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मंगलवार, 1 अगस्त 2023

एक निएंडरथल, आधुनिक मानव संकर?

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एक बच्चे के कंकाल की खोज से कैसे पता चला कि आधुनिक मानव निएंडरथल के साथ प्रजनन करते थे।

आधुनिक मानव का दो और पुरातन मानवों से अंतर्संबंध हुआ

एक नए अध्ययन से पता चला है कि निएंडरथल और डेनिसोवन्स के अलावा, आधुनिक मानव दो अन्य विलुप्त प्रजातियों के साथ भी प्रजनन करते हैं, जिन्हें EH1 और EH2 नाम दिया गया है।

 तथ्य अब तक अच्छी तरह से स्थापित हो चुका है कि आधुनिक मानव या होमो सेपियन्स बहुत निकट प्रजातियों के साथ अंतःप्रजनन में शामिल थे। यह भी स्थापित किया गया है कि आधुनिक मानव ने निएंडरथल और डेनिसोवन्स के साथ संबंध बनाया था - दो पुरातन मानव प्रजातियां जो अब इस दुनिया में नहीं हैं। लेकिन उनकी उपस्थिति अभी भी आधुनिक मनुष्यों के डीएनए में मौजूद है। मनुष्य के डीएनए में अभी भी 2% निएंडरथल जीन मौजूद हैं।

अब पीएनएएस में प्रकाशित एक नवीनतम शोध में कहा गया है कि आधुनिक मानव ने दो अन्य विलुप्त प्रारंभिक मानव प्रजातियों के साथ संबंध बनाए। ऑस्ट्रेलिया के एडिलेड विश्वविद्यालय के जोआओ टेक्सेरा और पीएनएएस पेपर के प्रमुख लेखक ने कहा, “हम में से प्रत्येक अपने भीतर इन अतीत की मिश्रण घटनाओं के आनुवंशिक निशान रखता है। ये पुरातन समूह व्यापक और आनुवंशिक रूप से विविध थे, और वे हम में से प्रत्येक में जीवित हैं। उनकी कहानी इस बात का अभिन्न हिस्सा है कि हम कैसे बने।”

जब आधुनिक मानव अफ्रीका में उभरे और प्रवास करना शुरू किया, तो वे पूरे यूरेशिया में फैल गए। उन्होंने वहां पाया कि यूरेशिया पर पहले से ही निएंडरथल और डेनिसोवन्स जैसे पुराने होमिनिन का कब्जा था। अफ्रीका के बाहर अपनी यात्रा में, आधुनिक मानव अक्सर इन पुरातन प्रजातियों के साथ प्रजनन में शामिल हो गए। आधुनिक मानव डीएनए में 2% निएंडरथल जीन इंगित करते हैं कि निएंडरथल का मिश्रण आधुनिक मनुष्यों के साथ अफ्रीका से बाहर प्रवास के तुरंत बाद हुआ था। ये घटनाएँ संभवतः 50,000 से 55,000 वर्ष पहले मध्य पूर्व में घटित हुई थीं

आधुनिक मानव पूर्व की ओर आगे बढ़े और दक्षिण पूर्व एशिया के द्वीपों पर भी पहुँचे। ऐसा लगता है कि यहां उन्हें अधिक होमिनिन प्रजातियों का सामना करना पड़ा है। "ऐसा प्रतीत होता है कि कम से कम तीन अन्य पुरातन मानव समूहों ने इस क्षेत्र पर कब्जा कर लिया है, और पुरातन मानव के विलुप्त होने से पहले आधुनिक मानव के पूर्वज उनके साथ मिश्रित हो गए थे," - टेक्सेरा ने कहा । इनमें से एक समूह डेनिसोवन्स था, लेकिन अन्य दो अभी भी मायावी बने हुए हैं।

दो अज्ञात होमिनिन प्रजातियों को EH1 और EH2 नाम दिया गया है।

पहला अज्ञात विलुप्त होमिनिन, EH1 आनुवंशिक रूप से डेनिसोवन्स और निएंडरथल से समान दूरी पर था। दिलचस्प बात यह है कि सभी एशियाई और ऑस्ट्रेलियाई-पापुआन आबादी के पूर्वज EH1 के साथ प्रजनन करते थे और यही कारण है कि ये आबादी 2.6 से 3.4% EH1 वंशावली साझा करती हैं।

यह अब लुप्त हो रहा है, लेकिन आनुवंशिक संकेत अभी भी ऑस्ट्रेलियाई आदिवासियों, पूर्वी एशियाई और अंडमान द्वीपवासियों के डीएनए में पाए जा सकते हैं। इससे एक बहुत ही दिलचस्प रहस्योद्घाटन हुआ, कि EH1 होमिनिन्स ने संभवतः उत्तरी भारत के एक क्षेत्र पर कब्जा कर लिया था। यहां आधुनिक मनुष्यों का एक समूह, वह शाखा जो एशिया, ऑस्ट्रेलिया और पापुआन द्वीपों की ओर प्रवास करती रही, को EH1 (शाखा 1 के नीचे मानचित्र में) का सामना करना पड़ा।

पूर्वी एशिया, सुंडा शेल्फ और फिलीपींस में हुई डेनिसोवन्स के साथ अंतर-प्रजनन की घटनाओं को नीचे दिए गए मानचित्र में शाखा 2, 3 और 4 पर देखा जा सकता है।

दूसरी विलुप्त होमिनिन प्रजाति, EH2 फ्लोर्स में आधुनिक मनुष्यों के साथ अंतर्संबंधित हुई, लेकिन इसके साक्ष्य कम स्पष्ट हैं। यह लिआंग बुआ गुफा के पास रहने वाले छोटे कद के लोगों में दिखाई देता है, वह स्थान जहां होमो फ्लोरिएन्सिस की खोज की गई थी। उपरोक्त मानचित्र में शाखा 5 इसका प्रतीक है।

इस पंक्ति में और अधिक निष्कर्षों से अत्यंत जटिल और पेचीदा मानव इतिहास का पता चलता है। “हम जानते थे कि अफ़्रीका की कहानी आसान नहीं थी, लेकिन हमने जितना सोचा था उससे कहीं अधिक जटिल लगती है। टेक्सेरा ने कहा , "द्वीप दक्षिण पूर्व एशिया क्षेत्र पर स्पष्ट रूप से कई पुरातन मानव समूहों का कब्जा था, जो शायद आधुनिक मनुष्यों के पूर्वजों के आने से पहले सैकड़ों हजारों वर्षों से एक-दूसरे से सापेक्ष अलगाव में रह रहे थे। "

Sabhar https://www.newsclick.in

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इंटिमेट वीडियो वायरल होने पर स्टूडेंट्स ने किया सुसाइड:बिना पूछे वीडियो बनाने वालों की ऐसे करें शिकायत; होगी जेल

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 कर्नाटक के दावणगेरे में एक कॉलेज के दो स्टूडेंट्स ने सुसाइड कर लिया। दरअसल दो महीने पहले दोनों का एक वीडियो वायरल हुआ था। इसमें दोनों कॉलेज की छत पर आपत्तिजनक स्थिति में दिख रहे थे। वीडियो की वजह से बदनामी हुई और तंग आकर दोनों ने जान दे दी। वीडियो वायरल करने वाला व्यक्ति अनजान था।

आपकी जानकारी के बिना क्या किसी को आपकी फोटो लेने या वीडियो बनाने का हक है इस पर आज बात करेंगे। कानून को समझेंगे। इसके साथ ये जानेंगे कि अगर आपके परिवार में किसी के साथ इस तरह की घटना घट जाएं तब आपके पास उससे कैसे डील कर सकते हैं।


सबसे पहले समझ लीजिए निजता यानी प्राइवेसी 4 से जुड़े 4 पॉइंट


राइट टू प्राइवेसी: आपकी रोजमर्रा की जिंदगी में किसी दूसरे का दखल न देना ही राइट टू प्राइवेसी है। यह हर व्यक्ति का संवैधानिक अधिकार है। आपकी या हमारी जिंदगी में कुछ प्राइवेसी यानी निजी पल और चीजें हैं, उसमें कोई और दखल नहीं दे सकता।


सम्मान: हम किसी अनजान व्यक्ति का वीडियो या फोटो लेकर वायरल कर दें, तो ये कानून की नजर में अपराध होगा। ऐसा करने से उस व्यक्ति की डिग्निटी यानी सम्मान को ठेस पहुंचेगी। भारत के हर नागरिक को सम्मान के साथ जीने का अधिकार है।


सोशल हार्म: किसी व्यक्ति का वीडियो या फोटो वायरल करने पर उसे सोशल हार्म होगा। यानी इससे उसका मान-सम्मान गिरेगा। यह भी एक अपराध है।


एंबेरेसमेंट: किसी को वीडियो या फोटो के जरिए मानसिक या किसी भी तरीके से एंबेरेस करना यानी शर्मिंदा करना गलत है।


सवाल: स्कूल-कॉलेज, मॉल, रोड या पब्लिक प्लेस पर कोई आपसे बिना पूछे आपका वीडियो बनाता है तो क्या आप उसकी शिकायत कर सकते हैं?

जवाब: हां बिल्कुल शिकायत कर सकते हैं। अगर किसी ने आपको बिना बताए आपकी फोटो, वीडियो, पर्सनल जानकारी पोस्ट की है या आपका वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड किया है (निजी या संवेदनशील सिचुएशन वाला), तो आप उसे हटाने के लिए कह सकते हैं।


अगर आप वीडियो बनाने वाले व्यक्ति तक पहुंच नहीं पा रहे, या फिर उसने वीडियो हटाने से मना कर दिया है, तब आप पुलिस से इसकी शिकायत कर सकते हैं। शेयर किए जाने वाले सोशल प्लेटफॉर्म पर रिपोर्ट का ऑप्शन रहता है। उस पर जाकर तुंरत शिकायत करें।


सवाल: फोटो, वीडियो, पर्सनल जानकारी किसी के बिना बताएं शेयर करने पर उसकी शिकायत कहां करें?

जवाब: इसे नीचे लिखे क्रिएटिव से समझते हैं- sabhar bhaskar.com 

जरूरत की खबरइंटिमेट वीडियो वायरल होने पर स्टूडेंट्स ने किया सुसाइड:बिना पूछे वीडियो बनाने वालों की ऐसे करें शिकायत; होगी जेल

4 घंटे पहले

कर्नाटक के दावणगेरे में एक कॉलेज के दो स्टूडेंट्स ने सुसाइड कर लिया। दरअसल दो महीने पहले दोनों का एक वीडियो वायरल हुआ था। इसमें दोनों कॉलेज की छत पर आपत्तिजनक स्थिति में दिख रहे थे। वीडियो की वजह से बदनामी हुई और तंग आकर दोनों ने जान दे दी। वीडियो वायरल करने वाला व्यक्ति अनजान था।

आपकी जानकारी के बिना क्या किसी को आपकी फोटो लेने या वीडियो बनाने का हक है इस पर आज बात करेंगे। कानून को समझेंगे। इसके साथ ये जानेंगे कि अगर आपके परिवार में किसी के साथ इस तरह की घटना घट जाएं तब आपके पास उससे कैसे डील कर सकते हैं।

सबसे पहले समझ लीजिए निजता यानी प्राइवेसी 4 से जुड़े 4 पॉइंट

राइट टू प्राइवेसी: आपकी रोजमर्रा की जिंदगी में किसी दूसरे का दखल न देना ही राइट टू प्राइवेसी है। यह हर व्यक्ति का संवैधानिक अधिकार है। आपकी या हमारी जिंदगी में कुछ प्राइवेसी यानी निजी पल और चीजें हैं, उसमें कोई और दखल नहीं दे सकता।

सम्मान: हम किसी अनजान व्यक्ति का वीडियो या फोटो लेकर वायरल कर दें, तो ये कानून की नजर में अपराध होगा। ऐसा करने से उस व्यक्ति की डिग्निटी यानी सम्मान को ठेस पहुंचेगी। भारत के हर नागरिक को सम्मान के साथ जीने का अधिकार है।

सोशल हार्म: किसी व्यक्ति का वीडियो या फोटो वायरल करने पर उसे सोशल हार्म होगा। यानी इससे उसका मान-सम्मान गिरेगा। यह भी एक अपराध है।

एंबेरेसमेंट: किसी को वीडियो या फोटो के जरिए मानसिक या किसी भी तरीके से एंबेरेस करना यानी शर्मिंदा करना गलत है।

सवाल: स्कूल-कॉलेज, मॉल, रोड या पब्लिक प्लेस पर कोई आपसे बिना पूछे आपका वीडियो बनाता है तो क्या आप उसकी शिकायत कर सकते हैं?
जवाब: 
हां बिल्कुल शिकायत कर सकते हैं। अगर किसी ने आपको बिना बताए आपकी फोटो, वीडियो, पर्सनल जानकारी पोस्ट की है या आपका वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड किया है (निजी या संवेदनशील सिचुएशन वाला), तो आप उसे हटाने के लिए कह सकते हैं।

अगर आप वीडियो बनाने वाले व्यक्ति तक पहुंच नहीं पा रहे, या फिर उसने वीडियो हटाने से मना कर दिया है, तब आप पुलिस से इसकी शिकायत कर सकते हैं। शेयर किए जाने वाले सोशल प्लेटफॉर्म पर रिपोर्ट का ऑप्शन रहता है। उस पर जाकर तुंरत शिकायत करें।

सवाल: फोटो, वीडियो, पर्सनल जानकारी किसी के बिना बताएं शेयर करने पर उसकी शिकायत कहां करें?
जवाब:
 इसे नीचे लिखे क्रिएटिव से समझते हैं-

सवाल: सोशल मीडिया पर फोटो-वीडियो शेयर होने की शिकायत को कोई नहीं सुन रहा या पुलिस के पास जाने से डर रहें हैं, तब क्या करें और कहां जाएं?
जवाब:
 पुलिस के पास जाने से कतरा रहे हैं तो साइबर फोरेंसिक एक्सपर्ट की मदद लें।

साइबर लॉ एक्सपर्ट सोनाली गुहा कहती हैं कि अगर किसी की फोटो-वीडियो कहीं वायरल हो गई है और वह व्यक्ति पुलिस के पास जाने से बच रहा है तो वह किसी फोरेंसिक एक्सपर्ट की सहायता ले सकता है। एक्सपर्ट उस वेबसाइट को डाउन करने में आपकी मदद करेंगे, जहां वीडियो या फोटो वायरल हुई है।

इसके साथ ही साइबर फोरेंसिक एक्सपर्ट कुछ एआई स्कैनिंग टूल्स का इस्तेमाल करके यह भी बता देंगे कि आपकी शक्ल से मिलते-जुलते चेहरे की फोटो और वीडियो कहां-कहां और किस समय पर अपलोड हुए हैं।

यह एक तरीके का फेस डिटेक्शन सिस्टम होता है। ये आपकी वायरल फोटो-वीडियो को आईडेंटिफाई करने में मदद करता है।

सवाल: बिना पूछे फोटो-वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट करने पर क्या सजा मिलती है?
जवाब: 
IT अधिनियम, 2000 की धारा 66E गोपनीयता के उल्लंघन से जुड़ी है। इसके तहत किसी भी व्यक्ति की मंजूरी के बिना उसके प्राइवेट एरिया या फिर उसकी फोटो या वीडियो बनाना, फिर इसे सोशल मीडिया पर शेयर करना दंडनीय अपराध है।

IT अधिनियम, 2000 की धारा 67 इलेक्ट्रॉनिक रूप में अश्लील कंटेंट के प्रसारण पर रोक लगाती है। इसमें ऐसा कोई भी कंटेंट शामिल है, जो कामुक है और लोगों को भ्रष्ट करती है।

ऐसा करने वाला दोषी साबित होगा। इस स्थिति में उसे 3 साल तक की कैद और 2 लाख रुपए तक का जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है।

इसके अलावा अगर कोई व्यक्ति सोशल मीडिया पर अपमानजनक जानकारी शेयर करता है तो उसके खिलाफ आईपीसी की धारा 499, 500 और 501 (आपराधिक मानहानि) का केस दर्ज किया जा सकता है।

सवाल: अगर कोई आपका वीडियो या फोटो वायरल कर दे, तो किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
जवाब:
 हिम्मत से काम लेते हुए, घबराएं नहीं और इन 5 पाइंट्स को फॉलो करें...

  • अक्सर लोग डर जाते हैं और आत्महत्या की कोशिश करते हैं, ऐसा न करें।
  • परिवार को पूरी बात बताएं, वो गुस्सा करेंगे, लेकिन वही मदद भी करेंगे।
  • वायरल वीडियो या फोटो का स्क्रीनशॉट जरूर लें या उसे सेव कर लें।
  • किसी सोशल मीडिया साइट पर आपको टैग किया गया है, तो खुद को अनटैग करें।
  • पर्टिकुलर वेबसाइट पर जाकर वीडियो या फोटो डिलीट करने के लिए शिकायत करें।

सवाल: वीडियो-फोटो शेयर करने वाला डाटा डिलीट करने के बाद पकड़ा जाता है या नहीं?
जवाब: 
साइबर लॉ एक्सपर्ट सोनाली गुहा कहती हैं कि यदि कोई व्यक्ति प्राइवेट वीडियो-फोटो शेयर करने जैसे अपराध करके अपने फोन और लैपटॉप से डाटा डिलीट करने के बाद यह सोचता है कि वह पकड़ा नहीं जाएगा तो यह सोचना गलत है।

याद रखें कि फोरेंसिक और डिजास्टर रिकवरी के जरिए सारा डेटा रिकवर किया जा सकता है।

यह जरूर देखें कि जब भी इस डाटा की रिकवरी की जा रही हो, वहां एक एक्सपर्ट जरूर मौजूद रहे। जो यह सर्टिफिकेट दे कि निकाला गया डाटा इसी डिवाइस से प्राप्त हुआ है।

सवाल: क्या किसी भी डिवाइस में लगे कैमरे का गलत तरीके से इस्तेमाल हो सकता है?
जवाब:
 हां, बिल्कुल। आप जितने भी डिवाइस इस्तेमाल करते हैं वो इंटरनेट से कनेक्ट होता है इसलिए उनके कैमरे को गलत तरीके से इस्तेमाल आसानी से किया जा सकता है।

आपके डिवाइस का कैमरा हैक हो गया है इसे 7 तरीके से जानें

  • जिस भी डिवाइस में कैमरा दिया जाता है, उनमें कैमरे के बगल में एक इंडिकेटर लाइट होती है। चैक करें कि कहीं वह बिना आपकी मर्जी के तो नहीं जल रही।
  • अगर डिवाइस ऑन करते ही लाइट अपने आप ऑन हो जाती है तो आपके ब्राउसर एक्सटेंशन में प्रॉब्लम हो सकती है। एक-एक करके ब्राउसर एक्सटेंशन डिलीट करके पहचान सकते हैं कि किसमें प्रॉब्लम है।
  • डिवाइस की एप्लीकेशन्स एक-एक कर खोल के देखें। जिस एप्लीकेशन्स को ऑन करते ही बिना परमिशन मांगे लाइट जल जाती है, उसके जरिए कैमरा हैक हो सकता है।
  • टास्क मैनेजर पर जाकर देख सकते हैं कि वेबकैम चल रहा है या नहीं।
  • सभी चीजें बंद करके वेबकैम खोल कर देखें। अगर यह पॉप अप आए कि आपका कैमरा पहले ही इस्तेमाल किया जा रहा है तो समझ जाएं कि कैमरा हैक हो चुका है।
  • गैलरी में अगर कोई ऐसे वीडियो और फोटो हैं जो आपको याद ही नहीं हैं कि आपने कब ली तो समझ जाएं कि गड़बड़ है।
  • मालवेयर स्कैन करके देखें। कई बार मालवेयर सॉफ्टवेयर के जरिए कैमरा हैक किया जाता है।

कैमरा हैकिंग से बचने के लिए अपनाएं ये 5 टिप्स

  • अपने डिवाइस के कैमरे को किसी टेप वगैरह से ढंक दें। इसके लिए मार्केट में तरह-तरह के स्टिकर भी अवेलबल हैं।
  • ध्यान दें टेप को लगाने से आपके डिवाइस को बंद करने में कोई परेशानी नहीं आनी चाहिए।
  • एक अच्छा और विश्वसनीय एंटी वायरस इस्तेमाल करें।सस्ते के चक्कर में न पड़ें।
  • अनजान लिंक पर क्लिक न करें। अनजान सोर्स से ऐप डाउनलोड करने से बचें।
  • सिक्योर वाई-फाई का ही इस्तेमाल करें।

अब इस घटना के साइकोलॉजिकल पहलू को जानते हैं साइकेट्रिस्ट प्रीतेश गौतम से

अपत्तिजनक वीडियो वायरल होने के बाद एक व्यक्ति की मनोस्थिति ऐसी नहीं रहती कि वो वीडियो डिलीट करवाएं या उसकी शिकायत साइबर सेल में करें। ऐसे में आपके आसपास अगर कोई ऐसी घटना घट रही हैं तो व्यक्ति को खराब मनोस्थिति से निकालने में आसपास के लोगों का रोल महत्वपूर्ण है।

सवाल: ऐसे व्यक्ति का दिमाग कैसे रिएक्ट करता है?
जवाब
: जब कोई ऐसा सदमा लगता है कि व्यक्ति की मनोस्थिति निर्णय लेने की क्षमता खो देती है। वो व्यक्ति खुद से सवाल पूछता है और खुद ही उसका जवाब ढूंढता है। और जब आपका दिमाग ट्रॉमा की वजह से खुद ही कंफ्यूज है ताे गलत ही फैसले लेता है।

इसे साइकिक ट्रॉमा कहते हैं, इसमें माइंड और बॉडी दोनों अलग तरह से रिएक्ट करते हैं। स्ट्रेस हार्माेन बाहर निकलता है जो सही सोचने नहीं देता।

सवाल: गलत कदम न उठाएं वो व्यक्ति, ऐसी सिचुएशन में परिवार और दोस्तों को क्या करना चाहिए?
जवाब:
 जब व्यक्ति जिसका वीडियो या फोटो वायरल हुआ वो सही सोच नहीं पा रहा है तब उसकी मदद परिवार और दोस्त ही मदद करते हैं। दरअसल सोशल प्रेशर की वजह से वो व्यक्ति खुद को विक्टिम मानने लगता है। उसे लगता है कि उसकी वजह से सबकी इज्जत चली गई। सब उससे नफरत कर रहे होंगे। इस फीलिंग की वजह से व्यक्ति के मन में मरने का ख्याल आता है। इसी फीलिंग से उसे परिवार और दोस्त बचा सकते हैं। उसे घटना को भूलने में मदद कर सकते हैं। उसकी जगह साइबर सेल और पुलिस में शिकायत कर सकते हैं। इसलिए उस व्यक्ति को परिवार और दोस्त इस बात का अहसास सबसे पहले कराएं कि वो उसके साथ हैं। उसे ताना न दें। जिंदगी नए सिरे से जीने में मदद करें।

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घाट रही है सिगरेट पीने वालों की लेकिन संख्या छूटा जर्मनी के पीछे

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दुनिया में तम्बाकू का इस्तेमाल किया गया की कोशिशें असर ला रही हैं। एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, यूरोपियन यूनियन के खिलाफ उठाए गए कदम से देश की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है। इन अभियानों के कारण धूमपान करने वालों की संख्या कम हुई है।


स्वास्थ्य जर्मनी

घाट रही है सिगरेट पीने वालों की लेकिन संख्या छूटा जर्मनी के पीछे

12 घंटे पहले12 घंटे पहले

दुनिया में तम्बाकू का इस्तेमाल किया गया की कोशिशें असर ला रही हैं। एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, यूरोपियन यूनियन के खिलाफ उठाए गए कदम से देश की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है। इन अभियानों के कारण धूमपान करने वालों की संख्या कम हुई है।


https://p.dw.com/p/4UeQP

विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया में धूमपान करने वालों की संख्या में कमी आ रही है।

कुछ देशों में जहां संयुक्त राज्य अमेरिका में कीटनाशकों का इस्तेमाल किया गया था, वहां काफी काम कर रहे हैं, वहीं कुछ देशों में जहां संयुक्त राज्य अमेरिका में कीटनाशकों का इस्तेमाल किया गया था, वहां काफी पीछे हैं।चित्र: वेस्टएंड61/इआमगो छवियाँ

आदि

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 31 जुलाई को एक रिपोर्ट जारी कर तंबाकू के इस्तेमाल पर रोक लगाने की घोषणा की थी। इसके अनुसार, दुनिया में करीब 560 करोड़ लोग ऐसे हैं जो देशों में रहते हैं, जहां नशे की लत के लिए कम-से-कम एक ठोस लागू किया गया है। इससे धूम्रपान में भी कमी आती है। अगर ये उपाय लागू नहीं होता तो दुनिया में 30 करोड़ और भी लोग सितारा पी रहे होते.


रिपोर्ट के मुताबिक, 2007 में धूमपान का वैश्विक प्रकाशन जहां 22.8 फीसदी था, वहीं 2021 में यह 17 फीसदी रहा। विश्व स्वास्थ्य संगठन के निदेशक जनरल टेड्रोस अधनोम गेब्रियेसस ने कहा, "दारो-दरा, लेकिन निश्चित रूप से ज्यादातर लोगों को विषाक्तता से नुकसान हो रहा है।"


घाट रही है सिगरेट पीने वालों की लेकिन संख्या छूटा जर्मनी के पीछे

12 घंटे पहले

दुनिया में तम्बाकू का इस्तेमाल किया गया की कोशिशें असर ला रही हैं। एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, यूरोपियन यूनियन के खिलाफ उठाए गए कदम से देश की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है। इन अभियानों के कारण धूमपान करने वालों की संख्या कम हुई है।

https://p.dw.com/p/4UeQP
विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया में धूमपान करने वालों की संख्या में कमी आ रही है।
कुछ देशों में जहां संयुक्त राज्य अमेरिका में कीटनाशकों का इस्तेमाल किया गया था, वहां काफी काम कर रहे हैं, वहीं कुछ देशों में जहां संयुक्त राज्य अमेरिका में कीटनाशकों का इस्तेमाल किया गया था, वहां काफी पीछे हैं।चित्र: वेस्टएंड61/इआमगो छवियाँ

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 31 जुलाई को एक रिपोर्ट जारी कर तंबाकू के इस्तेमाल पर रोक लगाने की घोषणा की थी। इसके अनुसार, दुनिया में करीब 560 करोड़ लोग ऐसे हैं जो देशों में रहते हैं, जहां नशे की लत के लिए कम-से-कम एक ठोस लागू किया गया है। इससे धूम्रपान में भी कमी आती है। अगर ये उपाय लागू नहीं होता तो दुनिया में 30 करोड़ और भी लोग सितारा पी रहे होते.

रिपोर्ट के मुताबिक, 2007 में धूमपान का वैश्विक प्रकाशन जहां 22.8 फीसदी था, वहीं 2021 में यह 17 फीसदी रहा। विश्व स्वास्थ्य संगठन के निदेशक जनरल टेड्रोस अधनोम गेब्रियेसस ने कहा, "दारो-दरा, लेकिन निश्चित रूप से ज्यादातर लोगों को विषाक्तता से नुकसान हो रहा है।"

एक तेल और गैस के ड्रम पर नो स्मोकिंग का संदेश दिया गया
के अनुसार, अभी भी 44 देश ऐसे हैं, जहां धूम्रपान पर रोक या इसे कम करने की दिशा में कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है।चित्र: मैट रेगेन/डिज़ाइन चित्र/IMAGO

धूमपान है बड़ा खतरा

धूमपान से दुनिया में हर साल करीब 80 लाख कलाकार होते हैं। इनके अलावा लगभग 12 लाख लोग 'सेकंड हैंड स्मोकिंग' से मरते हैं। ये ऐसे कलाकार हैं, जिन्हें खरीदा जा सकता है। धूमपान ऐसी चॉकलेट के मुख्य उत्पादों में से एक है। गैर-सरकारी संगठनों में धूमपान के नुकसान और गंभीर प्रभाव के खिलाफ प्रचार करना भी शामिल है। इसके अलावा सीताफल के किटों पर स्वास्थ्य चेतावनी और लक्ष्य भी अहम हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, मॉरीशस, नीदरलैंड्स, तुर्की और ब्राज़ीलियाई देशों में धूमपान कम करने के लिए सभी देशों में लागू होने वाली सभी बातें शामिल हो गई हैं। इनके अलावा इथियोपिया, ईरान, आयरलैंड, जॉर्डन, मेडागास्कर, मैक्सिको, न्यूजीलैंड और स्पेन ने भी तेजी से प्रयास किए हैं।

कई देश पीछे हैं

के अनुसार, अभी भी 44 देश ऐसे हैं, जहां धूम्रपान पर रोक या इसे कम करने की दिशा में कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है। भारत की कुल जनसंख्या लगभग 230 करोड़ है। पारंपरिक धूमपान के अलावा रिपोर्ट में ई-सिगरेट के बढ़ते चलन पर भी चिंता जताई गई है। लगभग 74 देशों में वेपी राजपूतों के लिए कोई रेगुलेशन नहीं है। दुनिया के देशों में सबसे ज्यादा ई-सिगरेट की कमी की कोई न्यूनतम आयु नहीं है। sabhar dw.de

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सूडान संघर्ष: महिलाओं ने सुनाई बलात्कार की डरावनी आपबीती

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चेतावनी: इस लेख में ऐसे विवरण हैं जो कुछ पाठकों को परेशान करने वाले लग सकते हैं.

"वे बहुत क्रूर थे. उन्होंने बारी-बारी से उस पेड़ के नीचे मेरे साथ बलात्कार किया, जहाँ मैं आग जलाने के लिए लकड़ी इकट्ठा करने गई थी," उन्होंने फ़ोन लाइन पर कांपती आवाज़ में कहा.

हमने इस लेख में बलात्कार पीड़ितों के नाम बदल दिए हैं.

लगभग 40 साल की कुलसुम पश्चिम दारफुर के काले अफ़्रीकी मासालिट समुदाय से हैं जबकि उनके बलात्कारी रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (आरएसएफ़) से थे.

इस अर्धसैनिक समूह पर एक संघर्ष में कई तरह के अत्याचारों को अंजाम देने का आरोप है, जिसने दारफुर में तेज़ी से नस्लीय और जातीय रूप धारण कर लिया है.

कुलसुम अल जेनिना में रहती थीं जो कि ऐतिहासिक रूप से दारफुर में काली अफ़्रीकी शक्ति का प्रतीक और मसालिट साम्राज्य की पारंपरिक राजधानी है. वह अब अपने बीमार पति और बच्चों के साथ भाग गई हैं.

कुलसुम का कहना है कि उनके बलात्कारियों ने उन्हें यह कहते हुए शहर छोड़ने के लिए कहा कि यह 'अरबी लोगों' का है. इससे कई काले अफ़्रीकियों के डर को बढ़ावा मिला कि आरएसएफ़ जंजावीद के साथ मिलकर जातीय रूप से मिश्रित क्षेत्र को अरब शासित इलाक़े में बदलना चाहता है.

सूडान में ऐसे हालात क्यों बने?

सूडान अपने दो सबसे शक्तिशाली जनरलों, सेना प्रमुख अब्देल फ़तह अल बुरहान और आरएसएफ़ कमांडर मोहम्मद हमदान दगालो के आमने-सामने आने के बाद अप्रैल से ही गृहयुद्ध में फंसा हुआ है.

उनके झगड़े ने दारफुर में संघर्ष को फिर से भड़का दिया है, जो पहली बार 2003 में भड़का था. तब क्षेत्र में अनुमानित तीन लाख लोगों की मौत हो गई थी.

ताज़ा संघर्ष ने एक लाख साठ हज़ार से अधिक लोगों को चाड भागने के लिए मजबूर कर दिया है. इनमें से अधिकतर मासालिट समुदाय के हैं.

यह स्पष्ट नहीं है कि इस क्षेत्र में कितने लोग मारे गए हैं, अल जेनिना में मरने वालों की संख्या का सबसे कम अनुमान पांच हज़ार है.

आरएसएफ़ लड़ाकों पर सूडान के सबसे अधिक आबादी वाले राज्य और राजधानी खार्तूम में अत्याचार करने का भी आरोप लगाया गया है.

अर्धसैनिक बलों का राज्य के अधिकांश हिस्से पर नियंत्रण है, सेना उन्हें पीछे धकेलने में विफल रही है. लड़ाई के कारण अप्रैल से लेकर अब तक करीब 20 लाख लोगों का पलायन हुआ है.

खार्तूम में हिंसा ने नस्लीय या जातीय रंग नहीं लिया है. अरब और दूसरी जातियों के लोग यहाँ चल रही लड़ाइयों के शिकार हैं.

24 साल की इब्तिसाम ने बीबीसी को बताया कि वह अपनी मौसी से मिलने जा रही थीं, जब तीन आरएसएफ़ जवानों ने उन्हें रोका.

इब्तिसाम कहती हैं, "उन्होंने मुझ पर अपनी बंदूकें तान दीं और मुझसे पूछा कि मैं कहां जा रही हूँ. जब मैंने उन्हें बताया कि मैं अपनी मौसी के घर जा रही हूं, तो उन्होंने मुझ पर सेना की ख़ुफ़िया सेवाओं से संबंधित होने का आरोप लगाया.''

इसके बाद सिपाहियों ने उन्हें अपनी कार में अपने साथ चलने के लिए मजबूर किया और पास के एक घर में ले गए.

इब्तिसाम ने फ़ोन पर रोते हुए कहा, "मैंने घर के अंदर एक और आदमी को देखा, जो अंडरवियर पहने हुए था. मैंने भागने की कोशिश की. लेकिन उनमें से एक सैनिक ने मुझे इतनी ज़ोर से मारा कि मैं फर्श पर गिर गई. उन्होंने मुझे धमकी दी कि अगर मैं हिली या दोबारा चिल्लाई तो जान से मार देंगे."

उन्होंने बताया, "उन तीनों ने बारी-बारी से मेरे साथ एक से अधिक बार बलात्कार किया. फिर वे मुझे वापस अपनी कार में ले गए और सूर्यास्त के समय सड़क के किनारे फेंक दिया."

थोड़ी देर के बाद इब्तिसाम ने बताया कि कैसे वह पूरी तरह से अपमानित और क्रोधित महसूस कर रही थीं.

"मैं आत्महत्या करना चाहती थी. लेकिन मैंने इसे रोके रखा. मैं घर वापस चली गई और किसी को नहीं बताया कि क्या हुआ था."

सूडान में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने जुलाई की शुरुआत में कहा था कि उसे कम से कम 57 महिलाओं और लड़कियों के ख़िलाफ़ यौन हिंसा की 21 घटनाओं की रिपोर्ट मिली है.

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने कहा कि उनके कार्यालय में रिपोर्ट किए गए लगभग सभी मामलों में आरएसएफ़ को 'अपराधी' के रूप में पहचाना गया है.

संयुक्त राष्ट्र और स्थानीय अधिकार समूहों, दोनों का मानना ​​है कि ये संख्याएँ अपराध के वास्तविक पैमाने का केवल एक अंश भर हैं.

सूडानी मानवाधिकार कार्यकर्ता अहलम नासिर ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि लोगों को आतंकित करने के लिए बलात्कार को युद्ध के हथियार के रूप में व्यवस्थित तरीक़े से इस्तेमाल किया जा रहा है.

उन्होंने कहा, "बलात्कार जैसे अपराध का इस्तेमाल अतीत में दारफु़र में किया गया है और इसका इस्तेमाल खार्तूम में ख़ासकर आरएसएफ़ द्वारा मौजूदा युद्ध में किया जा रहा है."

नासिर ने कहा कि उन्होंने भी खार्तूम की कुछ महिलाओं से डरावनी कहानियाँ सुनी हैं.

उन्होंने कहा, "कुछ मामलों में मांओं के साथ उनके बच्चों के सामने बलात्कार किया गया."

आरोपों पर आरएसएफ़ का इनकार

आरएसएफ़ ने इस बात से इनकार किया है कि इन हमलों के पीछे उसके लड़ाकों का हाथ है.

बीबीसी को भेजी गई एक वॉयस रिकॉर्डिंग में आरएसएफ़ के प्रवक्ता मोहम्मद अल-मुख्तार ने कहा कि उनके लड़ाके युद्ध के उच्चतम नैतिक मानकों के लिए प्रतिबद्ध हैं.

उन्होंने कहा, "हमने जो सैन्य जीत हासिल की है, उसके बाद हमारे लड़ाकों की प्रतिष्ठा को धूमिल करने के लिए जानबूझकर अभियान चलाए जा रहे हैं."

जब बीबीसी संवाददाता ने उन्हें बताया कि बीबीसी ने उन महिलाओं से बात की है जिन्होंने आरएसएफ़ लड़ाकों को अपने हमलावरों के रूप में पहचाना है तो अल-मुख्तार ने कहा कि आरएसएफ़ सदस्यों के रूप में भेष बदलने वाले लोग अत्याचारों के लिए जिम्मेदार थे.

इस संघर्ष के कारण बलात्कार और यौन हिंसा से बचे लोगों को बहुत कम मदद मिली है. अधिकांश अस्पताल अब काम नहीं कर रहे हैं और जो कुछ हैं उन तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है.

कुलसुम और इब्तिसाम ने मुझे बताया कि यह दर्द उन्हें हमेशा सताता रहेगा.

कुलसुम ने कहा, "मेरे साथ जो हुआ उसे मैं कभी नहीं भूलूंगी. शर्म का एक निशान हमेशा मेरी परछाई की तरह मेरा पीछा करेगा." Sabhar BBC.COM 

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