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मंगलवार, 1 अगस्त 2023

बुल्गारिया: महिलाओं के साथ हिंसा के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोग

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बुल्गारिया: महिलाओं के साथ हिंसा के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोग 

बुल्गारिया में एक लड़की को उसके पूर्व प्रेमी से मिली प्रताड़ना पर कोर्ट के फैसले से लोगों में बहुत नाराजगी है. महिलाओं के खिलाफ हिंसा के विरोध में हजारों लोगों ने प्रदर्शन किया.

कानून और न्यायबुल्गारिया

बुल्गारिया: महिलाओं के साथ हिंसा के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोग

3 घंटे पहले

बुल्गारिया में एक लड़की को उसके पूर्व प्रेमी से मिली प्रताड़ना पर कोर्ट के फैसले से लोगों में बहुत नाराजगी है. महिलाओं के खिलाफ हिंसा के विरोध में हजारों लोगों ने प्रदर्शन किया.

https://p.dw.com/p/4Ud6i
बुल्गारिया में महिला अधिकार की मांग करते लोग
कोर्ट के फैसले ने महिलाओं के साथ होने वाली हिंसा के खिलाफ लोगों को एकजुट कर दियातस्वीर: Alexandar Detev/DW

बुल्गारिया में 18 साल की एक लड़की के साथ हुई हिंसा और इस पर कोर्ट के फैसले ने महिलाओं के साथ होने वाली हिंसा के खिलाफ लोगों को एकजुट कर दिया है. महिला सुरक्षा के मुद्दे पर हजारों लोग सड़कों पर उतर आए. 31 जुलाई को राजधानी सोफिया समेत देश के कई हिस्सों में रैलियां निकाली गईं. अकेले सोफिया में ही 5,000 से ज्यादा लोग प्रदर्शनों में शामिल हुए. बुल्गारिया में महिलाओं के साथ हिंसा के मुद्दे पर इतने व्यापक विरोध प्रदर्शन आम नहीं हैं. 

क्या है पूरा मामला?

यह मामला एक 18 साल की लड़की के साथ हुई हिंसा से जुड़ा है. लड़की ने बताया कि उसके बॉयफ्रेंड ने सैकड़ों बार उसे काटा. उसकी नाक तोड़ दी और सिर के बाल मूंड दिए. मामला कोर्ट में गया. स्तारा जागोरा शहर की अदालत ने केस पर सुनवाई करते हुए चोट को "हल्का" बताया और आरोपी को हिरासत में नहीं भेजा. इस प्रकरण से लोगों में गहरी नाराजगी पैदा हुई. लोगों ने कहा कि कोर्ट का रवैया हैरान करने वाला 

प्रदर्शनकारी महिलाओं के लिए ज्यादा सुरक्षित माहौल के साथ-साथ न्यायिक सुधार की भी मांग कर रहे हैं. प्रदर्शनों में लोग "एक भी और महिला नहीं" जैसे पोस्टर थामे नजर आए. 33 साल के एक प्रदर्शनकारी इवान ने समाचार एजेंसी एएफपी से कहा, "घरेलू हिंसा को लेकर बनी पारंपरिक सहिष्णुता और संस्थाओं के सही तरह से काम ना करने की व्यवस्था को बदलना ही होगा. इनमें बदलाव शुरू हो गए हैं, लेकिन समाज को भी शामिल होने की जरूरत है." एक और प्रदर्शनकारी एमिलिया स्टोयानोवा ने कहा, "यह कैसे संभव है कि इस तरह की प्रताड़ना को 'हल्की शारीरिक चोट' करार दिया जाए... अदालत की प्रतिक्रिया चौंकाने वाली है."


कानून और न्यायबुल्गारिया

बुल्गारिया: महिलाओं के साथ हिंसा के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोग

3 घंटे पहले

बुल्गारिया में एक लड़की को उसके पूर्व प्रेमी से मिली प्रताड़ना पर कोर्ट के फैसले से लोगों में बहुत नाराजगी है. महिलाओं के खिलाफ हिंसा के विरोध में हजारों लोगों ने प्रदर्शन किया.

https://p.dw.com/p/4Ud6i
बुल्गारिया में महिला अधिकार की मांग करते लोग
कोर्ट के फैसले ने महिलाओं के साथ होने वाली हिंसा के खिलाफ लोगों को एकजुट कर दियातस्वीर: Alexandar Detev/DW

बुल्गारिया में 18 साल की एक लड़की के साथ हुई हिंसा और इस पर कोर्ट के फैसले ने महिलाओं के साथ होने वाली हिंसा के खिलाफ लोगों को एकजुट कर दिया है. महिला सुरक्षा के मुद्दे पर हजारों लोग सड़कों पर उतर आए. 31 जुलाई को राजधानी सोफिया समेत देश के कई हिस्सों में रैलियां निकाली गईं. अकेले सोफिया में ही 5,000 से ज्यादा लोग प्रदर्शनों में शामिल हुए. बुल्गारिया में महिलाओं के साथ हिंसा के मुद्दे पर इतने व्यापक विरोध प्रदर्शन आम नहीं हैं. 

क्या है पूरा मामला?

यह मामला एक 18 साल की लड़की के साथ हुई हिंसा से जुड़ा है. लड़की ने बताया कि उसके बॉयफ्रेंड ने सैकड़ों बार उसे काटा. उसकी नाक तोड़ दी और सिर के बाल मूंड दिए. मामला कोर्ट में गया. स्तारा जागोरा शहर की अदालत ने केस पर सुनवाई करते हुए चोट को "हल्का" बताया और आरोपी को हिरासत में नहीं भेजा. इस प्रकरण से लोगों में गहरी नाराजगी पैदा हुई. लोगों ने कहा कि कोर्ट का रवैया हैरान करने वाला है.

सोफिया में महिलाओं के साथ होने वाली हिंसा के खिलाफ प्रदर्शन करते लोग
महिलाओं के साथ होने वाली हिंसा के विरोध में राजधानी सोफिया समेत देश के कई हिस्सों में रैलियां निकाली गईं.तस्वीर: Alexandar Detev/DW

प्रदर्शनकारी महिलाओं के लिए ज्यादा सुरक्षित माहौल के साथ-साथ न्यायिक सुधार की भी मांग कर रहे हैं. प्रदर्शनों में लोग "एक भी और महिला नहीं" जैसे पोस्टर थामे नजर आए. 33 साल के एक प्रदर्शनकारी इवान ने समाचार एजेंसी एएफपी से कहा, "घरेलू हिंसा को लेकर बनी पारंपरिक सहिष्णुता और संस्थाओं के सही तरह से काम ना करने की व्यवस्था को बदलना ही होगा. इनमें बदलाव शुरू हो गए हैं, लेकिन समाज को भी शामिल होने की जरूरत है." एक और प्रदर्शनकारी एमिलिया स्टोयानोवा ने कहा, "यह कैसे संभव है कि इस तरह की प्रताड़ना को 'हल्की शारीरिक चोट' करार दिया जाए... अदालत की प्रतिक्रिया चौंकाने वाली है."

प्रदर्शनों के बाद दबाव में आए प्रशासन ने आरोपी को हिरासत में भेज दिया है
पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, 2023 के पहले तीन महीनों में 18 महिलाओं की हत्या हुई. इनमें आरोप ज्यादातर उनके परिचितों पर लगा.तस्वीर: Alexandar Detev/DW

बड़े स्तर पर हुए प्रदर्शनों के बाद दबाव में आए प्रशासन ने आरोपी को हिरासत में ले लिया है. उस पर लड़की को धमकी भरे मैसेज करने का भी आरोप है. हालांकि वह इन आरोपों से इनकार कर रहा है.

कानून में सुधार की मांग

पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, 2023 के पहले तीन महीनों में 18 महिलाओं की हत्या हुई. इनमें आरोप ज्यादातर उनके परिचितों पर लगा. कई प्रदर्शनकारियों का मानना है कि ऐसे मामलों की संख्या कहीं ज्यादा है. वे महिलाओं से गलत व्यवहार करने वाले पार्टनर्स या एक्स-पार्टनर्स से बेहतर दिलाने के लिए कानूनी संशोधन चाहते हैं.

बुल्गारिया ने अभी तक इस्तांबुल कन्वेंशन को मंजूरी नहीं दी है. यह महिलाओं को हिंसा से बचाने के मकसद से हुई एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संधि है. जून 2023 में यूरोपीय संघ इसमें शामिल हुआ. इसके बाद इसमें शामिल न होने वाले सदस्य देशों पर दबाव बढ़ा. बुल्गारिया 2007 में यूरोपीय संघका सदस्य बना. इसने अब तक इसे मंजूर नहीं किया है.

पीवाई/एसएम (एएफपी) sabhar Dw.de 

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दिल्ली अध्यादेश बिल और विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव पर क्या है स्टैंड? नवीन पटनायक की पार्टी BJD ने साफ कर दिया रुख

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दिल्ली अध्यादेश बिल और विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव पर क्या है स्टैंड? नवीन पटनायक की पार्टी BJD ने साफ कर दिया रुख 

Delhi Ordinance Bill: दिल्ली के अधिकारियों की ट्रांसफर और पोस्टिंग से जुड़े अध्यादेश की जगह लेने वाले विधेयक और विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव पर ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की बीजू जनता दल (BJD) ने मंगलवार (1 अगस्त) को रुख साफ किया. 

केंद्र सरकार के विधेयक लोकसभा में पेश करने के बीच बीजेडी ने कहा कि वो इसके समर्थन में है. पार्टी ने साथ ही कहा कि विपक्षी गठबंधन ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस’ (इंडिया) की तरफ से लाए गए अविश्वास प्रस्ताव का वो विरोध करेगी. इस संबंध में लोकसभ और राज्यसभा के सांसदों को बीजेडी ने व्हिप जारी किया है और सदन में मौजूद रहने के लिए कहा है.


न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए बीजेडी के राज्यसभा सांसद सस्मित पात्रा ने कहा कि पार्टी सांसदों को व्हिप जारी कर संसद में मौजूद रहने को कहा गया है.


बीजेडी के राज्यसभा में 9 सांसद है. ऐसे में बीजेपी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को इसका फायदा होगा. 


राज्यसभा में क्या गणित है?
लोकसभा में बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए के पास बहुमत है. हालांकि राज्यसभा में एनडीए और विपक्षी INDIA आंकड़ों के ख्याल से राज्यसभा में बराबरी की स्थिति में हैं. न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, राज्यसभा में एनडीए के 101 सांसद हैं, जबकि 26 दलों वाले इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस (INDIA) को 100 सांसदों का समर्थन है. 

केंद्र सरकार के विधेयक लोकसभा में पेश करने के बीच बीजेडी ने कहा कि वो इसके समर्थन में है. पार्टी ने साथ ही कहा कि विपक्षी गठबंधन ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस’ (इंडिया) की तरफ से लाए गए अविश्वास प्रस्ताव का वो विरोध करेगी. इस संबंध में लोकसभ और राज्यसभा के सांसदों को बीजेडी ने व्हिप जारी किया है और सदन में मौजूद रहने के लिए कहा है.


न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए बीजेडी के राज्यसभा सांसद सस्मित पात्रा ने कहा कि पार्टी सांसदों को व्हिप जारी कर संसद में मौजूद रहने को कहा गया है.


बीजेडी के राज्यसभा में 9 सांसद है. ऐसे में बीजेपी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को इसका फायदा होगा. 


राज्यसभा में क्या गणित है?
लोकसभा में बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए के पास बहुमत है. हालांकि राज्यसभा में एनडीए और विपक्षी INDIA आंकड़ों के ख्याल से राज्यसभा में बराबरी की स्थिति में हैं. न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, राज्यसभा में एनडीए के 101 सांसद हैं, जबकि 26 दलों वाले इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव 

Sanhar www.abplive.com

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लोकसभा में 8 अगस्त को शुरू होगी अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा, इस दिन पीएम मोदी दे सकते हैं जवाब

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Tue. Aug 1st, 2023 15:59:34
    लोकसभा में 8 अगस्त को शुरू होगी अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा, इस दिन पीएम मोदी दे सकते हैं जवाब

    लोकसभा में विपक्ष द्वारा पेश अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा 8 से 10 अगस्त तक होगी और चर्चा के अंतिम दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जवाब देने की संभावना है. इस आशय का निर्णय लोकसभा की कार्य मंत्रणा समिति की बैठक में लिया गया. इसका विपक्षी दलों के गठबंधन ‘इंडिया’ और भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) ने बहिष्कार किया.

    इन विपक्षी दलों की मांग है कि प्रस्ताव पर तत्काल चर्चा शुरू हो. विपक्षी दलों के सदस्य इस दौरान सरकार द्वारा विधायी एजेंडा को आगे बढ़ाने का विरोध कर रहे हैं.

    सरकार का तत्काल चर्चा से इनकार
    वहीं, सरकार ने इस बात पर जोर दिया है कि ऐसा कोई नियम या परंपरा नहीं है जो अविश्वास प्रस्ताव को सदन में तत्काल चर्चा के लिए लेने को अनिवार्य बनाता हो. सरकार का कहना है कि नियमानुसार प्रस्ताव लाये जाने के 10 कामकाजी दिवस में उसे चर्चा के लिए लिया जाना चाहिए.

    लोकसभा अध्यक्ष ने स्वीकार किया अविश्वास प्रस्ताव
    लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 26 जुलाई को अविश्वास प्रस्ताव स्वीकार किया था. उन्होंने उस दिन कहा था कि सभी दलों के नेताओं से बात करके और नियमों पर विचार करके प्रस्ताव पर चर्चा की तारीख तय करेंगे.

    यह दूसरा मौका है जब मोदी सरकार अविश्वास प्रस्ताव का सामना करेगी. इससे पहले, जुलाई, 2018 में मोदी सरकार के खिलाफ कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्ष अविश्वास प्रस्ताव लाया था. इस अविश्वास प्रस्ताव के समर्थन में सिर्फ 126 वोट पड़े थे, जबकि इसके खिलाफ 325 सांसदों ने मत दिया था.

    इस बार भी अविश्वास प्रस्ताव का भविष्य पहले से तय है क्योंकि संख्याबल स्पष्ट रूप से बीजेपी के पक्ष में है और निचले सदन में विपक्षी समूह के 150 से कम सदस्य हैं. हालांकि विपक्षी दलों की दलील है कि वे चर्चा के दौरान मणिपुर मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए धारणा से जुड़ी लड़ाई में सरकार को मात देने में सफल रहेंगे.

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    Nuh Violence: नूंह हिंसा के बाद मोनू मानेसर का पहला बयान, कहा- ‘बवाल से मेरा कोई लेना देना नहीं’

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    Nuh Communal Clash: नूंह हिंसा की आग सोहना के बाद गुरुग्राम में पहुंची. गुरुग्राम के सेक्टर-57 में एक मस्जिद में आग लगा दी गई. वहीं नूंह हिंसा को लेकर मोनू मानेसर का भी बयान सामने आया है.

    Haryana News: हरियाणा में नूंह में हुई हिंसा को लेकर मोनू मानेसर का पहला बयान सामने आया है. एबीपी न्यूज से बातचीत के दौरान मोनू मानेसर ने कहा कि मैं कल नूंह नहीं गया. नूंह में हुए बवाल से मेरा कोई लेना देना नहीं है. वहीं आपको बता दें कि नूंह हिंसा की आग अब सोहना के बाद गुरुग्राम तक फैल चुकी है. गुरुग्राम में भीड़ ने एक मस्जिद में आग लगा दी. वहीं अभी तक इस हिंसा में 5 लोगों को मौत हो चुकी है.  

    नूंह हिंसा में कैसे आया मोनू मानेसर का नाम?
    कुछ दावों के मुताबिक, बल्लभगढ़ में बजरंग दल के एक कार्यकर्ता ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट किया जो झड़प की वजह बना. ऐसी भी खबरें थीं कि राजस्थान में दो मुस्लिम व्यक्तियों की हत्या में वांछित गोरक्षक मोनू मानेसर को जुलूस में शामिल होना था. लेकिन विहिप की सलाह पर उसने जुलूस में भाग नहीं लिया, क्योंकि उन्हें डर था कि मोनू मानेसर के जूलूस में शामिल होने से तनाव पैदा हो सकता है. वहीं ट्विटर पर मोनू मानेसर को कथित तौर पर नूंह आने की चुनौती देने की धमकियां भी दी गईं थी.


    हरियाणा पुलिस की 20 कंपनियां तैनात
    नूंह जिले में हिंसा के बाद अर्धसैनिक बलों की 20 कंपनियां और हरियाणा पुलिस बल की भी 20 कंपनियां तैनात की गई है. नूंह एसपी नरेंद्र बिजारणिया ने बताया कि उपद्रवियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी. वहीं उन्होंने आम जनता से शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है. 


    नूंह उपायुक्त कैंप कार्यालय में बैठक 
    वहीं नूंह हिंसा को लेकर नूंह उपायुक्त कैंप कार्यालय में शांति समिति की बैठक की गई. नूंह एसपी नरेंद्र बिजारणिया ने बताया कि हिंदू और मुस्लिम दोनों कमेटियों को बातचीत के लिए बुलाया गया है. पहले दोनों की अलग-अलग बैठकें की हैं और एक बार कॉमन ग्राउंड तैयार होते ही आज शाम कॉमन बैठक की जाएगी. Sabhar :www.abplive.com

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