बुधवार, 2 अक्टूबर 2013
बिना ड्राइवर के चलेगी मर्सडीज की यह कार
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बिना ड्राइवर के चलने वाली कार! ऐसी कारें कभी-कभार फिल्मों में दिख जाती हैं। लेकिन अब यह हकीकत में सड़कों पर दौड़ती दिखेंगी। मर्सडीज की एक ऐसी कार आ रही है, जो बिना ड्राइवर के चलेगी। मसर्डीज एस-क्लास का लेटेस्ट वर्जन अगले महीने अमेरिका में बिक्री के लिए उपलब्ध होगा। इसकी कीमत करीब 92 हजार डॉलर होगी।
यह कार हाईवे या आम सड़कों पर खुद ही ब्रेक लगाने और एक्सेलेरेट करने में सक्षम है। यह सीधी या हल्के मोड़ वाली सड़क पर खुद ही स्टियरिंग भी मोड़ लेती है। सुरक्षा और कानून के लिहाज से इसमें बैठे शख्स को व्हील पर हाथ रखना जरूरी होता है। अगर हालात जटिल हो जाएं तो उनसे मुकाबला करने के लिए ड्राइवर को सतर्क भी रहना होगा।
फ्रैंकफुर्ट मोटर शो के दौरान पिछले हफ्ते इस कार को प्रदर्शित किया गया। दुनिया का यह सबसे बड़ा ऑटो शो 14 सितंबर से 22 सितंबर तक आम लोगों के लिए खुला है।
ऑटो शो के दौरान 70 से अधिक कारों को दुनिया के सामने पहली बार पेश किया गया। आइए, देखते हैं ऐसी ही चुनिंदा कुछ कारों की तस्वीरें...
sabhar : bhaskar.com
देखें भारत में लॉन्च हुई 3.1 करोड़ की इस कार के दिलकश नजारे
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अक्टूबर 02, 2013 in देखें भारत में लॉन्च हुई 3.1 करोड़ की इस कार के दिलकश नजारे

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नई दिल्ली : लग्जरी कार निर्माता बेंटले ने मंगलवार सुपर प्रीमियम सेडान कार फ्लाइंग स्पर को भारत में लॉन्च किया। इसकी कीमत करीब 3.1 करोड़ रुपए है।
कंपनी ने कहा कि वह भविष्य में एसयूवी सहित अपने सभी नए वैश्विक मॉडलों को भारतीय बाजार में पेश करेगी। कंपनी को भारत में इस साल अपनी बिक्री दहाई अंक में बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि, कंपनी ने बिक्री संबंधी आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए।
बेंटले के क्षेत्रीय निदेशक (भारत, दक्षिण अफ्रीका व पश्चिम एशिया) क्रिस बक्सटन ने बताया, ‘भारत बेंटले के लिए बहुत महत्वपूर्ण बाजार है। यह लग्जरी का हब है। हमें 2016-17 तक देश में सालाना सैकड़ों कारों की बिक्री होने की उम्मीद है।’ फ्लाइंग स्पर 6000 सीसी का इंजन लगा है। कंपनी का कहना है कि 6 लीटर इंजन से लैस नई फ्लाइंग स्पर, पुरानी कार से बहुत ज्यादा तेज और ताकतवर है। कंपनी ने इस लग्जरी कार में उन तमाम खूबियों को जोड़ा है, जो कि ग्राहक चाहता है। इसमें मौजूद 6 लीटर डब्लू 12 इंजन काफी दमदार है। इसी वजह से ये कार 0-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार को महज 3-6 सैकण्ड में ही हासिल कर लेती है।
200 किमी/घंटे की रफ्तार पर दौड़ने पर भी कार के अंदर किसी तरह का वायब्रेशन महसूस नहीं होगा। यह 8 स्पीड के साथ 4 व्हील ड्राइव कार है।
आगे की सीट पर टच स्क्रीन इन्फोटेनमेंट सिस्टम लगा है। इसमें नेविगेशन, ऑडियो, टेलीफोन जैसे सुविधाएं हैं। इसमें वाई-फाई एक्सिस हम है, जिससे आप अपने टेबलेट, लैपटॉप और मोबाइल को कनेक्ट कर सकते हो।
पिछली सिटों पर डीवीडी प्लेयर, वायरलैस हेडफोन और एलसीडी लगी हुई है। साथ ही इनमें टेबलेट, पीसी, म्यूजिक प्लेयर और मोबाइल कनेक्ट करने के लिए पोर्ट दिए गए हैं।
पिछली सीट पर बैठे लोगों के लिए एक और सुविधा है। यहां पर टच स्क्रीन रिमोट दिया गया है जिसमें क्लाइमेट कंट्रोल और मल्टीमीडिया कंट्रोलिंग दी गई है।
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मंगलवार, 1 अक्टूबर 2013
खतरे में है आपकी सेहत, जहरीली हो रही हैं हरी सब्जियां!
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अक्टूबर 01, 2013 in जहरीली हो रही हैं हरी सब्जियां!

कानपुर. मेडिकल साइंस में हरी सब्जियों को मानव शरीर के लिए सबसे उपयुक्त आहार माना जाता है। बाज़ार में बिक रही, हरी सब्जियां प्रोटीन और विटामिन युक्त होती हैं। यह दावा नहीं किया जा सकता कि यह सब्जियां प्रोटीन युक्त हैं या नहीं। खासकर कानपुर की मंडियों से सप्लाई की जा रही, सब्जियों पर तो बिल्कुल नहीं।
जी हां, यहां से जो सब्जिया सप्लाई की जा रही है। वह उपभोक्ताओं की सेहत से खिलवाड़ तो कर ही रही हैं साथ ही किसानों को भी भारी नुकसान पहुंचा रही है। कानपुर के जाजमऊ इलाके के दर्जनों गांवो में सब्जियों की खेती होती है। इनकी सिंचाई के लिए किसान टेनरी से निकलने वाले केमिकल युक्त पानी का इस्तेमाल करने पर मजबूर है। यह पानी इन सब्जियों को जहरीला बना रहे हैं।
यह इलाका चमड़े के कारोबार और टेनरियो के लिए पूरे भारत में जाना जाता है। यह टेनरियां अब जाजमऊ इलाके के दर्जनों गांवों के किसानों के लिए मुसीबत बनती जा रही है। इस इलाके में बसे ग्रामीण खेती पर ही निर्भर है। इसी खेती से यह किसान अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं।
पिछले कुछ सालों से इन इलाकों के किसान बेहद परेशान हैं। इनकी खेती को नुकसान हो रहा है। गांवो के किसानों की माने तो, खेतों में इस्तेमाल किए जा रहे पानी से चालीस फीसदी फसल खेतों में ही खराब हो जाती है। इस वजह से उन्हें हर सीजन में घाटा उठाना पड़ता है।
खेतों में हरी सब्जियों को देख कोई भी उसे ताज़ी और पौष्टिक समझ कर खरीदना चाहेगा। पर यह सब्जियां आपकी सेहत को बिगाड़ सकती है। इस बात का अंदाजा ना तो आप लगा सकते हैं और न ही कोई और। दरअसल इन सब्जियों की खेती के लिए टेनरियो से निकले पानी का इस्तेमाल किया जाता है। जी हां यह पानी जहरीला है और यह पानी नहर के बाकि पानी को भी जहरीला कर देता है। इस नहर के किनारे कई गांव है, सभी किसान इसी नहर के पानी के भरोसे खेती करते हैं।
वहां के किसानों की माने तो इस पानी से की गई खेती से उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ता है। इस पानी से की गई चालीस फीसदी के करीब फसल पहले से ही खराब हो जाती है। बाकि बची फसल से इनकी लागत भी नहीं निकल पाती। कुछ किसानों का आरोप है कि केमिकल युक्त पानी का इस्तेमाल होने से फसलों पर छिड़की जाने वाली कीटनाशक दवा का भी असर नहीं होता।
इन गांवों में होने वाली सब्जियों को कानपुर की विभिन्न मंडियों में सप्लाई किया जाता है। उपभोक्ता इन सब्जियों को हरी और ताज़ी समझ कर खरीदता है। वैसे अब उपभोक्ता भी मानते है कि बाज़ार में बिकने वाली हरी सब्जिया स्वादहीन हो चुकी हैं। इस तरह की सब्जियों में पौष्टिकता की मात्रा खतम हो चुकी है। इनके सेवन से मुख्य रुप से लीवर खराब होने के साथ चर्म रोग भी होता है।
सब्जी विक्रेता राजा यादव कि माने तो उनके पास जो सब्जियां किसान लेकर आते हैं वह किस पानी से धोई जाती है, या फिर उनकी सिंचाई कैसे की जाती है उन्हें क्या पता। किसान इसे हमलोगों को शुद्ध और ताज़ी कहकर दे जाते है और हम लोग इसको बेचने लगते है। sabhar : bhaskar.com
उसे असली महिलाओं से चिढ़ थी, इसीलिए बना बैठा डॉल से संबंध, देखें तस्वीरें
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अक्टूबर 01, 2013 in इसीलिए बना बैठा डॉल से संबंध, उसे असली महिलाओं से चिढ़ थी, देखें तस्वीरें
अमेरिका ने अभी शटडाउन की घोषणा कर दी है। लाखों लोगों को बिना सैलरी के नौकरी से छुट्टी दे दी जाएगी। ऐसे कठिन में दौर में कोई भी पुरुष दो बीवियों की तो सोच भी नहीं सकता है, लेकिन मिशिगन के रहने वाले डेवकेट ने पत्नी की लाख मनाही के बाद भी उसकी सौतन घर ले आए हैं। दरअसल 40 वर्षीय डेवकेट रोबोट फैन हैं और उन्हें डॉल के साथ रहना बहुत पसंद है। उन्हें यह इतना पसंद था कि उन्होंने डॉल से ही शादी कर ली थी, लेकिन इस सुखद प्रेम कहानी में अजीब मोड़ तब आया, जब डेवकेट अपनी पत्नी की सौत को घर ले आए।
डेवकेट (काल्पनिक नाम) का मानना है कि उन्हें ऑर्गेनिक वीमेन यानी असलियत की महिलाओं से चिढ़ है। असली महिलाएं कभी भी धोखा दे सकती हैं, लेकिन प्लास्टिक की बीवी और रखैल कभी भी छोड़ कर नहीं जाएंगी। पहली प्लास्टिक बीवी सिडोर कुरोनेको के बाद ऐलना वोस्ट्रीकोवा का आगमन हो चुका है। दोंनों महिलाओं के साथ मिशिगन के प्लैट में रहता है। ऐलना अब उनके साथ उनके ऑफिस जाती है।
डेवकेट (काल्पनिक नाम) का मानना है कि उन्हें ऑर्गेनिक वीमेन यानी असलियत की महिलाओं से चिढ़ है। असली महिलाएं कभी भी धोखा दे सकती हैं, लेकिन प्लास्टिक की बीवी और रखैल कभी भी छोड़ कर नहीं जाएंगी। पहली प्लास्टिक बीवी सिडोर कुरोनेको के बाद ऐलना वोस्ट्रीकोवा का आगमन हो चुका है। दोंनों महिलाओं के साथ मिशिगन के प्लैट में रहता है। ऐलना अब उनके साथ उनके ऑफिस जाती है।
बकौल डेवकेट, मैं इन प्लास्टिक की मूरतों से ज्यादा सहज होता हूं। पेशे से बतौर आईटी वर्कर डेवकेट आईडॉक्टर्स संगठन का सदस्य है। उसे टेक्नोसेक्शुअल भी कहा जाता है। इनका कहना है कि उन्हें रोबोट पसंद हैं। वह आपकी हर जरूरत को पूरा करते हैं और सार्थक रिश्ता बना सकते हैं। डेवकेट ने दोनों डॉल को दुनिया की मशहूर कंपनी रियल डॉल से छह हजार डॉलर में खरीदा था।
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सोमवार, 30 सितंबर 2013
ये हैं A से Z तक सेहत के लिए फायदेमंद 26 फ्रूट और हेल्थ ड्रिंक्स!
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सितंबर 30, 2013 in ये हैं A से Z तक सेहत के लिए फायदेमंद

बाजार में तरह-तरह के फ्रूट जूस और हेल्थ ड्रिंक्स उपलब्ध हैं। लेकिन कौन-से फ्रूट जूस से सेहत को क्या फायदा पहुंचता है, इसकी ए टू जैड गाइडबुक तैयार की गई है। इनको दिनचर्या में शामिल कर सकते हैं।
अगर आप रोजाना एक गिलास सेब का जूस पीते हैं, तो आप हमेशा स्वस्थ रहेंगे और बीमारियां आपसे कोसों दूर रहती हैं। एक गिलास ताजा सेब का जूस आपको भरपूर मात्रा में विटामिन 'ए' और 'सी' देता है। ध्यान रहे कि जूस निकालते वक्त सेब छिलका नहीं उतारना ताकि आपको पूरा पोषण मिल सके।
A : एपल (सेब) एपल जूस पीने से वजन तेजी से घटता है। कॉलेस्ट्रॉल का लेवल कम होता है। सांस की समस्याओं से राहत मिलती है। डायबिटीज़ का खतरा टलता है। एपल जूस पीने से दिमाग भी तेज़ होता है।
B: बीट (चुकंदर)
मीठे और जड़ों वाले चुकंदर का बना जूस या चुकंदर को ऑरेन्ज जूस में डालकर पी सकते हैं। इस जूस को पीने से ब्लड प्रैशर कंट्रोल में रहता है।
C: सिलैन्ट्रो (हरा धनिया)
सिलैन्ट्रो को खरबूजे के साथ मिलाकर पी सकते हैं। सिलैन्ट्रो में डी-टॉक्सिफाइंग प्रॉपर्टीज होती हैं जो त्वचा के लिए बेहद लाभदायक हैं।
D: डैंडीलियन ग्रीन्स (कुकरौंधा)
इसके पत्तों और जड़ों, दोनों का जूस बन सकता है। जैसे-जैसे पौधा बढ़ता है, इसका कड़वापन बढ़ने लगता है। इसलिए शहद डाल लें। इसे पीने से स्किन एलर्जी नहीं होती।
E: ईपाजोट (मैक्सिको में मिलने वाले एक बूटी):
इसे जूस में डालने से स्वाद कुछ खट्टा हो जाता है। इसे रोज़ाना पीने से पेट और फेफड़ों की बीमारियों की आशंका कम हो जाती है।
F: फैनल (सौंफ) ये खाने में मीठा होता है। खुशबू भी अच्छी होती है। इसे जूस में डालने से स्वाद बदल जाता है। फैनल में पत्ते ज्यादा होने से स्वाद में ज्यादा बदलाव आ जाता है।
G: जिंजर (अदरक): इसे जूस में डालने से सूदिंग इफेक्ट मिलता है, लेकिन छील कर डालें। इसका सेवन करने से शरीर के लिए न्यूट्रियंट्स को एब्जॉर्ब करना आसान हो जाता है। इसे खाने से पेट की परेशानियां कम होती हैं।
H: हनीडच्यू मैलन (खरबूजे की किस्म) इसकी खुशबू फूलों जैसी होती है। इसे पीने से शरीर को ताकत मिलती है। इसमें विटामिन-सी और बी६, पोटैशियम, फाइबर अधिक मात्रा में होता है। इससे ब्लड-प्रेशर नहीं बढ़ता।
I: इटेलियन स्वीट पैपर:
स्वीट पैपर जूस शरीर के लिए फायदेमंद है। कैंसर के पीड़ितों को स्वीट पैपर जूस पीना ही चाहिए। इसमें ३क् प्रकार के कैरेटनॉइड्स होते हैं। डायट में विटामिन-सी की मात्रा बढ़ाना चाहते हैं तो ये परफेक्ट ऑप्शन है।
J: हैलापीनो (तीखी या हरी मिर्च): इसके स्पेलिंग jalapeno होते हैं लेकिन उच्चरण हैलापीनो होता है। इसका जूस पीने से माइग्रेन की समस्या कम होने लगती है।
K: कैल (एक तरह की गोभी):
जूस में कैल की मात्रा 20 से 22 फीसदी ही डालें। इसका अर्दी फ्लेवर काफी तेज़ होता है। इसमें कैलोरी काफी कम और फाइबर ज्यादा होता है।
L: लैमन (नींबू): इसमें विटामिन-सी की मात्रा सबसे ज्यादा होती हैं। इसे पीने से हर तरह की समस्याओं से राहत मिलती है।
M: मिंट (पुदीना): पुदीना को जूस में डालकर पीने से पाचन शक्ति बढ़ती है। दर्द से राहत मिलती है। एक्ने भी ठीक होते हैं।
N: नस्टरशम (जलकुंभी, अमेरिकी पौधा): ये एक नेचुरल एंटीबायोटिक है। इसमें विटामिन-सी की मात्रा ज्यादा होती है। इसका जूस पीने से फ्लू और कोल्ड से राहत मिलती है। अधिक फायदे के लिए दिन में तीन-चार पत्ते खा लें।
O: ऑरेन्ज (संतरा):
रोज एक ग्लास ऑरेन्ज जूस पीने से कैंसर का खतरा टलता है। गुर्दे की बीमारियां नहीं होती हैं। हार्ट हेल्थ मजबूत होती है। कॉलेस्ट्र्ॉल लेवल कम होता है।
P; पाइनएपल (अननास):
ये स्वीट फ्रूट है। जूस के लिए ऐसा अननास चुनें जो बाहर से सख्त और अंदर से थोड़ा नर्म हो। इसमें विटामिन और मिनरल की मात्रा ज्यादा होती है। इसे पीने से हड्डियां मजबूत होती हैं।
Q: क्वेश्च प्लम (आलूबुखारा): इसका फ्लेवर खट्टा होता है। मध्यम आकार के प्लम में पोटेशियम की मात्रा 113 मिलिग्राम होती है। इससे गुर्दे की बीमारियां कम होती हैं।
R: रसबेरी: ये एक फ्रूट रिच डायट है। इसमें विटामिन-सी की मात्रा ज्यादा होने के कारण घाव जल्दी भरते हैं। इससे हॉरमोन्स का उत्पादन बढ़ता है।
S: समर स्क्वैश: माइल्ड फ्लेवर होने के कारण इसे पीने में मजा आता है। इसमें विटामिन-ए, बी6 और सी, मैगनेशियम, फाइबर, फोलेट, रिबोफ्लेविन, फॉस्फोरस, मैग्नेशियम की मात्रा ज्यादा होने के कारण शरीर काबरेहाइड्रेट्स और ग्लूकोस को तेज़ी से प्रॉसेस करता है।
T: टर्मरिक रूट (हल्दी की जड़)
टर्मरिक रूट से जूस को पीला रंग होता है। हफ्ते में तीन बार टर्मरिक वाला जूस पीने से हड्डियों को मजबूती मिलती है। ये एक एंटी-ऑक्सीडेंट है। कैंसर के पीड़ितों के लिए फायदेमंद है।
U: अगली टोमैटो : इसमें विटामिन, मिनरल और एंटी-ऑक्सीडेंट्स की मात्रा ज्यादा होती है। दिल की बीमारियां नहीं होती।
V: वियतनामी सिनमन (दालचीनी) ये पेट के लिए बेहद फायदेमंद है। जूस में इसे डालकर पीने से जुकाम और खांसी की आशंका काफी कम हो जाती है।
W: वॉटरमैलन (तरबूज) ये सभी जूस में सबसे रिफ्रेशिंग ड्रिंक है। इसे रोज़ पीने से चेहरे पर चमक आती है। पेट की परेशानियां नहीं होती है।
X:एक्स फैक्टर जूस के टेस्ट और फ्लेवर को बदलने के लिए कामू-कामू और गोजी बेरीज जैसे सप्लीमेंट्स डालें। ये सेहत के लिए बहुत फायदेमंद हैं।
Y: यम (जमीकंद) इसमें स्वीट पोटेटो की वेरायटी है। इसमें सिनमन और जिंजर डालने से तीखा और खट्टा टेस्ट आएगा।
Z: जूकीनी (तुरई जैसी एक सब्जी) अक्टूबर के महीने तक ज़ूकीनी का जूस पी सकते हैं। इसे पीने से कूल और रीफ्रेशिंग महसूस करते हैं। अगर कुछ अच्छा पीने का मन हो तो यही पीएं। SABHAR : BHASKAR.COM
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