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शुक्रवार, 30 अगस्त 2013

खारिज होने के डर से आसाराम ने वापस ली ट्रांजिट बेल की अर्जी, हो सकते हैं गिरफ्तार

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खारिज होने के डर से आसाराम ने वापस ली ट्रांजिट बेल की अर्जी, हो सकते हैं गिरफ्तार

जोधपुर। यौन शोषण के आरोपी कथावाचक आसाराम बापू को गुजरात हाई कोर्ट से झटका लगा है। आसाराम ने कोर्ट का रुख देख ट्रांजिट बेल की अर्जी वापस ले ली है। अब आसाराम के सिर पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है।आसाराम की तरफ से शुक्रवार को ही ट्रांजिट बेल की अर्जी दाखिल की गई। अदालत ने क‍हा कि आसाराम के खिलाफ गंभीर आरोप हैं और ऐसे में जमानत मिलना संभव नहीं है। अदालत ने यह भी कहा कि अगर अर्जी वापस नहीं ली जाती है तो यह खारिज कर दी जाएगी। आसाराम को शुक्रवार को जोधपुर में जांच अधिकारी एसीपी चंचल मिश्रा के समक्ष पेश होना है। लेकिन उन्‍होंने 15 दिन की मोहलत मांग ली है। पुलिस ने वक्‍त देने से इनकार कर दिया है। उनकी गिरफ्तारी के लिए एसीपी मिश्रा के नेतृत्व में तीन थानेदारों की टीम बना दी गई है। शनिवार सुबह आसाराम जहां भी होंगे, उन्हें गिरफ्तार करने के लिए टीम रवाना हो जाएगी। 
छिंदवाड़ा के गुरुकुल की वार्डन शिल्पी, संचालक शरदचंद्र और आसाराम के प्रमुख सेवादार शिवा को भी गुरुवार रात तक पुलिस के समक्ष पेश होना था। ये तीनों भी पेश नहीं हुए। पुलिस तीनों की गिरफ्तारी के लिए भी टीमें भेजेगी। आसाराम पर कार्रवाई को लेकर शुक्रवार को संसद में हंगामा हुआ। जदयू नेता शरद यादव ने तत्‍काल कार्रवाई की मांग की। 
पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि आसाराम पर यौन उत्पीडऩ का आरोप लगाने वाली छिंदवाड़ा गुरुकुल की नाबालिग छात्रा को कोई बीमारी नहीं थी, बल्कि पूरी साजिश उसका आसाराम के समक्ष समर्पण कराने की थी। अब तक की पुलिस जांच के मुताबिक गुरुकुल वार्डन ने बीमारी के बहाने ही उसके परिजनों को बुलाया था, मगर बाद में भूत-प्रेत का साया बताकर आसाराम से अनुष्ठान कराने का दबाव बनाया था।
खारिज होने के डर से आसाराम ने वापस ली ट्रांजिट बेल की अर्जी, हो सकते हैं गिरफ्तार
छिंदवाड़ा में छानबीन करने गई जोधपुर पुलिस टीम को उसकी बीमारी का कोई सबूत नहीं मिला और न ही गुरुकुल प्रबंधन ने उसके उपचार का कोई रिकॉर्ड दिया। खुद पीडि़ता व उसके परिजनों ने भी अपने बयान में यही कहा था कि उसे सिर्फ एक दिन चक्कर ही आया था। इसी के इलाज के बहाने आसाराम ने उसमें दैवीय शक्तियां समाहित करने की बात कहते हुए गलत हरकतें की थी।
जोधपुर कमिश्नरेट के डीसीपी अजयपाल लांबा ने बताया कि गुरुकुल में पीडि़ता के बीमार होने का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला है। ऐसी बातें सामने आई है कि यह हरकत समर्पण कराने जैसी कोशिश थी। आसाराम व उनके सहयोगियों के खिलाफ गुजरात के दो थानों में हत्या के प्रयास, मारपीट व जमीन विवाद के 16 मुकदमे दर्ज हैं, वह रिकॉर्ड भी मंगवाया गया है।
छिंदवाड़ा में गुरुकुल संचालक शरदचंद्र व वार्डन शिल्पी से पुलिस ने पीडि़ता की बीमारी के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि उसकी तबीयत कुछ दिनों से ठीक नहीं थी।
जांच दल ने छिंदवाड़ा में जब गुरुकुल में लड़की के हुए उपचार के बारे में पूछा और रिकॉर्ड मांगा तो वहां कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। यही बात छात्रा के साथ वाले विद्यार्थियों से भी पूछी तो उनसे भी पीडि़ता की बीमारी के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली। जांच में यह पता चला है कि बीमारी का बहाना बना कर गुरुकुल की छात्राओं को आसाराम को ‘समर्पण’ कराने की कोशिश की जाती है।
यही बात पीडि़ता ने पुलिस को दिए बयान में कही कि आसाराम ने उसे ‘समर्पण’ करने को कहा था। यह प्रलोभन भी दिया कि वे उसे आश्रम की प्रमुख सेवादारों में शामिल कर देंगे और उसमें दैवीय शक्ति पैदा कर देंगे।

गुरुवार को आसाराम ने भोपाल में भी चौंकाने वाले बयान दिए। गुरुवार को वे अपने समधी और भोपाल आश्रम के प्रमुख देव कृष्णानी के अंतिम दर्शन के लिए यहां आए थे। आते ही एयरपोर्ट पर उन्हें मीडिया ने घेर लिया। सवालों के जवाब में उन्होंने कहा- मुझ पर लगे आरोपों से मेरे समधी गहरे सदमे में थे। छिंदवाड़ा आश्रम में पुलिस ने अन्य लड़कियों पर दबाव बनाया कि वे मेरे खिलाफ बयान दें। इसकी जानकारी मेरे समधी को मिली तो वे टूट गए। इसी सदमे में उनकी जान चली गई। देव कृष्णानी आसाराम के बेटे नारायण सांई के ससुर थे। 
 
सवाल-क्या आपको लगता है ये साजिश है? 
 
आसाराम- लोग कहते हैं ये सब मैडम और उनके पुत्र के इशारे पर हो रहा है। (इस बीच कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने कहा है कि आसाराम इतने बड़े नहीं हैं कि नेहरू-गांधी परिवार उनके खिलाफ साजिश करे)। 
 
सवाल-पुलिस से कितना समय मांगा है? 
 
आसाराम- समय क्यों मांगूंगा? 
 
मैं तो तैयार हूं। जेल जाऊंगा तो वो भी मेरे लिए बैकुण्ठ है। (आसाराम ने जोधपुर पुलिस को पत्र देकर २० सितंबर तक का समय मांगा था। पुलिस इतना समय देने से इनकार कर चुकी है)। 
 
सवाल-आपने कहा था-जेल भेजेंगे तो अन्न-जल त्याग दूंगा! क्या सही है? 
 
आसाराम-मुझे जेल भेजने की साजिश है। वहां खाने-पीने में कुछ भी दिया जा सकता है। इसीलिए मैंने अपनी किसी नजदीकी से कहा था-जेल जाऊंगा तो अन्न-जल त्याग दूंगा। 
 
सवाल-उमा भारती ने तो आपका बचाव किया है? 
 
आसाराम-(तैश में) गलत बात है ये। मेरे साथ कोई नहीं है। आप भी नहीं। मत सताओ मुझे। (बाद में आश्रम में कहा-सभी पार्टियों में मेरे भक्त पार्षद, विधायक और मंत्री हैं।)
आसाराम के खिलाफ हाईकोर्ट में सुनवाई टली

आसाराम बापू और उनकी प्रवक्ता नीलम दुबे के खिलाफ राजस्थान हाईकोर्ट में दायर विविध आपराधिक याचिका की सुनवाई गुरुवार को टल गई। न्यायाधीश कंवलजीत सिंह अहलूवालिया की पीठ ने इस याचिका के साथ टीवी प्रोग्राम में दोनों आरोपियों के बयान की ट्रांस्क्रिप्ट पेश नहीं करने पर सुनवाई से इनकार कर दिया।
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि पिछले सप्ताह आसाराम व नीलम दुबे ने एक टीवी कार्यक्रम में भावनाएं आहत करने वाला बयान दिया।
मैडम और उनके बेटे के इशारे पर हो रहा है सब : आसाराम
नाबालिग बच्ची से यौन उत्पीडऩ के आरोपों में घिरे आसाराम ने गुरुवार को भोपाल में कहा कि उनके खिलाफ ये सब मैडम और उनके बेटे के इशारे पर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मैं कहता हूं कि करने दो, जो भी उन्हें करना है। लोग बताते हैं कि साढ़े चार साल से धर्मांतरण कराने वालों को इन्हीं का समर्थन है।
जब उनसे पूछा गया कि क्या वे सोनिया गांधी पर आरोप लगा रहे हैं तो उन्होंने कहा कि मैं किसी पर आरोप नहीं लगा रहा हूं। मैं तो वही कह रहा हूं, जो लोगों से सुना है।

इस दौरान आसाराम मीडिया पर भी नाराज हुए। आसाराम ने कहा कि वह यहां अपने समधी और भोपाल आश्रम के प्रमुख देव कृष्णानी के अंतिम दर्शन के लिए आए हैं। मुझ पर लगे आरोपों से मेरे समधी गहरे सदमे में थे। छिंदवाड़ा आश्रम पहुंचकर पुलिस ने अन्य लड़कियों पर भी दबाव बनाया। पुलिस ने लड़कियों से कहा कि वे भी ऐसा बयान दें कि जो उनकी सहेली के साथ हुआ, वो उनके साथ भी हुआ है। हालांकि लड़कियों ने इससे मना कर दिया। इस बात की जानकारी उनके शिष्य व समधी कृष्णानी को मिली तो वे टूट गए। इसी सदमे में उनकी जान चली गई।
 आसाराम के बेटे ने कहा- लड़की का दिमाग खराब है

दुष्कर्म के आरोपी आसाराम बापू के बचाव में उनके बेटे नारायण साईं ने गुरुवार को फिर विवादित बयान दिया। ससुर के अंतिम संस्‍कार में शामिल होने आए नारायण ने कहा कि आसाराम पर आरोप लगाने वाली लड़की पागल है। वह ढाई-ढाई घंटे तक नहाने के लिए बाथरूम में चली जाती थी और भी कई ऐसी हरकतें करती थी जो पागल ही कर सकता है।
नारायण ने बुधवार को भी राजकोट में प्रवचन के दौरान कहा था- आरोप लगाने वाली लड़की मानसिक रूप से कमजोर है। उसका दिमाग खराब है।
शिंदे से मिले गहलोत
इस मामले में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे से मुलाकात की। गहलोत ने उन्हें आसाराम के खिलाफ अब तक हुई कार्रवाई के बारे में बताया। बाद में गहलोत ने कहा कि कानून अपना काम कर रहा है। निष्पक्षता से जांच चल रही है।
मंगलवार को चला था सात घंटे का ड्रामा
इंदौर में जिस आश्रम में आसाराम रुके थे, वहां मंगलवार सुबह सवा सात बजे ही जोधपुर पुलिस आ धमकी थी। समन देने के लिए। द्वार पर पुलिस थी और भीतर आसाराम थे। पर 7 घंटे लग गए संत को समन थमाने में।
जैसे ही पुलिस पहुंची, समर्थकों ने उसे द्वार पर रोक दिया। कहा-बापू नहीं मिल सकते। समन भी नहीं लेंगे। पुलिस ने अपना रूप दिखाया। सारे समर्थक इधर-उधर हो गए। पुलिस परिसर में दाखिल। वहां पुलिस से कहा गया-बापू ध्यान में चले गए हैं। समन हमें दे दो। फिर आई कड़क आवाज़। ध्यान से निकलने दो। और चिंता मत करो। समन तामील कराना हमें आता है।

7 घंटे बाद की कहानी और भी अलग
पुलिस चली गई। आसाराम सामने आसन पर बैठे थे। और सामने समर्थकों का हुजूम। प्रवचन शुरू हुए। इतने में एक टीवी चैनल का संवाददाता आ पहुंचा। सवाल पर सवाल। आप पर गंभीर आरोप हैं। आसाराम ने कहा-सब झूठ है

जोधपुर की उस कुटिया में ऐसा कुछ हो ही नहीं सकता। आपस में बोलो तो वहां से दूर तक आवाज जाती है। मैंने डेढ़ घंटे मुंह दबाया और किसी को आवाज ही नहीं आई! ऐसे कैसे हो सकता है? मिला होगा। कई लोगों से मिलता हूं। लेकिन वैसा नहीं मिला, जैसा कहा जा रहा है। सवाल तीखे हुए। आपको गिरफ्तार किया जा सकता है? जवाब -7 नहीं, 17 साल के लिए जेल में डाल दो।

सांच को आंच नहीं। संवाददाता ने पूछा-आप खुद को निदरेष कैसे साबित करेंगे? भक्तों ने जयघोष शुरू किया। आसाराम ने कहा-थोड़ा कैमरा उधर भी घुमा दो। 

मुझे तो रोज 20 देश के लोग देखते और सुनते हैं। गुस्सा चेहरे पर साफ था। संवाददाता ने फिर सवाल किया। 
आसाराम ने कहा-अब जरा भक्तों से बात कर लूं। बोलने लगे- सुबह उठकर पानी पीना बहुत जरूरी है। सुबह 9 से 11 के बीच भोजन सर्वोत्तम। संवाददाता का सवाल-गुस्से के बावजूद हंसते हुए आसाराम ने भक्तों से कहा-रात को 1 से 3 बजे के बीच जागना खतरनाक है।
 खारिज होने के डर से आसाराम ने वापस ली ट्रांजिट बेल की अर्जी, हो सकते हैं गिरफ्तार

संवाददाता ने कहा-जवाब तो दीजिए। अनसुना करते हुए भक्तों से फिर कहा-टेंशन 3 प्रकार के होते हैं। शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक। संवाददाता ने फिर तेज आवाज में सवाल किया। आसाराम ने माइक से ही शुरू किया-ओम.ओम.ओम.। 

भक्त भी यही दोहराने लगे। संवाददाता ने फिर जवाब मांगा। आसाराम ने फिर कहा-हसंते रहिए। हंसने से ऊपर बताए सारे टेंशन भाग जाते हैं। फ्लाइट का टाइम हो गया है। चलो एयरपोर्ट। और आसाराम मुंबई होते हुए सूरत की फ्लाइट के लिए निकल गए। sabhar : bhaskar.com





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गुरुवार, 29 अगस्त 2013

खत्म हुआ कपूर खानदान का इंतजार, रणबीर कैटरीना की होगी सगाई!

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खत्म हुआ कपूर खानदान का इंतजार, रणबीर कैटरीना की होगी सगाई!

अभी तक तो सभी लोग बस इसी बात का इंतजार कर रहे थे कि कब कैटरीना कैफ और रणबीर कपूर अपने रिलेशनशिप को सबके सामने स्वीकार करेंगे। लेकिन यहां तो सीधे सगाई और शादी की बात होने लगी है।
 
इस कपल के बारे में लेटेस्ट खबर ये है कि ये दोनों रिलेशनशिप के स्टेटस से आगे बढ़ गए हैं और जल्दी ही सगाई करने वाले हैं।
 
एक एंटरटेनमेंट एंड लाइफस्टाइल वेबसाइड के मुताबिक रणबीर इन दिनों अपने कई करीबी दोस्तों और रिश्तेदारों से इस बारे में बात कर रहे हैं कि कपूर खानदान की बहू बनने के लिए कैटरीना कैफ कैसी रहेंगी? अगर ये सारे लोग कैट के लिए अच्छा रिस्पॉन्स देते हैं तो जल्दी ही ये दोनों सगाई कर लेगें।
 खत्म हुआ कपूर खानदान का इंतजार, रणबीर कैटरीना की होगी सगाई!

वैसे अगर रणबीर कैटरीना के रिलेशनशिप की बात की जाए तो जब से ये दोनों स्पेन के बीचेस पर छुट्टियां मना कर लौटे हैं, तब से फिल्म इंडस्ट्री और पूरी मीडिया में यही छाए हैं।
खत्म हुआ कपूर खानदान का इंतजार, रणबीर कैटरीना की होगी सगाई!

इनके वेकेशन्स की तस्वीरें इतनी वायरल हो गई थीं कि कैटरीना ने तो मीडिया को लेटर तक लिख दिया था कि उनकी निजी तस्वीरें ना दिखाई जाएं।

खत्म हुआ कपूर खानदान का इंतजार, रणबीर कैटरीना की होगी सगाई!

हालांकि कपूर परिवार के मुताबिक ये चीजें अब काफी पुरानी हो गई हैं और अब कैट और रणबीर अपना रिश्ता आगे बढ़ाने की सोच रहे हैं।

खत्म हुआ कपूर खानदान का इंतजार, रणबीर कैटरीना की होगी सगाई!

यहां तक कि रणबीर का मां भी कैटरीना को अपनी बहू बनते देखना चाहती हैं। उनकी तरफ से रणबीर को कैट के लिए ग्रीन सिग्नल मिल चुका है।
बताया ये जा रहा है कि 28 सितंबर को जब रणबीर का बर्थडे होगा तो रणबीर कैटरीना को प्रपोज करने वाले हैं। अगर कैटरीना इसके लिए हां बोल देती हैं तो जल्दी ही इन दोनों की सगाई भी हो जाएगी। इसके लिए रणबीर की तरफ से प्लानिंग अभी से शुरू हो गई है।

खत्म हुआ कपूर खानदान का इंतजार, रणबीर कैटरीना की होगी सगाई!
खैर, इनके रिश्ते में अब आहगे जो भी हो, रणबीर अपनी प्लेब्वॉय की इमेज के लिए तो फेमस हैं ही। लेकिन अब अगर वो कैट से शादी के बारे में सोच रहे हैं तो ये जरूर एक बड़ी खबर है।
खत्म हुआ कपूर खानदान का इंतजार, रणबीर कैटरीना की होगी सगाई!

अभी तक कैटरीना अपनी बहन की शादी की वजह से लंदन में व्यस्त थीं लेकिन बीती रात वो भी मुंबई वापस आ गई हैं।
खत्म हुआ कपूर खानदान का इंतजार, रणबीर कैटरीना की होगी सगाई!
वहीं दूसरी ओर रणबीर इन दिनों अपनी आगामी फिल्म 'बेशर्म' के प्रमोशन में व्यस्त हैं।तो इन दोनों स्टार्स के फैन्स के लिए अच्छी खबर यही है कि सितंबर में उन्हें गुड न्यूज मिल सकती है।






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ये है अमेरिका की असली ताकत, PIX देख मजबूरी में दबा लेंगे दांतों तले उंगलियां

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ये है अमेरिका की असली ताकत, PIX देख मजबूरी में दबा लेंगे दांतों तले उंगलियां


आधुनिकता के इस दौर में दुनियाभर के देश अपने आपको शक्तिशाली और समृद्ध बनाने के लिए जमकर प्रयोग कर रहे हैं। वे ऐसे प्रोजेक्ट पर पैसा लुटा रहे हैं जिनकी बदौलत दुनियाभर में उनकी ताकत और बढ़ सके। वे पहले से भी ज्यादा समृद्ध और आधुनिक हो जाएं और उनके यहां का बिजनेस और इन्फ्रास्ट्रक्चर को सुदृढ़ बन सके।  
 
इनमें प्रमुख रूप से अमेरिका और चीन ऐसे देश हैं जो अपने सरकारी खजाने से बेशुमार दौलत बड़े-बड़े प्रोजेक्ट पर खर्च कर रहे हैं। चलिए हम आपको दुनिया के  ऐसे इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट के बारे में बता रहे हैं जो कि दुनिया के सबसे महंगे प्रोजेक्ट में शुमार हैं। इनमें से कुछ पूरे हो चुके हैं और कुछ पर अभी काम चल रहा है। 






ये है अमेरिका की असली ताकत, अंबानी की दौलत से चार गुना ज्यादा है इसकी लागत

जेराल्ड आर फोर्ड क्लास एयरक्राफ्ट कैरियर
 
लागत- करीब 5476 करोड़ रुपए
 
द जेराल्ड आर फोर्ड क्लास एयरक्राफ्ट कैरिअर्स (सीवीएन 78) अमेरिकी नौसाना का नेक्स जनरेशन सुपर कैरिअर पोत होगा। इसका निर्माण कार्य २क्क्७ में शुरू हुआ। 2015 तक इसे तैयार करने की योजना है। यह पोत अत्याधुनिक तकनीक और उपकरणों से लेस रहेगा। यह न्यूक्लियर पॉवर एयरक्रॉफ्ट ले जाने में समक्ष है। फिलहाल यह अमेरिका के इकलौते न्यूक्लियर पॉवर एयरक्रॉफ्ट कैरियर शिप बिल्डिंग यार्ड में निर्माणाधीन है। इस प्रोजेक्ट के तहत अभी तीन पोत तैयार किया जा रहे हैं लेकिन आगामी समय में 11 पोत तैयार किए जाएंगे। 
 ये है अमेरिका की असली ताकत, अंबानी की दौलत से चार गुना ज्यादा है इसकी लागत

 बिग डिग, बोस्टन
 
लागत- करीब 98710 करोड़ रुपए
 
यह इंटरस्टेट टनल है। यह अमेरिकी शहर बोस्टन के बीचो बीच से गुजरती है। करीब 3.5 मील लंबी यह टनल दुनिया के सबसे महंगे हाईवे प्रोजेक्ट में शुमार है। इस प्रोजेक्ट से जुड़े कई क्रिमिनल रिकार्ड भी हैं। जनवरी 2006 में यह प्रोजेक्ट पूरा हो गया था। यह बेहद मुश्किल टन हाइवे प्रोजेक्ट की गिनती में आता है। 


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हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम क्यों गिराए गए थे?

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हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम क्यों गिराए गए थे?

जापान अपने अंतर्राष्ट्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर दुनिया भर में परमाणु हथियारों के उन्मूलन के लिए संघर्ष करेगा। यह बात जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने 6 अगस्त को हिरोशिमा पर अमरीकी परमाणु बमबारी की 68-वीं बरसी पर आयोजित एक स्मृति समारोह में बोलते हुए कही।

यह लक्ष्य तो बहुत ही अच्छा है, लेकिन इसे हासिल करने की संभावना लगभग नहीं के बराबर है। इसका कारण यह है कि परमाणु हथियारों के मामले में भी राजनीति की जा रही है। अगर ऐसी स्थिति से निपटना है तो सबसे पहले मानवजाति को इस सवाल का जवाब बड़ी ही ईमानदारी से देना होगा कि हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराने की ज़रूरत क्या थी। इस संबंध में मास्को स्थित अंतर्राष्ट्रीय संबंध संस्थान के एक वरिष्ठ शोधकर्ता आन्द्रेय इवानोव ने कहा-
यह बात तो निर्विवाद है कि अमरीकियों द्वारा हिरोशिमा और नागासाकी पर की गई परमाणु बमबारी जापानी जनता के लिए एक भयानक त्रासदी थी। उस परमाणु बमबारी के कारण आज भी कई लोग बीमार होते हैं और मर जाते हैं। आज भी इस सवाल पर बहस जारी है कि जापान पर की गई परमाणु बमबारी कहाँ तक जायज़ थी। अमरीका में आज भी इसी बात का प्रचार किया जाता है कि हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराने के बाद ही जापान आत्मसमर्पण करने पर मज़बूर हुआ था और इसकी बदौलत ही लाखों अमरीकी, ब्रिटिश, सोवियत, चीनीऔर जापानी सैनिकों की जानें बच गई थीं। जहाँ तक कि सन् 2007 में जापान के रक्षामंत्री फ़ुमियो कियुमा ने तो यह भी कह दिया था कि हिरोशिमा और नागासाकी पर की गई परमाणु बमबारी त्रासदिक तो थी लेकिन इसके बिना कोई दूसरा विकल्प भी तो मौजूद नहीं था। इस प्रकार, पश्चिम में आज भी हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बमबारी की आवश्यकता का विचार प्रमुख धारणा बना हुआ है और वहाँ इस बमबारी को न्यायोचित ठहराया जाता है।
आन्द्रेय इवानोव ने याद दिलाया है कि उस समय ख़ुद ब्रिटिश प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल ने कहा था कि अमरीका की परमाणु बमबारी से नहीं, बल्कि जापान के विरुद्ध युद्ध में सोवियत संघ के शामिल होने के बाद ही जापान आत्मसमर्पण करने पर मज़बूर हुआ था। रूस में तो इस बात को बच्चा-बच्चा जानता है लेकिन पश्चिम में इसे भुला दिया गया है। इसलिए कई पश्चिमी पाठक एक ब्रिटिश इतिहासकार, वार्ड विल्सन के लेख "स्टालिन ने वह काम चार दिनों में कर दिखाया जो अमरीका चार साल में भी नहीं कर पाया था" को पढ़कर बहुत हैरान हुए हैं। वार्ड विल्सन ही "परमाणु हथियारों के बारे में पाँच भ्रम" शीर्षक से एक पुस्तक लिखी थी। लेखक ने इस अवधारणा को ग़लत सिद्ध किया है कि परमाणु बमबारी के कारण ही प्रशांत महासागर में युद्ध का अंत हुआ था। परमाणु बमबारी से पहले भी "उड़ते किले" नामक अमरीकी विमानों ने बमबारी करके दर्जनों जापानी शहरों का नामो-निशान मिटा दिया था। इन हमलों में लाखों लोग मारे गए थे। लेकिन उस समय की जापानी आलाकमान का कहना था कि ऐसे हमलों की बदौलत पूरा राष्ट्र एकजुट हो रहा है और दुश्मन का मुकाबला कर रहा है। इसलिए जब 6 अगस्त 1945 को हिरोशिमा पर परमाणू बम गिराया गया था तो जापानी नेताओं को बहुत परेशानी नहीं हुई थी। 9 अगस्त को नागासाकी पर परमाणु बम गिराए जाने के बाद भी जापानी नेताओं के रवैये में कोई बदलाव नहीं आया था। उनके रवैये में बदलाव तब ही आया था जब उसी दिन जापान के प्रधानमंत्री कन्तारो सुज़ुकी ने एक आपात बैठक में कहा था कि "आज सुबह सोवियत संघ के द्वारा युद्ध में शामिल हो जाने से हम एक कठिन स्थिति में फंस गए हैं और अब इस युद्ध को जारी रखना असंभव है"।
वास्तव में, जब सोवियत सैनिक मंचूरिया में बड़ी तेज़ी से आगे बढ़े थे तो तब ही जापान के सम्राट हिरोहितो 14 अगस्त को आत्मसमर्पण संबंधी एक अध्यादेश पर हस्ताक्षर करने पर मज़बूर हुए थे। केवल सोवियत सेना के निर्णायक हमले के कारण ही मंचूरिया और कोरिया में जापानी सशस्त्र बलों को पराजय का मुँह देखना पड़ा था और 19 अगस्त 1945 को जापान ने बिना किसी शर्त के आत्मसमर्पण कर दिया था। वास्तव में, हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बमबारी ने नहीं, जिसने कि हज़ारों निर्दोष जापानी नागरिकों की जानें ले ली थीं, बल्कि सोवियत सेना की इस कार्रवाई ने ही युद्ध का अंत किया था। इस परमाणु दुःस्वप्न के बिना भी युद्ध का अंत ऐसा ही होना था। लेकिन अमरीका इस "परमाणु डण्डे" से सोवियत संघ पर दबाव डालना चाहता था।
लगातार परमाणु सर्वनाश के ख़तरे के डर के माहौल में जीना बहुत ही असहज होता है। लेकिन हिरोशिमा और नागासाकी की त्रासदी को भूल जाने से ही दुनिया को परमाणु हथियारों से मुक्त नहीं कराया जा सकता है। इस सिलसिले में आन्द्रेय इवानोव ने कहा-
दुर्भाग्य से, हम देख रहे हैं कि आज कई देशों के लिए परमाणु हथियार ही उनके अस्तित्व की एक विश्वसनीय गारंटी हैं। उदाहरण के लिए, इज़राइल ऐसा ही समझता है। लेकिन, इज़राइल के परमाणु हथियारों की मौजूदगी पर अमरीका को कोई आपत्ति नहीं है पर प्योंगयांग के संबंध में उसका रवैया इसके बिलकुल उलट है। उत्तरी कोरिया के लिए भी मिसाइलें और परमाणु हथियार उसकी सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं। वाशिंगटन एक के बाद एक संप्रभु देशों में सत्ता परिवर्तन करवा रहा है, लेकिन प्योंगयांग को इस बात की कोई गारंटी देने के लिए तैयार नहीं है कि वहाँ भी ऐसा नहीं किया जाएगा। ईरान की स्थिति भी ऐसी ही है।
इससे यही निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि अगर कई देशों को बाहरी हमलों के विरुद्ध कोई अन्य विश्वसनीय गारंटी नहीं दी जाएगी तो वे परमाणु हथियार प्राप्त करने के लिए प्रयत्नशील रहेंगे और ऐसी स्थिति में दुनिया को परमाणु हथियारों से मुक्त कराने का सपना कभी साकार नहीं हो सकता है। sabhar : http://hindi.ruvr.ru
और पढ़ें: http://hindi.ruvr.ru/2013_08_06/hiroshima-nagasaki-parmanu/

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यूराल पर्वत की तलहटी की विचित्र यात्रा

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यूराल पर्वत की तलहटी की विचित्र यात्रा

रूस के यूराल पहाड़ों की तलहटी में मलियोब्का नामक एक गाँव बसा हुआ है। आजकल वहाँ पर्यटकों की ख़ूब रौनक लगी रहती है। उफो विशेषज्ञों ने इस इलाके को “मलियोब्का त्रिकोण” का नाम दिया हुआ है।

इस "विषम" क्षेत्र में लगातार रहस्यमयी घटनाएं घटती रहती हैं, और कोई भी नहीं बता सकता है कि ये घटनाएं क्यों घटती हैं। यही कारण है कि दुनिया के कोने-कोने से लोग यहाँ आते हैं और वे इस उम्मीद से यहाँ आते हैं कि शायद परग्रह-वासियों से उनकी मुलाकात हो सके।
इस इलाके में पहुँचना कोई आसान काम नहीं है। यहाँ सड़कें नहीं हैं। यहाँ जंगलों के बीचों-बीच गुज़रना पड़ता है। वाहन कीचड़ में फंस जाते हैं। वीडियो कैमरे बंद हो जाते हैं। झाड़ियों में से दूधिया रोशनी निकलती दिखाई देती है मानो धरती के गर्भ से किरणें निकल रही हों। आकाश में आग के गोले उड़ते दिखाई देते हैं।
अचानक पेड़ों की चोटियों से ऊपर आकाश में विशाल मानव आकृतियां दिखाई देने लगती हैं। गाइड पर्यटकों को सलाह देता है कि अगर किसी को ठंड लगती है तो वे गुनगुने भोज वृक्षों से चिपक जाएँ को क्योंकि ये वृक्ष ठंड के मौसम में भी गर्मी देते हैं। इस विचित्र जगह का सबसे पहले एक भूविज्ञानी एमिल बचूरिन ने पता लगाया था। बाद में, एक दिन रहस्यमयी परिस्थितियों में अपने घर में ही उनकी जलकर मृत्यु हो गई थी। अपने जीवनकाल में एक बार उन्होंने बताया था कि मलियोब्का त्रिकोण में परग्रह-वासियों से उनकी मुलाकात हुई थी। उन्होंने बताया था-
मैंने आकाश में बादलों के बीचों-बीच नीले-बैंगनी रंग की चमकती हुई कोई चीज़ देखी। वह बड़ी तेज़गति से नीचे उतर रही थी। जब वह ज़मीन की सतह से टकराई तो उसने एक चमकदार गोलार्द्ध का रूप धारण कर लिया। वह चलती-चलती गाँव की ओर बढ़ने लगी। अब तक वह एक गुंबद में बदल गई थी। मैंने इस जगह को याद कर लिया और अगले दिन वहाँ पहुँच गया। रात को कुछ हिमपात हुआ था। मैंने उस जगह पर एक गोल दायरा देखा। वहाँ घास दबी हुई थी। और तापमान शून्य से नीचे होने के बावजूद गोल दायरे के केंद्र से भाप निकल रही थी।
अब इस क्षेत्र में घटी घटनाओं का उल्लेख न केवल रूस में बल्कि विदेशों में भी किया जाता है। जापान, अमरीका, इंग्लैंड, कनाडा, इटली और अन्य देशों की उफो पत्रिकाओं में मलियोब्का त्रिकोण का हवाला दिया जाता है। शोधकर्ताओं ने इस क्षेत्र में ऐसे लगभग चालीस स्थान खोज डाले हैं जहाँ समय भी अपनी गति बदल लेता है। चाबी वाली यांत्रिक घड़ियाँ दिन में कुछ घंटे पीछे चलने लगती हैं और इलेक्ट्रॉनिक घड़ियों पर केवल शून्य दिखाई देता है या फिर बड़ी अजीब-सी संख्या दिखाई देने लगती है। हालांकि, भूभौतिकीविदों को इन घटनाओं में कोई रहस्य दिखाई नहीं देता। उनका कहना है कि यहाँ की चुंबकीय विसंगति और भूमि संरचना की क्रस्टल-गति के कारण ही ऐसी घटनाएं घट रही हैं। बात दरअसल यह है कि इस इलाके में भूमि के नीचे कम गहराई पर ही गैस का एक भंडार मौजूद है। गर्मियों में यहाँ कुछ स्थानों पर दरारें पड़ जाती हैं और इन दरारों के ज़रिए गैस बाहर निकल आती है। इसलिए वहाँ आनेवाले किसी भी व्यक्ति पर इस मादक गैस का असर हो जाता है। “यहाँ शांति और खुशी की भावनाओं का अनुभव होता है। जिस किसी बात की समझ नहीं आती, यहाँ आकर उसका समाधान भी उपलब्ध हो जाता है।” इस प्रकार की कई टिप्पियाँ वेबसाइट molebka.ru पर छपी हुई हैं। इस सिलसिले में एक स्थानीय खोजकर्ता वालेरी यकीमोव ने कहा-
दुनिया के कोने-कोने से यात्री यहाँ आते हैं। हमारे यहाँ बहरीन से भी कुछ मेहमान आए थे। इस अरब देश की एक महिला नेसंयोग से ही हमारी वेबसाइट देख ली। इस साइट पर छपे चित्रों को देखते ही वह इतनी आकर्षित हुईं कि उनके साथ एक पूरा ग्रुप यहाँ पहुँच गया। इन लोगों ने पूरे बीस दिन यहाँ बिताए।
मलियोब्का त्रिकोण की यात्रा बहुत सस्ती है। इसके आयोजकों के अनुसार, अगर कोई टेंट आदि आपने साथ लेकर यहाँ की यात्रा पैदल करता है तो उससे एक पैसा भी नहीं लिया जाता है। केवल भोजन की लागत ही वसूल की जाती है। लेकिन यदि कोई यात्री कारों और स्नोमोबाइल की सेवाएं लेनी चाहता है तो उससे भी केवल एक सौ डॉलर ही वसूल किए जाते हैं sabhar :http://hindi.ruvr.ru
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आ के फिर ना जायेगी जवानी

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स्रोत फोटो : गूगल 
आ के  फिर ना जायेगी जवानी  जवानी जो तीनो पड़ाव मे मे सबसे  लुभावनी है  | कब सरक जाती है पता नहीं चलता  मगर ईधर पश्चिम  देशो मे  कयी ऐसी चौकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है | जो आई जवानी के वापस न जाने की बात कही है, यानी की सदाबहार जवानी का दावा  इस संदर्भ मे पिछले दिनो हावर्ड विश्विद्यालय से आई रिपोर्ट अपने आप मे पहली रिपोर्ट कही जा सकती है | जो जवानी की चाभी कही जाने वाली टेलोमियर्स को राह पे आने मे सफल हुई है |

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स्रोत फोटो : गूगल 
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 स्रोत फोटो : गूगल 

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      साभार : हिंदुस्तान दैनिक 

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कैमरे के सामने आई युवती, दिया जवाब, कैसे बीते आसाराम के वो 7 घंटे!

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कैमरे के सामने आई युवती, दिया जवाब, कैसे बीते आसाराम के वो 7 घंटे!

इंदौर. पुलिस चली गई। आसाराम सामने आसन पर बैठे थे। सामने समर्थकों का हुजूम। प्रवचन शुरू हुए। इतने में एक टीवी चैनल का संवाददाता आ पहुंचा। सवाल पर सवाल। आप पर गंभीर आरोप हैं। आसाराम ने कहा - सब झूठ है। जोधपुर की उस कुटिया में ऐसा कुछ हो ही नहीं सकता। आपस में बोलो तो वहां से दूर तक आवाज जाती है। मैंने डेढ़ घंटे मुंह दबाया और किसी को आवाज ही नहीं आई! ऐसे कैसे हो सकता है? मिला होगा। कई लोगों से मिलता हूं। लेकिन वैसा नहीं मिला, जैसा कहा जा रहा है। सवाल तीखे हुए। आपको गिरफ्तार किया जा सकता है? जवाब - 7 नहीं, 17 साल के लिए जेल में डाल दो। सांच को आंच नहीं। संवाददाता ने पूछा - आप खुद को निर्दोष कैसे साबित करेंगे? भक्तों ने जयघोष शुरू किया। आसाराम ने कहा-थोड़ा कैमरा उधर भी घुमा दो। मुझे तो रोज 20 देश के लोग देखते और सुनते हैं। गुस्सा चेहरे पर साफ था। संवाददाता ने फिर सवाल किया। आसाराम ने कहा-अब जरा भक्तों से बात कर लो। बोलने लगे- सुबह उठकर पानी पीना बहुत जरूरी है। सुबह 9 से 12 के बीच भोजन सर्वोत्तम। संवाददाता का सवाल-गुस्से के बावजूद हंसते हुए आसाराम ने भक्तों से कहा-रात को 1 से 3 बजे के बीच जागना खतरनाक है। संवाददाता ने कहा-जवाब तो दीजिए। अनसुना करते हुए भक्तों से फिर कहा-टेंशन 3 प्रकार के होते हैं। शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक। संवाददाता ने फिर तेज आवाज में सवाल किया। आसाराम ने माइक से ही शुरू किया-ओम..ओम..ओम..। भक्त भी यही दोहराने लगे। संवाददाता ने फिर जवाब मांगा। आसाराम ने फिर कहा-हसंते रहिए। हंसने से ऊपर बताए सारे टेंशन भाग जाते हैं। फ्लाइट का टाइम हो गया है। चलो एयरपोर्ट। और आसाराम मुंबई होते हुए सूरत की फ्लाइट के लिए निकल गए।
 नाबालिग किशोरी के यौन शोषण के मामले में मंगलवार सुबह जोधपुर पुलिस का दल खंडवा रोड स्थित आसाराम आश्रम में पहुंचा। पुलिस दल को पहले आश्रम में दाखिल होने से ही रोक दिया गया। जब पुलिस वाले अंदर पहुंचे तो आसाराम योग कर रहे थे। बाद में ध्यान में लीन हो गए।
कैमरे के सामने आई युवती, दिया जवाब, कैसे बीते आसाराम के वो 7 घंटे!

ऐसे चला पूरा घटनाक्रम
 - सुबह सवा सात बजे जोधपुर पुलिस के सब इंस्पेक्टर भंवरसिंह और हेड कांस्टेबल सुरेंद्रसिंह नोटिस लेकर खंडवा रोड स्थित आश्रम पहुंचे।
 - पुलिस को देख सेवादारों ने आश्रम का मुख्यद्वार बंद रखते हुए पुलिस को अंदर जाने से मना कर दिया।
 - जोधपुर पुलिस करीब आधे घंटे तक आश्रम के बाहर ही खड़ी रही।
 - सुबह 8 बजे भंवरकुआं थाने से टीआई अशोक तिवारी पुलिस दल के साथ आश्रम पहुंचे।
 - कुछ देर तक बातचीत के बाद टीआई ने जोधपुर पुलिस के जवानों को अंदर दाखिल करवाया। करीब आधे घंटे तक आश्रम के भीतर पुलिस से न ही किसी ने बात की और न ही कोई नोटिस लेने आया। वे यहां इंतजार करते रहे।
 - काफी देत तक इंतजार के बाद करीब 8.30 बजे पुलिसवालों को आसाराम के सेवादारों ने बापू के योग में बैठे होने की जानकारी दी।
 - सुबह नौ बजे आसाराम की ओर से एक वकील ने जोधपुर पुलिस से चर्चा की।
 - सवा नौ बजे पुलिस को सचिव ने जानकारी दी कि बापू ध्यान में लीन हो गए हैं।
 - साढ़े 10 बजे के करीब इंदौर पुलिस आश्रम से बाहर आ गई, जबकि जोधपुर पुलिस वहीं बापू के बाहर आने का इंतजार करती रही।
 - दोपहर साढ़े बारह बजे के करीब विधायक रमेश मेंदोला कुछ लोगों के साथ आश्रम पहुंचे।
 - दोपहर करीब एक बजे बजे जोधपुर पुलिस ने नोटिस तामील करवाया। इसके बाद पुलिस जवान आश्रम से बाहर आ गए।
 - दोपहर करीब चार बजे आसाराम ने चर्चा के लिए मीडिया को आश्रम में बुलाया।
 - सफाई देने के बाद करीब सवा चार बजे मीडिया के सामने एक युवती आई, जिसका परिचय पीडि़ता की सहेली के रूप में करवाया गया। युवती ने बापू के बचाव में मीडिया से बातें की।
 - इसके बाद बापू आश्रम से निकलकर सीधे एयरपोर्ट पहुंचे।
कैमरे के सामने आई युवती, दिया जवाब, कैसे बीते आसाराम के वो 7 घंटे!

 आश्रम वालों ने पीडि़ता की कथित सहेली से कहलवाया- सब साजिश है।
 आसाराम के सत्संग के बाद आश्रम से जुड़े पदाधिकारी एक युवती को मीडिया के सामने लाए। युवती ने कहा-मैं पीडि़ता (जिसने दुष्कर्म का आरोप लगाया है) की सहेली हूं। पिछले साल हम दोनों आसाराम बापू के छिंदवाड़ा आश्रम में साथ-साथ रहते थे। ताजा मामला सामने आया तो दो दिन पहले मैंने उससे फोन पर बात की। उसने कहा कि माता-पिता के दबाव में उसने आसाराम बापू पर दुष्कर्म का झूठा आरोप लगाया है। युवती से जब मीडिया ने नाम पूछा तो उसने नाम बताने से इनकार किया। हालांकि, आश्रम से जुड़े लोगों का कहना है कि उसका नाम अश्विनी है। sabhar : bhaskar.com


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जब-जब हिन्दुस्तान में महंगा होता पेट्रोल-डीजल, यहां लोग मनाते हैं ईद-दिवाली

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जब-जब हिन्दुस्तान में महंगा होता पेट्रोल-डीजल, यहां लोग मनाते हैं ईद-दिवाली

डॉलर के लगातार आसमान पर पहुंचने के चलते अब देश में डीजल और पेट्रोल की कीमतें 5 रुपए तक बढ़ाए जाने की बात होने लगी है। सरकार इसके पीछे तर्क दे रही है कि कंपनियों को नुकसान हो रहा है। लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि आखिर ये कंपनियां हैं कौन, हर बार जिनका हवाला देकर तेल के दाम बढ़ा दिए जाते हैं। 
 
दिलचस्प है कि दुनियाभर में तेल कंपनियों की अलग ही धाक है। इनके मुनाफों के बारे में सुनोगे तो आपके होश उड़ जाएंगे। भारत की प्रमुख तेल कंपनियों के बारे में तो आप जानते ही होंगे। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ऐसी कौनसी तेल कंपनियां हैं जो दुनियाभर में अपने कारोबार का सिक्का जमा चुकी हैं।
जब-जब हिन्दुस्तान में महंगा होता पेट्रोल-डीजल, यहां लोग मनाते हैं ईद-दिवाली

एक्सॉन
यह अमेरिकी तेल कंपनी दुनिया की टॉप तेल कंपनियों में पहले नंबर पर है।
एसेट्स- 331 बिलियन डॉलर
रेवेन्यू- 434 बिलियन डॉलर
प्रॉफिट- 41 बिलियन डॉलर
पूर्व रैंक- 1
जब-जब हिन्दुस्तान में महंगा होता पेट्रोल-डीजल, यहां लोग मनाते हैं ईद-दिवाली
शेल
नीदरलैंड की यह कंपनी दूसरे स्थान पर है। इसका कारोबार दुनियाभर में फैला हुआ है।
ऐसेट्स- 345 बिलियन डॉलर
रेवेन्यू- 470 बिलियन डॉलर
प्रॉफिट- 31 बिलियन डॉलर
पूर्व रैंक- 6
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शेवरॉन
अमेरिका की यह कंपनी दुनिया में तीसरे स्थान पर है।
ऐसेट्स- 209 बिलियन डॉलर
रेवेन्यू- 236 बिलियन डॉलर
प्रॉफिट- 27 बिलियन डॉलर
पूर्व रैंक- 3

जब-जब हिन्दुस्तान में महंगा होता पेट्रोल-डीजल, यहां लोग मनाते हैं ईद-दिवाली

बीपी
यह ब्रिटिश कंपनी दुनिया में चौथे स्थान पर है।
ऐसेट्स- 293 बिलियन डॉलर
रेवेन्यू- 376 बिलियन डॉलर
प्रॉफिट- 26 बिलियन डॉलर
पूर्व रैंक- 118

जब-जब हिन्दुस्तान में महंगा होता पेट्रोल-डीजल, यहां लोग मनाते हैं ईद-दिवाली

गेजप्रॉम
यह रशियन कंपनी दुनिया में 5वें स्थान पर है।
ऐसेट्स- 328 बिलियन
रेवेन्यू- 139 बिलियन
प्रॉफिट- 39 बिलियन
पूर्व रैंक- 3
जब-जब हिन्दुस्तान में महंगा होता पेट्रोल-डीजल, यहां लोग मनाते हैं ईद-दिवाली

स्टेटॉयल
नार्वे की यह कंपनी दुनिया में 6वें स्थान पर है।
ऐसेट्स- 129 बिलियन डॉलर
रेवेन्यू- 108 बिलियन डॉलर
प्रॉफिट- 13 बिलियन डॉलर
पूर्व रैंक- 11

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टोटल
यह फ्रांसीसी कंपनी दुनिया में 7वें स्थान पर है।
ऐसेट्स- 205 बिलियन डॉलर
रेवेन्यू- 209 बिलियन डॉलर
प्रॉफिट- 15 बिलियन डॉलर
पूर्व रैंक- 5

जब-जब हिन्दुस्तान में महंगा होता पेट्रोल-डीजल, यहां लोग मनाते हैं ईद-दिवाली

कोनोको फिलिप्स
यह ब्रिटिश कंपनी दुनिया में 8वें नंबर पर है।
ऐसेट्स- 153 बिलियन डॉलर
रेवेन्यू- 235 बिलियन डॉलर
प्रॉफिट- 12 बिलियन डॉलर
पूर्व रैंक- 7
जब-जब हिन्दुस्तान में महंगा होता पेट्रोल-डीजल, यहां लोग मनाते हैं ईद-दिवाली
पेट्रो चाइना
यह चाइनीस कंपनी दुनिया में 9वें नंबर पर है।
ऐसेट्स- 301 बिलियन डॉलर
रेवेन्यू- 310 बिलियन डॉलर
प्रॉफिट- 21 बिलियन डॉलर
पूर्व रैंक- 4                                                        sabhar : bhaskar.com



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बुधवार, 28 अगस्त 2013

कर्ज में डूबे अमेरिका के पास नहीं हैं वेतन तक के पैसे, बचेगा सिर्फ चार दिन का खर्च

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कर्ज में डूबे अमेरिका के पास नहीं हैं वेतन तक के पैसे, बचेगा सिर्फ चार दिन का खर्च

अमेरिका की हालत खस्‍ता है। दुनिया का सबसे ताकतवर मुल्‍क गहरे वित्तीय संकट की ओर बढ़ रहा है। मध्य अक्टूबर तक उसके पास केवल तीन-चार दिन के खर्च के लिए 50 अरब डॉलर (लगभग 3.31 लाख करोड़ रुपए) का कैश ही बचेगा। इसके बाद वह अपने सैनिकों को न तो वेतन दे पाएगा और न लोगों को सामाजिक सुरक्षा के मद में दी जाने वाली रकम।
 
 
ओबामा प्रशासन ने सोमवार को साफ तौर पर आर्थिक संकट की बात स्वीकार की। साथ ही कहा कि देश अब और ज्यादा कर्ज लेने की स्थिति में भी नहीं है। उस पर पहले से 16.7 लाख करोड़ डॉलर का कर्ज है। खर्चों में कटौती की जा रही है। लोगों को नौकरियों से निकाला जा रहा है। वेतन कम किए जा रहे हैं। खुद ओबामा और उनकी सरकार के कई मंत्री भी अपनी सैलरी कटवा रहे हैं।

कर्ज में डूबे अमेरिका के पास नहीं हैं वेतन तक के पैसे, बचेगा सिर्फ चार दिन का खर्च

कर्मचारियों को जबरन अवैतनिक छुट्टी 
कर्मचारियों को जबरन अवैतनिक छुट्टी पर भेजा जा रहा है। अब नए सिरे से कटौतियां करनी होंगीं। राष्ट्रपति बराक ओबामा ने देश की कर्ज सीमा बढ़ाने या इस संबंध में कोई मध्यस्थता करने से इनकार कर दिया। उन्होंने संकट के लिए देश की संसद (कांग्रेस) खासकर रिपब्लिकन पार्टी को दोषी ठहराया। अमेरिकी संसद के निचले सदन में रिपब्लिकन का बहुमत है। व्हाइट हाउस के प्रेस सचिव जे. कार्नी ने साफ कहा कि रिपब्लिकन पार्टी के सांसदों से इस मामले में कोई बात नहीं की जाएगी। कई महीनों से प्रस्ताव उनके पास है। हम केवल उनके जवाब का इंतजार करेंगे। 
कर्ज में डूबे अमेरिका के पास नहीं हैं वेतन तक के पैसे, बचेगा सिर्फ चार दिन का खर्च
कर्ज की सीमा बढ़ाए कांग्रेस : वित्त मंत्री 
वित्त मंत्री जैक ल्यू ने सोमवार को सांसदों को पत्र लिखा है। इसमें कहा है कि अगर कर्ज की सीमा नहीं बढ़ाई गई तो निवेशक सरकारी बॉन्ड्स में रकम लगाने से मना कर सकते हैं। वे पहले ही लाख करोड़ डॉलर के सरकारी बांड खरीद चुके हैं। कर्ज लेने की वर्तमान सीमा मई में तय की गई थी। वित्त विभाग कर्ज लेने के लिए नई तकनीक खोज रहा है। 
 
ओबामा के ड्रीम प्रोजेक्ट पर भी खतरा 
ओबामा प्रशासन ने सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में महत्वाकांक्षी मेडिकेयर योजना चला रखी है। इस पर भी संकट मंडरा रहा है। इस योजना के लिए एक दिन में 30 अरब डॉलर (करीब 1.98 लाख करोड़ रुपए) की रकम विभिन्न विभागों को ट्रांसफर करनी होती है। 
कर्ज में डूबे अमेरिका के पास नहीं हैं वेतन तक के पैसे, बचेगा सिर्फ चार दिन का खर्च

अमेरिका और उसके मित्र देश मंगलवार को सीरिया पर सैन्य कार्रवाई की योजना बनाने में जुट गए। अमरीकी रक्षा मंत्री चक हेगेल ने कहा है कि अगर राष्ट्रपति बराक ओबामा हमले का आदेश देते हैं तो अमरीकी सेनाएं सीरिया पर हमले के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा है कि हमने साजो-सामान को उचित जगह पर पहुंचा दिया है ताकि जो भी फैसला राष्ट्रपति लें उस पर तुरंत अमल किया जा सके। सीरियाई विद्रोहियों को संकेत दिए गए हैं कि कुछ दिन में अमेरिका सीरिया पर हमला कर सकता है। अमेरिका ने यूरोप और मध्यपूर्व के अपने मित्र देशों के शीर्ष फौजी अफसरों से जॉर्डन में बातचीत की है।  इसे ‘युद्ध परिषद’ कहा गया है। राष्ट्रपति ओबामा ने ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरन तथा फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री केविन रड से बातचीत की है। फिलहाल रूस से बातचीत स्थगित कर दी गई है क्योंकि उसने सीरिया में अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप में सहयोग करने से इनकार कर दिया है। चीन भी रूस के साथ है। ये दोनों संयुक्त राष्ट्र में असद के खिलाफ कार्रवाई को वीटो करने को तैयार हैं। ईरान पहले से असद के साथ है। 

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विद्रोहियों का खनासीर पर कब्जा, 53 सैनिक मारे गए 
 
सीरिया के विद्रोहियों ने सोमवार को अलेप्पो से लगे खनासीर शहर पर कब्जा कर लिया। इसमें 53 सरकारी सैनिक मारे गए। विद्रोहियों ने राष्ट्रपति असद को जहरीली गैस का हमला करने की धमकी दी है। सीरिया में तैनात ब्रिटेन के मानवाधिकार पर्यवेक्षक अब्दुल रहमान ने बताया कि विद्रोहियों ने खनासीर शहर पर कब्जा किया। उत्तरी हमा प्रांत को जोड़ने वाला सड़क संपर्क काट दिया। इससे पहले लेबनान की सीमा से लगे तालखलाख शहर पर भी विद्रोहियों ने कब्जा करने का प्रयास किया।
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आज फिर शुरू होगी जांच
 
सीरिया पहुंचे संयुक्त राष्ट्र जांच दल ने दूसरी बार जांच बुधवार तक टाल दी है। सोमवार को उनके काफिले और होटल पर हमले के बावजूद उन्होंने जांच की थी। सीरियाई विदेश मंत्री वालिद अल-मुआलम ने साफ कहा है कि सीरिया सरकार ने रासायनिक हथियारों या पदार्थ का इस्तेमाल नहीं किया है। जबकि अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन केरी ने कहा कि इसमें कोई शक नहीं कि राष्ट्रपति असद की सेना ने ही रासायनिक पदार्थ का इस्तेमाल किया है। sabhar : bhaskar.com



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