गुरुवार, 14 जनवरी 2021
कया ब्रमांड पहले से था और रहेगा
0वैसे तो ब्रह्मांड के निर्माण के संबंध में कई सिद्धांत और और धारणाएं प्रचलित है लेकिन महा विस्फोट के संबंधी अवधारणा को सबसे ज्यादा मान्यता मिली है और आप सभी आमतौर पर इसे स्वीकारते हैं बिग बैंग थ्योरी के अनुसार अरबों साल पहले यह ब्रह्मांड अत्यधिक घनीभूत अवस्था में था और एक बिंदु के रूप में था इस बिंदु को वैज्ञानिकों ने विलक्षणता का बिंदु कहा इस बिंदु में एक महा विस्फोट हुआ इसका विस्तार होना शुरू हो गया इस महा विस्फोट ने अति सघन बिंदु बिंदु को छिन्न-भिन्न कर दिया और इस पिंड के टूटे हुए हंस अंतरिक्ष में दूर-दूर तक छुट्टी है अभी भी हजारों किलो मीटर प्रति सेकेंड की दर से गतिमान है इन्हीं गतिशील आंसुओं से अकाश गंगा निर्मित हुई है और ब्रह्मांड का वर्तमान स्वरूप सामने आया हरमन बॉडी गोल्ड पायल नाम के तीन सिद्धांत दिया इस सिद्धांत में एक सी फील्ड वहां से फील्ड का मतलब क्रिएशन यानी निर्माण से है कि कल्पना की गई बहुत ही घने हो मुझे द्रव्यमान वालों के आसपास मौजूद इस फील्ड की ऊर्जा को और बना देता है जिससे पदार्थ का निर्माण होता है इस प्रक्रिया में उर्जा में बढ़ोतरी के साथ में भी बढ़ोतरी होती है जिससे तेज गति के साथ बाहर करता है इससे छोटे स्तर पर विस्फोट की होती है छोटे छोटे बड़े विस्तार होता है इस प्रकार की संरचना होती है हरमन बॉडी थम्स गोल्ड रेट हायर नामक के तीन ब्रिटिश वैज्ञानिकों ने महा विस्फोट के इस सिद्धांत को चुनौती दी उन्होंने 1948 में ब्रह्मांड की उत्पत्ति के एक नए सिद्धांत को प्रस्तुत किया जिसे अस्थाई अवस्था सिद्धांत कहा जाता है इस सिद्धांत के अनुसार ब्रह्मांड का ना तो महा विस्फोट के साथ आरंभ हुआ ना ही कभी इसका अंत होगा यानी इस विशाल ब्रह्मांड का ना आदि है न अंत इस सिद्धांत के अनुसार आकाशगंगा ए आपस में दूर तो हो जाती है
रविवार, 10 जनवरी 2021
चीनी वैज्ञानिकों ने खोजा ब्रह्मपुत्र और सिंधु नदियों का उद्गम
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जनवरी 10, 2021 in
ब्रह्मपुत्र पर बांध बनाने समेत तिब्बत में कई जल परियोजनाओं को अंजाम देने के लिए तैयार बैठे चीन के वैज्ञानिकों ने तिब्बत की सीमा से बहने वाली नदियों के उद्गम स्थल और उनके मार्ग की लंबाई का व्यापक उपग्रह अध्ययन पूरा कर लिया है चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेज के वैज्ञानिकों ने ब्रह्मपुत्र के मार्ग की उपग्रह से ली गई तस्वीरों का विश्लेषण करने के साथ भारत पाकिस्तान से बहने वाली सिंधु और म्यांमार के रास्ते बहने वाली सालवीन और इरावडी के बहाव के बारे में भी पूरा विवरण उठा लिया है सी ए एस के तहत आने वाली इंस्टीट्यूट आफ रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन के शोधकर्ता न्यू साउथ शिवांग ने बताया कि इसके बाद पहले 4 नदियों के उद्गम कभी स्पष्ट नहीं हुए थे और इनकी लंबाई क्षेत्र के बारे में आ रहे विभिन्न जानकारियों ने शोधकर्ताओं को कई साल तक भ्रम में रखा था क्योंकि इस कार्य में प्राकृतिक परिस्थितियों से जुड़ी कई बाधाएं आती थी और सर्वेक्षण की तकनीक भी सीमित थी न्यू ने अपने विश्लेषण के आधार पर बताया कि ब्रह्मपुत्र का उद्गम स्थल तिब्बत के दौरान काउंटी स्थित हिमालय पर्वत के उत्तरी क्षेत्र में स्थित सांसी ग्लेशियर है न कि सीमा युंग डुंग ग्लेशियर इसे भूगोल विद स्वामी प्रणवानंद ने 1930 के दशक में ब्रह्मपुत्र का उद्गम बताया था
भ्रूण में दिल धड़कने की सफल विडिओग्राफी
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जनवरी 10, 2021 in भ्रूण में दिल धड़कने की सफल विडिओग्राफी
अमेरिकी वैज्ञानिकों ने भ्रूण में दिल धड़कने की शुरआती अवस्था का सजीव वीडियो तैयार करने में सफलता अर्जित की है में चिकित्सा स्टान विश्वविद्यालय के बेयलर कालेज विभाग के वैज्ञानिक high-resolution और इमेजिंग उपकरण से स्तनपाई के दिल के निर्माण की प्रक्रिया को दर्ज कर रहे हैं यह एक महत्वपूर्ण की सबसे बढ़िया और जीवन तस्वीर होगी वैज्ञानिकों ने ऑप्टिकल्स को हरेंद्र टोमोग्राफी की मदद से परिसंचरण संबंधी अनियमितताओं का विश्लेषण किया है इस तकनीक में किसी बिंदु पर पड़ने वाले इंफ्रारेड लेजर कुंज के परावर्तन से बहुत गहराई वाली तस्वीर प्राप्त होती है अल्ट्रासाउंड की ध्वनि तरंगों से जहां दानेदार जो इमेज प्राप्त होती है वही उसी में कल कष्ट और उसे प्राप्त करने में मदद मिलती है
शनिवार, 9 जनवरी 2021
हमजा अमेजॉन के नीचे बहने वाली नदी
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जनवरी 09, 2021 in
वैज्ञानिकों ने हाल में ही एक ऐसी भूमिगत नदी का पता लगाया है जो विशाल अमेजन के मिलो नीचे बहती है वैज्ञानिकों ने ब्राजील के आयल कंपनी पेट्रोब्रास द्वारा 1970 एवं 1980 के दशक में अमेजन क्षेत्र में खुदाई किए गए तेल कुआं के आंकड़े के विश्लेषण के आधार पर इसकी खोज की है उन्होंने इस नदी को ब्राजील के नेशनल ऑब्जर्वेटरी के वैज्ञानिक वालिया हमजा के नाम पर हम जा रखा कंप्यूटर विश्लेषकों के द्वारा यह बताया गया कि यह नदी अमेजन कि भारत ही पश्चिम से पूर्व तक पृथ्वी तल से 13000 फीट नीचे बहती है वैज्ञानिकों ने अभी बताया कि पृथ्वी से लगभग 2000 फीट की गहराई पर या नदी ऊर्ध्वाधर रूप में बहती है यह नदी लगभग अमेजॉन जितनी लंबी है लेकिन इसमें अमेजन के कुल जल प्रवाह का एक बटे 33 वां भाग ही जल प्रभावित होता है हमजा की चौड़ाई 125 से 250 मील के बीच है जबकि अमेजन की चौड़ाई 0.6 मील से 7 मील के बीच है वैज्ञानिकों के इस दल ने अपने इस विश्लेषण के आधार पर निष्कर्ष निकाला कि पृथ्वी के अन्य भागों में भी हमजा जैसे भूगर्भीय नदियां हो सकती हैं वैज्ञानिकों ने कहा उल्लेखनीय है कि वालिया हमजा तथा एलिजाबेथ तेरस के नेतृत्व में वैज्ञानिकों के एक दल ने 2 वर्ष के गहन अध्ययन के बाद यह रिपोर्ट तैयार की जिसे कांग्रेश ऑफ द ब्राजीलियन सोसाइटी ऑफ जियोफिजिक्स में प्रस्तुत किया जिले में प्रस्तुत किया गया
भालिया गेहूं की जीआईसी टैग
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जनवरी 09, 2021 in
गुजरात के बाल क्षेत्र के प्रख्यात भालिया गेहूं को विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र के उत्पाद के रूप में मान्यता प्रदान की गई है गेहूं की इस किस्म को भौगोलिक संकेतक जी आई कानून के तहत पंजीकृत कर लिया गया है इस पंजीकरण से अर्थ की और क्षेत्र में पैदा होने वाले गेहूं को इस के नाम से नहीं बेचा जा सकेगा गुजरात के अहमदाबाद से लेकर भावनगर तक तथा खंभात तक बोले जाने वाले बाल गेहूं गेहूं की लंबी किस में प्रोटीन की मात्रा अधिक होती है
एलन मस्क: कहानी दुनिया का सबसे अमीर शख़्स बनने की
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जनवरी 09, 2021 in एलन मस्क:, कहानी दुनिया का सबसे अमीर शख़्स, बनने की
स्पेस-एक्स के संस्थापक और टेस्ला के सीईओ एलन मस्क दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति बन गये हैं. उनकी कुल संपत्ति 185 बिलियन डॉलर (1 खरब 85 अरब डॉलर) को पार कर गई है.बीते गुरुवार को मस्क की कंपनी ने शेयर की क़ीमतों में बड़ा उछाल देखा, जिसके बाद कुल संपत्ति के मामले में वे पहले पायदान पर पहुँच गये.ये जगह मस्क ने ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफ़ॉर्म 'अमेज़न' के संस्थापक जेफ़ बेज़ोस को पीछे छोड़कर हासिल की है. जेफ़ बेज़ोस साल 2017 से इस स्थान पर थे.मस्क की इलेक्ट्रिक कार कंपनी टेस्ला ने इस साल अपनी मार्केट वैल्यू में काफ़ी वृद्धि की है. बुधवार को यह पहली बार 700 बिलियन डॉलर तक पहुँच गई जो कार कंपनी टोयोटा, फ़ॉक्सवैगन, ह्युंदै, जीएम और फ़ोर्ड की कुल मार्केट वैल्यू से भी अधिक है.अमेरिका के कई आर्थिक विश्लेषकों ने लिखा है कि 'अमेरिका में सत्ता बदलने के बाद, एलन मस्क की कंपनी का भविष्य और भी सुनहरा हो सकता है.'उनका मानना है कि 'डेमोक्रैट्स के आने से इलेक्ट्रिक कार कंपनी टेस्ला का काम और भी बढ़ेगा क्योंकि जो बाइडन की पार्टी ने चुनाव अभियान के दौरान 'ग्रीन-एजेंडे' को बढ़ावा देने के लगातार वादे किये थे.'
कौन हैं एलन मस्क और क्या-क्या करते हैं?
एलन मस्क के काम का दायरा सिर्फ़ भविष्य की कारें बनाने वाली कंपनी तक सीमित नहीं है. उनकी कंपनी टेस्ला इलेक्ट्रिक कारों में लगने वाले पुर्ज़े और बैट्रियाँ बनाती है जिन्हें दूसरे कार निर्माताओं को बेचा जाता है.वे घरों में लगने वाले 'सोलर एनर्जी सिस्टम' बनाते हैं जिसकी माँग वक़्त के साथ बढ़ी है. वे एक अंतरिक्ष अन्वेषण कंपनी भी चलाते हैं. साथ ही वे अमेरिका में 'सुपर-फ़ास्ट अंडरग्राउंड ट्रांसपोर्ट सिस्टम' का ख़ाका तैयार कर रहे हैं.आज के समय 49 वर्षीय एलन मस्क के बिज़नेस की शुरुआत असल में साल 1999 में हुई, जब उन्होंने और उनके भाई किंबल ने अपनी सॉफ़्टवेयर कंपनी 'ज़िप-2' के लिए एक सफल डील तलाश ली.इससे मिले पैसे को, 27 वर्ष की उम्र में मस्क ने एक नई कंपनी में लगाया जिसका नाम था 'एक्स डॉट कॉम' और इस कंपनी का दावा था कि 'वो पैसा ट्रांसफ़र करने की व्यवस्था में क्रांति लाने वाली है.'मस्क की इसी कंपनी को आज 'पे-पाल' के नाम से जाना जाता है जिसे साल 2002 में ई-बेय ने ख़रीद लिया था और इसके लिए मस्क को 165 मिलियन डॉलर मिले थे. यह उनके करियर की बड़ी उपलब्धि थी.इसके बाद मस्क ने अंतरिक्ष अन्वेषण की तकनीकों पर काम करना शुरू किया. उनके इसी प्रोग्राम को 'स्पेस-एक्स' का नाम दिया गया जिसने कहा कि 'मनुष्य आने वाले वक़्त में दूसरे ग्रहों पर भी रह सकेंगे.'साल 2004 में एलन मस्क ने इलेक्ट्रिक कार कंपनी टेस्ला की बुनियाद रखी और उन्होंने कहा, "भविष्य में सब कुछ इलेक्ट्रिक होगा, स्पेस में जाने वाले रॉकेट भी और टेस्ला इस बदलाव को लाने में अहम भूमिका निभायेगी."में एलन मस्क की पहचान एक अमेरिकी उद्यमी के तौर पर है, पर उनका जन्म दक्षिण अफ़्रीका में हुआ था. उनकी माँ मूल रूप से कनाडा की हैं और पिता दक्षिण अफ़्रीका के. मस्क के अनुसार, उन्हें बचपन से ही किताबें पढ़ने का बहुत शौक़ था.वे कहते हैं कि 'बचपन में मैं बहुत ज़्यादा शांत रहता था, इस वजह से मुझे बहुत परेशान भी किया गया.'10 साल की उम्र में एलन मस्क ने कम्यूटर प्रोग्रामिंग सीखी और 12 साल की उम्र में उन्होंने 'ब्लास्टर' नामक एक वीडियो गेम तैयार किया जिसे एक स्थानीय मैग्ज़ीन ने उनसे पाँच सौ अमेरिकी डॉलर में ख़रीदा. इसे मस्क की पहली 'व्यापारिक उपलब्धि' कहा जा सकता है.मस्क की सफलता का राज़ क्या है? बीबीसी के संवाददाता जस्टिन रॉलेट ने एलन मस्क से एक साक्षात्कार के दौरान यह प्रश्न पूछा था कि 'आपकी सफलता का राज़ क्या है?' और रॉलेट को इसका जो जवाब समझ आया वो है: 'एलन मस्क का बिज़नेस के प्रति 'एटिट्यूड' यानी व्यापार और अपने काम को लेकर उनका अलग नज़रिया.'कुछ वर्ष पहले हुए इस साक्षात्कार में मस्क ने कहा था, "मैं नहीं जानता कि मेरे पास कितनी संपत्ति है. ये इस तरह से नहीं है कि कहीं नोट के बंडल पड़े हुए हैं. इसे ऐसे देखना चाहिए कि टेस्ला, स्पेस-एक्स और सोलर सिटी में मेरी हिस्सेदारी है और बाज़ार में उस हिस्सेदारी की कुछ क़ीमत है. पर मुझे वाक़ई इससे फ़र्क़ नहीं पड़ता क्योंकि मेरे काम करने का लक्ष्य ये नहीं है."
रॉलेट लिखते हैं कि 'मस्क का यह नज़रिया शायद काम कर रहा है. उनके पास आज जितनी संपत्ति है, उसमें वे चाहें तो दुनिया की कई बड़ी कार निर्माता कंपनियों को एक साथ ख़रीद सकते हैं. वे इस साल 50 वर्ष के हो जायेंगे, पर एक 'दौलतमंद शख़्स' के तौर पर दुनिया को अलविदा कहने का उनका सपना बिल्कुल नहीं है.'मस्क कहते हैं कि वे मंगल ग्रह पर एक बेस बनाने में अपनी पूंजी का सबसे बड़ा हिस्सा लगाना चाहते हैं और उन्हें कोई आश्चर्य नहीं होगा अगर उन्होंने इस मिशन को सफल बनाने में अपनी सारी पूंजी लगा दी.
मंगल ग्रह पर मनुष्यों का एक बेस, मस्क की नज़र में बहुत बड़ी सफलता होगी.
वे मानते हैं कि 'इससे भविष्य बेहतर होगा.' स्पेस-एक्स की स्थापना को लेकर भी बीबीसी से हुए साक्षात्कार में मस्क ने कहा था, "मैंने कंपनी इसलिए बनाई क्योंकि मैं इस बात से असंतुष्ट था कि अमेरिकी स्पेस एजेंसी अंतरिक्ष अन्वेषण को लेकर और महत्वकांक्षी क्यों नहीं है, वो क्यों और आगे का नहीं सोच पा रही. मैं उम्मीद करता हूँ कि भविष्य में चाँद और मंगल ग्रह पर हमारा बेस हो और वहाँ के लिए लगातार फ़्लाइट्स चलें."
'
लोग मुझे इंजीनियर के रूप में जानें'
मस्क चाहते हैं कि लोग उन्हें एक निवेशक से ज़्यादा, एक इंजीनियर के रूप में जानें. रॉलेट से साक्षात्कार में उन्होंने कहा था, "मैं हर सुबह किसी नई तकनीकी समस्या का हल ढूंढने के लिए उठना चाहता हूँ. बैंक में कितना पैसा है, इसे मैं सफलता का पैमाना नहीं मानता."
रॉलेट लिखते हैं कि "मस्क कार उद्योग में क्रांतिकारी बदलाव लाना चाहते हैं, वे मंगल ग्रह पर कॉलोनी बनाना चाहते हैं, वैक्यूम टनल में चलने वाली सुपर-फ़ास्ट ट्रेनें चलाना चाहते हैं, मनुष्यों के दिमाग़ से एआई यानी आर्टिफ़िशयल इंटेलिजेंस को जोड़ना चाहते हैं और सौर उर्जा से दुनिया चलाना चाहते हैं. इन सब चीज़ों में एक चीज़ समान है, वो ये कि ऐसी भविष्य की कल्पनाएं आपको 1980 के दशक की शुरुआत में मिलने वाली बच्चों की पत्रिकाओं में मिलती थीं. और इसमें कोई छिपी हुई बात नहीं कि मस्क का बचपन दक्षिण अफ़्रीका में बहुत सारी पत्रिकाएं, क़िताबें पढ़कर और फ़िल्में देखकर गुज़रा."
मस्क बदलाव की धीमी गति में विश्वास नहीं रखते. वे जल्द से जल्द जीवाश्म ईंधनों को पीछे छोड़ देना चाहते हैं. साथ ही मानवता के अस्तित्व को लंबे समय तक बनाये रखने के लिए वे मंगल ग्रह पर उपनिवेश विकसित करने के पक्षधर हैं.
जोख़िम उठाने की आदत
एलन मस्क जोख़िम उठाने वाले शख़्स हैं और उन्होंने यह साबित किया है. 2008 में जब दुनिया ने आर्थिक मंदी का सामना किया तो मस्क की हालत भी काफ़ी ख़राब हो गई थी. इसके बाद उनकी नई कंपनियों ने कई असफलताएं देखीं. स्पेस-एक्स के पहले तीनों लॉन्च फ़ेल हुए. टेस्ला में भी उत्पादन से जुड़ी कई समस्याएं आती रहीं और मस्क तंगी में फँस गये.अपने साक्षात्कार में एलन मस्क ने बताया था कि एक वक़्त ऐसा भी आया जब उन्हें अपने ख़र्चों के लिए दोस्तों से पैसे उधार लेने पड़े.पर क्या उन्हें कभी दिवालिया होने का डर नहीं हुआ? इस सवाल के जवाब में एलन मस्क ने जस्टिन रॉलेट से कहा था, "ज़्यादा से ज़्यादा क्या होता, मेरे बच्चों को सरकारी स्कूल में जाना पड़ता, तो इसमें क्या बड़ी बात होती, मैं ख़ुद सरकारी स्कूल में पढ़ा हूँ."रॉलेट लिखते हैं, "हमारी मुलाक़ात के दौरान मैंने पाया था कि मस्क एक चीज़ से ज़रूर निराश थे और वो थीं आलोचनाएं. उनका कहना था कि आलोचनाएं किसी आधार पर होनी चाहिए, पर यहाँ तो लोग खुलेतौर पर टेस्ला के डूबने का इंतज़ार कर रहे हैं. हालांकि, उन्होंने कहा कि वे आलोचनाओं की वजह से अपने इरादों में कभी बदलाव नहीं करते. मस्क के अनुसार, जब उन्होंने स्पेस-एक्स और टेस्ला की नीव रखी थी, तब उन्हें ख़ुद विश्वास नहीं था कि वो इससे पैसा कमा सकेंगे."काम करने की लत एलन मस्क को क़रीब से जानने वाले कहते हैं कि उन्हें काम करने की लत है. टेस्ला मॉडल-3 को तैयार करते समय उन्होंने कहा था कि 'वे हफ़्ते में 120 घंटे काम करते हैं और उसमें उन्हें मज़ा आता है.'कोरोना महामारी के दौरान जब सैन फ़्रांसिस्को स्थित उनकी फ़ैक्ट्री को बंद करना पड़ा, तो लॉकडाउन के प्रतिबंधों के ख़िलाफ़ एलन मस्क खुलकर बोले. उन्होंने कहा, 'जो लोग महामारी का हौवा बना रहे हैं, वो बेवक़ूफ़ हैं.' उन्होंने घर में रहने के आदेशों को 'ज़बरदस्ती' बताया और कहा कि 'कोविड लॉकडाउन संवैधानिक अधिकारों के ख़िलाफ़ है.' महामारी के दौरान ही एलन मस्क के घर बेटे का जन्म हुआ. इस मौक़े पर उन्होंने ट्विटर के ज़रिये दुनिया को बताया कि उन्होंने बेटे का नाम X Æ A-12 रखा है.कुछ लोग मानते हैं कि एलन मस्क के मन को पढ़ा नहीं जा सकता और उनके व्यवहार का पूर्वानुमान मुश्किल है. लेकिन इसका उनके काम पर ज़रा भी असर नहीं दिखता. बतौर उद्यमी वे एक दूरदर्शी इंसान हैं.सितंबर, 2020 में उन्होंने कहा कि 'जल्द ही उनकी कंपनी की सभी कारें सेल्फ़ ड्राइविंग वाली होंगी.' वे अगले तीन वर्षों में सस्ती इलेक्ट्रिक कारें लाने का भी इरादा रखते हैं.
sabhar : bbc.com
गुरुवार, 7 जनवरी 2021
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जनवरी 07, 2021 in
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नमक के कण पर दुनिया का नक्शा
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जनवरी 07, 2021 in
अमेरिका के वैज्ञानिको ने दवा किया है की उन्होने पृश्वी का अबतक का सबसे सूछम त्रिआयामी 3d मैप तैयार किया है यह मानचित्र इतना सूछम है की नमक के एक दाने के आकार में ऐसे 1000 मानचित्र समा सकते है कम्प्यूटर की दिगज कंपनी आई बी एम के एक दल ने एक अनोखी तकनीक की मदद से यह मानचित्र बनाया है जो की पेंसिल की नोक के एक लाख गुना छोटा है इसका आकर 15 नैनो मीटर जितना है वैज्ञानिको के अनुसार इस नयी तकनीक के ईजाद होने से इलेक्ट्रानिक भविस्य की चिप तकनीक औषदि विज्ञानं जीव विज्ञानं ऑप्टो इलेक्ट्रानिक्स जैसे विषयो नैनो उत्पाद को लेकर नया रास्ता खुलेगा
शुक्रवार, 18 दिसंबर 2020
Vigyan India.com (विज्ञान इंडिया डाट कॉम ): स्ट्रिंग थ्योरी भारतीय दर्शन के करीब
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दिसंबर 18, 2020 in
Vigyan India.com (विज्ञान इंडिया डाट कॉम ): स्ट्रिंग थ्योरी भारतीय दर्शन के करीब: इस सिद्धांत के अनुसार सभी कण एक धागे रूपी रचना के रूप में है जिसे स्ट्रिंग कहते है यह अति छोटी इकाई है तथा फ्रीकवेंसी पे ...
कोरोना से जीत चुके मरीजों की जान ले रही यह बीमारी, अहमदाबाद में नौ लोगों ने गंवाई जान
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दिसंबर 18, 2020 in
कोरोना महामारी का खौफ पूरी दुनिया में है, लेकिन इस खौफनाक वायरस से जंग जीतने वाले भी करोड़ों लोग हैं। इस बीच एक ऐसी बीमारी का पता लगा है, जो कोरोना से जंग जीतने वालों को निशाना बना रही है। इस बीमारी का नाम म्यूकोरमाइकोसिस है, जिससे गुजरात के अहमदाबाद में अब तक नौ लोग जान गंवा चुके हैं। वहीं, दिल्ली में भी म्यूकोरमाइकोसिस के 12 मामले सामने आ चुके हैं।
अहमदाबाद में मिले 44 मामले
जानकारी के मुताबिक, म्यूकोरमाइकोसिस बीमारी उन मरीजों को हो रही है, जो कोरोना से ठीक हो चुके हैं, लेकिन डायबिटीज से पीड़ित हैं। ऐसे मरीजों में हृदय, लिवर और ब्रेन स्ट्रोक जैसे मामलों में भी इजाफा हुआ है। अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में अब तक म्यूकोरमाइकोसिस के 44 मरीज सामने आ चुके हैं। इनमें से नौ लोगों की मौत हो चुकी है।
ये हैं म्यूकोरमाइकोसिस के लक्षण
बता दें कि म्यूकोरमाइकोसिस एक तरह का फंगस इंफेक्शन है, जो कोरोना से ठीक होने के बाद मरीजों को ज्यादा चपेट में ले रही है। इस बीमारी में सबसे पहले जुकाम होता है, जो दिमाग पर असर डालने लगता है। इसके बाद मरीज धीरे-धीरे अंधेपन का शिकार हो जाता है। यह बीमारी आंखों और दिमाग पर ज्यादा असर डालती है।
ऐसे फैलता है म्यूकोरमाइकोसिस
अहमदाबाद के सिविल अस्पताल की ईएनटी हेड डॉ. बेला प्रजापति के मुताबिक, म्यूकोरमाइकोसिस के अब तक जितने भी मामले मिले हैं, उनमें मरीजों की उम्र 50 साल से ज्यादा है और वे खासतौर पर डायबिटीज या अन्य बीमारियों से पीड़ित हैं। बता दें कि म्यूकोरमाइकोसिस को लेकर राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी ट्वीट किए हैं।
sabhar amarujala.com
Vigyan India.com (विज्ञान इंडिया डाट कॉम ): शरीर के इन अंगों पर तिल मानते हैं बेहद शुभ, धनवान ...
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दिसंबर 18, 2020 in
Vigyan India.com (विज्ञान इंडिया डाट कॉम ): शरीर के इन अंगों पर तिल मानते हैं बेहद शुभ, धनवान ...: Many mole are born on the body and many mole emerge later. Over time, many mole also become small and big. According to oceanography, the pr...
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