गुरुवार, 11 मई 2017
मंगलवार, 9 मई 2017
ऐसा भी होता है! इस महिला को याद है जन्म के बाद की हर बात
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मई 09, 2017 in

नई दिल्ली : हमें अपने जीवन और आसपास हुई कुछ अहम घटनाओं के अलावा शायद ही कोई बीती बात याद रहती है, लेकिन ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड की रबेका शैरॉक (27) के पास अद्भुत स्मरणशक्ति है. उनके मुताबिक, 12 दिन की उम्र से लेकर अब तक की हर दिन की बात याद है. यहां तक कि उन्होंने किस दिन क्या पहना था और उस दिन का मौसम कैसा था तक बता देती हैं.रबेका बताती हैं कि उनके जन्म के 12वें दिन उनके माता-पिता ने उन्हें ड्राइविंग सीट पर रखा था और उनकी तस्वीर ली थी. रबेका को अपना पहला जन्मदिन भी याद है. उन्होंने बताया कि वह जन्मदिन पर रोने लगी थीं, क्योंकि उनकी ड्रेस उन्हें असहज लग रही थी.डेली मेल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, रबेका के पास हाइली सुपीरियर ऑटोबायॉग्रफिकल मेमोरी (एचएसएएम) है. ऐसी स्मरणशक्ति वाले लोगों के पास असाधारण यादें संजोकर रखने की क्षमता होती है. बताया जा रहा है कि दुनियाभर में सिर्फ 80 लोगों के पास ऐसी स्मरणशक्ति है. रबेका को हैरी पॉटर बुक का एक-एक शब्द याद है. उनकी अपने जीवन से जुड़ी सबसे पहली बात जो याद है वह उनका जन्म है. उन्हें याद कि उनके पहले जन्मदिन पर उन्हें क्या गिफ्ट मिला था. उन्होंने ये सारी बातें अपने ब्लॉग पर लिखी हैं.
ज़ी न्यूज़ डेस्क
नई दिल्ली : हमें अपने जीवन और आसपास हुई कुछ अहम घटनाओं के अलावा शायद ही कोई बीती बात याद रहती है, लेकिन ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड की रबेका शैरॉक (27) के पास अद्भुत स्मरणशक्ति है. उनके मुताबिक, 12 दिन की उम्र से लेकर अब तक की हर दिन की बात याद है. यहां तक कि उन्होंने किस दिन क्या पहना था और उस दिन का मौसम कैसा था तक बता देती हैं.रबेका बताती हैं कि उनके जन्म के 12वें दिन उनके माता-पिता ने उन्हें ड्राइविंग सीट पर रखा था और उनकी तस्वीर ली थी. रबेका को अपना पहला जन्मदिन भी याद है. उन्होंने बताया कि वह जन्मदिन पर रोने लगी थीं, क्योंकि उनकी ड्रेस उन्हें असहज लग रही थी.डेली मेल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, रबेका के पास हाइली सुपीरियर ऑटोबायॉग्रफिकल मेमोरी (एचएसएएम) है. ऐसी स्मरणशक्ति वाले लोगों के पास असाधारण यादें संजोकर रखने की क्षमता होती है. बताया जा रहा है कि दुनियाभर में सिर्फ 80 लोगों के पास ऐसी स्मरणशक्ति है. रबेका को हैरी पॉटर बुक का एक-एक शब्द याद है. उनकी अपने जीवन से जुड़ी सबसे पहली बात जो याद है वह उनका जन्म है. उन्हें याद कि उनके पहले जन्मदिन पर उन्हें क्या गिफ्ट मिला था. उन्होंने ये सारी बातें अपने ब्लॉग पर लिखी हैं.
ज़ी न्यूज़ डेस्क
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आध्यात्मिक काम विज्ञान
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मई 09, 2017 in आध्यात्मिक, काम विज्ञान
यद्यपि भारतीय धर्मग्रन्थों में ब्रह्मचर्य पालन की बड़ी महिमा बरवान की गयी है। परंतु आध्यात्म द्वारा नियन्त्रित जीवन में कामेच्छा की उचित भूमिका को अस्वीकार नहीं किया गया है। उसकी उचित मांग स्वीकार की गयी है किंतु उसे आवश्यकता से अधिक महत्व देने से इंकार किया गया है। जब व्यक्ति आध्यात्मिक परिपक्वता प्राप्त कर लेता है तब यौन-आकर्षण स्व्यं ही विलीन हो जाता है; उसका निग्रह करने के लिए मनुष्य को प्रयत्न नहीं करना पड़ता, वह पके फल की भाँति झड जाता है। इन विषयों में मनुष्य को अब और रूचि नहीं रह जाती। समस्या केवल तभी होती है जब मनुष्य चाहे सकारात्मक चाहे नकारात्मक रूप में कामेच्छा में तल्लीन या उससे ग्रस्त होता है।) दोनों ही परिस्थितियों में मनुष्य यौन चिंतन करता है व ऊर्जा का उपव्यय करता रहता है।इस संदर्भ में श्री अरविन्द कहते हैं कि जब हम यौन ऊर्जा के सरंक्षण की या ब्रह्मचर्य की बात करते हैं तब प्रश्न यह नहीं होता कि कामवृत्ति बुरी है या अच्छी, पाप है या पुण्य। यह तो प्रकृति की एक देन है। प्रत्येक मानव शरीर में कुछ द्रव्य होते हैं, ज्यों-ज्यों शरीर का विकास होता है वे संचित होते जाते हैं शारीरिक विकास की एक विशेष अवस्था आने पर प्रकृति जोर लगाने व दबाव डालने का तरीका काम में लेती है ताकि वे यौन द्रव्य बाहर निक्षिप्त कर दिए जांए और मानव जाति की अगली कडी (पीढ़ी) का निर्माण हो सकें।
अब जो व्यक्ति प्रकृति का अतिक्रमण करना चाहता है, प्रकृति के नियम का अनुसरण करने, और प्रकृति की सुविधाजनक मंथर गति आगे बढ़ने से संतुष्ट नहीं होता वह अपनी शक्ति के संचय संरक्षण के लिए यत्नशील होता है, जिसे वह बाहर निक्षिप्त नहीं होने देता। यदि इस शक्ति की तुलना पानी से की जाए तो जब यह संचित हो जाती है तब शरीर में गरमी की, उष्णता की एक विशेष मात्रा उत्पन्न होती हैं यह उष्णता ‘तपस्’ प्रदीप्त ऊष्मा कहलाती है। वह संकल्प शक्ति को, कार्य निष्पादन की सक्रिय शक्तियों को अधिक प्रभावशाली बनाती है। शरीर में अधिक उष्णता, अधिक ऊष्मा होने से मनुष्य अधिक सक्षम बनता है, अधिक सक्रियतापूर्वक कार्य संपादन कर सकता है और संकल्प शक्ति की अभिवृद्धि होती है। यदि वह दृढ़तापूर्वक इस प्रयत्न में लगा रहे, अपनी शक्ति को और भी अधिक संचित करता रहे तो धीरे-धीरे यह ऊष्मा प्रकाश में, ‘तेजस्’ में रूपांतरित हो जाती है। जब यह शक्ति प्रकाश में परिवर्तित होती है तब मस्तिष्क स्वयं प्रकाश से भर जाता है, स्मरणशक्ति बलवान हो जाती है और मानसिक शक्तियों की वृद्धि और विस्तार होता है। यदि रूपातंर की अधिक प्रारंभिक अवस्था में सक्रिय शक्ति को अधिक बल मिलता है तो प्रकाश में परिवर्तन रूपांतर की इस अवस्था में मन की, मस्तिष्क की शक्ति में वृद्धि होती है। इससे भी आगे शक्ति-संरक्षण की साधना से ऊष्मा और प्रकाश दोनों ही विद्युत् में, एक आंतरिक वैद्युत् शक्ति में परिवर्तित हो जाते हैं जिसमें संकल्प शक्ति और मस्तिष्क दोनों की ही प्रवृद्ध क्षमताएं संयुक्त हो जाती है। दोनों ही स्तरों पर व्यक्ति को असाधारण सामथ्र्य प्राप्त हो जाती है। स्वाभाविक है कि व्यक्ति और आगे बढ़ता रहेगा और तब यह विद्युत् उस तत्व में बदल जाती है जिसे 'ओजस्' कहते हैं। ओजस् अस आद्या सूक्ष्म ऊर्जा ‘सर्जक ऊर्जा’ के लिये प्रयुक्त संस्कृत शब्द है जो भौतिक सृष्टि की रचना से पूर्व वायुमडंल में विद्यमान होती है। व्यक्ति इस सूक्ष्म शक्ति को जो एक सृजनात्मक शक्ति है, प्राप्त कर लेता है और वह शक्ति उसे सृजन की व निर्माण की यह असाधारण क्षमता प्रदान करती है। (सुंदर जीवन, माधव पण्डित पाण्डिचरी)
हिंदू धर्म, संभोग से समाधि संभव है
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मई 09, 2017 in संभोग से समाधि संभव है?, हिंदू धर्म
हिंदू धर्म में आद्यात्मिक काम विज्ञानं का बहुत महत्व है तंत्र विद्या जिसके जनक भगवान शिव माने जाते है पुरुष और प्रकृति के सयोग पे आधारित है सम्भोग से समाधी में जो विचार शून्यता की अनुभूति सेक्स के चरम पे होती है वही विचार शून्यता की अनुभूति समाधी में होती है धयान की ११२ विधियों में से सम्भोग से समाधी भी एक बिधि है सम्भोग के चरम में जब विचार शून्य हो जाते है स्त्री पुरुष को शिव शक्ति का स्वरुप मानकर साधना मन को एकाग्र करने के लिए की जाती है यानि ऋणात्मक शक्ति धनात्मक शक्ति एक हो जाती है जो की ब्रम्ह की अवस्था है हर कण कण में शिव और शक्ति का वास है काम सूत्र की रचना नंदी ने शिव और पार्वती के प्रणय सम्बाद पे आधारित भगवान शिव की इच्छा पे संसार के लिए किया ताकि लोगो को आध्यात्मिक काम का ज्ञान मिल सके इसी पे आधारित वात्सायन ने काम सूत्र की रचना की और चंदेल राजाओ ने खजुराहो के काम मंदिर की स्थापना की आगे चल के ओशो ने सम्भोग से समाधी का समर्थन किया और इसकी विवेचना की
सोमवार, 20 मार्च 2017
यह हैं खुशहाल शादीशुदा जिंदगी के 6 मंत्र
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मार्च 20, 2017 in

कई बार सबकुछ होते हुए भी शादीशुदा जिंदगी टूटने के कगार पर पहुंच जाती है। पति-पत्नी चाहते तो यही हैं कि वे साथ रहें लेकिन एक बार जब चीजें बिगड़ना शुरू होती हैं तो बिगड़ती ही चली जाती हैं।
असलियत यह है कि शादीशुदा जिंदगी को संभालकर रखना थोड़ा मुश्किल जरूर है लेकिन अगर समझदारी से काम लिया जाए तो हर समस्या को दूर किया जा सकता है। यह वो 6 मंत्र हैं, जिनकी मदद से आप अपने वैवाहिक जीवन को टूटने से बचा सकते हैं।
- माना कि वह आपके पति हैं लेकिन हर समय उन्हें काबू करने की कोशिश न करें। उन्हें उनका स्पेस जरूर दें। इससे आपका रिश्ता मजबूत होगा।
- अगर आपको लगता है कि प्यार ही सबकुछ है तो आपको बता दें कि आप गलत हैं। प्यार का मतलब एक-दूसरे को इज्जत देना है। अगर आप एक-दूसरे को इज्जत देते हैं और सार्वजनिक जगहों पर भी एक-दूसरे की इज्जत का ख्याल रखते हैं तो इससे अच्छा कुछ नहीं। ये बातें आपके रिश्ते को मजबूत करेंगी। हर रिश्ते में कुछ समझौते करने पड़ते हैं। अगर आपको भी इस रिश्ते को बचाने के लिए कुछ समझौते करने पड़ें तो इसमें कोई बुराई नहीं है। आमतौर पर समझौता करने को कमजोरी से जोड़कर देखा जाता है लेकिन ऐसा नहीं है।
- अमूमन लोगों को लगता है कि रुपये-पैसे की बात करना बेकार है लेकिन कई बार रिश्तों में दरार ही इस वजह से पड़ जाती है। ऐसे में कोशिश करनी चाहिए कि आपके फाइनेंशियल मामले एक-दूसरे के लिए स्पषट हों और इसमें कोई झूठ न हो।
- अपने पति के घरवालों को सम्मान दें। खासतौर पर उनके माता-पिता को।अगर आप चाहते हैं कि आपका रिश्ता मजबूत हो तो कोशिश कीजिए कि आप अपने पार्टनर के परिवार वालों को सम्मान दें और उनसे जुड़े रहें। ऐसा करके आप अपने पार्टनर के और करीब हो सकेंगें।
- अगर आप दोनों के बीच का रोमांस खत्म हो गया है तो यह वाकई चिंता की बात है। चाहे कुछ हो जाए कोशिश कीजिए कि आप दोनों के बीच का प्यार जिंदा रहे क्योंकि यही आप दोनों को बांधे रखेगा।
कई बार सबकुछ होते हुए भी शादीशुदा जिंदगी टूटने के कगार पर पहुंच जाती है। पति-पत्नी चाहते तो यही हैं कि वे साथ रहें लेकिन एक बार जब चीजें बिगड़ना शुरू होती हैं तो बिगड़ती ही चली जाती हैं।
असलियत यह है कि शादीशुदा जिंदगी को संभालकर रखना थोड़ा मुश्किल जरूर है लेकिन अगर समझदारी से काम लिया जाए तो हर समस्या को दूर किया जा सकता है। यह वो 6 मंत्र हैं, जिनकी मदद से आप अपने वैवाहिक जीवन को टूटने से बचा सकते हैं।
- माना कि वह आपके पति हैं लेकिन हर समय उन्हें काबू करने की कोशिश न करें। उन्हें उनका स्पेस जरूर दें। इससे आपका रिश्ता मजबूत होगा।
- अगर आपको लगता है कि प्यार ही सबकुछ है तो आपको बता दें कि आप गलत हैं। प्यार का मतलब एक-दूसरे को इज्जत देना है। अगर आप एक-दूसरे को इज्जत देते हैं और सार्वजनिक जगहों पर भी एक-दूसरे की इज्जत का ख्याल रखते हैं तो इससे अच्छा कुछ नहीं। ये बातें आपके रिश्ते को मजबूत करेंगी। हर रिश्ते में कुछ समझौते करने पड़ते हैं। अगर आपको भी इस रिश्ते को बचाने के लिए कुछ समझौते करने पड़ें तो इसमें कोई बुराई नहीं है। आमतौर पर समझौता करने को कमजोरी से जोड़कर देखा जाता है लेकिन ऐसा नहीं है।
- अमूमन लोगों को लगता है कि रुपये-पैसे की बात करना बेकार है लेकिन कई बार रिश्तों में दरार ही इस वजह से पड़ जाती है। ऐसे में कोशिश करनी चाहिए कि आपके फाइनेंशियल मामले एक-दूसरे के लिए स्पषट हों और इसमें कोई झूठ न हो।
- अपने पति के घरवालों को सम्मान दें। खासतौर पर उनके माता-पिता को।अगर आप चाहते हैं कि आपका रिश्ता मजबूत हो तो कोशिश कीजिए कि आप अपने पार्टनर के परिवार वालों को सम्मान दें और उनसे जुड़े रहें। ऐसा करके आप अपने पार्टनर के और करीब हो सकेंगें।
- अगर आप दोनों के बीच का रोमांस खत्म हो गया है तो यह वाकई चिंता की बात है। चाहे कुछ हो जाए कोशिश कीजिए कि आप दोनों के बीच का प्यार जिंदा रहे क्योंकि यही आप दोनों को बांधे रखेगा।
sabhar :नवभारतटाइम्स.कॉम
शुक्रवार, 17 फ़रवरी 2017
वापसी कर रहा है Nokia 3310, इसी महीने होगा रीलॉन्च
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फ़रवरी 17, 2017 in

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नोकिया अपने बेहद पॉप्युलर रहे मोबाइल फोन Nokia 3310 को रीलॉन्च करने जा रहा है। अपनी मजबूती और लंबी बैटरी लाइफ के लिए पहचाने जाने वाले इस फोन ने मोबाइल फोन्स के नए युग की शुरुआत की थी। इससे पहले के मोबाइल फोन साइज में बहुत बड़े होते थे। आज भी लोग सबसे 'भरोसेमंद' फोन के तौर पर इसकी मिसाल देते हैं।
Nokia 3310 को आज से 17 साल पहले 2000 में लॉन्च किया गया था। कंपनी इसे इसलिए लॉन्च कर रही है ताकि लोग इसे अपने सेकंडरी फोन के तौर पर इस्तेमाल कर सकें। यानी जिन लोगों के पास पहले ही स्मार्टफोन है, वे इसे भरोसेमंद बैटरी वाले डिवाइस के तौर पर इस्तेमाल कर सकें।
गैजट्स के बारे में जानकारियां लीक करने वाले इवान ब्लास का कहना है कि 3310 के नए वर्जन को 59 यूरो यानी करीब 4000 रुपये में लॉन्च किया जाएगा। इवान का कहना है कि इसी महीने स्पेन के बार्सिलोना में होने जा रहे टेक इवेंट मोबाइल वर्ल्ड कांग्रेस (MWC2017) में इससे पर्दा उठाया जाएगा।
Nokia 3310 को आज से 17 साल पहले 2000 में लॉन्च किया गया था। कंपनी इसे इसलिए लॉन्च कर रही है ताकि लोग इसे अपने सेकंडरी फोन के तौर पर इस्तेमाल कर सकें। यानी जिन लोगों के पास पहले ही स्मार्टफोन है, वे इसे भरोसेमंद बैटरी वाले डिवाइस के तौर पर इस्तेमाल कर सकें।
गैजट्स के बारे में जानकारियां लीक करने वाले इवान ब्लास का कहना है कि 3310 के नए वर्जन को 59 यूरो यानी करीब 4000 रुपये में लॉन्च किया जाएगा। इवान का कहना है कि इसी महीने स्पेन के बार्सिलोना में होने जा रहे टेक इवेंट मोबाइल वर्ल्ड कांग्रेस (MWC2017) में इससे पर्दा उठाया जाएगा।
खुशखबरी : अब पेड़ पर फलेंगी बिजलियां!
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फ़रवरी 17, 2017 in
वाशिंगटन : पैसे भले पेड़ पर न फलें, लेकिन जल्द ही पेड़ पर बिजली फलेगी क्योंकि अब वैज्ञानिकों ने एकबायोमेट्रिक पेड़ विकसित किया है जिसमें उसके कृत्रिम पत्तियों से हवा गुजरने से बिजली पैदा होगी।
अमेरिका की आइओवा स्टेट युनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने यह तकनीक विकसित की है। इससे लोग बिना किसी बड़े पवन टर्बाइन के बिजली के अपने घरेलू उपकरण चला सकेंगे। वैज्ञानिकों ने जो उपकरण बनाया है जो किसी प्रोपेलर या कॉटनवुड के पेड़ की शाखाओं और पत्तियों से मिलता जुलता है और जब तेज हवा में उसकी कृत्रिम पत्तियां उड़ती हैं तो बिजली पैदा होती है।
इस उपकरण के डिजाइन का नेतृत्व करने वाले माइक मैकक्लोस्की ने कहा कि यह पवन टरबाइन की जगह नहीं लेगा, लेकिन इससे तेज हवा को बिजली में बदलने वाली छोटी मशीनों का एक बाजार बन सकता है।
sabhar :http://zeenews.india.com
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