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मंगलवार, 18 फ़रवरी 2014

अगर आप कामेच्छा बढ़ाने वाली दवा लेते हैं तो सावधान हो जाएं

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वायग्रा लेना हो सकता है खतरनाक

वायग्रा लेना हो सकता है खतरनाक


अगर आप कामेच्छा बढ़ाने वाली दवा लेते हैं तो सावधान हो जाएं। जी हां, एक रिसर्च में पाया गया है कि कामेच्छा बढ़ाने वाली पिल वायग्रा को सही अंदाज में ना लिया जाए तो उससे कई समस्याएं खड़ी हो सकती हैं।

रिसर्च के मुताबिक, यदि वायग्रा के साथ किसी और ड्रग को लिया जाए तो उससे व्य‌क्ति का शरीर सुन्न हो सकता है। दरअसल, वायग्रा के साथ दूसरा ड्रग लेने से सेरोटोनिन सिंड्रोम नाम बीमारी हो जाती है।
क्या होगा नुकसान

क्या होगा नुकसान

डेली मेल पर प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, डॉक्टर्स इस बात की चेतावनी दे रहे हैं कि 'सेक्सटेसी' ट्रेंड के चलते लोग एक साथ दो-दो ड्रग ले रहे हैं। जबकि ये लाइफ के लिए खतरनाक हो सकता है।

दो ड्रग साथ में लेने से शरीर में काफी मात्रा में सेरोटोनिन नाम पदार्थ काफी हो जाता है जो कि कोमा का कारण बन सकता हैं। 30 की उम्र के बाद वायग्रा लेने वालों को ये खतरा ज्यादा है। sabhar :http://www.amarujala.com/

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बड़े-बड़े बॉडीबिल्डर्स को भी देते हैं मात 70 साल के सैम सोनी ब्रयांट

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70 साल के सैम सोनी ब्रयांट, बड़े-बड़े बॉडीबिल्डर्स को भी देते हैं मात

अमेरिका के जॉर्जिया प्रांत के सैम सोनी ब्रयांट 70 वर्ष की उम्र में भी नौजवानों को मात देने की हैसियत रखते हैं। पेशे से बॉडीबिल्डर सैम की फिट बॉडी युवाओं को भी शर्मिंदा कर दे। खासकर तब जब ये पता चले कि उनकी उम्र 70 साल है और उम्र के इस पड़ाव में भी वो हर दिन शारीरिक रूप से मजबूत होते जा रहे हैं। 
 
सैम ने बताया कि जब लोग उनसे उनके रिटायरमेंट के बारे में पूछते हैं, तो उनका जवाब होता है कभी नहीं। सैम ने 44 साल की उम्र में तब वर्जिश करना शुरू किया, जब उनकी वैवाहिक जिंदगी ठीक नहीं चल रही थी। शुरुआती दौर में वो जिम में अपना तनाव दूर करने जाते थे। उन्हें वर्जिश और वेट लिफ्टिंग के बारे में कोई जानकारी नहीं थी।  
 
सैम ने कभी हार मानना नहीं सीखा था। शायद इसीलिए सिर्फ 11 महीनों में उन्होंने ऐसा शरीर बना लिया, कि उनके इंस्ट्रक्टर उन्हें बॉडीबिल्डिंग कॉन्टेस्ट में हिस्सा लेने के लिए कहने पर मजबूर हो गए। कॉन्टेस्ट में हिस्सा लेने की बात पर सैम भी हैरान थे। उन्होंने अपने इंस्ट्रक्टर से कहा कि क्या आपको ऐसा लगता है, तो इंस्ट्रक्टर ने जवाब हां में दिया। 
 
इसके बाद सैम कॉन्टेस्ट में हिस्सा लेने जॉर्जिया गए। सैम ने इससे पहले कभी भी किसी भी तरह के कॉन्टेस्ट में हिस्सा नहीं लिया था। सैम को कॉन्टेस्ट में जीत हासिल हुई। यहीं से सैम को बॉडीबिल्डिंग का क्षेत्र पसंद आने लगा। 
70 साल के सैम सोनी ब्रयांट, बड़े-बड़े बॉडीबिल्डर्स को भी देते हैं मात

सैम देखते ही देखते जिम जाने के आदी हो गए। उन्हें वर्जिश करना अच्छा लगने लगा। उम्र भी इसमें बाधा नहीं बन सकी। वहीं, सैम उम्र को लेकर कहते हैं कि ये सब अपनी धारणा पर निर्भर करता है। लोग इस गलतफहमी का शिकार हो जाते हैं कि उम्र उन्हें बूढ़ा कर रही है, इसलिए उन्हें खुद भी बुढ़ापा महसूस होने लगता है। सैम ने कहा कि उन्हें लगता है कि ये एक मानसिक स्थिति है।


70 साल के सैम सोनी ब्रयांट, बड़े-बड़े बॉडीबिल्डर्स को भी देते हैं मात

सैम को बहुत से लोगों ने चुनौती दी, कि जब वो उनकी उम्र में पहुंचेंगे, तब उन्हें उम्र का एहसास होगा। इस पर सैम ने उन लोगों को जब अपनी असल उम्र बताई, तो वो शर्मिंदा हो गए। सैम कहते हैं कि ये सब इनसान के अवचेतन मन में होता है। इनसान जब ये सोचने लगता है कि वो बूढ़ा हो गया, तो उसका शरीर भी बुजुर्ग की तरह काम करने लगता है। इस तरह इनसान हर दिन बूढ़ा होता चला जाता है। सैम ने कहा वो इन बातों में विश्वास नहीं करते। 

70 साल के सैम सोनी ब्रयांट, बड़े-बड़े बॉडीबिल्डर्स को भी देते हैं मात

सैम चाहते हैं कि लोग उन्हें उनके काम की वजह से याद करें। सैम लोगों के लिए रोल मॉडल बनना चाहते हैं। सैम ने बताया कि उन्होंने बहुत से युवाओं और उनके जिंदगी जीने के तरीके को देखा है। ज्यादातर युवा छुट्टियों में घर जाते हैं और दिनभर घर में बैठकर टीवी देखते हैं। इसके सिवा कुछ नहीं करते। सैम कहते हैं कि वो ऐसा नहीं कर सकते। वो घर में इतने लंबे वक्त तक नहीं रह सकते। वो हमेशा व्यस्त रहना चाहते हैं

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सोमवार, 17 फ़रवरी 2014

बॉलीवुड काट रहा था सनी से कन्नी, सलमान ने कर दी मदद

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बॉलीवुड काट रहा था सनी से कन्नी, सलमान ने कर दी मदद

मुंबई. पोर्न स्टार वाली इमेज के कारण सनी लियोनी अभी तक अछूत की तरह ट्रीट की जाती थीं। न किसी बड़े फिल्म स्टार की पार्टी में उन्हें आमंत्रित किया जाता था, न किसी बड़े फिल्मी समारोह का बुलावा आता था।
 
पिछले साल एक स्टार डांडिया नाइट से उन्हें बैरंग वापस लौटना पड़ा था तो कपिल शर्मा ने अपने शो ‘कॉमेडी नाइट विद कपिल’ में फिल्म ‘जैकपॉट’ के प्रमोशन के लिए उन्हें होस्ट करने से मना कर दिया था। पर सलमान ख़ान ने उनकी इमेज पर झाड़ू-पोंछा लगा दिया है। जब से सलमान के कहने पर उन्हें ‘सेलिब्रिटी क्रिकेट लीग’ में फिल्म बिरादरी के बीच बुलाया गया है, लोगों ने छुआछूत का बर्ताव बदल दिया है।
 
सूत्रों के अनुसार, सनी से कन्नी काटने वाले कपिल ने उनकी आने वाली फिल्म ‘रागिनी एमएमएस-2’ के लिए खुद अपने शो में आमंत्रित किया है।  वैसे सनी महेश भट्ट कैंप और एकता कपूर कैंप के भी बाहर के कई प्रॉड्यूसर-डायरेक्टर और स्टार्स से काफी फ्रेंडली हो गई हैं। डिनो मोरिया, रणदीप हुड्डा, सोनू सूद जैसे कई एक्टर्स तो उनकी बोल्डनेस, सेल्फ कॉन्फिडेंस व ईमानदारी की तारीफ करते हुए उनके साथ काम करने की बेताबी भी जता चुके हैं।
 
वैसे पिछले दिनों दुबई में हुए एक CCL मैच में सलमान और कपिल के साथ नजर आने के अलावा सनी को जनवरी 2014 में हुए प्रोड्यूसर्स गिल्ड अवॉर्ड्स में भी बुलाया गया था। इस अवॉर्ड के होस्ट सलमान खान ही थे और उन्होंने स्टेज पर सनी को बुलाकर उन्हें साड़ी बांधना भी सिखाया था
बॉलीवुड काट रहा था सनी से कन्नी, सलमान ने कर दी मदद

बॉलीवुड काट रहा था सनी से कन्नी, सलमान ने कर दी मदद


बॉलीवुड काट रहा था सनी से कन्नी, सलमान ने कर दी मदद


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हवा से ऑक्सीजन स्टोर कर हाइड्रोजन से चलेगी ये बाइक

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हाइड्रोजन से चलेगी ये बाइक, हवा से ऑक्सीजन स्टोर कर लेती है इसकी बैटरी

ग्रेटर नोएडाऑटो एक्सपो में एक से बढ़कर एक कारें और बाइक्स लॉन्च हुईं। कुछ बाइक्स और स्कूटर ऐसे रहे जो लोगों की नजरों में समा गए। हम ऐसे ही कुछ बाइक्स और स्कूटर्स को पेश कर रहे हैं, जिन्हें आप भी देखना पसंद करेंगे।
वैसे तो ऑटो एक्सपो 2014 में हर कार, बाइक और कॉन्सैप्ट्स देखने लायक थे। लेकिन ऑटो एक्सपो में कुछ ऐसे टू-व्हीलर्स पेश किए गए, जिनके इर्द-गिर्द दर्शकों की भारी भीड़ जमा रही। इन्हें हर कोई अपने कैमरे में कैद करना चाहता था। हो भी क्यों न देखने में ये बाइक्स और स्कूटर्स हैं भी जोरदार। 
HERO CONCEPT:आईऑन
हीरो ने ऑटो एक्सपो 2014 में हाइड्रोजन फ्यूल सेल व्हीकल का कॉन्सेप्ट पेश किया। इसमें एडवांस्ड ली-एयर बैटरीज लगी हुई हैं, जो हवा से ऑक्सीजन स्टोर करती हैं। ब्रेकिंग और एक्सिलेशन के लिए सुपर-कैपिसिटर्स इसके फीचर्स में शामिल हैं।

हाइड्रोजन से चलेगी ये बाइक, हवा से ऑक्सीजन स्टोर कर लेती है इसकी बैटरी


पियाजियो एप्रिला शिवर 750
पियाजियो बिग बाइक पोर्टफोलियो को बढ़ाने की तैयारी में है। कंपनी ने ऑटो एक्सपो में एप्रिला शिवर 750 पेश की। यह बाइक 95 पीएस का मैग्जिमम पावर और 81 एनएम का पीक टर्क देती है। इंजन तीन राइडिंग मोड- स्पोर्ट, टूरिंग और रेन में आता है। सिक्स गियर बॉक्स के साथ आने वाली इस बाइक की कीमत 8-10 लाख रुपये हो सकती है। यह स्मार्ट लुकिंग बाइक 17 इंच एल्युमिनियम बाइक व्हील्स पर फर्राटा भरेगी
हाइड्रोजन से चलेगी ये बाइक, हवा से ऑक्सीजन स्टोर कर लेती है इसकी बैटरी
डीएसके ह्योसंग अकीला 250
ऑटो एक्सपो में डीएसके ह्योसंग ने अकीला 250 क्रूजर बाइक पेश की। यह 250 सीसी, ऑयल कूल्ड, वी-ट्विन, 8-वाल्व इंजन के साथ उतारी जाएगी। इंजन 9,500 आरपीएम पर 26.5 पीएस की पावर और 7,000 आरपीएम पर 21 एनएम का टॉर्क देगा। इस कोरियाई बाइक की कीमत 2.69 लाख रुपये होगी। यह बाइक महंगी है, लेकिन अपने देश में बिकने वाली वी-ट्विन क्रूजर में सबसे सस्ती। sabhar : bhaskar.com




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मुगल गार्डन जनता के लिए खुल गया

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16 फरवरी से मुगल गार्डन जनता के लिए खुल गया है, उससे पहले ही हमारे प्रेस फोटोग्राफर बंधुओं ने मुगल गार्डन के सारे खूबसूरत नजारों को कैमरे में कैद कर लिया...suchitra singh

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रविवार, 16 फ़रवरी 2014

चीन के डॉक्‍टरों ने एक टीनएजर लड़की की ब्रेस्‍ट पर नया चेहरा उगा दिया

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विज्ञान का चमत्‍कार, ब्रेस्‍ट पर उगाया चेहरा!


इसे विज्ञान का चमत्‍कार ही कहेंगे कि चीन के डॉक्‍टरों ने एक टीनएजर लड़की की ब्रेस्‍ट पर नया चेहरा उगा दिया। कुछ समय पहले तक शरीर के किसी अंग के कटने या खराब होने के बाद उसे फिर ठीक करना लगभग असंभव था। लेकिन अब डॉक्‍टर शरीर के किसी भी अंग को दोबारा बनाने में सक्षम हैं।
दरअसल, डॉक्‍टरों ने एक टीनएजर लड़की की ब्रेस्‍ट पर चेहरा उगाकर उसे नया जीवन दिया है। 17 साल की जु जियानमेई जब 5 साल की थीं तो उनका चेहरा आग में बुरी तरह झुलस गया था और अब पिछले सप्ताह उनकी सर्जरी की गई है। ऑपरेशन के बाद होश आने पर अपनी ठुड्डी, पलकें और कान देखकर वह खुशी से फूले नहीं समाई। लेकिन जू ने कहा कि सबसे अच्‍छी बात यह है कि 12 सालों में वह पहली बार अब ठीक से मुस्‍कुरा पाएंगी।
डॉक्टर्स ने जु की टांगों के ब्लड वेसल को उसकी छाती पर प्लांट कर नया चेहरा बनाया। डाक्टरों ने जु की टांगों से ब्लड वेसल निकाले और वॉटर बैलून से इन्हें एक्सपेंड किया गया, ताकि झुलसी हुई त्वचा के अनुसार स्किन तैयार की जा सके। डॉक्टरों को ब्लड वेसल से चेहरा तैयार करने में लगभग एक साल का समय लग गया। डॉक्‍टर जियांग जेझांग के कहे अनुसार, 'अब जु खुद अपने नए चेहरे को बेहतर तरीके से अभिव्‍यक्‍त कर पाएगी। भाव बदलने पर उसके चेहरे पर लालिमा भी छाएगी, लेकिन इसमें अभी थोड़ा समय लगेगा।'
चीनी डॉक्‍टरों की टीम का कहना है कि उन्‍होंने हाल के महीनों में ऐसे कई ऑपरेशन किए हैं। यह वही डॉक्‍टरों की टीम है, जिन्‍होंने सड़क दुर्घटना में घायल एक व्यक्ति के माथे पर नाक उगाई थी।

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न जाने किस ग्राहक के लिए इंसान के दिमाग को भून रहे थे ये

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people Selling Roasted Human Heads

नाइजीरिया के एक रेस्टोरेंट से 11 लोगों को इंसानी खोपड़ी पकाने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया है।साथ ही रेस्टोरेंट को भी ताला लगा दिया गया है। अफ्रीका न्यूज पोस्ट की खबर के अनुसार, जिन 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया है वो किसी इंसान के सिर को भून रहे थे।इसके अलावा पुलिस को दो नरमुंड भी मिले हैं। हिरासत में लिए गए लोगों में से 6 औरतें भी हैं। इन दोनों नरमुंडों से खून बह रहा था और उन्हें एक थैले में भरकर रखा गया था।एक स्‍थानीय नागरिक ने बताया कि बाजार के पास होने की वजह से वो अक्सर इस दुकान पर आता रहता था। उसे अक्सर यहां कुछ अजीब लगता था ‌लेकिन पुलिस द्वारा की गई ये गिरफ्तारी वाकई चौंकाने वाली है sabhar :http://www.amarujala.com/

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महिलाओं को सबसे ज्यादा पसंद हैं लंबे पुरुष

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महिलाओं को सबसे ज्यादा पसंद हैं लंबे पुरुष


न्यूयार्क: अब तक हम यही सुनते आए हैं कि जब मामला प्यार का हो तो लंबाई, चमड़े की रंगत, आंखों का रंग, बालों का रंग, भाषा वगैरह से कुछ फर्क नहीं पड़ता। लेकिन एक ताजा अध्ययन ने इस अवधारणा को गलत साबित कर दिया है। इस अध्ययन के मुताबिक महिलाएं स्त्रीत्व तथा संरक्षण के चलते लंबे पुरुषों की तरफ अधिक आकर्षित होती हैं।

टेक्सास स्थित राइस विश्वविद्यालय में समाजशास्त्र के प्राध्यापक माइकल इमरसन, एलिन और ग्लैडिस क्लाइन ने कहा कि विकासात्मक मनोविज्ञान सिद्धांत के अनुसार, मानव में अपने जोड़ीदार के चुनाव में समानता सबसे बड़े कारक की भूमिका अदा करता है।

इस अध्ययन में दिए गए आकड़ों के अनुसार, किसी महिला के लंबे पुरुष की ओर आकर्षित होने के पीछे संरक्षण की चाह और स्त्रीत्व का भाव काम करता है।

अध्ययन में एक महिला के हवाले से कहा गया है कि एक लड़की होने के नाते, मैं एक ही समय में खुद को नाजुक और सुरक्षित महसूस करना पसंद करती हैं। अपने प्रेमी की निगाह में खुद को नीचा सोचते हुए अजीब लगता है। महिला ने आगे कहा कि मैं भी उसे अपनी बाहों में लेना चाहती हूं, तथा उसकी गले में अपनी बाहें डालना चाहती हूं।

पुरुषों को हालांकि लंबाई को लेकर प्रेम संबंध के बारे में कुछ कहते कम ही सुना गया है, तथा जो कहते भी हैं वे कम लंबाई की महिला को ही प्राथमिकता देते सुने गए हैं। हालांकि वे इतनी छोटी महिला के साथ भी प्रेम नहीं करना चाहते, जिसके साथ शारीरिक तालमेल न बैठ सके।

उत्तरी टेक्सास विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र के प्राध्यापक जॉर्ज यांसी के अनुसार, अब तक ऐसा माना जाता रहा है कि लंबा होना पुरुषों के व्यक्तित्व में सकारात्मकता लाता है, जबिक महिला लंबी हो तो उसके लिए यह किसी निजी जिम्मेदारी की तरह हो जाती है।

यह अध्ययन शोध पत्रिका `फेमिली इश्यूज` के ताजा अंक में प्रकाशित हुआ, जिसके संकेत की महिलाएं लंबे पुरुषों की ओर अधिक आकर्षित होती हैं, पितृसत्तात्मक समाज की मान्यताओं को दर्शातें हैं, जिसमें पुरुषों को अधिक अधिकार प्राप्त होते हैं। (एजेंसी)
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बेजुबान जानवर की इस भावुकता ने इंसानों की आंखों में छलकाए आंसू

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बेजुबान जानवर की इस भावुकता ने इंसानों की आंखों में छलकाए आंसू
जानवर भी इंसान की तरह प्यार की भाषा समझते हैं और भावनात्मक रूप से गहरा जुड़ाव रखते हैं। मनुष्य का प्यार जब जानवरों को मिलता है,तो वे भी इंसानों को अपने दिल के बेहद करीब मानते हैं। यह दृश्य कांगो रिपब्लिक के चिंपोंगा चिम्पांजी रिहैबिलिटेशन सेंटर का है। इस सेंटर में एक साल से मादा चिम्पांजी वाउंडा की देखभाल की जा रही थी।
वाउंडा के स्वस्थ होने के बाद जब उसे जंगल वापस ले जाया जा रहा था, तो वह इतनी भावुक हुई कि देखभाल करने वाली संस्था की प्रमुख डॉक्टर जेन गुडाल को अपनी बाहों में भर लिया। उसे एक साल पहले रिहैबिलिटेशन सेंटर में लाया गया था। अच्छी नर्सिंग केचलते वह स्वस्थ हो गई और इसके बाद उसे जंगल में छोड़ दिया गया । यह स्टोरी कांगो रिपब्लिक के जेन गुडाल इंस्टिट्यूट पर बनी एक डाक्यूमेंट्री में सामने आई है। इस संस्थान में 160 से अधिक चिम्पांजी की देखभाल की जा रही है।
बेजुबान जानवर की इस भावुकता ने इंसानों की आंखों में छलकाए आंसू

वाउंडा को रिहैबिलिटेशन सेंटर में नर्सिंग के साथ ही इंसानों का भरपूर प्यार मिला। वाउंडा को मरणासन्न हालत में एक साल पहले जब सेंटर लाया गया था, उसे कई बीमारियां थीं और उसका वजन बहुत कम था। यहां उसका इलाज किया गया। हर दिन उसे एक लीटर दूध दिया जाने लगा। अच्छी देखभाल से वह जल्द ही ठीक होने लगी।

बेजुबान जानवर की इस भावुकता ने इंसानों की आंखों में छलकाए आंसू


डॉक्टर जेन गुडाल 20 वर्ष पहले कांगो आई थीं। उन्होंने कांगो सरकार की मदद से चिम्पांजियों के संरक्षण के लिए एक सैंक्चुअरी की स्थापना की। इसका नाम चिंपोंगा चिम्पांची रिहैबिलिटेशन सैंक्चुअरी है। आज उनके प्रयासों के चलते कांगो की इस सैंक्चुअरी में सैकड़ों चिम्पांजी आबाद हैं।
चिम्पांजी सैंक्चुअरी टिचिंडजुलू द्वीप में स्थित है। यहां बहुत ही घने जंगल हैं। इसके पास कांगो की दूसरी सबसे बड़ी नदी कोउलोउ बहती है।
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डॉक्टर जेन गुडाल और डॉक्टर रेबेका एटेंसिया चिम्पांजी वाउंडा को रिहैबिलिटेशन से टिचिंडजुलू द्वीप में स्थित सैंक्चुअरी में भेजने से पहले इस योजना पर आपस में विचार-विमर्श करती हुईं।
बेजुबान जानवर की इस भावुकता ने इंसानों की आंखों में छलकाए आंसू


वाउंडा को एक वाहन पर रखे पिंजड़े के अंदर बिठाया गया और टिचिंडजुलू सैंक्चुअरी के लिए रवाना किया गया। उसे टिचिंडजुलू सैंक्चुअरी में इसलिए भेजा गया, ताकि वहां उसकी जिंदगी में इंसानों का दखल नहीं हो। इस दौरान उसके साथ पुनर्वास केंद्र जेनगुडाल संस्थान - कांगो की प्रमुख और डॉक्टर रेबेका एटेंसिया भी थीं।

बेजुबान जानवर की इस भावुकता ने इंसानों की आंखों में छलकाए आंसू
डॉक्टर जेन गुडाल पिंजड़े के अंदर बैठी वाउंडा को देखते हुए भावुक हो रहीं थीं। वाउंडा के बाहर निकले हाथ को स्पर्श करती हुईं डॉ.जेन।

बेजुबान जानवर की इस भावुकता ने इंसानों की आंखों में छलकाए आंसू


रिहैबिलिटेशन सेंटर की टीम ने टिचिंडजुलू द्वीप में पहुंचने के लिए एक नाव का भी सहारा लिया। टीम के सदस्यों ने इस आयलैंड के पास बह रह कोउलोउ को नदी इस तरह पार किया। नाव में पिंजड़ा भी रखा गया, जिसके अंदर मादा चिम्पांजी वाउंडा है। नाव पर डॉ. जेन गुडाल और डॉक्टर रेबेका एटेंसिया भी दिखाई दे रहीं हैं।


बेजुबान जानवर की इस भावुकता ने इंसानों की आंखों में छलकाए आंसू
टिचिंडजुलू द्वीप में स्थित सैंक्चुअरी में पिंजड़े से बाहर आने के बाद वाउंडा जब जाने लगी तो डॉ. जेन गुडाल और डॉक्टर रेबेका एटेंसिया भावुक हो गईं। वे उसे जाते हुए देख रहीं हैं।

बेजुबान जानवर की इस भावुकता ने इंसानों की आंखों में छलकाए आंसू

टिचिंडजुलू द्वीप में स्थित चिम्पांजी सैंक्चुअरी में वाउंडा अपने पुराने समूह के सदस्यों के बीच पहुंची तो इस तरह कुछ आराम करने लगी।
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शनिवार, 15 फ़रवरी 2014

कुछ मठ, मंदिर, चर्च और संत क्यों सदियों से रहस्य बने हैं

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जानें, क्यों सदियों से रहस्य बने हैं ये कुछ मठ, मंदिर, चर्च और संत

विज्ञान के युग में भी विश्व के विभिन्न धर्मों के लोगों का मंदिर, चर्च, मठ और संतों में  आस्था-विश्वास बरकार है। ये रहस्य और अलौकिक शक्तियों से संपन्न माने जा रहे हैं।विभिन्न धर्मों में कुछ बड़े संतों संतों की मौत के बाद लोग उनके शरीर की पूजा कर रहे हैं। वे इन धार्मिक स्थलों और संतों के चमत्कार के अनुभव का भी दावा करते हैं।
यह थाइलैंड के कोह सामुई द्वीप में स्थित यह वात खुनारम नाम का बौद्ध मंदिर है। श्राइन के अंदर स्थित मंदिर में एक बौद्ध संन्यासी लुआंग पारे डैइंग का ममीफाइड शव रखा है। 1973 में उनकी मौत के बाद से यह बॉडी रखी हुई है। इसे बहुत सुरक्षित ढंग से रखा गया है। बौद्ध संन्यासी की इच्छा थी कि मृत्यु के बाद उनके शरीर को सुरक्षित रखा जाए। इससे जीवन, मृत्यु और बुद्ध के मध्यम मार्ग की शिक्षा दी जा सके। वह अपने जीवन में ध्यान साधना के लिए विख्यात थे।
शरीर की आंखों को ढंकने के लिए एक चश्मा भी लगाया गया है। खास बात यह हैं कि उनका शरीर बहुत हद तक सुरक्षित है फिर भी एक गिरगिट उनके शरीर के अंगों पर घूमता रहता है। उसके अंडे बॉडी में दिखते हैं। बॉडी अब पहले जैसी स्थिति में नहीं है, फिर काफी हद तक यह सुरक्षित है।

जानें, क्यों सदियों से रहस्य बने हैं ये कुछ मठ, मंदिर, चर्च और संत

1- सेंट रॉच चैपेल, न्यू ओरलेआन्स, अमेरिका :
सेंट रॉच का जन्म 13 वीं शताब्दी के अंत में फ्रांस के समीप हुआ था। जब वह जन्मे तो उनकी सीने पर क्रास का चिन्ह था।20 वर्ष की उम्र में ही उनके मां-बाप की मौत हो गई थी। लोगों की सेवा के लिए वे कई देशों में गए थे।

सेवा : वह प्लेग पीडि़तों की सेवा करते करते स्वयं इससे पीडि़त हो गए थे। लेकिन वह प्लेग पीडि़तों की सेवा से पीछे नहीं हटे।
चमत्कार : अमेरिका की खाड़ी का इलाका वर्ष 1,800 में  पीले ज्वर से प्रभावित था। लोगों ने सेंट रॉच से बीमारी के प्रकोप से बचाने प्रेयर करने के लिए कहा था। इसके बाद इलाके में बीमारी तो आई, लेकिन एक भी मौत नहीं हुई।
जनआस्था : लोगों ने संत सेंट रॉच के चमत्कारों को देखते हुए उनके सम्मान में एक कैथेड्रल निर्मित करवाया। लोग आज भी यहां आकर अपने स्वस्थ होने की कामना करते हैं। जो भी व्यक्ति यहां आकर प्रार्थना करता है, उसे बीमारी से राहत मिलती है

जानें, क्यों सदियों से रहस्य बने हैं ये कुछ मठ, मंदिर, चर्च और संत

2-एमिएन्स कैथेड्रल फ्रांस:  13 वीं शताब्दी में बने इस कैथेड्रल में यहां सेंट जॉन का सिर रखा गया है। हेरोइडस ने उनकी हत्या कर दी थी और सिर में छेद भी कर दिया था। कहानी के अनुसार उन्हें कई साल तक यातनाएं दी गई थीं। कुछ समय के लिए उनका सिर खो गया था।
चमत्कार : बताया जाता है कि जब बैप्टिस्ट सेंट जॉन का सिर खो गया था तो उन्होंने किसी स्वप्न दिया। वह व्यक्ति मारासेलस था और उसने जहां बताया, वहां से उनका सिर की हड्डी मिल गई। इसे फिर चर्च में रखा गया लेकिन यह फिर खो गई। बताया जाता है कि फिर सेंट जॉन स्वप्न में आए और उन्होंने संकेत दिया। यह सिर कांस्टैंटनोपल में कई सदियों तक सुरक्षित रहा। इसे एक धर्मयोद्धा ने खोजा और फ्रांस के शहर एमिएन्स ले आया था। उसका नाम वॉलोन डी सार्टन था।
जानें, क्यों सदियों से रहस्य बने हैं ये कुछ मठ, मंदिर, चर्च और संत

3- जापान में नारा सिटी के बुद्ध की मूर्ति की नाक : जापान के नारा शहर में भगवान बुद्ध का यह मंदिर 752 में निर्मित किया गया था। इसका मुख्य हॉल दुनिया का सबसे विशाल लकड़ी से बनी बिल्डिंग है। इसका पुनर्निर्माण 1692 में किया गया था। भगवान बुद्ध की मूर्ति कांस्य से बनी हुई है। 15 मीटर ऊंची मूर्ति 129 किलो सोना और 437 टन कांस्य से बनी है।
लोक मान्यता: मूर्ति के पीछे एक विशाल लकड़ी का पोल है और इसके अंदर छेद है। यहां मान्यता है कि यहां मंदिर आपसे संवाद करने लगता है। पिलर का छेद मूर्ति की नाक की साइज का है। कहा जाता है कि इसे सही ढंग से फिट करने वाले को आत्मज्ञान की प्राप्ति होती है। sabhar : bhaskar.com

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परग्रही सभ्यताओं के साथ संपर्क 20 साल के बाद

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परग्रही सभ्यताओं के साथ संपर्क 20 साल के बाद


अमरीका में परग्रही सभ्यता अनुसंधान एजेंसी के एक वैज्ञानिक सेट शोस्ताक ने कहा है कि परग्रही सभ्यताओं के प्रतिनिधि वर्ष 2040 में पृथ्वी के निवासियों के साथ संपर्क स्थापित करेंगे।

अमरीका के वैज्ञानिक ने बताया है कि हर पांचवें सितारे के चारों ओर कम से कम एक ऐसा ग्रह घूमता है जिस पर जीवन के लिए उपयुक्त वातावरण मौजूद हो सकता है। इसका मतलब यह है कि आकाशगंगा में हमारी पृथ्वी जैसे अरबों ग्रह मौजूद हो सकते हैं।
वैज्ञानिक के मुताबिक, अगर इन में से एक भी ग्रह पर हमारी पृथ्वी जैसा जीवन मौजूद है और वहां भी विकास का स्तर हम जैसा ही है तो उस ग्रह के निवासी धरती से रेडियो संकेत प्राप्त कर सकते हैं और इन संकेतों का जवाब भी दे सकते हैं।

sabhar ; http://hindi.ruvr.ru/

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