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रविवार, 16 फ़रवरी 2014

न जाने किस ग्राहक के लिए इंसान के दिमाग को भून रहे थे ये

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people Selling Roasted Human Heads

नाइजीरिया के एक रेस्टोरेंट से 11 लोगों को इंसानी खोपड़ी पकाने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया है।साथ ही रेस्टोरेंट को भी ताला लगा दिया गया है। अफ्रीका न्यूज पोस्ट की खबर के अनुसार, जिन 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया है वो किसी इंसान के सिर को भून रहे थे।इसके अलावा पुलिस को दो नरमुंड भी मिले हैं। हिरासत में लिए गए लोगों में से 6 औरतें भी हैं। इन दोनों नरमुंडों से खून बह रहा था और उन्हें एक थैले में भरकर रखा गया था।एक स्‍थानीय नागरिक ने बताया कि बाजार के पास होने की वजह से वो अक्सर इस दुकान पर आता रहता था। उसे अक्सर यहां कुछ अजीब लगता था ‌लेकिन पुलिस द्वारा की गई ये गिरफ्तारी वाकई चौंकाने वाली है sabhar :http://www.amarujala.com/

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महिलाओं को सबसे ज्यादा पसंद हैं लंबे पुरुष

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महिलाओं को सबसे ज्यादा पसंद हैं लंबे पुरुष


न्यूयार्क: अब तक हम यही सुनते आए हैं कि जब मामला प्यार का हो तो लंबाई, चमड़े की रंगत, आंखों का रंग, बालों का रंग, भाषा वगैरह से कुछ फर्क नहीं पड़ता। लेकिन एक ताजा अध्ययन ने इस अवधारणा को गलत साबित कर दिया है। इस अध्ययन के मुताबिक महिलाएं स्त्रीत्व तथा संरक्षण के चलते लंबे पुरुषों की तरफ अधिक आकर्षित होती हैं।

टेक्सास स्थित राइस विश्वविद्यालय में समाजशास्त्र के प्राध्यापक माइकल इमरसन, एलिन और ग्लैडिस क्लाइन ने कहा कि विकासात्मक मनोविज्ञान सिद्धांत के अनुसार, मानव में अपने जोड़ीदार के चुनाव में समानता सबसे बड़े कारक की भूमिका अदा करता है।

इस अध्ययन में दिए गए आकड़ों के अनुसार, किसी महिला के लंबे पुरुष की ओर आकर्षित होने के पीछे संरक्षण की चाह और स्त्रीत्व का भाव काम करता है।

अध्ययन में एक महिला के हवाले से कहा गया है कि एक लड़की होने के नाते, मैं एक ही समय में खुद को नाजुक और सुरक्षित महसूस करना पसंद करती हैं। अपने प्रेमी की निगाह में खुद को नीचा सोचते हुए अजीब लगता है। महिला ने आगे कहा कि मैं भी उसे अपनी बाहों में लेना चाहती हूं, तथा उसकी गले में अपनी बाहें डालना चाहती हूं।

पुरुषों को हालांकि लंबाई को लेकर प्रेम संबंध के बारे में कुछ कहते कम ही सुना गया है, तथा जो कहते भी हैं वे कम लंबाई की महिला को ही प्राथमिकता देते सुने गए हैं। हालांकि वे इतनी छोटी महिला के साथ भी प्रेम नहीं करना चाहते, जिसके साथ शारीरिक तालमेल न बैठ सके।

उत्तरी टेक्सास विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र के प्राध्यापक जॉर्ज यांसी के अनुसार, अब तक ऐसा माना जाता रहा है कि लंबा होना पुरुषों के व्यक्तित्व में सकारात्मकता लाता है, जबिक महिला लंबी हो तो उसके लिए यह किसी निजी जिम्मेदारी की तरह हो जाती है।

यह अध्ययन शोध पत्रिका `फेमिली इश्यूज` के ताजा अंक में प्रकाशित हुआ, जिसके संकेत की महिलाएं लंबे पुरुषों की ओर अधिक आकर्षित होती हैं, पितृसत्तात्मक समाज की मान्यताओं को दर्शातें हैं, जिसमें पुरुषों को अधिक अधिकार प्राप्त होते हैं। (एजेंसी)
SABHAR :http://zeenews.india.com/

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बेजुबान जानवर की इस भावुकता ने इंसानों की आंखों में छलकाए आंसू

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बेजुबान जानवर की इस भावुकता ने इंसानों की आंखों में छलकाए आंसू
जानवर भी इंसान की तरह प्यार की भाषा समझते हैं और भावनात्मक रूप से गहरा जुड़ाव रखते हैं। मनुष्य का प्यार जब जानवरों को मिलता है,तो वे भी इंसानों को अपने दिल के बेहद करीब मानते हैं। यह दृश्य कांगो रिपब्लिक के चिंपोंगा चिम्पांजी रिहैबिलिटेशन सेंटर का है। इस सेंटर में एक साल से मादा चिम्पांजी वाउंडा की देखभाल की जा रही थी।
वाउंडा के स्वस्थ होने के बाद जब उसे जंगल वापस ले जाया जा रहा था, तो वह इतनी भावुक हुई कि देखभाल करने वाली संस्था की प्रमुख डॉक्टर जेन गुडाल को अपनी बाहों में भर लिया। उसे एक साल पहले रिहैबिलिटेशन सेंटर में लाया गया था। अच्छी नर्सिंग केचलते वह स्वस्थ हो गई और इसके बाद उसे जंगल में छोड़ दिया गया । यह स्टोरी कांगो रिपब्लिक के जेन गुडाल इंस्टिट्यूट पर बनी एक डाक्यूमेंट्री में सामने आई है। इस संस्थान में 160 से अधिक चिम्पांजी की देखभाल की जा रही है।
बेजुबान जानवर की इस भावुकता ने इंसानों की आंखों में छलकाए आंसू

वाउंडा को रिहैबिलिटेशन सेंटर में नर्सिंग के साथ ही इंसानों का भरपूर प्यार मिला। वाउंडा को मरणासन्न हालत में एक साल पहले जब सेंटर लाया गया था, उसे कई बीमारियां थीं और उसका वजन बहुत कम था। यहां उसका इलाज किया गया। हर दिन उसे एक लीटर दूध दिया जाने लगा। अच्छी देखभाल से वह जल्द ही ठीक होने लगी।

बेजुबान जानवर की इस भावुकता ने इंसानों की आंखों में छलकाए आंसू


डॉक्टर जेन गुडाल 20 वर्ष पहले कांगो आई थीं। उन्होंने कांगो सरकार की मदद से चिम्पांजियों के संरक्षण के लिए एक सैंक्चुअरी की स्थापना की। इसका नाम चिंपोंगा चिम्पांची रिहैबिलिटेशन सैंक्चुअरी है। आज उनके प्रयासों के चलते कांगो की इस सैंक्चुअरी में सैकड़ों चिम्पांजी आबाद हैं।
चिम्पांजी सैंक्चुअरी टिचिंडजुलू द्वीप में स्थित है। यहां बहुत ही घने जंगल हैं। इसके पास कांगो की दूसरी सबसे बड़ी नदी कोउलोउ बहती है।
बेजुबान जानवर की इस भावुकता ने इंसानों की आंखों में छलकाए आंसू

डॉक्टर जेन गुडाल और डॉक्टर रेबेका एटेंसिया चिम्पांजी वाउंडा को रिहैबिलिटेशन से टिचिंडजुलू द्वीप में स्थित सैंक्चुअरी में भेजने से पहले इस योजना पर आपस में विचार-विमर्श करती हुईं।
बेजुबान जानवर की इस भावुकता ने इंसानों की आंखों में छलकाए आंसू


वाउंडा को एक वाहन पर रखे पिंजड़े के अंदर बिठाया गया और टिचिंडजुलू सैंक्चुअरी के लिए रवाना किया गया। उसे टिचिंडजुलू सैंक्चुअरी में इसलिए भेजा गया, ताकि वहां उसकी जिंदगी में इंसानों का दखल नहीं हो। इस दौरान उसके साथ पुनर्वास केंद्र जेनगुडाल संस्थान - कांगो की प्रमुख और डॉक्टर रेबेका एटेंसिया भी थीं।

बेजुबान जानवर की इस भावुकता ने इंसानों की आंखों में छलकाए आंसू
डॉक्टर जेन गुडाल पिंजड़े के अंदर बैठी वाउंडा को देखते हुए भावुक हो रहीं थीं। वाउंडा के बाहर निकले हाथ को स्पर्श करती हुईं डॉ.जेन।

बेजुबान जानवर की इस भावुकता ने इंसानों की आंखों में छलकाए आंसू


रिहैबिलिटेशन सेंटर की टीम ने टिचिंडजुलू द्वीप में पहुंचने के लिए एक नाव का भी सहारा लिया। टीम के सदस्यों ने इस आयलैंड के पास बह रह कोउलोउ को नदी इस तरह पार किया। नाव में पिंजड़ा भी रखा गया, जिसके अंदर मादा चिम्पांजी वाउंडा है। नाव पर डॉ. जेन गुडाल और डॉक्टर रेबेका एटेंसिया भी दिखाई दे रहीं हैं।


बेजुबान जानवर की इस भावुकता ने इंसानों की आंखों में छलकाए आंसू
टिचिंडजुलू द्वीप में स्थित सैंक्चुअरी में पिंजड़े से बाहर आने के बाद वाउंडा जब जाने लगी तो डॉ. जेन गुडाल और डॉक्टर रेबेका एटेंसिया भावुक हो गईं। वे उसे जाते हुए देख रहीं हैं।

बेजुबान जानवर की इस भावुकता ने इंसानों की आंखों में छलकाए आंसू

टिचिंडजुलू द्वीप में स्थित चिम्पांजी सैंक्चुअरी में वाउंडा अपने पुराने समूह के सदस्यों के बीच पहुंची तो इस तरह कुछ आराम करने लगी।
sabhar : bhaskar.com





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शनिवार, 15 फ़रवरी 2014

कुछ मठ, मंदिर, चर्च और संत क्यों सदियों से रहस्य बने हैं

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जानें, क्यों सदियों से रहस्य बने हैं ये कुछ मठ, मंदिर, चर्च और संत

विज्ञान के युग में भी विश्व के विभिन्न धर्मों के लोगों का मंदिर, चर्च, मठ और संतों में  आस्था-विश्वास बरकार है। ये रहस्य और अलौकिक शक्तियों से संपन्न माने जा रहे हैं।विभिन्न धर्मों में कुछ बड़े संतों संतों की मौत के बाद लोग उनके शरीर की पूजा कर रहे हैं। वे इन धार्मिक स्थलों और संतों के चमत्कार के अनुभव का भी दावा करते हैं।
यह थाइलैंड के कोह सामुई द्वीप में स्थित यह वात खुनारम नाम का बौद्ध मंदिर है। श्राइन के अंदर स्थित मंदिर में एक बौद्ध संन्यासी लुआंग पारे डैइंग का ममीफाइड शव रखा है। 1973 में उनकी मौत के बाद से यह बॉडी रखी हुई है। इसे बहुत सुरक्षित ढंग से रखा गया है। बौद्ध संन्यासी की इच्छा थी कि मृत्यु के बाद उनके शरीर को सुरक्षित रखा जाए। इससे जीवन, मृत्यु और बुद्ध के मध्यम मार्ग की शिक्षा दी जा सके। वह अपने जीवन में ध्यान साधना के लिए विख्यात थे।
शरीर की आंखों को ढंकने के लिए एक चश्मा भी लगाया गया है। खास बात यह हैं कि उनका शरीर बहुत हद तक सुरक्षित है फिर भी एक गिरगिट उनके शरीर के अंगों पर घूमता रहता है। उसके अंडे बॉडी में दिखते हैं। बॉडी अब पहले जैसी स्थिति में नहीं है, फिर काफी हद तक यह सुरक्षित है।

जानें, क्यों सदियों से रहस्य बने हैं ये कुछ मठ, मंदिर, चर्च और संत

1- सेंट रॉच चैपेल, न्यू ओरलेआन्स, अमेरिका :
सेंट रॉच का जन्म 13 वीं शताब्दी के अंत में फ्रांस के समीप हुआ था। जब वह जन्मे तो उनकी सीने पर क्रास का चिन्ह था।20 वर्ष की उम्र में ही उनके मां-बाप की मौत हो गई थी। लोगों की सेवा के लिए वे कई देशों में गए थे।

सेवा : वह प्लेग पीडि़तों की सेवा करते करते स्वयं इससे पीडि़त हो गए थे। लेकिन वह प्लेग पीडि़तों की सेवा से पीछे नहीं हटे।
चमत्कार : अमेरिका की खाड़ी का इलाका वर्ष 1,800 में  पीले ज्वर से प्रभावित था। लोगों ने सेंट रॉच से बीमारी के प्रकोप से बचाने प्रेयर करने के लिए कहा था। इसके बाद इलाके में बीमारी तो आई, लेकिन एक भी मौत नहीं हुई।
जनआस्था : लोगों ने संत सेंट रॉच के चमत्कारों को देखते हुए उनके सम्मान में एक कैथेड्रल निर्मित करवाया। लोग आज भी यहां आकर अपने स्वस्थ होने की कामना करते हैं। जो भी व्यक्ति यहां आकर प्रार्थना करता है, उसे बीमारी से राहत मिलती है

जानें, क्यों सदियों से रहस्य बने हैं ये कुछ मठ, मंदिर, चर्च और संत

2-एमिएन्स कैथेड्रल फ्रांस:  13 वीं शताब्दी में बने इस कैथेड्रल में यहां सेंट जॉन का सिर रखा गया है। हेरोइडस ने उनकी हत्या कर दी थी और सिर में छेद भी कर दिया था। कहानी के अनुसार उन्हें कई साल तक यातनाएं दी गई थीं। कुछ समय के लिए उनका सिर खो गया था।
चमत्कार : बताया जाता है कि जब बैप्टिस्ट सेंट जॉन का सिर खो गया था तो उन्होंने किसी स्वप्न दिया। वह व्यक्ति मारासेलस था और उसने जहां बताया, वहां से उनका सिर की हड्डी मिल गई। इसे फिर चर्च में रखा गया लेकिन यह फिर खो गई। बताया जाता है कि फिर सेंट जॉन स्वप्न में आए और उन्होंने संकेत दिया। यह सिर कांस्टैंटनोपल में कई सदियों तक सुरक्षित रहा। इसे एक धर्मयोद्धा ने खोजा और फ्रांस के शहर एमिएन्स ले आया था। उसका नाम वॉलोन डी सार्टन था।
जानें, क्यों सदियों से रहस्य बने हैं ये कुछ मठ, मंदिर, चर्च और संत

3- जापान में नारा सिटी के बुद्ध की मूर्ति की नाक : जापान के नारा शहर में भगवान बुद्ध का यह मंदिर 752 में निर्मित किया गया था। इसका मुख्य हॉल दुनिया का सबसे विशाल लकड़ी से बनी बिल्डिंग है। इसका पुनर्निर्माण 1692 में किया गया था। भगवान बुद्ध की मूर्ति कांस्य से बनी हुई है। 15 मीटर ऊंची मूर्ति 129 किलो सोना और 437 टन कांस्य से बनी है।
लोक मान्यता: मूर्ति के पीछे एक विशाल लकड़ी का पोल है और इसके अंदर छेद है। यहां मान्यता है कि यहां मंदिर आपसे संवाद करने लगता है। पिलर का छेद मूर्ति की नाक की साइज का है। कहा जाता है कि इसे सही ढंग से फिट करने वाले को आत्मज्ञान की प्राप्ति होती है। sabhar : bhaskar.com

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परग्रही सभ्यताओं के साथ संपर्क 20 साल के बाद

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परग्रही सभ्यताओं के साथ संपर्क 20 साल के बाद


अमरीका में परग्रही सभ्यता अनुसंधान एजेंसी के एक वैज्ञानिक सेट शोस्ताक ने कहा है कि परग्रही सभ्यताओं के प्रतिनिधि वर्ष 2040 में पृथ्वी के निवासियों के साथ संपर्क स्थापित करेंगे।

अमरीका के वैज्ञानिक ने बताया है कि हर पांचवें सितारे के चारों ओर कम से कम एक ऐसा ग्रह घूमता है जिस पर जीवन के लिए उपयुक्त वातावरण मौजूद हो सकता है। इसका मतलब यह है कि आकाशगंगा में हमारी पृथ्वी जैसे अरबों ग्रह मौजूद हो सकते हैं।
वैज्ञानिक के मुताबिक, अगर इन में से एक भी ग्रह पर हमारी पृथ्वी जैसा जीवन मौजूद है और वहां भी विकास का स्तर हम जैसा ही है तो उस ग्रह के निवासी धरती से रेडियो संकेत प्राप्त कर सकते हैं और इन संकेतों का जवाब भी दे सकते हैं।

sabhar ; http://hindi.ruvr.ru/

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मनुष्यों और पशुओं के बीच संकरण: एक भावी ख़तरा

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मनुष्यों और पशुओं के बीच संकरण: एक भावी ख़तरा

कई देशों के वैज्ञानिक मनुष्यों और जानवरों के विचित्र संकर तैयार कर रहे हैं, इस प्रकार से तैयार किये गए संकर समाज पर कहर बरपा सकते हैं| पिछले दस वर्षों के दौरान जेनेटिक इंजीनियरिंग में हुई प्रगति ने वैज्ञानिकों और आम आदमी को स्तब्ध कर छोड़ा है|

छात्रों के लिये भी नए जीवन रूपों का सृजन आज घर बैठे करना संभव है| अफ़सोस यह है कि क़ानून वैज्ञानिकों के साथ तालमेल रखने में पिछड़ जाता है|
जीवन के यह नए रूप वैसे तो गैरकानूनी नहीं हैं, लेकिन उनसे समाज के लिये खतरा हो सकता है| इन नए रूपों की नस्ल पैदा होने की स्थिति में क्या होगा विषय पर आज कोई कुछ नहीं बता सकता है, लेकिन इसके बावजूद भी सारी दुनिया के वैज्ञानिक दुनिया के लिये अपनी नई रचनाएँ प्रस्तुत करने की जल्दी में लगे हुए हैं; ऐसी रचनाएँ जिनकी कल्पना करना भी कुछ समय पहले तक असंभव था|
वैज्ञानिकों द्वारा कृत्रिम मानव गुणसूत्र से बनाए गए चूहे इसका एक उदाहरण हैं| इस रचना को एक बड़ी सफलता माना जा रहा है, क्योंकि आशा की जा रही है कि इनसे कई बीमारियों के इलाज के लिये नए रूपों को जन्म दिया जा सकेगा| Lifenews.com के अनुसार विस्कॉन्सिन विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक चूहों के दिमाग में मानव भ्रूण की कोशिकाओं की रोपाई में बड़ी सफलता हासिल कर चुके हैं| इन कोशिकाओं का विकास होने पर चूहों की बुद्धिक्षमता में विकास नज़र आया है| यह चूहे भूलभुलैया में भी रास्ता ढूंढ सकते हैं और पहले की तुलना में अधिक जल्दी संकेतों को सीख सकते हैं|
यहाँ यह प्रश्न उठता है: मानव ऊतकों के जानवरों में प्रत्यारोपण से लाभ ज़्यादा हैं या हानि? अभी ही यह स्पष्ट हो चुका है कि पशुओं में मानव अंगों का विकास अब कोई विज्ञान-कथा नहीं बल्कि शुद्ध वास्तविकता है| जापान के वैज्ञानिक मानव अंगों के विकास के लिये सुअरों का उपयोग कर रहे हैं; इस प्रक्रिया में लगभग एक साल लगता है| Infowars.com के अनुसार इस अभ्यास का मुख्य लक्ष्य चिकित्सा प्रयोजनों के लिये मानव अंगों की संख्या में वृद्धि करना है| लेकिन जापान की सरकार के उद्देश्य बिलकुल अलग हैं; वर्तमान में वह भ्रूण से सम्बंधित अनुसंधान को संभव बनाने के लिये नियम बना रही है|
Thetruthwins.com का कहना है कि जिन सूअरों के भीतर मानव अंगों का विकास किया जाता है, वह सूअर शत प्रतिशत सूअर नहीं रह जाते हैं| वैसे ही सुअरों में विकसित अंग शत प्रतिशत मानव अंग नहीं होते हैं| इस प्रकार के अंगों के प्राप्तकर्ताओं को संकरित अंगों के आरोपण की सहमति देनी होगी|
संकरित रूपों की रचना मानवजाति के लिये ख़तरा हो सकती है| ऐसे संकरों पर नियंत्रण खोने से होने वाले परिणामों की भविष्यवाणी में असमर्थता भी एक बहुत बड़ा ख़तरा है|
सबसे अधिक चौंकाने वाली बात यह है कि अधिकतर देशों में इस प्रकार के नए रूपों के निर्माण पर प्रतिबन्ध नहीं हैं| इस प्रकार से बनाए गए जीव के कारण किसी दूसरे प्राणी को पहुँचने वाली हानि के लिये किसी भी प्रकार की सज़ा के प्राविधान भी नहीं हैं|
दुनिया में ऐसी धारणा भी प्रबल है कि मानव अंगों के विकास के लिये जानवरों का इस्तेमाल प्रकृति की संरचना को नष्ट करने का एक और तरीका है| वर्ष 2011 में डेलीमेल में ब्रिटेन के उन वैज्ञानिकों के बारे में खबर छपी थी, जिन्होंने मनुष्यों और पशुओं के संकरण से 150 से अधिक भ्रूण तैयार किये थे| उस समय इस खबर ने किसी को विचलित नहीं किया था|
पत्रिका स्लेट ने ऐसे दूसरे अनुसंधानों के बारे में लिखा था| मनुष्य का दूध देने वाली बकरी और वैज्ञानिकों द्वारा जानवरों के लिये मानव प्रतिरक्षा तंत्र विकसित करने की ख़बरें कुछ ऐसी ख़बरें थीं| यह मात्र वह परियोजनाएं हैं जिनके बारे में हमें पता है| संभव है कि ऐसी और परियोजनाएं भी हैं, जिनके बारे में हमें कुछ पता नहीं है| मानुष और पशु का संकरण संभव है| इस प्रकार के संकरण से होने वाले लाभ और उससे संभावित खतरों के बारे में व्यापक पैमाने पर बहस जारी रहनी चाहिए| sabhar :http://hindi.ruvr.ru/

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आपकी आत्मा का रंग कैसा है

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what is colour of atma


यह दुनिया रंग-बिरंगी या कहें कि सतरंगी है। सतरंगी अर्थात सात रंगों वाली। लेकिन आत्मा का कोई रंग पता नहीं चला है।

ध्यान, धारणा, समाधि और पूजापाठ से लेकर मृत्यु के बाद वापस शरीर में लौटे लोगों तक आत्मा और परलोक के अनुभव बताते हैं पर उसका रंग कोई नहीं बताता।

अध्यात्म विज्ञान की दिशा में शोध प्रयोग कर रहे कुछ अनुसंधान करने वालों ने इस दिशा में काम शुरु किया है। इस तरह के प्रयोगों में लगे पांडीचेरी के प्रो. के सुंदरम ने कहा है कि आत्मा का भी रंग होता है।

रंगों का विश्लेषण करते हुए प्रो. सुंदरम का कहना है कि मूलत: पांच तरह के रंग ही होते हैं, जैसे काला, सफेद, लाल, नीला और पीला। इनमें भी काला और सफेद कोई रंग नहीं है। रंगों की अनुपस्थिति काला रंग बनता है और सभी रंगों की उपस्थिति सफेद रंग का आभास कराता है।

इस तरह तीन ही रंग प्रमुख हो जाते हैं- लाल, पीला और नीला। अध्ययन और प्रयोगों को आगे बढ़ाते हुए प्रो, सुंदरम और उनके सहयोगियों ने शरीर में मौजूद सात चक्रों का रंग रुप भी खंगाला। चक्रों पर किए प्रयोग के बाद उन्होंने कहा है कि आत्मा का रंग या तो नीला होता है अथवा आसमानी।

नीले रंग को वे थोड़ा निरस्त भी करते हैं क्योकि प्रकाश के रुप में आत्मा ही दिखाई पड़ती है और पीले रंग का प्रकाश आत्मा की उपस्थिति को सूचित करता है। धरती पर पचहत्तर प्रतिशत जल ही फैला है और जहां भी वह घनीभूत होता है वहां आकाश का रंग प्रतिबिंबित होने के कारण पानी का रंग नीला दिखाई देता है।

ध्यान में हुए अनुभवों और सपनों में दिखाई देने वाले उदास रंगों के आधार पर उन्होंने कहा है कि आत्मा का रंग आसमानी है। कुछ मनीषी मानते हैं कि नीला रंग आज्ञा चक्र का और आत्मा का रंग है।

आज्ञाचक्र शरीर का आखिरी चक्र है। यह सात में से छठा है, सातवां सहस्रार चक्र शरीर और आत्मा के बीच सेतु का काम करता है। उसका अपना कोई रंग नहीं है। इसलिए नीला और आसमानी रंग ही आत्मा का रंग कहा जा सकता है। sabhar :http://www.amarujala.com/

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ह्यूमन लंग्स लैब में

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लैब में ह्यूमन लंग्स तैयार, लेकिन करना होगा सालों इंतजार

वैज्ञानिकों ने पहली बार लैब में ह्यूमन लंग्स बनाने में सफलता हासिल की है। मानव शरीर के अंगों के तैयार करने की दिशा में यह एक उत्साहजनक कदम है। हालांकि, इसे इंसान के शरीर में प्रत्यारोपित करने में कई साल का वक्त लगेगा। अनुमान है कि इसमें 12 साल तक का वक्त और लग सकता है। अमेरिकी वैज्ञानिकों ने मेडिकल के क्षेत्र में यह बड़ी कामयाबी हासिल की है।
लैब में ह्यूमन लंग्स तैयार, लेकिन करना होगा सालों इंतजार
यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास मेडिकल ब्रांच की जोआन निकोलस ने कहा कि यह अभी तक एक साइंस फिक्शन रहा है, लेकिन वे इसे वैज्ञानिक तथ्य बनाने की ओर आगे बढ़ रहें हैं। यदि लंग्स काम करने लगें, तो यह बड़ी उपलब्धि होगी। इससे लंग्स ट्रांसप्लांट का इंतजार कर रहे 1,600 अमेरिकियों को बहुत मदद मिलेगी। लैब में तैयार किया गया नया मानव अंग फेफड़ा भी है। इससे पहले श्वांस नली और लीवर तैयार किए जा चुके हैं।
लैब में ह्यमून लंग्स ऐसे तैयार:
डॉक्टर निकोलस ने बताया कि दो बच्चे जो कार एक्सीडेंट में मारे गए थे। उनके लंग्स भी क्षतिग्रस्त हो गए थे, लेकिन इनमें कुछ स्वस्थ ट्श्यिू भी थे। इनका उपयोग ट्रांसप्लांट किया जाना था। उन्होंने बताया कि लंग्स से सारी सेल्स अलग की और उसके ढांचे को अलग कर दिया। अब इसमें कोई भी सेल्स नहीं बची थी। इसके बाद उन्होंने दूसरी बॉडी के फेफड़ों से कुछ सेल्स लेकर इस ढांचे से जोड़ दी।
तकनीक से मिली मदद :
इन लंग्स के तैयार होने में कई महीने का वक्त लग सकता था, लेकिन यूटीएमबी मेडिकल के छात्र डॉक्टर माइकल रिडल ने एक ऐसा उपकरण तैयार किया, जिससे लंग्स के तैयार होने की प्रक्रिया तेज हो गई। मेडिकल टीम ने बताया कि सेल्स को लंग्स के ढांचे में विकसित करने में चार माह तक का समय लगता, लेकिन सिर्फ तीन दिन में इस प्रक्रिया में परिणाम आ गए।
डॉक्टर जोआन निकोलस ने बताया कि उन्हें दुनिया को इस बारे में बताने में एक साल का समय लगा कि वास्तव में एक अच्छा काम किया है।
डॉक्टर निकोलस ने बताया कि लैब में तैयार किए गए फेफड़ों को सबसे पहले सूअर को प्रत्यारोपित किया जाएगा। इस पर कम से कम दो साल तक काम किया जाएगा।

यूनिवसिर्टी ऑफ पिट्सबर्ग के मैकगोवेन इंस्टिट्यूट फॉर रिजनरेटिव मेडिसिन के निदेशक डॉक्टर स्टीफन बैडलाक ने कहा कि यह संपूर्ण अंग की इंजीनियरिंग अंग दानदाता की कमी को दूर करने का काम कर रही है। sabhar : bhaskar.com

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शुक्रवार, 14 फ़रवरी 2014

ईरान की राष्ट्रीय महिला फुटबॉल टीम में महिलाओं के रूप में अब तक चार पुरुष खिलाड़ी खेल रहे थे

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महिला जैसे दिखने वाले पुरुषों से कहा- पहले सेक्स चेंज करो तभी खेलोगे टीम में


ईरान में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां की राष्ट्रीय महिला फुटबॉल टीम में महिलाओं के रूप में अब तक चार पुरुष खिलाड़ी खेल रहे थे। मामले के खुलासे के बाद अब इन चारों खिलाड़ियों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। इतना ही नहीं, टीम में वापसी के लिए इनसे एक शर्त भी रखी गई है। शर्त के मुताबिक, अगर ये अपना लिंग परिवर्तन करवाते हैं, तभी इन्हें टीम में वापस जगह मिलेगी। 
 
वहीं, सभी महिला खिलाड़ियों को अब क्लब में शामिल होने से पहले लिंग परीक्षण करवाना होगा। अब खेल के मैदान में आकस्मिक जांच कभी भी की जा रही है। इसका नतीजा ये हुआ है कि सात खिलाड़ियों ने अपना अनुबंध रद्द करा दिया है। 
 
प्रतिबंध लगाए गए कुछ खिलाड़ियों में ऐसे हैं, जिनमें कुछ यौन गड़बड़ियां हैं। वहीं, कुछ खिलाड़ियों में महिलाओं और पुरुष दोनों के लक्षण हैं। 

महिला जैसे दिखने वाले पुरुषों से कहा- पहले सेक्स चेंज करो तभी खेलोगे टीम में


ईरानी फुटबॉल फेडरेशन की मेडिकल टीम के प्रमुख अहमद हश्मियां ने बताया कि अगर ये खिलाड़ी सर्जरी के जरिए अपनी परेशानी खत्म कर लेते हैं या जरूरत के मुताबिक, मेडिकल मदद ले लेते हैं, तो वो फिर से उन्हें महिला फुटबॉल टीम में जगह मिल जाएगी। 

महिला जैसे दिखने वाले पुरुषों से कहा- पहले सेक्स चेंज करो तभी खेलोगे टीम में

ईरान में समलैंगिकता और शादी से पहले सेक्स पर पाबंदी है, लेकिन बावजूद इसके खिलाड़ियों को सर्जरी कराने की अनुमति दी गई है।  sabhar : bhaskar.com




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गुरुवार, 13 फ़रवरी 2014

टीना घई एक बेहतरीन कलाकार

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पंजाब मे जन्मी टीना घई एक बेहतरीन अदाकारा है इन्होने हिन्दी , पंजाबी , भोजपुरी , राजस्थानी , तेलुगू , तुलु , कन्नड़ , हरयाणवी , बंगाली और अंग्रेजी जैसी भाषाओं में गाया है विभिन्न प्रिंट और टीवी विज्ञापनों में चित्रित किया गया है . इसके अलावा  दुनिया भर में लगभग 400 शो में लाइव प्रदर्शन करने के बाद का गौरव प्राप्त है |. हिन्दी गाने के कई एल्बम यू  ट्यूब  पे उपलब्ध  है  जल्दी ही इनकी कई  फिल्मे  और एल्बम आने वाली है  इतनी बड़ी कलाकार होने के बाद भी  ये फ़ेसबुक  पे अपने  फैन्स  के बीच सहज  संबाद स्थापित  करती है  |,नीचे कुछ फोटोग्राफ्स  उनकी टीना घई डाट काम वेब  से ली गयी है |



























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बुधवार, 12 फ़रवरी 2014

(डॉ. सोनल मानसिंह)-प्रतिष्ठित भारतीय शास्त्रीय नर्तक

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(((जिंदगी के सफर में महिलाओं को कितनी परेशानियों का सामना करना पड़ता है.....

....नृत्यांगना सोनल मानसिंह, जिन्होंने जिंदगी में बहुत मुश्किल फैसले लिए और मुश्किल दौर से दो.चार भी हुईं। 

....नृत्यांगना सोनल मानसिंह ऐसी शख्सियत हैं जिन्होंने नृत्य के लिए घर छोड़ा सफलता कदम चूमने लगी तभी सड़क हादसे से की वजह से कदम थम गए। लेकिन डॉक्टरों की कड़ी मेहनत अपनी जबरदस्त हिम्मत और आत्मविश्वास की वजह से वह जल्द ही मंच पर थिरकती नजर आईं।
.....शादी के बाद सोनल ने नृत्य के ख़ातिर अपना घर छोड़ा और ख़ानाबदोश की ज़िंदगी अपनाई।
......सोनल के अनुसार पुरुषों की दुनिया में एक महिला और वह भी एक डाँसर का जीना कोई आसान बात नहीं हैं। आप जिसके शिकंजे से बचे। उसी व्यक्ति ने आपको नज़रअंदाज़ करना शुरु कर दिया। मगर उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपनी पहचान बनार्इ।




डॉ. सोनल मानसिंह पद्म विभूषण, एक मशहूर और प्रतिष्ठित भारतीय शास्त्रीय नर्तक, गुरु, कोरियोग्राफर और एक प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता, शोधकर्ता और प्रेरक वक्ता है ।

Sonal Mansingh: the finest classical Indian dancer

नृत्यांगना सोनल मानसिंह ऐसी शख्सियत हैं जिन्होंने नृत्य के लिए घर छोड़ा, सफलता कदम चूमने लगी, तभी सड़क हादसे से की वजह से कदम थम गए। लेकिन डॉक्टरों की कड़ी मेहनत अपनी जबरदस्त हिम्मत और आत्मविश्वास की वजह से वह जल्द ही मंच पर थिरकती नजर आईं।

Sonal Mansingh: the finest classical Indian dancer

सोनल मानसिंह के दादाजी आज़ादी के आन्दोलन में गाँधी जी के साथ थे। आज़ादी के बाद वह गवर्नर बने। माता जी कस्तूरबा के साथ जेल में रहीं।>>

Sonal Mansingh: the finest classical Indian dancer


सोनल को बचपन से ही नृत्य का शौक था। जब उनके पिताजी पखावज बजाते थे। तो उनके पैर थिरकने लगते थे। अपनी इसी शौक को उन्होंने करियर बना लिया।
Sonal Mansingh: the finest classical Indian dancer

शादी के बाद सोनल ने नृत्य के ख़ातिर अपना घर छोड़ा और ख़ानाबदोश की ज़िंदगी अपनाई।सोनल पांच महाद्वीपों पर दुनिया के 87 देशों में नृत्य किया गया है।

Sonal Mansingh: the finest classical Indian dancer

सोनल के अनुसार पुरुषों की दुनिया में एक महिला और वह भी एक डाँसर का जीना कोई आसान बात नहीं हैं। आप जिसके शिकंजे से बचे। उसी व्यक्ति ने आपको नज़रअंदाज़ करना शुरु कर दिया। मगर उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपनी पहचान बनार्इ।

Suchitra Singh

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