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रविवार, 23 जुलाई 2023

BREAKINGज्ञानवापी में 26 जुलाई तक नहीं होगा ASI सर्वे:सुप्रीम कोर्ट ने कहा- मस्जिद कमेटी वाराणसी कोर्ट के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट जा सकती है

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 सुप्रीम कोर्ट ने 24 जुलाई (सोमवार) को वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के सर्वे को लेकर अहम बात कही। शीर्ष कोर्ट ने मस्जिद में ASI के सर्वे पर 26 जुलाई यानी 2 दिन तक रोक लगा दी है। कहा कि 26 जुलाई की शाम 5 बजे तक कोई सर्वे ना किया जाए।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इस दौरान अगर मस्जिद कमेटी चाहे तो वाराणसी कोर्ट के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट जा सकती है। वाराणसी की अदालत ने मस्जिद में साइंटिफिक सर्वे का आदेश दिया था।

सुप्रीम कोर्ट में 24 जुलाई को जब सुनवाई शुरू हुई, जब ASI की टीम ज्ञानवापी में सर्वे कर रही थी। SC ने तुरंत वहां पर किसी तरह की खुदाई पर रोक लगा दी और कहा कि हम दोपहर 2 बजे दोबारा इस मामले पर सुनवाई करेंगे। लेकिन 11:50 बजे के आसपास ही कोर्ट ने सर्वे पर रोक BREAKINGज्ञानवापी में 26 जुलाई तक नहीं होगा ASI सर्वे:सुप्रीम कोर्ट ने कहा- मस्जिद कमेटी वाराणसी कोर्ट के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट जा सकती है आदेश दे दिया।

ऐसे हो रहा था ज्ञानवापी में सर्वे

वाराणसी में ASI ने 24 जुलाई को ज्ञानवापी का सर्वे शुरू कर किया था। सील वजूस्थल को छोड़कर पूरे परिसर का सर्वे कराने की बात थी।। शुरुआती 3 घंटे के सर्वे में फीता लेकर पूरे परिसर को नापा गया। 4 स्टैंड कैमरे परिसर के चारों कोने पर लगाए गए हैं। उसमें एक-एक एक्टिविटी रिकॉर्ड की जा रही है। तहखाने में अंधेरा ज्यादा होने से सर्वे में दिक्कत हुई। टॉर्च और अन्य लाइट की रोशनी कम पड़ गई। उधर, मुस्लिम पक्ष ने सर्वे का बहिष्कार किया। वह सर्वे के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया। सुप्रीम कोर्ट में याचिका को लेकर सुनवाई हुई। CJI ने यूपी सरकार से पूछा था कि ASI वहां क्या कर रही है। ज्ञानवापी में सर्वे की यथास्थिति क्या है।

परिसर में लगे पत्थर और ईंट की हाइट नापी
ASI की 4 टीमें परिसर को 4 हिस्सों में बांट कर अलग-अलग सर्वे कर रही हैं। परिसर में लगे पत्थर और ईंट की हाइट नापी गई। नींव के पास से मिट्टी का सैंपल लिया गया। चारों ओर की दीवारों की फोटो-वीडियोग्राफी की गई। सीढ़ियों पर लगे पत्थर के सैंपल लिए गए।

ASI टीम अब ज्ञानवापी के सभी कमरों और बरामदे की फोटो-वीडियो ग्राफी की जा रही है। 30 सदस्यीय ASI टीम सोमवार सुबह 6.30 बजे ज्ञानवापी पहुंच गई थी। 7 बजे से सर्वे शुरू कर दिया था। सर्वे और सावन के सोमवार को देखते हुए वाराणसी को हाईअलर्ट पर रखा गया है। परिसर के बाहर और आसपास 2,000 से ज्यादा जवान तैनात हैं।

मुस्लिम पक्ष के वकील बोले- हमने DM से कह दिया था सर्वे में शामिल नहीं होंगे
रविवार रात दिल्ली, पटना और आगरा से ASI की टीम वाराणसी पहुंची। यहां DM, कमिश्नर, पुलिस कमिश्नर के साथ बैठक की। इसके बाद सोमवार सुबह से सर्वे पर सहमति बनी। प्रशासन ने हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्षों और उनके वकीलों को बुलाया। हिंदू पक्ष ने सर्वे में सहयोग की बात कही। हिंदू पक्ष के लोग सर्वे टीम के साथ सुबह ज्ञानवापी के अंदर गए हैं।

वहीं, मुस्लिम पक्ष यानी अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी ने वाराणसी जिला कोर्ट के आदेश के खिलाफ सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई का हवाला दिया। मुस्लिम पक्ष के वकील मुमताज अहमद और रईस अहमद ने कहा, "हमने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार ही आगे बढ़ेंगे। कल ही हमने DM को मना कर दिया था कि हम सर्वे में शामिल नहीं होंगे।"

हिंदू पक्ष बोला-हमें यकीन है कि पूरा परिसर मंदिर का ही है
ज्ञानवापी मामले पर हिंदू पक्ष का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील सुभाष नंदन चतुर्वेदी ने कहा, "हमें यकीन है कि पूरा परिसर मंदिर का ही है। सर्वे का परिणाम हमारे अनुकूल होगा। वहीं याचिकाकर्ता सोहन लाल आर्य ने कहा, "यह हमारे लिए हिंदू समुदाय और करोड़ों हिंदुओं के लिए बहुत ही गौरवशाली पल है। सर्वे ही इस ज्ञानवापी मुद्दे का एकमात्र समाधान है।"

हिंदू पक्ष के वकील सुधीर त्रिपाठी ने कहा, "आज ज्ञानवापी सर्वे हो रहा है। ये हमारे लिए अच्छी बात है। सर्वे कब तक चलेगा, कह नहीं सकते।"

ज्ञानवापी मस्जिद के मुफ्ती बोले- पहले से सर्वे की कोई नोटिस नहीं दी
ज्ञानवापी मस्जिद के मुफ्ती अब्दुल बातिन नोमानी ने कहा, "रविवार देर रात वाराणसी के जिलाधिकारी और पुलिस कमिश्नर के साथ मुस्लिम पक्ष की बैठक हुई। अधिकारियों को बताया था कि पुरातत्विक सर्वे को लेकर उन्हें पहले से कोई नोटिस नहीं दी गई है। रिक्वेस्ट किया था कि इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को सुनवाई होने वाली है। ऐसे में सर्वे को 1 दिन के लिए टाल दिया जाए।

नोमानी का दावा है कि अधिकारियों ने उन्हें आश्वासन दिया था कि उनकी बातों को ऊपर के अधिकारियों को पहुंचाया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। सोमवार को सर्वे शुरू कर दिया गया। इसलिए मुस्लिम पक्ष ने सर्वे में शामिल ना होने का फैसला लिया।

वहीं, हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा- हमें उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट न्याय करेगा। अगर वे तत्काल सुनवाई की अनुमति देते हैं तो हम सुप्रीम कोर्ट में अपनी बात रखने के लिए तैयार हैं।

स्वास्तिक, त्रिशूल, डमरू और कमल चिह्न मिले थे
वाराणसी कोर्ट में वकील विष्णुशंकर जैन ने सुनवाई के दौरान दलील दी कि ज्ञानवापी की 14 से 16 मई के बीच हुए सर्वे में 2.5 फीट ऊंची गोलाकार शिवलिंग जैसी आकृति के ऊपर अलग से सफेद पत्थर लगा मिला। उस पर कटा हुआ निशान था। उसमें सींक डालने पर 63 सेंटीमीटर गहराई पाई गई। पत्थर की गोलाकार आकृति के बेस का व्यास 4 फीट पाया गया। ज्ञानवापी में कथित फव्वारे में पाइप के लिए जगह ही नहीं थी, जबकि ज्ञानवापी में स्वास्तिक, त्रिशूल, डमरू और कमल जैसे चिह्न मिले। मुस्लिम पक्ष कुंड के बीच मिली जिस काले रंग की पत्थरनुमा आकृति को फव्वारा बता रहा था, उसमें कोई छेद नहीं मिला है। न ही उसमें कोई पाइप घुसाने की जगह है।

नीचे सर्वे करें और खुदाई करें। सभी तहखानों की जमीन के नीचे सर्वे करें और यदि आवश्यक हो तो खुदाई करें। ज्ञानवापी के व्यासजी के तहखाने की भी जांच और सर्वे ASI करेगी। सर्वे की पूरे प्रक्रिया की वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी कराई जाएगी।

पुरातात्विक सर्वे धार्मिक ढांचा किसी अन्य धार्मिक निर्माण की सच्चाई सामने लाएगा। दीवारों की कलाकृति सिद्ध करेगी कि वर्तमान ढांचा पुराने मंदिर पर तो नहीं बना। निर्माण के दौरान पुरावशेष में क्या बदलाव किया गया है? यदि ऐसा है तो उसकी निश्चित अवधि, आकार, वास्तुशिल्पीय डिजाइन और बनावट विवादित स्थल पर वर्तमान में किस रूप में है?

बता दें कि याचिकाकर्ताओं की मांग थी कि ज्ञानवापी परिसर का वैज्ञानिक सर्वेक्षण कर यह पता लगाए जाए कि अंदर का भाग मंदिर का है या नहीं। अब काफी कुछ आज के ASI सर्वे पर निर्भर करता है।

GPR सर्वे से 15 मीटर तक प्रमाण
ASI के अधिकारियों की मानें तो GPR एक भू-भौतिकीय विधि है, जो उपसतह की छवि के लिए रडार का उपयोग करती है। यह कॉन्क्रीट, तारकोल, धातु, पाइप, केबल या चिनाई जैसी भूमिगत उपयोगिताओं की जांच करने के लिए उपसतह का सर्वेक्षण करने का एक तरीका है। इतिहासकारों ने पहले ही प्रस्ताव दिया था कि ज्ञानवापी परिसर से 50 मीटर की दूरी में ट्रेंच लगाकर सर्वे किया जा सकता है। संभावना है कि यहां उससे भी प्राचीन तथ्य मिल सकते हैं।

GPR सर्वे की तकनीक से बिना खुदाई कराए जमीन से 15 मीटर नीचे तक की सभी जानकारियां आसानी से मिल जाती हैं। ऐतिहासिक धरोहरें खुदाई में नष्ट नहीं होने का खतरा अधिक रहता है। इससे किसी तरह का उस क्षेत्र को कोई भी नुकसान नहीं होता है। कलाकृतियों की उम्र और प्रकृति का पता लगाई जाएगी। इमारत की आयु, निर्माण की प्रकृति भी पता चल जाएगी।

हिंदू पक्ष की ओर से कैविएट दाखिल
सर्वे से संबंधित जिला जज की अदालत के फैसले के बाद हिंदू पक्ष ने हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल की है। चार महिला वादिनी सीता साहू, रेखा पाठक, मंजू व्यास और लक्ष्मी देवी के अधिवक्ता सुधीर त्रिपाठी ने बताया कि हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल की जा चुकी है।

मां श्रृंगार गौरी मुकदमे की एक अन्य वादिनी राखी सिंह की तरफ से इलाहाबाद हाईकोर्ट में कैविएट दाखिल की गई है। उनके अधिवक्ता सौरभ तिवारी ने बताया कि राखी सिंह ASI से सर्वे के समर्थन में हैं। कैविएट इसलिए दाखिल की गई है कि किसी भी आदेश से पहले उनके पक्ष को सुना जाए।

कार्बन डेटिंग पर लगी है रोक
ज्ञानवापी में मिले कथित शिवलिंग के साइंटिफिक सर्वे और कॉर्बन डेटिंग पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा रखी है। 12 मई 2023 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ज्ञानवापी मस्जिद के वजूखाने में स्थित ठोस संरचना की कार्बन डेटिंग और वैज्ञानिक सर्वेक्षण का आदेश दिया था। SC ने कहा था कि ज्ञानवापी के इस मामले में संभलकर चलने की जरूरत है। ज्ञानवापी मस्जिद प्रबंधन समिति की तरफ से वकील हुजेफा अहमदी की याचिका पर सुनवाई हुई थी।

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BREAKINGज्ञानवापी में 26 जुलाई तक नहीं होगा ASI सर्वे:सुप्रीम कोर्ट ने कहा- मस्जिद कमेटी वाराणसी कोर्ट के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट जा सकती है

वाराणसीकुछ ही क्षण पहले

सुप्रीम कोर्ट ने 24 जुलाई (सोमवार) को वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के सर्वे को लेकर अहम बात कही। शीर्ष कोर्ट ने मस्जिद में ASI के सर्वे पर 26 जुलाई यानी 2 दिन तक रोक लगा दी है। कहा कि 26 जुलाई की शाम 5 बजे तक कोई सर्वे ना किया जाए।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इस दौरान अगर मस्जिद कमेटी चाहे तो वाराणसी कोर्ट के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट जा सकती है। वाराणसी की अदालत ने मस्जिद में साइंटिफिक सर्वे का आदेश दिया था।

सुप्रीम कोर्ट में 24 जुलाई को जब सुनवाई शुरू हुई, जब ASI की टीम ज्ञानवापी में सर्वे कर रही थी। SC ने तुरंत वहां पर किसी तरह की खुदाई पर रोक लगा दी और कहा कि हम दोपहर 2 बजे दोबारा इस मामले पर सुनवाई करेंगे। लेकिन 11:50 बजे के आसपास ही कोर्ट ने सर्वे पर रोक का आदेश दे दिया।

ऐसे हो रहा था ज्ञानवापी में सर्वे

वाराणसी में ASI ने 24 जुलाई को ज्ञानवापी का सर्वे शुरू कर किया था। सील वजूस्थल को छोड़कर पूरे परिसर का सर्वे कराने की बात थी।। शुरुआती 3 घंटे के सर्वे में फीता लेकर पूरे परिसर को नापा गया। 4 स्टैंड कैमरे परिसर के चारों कोने पर लगाए गए हैं। उसमें एक-एक एक्टिविटी रिकॉर्ड की जा रही है। तहखाने में अंधेरा ज्यादा होने से सर्वे में दिक्कत हुई। टॉर्च और अन्य लाइट की रोशनी कम पड़ गई। उधर, मुस्लिम पक्ष ने सर्वे का बहिष्कार किया। वह सर्वे के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया। सुप्रीम कोर्ट में याचिका को लेकर सुनवाई हुई। CJI ने यूपी सरकार से पूछा था कि ASI वहां क्या कर रही है। ज्ञानवापी में सर्वे की यथास्थिति क्या है।

ASI की टीम जांच के लिए सभी अत्याधुनिक उपकरण के साथ-साथ फावड़ा, झाड़ू भी अपने साथ लेकर आई है। - Dainik Bhaskar
ASI की टीम जांच के लिए सभी अत्याधुनिक उपकरण के साथ-साथ फावड़ा, झाड़ू भी अपने साथ लेकर आई है।

परिसर में लगे पत्थर और ईंट की हाइट नापी
ASI की 4 टीमें परिसर को 4 हिस्सों में बांट कर अलग-अलग सर्वे कर रही हैं। परिसर में लगे पत्थर और ईंट की हाइट नापी गई। नींव के पास से मिट्टी का सैंपल लिया गया। चारों ओर की दीवारों की फोटो-वीडियोग्राफी की गई। सीढ़ियों पर लगे पत्थर के सैंपल लिए गए।

ASI टीम अब ज्ञानवापी के सभी कमरों और बरामदे की फोटो-वीडियो ग्राफी की जा रही है। 30 सदस्यीय ASI टीम सोमवार सुबह 6.30 बजे ज्ञानवापी पहुंच गई थी। 7 बजे से सर्वे शुरू कर दिया था। सर्वे और सावन के सोमवार को देखते हुए वाराणसी को हाईअलर्ट पर रखा गया है। परिसर के बाहर और आसपास 2,000 से ज्यादा जवान तैनात हैं।

ज्ञानवापी के आसपास भारी सुरक्षा व्यवस्था है। - Dainik Bhaskar
ज्ञानवापी के आसपास भारी सुरक्षा व्यवस्था है।

मुस्लिम पक्ष के वकील बोले- हमने DM से कह दिया था सर्वे में शामिल नहीं होंगे
रविवार रात दिल्ली, पटना और आगरा से ASI की टीम वाराणसी पहुंची। यहां DM, कमिश्नर, पुलिस कमिश्नर के साथ बैठक की। इसके बाद सोमवार सुबह से सर्वे पर सहमति बनी। प्रशासन ने हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्षों और उनके वकीलों को बुलाया। हिंदू पक्ष ने सर्वे में सहयोग की बात कही। हिंदू पक्ष के लोग सर्वे टीम के साथ सुबह ज्ञानवापी के अंदर गए हैं।

वहीं, मुस्लिम पक्ष यानी अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी ने वाराणसी जिला कोर्ट के आदेश के खिलाफ सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई का हवाला दिया। मुस्लिम पक्ष के वकील मुमताज अहमद और रईस अहमद ने कहा, "हमने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार ही आगे बढ़ेंगे। कल ही हमने DM को मना कर दिया था कि हम सर्वे में शामिल नहीं होंगे।"

ये तस्वीर काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के गेट नंबर-4 से मंदिर जाने के रास्ते की है। बगल में लोहे की बैरिकेडिंग के अंदर ज्ञानवापी दिख रही है। जहां सर्वे चल रहा है। - Dainik Bhaskar
ये तस्वीर काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के गेट नंबर-4 से मंदिर जाने के रास्ते की है। बगल में लोहे की बैरिकेडिंग के अंदर ज्ञानवापी दिख रही है। जहां सर्वे चल रहा है।

हिंदू पक्ष बोला-हमें यकीन है कि पूरा परिसर मंदिर का ही है
ज्ञानवापी मामले पर हिंदू पक्ष का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील सुभाष नंदन चतुर्वेदी ने कहा, "हमें यकीन है कि पूरा परिसर मंदिर का ही है। सर्वे का परिणाम हमारे अनुकूल होगा। वहीं याचिकाकर्ता सोहन लाल आर्य ने कहा, "यह हमारे लिए हिंदू समुदाय और करोड़ों हिंदुओं के लिए बहुत ही गौरवशाली पल है। सर्वे ही इस ज्ञानवापी मुद्दे का एकमात्र समाधान है।"

हिंदू पक्ष के वकील सुधीर त्रिपाठी ने कहा, "आज ज्ञानवापी सर्वे हो रहा है। ये हमारे लिए अच्छी बात है। सर्वे कब तक चलेगा, कह नहीं सकते।"

ज्ञानवापी मस्जिद के मुफ्ती बोले- पहले से सर्वे की कोई नोटिस नहीं दी
ज्ञानवापी मस्जिद के मुफ्ती अब्दुल बातिन नोमानी ने कहा, "रविवार देर रात वाराणसी के जिलाधिकारी और पुलिस कमिश्नर के साथ मुस्लिम पक्ष की बैठक हुई। अधिकारियों को बताया था कि पुरातत्विक सर्वे को लेकर उन्हें पहले से कोई नोटिस नहीं दी गई है। रिक्वेस्ट किया था कि इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को सुनवाई होने वाली है। ऐसे में सर्वे को 1 दिन के लिए टाल दिया जाए।

ज्ञानवापी मस्जिद के मुफ्ती अब्दुल बातिन नोमानी। - Dainik Bhaskar
ज्ञानवापी मस्जिद के मुफ्ती अब्दुल बातिन नोमानी।

नोमानी का दावा है कि अधिकारियों ने उन्हें आश्वासन दिया था कि उनकी बातों को ऊपर के अधिकारियों को पहुंचाया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। सोमवार को सर्वे शुरू कर दिया गया। इसलिए मुस्लिम पक्ष ने सर्वे में शामिल ना होने का फैसला लिया।

वहीं, हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा- हमें उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट न्याय करेगा। अगर वे तत्काल सुनवाई की अनुमति देते हैं तो हम सुप्रीम कोर्ट में अपनी बात रखने के लिए तैयार हैं।

ASI की 30 सदस्यीय टीम सर्वे के लिए ज्ञानवापी में एंट्री करती हुई। - Dainik Bhaskar
ASI की 30 सदस्यीय टीम सर्वे के लिए ज्ञानवापी में एंट्री करती हुई।
अपर पुलिस आयुक्त (मुख्यालय-अपराध) संतोष कुमार सिंह, DCP काशी रामसेवक गौतम और ADCP काशी चंद्रकांत मीणा सहित पुलिस फोर्स ने आसपास के इलाकों में गश्त किया। - Dainik Bhaskar
अपर पुलिस आयुक्त (मुख्यालय-अपराध) संतोष कुमार सिंह, DCP काशी रामसेवक गौतम और ADCP काशी चंद्रकांत मीणा सहित पुलिस फोर्स ने आसपास के इलाकों में गश्त किया।

स्वास्तिक, त्रिशूल, डमरू और कमल चिह्न मिले थे
वाराणसी कोर्ट में वकील विष्णुशंकर जैन ने सुनवाई के दौरान दलील दी कि ज्ञानवापी की 14 से 16 मई के बीच हुए सर्वे में 2.5 फीट ऊंची गोलाकार शिवलिंग जैसी आकृति के ऊपर अलग से सफेद पत्थर लगा मिला। उस पर कटा हुआ निशान था। उसमें सींक डालने पर 63 सेंटीमीटर गहराई पाई गई। पत्थर की गोलाकार आकृति के बेस का व्यास 4 फीट पाया गया। ज्ञानवापी में कथित फव्वारे में पाइप के लिए जगह ही नहीं थी, जबकि ज्ञानवापी में स्वास्तिक, त्रिशूल, डमरू और कमल जैसे चिह्न मिले। मुस्लिम पक्ष कुंड के बीच मिली जिस काले रंग की पत्थरनुमा आकृति को फव्वारा बता रहा था, उसमें कोई छेद नहीं मिला है। न ही उसमें कोई पाइप घुसाने की जगह है।

 - Dainik Bhaskar

इन पद्धतियों से सर्वे करेगी ASI की टीम
ASI ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार यानी GPR या जिओ रेडियोलॉजी सिस्टम या दोनों का प्रयोग कर सर्वेक्षण कर सकती है। पुरानी इमारतों और खंडहरों के सर्वे में GPR और मॉडर्न टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करती है। ज्ञानवापी के सर्वे में भी इसी तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा।

हिंदू पक्ष के वकील विष्णु जैन ने बताया है कि आज ज्ञानवापी का सर्वे GPR और मॉडर्न टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से किया जाएगा। इसके अलावा ASI की एक टीम अध्ययन क्षेत्र में आगे-पीछे सीधी रेखाओं में चलती है। जैसे-जैसे वे चलते हैं, वे अतीत की मानवीय गतिविधियों के साक्ष्य की तलाश करते हैं। जिसमें दीवारें या नींव, कलाकृतियां, मिट्टी में रंग परिवर्तन शामिल हैं जो सुविधाओं का संकेत दे सकते हैं। एक शोधकर्ता या टीम सतह पर कलाकृतियां या अन्य पुरातात्विक संकेतकों की तलाश में लक्ष्य क्षेत्र के माध्यम से धीरे-धीरे चलती है, टीम उस समय के पर्यावरण के पहलुओं को रिकॉर्ड करती है। आज ASI सर्वे की टीम उन सभी साक्ष्यों को सहेजेगी।

आज इस परिसर में ASI की टीम गुंबद से लेकर दीवार तक सर्वे कर रही है। - Dainik Bhaskar
आज इस परिसर में ASI की टीम गुंबद से लेकर दीवार तक सर्वे कर रही है।

21 जुलाई को कोर्ट ने सर्वे का आदेश दिया, इन सवालों के मिलेंगे जवाब
हिंदू पक्ष की ओर से सर्वे की मांग की गई जिसको स्वीकार कर कोर्ट ने ASI को 21 जुलाई को आदेश दिया। कोर्ट ने आदेश दिया कि ASI के निदेशक मस्जिद के तीन गुंबदों के ठीक नीचे GPR तकनीक से सर्वेक्षण करें और यदि आवश्यक हो तो खुदाई करें। इमारत के पश्चिमी दीवार के नीचे सर्वे करें और खुदाई करें। सभी तहखानों की जमीन के नीचे सर्वे करें और यदि आवश्यक हो तो खुदाई करें। ज्ञानवापी के व्यासजी के तहखाने की भी जांच और सर्वे ASI करेगी। सर्वे की पूरे प्रक्रिया की वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी कराई जाएगी।

पुरातात्विक सर्वे धार्मिक ढांचा किसी अन्य धार्मिक निर्माण की सच्चाई सामने लाएगा। दीवारों की कलाकृति सिद्ध करेगी कि वर्तमान ढांचा पुराने मंदिर पर तो नहीं बना। निर्माण के दौरान पुरावशेष में क्या बदलाव किया गया है? यदि ऐसा है तो उसकी निश्चित अवधि, आकार, वास्तुशिल्पीय डिजाइन और बनावट विवादित स्थल पर वर्तमान में किस रूप में है?

बता दें कि याचिकाकर्ताओं की मांग थी कि ज्ञानवापी परिसर का वैज्ञानिक सर्वेक्षण कर यह पता लगाए जाए कि अंदर का भाग मंदिर का है या नहीं। अब काफी कुछ आज के ASI सर्वे पर निर्भर करता है।

वाराणसी में ज्ञानवापी के वजूस्थल में सर्वे के दौरान मिला था कथित शिवलिंग। - Dainik Bhaskar
वाराणसी में ज्ञानवापी के वजूस्थल में सर्वे के दौरान मिला था कथित शिवलिंग।

GPR सर्वे से 15 मीटर तक प्रमाण
ASI के अधिकारियों की मानें तो GPR एक भू-भौतिकीय विधि है, जो उपसतह की छवि के लिए रडार का उपयोग करती है। यह कॉन्क्रीट, तारकोल, धातु, पाइप, केबल या चिनाई जैसी भूमिगत उपयोगिताओं की जांच करने के लिए उपसतह का सर्वेक्षण करने का एक तरीका है। इतिहासकारों ने पहले ही प्रस्ताव दिया था कि ज्ञानवापी परिसर से 50 मीटर की दूरी में ट्रेंच लगाकर सर्वे किया जा सकता है। संभावना है कि यहां उससे भी प्राचीन तथ्य मिल सकते हैं।

GPR सर्वे की तकनीक से बिना खुदाई कराए जमीन से 15 मीटर नीचे तक की सभी जानकारियां आसानी से मिल जाती हैं। ऐतिहासिक धरोहरें खुदाई में नष्ट नहीं होने का खतरा अधिक रहता है। इससे किसी तरह का उस क्षेत्र को कोई भी नुकसान नहीं होता है। कलाकृतियों की उम्र और प्रकृति का पता लगाई जाएगी। इमारत की आयु, निर्माण की प्रकृति भी पता चल जाएगी।

ज्ञानवापी सर्वे में चारों महिला वादिनी के अलावा इन वकीलों की मौजूदगी रहेगी। - Dainik Bhaskar
ज्ञानवापी सर्वे में चारों महिला वादिनी के अलावा इन वकीलों की मौजूदगी रहेगी।

सर्वे के दौरान इन लोगों की मौजूदगी
सर्वे के दौरान ज्ञानवापी परिसर में ASI की 30 सदस्यीय टीम के अलावा हिंदू पक्ष की चार वादिनी महिला, उनके चार अधिवक्ता मौजूद रहेंगे। मसाजिद कमेटी से भी चार लोगों और उनके चार अधिवक्ताओं को रहने के लिए कहा गया है। इसके अलावा जिला शासकीय अधिवक्ता, राज्य सरकार के अधिवक्ता, केंद्र सरकार के अधिवक्ता, एडीएम सिटी और एक अपर पुलिस आयुक्त मौजूद रहेंगे। फोटोग्राफर और वीडियोग्राफर कौन रहेंगे, इस संबंध में एएसआई को निर्णय लेना है। हिंदू पक्ष की तरफ से वकील सुधीर त्रिपाठी, सुभाष नंदन चतुर्वेदी, अनुपम द्विवेदी आदि रहेंगे। पुलिस कमिश्नर मुथा अशोक जैन ने सभी को बुलाकर संवाद किया।

वाराणसी ज्ञानवापी परिसर के बाहर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम। - Dainik Bhaskar
वाराणसी ज्ञानवापी परिसर के बाहर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम।

हिंदू पक्ष की ओर से कैविएट दाखिल
सर्वे से संबंधित जिला जज की अदालत के फैसले के बाद हिंदू पक्ष ने हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल की है। चार महिला वादिनी सीता साहू, रेखा पाठक, मंजू व्यास और लक्ष्मी देवी के अधिवक्ता सुधीर त्रिपाठी ने बताया कि हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल की जा चुकी है।

मां श्रृंगार गौरी मुकदमे की एक अन्य वादिनी राखी सिंह की तरफ से इलाहाबाद हाईकोर्ट में कैविएट दाखिल की गई है। उनके अधिवक्ता सौरभ तिवारी ने बताया कि राखी सिंह ASI से सर्वे के समर्थन में हैं। कैविएट इसलिए दाखिल की गई है कि किसी भी आदेश से पहले उनके पक्ष को सुना जाए।

ASI टीम ने सर्वे से एक दिन पहले यानी रविवार शाम बैठक की। इसमें सोमवार को सर्वे का दिन तय हुआ। इसके बाद पुलिस कमिश्नर के आवास पहुंचा वादिनी हिंदूपक्ष। - Dainik Bhaskar
ASI टीम ने सर्वे से एक दिन पहले यानी रविवार शाम बैठक की। इसमें सोमवार को सर्वे का दिन तय हुआ। इसके बाद पुलिस कमिश्नर के आवास पहुंचा वादिनी हिंदूपक्ष।

ASI से सर्वे के खिलाफ मसाजिद कमेटी पहुंची सुप्रीम कोर्ट
ASI सर्वे संबंधी जिला जज की अदालत के आदेश के खिलाफ अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल की है। अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी के संयुक्त सचिव सैयद मोहम्मद यासीन ने कहा कि ASI सर्वे का आदेश देकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना की गई है। जिला जज की अदालत का आदेश सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना है।

ज्ञानवापी परिसर की पश्चिमी दीवार पर स्वास्तिक, त्रिशूल, डमरू और कमल जैसे चिह्न मिले है। - Dainik Bhaskar
ज्ञानवापी परिसर की पश्चिमी दीवार पर स्वास्तिक, त्रिशूल, डमरू और कमल जैसे चिह्न मिले है।

कार्बन डेटिंग पर लगी है रोक
ज्ञानवापी में मिले कथित शिवलिंग के साइंटिफिक सर्वे और कॉर्बन डेटिंग पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा रखी है। 12 मई 2023 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ज्ञानवापी मस्जिद के वजूखाने में स्थित ठोस संरचना की कार्बन डेटिंग और वैज्ञानिक सर्वेक्षण का आदेश दिया था। SC ने कहा था कि ज्ञानवापी के इस मामले में संभलकर चलने की जरूरत है। ज्ञानवापी मस्जिद प्रबंधन समिति की तरफ से वकील हुजेफा अहमदी की याचिका पर सुनवाई हुई थी।

वादिनी चार महिलाओं ने ASI सर्वे के आदेश के बाद खुशी जताई थी। हर हर महादेव के नारे लगाए थे। - Dainik Bhaskar
वादिनी चार महिलाओं ने ASI सर्वे के आदेश के बाद खुशी जताई थी। हर हर महादेव के नारे लगाए थे।

सर्वे का मामला एक नजर में
अगस्त 2021 में पांच महिलाओं ने वाराणसी के सिविल जज के सामने एक वाद दायर किया था। इसमें उन्होंने ज्ञानवापी के बगल में बने श्रृंगार गौरी मंदिर में रोजाना पूजा और दर्शन करने की अनुमति देने की मांग की थी। महिलाओं की याचिका पर जज ने ज्ञानवापी परिसर का सर्वे कराने का आदेश दिया था। कोर्ट के आदेश पर पिछली साल तीन दिन तक सर्वे हुआ था।

सर्वे के बाद हिंदू पक्ष ने यहां शिवलिंग मिलने का दावा किया था। दावा था कि ज्ञानवापी के वजूखाने में शिवलिंग है। हालांकि मुस्लिम पक्ष का कहना था कि वो शिवलिंग नहीं, बल्कि फव्वारा है जो हर मस्जिद में होता है। इस मामले की सुनवाई कोर्ट में पूरी हो गई थी। जिला जज ने ऑर्डर रिजर्व कर लिया था। 16 मई 2023 को चारों वादिनी महिलाओं की तरफ से हिंदू पक्ष ने एक प्रार्थना पत्र दिया था, जिसमें मांग की गई थी कि ज्ञानवापी के विवादित हिस्से को छोड़कर पूरे परिसर की ASI से जांच कराई जाए। 21 जुलाई को इसी याचिका पर कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए ASI सर्वे की इजाजत दे दी है। sabhar bhaskar.com 

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मणिपुर घटना को लेकर कथित उदारवादियों पर बरसे असम सीएम, कई खबरें शेयर कर उठाया गंभीर सवाल

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 असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मणिपुर की घटना पर ‘सीमित नाराजगी’ को लेकर सवाल उठाए हैं। सरमा ने कहा कि अन्य जगहों पर हो रही ऐसी ही हिंसक घटनाओं पर कथित उदारवादी चुप क्यों हैं? सरमा ने शुक्रवार को कई ट्वीट किए, जिनमें उन्होंने कई मीडिया रिपोर्ट्स को साझा किया, जिनमें अन्य राज्यों में महिलाओं के साथ हुई यौन उत्पीड़न की घटनाओं के बारे में जानकारी दी गई थी।

हिमंत बिस्वा सरमा ने मणिपुर के वायरल वीडियो पर पूर्वोत्तर के लिए "सीमित आक्रोश" पर सवाल उठाया

सरमा ने उठाए सवाल

हिमंत बिस्वा सरमा ने ट्वीट में लिखा कि ‘मणिपुर की घटना वीभत्स है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी लेकिन दुर्भाग्य से कथित उदारवादियों ने उत्तर पूर्व की घटना को लेकर ही सीमित नाराजगी जाहिर की, जबकि ऐसी ही निर्दयतापूर्वक आपराधिक घटनाएं कई अन्य जगह भी हुई हैं।’



सीएम ने कई खबरों को किया साझा

सरमा ने एक अन्य ट्वीट में एक खबर साझा करते हुए लिखा ‘जोधपुर में 19 जुलाई 2023 को एक ही परिवार के चार लोगों, जिनमें छह महीने का नवजात भी शामिल था, उनकी हत्या के बाद शव जला दिए गए।’ एक अन्य ट्वीट में सरमा ने लिखा कि ‘जोधपुर में 16 जुलाई 2023 को एक दलित नाबालिग के साथ उसके प्रेमी के सामने सामूहिक दुष्कर्म किया गया।’


सरमा ने अन्य ट्वीट में लिखा कि ’13 जुलाई 2023 को एक भाजपा कार्यकर्ता ने आरोप लगाया कि चुनाव में हारने पर टीएमसी कार्यकर्ता ने उस पर पेशाब किया।’


अन्य ट्वीट में असम सीएम ने लिखा कि ‘8 जुलाई 2023 को एक महिला भाजपा कार्यकर्ता ने आरोप लगाया कि उसे निर्वस्त्र करके टीएमसी कार्यकर्ताओं ने परेड कराई।’ ‘7 जून 2023 को बिहार में आठ लोगों ने एक नाबालिग आदिवासी लड़की से सामूहिक दुष्कर्म किया।’ ’20 अक्तूबर 2022 को झारखंड के चाईबासा में एक आदिवासी महिला से 10 लोगों ने दिन के उजाले में सड़क पर सामूहिक दुष्कर्म किया।’


पहले भी जता चुके हैं नाराजगी

इससे पहले शुक्रवार को भी अपने एक बयान में हिमंत बिस्वा सरमा ने मणिपुर की वीडियो वायरल होने के समय पर भी सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा कि ‘मणिपुर घटना की शिकायत काफी दिनों पहले दर्ज हो गई थी और वीडियो भी उपलब्ध था लेकिन संसद का मानसून सत्र शुरू होने से एक दिन पहले ही यह वायरल हुआ। इससे लगता है कि इसमें कुछ राजनीति भी शामिल है।’



सरमा ने कहा कि ‘मणिपुर की घटना की जितनी निंदा की जाए, वह कम है और दोषियों को सजा मिलनी चाहिए, इसमें मुझे कोई दिक्कत नहीं है लेकिन इसे लेकर पूरे उत्तर पूर्व और मणिपुर को बदनाम करना भी ठीक नहीं है।’ बता दें कि मणिपुर में दो महिलाओं को लोगों की भीड़ द्वारा निर्वस्त्र कर परेड कराने और उनके साथ सामूहिक दुष्कर्म का वीडियो सामने आया था। जिसे लेकर पूरे देश में गुस्सा और नाराजगी देखी गई। विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार को घेर रहा है और सीएम एन बीरेन सिंह से इस्तीफे की मांग कर रहा है।

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शनिवार, 22 जुलाई 2023

मणिपुर में 2 और लड़कियों से गैंगरेप:दोनों की हत्या की गई; चश्मदीद ने कहा- भीड़ के साथ आई महिलाओं ने रेप के लिए उकसाया

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 मणिपुर में 4 मई को भीड़ ने दो महिलाओं को निर्वस्त्र कर सड़क पर घुमाया था। उसी दिन दो अन्य लड़कियों का रेप कर हत्या कर दी गई थी। ये घटना कांगपोकपी जिले के कोनुंग ममांग इलाके में हुई थी, यह जगह दूसरे घटनास्थल से 40 किलोमीटर दूर है।

पीड़ितों के साथ काम करने वाले एक शख्स ने बताया कि एक लड़की की उम्र 21 और दूसरी की 24 साल थी। दोनों गैराज में काम करती थीं। उस दिन भीड़ में महिलाएं भी आई थीं। उन महिलाओं ने ही भीड़ में मौजूद मर्दों से उनका रेप करने के लिए कहा था।


इसके बाद वो लड़कियों को कमरे में ले गए। लाइट बंद कर दी। उनके मुंह पर कपड़ा बांध दिया गया। डेढ़ घंटे बाद उनको घसीटते हुए बाहर लाया गया। उनके शरीर पर कपड़े नहीं थे। वो खून से लथपथ थीं। उनके बाल भी कटे हुए थे।

 मई को जीरो FIR दर्ज की गई थी

दैनिक भास्कर के रिपोर्टर ने दोनों लड़कियों में से एक की मां से बात की। उन्होंने बताया कि 16 मई को उन्होंने सैकुल पुलिस स्टेशन में जीरो FIR दर्ज कराई थी। डरे होने के कारण पहले रिपोर्ट दर्ज कराने की हिम्मत नहीं हुई। बाद में जब माहौल थोड़ा शांत हुआ तो रिपोर्ट दर्ज कराई थी।


पुलिस को अब तक नहीं मिले पीड़ित लड़कियों के शव

FIR के मुताबिक, दोनों लड़कियों का रेप हुआ, उन्हें टॉर्चर किया गया और बाद में बेरहमी से हत्या कर दी गई। इस घटना में 100-200 लोगों के मौजूद होने का जिक्र है। ये मामला फिलहाल पोरोम्पैट पुलिस स्टेशन को ट्रांसफर कर दिया गया है। पुलिस को अब तक पीड़ितों के शव नहीं मिले हैं।


मणिपुर पुलिस ने बताया कि इस मामले में अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है।


19 जुलाई को महिलाओं को निर्वस्त्र कर घुमाने का वीडियो वायरल हुआ था

यह फोटो महिलाओं को निर्वस्त्र घुमाए जाने के वीडियो से ही ली गई है। हमने महिलाओं वाले हिस्से को नहीं लगाया। यह हुजूम आरोपियों का है।

4 मई को ही दो महिलाओं को निर्वस्त्र घुमाने की घटना थोउबाल जिले में हुई थी। इसका वीडियो 19 जुलाई को सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। वीडियो में दिखाई दे रहा है कि कुछ लोग दो महिलाओं को निर्वस्त्र करके ले गए और उनसे अश्लील हरकतें कीं।


एक पीड़ित महिला के पति ने बताया- 'हजार लोगों की भीड़ ने गांव पर हमला किया था। मैं भीड़ से अपनी पत्नी और गांव वालों को नहीं बचा पाया। पुलिसवालों ने भी हमें सुरक्षा नहीं दी। भीड़ तीन घंटे तक दरिंदगी करती रही। मेरी पत्नी ने किसी तरह एक गांव में पनाह ली।'


वहीं, वीडियो में दिख रही दूसरी महिला की मां ने कहा- 'अब हम कभी अपने गांव नहीं लौटेंगे। वहां मेरे छोटे लड़के की गोली मारकर हत्या कर दी गई, मेरी बेटी को शर्मिंदा किया गया। अब मेरे लिए सब कुछ खत्म हो चुका है।'

मणिपुर में 2 और लड़कियों से गैंगरेप:दोनों की हत्या की गई; चश्मदीद ने कहा- भीड़ के साथ आई महिलाओं ने रेप के लिए उकसाया

महिलाओं को निर्वस्त्र कर घुमाने के मामले में अब तक 5 आरोपी गिरफ्तार

मणिपुर में दो महिलाओं को निर्वस्त्र कर घुमाए जाने के मामले में अब तक पांच आरोपी को गिरफ्तार किया गया है। 21 जुलाई को गिरफ्तार किए गए 4 आरोपियों की कोर्ट में पेशी हुई थी। उन्हें 11 दिन की पुलिस कस्टडी में भेजा गया है। sabhar Bhaskar.com

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बहन ने भाई को फोन कर कहा- मैंने जहर खा लिया है, थोड़ी देर में मर जाऊंगी

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UP: बहन, अब मैं जीना नहीं चाहता, फोन करके बोला भाई- मैंने जहर खा लिया, कुछ देर में मर जाऊंगा; और फिर... 

बाराबंकी के फतेहपुर में अपनी बहन के कुछ समय पहले प्रेमी संग भाग जाने से नाराज एक युवक ने शुक्रवार सुबह उसकी बेरहमी से हत्या कर दी। उसका सिर धड़ से अलग करने के बाद वह एक हाथ में बांका और एक हाथ में कटा सिर लेकर सहसी से फतेहपुर की तरफ जाने वाली सड़क पर घूमता रहा। इससे पूरे गांव में दहशत फैल गई।


ऑनर किलिंग की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस ने गांव से करीब एक किलोमीटर दूर फतेहपुर की तरफ जाने वाली सड़क पर उसे गिरफ्तार कर लिया। पिता की तहरीर पर युवक के खिलाफ हत्या का केस दर्ज कर लिया गया है। जानकारी के मुताबिक, आरोपी युवक रियाज ने अपनी बहन को घर के पास अहाते में कपड़े धोने भेजा।

बहन ने भाई को फोन कर कहा- मैंने जहर खा लिया है, थोड़ी देर में मर जाऊंगी


फिर वहीं पहुंचकर उस पर ताबड़तोड़ वार करने लगा और आखिर में सिर ही धड़ से अलग कर दिया। रियाज की बहन गत 25 मई को गांव के ही निवासी चांदबाबू के साथ घर छोड़कर चली गई थी। 29 मई को पिता की तहरीर पर चांदबाबू समेत पांच लोगों पर अपहरण का केस दर्ज किया गया।


पिता ने बेटी की उम्र 17 वर्ष बताई थी। पुलिस ने दोनों को खोज निकाला और युवक को जेल भेज दिया, जबकि किशोरी को उसके परिजनों को सौंप दिया। 24 वर्षीय रियाज तभी से अपनी बहन के चाल-चलन को लेकर नाराज था। एसएचओ डीके सिंह ने बताया कि आरोपी मानसिक रूप से स्वस्थ लग रहा है।


बहन को पूरी रात समझाया, फिर लिया हत्या का फैसला

फतेहपुर कोतवाली क्षेत्र में भाई की ओर से बहन की हत्या के पीछे की वजह जानकर आप दंग रह जाएंगे। जेल से छूटे प्रेमी के साथ ही रहने के लिए वह तय कर चुकी थी। उसने मां, बहन व भाई से साफ कह दिया था कि वह सच्चा प्यार करती है। भाई रियाज पूरी रात बहन को समझाता रहा कि दूसरी जगह शादी करेंगे। युवती ने बात मानने से इंकार किया तो भाई ने बहन की हत्या कर दी।



कोतवाली में गिरफ्तार कर लाए गए युवक ने पुलिस को यह सच्चाई बताई। उसने कहा कि वह भाग नहीं रहा था, बल्कि स्वयं कोतवाली आ रहा था। युवक हम लोगों की जाति से मिलता नहीं था। बहन की शादी कैसे कर सकते थे। परिजनों ने भी पुलिस को यही सच्चाई बताई। फतेहपुर के एसएचओ ने बताया कि युवती का प्रेमी बीरी सात जुलाई को छूट गया था। लेकिन गांव नहीं आया था। हत्या से पहले भी रियाज उसे मनाने व समझाने की कोशिश करने की बात कह रहा है।


बदहवास हुआ पिता, बिलख पड़ीं बहनें

मृतका का पिता साइकिल से फेरी लगाकर सब्जी बेचता है। युवती तीन बड़े भाइयों व चार बहनों में पांचवें नंबर पर थी। इनमें एक भाई व एक बहन की शादी हो चुकी है। युवती दो साल पहले तक मदरसे में पढ़ती थी। इन दिनों वह घर पर ही रहती थी। शुक्रवार सुबह पिता अपने काम के सिलसिले में घर से निकल गया था। सूचना पाकर जब पिता घर पहुंचा तो बदहवास हो गया। बहनें भी बिलख रही थीं। एएसपी उत्तरी आशुतोष मिश्र ने बताया कि बहन के चाल-चलन से क्षुब्ध होकर युवक ने घटना को अंजाम दिया है।

कटा सिर लेकर घूमता रहा भाई, ‘मैं चांदबाबू से सच्चा प्यार करता हूं, रात भर समझाया, नहीं माना तो काट दिया’

अहाते से सड़क तक बिखरा खून, गांव में सनसनी

हत्या के बाद युवक जब सिर लेकर अहाते से निकला तो टपकता खून सड़क तक फैल गया। इससे गांव में सनसनी फैल गई। महिलाएं दहशत से घरों में दुबक गईं।

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ईरान को अपनी ‘नैतिकता पुलिस’ की वापसी क्यों करानी पड़ी?

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 ईरान को अपनी ‘नैतिकता पुलिस’ की वापसी क्यों करानी पड़ी?

मोनीर गाएदी


ईरान में हिजाब कानून लागू कराने के लिए ‘नैतिकता पुलिस’ यानी ‘मोरैलिटी पुलिस’ की गश्त फिर शुरू कर दी गई है. हिजाब कानून के तहत महिलाओं को सार्वजनिक जगहों पर ढीले कपड़े पहनने होते हैं और अपने बालों को ढक कर रखना होता है

राजनीतिमध्य पूर्व

ईरान को अपनी ‘नैतिकता पुलिस’ की वापसी क्यों करानी पड़ी?

मोनीर गाएदी

8 घंटे पहले8 घंटे पहले

ईरान में हिजाब कानून लागू कराने के लिए ‘नैतिकता पुलिस’ यानी ‘मोरैलिटी पुलिस’ की गश्त फिर शुरू कर दी गई है. हिजाब कानून के तहत महिलाओं को सार्वजनिक जगहों पर ढीले कपड़े पहनने होते हैं और अपने बालों को ढक कर रखना होता है.


https://p.dw.com/p/4UEgU

हिजाब कानूनों का पालन कराने के लिए ईरान को नैतिकता पुलिस की जरूरत पड़ती है

ईरान में हिजाब के खिलाफ प्रदर्शन करती महिलाएंतस्वीर: UGC

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पिछले साल हुए देशव्यापी प्रदर्शन और बड़ी संख्या में महिलाओं द्वारा हिजाब पहनने से इनकार करने के बाद ‘नैतिकता पुलिस' एक तरह से ईरान की सड़कों से गायब ही हो गई थी. लेकिन अब अधिकारियों ने इस कानून के प्रवर्तन के लिए नया अभियान शुरू कर दिया है. रविवार को ईरानी पुलिस के एक प्रवक्ता सैयद मोंतजिर अल अहमदी ने इस बात की पुष्टि कि जल्दी ही गश्त के लिए वाहनों और पैदल सिपाहियों को तैनात किया जाएगा. ईरान की सरकार समाचार एजेंसी इरना ने उनके हवाले से लिखा है कि पुलिस शुरुआत में बात न मानने वाली महिलाओं के खिलाफ चेतावनी जारी करेगी और जो लोग कानून तोड़ेंगे, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी.


कौन दे रहा है ईरान में स्कूली लड़कियों को जहर


पिछले साल सितंबर में, 22 वर्षीय कुर्द महिला महसा जिना अमीनी को ‘मोरैलिटी पुलिस' ने गलत तरीके से हिजाब पहनने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया था. तीन दिन बाद ही अस्पताल में उनकी मौत हो गई. कथित तौर पर दुर्व्यवहार के चलते हुए उनकी मौत के विरोध में देशव्यापी विरोध प्रदर्शन होने लगे और कई महीने तक ईरान में अस्थिरता बनी रही. बेहद सख्ती से इस विरोध प्रदर्शन को नियंत्रित करने के चलते सैकड़ों लोगों की मौत हो गई. इसके बावजूद बड़ी संख्या में महिलाओं ने झुकने से इनकार कर दिया और विरोध और गुस्से में सार्वजनिक रूप से बिना सिर ढके प्रदर्शन में हिस्सा लेने लगीं. दिसंबर में अधिकारियों ने दावा किया कि इस पुलिस को भंग करदिया गया है.


लेकिन पिछले कुछ दिनों से ऐसी खबरें मिल रही हैं कि इसकी वापसी हो गई है. इस बारे में कई पत्रकारों की रिपोर्ट् और सोशल मीडिया में भी लिखा जा रहा है, न सिर्फ राजधानी तेहरान में बल्कि दूसरे शहरों में भी. रविवार को सोशल मीडिया पर उत्तरी शहर रश्त का एक वीडियो प्रसारित होना शुरू हुआ जिसमें ‘मोरैलिटी पुलिस' वाले तीन महिलाओं को गिरफ्तार करने की कोशिश कर रहे हैं और दर्जनों स्थानीय लोग उसका विरोध कर रहे हैं.


राजनीतिमध्य पूर्व

ईरान को अपनी ‘नैतिकता पुलिस’ की वापसी क्यों करानी पड़ी?

मोनीर गाएदी

9 घंटे पहले9 घंटे पहले

ईरान में हिजाब कानून लागू कराने के लिए ‘नैतिकता पुलिस’ यानी ‘मोरैलिटी पुलिस’ की गश्त फिर शुरू कर दी गई है. हिजाब कानून के तहत महिलाओं को सार्वजनिक जगहों पर ढीले कपड़े पहनने होते हैं और अपने बालों को ढक कर रखना होता है.


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हिजाब कानूनों का पालन कराने के लिए ईरान को नैतिकता पुलिस की जरूरत पड़ती है

ईरान में हिजाब के खिलाफ प्रदर्शन करती महिलाएंतस्वीर: UGC

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पिछले साल हुए देशव्यापी प्रदर्शन और बड़ी संख्या में महिलाओं द्वारा हिजाब पहनने से इनकार करने के बाद ‘नैतिकता पुलिस' एक तरह से ईरान की सड़कों से गायब ही हो गई थी. लेकिन अब अधिकारियों ने इस कानून के प्रवर्तन के लिए नया अभियान शुरू कर दिया है. रविवार को ईरानी पुलिस के एक प्रवक्ता सैयद मोंतजिर अल अहमदी ने इस बात की पुष्टि कि जल्दी ही गश्त के लिए वाहनों और पैदल सिपाहियों को तैनात किया जाएगा. ईरान की सरकार समाचार एजेंसी इरना ने उनके हवाले से लिखा है कि पुलिस शुरुआत में बात न मानने वाली महिलाओं के खिलाफ चेतावनी जारी करेगी और जो लोग कानून तोड़ेंगे, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी.


कौन दे रहा है ईरान में स्कूली लड़कियों को जहर


पिछले साल सितंबर में, 22 वर्षीय कुर्द महिला महसा जिना अमीनी को ‘मोरैलिटी पुलिस' ने गलत तरीके से हिजाब पहनने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया था. तीन दिन बाद ही अस्पताल में उनकी मौत हो गई. कथित तौर पर दुर्व्यवहार के चलते हुए उनकी मौत के विरोध में देशव्यापी विरोध प्रदर्शन होने लगे और कई महीने तक ईरान में अस्थिरता बनी रही. बेहद सख्ती से इस विरोध प्रदर्शन को नियंत्रित करने के चलते सैकड़ों लोगों की मौत हो गई. इसके बावजूद बड़ी संख्या में महिलाओं ने झुकने से इनकार कर दिया और विरोध और गुस्से में सार्वजनिक रूप से बिना सिर ढके प्रदर्शन में हिस्सा लेने लगीं. दिसंबर में अधिकारियों ने दावा किया कि इस पुलिस को भंग करदिया गया है.


लेकिन पिछले कुछ दिनों से ऐसी खबरें मिल रही हैं कि इसकी वापसी हो गई है. इस बारे में कई पत्रकारों की रिपोर्ट् और सोशल मीडिया में भी लिखा जा रहा है, न सिर्फ राजधानी तेहरान में बल्कि दूसरे शहरों में भी. रविवार को सोशल मीडिया पर उत्तरी शहर रश्त का एक वीडियो प्रसारित होना शुरू हुआ जिसमें ‘मोरैलिटी पुलिस' वाले तीन महिलाओं को गिरफ्तार करने की कोशिश कर रहे हैं और दर्जनों स्थानीय लोग उसका विरोध कर रहे हैं.

एक विफल परियोजना'

समाजशास्त्री अजादेह कियान-शिबू कहती हैं कि ईरानी शासन इस्लामिक गणराज्य की अनिवार्य हिजाब नीति को लागू कराने के बारे में काफी सख्त रहा है. उनके मुताबिक, यह नीति उस क्रांति का एक अहम हिस्सा रही है जिसकी वजह से वे सत्ता में आए हैं. वो कहती हैं कि शासन की इस नीति को लेकर जब उन्हें जनता के असंतोष का सामना करना पड़ा तो उन्होंने प्रवर्तन के नए रास्ते ढूंढ़ने शुरू कर दिए. पिछले कुछ महीनों में सरकार ने सार्वजनिक परिवहन पर चेहरे पहचानने वाली तकनीक का उपयोग करना शुरू किया है. साथ ही, उन शॉपिंग मॉल्स, कैफे और रेस्त्रां को बंद करा दिया है जहां बिना हिजाब के महिलाओं को जाने की अनुमति दी गई है. अधिकारियों ने टैक्सी ड्राइवरों पर भी सख्ती की है कि वो उन महिलाओं को अपनी गाड़ी में न बैठाएं जो हिजाब नहीं पहनतीं.

लेकिन कियान-थिबौत कहती हैं कि सरकार की इन कोशिशों और सख्ती के बावजूद महिलाओं ने हिजाब पहनने से इनकार करना नहीं छोड़ा है. वो कहती हैं, "अनिवार्य हिजाब एक विफल परियोजना है. ईरानी महिलाओं ने इसे खारिज कर दिया है और पुरुष उनका समर्थन कर रहे हैं.” कियान-थिबौत कहती हैं कि यदि ‘मोरलिटी पुलिस' सड़कों पर लौटती और सरकार महिलाओं को हिजाब पहनने को लेकर सख्त होती है तो इसकी तीव्र प्रतिक्रिया हो सकती है और तनाव बढ़ सकता है. वो कहती हैं कि ईरान की मौजूदा कट्टरपंथी सरकार ‘ईरान के आधुनिक, वैविध्यपूर्ण और जटिल समाज' पर अपना शासन थोप नहीं पाएगी, भले ही ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता अली खमेनेई और उनके कट्टरपंथी समर्थक अनौपचारिक कपड़ों को पश्चिम के ‘सांस्कृतिक आक्रमण' का संकेत मानते हों.

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ईरान को अपनी ‘नैतिकता पुलिस’ की वापसी क्यों करानी पड़ी?

मोनीर गाएदी

9 घंटे पहले9 घंटे पहले

ईरान में हिजाब कानून लागू कराने के लिए ‘नैतिकता पुलिस’ यानी ‘मोरैलिटी पुलिस’ की गश्त फिर शुरू कर दी गई है. हिजाब कानून के तहत महिलाओं को सार्वजनिक जगहों पर ढीले कपड़े पहनने होते हैं और अपने बालों को ढक कर रखना होता है.


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हिजाब कानूनों का पालन कराने के लिए ईरान को नैतिकता पुलिस की जरूरत पड़ती है

ईरान में हिजाब के खिलाफ प्रदर्शन करती महिलाएंतस्वीर: UGC

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पिछले साल हुए देशव्यापी प्रदर्शन और बड़ी संख्या में महिलाओं द्वारा हिजाब पहनने से इनकार करने के बाद ‘नैतिकता पुलिस' एक तरह से ईरान की सड़कों से गायब ही हो गई थी. लेकिन अब अधिकारियों ने इस कानून के प्रवर्तन के लिए नया अभियान शुरू कर दिया है. रविवार को ईरानी पुलिस के एक प्रवक्ता सैयद मोंतजिर अल अहमदी ने इस बात की पुष्टि कि जल्दी ही गश्त के लिए वाहनों और पैदल सिपाहियों को तैनात किया जाएगा. ईरान की सरकार समाचार एजेंसी इरना ने उनके हवाले से लिखा है कि पुलिस शुरुआत में बात न मानने वाली महिलाओं के खिलाफ चेतावनी जारी करेगी और जो लोग कानून तोड़ेंगे, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी.


कौन दे रहा है ईरान में स्कूली लड़कियों को जहर


पिछले साल सितंबर में, 22 वर्षीय कुर्द महिला महसा जिना अमीनी को ‘मोरैलिटी पुलिस' ने गलत तरीके से हिजाब पहनने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया था. तीन दिन बाद ही अस्पताल में उनकी मौत हो गई. कथित तौर पर दुर्व्यवहार के चलते हुए उनकी मौत के विरोध में देशव्यापी विरोध प्रदर्शन होने लगे और कई महीने तक ईरान में अस्थिरता बनी रही. बेहद सख्ती से इस विरोध प्रदर्शन को नियंत्रित करने के चलते सैकड़ों लोगों की मौत हो गई. इसके बावजूद बड़ी संख्या में महिलाओं ने झुकने से इनकार कर दिया और विरोध और गुस्से में सार्वजनिक रूप से बिना सिर ढके प्रदर्शन में हिस्सा लेने लगीं. दिसंबर में अधिकारियों ने दावा किया कि इस पुलिस को भंग करदिया गया है.


लेकिन पिछले कुछ दिनों से ऐसी खबरें मिल रही हैं कि इसकी वापसी हो गई है. इस बारे में कई पत्रकारों की रिपोर्ट् और सोशल मीडिया में भी लिखा जा रहा है, न सिर्फ राजधानी तेहरान में बल्कि दूसरे शहरों में भी. रविवार को सोशल मीडिया पर उत्तरी शहर रश्त का एक वीडियो प्रसारित होना शुरू हुआ जिसमें ‘मोरैलिटी पुलिस' वाले तीन महिलाओं को गिरफ्तार करने की कोशिश कर रहे हैं और दर्जनों स्थानीय लोग उसका विरोध कर रहे हैं.


बीते महीनों में कई महिलाएं विरोध के तौर पर हिजाब पहनने से इनकार कर रही हैंबीते महीनों में कई महिलाएं विरोध के तौर पर हिजाब पहनने से इनकार कर रही हैं

मोरैलिटी पुलिस ईरान के पुलिस बल की एक शाखा है जिसने 2006 से ईरानी ससड़कों पर गश्त शुरू की थीतस्वीर: UGC

एक विफल परियोजना'

समाजशास्त्री अजादेह कियान-शिबू कहती हैं कि ईरानी शासन इस्लामिक गणराज्य की अनिवार्य हिजाब नीति को लागू कराने के बारे में काफी सख्त रहा है. उनके मुताबिक, यह नीति उस क्रांति का एक अहम हिस्सा रही है जिसकी वजह से वे सत्ता में आए हैं. वो कहती हैं कि शासन की इस नीति को लेकर जब उन्हें जनता के असंतोष का सामना करना पड़ा तो उन्होंने प्रवर्तन के नए रास्ते ढूंढ़ने शुरू कर दिए. पिछले कुछ महीनों में सरकार ने सार्वजनिक परिवहन पर चेहरे पहचानने वाली तकनीक का उपयोग करना शुरू किया है. साथ ही, उन शॉपिंग मॉल्स, कैफे और रेस्त्रां को बंद करा दिया है जहां बिना हिजाब के महिलाओं को जाने की अनुमति दी गई है. अधिकारियों ने टैक्सी ड्राइवरों पर भी सख्ती की है कि वो उन महिलाओं को अपनी गाड़ी में न बैठाएं जो हिजाब नहीं पहनतीं.


लेकिन कियान-थिबौत कहती हैं कि सरकार की इन कोशिशों और सख्ती के बावजूद महिलाओं ने हिजाब पहनने से इनकार करना नहीं छोड़ा है. वो कहती हैं, "अनिवार्य हिजाब एक विफल परियोजना है. ईरानी महिलाओं ने इसे खारिज कर दिया है और पुरुष उनका समर्थन कर रहे हैं.” कियान-थिबौत कहती हैं कि यदि ‘मोरलिटी पुलिस' सड़कों पर लौटती और सरकार महिलाओं को हिजाब पहनने को लेकर सख्त होती है तो इसकी तीव्र प्रतिक्रिया हो सकती है और तनाव बढ़ सकता है. वो कहती हैं कि ईरान की मौजूदा कट्टरपंथी सरकार ‘ईरान के आधुनिक, वैविध्यपूर्ण और जटिल समाज' पर अपना शासन थोप नहीं पाएगी, भले ही ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता अली खमेनेई और उनके कट्टरपंथी समर्थक अनौपचारिक कपड़ों को पश्चिम के ‘सांस्कृतिक आक्रमण' 

इस्लामी शासन को चुनौती दे रही छात्राओं की जान ले रहे ईरानी सुरक्षा बल


युवा पीढ़ी के बीच यह एक सच है. डीडब्ल्यू ने शिराज शहर में 25 साल की एक छात्रा से संपर्क किया जो मंदाना नाम के एक छद्म नाम से बाहर जाती थी और करीब दो साल पहले उसने उन ‘सुरक्षित क्षेत्रों' में बिना हिजाब पहने जाना शुरू किया था जहां पुलिस की मौजूदगी नहीं रहती थी. नवंबर में उसने स्कार्फ पहनना पूरी तरह से बंद कर दिया, यहां तक कि अब वो अपने बैग में भी स्कार्फ नहीं रखती. डीडब्ल्यू से बातचीत में वो कहती है, "मैं आज घर से बाहर जाने के मूड में नहीं थी लेकिन जब मैंने सुना कि मोरलिटी पुलिस फिर से आ गई है तो मैंने अपना विचार बदल दिया. नियम के उल्लंघन के तौर पर मैं एक गश्ती दल के करीब से बिना हिजाब के गुजरी. अधिकारी वहां खड़े रहे और उन्होंने सिर्फ मौखिक रूप से मुझे अपने बालों को ढकने की चेतावनी दी. इससे ज्यादा और वो कुछ कर भी नहीं सकते थे क्योंकि उन्हें पता है कि हम विरोध में फिर उठ खड़े होंगे.” हिजाब कानून की आलोचना कुछ सांसदों, राजनेताओं और यहां तक कि धार्मिक नेताओं ने भी की है जिनका मानना है कि हिजाब पहनने या न पहनने का फैसला व्यक्ति की निजी पसंद का मामला होना चाहिए.


अशांति और विद्रोह की अनवरत स्थिति'

कियान-शिबू कहती हैं कि यह स्पष्ट है कि ईरान की मौजूदा सरकार के प्रति लोगों के समर्थन में कमी आई थी और ईरान ‘अशांति और विद्रोह की अनवरत स्थिति' में था. वो कहती हैं कि सरकार के प्रति लोगों की नाराजगी बढ़ाने में बढ़ती कीमतें, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और सीमित सामाजिक आजादी ने भी अहम भूमिका निभाई. उनका सुझाव है कि इसीलिए सरकार के पास हिजाब को अनिवार्य बनाने के अलावा अति रूढ़िवादी अल्पसंख्यक समुदाय की मांगों को पूरा करने के लिए दूसरा कोई विकल्प नहीं था जो अभी भी उसका समर्थन करते हैं.


कियान-शिबू भी लगभग वही बातें कह रही हैं जो सोशल मीडिया में तमाम लोग लगातार कह रहे हैं. तेहरान में रहने वाली एक पत्रकार मोस्तफा अरानी ट्विटर पर लिखती हैं, "ईरान पिछले दो दशक से गंभीर प्रतिबंधों का सामना कर रहा है. भोजन की कीमतें अस्थिर बनी हुई हैं. देश में विरोध प्रदर्शन हुए जिसमें सैकड़ों लोग मारे गए. और पुलिस को यह काम सौंपा जाता है कि वो आधी आबादी से 40 डिग्री सेल्सियस तापमान की गर्मी में सिर पर स्कार्फ बांध कर चलने को कहे. ऐसा इसलिए क्योंकि इस देश के कानून धर्म की उस व्याख्या पर आधारित हैं जो अल्पसंख्यकों ने की है.”

भ्रष्टाचार के घोटालों से ध्यान भटकाना

मोरैलिटी पुलिस की वापसी ईरानी पत्रकारों द्वारा की गई कुछ खोजी रिपोर्ट्स के बाद हुई है जिनमें कई बड़े धर्मगुरुओं का नाम आर्थिक भ्रष्टाचार और जमीन हड़पने के मामलों में आया है. ये खबरें ईरान के प्रिंट और ऑनलाइन मीडिया में सुर्खियों में रही हैं. इन धर्मगुरुओं में राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी के ससुर आयतुल्ला अहमद अलम अल-होदा का नाम भी शामिल है जो कि अपने कट्टरपंथी विचारों के लिए जाने जाते हैं. लंदन में रहने वाले पत्रकार हुमायूं खेरी ट्विटर पर लिखते हैं, "ऐसा नहीं है कि ‘मोरलिटी पुलिस' की वापसी का संबंध भ्रष्टाचार की खबरों के उजागर होने से है. इस अक्षम सरकार के समर्थकों को आर्थिक और सांगठनिक रूप से धार्मिक व्यवस्था का समर्थन प्राप्त है, जिसका देश को अस्थिर करने का इतिहास ही रहा है. कानून प्रवर्तन बल भी आर्थिक रूप से विवश हैं और इस तरह की चीजों से निपटने का कौशल हासिल करने के लिए पैसा लगाना पड़ता है.” Sabhar Dw.de 

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नेपाल के राजघराने ने सुल्तानपुर की दियरा स्टेट में ब्याही थी अपनी बेटी

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 सुल्तानपुर। भारत और नेपाल के बीच रोटी-बेटी का रिश्ता है। लाख कोशिशों के बाद भी इस डोर को कमजोर नहीं किया जा सकता। देश का शायद ही कोई ऐसा कोना हो जहां इक्का-दुक्का ही सही नेपाल के लोग रोजी-रोटी के सिलसिले में न हों। यही हाल रिश्तों का भी है। जिला भी इन संबंधों से अछूता नहीं है। नेपाल के राजघराने शाहवंश ने सुल्तानपुर की दियरा स्टेट में अपनी बेटी ब्याही थी। पूर्व में नेपाल के प्रधानमंत्री रहे व राणा राजवंश के संस्थापक की प्रपौत्री की शादी दियरा राजघराने में हुई है

नेपाल में जंग बहादुर राणा ने राणा राजवंश की स्थापना की थी। बाद में शाह वंश (मौजूदा राजवंश) के बीच हुई तकरार में जंग बहादुर राणा को नेपाल में सरकार संचालन का दायित्व मिला। वह वर्ष 1860 के करीब नेपाल के पीएम बने। शाह वंश को बंटवारे में राजवंश मिला था।

भारत व नेपाल के राजघराने व सरकार में रिश्ते की डोर यहीं से शुरू हुई। नेपाल के पूर्व पीएम व राणा राजवंश के संस्थापक जंग बहादुर राणा ने अपनी तीन पौत्रियों की शादी भारत के राजघरानों में कराई। इसमें एक नैनीताल में दान सिंह बिष्ट, दूसरी सिरवारा में बाबू भीम सिंह व तीसरी बलरामपुर राजघराने में हुई थी।

सिरवारा में ब्याही उनकी पौत्री महारानी लक्ष्मी मिट्ठू मइया रानी की पुत्री इंदुबाला शाही की शादी सुल्तानपुर के दियरा राजवंश के मत्स्येंद्र प्रताप शाही के साथ हुई। तब से दियरा स्टेट से नेपाल के राणा वंश में रिश्तों की डोर बंधी चली आ रही है। मत्स्येंद्र प्रताप शाही बताते हैं कि राणावंश के अंतिम प्रधानमंत्री महाराज मोहन शमशेर सिंह राणा रहे।


नेपाल के राणा वंश से ही दियरा स्टेट का रिश्ता नहीं रहा बल्कि बंटवारे में शाह वंश के हाथों गये राजंवश से भी दियरा स्टेट का बेटी-दामाद का संबंध रहा। दियरा स्टेट के राजा कौशलेंद्र प्रताप शाही (बब्बन महराज) के सात पुत्रों में दूसरे नंबर के पुत्र योगेंद्र प्रताप शाही की शादी नेपाल के मौजूदा राजवंश (शाहवंश) में हुई थी।
नेपाल के शाह वंश की पुत्री प्रेम राज राजेश्वरी का विवाह योगेंद्र प्रताप शाही के साथ हुआ था। हालांकि योगेंद्र प्रताप शाही की कोई संतान नहीं थी। नेपाल में शाहवंश (राजवंश) में संबंध होने की वजह से दियरा स्टेट का लगाव आज भी वहां से है।

नेपाल के राणा वंश से ही दियरा स्टेट का रिश्ता नहीं रहा बल्कि बंटवारे में शाह वंश के हाथों गये राजंवश से भी दियरा स्टेट का बेटी-दामाद का संबंध रहा। दियरा स्टेट के राजा कौशलेंद्र प्रताप शाही (बब्बन महराज) के सात पुत्रों में दूसरे नंबर के पुत्र योगेंद्र प्रताप शाही की शादी नेपाल के मौजूदा राजवंश (शाहवंश) में हुई थी।
नेपाल के शाह वंश की पुत्री प्रेम राज राजेश्वरी का विवाह योगेंद्र प्रताप शाही के साथ हुआ था। हालांकि योगेंद्र प्रताप शाही की कोई संतान नहीं थी। नेपाल में शाहवंश (राजवंश) में संबंध होने की वजह से दियरा स्टेट का लगाव आज भी वहां से है।

दियरा स्टेट के मत्स्येंद्र प्रताप शाही बताते हैं कि शाहवंश की उनकी दादी प्रेम राज राजेश्वरी शाही को शाह वंश की ओर से भूमि भी दान में मिली थी लेकिन उन्होंने वह जमीन उसी परिवार को दे दी। शाह वंश के गया प्रसाद शाह एक समय पर नेपाल के खाद्य एवं रसद मंत्री भी रहे। नेपाल के राजवंश से देश के कई राजघरानों के रिश्ते हैं। ऐसे में यह रिश्ता तोड़ पाना नेपाल के लिए आसान नहीं है। sabhar amarujala.com

नेपाल के राजघराने ने सुल्तानपुर की दियरा स्टेट में 

नेपाल के राजघराने ने सुल्तानपुर की दियरा स्टेट में ब्याही थी अपनी बेटी

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