vartabook Varta.tv : : Vartavideo.com : vigyanindia.com
Charchamanch.com.com:worldexpress.co.in इस साइट पर नए समाचार यूट्यूब संबंधित ज्ञानवर्धक वीडियो आध्यात्मिक समाचार वैज्ञानिक समाचार सामाजिक समाचार भारत का विश्व की विस्तृत खबरें एवं वीडियो इत्यादि आधुनिक प्रोडक्ट के विषय में भी बताए जाते हैं भारतीय विज्ञान एवं अध्यात्म काम विज्ञान महान दार्शनिकों के अनुभव ओशो विवेकानंद ऋषि-मुनियों से संबंधित खबरें भी प्रकाशित की जाती हैं आशा है कि आप इसे पसंद करेंगे कृपया साइट पर भ्रमण करें latest
कभी डायनासोर सबसे ज्यादा शक्तिशाली जीव थे जो पूरी तरह खत्म हो गए. आज इंसान सबसे ज्यादा शक्तिशाली है, लेकिन उसके सफाये की आशंका भी उतनी ही प्रबल है.
पृथ्वी पर जीवन बीते 50 करोड़ साल से है. अब तक पांच बार ऐसे मौके आए हैं जब सबसे ज्यादा फैली और प्रभावी प्रजातियां पूरी तरह विलुप्त हुई हैं. भविष्य में सर्वनाश का छठा चरण आएगा और इंसान के लिए यह बुरी खबर है, क्योंकि इस वक्त धरती पर सबसे ज्यादा प्रबल प्रजाति उसी की है.
इंग्लैंड की लीड्स यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने सर्वनाश और क्रमिक विकास पर शोध किया है. वैज्ञानिकों के मुताबिक आखिरी सर्वनाश की घटना 6.6 करोड़ साल पहले घटी. तब एक बड़ा धूमकेतु पृथ्वी से टकराया और 15 करोड़ साल तक धरती पर विचरण करने वाले डायनासोर एक झटके में खत्म हो गए. डायनासोरों की तुलना में इंसान ने पृथ्वी पर बहुत कम समय गुजारा है, करीब 15 लाख साल.
वैज्ञानिकों के मुताबिक बीती घटनाओं के दौरान, एक समान दिखने वाली या बहुत ही कम अंतर वाली प्रजातियों का 50 से 95 फीसदी तक सफाया हुआ. शोध टीम के प्रमुख प्रोफेसर एलेक्जेंडर डनहिल कहते हैं, "जीवाश्मों के आधार पर बीते दौर के व्यापक सफाये को देखें तो पता चलता है कि मौजूदा जीवों की लुप्त होने की रफ्तार भी काफी ऊंची है." दूसरे शब्दों में कहें तो धरती सर्वनाश के छठे चरण की ओर बढ़ रही है.
ट्राइएशिक-जुरासिक काल का सबसे बड़ा जीव
शोध टीम के मुताबिक सर्वनाश के लिए जिम्मेदार कई घटनाएं फिलहाल इंसान के बस में नहीं हैं. इतिहास को देखें तो पता चलता है कि खगोलीय या भूगर्भीय घटनाओं के कारण पृथ्वी की जलवायु में अभूतपूर्व बदलाव आए और ज्यादातर जीव उजड़ गए. 20 करोड़ साल पहले ट्राइएशिक-जुरासिक काल के दौरान भी यही हुआ. प्रोफेसर डनहिल के मुताबिक, "ऐसे जीव जो इन परिस्थितियों के मुताबिक खुद को बहुत तेजी से नहीं ढाल पाए वे लुप्त हो गए." ट्राइएशिक-जुरासिक काल के 80 फीसदी जीव बदलाव की भेंट चढ़े.
हालांकि महाविनाश की वो घटनाएं वक्त बीतने के साथ धीमी पड़ती गईं. यही कारण है कि मगरमच्छ और सरीसृप प्रजाति के कई जीव बच गए. और फिर धीरे धीरे क्रमिक विकास के साथ स्तनधारी और पंछी बने.
बीती घटनाओं के आधार पर नतीजे निकाले जाएं तो अगले महाविनाश में सबसे ज्यादा नुकसान इंसान को होगा. डनहिल कहते हैं, "20 करोड़ साल पहले फूटे ज्वालामुखियों ने वायुमंडल में बहुत ही ज्यादा कार्बन डाइऑक्साइड और ग्रीन हाउस गैसें छोड़ीं, इनकी वजह से जानलेवा ग्लोबल वॉर्मिंग हुई. तथ्य यह है कि हम इंसानी गतिविधियों से वैसे ही हालात तैयार कर रहे हैं, वो भी समय के मुकाबले कहीं ज्यादा तेजी से."
इंसान की वजह से आज प्रकृति तबाह हो चुकी है और कई प्रजातियां लुप्त होने पर मजबूर हो चुकी हैं. प्रोफेसर डनहिल के मुताबिक किसी भी और प्रजाति की तुलना में इंसान धरती पर सबसे ज्यादा फैले हैं, "आप कह सकते हैं कि हम इतने बड़े इलाके में फैले हैं कि क्रमिक विकास की बड़ी घटना में हमारा पूरी तरह सफाया नहीं होगा, लेकिन दुनिया की ज्यादातर आबादी अब भी आहार, पानी और ऊर्जा के लिए प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर है. प्रकृति में होने वाली बड़ी उथल पुथल का असर इंसानों पर निश्चित रूप से नकारात्मक होगा."
अमरीका में 70 साल पहले एक किसान ने एक मुर्गे का सिर काट दिया, लेकिन वह मरा नहीं बल्कि 18 महीने तक जिंदा रहा.
चकित करने वाली इस घटना के बाद यह मुर्गा 'मिरैकल माइक' नाम से मशहूर हुआ.
ये सिरकटा मुर्गा इतने दिनों तक ज़िंदा कैसे रहा?
पढ़ें विस्तार से
10 सितंबर 1945 को कोलाराडो में फ़्रूटा के अपने फ़ार्म पर लॉयल ओल्सेन और उनकी पत्नी क्लारा मुर्गे-मुर्गियों को काट रहे थे.
लेकिन उस दिन 40 या 50 मुर्गे-मुर्गियों में से एक सिर कट जाने के बाद भी मरा नहीं.
ओल्सेन और क्लारा के प्रपौत्र ट्रॉय वाटर्स बताते हैं, “जब अपना काम ख़त्म कर वे मांस उठाने लगे तो उनमें से एक जिंदा मिला जो बिना सिर के भी दौड़े चला जा रहा था.”
दम्पति ने उसे सेब के एक बक्से में बंद कर दिया, लेकिन जब दूसरी सुबह लॉयल ओल्सेन ये देखने गए कि क्या हुआ तो उसे ज़िंदा पाकर उन्हें बहुत हैरानी हुई.
बचपन में वाटर्स ने अपने परदादा से ये कहानी सुनी थी.
Image copyrightBBC World ServiceImage captionअमरीका के फ्रूटा में हर साल 'हेडलेस चिकन' महोत्सव मनाया जाता है.
वाटर्स कहते है, “वो मीट बाज़ार में मांस बेचने के लिए ले गए और अपने साथ उस ‘हेडलेस चिकन’ को भी लेते गए. उस समय घोड़ा गाड़ी हुआ करती थी.”
“बाज़ार में उन्होंने इस अजीब घटना पर बियर या ऐसी चीजों की शर्त लगानी शुरू कर दी.”
यह बात जल्द ही पूरे फ़्रूटा में फैल गई. एक स्थानीय अख़बार ने ओल्सेन का साक्षात्कार लेने के लिए अपना रिपोर्टर भेजा.
कुछ दिन बाद ही एक साइडशो के प्रमोटर होप वेड 300 मील दूर यूटा प्रांत के साल्ट लेक सिटी से आए और ओल्सेन को अपने शो में आने का न्यौता दिया.
अमरीका का टूर
वह पहले साल्ट लेक सिटी गए और फिर यूटा विश्वविद्यालय पहुंचे जहां 'माइक' की जांच की गई. अफ़वाह उड़ी कि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने कई मुर्गों के सिर काटे ताकि यह पता लगाया जा सके कि वे सिर के बिना ज़िंदा रहते हैं या नहीं.
माइक को 'मिरैकल माइक' नाम होप वेड ने ही दिया था. उस पर 'लाइफ़ मैग्ज़ीन' ने भी कहानी की.
इसके बाद तो लॉयड, क्लारा और माइक पूरे अमरीका के टूर पर निकल पड़े.
वे कैलिफ़ोर्निया, एरिज़ोना और अमरीका के दक्षिण पूर्वी राज्यों में गए.
माइक की इस यात्रा से जुड़ी बातों को क्लारा ने नोट किया था जो आज भी वाटर्स के पास मौजूद है.
Image copyrightBBC World ServiceImage captionक्लारा और लॉयड
लेकिन ओल्सेन जब 1947 के बसंत में एरिज़ोना के फ़ीनिक्स पहुंचे तो माइक की मृत्यु हो गई.
माइक को अक्सर ड्रॉप से जूस वगैरह दिया जाता था और उसकी भोजन नली को सीरिंज से साफ किया जाता था, ताकि गला चोक न हो.
लेकिन उस रात वे सीरिंज एक कार्यक्रम में भूल गए थे और जब तक दूसरे का इंतज़ाम होता, माइक का दम घुटने से मौत हो गई.
ताज्जुब
वाटर्स कहते हैं, “सालों तक ओल्सेन यह दावा करते रहे कि उन्होंने माइक को बेच दिया था. लेकिन एक रात उन्होंने मुझे बताया कि असल में वह मर गया था.”
हालांकि ओल्सेन ने कभी नहीं बताया कि उन्होंने माइक का क्या किया लेकिन उसकी वजह से उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ.
न्यूकैसल यूनिवर्सिटी में सेंटर फ़ॉर बिहैवियर एंड इवोल्यूशन से जुड़े चिकन एक्सपर्ट डॉ. टॉम स्मल्डर्स कहते हैं कि आपको ताज्जुब होगा कि चिकन का पूरा सिर उसकी आंखों के कंकाल के पीछे एक छोटे से हिस्से में होता है.
रिपोर्टों के अनुसार माइक की चोंच, चेहरा और आंखें निकल गई थीं, लेकिन स्मल्डर्स का अनुमान है कि उसके मस्तिष्क का 80 प्रतिशत हिस्सा बचा रह गया था, जिससे माइक का शरीर, धड़कन, सांस, भूख और पाचन तंत्र चलता रहा.
वर्ष 1930 में एक संपन्न और भले परिवार में शांति देवी का जन्म हुआ था। लेकिन जब वे महज 4 साल की थीं तभी उन्होंने अपने माता-पिता को पहचानने से इनकार कर दिया और यह कहने लगीं कि ये उनके असली अभिभावक नहीं हैं। उनका कहना था कि उनका नाम लुग्दी देवी है और बच्चे को जन्म देते समय उनकी मौत हो गई थी। इतना ही नहीं वह अपने पति और परिवार से संबंधित कई और जानकारियां भी देने लगीं।जब उन्हें, उनके कहे हुए स्थान पर ले जाया गया तो उनकी कही गई हर बात सच निकलने लगी। उन्होंने अपने पति को पहचान लिया और अपने पुत्र को देखकर उसे प्यार करने लगीं। कई समाचार पत्रों, पत्रिकाओं में भी शांति देवी की कहानी प्रकाशित हुई। यहां तक कि महात्मा गांधी भी शांति देवी से मिले।
शांति देवी को ना सिर्फ अपना पूर्वजन्म याद था बल्कि उन्हें यह भी याद था कि मृत्यु के बाद और जन्म से पहले भगवान कृष्ण के साथ बिताया गया उनका समय कैसा था। उनका कहना था कि वह कृष्ण से मिली थीं और कृष्ण चाहते थे कि वह अपने पूर्वजन्म की घटना सबको बताएं इसलिए शांति देवी को हर घटना याद है। बहुत से लोगों ने प्रयास किया लेकिन कोई भी शांति देवी को झूठा साबित नहीं कर पाया।
sabhar :http://www.speakingtree.in/
इतिहास की रहस्यमय चीजों में सम्राट अशोक की 9 लोगों की एक सोसायटी का जिक्र सामने आता है। इसे The nine unknown के नाम से भी जाना जाता है। सम्राट अशोक ने 273 ई.पू. में इस कथित शक्तिशाली लोगों की सोसाइटी की नींव रखी थी। इस सोसाइटी का निर्माण कलिंग के युद्ध में 1 लाख से अधिक लोगों की मौत के बाद हुआ था।
कहा जाता है कि इन 9 लोगों के पास ऐसी सूचनाएं थीं, जो गलत हाथों में जाने पर खतरनाक हो सकती थी। इनमें प्रोपेगंडा सहित माइक्रोबायोलॉजी से संबंधित किताबें थी। कुछ किताबों के बारे में कहा जाता है कि इनमें एंटी ग्रेविटी और टाइम ट्रैवल के गुप्त सिद्धांत दर्ज थे। ये 9 लोग विश्व के कई स्थानों में फैले थे। सबसे आश्चर्य की बात है कि इनमें से कई विदेशी भी थे।
गैजेट डेस्क। एप्पल कंपनी ने 9 सितंबर के इवेंट में आईफोन के दो मॉडल्स के साथ कुल 5 प्रोडक्ट्स लॉन्च किए लेकिन जिस प्रोडक्ट ने अपनी तरफ लोगों का सबसे ज्यादा ध्यान खींचा वो है एप्पल टीवी।
* क्या है एप्पल टीवी-
एप्पल टीवी एक तरह का डिजिटल मीडिया प्लेयर या सेट टॉप बॉक्स है। ये दिखने में बहुत छोटा है। इंटरनेट से कनेक्ट होने पर यह डिवाइस टीवी स्क्रीन पर इंटरनेट से वीडियो स्ट्रीम कर सकता है। आसान शब्दों में कहें तो इसकी मदद से इंटरनेट के लाइव टीवी चैनल्स और मूवी वेबसाइट्स, जैसे नेटफ्लिक्स और HBO की फिल्मों के अलावा ऑनलाइन टीवी शो और वीडियो टीवी पर देखे जा सकते हैं। एप्पल टीवी के जरिए स्ट्रीम किए गए कंटेंट की क्वालिटी बहुत अच्छी होती है।
TECH GUIDE: प्रचलित टेक टर्म्स और उनके मतलब
* क्या हैं फीचर्स-
कंपनी की ये एप्पल टीवी ऐप के जरिए काम करेगी। ये टच सरफेस रिमोट कंट्रोल के साथ आएगी। इस रिमोट पर ग्लास टच सरफेस के जरिए यूजर को म्यूट बटन, डिस्प्ले बटन, सिरी बटन, प्ले/पॉज, वॉल्यूम जैसे फीचर्स मिलेंगे। इस टीवी को एप्पल की दूसरी डिवाइस जैसे आईफोन, आईपैड यहां तक की एप्पल पेंसिल के जरिए भी ऑपरेट किया जा सकेगा। ये किसी XBOX One और PS 4 की तरह भी काम करेगी। यूजर इसकी मदद से ऑनलाइन शॉपिंग भी कर सकेंगे।
* कीमत और उपलब्धता-
एप्पल टीवी यूजर्स के लिए अक्टूबर लास्ट तक उपलब्ध होगी। ये दो वेरिएंट 32GB और 65GB मेमोरी में आएगी। 32GB की कीमत 149 डॉलर यानी लगभग 9,916 रुपए और 65GB की कीमत 199 डॉलर यानी लगभग 13,244 रुपए होगी।
* क्या खास है सीरी में-
एप्पल टीवी की सबसे खास बात है सीरी। इसमें दिया गया रिमोट कंट्रोल एक माइक्रोफोन के साथ आता है जो वॉइस कंट्रोल का काम करता है। इसके अलावा इसमें 2 इंटिग्रेटेड माइक्रोफोन हैं- एक वॉइस कमांड लेने के लिए और दूसरा बैकग्राउंड शोर (नॉइज) को फिल्टर करने के लिए। ये यूजर की वॉइस को इस तरह से फिल्टर करेगा जैसे एक्टर्स की आवाज आपको टीवी पर सुनाई देती है।
एप्पल टीवी का सीरी फीचर एक साथ यूजर के कई सवालों का जवाब दे सकता है। मूवी देखते समय यूजर सीरी के कुछ खास फीचर्स का इस्तेमाल कर सकता है जैसे कि, मूवी को फास्ट फॉर्वर्ड करना, कुछ सेकंड्स के लिए रिवाइंड करना और सब टाइटल्स डिस्प्ले करना। आपको बता दें कि एप्पल टीवी में अब तक एक कमी पता चली है वो ये है कि फिलहाल यह सिर्फ आईट्यून्स की मूवीज दिखा सकता है। हालांकि, आगे जाकर इसमें कंपनी कोई बदलाव करती है या नहीं ये अब तक क्लियर नहीं है।
फास्ट हार्डवेयर
कंपनी के इस फ्यूचरिस्टिक टीवी के हार्डवेयर फीचर्स की बात की जाए तो ये काफी फास्ट है। रिमोट कंट्रोल के टच पैड की मदद से ऐप्स को फास्ट स्क्रोल किया जा सकता है। इसमें 3-D एनिमेटेड ऐप्स आईकॉन दिए गए हैं। इसमें टॉप गैलरी दी गई है, जब यूजर एक ऐप से दूसरे ऐप पर जाता है तो उसे ऐप के सभी फीचर्स इस गैलरी में दिखाई देंगे। इससे ऐप पर क्लिक किए बिना ही यूजर को बता चल सकेगा कि उसमें क्या-क्या फीचर्स हैं।
बड़े काम का है रिमोट
एप्पल टीवी की एक और खासियत उसका रिमोट है। माइक्रोफोन के साथ-साथ इसमें टच पैड दिया गया है। इसकी मदद से एप्पल टीवी मेन्यू में आसानी से सर्फिंग की जा सकती है, मूवी या टीवी शो के बीच में ही इसे फास्ट फॉर्वर्ड किया जा सकता है। इसका बेस्ट फीचर ये है कि इसमें वॉइस फिल्टर टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है। इसे CEC टेक्नोलॉजी कहते हैं। यह किसी ऐप या गेम के इस्तेमाल के लिए जरूरी वॉइस को कंट्रोल करता है।
नई दिल्ली: एक मशहूर वैज्ञानिक के किए गए दावों के मुताबिक अगले 50 साल में इंसान न सिर्फ रोबोट से प्रेम करने लगेगा बल्कि उससे यौन संबंध बनाना भी बेहद आम बात हो जाएगी। डॉ. हेलेन ड्रिसकॉल के मुताबिक जिस तेजी से तकनीक का विकस हो रहा है उससे यह मुमकिन है कि वर्ष 2070 तक दो मानवों के बीच बनने वाले शारीरिक संबंधों को पिछड़ेपन की निशानी माना जाने लगे।
गौर हो कि कई देशों में लोग इंसानों की तरह दिखने वाले पुतलों को या सेक्स डॉल्स को अपने सेक्स पार्टनर के तौर पर खरीद रहे हैं। आने वाले वक्त में ऐसे सेक्स रोबोट बनाए जा सकते हैं जो न सिर्फ इंसानों की तरह दिखेंगे बल्कि आपसे बात कर सकेंगे और आपकी हरकतों को भांप कर उसी मुताबिक व्यवहार भी कर करेंगे।
डॉ ड्रिस्कॉल के मुताबिक यह उन लोगों के लिए बहुत काम का साबित होगा जिनके साथी की मौत हो चुकी है या जो अकेले रहते हैं क्योंकि कोई भी साथी न होने से तो बेहतर रोबोट साथी होना ही है। यहां तक कि लोग इनसे सच में प्यार भी कर बैठेंगे। रोबोट के बारे में यह बात हमेशा से चर्चा का विषय रही है कि रोबोट इंसान की तरह ही सबकुछ कर सकते है। इसे लेकर वैज्ञानिकों की राय कभी एक नहीं रही है। लेकिन 2070 तक इंसानों का रोबोट के साथ सेक्स करने वाला यह दावा यकीनन चौंकाने वाला है।
WPG दुनिया के सबसे बड़े इलेक्ट्रॉनिक डिस्ट्रिब्यूटर्स में से एक है, इंटेल और माइक्रोसॉफ्ट के साथ मिलकर भारत में अल्ट्रा कॉम्पैक्ट PC लॉन्च किया है। इस PC की सबसे खास बात ये है कि इस PC का साइज एक हथेली के बराबर है। 117*112*35mm साइज का ये पीसी बिजनेस यूजर्स के लिए है।
इंटेल के इस नए पीसी में Intel Core i3 प्रोसेसर लगा हुआ है. यह पीसी सिर्फ 35मिमी चौड़ा है, वहीं 4X4 इंच जगह में यह आ सकता है. वैसे यह Intel NUC पर बेस्ड है जो बिजनेस मैन और होम कंज्यूमर्स को टारगेट करेगा. हालांकि इसे इंडिया में एसेंबल किया जा सकेगा. यह पीसी दो वर्जन में उपलब्ध है. पहला 2जीबी रैम वाला जिसमें 500जीबी स्टोरेज पॉवर है.
अनंतपुर (आंध्रप्रदेश), भारत के दक्षिणी राज्य आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले के एक छोटे से ऐतिहासिक गांव लेपाक्षी में 16 वीं शताब्दी का वीरभद्र मंदिर है। इसे लेपाक्षी मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। यह रहस्यमयी मंदिर है, जिसकी गुत्थी दुनिया का कोई भी इंजीनियर आज तक सुलझा नहीं पाया।
ब्रिटेन के एक इंजीनियर ने भी इसे सुलझाने की काफी कोशिश की थी, लेकिन वह भी नाकाम रहा। मंदिर का रहस्य इसके 72 पिलरों में एक पिलर है, जो जमीन को नहीं छूता। यह जमीन से थोड़ा ऊपर उठा हुआ है और लोग इसके नीचे से कपड़े को एक तरफ से दूसरे तरफ निकाल देते हैं।
मंदिर का निर्माण विजयनगर शैली में किया गया है। इसमें देवी, देवताओं, नर्तकियों, संगीतकारों को चित्रित किया गया है। दीवारों पर कई पेंटिंग हैं। खंभों और छत पर महाभारत और रामायण की कहानियां चित्रित की गई हैं।
मंदिर में 24 बाय 14 फीट की वीरभद्र की एक वाल पेंटिंग भी है। यह मंदिर की छत पर बनाई गई भारत की सबसे बड़ी वाल पेंटिंग है। पौराणिक कथाओं के अनुसार वीरभद्र को भगवान शिव ने पैदा किया था। मंदिर के सामने विशाल नंदी की मूर्ति है। यह एक ही पत्थर पर बनी हुई है और कहा जाता है कि दुनिया में यह अपनी तरह की नंदी की सबसे बड़ी मूर्ति है।
वीरभद्र मंदिर का निर्माण दो भाइयो विरन्ना और विरुपन्ना ने किया था। वे विजयनगर साम्राज्य के राजा अच्युतार्य के अधीन सामंत थे।
लेपाक्षी गांव का रामायण कालीन महत्व है। यहां के बारे में एक किवदंती प्रचलित है कि जब रावण सीता का हरण करके लिए जा रहा था, तब जटायु ने उससे युद्ध किया था। इसके बाद घायल होकर जटायु यहीं गिर गया था। भगवान राम ने जटायु को घायल हालत में यहीं पाया था और उन्होंने उससे उठने के लिए कहा था। ले पाक्षी का तेलुगु में अर्थ है- उठो, पक्षी।
न्यूयॉर्क। भले ही यह सुनने में अजीब लगे, लेकिन सच है, क्योंकि अमेरिकी शोधकर्ता इंसान के मल से सोना और कई दूसरी कीमती धातुओं को निकालने में लगे हुए हैं। शोधदल ने अमेरिका के मैला निष्पादन संयत्रों में इतना सोना निकालने में कामयाबी हासिल की है जितना किसी खान में न्यूनतम स्तर पर पाया जाता है। एक अंग्रेजी वेबसाइट पर छपी खबर के मुताबिक डेनवर में अमेरिकन केमिकल सोसायटी की 249वीं राष्ट्रीय बैठक में मल से सोना निकालने के बारे में विस्तार से बताया गया है यूएस जिओलॉजिकल सर्वे (यूएसजीएस) के सह-लेखक डॉक्टर कैथलीन स्मिथ के मुताबिक हमने खनन के दौरान न्यूनतम स्तर पर पाई जाने वाली मात्रा के बराबर सोना कचरे में पाया है। उन्होंने बताया कि इंसानी मल में सोना, चांदी, तांबा के अलावा पैलाडियम और वैनेडियम जैसी दुर्लभ धातु भी होती है।शोधदल का मानना है कि अमेरिका में हर साल गंदे पानी से 70 लाख टन ठोस कचरा निकलता है। इस कचरे का आधा हिस्सा खेत और जंगल में खाद के रूप में उपयोग मे लिया जाता है बचे हुए आधो हिस्से को जला दिया जाता है या फिर जमीन भरने के काम में ले लिया जाता है।
धातु निकालने के लिए औद्योगिक खनन प्रक्रियाओं में जिस रासायनिक विधि का प्रयोग किया जाता है वैज्ञानिक उसी विधि से कचरे से धातु निकलने का प्रयोग कर किया जा रहा है। इससे पहले वैज्ञानिकों के एक दूसरे दल ने अनुमान कि आधार पर बताया था कि दस लाख अमेरिकी जितना कचरा पैदा करते हैं उस कचरे में से एक करोड़ तीस लाख डॉलर की धातु निकाली जा सकती है।
मल त्यागना हम सबकी दिनचर्या का हिस्सा है. लेकिन क्या इंसानी मल किसी काम आ सकता है? बिल्कुल. जर्मनी में रिसर्चर कहते है कि इससे खाद बनाया जा सकता है जिसका खेती में इस्तेमाल किया जा सकता है. देखिए ये कैसे संभव होता है. sabhat webdunia dw.de
वाशिंगटन। अमेरिका के एक पूर्व अंतरिक्ष यात्री ने दावा किया है कि अमेरिका और रूस के बीच परमाणु युद्ध रोकने और शांति स्थापित करने के लिए एलियन पृथ्वी पर आए थे। डॉ. एडगर मिचेल नामक यह सज्जन चांद पर पहुंचने वाले छठे व्यक्ति थे। वह 1971 में "अपोलो 14" मिशन से वहां गए थे।
84 वर्षीय मिचेल के अनुसार 16 जुलाई 1945 को न्यू मेक्सिको राज्य के वाइट सैंड्स में परमाणु परीक्षण के दौरान वहां यूएफओ (अज्ञात अंतरिक्ष यान) दिखाई दी थीं। उनके अनुसार एलियन हमारे परमाणु परीक्षणों के स्थानों में गहरी रुचि रखते थे और उन्होंने उस समय दोनों महाशक्तियों- रूस और अमेरिका के बीच परमाणु युद्ध के खतरे को समाप्त किया था। वह कहते हैं कि उस समय वहां मौजूद अमेरिकी सेना के कर्मचारियों के दर्ज बयान उनके दावों को सच्चा साबित करते हैं।
इससे पहले भी मिचेल एलियंस से जुड़े कई रोचक बयान दे चुके हैं। उनके अनुसार हमारी तकनीक उनके जैसी विकसित नहीं है, लेकिन यदि वह उग्र होते तो पृथ्वी पर मानवजाति का नामोनिशान ही नहीं बचता। इसके अलावा, वह पहले यह भी अंदाजा लगा चुके हैं कि शायद एलियन देखने में बहुत-कुछ फिल्मी ईटी की तरह दिखते हैं, यानी वह बड़ी आंखें और बड़े सिर वाले होंगे।
सरकारी दावा
एडगर मिचेल के अजीबोगरीब दावों के जवाब में अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के एक पूर्व शोधकर्ता निक पोप का कहना है कि मिचेल के दावे अधकचरी सूचनाओं के आधार पर तैयार किए गए हैं। हालांकि पोप यह जरूर कहते हैं कि परमाणु संयंत्रों और फौजी छावनियों के आसपास अज्ञात यान देखे गए थे, लेकिन वह यूएफओ थे या कुछ और, कहना कठिन है।
पोप के अनुसार मिचेल के दावों पर यकीन करने वाले वही लोग होते हैं जो इंसान के चांद पर पहुंचने को लेकर शंका जताते रहे हैं और दावे करते हैं कि वह किसी सेट पर बनाई गई फिल्म थी। वहीं यूएफओ में यकीन रखने वालों के अनुसार परमाणु तकनीक के विकसित होने पर बाहरी जगत के प्राणी इसलिए धरती पर पहुंचे थे क्योंकि इससे इंसान की शक्ति में कई गुना इजाफा हो गया था।
नासा का बयान
नासा के एक प्रवक्ता के अनुसार नासा यूएफओ की तलाश में समय नहीं बिताता। नासा कहीं भी एलियन को लेकर किसी तथ्य पर पर्दा भी नहीं डालता। नासा के अनुसार डॉ. एडगर मिचेल एक महान अमेरिकी वैज्ञानिक हैं, लेकिन नासा उनके विचारों से सहमत नहीं है।
अनोखे दावे
एक भौतिकशास्त्री डॉ. जॉन ब्रांडेनबर्ग के अनुसार मंगल ग्रह पर स्थित प्राचीन सभ्यता को एलियन ने ही परमाणु धमाके से खत्म कर दिया था। डॉ ब्रांडेनबर्ग के अनुसार इस नरसंहार के निशान आज तक वहां देखे जा सकते हैं। उन्होंने कुछ वर्ष पहले दावा पेश किया था कि मंगल की लाल सतह वहां हुए परमाणु धमाके के कारण है, जिससे वहां के वातावरण में कई रेडियोधर्मी पदार्थ फैल गए थे।
vartabook Varta.tv : : Vartavideo.com : vigyanindia.com
Charchamanch.com.com:worldexpress.co.in इस साइट पर नए समाचार यूट्यूब संबंधित ज्ञानवर्धक वीडियो आध्यात्मिक समाचार वैज्ञानिक समाचार सामाजिक समाचार भारत का विश्व की विस्तृत खबरें एवं वीडियो इत्यादि आधुनिक प्रोडक्ट के विषय में भी बताए जाते हैं भारतीय विज्ञान एवं अध्यात्म काम विज्ञान महान दार्शनिकों के अनुभव ओशो विवेकानंद ऋषि-मुनियों से संबंधित खबरें भी प्रकाशित की जाती हैं आशा है कि आप इसे पसंद करेंगे कृपया साइट पर भ्रमण करें latest