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शुक्रवार, 25 अप्रैल 2014

जब रातों रात रात भूतों ने बना दिया भगवान श्री कृष्ण का मंदिर

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यह चौंकाने वाली कहानी वृंदावन की है

यह चौंकाने वाली कहानी वृंदावन की है


भूतों को भगवान से डर लगता है यह तो आपने कई बार सुना होगा लेकिन क्या कभी सुना है कि भूत खुद आकर भगवान के लिए मंदिर बनाने लग जाएं। लेकिन यह चौंकाने वाली कहानी वृंदावन की है।

मंदिर जिसे भूतों ने बनाया

वृंदावन की पवित्र भूमि जिसे भगवान श्री कृष्ण की लीलास्थली के रुप में जाना जाता है। इस भूमि में एक प्राचीन मंदिर है जिसका नाम गोविद देव जी मंदिर है। इस मंदिर के विषय में मान्यता है कि इस मंदिर का निर्माण भूतों ने करवाया है।

भूतों ने एक रात में ही कई मंजिला मंदिर का निर्माण कर दिया। लेकिन मंदिर पूरा होने से पहले ही भूतों को मंदिर निर्माण का काम छोड़कर भागना पड़ा।

इसलिए मंदिर का काम छोड़कर भाग गए भूत

इसलिए मंदिर का काम छोड़कर भाग गए भूत

इसके विषय में यह कहा जाता है कि सुबह होने वाली थी। और भूत मंदिर का निर्माण करने में लगे थे। तभी किसी ने चक्की लगाना शुरु कर दिया। चक्की की आवाज सुनकर भूत मंदिर का काम छोड़कर भाग गए। कहते हैं कि मुगलों के समय में इस मंदिर की रोशनी आगरा तक दिखती थी।

वृंदावन से जयपुर पहुंच गए गोविंद जी, यह है प्राचीन मूर्ति

इस मंदिर के विषय में कहा जाता है कि इस मंदिर में स्थापित प्राचीन मूर्ति अब इस मंदिर में नहीं है। मंदिर के पुजारी मू्र्ति की रक्षा के लिए इसे जयपुर लेकर चले गए। आज वह प्राचीन मूर्ति जयपुर के गोविंद देव जी मंदिर में विराजमान है।  sabhar :http://www.amarujala.com/

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इन तकनीकों से बदल जाएगा जीने का ढंग

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dyson award shortlisted 20 technologies

इस साल के इंजीनियरिंग के जेम्स डाइसन अवार्ड के विजेता को 29,20,000 रुपए की राशि मिलेगी। यह ब्रितानी प्रोजेक्ट है बायोवूल। यह ऊन उद्योग के अवशेषों को ऐसे पदार्थ के रूप में बदल देगा जिसे प्लास्टिव के विकल्प के रूप में इस्तेमाल किया जा सकेगा


इस साल के इंजीनियdyson award shortlisted 20 technologies

इस साल छांटी गई 20 प्रविष्टियों में से दूसरी जर्मन है। ज़ारियस हवा से बिजली उत्पन्न करता है जिससे दूसरे उपकरणों को चार्ज किया जा सकता है।


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ऑस्ट्रिया का सोनो कुछ चुनिंदा आवाज़ों को बंद कर सकता है जिससे वह खिड़की के बाहर न जा सकें। इन आवाज़ों को वाई-फ़ाई से चुन सकता है

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ओल्टू फलों और सब्ज़ियों को रखने के लिए ज़्यादा जगह देता है। यह स्पेनी अविष्कार ऊर्जा के लिए फ़्रिज के पीछे पैदा होने वाली गर्मी का इस्तेमाल करता है। इसके चार अलग-अलग खानों को ठंडा, गरम, गीला या सूखा रखा जा सकता है।

dyson award shortlisted 20 technologies

इस अमरीकी अविष्कार में साइकिल के पहियों में एलईडी चक्के लगाकर सवार को दुर्घटना से बचाने का इंतज़ाम है। इसे ऊर्जा एक बैटरी से मिलती है।



इस अमरीकी अविष्कार में dyson award shortlisted 20 technologies

कॉम्ब एक चालकरहित डंपर ट्रक है। ऑस्ट्रिया के इस प्रोजेक्ट में जीपीएस लोकेशन तककनीक के ज़रिए वाहन को चलाने का प्रस्ताव है।

dyson award shortlisted 20 technologies

स्टैक एक दुबला प्रिंटर है। यह कागज़ों के चट्टे पर रखा जाता है और उसमें से काग़ज़ लेकर प्रिंट देता रहता है। इसमें काग़ज़ को अंदर डालने की ज़रूरत नहीं रहती। इसे बनाने वाली स्विस टीम का कहना है कि छोटे घरों के लिए यह आदर्श रहेगा।

dyson award shortlisted 20 technologies


यह उपकरण अपने आप टांके लगाने के लिए तैयार किया गया है ताकि मेडिकल कर्मचारी कुछ और काम कर सकें। इसे बनाने वाली कनाडाई टीम इसे पेट की सर्जरी के बाद उसे सिलने के लिए इसे तैयार किया है ताकि यह काम जल्दी हो सके




dyson award shortlisted 20 technologies
टीमओ को इसलिए डिज़ाइन किया गया है कि ताकि अगर किसी को लाइफ़जैकेट के सहारे खींचा जाए तो उसका मुंह पानी से बाहर रहे। इसे बनाने वाली ब्रितानी टीम ने लहरों के थपेड़ों से बचाने के लिए गर्दन के चारों ओर एक सहारा भी दिया है।
dyson award shortlisted 20 technologies

कोर्टेक्स एक थ्रीडी-प्रिंटिड सांचा है। इसे प्लास्टर से बनने वाले मूल सांचों से होने वाली बदबू और खुजली जैसे दिक्कतों को दूर करने के लिए बनाया गया है। न्यूज़ीलैंड के इसके आविष्कारक कहते हैं कि अवशेषों को कम करने के लिए इसे रिसाइकल्ड प्लास्टिक से बनाया गया है।

dyson award shortlisted 20 technologies


रिन्यूवेबल वेव पावर जेनरेटर पहले ही जेम्स डाइसन प्रतियोगिता में ब्रिटेन का चक्र जीत चुका है। इसमें हल्के से जुड़े पिस्टनों को ज्वारीय पानी से ऊर्जा हासिल करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यह उन उपकरणों से आगे है जो तभी ठीक से काम कर पाते हैं जब पानी एक दिशा में चलता है।


dyson award shortlisted 20 technologies


आइरिश आविष्करकों की टीम ने सेंसर युक्त जबड़ा मेमोरी बनाया है। यह खिलाड़ी को ज़्यादा चोट लगने पर मेडिकल कर्मचारियों को सूचित कर देता है।

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अमरीका में तैयार टाइटन आर्म ऊपरी हिस्से पर लगने वाला उपकरण है जो पहनने वाले की ताकत बढ़ाने का वादा करता है। इसे बनाने वालों का कहना है कि इसे घायल लोगों की कोशिका निर्माण के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है

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ई-हेल्थ रास्पबेरी पाइ और अरड्यूनो कंप्यूटरों के इस्तेमाल से रक्तचाप, रक्त में ऑक्सीजन और दूसरे बायोमैट्रिक आंकड़ों को मापने का एक किफ़ायती तरीका है। इसके स्पेनिश आविष्कारकों का कहना है कि इसका इस्तेमाल घर पर ही स्वास्थ्य जांच के लिए किया जा सकता है।

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अवारिंग को सुनने में कमज़ोर लोगों के लिए डिज़ाइन किया गया है। इस जापानी अविष्कार में लाइटों के ज़रिए यह बताया जाता है कि कौन बात कर रहा है और कितनी ज़ोर से बोल रहा है।

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हैंडी के टुकड़ों को थ्रीडी प्रिंटर की मदद से फिर बनाया जा सकता है। इसके जापानी आविष्कारकों का कहना है कि इससे इस प्रोस्थेटिक हाथ की देखरेख किफ़ायती हो सकती है।

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ग्लूको एक स्मार्टफ़ोन से एक ख़ास घड़ी को जोड़कर मधुमेह के स्तर की जांच करता है। इसे बनाने वाली फ्रांसीसी टीम का कहना है कि अगर मधुमेह का स्तर बहुत कम या ज़्यादा हो जाता है तो इसकी जानकारी नामित व्यक्ति को दी जा सकती है।

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हाइड्रोस लाइफ़ जैकेट निर्माण के लिए नया नज़रिया पेश करता है। इसे बनाने वाली आयरिश टीम का कहना है कि यह आरामदेह है और पारंपरिक डिज़ाइन के मुकाबले ठंड से बेहतर बचाव करता है।




ऑस्ट्रेलिया की टीम ने बच्चों के लिए रोम नाम के ऑक्सीजन सिलिंडर का अविष्कार किया है। इसमें एक नाक पर लगाने वाला मास्क भी होता है। इसे बनाने वालों का कहना है कि गंभीर दमे के अटैक के वक्त मौजूदा सिलिंडरों के मुकाबले इसे लाना-ले जाना आसान है।
dyson award shortlisted 20 technologies

ऑस्ट्रेलिया की टीम ने बच्चों के लिए रोम नाम के ऑक्सीजन सिलिंडर का अविष्कार किया है। इसमें एक नाक पर लगाने वाला मास्क भी होता है। इसे बनाने वालों का कहना है कि गंभीर दमे के अटैक के वक्त मौजूदा सिलिंडरों के मुकाबले इसे लाना-ले जाना आसान है।

dyson award shortlisted 20 technologies



लेनिफी एक स्ट्रेचर है जो तीन टुकड़ों में बंट जाता है। इसे बनाने वाली अमरीकी टीम का कहना है कि इससे स्वास्थ्यकर्मियों को मरीज़ को एक हिस्से से दूसरे हिस्से में खिसकाने में मदद मिलती है। पारंपरिक रूप से उठाकर रखने से मरीज़ को और नुक्सान पहुंच सकता है। प्रतियोगिता के परिणाम 7 नवंबर को घोषित होंगे।

sabhar :http://www.amarujala.com/










कोर्टेक्स एक थ्रीडी-प्रिंटिड सांचा है। इसे प्लास्टर से बनने वाले मूल सांचों से होने वाली बदबू और खुजली जैसे दिक्कतों को दूर करने के लिए बनाया गया है। न्यूज़ीलैंड के इसके आविष्कारक कहते हैं कि अवशेषों को कम करने के लिए इसे रिसाइकल्ड प्लास्टिक से बनाया गया है।

स्टैक एक दुबला प्रिंटर है। यह कागज़ों के चट्टे पर रखा जाता है और उसमें से






 काग़ज़ लेकर प्रिंट देता रहता है। इसमें काग़ज़ को अंदर डालने की ज़रूरत नहीं रहती। इसे बनाने वाली स्विस टीम का कहना है कि छोटे घरों के लिए यह आदर्श रहेगा।




साइकिल के पहियों में एलईडी चक्के लगाकर सवार को दुर्घटना से बचाने का इंतज़ाम है। इसे ऊर्जा एक बैटरी से मिलती है।









रिंग के जेम्स डाइसन अवार्ड के विजेता को 29,20,000 रुपए की राशि मिलेगी। यह ब्रितानी प्रोजेक्ट है बायोवूल। यह ऊन उद्योग के अवशेषों को ऐसे पदार्थ के रूप में बदल देगा जिसे प्लास्टिव के विकल्प के रूप में इस्तेमाल किया जा सकेगा

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गुरुवार, 24 अप्रैल 2014

पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति का कबूलनामा: एलियन्स की पसंदीदा जगह है पृथ्वी

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कहने को तो ये धरती इंसानों की है लेकिन इस इंसानी दुनिया में समय-समय पर ऐसे लोगों का विचरण या आगमन होता रहता है जिनका इस लौकिक दुनिया से कोई वास्ता नहीं है. भूत-प्रेत, आत्माओं से जुड़े किस्से और कहानियां हम अकसर सुनते आए हैं और जहां तक उम्मीद है आगे भी इसी तरह सुनते रहेंगे लेकिन दूसरे ग्रह के प्राणियों, एलियन का जिक्र जब कभी भी उठता है, उस पर विश्वास से ज्यादा संदेह करने वालों की तादात बढ़ती जाती है लेकिन जब अमेरिका जैसी महाशक्ति के राष्ट्रपति ही इस बात को कबूल कर लें कि अगर धरती पर एलियन का आवागमन होता है तो इस बात से उन्हें कोई आश्चर्य नहीं होगा क्योंकि शायद कहीं ना कहीं उन्हें भी इस बात का यकीन है कि मंगलवासियों का धरती पर विचरण होना एक सामान्य सी घटना है.

Bill Clinton With Alien


हम बात कर रहे हैं अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन की जिन्होंने हाल ही में हुए एक टॉक शो में यह कबूल किया कि जैसे ही उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति का पदभार संभाला तभी उन्होंने अपने साथियों को एरिया 51 का जिसे नेवादा टेस्ट एंड ट्रेनिंग रेंज भी कहा जाता है, का सर्वेक्षण करने को कहा ताकि वह जान सकें कि सैन्य कार्यवाहियों में काम आने वाले इस स्थान पर एलियन तो नहीं हैं.


अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन का कहना है कि हम एक ऐसे युग में रहते हैं जिस समय ब्रह्मांड का विस्तार निरंतर होता जा रहा है, ऐसे में मंगल और धरती की दूरी ज्यादा नहीं रह गई है. अब अगर एलियन अपना ग्रह छोड़कर धरती पर आते हैं तो इसमें हैरत की कोई बात नहीं है.

sabhar :http://worldfocus.jagranjunction.com/

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रहस्यः क्या सच में जहाज होते हैं यहां एलियन्स का शिकार या फिर

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वॉशिंगटन: दुनिया में बहुत सारी जगह रहस्यों से भरी पड़ी हैं और जिसके रहस्य का खुलासा कभी भी नहीं हो पाया है। ऐसा ही रहस्यों से भरा हुआ है अमेरिका के दक्षिण पूर्वी तट पर बना बरमूडा ट्राएंगल, जहां पर पुहंचा जहाज आज तक नही मिला। यहां तक की बरमूडा ट्राएंगल के रहस्य के बारे में वैज्ञानिक भी पता नहीं लगा पाएं। 

बरमूडा ट्राएंगल अमेरिका के फ्लोरिडा, प्यूर्टोरिको और बरमूडा तीनों को जोड़ने वाला एक ट्रायंगल यानी त्रिकोण है। इस ट्राएंगल में पास पह‌ुंचते ही न तो समुद्री जहाज, हवाई जहाज मिलता है और न ही उसके यात्री। इस जगह पर कई जहाज लापता हो गए, जिसमें मैरी सेलेस्टी, एलिन ऑस्टिन फ्लाईट 19, स्टार टाईगर, डगलस डीसी-3 बरमूडा ट्राएंगल में गुम होने वाले हवाई जहाजों के नाम हैं। 

बरमूडा ट्राएंगल क्षेत्र में मैरी सेलेस्टी नाम का एक व्यापारिक जहाज लापता हो गया था जो 4 दिसम्बर 1872 को अटलांटिक महासागर में मिला, लेकिन किसी यात्री या कर्मचारी का कोई भी सुराग नहीं मिला। पहले-पहले इस जहाज को समुद्री डाकुओं द्वारा लूटे जाने की आशंका जताई गई लेकिन कीमती सामानों के सुरक्षित होने से यह बात साबित नहीं हुई। इस जहाज की तरह 1881 में एलिन ऑस्टिन नामक जहाज भी यहां गायब हो गया। यह जहाज कुशल चालकों के साथ न्यूयॉर्क के लिए रवाना हुआ और इसके भी किसी यात्री के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली।

अमेरिका के लेफ्टिनेंट कमांडर जी डब्ल्यू वर्ली 309 क्रू सदस्यों के साथ यूएसएस साइक्लोप्स नाम के जहाज से सफर कर रहे थे। ठीक वैसे ही बरमूडा ट्राएंगल को पार करते ही जहाज गायब हो गया। जिस दिन यह घटना हुई मौसम बिल्कुल ठीक था और सब कुछ ठीक चलने के संदेश भी भेजे जा रहे थे, लेकिन अचानक ही सब बदला और कोई यह जान नहीं पाया कि जहाज कहां गया। sabhar :http://www.punjabkesari.in/

अमेरिका के इतिहास में इस जहाज और क्रू मेंबर का गायब होना एक बड़ा रहस्य बना हुआ है। कई शोध और अध्ययन हुए, लेकिन जहाजों के गायब होने का पता नहीं चल पाया। शुरुआती शोध के परिणाम बताते हैं कि बरमूडा ट्राएंगल के पास एक विशेष प्रकार का कोहरा छाया रहता है, जिसमें जहाज भटक जाते हैं और दूसरा कारण मीथेन गैसों का भंडार होने का बताया जाता है। इससे पानी का घनत्व कम हो जाता है और जहाज धीरे-धीरे पानी में समाने लगता है। 

इस बात की अफवाहें भी हैं कि इस क्षेत्र में एलियन्स का रिसर्च सेंटर है। एलियनों को इस क्षेत्र में बाहरी दुनिया के लोगों का आना पसंद नहीं है, इसलिए वह इस तरह की घटनाओं को अंजाम देते हैं। जहाज गायब होने के कारण अभी तक पता नहीं चल सके हैं

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हनुमान भक्त बना कुत्ता, बेहोशी से उठकर फिर करने लगा परिक्रमा

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हाथी की ईश्वर भक्ति


हाथी की ईश्वर भक्ति


अगर आप यह मानते हैं कि भक्ति करना सिर्फ हम मनुष्यों को आता है तो यह बात अपने मन से निकाल दीजिए। हम इंसानों की तरह पशुओं में भी भगवान के प्रति आस्था और श्रद्घा होती है। इसका सबसे पहला उदाहरण वह हाथी है जो भगवान विष्णु का परम भक्त था।

मगरमच्छ ने जब हाथी के पांव पकड़ लिए और हाथी के जीवन पर संकट आ गया तो भक्त हाथी की पुकार सुनकर भगवान विष्णु स्वयं प्रकट हुए और मगरमच्छ से हाथी के प्राण बचाए।

लेकिन जिस कुत्ते की भक्ति की हम बात कर रहे हैं वह किसी इतिहास पुराण की कथा नहीं है बल्कि आज के जमाने की बाद है वह भी इसी महीने की घटना है।
कुत्ते की भक्ति देख सभी हुए हैरान


कुत्ते की भक्ति देख सभी हुए हैरान

मध्यप्रदेश के मुड़ागांव में एक प्राचीन हनुमान मंदिर है स्थानीय लोग इसे बजरंगबली-श्रीजानकी मंदिर के नाम से जानते हैं। अप्रैल महीने के पहले हफ्ते की बात है, लोग मंगलवार के दिन हनुमान जी की पूजा करने मंदिर आए तो एक कुत्ते को मंदिर के चारों ओर घूमते देखा।

पहले तो लोगों ने कुत्ते की इस हरकत पर कोई ध्यान नहीं दिया। कुछ लोग कुत्ते को ऐसा करते देख हंस भी रहे थे। लेकिन कुछ समय बीतने के बाद कुत्ते पर हंसने वाले लोग भी दांतो तले उंगली दबा रहे थे। लोगों को कुत्ते की भक्ति के आगे अपनी श्रद्घा भक्ति कम लगने लगी थी।
कई दिनों तक उन हालातों में करता रहा परिक्रमा

कई दिनों तक उन हालातों में करता रहा परिक्रमा

कुत्ता लगातार बिना भोजन पानी के हनुमान मंदिर की परिक्रमा करता जा रहा था। यह सिलसिला तीन दिनों तक चलता रहा। स्थानीय लोग बताते हैं कि कुत्ता हर परिक्रमा पूरी करने के बाद हनुमान जी के समाने माथा टेकता और फिर परिक्रमा शुरु कर देता।

कुत्ते की इस भक्ति की खबर जो गांव में फैली तो लोग हैरानी से मंदिर परिसर में जमा होने लगे। लेकिन लोगों की भीड़ देखकर भी कुत्ता विचलित नहीं हुआ और निरंतर परिक्रमा करता रहा।

डॉक्टर ने लगाई सूई, कुत्ता उठकर फिर लगाने लगा परिक्रमा

कई दिनों तक परिक्रमा करते रहने के कारण कुत्ता जब थक कर बैठ गया और उसके आंखों से आंसू आने लगा तब लोगों ने हनुमान भक्त कुत्ते का ईलाज करवाया। स्थानीय पशु चिकित्सक डॉ. देवेश जोशी ने जब कुत्ते को इंजेक्शन दिया तो कुत्ता उठकर खड़ा हो गया और फिर हनुमान जी की परिक्रमा करने लगा।

इस कुत्ते के बारे में स्थानीय बड़े बुजुर्ग अब यह कहने लगे हैं कि किसी कर्म के कारण इस जन्म में इसे कुत्ता बनना पड़ा। पूर्वजन्म के शाप से मुक्ति के लिए यह हनुमान जी की परिक्रमा कर रहा होगा।

वहीं कुछ लोग इसे पूर्व जन्म का हनुमान भक्त मान रहे हैं। अब कुत्ता किसलिए हनुमान जी की परिक्रमा कर रहा था यह एक रहस्य बना हुआ है। लेकिन जो भी है यह अद्भुत एक घटना है जो यह दर्शाता है कि हम मनुष्यों को यह अभिमान नहीं करना चाहिए कि केवल हम मनुष्य की भगवान के भक्त हो सकते हैं। ईश्वर सभी के हैं और सब ईश्वर के हैं। sabhar :http://www.amarujala.com/


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बुधवार, 23 अप्रैल 2014

आध्यात्म की तलाश में आईं भारत ...और बन गईं 'आइटम गर्ल'

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B'day: आध्यात्म की तलाश में आईं भारत ...और बन गईं 'आइटम गर्ल'


मुंबईः बॉलीवुड एक्ट्रेस, मॉडल और बिजली गर्ल के नाम से मशहूर याना गुप्ता आज अपना 35वां जन्मदिन मना रही हैं। अपने हॉट अवतार और कई कॉन्ट्रोवर्सी के चलते वो हमेशा ही सुर्खियों में रहती हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 16 साल की उम्र में बतौर मॉडलिंग की थी। उन्होंने मॉडलिंग के लिए अपना घर छोड़ दिया था और जापान चली गई थीं।
 
याना का झुकाव शुरू से ही आध्यात्म की तरफ था इसी तलाश में वो भारत आ गईं। उन्होंने मेडिटेशन के लिए पुणे में ओशो आश्रम ज्वॉइन कर लिया। यहां पर उनकी मुलाकात सत्यकाम गुप्ता से हुई। दोनों में नजदीकियां बढ़ीं और 2001 में शादी रचा ली। हालांकि, शादी के महज 4 साल बाद 2005 में दोनों का तलाक हो गया। तलाक के बाद याना ने भारत में ही मॉडलिंग शुरू कर दी। उन्होंने कई बड़े ब्रान्ड्स के ऐड किए जिसमें लैक्मे भी शामिल रहा।
 
2003 में याना को बॉलीवुड में पहली बार काम करने का मौका मिला। उन्होंने फिल्म 'दम' में 'बाबूजी जरा धीरे चलो...' का आइटम नंबर किया, जो काफी पॉपुलर हुआ। इस गाने की सफलता ने उनके लिए बॉलीवुड का रास्ता खोल दिया। इसके बाद उन्होंने हिंदी के साथ साउथ फिल्मों में भी ढेर सारे आइटम नंबर किए। साल 2009 में याना ने 'How To Love Your Body And Get The Body You Love' नाम की किताब भी लिखी।
 
याना की कॉन्ट्रोवर्सी
 
मुंबई के एक चैरिटी इवेंट में याना गुप्ता अपनी ब्लैक ड्रेस के अंदर अंतःवस्त्र पहनना भूल गईं और उनके फोटो भी खींच लिए गए। चैरिटी इवेंट में पहनी गई याना की यह ड्रेस बहुत छोटी थी। इस घटना के बाद बॉलीवुड में चर्चा चल पड़ी कि याना ने यह काम इसलिए किया ‍ताकि उनकी चर्चा हो और उन्हें कुछ फिल्में मिले। इस घटना के बाद उन्हें 'नो पैंटी' गर्ल कहा जाने लगा। अपने बोल्ड अवतार के लिए याना हमेशा ही सुर्खियों में रहती हैं।

B'day: आध्यात्म की तलाश में आईं भारत ...और बन गईं 'आइटम गर्ल'

B'day: आध्यात्म की तलाश में आईं भारत ...और बन गईं 'आइटम गर्ल'

B'day: आध्यात्म की तलाश में आईं भारत ...और बन गईं 'आइटम गर्ल'


साभार : भस्करडॉटकॉम 


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सॉफ्टवेयर बनाएंगे कपड़े

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वह समय दूर नहीं जब दर्जी अपनी सुई, इंचटेप और कैंची जैसे औजार उठाकर कूड़ेदान में फेंक देंगे. फैशन की दुनिया में तेजी से कदम बढ़ा रही नई तकनीकों से अब कपड़ों की डिजाइनिंग भी डिजिटल तरीके से हो रही है.

Kleid wird am Computer entworfen

दुकान से कपड़े खरीदते समय उसे पहन कर देखना तो आम है लेकिन कपड़े सिले जाने से भी पहले उसकी डिजाइन, कट और शरीर पर फिट होने का अंदाज देखना एक अलग बात है. अब ऐसे सॉफ्टवेयर आ गए हैं जिनकी मदद से आप अपने कंप्यूटर स्क्रीन पर किसी कपड़े की सिलाई से पहले ही उन्हें डिजिटल मॉडलों पर देख सकेंगे. कई फैशन डिजाइनर कपड़े इन्हीं सिमुलेशन सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर डिजिटल तरीके से बना रहे हैं. जर्मनी के डार्मश्टाट में स्थित फ्राउनहोफर इंस्टीट्यूट के कंप्यूटर ग्राफिक रिसर्च सेंटर के योर्न कोलहामर बताते हैं, "ये (कपड़े) अपने आप में एक जटिल सामान होते हैं. स्टील या किसी दूसरे ठोस पदार्थ से काफी अलग. कोई कपड़ा किस तरह के रेशों से बनाया गया है या उसमें कितना लचीलापन है, जिसके कारण हिलाए या खींचे जाने पर वह अलग अंदाज में गिरता है."
रेशों से कपड़े तक
फ्राउनहोफर इंस्टीट्यूट के नए सॉफ्टवेयर के आते ही उसे फैशन की कई बड़ी कंपनियों ने हाथों हाथ ले लिया है. वे इसका इस्तेमाल कर ड्रेस की सिलाई के भी पहले से शुरू करते हैं. जिस कपड़े का इस्तेमाल ड्रेस बनाने में होना है उसके रेशों को एक कंप्यूटर पर दिखने वाले एक आभासी मॉडल पर परखा जाता है. माउस के इस्तेमाल से कपड़े को हिला डुला कर देखा जा सकता है कि इससे बने कपड़े पहने जाने पर कैसे लगेंगे.
Textile Simulation

सिर्फ कपड़े की किस्म ही नहीं, उसके कई रंग भी आजमाए जा सकते हैं. यहां तक की कपड़े की बुनाई में इस्तेमाल होने वाले अनगिनत रेशों में से केवल कुछ रेशों को चुन कर उन्हें अलग रंग देना भी संभव है. डिजाइनर इस तरह बने कपड़ों को तुरंत स्क्रीन पर देखकर अपनी ड्रेस के लिए सही कपड़े का चुनाव फटाफट कर सकते हैं.
करता है दर्जी का काम
बिल्कुल किसी दर्जी की सिलाई मशीन की ही तरह स्क्रीन पर कर्सर घुमा कर देखा जा सकता है कि सिले हुए कपड़े कैसे दिखेंगे. कंप्यूटर प्रोग्राम की मदद से कपड़े के किसी डिजाइन में कटे हुए टुकड़ों को साथ लगा कर पूरी ड्रेस की परिकल्पना की जा सकती है. कोलहामर बताते हैं, "3-डी, रियल टाइम सिमुलेशन के लिए यह एक बहुत महत्वपूर्ण कदम है. जब आप सिमुलेटर में सिलाई करके देख पाते हैं कि असल में हिलता डुलता वह कपड़ा कैसा दिखेगा."
इसका इस्तेमाल फैशन जगत में तो क्रांति ला ही रहा है लेकिन भविष्य में उद्योग जगत को इस तकनीक से काफी फायदा हो सकता है. वैज्ञानिकों का मानना है कि आगे चल कर इससे कार्बन, ग्लास या प्लास्टिक के रेशों के साथ बुनाई की जा सकेगी. कोलहामर का मानना है कि खास तरह की इंजीनियरिंग से तैयार की गए इन सामानों का इस्तेमाल कार या पानी के जहाज से लेकर हवाईजहाज तक बनाने में हो सकेगा.
रिपोर्टः फाबियान श्मिट/आरआर
संपादनः आभा मोंढे
साभार :http://www.dw.de/


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और इस तरह वह फकीर शिरडी का साई बाबा कहलाने लगा

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जब पहली बार शिरडी में आए बाबा


जब पहली बार शिरडी में आए बाबा

कहा जाता है कि सन् 1854 ई. में पहली बार बाबा शिरडी में दिखाई दिए। उस समय बाबा की उम्र लगभग सोलह वर्ष की थी। शिरडी के लोगों ने बाबा को सर्वप्रथम एक नीम के वृक्ष के नीचे समाधि में लीन देखा।

इतनी कम उम्र में सर्दी-गर्मी, भूख-प्यास की जरा भी चिंता किए बगैर उस बालयोगी को अति कठिन तपस्या करते देखकर लोगों को बड़ा आश्चर्य हुआ।

जब अचानक शिरडी से चले गए साईं बाबा

सदा नीम के पेड़ के नीच बैठा रहने वाला इस बालयोगी के व्यक्तित्व की ओर लोग सहज ही आकर्षित हो जाते थे। त्याग और वैराग्य की साक्षात् मूर्ति ने धीरे-धीरे गांव वालों का मनमोह लिया।

कुछ समय शिरडी में रहकर वह तरुण योगी एक दिन किसी से कुछ कहे बिना अचानक वहां से चला गया।

इस घटना के बाद कहलाने लगे वह साईं बाबा

कुछ वर्ष बाद चांद पाटिल की बारात के साथ वह योगी पुनः शिरडी पहुंचा। खंडोबा मंदिर के पुजारी म्हालसापति ने उस फकीर को जब ‘आओ सांई’ कहकर स्वागत किया, तब से उनका नाम ‘सांईबाबा’ पड़ गया।

उसके बाद बाबा बारात के साथ वापस नहीं लौटे और सदा-सदा के लिए शिरडी के होकर रह गए।

साई बाबा का जन्म कहां और कब

वे कौन थे? उनका जन्म कहां हुआ था? उनके माता-पिता का नाम क्या था? ये सारे प्रश्न अनुत्तरित ही है। बाबा ने अपना परिचय कभी नहीं दिया। उनके मानवता प्रेम, त्याग, दयालुता और चमत्कारों की प्रसिद्घि चारों ओर फैल गई और वे कहलाने लगे ‘शिरडी के सांईबाबा’। sabhar :http://www.amarujala.com/

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मंगलवार, 22 अप्रैल 2014

नासा ने बनाया ऑयरन मैन की तरह सुपरहीरो रोबोट

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नासा ने एक ऐसा सुपरहीरो रोबोट बनाया है जो देखने में ऑयरन मैन मूवी के हीरो की तरह लगता है। इस रोबोट का नाम वालकेरी रखा गया है। वालकेरी रोबोट में कई फीचर दिए गए हैं जैसे ये चल सकता है साथ ही इसके सीने में, पैरो में और घूटनों में कई कैमरे भी लगे हुए हैं। रोबोट के दोनों हाथों में 3 उंगलियां दी गई है जो घूम सकती हैं। आईए देखते है नासा के रोबोट का वीडियो।





नासा ने बनाया ऑयरन मैन की तरह सुपरहीरो रोबोट


नासा द्वारा बनाया गया रोबोट क्‍या-क्‍या कर सकता वालकेरी नाम के इस रोबोट का नाम फीमेल के नाम पर रखा गया है जबकि आधिकारिक तौर पर ये जेंडरलेस ह्यूमनॉयड है शॉट में वाल का मतलब रोबोटिक्‍स होता है।  नासा द्वारा बनाए गए इस रोबोट के हाथ पैर काफी लचीले हैं जिससे ये कई काम कर सकता है।  नासा ने नया रोबोट DARPA Robotics Challenge को टक्‍कर देने के लिए किया है।  दूसरे रोबोनॉट की तरह नासा ने ये रोबोट अंतरिक्ष के लिए नहीं बनाया है।




साभार :http://hindi.gizbot.com/

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यूएस: वैज्ञानिकों ने खोज निकाली लेजर किरणों से बारिश कराने की नई तकनीक

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यूएस: वैज्ञानिकों ने खोज निकाली लेजर किरणों से बारिश कराने की नई तकनीक

वाशिंगटन। शोधकर्ताओं ने एक ऐसी तकनीक विकसित की है, जिससे बारिश कराने के लिए बादलों में उच्च ऊर्जा वाली लेजर किरणें छोड़ी जा सकेंगी।
 
यूनिवर्सिटी ऑफ सेंट्रल फ्लोरिडा के कॉलेज ऑफ ऑप्टिक्स एंड फोटोनिक्स और यूनिवर्सिटी ऑफ एरिजोना के शोधकर्ताओं के मुताबिक बादलों में पानी की सघनता और बिजली चमकने की प्रक्रिया वायुमंडलीय विक्षोभ से चार्ज असंख्य कणों से जुड़ी हुई होती है। उपयुक्त लेजर किरणों की मदद से इन कणों को सक्रिय करके जब चाहें और जहां चाहें बारिश की जा सकती है। शोधकर्ताओं का दावा है कि फिलहाल इस तकनीक पर आगे काम करने की जरूरत है। 
 
वैज्ञानिकों के सामने थी बड़ी चुनौती 
 
अभी तक शोधकर्ता बादलों में बिजली पैदा करने में विफल रहे थे। शोधकर्ताओं के लिए यह बड़ी चुनौती थी कि लेजर किरणों को इस तरह बादलों पर छोड़ा जाए कि बिजली की चमक से बादलों में विस्फोट न हो पाए। यह शोध जर्नल 'नेचर फोटोनिक्स' में प्रकाशित हुआ है।
यूएस: वैज्ञानिकों ने खोज निकाली लेजर किरणों से बारिश कराने की नई तकनीक

इस तरह मिलेगी मदद 
 
सेंटर फॉर रिसर्च एंड एजुकेशन इन ऑप्टिकल एंड लेजर (सीआरईओएल) के स्नातक के छात्र मैथ्यू मिल्स ने कहा, 'लेजर काफी लंबी दूरी तय करती हैं। लेकिन यही किरणें जब ज्यादा तीव्र हो जाती हैं तो सामान्य से बिल्कुल अलग तरीके से काम करने लगती हैं। 
 
अत्यधिक गहन ये किरणें ढहने लगती हैं और यह सब इतनी तीव्र गति से होता है कि हवा में मौजूद ऑक्सीजन और नाइट्रोजन के इलेक्ट्रान प्लाज्मा बनाने लगते हैं।' ऐसी स्थिति में प्लाजमा वापस किरणें छोड़ने लगता है। इससे बहुत ही छोटी लेजर किरणें पैदा होती हैं। इन किरणों के फैलने और गिरने की प्रक्रिया से घर्षण पैदा होता है जो 'फिलामेंटेशन' कहलाता है। इससे ही बादलों में बिजली पैदा होती

यूएस: वैज्ञानिकों ने खोज निकाली लेजर किरणों से बारिश कराने की नई तकनीक

अब चांद की रोशनी से जगमग होंगी रातें 
 
अगर ऐसा हो जाए कि चांद की रोशनी से ही धरती पर रातें भी जगमग हो जाएं। इतनी रोशनी कि आपको सड़कों पर स्ट्रीट लाइट लगाने की जरूरत ही न पड़े। ऐसा हकीकत में होगा। स्वीडन की एक कॉस्मैटिक कंपनी फोरीयो के पास ऐसी योजना है जिससे रातें भी रोशन हो जाएंगी। कंपनी की योजना ऐसी है, जिससे चांद का सतह को रोशन किया जा सकता है ताकि पृथ्वी की रात को जगमग किया जा सके। 
 
इसका मकसद चांद पर पहले मौजूद संसाधनों का इस्तेमाल कर सतह को रोशन करना है। कंपनी ने कहा, 'रोशन रातों का मतलब बिजली का कम इस्तेमाल और कार्बन उत्सर्जन के इस्तेमाल से होने वाली ग्लोबल वार्मिंग को कम करना है।' 
 साभार : भास्करडाट कॉम 


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सोमवार, 21 अप्रैल 2014

बोल्ड एक्ट्रेस थीं ममता कुलकर्णी, फिर हुई गुमनाम... और बन गईं साध्वी

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B'Day: बोल्ड एक्ट्रेस थीं ममता, फिर हुई गुमनाम... और बन गईं साध्वी
ममता ने अपने करियर के दौरान ढेर सारी हिट फिल्में दीं। एक्टिंग के मामले में वो इंडस्ट्री की दूसरी एक्ट्रेस को बराबर से टक्कर देती थीं। उन्होंने इंडस्ट्री के सुपरस्टार सलमान खान, अक्षय कुमार, सैफ अली खान के साथ काम किया है
सितंबर 1993 में स्टारडस्ट मैगजीन में ममता कुलकर्णी की एक टॉपलेस फोटो छपी। इस फोटो ने बॉलीवुड में हलचल मचा दी। हालांकि, टॉपलेस फोटो की वजह से उनकी भारत में काफी आलोचना भी हुई। उनके ऊपर अश्लीलता फैलाने के आरोप में केस दर्ज हुआ। यह मामला कोर्ट तक पहुंच गया, लेकिन कुछ फाइन के साथ उन्हें आरोप से बरी कर दिया गया। उसी समय ममता एक बार फिर विवाद में आईं जब उन्होंने कोर्ट में पेशी के समय बुर्का पहन रखा था। 1997 में बिहार के विधायक आर के राणा (जो बाद में पशुपालन मंत्री बने और चारा घोटाला में फंसे) द्वारा आयोजित किए गए एक निजी कार्यक्रम में ममता ने परफॉर्म करने के लिए मोटी रकम ली थी। इस मामले ने भी काफी तूल पकड़ा था।

90 के दशक में ममता बॉलीवुड की सुपरहिट एक्ट्रेसेस में शुमार हो चुकी थीं। हालांकि, 2002 के बाद उन्होंने अपने फिल्मी करियर पर विराम लगा दिया और आध्यात्म से जुड़ाव कर लिया। उन्‍होंने आध्‍यात्‍म पर एक किताब 'ऑटोबायोग्राफी ऑफ एन योगिनी' भी लिखी। एक इंटरव्यू में जब उनसे फिल्म इंडस्ट्री छोड़ने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, "कुछ लोग दुनिया के काम करने पैदा होते है, जबकि कुछ ईश्‍वर के लिए। मैं भी ईश्‍वर के लिए पैदा हुई हूं।" उन्होंने फिल्म में वापस लौटने के जवाब में कहा, "क्‍या घी को फिर से दूध बनाना मुमकिन है? क्‍या ऋषि वाल्‍मीकि फिर से वाल्‍या बन सकते हैं? अब मेरे असली हीरो शाहरुख, सलमान और आमिर नहीं हैं, बल्कि परम पिता परामात्‍मा और सभी धर्मों  के भगवान हैं।"sabhar ; bhaskar.com

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