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सोमवार, 7 अक्टूबर 2013

प्लेब्वॉय के कवर पेज पर इम्प्लॉइ की न्यूड फोटो देख बॉस ने ऐसे निकाला गुस्सा

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प्लेब्वॉय के कवर पेज पर इम्प्लॉइ की न्यूड फोटो देख बॉस ने ऐसे निकाला गुस्सा
मर्दों को मशहूर मैगजीन 'प्लेब्वॉय' के लिए पोज दे चुकी एक महिला ने अपने बॉस पर मुकदमा दायर कर दिया है। महिला के मुताबिक उसके बॉस ने पहले उसे मैगजीन में न्यूड फोटोशूट की इजाजत दी और तस्वीर छपने के बाद नौकरी से निकाल दिया। घटना अमेरिका के मिनेसोटा की है। बॉस की बेरुखी का शिकार हुई महिला का नाम जेसिका जेलिनस्के है और वह एक बच्चे की अविवाहित मां है।

33 वर्षीय जेसिका के मुताबिक उन्होंने अपने बॉस से मैन्स मैगजीन के फोटोशूट की इजाजत मांगी थी। 33 वर्षीय जेसिका की तस्वीर पिछले साल प्लेब्वॉय के 'हॉट हाउसवाइफ' इश्यू में प्रकाशित हुई थी। कवर पेज के लिए 400 मॉडल्स में से जेसिका को चुना गया था। लेकिन इश्यू मार्केट में आने के बाद 9 साल की बच्ची की मां जेसिका को नौकरी से निकाल दिया गया। वह मिनेसोटा की एक केबल कम्युनिकेशन कंपनी चार्टर कम्युनिकेशन में एडवर्टाइजिंग सेल्स एग्जीक्यूटिव की पोस्ट पर थीं।

जेसिका के बॉस टिमोथी मैकबीन के मुताबिक मैगजीन के कवर पेज पर उत्तेजक तस्वीर छपवाकर उन्होंने कंपनी के नियमों का उल्लंघन किया है।

कंपनी की ओर से भेज गए नोटिस में लिखा था, 'एक जानी-मानी मैगजीन के कवर पेज पर न्यूड पोज देने के कारण आपने चार्टर कंपनी के पेशेवर आचरण नियमों का उल्लंघन किया है।'

कोर्ट में दायर मुकदमें में जेसिका ने दावा किया है कि मैगजीन में फोटोशूट के लिए उसके बॉस ने इजाजत दी थी।  
प्लेब्वॉय के कवर पेज पर इम्प्लॉइ की न्यूड फोटो देख बॉस ने ऐसे निकाला गुस्सा

जेसिका ने मुकदमे में जिक्र किया है कि उसके बॉस को शिकागो में आयोजित हाउसवाइफ मॉडलिंग प्रतियोगिता के बारे में मालूम था। जेसिका के मुताबिक उसे यह आश्वासन दिया गया था कि मैगजीन के लिए न्यूड पोज देने पर उसकी नौकरी को किसी तरह का खतरा नहीं है। जेसिका इश नौकरी से हर साल 18,000 डॉलर कमाती थी।

जेसिका की उत्तेजक तस्वीर 'प्लेब्वॉय' के जुलाई, 2011 इश्यू में प्रकाशित हुई थी। इस तस्वीर में जेसिका ने अपनी क्लीवेज दिखाते हुए पोज दिया है। साथ में मैगजीन के कवर पेज पर लिखा था, 'नॉटी मॉम्स एंड सेक्सी वाइव्स'।
 
जेसिका ने टिमोथी के खिलाफ 150,000 डॉलर का मुकदमा दायर किया है। गौरतलब है कि वह इससे पहले भी 2006 में मैक्सिम मैगजीन के लिए फोटोशूट करवा चुकी हैं। 2011 में एक इंटरव्यू में उसने कहा था कि न्यूड पोज देने के लिए उसमें काफी आत्मविश्वास है।
 प्लेब्वॉय के कवर पेज पर इम्प्लॉइ की न्यूड फोटो देख बॉस ने ऐसे निकाला गुस्सा
वह मिनेसोटा के रोचेस्टर में फैशन मॉल शो में भी मॉडलिंग कर चुकी है। sabhar : bhaskar.com

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ऐसे ही नहीं कहलाते BIG B, करोड़ों नहीं अरबों की दौलत के हैं मालिक

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ऐसे ही नहीं कहलाते BIG B, करोड़ों नहीं अरबों की दौलत के हैं मालिक

11 अक्टूबर 2013 को बॉलीवुड के महानायक अमिताभ 71 साल के होने जा रहे हैं। बिग बी बॉलीवुड के शहंशाह हैं तो जाहिर है उनके पास भी धन-दौलत की कोई कमी नहीं होगी।
 
अपनी प्रोडक्शन कंपनी एबीसीएल के जबरदस्त घाटे में जाने के बावजूद बिग बी की माली हालत काफी अच्छी है। आलीशान घरों, महंगी गाड़ियों और शानोशौकत की अमिताभ बच्चन की लाइफ में कोई कमी नहीं है।
 
ऐसे में आज हम आपको बताते हैं कि आखिर कितनी संपत्ति के मालिक हैं बच्चन परिवार के मुखिया और उनकी पत्नी जया बच्चन।
ऐसे ही नहीं कहलाते BIG B, करोड़ों नहीं अरबों की दौलत के हैं मालिक
सूत्रों की मानें तो बच्चन दंपति यानी अमिताभ बच्चन और उनकी पत्नी जया बच्चन कुल चार अरब 94 करोड़ 86 लाख 37 हजार 334 रुपए की संपत्ति के मालिक हैं। बच्चन दंपति के पास करोड़ 70 लाख 37 हजार 334 रुपए की चल संपत्ति है जबकि 150 करोड़ रुपए की अचल संपत्ति है।
ऐसे ही नहीं कहलाते BIG B, करोड़ों नहीं अरबों की दौलत के हैं मालिक


चल संपत्तियों में अमिताभ बच्चन के पास 3 अरब, 61 लाख 7 हजार 311 रुपए की संपत्ति है, जबकि जया बच्चन 43 करोड़ नौ लाख 30 हजार 23 रुपए की चल संपत्तियों की मालकिन हैं।
ऐसे ही नहीं कहलाते BIG B, करोड़ों नहीं अरबों की दौलत के हैं मालिक

अमिताभ के पास 6 करोड़ 32 लाख 26 हजार 554 रुपए की लग्जरी कारें हैं। जया के पास 30 लाख की टोयोटा लेक्सस सहित दो गाड़ियां है,जबकि अमिताभ के पास तीन करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की राल्स रायस सहित कुल नौ गाड़ियां और एक ट्रैक्टर भी है। 

ऐसे ही नहीं कहलाते BIG B, करोड़ों नहीं अरबों की दौलत के हैं मालिक

जया के पास मुंबई के 'जलसा' नाम के बंगले के अलावा, भोपाल में दो फ्लैट हैं,जबकि अमिताभ के पास मुंबई, गुड़गांव और फ्रांस में एक अचल संपत्ति है,जिसकी कीमत तीन करोड़ रुपए है

ऐसे ही नहीं कहलाते BIG B, करोड़ों नहीं अरबों की दौलत के हैं मालिक

अमिताभ के पास जूहू में 20 करोड़ रुपये की कीमत का एक व्यावसायिक भवन भी है, जबकि उनके पास बाराबंकी के दौलतपुर और लखनऊ के मुजफ्फरनगर गांव में खेती की जमीन है। जया के पास भोपाल और लखनऊ में खेती की जमीन है। sabhar : bhaskar.com


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Real Look में कुछ ऐसे दिखाई देते हैं चंपक दादा, जानिए रोचक बातें...

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Real Look में कुछ ऐसे दिखाई देते हैं चंपक दादा, जानिए रोचक बातें...

‘अरे जेठिया, तुझमें तो अक्ल की एक बूंद भी नहीं.. अरे नहाए बगैर क्यों खाना खाने बैठ गया.. अरे बहू ये जेठिया कहां गया.. अरे टप्पू ने अपना लेशन किया कि नहीं..’ ये संवाद सुनते ही आपकी नजरों के सामने एक चेहरा तैरने लगा होगा। जी हां, आपने बिल्कुल ठीक समझा। हम चंपकलाल जयंतीलाल गडा यानी की अमित भट्ट की ही बात कर रहे हैं।
 
लोकप्रिय टीवी धारावाहिक सीरियल ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ में चंपकलाल ने एक अनोखी ही छाप छोड़ी है। सीरियल में बिल्कुल बूढ़े दिखाई देने वाले चंपक जोर-जोर से बोलते हुए और हाथ में लकड़ी लेकर ही चलते नजर आते हैं। यही अदा ही उनकी मुख्य पहचान बन गई है।
 
सीरियल में हमेशा जेठा को डांटते हुए, टप्पू को लाड़ करते हुए और दयाभाभी को समझाइश देते बापूजी का रोल गुजराती कलाकार अमित भट्ट कर रहे हैं। 

Real Look में कुछ ऐसे दिखाई देते हैं चंपक दादा, जानिए रोचक बातें...

मूल कच्छ के रहने वाले गुजराती कलाकार अमित भट्ट फिलहाल मुंबई में रहते हैं। परिवार में पत्नी के अलावा उनके दो जुड़वा बेटे भी हैं। ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ सीरियल में आने से पहले भी उन्होंने कई गुजराती नाटकों में काम किया है।आपको जानकर आश्चय्र होगा कि चंपक चाचा का रोल करने वाले अमित भट्ट की उम्र अभी सिर्फ 39 वर्ष है। इतना ही नहीं, सीरियल में जेठालाल के पिता बने अमित भट्ट, जेठालाल से भी 5 साल छोटे हैं।
Real Look में कुछ ऐसे दिखाई देते हैं चंपक दादा, जानिए रोचक बातें...

सीरियल में बापूजी का रोल करने के लिए उन्हें काफी मेहनत करनी पड़ती है। इतना ही नहीं, उन्हें हर दो दिन में अपने बाल भी मुंडवाने पड़ते हैं।

Real Look में कुछ ऐसे दिखाई देते हैं चंपक दादा, जानिए रोचक बातें...
आपको यह जानकर भी आश्चर्य होगा कि शरुआत के दो सालों में उन्हें 250 से अधिक बार शेविंग भी करानी पड़ी थी। जब सीरियल में उनके लिए स्पेशल विंग मंगवाई गई, तब कहीं जाकर उन्हें सिर मुंडवाने की मुसीबत से छुटकारा मिल सका।
Real Look में कुछ ऐसे दिखाई देते हैं चंपक दादा, जानिए रोचक बातें...

अमित भट्ट एक्टिंग में दुनिया में काफी समय से जुड़े हुए हैं। वे अपने कॉलेज के दिनों से ही एक्टिंग में दुनिया में कदम रख चुके थे।
Real Look में कुछ ऐसे दिखाई देते हैं चंपक दादा, जानिए रोचक बातें...

एक बार सूरत में दिव्यभास्कर की टीम से हुई मुलाकात में उन्होंने बताया था कि शुरुआत में ये रोल मुझे बहुत मुश्किल लगा था, लेकिन मैंने इसे एक चैलेंज के रूप में लिया। इसके बाद तो मुझे यह रोल करने की जैसे आदत ही पड़ गई। बच्चों के साथ खेलना, अपनों से बड़ी उम्र के लोगों को डांटना..हाहाहाहाहा.. एक अलग ही मजा है।
 
Real Look में कुछ ऐसे दिखाई देते हैं चंपक दादा, जानिए रोचक बातें...

Real Look में कुछ ऐसे दिखाई देते हैं चंपक दादा, जानिए रोचक बातें...
Real Look में कुछ ऐसे दिखाई देते हैं चंपक दादा, जानिए रोचक बातें...

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हजारों साल पुराने चमत्कारी पेड़ के बारे में जान, रह जाएंगे हैरान!

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PICS: हजारों साल पुराने चमत्कारी पेड़ के बारे में जान, रह जाएंगे हैरान!

लखनऊ. अभी तक आपने कई पेड़ पौधों के बारे में सुना होगा। उनकी चमत्कारिक शक्तियों के बारे में भी जानते होंगे। पर क्या किसी ऐसे पेड़ के बारे में भी सुना है जिसको छूने मात्र से ही आपकी सारी थकान गायब हो जाए। आपकी मांगी हुई सारी मन्नतें भी पूरी हो जाए जी हां बाराबंकी जिले में एक ऐसा ही पेड़ है जो कई सालों से श्रद्धा और आस्था का केंद्र बिंदु बना हुआ है। उसका नाम है परिजात।  
 
आइए पहले हम आपको परिजात की विशेषताओं के बारे में बता दें। राजधानी लखनऊ से 28 किमी दूर बाराबंकी के रामनगर क्षेत्र में बोरोलिया गांव में परिजात वृक्ष स्थित है। करीब पैंतालिस फीट ऊंचे और पचास फीट मोटे इस परिजात की अधिकांश शाखाएं धरती की और मुड़ जाती हैं। धरती छूते ही यह शाखाएं अपने आप सूख जाती है। यह भी कहा जाता है कि परिजात वृक्ष की प्रजाति भारत में नहीं मिलती। पूरे भारत में एक मात्र यही परिजात है। इसकी आयु करीब पांच हज़ार से एक हज़ार साल तक होती है। 

PICS: हजारों साल पुराने चमत्कारी पेड़ के बारे में जान, रह जाएंगे हैरान!

मान्यता है की परिजात पेड़ की उत्पत्ति समुद्र मंथन से हुई थी। जिसे भगवान इंद्रा ने अपनी वाटिका में रोप दिया था। माना जाता है जब पांडव पुत्र कुंती के साथ अज्ञातवास कर रहे थे, तब उन्होंने ही सत्यभामा की वाटिका से उसे लाकर बोरोलिया गांव में रोपित किया था। तब से ही यह वृक्ष आस्था का केंद्र बना हुआ है। यह भी मान्यता है कि अर्जुन परिजात को स्वर्ग से लेकर आए थे।
PICS: हजारों साल पुराने चमत्कारी पेड़ के बारे में जान, रह जाएंगे हैरान!
यह भी कहा जाता है समुद्र मंथन के बाद स्वर्गलोक के राजा इंद्र ने नारद ऋषि को पारिजात के कुछ फूल भेंट में दिए थे। नारद जी ने उन फूलों में से एक भगवान कृष्ण को दिया। जिसे उन्होंने अपनी पत्नी रुकमणी को भेंट कर दिया। यह देख नारद जी श्रीकृष्ण की दूसरी पत्नी सत्यभामा के पास गए और सारा हाल उन्हे बतलाया। यह सुनकर सत्यभामा के मन में द्वेष की भावना आ गई। नारद जी ने उन्हें सुझाव दिया कि वह भी श्रीकृष्ण से वैसा ही फूल ला कर देने का अनुरोध करें। साथ ही नारद जी ने इंद्र को भी सावधान कर दिया। भगवान श्रीकृष्ण और सत्यभामा परिजात वृक्ष की एक डाल ले जा रहे थे तभी वहां इंद्र आ गए और कृष्ण से वृक्ष न ले जाने का अनुरोध किया। कृष्ण के ना मानने पर युद्ध छिड़ गया और इंद्र को हार का मुंह देखना पड़ा।
PICS: हजारों साल पुराने चमत्कारी पेड़ के बारे में जान, रह जाएंगे हैरान!

परिजात वृक्ष को कल्प वृक्ष भी कहा जाता है। मान्यता है कि यह सभी की कामनाओं को पूर्ण करता है। यह वृक्ष उन 14 रत्नों में से एक है जो समुद्र मंथन द्वारा देवताओं और असुरों ने प्राप्त किए थे। यह वृक्ष महाभारत काल से मौजूद है

PICS: हजारों साल पुराने चमत्कारी पेड़ के बारे में जान, रह जाएंगे हैरान!
बाराबंकी के बोरोलिया में यह पेड़ पिछले कई वर्षों से कई लोगों की जहां थकान दूर कर रहा है। वहीं कईयों की मनौतियां भी पूरी कर रहा है। ऐसे में यदि आप लखनऊ घूमने आ रहे हैं, तो आप की भी कोई इच्छा हो तो बोरोलिया गांव आकर स्वर्ग से आए इस पेड़ से अपनी मनौतियों को मान सकते हैं।  sabhar : bhaskar.com


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सच्ची कहानी: कब्र में लिटाते ही बोल पड़ी मृतक महिला, दंग रह गए लोग!

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सच्ची कहानी: कब्र में लिटाते ही बोल पड़ी मृतक महिला, दंग रह गए लोग!

गीताप्रेस, विश्व की सर्वाधिक हिन्दू धार्मिक पुस्तकें प्रकाशित करने वाली संस्था है। यह पूर्वी उत्तर प्रदेश के गोरखपुर शहर के शेखपुर इलाके की एक इमारत में धार्मिक पुस्तकों के प्रकाशन और मुद्रण का काम कर रही है। देश-दुनिया में हिंदी, संस्कृत और अन्य भारतीय भाषाओं में प्रकाशित धार्मिक पुस्तकों, ग्रंथों और पत्र-पत्रिकाओं की बिक्री कर रही गीताप्रेस को भारत में घर-घर में रामचरित मानस और भगवद्गीता को पहुंचाने का श्रेय जाता है। इसके द्वारा कल्याण (हिन्दी मासिक) और कल्याण-कल्पतरु (इंग्लिश मासिक) का प्रकाशन भी होता है। दैनिकभास्कर.कॉम इसी पत्रिका में प्रकाशित कुछ सच्ची घटनाओं की एक सीरिज शुरू कर रहा है। 
 
इसके तहत सबसे पहले प्रस्तुत है सच्ची कहानी- जब उसे परलोक का हुआ अनुभव
 
घटना 1957 की है, वाराणसी (अब चंदौली) के सकलडीहा स्टेशन से कुछ दूरी पर स्थित प्रभुपुर नाम का गांव है। इस गांव में भांगरी नाम की एक महिला रहा करती थी, उसके पति का नाम मनिहार था। वह कांच की चूड़ियां बेचा करती थी। भांगरी के पड़ोस में रहेने वाली महिला अक्सर बीमार रहा करती थी। भांगरी एक दिन उस महिला को देखने के लिए गई। वहां से लौटकर जैसे ही वह अपने घर में घुसी, जमीन पर गिर पड़ी और उसकी मृत्यु हो गई।
 
चूंकि भांगरी मुसलमान थी, उसे इस्लामिक रीति-रिवाज के अनुसार दफनाने के लिए तैयारी शुरु हो गई। गांववालों ने उसे दफनाने के लिए गांव के बाहर जंगल में एक गड्ढा भी खोद लिया। इस बीच घर परिवार के लोगों ने उसको कफ़न में लपेट कर सिल दिया। भांगरी को उसकी कब्र के पास ले जाया गया। जैसे ही उसे दफनाने के लिए कब्र में लिटाया गया, भांगरी बोल पड़ी। वहां खड़े लोगों के होश उड़ गए कि वह जिंदा है।
सच्ची कहानी: कब्र में लिटाते ही बोल पड़ी मृतक महिला, दंग रह गए लोग!

भांगरी के मुंह पर से कफन का कपड़ा हटाया गया। एक बार फिर लोगों की चौंकने की बारी थी। भंगरी के सर पर जलने के तीन निशान थे। यह निशान त्रिशूल जैसे थे। यहां तक कि उसके सर के बाल भी कुछ दूरी तक जले हुए थे। उसे लोग वापस घर लेकर आए। उसके बाद न तो भांगरी के सर के जले हुए बाल सही हुए और न ही जलने के निशान मिटे। 
सच्ची कहानी: कब्र में लिटाते ही बोल पड़ी मृतक महिला, दंग रह गए लोग!

जब लोगों ने भांगरी से इस जले निशान के बारे में पूछा तो उसने बताया कि जमीन पर गिरने के बाद दो व्यक्ति आए और अपने साथ ले गए। जिस जगह वे मुझे लेकर गए वहां लोगों की सभा लगी हुई थी। एक ऊंचे आसन पर एक व्यक्ति बैठा हुआ था जिसके चहरे पर बहुत तेज था। जैसे ही मुझे उसके सामने ले जाया गया, उसने मुझे और उन दोनों को जमकर फटकारा। 
सच्ची कहानी: कब्र में लिटाते ही बोल पड़ी मृतक महिला, दंग रह गए लोग!
उसने कहा कि तुम लोग यह किसे उठाकर ले आए, इसकी उम्र अभी 14 वर्ष और बाकी है। तुम दोनों को इसके पड़ोस में रहने वाली स्त्री को लेकर आना था जो बीमार है। भांगरी ने बताया कि उस व्यक्ति ने मेरी ओर इशारा करते हुए कहा कि यह स्त्री पापात्मा है। यह अपने दोनों बेटियों को अपने सामने मरते देखेगी। इसे वापस भेज दो, लेकिन इसके सर पर त्रिशूल से निशान लगा दो ताकि इसे यहां आना याद रहे। साथ ही यह अपने शेष जीवनकाल में पाप करने से बचे।

सच्ची कहानी: कब्र में लिटाते ही बोल पड़ी मृतक महिला, दंग रह गए लोग!
भांगरी की बताई हुई बातें सही साबित हुई, उसके कब्र से लौटने के बाद ही उसके पड़ोस में रहने वाली बीमार स्त्री की मौत हो गई। वह उस घटना के 14 वर्ष बाद ही मृत्यु को प्राप्त हुई। मरने से पहले भांगरी ने अपनी दोनों बेटियों की मौत देखी। उसके सर पर जलने के तीन निशान पूरी जिंदगी बने रहे। sabhar :bhaskar.com

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शनिवार, 5 अक्टूबर 2013

मधुमेह रोगियों के लिए मददगार साबित होगा कृत्रिम पंप

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मधुमेह रोगियों के लिए मददगार साबित होगा कृत्रिम पंप

सिडनी: ऑस्ट्रेलियाई चिकित्सकों ने मधुमेह-टाइप वन के रोगियों के लिए जोखिम और कोमा से बचने के लिए एक पंप तैयार किया है। ऑस्ट्रेलिया के पर्थ में प्रिंसेज मार्गरेट हॉस्पिटल फॉर चिल्ड्रेन में इंडोक्रिनॉलॉजी विभाग के प्रमुख टिम जॉन्स और उनके दल ने आग्नाशय जैसा एक कृत्रिम पंप बनाया है, जो मधुमेह रोगियों में इंसुलिन पहुंचाता है और उसे रोकता है।

नया उपकरण रोगियों में घातक कोमा की पहचान कर सकता है और रक्त में सुगर का स्तर कम हो जाने पर इंसुलिन की आपूर्ति को रोकता है। जॉन्स ने बताया कि कुछ रोगी दिल की धड़कनें तेज होने और रक्त में ग्लूकोज की बूंदों के रूप में अस्थिरता जैसे लक्षण देखेंगे।

उन्होंने आगे कहा कि अन्य लोगों को कोई चेतावनी संकेत नहीं मिलता है। इस तकनीक पर फिर भी ज्यादा भरोसा है। 
जॉन्स ने बताया कि नया पंप रोगियों को हाइपोग्लाइसीमिया और रक्त में कम ग्लूकोज से बचाएगा। (एजेंसी)

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आसाराम पर अपनी दवाओं से नपुंसक बनाने का आरोप

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आसाराम पर अपनी दवाओं से नपुंसक बनाने का आरोप
नई दिल्ली : यौन उत्पीड़न मामले में जेल में बंद कथावाचक आसाराम की मुश्किलें दिनोंदिन बढ़ती जा रही हैं। आसाराम के सेवादारों ने उन पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। आसाराम के एक पूर्व सेवादार शिवनाथ ने आरोप लगाया है कि आसाराम अपनी दावाओं से सेवादारों को नपुंसक बनाते हैं। शिवनाथ का कहना है कि दवा नपुंसक बनाने वाली एक तरह की जड़ी बूटी है।

दूसरी ओर आसाराम के एक अन्य सेवादार अजय कुमार ने भी ज़ी मीडिया से खास बातचीत में आसाराम पर गंभीर आरोप लगाए हैं। अजय कुमार का आरोप है कि आसाराम के आश्रमों की एक अलग दुनिया होती है और वहां तरह-तरह के ‘खेल खेले’ जाते हैं और इस बारे में जो कोई भी आवाज उठाता है, उसकी आवाज दबा दी जाती है।

अजय कुमार ने कहा कि आसाराम के आश्रम में स्वीमिंग पूल होता है और स्वीमिंग पूल में आसाराम महिलाओं के साथ स्नान करते हैं। अजय ने कहा कि उन्होंने एक बार स्वीमिंग पूल से एक महिला को बाहर आते देखा था। 

सेवादार अजय कुमार का आरोप है कि आसाराम के पुत्र नारायण साई भी अपने पिता के काले-करतूतों में भागीदार हैं। जबकि आसाराम के पूर्व सेवादार शिवनाथ का दावा है कि आसाराम जो दवा देते हैं, वह एक तरह की जड़ी-बूटी है जो मनुष्य को नपुंसक बनाती है। शिवनाथ ने बताया कि सेवादारों को यह दवा खाने के लिए मजबूर किया जाता है। 

आसाराम के सेवादारों के लगाए गए आरोपों की ज़ी मीडिया पुष्टि नहीं करता लेकिन विवादों में रहने वाले आसाराम के ऊपर ये गंभीर आरोप हैं, जिनकी जांच होनी चाहिए। sabhar :http://zeenews.india.com/

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सोचे हुए को सुन पाना संभव

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मस्तिष्क
मस्तिष्क की कार्यप्रणाली का बड़ा भाग अभी भी वैज्ञानिकों के लिए पहेली बना हुआ है


अमरीका में वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि उन्होंने मस्तिष्क से निकलने वाली तरंगों को पढ़ने की ओर पहला क़दम बढ़ा लिया है.
इससे ये संभव हो सकेगा कि किसी व्यक्ति के कुछ बोलने से पहले ही ये जाना जा सकेगा कि वह क्या बोलने जा रहा है.

शोध के नतीजों से ये उम्मीद जागी है कि आने वाले दिनों में मस्तिष्क से संबंधित बीमारियों से परेशान लोगों के लिए या बोल पाने में अक्षम लोगों की बातें समझना आसान हो जाएगा.कैलिफ़ोर्निया यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने मस्तिष्क में कुछ उपकरण लगाकर और एक कंप्यूटर प्रोग्राम की सहायता से ऐसा संभव कर दिखाया है.

किसी विज्ञान कथा की तरह

बीबीसी के विज्ञान संवाददाता जैसन पामर का कहना है कि ये किसी विज्ञान कथा की तरह है जिसमें आप किसी के विचारों को पढ़कर उन्हें सुन भी पा रहे हैं.
यानी आप किसी व्यक्ति के मस्तिष्क से सीधे बात कर रहे हैं.
उन्होंने ये उपकरण मस्तिष्क के उस हिस्से में लगाया था जो भाषा को लेकर जटिल विद्युतीय तरंगों के रूप में संकेत देता है. फिर इन तरंगों को कंप्यूटर की सहायता से ध्वनि तंरंगों में बदलकर उसे डिकोड करके बोले गए शब्दों और वाक्यों के रूप में सुना.
यानी शोधकर्ता वह बात सुन पा रहे थे जो व्यक्ति सोच रहा था.
शोधकर्ता मान रहे हैं कि ये उन लोगों के लिए वरदान साबित हो सकता है जो किसी और तरह से अपनी बात नहीं रख पाते.sabhar : bbc.co.uk

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क्या दिमाग़ पर क़ब्ज़ा संभव है?

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इंसानी दिमाग पर नियंत्रण

इंसान के दिमाग़ पर नियंत्रण करना अब वैज्ञानिकों की कोरी कल्पना, या तंत्र-मंत्र की किताबों तक ही सीमित नहीं रहने वाला.
वॉशिंगटन विश्वविद्यालय में किए गए एक शोध में इंटरनेट के माध्यम से एक वैज्ञानिक ने दूसरे वैज्ञानिक के दिमाग़ को नियंत्रित करके दिखाया है.

लेकिन कुछ कहते हैं कि अभी इस सबके बारे में कहना बहुत जल्दबाज़ी होगी.कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि इससे पता चल सकता है कि भविष्य में इंसानों के बीच संवाद कैसे होगा.

प्रयोग

वॉशिंगटन विश्वविद्यालय कैंपस में एक कंप्यूटर स्क्रीन के पास बैठे वैज्ञानिक राजेश राव अपने साथी वैज्ञानिक एंड्री स्टोको को संदेश देते हैं कि वह गोला दाग़ें.
कैंपस के दूसरे छोर पर एक कीबोर्ड के सामने बैठे स्टोको न चाहते हुए भी कीबोर्ड का स्पेसबार दबा देते हैं.
रावकी स्क्रीन पर गोला उड़कर रॉकेट को लगता हुआ दिखाई देता है.
ख़ास बात यह है कि स्टोको को संदेश देने के लिए राव ने न ज़ुबान हिलाई न ही शरीर का कोई और अंग. उन्होंने स्टोको को संदेश अपने दिमाग़ से भेजा.
यह घटना एक इंसान के किसी दूसरे इंसान के दिमाग़ पर नियंत्रण करने का पहला प्रमाण है.
हालांकि शोधकर्ता इसे थोड़ा कम आकर्षक नाम 'इंसान से इंसान का दिमाग़ी अंतरसंबंध' दे रहे हैं.
लेकिन आम आदमी को यह हैरी पॉटर के खलनायक वोल्डेमोर्ट का दिमाग़ पर नियंत्रण करने वाला सम्मोहन शाप जैसा लग सकता है.
हालांकि स्टोको इस प्रयोग को मज़ाक़ में मशहूर टीवी सीरीज़ स्टार ट्रेक में स्पोक द्वारा दिमाग़ से बातें साझा करने जैसा बताते हैं.
इंसानी दिमाग पर नियंत्रण
बहरहाल वह कहते हैं, "इस मामले में इंटरनेट का इस्तेमाल किया गया था. जैसे वह कंप्यूटरों को जोड़ता है उसने दिमाग़ों को जोड़ा था."
राव कहते हैं कि एक क्लिक करेंसोची गई बात को किसी दूसरे के दिमाग़ का पढ़ना और लागू होते हुए देखना "सचमुच बहुत उत्साहजनक और अद्भुत" था
वह कहते हैं, "अगले चरण में दोनों दिमाग़ों के बीच और दोतरफ़ा संवाद करना होगा."

तकनीक

लेकिन दिमाग़ के तकनीक को नियंत्रित करने की और भी कई उदाहरण हैं.
जैसे कि, क्लिक करेंसैमसंग दिमाग़ से चलने वाले एक टैबलेट पर प्रयोग कर रहा है.
टेक्नोलॉजी फ़र्म इंट्राक्सॉन एक "मस्तिष्क संवेदी हेडबैंड" की मार्केटिंग कर रही है जिससे आप अपने क्लिक करेंदिमाग़ से चीज़ों को नियंत्रित कर सकते हो.
यह उपकरण पहले ही शारीरिक रूप से अक्षम लोगों द्वारा बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया जा रहा है.
साफ़ है कि इस प्रयोग में इस्तेमाल की गई दिमाग़ के आदेश लेने और देने की तकनीक पहले से ही मौजूद है.
इलेक्ट्रोनसैफलोग्राफ़ी, वह तकनीक है जिसे राव के दिमाग़ से संदेश भेजने के लिए इस्तेमाल किया गया. इसे सामान्यतः मेडिकल पेशे में खोपड़ी से दिमाग़ की हरकतें रिकॉर्ड करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है.
ट्रांसक्रेनियल मैग्नेटिक स्टिमुलेशन, वह तकनीक है जिससे स्टोको की उंगली ने हरकत की. इस तकनीक का इस्तेमाल किसी हरकत के लिए दिमाग़ को उत्तेजित करने के लिए किया जाता है.
वॉल्डेमॉर्ट
लेकिन इन दोनों का एक साथ इस्तेमाल कर एक आदमी से दूसरे के आदेश का पालन करवाना- यह नया है.
हालांकि शोधकर्ता यह बताना नहीं भूलते कि यह प्रयोग सिद्धांत के लिहाज़ से बहुत शुरुआती चरण में है.

संभावनाएं

लेकिन रोबोटिक्स में पीएचडी करने वाले और 'रोबोकैलिप्स' के लेखक डेविड विल्सन कहते हैं कि यह प्रयोग 'सिद्धांत के सबूत' के रूप में बहुत महत्वपूर्ण है.
वह कहते हैं, "इसने एक बहस शुरू कर दी है कि भविष्य में दिमाग़ से दिमाग़ का संवाद कैसे समाज को प्रभावित करेगा."
हालांकि वह यह भी कहते हैं, "हालांकि यह प्रयोग इतने छोटे दायरे में किया गया है कि इसका व्यावहारिक रूप से कोई विशेष अर्थ नहीं है, लेकिन यह हमें सोचने पर मजबूर तो करता ही है."
लेकिन सभी प्रभावित नहीं हैं.
फ़्यूचरोलॉजिस्ट (भविष्य की अध्ययनकर्ता) डॉ इयान पीयरसन विज्ञान और अभियांत्रिकी के क्षेत्र से हैं.
वह कहती हैं, "एक साधारण सा विचार की पहचान करने वाला तंत्र बहुत मामूली चीज़ है. अगर वह एक व्यक्ति के विचार को लेकर सीधे दूसरे व्यक्ति में पैदा करवा सकते- तो मैं प्रभावित हो जाती."

डॉक्टर डेविड विल्सन
हालांकि सामान्यतः इस क्षेत्र में होने वाला विकास इंसानों के बीच संवाद और सहयोग के असर को लेकर आमतौर पर सहमति है.
स्टोको कहते हैं कि संभव है कि एक दिन पायलट के अक्षम हो पाने की स्थिति में ज़मीन बैठा आदमी किसी यात्री के माध्यम से हवाई जहाज़ को ज़मीन पर उतरवाने में कामयाब हो जाए.

आशंकाएं

हालांकि दिमाग़ पर नियंत्रण का पूरा सिद्धांत ही अक्सर इसके दुरुपयोग की आशंकाओं से घिरा रहता है.
लेकिन रोबोट नियंत्रित भविष्य के बारे में किताब लिखने वाले विल्सन कहते हैं इस प्रयोग के असर को लेकर आशांवित हैं.
वह कहते हैं, "मुझे इसमें कोई भी ख़तरा नहीं दिखाई देता. यह तो दो अलग भाषा बोलने वाले लोगों को एक बेहतर दल बनाने में सहायता कर सकता है- जिससे समस्याएं जल्दी सुलझ सकेंगी."
वॉशिंगटन विश्वविद्यालय में मनोविज्ञान की असिस्टेंट प्रोफ़ेसर चंतल प्रत ने भी इस प्रयोग के संचालन में मदद की थी.
वह विल्सन की बात से सहमत हैं.
चंतल कहती हैं, "ऐसी कतई संभावना नहीं है कि जिस तकनीक का हम इस्तेमाल कर रहे हैं उसे किसी ऐसे किसी व्यक्ति पर लागू नहीं किया जा सकता जो इसे चाहता न हो या जिसे इसकी जानकारी न हो."
डॉक्टर पीयरसन कहती हैं "जब दिमाग तक हमारी पूरी तरह सीधी पहुंच हो जाएगी और आप किसी को रोबोट की तरह इस्तेमाल कर सकेंगे तब दिक्क़त हो सकती है."

"चाहे यह ग़ुलामी हो या सरकारी नियंत्रण- कौन जानता है. आप इस बारे में जिनती चाहें कहानियां लिख सकते हैं." sabhar : bbc.co.uk

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कुत्ते ने किया रक्तदान

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न्यूजीलैंड। अगर आपसे कोई अचानक रक्तदान के लिए कहे तो क्या आप सहर्ष तैयार हो जायेंगे, ऐसे में ज्यादातर लोग तैयार नहीं होंगे। लेकिन हम इंसान एक कुत्ते से तो सीख ही सकते हैं।
न्यूजीलैंड में एक लैब्रोडोर नस्ल के कुत्ते ने बिल्ली को बचाने के लिए रक्त दिया। आमतौर पर कुत्ते और बिल्ली के बीच कभी सामान्य रिश्ते नहीं देखे जाते हैं पर कुत्ते ने ऐसे समय में बिल्ली को खून दिया जब वो लगभग मरने ही वाली थी, पशु चिकित्सक का कहना है कि बिल्ली ने गलती से चूहे मारने की दवा खा ली थी, जिससे उसकी हालत एकदम खराब हो गयी थी। बिल्ली की मालकिन किम ने बताया कि रोरी (बिल्ली) की तबियत बिल्कुल बिगड़ती ही जा रही थी, हमारे पास बिल्कुल भी वक्त नहीं था कि हम एक बिल्ली का खून लें और उसे लैब में मैच करवाकर रोरी को दें तभी मैनें अपने दोस्त से बात की जिनके पास लैब्रोडोर प्रजाति का कुत्ता है।
उस कुत्ते के रक्त को टेस्ट करके बिल्ली को चढ़ाया गया और बिल्ली ठीक हो गयी। sabhar : jagaran.com

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42 साल पहले अंतरिक्ष में फटा था परमाणु बम, US की पोल खोलने वाले फैक्ट्स

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42 साल पहले अंतरिक्ष में फटा था परमाणु बम, US की पोल खोलने वाले फैक्ट्स

इन दिनों अमेरिका शटडाउन है। सभी गैरजरूरी सरकारी संस्थान बंद कर दिए गए हैं। लाखों लोगों को बिना सैलरी दिए छुट्टी पर भेज दिया गया। सरकार के पास अपने खर्चे पूरे करने के लिए पैसा नहीं है। ऐसे दौर में अमेरिका जाने की बात सोचना भी मुश्किल है।
एक दौर था, जब अमेरिकन ड्रीम का नारा युवाओं पर छाया रहता था। लोग वहां नौकरी और पढ़ाई करने के सपने देखते थे। लोगों को रेड इंडियंस की यह धरती स्वर्ग जैसी लगती थी। लेकिन मंदी की मार, आतंक के खिलाफ अघोषित युद्ध ने अमेरिका की कमर तोड़ दी। सरकार को अपने सरकारी संस्थान चलाने के बैलआउट पैकेज देने पड़े। विकास दर की गति काफी धीमी हो गई है।
हालांकि इसमें कोई दोराय नहीं कि अमेरिका जल्द ही इन परेशानियों से उबर जाएगा। फिर भी चीन और भारत से मिल रही चुनौती से अगले कुछ दशकों में पार पाना मुश्किल होगा। विशेषज्ञों की राय में तीन दशकों में चीनी अर्थव्यवस्था अमेरिकी अर्थव्यवस्था को पछाड़ सकती है।
अमेजिंग फैक्ट्स की इस सीरीज में हम आपको इस बार अमेरिका के कुछ दिलचस्प फैक्ट्स से रूबरू करवा रहे हैं.....

(FACT 1: 1962 में अमेरिका हाइड्रोजन बम अंतरिक्ष में फट गया था। यह हिरोशिमा पर गिराए गए बम से सौ गुना ज्यादा शक्तिशाली था।)

42 साल पहले अंतरिक्ष में फटा था परमाणु बम, US की पोल खोलने वाले फैक्ट्स
अमेरिकी नागरिक संसाधनों का अंधाधुंध इस्तेमाल करने के लिए पूरी दुनिया में बदनाम हैं। एक अमेरिकी नागरिक 32 केन्याई नागरिकों के बराबर संसाधनों को इस्तेमाल करता 
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आप भले ही मानें या न मानें। अगर आपकी पॉकेट में 10 डॉलर (6 हजार रुपए) हैं और आप पर किसी भी तरह का कर्ज न हो, तब आप अमेरिका के 25 फीसदी लोगों से ज्यादा संपन्नशाली होंगे।
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भले ही अमेरिका में काले-गोरे को लेकर लंबी लड़ाई चली हो, लेकिन आपको बता दें कि अमेरिका में पहला गुलामों का मालिक एक काला व्यक्ति ही था।

42 साल पहले अंतरिक्ष में फटा था परमाणु बम, US की पोल खोलने वाले फैक्ट्स
दुनिया का सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका एप्पल कंपनी  के आगे बेबस है। एप्पल कंपनी के पास अमेरिकी खजाने से भी ज्यादा पैसा है। वहीं, 40 फीसदी बच्चों का जन्म अमेरिका में बिन ब्याही लड़कियों द्वारा होता  है।
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आठ में से एक अमेरिकी मैक्डोनाल्ड में नौकरी करता है। वहीं, सात फीसदी अमेरिकी दावा करते हैं कि वे कभी नहीं नहाते।
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अमेरिका अपराध का घर माना जाता है। दुनिया में करीब 90 लाख अपराधी जेलों में मौजूद हैं। इसी का चौथाई हिस्सा यानी करीब 25 लाख अपराधी अमेरिका की जेलों में सड़ रहा है।
42 साल पहले अंतरिक्ष में फटा था परमाणु बम, US की पोल खोलने वाले फैक्ट्स
हर साल यहां 50 हजार मौतें दूसरों के सिगरेट के धुंए के संपर्क में आने से होती है। अमेरिका और यूरोप के कुछ हिस्सों में नाबालिगों को कानून में सिगरेट पीने की आजादी दी हुई है। बावजूद इसके सिगरेट खरीद नहीं सकते।
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अमेरिका में हर दिन 4 हजार नाबालिग अपनी पहली सिगरेट का कश लेते हैं। इनमें से एक हजार लोग सिगरेट को अपनी जिंदगी का अहम हिस्सा बना लेते हैं। हर साल पांच में से एक आदमी सिगरेट से मरता है।
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चिकन पूरी दुनिया में खाया जाता है। अमेरिका में हर साल आठ बिलियन चिकन की खपत होती है। वहीं, हर दिन 22 मिलियन चिकन की खपत पूरे अमेरिका में होती है।
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हर तीन में से एक अमेरिकी नागरिक मोटापे से शिकार है। वहीं, मेडिकल की गलतियां अमेरिका में 6वें नंबर की सबसे बड़ी समस्या है। इन गलतियों से कई मौतें हो जाती हैं।
42 साल पहले अंतरिक्ष में फटा था परमाणु बम, US की पोल खोलने वाले फैक्ट्स
महंगाई के जमाने में यहां एक घर की कीमत करोड़ों रुपए है, वहीं अमेरिका ने दुनिया की सबसे अच्छी डील की थी। उसने 1867 में रूस से अलास्का राज्य खरीदा था। वो भी सिर्फ 72 लाख रुपए में।
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अमेरिका में तेजी से नौकरी छोड़ना आम बात है। औसतन एक अमेरिकी मजदूर किसी भी जगह 4 साल 4 महीने से ज्यादा नहीं टिकता।
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यह आंकड़ा आपको चौंकाने के लिए काफी है कि अमेरिका में हर घंटे एक व्यक्ति की मौत शराब पीने से ही हो जाती है। वहीं, 20 और 30 के दशक में अमेरिकी सरकार द्वारा प्रतिबंधित जहरीली शराब पीने से दस हजार लोगों की मौत हो गई थी।
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चॉकलेट किसे पसंद नहीं है, लेकिन इस मामले में भी अमेरिकियों का भी जवाब नहीं है। अमेरिकी सामूहिक रूप से हर सेकंड में 100 पाउंड की चॉकलेट खा जाते हैं।
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अमेरिका और पिज्जा का संबंध भारत में समोसा के साथ आलू जैसा है। अमेरिका में हर दिन 100 एकड़ के बराबर पिज्जा अलग-अलग रेस्ट्रोरेंट में सर्व किया जाता है। sabhar : bhaskar.com





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