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शुक्रवार, 9 दिसंबर 2011

मौज या 'मानसिक' बीमारी, अमेरिका में युवाओं के बीच न्यूड पार्टी की खुमारी

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न्यूयार्क में कुछ युवा आजकल नग्नता को बढ़ावा दे रहे हैं, उनका सोचना है कि आने वाले समय में नग्नता निंदा का विषय नहीं रहेगा और समाज के हर तबके द्वारा इसे स्वीकार किया जाएगा। 

बीते 19 नवंबर को न्यूयार्क के सोहो क्षेत्र के 18 से 40 वर्ष के कुछ फैशनेबल पुरूषों और महिलाओं द्वारा नग्नता की पहली वर्षगांठ मनाने के लिए एकत्रित हुए, जहां सभी लोग पूरी तरह नग्न थे। 

इस पार्टी में उपस्थित सभी नग्न लोगों ने एक-गूसरे से बात की, शराब पी और खूब एन्जॉय किया। इन लोगों ने आशा जताई कि भविष्य में होने वाली इस तरह की पार्टियों में अधिक से अधिक लोग नग्न होगें और न्यूडिज़्म को बढ़ावा देंगे। sabhar : bhaskar.com

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होटल का गेट खोलते ही दंग रह गई पुलिस, न्यूड हो रंगरेलियां...

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मेरठ। शहर में दिल्ली रोड पर स्थित एक होटल में गुप्त सूचना मिलने पर रेड मारने पहुंची पुलिस ने ज्यों ही कमरे का गेट खोला भौंचक्की रह गई। यहां कमरे के अंदर कई प्रेमी जोड़े न्यूड होकर अश्लील हरकतें करते हुए मिले।

पुलिस के आने की सूचना मिलने पर यहां भगदड़ मच गई। सभी जोड़ों को गिरफ्तार कर लिया गया। कुछ देर बाद इनको बिना कानूनी कार्रवाई किए छोड़ दिया गया।

जानकारी के मुताबिक दिल्ली रोड पर स्थित एक होटल में प्रेमी युगलों द्वारा अश्लील हरकतें करने की सूचना टीपीनगर पुलिस को मिली। पुलिस मौके पर पहुंची और तलाशी के दौरान होटल के कमरों से दो प्रेमी युगल को आपत्तिजनक स्थिति में पकड़ लिया। यहां जमा भीड़ ने बताया कि यहां आए दिन शराब और अय्याशी का धंधा चलता है।

पुलिस होटल से पकड़े गए जोड़ों को साथ ले आई। सभी के परिजनों को सूचित किया। परिजनों से बातचीत के बाद युवतियों को उनके हवाले कर दिया। यहां जब पुलिस से कार्रवाई के संबंध में मीडिया ने पूछा तो पुलिस ने कुछ भी साझा करने से इंकार कर दिया। sabhar: bhaskar.com

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रेलवे कुली था, अब दुनिया के सबसे दौलतमंदों में है

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जी हां, यह दास्तान एक ऐसे व्यक्ति की है जिसका बचपन बेहद कठिन परिस्थितियों में गुजरा और जिसने बहुत तकलीफें उठाईं लेकिन आज वह दुनिया के सबसे अमीर लोगों में है। हम बात कर रहे हैं जॉर्ज सोरोस की जो आज 22 अरब डॉलर की हस्ती हैं।



1930 में जॉर्ज सोरोस का जन्म हंगरी में हुआ था। उनके माता पिता यहूदी थे और एक लेखक थे लेकिन वहां जर्मन नाजियों का कब्जा हो जाने के बाद उन्हें 13 साल की उम्र में उन्हें यहूदी काउंसिल में नौकरी करनी पड़ी। 1947 में वे हंगरी के एक अमीर व्यक्ति के साथ इंग्लैंड भाग गए और अपने चाचा के साथ रहने लगे। चाचा ने दया करके उन्हें लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में दाखिला दिला दिया। लेकिन सोरोस के पास खर्च के लिए पैसे नहीं थे इसलिए उन्होंने रेलवे कुली, वेटर और समुद्र के किनारे सामान बेचना शुरू किय़ा। वह बेहद गरीबी में दिन गुजार रहे थे।



पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्हें नौकरी ढूंढ़ने में बहुत परेशानी हुई। किसी तरह से उन्हें एक बैंक में छोटी सी नौकरी मिली और फिर वे उसमें लग गए। तंग आकर 1956 में वे अमेरिका चले गए जहां उन्होंने एनालिस्ट की नौकरी कर ली। बाद में वे एक और कंपनी में चले गए और वहां वाइस प्रेसीडेंट बन गए। 1967 में उन्होंने अपनी कंपनी को एक निवेश फंड कंपनी बनाने के लिए मना लिया। उनकी कंपनी ने 1969 में उनके लिए डबल ईंगल हेज फंड बनाया। 1970 में उन्होंने सोरोस फंड मैनेजमेंट बनाया और उसके चेयरमैन बन गए। उन्होंने क्वांटम फंड भी शुरू किया। उसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। निवेश की दुनिया उन्हें भा गई और देखते-देखते वह दुनिया के सबसे बड़े निवेशकों में आ गए। उन्हें फाइनेंस की दुनिया का जादूगर माना जाता है।



सोरोस अपना अतीत नहीमं भूले हैं और वे दुनिया भर में दान करते रहते हैं। 2011 तक उन्होंने 8 अरब डॉलर शिक्षा, स्वास्थ्य़ के लिए दान कर दिया था। अभी भी वह जनकल्याण के लिए दान करते रहते हैं। sabhar :bhaskar.com

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मछली खाने से नहीं होता अल्‍जाइमर

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मांसाहारी लोगों के लिए अच्‍छी खबर है। शोधकर्ताओं का कहना है कि जिन लोगों के खान-पान में मछली शामिल होती है, उनका मानसिक स्वास्थ्य अच्छा रहता है और साथ ही वे अल्जाइमर जैसी खतरनाक बीमारी के खतरे से भी दूर रहते हैं।
पिट्सबर्ग विश्वविद्यालय के मेडीकल सेंटर के सायरस राजी का कहना है कि मछली का मांस  मस्तिष्क की संरचना और अल्जाइमर के खतरे के बीच संबंध स्थापित करता है

जो लोग प्रति सप्ताह कम से कम एक बार सिकी हुई या उबली हुई मछली खाते हैं उनके मस्तिष्क की संरचना में ग्रे मैटर क्षेत्र संरक्षित रहता है। अल्जाइमर बीमारी में मस्तिष्क के इस हिस्से की खास भूमिका होती है।

अल्जाइमर बीमारी का कोई इलाज नहीं है। यह बीमारी धीरे-धीरे बढ़ती जाती है। इससे व्यक्ति की याददाश्त और बोध क्षमता धीरे-धीरे कम होती जाती है। sabhar : bhaskar.com

 

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हॉट फिगर के लिए बहुत कुछ खोया है नेहा ने

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नेहा धूपिया बॉलीवुड की उन हॉट एक्‍ट्रेस में से है जो अपनी फिटनेस को लेकर काफी कॉन्शस हैं। उनका कहना है कि ग्‍लैमर वर्ल्‍ड में अपनी जगह बनाए रखने के लिए फिटनेस पर काफी ध्‍यान देना पड़ता है यही नहीं स्‍वाद से भी समझौता करना पड़ता है। मैं हफ्ते में दो से तीन बार वेट ट्रेनिंग और कार्डियो करना नहीं भूलती। कार्डियो करने से स्टेमिना बढ़ता है। जब भी समय मिलता है , तो स्कवैश खेलती हूं। अक्सर स्वीमिंग करने भी जाती हूं। कभी - कभार योगा की प्रैक्टिस भी करती हूं।

मैं अपने दिन की शुरूआत एक गिलास गर्म पानी के साथ करती हूं। उसमें शहद व नीबू मिला लेती हूं। नाश्ते में पांच बादाम और एक बाउल फू्रट्स लेना पसंद है। इसके बाद मिड नाइट या आफ्टरनून में चार उबले अंडे को ब्राउन ब्रेड के साथ लेती हूं। लंच में आमतौर पर चावल , रोटी , सब्जी , दाल और स्प्राउट्स लेती हूं। ग्रीन - टी लेना पसंद है। तकरीबन 7 बजे डिनर से पहले ग्रिल्ड वेजिटेबल और सलाद लेना प्रिफर करती हूं।
लेकिन इन दिनों मैं माइक्रोबाइटिक डाइट पर हूं। यह 80 प्रतिशत ऑर्गेनिक है। मैं ऐसी कोई चीज नहीं खाती , जिसमें न्‍यूट्रिशन न हो। मुझे फ्रेश पकी सब्जियां , फ्रेश फू्रट्स और वेजिटेबल जूस लेना पसंद है। मुझे रेडमीट पसंद है फिर भी मैं बहुत कम खाती हूं। सबसे ज्यादा घर का खाना पसंद है क्योंकि यह ताजा होता है।  sabhar : bhakar.com

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रेयरेस्ट ऑफ द रेयर: लड़की बनी है विज्ञान जगत के लिए पहेली!

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रेयरेस्ट ऑफ द रेयर: लड़की बनी है विज्ञान जगत के लिए पहेली! 

लखनऊ। यूपी की राजधानी लखनऊ के आलमबाग की रहने वाली ट्विंकल द्विवेदी विज्ञान जगत के लिए एक पहेली बनी हुई है। यह जब रोती है तो इसके आंखों से आंसू नहीं खून निकलते हैं।

जुलाई, 2007 से अचानक इस बीमारी से पीड़ित इस लड़की को किसी वक्त भी बिना किसी खरोंच, घाव, चोट के, आंख, नाक, गर्दन, से खून निकलना शुरू हो जाता है। अमेरिकी हीमेटोलॉजिस्ट एक्सपर्ट डॉक्टर जार्ज बुचानन ने मुंबई के एक अस्पताल में ट्विंकल की जांच की, लेकिन वो भी किसी किसी निष्कर्ष पर पहुंचने में नाकाम रहे।

ट्विंकल को दिन में लगभग 50 बार यह रक्तस्त्राव होता है जिसकी वजह से रोजाना उसका कुछ लीटर खून बेकार बह जाता है। इस परेशानी की वजह से ट्विंकल की पढ़ाई भी दो साल से छूट चुकी है। अचानक रक्तस्त्राव के कारण वह जिस भी स्कूल में पढ़ती है उसे वहां से निकाल दिया जाता है।

sabhar : bhaskar .com

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गुरुवार, 8 दिसंबर 2011

42 साल पहले बनाई थी भविष्य की कार, अब आई दुनिया के सामने

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नई टेक्नोलॉजी प्रदर्शित करने के लिए कार निर्माता कॉन्सेप्ट कार बनाते हैं। इनमें से कुछ का निर्माण शुरू हो जाता है और कुछ पैक कर रख दी जाती हैं। कुछ भी हो दुनिया को भविष्य की एक झलक देखने को मिल जाती है।



ऐसी ही एक कार है ‘होल्डेन्स हरीकेन’। 42 साल पहले मेलबर्न में इसे प्रदर्शित किया गया था, अब एक बार फिर मेलबर्न मोटर शो में इसे देखा जा सकता है। इसमें जो टेक्नोलॉजी दिखाई गई थीं, वे आज कारों के लिए स्टैंडर्ड मानक बन गई हैं। इसमें डिजिटल डिस्प्ले, मैग्नेटिक जीपीएस सिस्टम, रियर-व्यू सीसीटीवी कैमरा और हाइड्रोलिक दरवाजे लगे हैं। हाइड्रोलिक प्लेट्स के जरिए पूरी छत ऊपर उठ जाती है।



जनरल मोटर्स का एक सब डिवीजन था होल्डेन। उन्होंने इस कार का इंजन भी भविष्य के लिहाज से बनाया था। इसमें 259 एचपी का 4.2 लीटर होल्डेन वी8 इंजन लगाया गया था।



कार में कम्फरट्रॉन एयर कंडीशनिंग सिस्टम और ऑटो-सीक रेडियो लगा था, जिसे बटन घुमाकर ट्यून नहीं करना पड़ता था। पाथफाइंडर जीपीएस सिस्टम में चमकता हुआ तीर ड्राइवर को बताता था कि किस तरफ मुड़ना है और एक बजर आने वाले दोराहे की चेतावनी देता था। sabhar: bhaskar.com
 
 
 
 
 
 

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यह क्या..नौकरी के लिए अमेरिकी भी अपना देश छोड़ रहे हैं

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आंकड़े हैं गवाह 
मौजूदा समय में तकरीबन 63 लाख अमेरिकी विदेश में या तो पढ़ाई कर रहे हैं अथवा वहां नौकरी कर रहे हैं, यह अपने-आप में है एक नया रिकॉर्ड
आर्थिक सुस्ती से पीछा छुड़ाने के लिए खासकर ब्राजील, रूस, चीन व लैटिन अमेरिका जाना पसंद कर रहे हैं अमेरिका के निवासी

इससे क्या मिलता है संकेत 
फिलहाल आर्थिक संकट के साथ-साथ 'ब्रेन ड्रेन' की समस्या से भी जूझ रहा है अमेरिका



अब तक 'ब्रेन गेन' पर निर्भर रहा है अमेरिका ताकि वह दुनिया भर में अपना सिक्का जमाए रखने के सपने को पूरा कर सके

बुरा हाल
अमेरिका में बेरोजगारी लंबे समय से तकरीबन 9 फीसदी के उच्च स्तर पर है विराजमान
अमेरिका में आर्थिक सुस्ती का कहर बदस्तूर जारी रहने के कारण लाखों अमेरिकी परिवारों का बजट गया है बिगड़
इन परिवारों को अपने देश में छाई आर्थिक सुस्ती के जल्द खत्म होने का भरोसा अब नहीं रह गया है

नौकरी पाने के लिए लोग आम तौर पर कुछ भी कर गुजरने को तैयार हो जाते हैं। इसके लिए अगर अपना शहर या राज्य छोडऩा पड़ जाए तो लोग उसके लिए भी तैयार हो जाते हैं। यही हाल अब अमेरिका के निवासियों का भी हो गया है। जी हां, अमेरिकी भी अब अच्छी नौकरी पाने के लिए अपना देश छोडऩे पर विवश हो गए हैं। यही नहीं, किसी और मुल्क में बिजनेस की अच्छी गुंजाइश नजर आने पर भी अमेरिकी अब अपना वतन छोड़ देने से गुरेज नहीं कर रहे हैं।



लंबी आर्थिक सुस्ती से उबरने में अमेरिकी सरकार के बार-बार नाकामयाब साबित होने से ही काफी निराश होकर वहां के वाशिंदे इस तरह का कठोर कदम उठा रहे हैं। इसका मतलब यही हुआ कि जिस तरह से बिहार और उत्तर प्रदेश के लोगों को अच्छी नौकरी पाने के लिए अक्सर महानगरों का रुख करना पड़ता है, उसी तरह से अमेरिका के निवासियों को भी बढिय़ा नौकरी की तलाश में मजबूर होकर विदेश जाना पड़ रहा है।



ताजा आंकड़े इस बात के गवाह हैं। अमेरिका के विदेश मंत्रालय ने हाल ही में यह जानकारी दी है कि मौजूदा समय में तकरीबन 63 लाख अमेरिकी विदेश में या तो पढ़ाई कर रहे हैं अथवा वहां नौकरी कर रहे हैं। यह अपने-आप में एक नया रिकॉर्ड है। ऐसे में अगर यह कहा जाए कि अमेरिका को फिलहाल 'ब्रेन ड्रेन' की समस्या से भी जूझना पड़ रहा है, तो ऐसा कहना शायद गलत नहीं होगा।




यह निश्चित तौर पर अमेरिका के लिए भारी चिंता का विषय है। दरअसल, अमेरिका पिछले कई दशकों से दुनिया भर के अत्यंत प्रतिभाशाली लोगों को आकर्षक सैलरी पैकेज वगैरह का प्रलोभन देकर अपने यहां बुलाता रहा है ताकि इस तरह के 'ब्रेन गेन' की बदौलत वह नए-नए उन्नत उत्पाद तैयार कर दुनिया भर में अपना सिक्का जमाए रखने के अमेरिकी ड्रीम को पूरा कर सके।



भारत समेत कई देशों में रहने वाले लोग भी अमेरिका में ही नौकरी करना और वहां बसना पसंद करते रहे हैं। वहीं, अब नौबत यह आ गई है कि बड़ी संख्या में प्रतिभाशाली एवं महत्वाकांक्षी अमेरिकी बढिय़ा नौकरी की तलाश में विदेश का रुख कर रहे हैं ताकि आर्थिक सुस्ती के निराशाजनक माहौल से उन्हें निजात मिल सके।

यही नहीं, इस माहौल ने अमेरिका के उद्यमियों को भी भारी चिंता में डाल दिया है। आर्थिक सुस्ती से पीछा छुड़ाने के लिए अमेरिका के निवासी खासकर ब्राजील, रूस, चीन और लैटिन अमेरिका जाना पसंद क रहे हैं। जानी-मानी वेबसाइट 'एमएसएनबीसी.कॉम' में डाले गए एक खास लेख में इन बातों का जिक्र किया गया है।




इस लेख में यह भी बताया गया है कि आखिरकार यह नौबत क्यों आई है। एक बात तो यह है कि अमेरिका में बेरोजगारी लंबे समय से तकरीबन 9 फीसदी के उच्च स्तर पर विराजमान है। दूसरी बात यह है कि अमेरिका में आर्थिक सुस्ती का कहर बदस्तूर जारी रहने के कारण लाखों अमेरिकी परिवारों का बजट बिगड़ गया है। तीसरी बात यह है कि इन परिवारों को अपने देश में छाई आर्थिक सुस्ती के जल्द खत्म होने का भरोसा अब नहीं रह गया है।



इस वजह से अमेरिकी इकोनॉमी का आकर्षण अब काफी घट गया है। ऐसे में इस देश के ज्यादातर लोगों को यह समझ में नहीं आ रहा है कि आखिरकार उनके देश की अर्थव्यवस्था किस तरफ जा रही है? विदेश जाने वाले अमेरिकियों को यह पता है कि वहां जाने पर भाषा, संस्कृति, नौकरशाही वगैरह की बाधाएं आएंगी, लेकिन इसके बावजूद वे नौकरी करने के लिए विदेश जाने से बाज नहीं आ रहे हैं। sabhar: bhaskar.com

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पोर्न को मिले कानूनी अधिकार : पूनम पांडे

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केंद्रीय दूरसंचार और मानव संसाधन एवं विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, फेसबुक और याहू के अधिकारियों की एक बैठक बुलाकर कहा है कि धर्म से जुड़े लोगों, प्रतीकों के अलावा भारत के प्रधानमंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष जैसी राजनीतिक हस्तियों के खिलाफ अपमानजनक सामग्री की निगरानी करें।
सिब्बल ने यह भी कहा कि निगरानी के लिए सिर्फ तकनीक पर निर्भर न रहें बल्कि इसके लिए लोगों को लगाएं। कपिल सिब्‍बल के इस बयान के बाद लोगों ने आपत्ति जताई है लोगों का कहना है कि यह उनके स्‍वतंत्रता का हनन है।
वहीं इन दिनों इंटरनेट पर लोगों की पहली पंसद बनी पूनम पांडे ने कहा है कि कपिल सिब्‍बल इतना कोलावरी डी क्‍यों ?हमलोग नए जमाने के लड़के लड़कियां हैं। यह जेनरेशन काफी मैच्‍योर हो गया है।
सच तो यह है कि भारत तेजी से विकास कर रहा है। ऐसे में पोर्न को भारत में कानूनी मान्‍यता मिलनी चाहिए।
पूनम के इस टिवट पर लोगों ने आपत्ति जताई तो पूनम ने कहा कि मेरे कहने का मतलब पोर्न ब्रॉडकास्टिंग से था। sabhar : bhaskar.com

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पति की दरिंदगी कर देती है आत्मा तार-तार, कैसे करें औलाद को दुलार?

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हांगकांग. ऑस्ट्रेलिया के शोधकर्ताओं ने खुलासा किया कि 40 प्रतिशत महिलाएं जो बच्चे को जन्म देने के बाद अवसादग्रस्त हो जाती हैं इसके पीछे उनके पतियों द्वारा उनको दी जाने वाली शारीरिक और मानसिक प्रताडना जिम्मेदार होती है।

ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया में मडरेक बच्चों के अनुसंधान संस्थान की हन्ना वूलहाउस ने कहा, बच्चों को जन्म देने के बाद अवसादग्रस्त होने वाली महिलाओं का इलाज करने वाले स्वास्थ्य विशेषग्यों को ध्यान रखना चाहिए कि ऐसी महिलाओं के अवसादग्रस्त होने के पीछे उनके पतियों द्वारा उनके साथ की जाने वाली मानसिक और शारीरिक हिंसा भी जिम्मेदार हो सकती है।

वूलहाउस ने कहा कि ऐसी समस्याओं से जूझ रहे दम्पतियों को सलाह देकर या प्रताड़ित महिला को शरण देकर उनका इलाज किया जा सकता है।

इस खुलासे से पहले वूलहाउस ने पहली बार मां बनी 1,305 महिलाओं पर अपने साथियों के साथ अध्ययन किया और पाया कि बच्चे को जन्म देने के बारह महीने बाद लगभग 16 प्रतिशत महिलाओं में अवसाद की शिकायत पायी गयी।

अनुसंधान से यह भी स्पष्ट हुआ कि जिन लगभग 40 प्रतिशत महिलाओं में अवसाद के लक्षण दिखायी दिये उनके साथ उनके पतियों ने हिंसा की थी।

अध्ययन से यह भी पता चला कि अधिकतर महिलाओं में बच्चे को जन्म देने के छह माह बीत जाने के बाद अवसाद के लक्षण नजर आये। sabhar : bhaskar.com

 
 

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आखिरकार कैटरीना ने माना, 'हां सलमान के साथ थे मेरे संबंध, वो मेरे...'

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बॉलीवुड एक्ट्रेस कैटरीना कैफ ने आखिरकार कई बार खंडन करने के बाद स्वीकार कर ही लिया है कि वे और सलमान खान डेटिंग कर रहे थे।

एक मैगजीन को अपनी सफलता व रिश्तों के बारे में बताते हुए कैटरीना ने कहा कि सलमान खान के साथ उनके रिश्ते को लेकर वे बहुत सीरियस थीं। कपूर फैमिली के चश्मोचिराग रणबीर कपूर के साथ दो फिल्में करने के बाद उनका नाम जोड़ा जाने लगा। हालांकि रणबीर और कैट दोनों ने ही इससे इंकार कर दिया था।



इस बारे में कैटरीना ने कहा, "रणबीर के साथ डेटिंग की बातें महज अफवाहें थीं। हमने साथ में दो फिल्मों में काम किया जो हमारे लिए फायदेमंद रहीं। मैंने रिश्तों से अभी तक यही सिखा है कि यह बहुत अप्रत्याशित होते हैं।"

अभिनेताओं के बाद सबसे ज्यादा मांग वाली एक्ट्रेस कैटरीना ने यह भी स्पष्ट किया कि वह अभी सिंगल हैं। कैटरीना कहती हैं, "अभी, मैं सिंगल हूं और मेरा मानना है कि इन बातों पर न तो आपका नियंत्रण होता है और न इनकी भविष्यवाणी कर सकते हैं। मैं एक होपलेस रोमांटिक पर्सन हूं। प्यार देने और विश्वास करने का नाम होता है।"

ऐसा लगता है कि कैटरीना एकबार फिर से सलमान खान कैम्प में वापसी करना चाहती हैं। अब इस बात में कितनी सच्चाई है यह तो कैटरीना ही बेहतर बता सकती हैं।

वैसे फिलहाल कैट और सलमान फिल्म एक था टाइगर में साथ काम कर रहे हैं। इसके साथ ही उनकी आमिर और शाहरूख खान के साथ फिल्में पाइपलाइन में हैं। sabhar : bhaskar.com

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