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शुक्रवार, 28 मार्च 2014

इस महिला के लिए रोजाना 5 घंटे सेक्स जरुरी नहीं तो

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इस महिला के लिए रोजाना 5 घंटे सेक्स जरुरी नहीं तो...
इंग्‍लैंड की रहने वाली एक महिला नेसा जे ने दावा किया है कि वह अब तक 324 लोगों के साथ सेक्स कर चुकी हैं.
महिला ने कहा है कि सेक्स करना उसकी लत बन चुकी है और वह रोज पांच घंटे तक अगर सेक्स नहीं करे तो उसे चैन नहीं मिलता है.

24 वर्षीय नेसा जे का कहना है कि सेक्स उसकी आदत और जरूरत बन चुका है जिसके बिना उसे चैन नहीं मिलता है.

इंग्लैंड के तटीय शहर क्रोमर की नेसा इस आदत से छुटकारा पाने के लिए थेरेपी भी ले रही हैं.
उसका कहना है कि अगर मैं दिन में पांच बार सेक्‍स के जरिए चरम पर न पहुंचूं तो मेरी हथेलियों पर पसीना आने लगता है और मुझे गुस्‍सा आने लगता है.

इस दौरान मुझे खुद को संतुष्‍ट करने की जरूरत महसूस होने लगती है.

नेसा ने खुद को माइक्रो ब्‍लॉगिंग साइट ट्विटर पर सेक्‍स टॉयज़ का फिलॉसफर और बॉइंकोलॉजिस्‍ट (सेक्‍स पर लिखने वाला) बताया है.
नेसा कहीं भी तलाशती है सेक्‍स पार्टनर

नेसा के मुताबिक वह `किसी के साथ` भी सेक्‍स कर सकती हैं. वह सुपर मार्केट जाकर भी अपने लिए सेक्‍स पार्टनर तलाशती रहती हैं.

नेसा ने 16 साल की उम्र में अपनी वर्जिनिटी खो दी थी और तब से ही सेक्‍स के लिए उसकी प्‍यास बढ़ती चली गई. लेकिन अब वह अपना ज्यादातर समय सेक्‍स टॉयज रिव्‍यू करने में लगाती हैं.

नेसा के मुताबिक पहले एक महीने में करीब 30 पुरुषों के साथ हमबिस्‍तर हुआ करती थी, लेकिन अब एक ही पार्टनर है. उसका कहना है कि सेक्‍स का मजा लेने के लिए भावनात्‍मक होना भी जरूरी है. sabhar :http://www.samaylive.com/

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हीरोइनः पहले बुरी फिर बाद में हो गई सुंदर

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कुछ ज्यादा ही काली लगतीं थीं शिल्पा

कुछ ज्यादा ही काली लगतीं थीं शिल्पा


आज बॉलीवुड की स्टाइल आईकॉन कही जाने वाली शिल्पा शेट्ी एक बच्चे की मां बनने के बाद भी बेहद सुंदर नजर आती हैं। लोग उनकी सुंदरता की तारीफ करते नहीं थकते। लेकिन जब इन्होंने बॉलीवुड में कदम रखा था इनको बुराई ही मिली थी।

शिल्पा पर्दे पर बेहद काली दिखती थीं तो उनकी नाक भी अजीब थी इसके अलावा वह अक्सर ही गुलाबी लिपिस्टक लगाती थीं जो उनकी पर्सनलिटी को जरा भी सूट नहीं करती थी। लेकिन बाद में शिल्पा ने अपने लुक पर काफी ध्यान दिया और योग के सहारे न सिर्फ अपनी फिटनेस बल्कि सुंदरता में भी चार चांद लगा डाले।
काजोल भी नहीं थीं हुस्न की मल्लिका

काजोल भी नहीं थीं हुस्न की मल्लिका

तनुजा की बेटी काजोल ने बेखुदी फिल्म से कैरियर शुरु किया फिल्म फ्लॉप रही तो काजोल को भी नकार दिया गया। लोगों को जरा भी नहीं लगा कि काजोल जैसी अजीब से चेहरे वाली लड़की में हीरोइन बनने के लिए कुछ खास चेहरा मोहरा है।

लेकिन इसके बाद न सिर्फ काजोल की एक्टिंग ने लोगों को दिल जीत लिया बल्कि अपनी काली गहरी आंखों का दीवाना कईयों को बना डाला।

करिश्मा दिखतीं थी बेहद अजीब

करिश्मा दिखतीं थी बेहद अजीब

करिश्मा कपूर ने मात्र 17 साल की उम्र में बॉलीवुड में कैरियर शुरु किया। 'प्रेम कैदी' में जिसने भी उनको देखा मानने को तैयार ही नहीं हुआ कि ये कपूर खानदान से ताल्लुक रखती है।

करिश्मा का चेहरा गोरा था और आंखे नीली पर उनका चेहरा देखने में बहुत ही अजीब सा लगता था। करिश्मा की भोंहे मिली हुई थीं और हेयर स्टाइल भी अजीब ही था। वो जरा भी सुंदर नहीं दिखती थीं। लेकिन बाद में करिश्मा ने अपना मेकओवर किया और फिर बॉलीवुड की सेक्सी बाला बन गई। करिश्मा ने एक के बाद एक कई हिट फिल्में भी दीं।
रेखा सबसे बड़ी मिसाल

रेखा सबसे बड़ी मिसाल

रेखा ने जब फिल्मी दुनिया में कदम रखा तो वह बेहद मोटी और थुलथुली थीं। उनके कोस्टार नवीन निश्चल ने तो एक बार उनके साथ काम तक करने को मना कर दिया था।

लेकिन फिर बाद में रेखा ने अपने शरीर पर इतनी मेहनत की फिर उनकी सुंदरता निखरती ही चली गई। आलम ये हुआ कि रेखा की आंखों की मस्ती के दीवाने लाखों बन गए।

sabhar :http://www.amarujala.com/



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देखिए, औरतें जो बन गईं हैंडसम मर्द

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10 Handsome Men Who Were Born Female



बक एंजेल- एडल्ट फिल्ममेकर

10 Handsome Men Who Were Born Female


लुकास सिल्वेरिया- गिरारिस्ट, सॉन्ग राइटर


10 Handsome Men Who Were Born Female

काटास्ट्रोफी - अमेरिकन हिपहॉप रैपर
10 Handsome Men Who Were Born Female


थॉमस बिटीः दुनिया का सबसे पॉपुलर प्रेगनेंट पुरुष

10 Handsome Men Who Were Born Female

चैज़ बोनो- टीवी पर्सनेलिटी
चैज़ बोनो- टीवी पर्सनेलिटी


काटास्ट्रोफी10 Handsome Men Who Were Born Female


रियान सैलांस- वकील


10 Handsome Men Who Were Born Female



एंड्रीयास क्रिगर- जर्मन शॉट पुटर


रियान सैलांस- वकी10 Handsome Men Who Were Born Female


बा‌लियन बसचबॉम-जर्मन पॉल डांसर

sabhar : http://www.amarujala.com/









 - अमेरिकन हिपहॉप रैपर

काटास्ट्रोफी - अमेरिकन हिपहॉप रैपर
लुकास सिल्वेरिया- गिरारिस्ट, सॉन्ग राइटर

बक एंजेल- एडल्टबक एंजेल- एडल्ट फिल्ममेकर फिल्ममेकर

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46 की उम्र में भी लोगों को उत्तेजित कर देती है ये हसीना

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Pamela Anderson, 46, poses nude for French magazine

Pamela Anderson, 46, poses nude for French magazine

46 वर्षीय कनाडियन, अमेरिकन एक्ट्रेस पामेला एंडरसन ने हाल ही में एक फ्रेंच मैग्जीन के लिए न्यूड फोटोशूट करवाया है। फोटोः डेली मेल


46 साल की उम्र में भी पामेला बेहद हॉट लग रही हैं।

Pamela Anderson, 46, poses nude for French magazine

25 साल पहले पामेला ने प्लेब्वॉय मैग्जीन के कवर पेज के लिए न्यूड फोटोशूट करवाया था।


Pamela Anderson, 46, poses nude for French magazine

पामेला को देखकर ऐसा लग रहा है कि बढ़ती उम्र के साथ वे ज्यादा खूबसूरत होती जा रही हैं



Pamela Anderson, 46, poses nude for French magazine

इस पूरे फोटोशूट में पामेला ने सिर्फ एक फर से अपने आपको ढक रखा है।


Pamela Anderson, 46, poses nude for French magazine


कहीं-कहीं तो पामेला के ब्रेस्ट बिल्कुल साफ नजर आ रहे हैं।

sabhar :http://www.amarujala.com/


25 सालकहीं-कहीं तो पामेला के ब्रेस्ट बिल्कुल साफ नजर आ रहे हैं। पहले पामेलापामेला को देखकर ऐसा लग रहा है कि बढ़ती उम्र के साथ वे ज्यादा खूबसूरत होती जा रही हैं ने प्लेब्वॉय मैग्जीन के कवर पेज के लिए न्यूड फोटोशूट करवाया था।
फोटोः डेली मेल46 साल की उम्र में भी पामेला बेहद हॉट लग रही हैं।
फोटोः डेली मेल
फोफोटोः डेली मेलटोः डेली मेल


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गुरुवार, 27 मार्च 2014

फेसबुक 120 अरब रुपए में वर्चुअल रियलिटी गॉगल बनाने वाली कंपनी खरीदेगी

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वर्चुअल रियलिटी गॉगल बनाने वाली कंपनी खरीदेगी फेसबुक, 120 अरब रुपए में सौदा


वाशिंगटन। फेसबुक इंक गेम्स के लिए वर्चुअल रिएलिटी गॉगल बनाने वाली दो साल पुरानी ओक्युलस वीआर इंक को खरीदेगा। यह सौदा दो अरब डॉलर (करीब 120 अरब रुपए) में तय हुआ है। वेयरेबल डिवाइस के तेज़ी से बढ़ते बाजार में यह अपने तरह का पहला सौदा होगा।

मैसेजिंग सर्विस वॉट्सऐप की डील के बाद ये फेसबुक की ओर से दूसरा बड़ा अधिग्रहण होगा। टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री में अगले पारी की उम्मीद के साथ फेसबुक ने एक बड़ी बोली लगाई है। वो भी उस वक्त में जब यूजर्स बहुत तेज़ी से पीसी छोड़ स्मार्टफोन का दामन थाम रहे हैं।

इंडस्ट्री के बहुत से जानकारों का मानना है कि वेयरेबल डिवाइस तकनीक दुनिया में अगले बदलाव का प्रतिनिधित्व कर सकती है। इसी तरह गूगल इंक ने भी गूगल ग्लास का परीक्षण किया है। पिछले हफ्ते गूगल ने हाथों में लगाने वाली कम्प्यूटराइज्ड घड़ी बनाने के प्रयास भी शुरू किए हैं।

वर्चुअल रियलिटी गॉगल बनाने वाली कंपनी खरीदेगी फेसबुक, 120 अरब रुपए में सौदा


इस सौदे को लेकर फेसबुक की ओर से कहा गया कि ये तकनीक सोशल और कम्युनिकेशन क्षेत्र में एक बदलाव ला सकती है। फेसबुक के संस्थापक और चीफ एक्जीक्यूटिव मार्क जुकरबर्ग ने कहा कि मोबाइल आज के वक्त की मांग है और अब हम अगले दौर के लिए एक नए मंच की तलाश कर रहे हैं। ओक्युलस इस दिशा में एक कोशिश है, ताकि गेम्स और कम्युनिकेशन के साथ ही काम करने के तरीके में बदलाव लाया जा सके। 
 
उन्होंने कहा कि गेम्स के अलावा हम ओक्युलस के जरिए लोगों को और भी तरह के अनुभवों के लिए प्लेटफॉर्म देने की तैयारी कर रहे हैं। अपने घर में सिर्फ इस वर्चुअल रिएलिटी गॉगल को लगाकर गेम्स के जरिए यूजर्स तमाम तरह के अनुभव ले सकेंगे।
 
डील के तहत फेसबुक ओक्युलस को 4000 लाख डॉलर (करीब 24 अरब रुपए) नगद देगा और उसके दो करोड़ 31 लाख शेयर्स फेसबुक के सामान्य शेयर में शामिल होंगे। 

sabhar ; bhaskar.com

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विकलांगों और बुजुर्गों को बेहतर जिंदगी देगा जापानी रोबोट सूट

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PIX: विकलांगों और बुजुर्गों को बेहतर जिंदगी देगा जापानी रोबोट सूट


टोक्यो. हादसे में हाथ-पैर गंवा देने वाले या जन्मजात विकलांगता का दंश झेलने वाले लोगों की जिंदगी को आसान बनाने के लिए टोक्यो में रोबोट सूट, हाईब्रिड असिस्टिव लिंब (एचएएल) का बुधवार को यूनिवर्सिटी ऑफ तुषुकुबा के प्रोफेसर और जैपनीज रोबोट वेंचर साइबरडाइन के प्रेसीडेंट युसुकी शंकाई ने डिस्प्ले किया। 
 
इसलिए खास है ये
 
खास तौर पर डिजाइन किया गया ये सूट उपयोग करने वाले की गति को नियंत्रित करने में सक्षम है। चल पाने में अक्षम बुजुर्गों के लिए भी यह कारगर रहेगा। हालांकि पूरे शरीर के लिए सूट तैयार करने में अभी और काम होना बाकी है। 
 
ये भी जानें : हाईब्रिड असिस्टिव लिंब बनाने में साइबरडाइन और तुशुकुबा विश्वविद्यालय संयुक्तरूप से काम कर रहे हैं। इस तरह के अंगों के परीक्षण का दौर 2015 तक चलेगा

PIX: विकलांगों और बुजुर्गों को बेहतर जिंदगी देगा जापानी रोबोट सूट


PIX: विकलांगों और बुजुर्गों को बेहतर जिंदगी देगा जापानी रोबोट सूट


PIX: विकलांगों और बुजुर्गों को बेहतर जिंदगी देगा जापानी रोबोट सूट


sabhar :http://www.bhaskar.com/

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बुधवार, 26 मार्च 2014

अब घर-घर नहीं फुदकती नन्हीं गौरैया

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अब घर-घर नहीं फुदकती नन्हीं गौरैया


लखनऊ: एक-दो दशक पहले लोगों के घर-आंगन में फुदकने वाली गौरैया आज विलुप्ति के कगार पर है। भारत में गौरैया की संख्या घटती ही जा रही है। इस नन्हें से परिंदे को बचाने के लिए प्रत्येक वर्ष 20 मार्च को विश्व गौरैया दिवस के रूप में मनाया जाता है। 

पर्यावरण संरक्षण में गौरैया के महत्व व भूमिका के प्रति लोगों का ध्यान आकृष्ट करने तथा इस पक्षी के संरक्षण के प्रति जनजागरूकता उत्पन्न करने के इरादे से यह आयोजन किया जाता है। यह दिवस पहली बार वर्ष 2010 में मनाया गया था। वैसे देखा जाए तो इस नन्ही गौरैया के विलुप्त होने का कारण मानव ही हैं। हमने तरक्की तो बहुत की लेकिन इस नन्हें पक्षी की तरक्की की तरफ कभी ध्यान नहीं दिया। यही कारण है कि जो दिवस हमें खुशी के रूप में मनाना चाहिए था, वो हम आज इसलिए मनाते हैं कि इनका अस्तित्व बचा रहे।

वक्त के साथ जमाना बदला और छप्पर के स्थान पर सीमेंट की छत आ गई। आवासों की बनावट ऐसी कि गौरैया के लिए घोंसला बनाना मुश्किल हो गया। एयरकंडीशनरों ने रोशनदान तो क्या खिड़कियां तक बन्द करवा दीं। गौरैया ग्रामीण परिवेश का प्रमुख पक्षी है, किन्तु गांवों में फसलों को कीटों से बचाने के लिए कीटनाशकों के प्रयोग के कारण गांवों में गौरैया की संख्या में कमी हो रही है।

पहले घर-घर दिखने वाली इस गौरैया के संरक्षण अभियान में अब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी जुड़ गए हैं। उन्होंने राज्य की जनता से गौरैया को लुप्त होने से बचाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की अपील की है।

उन्होंने गौरैया के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु वन विभाग से प्रदेश स्तर पर अभियान चलाने के लिए कहा है। प्रकृति ने सभी वनस्पतियों और प्राणियों के लिए विशिष्ट भूमिका निर्धारित की है। इसलिए पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए आवश्यक है कि पेड़-पौधों और जीव-जन्तुओं को पूरा संरक्षण प्रदान किया जाए।

गौरैया के संरक्षण में इंसानों की भूमिका सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। आवास की छत, बरामदे अथवा किसी खुले स्थान पर बाजरा या टूटे चावल डालने व उथले पात्र में जल रखने पर गौरैया को भोजन व पीने का जल मिलने के साथ-साथ स्नान हेतु जल भी उपलब्ध हो जाता है। बाजार से नेस्ट हाउस खरीद कर लटकाने अथवा आवास में बरामदे में एक कोने में जूते के डिब्बे के बीच लगभग चार सेंटीमीटर व्यास का छेद कर लटकाने पर गौरैया इनमें अपना घोंसला बना लेती है। सिर्फ एक दिन नहीं हमें हर दिन जतन करना होगा गौरैया को बचाने के लिए।

गौरैया महज एक पक्षी नहीं है, ये हमारे जीवन का अभिन्न अंग भी रहा है। बस इनके लिए हमें थोड़ी मेहनत रोज करनी होगी। छत पर किसी खुली छावदार जगह पर कटोरी या किसी मिट्टी के बर्तन में इनके लिए चावल और पीने के लिए साफ बर्तन में पानी रखना होगा। फिर देखिये रूठा दोस्त कैसे वापस आता है। (एजेंसी) sabhar :http://zeenews.india.com/

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दुनिया का पहला पोर्नोग्राफिक जर्नल लॉन्च, मुफ्त में होगा उपलब्ध

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दुनिया का पहला पोर्नोग्राफिक जर्नल लॉन्च, मुफ्त में होगा उपलब्ध

लंदन। पोर्नग्राफी कल्चर या सेक्शुअल फैंटेसी को समझने के इच्छुक लोगों के लिए दुनिया का पहला पोर्न जर्नल लॉन्च किया गया है। लंदन स्थित रॉटलेज प्रकाशन द्वारा लॉन्च किए गए इस जर्नल का नाम 'पोर्न स्टडीज' है। 
 
रॉटलेज के मुताबिक, यह दुनिया का पहला पोर्न जर्नल इश्यू है, जो आपको पोर्नोग्राफिक कल्चर और इससे जुड़ी सामग्री उपलब्ध करवाएगा। 
 
जर्नल के संपादक के मुताबिक, पोर्नोग्राफी की पढ़ाई अभी तक शुरुआती दौर में है। इस जर्नल में पोर्नोग्राफी के इतिहास और वर्तमान के अलावा दुनियाभर में उनकी विविधता से जुड़ी जानकारी होगी।  
 
'पोर्न स्टडीज' के पहले इश्यू में दो मुख्य पेपर हैं, जो 'साइकोलॉजी और पोर्नोग्राफी: एक झलक' और 'गोंजो, ट्रैनी, एंड टीन्स - अमेरिकी एडल्ट कंटेंट प्रोडक्शन, डिस्ट्रीब्यूशन और कंसंप्शन' हैं। 
 
एकैडमिक बुक्स, जर्नल्स और ऑनलाइन रिसोर्स प्रकाशित करने वाले रॉटलेज प्रकाशन के मुताबिक, 'पोर्न स्टडीज' में निश्चित समयावधि तक सभी के लिए मुफ्त उपलब्ध है। 

दुनिया का पहला पोर्नोग्राफिक जर्नल लॉन्च, मुफ्त में होगा उपलब्ध

प्रकाशित करने का कारण
'पोर्न स्टडीज' के एडिटर फियोना एटवुड और क्लैरिसा स्मिथ हैं। जर्नल के इंट्रोडक्शन में उन्होंने बताया कि इसे प्रकाशित करने के पीछे कई कारण हैं। इसमें बताया गया है कि सार्वजनिक स्थानों पर पोर्नोग्राफी के बारे में होने वाली चर्चा और पिछले कुछ सालों में टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में पोर्न का बढ़ता इस्तेमाल, 'पोर्न स्टडीज' को प्रकाशित करने का मुख्य कारण है sabhar :http://www.bhaskar.com/


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मंगलवार, 25 मार्च 2014

स्टीफन हॉकिंग की ब्लैक होल थ्योरी पहेली को सुलझाने का दावा

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स्टीफन हॉकिंग की ब्लैक होल थ्योरी पहेली को सुलझाने का दावा

वाशिंगटन। मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि उन्होंने वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग की ब्लैक होल थ्योरी को सुलझा लिया है।  यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर क्रिस एडमी ने बताया कि 1975 में हॉकिंग ने अपने रिसर्च में बताया था कि ब्लैक होल्स के सभी होल ब्लैक नहीं हैं। वास्तव में यह बिना किसी चमक के रेडिएशन फैलाते हैं। इसे हॉकिंग रेडिएशन कहा जाता है। 
 
इस वास्तविक थ्योरी में हॉकिंग ने कहा था कि रेडिएशन धीरे-धीरे ब्लैक होल को खा जाते हैं या संभवत: लुप्त हो जाते हैं। यानी जो भी ब्लैक होल्स में जाता है वह खो जाता है। हालांकि इस थ्योरी में एक मूलभूत समस्या है, जो हॉकिंग की बातों से विरोधाभासों को जन्म देती है। 
 
प्रो. एडमी बताते हैं कि क्वांटम फिजिक्स की मानें तो जानकारी कभी गायब नहीं होती है। वह इसे समझाते हैं कि जानकारी के खो जाने का मतलब है कि ब्लैक होल के किसी भी कण को निगलने के बाद हमारा ब्रह्मांड हर समय अप्रत्याशित तरीके से बदलाव महसूस करेगा। यह बात समझ के परे है कि भौतिक का कोई भी नियम इसकी इजाजत नहीं देता। 
 
यदि ब्लैक होल अपने तीव्र गुरुत्वाकर्षण खिंचाव के कारण किसी भी जानकारी को सोख लेता है और सारी जानकारियां गायब हो जाती हैं तो यह क्वांटम फिजिक्स के नियम का पालन नहीं करता है। 
 
एडमी कहते हैं कि रेडिएशन से उत्सर्जित जानकारी हॉकिंग रेडिएशन के मुताबिक, ब्लैक होल को चमकीला बनाती है, जबकि ब्लैक होल उतना काला नहीं है। यानी निगलने वाली जानकारी के उत्सर्जन के कारण ब्लैक होल चमकता है।
 
प्रोफेसर के मुताबिक, उत्सर्जन एक भौतिक क्रिया है। इसके पीछे लेजर (लाइट एम्प्लीफिकेशन बाय स्टीमुलेटेड इमीशन ऑफ रेडिएशन) है। मुख्यत: यह एक कॉपी मशीन की तरह है। अगर आप मशीन में कुछ डालोगे तो आपको दो परिणाम मिलेंगे। यदि आप ब्लैक होल में जानकारी डालेंगे तो उसे निगलने से पहले ब्लैक होल इसकी एक अन्य कॉपी बाहर फेंक देता है। इस कॉपी मेकेनिज्म की खोज अल्बर्ट आईंस्टीन ने 1917 में की थी। 
 
1975 से ही ब्लैक होल के व्यवहार पर काफी बहस होती रही है। इस साल की शुरुआत में हॉकिंग ने ब्लॉग पोस्ट में लिखा था कि इवेंट होरिजन यानी ब्लैक होल में अदृश्य सीमाएं हैं। हालांकि इनका कोई अस्तित्व नहीं है। 
 
 
गौरतलब है कि हॉकिंग को ब्लैक होल्स का सबसे बड़ा विशेषज्ञ माना जाता है। बीते सालों में उन्होंने अपनी थ्योरी में कई बदलाव किए और इसकी कॉस्मिक पहेलियों को समझने का काम किया। एरिजोना स्टेट यूनिवर्सिटी के कॉस्मोलॉजिस्ट पॉल डेविस बताते हैं कि एडमी ने ब्लैक होल जानकारी के विरोधाभासों का सही हल ढूंढने की कोशिश की है। आश्चर्यजनक रूप से यह जानकारी कई सालों तक छिपी रही है। 
 
अपने जर्नल क्लासिकल एंड क्वांटम ग्रैविटी में प्रकाशित हुए इस नए रिसर्च मुस्कारते हुए एडमी कहते हैं कि स्टीफन हॉकिंग की शानदार थ्योरी मेरे विचारों के साथ अब पूरी हुई है। ब्लैक होल थ्योरी में होल की खामी पूरी हुई है और मैं अब रात को शांति से सो सकता हूं। sabhar :http://www.bhaskar.com/

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सोमवार, 24 मार्च 2014

मनुष्य की तरह सोचने वाली ड्राइवर विहीन कार शीघ्र

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लंदन। वैज्ञानिक अगली पीढ़ी की एक ऐसी नई कार तैयार कर रहे हैं जो बिना ड्राइवर के चलेगी और इसमें मनुष्य की तरह ही निर्णय लेने की क्षमता होगी।
ब्रिटेन में स्टर्लिग यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने पाया है कि मानव मस्तिष्क के एक हिस्से के जैसा कंप्यूटर प्रोग्राम रोबोटिक कार को नियंत्रित कर सकता है। यह लेन बदल सकता है, गति को नियंत्रित कर सकता है और ब्रेक लगा सकता है। मस्तिष्क का यह हिस्सा निर्णय लेने के लिए जिम्मेदार होता है। द संडे टाइम्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि शोधकर्ता यूनिवर्सिटी में एक अंतरराष्ट्रीय रोबोटिक्स सम्मेलन में इस प्रौद्योगिकी को प्रदर्शित करेंगे। यूनिवर्सिटी के कंप्यूटिंग साइंस एंड मैथेमेटिक्स डिवीजन के इरफु यांग ने बताया, 'हम सम्मेलन में अगली पीढ़ी की स्मार्ट कार के बारे में बताएंगे। यह कार मनुष्य द्वारा नियंत्रित किए बिना बहुत से काम कर सकेगी। अभी तक किसी ने इस तरह की स्वचालित ड्राइविंग क्षमता का प्रदर्शन नहीं किया है।' शोधकर्ताओं का कहना है कि अगली पीढ़ी के ड्राइवर विहीन कार रास्ते की पूर्व जानकारी के बिना ही सड़क को पार कर सकेंगे। sabhar :http://www.jagran.com/

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98 बच्चों के बाप को बीवी चाहिए

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एड हूबेन

एड हूबेन को यूरोप का सबसे सक्रिय 'स्पर्म डोनर' कहा जा सकता है. उन्होंने क़रीब 100 बच्चों के जन्म के लिए शुक्राणु दान किए हैं लेकिन हूबेन को आज भी अपने जीवनसाथी की तलाश है.
हूबेन ने स्पर्म डोनेशन की शुरुआत नीदरलैंड स्थित एक स्थानीय फ़र्टिलिटी क्लीनिक से की थी.

बीबीसी के आउटलुक कार्यक्रम के जॉन लॉरेंसन हूबेन के साथ उनके 98वें बच्चे को देखने के लिए उनके साथ गए.लेकिन अब वह संतान की चाह रखने वाली महिलाओं को मुफ़्त सेक्स की सेवाएं दे रहे हैं.
उत्तर-पश्चिम जर्मनी में पुराने फार्म हाउस में लकड़ी की सीढ़ियों पर चढ़ते हुए हूबेन बताते हैं कि वह अपने इस बच्चे को पहली बार देख रहे हैं. वह बताते हैं कि उनका यह बच्चा सात सप्ताह का है.

98वें बच्चे से मुलाकात

यह उनका 98वां बच्चा है. उनकी बच्ची की माँ की उम्र 28 साल है, जो अपने बच्चे की काफ़ी अच्छे ढंग से देखभाल कर रही हैं.

"मैं बच्ची के पिता को जानना चाहती थी. मेरे लिए यह जानना महत्वपूर्ण था कि वह कहाँ का रहने वाला है? ताकि जब मेरी बच्ची बड़ी होकर सवाल पूछने लायक हो तो मैं उसके पिता के बारे में उसे बता सकूं."
एक बच्ची की माँ के शब्द
वह बताती हैं, "मैं अकेली थी. मैं सालों से एक बच्चा चाहती थी. लेकिन मुझे कोई उपयुक्त व्यक्ति नहीं मिला. इसलिए छह साल बाद मैंने हूबेन से मिलना शुरू किया."
उनके लिए एक अज़नबी व्यक्ति के साथ शारीरिक सबंध बनाना और बच्चे पैदा करना कितना मुश्किल था.
इसके बारे में वह कहती हैं, "मेरे लिए किसी ऐसे व्यक्ति की तलाश ज़्यादा महत्वपूर्ण थी जिसके ऊपर मैं भरोसा कर सकूं. अजनबी होना उतनी बड़ी समस्या नहीं थी क्योंकि हम बच्चा पैदा करने से पहले एक-दूसरे से परिचित हो सकते थे."
वह कहती हैं, "मैं बच्ची के पिता को जानना चाहती थी. मेरे लिए यह जानना महत्वपूर्ण था कि वह कहाँ का रहने वाला है? ताकि जब मेरी बच्ची बड़ी होकर सवाल पूछने लायक हो तो मैं उसके पिता के बारे में उसे बता सकूं. इसलिए मुझे अनजान व्यक्ति से क्लिक करेंस्पर्म डोनेशन स्वीकार करने की बजाय हूबेन से मिलना बेहतर लगा."

पिता से मिल पाएगी बेटी

एड हूबेन
वह कहती हैं, "यह बेहद महत्वपूर्ण है कि मेरी बेटी का अपने पिता से मिलना संभव हो सकेगा. अगर साल में एक या दो बार भी मिलना हो पाएगा तो भी मुझे अच्छा लगेगा. यह दोनों पक्षों के लिए संभव है."
एड हूबेन कहते हैं, "इस तरह से समलैंगिक जोड़ों के लिए भी बच्चा पाना आसान हो सकेगा. फादर्स डे के दिन बच्चों का अपने पिता से मिलना संभव हो सकता है."
टूर गाइड के रूप में काम करने वाले हूबेन के कमरे में उनके बच्चों के बनाए चित्र लगे हैं. इसमें से एक में लिखा है "आई लव माई डैड."
एड हूबेन पारंपरिक तौर पर 'स्पर्म बैंक' में शुक्राणु दान करने के साथ-साथ निजी रूप से भी स्पर्म डोनेशन की मुफ़्त सेवा प्रदान करते हैं.
उनका मानना है, "स्पर्म डोनेशन की बजाय सीधे संपर्क से गर्भधारण की ज़्यादा संभावना होती हैं. इस कारण मैं अपने अधिकतर बच्चों को जानता हूँ. वे मुझसे मिल सकते हैं."

काम के पीछे की प्रेरणा

गर्भवती महिला
वह कहते हैं, "इससे लोगों को अजीब स्थितियों का सामना करने से निजात मिलेगी, जिसमें डीएनए टेस्ट के माध्यम से पिता का निर्धारण किया जाता है कि किसी लड़के या लड़की का पिता कौन है? हमने सबकुछ खुला रखा है ताकि किसी तरह की कोई उलझन वाली परिस्थिति से बचा जा सके."
अपने काम के पीछे की प्रेरणा के बारे में बताते हुए हूबन कहते हैं, "अधिकतर लोगों को लगता होगा कि मैं ऐसा बिना किसी ज़िम्मेदारी के सेक्स के लिए कर रहा हूँ, लेकिन मैं ही अकेला ऐसा इंसान हूँ जिससे आप इसके बारे में बात कर सकते हैं."
उन्होंने कहा, "जो बात मुझे सबसे ज़्यादा प्रेरित करती है वह है दुनिया में एक नई ज़िंदगी आने की उम्मीद, जिससे प्यार किया जाएगा और उसकी परवाह की जाएगी."
वह कहते हैं, "मैं अपनी भावनाओं को संतुलित रखने की कोशिश करता हूँ, यह बेहतर है. कई बार पिता बनने का अपना अनुभव है, लेकिन इसके लिए श्रेय लेने का कोई अर्थ नहीं है. क्योंकि आप बच्चों के माता-पिता से वादा करते हैं कि आप उनकी ज़िंदगी में दखल नहीं देंगे.

'कोई दबाव नहीं डालूंगा'

कृत्रिम गर्भधारण
उनके अनुसार, "अगर माता-पिता या बच्चे मुझसे संपर्क रखना चाहते हैं तो मुझे ख़ुशी होगी. लेकिन हाल-फिलहाल मुझे इसे रोकना होगा. यह काफ़ी मुश्किल है, लेकिन मुझे पता है कि मेरे बच्चे कहाँ हैं और वे ख़ुश है."
अपने बच्चों की माँओं की भावनाओं के बारे में हूबेन कहते हैं, "मैं महिलाओं को बताने की कोशिश करता हूँ कि मैं उनके साथ किसी रिश्ते में नहीं हूँ, वे अकेली हैं या किसी के साथ रिश्ते में हैं, मैं उनके ऊपर कोई दबाव नहीं डालूंगा."
हालांकि ऐसा कर पाना उनके लिए भी ख़ासा मुश्किल होता है. वह कहते हैं, "मैं अकेला हूँ और सबके लिए खुली सोच रखता हूँ. शुरुआती दौर में दो रिश्तों को लेकर मैं गंभीर था जो लंबे समय तक चले."
वह अपने बच्चों के बारे में जानकारी एकत्रित कर चुके हैं. उन्होंने बताया, "मैं अपने सभी बच्चों के नाम, जन्म की तिथि और जन्म स्थान की सूची अपने पास रखता हूँ, यह काफ़ी महत्वपूर्ण है."
उन्होंने अपने कंप्यूटर में इसका डेटा बेस बना रखा ताकि किसी विवाद वाली स्थिति में बच्चों के पिता का निर्धारण किया जा सके.

'15 साल बाद मिला बच्चा'

गर्भवती महिला
हूबेन कहते हैं कि एक महिला को 15 सालों के इंतज़ार के बाद बच्चा हुआ.
वह बताते हैं, "मेरे बच्चे फ़्रांस, ब्रिटेन, अमरीका में हैं. मेरे पास एक अमरीकी दंपति कई सालों तक ब्रिटेन और अमरीका के कई अस्पतालों का चक्कर काटने के बाद एक सप्ताह के लिए आए. उन्होंने मेरे बारे में पढ़ा और मुझसे संपर्क किया. वह आठ दिनों तक मेरे पास रहे. उनकी पत्नी ने मेरे साथ चार बार संबंध बनाए, इसके बाद वह गर्भवती हुईं. वह दूसरे बच्चे के लिए भी अपने पति के साथ मेरे पास आईं."
इस मुश्किल परिस्थिति के बारे में हूबेन कहते हैं, "पिछले साल बेलारूस से मेरे पास एक दंपति हज़ार मील का सफ़र तय करके हर महीने पहुंचते थे. बच्चे की उम्मीद में वे पिछले 15 सालों से कोशिश कर रहे थे. डॉक्टर उनको दिलासा देते रहे. उन्होंने अपनी सारी बचत ख़र्च कर दी लेकिन उनको कोई मदद नहीं मिली."
वह कहते हैं, "यहाँ तीन बार आने के बाद उनकी पत्नी गर्भवती हुईं, इससे आप पति के सामने पत्नी के किसी अज़नबी के साथ सोने वाली स्थिति की गंभीरता का अनुमान लगा सकते हैं."

'मेरा अपना परिवार होगा'

उन पर पारंपरिक परिवार की महत्ता कम करने, अकेली महिलाओं और समलैंगिक जोड़ों को बच्चे के लिए बढ़ावा देने वाले आरोप भी लगे.
इसके बारे में वह कहते हैं, "पारंपरिक परिवारों से मेरा कोई विरोध नहीं है. लेकिन भविष्य में यूरोप के लोगों को परिवार के बारे में नए सिरे से विचार करना होगा."
"पारंपरिक परिवारों से मेरा कोई विरोध नहीं है. लेकिन भविष्य में यूरोप के लोगों को परिवार के बारे में नए सिरे से विचार करना होगा."
एड हूबेन, शुक्राणु दान करने वाले व्यक्ति
अपने भविष्य की योजना के बारे में हूबेन कहते हैं, "मुझे अभी भी उम्मीद है कि मैं अपने लिए कोई क्लिक करेंरिश्ता खोज पाऊंगा और मेरा अपना परिवार होगा."
अपना परिवार बसाने के बाद वह अपनी सेवाएं जारी रखेंगे? इस सवाल पर वह कहते हैं, "यह काफ़ी हद तक मेरे साथी पर निर्भर करेगा. लेकिन साथी को भावनात्मक होने की बजाय यह देखना होगा कि मैं यह काम लोगों की मदद के लिए कर रहा हूँ."

हालांकि हूबेन शराब नहीं पीते हैं लेकिन संभव है कि अपवाद के तौर पर वह अपने सौंवे बच्चे के जन्म की ख़ुशियां मनाने के लिए ऐसा कर सकते हैं.


sabhar :http://www.bbc.co.uk/

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