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मंगलवार, 25 मार्च 2014

स्टीफन हॉकिंग की ब्लैक होल थ्योरी पहेली को सुलझाने का दावा

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स्टीफन हॉकिंग की ब्लैक होल थ्योरी पहेली को सुलझाने का दावा

वाशिंगटन। मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि उन्होंने वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग की ब्लैक होल थ्योरी को सुलझा लिया है।  यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर क्रिस एडमी ने बताया कि 1975 में हॉकिंग ने अपने रिसर्च में बताया था कि ब्लैक होल्स के सभी होल ब्लैक नहीं हैं। वास्तव में यह बिना किसी चमक के रेडिएशन फैलाते हैं। इसे हॉकिंग रेडिएशन कहा जाता है। 
 
इस वास्तविक थ्योरी में हॉकिंग ने कहा था कि रेडिएशन धीरे-धीरे ब्लैक होल को खा जाते हैं या संभवत: लुप्त हो जाते हैं। यानी जो भी ब्लैक होल्स में जाता है वह खो जाता है। हालांकि इस थ्योरी में एक मूलभूत समस्या है, जो हॉकिंग की बातों से विरोधाभासों को जन्म देती है। 
 
प्रो. एडमी बताते हैं कि क्वांटम फिजिक्स की मानें तो जानकारी कभी गायब नहीं होती है। वह इसे समझाते हैं कि जानकारी के खो जाने का मतलब है कि ब्लैक होल के किसी भी कण को निगलने के बाद हमारा ब्रह्मांड हर समय अप्रत्याशित तरीके से बदलाव महसूस करेगा। यह बात समझ के परे है कि भौतिक का कोई भी नियम इसकी इजाजत नहीं देता। 
 
यदि ब्लैक होल अपने तीव्र गुरुत्वाकर्षण खिंचाव के कारण किसी भी जानकारी को सोख लेता है और सारी जानकारियां गायब हो जाती हैं तो यह क्वांटम फिजिक्स के नियम का पालन नहीं करता है। 
 
एडमी कहते हैं कि रेडिएशन से उत्सर्जित जानकारी हॉकिंग रेडिएशन के मुताबिक, ब्लैक होल को चमकीला बनाती है, जबकि ब्लैक होल उतना काला नहीं है। यानी निगलने वाली जानकारी के उत्सर्जन के कारण ब्लैक होल चमकता है।
 
प्रोफेसर के मुताबिक, उत्सर्जन एक भौतिक क्रिया है। इसके पीछे लेजर (लाइट एम्प्लीफिकेशन बाय स्टीमुलेटेड इमीशन ऑफ रेडिएशन) है। मुख्यत: यह एक कॉपी मशीन की तरह है। अगर आप मशीन में कुछ डालोगे तो आपको दो परिणाम मिलेंगे। यदि आप ब्लैक होल में जानकारी डालेंगे तो उसे निगलने से पहले ब्लैक होल इसकी एक अन्य कॉपी बाहर फेंक देता है। इस कॉपी मेकेनिज्म की खोज अल्बर्ट आईंस्टीन ने 1917 में की थी। 
 
1975 से ही ब्लैक होल के व्यवहार पर काफी बहस होती रही है। इस साल की शुरुआत में हॉकिंग ने ब्लॉग पोस्ट में लिखा था कि इवेंट होरिजन यानी ब्लैक होल में अदृश्य सीमाएं हैं। हालांकि इनका कोई अस्तित्व नहीं है। 
 
 
गौरतलब है कि हॉकिंग को ब्लैक होल्स का सबसे बड़ा विशेषज्ञ माना जाता है। बीते सालों में उन्होंने अपनी थ्योरी में कई बदलाव किए और इसकी कॉस्मिक पहेलियों को समझने का काम किया। एरिजोना स्टेट यूनिवर्सिटी के कॉस्मोलॉजिस्ट पॉल डेविस बताते हैं कि एडमी ने ब्लैक होल जानकारी के विरोधाभासों का सही हल ढूंढने की कोशिश की है। आश्चर्यजनक रूप से यह जानकारी कई सालों तक छिपी रही है। 
 
अपने जर्नल क्लासिकल एंड क्वांटम ग्रैविटी में प्रकाशित हुए इस नए रिसर्च मुस्कारते हुए एडमी कहते हैं कि स्टीफन हॉकिंग की शानदार थ्योरी मेरे विचारों के साथ अब पूरी हुई है। ब्लैक होल थ्योरी में होल की खामी पूरी हुई है और मैं अब रात को शांति से सो सकता हूं। sabhar :http://www.bhaskar.com/

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सोमवार, 24 मार्च 2014

मनुष्य की तरह सोचने वाली ड्राइवर विहीन कार शीघ्र

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लंदन। वैज्ञानिक अगली पीढ़ी की एक ऐसी नई कार तैयार कर रहे हैं जो बिना ड्राइवर के चलेगी और इसमें मनुष्य की तरह ही निर्णय लेने की क्षमता होगी।
ब्रिटेन में स्टर्लिग यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने पाया है कि मानव मस्तिष्क के एक हिस्से के जैसा कंप्यूटर प्रोग्राम रोबोटिक कार को नियंत्रित कर सकता है। यह लेन बदल सकता है, गति को नियंत्रित कर सकता है और ब्रेक लगा सकता है। मस्तिष्क का यह हिस्सा निर्णय लेने के लिए जिम्मेदार होता है। द संडे टाइम्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि शोधकर्ता यूनिवर्सिटी में एक अंतरराष्ट्रीय रोबोटिक्स सम्मेलन में इस प्रौद्योगिकी को प्रदर्शित करेंगे। यूनिवर्सिटी के कंप्यूटिंग साइंस एंड मैथेमेटिक्स डिवीजन के इरफु यांग ने बताया, 'हम सम्मेलन में अगली पीढ़ी की स्मार्ट कार के बारे में बताएंगे। यह कार मनुष्य द्वारा नियंत्रित किए बिना बहुत से काम कर सकेगी। अभी तक किसी ने इस तरह की स्वचालित ड्राइविंग क्षमता का प्रदर्शन नहीं किया है।' शोधकर्ताओं का कहना है कि अगली पीढ़ी के ड्राइवर विहीन कार रास्ते की पूर्व जानकारी के बिना ही सड़क को पार कर सकेंगे। sabhar :http://www.jagran.com/

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98 बच्चों के बाप को बीवी चाहिए

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एड हूबेन

एड हूबेन को यूरोप का सबसे सक्रिय 'स्पर्म डोनर' कहा जा सकता है. उन्होंने क़रीब 100 बच्चों के जन्म के लिए शुक्राणु दान किए हैं लेकिन हूबेन को आज भी अपने जीवनसाथी की तलाश है.
हूबेन ने स्पर्म डोनेशन की शुरुआत नीदरलैंड स्थित एक स्थानीय फ़र्टिलिटी क्लीनिक से की थी.

बीबीसी के आउटलुक कार्यक्रम के जॉन लॉरेंसन हूबेन के साथ उनके 98वें बच्चे को देखने के लिए उनके साथ गए.लेकिन अब वह संतान की चाह रखने वाली महिलाओं को मुफ़्त सेक्स की सेवाएं दे रहे हैं.
उत्तर-पश्चिम जर्मनी में पुराने फार्म हाउस में लकड़ी की सीढ़ियों पर चढ़ते हुए हूबेन बताते हैं कि वह अपने इस बच्चे को पहली बार देख रहे हैं. वह बताते हैं कि उनका यह बच्चा सात सप्ताह का है.

98वें बच्चे से मुलाकात

यह उनका 98वां बच्चा है. उनकी बच्ची की माँ की उम्र 28 साल है, जो अपने बच्चे की काफ़ी अच्छे ढंग से देखभाल कर रही हैं.

"मैं बच्ची के पिता को जानना चाहती थी. मेरे लिए यह जानना महत्वपूर्ण था कि वह कहाँ का रहने वाला है? ताकि जब मेरी बच्ची बड़ी होकर सवाल पूछने लायक हो तो मैं उसके पिता के बारे में उसे बता सकूं."
एक बच्ची की माँ के शब्द
वह बताती हैं, "मैं अकेली थी. मैं सालों से एक बच्चा चाहती थी. लेकिन मुझे कोई उपयुक्त व्यक्ति नहीं मिला. इसलिए छह साल बाद मैंने हूबेन से मिलना शुरू किया."
उनके लिए एक अज़नबी व्यक्ति के साथ शारीरिक सबंध बनाना और बच्चे पैदा करना कितना मुश्किल था.
इसके बारे में वह कहती हैं, "मेरे लिए किसी ऐसे व्यक्ति की तलाश ज़्यादा महत्वपूर्ण थी जिसके ऊपर मैं भरोसा कर सकूं. अजनबी होना उतनी बड़ी समस्या नहीं थी क्योंकि हम बच्चा पैदा करने से पहले एक-दूसरे से परिचित हो सकते थे."
वह कहती हैं, "मैं बच्ची के पिता को जानना चाहती थी. मेरे लिए यह जानना महत्वपूर्ण था कि वह कहाँ का रहने वाला है? ताकि जब मेरी बच्ची बड़ी होकर सवाल पूछने लायक हो तो मैं उसके पिता के बारे में उसे बता सकूं. इसलिए मुझे अनजान व्यक्ति से क्लिक करेंस्पर्म डोनेशन स्वीकार करने की बजाय हूबेन से मिलना बेहतर लगा."

पिता से मिल पाएगी बेटी

एड हूबेन
वह कहती हैं, "यह बेहद महत्वपूर्ण है कि मेरी बेटी का अपने पिता से मिलना संभव हो सकेगा. अगर साल में एक या दो बार भी मिलना हो पाएगा तो भी मुझे अच्छा लगेगा. यह दोनों पक्षों के लिए संभव है."
एड हूबेन कहते हैं, "इस तरह से समलैंगिक जोड़ों के लिए भी बच्चा पाना आसान हो सकेगा. फादर्स डे के दिन बच्चों का अपने पिता से मिलना संभव हो सकता है."
टूर गाइड के रूप में काम करने वाले हूबेन के कमरे में उनके बच्चों के बनाए चित्र लगे हैं. इसमें से एक में लिखा है "आई लव माई डैड."
एड हूबेन पारंपरिक तौर पर 'स्पर्म बैंक' में शुक्राणु दान करने के साथ-साथ निजी रूप से भी स्पर्म डोनेशन की मुफ़्त सेवा प्रदान करते हैं.
उनका मानना है, "स्पर्म डोनेशन की बजाय सीधे संपर्क से गर्भधारण की ज़्यादा संभावना होती हैं. इस कारण मैं अपने अधिकतर बच्चों को जानता हूँ. वे मुझसे मिल सकते हैं."

काम के पीछे की प्रेरणा

गर्भवती महिला
वह कहते हैं, "इससे लोगों को अजीब स्थितियों का सामना करने से निजात मिलेगी, जिसमें डीएनए टेस्ट के माध्यम से पिता का निर्धारण किया जाता है कि किसी लड़के या लड़की का पिता कौन है? हमने सबकुछ खुला रखा है ताकि किसी तरह की कोई उलझन वाली परिस्थिति से बचा जा सके."
अपने काम के पीछे की प्रेरणा के बारे में बताते हुए हूबन कहते हैं, "अधिकतर लोगों को लगता होगा कि मैं ऐसा बिना किसी ज़िम्मेदारी के सेक्स के लिए कर रहा हूँ, लेकिन मैं ही अकेला ऐसा इंसान हूँ जिससे आप इसके बारे में बात कर सकते हैं."
उन्होंने कहा, "जो बात मुझे सबसे ज़्यादा प्रेरित करती है वह है दुनिया में एक नई ज़िंदगी आने की उम्मीद, जिससे प्यार किया जाएगा और उसकी परवाह की जाएगी."
वह कहते हैं, "मैं अपनी भावनाओं को संतुलित रखने की कोशिश करता हूँ, यह बेहतर है. कई बार पिता बनने का अपना अनुभव है, लेकिन इसके लिए श्रेय लेने का कोई अर्थ नहीं है. क्योंकि आप बच्चों के माता-पिता से वादा करते हैं कि आप उनकी ज़िंदगी में दखल नहीं देंगे.

'कोई दबाव नहीं डालूंगा'

कृत्रिम गर्भधारण
उनके अनुसार, "अगर माता-पिता या बच्चे मुझसे संपर्क रखना चाहते हैं तो मुझे ख़ुशी होगी. लेकिन हाल-फिलहाल मुझे इसे रोकना होगा. यह काफ़ी मुश्किल है, लेकिन मुझे पता है कि मेरे बच्चे कहाँ हैं और वे ख़ुश है."
अपने बच्चों की माँओं की भावनाओं के बारे में हूबेन कहते हैं, "मैं महिलाओं को बताने की कोशिश करता हूँ कि मैं उनके साथ किसी रिश्ते में नहीं हूँ, वे अकेली हैं या किसी के साथ रिश्ते में हैं, मैं उनके ऊपर कोई दबाव नहीं डालूंगा."
हालांकि ऐसा कर पाना उनके लिए भी ख़ासा मुश्किल होता है. वह कहते हैं, "मैं अकेला हूँ और सबके लिए खुली सोच रखता हूँ. शुरुआती दौर में दो रिश्तों को लेकर मैं गंभीर था जो लंबे समय तक चले."
वह अपने बच्चों के बारे में जानकारी एकत्रित कर चुके हैं. उन्होंने बताया, "मैं अपने सभी बच्चों के नाम, जन्म की तिथि और जन्म स्थान की सूची अपने पास रखता हूँ, यह काफ़ी महत्वपूर्ण है."
उन्होंने अपने कंप्यूटर में इसका डेटा बेस बना रखा ताकि किसी विवाद वाली स्थिति में बच्चों के पिता का निर्धारण किया जा सके.

'15 साल बाद मिला बच्चा'

गर्भवती महिला
हूबेन कहते हैं कि एक महिला को 15 सालों के इंतज़ार के बाद बच्चा हुआ.
वह बताते हैं, "मेरे बच्चे फ़्रांस, ब्रिटेन, अमरीका में हैं. मेरे पास एक अमरीकी दंपति कई सालों तक ब्रिटेन और अमरीका के कई अस्पतालों का चक्कर काटने के बाद एक सप्ताह के लिए आए. उन्होंने मेरे बारे में पढ़ा और मुझसे संपर्क किया. वह आठ दिनों तक मेरे पास रहे. उनकी पत्नी ने मेरे साथ चार बार संबंध बनाए, इसके बाद वह गर्भवती हुईं. वह दूसरे बच्चे के लिए भी अपने पति के साथ मेरे पास आईं."
इस मुश्किल परिस्थिति के बारे में हूबेन कहते हैं, "पिछले साल बेलारूस से मेरे पास एक दंपति हज़ार मील का सफ़र तय करके हर महीने पहुंचते थे. बच्चे की उम्मीद में वे पिछले 15 सालों से कोशिश कर रहे थे. डॉक्टर उनको दिलासा देते रहे. उन्होंने अपनी सारी बचत ख़र्च कर दी लेकिन उनको कोई मदद नहीं मिली."
वह कहते हैं, "यहाँ तीन बार आने के बाद उनकी पत्नी गर्भवती हुईं, इससे आप पति के सामने पत्नी के किसी अज़नबी के साथ सोने वाली स्थिति की गंभीरता का अनुमान लगा सकते हैं."

'मेरा अपना परिवार होगा'

उन पर पारंपरिक परिवार की महत्ता कम करने, अकेली महिलाओं और समलैंगिक जोड़ों को बच्चे के लिए बढ़ावा देने वाले आरोप भी लगे.
इसके बारे में वह कहते हैं, "पारंपरिक परिवारों से मेरा कोई विरोध नहीं है. लेकिन भविष्य में यूरोप के लोगों को परिवार के बारे में नए सिरे से विचार करना होगा."
"पारंपरिक परिवारों से मेरा कोई विरोध नहीं है. लेकिन भविष्य में यूरोप के लोगों को परिवार के बारे में नए सिरे से विचार करना होगा."
एड हूबेन, शुक्राणु दान करने वाले व्यक्ति
अपने भविष्य की योजना के बारे में हूबेन कहते हैं, "मुझे अभी भी उम्मीद है कि मैं अपने लिए कोई क्लिक करेंरिश्ता खोज पाऊंगा और मेरा अपना परिवार होगा."
अपना परिवार बसाने के बाद वह अपनी सेवाएं जारी रखेंगे? इस सवाल पर वह कहते हैं, "यह काफ़ी हद तक मेरे साथी पर निर्भर करेगा. लेकिन साथी को भावनात्मक होने की बजाय यह देखना होगा कि मैं यह काम लोगों की मदद के लिए कर रहा हूँ."

हालांकि हूबेन शराब नहीं पीते हैं लेकिन संभव है कि अपवाद के तौर पर वह अपने सौंवे बच्चे के जन्म की ख़ुशियां मनाने के लिए ऐसा कर सकते हैं.


sabhar :http://www.bbc.co.uk/

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Hindi Film Gazab Nagaria

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Hindi Film Gazab Nagaria


आप कुछ अपने बारे में बताये। . 

मैंने श्री राम आर्ट सेण्टर  से एक साल कोर्स करके  नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा में प्रवेश लिया। . सच कहु तो एक्टिंग सही तालीम मैंने  एन एस डी  से ही ली।  आ जो कुछ भी हु वो उसके लिए मै सभी का तह दिल से सुक्रिया अदा करना चाहुगा।  पापा चाहते थे मै डॉक्टर बनू  मगर मेरी जिद और लगन ने मुझे एक्टर बना दिया।

अभी तक आपने कितने फिल्मे की है।  

अभी तक मैंने टोटल १५ फ़िल्म की है ये मेरी  जीवन की पूजी है।   मेरी  आने वाली फ़िल्म फेंटम , गजब नगरिया  है

आप टीवी क्यों नहीं करना चाहते। 

मुझे टीवी पर काफी रोल ऑफर होते रहते है  मुझे लगता है मै थिएटर और फिल्मो के लिए बना हु।  मै फिल्मे ही करना चाहुगा।  मुझे एक अच्छे रोल का इंतजार है जहा मै न्याय कर सकू।  अभी हाल मेरी फ़िल्म हाई वे आई है मुझे ख़ुशी है फ़िल्म काफी अच्छी चल रही है।  इसमे मेरा रोल अच्छा है। 

एक्टिंग के अलावा क्या करते है। 

मैंने कुछ दिन तक बालाजी टेलीफिल्म के एक्टिंग स्कूल में शिक्षा दी।  खाली टाइम मै उन लोगो को एक्टिंग सिखाता हु जो बॉलीवुड में अपनी एक जगह बनाना चाहते है। मुझे संगीत सुनना , लिखना और पढ़ना काफी अच्छी लगता है।

This Interview taken by Editor Sushil Gangwar






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मिडिया दलाल वेब के आडिटर सुशील गंगवार द्वारा टीवी तथा फिल्मी कलाकारो से बातचीत की

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मिडिया दलाल वेब के आडिटर सुशील गंगवार द्वारा टीवी तथा फिल्मी कलाकारो से बातचीत की 
जिसमे कुछ नयी आने वाली फिल्म गजब नागरिया है और आप के पापुलर धारावाहिक लापतागंज के कलाकार है 

Hindi Film Gazab Nagaria











आज जो कुछ भी हु वो अश्वनी धीर की वजह से हु। . रोहिताश गौड़



एन .एस .डी से निकलने के बाद कितना बॉलीवुड में कितना संघर्ष करना पड़ा।

जीवन ही संघर्ष है। हमें जीवन के लिए संघर्ष करते रहना चाहिए। मै अपने जीवन में सबसे जायदा अश्वनी धीर जी को थैंक्स कहना चाहुगा। आज जो कुछ भी मेरे पास है वो उनकी वजह से है।

लापतागंज काफी लोकप्रिय हो रहा है। .

जब मैंने लापतागंज में काम करना शुरू किया था लोग सोचते थे ये सीरियल केवल छे महीना ही चलेगा। आज ऊपर वाले की कृपा से चौथा साल चल रहा है। मेरी भूमिका मुकंदी लाल की है जो काफी लोकप्रिय हो रही है।


आपकी आने वाली फिल्मे और टीवी सीरियल कौन कौन सी है।

अभी मै राज कुमार हिरानी की फ़िल्म पी के कर रहा हु। जिसमे मैंने हरियाणी पुलिस वाले का रोल किया है जो छोटी छोटी रिश्वत लेता है। अभी तो सीरियल लापतागंज ही कर रहा हु। फिल्मो में अच्छे रोल मिल रहे है। अगर कोई अच्छा रोल आता है उसे करता रहूगा।

क्या आप अपने बच्चो को फिल्मो में लाना चाहेगे।

कभी नहीं। . अगर वो अपनी मर्जी से आ जाते है। . तो कोई बात नहीं।


नए लोगो के लिए क्या कहना चाहेगे जो फिल्मो और टीवी में आना चाहते है।

मै तो ये कह सकता हु। जो जिस लाइन के लिए बना है उसे वही काम करना चाहिए। अगर आप आना चाहते है तो बॉलीवुड में सबके लिए जगह है। मगर अपने टैलेंट को पहचान ले। खाली भटके नहीं।

This interview taken by Editor sushil Gangwar

मै छोटे रोल नहीं करना चाहता हु। --ओनकार दास -


आखिर क्या हुआ आप पीपली लाइव के बाद से एक गुम हो गए। . 

मैंने पीपली लाइव फ़िल्म की थी जिसे माद्यम से मेरी बॉलीवुड में एंट्री हुई। मै थैंक्स कहना चाहता हु आमिर खान जी को। मै तो थिएटर का कलाकार हु। भोपाल में थिएटर करता था। आज भी कर रहा हु। फिल्मो से गायब नहीं हुआ हु। मुझे उसके बाद अच्छे रोल नहीं मिल पाये। मुझे ऐसा लगता है जो फिल्मे बन रही। उसमे मेरे लायक रोल नहीं आ रहा है। 

क्या बॉलीवुड में गाड़फाथेर होना जरूरी है। 

हां मुझे ऐसा लगता है.. गाड़फाथेर होना जरूरी है। इससे बहुत मदद मिलती है। आपको पता रहता है क्या और कैसे करना है। फिल्मे मिलने में थोड़ी सी आसानी हो जाती है। वैसे तो तो अपना गाड़फाथेर आमिर खान को ही मानता हु। 

सुना है आप टीवी नहीं करना चाहते है। ऐसा क्यों ?
ऐसा कुछ नहीं है अगर कोई लीड रोल मिलेगा तो मै करना चाहुगा। मै छोटे रोल नहीं करना चाहता हु। अच्छे रोल का टीवी और फिल्मो का इंतजार है। जल्दी ही मेरी कुछ फ़िल्म आने वाली है जो पाइप लाइन में है। .


This interview taken by Editor Sushil Gangwar

एक्टिंग भगवान् का दिया हुआ गिफ्ट है। ---गीतांजलि मिश्रा






आप एक्टिंग के फील्ड में कैसे आयी। . 

मैं बी. ए करने के बाद मुम्बई में नौकरी कर रही थी। . एक मेरे एक दोस्त का फ़ोन आया। . तुम्हारे लिए लिए एक किरदार है तुम चाहो तो कर सकती हो। मैंने उस किरदार के लिए हामी भर दी। . उसके बाद में लगातार छोटे परदे पर आ रही हु। . वैसे तो वनारस कि रहने वाली हु मगर मेरी परवरिश मुम्बई में ही हुई है।

आपका रंग रसिया में रोल क्या है। 

मै इसमे मैथली का रोल कर रही हु। जो अपनी सास से डर कर रहती है। सास जो भी कहती है वह मै करती जाती हु। सच कहु तो एक दब्बू बहु का किरदार निभा रही हु।

आपके बारे में कहा जाता है आप फ़िल्म नहीं करती। इसका क्या कारण है। 

मै अपनी प्रतिभा को घर घर तक पहुचाना चाहती हु। टीवी एक सशक्त माद्यम है। आज कल तो बड़े स्टार भी टीवी ज्वाइन कर रहे है।

आपके आने वाले टीवी सीरियल कौन कौन से है।
मै सावधान इंडिया , क्राइम पेट्रोल , रंग रसिया कर रही हु और आने वाले सीरियल में इक लक्छ आ रहा है।

जो लोग फिल्मो में आना चाहते है उनके लिए क्या सन्देश है। 

एक्टिंग भगवान् का दिया हुआ गिफ्ट है। अगर आपके अंदर प्रतिभा है तो आप बॉलीवुड में आ सकते है। अगर आये तो पूरी तैयारी से आये। हो सके तो कोई एक्टिंग स्कूल या थिएटर कर सकते है। इससे काफी लाभ होगा।

क्या टीवी और फिल्मो में कोम्प्रोमाईज़ चलता है। .

जहा आग होती है वही धुँआ होता है। . मै खुद नहीं जानती आखिर मुझे सिनेमा से क्यों घुटन होती है मगर होती है। हम लोग गिफ्ट का रैपर बनकर रह गए है। मगर रैपर नहीं बनना चाहती हु। इसलिए टीवी की दुनिया में ही खुश हु।

This interview taken by Editor Sushil Gangwar ..

रंग रसिया में मेरा रोल काफी अच्छा है - खुशबु ठक्कर



आपका बॉलीवुड में आना कैसे हुआ। .

ग्रेजुएट करने बाद मुझे टेली चक्कर में मुझे काम मिल गया। . करीव आठ महीना मैंने टेली चक्कर में काम किया। टेली चक्कर के दौरान ही मुझे टीवी सीरियल का ऑफर मिला। जिसे मैंने स्वीकार कर लिया।

आपकी रंग रसिया में क्या भूमिका है।

इसमे मै मैथली की ननद की भूमिका में हु जो थोड़ी चुलबुली है।

आपको रंग रसिया कैसे मिला।

जब मै वीरा कर रही थी उसी टाइम मुझे काम करने का ऑफर मिला था।

आपकी आने वाले टीवी सीरियल कौन कौन से है

अभी तो रंग रसिया और वीरा कर रही हु।

क्या फिल्मे करना चाहेगी। ।

अगर हां रोल सही मिला तो करना पसंद करुँगी। .वर्ना टीवी शो करती रहूगी।


यह इंटरव्यू एडिटर सुशिल गंगवार ने लिया है। .उनसे संपर्क ९१६७६१८८६६ पर कर सकते है।

मुझे एक अच्छे रोल का इंतजार है जहा मै न्याय कर सकू। --- हेमंत माहौर






आप कुछ अपने बारे में बताये। . 

मैंने श्री राम आर्ट सेण्टर से एक साल कोर्स करके नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा में प्रवेश लिया। . सच कहु तो एक्टिंग सही तालीम मैंने एन एस डी से ही ली। आ जो कुछ भी हु वो उसके लिए मै सभी का तह दिल से सुक्रिया अदा करना चाहुगा। पापा चाहते थे मै डॉक्टर बनू मगर मेरी जिद और लगन ने मुझे एक्टर बना दिया।

अभी तक आपने कितने फिल्मे की है। 

अभी तक मैंने टोटल १५ फ़िल्म की है ये मेरी जीवन की पूजी है। मेरी आने वाली फ़िल्म फेंटम , गजब नगरिया है

आप टीवी क्यों नहीं करना चाहते। 

मुझे टीवी पर काफी रोल ऑफर होते रहते है मुझे लगता है मै थिएटर और फिल्मो के लिए बना हु। मै फिल्मे ही करना चाहुगा। मुझे एक अच्छे रोल का इंतजार है जहा मै न्याय कर सकू। अभी हाल मेरी फ़िल्म हाई वे आई है मुझे ख़ुशी है फ़िल्म काफी अच्छी चल रही है। इसमे मेरा रोल अच्छा है।

एक्टिंग के अलावा क्या करते है। 

मैंने कुछ दिन तक बालाजी टेलीफिल्म के एक्टिंग स्कूल में शिक्षा दी। खाली टाइम मै उन लोगो को एक्टिंग सिखाता हु जो बॉलीवुड में अपनी एक जगह बनाना चाहते है। मुझे संगीत सुनना , लिखना और पढ़ना काफी अच्छी लगता है।

This Interview taken by Editor Sushil Gangwar




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रविवार, 23 मार्च 2014

वर्जिनिटी नीलाम कर ढाई करोड़ कमाएगी ये मेडिकल स्टूडेंट!

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वॉशिंगटन. अमेरिका की एक मेडिकल स्‍टूडेंट एलिजाबेथ रेने ने अपनी वर्जिनिटी नीलाम करने का फैसला किया है. 27 साल की एलिजाबेथ इंटरनेट के जरिए अपनी वर्जिनिटी बेचेंगी और उन्‍हें उम्‍मीद है कि वे इससे कम से कम 2 करोड़ 43 लाख 84 हजार रुपये कमाएंगी. यह नीलामी रेने की वेबसाइट www.elizabeth-raine.com पर 1 अप्रैल से शुरू होगी.
रेने के मुताबिक, वर्जिनिटी की नीलामी का प्रमुख मकसद पैसे कमाना है. मुझे अपनी वर्जिनिटी से कोई भावनात्‍मक लगाव न तो था और न है. इसलिए मेरे लिए ऐसा करना बड़ा आसान है. और मैं क्‍यों ऐसा न करूं? यह पैसे कमाने का दमदार और आसान तरीका है.
आलीशान होटल में बिताएंगी 12 घंटे
रेने अमेरिका में मेडिकल स्‍टूडेंट हैं, लेकिन उन्‍होंने यह नहीं बताया है कि वे किस कॉलेज में पढ़ाई कर रही हैं. उनके ब्‍लॉग में उन्‍होंने अपनी जो तस्‍वीरें अपलोड की हैं उसमें उनका चेहरा छिपा हुआ है. रेने कहती हैं कि नीलामी में जो जीतेगा उसे उनके साथ एक आलीशान होटल में 12 घंटे बिताने के लिए मिलेंगे. इस दौरान उनके घरवालों को पता होगा कि वो कहां हैं. उनका कहना है कि अगर किसी को लगता है कि सेक्‍स के लिए पैसे चुकाने के बाद मुझे उससे प्‍यार हो जाएगा तो उसे बेहद निराशा होगी.
पहले कभी नहीं किया सेक्स
रेने ने कभी भी सेक्‍स नहीं किया है. उन्‍हें कभी किसी ने न्‍यूड अवस्‍था में भी नहीं देखा और न ही उन्‍होंने किसी न्‍यूड पुरुष को देखा है. उनके मुताबिक, मैंने लड़कों से डेट की है, लेकिन दो या तीन महीनों से ज्‍यादा नहीं. मेरा कभी कोई ब्‍वॉयफ्रेंड नहीं रहा क्‍योंकि मुझे ऐसा कोई नहीं मिला जिसने मुझे इस बात का यकीन दिलाया हो कि सेक्‍स शरीरिक कसरत से ज्‍यादा है. मुझे लड़के पसंद हैं, लेकिन किसी के साथ भी मेरा इमोशनल कनेक्‍शन नहीं रहा. मैं पढ़ाई और प्रोजेक्‍ट्स पर काम करती हूं. मुझे दोस्‍तों के साथ घूमना-फिरना पसंद है और यही मेरे लिए काफी है.
भाई को ऐतराज
रेने के दोस्‍त तो इस फैसले का समर्थन करते हैं, लेकिन उनके भाई को यह पसंद नहीं. रेने के मुताबिक, मेरे दोस्‍त मेरे फैसले का सम्‍मान करते हैं. उन्‍हें मुझ पर भरोसा है, लेकिन मेरे भाई को इस पर आपत्ति है. हालांकि इससे हमारे रिश्‍ते पर कोई फर्क नहीं पड़ा. उसे पता है कि मैं स्‍मार्ट हूं और उसे भरोसा है कि मैं यह सब ठीक से कर पाऊंगी. यही नहीं रेने के माता-पिता भी उनके साथ हैं.
रेने का कहना है कि नीलामी पूरी तरह से कानून के हिसाब से होगी. वे नीलामी से मिले पैसों पर टैक्‍स भी अदा करेंगी और कमाई का 35 फीसदी हिस्‍सा चैरिटी को दान में दे देंगी.
आपको बता दें कि इससे पहले ब्राजील की एक 21 वर्षीय स्‍टूडेंट कटरीना मिगलियोरिनी ने भी अपनी वर्जिनिटी की नीलामी का ऐलान किया था. \sabhar :http://www.palpalindia.com/

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शनिवार, 8 मार्च 2014

आखिर उस पुरुष के प्यार में क्यों पागल है नागिन

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mystery love nagin mathura

यह घटना किसी बॉलीवुड फिल्म की तरह है जिसे पढ़कर आप सोचने पर मजबूर हो सकते हैं कि, क्या कोई किसी से इतना प्यार कर सकता है। प्यार भी कैसा तो एक नागिन का इंसान से, जो आमतौर पर एक दूसरे के जानी दुश्मन माने जाते हैं।

यह प्रेम कहानी मथुरा जिले के अगरयाला गांव की है। यह हर साल नागपंचमी के दिन एक नागिन लक्ष्मण नाम के व्यक्ति से आकर लिपट जाती है। लगभग तीन दिनों तक लक्ष्मण के साथ रहने के बाद यह नागिन कहीं चली जाती है।

नागिन कहां से आती है, कहां चली जाती है और लक्ष्मण नाम के व्यक्ति से क्यों लिपट जाती है यह रहस्य बना हुआ है। लोग इसे पूर्वजन्म की प्रेम कहानी मानते हैं। यह प्रेम कहानी लगभग ग्यारह साल पहले नागपंचमी के दिन लोगों की नजरों में आयी।

लक्ष्मण के परिवार वालों का कहना है कि जब यह सात महीने का था तब नागिन आकर लक्ष्मण के सीने पर बैठ गयी लेकिन काटी नहीं। उस समय तक किसी को नागिन के प्रेम का अंदाजा नहीं था।

जब लक्ष्मण की शादी गंगा नाम की लड़की से हो गयी तब से नागिन ने लक्ष्मण को काटना शुरु कर दिया। लेकिन हर बार लक्ष्मण को बचा लिया जाता। परिवार वालों ने जब इस घटना को जानने के लिए ढाक बजवाया तो पता चला कि नागिन लक्ष्मण की पूर्वजन्म की पत्नी है, यह हमेशा लक्ष्मण के पास रहना चाहती है। sabhar :http://www.amarujala.com/

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मोबाइल से शरीर में पहुंचा 11000 वोल्ट का करंट

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मोबाइल ब्लास्ट से चेहरा और शरीर जला


मोबाइल ब्लास्ट से चेहरा और शरीर जला


आपको यह जानकर आश्चर्य जरूर होगा कि बिजली के तार के नजदीक मोबाइल फोन से बात करने पर एक युवक के शरीर में 11 हजार वोल्ट का करंट पहुंच गया। इससे उसके शरीर के अंदर इतना बड़ा ब्लास्ट होगा।

ब्लास्ट की वजह से मरीज का चेहरा, आंख और शरीर के कई महत्वपूर्ण अंग बुरी तरीके से जल गए। मरीज का इलाज करने वाले डॉक्टर भी इस घटना से आश्चर्य में हैं।

मरीज की अभी तक 11 सर्जरी की जा चुकी है और करीब आधा दर्जन सर्जरी और होनी है। मरीज को मध्य प्रदेश के ग्वालियर से दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

करंट कान से होते हुए शरीर में पहुंचा

करंट कान से होते हुए शरीर में पहुंचा

एक अगस्त-2013 को 23 वर्षीय एमबीए ग्रैजुएट युवक छत पर मोबाइल फोन से बात करने गया, छत के पास से 11 हजार वोल्ट बिजली का तार गुजर रहा था। तार में करंट था।

डॉक्टरों का कहना है कि मोबाइल से मैगनेटिक फिल्ड और बिजली की तार से इलेक्ट्रिक फिल्ड निकला। इसकी वजह से करंट युवक के कान से होते हुए शरीर में प्रवेश किया और ब्लास्ट हुआ।

ब्लास्ट के बाद युवक अचेत होकर 45 मिनट तक पड़ा रहा। इसके बाद उसे होश आया। उस दिन उसे ग्वालियर के ही एक अस्पताल में भर्ती कराया गया। दो दिन बाद तीन अगस्त-2013 को मरीज को सर गंगा राम अस्पताल में भर्ती कराया गया। 

ग्वालियर का रहने वाला, दिल्ली में हो रहा है ईलाज

ब्लास्ट के बाद गंभीर अवस्था में 23 वर्षीय युवक रवि (परिवर्तित नाम) को तीन अगस्त-2013 को ग्वालियर से सर गंगा राम अस्पताल लाया गया।

डॉक्टरों की टीम ने मरीज को देखा इसके बाद उसे प्लास्टिक और रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी विभाग रेफर कर दिया गया। मरीज की दाहिनी आंख पूरी तरह से खराब हो चुकी थी। कॉर्निया तक जल चुका था। चेहरा बुरी तरह से जल चुका था।

कान, जांघ और निजी अंगों के अलावा कई अन्य प्रभावित थे। चेहरे की हड्डी तक जल चुकी थी। ऐसे में चिकित्सकों के लिए सबसे बड़ी चुनौती मरीज के घाव में फैल रहे संक्रमण को रोकना था।

10 सर्जरी के बाद हो रहा है सुधार

प्लास्टिक और रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी विभाग के एसोसिएट कंसलटेंट डॉ. स्वरूप सिंह गंभीर ने बताया कि अभी तक मरीज की 10 सर्जरी की जा चुकी है और 11वीं सर्जरी की तैयारी की जा रही है।

मरीज की कई दिक्कतों को दूर कर दिया गया है। वह अब सुन सकता है और चेहरे की भी रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी की जा चुकी है। भौं (आई ब्रो) सहित कुछ अन्य रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी भी की जानी है। डॉ. स्वरूप का कहना था कि ऐसा केस उन्होंने अपने चिकित्सीय जीवन में नहीं देखा, लेकिन मरीज में हो रहे सुधार से वे काफी खुश हैं।

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उफ! क्या थीं ये फिल्में जो दुनिया भर में तहलका मचा बैन हो गईं

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आखिर क्यों बैन हुई ये फिल्में

आखिर क्यों बैन हुई ये फिल्में


दुनिया भर में कई ऐसी फिल्में बनी जो अपनी विषय वस्तु और कथानक को लेकर आलोचनाओं में रहीं। इन्होंने दुनिया भर में विवाद पैदा कर दिया।

इनमें से कईयों को बैन कर दिया गया तो कुछ एक के निर्माता को अपनी जान तक से हाथ धोना पड़ा। ऐसी ही फिल्मों और इनसे जुड़ी पूरी जानकारियां हम आपको दे रहे हैं। 

 निर्माता की ही जान ले गई  'सालो/द 120 डेज ऑफ सोडम'

निर्माता की ही जान ले गई 'सालो/द 120 डेज ऑफ सोडम'

इटली की ये फिल्म 1975 में आई और मोस्ट कंट्रोवर्सल फिल्मों की सरताज बन गई। फिल्म में बच्चों के एक ग्रुप का अपहरण कर लिया जाता है जो नाजी के हाथों की कठपुतलियां बन जाते हैं।

बच्चों के साथ रेप, मर्डर के अलावा कई वीभत्स टार्चर दिखाए गए। जिसमें ऐनल रेप जैसी कई गंदी हरकतें भी शामिल थीं। फिल्म आस्ट्रेलिया में 1993 तक बेन रही इसके बाद 1998 में इसको फिर से बेन कर दिया गया।

यही नहीं फिल्म बनाने वाले पॉयर पाओलो पासोलोनी के पास तो अपनी फिल्म की सफाई देने का भी वक्त नहीं बचा क्योंकि फिल्म रिलीज के बाद ही उनकी बेहद निर्ममतापूर्ण हत्या भी कर दी गई।

'लॉस्ट हाउस ऑन द लेफ्ट: शूटिंग में घबरा गई हीरोइन ही

लॉस्ट हाउस ऑन द लेफ्ट: शूटिंग में घबरा गई हीरोइन ही

1972 में आई ये फिल्म सेक्सअुल टार्चर पर आधारित थी। जिसमें दो टीनेज फ्रेंड्स का किडनेप कर लिया जाता है। इसके बाद इन दोनों को एक दूसरे के साथ सेक्स के लिए बाध्य किया जाता है। फिल्म में सेक्स हिंसा के कई सीन थे।

बताया जाता है कि फिल्म की हीरोइन सांड्रा पीबॉडी खुद शूटिंग के दौरान इतना विचलित हो गई थीं कि वह सैट ही छोड़ कर चली गईं। 

डायरेक्टर को ही जेल में ले गई 'लॉस्ट टेंगो इन पेरिस'

1972 में बनी ये फिल्म अपने कथानक और विषयवस्तु के कारण विवादों में आ गई। फिल्म के डॉयरेक्टर बर्नाडो को तो ‌चार महीने जेल की हवा भी खानी पड़ी।

फिल्म में सेक्स की खुशी पाने के लिए की गई हरकतें लोगों को जरा भी रास नहीं आईं। कई देशों में फिल्म को पूरी तरह से बेन कर दिया गया। इटली, पुर्तगाल और चिली में फिल्म पर 30 साल तक रोक लग गई।
वहशियाना हरकतों से भी आगे निकल गए ये 'किड्स'

वहशियाना हरकतों से भी आगे निकल गए ये 'किड्स'

अमेरिका में 1995 में आई फिल्म किड्स अपने नाम के एकदम विपरीत निकली। फिल्म में सेक्स एडिक्ट टीनेजर्स को दिखाया गया था। एचआईवी पीड़ित लड़के के ग्रुप द्वारा लड़की के साथ रेप जैसे तमाम विवादास्पद सीन थे।

सेक्स, नशा और वहशियाना हरकतों से भरपूर थी ये फिल्म। जिसने दर्शकों और क्रिटिक्स को चौंका कर रख दिया। फिल्म की खूब आलोचना हुई।

'एंटीक्रिस्ट' देख बेहोश हो गए थे चार लोग

डेनमार्क में बनी ये फिल्म इतनी वीभत्स और अजीब थी जिसे देख कान फिल्म फेस्टिवल में हुई स्क्रीनिंग के दौरान चार लोग बेहोश हो गए थे। टेलीग्रॉफ फिल्म क्रिटिक्स ने इस फिल्म को टार्चर पोर्न को लेबल दिया था।

फिल्म में एक कपल्स के सेक्स मूमेंट के दौरान उनके बेटे की खिड़की से गिरकर मौत हो जाती है। निराशा में ये पति-पत्नी एक दूसरे को ही टार्चर करने लगते हैं। फिल्म में पत्नी द्वारा पति के पैर में ड्रिल मशीन से छेद कर लकड़ी डालने जैसे भयंकर दृश्य थे।

बेसी-मोईः सताई महिलाओं ने जब लोगों को सताया

बेसी-मोईः सताई महिलाओं ने जब लोगों को सताया

बेसी-मोई दो ऐसी महिलाओं की कहानी थी जो काफी वॉयलेंस झेल चुकी थीं। ये दोनों मिलती हैं और कुछ नया एक्साइटिंग करने की चाह में एक रोड ट्रिप पर निकल जाती हैं। इसी ट्रिप के बाद शुरु होती है सेक्स और हत्याओं की सिलसिलेवार कहानी।

जिसकी जिम्मेदार ये दोनों महिलाएं होती है। दोनों को देश की मोस्ट वांटेड नॉटीरिअस घोषित कर दिया जाता है। फिल्म की दोनों हीरोइनें पूर्व पोर्न स्टार थीं। फिल्म इतनी वॉयलेंटेड थी कि फ्रांस में इसकी जमकर आलोचना हुई।

ब्रिटेन में फिल्म में 10 सेकेंड के कट के बाद 18 सार्टिफिकेट के साथ रिलीज की इजाजत मिली। फिल्म का पोस्टर लंडन में पूरी तरह बेन कर दिया गया। फ्रांस की ये फिल्म 2000 में आई थी।

रिलीज न हो सकी'द एक्सोरिस्ट'

अमेरिका की ये फिल्म 1973 में बनाई गई थी। जिसे आलोचकों ने रिलीजियस पोर्न बताते हुए बेहद विवादास्पद करार दिया।1984 वीडियो रिकार्डिंग एक्ट के तहत फिल्म को रिलीज करने से साफ मना कर दिया गया साथ ही इस फिल्म की कोई भी वीडियो कॉपी यूके में बिक्री के लिए प्रतिबंधित कर दी गई।

बैन ही रही 'ए क्लोकवाइज ऑरेंज'

यूके की ये फिल्म बनी तो 1971 में थी लेकिन बाद में ये पर्दे पर नहीं दिख सकी। फिल्म में डर्टी रेप सीन्स और वीभत्स हिंसा के कई दृश्य थे। मीडिया ने फिल्म की खूब आलोचना की।
यही नहीं डायरेक्टर और उसके परिवार को जान से मारने की धम‌कियां भी मिलती रहीं। आखिरकार ये फिल्म बैन कर दी गई।

धार्मिक भावनाओं को हिला गई'लाइफ ऑफ ब्रॉयन'

1979 में आई ब्रिटेन की ये फिल्म आते ही विवादों में छा गई। फिल्म को धार्मिक आस्‍थाओं पर प्रहार करने वाली माना गया। चर्च और धार्मिक संगठनों ने इस फिल्म को पूरी तरह से बेन करने की मांग कर दी। 
स्पिट ऑन योर ग्रेव

स्पिट ऑन योर ग्रेव

1978 में आई अमेरिका‌ निर्मित ये फिल्म बदले और बलात्कार पर आधारित थी। फिल्म में रेप सीन के अलावा भयंकर वीभत्स दृश्य भी थे। जिसमें रेप और टार्चर को बहुत ही गंदे ढंग से दिखाया गया।

फिल्म को रिलीज से पहले ही अमेरिका में सेंसर्ड कर दिया गया। बाद में युरोप के कई देशा में फिल्म पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया। क्रिटिक्स का मानना था कि ये फिल्म क्रिमिलन दिमाग वाले लोगों को और अधिक क्राइम करने के लिए प्रेरित करेगी। sabhar :http://www.amarujala.com/

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एक अकेली औरत

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सुरुचि शर्मा

सुरुचि शर्मा की उम्र 28 साल है, वह मुंबई में एक अच्छे पद पर कार्यरत हैं और उनकी अभी तक शादी नहीं हुई है. वह कहती हैं कि पुरुष हो या महिला, अगर आपको अच्छी शिक्षा मिली हो और थोड़ी चतुराई का इस्तेमाल करें तो भारत में मौकों की कमी नहीं है और आपको एक बढ़िया वेतन वाली नौकरी मिलने की संभावना रहती है.
लेकिन अगर आप महिला हैं तो इन हालात में भी ये ज़रूरी है कि 20 की उम्र पार करने के कुछ साल के अंदर आपकी शादी हो जानी चाहिए.

भारत में इस आयु वर्ग की हर अविवाहित महिला को इस तरह के सवालों और बातचीत का सामना लगभग हर वक़्त करना पड़ता है.अगर 30 साल के क़रीब पहुंचते-पहुंचते भी आपकी शादी नहीं हुई है, तो लोग आपसे सहानुभूति जताते हैं, सवाल करते हैं, आपसे पूछा जाता है कि क्या आपको कोई मिला नहीं और आपको एक नाक़ामयाब इंसान समझा जाता है.
मैं एक शहरी मध्यम वर्ग परिवार से हूं. मेरा बचपन वडोदरा में बीता, कॉलेज की पढ़ाई वडोदरा और दिल्ली में हुई और अब मुंबई में एक बड़ी कंपनी में डिजीटल कम्युनिकेशन विभाग की प्रमुख हूं.
मेरी ज़िंदगी उन बहुत सी युवतियों की तरह है जो काम के लिए घर से दूर रहती हैं. अकेले रहना एक ग़ज़ब का अनुभव है.

शादी का दबाव

मैं आत्मनिर्भर हूं और मेरी जीवनशैली ऐसी है जिसका मैं हमेशा सपना देखती थी. भारतीय महिलाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने और आगे बढ़ने के मौका मिल रहा है. हमें हर क़दम पर लैंगिक भेदभाव का सामना करना पड़ता है लेकिन हम फिर भी रास्ता ढूंढ लेती हैं और आगे बढ़ जाती हैं.
"अगर 30 साल के करीब पहुंचते-पहुंचते भी आपकी शादी नहीं हुई है, तो लोग आपसे सहानुभूति जताते हैं, सवाल करते हैं, आपसे पूछा जाता है कि क्या आपको कोई मिला नहीं और आपको एक नाक़ामयाब इंसान समझा जाता है."
सुरुचि शर्मा
लेकिन फिर भी भारत में लड़कियों पर शादी दबाव हमेशा रहता है. हमसे हमेशा पूछा जाता कि हम कब शादी करेंगे. भारत में एक लड़की की पहचान और व्यक्तित्व शादी के इर्द-गिर्द घूमता है और बचपन से ही हमें समझाया जाता है कि बड़े होकर हमें शादी करनी होगी और दूसरे परिवार में बहू बन कर जाना होगा.
हम जो भी सीखते हैं, वो भविष्य में एक पत्नी और बहू की भूमिका को ध्यान में रखकर सिखाया जाता है. हमें खाना बनाना, घर के काम करना, अच्छा बर्ताव करना और सही छवि बनाना सिखाया जाता है.
अगर आप शादी की किसी वेबसाइट पर नज़र डालें तो उपयुक्त वधू के लिए 'फैमिली-ओरिएंटेड', 'घरेलू' और 'बहुत ज़्यादा नौकरी या करियर में दिलचस्पी नहीं लेने वाली' जैसे गुण पाएंगे. हर कोई ऐसी पत्नी चाहता है जिसकी करियर से पहले गृहस्थी में दिलचस्पी हो.
किसी भी पुरुष की ज़िंदगी में आदर्श महिला बनने के लिए ज़रूरी है कि उसे अच्छी शिक्षा मिली हो, वह देखने में आकर्षक हो, उसका एक बढ़िया करियर हो और इसके बावजूद वह इस सबको ठंडे बस्ते में डालने के लिए भी तैयार हो.
हिंदू विवाह
भारत में लड़कियों पर शादी दबाव हमेशा रहता है. एक लड़की की पहचान और व्यक्तित्व शादी के इर्द-गिर्द घूमता है.

सही साथी का इंतज़ार

मैंने शादी इसलिए नहीं की क्योंकि मुझे अब तक उन्हें अपने लिए सही साथी नहीं मिला है. सुनने में शायद ऐसा लगे कि मैं शादी के ख़िलाफ़ हूं लेकिन ऐसा नहीं है.
भारतीय मान्यताओं के मुताबिक तो अब तक मेरी शादी हो जानी चाहिए थी और इस मामले में अब देर हो गई है. शादी के लिए योग्य महिलाओं की सूची में मैं शायद काफ़ी नीचे हूं. लेकिन मैं फिर भी 'सिर्फ़ घर बसाने' के लिए कोई समझौता नहीं करना चाहतीं और किसी से भी शादी नहीं करना चाहती.
"मैंने शादी इसलिए नहीं की क्योंकि मुझे अब तक उन्हें अपने लिए सही साथी नहीं मिला है. लेकिन मैं फिर भी ''सिर्फ़ घर बसाने'' के लिए किसी से भी शादी नहीं करना चाहती."
सुरुचि शर्मा
मेरे लिए कौन सा व्यक्ति सही या उपयुक्त है, इसका फ़ैसला दूसरों को नहीं बल्कि मुझे करना है.
भारत में आज भी एक महिला के लिए अविवाहित होना एक धब्बा है. अगर कोई महिला अपनी मर्ज़ी से शादी नहीं करती, तो ये मान लिया जाता है कि वह इज़्ज़तदार नहीं है.

मुश्किलें

सुरुचि बताती हैं कि कई बार उन्होंने किसी बढ़िया इलाक़े में किराए पर मकान लेने की कोशिश की लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली.
अकेली, कामकाजी महिला को लोग मकान किराए पर नहीं देना चाहते. उन्हें डर होता है कि मुझ जैसी महिला का बर्ताव अनैतिक होगा, मेरे घर में पार्टियां होंगी, रात भर पुरुष रहेंगे और मैं आस-पास के परिवारों पर बुरा असर डालूंगी. कोई ये सोच भी नहीं सकता कि मैं एक सामान्य इंसान हो सकती हूं जो एक सामान्य जीवन बिता रही है.
मकान मालिक अकेली महिला किराएदारों को निकालने का मौका हमेशा तलाशते रहते हैं. थोड़ी सी भी कमी या भूल होने पर उन्हें मकान खाली करने के लिए कहा जाता है. अकेली महिला के लिए हर जगह क़ायदे-क़ानून हैं और हम सामान्य जीवन नहीं बिता सकतीं.
दूसरे शब्दों में, ये मान लिया जाता है कि अपने परिवार से दूर, एक स्वतंत्र जीवन बिता रहीं अकेली महिला चरित्रहीन होगी.
जितना ज़्यादा समय मैं इस तरह की ज़िंदगी बिताउंगी, उतना ही एक प्रतिष्ठित परिवार में मेरी शादी होनी की संभावना कम होगी. कई बार मैं सोचती हूं कि अपने माता-पिता को लोगों की बातें सुनने से बचाने के लिए क्या मैं समझौता कर लूं और किसी ठीक-ठाक इंसान से शादी कर लूं.
मैं ख़ुशकिस्मत हूं क्योंकि मेरे माता-पिता मेरा पूरा साथ देते हैं.
सुरुचि शर्मा का परिवार
सुरुचि शर्मा ख़ुद को ख़ुशकिस्मत मानती हैं कि उनका परिवार उनका पूरा साथ दे रहा है.

परिवार का सहयोग

जब मैं सही इंसान के लिए इंतज़ार करने की बात करती हूं तो मेरे माता-पिता मेरा साथ देते हैं. लेकिन उन पर भी रिश्तेदारों और जान-पहचान के लोगों का बहुत ज़्यादा दबाव है. उनसे हर रोज़ पूछा जाता है, 'सुरुचि कब शादी कर रही है?' और इस तरह के सवालों से वे परेशान हो जाते हैं.
"जब तक मैं इस समाज का हिस्सा हूं, तब तक मुझ पर शादी करने का दबाव बढ़ता रहेगा. सच कहूं तो अगर मैं अगले एक-दो साल में शादी नहीं करती, तो मैंने विदेश जाने के बारे में भी सोचा है."
सुरुचि शर्मा
वे सोचने लगते हैं कि अपनी बेटी को ख़ुद फ़ैसले करने की छूट देकर वे कहीं कुछ ग़लत तो नहीं कर रहे. उन्हें नहीं लगता कि अगर मैंने शादी नहीं की तो भारतीय समाज मुझे ख़ुशहाल ज़िंदगी बिताने देगा.
इन दबावों से जूझने के लिए मैं अपनी मां-बाप की शुक्रगुज़ार हूं. मुझे अपने बारे में इतनी चिंता नहीं है लेकिन मैं हमेशा सोचती हूं कि अपने मां-बाप के लिए कैसे हालात कैसे आसान बना सकती हूं.
जब तक मैं इस समाज का हिस्सा हूं, तब तक मुझ पर शादी करने का दबाव बढ़ता रहेगा. सच कहूं तो अगर मैं अगले एक-दो साल में शादी नहीं करती, तो मैंने विदेश जाने के बारे में भी सोचा है.
समाज की ताक-झांक और दखलअंदाज़ी से बचने और एक शांत ज़़िंदगी बिताने का एकमात्र तरीक़ा भारत से चले जाना ही है. अगर मैं किसी दूसरे देश में रहूंगी तो लोग मुझसे मेरी शादी की योजना के बारे में नहीं पूछेंगे. मुझे लगता है कि विदेश में शादी करने का दबाव इतना नहीं होता.

28 साल की उम्र में अविवाहित होना आसान नहीं है. मैं इस दबाव को 24 घंटे सहती हूं. मैंने इसके साथ रहने का फ़ैसला किया है. sabhar :http://www.bbc.co.uk/

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