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शुक्रवार, 7 अगस्त 2015

दुनिया में पहली बार जापान में रोबोट्स की शादी

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दुनिया में पहली बार कोई रोबोट जोड़ा शादी के बंधन में बंध गया है। यह शादी जापान की राजधानी तोक्यो में हुई। रोबोट दूल्हे का नाम फ्रायोस और दुल्हन का नाम युक्रिन था। दोनों ने पारंपरिक परिधान पहन रखे थे।
यह आयोजन मावा डेंकी नामक कंपनी ने करवाया था। इलेक्ट्रॉनिक एक्सेसरीज बनाने वाली इस कंपनी ने फ्रायोस को डिजाइन किया है। युक्रिन की शक्ल काफी कुछ जापान की पॉप स्टार युकी काशीवागी से मिलती है लेकिन कार्यक्रम में उसे रोबोरिन के नाम से ही संबोधित किया गया। जानकारों के अनुसार, ऐसा कॉपीराइट की कानूनी अड़चनों से बचने के लिए किया गया।
शादी के कार्ड
शादी में शामिल हुए लोगों के अनुसार, इस कार्यक्रम के लिए शादी के कार्ड भी छपवाए गए थे। इसमें एक दिल में दोनों रोबोट की फोटो एक साथ छापी गई थी।
तोक्यो में हुए इस फंक्शन में दूल्हे फ्रायोस और दुल्हन युक्र...

परंपरागत पहनावे
तोक्यो में हुए इस फंक्शन में दूल्हे फ्रायोस और दुल्हन युक्रिन ने पारंपरिक परिधान पहन रखे थे। फंक्शन में कुल 100 अलग-अलग तरह के रोबोट्स दोनों ओर से शामिल हुए थे। इनमें से ज्यादातर को परंपरागत परिधान पहनाए गए थे। इनमें साफ्टबैंक का प्रसिद्ध रोबोट पेपर भी था। शादी पेपर ने ही करवाई।
रोबोट जोड़े के कई दोस्त भी फंक्शन में पहुंचे

केक काटा, किस किया
शादी की रस्मों के बाद फ्रायोस और युक्रिन ने केक काटा और फिर एक-दूसरे को किस भी किया। हालांकि यह नहीं पता है कि यह केक असली था या नकली। शादी के बाद ऑटोमेटेड ऑक्रेस्ट्रा ने दोनों के फर्स्ट डांस के लिए गाना भी बजाया।
फ्रायोस और युक्रिन ने केक काटा और एक-दूसरे को किस भी किया
 
इसके अलावा एक छोटा रोबोट पाल्मी भी था जो माइक पर कार्यक्रम का संचालन कर रहा था। दुल्हन युक्रिन के साथ एक ब्राइड्समेड भी थी।

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रीढ़ की हड्डी में होता है छोटा दिमाग

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वॉशिंगटन

अमेरिकी शोधकर्ताओं ने मनुष्यों की रीढ़ की हड्डी में एक छोटे मस्तिष्क का पता लगाया है। यह हमें भीड़ के बीच से गुजरते वक्त या सर्दियों में बर्फीली सतह से गुजरते वक्त संतुलन बनाने में मदद करती है और फिसलने या गिरने से बचाती है। इस तरह के कार्य अचेतन अवस्था में होते हैं।

हमारी रीढ़ की हड्डी में मौजूद तंत्रिका कोशिकाओं के समूह संवेदी सूचनाओं को इकट्ठा कर मांसपेशियों के आवश्यक समायोजन में मदद करते हैं। कैलिफोर्निया स्थित एक स्वतंत्र वैज्ञानिक अनुसंधान संस्थान 'साल्क' के जीवविज्ञानी मार्टिन गोल्डिंग के मुताबिक 'हमारे खड़े होने या चलने के दौरान पैर के तलवों के संवेदी अंग इस छोटे दिमाग को दबाव और गति से जुड़ी सूचनाएं भेजते हैं।'

गोल्डिंग ने कहा, 'इस अध्ययन के जरिए हमें हमारे शरीर में मौजूद 'ब्लैक बॉक्स' के बारे में पता चला। हमें आज तक नहीं पता था कि ये संकेत किस तरह से हमारी रीढ़ की हड्डी में इनकोड और संचालित होते हैं।'

प्रत्येक मिलिसेकंड पर सूचनाओं की विभिन्न धाराएं मस्तिष्क में प्रवाहित होती रहती हैं, इसमें शोधकर्ताओं द्वारा खोजे गए संकेतक भी शामिल हैं। अपने अध्ययन में साल्क वैज्ञानिकों ने इस संवेदी मोटर नियंत्रण प्रणाली के विवरण से पर्दा हटाया है। अत्याधुनिक छवि प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल से इन्होंने तंत्रिका फाइबर का पता लगाया है, जो पैर में लगे संवेदकों की मदद से रीढ़ की हड्डी तक संकेतों को ले जाते हैं।

इन्होंने पता लगाया है कि ये संवेदक फाइबर आरओआरआई न्यूरॉन्स नाम के तंत्रिकाओं के अन्य समूहों के साथ रीढ़ की हड्डी में मौजूद होते हैं। इसके बदले आरओआरआई न्यूरॉन मस्तिष्क के मोटर क्षेत्र में मौजूद न्यूरॉन से जुड़े होते हैं, जो मस्तिष्क और पैरों के बीच एक महत्वपूर्ण संबंध हो सकते हैं।

गोल्डिंग की टीम ने जब साल्क में आनुवांशिक रूप से परिवर्धित चूहे की रीढ़ की हड्डी में आरओआरआई न्यूरॉन को निष्क्रिय कर दिया तो पाया कि इसके बाद चूहे गति के बारे में कम संवेदनशील हो गए।

गोल्डिंग की प्रयोगशाला के लिए शोध करने वाले शोधकर्ता स्टीव बॉरेन ने कहा, 'हमें लगता है कि ये न्यूरॉन सभी सूचनाओं को एकत्र कर पैर को चलने के लिए निर्देश देते हैं।'

यह शोध तंत्रिकीय विषय और चाल के नियंत्रण की निहित प्रक्रियाओं व आस-पास के परिवेश का पता लगाने के लिए शरीर के संवेदकों पर विस्तृत विचार पेश करती है। यह शोध 'सेल' पत्रिका में प्रकाशित किया गया है।

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क्या थम सकती है हमारी उम्र?

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लंदन
हमेशा जवान बने रहने की ख्वाहिश आखिर किसे नहीं होती! लेकिन चेहरे की झुर्रियां और ढीली होती हमारी मांसपेशियां इस ख्वाहिश पर जबर्दस्त आघात सी लगती हैं। लेकिन हो सकता है, कि आने वाले कुछ समय में ये तमन्ना हकीकत में तब्दील हो जाए।

उम्र को रोक कर रखने वाली एक नई दवा पांच साल के भीतर आ सकती है । ये कहना है उन वैज्ञानिकों का जिन्होंने एक ऐसे एन्जाइम का पता लगाया है, जो हमारी उम्र संबंधी परेशानियों को बढ़ाने और मसल्स को कमजोर करने के लिए जिम्मेदार होता है।

बर्मिंघम यूनिवर्सिटी के इन शोधकर्ताओं के अनुसार यदि इस एन्जाइम के प्रभाव को एक समय के बाद रोक दिया जाए, तो उम्र पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ना बंद हो जाएगा। इस एन्जाइम का नाम '11 बीटा-एचएसडी 1' है। यह शरीर की मसल्स को समय के साथ-साथ ढीला और कमजोर करने का काम करता है। हाल ही में किए गए शोध में इसी एन्जाइम की भूमिका को पूरी तरह से समझा गया है।

शोध में पाया गया कि '11 बीटा-एचएसडी 1' एन्जाइम का उत्सर्जन 20 से 40 साल की महिलाओं की तुलना में 60 साल से ऊपर की महिलाओं में 2.72 गुना ज्यादा हो जाता है। जैसे-जैसे एन्जाइम शरीर में बढ़ता है, वैसे-वैसे शरीर ढीला पड़ने लगता है, प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है और बॉडी कमजोर होती जाती है। हालांकि शोध में पुरुषों के भीतर इस एन्जाइम में कोई बदलाव नहीं देखा गया। इसके कारणों का फिलहाल पता नहीं चल सका है।

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शुक्रवार, 17 अप्रैल 2015

नारी के शरीर के आकार वाला दुर्लभ फूल 20 साल में खिलता

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नई दिल्ली. नारीलता नाम के फूल की खासियत है कि यह महिला के शरीर के आकार का होता है. यह फूल भारत के हिमालयी क्षेत्रों में पाया जाता है.
2 दशकों यानी 20 साल में खिलने वाले इस फूल ने लोगों को पिछले दिनों हैरान कर दिया. इस फूल का आकार नारी के शरीर के आकार में दिखा.
नारी शरीर के आकार में दिखने वाले इस फूल को लेकर खूब विवाद भी हुआ. इसे हकीकत नहीं मानने वालों का कहना है कि ये फूल किसी कंप्यूटर सॉफ्टवेयर की मदद से बनाया गया है जबकि इस हकीकत को मनाने वाले इसे सबसे ज्यादा दुर्लभ किस्म का फूल बताते हैं.
आपको बता दें कि ऑर्किडासिये परिवार का ये फूल हाबेनरिया प्रजाति का है. हाबेनरिया की सभी प्रजातियों के फूल ट्यूबर युक्त स्थलीय ऑर्किड होते हैं. ये फूल श्रीलंका में लियाथाबरा माला नाम से जाना जाता है, जिसकी 10 प्रजातियां है. वहीं, थाईलैंड में इस फूल के पौधे को नारीपोल कहा जाता है sabhar :http://www.palpalindia.com/

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सोमवार, 5 जनवरी 2015

समुद्र के अंदर बसेगा शहर, सतह से तल तक होंगे घर ही घर!

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कंस्ट्रक्‍शन कंपनी का आया प्लान

अगर वैज्ञानिक मंगल ग्रह पर रहने के रास्ते तलाश कर रहें हैं तो ऐसी भी कंपनी है जो धरती पर ही समुद्र के अंदर पूरा एक शहर बसाने का प्लान बना चुकी है।

मेट्रो
 में छपी खबर के मुताबिक जापान की कंस्ट्रक्‍शन कंपनी शिंमिजू कॉरपोरेशन समुद्र के भीतर एक शहर बनाने की पूरी तैयारी कर चुकी है।

उनके मुताबिक ये शहर समुद्र के सतह से शुरू होगा और उसके तल तक जाएगा। इसका आकार किसी स्प्रिंग जैसा स्पाइरल होगा और इसके हर स्पाइरल पर लगभग 5000 लोगों के रहने की व्यवस्‍था होगी

कंपनी ने इस नई सिटी के लिए अपना ब्लूप्रिंट बनाया है। साल 2030 के आने तक अगर सबकुछ वो वक्त के अनुसार कर पाए, तो लोगों को पानी के अंदर भी बसने का मौका दे देंगे।
    2030 तक होगा रेडी
ये सभी घर वाटरटाइट होंगे और इनमें पानी नहीं भरेगा। समुद्र के अंदर का तापमान या मंजर में बदलाव घरों को बिल्कुल प्रभावित नहीं होने देगी।

इस प्रोजेक्ट का खर्च 16.4 बिलियन पाउंड तक बताया जा रहा है। कंपनी का कहना है कि इस तरह के रिहायशी इलाके में अंडरसी डॉकिंग सिस्टम के इस्तेमाल से चीजें समुद्र के अंदर तक सप्लाई की जा सकेंगी।

कार्बनडाइऑक्साइड जैसी गैस सूक्ष्म जीवों के जरिए पैदा करेंगे। समुद्र के भीतर बसा शहर पानी के अंदर नौ मील तक गहरा होगा।
sabhar :http://www.amarujala.com/

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VIDEO: 100 साल की बूढ़ी महिला सेकेंडों में बनी फिर जवान

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 फोटोशॉप का कमाल

अगर किसी 100 साल की बूढ़ी महिला को एकदम से 20 साल की बना दिया जाए, तो सोचो कैसा हो?

अडोब फोटोशॉप को हम बिगड़ी हुई चीजें सुधारने के लिए तो जानते ही हैं। लेकिन इस बार फोटोशॉप की मदद से एक 100 साल की बूढ़ी महिला की कायापलट कर दी गई है।

मेट्रो
 के मुताबिक फोटोशॉप में एक्सपर्ट लोगों ने मिलकर एक बूढ़ी महिला की तस्वीर को बदल डाला और उसे 20 साल जैसा बना दिया।

यकीन ही नहीं होता कि ये महिला इतनी खूबसूरत रही होगी। बूढ़ापे जवानी के ऊपर एक दिन कैसे हावी हो जाता है, आप यहां देखकर स्तब्‍ध रह जाएंगे।

 रूला दिया वीडियो ने

बजफीड से बात करते हुए एक आर्टिस्ट ने बताया कि इसको देखने वाले कई लोग रो पड़े। उन्हें समझ में आया कि कैसे सबका जवानी वाला हंसता-खेलता जवान चेहरे बुढ़ापे की देन चढ़ जाता है।

कई बूढ़े लोग तो इस वीडियो को देखकर अपनी जवानी के दिन याद करने लगे। वहीं एक टीचर ने फोटोशॉप आर्टिस्ट से संपर्क किया और बताया कि वो उनके इस अनोखे वीडियो से बच्चों को ऐसी ही चीजें बनाना सिखाना चाहती हैं।



हांलाकि कई ऐसे भी लोग हैं जिन्होंने इस काम को गलत कहा और इसको बहुत बुरा माना। उनका कहना था कि वीडियो बस एक झूठ है जिसे लोग ज्यादा ही तूल दे रहे हैं।




sabhar :http://www.amarujala.com/

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शनिवार, 3 जनवरी 2015

तीसरा स्तन पाने के लिए महिला ने खर्च किए 20 हजार डॉलर

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तीसरा स्तन पाने के लिए महिला ने खर्च किए 20 हजार डॉलर

फोटो सौजन्य : जैस्मिन के फेसबुक वाल से
ज़ी मीडिया ब्यूरो
न्यूयार्क : अमेरिका में फ्लोरिडा की एक मसाज थेरपिस्ट ने एक और अतिरक्ति स्तन पाने के लिए सर्जरी कराई है। तीसरा स्तन पाने के लिए उसने 20 हजार डॉलर खर्च किए हैं। मसाज थेरपिस्ट का नाम जैस्मिन ट्राइडेविल है जो 'एमटीवी' के शो में आना चाहती है। 21 वर्षीय जैस्मिन ने कुछ महीने पहले सर्जरी कराई है।
वेबसाइट हफिंगटन पोस्ट के मुताबिक जैस्मिन को तीसरा स्तन पाने के लिए काफी मुश्किलों से गुजरना पड़ा। इस सर्जरी के लिए उसने 50 से 60 डॉक्टरों से संपर्क किया था लेकिन इन सभी डॉक्टरों ने सर्जरी करने से इंकार कर दिया। डॉक्टरों ने कहा कि यह उनके पेशे के खिलाफ है।
वेबसाइट के मुताबिक जैस्मिन ने कहा कि इस सर्जरी के लिए उसे पैसों की व्यवस्था करने में दो साल का समय लग गया। सर्जरी के लिए उसने दो साल तक पैसे जोड़े।
जैस्मिन ने रियल रेडियो 104.1 के साथ बातचीत में कहा, 'मेरा जीवन का सपना एमटीवी के एक शो में शरीक होना है। मैंने इसके लिए एक-एक पैसा जोड़ा है।' जैस्मिन ने इस बात से इंकार किया है कि उसने यह सर्जरी नाम और शोहरत के लिए कराई है।
जैस्मिन ने कहा, 'मैंने तीसरे स्तन के लिए इसलिए सर्जरी कराई क्योंकि मैं पुरुषों के लिए भद्दा दिखनी चाहती थी। क्योंकि मैं अब किसी के साथ डेट नहीं करना चाहती।' मसाज थेरपिस्ट ने कहा कि सर्जरी कराने के बाद से उसके परिवार के लोग उससे नाराज हैं। उसकी मां और बहन उससे बातचीत नहीं करेंगी और पिता शर्मिंदा होंगे।  
 sabhar :http://zeenews.india.com/

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