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शनिवार, 21 दिसंबर 2013

4 साल का बच्चा आईक्यू भौतिक वैज्ञानिक अलबर्ट आईंस्टीन के बराबर

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लंदन : ब्रिटेन में चार साल के बच्चे के बारे में कहा जा रहा है कि उसका आईक्यू भौतिक वैज्ञानिक अलबर्ट आईंस्टीन के बराबर है। दक्षिणी यार्कशायर के रहने वाले शेरविन साराबी ने वेश्लर पैमाने पर 160 अंक हासिल करके मनौवैज्ञानिकों को हैरान कर दिया।

समाचार पत्र ‘डेली एक्सप्रेस’ के अनुसार शेरविन के आईक्यू को आईंस्टीन, बिल गेट्स और स्टीफन हॉकिंगस के आईक्यू के बराबर माना गया है। वैसे, आईंस्टीन के आईक्यू की कभी जांच नहीं हुई थी क्योंकि उनके दौर में यह आधुनिक तकनीक नहीं थी। विशेषज्ञों का मानना है कि उनका आईक्यू 160 रहा होगा।

शेरविन ने 10 महीने की उम्र में पहला शब्द बोला था और 20 महीने की उम्र तक बातचीत करने लगा। उसकी मां आमंडा का कहना है कि शेरविन 190 से अधिक पुस्तकें पढ़ चुका है। उसे नयी चीजों के बारे में जानने की उत्सुकता रहती है। (एजेंसी)  sabhar :http://zeenews.india.com

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बच्चेदानी के बदले पेट में पल रही थी बच्ची

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RARE : डॉक्टर हुए हैरान, बच्चेदानी के बदले नौ माह से पेट में पल रही थी बच्ची

रांची। रिम्स के लेबर रूम में शुक्रवार को डॉक्टरों को हैरान कर देनेवाली घटना घटी। नौ माह तक जिस बच्ची को मां की बच्चेदानी में होना चाहिए था, वह मां के पेट से निकली। गायनी विभाग के डॉ प्रीती बाला सहाय यूनिट के डॉक्टरों की टीम यह देख भौचक्क रह गयी और सबके मुंह से एक ही शब्द निकले अरे... यह क्या? बच्ची तो पेट में पल रही थी। बच्चेदानी तो एकदम अलग है।
सबने इसे कुदरत का करिश्मा कहा और बताया कि यह घटना रेयर है। हालांकि, बच्ची को जन्म देनेवाली मां अनि देवी(30) और उसकी बेटी दोनों स्वस्थ है। बच्ची का वजन भी 2.5 किलोग्राम है। अनि रांची के बेड़ो स्थित खत्री गांवकी रहनेवाली है। डॉ सहाय ने इसकी सूचना रिम्स अधीक्षक डॉ वसुंधरा को दी। ऑपरेशन टीम में डॉ सहाय, डॉ मधुलिका और पीजी छात्रा डॉ अंशु व नीतू और एनेस्थिसिया के डॉ सपन व डॉ सुनीत शामिल थे।ऑपरेशन टीम में शामिल डॉ अर्चना ने बताया कि अनि देवी कल शाम को बेड़ो पीएचसी से गर्भ में पल रहे शिशु के धड़कन कम होने की शिकायत पर भेजा गया। रिम्स में जांच किया गया। अनि के अनुसार वह नौ माह की गर्भवती थी। लेकिन, जांच के क्रम में सबकुछ सही नहीं मिला। अल्ट्रासाउंड जांच में पता नहीं चला। आज जब ऑपरेशन से पहले क्लीनिकली चेक किया गया तो पता चला कि बच्ची बच्चेदानी में नहीं बल्कि पेट में है। बच्चेदानी खाली था। इसे एब्डोमिनल प्रेगनेंसी कहा जाता है। जिसे सिजेरियन नहीं बल्कि लेप्रोटॉमी करके निकाला गया। दोनों की हालत ठीक है। पेट में पलने के कारण अंदरूनी अंगों पर दवाब था।
सहिया ने दिया अनि देवी को खून
अनि देवी के ऑपरेशन के वक्त डॉक्टरों ने एक यूनिट खून की जरूरत बतायी। साथ में पति नहीं था। मरीज को लेकर अस्पताल पहुंची सहिया संगीता देवी पशोपेश में पड़ गयी। अंत में उसने ही खून दी तब ऑपरेशन हुआ।
sabhar : bhaskar.com


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शुक्रवार, 20 दिसंबर 2013

मरने के 20 मिनट बाद ही उसने ले लिया दूसरा जन्म

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parapsychology rebirth story

कहते हैं कि मरने के बाद आत्मा यमलोक जाती है फिर अपने कर्मों के अनुसार लौट कर पृथ्वी पर लौटती है। लेकिन कुदरत कब कौन सा चमत्कार कर दिखाए कहा नहीं जा सकता।

ऐसी ही एक चमत्कारी घटना उत्तर प्रदेश, मैनपुरी के तिलयानी गांव की है। साल 2010 में सत्यभान सिंह यादव के पुत्र मनोज को एक बिच्छू ने काट लिया। इस समय मनोज महज 8 साल का था।

मनोज को मिनी पीजीआई सैफई में भर्ती कराया गया। इसी दिन तिलियानी के ही राजू की पत्नी को प्रसव पीड़ा होने पर मिनी पीजीआई में भर्ती कराया गया। यह अजब संयोग था कि रात के 10:40 बजे मनोज की मौत हो गई और लगभग 11 बजे राजू की पत्नी ने पुत्र को जन्म दिया, जिसका नाम छोटू रखा गया।

परिवार वालों का कहना है कि छोटू जब ढाई साल का हुआ तो वह मनोज के पिता सत्यभान को पापा कहकर बुलाने लगा। छोटू को अपने पूर्व जन्म के रिश्तेदार और उनसे जुड़ी बातें याद है।

सत्यभान का दावा है कि छोटू ने ऐसी कई बातें बताई हैं जो मनोज या उसके घर वाले ही जानते थे। अब पुनर्जन्म को मानते हुए छोटू को सत्यभान और उसका परिवार मनोज की तरह प्यार करते हैं। छोटू के मां-बाप को इससे कोई ऐतराज नहीं हैं। उनका कहना है कि छोटू को दो-दो मां-बाप का प्यार मिल रहा है।

एसएन मेडिकल कालेज के मनोचिकित्सा विभागाध्यक्ष डॉ. विशाल सिन्हा का कहना है कि साइंस और मनोविज्ञान पिछले जन्म में विश्वास नहीं करता। sabhar :http://www.amarujala.com

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पैरों से जुड़ा रहा हाथ

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दुनिया में आज भी स्वस्थ शरीर को सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं। जाहिर है आज की टेक्नोलॉजी में केवल एक बटन दबाकर आप बहुत कुछ कर सकते हैं लेकिन कोई भी टेक्नोलॉजी मरे को जिंदा नहीं कर सकती। दो हाथ, दो पैर, दिल, शरीर का हर अंग आपके लिए बहुत कीमती है क्योंकि टेक्नोलॉजी यह सब आपको नहीं दे सकती। लेकिन जब हम बात विज्ञान के करिश्मे की कर रहे हैं, इस बायॉलोजी की टेक्नोलॉजी ने बहुत हद तक आज इसे संभव बना दिया है और अब विज्ञान आपको प्राकृतिक हाथ-पैर भी दे सकता है। इस खबर को पढ़कर आप भी समझ जाएंगे, कुदरत का करिश्मा और बात होती है लेकिन आज विज्ञान के करिश्मे भी कम नहीं हैं। कुदरत किसी को जीवन दे सकती है, मौत दे सकती है, मौत से बदतर अपाहिज जिंदगी भी..मतलब जो मिला आपको उसी से संतोष करना पड़ता है। इंसान के पास उसमें अपनी पसंद शामिल करना संभव नहीं है। लेकिन विज्ञान ने हमें इसमें छूट दिलाई है। बायलॉजी का कमाल देखिए कि अब कुदरती अंग भी विज्ञान के करिश्मे से पाए जा सकते हैं।इसी वर्ष नवंबर की बात है। चांगशा(चीन) के जिआओ वेई को लगा कि अब पूरी उम्र उसे अपाहिज बनकर जीना पड़ेगा। फैक्टरी में काम करते हुए दुर्घटना में मशीन से उसका दाहिना हाथ ही कट गया। उसका साथी कर्मचारी कटे हुए हाथ के साथ तुरंत उसे अस्पताल लेकर गया लेकिन दुर्घटना बहुत बड़ी थी। हाथ के साथ वी की बांहें भी कट गई थीं। स्थानीय डॉक्टरों ने उसके हाथ को दुबारा जोड़ पाने में असमर्थता जता दी। लेकिन चांगशा के ही किसी दूसरे अस्पताल में डॉक्टरों ने कहा कि वे वी का हाथ दुबारा जोड़ सकते थे लेकिन क्योंकि बांह भी कटी हुई थी इसलिए तुरंत ऑपरेशन कर ऐसा कर पाना संभव नहीं था। हाथ जोड़ने से पहले बांहों का इलाज करना था और इसमें कम से कम एक महीने का समय लगता और तब तक हाथ का जिंदा रहना जरूरी था।
क्योंकि शरीर से कटकर हाथ इतने दिनों तक जिंदा नहीं रह सकता था इसलिए डॉक्टरों ने उसका हाथ पैरों से जोड़ दिया। वी इसी तरह एक माह तक रहा और एक महीने बाद डॉक्टरों ने वापस उसका हाथ उसकी सही जगह से जोड़ा।
विज्ञान की दुनिया में यह एक अजूबे से कम नहीं। पैरों से जुड़े हाथ के साथ रहना पड़ा लेकिन वी को उसका दाहिना हाथ वापस मिल गया। इससे पहले चीन में ही डॉक्टरों ने एक आदमी की क्षतिग्रस्त नाक को दुबारा उसके माथे पर उगाकर उसकी जान बचाई थी। तो अब कह सकते हैं कि अब आप कुदरत के करिश्मे में कुछ अपनी पसंद जोड़ सकते हैं। sabhar : jagran.com

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वाकई में भूत-प्रेत होते हैं ?

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न करें इसे झूठ समझने की भूल, असलियत में होते हैं भूत-प्रेत!

न करें इसे झूठ समझने की भूल, असलियत में होते हैं भूत-प्रेत!

विभिन्न धर्म ग्रंथों में भी भूत-प्रेतों के बारे में बताया गया है। सवाल यह उठता है कि अगर वाकई में भूत-प्रेत होते हैं तो दिखाई क्यों नहीं देते या फिर कुछ ही लोगों को क्यों दिखाई देते हैं। धर्म ग्रंथों के अनुसार जीवित मनुष्य का शरीर पांच तत्वों से मिलकर बना होता है-पृथ्वी, जल, वायु, आकाश व अग्नि। मानव शरीर में सबसे अधिक मात्रा पृथ्वी तत्व की होती है और यह तत्व ठोस होता है इसलिए मानव शरीर आसानी से दिखाई देता है। 
जबकि भूत-प्रेतों का शरीर में वायु तत्व की अधिकता होती है। वायु तत्व को देखना मनुष्य के लिए संभव नहीं है क्योंकि वह गैस रूप में होता है इसलिए इसे केवल आभास किया जा सकता है देखा नहीं जा सकता। यह तभी संभव है जब किसी व्यक्ति के राक्षण गण हो या फिर उसकी कुंडली में किसी प्रकार का दोष हो। मानसिक रूप से कमजोर लोगों को भी भूत-प्रेत दिखाई देते हैं जबकि अन्य लोग इन्हें नहीं देख पाते।धर्म शास्त्रों के अनुसार भूत का अर्थ है बीता हुआ समय। दूसरे अर्थों में मृत्यु के बाद और नए जन्म होने के पहले के बीच में अमिट वासनाओं के कारण मन के स्तर पर फंसे हुए जीवात्मा को ही भूत कहते हैं। जीवात्मा अपने पंच तत्वों से बने हुए शरीर को छोडऩे के बाद अंतिम संस्कार से लेकर पिंड दान आदि क्रियाएं पूर्ण होने तक जिस अवस्था में रहती है, वह प्रेत योनी कहलाती है।गरूण पुराण के अनुसार व्यक्ति की मृत्यु के बाद पुत्र आदि जो पिंड और अंत समय में दान देते हैं, इससे भी पापी प्राणी की तृप्ति नहीं होती क्योंकि पापी पुरुषों को दान, श्रद्धांजलि द्वारा तृप्ति नहीं मिलती। इस कारण भूख-प्यास से युक्त होकर प्राणी यमलोक को जाते हैं इसके बाद जो पुत्र आदि पिंडदान नहीं देते हैं तो वे मर के प्रेत रूप होते हैं और निर्जन वन में दु:खी होकर भटकते रहते हैं।प्रत्येक नकारात्मक व्यक्ति की तरह भी भूत भी अंधेरे और सुनसान स्थानों पर निवास करते हैं। खाली पड़े मकान, खंडहर, वृक्ष व कुए, बावड़ी आदि में भी भूत निवास कर सकते हैंहमें कई बार ऐसा सुनने में आता है कि किसी व्यक्ति के ऊपर भूत-प्रेत का असर है। ऐसा सभी लोगों के साथ नहीं होता क्योंकि जिन लोगों पर भूत-प्रेत का प्रभाव होता है उनकी कुंडली में कुछ विशेष योग बनते हैं जिनके कारण उनके साथ यह समस्या होती है। साथ ही यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में चंद्रमा नीच का हो या दोषपूर्ण स्थिति में हो तो ऐसे व्यक्ति पर भी भूत-प्रेत का असर सबसे ज्यादा होता है।प्रेत बाधा से ग्रस्त व्यक्ति की आंखें स्थिर, अधमुंदी और लाल रहती है। शरीर का तापमान सामान्य से अधिक होता है। हाथ-पैर के नाखून काले पडऩे के साथ ही ऐसे व्यक्ति की भूख, नींद या तो बहुत कम हो जाती है या बहुत अधिक। स्वभाव में क्रोध, जिद और उग्रता आ जाती है। शरीर से बदबूदार पसीना आता है।हमारे आस-पास कई ऐसी अदृश्य शक्तियां उपस्थित रहती है जिन्हें हम देख नहीं पाते। यह शक्तियां नकारात्मक भी होती है और सकारात्मक भी। सिर्फ  कुछ लोग ही इन्हें देख या महसूस कर पाते हैं। राक्षस गण वाले लोगों को भी इन शक्तियों का अहसास तुरंत हो जाता है। ऐसे लोग भूत-प्रेत व आत्मा आदि शक्तियों को तुरंत ही भांप जाते हैं। राक्षस गण, यह शब्द जीवन में कई बार सुनने में आता है लेकिन कुछ ही लोग इसका मतलब जानते हैं। यह शब्द सुनते ही मन और मस्तिष्क में एक अजीब सा भय भी उत्पन्न होने लगता है और हमारा मन राक्षस गण वाले लोगों के बारे में कई  कल्पनाएं भी करने लगता है। जबकि सच्चाई काफी अलग है। ज्योतिष शास्त्र के आधार पर प्रत्येक मनुष्य को तीन गणों में बांटा गया है। मनुष्य गण, देव गण व राक्षस गण। कौन सा व्यक्ति किस गण का है यह कुंडली के माध्यम से जाना जा सकता है। मनुष्य गण तथा देव गण वाले लोग सामान्य होते हैं। जबकि राक्षस गण वाले जो लोग होते हैं उनमें एक नैसर्गिक गुण होता है कि यदि उनके आस-पास कोई नकरात्मक शक्ति है तो उन्हें तुरंत इसका अहसास हो जाता है। कई बार इन लोगों को यह शक्तियां दिखाई भी देती हैं लेकिन इसी गण के प्रभाव से इनमें इतनी क्षमता भी आ जाती है कि वे इनसे जल्दी ही भयभीत नहीं होते। राक्षस गण वाले लोग साहसी भी होते हैं तथा विपरीत परिस्थिति में भी घबराते नहीं हैं।
 sabhar : bhaskar.com

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गुरुवार, 19 दिसंबर 2013

थ्रीडी प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी से आंख के पर्दे की कोशिकाएं प्रिंट करने में सफलता हासिल की

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.थ्रीडी प्रिंट तकनीक से तैयार की आंखों की कोशिकाएं


 कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने थ्रीडी प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी से आंख के पर्दे की कोशिकाएं (रेटिना सेल) प्रिंट करने में सफलता हासिल की है। यह नई खोज दृष्टिहीनता के उपचार में बड़ी क्रांति ला सकती है। वैज्ञानिकों ने इंकजेट प्रिंटर के जरिये चूहों की रेटिना सेल को प्रिंट किया। इस दौरान कोशिकाओं को कोई नुकसान भी नहीं हुआ और वे जीवित भी रहीं। 
 
शोधकर्ता प्रोफेसर कीथ मार्टिन ने बताया कि यह पहली बार है जब सेंट्रल नर्वस सिस्टम से जुड़ी किसी कोशिका को सफलतापूर्वक प्रिंट किया गया है। इससे दृष्टिहीनता के उपचार में मदद मिल सकती है। हमने पाया कि रेटिना की सेल को निकालकर अलग किया जा सकता है। इन कोशिकाओं को अलग-अलग पैटर्न पर प्रिंट भी किया जा सकता है। 
 
प्रिटिंग के दौरान ये कोशिकाएं जीवित रहती हैं। भविष्य में इनका इस्तेमाल खराब कोशिकाओं को बदलने के लिए किया जा सकता है। मार्टिन और उनके सहयोगी वैज्ञानिकों के इस शोध को बायोफैब्रिकेशन जर्नल में प्रकाशित किया गया है। भविष्य में इनकी योजना इस प्रणाली का उपयोग कर पूरी रेटिना तैयार करने की है। sabhar : bhaskar.com

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घरेलू नुस्खे :जो आंखों में सालों से लगा चश्मा भी उतर जाए

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चश्मा लग जाना आजकल एक सामान्य सी बात है। इस समस्या से जुझ रहे लोग इसे मजबूरी मानकर हमेशा के लिए अपना लेते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है कि अगर किसी कारण से एक बार चश्मा लग जाए तो वह उतर नहीं सकता। चश्मा लगने का सबसे प्रमुख कारण आंखों की ठीक से देखभाल न करना, पोषक तत्वों की कमी या अनुवांशिक  हो सकते हैं। इनमें से अनुवांशिक कारण को छोड़कर अन्य कारणों से लगा चश्मा सही देखभाल व खानपान का ध्यान रखने के साथ ही देसी नुस्खे अपनाकर उतारा जा सकता है।


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बादाम की गिरी, बड़ी सौंफ  व मिश्री तीनों को समान मात्रा में मिला लें। रोज इस मिश्रण को एक चम्मच मात्रा में एक गिलास दूध के साथ रात को सोते समय लें।

- आंखों के हर प्रकार के रोग जैसे पानी गिरना , आंखें आना, आंखों की दुर्बलता, आदि होने पर रात को आठ बादाम भिगोकर सुबह पीस कर पानी में मिलाकर पी जाएं।

 कनपटी पर गाय के  घी की हल्के हाथ से रोजाना कुछ देर मसाज करने पर आंखों की रोशनी बढ़ती है

 एक चने के दाने जितनी फिटकरी को सेंककर सौ ग्राम गुलाबजल में डालें और रोजाना रात को सोते समय इस गुलाबजल की चार-पांच बूंद आंखों में डाले साथ पैर के तलवों पर घी की मालिश करें इससे चश्में के नंबर कम हो जाते हैं।

 केला, गन्ना खाना आंखों के लिए हितकारी है। गन्ने का रस पीएं। एक नींबू एक गिलास पानी में पीते रहने से जीवन भर नेत्र ज्योति बनी रहती है।

- पैर के तलवों पर सरसों के तेल की मालिश करके सोएं। सुबह के समय नंगे पैर हरी घास पर चलें व नियमित रूप से अनुलोम-विलोम प्राणायाम करें आंखों की कमजोरी दूर हो जाएगी।
आंवले के पानी से आंखें धोने से या गुलाबजल डालने से आंखें स्वस्थ रहती है।
 - त्रिफला चूर्ण को रात्रि में पानी में भीगोकर, सुबह छानकर उस पानी से आंखें धोने से नेत्रज्योति बढ़ती है।

sabhar : bhaskar.com
 


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शुक्रवार, 6 दिसंबर 2013

पांच सुदूर ग्रहों के वायुमंडल में पानी की मौजूदगी के संकेत

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ग्रहों के वायुमंडल में पानी की मौजूदगी के संकेत ,नासा के नासा के वैज्ञानिकों ने पांच सुदूर ग्रहों के वायुमंडल में पानी की मौजूदगी के संकेत मिलने का दावा किया है।मिलने का दावा किया है नासा ने कहा कि हालांकि वातावरण में पानी की मौजूदगी का सौरमंडल से परे कुछ सुदूर ग्रहों पर पहले ही पता लगाया जा चुका है, लेकिन यह ऐसा पहला अध्ययन है जिसमें विविध ग्रहों पर पाए गए संकेतों का पूरी तरह मापन और आपस में तुलना की गई है। जिन पांच ग्रहों पर पानी के संकेत मिले हैं उनमें डब्ल्यूएएसपी-17बी, एचडी209458बी, डब्ल्यूएएसपी-12बी, डब्ल्यूएएसपी-19बी और एक्सओ-1बी शामिल हैं। यह अध्ययन हब्बल दूरबीन की मदद से किया गया है।मंगलवार को प्रकाशित हुए एस्ट्रोफिजिकल जर्नल पेपर के प्रमुख लेखक मेंडेल ने बताया कि इस काम से विभिन्न ग्रहों के वातावरण में उपस्थित पानी की मात्र की तुलना के रास्ते खुल गए हैं। उदाहरण के तौर पर गर्म और ठंडे ग्रहों की तुलना की जा सकती है। नासा ने बताया कि पांचों ग्रह गर्म हैं। शुरू में इनके धुंध से भरा हुआ प्रतीत होने पर वैज्ञानिक हैरान हो गए थे। इनमें से डब्ल्यूएएसपी-17बी ग्रह अतिरेक से भरे धुंध वाला है। लेकिन पानी के सबसे प्रबल संकेत वाला ग्रह एचडी209458बी है। वैज्ञानिक का कहना है कि हमारे सौरमंडल में बृहस्पति ग्रह जैसे बड़े, गर्म और अपने तारे के करीब भ्रमण करने वाले ग्रहों पर पानी मिलने के संकेत ज्यादा मिले हैं।नासा की रिपोर्ट में बताया गया है कि पानी की मौजूदगी के जो संकेत मिले हैं, उनमें भिन्नता है। मैरीलैंड के ग्रीनबेल्ट में स्थित नासा के गोडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर के ग्रह वैज्ञानिक एवी मेंडेल ने कहा कि हम इस बात को लेकर पूरी तरह आश्वस्त हैं कि हमने विविध ग्रहों पर पानी के संकेत देखे हैं। sabhar : jagaran.com

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बच्चों की जान बचाने के लिए खुद को अपहर्ताओं के हवाले कर दिया

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गुवाहाटी, [कंचन]। असम के शिवसागर जिले के नाजिरा स्थित केंद्रीय विद्यालय की आठवीं कक्षा की छात्रा गुंजन शर्मा ने 10 बच्चों की जान बचाने के लिए खुद को अपहर्ताओं के हवाले कर दिया। बाद में मौका देखते ही वह अपहर्ता के चंगुल से भाग निकली। असम के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने 12 वर्षीय गुंजन की बहादुरी की प्रशंसा करते हुए पुरस्कार के लिए उसके नाम की सिफारिश राष्ट्रपति के पास भेजने की घोषणा की है।
सिमलगुड़ी बाजार में बुधवार दोपहर एक युवक पिस्तौल लेकर फिल्मी अंदाज में 11 स्कूली बच्चों से भरी वैन में घुसा और उन्हें अगवा कर लिया। हथियार का डर दिखाकर युवक वैन को नगालैंड की ओर लेकर चल दिया। बहादुर गुंजन ने बताया कि वैन में केजी से दूसरी कक्षा तक के बच्चे थे, जो पिस्तौल देख काफी डर गए थे। इस बीच वैन एक नाले में फंस गई तो अपहर्ता कक्षा दो की छात्रा अनन्या बरगोहाई समेत दो अन्य छात्राओं को अपने साथ ले जाने लगा। उसने अपहर्ता से सभी बच्चों को छोड़ खुद को साथ ले जाने का आग्रह किया, जिसे युवक ने मान लिया। वह उसे पैदल ही नगालैंड के जंगल की ओर लेकर चल दिया। इस दौरान सीआरपीएफ, असम राइफल्स के जवान और नगालैंड पुलिस रात भर उसकी तलाश करती रही। बहादुर गुंजन ने बताया कि ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर चलने के बाद युवक ने एक बांस के झुरमुट में रात बिताने को कहा। सुबह मौका पाकर वह जंगल से भाग निकली। ग्रामीणों की सूचना पर पहुंची पुलिस ने उसे सिमलगुड़ी लाकर परिवार को सौंप दिया। sabhar : jagaran.com

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गुरुवार, 5 दिसंबर 2013

ग्लास, सेल्फ़ ड्राइविंग कार के बाद रोबोट विकसित करेगा गूगल

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मेका एम-1 रोबोटिक सिस्टम


गूगल ने पिछले छह महीने में सात रोबोट बनाने वाली कंपनियों का अधिग्रहण किया है और नए उत्पाद विकसित करने के लिए कर्मचारियों की भर्ती भी शुरू कर दी है.मेका के एम-वन रोबोट्स की तकनीक गूगल ने अधिगृहीत की है.गूगल के एक प्रवक्ता ने बताया है कि एंड्रॉएड ऑपरेटिंग सिस्टम निर्माण के प्रमुख रह चुके एंडी रुबिन गूगल के नए प्रयास का नेतृत्व कर रहे हैं.

'न्यूयार्क टाइम्स' अख़बार की एक रिपोर्ट के अनुसार गूगल फ़िलहाल जिन रोबोट्स पर काम कर रहा है, उन्हें वो अभी बेचना नहीं चाहता.हालांकि गूगल ने अभी तक ये नहीं बताया है कि वो किस तरह के रोबोट विकसित करेगा.अख़बार का कहना है कि गूगल सेल्फ़-ड्राइविंग कार में इस्तेमाल होने वाले रोबोट्स पर काम कर रहा है, ताकि सामानों की होम डिलीवरी में मदद मिल सके.
न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक़ हाल ही में गूगल ने सैन फ्रांसिस्को और सैन जोस मेंक्लिक करें           'शॉपिंग एक्सप्रेस' के नाम से किराने का सामान घर पहुंचाने वाली सेवा शुरू की है.यह भविष्य में अमेज़न की 'प्राइम एअर' प्रोजेक्टस को चुनौती दे सकता है जो ड्रोन के माध्यम से उपभोक्ताओं को सामान पहुंचाने की संभावनाओं पर विचार कर रही है.
हालांकि गूगल खुद अपनी परियोजना के बारे में जब तक नहीं बताता, तब तक इस परियोजना की सटीक जानकारी मिलना मुश्किल है.
एडिनबर्ग विश्वविद्यालय के रोबोटिक लैब विभाग के निदेशक प्रोफ़ेसर सेतु विजयकुमार कहते हैं, "यह साफ़ है कि पर्सनल रोबोट और इससे जुड़ी अन्य तकनीकों के बाज़ार में उतरने के दिन बहुत करीब हैं."
उन्होंने कहा, "अब तक रोबोट बनाने संबंधी तकनीक की दिशा में गति और सेंसिंग सिस्टम में काफ़ी तरक्की हुई है. अब मुख्यधारा की गूगल जैसी कंपनियां चुनौती के लिए तैयार हैं. इससे ताक़तवर सॉफ्टवेयर के एकीकरण, मानकीकरण और माड्युलर डिज़ाइन बनाने में तेज़ी आएगी." sabhar : http://www.bbc.co.uk

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हनुमानजी का जन्म के सुबूत

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PHOTOS: यहां हुआ था हनुमानजी का जन्म...ये रहे पुख्ता सुबूत!
गुजरात स्थित डांग जिला रामायण काल में दंडकारण्य प्रदेश के रूप में पहचाना जाता था। डांग जिले के आदिवासियों की हमेशा से यह मानता रही कि भगवान राम वनवास के दरमियान पंचवटी की ओर जाते समय डांग प्रदेश से गुजरे थे। डांग जिले के सुबिर के पास भगवान राम और लक्ष्मण को शबरी माता ने बेर खिलाए थे। आज यह स्थल शबरी धाम नाम से जाना जाता है।
 
शबरी धाम से लगभग 7 किमी की दूरी पर पूर्णा नदी पर स्थित पंपा सरोवर है। यहीं मातंग ऋषि का आश्रम था। डांग जिले के आदिवासियों की सबसे प्रबल मानता यह भी है कि डांग जिले के अंजनी पर्वत में स्थित अंजनी गुफा में ही हनुमानजी का भी जन्म हुआ था।कहा जाता है कि अंजनी माता ने अंजनी पर्वत पर ही कठोर तपस्या की थी और इसी तपस्या के फलस्वरूप उन्हें पुत्र रत्न यानि की हनुमान जी की प्राप्ति हुई थी। माता अंजनी ने अंजनी गुफा में ही हनुमानजी को जन्म दिया था।अंजनी गुफा से लगे हुए अंजनी कुंड में बाल हनुमान स्नान किया करते थे और इसी पर्वत पर खड़े होकर उन्होंने सूर्य को फल समझ लिया था, जिसके बाद उन्हें मुंह में रख लिया था। इसी भूमि पर ही उन्होंने शनिदेव को अपने वश में किया था।यहां रहने वाले लभगग सभी लोगों के नाम रामायण के पात्रों पर हैं जैसे कि राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघन, सीता, जानकी, लक्षु, रघु, रघुनाथ आदि।डांग जिले का हरेक व्यक्ति हनुमानजी का भक्त है। अंजनी पर्वत की तलहटी में ही अंजनकुंड गांव बसा हुआ है।
PHOTOS: यहां हुआ था हनुमानजी का जन्म...ये रहे पुख्ता सुबूत!
अंजनी पर्वत के बारे में यह भी कहा जाता है कि वनवास के दरमियान राम भगवान पंचवटी की ओर जाने के लिए यहां से दानवों का संहार कर ऋषि-मुनियों का उद्धार करने के लिए ही गुजरे थे
अंजनी पर्वत आज भी अनेक प्रकार की दुर्लभ वनस्पतियों और जड़ी-बूटियों से अटा पड़ा है। यहां रहने वाले अनेक लोग अपने आपको शबरी माता की वंशज भी मानते हैं।
PHOTOS: यहां हुआ था हनुमानजी का जन्म...ये रहे पुख्ता सुबूत!


PHOTOS: यहां हुआ था हनुमानजी का जन्म...ये रहे पुख्ता सुबूत!


PHOTOS: यहां हुआ था हनुमानजी का जन्म...ये रहे पुख्ता सुबूत!

sabhar : bhaskar.com

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