Sakshatkar.com : Sakshatkartv.com

.

Item Post Navigation Display

Home Recent Posts Display

Related Posts Display

शुक्रवार, 11 अक्टूबर 2013

इन खतरनाक रिसर्च में प्रयोगकर्ताओं को गंवानी पड़ी थी अपनी जान

0

इन खतरनाक रिसर्च में प्रयोगकर्ताओं को गंवानी पड़ी थी अपनी जान

आज हमे कई आधुनिक चीजें काफी आसानी से मिल जाती हैं और ये काफी एडवांस भी हैं। लेकिन  कुछ लोगों को ऐसी चीजों को इजाद करने या रिसर्च में हासिल करने में अपनी जान तक गंवानी पड़ी हैं।
ये प्रयोग बेहद कठिन और जानलेवा थे,लेकिन प्रयोगकर्ताओं ने अपनी जान दांव पर लगा कर इन्हें अंजाम तक पहुंचाने की भरपूर कोशिश की थी।
हम आपको यहां कुछ प्रयोगकर्ताओं और उनके ऐसे प्रयोगों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनसे उन्हें अपनी जान से भी हाथ धोना पड़ा।
इन खतरनाक रिसर्च में प्रयोगकर्ताओं को गंवानी पड़ी थी अपनी जान

लिक्विड से संचालित रॉकेट कार (1930),  वैज्ञानिक मैक्स वेलियर  :  एक ऑस्टे्रलियन अनुसंधानकर्ता मैक्स वेलियर की 17 मई 1930 को तब मौत हो गई, जब वह बर्लिन में एक एल्कोहल से भरा रॉकेट टेस्ट बेंच में फट गया। 1928-29 में वेलियर ने फ्रित्ज वोन ओपेल के साथ रॉकेट पावर्ड कारों और एयरक्राफ्ट पर काम किया था। इसके बाद वेलियर लिक्विड से भरे रॉकेट्स पर काम कर रहे थे। उन्होंने ने 19 अप्रैल 1930 को राकेट कार की टेस्ट ड्राइव की थी। यह कार लिक्विड से संचालित थी। एक माह बार इस कार के टेस्ट में विस्फोट हो गया।
इन खतरनाक रिसर्च में प्रयोगकर्ताओं को गंवानी पड़ी थी अपनी जान

-पैराशूट शूट (1912), खोजकर्ता- फ्रांज रिचेल्ट : ऑस्ट्रेलियन में जन्में फ्रैंच टेलर, शोधकर्ता और पैराशूटिंग में अग्रणी फ्रांज रिचेल्ट ने 4 फरवरी 1912 को एफिल टॉवर से छलांग लगाई। वह स्वयं का डिजाइन किया हुआ पैराशूट को टेस्ट करना चाहता था। हालांकि उसके दोस्तों और दर्शकों ने उसे काफी रोकने की कोशिश की, लेकिन वह टॉवर की पहले प्लेटफार्म से कूदा। दुर्भाग्य से उसका पैराशूट काम नहीं कर सका और वह चीन बर्फीली जमीन पर गिरा और उसकी जान चली गई।
इन खतरनाक रिसर्च में प्रयोगकर्ताओं को गंवानी पड़ी थी अपनी जान
शॉक ऑब्जर्वर (1985), प्रयोगकर्ता करेल सॉसेक : करेल सॉसेक एक प्रोफेशल स्टंटमैन था । वह कैप्शूल की खोज और नियाग्रा फॉल्स में इसकी सवारी करके विख्यात हुआ था। ऐसा करने में वह घायल हो गया और उसे कुछ चोटें भी आईं।
करेल सॉसेक ने 19 जनवरी1985 को एक कंपनी को टेक्सास स्थित ह्यूस्टन एस्ट्रोडोम से बैरल ड्राप करने का खर्च उठाने के लिए तैयार कर लिया था। 180 फीट ऊंचे स्ट्रक्चर से एक विशेष वॉटरफाल तैयार किया गय और एक टैंक भी खोदा गया था। लेकिन बैरल का रिम टैंक के पानी में गिरने की बजाय इसकी रिम से टकरा गया। इससे कैप्सूल फट गया। इससे सॉसेक को गंभीर चोंटे आई और दूसरे दिन उसकी मौत हो गई।
इन खतरनाक रिसर्च में प्रयोगकर्ताओं को गंवानी पड़ी थी अपनी जान

 ऑक्सीजन रीब्रीदर (1876), प्रयोगकर्ता - हेनरी फ्लेस : ब्रिटिश वैज्ञानिक हेनरी फ्लेस ने 1876 में एक क्लोज सर्किट ऑक्सीजन रीब्रीदर की खोज की थी। इस शूट का प्रयोग कंप्रेस्ड हवा के बजाय कंप्रेस्ड ऑक्सीजन के लिए किया जाता था। उनकी इस खोज का मूल रूप ये यह इरादा था कि इसका प्रयोग भरे हुए जहाज के चेंबर में लगे लोहे के दरवाजों को रिपेयर करने में किया जा सके। फ्लेस ने अपने प्रयोग को पानी के 30 फीट अंदर आजमाना तय किया। दुर्भाग्य से उनकी ऑक्सीजन के प्रेशर से मौत हो गई। ऑक्सीजन अंडर प्रेशर होने पर इंसान के लिए नुकसानदायक होती है।
इन खतरनाक रिसर्च में प्रयोगकर्ताओं को गंवानी पड़ी थी अपनी जान
- रोटरी प्रिंटिंग प्रेस (1867), विलियम बुलोक : विलियम बुलोक एक अमेरिकी अनुसंधानकर्ता थे। उन्होंने 1863 में एक वेब रोटरी प्रिंटिंग प्रेस का अविष्कार किया था। बुलोक के इस अविष्कार ने प्रिटिंग इंडस्ट्री में क्रांतिकारी परिवर्तन लाया। एक बार जब वह अपनी इस नई प्रिटिंग मशीन को चला रहे थे तो उसी दौरान उन्होंने इसकी ड्राइविंग बेल्ट को किक मार मार दी। पुल्ली में पैर लगा और वह मशीन में बुरी तरह फंस गए। इससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। ऑपरेशन के दौरान पेनसेल्वानिया में 12 अप्रैल 1867 को मौत हो गई।
इन खतरनाक रिसर्च में प्रयोगकर्ताओं को गंवानी पड़ी थी अपनी जान

- रीब्रीदिंग डिवाइस : (1772),  सिएर फ्रेमिनेट(वैज्ञानिक):
- 1772 में फ्रांसीसी सिएर फ्रेमिनेट ने स्कूबा डाइवर्स के लिए रीब्रीदिंग डिवाइस का अविष्कार करने की कोशिश में जान चली गई थी। यह डिवाइस बैरल से निकली हवा को रीसाइकिल करती है। दुर्भाग्य से इसके प्रयोग के दौरान ऑक्सीजन की कमी होने पर फ्रेमिनेट की मौत हो गई। यह डिवाइस डाइवर्स को पानी के अंदर 20 मिनट तक रखना खतरनाक साबित हुई। sabhar : bhaskar.com



Read more

इस वीर के तरकस में थे तीन ऐसे बाण जिससे भगवान कृष्ण को भी लगता था डर

0

इस वीर के तरकस में थे तीन ऐसे बाण जिससे भगवान कृष्ण को भी लगता था डर

सीकर. एक ऐसा महान योद्धा जिसकी वीरता एवं साहस के सामने पूरी दुनिया शीश झुकाती है। इस योद्धा ने अपनी वीरता के प्रमाण और वचन-वद्धता के लिए एक पल में अपना सर धर से अलग कर दिया था। इसी कारण इन्हें शीश के दानी के नाम से जाना गया। इस वीर के तरकश में थे तीन ऐसे बाण जिससे पल भर में पूरी दुनिया समाप्त हो सकती थी। इसके कारण देवता भी हो दहशत में थे। दहशत भी इतनी कि खुद श्रीकृष्ण को क्षल करने पर मजबूर होना पड़ा। आज कलयुग में इन्हे भगवान श्री कृष्ण  के अवतार के रूप में पूजा जाता है। 
dainikbhaskar.com के धर्मयात्रा की इस कड़ी में हम आपको लेकर चल रहे हैं शेखावाटी के सीकर जिले में स्थित इस परम वीर के धाम जिसे खाटू धाम के नाम से जाना जाता है। इस वीर की महिमा का बखान करने वाले भक्त राजस्थान या भारत में ही नहीं बल्कि दुनिया के कोने-कोने में मौजूद हैं।
इनके पास थे तीन ऐसे बाण जिससे भगवान कृष्ण को था इतिहास पलटने का डर
यह धाम सीकर से 65कि.मी. दूर खाटूश्यामजी गांव में स्थित है। सफेद मार्बल से बना यह प्राचीन मंदिर हिंदू भगवान, श्रीकृष्ण का अवतार मने जाने वाले खाटूश्याम को समर्पित है तथा, अनेक मजेदार कहानियों से जुड़ा है। इस मंदिर का वर्णन महान ग्रंथ ’महाभारत’ में भी किया गया है। यह कहानी एक ऐसे वीर की है जो गदाधारी भीम के पोते थे और भीम के पुत्र घटोतकच्छ और नाग कन्या अहिलवती के पुत्र थे।
किसने दिया इन्हें श्याम का नाम
इस वीर का बाल्यकाल में नाम बर्बरीक थ। उनकी माता, गुरुजन एवं रिश्तेदार उन्हें इसी नाम से जानते थे। इनका यह नाम इनके बडे-बडे और घने बाल होने के कारण पडा| वे महान पान्डव भीम के पुत्र घटोतकच्छ और नाग कन्या अहिलवती के पुत्र है। बाल्यकाल से ही वे बहुत वीर और महान यौद्धा थे। उन्होने युद्ध कला अपनी माँ से सीखी थी। कृष्ण ने उन्हें खाटूश्यामजी का नाम दिया था। उसके बाद इसी नाम से वो जाने गए।
के पास थे ऐसे तीन बाण जिससे पूरी दुनिया हो सकती थी ध्वस्त
बालक वीर बर्बरीक के जन्म के पश्चात् घटोत्कच इन्हें भगवन श्री कृष्ण के पास लेकर गए थे। श्री कृष्ण के बताए बातों के राह पर चलते हुए बर्बरीक ने विजय नामक ब्राह्मण का शिष्य बनकर अस्त्र-शस्त्र विद्या ज्ञान हासिल किया और उनके यज्ञ को राक्षसों से बचाकर, उनका यज्ञ संपूर्ण कराया। विजय नाम के उस ब्राह्मण का यज्ञ संपूर्ण करवाया। बर्बरीक ने भगवान शिव की घोर तपस्या करके उन्हें प्रसन्न किया जिससे मां भगवती व भगवन शिव शंकर बर्बरीक से बहुत प्रसन्न हुए और उनके सामने प्रकट होकर तीन बाण प्रदान किए जिससे तीनो लोकों में विजय प्राप्त की जा सकती थी।
महाभारत का युद्ध प्रारम्भ होने पर वीर बर्बरीक ने अपनी माता के सामने युद्ध में भाग लेने की इच्छा प्रकट की और तब इनकी माता ने इन्हें युद्ध में भाग लेने की आज्ञा दे दी और यह वचन लिया की तुम युद्ध में हारने वाले पक्ष का साथ निभाओगे। इस पर बर्बरीक कुरुक्षेत्र की ओर चल पड़े।
एक बाण से पीपल के पेड के सभी पत्तों को छेद डाला
सर्वव्यापी कृष्ण ने ब्राह्मण वेश धारण कर बर्बरीक से परिचित होने के लिये उसे रोका और यह जानकर उनकी हंसी भी उडायी कि वह मात्र तीन बाण से युद्ध में सम्मिलित होने आया है। ऐसा सुनने पर बर्बरीक ने उत्तर दिया कि मात्र एक बाण शत्रु सेना को ध्वस्त करने के लिये पर्याप्त है और ऐसा करने के बाद बाण वापिस तरकस में ही आयेगा। यिद तीनो बाणों को प्रयोग में लिया गया तो तीनो लोकों में हाहाकार मच जायेगा। इस पर कृष्ण ने उन्हें चुनौती दी की इस पीपल के पेड के सभी पत्तों को छेद कर दिखलाओ, जिसके नीचे दोनो खडे थे। बर्बरीक ने चुनौती स्वीकार की और अपने तरकस से एक बाण निकाला और इश्वर को स्मरण कर बाण पेड के पत्तो की और चलाया।
तीर ने क्षण भर में पेड के सभी पत्तों को भेद दिया और कृष्ण के पैर के इर्द-गिर्द चक्कर लगाने लगा, क्योंकि एक पत्ता उन्होनें अपने पैर के नीचे छुपा लिया था, बर्बरीक ने कहा कि आप अपने पैर को हटा लीजिये वर्ना ये आपके पैर को भी छेद देगा। यह सब देख कर भगवान कृष्ण बर्बरीक से अत्यंत प्रभावित हुए। इस पर श्री कृष्ण बर्बरीक से पूछते हैं की तुम युद्ध में किसके साथ हो इस प्रश्न पर बर्बरीक ने कहा कि युद्ध भाग लेने के लिए आते समय मां ने कहा था की पुत्र उस ओर से लड़ना जो हार रहा हो तथा निर्बल हो। कृष्ण ने सोचा की इस समय तो कौरव ही हार रहे हैं और इस समय में वह कौरवों का ही साथ देगा और यदि ऐसा हुआ तो पांडवों के लिए अच्छा न होगा।
.और एक पल में कलम कर दिया अपना सर
इस पर उन्होंने ब्राह्मण रूप में ही बालक बर्बरीक से दान स्वरूप बर्बरीक का सर मांग लिया इस पर बर्बरीक ने उन्हें यह दान देने का वचन दिया किंतु ब्राह्मण के असली रूप को जानने की इच्छा व्यक्त की इस पर श्री कृष्ण ने बालक को अपने वास्तविक रूप के दर्शन दिए। श्री कृष्ण ने ऐसा इसलिए किया क्योकि अगर बर्बरीक युद्ध में भाग लेते तो कौरवों की समाप्ति केवल 18 दिनों में नहीं हो सकती थी और युद्ध निरंतर चलता रहता। श्री कृष्ण ने बर्बरीक से कहा की युद्ध भूमि की पूजा करने के लिए किसी एक वीर के शिश के दान की जरूरत है। तुम्हारे अंदर मैने वो वीर देखा है। इस पर बर्बरीक ने श्री कृष्ण से प्रार्थना की कि वह पूरा महाभारत को देखना चाहता है। श्री कृष्ण ने बर्बरीक की प्रार्थना को स्वीकार किया और फाल्गुन महीने की द्वादश तिथि को बर्बरीक ने अपना शीश दान के रुप में दे दिया।
पूरा महाभारत देखने वाला एकमात्र योद्धा
श्री कृष्ण ने बालक बर्बरीक के शीश को अमृत से सींचा और युद्धभुमि के समीप ही पहाड़ की सबसे ऊंची चोटी पर रख दिया। जहां से उन्होंने पूरे युद्ध को देखा। युद्ध की समाप्ति पर पांडवों में आपस में ही इस बात को लेकर तनाव उत्पन्न हो गया कि युद्ध में कौन विजयी हुआ। इस पर कृष्ण ने उनसे कहा कि बर्बरीक का शीश सम्पूर्ण युद्ध का साक्षी है वही सही और गलत का निर्णय ले सकता है। सभी इस बात से सहमत होकर बर्बरीक के पास गये। बर्बरीक के शीश ने उत्तर दिया कि कृष्ण ही युद्ध मे विजय प्राप्त कराने में सबसे महान पात्र हैं। उन्हें युद्धभुमि में सिर्फ उनका सुदर्शन चक्र घूमता हुआ दिखायी दे रहा था जो कि शत्रु सेना को काट रहा था, महाकाली दुर्गा कृष्ण के आदेश पर शत्रु सेना के रक्त से भरे प्यालों का सेवन कर रही थीं। उन्हें यह वरदान मिला कि उन्हें कलयुग में श्याम के नाम से पूजा जाएगा। 
औरंगजेब ने किया था मंदिर को नष्ट
श्याम मंदिर बहुत ही प्राचीन है। श्याम मंदिर की आधारशिला सन् 1720 में रखी गई थी। एक मान्यता के मुताबिक सन् 1679 में औरंगजेब की सेना ने इस मंदिर को नष्ट कर दिया था। इस मंदिर की रक्षा के लिए उस समय अनेक राजपूतों ने अपना प्राणोत्सर्ग किया था। श्री कृष्ण भगवान के कलयुग के अवतार के रूप में यहां पर खाटू में विराजमान हैं। खाटू श्याम जी को हारे का सहारा माना जाता है। बर्बरीक को अनेक नामों से पुकारा जाता है यह खाटू श्याम, श्याम सरकार, र्यावर्चा, सुहृदय, शीश के दानी, तीन बाणधारी, खाटू नरेश और कलयुग के अवतार जैसे नामों से जाना जाते हैं।
sabhar; bhaskar.com

Read more

गुरुवार, 10 अक्टूबर 2013

केस करने वाली लड़की का नया आरोप- साधिकाओं को निर्वस्त्र कर नृत्य कराना चाहता था नारायण साईं

0

केस करने वाली लड़की का नया आरोप- साधिकाओं को निर्वस्त्र कर नृत्य कराना चाहता था नारायण साईं

इंदौर/सूरत/गांधीनगर. नाबालिग के यौन उत्‍पीड़न के आरोपी आसाराम बापू और उसके बेटे नारायण साईं की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। गुरुवार को आसाराम के सूरत आश्रम में एफडीए टीम ने छापा मारा। एफडीए टीम ने आश्रम से सैंपल एकत्रित करके जांच के लिए भेज दिए हैं। माना जा रहा है ये सैंपल आसाराम की मुश्किलें और बढ़ा सकते हैं। गुजरात पुलिस आसाराम को गुजरात लाकर पूछताछ करना चाहती है। वहीं, नारायण साईं को पेश होने के लिए सूरत पुलिस ने नोटिस भेजा है। साईं, उनकी मां लक्ष्मी और बहन भारती अंडरग्राउंड हैं। 
 
नारायण साईं पर दुष्कर्म के आरोप लगाने वाली सूरत की पीड़िता ने पुलिस को छह और लड़कियों के नाम बताए हैं। उसके मुताबिक इनसे भी नारायण ने दुष्कर्म किया। इनमें तीन लड़कियां इंदौर व तीन वडोदरा की हैं। दुष्कर्म मामले की पड़ताल में यह जानकारी सामने आई है। पुलिस के मुताबिक पीड़िता साबरकांठा स्थित एक आश्रम की संचालक रही है।
 
पीड़िता का कहना है कि नारायण साईं का इतना आतंक था कि साधिकाएं उसके खिलाफ कुछ नहीं बोल सकती थीं। उसका आरोप है कि उसके सामने देश के कई हिस्सों से लड़कियां लाई गई थीं। बाद में इन्हें काठमांडू के नागार्जुन हिल स्थित ओशो आश्रम ले जाया गया। मेडिटेशन में ले जाकर निर्वस्त्र अवस्था में नृत्य करने वाले दंपती दिखाए। वह इसी तर्ज पर अपनी साधिकाओं से नृत्य करवाना चाहता था। इन्हें दिखाते हुए कहा गया कि देखो और सीखो। पुरुष व महिला के बीच कोई फर्क ही नहीं होता।
साईं को पुलिस ने नोटिस भेजा :
नारायण साईं को पेश होने के लिए सूरत पुलिस ने नोटिस भेजा है। यह नोटिस जहांगीर पुरा स्थित आश्रम में मौजूद सेवादारों को बुधवार को सौंपा गया। नारायण साईं को जल्दी से जल्दी पेश होने की ताकीद की गई है। पुलिस अब तक नारायण साईं को तलाश नहीं कर पाई है। साईं, उनकी मां लक्ष्मी व बहन भारती भूमिगत हैं।
 sabhar : bhaskar.com

Read more

बुधवार, 9 अक्टूबर 2013

धरती के केंद्र में है यह चमत्कारी मंदिर, जानिए 10 रहस्यमयी बातें!

0

PICS: धरती के केंद्र में है यह चमत्कारी मंदिर, जानिए 10 रहस्यमयी बातें!

वाराणसी/मिर्जापुर. विंध्य पर्वत पर विराजमान आदि शक्ति माता विंध्यवासिनी की महिमा अपरम्पार है। भक्तों के कल्याण के लिए सिद्धपीठ विंध्याचल में सशरीर निवास करने वाली माता विंध्यवासिनी का धाम मणिद्वीप के नाम से विख्यात है। यहां आदि शक्ति माता विंध्यवासिनी अपने पूरे शरीर के साथ विराजमान हैं जबकि देश के अन्य शक्तिपीठों में सती के शरीर का एक-एक अंग गिरा है। 
 
ऋषियों मुनियों के लिए सिद्धपीठ आदिकाल से सिद्धि पाने के लिए तपस्थली रहा है। संसार का एक मात्र ऐसा स्थल है जहां मां सत, रज, तम गुणों से युक्त महाकाली, महालक्ष्मी, और अष्टभुजा तीनों रूप में एक साथ विराजती हैं। मंदिर के तीर्थ पुरोहित कमला शंकर मिश्र ने बताया मां के इस दरबार से जुड़ी कई अनसुनी बाते हैं जो मां कि महिमा को बताती हैं। 
PICS: धरती के केंद्र में है यह चमत्कारी मंदिर, जानिए 10 रहस्यमयी बातें!

1- सिद्धपीठ विंध्याचल आदिकाल से ऋषि मुनियों का साधना स्थल रहा है। पृथ्वी के केंद्र बिंदु पर विराजमान आदि शक्ति के धाम में देव दानव व मानवों ने तपस्या कर सिद्धि प्राप्त की है। देवासुर संग्राम के दौरान त्रिदेवों ने तप कर देवी से वरदान प्राप्त किया था। आज भी देवी के गर्भ गृह से निकलने वाले जल से भरे कुण्ड में ब्रह्मा, विष्णु एवं महेश तपस्या कर रहे हैं। 
PICS: धरती के केंद्र में है यह चमत्कारी मंदिर, जानिए 10 रहस्यमयी बातें!

2- भगवान सूर्य की परिक्रमा को रोकने वाले विंध्य पर्वत की हजारों किलोमीटर की विशाल श्रृंखला में विंध्य पर्वत एवं पतित पावनी गंगा का संगम इस क्षेत्र में होता है।
3- वास्तुशास्त्र के अनुसार ईशान कोण धर्म का स्थान है। धरा के मध्य एवं विंध्य पर्वत के ईशान कोण पर आदि शक्ति लक्ष्मी स्वरुपा माता विंध्यवासिनी स्वर्ण कमल पर विराजमान होकर भक्तों का कल्याण कर रही है। 
4- धरा के मध्य केंद्र बिन्दु पर विराजमान माता विंध्यवासिनी के धाम से ही भारतीय मानक समय का निर्धारण होता है। माता विंध्यवासिनी को बिन्दुवासिनी भी कहा जाता है।
5- धरती के अन्य स्थानों पर शिव प्रिय सती का एक-एक अंग जहां गिरा वह शक्तिपीठ कहा जाता है। जबकि विंध्य धाम में आदि शक्ति सम्पूर्ण अंगो के साथ विराजमान हैं, इसलिए विंध्य धाम को सिद्धपीठ कहा गया है। 
6- शक्ति संतुलन करने वाली विंध्यवासिनी देवी के स्वर्ण पताका पर प्रकाश बिखेरने वाले भगवान सूर्य एवं शीतलता प्रदान करने वाले भगवन चन्द्रदेव एक साथ विराजमान हैं। 
 7- विंध्य क्षेत्र में आदि शक्ति सत, रज, तम गुणों से युक्त महाकाली (कालीखोह), महालक्ष्मी (विंध्यवासिनी), महासरस्वती (अष्टभुजा) तीनों रूप में विराजमान हैं। आदि शक्ति को घंटे की ध्वनि अति प्रिय है। इसलिये यह तंत्र साधना का अद्भुत पीठ हैं। भक्तों के कल्याण के लिए मां चार रूपों में चारो दिशाओं में मुंह करके माता विंध्यवासिनी, माता काली, माता अष्टभुजा व मां तारा के रूप में विराजमान हैं। 
 8- आदि शक्ति माता विंध्यवासिनी के हजारवें अंश से माता अष्टभुजा का अवतरण हुआ। मार्कंडेय पुराण में देवताओं के प्रश्नों का उत्तर देते हुए देवी ने कहा है कि "नंदगोप गृहे जाता यशोदा गर्भ संभवा, ततस्तौ नाशयिश्यामी विन्ध्याचल निवासिनी" कंस के विनाश को माता का अवतरण हुआ है।  sabhar : bhaskar.com

Read more

अब रोबोट ब्वॉय करेगा आपके काम

0



लंदन। वह दिन दूर नहीं जब बुजुर्ग और बीमार लोगों को अपने कामों के लिए किसी पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं होगी। वैज्ञानिक एक ऐसा रोबोट बनाने में जुटे हैं जो इंसान के रोजमर्रा के कामों में मदद कर सकेगा। इस रोबोट में कृत्रिम मांसपेशियां लगाई जाएंगी ताकि वह आसानी से चल फिर सके।
यूनिवर्सिटी ऑफ ज्यूरिख के आर्टिफिशल इंटेलीजेंस लैब के इंजीनियरों के मुताबिक 1.2 मीटर लंबा यह रोबोट बच्चे की तरह दिखेगा। इसे रोबाय नाम दिया है। रोबोट में लगाई जाने वाली कृत्रिम शिराओं को नौ महीने में तैयार कर लिया जाएगा। रोबोट के हाथों को बनाने का काम पहले ही शुरू हो चुका है। इसकीत्वचा को नरम रखा जाएगा ताकि छूने में सहज महसूस हो। इसका अनावरण मार्च में ज्यूरिख में रोबोट ऑन टूर नामक कार्यक्रम में किया जाएगा।
डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक, शोधकर्ताओं ने उम्मीद जताई है कि रोबाय सर्विस रोबोट का ब्यू प्रिंट बनेगा। सर्विस रोबोट वह मशीन होती हैं जो कुछ हद तक मनुष्य के कामों को स्वतंत्रतापूर्वक करने में सक्षम होती हैं। शोधकर्ताओं ने कहा कि सर्विस रोबोट लोगों के साथ रहने की जगह को साझा करते हैं इसलिए इनका पर्यावरण के अनुकूल और सुरक्षित होना अत्यंत महत्वपूर्ण है। sabhar : jagaran.com

Read more

अजूबा है दो सिर वाला कछुआ

0


Two Headed Turtle

दुनिया में हर जीव की लगभग एक सी बनावट होती है। पर वही बनावट जब अलग हो जाती है तो वह वाकई में अजूबा होता है। पूरी दुनिया में इंसान से लेकर जानवर तक हर किसी का एक ही सर होता है और चार पांव जिसे हम इंसानों ने अपनी बुद्धि से दो पांव और दो हाथ बना लिए। पर सिर तो फिर भी जनाब हर किसी का एक ही होता है। अब अगर एक सिर की जगह दो सिर वाला इंसान तो छोड़ दीजिए, कोई भी जानवर, पक्षी भी आप देखेंगे तो अजूबा ही कहेंगे। पर कई बार ऐसे अजूबे प्यारे भी होते हैं।
अमेरिक के टेक्सास में प्रकृति का एक ऐसा ही अजूबा आजकल लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। टेक्सास के सान एंटोनियो चिडि़याघर में 25 जून को एक दो सिर वाला कछुआ पैदा हुआ है। यह छोटा सा, प्यारा दो सिर वाला कछुआ अजूबा सा दिखने के साथ ही हर किसी को लुभा रहा है। लोग इसे देखने के लिए सान एंटोनियो चिडि़याघर आ रहे हैं। चिडि़याघर के कर्मचारियों ने इसका नाम थेल्मा और लुईस रखा है। अन्य कछुओं की तरह यह भी पानी और जमीन पर एक सा रह सकता है, चल सकता है और तैर भी सकता है। विशेषज्ञों ने इसे पूरी तरह स्वस्थ बताया है।sabhar : jagaran.com

Read more

राजस्थान में दो सिर वाला बच्चा

0

Two headed baby

विज्ञान की दुनिया में हम हर चीज के वैज्ञानिक कारण ढूंढ़ते हैं पर कभी-कभी कुछ ऐसा घटता है जिसका वैज्ञानिक कारण ढूंढ़ना मुश्किल हो जाता है। प्रकृति में लगभग हर जीव की एक निश्चित संरचना है। जानवरों के चार पैर ही होते हैं, इंसानों के दो ही हाथ और दो पैर। पर जानवर हो या इंसान हर किसी का एक ही सिर होगा। फिर भी कभी-कभी प्रकृति के कुछ अजूबे दिख ही जाते हैं। हालांकि वह अजूबा न होकर आम जीवन में एक त्रासदी बन जाता है। राजस्थान के जयपुर में इसी तरह का एक अजूबा बच्चा पैदा हुआ है। हाथ पैरों के साथ ही इसके दो सिर हैं। राजस्थान के टोंक जिले में 24 जुलाई को इस बच्चे का जन्म हुआ है।
डॉक्टरों के मुताबिक बच्चे के दो सिर होने के साथ ही रीढ़ की हड्डियां, तंत्रिका तंत्र भी दो हैं। डॉक्टरों के मुतबिक विज्ञान की दुनिया में भी ऐसे मामले अजूबे ही होते हैं जो बहुत कम, शायद ही कभी देखने को मिलते हैं। इस स्थिति को डॉक्टरी भाषा में डाइसेफैलिक पैरापैगस कहते हैं। पूरे विश्व में 500 सालों में अब तक मात्र 600 ऐसे बच्चे पैदा हुए हैं। भारत में यह दूसरा बच्चा है। इससे पहले ऐसा ही दो सिर वाला बच्चा जबलपुर में पैदा हुआ था पर जन्म के कुछ दिनों बाद ही उसकी मौत हो गई थी। ऐसे बच्चों को बचाना मुश्किल होता है पर डॉक्टर अभी बच्चे को अपनी देखरेख में रखे हुए हैं।n sabhar : jagaran.com

Read more

मंगलवार, 8 अक्टूबर 2013

दाढ़ी या खाने की प्लेट

0

Isaiah Web

शौक एक बड़ी चीज है। सजना भी शौक का एक हिस्सा है। औरतों के अपने शौक हैं आदमियों के अपने। पर आदमियों के शौक भी बड़े अजीब हैं। किसी को लंबी मूंछों का शौक है तो किसी को लंबी दाढ़ी का। कोई लड़कियों की तरह लंबे बाल रखता है तो कोई अपनी दाढ़ी से ट्रक-ट्रैक्टर ही खींच लेता है। सब शौक की बात है। पर कोई अपनी दाढ़ी के साथ कितने स्टाइल आजमा सकता है आप सोच भी नहीं सकते। जनाब सिर्फ शौक नहीं, दिमाग की भी बात है। इन जनाब को देखिए जिन्होंने दाढ़ी-मूंछों में ही अपना पूरा डाइनिंग टेबल और कप-प्लेट बना रखा है।
इनका नाम है यशायाह वेब। इन्हें दाढ़ी रखने का बड़ा शौक है। पर इनकी दाढ़ी देखकर आप हैरान रह जाएंगे और आम आदमियों की तरह इनकी दाढ़ी देख आप नजर भी नहीं फेर पाएंगे। लड़के-लड़कियों को दोनों को ही आज स्टाइलिश्ड बाल रखने का बड़ा शौक है पर ये जनाब इन सबसे अलग हैं। इन्हें अपने दाढ़ी को स्टाइलिश बनाने का शौक है। इनके इसी शौक का नतीजा है कि आज इनकी दाढ़ी हर किसी के आकर्षण का केंद्र है। पर ऐसा किया क्या इन्होंने कि इनकी दाढ़ी इतनी चर्चा में है? दरअसल यशायाह वेब ने अपनी दाढ़ी को कुछ इस प्रकार बनाया है कि वे इसमें खाने की कोई भी चीज रख सकते हैं। अब वो नूडल हो या कोल्ड ड्रिंक की केन या बॉटल या पिज्जा-बर्गर वेब की दाढ़ी में सब कुछ समा सकता है। अपने पसंदीदा खाने के सामान को हमेशा अपनी दाढ़ी में रखकर वे चल सकते हैं और लोगों के लिए ये आकर्षण का केंद्र है।
यशायाह वेब को स्टाइलिश्ड दाढ़ी रखने का क्रेज है और इसमें उनकी मदद करती हैं उनकी पत्‍‌नी एंजेला। चित्र में यशायाह की एक भंगिमा आप भी देख सकते हैं। शायद इसे देखकर आप कह उठें कि कंजूसी की हद है.अब लोग दाढ़ी को ही प्लेट बना लेते हैं। लेकिन यह कंजूसी नहीं जनाब शौक की बात है! आप भी कोई अजूबा शौक पालिए और चर्चा में छा जाइए। sabhar : jagaran.com

Read more

मां व मौसी ने ही कराया गैंगरेप

0

gang rape


पानीपत, उपमुख्य संवाददाता। मां और मौसी ने कोल्ड ड्रिंक में नशीला पदार्थ पिला एक नवविवाहिता को पांच दरिंदों के हवाले कर दिया। जींद में सामूहिक दुष्कर्म के दो दिन बाद पीड़िता को होश आया तो फोन पर मामले की जानकारी उसने पति को दी। पुलिस ने पीड़िता की शिकायत पर मां, मौसी सहित सात आरोपियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
पढ़ें: पहले दोस्ती फिर शादी का झांसा देकर युवती से रेप
मामले के मुताबिक जींद की भटनागर कालोनी निवासी 25 वर्षीय सुष्मिता (परिवर्तित नाम) की शादी चार माह पूर्व पानीपत की बंसी कालोनी में हुई। उसकी यह दूसरी शादी है। 3 अक्टूबर की शाम वह सब्जी लेने आठ मरला चौक पर गई थी। इस दौरान मौसी ने फोन कर पूछा कि कहां हो? बताने पर कुछ देर बाद मौसी और मां कार लेकर चौक पर पहुंचीं और उसे अपने साथ जींद ले गई। सुष्मिता के मुताबिक मौसी ने उसे पीने को कोल्ड ड्रिंक दी। इससे उस पर बेहोशी छाने लगी। इसका फायदा उठाकर मौसी के घर में पांच लोगों ने उससे दुष्कर्म किया। 5 अक्टूबर को होश आने पर वह वहां से निकली और अपने पति को फोन किया। इसके बाद मामले की शिकायत पुलिस को की गई।
मंगलवार को आठ मरला चौकी प्रभारी कृष्ण कुमार महिला पुलिस के साथ पीड़िता को मेडिकल जांच के लिए सिविल अस्पताल लाए। मॉडल टाउन थाने में पीड़िता की मां और मौसी पर साजिश रचने व नशीला पदार्थ पिलाने तथा पांच आरोपियों जींद के रणबीर, सुरेंद्र, सुरेश, जय भगवान और गजे सिंह पर दुष्कर्म व अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।
कई बार धकेला देह व्यापार में
सुष्मिता का आरोप है कि उसकी मां और मौसी पहले से ही देह व्यापार में लिप्त हैं। शादी से पहले भी मां ने उससे कई बार देह व्यापार कराया। पुलिस की कार्रवाई से बचने के लिए उसकी मां जींद में ही रहने वाली बहन के पास रहती है। उसने कहा कि आरोपियों ने राज जाहिर करने पर उसे जान से मारने की धमकी भी दी।
sabhar : jagaran.com

Read more

अमेरिका में टीचर ने कराया था न्यूड फोटोशूट, क्लास में बच्चे देख रहे हैं वीडियो

0

अमेरिका में टीचर ने कराया था न्यूड फोटोशूट, क्लास में बच्चे देख रहे हैं वीडियो
अमेरिका में एक हाई स्कूल स्पैनिश टीचर को उस समय शर्मिदगी उठानी पड़ी, जब उसका अतीत ही उसके सामने आ खड़ा हुआ। टेक्सास के डालास में टाउन व्यू मैग्नेट हाई स्कूल की स्पैनिश भाषा की 21 वर्षीय टीचर क्रिस्टी निकोल डिवासी ने तीन साल पहले प्ले ब्वॉय के मैगजीन के लिए न्यूड पोज दिए थे। उस समय वह मात्र 18 साल की थी, लेकिन अब तीन साल बाद उनका भेद खुल गया है। बच्चों के मां-बाप ने स्कूल से गुस्सा जाहिर करते हुए क्रिस्टी को निकाल देने का अल्टीमेटम दिया है।

क्रिस्टी ने सेक्सी पोज वाली तस्वीरें और वीडियो इन दिनों स्कूल के सभी छात्रों के बीच मशहूर हो रहे हैं। इसमें उनके सामने बिना कपड़े वाले पोज, विंटर बनी गीयर और लांजिरी पहने हुई तस्वीरें और लेस्बियन सेक्सी सीन ऑनलाइन मौजूद हैं। एक सेक्स वीडियो में क्रिस्टी से उसकी हॉबीज के बारे में पूछा जाता है तो वह बताती है हंटिंग और शूटिंग। आगे बताती है कि उसने पिछले साल की एक बतख को मारा है। फिर वह कहती है कि स्पेनिश पढ़ रही है। आगे वह स्पेनिश टीचर बनना चाहेगी।

एक मां-बाप का कहना है कि क्रिस्टी का प्लेब्वॉय में न्यूड फोटोशूट करना और फिर टीचर बन जाना उसके अतीत से छुटकारा नहीं दिला सकता है। यह हमारे बच्चों पर गलत प्रभाव डालेगा। वहीं, दूसरे मां-बाप ने कहा कि उनके 16-17 साल के बेटे अपनी टीचर के न्यूड फोटो देख रहे हैं। इस मामले पर डालास स्कूल डिस्ट्रिक्ट ने कुछ भी कहने से मना कर दिया है। उन्होंने इसे निजी मामला करार दिया है। उन्होंने साफ कर दिया है कि जब यह फोटोशूट किया गया था, तब वह स्कूल में टीचर नहीं थी। 

अमेरिका में टीचर ने कराया था न्यूड फोटोशूट, क्लास में बच्चे देख रहे हैं वीडियो

अमेरिका में टीचर ने कराया था न्यूड फोटोशूट, क्लास में बच्चे देख रहे हैं वीडियो

अमेरिका में टीचर ने कराया था न्यूड फोटोशूट, क्लास में बच्चे देख रहे हैं वीडियो

sabhar : bhaskar.com

Read more

दो अमेरिकी और एक जर्मन वैज्ञानिक को मिला चिकित्सा के क्षेत्र में नोबेल

0

स्टॉकहोम. चिकित्सा के क्षेत्र में वर्ष 2013 का प्रतिष्ठित नोबेल पुरस्कार अमेरिकी वैज्ञानिक जेम्स रोथमैन, रैंडी डब्ल्यू शेकमैन और जर्मनी के वैज्ञानिक थॉमस श्यूडोफ को संयुक्त रूप से दिए जाने की सोमवार को घोषणा की गई। नोबेल फाउंडेशन ने पुरस्कारों की घोषणा करते हुए कहा कि इन्हें शरीर के अंदर कोशिकाओं के व्यवहार और संचार को नियमित करने वाली मशीनरी संबंधी खोज के लिए इस पुरस्कार के लिए चुना गया है।
इन्होंने अपने शोध में बताया है कि हर कोशिका अपने आप में एक कारखाना है। यह कई तरह के अणुओं का उत्पादन करती है। इन्हें शरीर में एक जगह से दूसरी जगह भेजती है। जैसे इंसुलिन का रक्त में छोड़ा जाना या तंत्रिकाओं में सूचनाओं का प्रवाह। ये अणु शरीर में छोटे-छोटे पैकेटों के रूप में भेजे जाते हैं। इन्हें वेस्किल कहते हैं। तीनों वैज्ञानिकों ने उस सिद्धांत का पता लगाया है, जो इन वेसिकल्स के संचार को नियमित करता है और अणुओं को उनकी सही जगह पर पहुंचाता है।
दो अमेरिकी और एक जर्मन वैज्ञानिक को मिला चिकित्सा के क्षेत्र में नोबेल

अमेरिका के कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के रैंडी डब्ल्यू शेकमैन ने वेसिकल्स के संचार के लिए जरूरी जीन की खोज की है। अमेरिका के न्यू हेवन में येल विश्वविद्यालय के जेम्स रोथमैन ने उस प्रोटीन प्रकिया का पता लगाया है, जो वेसिकल्स का उनकी लक्षित कोशिकाओं द्वारा अवशोषण सुनिश्चित करता है। जर्मनी में पैदा हुए अमेरिका के स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के थॉमस श्यूडोफ ने इस बात का पता लगाया है कि किस प्रकार वेसिकल्स को अपने अणु लक्षित कोशिकाओं को सौंपने का संकेत मिलता है।


दो अमेरिकी और एक जर्मन वैज्ञानिक को मिला चिकित्सा के क्षेत्र में नोबेल


इस पूरी प्रक्रिया में किसी तरह की गड़बड़ी होने के कारण तंत्रिका संबंधी बीमारियां, मधुमेह और शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली संबंधी बीमारी होती है। कोरोलिंस्का इंस्टीट्यूट में बच्चों के कैंसर विषय के प्रोफेसर जैन इग्ने हेंटर ने कहा कि इन खोजों का मानव शरीर को समझने में काफी महत्व है। तंत्रिका तंत्र, मधुमेह और प्रतिरक्षा संबंधी बीमारियों को समझने में भी ये मददगार होंगी। (तस्वीर में: थॉमस श्यूडोफ)
दो अमेरिकी और एक जर्मन वैज्ञानिक को मिला चिकित्सा के क्षेत्र में नोबेल


sabhar : bhaskar.com

Read more

Ads

 
Design by Sakshatkar.com | Sakshatkartv.com Bollywoodkhabar.com - Adtimes.co.uk | Varta.tv