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बुधवार, 26 जुलाई 2023

भारत ने विवादित कफ सिरप दवा निर्माता का लाइसेंस निलंबित किया

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 भारत ने मशाल द्वीप और माइक्रोनेशिया में भारत से गए कफ सिरप में शिकायत मिलने के बाद उसे बनाने वाली दवा कंपनी का लाइसेंस निलंबित कर दिया है. सरकार ने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से शिकायत के बाद यह कदम उठाया है.

डब्ल्यूएचओ ने उत्तरी पंजाब की क्यूपी फार्माकेम लिमिटेड के कफ सिरप के कुछ सैंपल को टेस्ट के बाद इंसानों के लिए घातक बताया था. सैंपल में डायथिलीन ग्लाइकॉल और एथिलीन ग्लाइकॉल की मात्रा मानक से काफी ज्यादा थी. स्वास्थ्य राज्यमंत्री भारती प्रवीण पवार ने संसद को बताया, "मैन्युफैक्चरिंग परिसर से लिए गए दवा के नमूनों को 'मानक गुणवत्ता का नहीं' घोषित किया गया." पवार ने कहा, क्यूपी फार्माकेम लिमिटेड और दो अन्य कंपनियों के मेडेन फार्मास्यूटिकल्स और मैरियन बायोटेक प्राइवेट के लाइसेंस रद्द कर दिए गए हैं और उनका निर्यात रोक दिया गया

Cough Syrup row: भारत ने एक और दवा निर्माता का लाइसेंस किया कैंसिल

Cough Syrup Row: विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा अप्रैल में माशाल द्वीप समूह और माइक्रोनेशिया (Mashall Islands and Micronesia) में अपने कफ सिरप (Cough Syrup) में मिलावट की रिपोर्ट के बाद, भारत ने एक दवा निर्माता के विनिर्माण लाइसेंस को निलंबित कर दिया। पिछले साल गाम्बिया और उज्बेकिस्तान में कम से कम 89 बच्चों की मौत का कारण कफ सिरप का मामला सामने आने के बाद भारतीय नियामक दवा निर्माताओं की जांच कर रहे हैंCough Syrup Row: विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा अप्रैल में माशाल द्वीप समूह और माइक्रोनेशिया (Mashall Islands and Micronesia) में अपने कफ सिरप (Cough Syrup) में मिलावट की रिपोर्ट के बाद, भारत ने एक दवा निर्माता के विनिर्माण लाइसेंस को निलंबित कर दिया। पिछले साल गाम्बिया और उज्बेकिस्तान में कम से कम 89 बच्चों की मौत का कारण कफ सिरप का मामला सामने आने के बाद भारतीय नियामक दवा निर्माताओं की जांच कर रहे हैं


डब्ल्यूएचओ ने उत्तरी पंजाब राज्य में स्थित क्यूपी फार्माकेम लिमिटेड द्वारा बनाए गए कफ सिरप के एक बैच से लिए गए नमूनों में डायथिलीन ग्लाइकॉल और एथिलीन ग्लाइकॉल की अवैध मात्रा के साथ मिलावट को चिह्नित किया, जिनका सेवन मनुष्यों के लिए जहरीला माना जाता है और यह घातक साबित हो सकता है।


हालांकि, कंपनी ने किसी भी किस्म की मिलावट से इंकार किया और रॉयटर्स से बातचीत के दौरान बताया कि उसने निलंबन के खिलाफ अपील करने की योजना बनाई है। मेडेन फार्मास्यूटिकल्स और मैरियन बायोटेक ने भी किसी भी गलत काम से इनकार किया है।


उप स्वास्थ्य मंत्री भारती प्रवीण ने संसद को बताया, “विनिर्माण परिसर से लिए गए दवा के नमूने… ‘मानक गुणवत्ता के नहीं’ घोषित किए गए थे।”


पवार ने कहा कि- क्यूपी फार्माकेम लिमिटेड और दो अन्य कंपनियों के विनिर्माण लाइसेंस को निलंबित कर दिया गया है और उनका निर्यात रोक दिया गया है।

भारत ने विवादित कफ सिरप दवा निर्माता का लाइसेंस निलंबित किया

10 घंटे पहले

भारत ने मशाल द्वीप और माइक्रोनेशिया में भारत से गए कफ सिरप में शिकायत मिलने के बाद उसे बनाने वाली दवा कंपनी का लाइसेंस निलंबित कर दिया है. सरकार ने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से शिकायत के बाद यह कदम उठाया है.

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भारत ने जून से कफ सीरप निर्यात का परीक्षण सख्त कर दिया है.
भारत ने जून से कफ सीरप निर्यात का परीक्षण सख्त कर दिया है.तस्वीर: Omar Wally/DW

पिछले साल गांबिया और उज्बेकिस्तान में भारत में बने कफ सिरप से कथित तौर पर करीब 89 बच्चों की मौत हो गयी थी. जिसके बाद भारत की नियामक एजेंसी दवा बनाने वाली कंपनियों की जांच कर रही है. दवा में गड़बड़ियों की शिकायत से भारत की वैश्विक स्तर पर सस्ती दवाएं उपलब्ध कराने वाली "दुनिया की फार्मेसी" छवि को नुकसान पहुंचा है.

कैमरून में कफ सीरप से मौत

डब्ल्यूएचओ ने उत्तरी पंजाब की क्यूपी फार्माकेम लिमिटेड के कफ सिरप के कुछ सैंपल को टेस्ट के बाद इंसानों के लिए घातक बताया था. सैंपल में डायथिलीन ग्लाइकॉल और एथिलीन ग्लाइकॉल की मात्रा मानक से काफी ज्यादा थी. स्वास्थ्य राज्यमंत्री भारती प्रवीण पवार ने संसद को बताया, "मैन्युफैक्चरिंग परिसर से लिए गए दवा के नमूनों को 'मानक गुणवत्ता का नहीं' घोषित किया गया." पवार ने कहा, क्यूपी फार्माकेम लिमिटेड और दो अन्य कंपनियों के मेडेन फार्मास्यूटिकल्स और मैरियन बायोटेक प्राइवेट के लाइसेंस रद्द कर दिए गए हैं और उनका निर्यात रोक दिया गया है.

कफ सीरप को पिलाने के लिए चम्मच में डाला जा रहा है
सैंपल में डायथिलीन ग्लाइकॉल और एथिलीन ग्लाइकॉल की मात्रा मानक से काफी ज्यादा थी.तस्वीर: Science Photo Library/IMAGO

मेडेन फार्मास्यूटिकल्स और मैरियन बायोटेक ने भी किसी भी गलत काम से इनकार किया है. कंपनी ने उस पर लगे आरोपों को खारिज किया है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स से बातचीत में कंपनी ने बताया है कि वह निलंबन के खिलाफ अपील करेगी. क्यूपी फार्माकेम के प्रबंध निदेशक सुधीर पाठक का कहना है कि कंपनी ने निलंबन आदेश के खिलाफ सरकार के पास अपील करने की योजना बनाई है. फिलहाल उत्पादन रोक दिया गया है. पाठक ने कहा कि उन्होंने गुइफेनेसिन टीजी नाम के कफ सिरप का उत्पादन शुरू करने से पहले इसमें प्रयुक्त सामग्री का परीक्षण किया था. उनका यह भी कहना है कि उन्होंने केवल कंबोडिया को उत्पाद निर्यात किया था. यह दवा मशाल द्वीप और माइक्रोनेशिया तक कैसे पहुंची इसके बारे में उन्हें जानकारी नहीं है.

मेडेन फार्मास्यूटिकल्स 

भारत ने जून से कफ सिरप निर्यात का परीक्षण सख्तकर दिया है. कंपनियों को दवाओं का निर्यात करने से पहले एक सरकारी लैब में उसकी जांच करानी होगी. विश्लेषण के बाद सरकारी लैब की तरफ से प्रमाण पत्र दिया जाएगा और उसके बाद ही दवा के निर्यात को मंजूरी मिलेगी. सरकार समर्थित व्यापार संघ ने जानकारी दी है कि इस वित्तीय वर्ष में भारत के फार्मास्युटिकल निर्यात पिछले साल की तुलना में लगभग दोगुना होगा. उम्मीद जताई जा रही है कि यह 27 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है. सिरप के इस्तेमाल से जुड़ी कथित मौतों के बाद भी अमेरिका भारी मात्रा में दवा खरीद रहा है. यही वजह है कि दवा बाजार में बढ़त बनी हुई है. पीवाई/एनआर (रॉयटर्स)

रियन बायोटेक ने भी किसी भी गलत काम से इनकार किया है. कंपनी ने उस पर लगे आरोपों को खारिज किया है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स से बातचीत में कंपनी ने बताया है कि वह निलंबन के खिलाफ अपील करेगी. क्यूपी फार्माकेम के प्रबंध निदेशक सुधीर पाठक का कहना है कि कंपनी ने निलंबन आदेश के खिलाफ सरकार के पास अपील करने की योजना बनाई है. फिलहाल उत्पादन रोक दिया गया है. पाठक ने कहा कि उन्होंने गुइफेनेसिन टीजी नाम के कफ सिरप का उत्पादन शुरू करने से पहले इसमें प्रयुक्त सामग्री का परीक्षण किया था. उनका यह भी कहना है कि उन्होंने केवल कंबोडिया को उत्पाद निर्यात किया था. यह दवा मशाल द्वीप और माइक्रोनेशिया तक कैसे पहुंची इसके बारे में उन्हें जानकारी नहीं है. 

भारत ने जून से कफ सिरप निर्यात का परीक्षण सख्तकर दिया है. कंपनियों को दवाओं का निर्यात करने से पहले एक सरकारी लैब में उसकी जांच करानी होगी. विश्लेषण के बाद सरकारी लैब की तरफ से प्रमाण पत्र दिया जाएगा और उसके बाद ही दवा के निर्यात को मंजूरी मिलेगी.  सरकार समर्थित व्यापार संघ ने जानकारी दी है कि इस वित्तीय वर्ष में भारत के फार्मास्युटिकल निर्यात पिछले साल की तुलना में लगभग दोगुना होगा. उम्मीद जताई जा रही है कि यह 27 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है. सिरप के इस्तेमाल से जुड़ी कथित मौतों के बाद भी अमेरिका भारी मात्रा में दवा खरीद रहा है. यही वजह है कि दवा बाजार में बढ़त बनी हुई है. 

पीवाई/एनआर (रॉयटर्स)

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डोम राजवंश के वंशज आज भी बाजा बजा कर निभाते हैं परंपरा

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डोम राजवंश के वंशज आज भी बाजा बजा कर निभाते हैं परंपरा

7 वर्ष पहले
जशपुर दशहरा महोत्सव के हर कार्यक्रम में राजपरिवार के सदस्यों का जितना महत्व रहता है, उतना ही महत्व बैगाओं, मिरधाओं और पारंपरिक नगाड़ा बजाने वाले लोगों का भी होता है। उनके बिना जशपुर दशहरा महोत्सव अधूरा है। जिले में नारायणपुर चिटकवाइन क्षेत्र डोम राजा का मुख्यालय हुआ करता था। आज भी डोम राजाओं के वंशज यहां दशहरा महोत्सव में नगाड़ा बजाते हैं। वर्तमान में 27 वीं पीढ़ी इस परंपरा को निभाती आ रही है। महोत्सव में नगाड़ा व अन्य वाद्य यंत्र को बजाने से पहले रियासत के राजा रणविजय सिंह जूदेव 27 पीढ़ी पुराने नगाड़ा की पारंपरिक रीति से पूजा करते हैं। इस पुराने नगाड़ा को शाश्वती राजधानी कहा जाता है। इस गांव के पारंपरिक नगाड़ा वादक 70 वर्षीय एतवा राम बताते हैं कि इस नगाड़ा को वर्तमान राजा के पूर्वजों ने डोम राजा से युद्ध के बाद छीनकर हमारे पुरखों को दिया था। यह नगाड़ा हमारे लिए एक विरासत है। इसकी पूजा करने के बाद ही हम नगाड़ा बजाते हैं। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में कई प्रकार के इलेक्ट्रानिक वाद्य यंत्रों का प्रयोग पूजा-पाठ के दौरान होता हो, पर यहां के दशहरा में नारायणपुर क्षेत्र के परंपरागत वादक ही पीढ़ी-दर-पीढ़ी नगाड़ा और शहनाई बजाते आ रहे हैं। वादक रामदयाल एवं भुवनेश्वर ने बताया कि आरती, हवन और दूसरी अन्य पूजा पूजा के दौरान नगाड़ों की थाप और धुन भी अलग-अलग होती है।



कौन थे डोम राजा इतिहासकार डॉ. विजय रक्षित के मुताबिक 18 वी सदी के मध्य में डोम राजवंश के अंतिम शासक रायभान थे। डोम राजा रायभान के राज में अराजकता से उनकी प्रजा में असंतोष की भावना पनप रही थी। इसी वक्त जशपुर की धरती पर बिहार के सोनपुर रियासत के राजा सुजान राय ने कदम रखा। राजा सुजान राय ने ही जशपुर रियासत की नींव रखी थी

27 पीढ़ी पुराना नगाड़ा आज भी है सुरक्षित
बैगाओं, मिरधाओं के बिना भी महोत्सव अधूरा
नगाड़ा वादकों के अलावा बैगाओं व मिरधाओं के बिना भी जशपुर दशहरा महोत्सव अधूरा है। पुराने समय में नवरात्रि के दौरान बलि देने वाले को मिरधा कहा जाता था। तपकरा क्षेत्र के रौतिया जाति के लोग बलि देने का कार्य करते थे, जिन्हें यह उपाधि दी गई थी। यह उपाधि पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही है। इसके अलावा बैगाओं के बिना भी दशहरा महोत्सव पूरा नहीं होता। बैगा वनवासियों के पुजारी होते हैं।

दशहरा महोत्सव के दौरान पूजा-पाठ, हवन कुंड की देखभाल बैगा ही करते आए हैं।

एतवा राम ने बताया कि उनके पास जो नगाड़ा रखा हुआ है वह 27 पीढ़ी पुराना है अौर दशहरा उत्सव में उनके द्वारा इसे लेकर जशपुर पहुंचते हैं।दशहरा उत्सव प्रारंभ होने के साथ ही उनके द्वारा इस नगाड़े की पूजा अर्चना करने के बाद उस बाजा को प्रतीकात्मक रूप से बजाने के बाद देवी पूजा के दौरान और दशहरा उत्सव तक उनके ही वंशजों के लोग उत्सव में बाजा बजाने की परंपरा निभाते हैं। खासबात यह है कि वे इसका कोई शुल्क नहीं लेते।उनका कहना है कि इस पूजा में उनकी भूमिका अहम होती है और विशेष सूर से वाद्ययंत्र को बजाया जाता है।पूर्वजों के अनुसार वे इसे अपना कर्तव्य मान कर निभाते चले आ रहे हैं।

उनका यह भी कहना है कि उनके समाज में पढ़े लिखे लोग भी हैं लेकिन इस उच्च परंपरा को निभाना गौरव की बात समझते हैं।

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2018 में की गई पीएम मोदी की भविष्यवाणी सोशल मीडिया पर वायरल

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Wed. Jul 26th, 2023 15:25:20
    2018 में की गई पीएम मोदी की भविष्यवाणी सोशल मीडिया पर वायरल

    केंद्र सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की विपक्षी दलों की योजना के बीच 2018 में इस तरह के प्रस्ताव पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जवाब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। जिसमें उन्होंने विपक्ष का उपहास करते हुए कहा था कि उन्हें 2023 में भी ऐसा ही प्रस्ताव लाने की तैयारी करनी चाहिए।

    उन्होंने लोकसभा में 2018 में लाए गए अविश्वास प्रस्ताव का जवाब देते हुए कहा था, मैं आपको अपनी शुभकामनाएं देना चाहता हूं कि आप इतनी तैयारी करें कि 2023 में फिर से अविश्वास प्रस्ताव लाने का आपको मौका मिले। सरकारी सूत्रों ने पीएम मोदी की ‘‘भविष्यवाणी’’ को दर्शाने वाला उनके संबोधन का यह हिस्सा साझा किया।

    विपक्षी पार्टी के एक सदस्य को जवाब देते हुए पीएम मोदी ने कहा था कि यह अहंकार का नतीजा है कि कांग्रेस की सीटों की संख्या कभी 400 से अधिक होती थी जो 2014 के लोकसभा चुनावों में घटकर करीब 40 रह गई। उन्होंने कहा था कि अपनी सेवा की भावना की बदौलत से ही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) दो सीटों से बढ़कर अपने दम पर सत्ता में पहुंची।

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    मंगलवार, 25 जुलाई 2023

    आईएमएफ का दावा- 2075 तक दूसरी बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था होगा भारत, चौंका देगा जापान-जर्मनी को पीछे करने वाले देश का नाम

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    IMF ने कहा है कि अमेरिका की अर्थव्‍यवस्‍था इस दौरान सुस्‍त पड़ जाएगी और अभी पहले स्‍थान पर होने के बावजूद यह सरककर तीसरे पायदान पर पहुंच जाएगी. 2023 में अमेरिका की जीडीपी 26.855 लाख करोड़ डॉलर की है, जबकि 2028 तक यह 32.3 लाख करोड़ डॉलर और 2075 तक 51.5 लाख करोड़ डॉलर तक पहुंच सकती है. 

    IMF GDP Projection : आईएमएफ ने अनुमान जताया है कि अभी जीडीपी के मामले में टॉप-5 पर रहने वाले देश साल 2075 तक कहीं पीछे चले जाएंगे. जापान-जर्मनी जैसे देशों को ऐसे देश पीछे छोड़ देंगे जो अभी गिनती में भी कहीं नहीं आते हैं. एशियाई देशों की जीडीपी इस मामले में कहीं ज्‍यादा मजबूत हो जाएगी

    नई दिल्‍ली. अंतरराष्‍ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) जैसी दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित संस्‍था ने भी माना है कि आने वाला समय एशियाई देशों का होगा. जीडीपी के लिहाज से दुनिया के 2 सबसे बड़े देश एशिया से ही होंगे. IMF ने अनुमान जताया है कि साल 2075 तक चीन दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था वाला देश होगा, जबकि भारत इस मामले में दूसरे पायदान पर पहुंच जाएगा.

    IMF की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, साल 2023 में भारत की जीडीपी (GDP) 3.737 लाख करोड़ डॉलर की है, जो साल 2028 तक बढ़कर 5.5 लाख करोड़ डॉलर पहुंच जाएगी. इतना ही नहीं अगले 4 दशक में यानी साल 2075 तक भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था का आकार बढ़कर 52.5 लाख करोड़ डॉलर पहुंच सकता है. चीन इस मामले में भारत से बस थोड़ा ही आगे रहेगा. IMF के अनुसार, अभी चीन की जीडीपी 19.374 लाख करोड़ डॉलर है, जो 2028 तक 27.4 लाख करोड़ डॉलर और 2075 तक 57 लाख करोड़ डॉलर पहुंच सकती है.

    तीसरे पायदान पर अमेरिका, बाकी सब काफी पीछे
    IMF ने कहा है कि अमेरिका की अर्थव्‍यवस्‍था इस दौरान सुस्‍त पड़ जाएगी और अभी पहले स्‍थान पर होने के बावजूद यह सरककर तीसरे पायदान पर पहुंच जाएगी. 2023 में अमेरिका की जीडीपी 26.855 लाख करोड़ डॉलर की है, जबकि 2028 तक यह 32.3 लाख करोड़ डॉलर और 2075 तक 51.5 लाख करोड़ डॉलर तक पहुंच सकती है.

    जर्मनी-जापान-ब्रिटेन-फ्रांस सबसे आगे नाइजीरिया
    IMF ने सबसे चौंकाने वाली बात यह बताई कि अभी तीसरे, चौथे, छठें और सातवें पायदान पर काबिज देश जीडीपी के मामले में पीछे चले जाएंगे. चौथे पायदान पर इंडोनेशिया पहुंच जाएगा. 2023 में इंडोनेशिया की जीडीपी 2 लाख करोड़ डॉलर की रहेगी, जो 2028 तक भी 2 लाख करोड़ तक ही सिमटी रहेगी, लेकिन 2075 तक यह 13.7 लाख करोड़ डॉलर पहुंच जाएगी. इसी तरह, नाइजीरिया की जीडीपी जो 2023 में महज 0.5 लाख करोड़ डॉलर की है और अभी काफी पीछे चल रही है, 2028 में 0.9 लाख करोड़ और 2075 तक 13.1 लाख करोड़ डॉलर के साथ 5वें पायदान पर पहुंच जाएगी.

    यूरोप-अमेरिका के बाकी देश बहुत पीछे
    दक्षिणी अमेरिकी देश ब्राजील जीडीपी के मामले में साल 2075 तक 8.7 लाख करोड़ डॉलर के साथ 6वें पायदान पर पहुंच जाएगा. 2028 में यह 2.7 लाख करोड़ डॉलर तक पहुंच सकती हे, जो अभी 2.08 लाख करोड़ डॉलर है. जर्मनी की जीडीपी भी 2023 के 4.309 लाख करोड़ डॉलर से बढ़कर 207 तक 8.1 लाख करोड़ डॉलर हो जाएगी और यह 7वें पायदान पर होगा. 2075 तक ब्रिटेन 8वीं बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था रहेगा. 2023 में उसकी जीडीपी 3.159 लाख करोड़ डॉलर है, जो 2028 तक 4.2 लाख करोड़ और 2075 तक 7.6 लाख करोड़ डॉलर पहुंच जाएगी

    IMF के अनुसार, जापान की अर्थव्‍यवस्‍था 9वें पायदान पर रहेगी. 2023 में इसकी जीडीपी 4.410 लाख करोड़ की है, जो 2028 में 5.3 लाख करोड़ और 2075 तक 7.5 लाख करोड़ डॉलर हो सकती है. 10वें पायदान पर रूस और 11वें पर फ्रांस की जीडीपी होगी. रूस 2075 तक 6.9 लाख करोड़ डॉलर और फ्रांस 6.5 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्‍यवस्‍था वाला देश होगा. आईएमएफ का दावा- 2075 तक दूसरी बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था होगा भारत, चौंका देगा जापान-जर्मनी को पीछे करने वाले देश का नाम

    Sabhar https://hindi.news18.com

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