मंगलवार, 8 जनवरी 2013
ये पांचों ऐप्स हैं या इंसान की जिंदगी बदलने वाले जादूगर...हैरान करने वाली हैं इनकी खूबियां
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आज की तारीख में आपकी करीब-करीब हर जरूरत को पूरा करने के लिए
ऐप मौजूद हैं। हम ऐसे ही पांच ऐप्स पर नजर डालते हैं, जिन्होंने भारतीय
बाजार में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है।
दस वर्षीया श्वेता ने गणित में अपने खराब प्रदर्शन में शानदार सुधार
किया है। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि इसके लिए उसे किसी ट्यूटर ने नहीं,
बल्कि एक मोबाइल अप्लीकेशन ‘टैबटर’ से सहायता मिली। ‘टैबटर’ ऐपल के आईओएस
प्लेटफार्म पर चलने वाला एक विशेष एजुकेशनल ऐप है। इस ऐप को डेवलप करने
वाली कंपनी ‘प्राजऐज’ उन हजारों कंपनियों में से एक है जो देश में स्मार्ट
मोबाइल फोन, टैबलेट्स और अन्य गैजेट्स के बढ़ रहे बाजार में अपने लिए
संभावनाएं तलाश रहीं हैं।
स्मार्टफोन धारकों की बढ़ती संख्या ने इस बाजार को और आकर्षक बना दिया
है। एक अनुमान के मुताबिक 2016 तक देश, दुनिया के अग्रणी ऐप बाजारों में
शामिल हो जाएगा। भारत, उस समय तक दुनिया की सबसे बड़ी ताकत अमेरिका को भी
पीछे छोड़ दे तो कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए। इंटरनेट और मोबाइल एसोसिएशन
ऑफ इंडिया के मुताबिक वर्तमान में देश में ऐप का बाजार करीब 1800 करोड़
रुपए का है।
टैबटर
कठिन सवाल करे चुटकियों में हल
बिट्स पिलानी और आईआईटी के पूर्व छात्रों ने टैबटर ऐप को विकसित किया
है, जिसके एडॉप्टिव लर्निग सॉफ्टवेयर को अमेरिका और भारत के 14 स्कूलों के
छात्र इस्तेमाल कर रहे हैं। प्राजऐज नामक कंपनी ने इस ऐप की डिजाइन को अपने
चेन्नई और बेंगलुरू स्थित डेवलपमेंट सेंटर में तैयार किया है। जीईएआर
इनोवेटिव इंटरनेशनल स्कूल में गणित की टीचर संध्या खांडेकर कहती हैं, ‘हम
भी बच्चों की तरह ही उत्साहित हैं।’ बेंगलुरू के इसी स्कूल में बच्चे
आईपैड्स के जरिए पढ़ाई करते हैं। इस स्कूल के संस्थापक और चेयरमैन एम.
श्रीनिवासन का कहना है, ‘यहां तक कि जो छात्र विषय में कमजोर हैं वो भी
तेजी से प्रॉब्लम सॉल्व करने लगे हैं।’ उनका कहना है कि हमारा उद्देश्य हर
किसी को अपना लक्ष्य खुद हासिल करने के योग्य बनाना है। ‘हम किसी छात्र पर
उसी गति और मार्ग पर चलने के लिए दबाव नहीं बनाते जिस मार्ग और गति से
दूसरे जाते हैं।’ इस स्कूल की योजना अन्य विषयों जैसे अंग्रेजी और विज्ञान
को भी इस ऐप में कस्टमाइज करने की है। प्राजऐज एक कस्टमाइज वर्शन क्रिएट कर
उसे मोनेटाइज करना चाहता है।
म्यूजिगुरु
यात्रा के दौरान सिखाए संगीत
काम के दबाव में अक्सर यात्रा करने वाले पेशेवरों को ध्यान में रखकर
इस ऐप को बनाया गया है। ऐसे लोगों को अपनी पसंद की चीजों के लिए समय नहीं
मिलता। म्यूजिगुरु एक मोबाइल अप्लीकेशन है, जिसे बेंगलुरू की एक कंपनी
लेविटम सॉफ्टवेयर सिस्टम ने लॉन्च किया है। यह एक वीडियो आधारित लर्निग
प्लेटफार्म है, जहां यूजर्स को संगीत सिखाया जाता है। आईओएस प्लेटफार्म पर
आधारित यह ऐप यूजर्स को यात्रा करते समय या घर से बाहर रहते हुए म्यूजिक
सीखने का मौका देता है। इसके सह संस्थापक अरविंद कृष्णास्वामी के मुताबिक
यह उन म्यूजीशियन और टीचर्स के लिए भी यह शानदार ऐप है जो अपना कंटेंट और
ब्रांड बेचना चाहते हैं। इस ऐप को डेवलप करने वालों की योजना, इसमें संगीत
देने वाले म्यूजीशियन को कमाई बांटना हैं। इनकी योजना कंटेंट को एक्सेस
करने के लिए विभिन्न म्यूजिक कॉलेजों के साथ समझौता करने की भी है।
जाना केयर
मधुमेह के मरीजों की करे जांच
जाना केयर को विकसित करने का खर्च मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ
टेक्नोलॉजी (एमआईटी) और हार्वड बिजनेस स्कूल के एक पूर्व छात्रों के संगठन
ने उठाया था। यह मधुमेह के मरीजों की सहायता के लिए विकसित किया गया एक
शानदार ऐप है। बेंगलुरू स्थित सेंटर में डेवलप किए गए इस ऐप से मधुमेह के
मरीज अपना ब्लड ग्लूकोज लेवल और हेल्थ पैरामीटर को एक सेंसर में प्लगइन कर
चेक कर सकते हैं। आपके मोबाइल फोन के लिए इस सेंसर को जाना केयर ने ही
डेवलप किया है। इस ऐप ने आपके स्मार्टफोन को एक बेहद सस्ती जांच डिवाइस में
बदल दिया है। हार्वर्ड बिजनेस स्कूल के पूर्व छात्र सिद्धांत जेना और
एमआईटी के रिसर्चर माइकल डेपा ने इस ऐप के फंडिंग संयुक्त रूप से की है। इस
कंपनी के सलाहकार बोर्ड में हार्वर्ड बिजनेस स्कूल के प्रोफेसर तरुण खन्ना
और नारायण हृदयालय के संस्थापन और जाने माने हृदय रोग विशेषज्ञ देवी
शेट्टी सलाहकार हैं। कंपनी की योजना इस साल के शुरुआत में इस प्रोड्क्ट को
बाजार उतारने की है। इस तरह अगर आप या आपके घर में कोई व्यक्ति मधुमेह रोग
से पीड़ित है तो उन्हें हर समय ग्लूकोज लेवल की जांच करवाने के लिए किसी
पैथोलॉजी जाने की जरूरत नहीं है।
शॉप सर्किल
खरीदारी बनाए किफायती
इस ऐप को बेंगलुरू की एक डाटा कंपनी एक्टिव क्यूब्स ने डेवलप किया है।
इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं को किसी उत्पाद की कीमत के बारे में जानकारी
देना है। इस तरह इस ऐप की मदद से शॉपिंग काफी आसान बन जाती है। इस ऐप की
मदद से कोई उपभोक्ता अपने 10 किलोमीटर के दायरे में उस विशेष उत्पाद पर मिल
रहे ऑफर्स को देख सकता है। एक्टिव क्यूब्स के सीईओ और सह संस्थापक राजेश
वैरियर का कहना है कि अब ग्राहकों को उत्पाद की कीमत पता करने के लिए अपना
बाजार की हर दुकान पर जाकर कीमती समय खर्च करने की जरूरत नहीं है। इस ऐप की
मदद से आप घर बैठे विभिन्न खुदरा स्टोर्स से प्राप्त कीमत की तुलना कर
अपने लिए किफायती स्टोर की पहचान कर सकते हैं, जिसके बाद आप सीधे उक्त
दुकान से सामान मंगवा सकते हैं। हाल में बाजार में आए इस ऐप को कई हजार
लोगों ने डाउनलोड किया है। इस ऐप को बनाने वाली कंपनी का उद्देश्य रिटेलर्स
को इस ऐप से जोड़कर विज्ञापन के जरिए पैसा कमाना है।
तवांग
संगीत का शानदार खजाना
तवांग को डेवलप करने वालों के मुताबिक अच्छी गुणवत्ता के म्यूजिकल
कंटेंट को वैध तरीके से उपलब्ध कराना ही, इस ऐप को इस समूह के अन्य ऐप्स से
अलग करता है। बीते साल नवंबर में इस ऐप को लॉन्च किया गया, जिसे साउंड
वेंचर्स ने डेवलप किया है। ऐप के जरिए दुनिया के लोगों को अच्छा म्यूजिक
उपलब्ध कराने के लिए जाने-माने 50 संगीतकारों से उनके संगीत को उपभोक्ताओं
तक पहुंचाने के लिए समझौता किया गया है। साउंड वेचर्स के सह संस्थापक
विष्णु रानेड के मुताबिक यह ऐप ऐसा म्यूजिक आपके पास पहुंचाता हैं जो आसानी
उपलब्ध नहीं हैं। इस फ्री ऐप की मदद से आप छह हजार से अधिक अलबम के 75
हजार से अधिक गाने सुन सकते हैं। इन गानों में चार हजार से अधिक कलाकार
शामिल हैं। डेवलपर्स की योजना इस ऐप में गानों की संख्या एक लाख से अधिक
करने की है। साथ ही कंपनी नए साल में इस ऐप के नए वर्शन भी ला सकती है। ऐसे
में अगर आप खास तरह के म्यूजिक को पसंद करते हैं तो इस ऐप को आजमा सकते
हैं।
sabhar : bhaskar.com
मंगलवार, 6 नवंबर 2012
Vigyan India.com: पांच तरकीब जो बदल देंगी आपकी दुनिया
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नवंबर 06, 2012 in
Vigyan India.com: पांच तरकीब जो बदल देंगी आपकी दुनिया
आईबीएम वैसे तो आधुनिक कंप्यूटरों और तकनीक के लिए मशहूर है, लेकिन अब यह कंपनी पांच ऐसी नई तरकीब बाजार में ला रही है जिससे इंसान की जिंदगी बदल सकती है.

आईबीएम वैसे तो आधुनिक कंप्यूटरों और तकनीक के लिए मशहूर है, लेकिन अब यह कंपनी पांच ऐसी नई तरकीब बाजार में ला रही है जिससे इंसान की जिंदगी बदल सकती है.

रविवार, 4 नवंबर 2012
102 की उम्र में बने बाप के पास आया अमेरिका से लिफाफा, क्या था अंदर
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नवंबर 04, 2012 in
खरखौदा। 102 वर्ष उम्र में दूसरी बार पिता बनने का सौभाग्य प्राप्त कर चुके रामजीत राघव को दूसरे देश से आर्थिक मदद मिली है। रामजीत बेहद गरीब है और तंगहाली में जीवन व्यतीत कर रहा है। उसे अमेरिका की बनिता स्प्रिंग हिस्टॉरिकल सोसाइटी की ओर से 10 डालर की मदद भेजी गई है।
गुरुवार को खरखौदा के वार्ड संख्या 9 में रहने वाले रामजीत के पास डाकिया पहुंचा और उसे एक लिफाफा थमाते हुए बताया कि उसे अमेरिका से किसी ने पत्र भेजा है। जिसे खोलकर देखा गया तो उसमें अमेरिका की बनिता स्प्रिंग हिस्टोरिकल सोसाइटी की ओर से दस डालर भेजे गए थे। रामजीत ने अपने दूसरे बेटे का नाम रणजीत रखा है। दो वर्ष पहले रामजीत राघव के पहले बेटे विक्रमाजीत का जन्म हुआ था गत 5 अक्टूबर को शहर के सरकारी अस्पताल में उसकी पत्नी शकुंतला ने दूसरे स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया तभी से यह बात लोगों के बीच में चर्चा का विषय बनी हुई है। वहीं रामजीत के शाकाहारी होने के चलते जानवरों के लिए काम करने वाली संस्था पेटा भी रामजीत का साक्षात्कार ले चुकी है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, आस्ट्रेलिया की एबीसी न्यूज रामजीत राघव पर डॉक्यूमेंट्री फिल्म बनाने की शुरुआत कर चुकी है और इसकी शूटिंग खरखौदा में हो रही है।
रामजीत राघव के पास अद्भुत सेक्स पावर है, इसका लोहा तो दुनिया मान चुकी है। रामजीत अपनी उम्र को 100 साल से ऊपर का बताते हैं। अभी भारतीय मीडिया में आई खबरों में भी उनको 102 साल का बताया गया है जबकि इंटरनेशनल मीडिया उनकी उम्र 96 साल मानती है।
लेकिन रामजीत की उम्र 96 साल मानने के बावजूद वह विश्व के सबसे वृद्ध पिता हैं। उन्होंने 2010 में पहले बच्चे का बाप बनकर यह वर्ल्ड रिकॉर्ड स्थापित किया था। अब, 2012 में दूसरे बच्चे का पिता बनकर उन्होंने अपना ही रिकॉर्ड तोड़ा है।
रामजीत राघव दो बेटों को पाकर बहुत खुश हैं। रामजीत का कहना है कि वह बेहद स्वस्थ महसूस करते हैं और वाइफ के साथ सेक्स लाइफ को इंज्वाय करते हैं वह हसबैंड और वाइफ के बीच रेगुलर सेक्स को मैरिज लाइफ के लिए बहुत जरूरी मानते हैं। रामजीत हरियाणा के सोनीपत में झोपड़ी में बीवी-बच्चों के साथ रह रहे हैं और खेतों में काम करके गुजारा चलाते हैं।
रामजीत की बीवी शकुंतला कहती हैं कि वह मुझे बिल्कुल भी बूढ़े नहीं लगते। वह 25 साल के मर्द की तरह मुझसे प्यार कर सकते हैं और सारी रात जारी रह सकते हैं। वह बेहतरीन पिता हैं। रामजीत का कहना है कि उनको काम करना अच्छा नहीं लगता। लेकिन चूंकि उनके बच्चे हैं इसलिए उनकी परवरिश के लिए खेतों में जाकर काम करना पड़ता हैं। रामजीत का कहना है कि वे सुबह में छह बजे उठते हैं और रोज लगभग नौ-दस घंटे काम करते हैं। वह एक सप्ताह में लगभग हजार रुपए कमा लेते हैं।
वह अपनी बीवी के साथ खुशी-खुशी जीवन गुजार रहे हैं। बच्चों के साथ वह बहुत खेलते हैं। जहां वह काम करते हैं वहां अपनी बीवी-बच्चों को ले जाते हैं। वह रसोई बनाने जैसे घरेलू और अन्य कामों में अपनी बीवी की मदद करते हैं। अपने बच्चों की परवरिश में भी वह बढ़-चढ़ कर भाग लेते हैं। अगर बच्चा रोता है तो वह गोद में उसे लेकर खेलाते हैं। उसको खाना खिलाते हैं। कपड़े पहनाते हैं।
रामजीत का कहना है कि बच्चा जब रोता है तो उनको पीड़ा होती है। वे अपनी जवानी में बहुत यकीन करते हैं। तीन किलो दूध के साथ आधा किलो मक्खन रोज खाते हैं। रामजीत जवानी में कुश्ती लड़ते थे और उनको यह भरोसा है कि वह बच्चों को जवान होते देख सकेंगे और मौत उनको छू नहीं सकती। उन्होंने एक अजीब बात यह कही थी कि उनको कोई काला सांप काट ले तभी वह मरेंगे।
उन्होंने पिछले साल बातों-बातों में मीडिया से कहा कि मुझे दस साल बाद देखने आना, मैं जैसा आज हूं, वैसा ही मिलूंगा। ऐसा उन्होंने दिसंबर 2010 में कहा था। उन्होंने अपने डाइट के बारे में कहा कि वह रोज गाय का दूध पीते हैं और खाने में हरी सब्जियां इस्तेमाल करते हैं। खेतों में जमकर पसीना बहाने की वजह से भी उनका शरीर आज तक स्वस्थ है। खरखौदा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात डॉक्टर हरेन्द्र कहते हैं कि मेडिकल साइंस में ऐसे मामले बहुत कम हैं, जहां इस उम्र में जाकर कोई पुरुष पिता बना हो।
रामजीत राघव जब 2010 में पहले बच्चे के बाप बने थे तब भी इंटरनेशनल मीडिया ने उनको कवर किया था। डेलीमेल, मेट्रो और द सन जैसे इंटरनेशनल वेबसाइट्स पर रामजीत के बारे में खबरें प्रमुखता से छपी थीं। उन्होंने उस साल सबसे वृद्ध पिता होने का विश्व रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया था।
यह रिकॉर्ड उनसे पहले एक भारतीय किसान नानु राम जोगी के नाम था जो 90 साल की उम्र में 2007 में 21वें बच्चे के बाप बने थे।
2012 में इसी महीने जब वह दूसरे बच्चे के बाप बने तो फिर से वह इंटरनेशनल मीडिया में छाए।
वेबसाइट इंडीपेंडेंट डॉट को डॉट यूके ने उनके बारे में लिखा कि नौ दशकों तक बैचलर रहने के बाद रामजीत ने दूसरे बच्चे को जन्म देकर अपना ही वर्ल्ड रिकॉर्ड तोड़ा है।
वेबसाइट के अनुसार, रामजीत अपनी बीवी से 17 साल पहले हरियाणा में सोनीपत के खारखोदा में मिले थे। रामजीत का कहना है कि वह शराब से आजीवन दूर रहे, यही उनके सेक्स पावर का राज है।
रामजीत के बारे में इंटरनेशनल वेबसाइट मिरर डॉट को डॉट यूके ने लिखा है कि दूसरी बार रामजीत 96 साल की उम्र में दुनिया के ओल्डेस्ट डैड बनने में सफल हुए हैं। रामजीत की बीवी शकुंतला, जो उनसे उम्र में आधी है, ने इसी महीने दूसरे बच्चे को जन्म दिया।
वेबसाइट के अनुसार, पड़ोसी उनसे जलते हैं और उनके सेक्स पावर का राज पूछते हैं। रामजीत दूसरे बच्चे को ईश्वर की कृपा मानते हैं। 'ईश्वर चाहते थे कि मुझे दूसरा बच्चा हो।'
2010 में पहले बच्चे के जन्म के बाद रामजीत ने कहा था कि उनको एक से ज्यादा बच्चे की ईच्छा नहीं है।
इंटरनेशनल वेबसाइट मिरर डॉट को डॉट यूके के अनुसार, रामजीत ने अपने बच्चों के बारे में बड़े सपने सजाए हैं। उसने कहा, 'मैं तो जिंदगी भर किसान ही रह गया लेकिन अपने दोनों बच्चों को मैं ऊंचे सरकारी पदों पर देखना चाहता हूं।'
दूसरे बच्चे के बारे में रामजीत ने कहा, 'अच्छा हुआ कि मुझे दूसरा बेटा हुआ। अगर दोनों बच्चों में एक जिंदा न रहा तो दूसरा तो उनके परिवार की देखभाल करने के लिए रहेगा।'
रामजीत ने बताया कि डॉक्टर्स उनके बाप बनने पर हंसते हैं लेकिन उन लोगों को इस बात पर आश्चर्य भी है।
वेबसाइट मिरर डॉट को डॉट यूके ने लिखा है कि रामजीत अपनी बीवी शकुंतला से बरसात महीने की एक सुबह में मिले थे जब वह एक मजार के पास अकेली बैठी थी। रामजीत बताते हैं,'मैं उसकी मदद करना चाहता था। उसके परिवार में कोई नहीं था, ना ही उसको कोई जानने वाला था।'
रामजीत शकुंतला को अपने घर ले आए और उसके बाद वह भी हमेशा के लिए रामजीत की हो गई। शकुंतला का कहना है कि उसके लिए रामजीत की उम्र कोई मायने नहीं रखती। वह उनको बिल्कुल भी बूढ़े नहीं लगते।
रामजीत की पहली शादी तब हुई थी जब वह 24 साल के थे। लेकिन अगले ही साल उनकी बीवी की मौत हो गई। उसके बाद से वह बैचलर ही रहे जब तक कि शकुंतला नहीं मिली।
रामजीत के दूसरे बच्चे के पिता बनने के बारे में इंटरनेशनल वेबसाइट द सन ने लिखा है कि पिछली बार जब वह पहले बच्चे के बाप बने थे तो कहा था कि दूसरा बच्चा वह नहीं चाहते।
लेकिन दूसरे बच्चे के बाद रामजीत ने कहा कि दो बच्चों का बाप बनकर वह खुश हैं। 'दो बच्चों का बाप बनना मुश्किल है लेकिन मैं खुश हूं', रामजीत ने कहा।
वेबासाइट लिखता है कि रामजीत के पास खारखोदा में दो कमरे की झोपड़ी है और खेती के काम से उसका परिवार चलता है।
इंटरनेशनल वेबसाइट हफिंगटन पोस्ट ने लिखा है कि रामजीत को जिस उम्र में दादा-परदादा होना चाहिए था, उस उम्र में वह बाप बने हैं। पोस्ट के अनुसार, रामजीत ने मीडिया से कहा कि वह अपनी पूरी जिंदगी ब्रह्मचर्य का पालन करते रहे हैं। शकुंतला से मिलने के बाद उन्होंने परिवार बसाने की सोची और दो बच्चों के बाप बने। ईश्वर ने उनकी ईच्छा पूरी की।
रामजीत के दूसरे बच्चे के पिता बनने के बारे में इंटरनेशनल वेबसाइट द सन ने लिखा है कि पिछली बार जब वह पहले बच्चे के बाप बने थे तो कहा था कि दूसरा बच्चा वह नहीं चाहते।
लेकिन दूसरे बच्चे के बाद रामजीत ने कहा कि दो बच्चों का बाप बनकर वह खुश हैं। 'दो बच्चों का बाप बनना मुश्किल है लेकिन मैं खुश हूं', रामजीत ने कहा।
वेबासाइट लिखता है कि रामजीत के पास खारखोदा में दो कमरे की झोपड़ी है और खेती के काम से उसका परिवार चलता है।
फिंगटन पोस्ट के अनुसार, रामजीत आर्थिक कारणों से अब आगे और बच्चा नहीं चाहते। रामजीत ने कहा कि उनकी माली हालत अच्छी नहीं है इसलिए वह और बच्चा नहीं पाल सकते। 'मैं अपने दोनों बच्चों को खूब पढ़ाना चाहता हूं और उनकी जिंदगी की हर जरूरत पूरी करना चाहता हूं।'
फेमस इंटरनेशनल वेबसाइट डेलीमेल ने रामजीत के पिता बनने की खबर देते हुए लिखा है कि दो साल पहले विक्रमजीत के जन्म के बाद उन्होंने विश्व रिकॉर्ड बनाया था और दूसरी बार फिर से वह बाप बने हैं।
वेबसाइट ने रामजीत के हवाले से उनके लाइफ के बारे में लिखा है कि उनकी जिंदगी में जितनी भी लड़कियां आईं, उनमें से कोई भी जिंदा नहीं रहीं। जब रामजीत को शकुंतला मिली तो वह उनको घर ले आए। उनको योगा सिखाया और दोनों एक-दूसरे से प्यार करने लगे। उसके बाद दोनों ने शादी कर ली।
sabhar : bhaskar.com
अश्मित से मेरा रिश्ता फेक नहीं था वीना मलिक
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नवंबर 04, 2012 in

बिग बॉस से फेम पा चुकी पाकिस्तानी एक्ट्रेस वीना मलिक की पहली बॉलीवुड डेब्यू फिल्म 'दाल में कुछ काला है' फ्लॉप रही थी लेकिन बावजूद इसके वीना मलिक ने चर्चाओं में आना नहीं छोड़ा है और इसी का नतीजा है कि उन्हें फिल्मों के ऑफर भी आने लगे हैं।
वीना ने हाल ही में इस बात को स्वीकार किया कि वे वाकई अश्मित के साथ इन्वॉल्व हो गई थीं। वीना मलिक ने बिग बॉस के घर में अश्मित के साथ अपने संबंधों को लेकर कहा कि आपने जो कुछ भी देखा मुझे नहीं लगता कि वो फेंक था। मैं और अस्मित एक-दूसरे के अच्छे दोस्त थे, हम एक-दूसरे कि इज्जत करते थे, हां ये बात अलग है कि मैं अभी उनके टच में नहीं हूं।
इतना ही नहीं वीना मलिक ने हाल ही इस बात का जिक्र किया कि वे बचपन से ही अपने आपको सेलिब्रिटी की तरह देखती थी।
अब ये तो सोचने वाली बात है इतने लंबे समय बात अचानक वीना अपने लिए सफाई क्यों दे रही हैं, कहीं वीना फिर से कुछ नया तो करने नहीं जा रही, जिसकी दर्शकों को उम्मीद भी ना हो। खैर, ये तो वक्त ही बताएगा। sabhar : amarujala.com
बिग बॉस से फेम पा चुकी पाकिस्तानी एक्ट्रेस वीना मलिक की पहली बॉलीवुड डेब्यू फिल्म 'दाल में कुछ काला है' फ्लॉप रही थी लेकिन बावजूद इसके वीना मलिक ने चर्चाओं में आना नहीं छोड़ा है और इसी का नतीजा है कि उन्हें फिल्मों के ऑफर भी आने लगे हैं।
वीना ने हाल ही में इस बात को स्वीकार किया कि वे वाकई अश्मित के साथ इन्वॉल्व हो गई थीं। वीना मलिक ने बिग बॉस के घर में अश्मित के साथ अपने संबंधों को लेकर कहा कि आपने जो कुछ भी देखा मुझे नहीं लगता कि वो फेंक था। मैं और अस्मित एक-दूसरे के अच्छे दोस्त थे, हम एक-दूसरे कि इज्जत करते थे, हां ये बात अलग है कि मैं अभी उनके टच में नहीं हूं।
इतना ही नहीं वीना मलिक ने हाल ही इस बात का जिक्र किया कि वे बचपन से ही अपने आपको सेलिब्रिटी की तरह देखती थी।
अब ये तो सोचने वाली बात है इतने लंबे समय बात अचानक वीना अपने लिए सफाई क्यों दे रही हैं, कहीं वीना फिर से कुछ नया तो करने नहीं जा रही, जिसकी दर्शकों को उम्मीद भी ना हो। खैर, ये तो वक्त ही बताएगा। sabhar : amarujala.com
पानी से धुलने वाला मोबाइल और कीबोर्ड
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नवंबर 04, 2012 in

जल्द ही बाजार में ऐसा मोबाइल फोन, आइ-पैड और की-बोर्ड आने वाला है जिसे आप गंदा होने पर पानी से धो सकते हैं। शायद सुनने में ये आपको थोड़ा अजीब लगे, लेकिन रिसर्चरों ने इसे सच करने का दावा किया है। कीबोर्ड या मोबाइल के गंदा होने पर आपकी समस्या का समाधान जल्द ही अधिक यूजर फ्रेंडली इलेक्ट्रानिक उपकरणों के जरिए होने वाला है।
ये नए उपकरण ऐसे होंगे कि इन्हें आप रास्ते के लिए भी कैरी कर सकते हैं। इन उपकरणों को पानी से कोई नुकसान नहीं होगा। रिसर्चरों ने जेनरेशन-नेक्सट वाले इलेक्ट्रानिक उपकरण विकसित किए हैं। इन सभी उपकरणों को फोल्ड करके रास्ते के लिए कैरी भी किया जा सकता है। इसके साथ ही इन उपकरणों को जीरो पिक्सल बार्डर की परत देकर वाशेबल बनाया गया है।
इन गैजेट्स की स्क्रीन पर इलेक्ट्रोफ्लूडिक इमेजिंग फिल्म का इस्तेमाल किया गया है। जिससे इन्हें पानी से साफ करने पर इनमें कोई खराबी नहीं आएगी। शोधकर्ताओं का दावा है ये गैजेट्स सूर्य की रोशनी में खुद ही चार्ज हो जाएंगे, जिससे इनके इस्तेमाल में बिजली की खपत बहुत कम होगी। इस तरह के उपकरणों में वायरलेस कनेक्शन पोर्ट दी गई है।
शोधकर्ताओं ने एक बयान में कहा कि अब आपका मोबाइल या आइ-पैड हाथ से कही गिर जाएं इस पर चढ़ी उच्च स्तरीय लचीली केसिंग इसकी स्क्रीन को नुकसान नहीं पहुंचने देगी और इसे आप धोकर भी साफ कर सकते हैं। इस काम को अंजाम देने में इलेक्ट्रोफ्लूडिक इमेजिंग फिल्म एक क्रांतिकारी खोज साबित हुई। ये एक पारदर्शी सफेद फिल्म है जिसमें पारगामी इलेक्ट्रोड की एक पतली परत चढ़ी हुई है।
तो अब आप जल्द ही बाजार में ग्रीन आइ-पैड, मोबाइल फोन और ई-रीडर देखने के तैयार रहिए, इनमें भारी बैटरी का बोझ नहीं होगा।
जल्द ही बाजार में ऐसा मोबाइल फोन, आइ-पैड और की-बोर्ड आने वाला है जिसे आप गंदा होने पर पानी से धो सकते हैं। शायद सुनने में ये आपको थोड़ा अजीब लगे, लेकिन रिसर्चरों ने इसे सच करने का दावा किया है। कीबोर्ड या मोबाइल के गंदा होने पर आपकी समस्या का समाधान जल्द ही अधिक यूजर फ्रेंडली इलेक्ट्रानिक उपकरणों के जरिए होने वाला है।
ये नए उपकरण ऐसे होंगे कि इन्हें आप रास्ते के लिए भी कैरी कर सकते हैं। इन उपकरणों को पानी से कोई नुकसान नहीं होगा। रिसर्चरों ने जेनरेशन-नेक्सट वाले इलेक्ट्रानिक उपकरण विकसित किए हैं। इन सभी उपकरणों को फोल्ड करके रास्ते के लिए कैरी भी किया जा सकता है। इसके साथ ही इन उपकरणों को जीरो पिक्सल बार्डर की परत देकर वाशेबल बनाया गया है।
इन गैजेट्स की स्क्रीन पर इलेक्ट्रोफ्लूडिक इमेजिंग फिल्म का इस्तेमाल किया गया है। जिससे इन्हें पानी से साफ करने पर इनमें कोई खराबी नहीं आएगी। शोधकर्ताओं का दावा है ये गैजेट्स सूर्य की रोशनी में खुद ही चार्ज हो जाएंगे, जिससे इनके इस्तेमाल में बिजली की खपत बहुत कम होगी। इस तरह के उपकरणों में वायरलेस कनेक्शन पोर्ट दी गई है।
शोधकर्ताओं ने एक बयान में कहा कि अब आपका मोबाइल या आइ-पैड हाथ से कही गिर जाएं इस पर चढ़ी उच्च स्तरीय लचीली केसिंग इसकी स्क्रीन को नुकसान नहीं पहुंचने देगी और इसे आप धोकर भी साफ कर सकते हैं। इस काम को अंजाम देने में इलेक्ट्रोफ्लूडिक इमेजिंग फिल्म एक क्रांतिकारी खोज साबित हुई। ये एक पारदर्शी सफेद फिल्म है जिसमें पारगामी इलेक्ट्रोड की एक पतली परत चढ़ी हुई है।
तो अब आप जल्द ही बाजार में ग्रीन आइ-पैड, मोबाइल फोन और ई-रीडर देखने के तैयार रहिए, इनमें भारी बैटरी का बोझ नहीं होगा।
30 साल की उम्र में भी कम हो सकती है मेमोरी
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नवंबर 04, 2012 in

आमतौर पर ऐसा माना जाता है कि ज्यादा उम्र के लोग ही भूलने की बीमारी से परेशान रहते हैं लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि केवल बुजुर्ग ही नहीं बल्कि 30 वर्ष की उम्र के लोगों को भी इस समस्या से दो-चार होना पड़ता है। ब्रिटेन में 50 साल की उम्र के करीब 1000 लोगों पर किए गए एक सर्वेक्षण में यह चौंकाने वाला खुलासा किया गया है।
इस सर्वेक्षण के अनुसार, आमतौर पर औसतन 50 साल की उम्र में लोगों को चीजें भूलना शुरू हो जाती हैं। मगर अधिकतर लोगों ने कहा कि भूलने की बीमारी उन्हें कम उम्र में ही लग गई थी।
शोधकर्ताओं के अनुसार, 50 की उम्र में लोगों को अपने करीबियों तक के नाम याद रखने में मुश्किल पेश आती है। पांच में से दो लोगों ने स्वीकार किया कि उन्हें उन लोगों के नाम भी याद नहीं रहते जिन्हें वे सालों से जानते हैं।
सर्वे के अनुसार कई लोग तो डॉक्टर से लिया गया अपाइंटमेंट तक भूल जाते हैं। वहीं दस में एक व्यक्ति ने कहा कि 40 साल की उम्र में ही उन्हें चीजें भूलने की बीमारी हो गई थी। वहीं छह प्रतिशत लोगों ने 30 साल की उम्र से ही इस बीमारी से पीड़ित होने की बात कही। sabhar amarujala.com
आमतौर पर ऐसा माना जाता है कि ज्यादा उम्र के लोग ही भूलने की बीमारी से परेशान रहते हैं लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि केवल बुजुर्ग ही नहीं बल्कि 30 वर्ष की उम्र के लोगों को भी इस समस्या से दो-चार होना पड़ता है। ब्रिटेन में 50 साल की उम्र के करीब 1000 लोगों पर किए गए एक सर्वेक्षण में यह चौंकाने वाला खुलासा किया गया है।
इस सर्वेक्षण के अनुसार, आमतौर पर औसतन 50 साल की उम्र में लोगों को चीजें भूलना शुरू हो जाती हैं। मगर अधिकतर लोगों ने कहा कि भूलने की बीमारी उन्हें कम उम्र में ही लग गई थी।
शोधकर्ताओं के अनुसार, 50 की उम्र में लोगों को अपने करीबियों तक के नाम याद रखने में मुश्किल पेश आती है। पांच में से दो लोगों ने स्वीकार किया कि उन्हें उन लोगों के नाम भी याद नहीं रहते जिन्हें वे सालों से जानते हैं।
सर्वे के अनुसार कई लोग तो डॉक्टर से लिया गया अपाइंटमेंट तक भूल जाते हैं। वहीं दस में एक व्यक्ति ने कहा कि 40 साल की उम्र में ही उन्हें चीजें भूलने की बीमारी हो गई थी। वहीं छह प्रतिशत लोगों ने 30 साल की उम्र से ही इस बीमारी से पीड़ित होने की बात कही। sabhar amarujala.com
ऑटो-टैक्सी का किराया बढ़ा तो न्यूड हो गई रीमा
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नवंबर 04, 2012 in

ग्लैमर इंडस्ट्री में छोटी-छोटी पर मॉडल्स और एक्ट्रेस का न्यूड होने का एक ट्रेंड बन गया है। आए दिन कोई ना कोई मॉडल चर्चा में आने के लिए इस फंडे को अपना रही है। पूनम पांडे, गहना, वीना मलिक या शर्लिन चोपडा जैसी कितनी ही एक्ट्रेस है जो आए दिन सोशल नेटवर्किंग साइट्स ट्विटर और फेसबुक पर अपनी न्यूड फोटोज अपलोड करती रहती हैं ताकि उनकी पॉपलैरिटी बनी रहे, या फिर किसी भी इश्यू को भुनाने के लिए न्यूड होने से गुरेज नहीं करती।
इसी फेहरिस्त में मॉडल रीमा शर्मा का नाम भी जुड़ गया है। बीते दिनों मुंबई में ऑटो और टैक्सी का किराया बढ़ने का विरोध करने के लिए मॉडल रीमा शर्मा ने न्यूड हो खूब चर्चा बटोरी। रीमा ने एक न्यूड फोटोशूट करवाया जिसमें उन्हें अपनी बैक साइड पर 'मीटर डाउन स्टॉप फ्रॉड' लिखवाया। रीमा को इस न्यूड फोटोशूट से कोई दिक्कत नहीं है।
गौरतलब है कि रीमा साउथ की कई फिल्मों में आ चुकी है। हाल ही में रीमा ने एक तमिल फिल्म भी साइन की है। वैसे आपको बता दें बॉलीवुड में रीमा को कोई नहीं पहचानता, इसीलिए रीमा ने अपने इस फोटोशूट की तस्वीरें ट्विटर पर अपलोड की। रीमा ने अपनी सफाई में कहा कि ये फोटोशूट सोशल कोस्ट के लिए था और वैसे भी मुंबई में लगभग 30 फीसदी टैक्सियों के मीटर खराब हैं तो वहीं 40 फीसदी ऑटो और रिक्शा वाले पुराने मीटर का उपयोग कर रहे हैं।
फिलहाल रीमा तो यही चाहती हैं कि इससे उनकी फैन फोलोइंग बने और फिर उन्हें बॉलीवुड में एंट्री करने को मिले।अब देखना होगा कि रीमा का ये कारनामा उनके काम आता है। sabhar : amarujala.com
ग्लैमर इंडस्ट्री में छोटी-छोटी पर मॉडल्स और एक्ट्रेस का न्यूड होने का एक ट्रेंड बन गया है। आए दिन कोई ना कोई मॉडल चर्चा में आने के लिए इस फंडे को अपना रही है। पूनम पांडे, गहना, वीना मलिक या शर्लिन चोपडा जैसी कितनी ही एक्ट्रेस है जो आए दिन सोशल नेटवर्किंग साइट्स ट्विटर और फेसबुक पर अपनी न्यूड फोटोज अपलोड करती रहती हैं ताकि उनकी पॉपलैरिटी बनी रहे, या फिर किसी भी इश्यू को भुनाने के लिए न्यूड होने से गुरेज नहीं करती।
इसी फेहरिस्त में मॉडल रीमा शर्मा का नाम भी जुड़ गया है। बीते दिनों मुंबई में ऑटो और टैक्सी का किराया बढ़ने का विरोध करने के लिए मॉडल रीमा शर्मा ने न्यूड हो खूब चर्चा बटोरी। रीमा ने एक न्यूड फोटोशूट करवाया जिसमें उन्हें अपनी बैक साइड पर 'मीटर डाउन स्टॉप फ्रॉड' लिखवाया। रीमा को इस न्यूड फोटोशूट से कोई दिक्कत नहीं है।
गौरतलब है कि रीमा साउथ की कई फिल्मों में आ चुकी है। हाल ही में रीमा ने एक तमिल फिल्म भी साइन की है। वैसे आपको बता दें बॉलीवुड में रीमा को कोई नहीं पहचानता, इसीलिए रीमा ने अपने इस फोटोशूट की तस्वीरें ट्विटर पर अपलोड की। रीमा ने अपनी सफाई में कहा कि ये फोटोशूट सोशल कोस्ट के लिए था और वैसे भी मुंबई में लगभग 30 फीसदी टैक्सियों के मीटर खराब हैं तो वहीं 40 फीसदी ऑटो और रिक्शा वाले पुराने मीटर का उपयोग कर रहे हैं।
फिलहाल रीमा तो यही चाहती हैं कि इससे उनकी फैन फोलोइंग बने और फिर उन्हें बॉलीवुड में एंट्री करने को मिले।अब देखना होगा कि रीमा का ये कारनामा उनके काम आता है। sabhar : amarujala.com
सिर्फ इनके गाय का दूध पीते हैं मुकेश अंबानी और सचिन तेंडुलकर
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नवंबर 04, 2012 in
पुणे। यह दूध कुछ खास है। तभी तो इसकी कीमत 75 रुपए प्रति लीटर है। इसके ग्राहकों में शामिल हैं पुणे और मुंबई की 4 हजार से ज्यादा नामी हस्तियां।
मसलन मुकेश अंबानी, सचिन तेंडुलकर, रितिक रोशन, शिल्पा शेट्टी, आदि गोदरेज, गरवारे, शबाना आजमी आदि। पूरी तरह कम्प्यूटराइज्ड दूध उत्पादन की प्रक्रिया में इंसानी हाथों का स्पर्श कतई नहीं है। सब तरह के रसायनों से मुक्त ऑर्गनिक दूध।
यह दूध गायों का है और गायों का रुतबा भी ‘वीआईपी’ से कम नहीं है। खानपान और रहन-सहन सब कुछ आलीशान। भीमाशंकर के पास स्थित 35 करोड़ रुपए लागत के इस फार्म की हर गाय के लिए कॉयरफोम का केरल से मंगाया रबर-कोटिंग वाला खास गद्दा है।
हरेक की कीमत सात हजार रुपए। खाने में अल्फा-अल्फा घास, ओट्स, कॉटनसीड्स जैसी हाईप्रोटीन डाइट का बुफे। रोज नहाने के लिए मल्टीजेट शॉवर।
वे 35 एकड़ के फॉर्म में खुला घूमती हैं। उनके रहने के लिए अलग जगह है, खाने की अलग और सोने के लिए एकदम अलग। डेयरी के अध्यक्ष देवेंद्र शहा कहते हैं, ‘हमारे उपभोक्ता क्वालिटी के प्रति बेहद जागरूक हैं।
शिल्पा शेट्टी जैसे कई उपभोक्ताओं ने आकर न सिर्फ उत्पादन देखा बल्कि दूध उन तक पहुंचेगा कैसे, इसका पूरा प्रजेंटेशन देखकर ही हमसे जुड़े। गोवंश की सेहत एक अहम मसला है। तयशुदा वक्त पर टीके लगते हैं। किसी गलती की गुंजाइश न हो इसलिए यह काम किसी कर्मचारी के भरोसे नहीं छोड़ा गया है।
गायों के कान में लगी एक माइक्रोचिप में इसका रिकॉर्ड है। टीके का वक्त होने पर यह कम्प्यूटर को याद दिलाती है। अगर फिर भी टीका न लगे तो गाय का दूध निकालना नामुमकिन हो जाता है, क्योंकि दूध भी इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम के जरिए निकलता है दूध निकालने से पहले हर गाय का एक ट्रांसपोंडर से गुजरना अनिवार्य है।
बीमार गाय को यह मशीन खुद ही कतार से बाहर कर देती है। रोज तीन बार में करीब 40-45 लीटर दूध देने वाली इन गायों के शरीर में मिनरल्स की कमी भी रोज पूरी की जाती है। जर्मनी और स्विटजरलैंड से कुछ साल पहले कर्नाटक और तमिलनाडु में होलस्टिन फ्रिझन वंश की दस हजार गाएं आई थीं। इसी वंश की फस्र्ट ब्रीड इस डेयरी में लाई गई।
दूध उत्पादन को बेहतर बनाने वाली हर तकनीक के प्रति डेयरी के कर्ता-धर्ता शुरू से सजग हैं। मसलन, अमेरिका-कनाडा के सांडों का गौवंश को बढ़ाने के लिए इस्तेमाल करना।
sabhar : bhaskar.com
रविवार, 21 अक्टूबर 2012
शर्लिन की बोल्ड तस्वीरों से एक बार फिर हॉट हुआ ट्विटर
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अक्टूबर 21, 2012 in





प्लेब्वॉय मैगज़ीन के लिए हाल ही में न्यूड होकर तहलका मचाने के बाद शर्लिन चोपड़ा लगातार ऐसा कुछ कर रही हैं जिससे वह चर्चा में बनी रहें.
वह आए दिन ट्विटर पर अपने बोल्ड कमेन्ट पोस्ट करने के साथ साथ न्यूड और सेमी न्यूड तस्वीरें भी अपलोड कर रही हैं.
हाल ही में शर्लिन ने ट्विटर पर अपनी सेमी न्यूड तस्वीरें अपलोड कर तहलका मचा दिया था.
हाल ही में शर्लिन ने ट्विटर पर अपनी सेमी न्यूड तस्वीरें अपलोड कर तहलका मचा दिया था.
अब इस बार उन्होंने कुछ हॉट और टॉपलेस तस्वीरें अपलोड कर सनसनी फैला दी है
sabhar : bhaskar.com
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कैंसर, डायबिटीज, दिल की बीमारियों का इलाज आसान होगा
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अक्टूबर 21, 2012 in
बेकार, बंजर, बिना काम का डार्क मैटर। वर्ष 2000 में जब पहली बार मनुष्य के जीन समूह (जीनोम) को सिलसिलेवार तरीके से जमाया गया तब वैज्ञानिकों ने उसके ज्यादातर हिस्से का इस तरह वर्णन किया था। तीन अरब मूल जोड़ों से बने हमारे डीएनए को केवल 22000 जीन्स में बांटा गया। यह मानवीय जीनोम का केवल दो प्रतिशत है। वैज्ञानिकों का कहना था, बाकी बहुत ज्यादा काम का नहीं है।
हमारे आनुवंशिक गौरव के लिए सौभाग्य की बात है कि यह निष्कर्ष गलत निकले हैं। अमेरिकी राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान (एनआईएच) की अगुवाई में हो रही खोज से पता लगा है, 98 प्रतिशत जीनोम का अधिकतर हिस्सा बायो केमिकल हलचल की जीवंत दुनिया है। इनसाइक्लोपीडिया ऑफ डीएनए एलिमेंट्स (एनकोड) प्रोजेक्ट ने कुछ लाइलाज बीमारियों के उपचार की संभावनाएं पेश की हैं। एनआईएच के राष्ट्रीय मानव जीनोम रिसर्च इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर डॉ एरिक ग्रीन ने पत्रकारों को बताया, जीवन ने कैसे आकार लिया- इस बुनियादी सवाल का हल खोजने के लिए यह एक शक्तिशाली संसाधन है। इससे हमें मनुष्य की बीमारियों के जीनोमिक आधार को समझने में मदद मिलेगी।
डीएनए का वह हिस्सा जो जीन नहीं बनाता, निठल्ला नहीं बैठा है। वह जीन्स को बताता है, कब काम करना है और किस वक्त आराम से बैठना है। वह यह भी निर्देश देता है, विभिन्न कोशिकाओं (सेल्स) में जीवन के किस बिंदु पर कितनी प्रोटीन का निर्माण करना है। उदाहरण के लिए उस 80 प्रतिशत डीएनए में किसी जगह से किसी कोशिका को दिमाग का न्यूरॉन बनाने या पैनक्रियास को इंसुलिन बनाने या चमड़ी की कोशिका को बूढ़ी कोशिका का स्थान लेने का निर्देश दिया जाता है।
एनकोड ने बेकार समझे जाने वाले 98 प्रतिशत जीनोम की रिसर्च को नई दिशा दी है। अगर कोई बीमारी जेनेटिक ऑन-ऑफ स्विच में गड़बड़ी से हुई है तो शोधकर्ता या डॉक्टर उसका पता लगाकर इलाज कर सकेंगे। यह खोज दिल के रोगों, डायबिटीज, अल्जीमर्स और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज को आसान बनाएगी। सबसे अधिक फायदा कैंसर मरीजों को होने की संभावना है। यह बीमारी कई टिश्यूज में अनेक तरह से होती है।
कोशिकाओं की अनियंत्रित वृद्धि कैंसर का मुख्य कारण है। इधर, कैंसर रोधी नई दवाएं ट्यूमर निर्माण की प्रक्रिया को निशाना बनाती हैं। अब एनकोड ने कैंसर की कोशिकाओं को जीवित रखने वाले समूचे सर्किट का पता लगा लिया है। इससे मौजूदा दवाओं का नए तरीके से उपयोग हो सकेगा। उदाहरण के लिए स्तन और फेफड़े के ट्यूमर एक ही सर्किट में हैं तो किसी मरीज के इलाज में इस्तेमाल की गई दवा का उपयोग दूसरे के लिए भी हो सकेगा।
सेंट लुई में वाशिंगटन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने कच्चे डीएनए को आरएनए में बदलने वाले दो दर्जन ट्रांसक्रिप्शन फैक्टर की पहचान की है। फिर इनसे 17 किस्म के कैंसर में पाए जाने वाले प्रोटीन की पहचान की गई। इन फैक्टर के अधिक सक्रिय होने से ट्यूमर बढ़ सकते हैं। अगर इन पर काबू पाने का तरीका खोज लिया जाता है तो एक उपचार से 17 कैसरों को ठीक किया जा सकेगा। एनकोड से मानव शरीर की सेहत से संबंधित कई गुत्थियां सुलझेंगी। जीन के समूह का ब्योरा मौजूद होने से डॉक्टर आपको होने वाली बीमारियों के खतरे के प्रति सचेत रहेंगे। sabhar :bhaskar.com
टेबलेट लें या गैलेक्सी नोट?
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अक्टूबर 21, 2012 in
सैमसंग का गैलेक्सी नोट भारतीय और विदेशी बाजार में तेजी से पॉपुलर हुआ है। मगर इसके फीचर्स के बारे में लोगों के मन में काफी दुविधा भी है। क्या यह एक एडवांस मोबाइल है? जिसमें टेबलेट की खूबियां भी समाहित हैं। या फिर यह टेबलेट का छोटा रूप है? बेहतर होगा कि हम गैलेक्सी नोट्स के फीचर्स पर एक निगाह डालते हैं, जिससे आप इसके बारे में बेहतर फैसला कर सकें।
टेबलेट की खूबियां
यह तो तय है कि गैलेक्सी नोट एक अलग किस्म की मोबाइल डिवाइस है, जिसमें टेबलेट की खूबियां और मोबाइल फोन की सहूलियत का सुंदर तालमेल है। सबसे पहली खूबी है इसका बड़े साइज का स्क्रीन। करीब 5.3 इंच का इसका एचडी सुपर एमोलेड स्क्रीन दुनिया में अपनी तरह का पहला है। इस स्क्रीन की मदद से आप न सिर्फ वेबपेज का ज्यादा बेहतर डिस्प्ले पाते हैं बल्कि वीडियो और इ-बुक्स की भी बेहतर प्रस्तुति मिलती है और उन्हें स्क्रोल या जूम-इन करने की जरूरत नहीं पड़ती है।
स्मार्ट पेन
इसकी दूसरी खूबी है- स्मार्ट पेन। इसे स्टेट-आफ-द-आर्ट-इनपुट टेक्नोलाजी के नाम से भी जाना जाता है। इसकी मदद से आप न सिर्फ स्क्रीन पर कुछ लिख सकते हैं बल्कि ड्रा कर सकते हैं या उनमें रंग भी भर सकते हैं। यह डिवाइस आपको काफी रचनात्मक आजादी देती है। इस लिहाज से गैलेक्सी नोट उन लोगों के मिजाज से ज्यादा मेल खाता है जो रचनात्मक कार्यों से जुड़े हैं। यह एक ऐसा फीचर है जिसकी मदद से आप कभी भी, कहीं भी अपनी अभिव्यक्ति को रिकार्ड कर सकते हैं। चाहे तस्वीर उतारनी हो, फटाफट कुछ लिखना हो (टाइप नहीं- क्योंकि वह झंझट भरा होता है और जब तक मेल न करनी हो आप उससे परहेज करते हैं) या फिर कुछ रेखांकन करना हो।
स्पेशल फीचर्स
कलात्मकता के साथ इसके कई फिचर एक कामकाजी व्यक्ति या उसके बिजनेस मोबाइल की जरूरतों को भी पूरा करते हैं। S-प्लानर में आप को अपने डे-प्लान के लिए कई एडवांस फीचर मिलते हैं। इसके अलावा S-चॉयस के जरिए आप कई ऐसे एप्लीकेशन डाउनलोड कर सकते हैं- जो कि खास गैलेक्सी नोट्स को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं। सैमसंग चैट-ऑन फीचर आपको न सिर्फ रीयल टाइम चैट की सुविधा देता है बल्कि इसकी मदद से टेक्स्ट, हाथ से लिखे नोट्स, तस्वीरें और वीडियो अपने मित्रों के साथ आसानी से शेयर कर सकते हैं।
मनोरंजन भी
जहां तक मनोरंजन की बात है तो इसके 1.4 गीगा हर्ट्ज ड्यूएल कोर प्रोसेसर की मदद से आप बखूबी रीयल टाइम वीडियो देख सकते हैं या फिर वीडियो गेम का आनंद उठा सकते हैं। गेम के शौकीन लोगों के लिए सैमसंग का गेम हब मदद कर सकता है। और अंत में यह फोन आसानी से आपकी जेब में समा जाता है sabhar : amarujala.com
टेबलेट की खूबियां
यह तो तय है कि गैलेक्सी नोट एक अलग किस्म की मोबाइल डिवाइस है, जिसमें टेबलेट की खूबियां और मोबाइल फोन की सहूलियत का सुंदर तालमेल है। सबसे पहली खूबी है इसका बड़े साइज का स्क्रीन। करीब 5.3 इंच का इसका एचडी सुपर एमोलेड स्क्रीन दुनिया में अपनी तरह का पहला है। इस स्क्रीन की मदद से आप न सिर्फ वेबपेज का ज्यादा बेहतर डिस्प्ले पाते हैं बल्कि वीडियो और इ-बुक्स की भी बेहतर प्रस्तुति मिलती है और उन्हें स्क्रोल या जूम-इन करने की जरूरत नहीं पड़ती है।
स्मार्ट पेन
इसकी दूसरी खूबी है- स्मार्ट पेन। इसे स्टेट-आफ-द-आर्ट-इनपुट टेक्नोलाजी के नाम से भी जाना जाता है। इसकी मदद से आप न सिर्फ स्क्रीन पर कुछ लिख सकते हैं बल्कि ड्रा कर सकते हैं या उनमें रंग भी भर सकते हैं। यह डिवाइस आपको काफी रचनात्मक आजादी देती है। इस लिहाज से गैलेक्सी नोट उन लोगों के मिजाज से ज्यादा मेल खाता है जो रचनात्मक कार्यों से जुड़े हैं। यह एक ऐसा फीचर है जिसकी मदद से आप कभी भी, कहीं भी अपनी अभिव्यक्ति को रिकार्ड कर सकते हैं। चाहे तस्वीर उतारनी हो, फटाफट कुछ लिखना हो (टाइप नहीं- क्योंकि वह झंझट भरा होता है और जब तक मेल न करनी हो आप उससे परहेज करते हैं) या फिर कुछ रेखांकन करना हो।
स्पेशल फीचर्स
कलात्मकता के साथ इसके कई फिचर एक कामकाजी व्यक्ति या उसके बिजनेस मोबाइल की जरूरतों को भी पूरा करते हैं। S-प्लानर में आप को अपने डे-प्लान के लिए कई एडवांस फीचर मिलते हैं। इसके अलावा S-चॉयस के जरिए आप कई ऐसे एप्लीकेशन डाउनलोड कर सकते हैं- जो कि खास गैलेक्सी नोट्स को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं। सैमसंग चैट-ऑन फीचर आपको न सिर्फ रीयल टाइम चैट की सुविधा देता है बल्कि इसकी मदद से टेक्स्ट, हाथ से लिखे नोट्स, तस्वीरें और वीडियो अपने मित्रों के साथ आसानी से शेयर कर सकते हैं।
मनोरंजन भी
जहां तक मनोरंजन की बात है तो इसके 1.4 गीगा हर्ट्ज ड्यूएल कोर प्रोसेसर की मदद से आप बखूबी रीयल टाइम वीडियो देख सकते हैं या फिर वीडियो गेम का आनंद उठा सकते हैं। गेम के शौकीन लोगों के लिए सैमसंग का गेम हब मदद कर सकता है। और अंत में यह फोन आसानी से आपकी जेब में समा जाता है sabhar : amarujala.com
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