Sakshatkar.com : Sakshatkartv.com

.

Item Post Navigation Display

Home Recent Posts Display

Related Posts Display

मंगलवार, 15 जुलाई 2014

वो अपनी दुनिया में इंसानों को आने नहीं देते, जानिए उन स्थानों के बारे में जहां इंसानों को जाने की मनाही है

0

इस दुनिया में बहुत सी ऐसी जगह हैं, जहां इंसानों के जाने की मनाही है. ऐसा माना जाता है कि यहां मृत लोगों की आत्माओं का वास है, इसलिए यहां जीवित मनुष्यों के आने से उनकी शांति में खलल पैदा हो सकता है. जाहिर तौर पर अपनी दुनिया में किसी और का दखल उन्हें बर्दाश्त नहीं होता और वे हर संभव कोशिश कर उन घुसपैठियों को भगाने की जुगत में जुट जाते हैं. आज हम आपको कुछ ऐसे ही स्थानों का पता बता रहे हैं, जहां इंसानों का जाना निषेध है या फिर किसी ना किसी भय के कारण स्वयं मनुष्य ने ही वहां जाना प्रतिबंधित किया हुआ है.

क्राइस्ट ऑफ द एबीज, इटली: 17 मीटर गहराई में 22 अगस्त,1954 को क्राइस्ट की विशालकाय पीतल की मूर्ति को पानी के अंदर रखा गया है. इस तरह की कई मूर्तियां अलग-अलग स्थानों पर मौजूद हैं लेकिन यहां आने-जाने वाला कोई नहीं है.
christ
कोलमैंस्कॉप, नामिब रेगिस्तान: दक्षिणी नामीबिया के नामिब रेगिस्तान में स्थित है घोस्ट टाउन या भूतहा शहर. बहुत पहले की बात है इस रेगिस्तान में बहुत भयंकर रेतीला तूफान आया था. इस तूफान से बचने के लिए डिलिवरी ब्वॉय जॉन कोलमैन अपनी बैलगाड़ी को वहीं छोड़कर भाग गया था. तूफान शांत होने के बाद ना तो उसकी बैलगाड़ी मिली और ना ही वो खुद. कभी बहुत छोटा सा रेगिस्तान जो खनन के लिए प्रसिद्ध था आज एक टूरिस्ट स्थल है लेकिन दहशत भरी दास्तां ज्यादा लोगों को यहां आने नहीं देती.
kolmanskop
डोम हाउस, दक्षिण-पश्चिमी फ्लोरिडा: नैपल्स में वर्ष 1981 में बनाए गए इगलू के डिजाइन के ये घर, भविष्य को ध्यान में रखकर निर्मित किए गए हैं. लेकिन अफसोस सरकारी मसलों में उलझने के बाद अभी तक इन्हें पूरा नहीं करवाया जा सका इसलिए अभी तक यहां लोगों की पहुंच नहीं बन पाई है.
dome houses

वंडरलैंड एम्यूजमेंट पार्क, बीजिंग: बीजिंग (चीन) से करीब 20 मील दूरी पर स्थित इस एम्यूजमेंट पार्क के निर्माण का काम कई बार शुरू हुआ पर किसी ना किसी वजह से वह अधूरा ही रहा. वर्ष 1998 में इसलिए रुका क्योंकि इसे बनाने के लिए पर्याप्त धनराशि नहीं थी तो वर्ष 2008 में किसी अन्य कारण ने इस एम्यूजमेंट पार्क का निर्माण नहीं होने दिया. स्थानीय लोग इस स्थान को श्रापित मानते हैं और यहां आना-जाना पसंद नहीं करते.

प्रिप्यात, यूक्रेन: उत्तरी यूक्रेन स्थित प्रिप्यात एक घोस्ट टाउन के तौर पर जाना जाता है. इस स्थान पर ज्यादा लोग आना-जाना पसंद नहीं करते.
pripyat

अंगकोर वाट, कम्बोडिया: हिंदू धर्म से संबंधित दुनिया का सबसे बड़ा कॉम्प्लेक्स और विशाल समाधि वाला मंदिर है. खमेर के राजा सूर्यवर्मन द्वितीय ने 12वीं शताब्दी की शुरुआत में यशोधरापुर (खमेर की राजधानी) में इस मंदिर का निर्माण करवाया था. उस दौर के सभी राजा शैव धर्म से संबंधित मंदिरों का निर्माण करवा रहे थे लेकिन ये मंदिर संपूर्ण रूप से विष्णु को समर्पित है. पहले ये मंदिर हिन्दुओं के लिए धार्मिक स्थल था, आज बौद्ध धर्म के अनुयायी इस मंदिर में आते हैं.

एल होटल डेल सेल्टो, कम्बोडिया: कम्बोडिया की राजधानी बगोटा से करीब 30 मील दूरी पर स्थित ये होटल पर्यटकों को खूब आकर्षित करता है. वर्ष 1928 में इस होटल का निर्माण अमीर पर्यटकों के लिए विशेषतौर पर किया गया था. लेकिन जैसे-जैसे बगोटा नदी दूषित होने लगी उसके किनारे बना यह होटल भी पर्यटकों की दिलचस्पी से हाथ धोता रहा. इस होटल में कई लोगों ने आत्महत्या भी की है और लोगों का मानना है कि यहां उनकी आत्माएं भटकती हैं. इस कारण यहां अब लोगों का आना-जाना बंद है.



नारा ड्रीमलैंड, जापान: वर्ष 1961 में कोलंबिया के डिज्नीलैंड से प्रेरित होकर बनाया गया जापान का यह पार्क, जुलाई 2006 में स्थायी तौर पर बंद कर दिया गया क्योंकि यहां पर्यटकों की जान को हमेशा खतरा रहता था.sabhar :http://infotainment.jagranjunction.com/

Read more

इस एक शरीर में दो लोग रहते हैं, पढ़िए उस बहन की कहानी जिसका अस्तित्व मर कर भी नहीं मिटा

0

अकसर लोग जब अपने बारे में किसी को बताते हैं तो वो अपने जन्म की तारीख, शादी की तारीख या फिर अपने जीवन से जुड़ी ऐसी ही कुछ बातों को सामने रखते हैं. लेकिन क्या आपने कभी कहीं पढ़ा है कि एक शख़्स अपने परिचय में शरीर के अंगों का भी विवरण दे रहा हो? जैसे; ‘मेरे दो हाथ, एक आंख और दो कान है’. ये सरासर बेवकूफी है लेकिन कोई है जिसे ऐसा भी करने की जरूरत पड़ती है. वो दुनिया से अलग है और अपने परिचय में उसे यह कहना पड़ता है कि ‘मेरे दो नहीं बल्कि चार पैर है’.

myrtle

ये हैं मायरटल कॉर्बिन

मायरटल कॉर्बिन का जन्म यूनाइटेड स्टेट के टेनेसी में हुआ. उसके जन्म ने हर किसी को हैरान कर दिया. बेहद मासूम व प्यारी मायरटल बाकी लोगों की तुलना में केवल एक अंतर लेकर इस दुनिया में आई थी और वो है उसके चार पैर. जी हां, मायरटल के दो नहीं बल्कि चार पैर हैं, दो सामान्य उसी स्थान पर और बाकी दो टांगें उनके ठीक बीचोबीच एक अलग अंग से जुड़ी है जो मायरटल की कमर के बीच से आती हैं.

Myrtle_Corbin


डॉक्टरों की मानें तो मायरटल के साथ जुड़े दो अलग पांव कमजोर हैं और मायरटल पूर्ण रूप से उनपर काबू भी नहीं पा सकती. ये पैर उनके दूसरे पैरों के मुकाबले में छोटे व नाजुक हैं.ये पैर मायरटल के नहीं किसी और के हैं

डॉक्टरों के मुताबिक बीच की दो टांगें उसकी खुद की नहीं बल्कि उसकी डायपिजस जुड़वा बहन की हैं. अब आप शायद इस बात को समझ ना पा रहे हों और यह आपको कुछ अटपटा लग रहा हो, लेकिन यह सच है.

myrtle_corbin2

मायरटल के साथ जुड़ी वो दो अलग टांगें उसके जुड़वा बहन की है जो इस दुनिया में आ नहीं आई. डॉक्टरों का कहना है कि कई बार जो जुड़े हुए जुड़वा बच्चे होते हैं उनमें से एक के शरीर का तो पूरा आकार बन जाता है लेकिन दूसरे के शरीर के कुछ हिस्से पहले वाले बच्चे के साथ जुड़ जाते हैं. इसका मतलब है कि मायरटल की एक जुड़वा बहन थी जो कि उसके पैदा होने से पहले उनकी मां के गर्भ में थी. लेकिन जन्म केवल मायरटल का हुआ जो जन्म के साथ अकेली नहीं आई बल्कि अपनी जुड़वा बहन के पैर साथ लेकर आई.

अजब-गजब है ये दुनिया

यह अजीब और विचित्र ही तो है कि आप अपने जन्म के साथ किसी दूसरे के शरीर के अंगों को साथ लेकर आए हो. डॉक्टरों के अनुसार मायरटल अपने अजन्मी बहन के अंग पर काबू तो पा सकती थी, लेकिन चलते समय उनका उपयोग करना उसके लिए काफी चुनौतीपूर्वक था. यह भी कहा गया कि उन दो टांगों से जुड़े उन दो पैरों में केवल 3-3 उंगलियां ही थी.  मायरटल की इस विचित्र बात ने उसे दुनिया भर में मशहूर भी बनाया. जब वो केवल 13 साल की थी तब उसके जीवन पर एक जीवनी लिखी गई, ‘बायोग्राफी ऑफ मायरटल कॉर्बिन’.

myrtlecorbinblog


मायरटल ने भी की शादी

मायरटल की एक बहन भी थी जिसका नाम विल्ले एन था. उसकी शादी लॉक बिकनैल नाम के लड़के से वर्ष 1885 में हुई थी. लॉक का एक भाई था डॉक्टर जेम्स क्लिंटन बिकनैल जिसने अपने भाई की शादी के कुछ समय बाद ही मायरटल के आगे शादी का प्रस्ताव रख दिया.

myrtle corbin

मायरटल और जेम्स की शादी एक सच्चे प्यार को बयां करती है. यहां एक और बात काफी अहम है और वो यह कि ना केवल मायरटल बल्कि उसकी अजन्मी बहन भी यौन संबंध बना सकती है. यानि कि मायरटल के शरीर में एक नहीं बल्कि दो योनि मौजूद थी.

कहा जाता है कि मायरटल ने आठ बच्चों को जन्म दिया था जिनमें से तीन का बचपन में ही निधन हो गया था. मायरटल के बच्चों के संदर्भ में यह भी कहा गया है कि उसके तीन में से दो बच्चे उसकी योनि से पैदा हुए थे और बाकी दो दूसरी योनि से. अब यह तथ्य सच है या नहीं लेकिन चिकित्सकीय रूप से देखा जाए तो ऐसा होना संभव माना गया है. sabhar :http://infotainment.jagranjunction.com/

Read more

5000 सालों से खुद जल देवता करते आ रहे हैं इस शिवलिंग का अभिषेक

1

5000 सालों से खुद जल देवता करते आ रहे हैं इस शिवलिंग का अभिषेक

मोसाद (गुजरात)। भोलेनाथ की आराधाना के पावन महीने सावन की शुरुआत हो चुकी है। इसके साथ ही पूरे राज्य में हर-हर महादेव की गूंज सुनाई देनी शुरू हो गई है। इसी मौके पर आज हम आपको गुजरात के एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे बहुत कम ही लोग जानते हैं।

यह मंदिर नर्मदा जिला, देडियापाडा तालुका के कोकम गांव में स्थित है। इस मंदिर को जलेश्वर महादेव मंदिर के नाम से जाना जाता है। माना जाता है कि यह शिवलिंग 5000 साल पुराना है।
मोसाद शहर से लगभग 14 किमी की दूरी पर स्थित महादेव का यह मंदिर पूर्वा नदी के तट पर है। यह नदी पूर्व दिशा की ओर बहती है, इसीलिए इसे पूर्वा नदी के नाम से पहचाना जाता है। 
5000 सालों से खुद जल देवता करते आ रहे हैं इस शिवलिंग का अभिषेक

यहां महादेव के मंदिर के अलावा हनुमानजी का भी एक मंदिर है। आमतौर पर हनुमानजी का मंदिर दक्षिणमुखी होता है, लेकिन यहां मंदिर पूर्वमुखी है। सूर्योदय के समय सूर्य की किरणों सीधे इस मंदिर में स्थापित हनुमानजी की प्रतिमा पर पड़ती है।
 
हनुमानजी के इसी मंदिर के ठीक पीछे जमीन से 3 फुट नीचे एक शिवलिंग है। इसी शिवलिंग को जलेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है।  इसके बारे में एक दंतकथा यह भी है कि वनवास के दरमियान पांडवों ने शिव को प्रसन्न करने के लिए इसी शिवलिंग की पूजा की थी।
5000 सालों से खुद जल देवता करते आ रहे हैं इस शिवलिंग का अभिषेक


आमतौर पर शिवलिंग का अभिषेक दूध और जल से भक्त किया करते हैं, लेकिन इस शिवलिंग की विशेषता यह है कि इसका अभिषेक बारहों महीनें और चौबीसों घंटे होता रहता है। शिवलिंग का अभिषेक खुद जलदेवता ही करते हैं। जहां शिवलिंग स्थित है, वहीं एक हाथ गड्ढा खोदने पर ही पानी निकल आता है।
 
यहां सबसे आश्चर्य की बात यह है कि लगातार इतना सारा पानी जमीन से ही आता है और वापस जमीन में ही पहुंच जाता है। पानी की यह धारा अनंत समय से ही फूट रही है। आज तक कभी ऐसा नहीं हुआ कि शिवलिंग पर पानी न बरसा हो।

sabhar :http://www.bhaskar.com/

Read more

क्या यौन संक्रमण से होता है प्रॉस्टेट कैंसर?

0

प्रॉस्टैट कैंसर की कोशिकाएं

वैज्ञानिकों का कहना है कि हो सकता है कि प्रॉस्टेट कैंसर एक यौन संचारित रोग (एसटीडी) हो, जो संभोग के समय संक्रमण की वजह से होता हो.
लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इसे साबित करने के लिए अभी और प्रमाण की ज़रूरत है.

कैलिफ़ोर्निया विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने इंसानी ब्रिटेन की संस्था कैंसर रिसर्च यूके का कहना है कि हालांकि कुछ कैंसर संक्रमण की वजह से होते हैं. लेकिन इस सूची में प्रॉस्टेट कैंसर को जोड़ना अभी जल्दबाज़ी होगी.
क्लिक करेंप्रॉस्टेट कोशिकाओं का प्रयोगशाला में परीक्षण किया.

यौन संक्रमण

इस दौरान वैज्ञानिकों ने पाया कि ट्रीकोमोनियासिस नाम के एक यौन संक्रमण ने क्लिक करेंकैंसर बढ़ाने में भूमिका निभाई.
"इस अध्ययन में एक संभव तरीके से यह पता चलता है कि परजीवी ट्रिकोमोनस वाजिनालिस प्रॉस्टैट कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि को बढ़ावा दे सकता है और इसे तेज़ी से विकसित कर सकता है"
निकोला स्मिथ, कैंसर रिसर्च यूके
प्रोसिडिंग ऑफ़ द नेशनल एकेडमी ऑफ़ साइंस (पीएनएस) नाम की विज्ञान पत्रिका का कहना है कि इसे साबित करने के लिए अभी और शोध किए जाने की ज़रूरत है.
माना जाता है कि दुनियाभर में 27.5 करोड़ लोग ट्रीकोमोनियासिस से संक्रमित हैं. यह विषाणुओं के बिना होने वाला सबसे आम यौन संक्रमण है.
इससे संक्रमित व्यक्ति में इसका कोई लक्षण नहीं दिखाई देता है. इसलिए उसे इसकी जानकारी नहीं होती.
इससे संक्रमित पुरुष पेशाब करने के बाद या संभोग के दौरान स्खलन के बाद लिंग के अंदर जलन और खुजली महसूस करता है या उसके लिंग से सफेद रंग का तरल पदार्थ निकलता है.
वहीं इससे संक्रमित क्लिक करेंमहिलाओं के जननांगों में खुजली या दर्द, पेशाब करते समय बेचैनी या मछली जैसी दुर्गंध वाले पदार्थ का निकल महसूस कर सकती हैं.
ट्रीकोमोनियासिस और प्रॉस्टेट कैंसर के बीच संबंध बताने वाला यह पहला शोध नहीं है. साल 2009 में हुए एक अध्ययन में पाया गया था कि प्रॉस्टेट कैंसर से पीड़ित एक चौथाई पुरुषों में ट्रीकोमोनियासिस के लक्षण पाए गए. इन लोगों में कैंसर का एडवांस ट्यूमर होने की आशंका थी.

प्रॉस्टेट कैंसर का कारण

प्रॉस्टैट कैंसर की कोशिकाएं
पीएनएस के अध्ययन नें बताया गया है कि यौन संबंध बनाने के दौरान हुआ संक्रमण कैसे पुरुषों में प्रॉस्टेटक्लिक करेंकैंसर फैलने का ख़तरा बढ़ा सकता है. हालांकि दोनों के बीच संबंध स्थापित करने के लिए यह निश्चित प्रमाण नहीं है.
प्रोफ़ेसर पैट्रिका जॉनसन और उनके सहयोगियों ने पाया कि ट्रिकोमोनियासिस पैदा करने वाला परजीवी ( ट्रिकोमोनस वाजिनालिस) प्रोटीन का स्राव करता है, जो जलन पैदा करता है और प्रॉस्टेट कैंसर की कोशिकाओं में वृद्धि करता है.
उनका कहना है कि इसमें और निश्चितता स्थापित करने के लिए और अध्ययन की ज़रूरत है. ख़ासकर इसलिए भी क्योंकि हमें अभी तक यह भी नहीं पता है कि प्रॉस्टेट कैंसर कैसे होता है.
कैंसर रिसर्च यूके की स्वास्थ्य सूचना अधिकारी निकोला स्मिथ ने कहा, ''इस अध्ययन में एक संभव तरीके़ से यह पता चलता है कि परजीवी ट्रिकोमोनस से एक ऐसे तरव पदार्थ का स्त्राव होता है जिससे जलन होती है और जो इस तरह की कोशिकाओं को बढ़ावा दे सकता है जिसका प्रभाव बाद में ज़ाहिर हो.''
वो कहती हैं, ''यह अध्ययन अभी केवल प्रयोगशाला में हुआ है और पहले के प्रमाण प्रॉस्टेट कैंसर और सामान्य यौन संक्रमण में कोई संबंध स्थापित करने में नाकाम रहे.''
निकोला स्मिथ कहती हैं, ''प्रॉस्टेट कैंसर के ख़तरे के बारे में पता लगाने के लिए बहुत अध्ययन हुए हैं और हम इस पहेली को सुलझाने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं.''
वो कहती हैं, ''लेकिन जीवनशैली इसका कारण है या नहीं, इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है. ये कहना कठिन है कि क्या इससे संक्रमण बढ़ सकता है और इन दोनों में कोई संबध है.''
वो कहती है कि उम्र बढ़ने के साथ ही प्रॉस्टेट कैंसर का ख़तरा बढ़ता जाता है.

ब्रिटेन के पुरुषों में प्रॉस्टेट कैंसर बहुत आम है. नौ में से एक पुरुष में इसका पाया जाना आम है. यह 70 साल से अधिक आयु के लोगों में बहुत आम है.sabhar :http://www.bbc.co.uk/

Read more

सोमवार, 14 जुलाई 2014

आम ही आम, अब नहीं गुठली का काम

0


 





बिहार के लोगों के लिए एक अच्छी खबर है. अब तक तो यहां के लोग गुठली वाला आम ही खाया करते थे लेकिन अब बगैर गुठली वाले आम का भी मजा लेंगे. बिहार कृषि विश्वविद्यालय ने महाराष्ट्र में विकसित सिन्धु प्रभेद का पौध लगा कर सफल प्रयोग किया है. तीन वर्षे के पौध में पहला फलन लगा आम इसके सफलता का द्योतक है. विश्व में पहली बार कोंकण विद्यापीठ संस्थान, महाराष्ट्र ने बगैर गुठली के आम को विकसित किया है. उस प्रभेद को विश्वविद्यालय के अखिल भारतीय समन्वित फल परियोजना प्रक्षेत्र में लगाया गया है. पौध से इस बार बेहतर फलन प्राप्त हुए हैं. इससे इतना स्पष्ट हो गया है कि अब आने वाले समय में बिहार की धरती पर भी इसका उत्पादन किया जा सकता है. बीएयू के उद्यान विभाग (फल) के विभागाध्यक्ष डॉ. वी.बी. पटेल कहते हैं सघन बागवानी के लिए भी यह उपयुक्त प्रभेद है.इसे आम्रपाली की तरह किचन गार्डन में भी लगाया जा सकता है. तीसरे वर्ष से फलन प्रारंभ हो जाता है. यह जुलाई के मध्य तक पकता है और इसमें गुठली नहीं के बराबर होती है.



फल लाल रंग का, कम रेशायुक्त होता है. प्रत्येक वर्ष फल देने वाला होता है. फल गुच्छे में आते हैं. गुदा गहरे पीले रंग का होता है.




इसका वजन 200 ग्राम के आस पास होता है. यह किस्म रतना और अलफांसो के संकरण से विकसित की गई है






बीएयू के कुलपति डॉ. मेवालाल चौधरी ने बताया कि गुठली रहित आम बिहार के आम उत्पादकों के लिए वरदान होगा. विविद्यालय में इसका फलन इसके सफल प्रयोग का गवाह है.


उत्साहित विश्वविद्यालय सिन्धु प्रभेद के इस पौध को अब किसानों तक उपलब्ध कराने पर विचार कर रहा है. यदि सब कुछ ठीक रहा तो आने वाले समय में बिहार के किसान विश्वविद्यालय से इसका पौध आसानी से प्राप्त कर सकेंगे और देश का पहला गुठली रहित आम घर-घर के थाली में होगा.आने वाले समय में यदि बेहतर ढंग से बिहार के किसान इसका उत्पादन करें तो इस प्रभेद की मांग विदेशों में बहुत ज्यादा हो सकती है.




अपने इस प्रभेद को लेकर अंतर्राष्ट्रीय बाजार में बिहार की विशेष पहचान बन सकती है.यहां यह बता दें कि विश्व में पहली बार इस प्रकार के नए प्रभेद को महाराष्ट्र में विकसित किया गया है जिसके उत्पादन का सफल प्रयोग बीएयू ने किया है. sabhar :
http://www.samaylive.com/






Read more

पेपर की तरह मोड़ सकेंगे टीवी को?

0

मुड़ने वाली स्क्रीन


इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद बनाने वाली कंपनी एलजी ने पेपर जैसे पतले दो नए टीवी स्क्रीन लॉन्च किए हैं जिनमें से एक इतना लचीला है कि उसे तीन सेंटीमीटर की गोलाई में मोड़ा जा सकता है.
क्लिक करेंकंपनी का कहना है कि इसके ज़रिए अब टीवी को नई तरह से इस्तेमाल किया जा सकेगा.
मुड़ने वाली स्क्रीन
इस नए टीवी स्क्रीन का रेज़ोल्यूशन 1,200x810 है जिसकी वजह से इसे मोड़ने के बाद भी तस्वीरें बिगड़ती नहीं.
कंपनी को विश्वास है कि 2017 तक वो इसके ज़रिए 60 इंच का मुड़ने वाला टीवी बनाने में कामयाब होंगे.
पारदर्शी स्क्रीन
स्टफ़ टीवी के संपादक स्टीफ़न ग्रेव्स के मुताबिक, "मुड़ने वाली स्क्रीन एक बेहतरीन तकनीक है जो नए रास्ते खोलती है. ये परंपरागत स्क्रीन से ज्यादा टिकाऊ होगी. इसका मतलब है कि हम हवाई जहाज़ जैसी जगहों पर बड़ी और बेहतर स्क्रीन की उम्मीद कर सकते हैं."

कंपनी ने इस साल की शुरूआत में अपने पहले 'लचीले टीवी' की घोषणा एक इलेक्ट्रॉनिक्स ट्रेड शो में की थी.

sabhar :

Read more

लड़कियों ने दिखाए योग के कमाल, तस्वीरों में देखिए अलग-अलग आसन

0

लड़कियों ने दिखाए योग के कमाल, तस्वीरों में देखिए अलग-अलग आसन

रांची. झारखंड योग एसोसिएशन के द्वारा रांची जिला योग संघ व परमहंस योगानन्द योगाश्रम के संयुक्त तत्वावधान में रांची के अग्रसेन भवन में चल रहे 13वीं झारखंड राज्य योग चैंपियनशिप के दूसरे दिन शनिवार को रांची और केआईवाई जमशेदपुर के प्रतिभागियों का दबदबा रहा। प्रतियोगिता के दूसरे दिन पूर्वी क्षेत्र के पर्यवेक्षक डॉ. आसवित आईच एवं अध्यक्ष प्रवीर कर्मकार ने दीप प्रज्ज्वलित कर प्रतियोगिता का शुभारंभ किया। प्रतियोगिता में शनिवार को 11 से 14 वर्ष की लड़कियों के बीच मुकाबला हुआ। जिसमें इन लड़कियों ने कमाल के आसन दिखाए। इस दौरान अलग- अलग वर्गो में कई प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया।प्रतियोगिता के 11 से 14 वर्ष बालिका में कोमल कुमारी (रांची), सलोनी कुमारी (रांची), निलांजना कुमारी (रांची), उषा कुमारी (पलामू), 17 से 21 महिला में वंदना कुमारी, सिन्धु महतो, ज्योत्सना (सभी रांची), 21 से 25 वर्ष महिला में इंदु महतो (रांची), कुसुम महतो (धनबाद), 35 वर्ष से ऊपर महिला लक्ष्मी रंजना (रांची), श्रावणी चक्रवर्ती (केआईवाई), 25 से 35 वर्ष महिला प्रियंका भट्टाचार्य (केआईवाई), पिंकी घोष (केआईवाई), अर्चना कुमारी (रांची), 21 से 25 वर्ष पुरुष उज्जवल शर्मा (केआईवाई), सन्नी (पश्चिम सिंहभूम), चंदन कुमार (चाईबासा), 25 से 35 वर्ष पुरुष अजय कुमार (रांची), सुब्रतो जोश (केआईवाई), डॉ. मनीष कुमार (रांची), 11 से 14 वर्ष बालक आयुष (जमशेदपुर), कुमार मानवेन्द्र (रांची), केतन कुमार (रांची), दीपक कुमार (पलामू) ने क्रमश अपने-अपने आयु वर्गों में प्रथम, द्वितीय व तृतीय स्थान प्राप्त किए।
लड़कियों ने दिखाए योग के कमाल, तस्वीरों में देखिए अलग-अलग आसन


लड़कियों ने दिखाए योग के कमाल, तस्वीरों में देखिए अलग-अलग आसन

लड़कियों ने दिखाए योग के कमाल, तस्वीरों में देखिए अलग-अलग आसन


लड़कियों ने दिखाए योग के कमाल, तस्वीरों में देखिए अलग-अलग आसन

लड़कियों ने दिखाए योग के कमाल, तस्वीरों में देखिए अलग-अलग आसन

लड़कियों ने दिखाए योग के कमाल, तस्वीरों में देखिए अलग-अलग आसन

लड़कियों ने दिखाए योग के कमाल, तस्वीरों में देखिए अलग-अलग आसन

लड़कियों ने दिखाए योग के कमाल, तस्वीरों में देखिए अलग-अलग आसन

लड़कियों ने दिखाए योग के कमाल, तस्वीरों में देखिए अलग-अलग आसन

लड़कियों ने दिखाए योग के कमाल, तस्वीरों में देखिए अलग-अलग आसन

लड़कियों ने दिखाए योग के कमाल, तस्वीरों में देखिए अलग-अलग आसन

लड़कियों ने दिखाए योग के कमाल, तस्वीरों में देखिए अलग-अलग आसन

लड़कियों ने दिखाए योग के कमाल, तस्वीरों में देखिए अलग-अलग आसन

sabhar : bhaskar.com



Read more

शनिवार, 12 जुलाई 2014

बादाम खाने से आपका ‘दिल’ रहेगा स्वस्थ

0

बादाम खाने से आपका ‘दिल’ रहेगा स्वस्थ

लंदन : एक अध्ययन के मुताबिक हर दिन मुट्ठीभर बादाम दिल की बीमारियों के खतरे को कम करता है। अध्ययन का दावा है कि बादाम खाने से हृदय की रक्त वाहिकाएं स्वस्थ रहती हैं। ब्रिटेन में एश्टन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने अपने शोध में पाया कि बादाम खाने से रक्त में एंटीऑक्सिडेंट की मात्रा में उल्लेखनीय रूप से बढ़ोत्तरी होती है जिसके कारण रक्तचाप बढ़ता है और रक्त प्रवाह में सुधार होता है।
शोधकर्ताओं ने बताया है कि ये नए तथ्य उस अवधारणा की पुष्टि करते हैं कि भूमध्यसागरीय क्षेत्र में बादाम से भरपूर भोजन स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होता है। यह अध्ययन एश्टन यूनिवर्सिटी में बायोमेडिकल साइंसेज में प्रोफेसर और स्कूल ऑफ लाइफ एंड हेल्थ साइंसेज में कार्यकारी डीन प्रोफेसर हेलेन ग्रीफिथ के नेतृत्व में किया गया था।
शोध के दौरान शोधकर्ताओं ने स्वस्थ युवाओं, अधेड़ उम्र के व्यक्तियों और हृदय की बीमारियों से ग्रस्त युवा व्यक्तियों के समूहों के बीच अल्प अवधि के लिए बादामयुक्त भोजन के प्रभाव को लेकर शोध किया था। शोध में उच्च रक्तचाप या अधिक वजन की समस्या से ग्रस्त व्यक्तियों को भी शामिल किया गया था। sabhar :http://zeenews.india.com/

Read more

शुक्रवार, 11 जुलाई 2014

वैज्ञानिकों ने इन्सानों में ऑन-ऑफ बटन खोजा

0

brain

वॉशिंगटन

वैज्ञानिकों ने इन्सान के मस्तिष्क में ऑन-ऑफ स्विच खोजने का दावा किया है। साइंटिस्ट्स का दावा है कि इस बटन से इन्सान को बेहोश किया जा सकता है या बेहोशी से बाहर लाया जा सकता है। 

जॉर्ज वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी के डॉ. मोहम्मद कुबैसी और उनकी टीम ने एक मरीज पर स्टडी के दौरान पाया कि दिमाग के एक खास हिस्से से निकल रही तरंगें उन्हें बार-बार सुला देती थीं। अगर इन तरंगों को रोका गया तो वह जग गईं लेकिन उन्हें बिल्कुल याद नहीं था कि इस दौरान क्या हुआ। इन्सान का होश में होना या बेहोश होना कैसे काम करता है, यह अभी तक एक रहस्य है। इस वजह से वैज्ञानिकों के बीच नींद एक बहस का मुद्दा बना हुआ है। ऐसे में, न्यू साइंटिस्ट मैगजीन में छपी यह नई खोज काफी मददगार साबित हो सकती है। sabhar :http://navbharattimes.indiatimes.com/

Read more

टेक्नोलॉजी का मानव को एक और उपहार : रिमोट कंट्रोल गर्भनिरोधक

0



न्यूयॉर्क. दुनिया के एक कोने से दूसरे कोने पर बैठे व्यक्ति से बात करना, फिर उसको देख पाना, रिमोट कंट्रोल से चलने वाली टीवी, कंप्यूटर, कार सबकुछ समझ आता है, लेकिन आपको जानकर ताज्जुब होगा कि अमेरिका की एक कंपनी ने एक ऐसी गर्भनिरोधक चिप तैयार की है, जिसे रिमोट कंट्रोल से ऑन और ऑफ किया जा सकता है.
महिलाओं के लिए बनी इस चिप को स्किन के नीचे इंप्लांट किया जा सकता है. इसके बाद बाद यह चिप 16 साल तक लगातार काम कर सकती है.
माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक बिल गेट्स द्वारा समर्थित मैसाचूसिट्स की कंपनी माइक्रोचिप्स ने स्पेशल इंप्लांट डिवेलप किया है. मजेदार बात यह है कि डिवेलपर्स को इस चिप को बनाने का आइडिया भी बिल गेट्स की वजह से ही मिला था.
2 साल पहले मैसाचूसिट्स इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी की लैब में आए गेट्स ने वहां के प्रफेसर से पूछा था कि क्या बर्थ कंट्रोल का ऐसा तरीका हो सकता है जिसे महिला ऑन या ऑफ कर सके. इस इंप्लांट में लगी चिप 16 साल तक हर रोज लिवोनोर्जेस्ट्रेल नाम का हारमोन रिलीज करेगी. यह हारमोन प्रेगनेंसी रोकता है.
इसके साथ ही एक और इंप्लांट करवाने के बाद महिला वायरलेस कंट्रोल से इस चिप को एक्टिवेट या डिएक्टिवेट कर सकती है. यानी एक तरह से यह गर्भनिरोध का काफी सुविधाजनक तरीका है.
इस स्पेशल चिप को हिप्स, बांहों या पेट में स्किन के नीचे इंप्लांट किया जा सकता है. इसके डिवेलपर्स का दावा है कि इस इंप्लांट से लंबे समय तक बर्थ कंट्रोल सॉल्यूशन मिलेगा और साथ ही डॉक्टरों के क्लीनिक्स के चक्कर भी नहीं काटने पड़ेंगे.
इस इंप्लांट को तैयार करने वालों का कहना है कि अगर इस इंप्लांट ने सेफ्टी टेस्ट पास कर दिए तो यह साल 2018 तक बाजार में होगा. इस इंप्लांट की क्लीनिकल टेस्टिंग अगले साल शुरू होगी.sabhar :http://www.palpalindia.com/

Read more

बुधवार, 9 जुलाई 2014

सारी बीमारियों का एक ही डॉक्टर - टमाटर

0



ज़ी मीडिया ब्यूरो 
नई दिल्ली: टमाटर सिर्फ स्वाद में ही खट्टा-मीठा नहीं होता बल्कि टमाटर कई तरह के औषधिय गुणों से भी भरपूर होता है। टमाटर एंटी-ऑक्सीडेंट और खासकर लाइकोपीन से भरपूर होता है। टमाटर में प्रोटीन, विटामिन, वसा आदि तत्व विद्यमान होते हैं। यह सेवफल व संतरा दोनों के गुणों से युक्त होता है। कार्बोहाइड्रेट की मात्रा कम होती है इसके अलावा भी टमाटर खाने से कई लाभ होते हैं। पौष्टिक तत्वों से भरपूर टमाटर हर मौसम में फायदेमंद है। इसे सब्जी में डालें या सलाद के रूप में या किसी और रूप में यह आपके लिए बेहद फायदेमंद साबित होगा।
टमाटर खाने से भूख बढती है। इसके अलावा टमाटर पाचन शक्ति, पेट से संबंधित अनेक समस्याओं को दूर करता है। टमाटर खाने से पेट साफ रहता है और इसके सेवन से रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है। त्वचा के लिए टमाटर खाने से सनबर्न और टैन्ड स्किन में फायदा होता है। टमाटर में पाया जाने वाला लाइकोपीन तत्व त्वचा को अल्ट्रावायलेट किरणों से बचाता है।
डायबिटीज रोगियों के लिए टमाटर खाना बहुत फायदेमंद होता है। हर रोज एक खीरा और एक टमाटर खाने से डायबिटीज रोगी को लाभ मिलता है। टमाटर आंखों व पेशाब संबंधी रोगों के लिए भी फायदेमंद है। टमाटर खाने से लीवर और किडनी की कार्यक्षमता को बढ़ाता है। हर रोज टमाटर का सूप पीने से लीवर और किडनी को फायदा होता है।
यदि आप टमाटर जैसा लाल दिखना चाहते हैं तो अपने भोजन में टमाटर का सेवन शुरू कर दीजिए। टमाटर को कच्चा, पकाकर और सूप के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। किसी न किसी तरह से आप टमाटर को आप हर रोज इस्तेमाल करते हैं। टमाटर खाने से कैंसर का खतरा कम होता है।
टमाटर खाने से त्वचा जवां दिखती है और त्वचा से संबंधित बीमारियां नहीं होती हैं। यानी टमाटर आपको जवां दिखाता है। ब्लड प्रेशर के मरीजों के लिए भी टमाटर बहुत फायदेमंद होता है। आइए हम आपको बताते हैं कि टमाटर में क्या-क्या गुण हैं और कैंसर से बचाव के लिए यह कितना फायदेमंद है।
टमाटर के नियमित सेवन से पेट साफ रहता है। टमाटर इतने पौष्टिक होते हैं कि सुबह नाश्ते में केवल दो टमाटर संपूर्ण भोजन के बराबर होते हैं और सबसे बड़ी बात तो यह है कि इनसे आपके वजन में जरा भी वृद्धि नहीं होगी। इसके अलावा यह पूरे शरीर के छोटे-मोटे विकारों को दूर करता है।
जो लोग अपना वजन कम करने के इच्छुक हैं, उनके लिए टमाटर एक वरदान है। एक मध्यम आकार के टमाटर में केवल 12 कैलोरीज होती है, इसलिए इसे पतला होने के भोजन के लिए उपयुक्त माना जाता है। sabhar :http://zeenews.india.com/

Read more

Ads

 
Design by Sakshatkar.com | Sakshatkartv.com Bollywoodkhabar.com - Adtimes.co.uk | Varta.tv