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शुक्रवार, 11 मई 2012

यूं नशे में धुत होकर पार्टी मनाती हैं बॉलीवुड की यह हसीनाएं, देखिए तस्वीरें

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यूं नशे में धुत होकर पार्टी मनाती हैं बॉलीवुड की यह हसीनाएं, देखिए तस्वीरें




बॉलीवुड सेलिब्रिटीज भले ही मीडिया के सामने यह संदेश देते फिरते हैं कि वह अल्कोहल को हाथ नहीं लगाते और ऐसे कोई प्रोडक्ट को एंडोर्स भी नहीं करना चाहते क्योंकि इससे उनके फैंस पर बुरा प्रभाव पड़ेगा|



मगर निजी जिंदगी में इसे कितना फॉलो करते हैं इसका अंदाजा आप नीचे दी गई कुछ तस्वीरें देखकर लगा सकते हैं| शराब पीने का शौक अभिनेताओं को तो रहता ही है मगर हमारी बॉलीवुड अभिनेत्रियां भी शराब पीने में पीछे नहीं हैं| पार्टी करते समय यह एक्ट्रेसस नशे में चूर होकर जमकर हुडदंग मचाती नजर आती हैं|



सोनम कपूर,मनीषा कोइराला,प्रिटी ज़िंटा,श्रेया सरन,रीमा सेन,अमीषा पटेल की पार्टियां तो ड्रिंक किए बिना पूरी ही नहीं होती| देखिए नशे में धुत इन हसीनाओं की कुछ अनदेखी तस्वीरें जिन्हें देखकर आप दंग रह जाएंगे:
 
sabhar : bhaskar.com

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महिला बनने की चाहत रखने वाले पुरुषों का अविश्सनीय आंकड़ा

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गांधीधाम (गुजरात)। हाल ही में आदिपुर के एक प्रोफेसर द्वारा लिंग परिवर्तन के बहुचर्चित मामले के बाद ऐसे लोगों की भारी तादात सामने आई है, जो लिंग परिवर्तन की इच्छा रखते हैं। दरअसल यहां काम करने वाली एक सामाजिक संस्था से कई लोगों ने इस हेतु संपर्क किया है। दरअसल इस संस्था से संपर्क करने वाले होमोसेक्सुअल का कहना है कि वे लिंग परिवर्तन कराना चाहते हैं लेकिन सर्जिकल ऑपरेशन में अधिक खर्च आने के कारण वे ऐसा नहीं कर सकते।


प्राप्त जानकारी के अनुसार आदिपुर के एक प्रोफेसर ने हाल ही में मुंबई के एक अस्पताल में लिंग परिवर्तन का सफल ऑपरेशन करवाया है। अब यह प्रोफेसर पूर्ण महिला है। इसके बाद जेंडर आईडेंटिटी डिसऑर्डर से पीड़ित लोगों की बड़ी संख्या सामने आई है। यहां की एक सामाजिक संस्था ‘प्रयास’ के ऑन रिकॉर्ड में अब तक लगभग 600 लोगों का रजिस्ट्रेशन हो चुका है। इन पुरुषों ने खुलेआम होमोसेक्सुअल होने की बात स्वीकारी है।


विज्ञान की मानें तो बचपन से ही हॉर्मोस में कुछ ऐसे बदलाव आ जाते हैं, जिसके चलते पुरुष खुद को स्त्री मानने लगते हैं। इनमें कुछ व्यक्तियों के दिमाग पर तो इतना असर होता है कि वे अक्सर एकांत में महिलाओं के वस्त्र पहनने, महिलाओं की तरह व्यवहार करके खुद को संतुष्ट करने का प्रयास करने लगते हैं। इसके साथ ही अनेकांे बार ऐसे पुरुष सेक्स के लिए दूसरे पुरुष की तलाश भी करते हैं। इसलिए इस स्थिति में जरूरी हो जाता है कि जेंडर आईडेंटिटी डिसऑर्डर से पीड़ित व्यक्तियों को मानसिक रूप से तैयार किया जाए, जिससे कि ये एचआईवी एड्स जैसी घातक बीमारी की चपेट में आने से बचे रहें।



गांधीनगर में हाई-प्रोफाइल गे ग्रुप :

गुजरात के गांधीनगर में होमोसेक्सुअल लोगों का एक हाई-प्रोफाइल ग्रुप भी है। उच्च वर्ग से संबंधित ये लोग आमतौर पर अनजान व्यक्तियों से संबंध बनाने से बचते हैं। इनका अपना ही एक ग्रुप है और ये अक्सर महंगी होटलों या शहर के बाहर स्थित फॉर्म हाउस में एकत्रित होते हैं। sabhar : bhaskar.com

 
 

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'मैंने बहुत पापड़ बेले हैं, अब न्यूड सीन भी देना पड़ा तो दूंगी'

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बॉलीवुड फिल्मों में खास काम न मिलते देख एक्ट्रेस कोइना मित्रा ने अब हॉलीवुड का रुख कर लिया है| उन्होंने हाल ही में कहा कि बॉलीवुड फिल्मों से ज्यादा उन्हें हॉलीवुड प्रोजेक्ट्स रास आ रहे हैं|



वह इन दिनों माइकल हर्शल की 'द स्टोरी ऑफ़ नाओमी' में काम कर रही हैं| कोइना इस फिल्म में एक ऐसी पत्नी का किरदार निभा रही हैं जिसके विवाहेत्तर संबंध हैं|



हाल ही में अपने करियर के बारे में बातचीत करते हुए कहा, मुझे कभी कुछ आसानी से हासिल नहीं हुआ, नाओमी में कास्ट किये जाने के लिए मेरा दस बार ऑडिशन हुआ|



मुझे सेक्स सीन्स देने में कुछ गलत नहीं लगता, मैं स्क्रिप्ट के मुताबिक आइटम नंबर्स भी कर सकती हूं और न्यूड भी हो सकती हूं| sabhar : bhaskar.com
 

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विटामिन-डी की कमी से परेशान रहेगा मन

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डिप्रेशन सिर्फ मनोरोग नहीं है। पैराथायरॉयड हार्मोन के साथ मेटाबॉलिज्म की गड़बड़ी और विटामिन बी-12 की कमी भी इसके लिए जिम्मेदार है।
एक हालिया रिसर्च से पता चला है कि विटामिन-डी की कमी भी डिप्रेशन की वजह बन सकती है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, परीक्षणों से साबित हुआ है कि विटामिन-डी की कमी से डिप्रेशन हो सकता है या फिर इसमें और बढ़ोतरी हो सकती है। अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास के वैज्ञानिकों ने करीब पांच साल की रिसर्च के बाद यह निष्कर्ष पेश किया है। इसके लिए उन्होंने 12,594 लोगों पर रिसर्च की। इसके तहत लोगों को 2 समूहों में बांटा गया। इनमें से पहले समूह में ऐसे लोग शामिल थे, जिन्हें पहले से डिप्रेशन था। दूसरे में वे थे, जिन्हें इसकी शिकायत नहीं थी।

बढ़ रही है संख्या 

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, दुनिया भर में आज की तारीख में डेढ़ अरब से ज्यादा लोग डिप्रेशन के शिकार हैं। भारत में मानसिक रोगियों की मौजूदा संख्या करीब 24 करोड़ है। इनमें से कम से कम 20 फीसदी लोग डिप्रेशन की चपेट में हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ते तनाव और प्रतिस्पर्धा के कारण इस संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ 

वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. विपुल त्यागी कहते हैं कि डिप्रेशन सिर्फ मनोरोग नहीं है। बीमारियों के साथ ही मेटाबॉलिज्म की गड़बडिय़ों और पैराथायरॉयड ग्लैंड के ठीक से काम न करने के कारण भी डिप्रेशन हो सकता है। उनकी सलाह है कि डिप्रेशन का इलाज सिर्फ मन की बीमारी मानकर न किया जाए, बल्कि विटामिन बी-12 का स्तर जांचने के साथ ही पैराथायरॉयड ग्लैंड और मेटाबॉलिज्म से जुड़ी जांच भी की जानी चाहिए। इसके अलावा कोई विटामिन लेने से पहले इस बात की जांच जरूर करा लेनी चाहिए कि शरीर में उसकी कमी है या नहीं।

विटामिन-डी का स्रोत 

विटामिन-डी का सबसे अच्छा और प्राकृतिक स्रोत सूर्य की किरणें हैं। इसके अलावा कॉड लिवर ऑयल, अंडे और फैटी फिश में भी यह भरपूर मात्रा में होता है। शाकाहारी लोग इसकी पूर्ति दूध व अन्य दुग्ध उत्पादों से कर सकते हैं। sabhar : bhaskar.com

 

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डिप्रेशन सिर्फ मनोरोग नहीं है। पैराथायरॉयड हार्मोन के साथ मेटाबॉलिज्म की गड़बड़ी और विटामिन बी-12 की कमी भी इसके लिए जिम्मेदार है।
एक हालिया रिसर्च से पता चला है कि विटामिन-डी की कमी भी डिप्रेशन की वजह बन सकती है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, परीक्षणों से साबित हुआ है कि विटामिन-डी की कमी से डिप्रेशन हो सकता है या फिर इसमें और बढ़ोतरी हो सकती है। अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास के वैज्ञानिकों ने करीब पांच साल की रिसर्च के बाद यह निष्कर्ष पेश किया है। इसके लिए उन्होंने 12,594 लोगों पर रिसर्च की। इसके तहत लोगों को 2 समूहों में बांटा गया। इनमें से पहले समूह में ऐसे लोग शामिल थे, जिन्हें पहले से डिप्रेशन था। दूसरे में वे थे, जिन्हें इसकी शिकायत नहीं थी।

बढ़ रही है संख्या 

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, दुनिया भर में आज की तारीख में डेढ़ अरब से ज्यादा लोग डिप्रेशन के शिकार हैं। भारत में मानसिक रोगियों की मौजूदा संख्या करीब 24 करोड़ है। इनमें से कम से कम 20 फीसदी लोग डिप्रेशन की चपेट में हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ते तनाव और प्रतिस्पर्धा के कारण इस संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ 

वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. विपुल त्यागी कहते हैं कि डिप्रेशन सिर्फ मनोरोग नहीं है। बीमारियों के साथ ही मेटाबॉलिज्म की गड़बडिय़ों और पैराथायरॉयड ग्लैंड के ठीक से काम न करने के कारण भी डिप्रेशन हो सकता है। उनकी सलाह है कि डिप्रेशन का इलाज सिर्फ मन की बीमारी मानकर न किया जाए, बल्कि विटामिन बी-12 का स्तर जांचने के साथ ही पैराथायरॉयड ग्लैंड और मेटाबॉलिज्म से जुड़ी जांच भी की जानी चाहिए। इसके अलावा कोई विटामिन लेने से पहले इस बात की जांच जरूर करा लेनी चाहिए कि शरीर में उसकी कमी है या नहीं।

विटामिन-डी का स्रोत 

विटामिन-डी का सबसे अच्छा और प्राकृतिक स्रोत सूर्य की किरणें हैं। इसके अलावा कॉड लिवर ऑयल, अंडे और फैटी फिश में भी यह भरपूर मात्रा में होता है। शाकाहारी लोग इसकी पूर्ति दूध व अन्य दुग्ध उत्पादों से कर सकते हैं। 

 

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'टाइम' में अपमानजनक स्तनपान पर विवाद

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न्यूयॉर्क. साप्ताहिक पत्रिका टाइम के कवर पेज पर प्रकाशित स्तनपान की तस्वीर की काफी आलोचना हो रही है। इस तस्वीर में एक मां को भी उत्तेजक रूप में दिखाया गया है।  
पत्रिका ने अपने कवर पर एक 26 वर्षीय महिला की अपने 4 साल के बेटे को दूध पिलाते हुए तस्वीर प्रकाशित करके सवाल किया है कि क्या आप 'पर्याप्त मां' हैं? मीडिया विश्लेषक टाइम के इस कवर को बेहुदा और निराशाजनक करार दे रहे हैं।
कवर स्टोरी 'क्या आप पर्याप्त मां हैं' के साथ कवर पेज पर एक खूबसूरत 26 वर्षीय मां की फोटो प्रकाशित की गई है। इस फोटो में महिला खड़ी हुई है और उसका चार साल का बेटा कुर्सी पर खड़े होकर स्तनपान कर रहा है।   मीडिया विशेषज्ञ ग्लनिस मैकनिकोल ने फॉक्स न्यूज से बात करते हुए कहा कि इसमें कोई शक नहीं कि इस कवर पेज पर मार्निग शो और टीवी कार्यक्रमों में बहस होगी और टाइम चर्चा का मुद्दा बनने का दावा करेगी, भले ही वो उतनी पढ़ी नहीं जा रही हो।

मैकनिकोल ने कहा, लोग टीवी पर या ऑनलाइन विवादित कवर पेज को देखने के बाद उसपर चर्चा जरूर करते हैं लेकिन अंदर के पन्नों तक नहीं पहुंचते। वो ये तो जानना चाहते हैं कि इस कवर के बारे में क्या कहा जा रहा है लेकिन स्टोरी में क्या कहा गया वहां तक पहुंचने की उनमें कोई दिलचस्पी नहीं होती। इस तरह का कवर पेज बताता है कि टाइम लोगों का ध्यान आकर्षण करने के लिए कितनी बैचेन है।
 
वहीं एक अन्य मीडिया विशेषज्ञ ब्रैड एडगेट का मानना है कि इस तरह के कवर पेज कभी-कभी नियमति ग्राहकों को भी पत्रिका से दूर कर देते हैं।   एडगेट ने कहा कि टाइम और न्यूजवीक जैसी पत्रिकाएं इस तरह के कवर पेज प्रकाशित करते खबरों में बने रहना चाहती है ताकि आज के युग में भी उनकी जरूरत बनी रही। गौरतलब है कि पिछले साल डायना के 50वें जन्मदिन के मौके पर न्यूजवीक ने दिवंगत प्रिसेज डायना की तस्वीर फोटोशॉप के जरिए मार्फ करके कैट मिडिटन के साथ प्रकाशित कर दी थी। इस तस्वीर को देखकर लग रहा था कि डायना कैट के साथ चल रही हैं।

हॉलीवुड अभिनेत्री एलिजा मिलानो ने टाइम की आलोचना करते हुए ट्वीट किया कि टाइम, आपसे चूक हो गई है। आपको बच्चों को स्तनपान कराने वाली माओं के लिए चीजों को आसान करना चाहिए लेकिन आपका कवर तो मां का ही शोषण कर रहा है। मिलाने भी पिछले साल ही मां बनी हैं।  sabhar : bhaskar.com

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बुधवार, 9 मई 2012

टीचर ने पहले बनाए सेक्स संबंध फिर भेजे टॉपलेस फोटो

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फ्लोरिडा की एक स्कूल शिक्षिका पर अपने एक नाबालिग छात्र के साथ शारीरिक संबंध बनाने के आरोप लगे हैं।



28 वर्षीया इस टीचर ने ना सिर्फ 16 साल के एक लड़के के साथ जबरदस्ती सेक्स संबंध बनाए बल्कि उसे अपनी टॉपलेस फोटो भी भेजी।



ओसिओला हाई स्कूल में टीचर केसी क्रिस्टीन विल्सन को किस्सीमी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने उनपर अनैतिक सेक्स कार्यों में लिप्त रहने व नाबालिग को इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के जरिए पोर्नोग्राफी सामग्री भेजने का मामला दर्ज किया है।



पिछले साल अक्टूबर में स्कूल को एक अनाम पत्र मिला था जिसमें विल्सन पर अपने छात्रों के साथ अनैतिक संबंध बनाने की शिकायत की गई थी।



पुलिस के अनुसार पीड़ित बच्चे ने बताया कि टीचर ने उसके साथ जबरदस्ती संबंध बनाए थे। उसने बताया कि टीचर ने धक्का देकर उसे दीवार से चिपका दिया और उसके साथ छेड़छाड़ करने लगी। उसके बाद उनके कपड़े उतार दिए और सेक्स किया। sabhar : bhaskar.com

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सड़क पर दौड़ेगी बिना ड्राइवर की गूगल कार

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लॉस एंजिलिस। सड़क पर अपने आप चलती कार, न कोई ड्राइवर न ही ट्रैफिक के किसी नियम को तोड़ने का खतरा, जहीं साइंस फिक्शन फिल्मों की कल्पना वाली यह तस्वीर अब सच्च्चई होगी। जल्द ही नेवादा की सड़कों पर यह सच होगा। इसे सच करने जा रहा है गूगल।

अपने सर्च इंजिन और ई-मेल सेवाओं के लिए जानी जाने वाली गूगल को अमेरिका में अपनी स्वचालित कारों के परीक्षण का लाइसेंस मिल गया है। वह नेवादा की व्यस्त आम सड़कों पर बिना चालक के चलने वाली इन कारों का परीक्षण करेगी।

नेवादा में मोटर वाहन विभाग के अधिकारियों ने कहा है कि उन्होंने गूगल को देश में अपनी तरह का पहला लाइसेंस दिया है। विभाग के बयान में क हा गया है कि उसने कई जगह के प्रदर्शन को देखने के बाद यह विशेष लाइसेंस जारी किया है।

स्वचालित वाहन की इस परियोजना को गूगल के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वह कई वर्षो से इस परियोजना पर काम कर रही है। इस कार से अपनी आंखों की रोशनी गंवा चुके लोगों और अन्य जरूरतमंद लोगों को मदद मिलेगी। साथ ही गूगल का कहना है कि इस कार से दुर्घटनाएं कम की जा सकेंगी क्योंकि 90 फीसदी दुर्घटनाएं मानवीय भूल से होती हैं। sabhar : bhasar.com

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कैप्सूल में बच्‍चों का मांस

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दक्षिण कोरिया में कस्टम अधिकारियों ने बच्चों के मांस से भरे हुए हजारों कैप्सूल बरामद किए हैं। दक्षिण कोरिया में इन कैप्सूलों की काफी डिमांड थी। इन कैप्सूलों को यह बताकर बेचा जाता था कि इनसे सभी तरह की बीमारियां ठीक हो जाती हैं।

इस संगीन अवैध व्यापार को चीन से चलाया जा रहा था। सुनियोजित तरीके से चलाए जा रहे इस व्यापार में गर्भपात करवाए गए बच्चों और छोटे मृत बच्चों को मेडिकल संस्थानों द्वारा खरीद लिया जाता था। छोटे बच्चों की लाशों को इस व्यापार में जुड़े लोगों के घरों में रेफ्रीजेटर्स में इकट्ठा किया जाता था।

आवश्यकता पड़ने पर बच्चों की लाशों को क्लीनिक में ले जाता और मेडिकल माइक्रोवेव्स में सुखाया जाता। जब लाश की त्वचा पूरी तरह सूख जाती तो इन्हें पाउडर की तरह पीस लिया जाता। इस प्रक्रिया के बाद इस पाउडर को अन्य दवाइयों के साथ मिलाकर कैप्सूल बना लिए जाते।

शुरूआती जांच में यह सामने आया है कि चीनी अधिकारियों को बच्चों के मांस से भरे कैप्सूलों के निर्माण और अवैध तस्करी का अंदेशा था। गौरतलब है कि चीन में इससे पहले भी मानव अंगों से दवाइयां और शक्तिवर्धक मेडिकल उत्पाद बनाए जाने के मामले सामने आ चुके हैं।

दक्षिण कोरियाई कस्टम एजेंट्स के अनुसार पिछले वर्ष अगस्त महीने से लेकर अभी तक तस्करी के 17,000 ऐसे मामले सामने आए हैं, जिसमें शक्तिवर्धक दवाइयों की तस्करी की जा रही थी।
 
 
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इतना गरीब है ये देश कि यहां चलती है लकड़ी की गाड़ियां, लोग खाते हैं जिंदा इंसान

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क्या आपको पता है दुनिया का सबसे गरीब देश कौन सा है? वहां की जीडीपी कितनी है? वहां की जनसंख्या कितनी है? नहीं पता, तो चलिए हम आपको बता देते हैं। दुनिया का सबसे गरीब देश होने का दर्जा डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो के नाम है। यहां पैसे की कमी के चलते लोग जानवरों को मार कर खाते हैं।


इस देश की गरीबी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां के अधिकतर लोग खाने की जगह जानवरों और इंसानों को मार कर खाते हैं। इतना ही नहीं, लकड़ी की गाड़ियां बनाकर लोग इससे आते-जाते हैं।


दिलचस्प है कि डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो की जीडीपी 17712 रुपये ही है। जीडीपी का आशय यहां के लोगों द्वारा हर साल खर्च किये जानी धनराशि से है। करीब 60 लाख जनसंख्या वाला ये देश आदिवासियों के मेले के लिए भी जाना जाता है। साथ ही इसे महिलाओं के लिए भी दुनिया का सबसे असुरक्षित देश बताया जाता है।
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अब महिलाओं के लिए नया कामसूत्र

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वात्स्यायन के कामसूत्र को जहां आज के लाइफस्टाइल के हिसाब से लिखा गया है वही अब इसे महिलाओं के नजरिए से लिखने की कोशिश हो रही है।

 यह पहल की है लेखिक के. आर. इंदिरा ने। इंदिरा का मानना है कि वात्स्यायन के कामसूत्र को पुरुष ने लिखा है इसलिए इसमें ज्यादातर पुरुषों की मानसिकता को बयां किया गया है।

 इंदिरा का कहना है कि मैंने जब कामसूत्र को गंभीरता से पढ़ना शुरू किया तो पाया कि यह एक पुरुष की लिखी हुई किताब है, जिसमें बताया गया है कि महिलाओं का कैसे इस्तेमाल किया जाए। ' मेरा सोचना है कि महिलाओं को भी सेक्शुअल इंडिपेंडेंस चाहिए।
यह किताब काफी रिसर्च के बाद लिखा गया है।

महिलाओं को कामसूत्र का पाठ पढ़ाने वाली उनकी किताब जून के पहले हफ्ते में रिलीज़ होगी। sabhar : bhaskar .com
 

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