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रविवार, 11 दिसंबर 2011

ओबामा ने दिया अमेरिका के बारे में चौंकाने वाला बयान

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वाशिंगटनः अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने एक ऐसी बयान दिया है जिससे सन्नाटा छा गया है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था के सुधरने के लक्षणों के बावजूद उन्होंने कहा कि उसे पूरी तरह सुधरने में अभी भी वर्षों लगेंगे।

सीबीएस चैनल को दिए इंटरव्यू में ओबामा से पूछा गया था कि क्या उन्हें पद संभालते वक्त लगा था कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था को सुधारना कितना मुश्किल होगा। उन्होंने कहा कि मैं शुरू से जानता था कि यह लंबे समय का काम है। हमारी अर्थव्यवस्था में दो दशकों से जो ढांचागत समस्याएं आती गई हैं उन्हें उलटने में वक्त लगेगा।

ओबामा ने कहा कि उन्होंने कहा कि में सोचता था कि इसमें दो साल लगेंगे, एक टर्म लगेगा और दो टर्म लगेंगे। इसमें शायद एक से ज्यादा टर्म लगेगा।

जब ओबामा से पूछा गया कि अमेरिका में बेरोजगारी की दर घटकर 8 प्रतिशत अगले साल नवंबर तक हो जाएगी, तो उन्होंने कहा कि यह संभव है। ओबामा का अगला टर्म देश में बेरोजगारी घटने पर निर्भर करेगा।


sabhar : bhaskar.com

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65 लाख का पैकेज और फेसबुक का फेस बदलने की जिम्मेदारी मिली

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संडे स्पेशल स्टोरी.संडे स्पेशल स्टोरी. 21 साल की राधिका मित्तल आईआटी खड़गपुर की पहली ऐसी छात्रा बन गई हैं जिनको फेसबुक ने 65 लाख का जॉब ऑफर किया है। राधिका मित्तल सहित आईआईटी खड़गपुर के चार छात्रों को 65 लाख का जॉब ऑफर किया है। राधिका एक ऐसे परिवार से आती है जहां कामर्स का बोलबाला रहा है लेकिन उन्होंने अपने लिए सांइस की तकनीकी दुनिया का चुनाव किया और आईआईटी के रास्ते फेसबुक टीम का हिस्सा बनने जा रही है।
आईआईटी खड़गपुर की कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग की छात्रा राधिका मित्तल ने दैनिक भास्कर डॉट कॉम के राजेश यादव से अपनी सफलता से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर बातचीत की..

प्रश्न. फेसबुक की तरफ से इतना बड़ा ऑफर आपको कैसे मिला? चयन प्रक्रिया से जुड़ी खास बातें क्या रहीं?
राधिका मित्तल.फेसबुक की टीम ने कई चरणों में टेस्ट लिया था जिसमें र्टिन टेस्ट और साक्षात्कार शामिल था। मुझे अपने चयन की खबर इंस्टीट्च्यूट के नोटिस बोर्ड से पता चली थी जहां रिजल्ट लगाया गया था। पहले टेस्ट में तो मेरा लीखित एक्जाम बेहतर नहीं रहा था तब लगा था कि फेसबुक की नौकरी तो गई हाथ से। लेकिन अगले टेस्ट के लिए मेरा चयन हुआ और बाद के दोनों टेस्ट और साक्षात्कार शानदार रहे और मुझे उम्मीद बनी कि मेरा चयन हो सकता है।
प्रश्न. फेसबुक की चयन प्रक्रिया में क्या खास बातें थी? फेसबुक की टीम के साथ साक्षात्कार का अनुभव कैसा रहा?
राधिका मित्तल.फेसबुक की टीम के तीन सदस्यों ने टेस्ट लिया था जिसमें दो भारतीय और एक अमेरिकन थे।मुझे लगता है कि फेसबुक टीम का ज्यादा फोकस हमारी सोच को जांचना था। उन्होंने जिस तरह के प्रोग्रामिंग टेस्ट लिए, हमें प्रश्नों को साल्व करने और इम्प्रू करने का अवसर दिया, उसे और बेहतर बनाने के लिए प्रेरित किया वह अपने आप में एक शानदार अनुभव रहा। हमारा पहला टेस्ट अक्टूबर माह से शुरु हुआ था और दिसंबर माह में प्रक्रिया पूरी हुई और पहले राउंड में कोडिंग और प्रोग्रामिंग और उसके बाद इंटरव्यू की प्रोसेस रही। फेसबुक की टीम के साथ प्रश्न साल्व करने में मजा आ रहा था , साक्षात्कार के दौरान भी सामान्य बातचीत के साथ आपकी सोच को जानने वाले प्रश्न अधिक पूछे गए थे।
प्रश्न. फेसबुक की तरफ से 65 लाख के जॉब के ऑफर के बारे में परिवार की प्रतिक्रिया कैसी रही?
राधिका मित्तल.देखिए फेसबुक के ऑफर के अलावा मेरे पास भारत में आईबीएम इंडिया रिसर्च लैब से भी जॉब का अच्छा ऑफर था । फेसबुक के लिए मुझे कैलिफोर्निया जाने की बात पर शुरु में मां को कुछ संकोच था लेकिन बाद में परिवार ने आपसी बातचीत के दौरान इस बात पर फैसला लिया कि मुझे फेसबुक को जॉब स्वीकार करना चाहिए क्योंकि मुझे वहां सीखने का ज्यादा असवर मिलेगा।
प्रश्न. अपने माता पिता और परिवार के बारे में कुछ बताएं?
राधिका मित्तल.मेरे पिता श्री सुनील मित्तल और माता श्रीमती सुनीता मित्तल  है। मेरे भाई अक्षय मित्तल ने एमबीए किया है। हमारा घर जूट के बिजनेस से भी जुड़ा हुआ है और अधिकांस लोग कार्मस विषय से संबंधित है। जब मैनें साइंस में अपना करयिर बनाने का विचार किया था तो मुझे भी कहा गया कि कार्मस अच्छा विषय हो सकता है लेकिन जब मैनें अपनी व्यक्तिगत पसंद विज्ञान बताई तो मुझे मेरे घर का पूरा सपोर्ट मिला। माता पिता का समर्थन तो हमेशा मेरे साथ था इसके साथ ही मेरे दादा जी श्री प्रेमचंद मित्तल और मेरी दादी श्रीमती मनी मित्तल ने मेरा हौसला हमेशा बढ़ाया। परिवार के समर्थन से ही मैं इतनी बढ़ी सफलता हासिल करने में कामयाब रही हूं।
प्रश्न. आपका रोल मॉडल कौन रहा है?
राधिका मित्तल .प्रोफेसर डीना कताबी और सिल्विया रत्नासामी मेरे रोल मॉडल है। मैं इन दो लोगों से बहुत प्रभावित हूं।
प्रश्न. आपकी हॉबी क्या है? 
राधिका मित्तल . मुझे फ्किशन बुक पढ़ने का शौक है। डैन ब्राउन और चेतन भगत जैसे लेखकों की किताबें अच्छी लगती है। वैसे मुझे इंग्लिश सांग और ए. आर रहमान का संगीत बेहद पसंद है, रोजा फिल्म का संगीत और हाल ही में नादान परिंदे घर आ जा मुझे बहुत अच्छे लगते हैं।
प्रश्न. सोशल नेटवर्किग वेबसाइटों का भविष्य कैसा है?
राधिका मित्तल .वर्ततान ट्रेड को देखें तो ब्राइट फ्यूचर है। मोबाइल तकनीकि और बेहतर हो जाने के बाद इस तरह की वेबसाइटो का क्रेज बढ़ा है। और भी बेहतर तकनीकि मोबाइल फोनों में आ रही है और लोग इंटरनेट का उपयोग अब मोबाइल के द्वारा करते हुए इन साइटों से जुड़ रहे हैं। लेकिन ऐसा भी देखने में आया था कि एक समय ऑरकुट का बहुत बोलबाला था लेकिन फेसबुक के आने के बाद यूजर इस तरफ बहुत तेजी से शिफ्ट हो गया। फिलहाल फेसबुक बेहतर स्थिति में है और उम्मीद है इस तरह की सोशल नेटवर्किग वेबसाइट को अभी और भी नए यूजर मिलेंगे।
प्रश्न. आप फेसबुक में किस तरह के बदलाव करना पसंद करेगीं?
राधिका मित्तल.फिलहाल तो ऐसा कुछ विशेष सोचा नहीं है। जब जॉब ज्वाइन करुगीं और जिस तरह के टॉस्क दिए जाएगें उस हिसाब से कुछ नया करने का प्रयास होगा। वैसे मुझे बैगग्रांउड वर्ग में काम करना बहुत पसंद है। मेरे हिसाब से फेसबुक की प्राइवेसी सेटिंग के ऑप्शन को और बेहतर किया जा सकता है।
प्रश्न. फेसबुक ने आपको 65 लाख का जॉब ऑफर किया है। कुछ सोचा है इस पैसे को कैसे खर्च करना है?
राधिका मित्तल. देखिए कैलिफोर्निया की लाइफ स्टाइल के हिसाब से तो वहां खर्चा भी खूब होगा। लेकिन पैसे बचाने के साथ मैं अपने माता पिता और परिवार पर खर्च करना पसंद करुगीं। फिलहाल अभी जॉब लेटर का इंतजार कर रही हूं ।
प्रश्न. अपने स्कूल डेज लाइफ के बारे में कुछ बताएं?
राधिका मित्तल.मेरी प्रारंभिक शिक्षा बिरला हाई स्कूल कोलकोत्ता से हुई हैं। शुरु से ही पढ़ने में मेरा लगाव था और इसमें में अच्छी थी।इसके अलावा खेल मुझे अच्छा लगता था। भौतिकी की प्राब्लम साल्व करना मुझे बहुत अच्छा लगता था। मेरे करियर लाइफ में आईआईटी की तैयारियों के दौरान फिटजी में मिला मार्गदर्शन मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
प्रश्न. करियर के चुनाव में युवाओं को किस बात का खास ध्यान रखना चाहिए? आप हमारे युवा रीडरों को क्या संदेश देना चाहोगी?
राधिका मित्तल.यंग रीडर को मैं कहना चाहूंगी किसी को देखकर अपना करियर मत बनाओं। आपको क्या अच्छा लगता है? आप क्या करना चाहते हो? अपनी पंसद को चुनो और आगे बढ़ो। मेरे परिवार में सभी लोग कामर्स फिल्म से हैं लेकिन मैनें अपनी पंसद साइस को चुनाव किया था इसलिए मैं तो यही कहूंगी हमें जो अच्छा लगता है जिसमें हमारी महारत हैं वहीं करना चाहिए। sabhar : bhaskar.com
 
 

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गैंगरेप कर बनाया अश्लील MMS, इसे हथियार बना अब...

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मथुरा। यहां एक नाबालिग लड़की के साथ गांव के ही चार लड़कों ने गैंग रेप किया। रेप के दौरान लड़की का एमएमएस बनाते रहे। जब लड़की के परिवार वालों ने विरोध किया तो उन्हें इज्जत की दुहाई देकर ब्लैकमेल करने लगे।

आखिरकार परिजनों ने रिफाइनरी थाना क्षेत्र में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है।

जानकारी के मुताबिक, गांव नगला सीता में रहने वाली एक नाबालिग लड़की के साथ गांव के ही चार लड़कों ने गैंग रेप किया था। इस दौरान उन्होंने एमएमएस तैयार कर लिया। घटना के बाद लड़की ने घर पहुंचकर सारी बात बताई। बदनामी के डर से परिजनों ने पुलिस से शिकायत नहीं की। बाद में आरोपियों ने परिजनों को पैसों के लिए ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया।

पुलिस के मुताबिक, मामला दर्ज करके चारों आरोपियों को गिरफ्तार करने के लिए दबिश डाली जा रही है।
sabhar: bhaskar.com

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अमेरिकी सेना में सुरक्षित नहीं है महिलाओं की आबरू

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वॉशिंगटन. दुनिया की चोटी की सेनाओं में शुमार अमेरिकी सेना का एक स्याह सच सामने आया है। अमेरिकी सेना में यौन अपराधों की लंबी चौड़ी फेहरिस्त है, जिनमें कई रोंगटे खड़े कर देने वाली सच्चाई छुपी हुई है। अमेरिकी सेना में तैनात महिला सैनिकों के लिए हालात इतने बिगड़ गए हैं कि अमेरिका में यह कहा जाने लगा है कि कोई दुश्मन अमेरिकी महिला सैनिक को मारे इससे कहीं ज़्यादा आशंका इस बात की रहती है कि इराक में तैनात अमेरिकी महिला सैनिक को उसका साथी ही 'शिकार' बना ले।

 
यह मामला इतना गंभीर है कि अमेरिकी फौज से रिटायर हो चुके कई पुरुष और महिलाओं ने अमेरिकी रक्षा मुख्यालय पेंटागन के खिलाफ मुकदमा किया है। मुकदमा करने वालों में 25 महिलाएं और तीन पुरुष शामिल हैं (मुकदमा कायम करते समय कुल लोगों की तादाद महज 17 थी)। इन लोगों का दावा है कि सशस्त्र सेनाओं में ड्यूटी के दौरान यौन उत्पीड़न का सामना करना पड़ा है।

इन लोगों ने पूर्व रक्षा मंत्रियों डोनाल्ड रम्सफील्ड और रॉबर्ट गेट्स पर ऐसी संस्कृति को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है, जिसमें उन महिलाओं और पुरुषों को सज़ा दी जाती है जो यौन उत्पीड़न की शिकायत करते हैं।


यह मुकदमा फरवरी में सामने आया था। तब से और ऐसे 400 लोग सामने आए हैं, जिन्होंने सेना में यौन उत्पीड़न की शिकायत की है। इस मुकदमे को सुजैन बर्क लड़ रही हैं। ये सभी लोग इस समय अदालत के उस फैसले का इंतजार कर रहे हैं, जिसमें उसे यह तय करना है कि इस मामले में ट्रायल शुरू होगा या नहीं।

रक्षा मंत्रालय के वकील ने 1950 के एक अदालती फैसले के हवाले से इस मुकदमे को खारिज करने की अपील की है। 1950 में कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि सेना में ड्यूटी के दौरान चोट लगने पर सरकार उसके लिए जिम्मेदार नहीं होगी।


लेकिन जानकार मानते हैं कि यह मुकदमा आगे चले या नहीं, लेकिन इस पूरी कोशिश ने अमेरिकी सेना के काले सच से पर्दा उठा दिया है। अमेरिकी रक्षा विभाग के डिपार्टमेंट एसएपीआरओ की 2010 की रिपोर्ट के मुताबिक  पिछले साल अमेरिकी सेना में यौन अपराधोंके 3,158 मामले दर्ज किए गए। लेकिन इनमें से महज 529 ही कोर्ट तक पहुंच सके और इनमें भी 104  में ही सज़ा मिल पाई।

लेकिन ये आंकड़े सच का सिर्फ एक छोटा हिस्सा भर हैं। यौन अपराधों के ज़्यादातर मामले तो दर्ज ही नहीं हो पाते हैं। एसएपीआरओ का ही आकलन है कि पिछले साल ही सेना के भीतर यौन अपराधों के 19,000 ऐसे मामले हुए, जिन्हें दर्ज नहीं किया गया।

अमेरिका में बुजुर्गों से जुड़े विभाग ने एक स्टडी की है, जिसके मुताबिक सेना में तैनात हर तीन महिला सैनिकों में से एक ड्यूटी के दौरान यौन हिंसा का सामना करती है। जबकि सिविल सोसाइटी में यह आंकड़ा हर छह महिलाओं में से एक का है। sabhar : bhaskar.com



 
 
 

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शुक्रवार, 9 दिसंबर 2011

वीडियो में देखें कैसे खुले पार्क में मना रहे थे रंगरलियां, तभी आ धमके...

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गाजियाबाद।  बात एक हफ्ते पहले की है। इस दिन साहिबाबाद के राम मनोहर लोहिया पार्क में प्रेमी जोड़ों मस्त थे। तभी एक महिला दरोगा पूरे दलबल के साथ अचानक पार्क में पहुंच जाती हैं और वहां मौजूद नौजवानों पर बिजली बनकर गिरती हैं। जोड़ों को पकड़ कर समझाने और दंड देने का काम करती है। साहिबाबाद इलाके के राम मनोहर लोहिया पार्क में इन दिनों ऑपरेशन मजनूं अभियान चला है। यहां गाजियाबाद पुलिस की टीम छापामार दस्ते की तरह कभी भी, कहीं भी अचानक धमक पड़ती है और फिर शुरू हो जाता है खाकी का खौफ दिखाने का सिलसिला। वीडियो में आप देखिए ऑपरेशन मजनूं...
साभार एएनआई   sabhar : bhaskar.com
 

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मौज या 'मानसिक' बीमारी, अमेरिका में युवाओं के बीच न्यूड पार्टी की खुमारी

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न्यूयार्क में कुछ युवा आजकल नग्नता को बढ़ावा दे रहे हैं, उनका सोचना है कि आने वाले समय में नग्नता निंदा का विषय नहीं रहेगा और समाज के हर तबके द्वारा इसे स्वीकार किया जाएगा। 

बीते 19 नवंबर को न्यूयार्क के सोहो क्षेत्र के 18 से 40 वर्ष के कुछ फैशनेबल पुरूषों और महिलाओं द्वारा नग्नता की पहली वर्षगांठ मनाने के लिए एकत्रित हुए, जहां सभी लोग पूरी तरह नग्न थे। 

इस पार्टी में उपस्थित सभी नग्न लोगों ने एक-गूसरे से बात की, शराब पी और खूब एन्जॉय किया। इन लोगों ने आशा जताई कि भविष्य में होने वाली इस तरह की पार्टियों में अधिक से अधिक लोग नग्न होगें और न्यूडिज़्म को बढ़ावा देंगे। sabhar : bhaskar.com

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होटल का गेट खोलते ही दंग रह गई पुलिस, न्यूड हो रंगरेलियां...

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मेरठ। शहर में दिल्ली रोड पर स्थित एक होटल में गुप्त सूचना मिलने पर रेड मारने पहुंची पुलिस ने ज्यों ही कमरे का गेट खोला भौंचक्की रह गई। यहां कमरे के अंदर कई प्रेमी जोड़े न्यूड होकर अश्लील हरकतें करते हुए मिले।

पुलिस के आने की सूचना मिलने पर यहां भगदड़ मच गई। सभी जोड़ों को गिरफ्तार कर लिया गया। कुछ देर बाद इनको बिना कानूनी कार्रवाई किए छोड़ दिया गया।

जानकारी के मुताबिक दिल्ली रोड पर स्थित एक होटल में प्रेमी युगलों द्वारा अश्लील हरकतें करने की सूचना टीपीनगर पुलिस को मिली। पुलिस मौके पर पहुंची और तलाशी के दौरान होटल के कमरों से दो प्रेमी युगल को आपत्तिजनक स्थिति में पकड़ लिया। यहां जमा भीड़ ने बताया कि यहां आए दिन शराब और अय्याशी का धंधा चलता है।

पुलिस होटल से पकड़े गए जोड़ों को साथ ले आई। सभी के परिजनों को सूचित किया। परिजनों से बातचीत के बाद युवतियों को उनके हवाले कर दिया। यहां जब पुलिस से कार्रवाई के संबंध में मीडिया ने पूछा तो पुलिस ने कुछ भी साझा करने से इंकार कर दिया। sabhar: bhaskar.com

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रेलवे कुली था, अब दुनिया के सबसे दौलतमंदों में है

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जी हां, यह दास्तान एक ऐसे व्यक्ति की है जिसका बचपन बेहद कठिन परिस्थितियों में गुजरा और जिसने बहुत तकलीफें उठाईं लेकिन आज वह दुनिया के सबसे अमीर लोगों में है। हम बात कर रहे हैं जॉर्ज सोरोस की जो आज 22 अरब डॉलर की हस्ती हैं।



1930 में जॉर्ज सोरोस का जन्म हंगरी में हुआ था। उनके माता पिता यहूदी थे और एक लेखक थे लेकिन वहां जर्मन नाजियों का कब्जा हो जाने के बाद उन्हें 13 साल की उम्र में उन्हें यहूदी काउंसिल में नौकरी करनी पड़ी। 1947 में वे हंगरी के एक अमीर व्यक्ति के साथ इंग्लैंड भाग गए और अपने चाचा के साथ रहने लगे। चाचा ने दया करके उन्हें लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में दाखिला दिला दिया। लेकिन सोरोस के पास खर्च के लिए पैसे नहीं थे इसलिए उन्होंने रेलवे कुली, वेटर और समुद्र के किनारे सामान बेचना शुरू किय़ा। वह बेहद गरीबी में दिन गुजार रहे थे।



पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्हें नौकरी ढूंढ़ने में बहुत परेशानी हुई। किसी तरह से उन्हें एक बैंक में छोटी सी नौकरी मिली और फिर वे उसमें लग गए। तंग आकर 1956 में वे अमेरिका चले गए जहां उन्होंने एनालिस्ट की नौकरी कर ली। बाद में वे एक और कंपनी में चले गए और वहां वाइस प्रेसीडेंट बन गए। 1967 में उन्होंने अपनी कंपनी को एक निवेश फंड कंपनी बनाने के लिए मना लिया। उनकी कंपनी ने 1969 में उनके लिए डबल ईंगल हेज फंड बनाया। 1970 में उन्होंने सोरोस फंड मैनेजमेंट बनाया और उसके चेयरमैन बन गए। उन्होंने क्वांटम फंड भी शुरू किया। उसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। निवेश की दुनिया उन्हें भा गई और देखते-देखते वह दुनिया के सबसे बड़े निवेशकों में आ गए। उन्हें फाइनेंस की दुनिया का जादूगर माना जाता है।



सोरोस अपना अतीत नहीमं भूले हैं और वे दुनिया भर में दान करते रहते हैं। 2011 तक उन्होंने 8 अरब डॉलर शिक्षा, स्वास्थ्य़ के लिए दान कर दिया था। अभी भी वह जनकल्याण के लिए दान करते रहते हैं। sabhar :bhaskar.com

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मछली खाने से नहीं होता अल्‍जाइमर

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मांसाहारी लोगों के लिए अच्‍छी खबर है। शोधकर्ताओं का कहना है कि जिन लोगों के खान-पान में मछली शामिल होती है, उनका मानसिक स्वास्थ्य अच्छा रहता है और साथ ही वे अल्जाइमर जैसी खतरनाक बीमारी के खतरे से भी दूर रहते हैं।
पिट्सबर्ग विश्वविद्यालय के मेडीकल सेंटर के सायरस राजी का कहना है कि मछली का मांस  मस्तिष्क की संरचना और अल्जाइमर के खतरे के बीच संबंध स्थापित करता है

जो लोग प्रति सप्ताह कम से कम एक बार सिकी हुई या उबली हुई मछली खाते हैं उनके मस्तिष्क की संरचना में ग्रे मैटर क्षेत्र संरक्षित रहता है। अल्जाइमर बीमारी में मस्तिष्क के इस हिस्से की खास भूमिका होती है।

अल्जाइमर बीमारी का कोई इलाज नहीं है। यह बीमारी धीरे-धीरे बढ़ती जाती है। इससे व्यक्ति की याददाश्त और बोध क्षमता धीरे-धीरे कम होती जाती है। sabhar : bhaskar.com

 

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हॉट फिगर के लिए बहुत कुछ खोया है नेहा ने

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नेहा धूपिया बॉलीवुड की उन हॉट एक्‍ट्रेस में से है जो अपनी फिटनेस को लेकर काफी कॉन्शस हैं। उनका कहना है कि ग्‍लैमर वर्ल्‍ड में अपनी जगह बनाए रखने के लिए फिटनेस पर काफी ध्‍यान देना पड़ता है यही नहीं स्‍वाद से भी समझौता करना पड़ता है। मैं हफ्ते में दो से तीन बार वेट ट्रेनिंग और कार्डियो करना नहीं भूलती। कार्डियो करने से स्टेमिना बढ़ता है। जब भी समय मिलता है , तो स्कवैश खेलती हूं। अक्सर स्वीमिंग करने भी जाती हूं। कभी - कभार योगा की प्रैक्टिस भी करती हूं।

मैं अपने दिन की शुरूआत एक गिलास गर्म पानी के साथ करती हूं। उसमें शहद व नीबू मिला लेती हूं। नाश्ते में पांच बादाम और एक बाउल फू्रट्स लेना पसंद है। इसके बाद मिड नाइट या आफ्टरनून में चार उबले अंडे को ब्राउन ब्रेड के साथ लेती हूं। लंच में आमतौर पर चावल , रोटी , सब्जी , दाल और स्प्राउट्स लेती हूं। ग्रीन - टी लेना पसंद है। तकरीबन 7 बजे डिनर से पहले ग्रिल्ड वेजिटेबल और सलाद लेना प्रिफर करती हूं।
लेकिन इन दिनों मैं माइक्रोबाइटिक डाइट पर हूं। यह 80 प्रतिशत ऑर्गेनिक है। मैं ऐसी कोई चीज नहीं खाती , जिसमें न्‍यूट्रिशन न हो। मुझे फ्रेश पकी सब्जियां , फ्रेश फू्रट्स और वेजिटेबल जूस लेना पसंद है। मुझे रेडमीट पसंद है फिर भी मैं बहुत कम खाती हूं। सबसे ज्यादा घर का खाना पसंद है क्योंकि यह ताजा होता है।  sabhar : bhakar.com

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रेयरेस्ट ऑफ द रेयर: लड़की बनी है विज्ञान जगत के लिए पहेली!

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रेयरेस्ट ऑफ द रेयर: लड़की बनी है विज्ञान जगत के लिए पहेली! 

लखनऊ। यूपी की राजधानी लखनऊ के आलमबाग की रहने वाली ट्विंकल द्विवेदी विज्ञान जगत के लिए एक पहेली बनी हुई है। यह जब रोती है तो इसके आंखों से आंसू नहीं खून निकलते हैं।

जुलाई, 2007 से अचानक इस बीमारी से पीड़ित इस लड़की को किसी वक्त भी बिना किसी खरोंच, घाव, चोट के, आंख, नाक, गर्दन, से खून निकलना शुरू हो जाता है। अमेरिकी हीमेटोलॉजिस्ट एक्सपर्ट डॉक्टर जार्ज बुचानन ने मुंबई के एक अस्पताल में ट्विंकल की जांच की, लेकिन वो भी किसी किसी निष्कर्ष पर पहुंचने में नाकाम रहे।

ट्विंकल को दिन में लगभग 50 बार यह रक्तस्त्राव होता है जिसकी वजह से रोजाना उसका कुछ लीटर खून बेकार बह जाता है। इस परेशानी की वजह से ट्विंकल की पढ़ाई भी दो साल से छूट चुकी है। अचानक रक्तस्त्राव के कारण वह जिस भी स्कूल में पढ़ती है उसे वहां से निकाल दिया जाता है।

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