सम्पादित करती हैं. मानव मस्तिष्क में असीमित रहस्यात्मक असीम शक्ति हैं जिसके विषय में हमें हलकी-फुलकी सतहीय सत्तर की जानकारी हैं. योग साधना का एक उदेश्य इस चेतना विद्युत -शक्ति का अभिवर्धन करना भी है. इसे मनोबल, प्राणशक्ति और आत्मबल भी कहते हैं. संकल्प शक्ति और इच्छा शक्ति के रूप में इसके चमत्कार देखे जा सके हैं. मनोविज्ञान के समूचे खजाने में दो चीजें भरी हैं सूत्र [ Formula ] और तकनीक [Technique ] . सूत्रों में स्थिति का विवेचन होने के साथ तकनीकों के संकेत भी हैं.तकनीकों द्वारा स्थिति को ठीक करने के प्रयास किये जातें हैं. संकल्प शक्ति संकल्प शक्ति मस्तिष्क के वे हाई momentum वाले विचार हैं जिनकी गति अत्यंत तीब्र और प्रभाव अति गहन होतें हैं और अत्यंत शक्तिशाली होने के कारण उनके परिणाम भी शीघ्रः प्राप्त होतें है. मन के तीन भाग या परतें भावना, विचारणा और व्यवहार मानवीय व्यक्तितिव के तीन पक्ष हैं उनके अनुसार मन को भी तीन परतों में विभक्त किया जा सकता है : भौतिक जानकारी संग्रह करने वाले चेतन - मस्तिष्क [Conscious- Mind ] और ऑटोनोमस नर्वस सिस्टम को प्रभावित करने वाले अचेतन - मस्तिष्क [Sub- Conscious - Mind] अभी अभी विज्ञान की परिधि में आयें हैं. पर अब अतीन्द्रिय - मस्तिष्क [Super-Conscious -Mind] का अस्तित्व भी स्वीकारा जाता हैं . हुना [Huna] हुना [Huna] का अर्थ हवाई द्वीप [ Phillippines ] में गुप्त या सीक्रेट है. शरीर , मन और आत्मा के एकीकरण पर आधारित हुना -तकनीक लगभग 2000 वर्ष पुरानी परामानोविज्ञानिक रहस्यवादी स्कूल हैं. इस गूढ़ और गुप्त तकनीक के प्रयोग से एक साधारण मनुष्य अपनी संकल्प शक्ति द्वारा अपने अन्तराल में प्रसुप्त पड़ी क्षमताओं को जगा कर और विशाल ब्रह्माण्ड में उपस्थित शक्तिशाली चेतन तत्त्वों को खीचकर अपने में धरण कर अपने आत्मबल को इतना जागृत कर सकता हैं की वह अपने व्यक्तिगत और सामाजिक परिस्थितिओं में मनचाहा परिवर्तन ला सके . हुना के अनुसार मन की तीन परतें Llower –Self [Unconsious- Mind]----- यह Rib-Cage में स्थित है.Middle -Self [Consious -Mind] ------यह भ्रूमध्य में पीनल ग्लैंड में स्थित है.Higher –Self [Super-Consious-Mind] -------यह सर से लगभग 5 फीट की उच्चाई पर स्थित है. Lower –Self : यह हमारा अचेतन मन है.समस्त अनुभवों और भावनाओं का केंद्र है. Middle -Self द्वारा इसे निर्देश और आदेश देकर कार्य करवाया जा सकता है. समस्त जटिल गिल्ट , कोम्प्लेक्सेस , तरह - तरह की आदतें, आस्थाएं, सदेव Lower -Self में संचित रहतें हैं. Lower -Self स्वयं कोई भी तार्किक या बुद्धि पूर्ण निर्णय लेने में पूर्ण रूप से असमर्थ है. Middle -Self : यह हमारा चेतन मन है जिससे हम सोच-विचार करते हैं और निर्णय लेते हैं. यह हमारे बुद्धि के स्तर को दर्शाता है. Higher- Self : मानव मस्तिष्क का वह भानुमती का पिटारा है जिसमें अद्भुत और आश्चर्य जनक क्षमताएं भरी पड़ी हैं, , जिन्हें अगर जीवंत-जागृत कर लिया जाए तो मनुष्य दीन -हीन स्थिति में न रह कर अनंत क्षमताओं को अर्जित कर सकता है. Higher-Self में किसी भी समस्या या परिस्थिति का समाधान करने की असाधारण क्षमता है. यह तभी संभव हो पाता है जब हम उससे मदद मांगें. Higher - Self कभी भी मानव के साधारण क्रिया-कलापों में दखलांदाजी नहीं करा है जब तक विशेष रूप से उससे मदद न मांगी जाये. हुना द्वीप वासी किसी देवी-देवता की जगह अपने कार्यों या प्रयोजनों की सिद्धि के लिए अपने Higher – Self पर पूर्ण रूप से आश्रित होतें हैं और उसीसे से ही प्रार्थना करते हैं. Aka - Chord यह अदृश्य चमकीली - चाँदी की ओप्टिकल फाइबर के समान कॉर्ड या वायर है जो Lower -Self को Higher - Self से और Middle - Self को Lower -Self से जोडती है, . Higher -Self और Middle -Self प्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए नहीं होते हैं. प्राण प्राण ही वह तत्व हैं जिसके माध्यम से Higher –Self हमरे अभीष्ट लक्ष्य की पूर्ति करता है. प्राण तत्व की अधिकता गहरी साँस द्वारा संभव है. चेतन मस्तिष्क या Middle-Self द्वारा प्राण तत्व वायु द्वारा ग्रहण किया जाता है. फिर इस प्राणतत्व को Lower-Self अत्यंत उच्च विद्युत –वोल्टेज़ में परिवर्तित कर देता है पुनः इस हाई – वोल्टेज़ का प्रयोग हमारा Higher- Self अभीष्ट की लक्ष्य प्राप्ति के लिए करता है. संकल्प ध्यान की Technique 1. सुख आसन या सुविधजनक जनक स्थिति में बैठ जायें. अपनी आंखें बंद करे, धीमें और गहरी 10 सांसें लें और प्रत्येक साँस के साथ प्राण शक्ति को अपने अन्दर जाता महसूस करे.2. अब ग्रहण किये प्राण शक्ति को अपने सोलर प्लेक्सस [Rib Cage] में एक चमकीली हाई वोल्टेज सिल्वर गेंद के रूप में Visualize करें.3. अब उस गेंद से अत्यंत तीब्र सिल्वर सफ़ेद प्रकाश निकलता देखें जिसे एक सक्रीय ज्वालामुखी से लावा निकलता है , या जैसे दिवाली के अवसर पर जलाये जाने वाले आतिशबाजी आनार से तीब्र गामी प्रकाश निकलता है.4. सफ़ेद प्रकाश को अपने सिर से 5 फीट की ऊंचाई तक जाता देखें .5. अब इस सफ़ेद प्रकाश को सर की ऊपर एक चमकीले सिल्वर रंग के विशाल गोले का रूप धरते देखें .6. इस गोले में अपनी लक्ष्य की विस्तृत और इच्क्षित पूर्ति देखे. आप का लक्ष्य एकदम सपष्ट और निश्चित होना चाहिए.7. अपने इच्क्षित लक्ष्य की अत्यंत बारीक़ और विस्तृत पूर्ति देखें.8. उस सफ़ेद गोले में अपने लक्ष्य को पूरा हुआ देखें और विश्वाश करे की आप का वह कार्य पूर्ण रूपेण , सफलता पूर्वक सम्पादित हो चूका है.9. मन में संकल्प करे की आपका वह इच्क्षित कार्य पूरा हो चूका है.10. प्रक्रिया के अंत में अपने Higher-Self को अपने संकल्प की पूर्ति के लिए धन्यवाद कहें.11. प्रतिदिन यह प्रक्रिया करें , जब तक आप का वह इच्क्षित कार्य पूर्ण नहीं हो जाता है.12. अपने Higher - Self पर विश्वाश करे जो आप के अन्दर ईश्वर के D.N.A. का प्रतिनिधितित्व करता है. वह आपको कभी धोखा नहीं देगा. अतीन्द्रिय विज्ञान और गूढ़ -विज्ञान में ऐसी संभावनाएं हैं जो मानवीय कष्टों को मिटा कर , किसी भी मानव की वर्तमान क्षमता में अधिक वृद्धि कर उसे अधिक सुखी और सफल बना सके. इसके लिए हमें अपना मस्तिष्क खुला रखना चाहिए. बिना अंध-विश्वास और अविश्वासी बने तथ्यों का अन्वेषण करना चाहिए. उपेक्षित और लुप्त प्रायः आत्म-विज्ञान को यदि अन्वेषण और प्रयोगों का क्षेत्र मान कर उसके लिए भौतिक-विज्ञानियों जैसी तत्परता बरती जाय तो अगले दिनों ऐसे अनेक उपयोगी रहस्य उद्घाटित हो सकते हैं , जो भौतिक अविष्कारों से भी अधिक उपयोगी सिद्ध होंगें.
द्वारा गीता झा
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