शुक्रवार, 13 अप्रैल 2012
ब्रह्मांड में "हम अकेले नहीं हैं"
0एक पूर्व अमेरिकी चंद्रयात्री को पूरा भरोसा है कि इस दुनिया के अलावा भी दुनियाएं हैं, जहां बुद्धिमान प्राणी रहते और कभी कभी पृथ्वी पर भी आते हैं. अमेरिका जैसे देशों की सरकारें यह जानती हैं, पर इस बारे में तथ्य छिपाती हैं.
भूतपूर्व चंद्रयात्री एडगर मिचेल का कहना है कि उन्हें पूरा विश्वास है कि "हम अकेले नहीं हैं." उन्हें इस बात में कोई शक नहीं है कि ET, यानी मनुष्यों जैसे इतरलोकीय प्राणियों का भी अस्तित्व है. अमेरिका की सरकार उनके अस्तित्व के बारे में जानती है, लेकिन जनता को जानबूझ कर अंधेरे में रख रही है
कथित उड़न तश्तरी का 13 वर्ष के एक ब्रिटिश लड़के द्वारा 15 फ़रवरी 1954 में लिया गया चित्र
एडगर मिचेल अपने सहयात्रियों एलन शेपर्ड और स्टुअर्ट रूसा के साथ अपोलो-14 चंद्रयान से 5 फ़रवरी 1971 को चंद्रमा पर उतरे थे. उन्होंने एलन शेपर्ड के साथ 9 घंटे 17 मिनट तक चंद्रमा पर विचरण किया था, जो चंद्रविचरण का अब तक का रेकॉर्ड समय है.
विज्ञान के छात्र रहे और एरोनॉटिक्स में डॉक्टर की उपाधि प्राप्त मिचेल अब 78 वर्ष के हो चले हैं. जुलाई 2008 में भी उन्होंने एक रेडियो इंटरव्यू में कहा था कि वे जानते हैं कि इतरलोकीय प्राणी उड़न तश्तरी जैसी चीज़ों में कई बार पृथ्वी पर आ चुके हैं, हम मनुष्यों से संपर्क करने के प्रयास भी कर चुके हैं.
जब वह अमेरिकी अंतरिक्ष अधिकरण नासा के लिए काम कर रहे थे, तब इस तरह के "एलियन" के संपर्क में रह चुके "जानकार सूत्र" उन्हें बताया करते थे कि वे "छोटे कद वाले अजीब-से लोग" होते हैं. मिचेल का समझना है कि किसी दूसरी दुनिया से आने वाले ये प्राणी इस पारंपरिक मान्यता से बहुत अलग नहीं हैं कि उनका कद छोटा, आंखें बड़ी-बड़ी और सिर भी काफ़ी बड़ा होता है
एडगर मिचेल ने अमेरिकी टेलीविज़न चैनल सीएनएन के साथ बातचीत में सोमवार 21 अप्रैल को अपनी पिछली कुछ बातें दुहरायीं और राष्ट्रपति बराक ओबामा की सरकार से आग्रह किया कि उड़न तश्तरियों और इतरलोकीय प्राणियों के बारे में अब तक की जानकारियों को सार्वजनिक किया जाये.
जुलाई 2008 वाले रेडियो इंटरव्यू में मिचेल ने कहा था कि "यह मेरा सौभाग्य रहा है कि मैं इस तथ्य को जानता हूँ कि इतरलोकीय प्राणी हमारे ग्रह पर आते रहे हैं और UFO (उड़न तश्तिरियों) के आने जैसी बातें सच हैं. हमारी सरकारें पिछले कोई 60 वर्षों से इस पर पर्दा डालती रही हैं. लेकिन, धीरे-धीरे यह जानकारी बाहर आ रही है और हम में से कुछ का सौभाग्य रहा है कि हमें इस बारे में बताया गया है. मैं ऐसे सैनिक और गुप्तचर दायरों में रहा हूं, जो जानते हैं कि सार्वजनिक जानकारी वाली सतह के नीचे, हां, इस तरह के यात्री यहां आये हैं
एडगर मिचेल न्यू मेक्सिको में रॉसवेल नाम के जिस स्थान पर पले-बढ़े हैं, वहां के लोगों का विश्वास है कि 1947 में वहां एक रहस्यमय उड़न वस्तु अपने यात्रियों के साथ ज़मीन से टकरा कर ध्वस्त हो गयी थी. लोग यह भी मानते हैं कि अमेरिकी सेना ने इस घटना पर पर्दा डालने और प्रत्यक्षदर्शियों के मुंह बंद कर देने में कोई कसर नहीं छोड़ी. मिचेल के अनुसार रॉसवेल का निवासी होने के नाते उन्हें इस घटना का अब अच्छी तरह पता चल गया है. स्थानीय लोगों ने तथा "गोपनीयता की शपथ के बावजूद" सेना और गुपतचर सेवाओं के लोगों ने उन्हें इतना कुछ बताया है कि वे इस घटना पर पड़ा पर्दा उठाने में लग गये हैं.
सीएनएन को एडगर मिचेल ने यह भी बताया कि वे एकमात्र ऐसे अंतरिक्षयात्री हैं, जिसने दस साल पहले भी अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागॉन को अपनी बात सुनाने का प्रयास किया था. वहां उन्होंने एक एडमिरल से बात की थी, जिसने रॉसवेल वाली घटना की "पुष्टि" की थी. लेकिन, बाद में उस एडमिरल ने जब और जानकारियां पाने की कोशिश की, तो उसे ऐसा करने से रोक दिया गया. मिचेल ने शिकायत की अब यह एडमिरल भी सारे मामले को ही झुठला रहा है.
अमेरिकी अंतरिक्ष अधिकरण नासा ने पिछले वर्ष भी और इस बार भी कहा कि उसे न तो उड़न तश्तरियों से कोई मतलब है और न ही वह तोपने-ढांपने की किसी गतिविधि से जुड़ा हुआ है.
1947 में रॉसवेल में ज़मीन से टकरा कर नष्ट हो गयी अज्ञात उड़न वस्तु के बारे में कहा जाता है कि उसके मलबे के बीच से छोटे कद के मनुष्य जैसे एक इतरलोकीय प्राणी का शरीर भी मिला था. उसकी चीरफाड़ कर उसकी शारीरिक बनावट को जानने का प्रयास भी हुआ था. लेकिन आधिकारिक तौर बाद में इस सब का खंडन किया जाने लगा.
अमेरिकी सरकार तो नहीं, लेकिन ब्रिटिश सरकार के बारे में सुनने में आया है कि वह उड़न तश्तरियों संबंधी अवलोकनों और प्रत्यक्षदर्शी बयानों वाली कोई 200 चुनी हुई फ़ाइलें इस वर्ष सार्वजनिक करेगी. यह भी सुनने में आया है कि ब्रिटेन से जुड़े इस तरह के 90 प्रतिशत मामले रफ़ादफ़ा किये जा सकते हैं. शेष 10 प्रतिशत को आसानी से रफ़ादफ़ा नहीं किया जा सकता.
पृथ्वी पर उड़न तश्तरियां और इतरलोकीय प्राणी तभी आ सकते हैं, जब पृथ्वी के अलवा भी कहीं बुद्धिमान प्राणधारियों का अस्तित्व हो. अभी तक तो भू और अंतरिक्ष आधारित
हमारे सारे दूरदर्शियों को ऐसे किसी अस्तित्व का रत्ती भर भी कोई संकेत नहीं मिला है.
अमेरिका ने गत 6 मार्च को केपलर नाम का एक ऐसा नया दूरदर्शी अंतिरक्ष में भेजा है. वह पृथ्वी से 600 से 3000 प्रकाश वर्ष दूर के दो तारकमंडलों में एक लाख तारों की छानबीन करते हुए यह जानने की कोशिश करेगा कि क्या उन में से किसी के पास ऐसे ग्रह भी हैं, जहां जीवन संभव है. वैज्ञानिक सौरमंडल के बाहर अब तक जिन 300 ग्रहों का पता लगा पाये हैं, उनमें से कोई भी ऐसा नहीं प्रतीत होता, जहां पृथ्वी जैसा जीवन संभव हो.
जर्मनी में म्युनिक विश्वविद्यालय में खगोल भौतिकी के प्रोफ़ेसर डॉ. हाराल्ड लेश का कहना है, "मुझे पूरा विश्वास है कि अंतरिक्ष में बहुत सारे ग्रहों पर किसी-न-किसी प्रकार का जीवन है. लेकिन, हम धरती वाले अपने साधनों से जब तक उनका पता लगा पायेंगे, तब तक शायद 15 वर्ष और लग जायेंगे. तब भी हम शायद एक-आध छोटी-छोटी कोषिकाएं ही इधर-उधर घूमते देखेंगे."
जब पृथ्वी के निकटतम बाह्यग्रहों की दूरियां भी सैकड़ों-हज़ारों प्रकाश वर्ष हों, तब गंभीर क़िस्म के वैज्ञानिकों के लिए यह मानना कठिन हो जाता है कि क्या कहीं ऐसे बुद्धिमान प्राणी भी हो सकते हैं, जो प्रकाश की गति से यात्रा कर सकते हैं और हज़ारों-लाखों प्रकाश वर्ष की दूरियां एक ही जीवनकाल में पूरी कर पृथ्वी पर पहुंच सकते हैं?
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हर तरह के कैंसर के लिए एक टीका
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अप्रैल 13, 2012 in हर तरह के कैंसर के लिए एक टीका
वैज्ञानिकों ने हर तरह के कैंसर के लिए एक टीका तैयार करने का दावा किया है. यह शरीर को ऐसे तैयार करेगा कि वह कैंसर को खुद पहचाने लगेगा और उसे खत्म करने लगेगा. हर तरह के कैंसर में एक खास समानता के कारण ही यह रास्ता निकला.
इस्राएल की तेल अवीव यूनिवर्सिटी और दवा कंपनी वैक्सिल बायोथेरापुटिक्स के मुताबिक कैंसर के 90 फीसदी मामलों में हमेशा एक अणु देखा जाता है. इसी अणु की मदद से कैंसर की पहचान की जाएगी. उम्मीद है कि जल्द ही एक यूनिवर्सल इंजेक्शन बाजार में लाया जा सकेगा. इसकी मदद से सभी मरीजों का रोग प्रतिरोधी तंत्र इतना मजबूत हो जाएगा कि वह कई तरह के कैंसरों से लड़ता रहेगा.
टीके का फिलहाल परीक्षण चल रहा है. प्रारंभिक परीक्षणों में पता चला है कि यह टीका मरीज की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत कर रहा है और बीमारी के स्तर को भी कम कर रहा है. अब वैज्ञानिक बड़े पैमाने पर परीक्षण करना चाहते हैं. तभी पता चलेगा कि क्या यह टीका वाकई हर तरह के कैंसर से लड़ सकता है.
वैज्ञानिकों के मुताबिक अगर प्रारंभिक चरण में ही किसी छोटे ट्यूमर की पहचान हो जाए, तो यह टीका उसे भी खत्म कर सकता है. नई दवा सर्जरी करा चुके लोगों में दोबारा ट्यूमर या कैंसर के लौटने की संभावना को भी खत्म करती दिख रही है.
शरीर का रोग प्रतिरोधी तंत्र कैंसर कोशिकाओं को खतरे की तरह नहीं देखता है. इसलिए कैंसर कोशिकाएं रोग प्रतिरोधी तंत्र से बच निकलती हैं. सामान्यतया रोग प्रतिरोधी तंत्र बाहरी कोशिकाओं के हमलों जैसे बैक्टीरिया आदि से लड़ता है. लेकिन ट्यूमर शरीर के अंदर किसी कोशिका के खराब होने से पनपता है.
वैज्ञानिकों के मुताबिक कैंसर कोशिकाओं में एक अणु बड़ी संख्या में पाया जाता है. इसे एमयूसीआई नाम दिया गया है. इसी की मदद से शरीर के रोग प्रतिरोधी तंत्र को ट्यूमर की पहचान हो सकती है. वैक्सीन में एमयूसीआई अणुओं का ही इस्तेमाल किया गया है, ताकि यह शरीर के अंदर जाकर कैंसर को पहचाने और उसे खत्म करना शुरू कर दें.
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फ्रांस के इस गांव से बनते हैं राष्ट्रपति
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अप्रैल 13, 2012 in फ्रांस के इस गांव से बनते हैं राष्ट्रपति

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फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति जाक शिराक इस बार के चुनाव में फ्रांसोआ ओलांद को क्यों वोट देंगे अगर यह समझना है तो कोरेज आना होगा. पैरिस से 400 किलोमीटर दूर बसे गांव ने देश को एक राष्ट्रपति दिया है और दूसरे की तैयारी है.
फ्रेंच भाषा में इसे ला फ्रांस प्रोफोंड भी कह सकते हैं यानी भीतरी फ्रांस. छोटे से गांव में थोड़े से लोग हैं और मुट्ठी भर पैसे. लेकिन इसी गांव में कई दशकों तक रह कर जाक शिराक ने अपना करियर बनाया. मौजूदा चुनाव में जिस उम्मीदवार के जीतने की बात कही जा रही है उन्होंने भी एक दो नहीं पूरे तीस साल तक इसी गांव में रह कर अपनी क्षमताओं को धारदार बनाया है
मौजूदा दक्षिणपंथी राष्ट्रपति निकोला सारकोजी इस हिसाब से फ्रांस की राजनीति में अनोखे हैं क्योंकि उन्होंने अपने करियर का ज्यादा वक्त फ्रांस के गांवों की बजाय पैरिस के आलीशान उपनगर में बिताया है. जाहिर है कि इन प्रांतों में वो ज्यादा लोकप्रिय नहीं हैं. 1995 से 2007 तक फ्रांस के राष्ट्रपति रहे जाक शिराक कोरेज के स्थानीय नागरिक हैं. पिछले साल अपनी रुढ़िवादी टोपी उतार कर उन्होंने एलान किया कि वो अपने उत्तराधिकारी सारकोजी की बजाय ओलांद को वोट देंगे. ऐसा नहीं है कि दोनों दक्षिणपंथी नेताओं का आपसी प्रेम खत्म हो गया हो तो भी 79 साल के शिराक यह नहीं कह सके कि वो सारकोजी को चुनेंगे और कोरेज के ज्यादातर लोग मानते हैं कि वो ओलांद को ही वोट देंगे.
ओलांद 1981 में पहली बार शिराक को चुनौती देने के लिए अपने गृहनगर नॉरमैन्डी से आए थे. उस वक्त उन्हें बाहर से भेजा उम्मीदवार कहा गया जिसके टिकने की उम्मीद नहीं थे. वे हारे जरूर लेकिन डिगे नहीं. 1981 में फ्रांसोआ मितराँ जब फ्रांस के पहले समाजवादी राष्ट्रपति बने तो उनकी पार्टी का कोई सदस्य शिराक के खिलाफ खड़ा होने के तैयार नहीं था. पूर्व प्रधानमंत्री और भविष्य के राष्ट्रपति से टकराने का साहस कम ही लोगों में था. ऐसे वक्त में मितराँ ने इकोल नेशनल एडमिनिशट्रेशन स्कूल के ग्रेजुएट 26 साल के ओलांद को यहां भेजा. तब शिराक ने यह कह कर कि "उनसे ज्यादा तो लोग मितराँ के कुत्ते को जानते हैं," उन्हें खारिज किया था. पूर्व समाजवादी कार्यकर्ता 74 साल के क्लोद मेनो याद करते हैं, "उनके हाथों में बस्ता था और वो हाई स्कूल के छात्र जैसे दिखते थे.
आखिरकार इस कोरेज का क्या असर है कि यहां से लोग राजनीति की बुलंदी छूते हैं. ऐसी जगह जहां कम्युनिस्ट दक्षिणपंथियों के लिए वोट देते हैं और रूढ़िवादी समाजवादियों के लिए, जहां नेताओं की छवि उनके आदर्शों पर भारी पड़ जाती है. यह इलाका गरीब है लेकिन खुबसूरत और आजाद ख्याल वाला. यहां की जमीन रजवाड़ों या बुर्जुआ समाज की बजाय किसानों के पास है और एक वक्त ऐसा भी था जब पैरिस की सत्ता के गलियारे में यहां के हितों की बात करने वाला कोई नहीं था. स्थानीय पत्रकार अलाँ एल्बिनेट कहते हैं, "कोरेज को अपने अस्तित्व के लिए राजनीति की जरूरत है. हम केवल अपने दम पर नहीं रह सकते. हमें पैरिस में संपर्क की जरूरत पड़ती है जिससे कि सड़कें बन सकें विकास हो."
हालांकि पास के एक छोटे शहर एग्लेटाँस के मेयर और सारकोजी की पार्टी यूएमपी की स्थानीय शाखा के प्रमुख माइकल पाइलासो नहीं मानते कि कोरेज की मिट्टी में ऐसा कुछ है जो राष्ट्रपति उगाती हो. एग्लेटाँस के दफ्तर में शिराक की एक बड़ी तस्वीर नजर आती है लेकिन सारकोजी की नहीं. वो कहते हैं, "दूसरी जगहों के मुकाबले अब यह राजनेताओं की जमीन नहीं रही."
जन्मभूमि चाहे अलग रही हो लेकिन शिराक और ओलांद ने कोरेज में बराबर वक्त गुजारा है. ओलांद की छवि सर्वसम्मति से चलने वाले की है तो शिराक को सामंती मिजाज वाला माना जाता है. राष्ट्रपति बनने से पहले शिराक 1977 से 1995 तक पैरिस के मेयर रहे हैं. दोनों ही पदों पर रहते हुए उनकी छवि ऐसी नीति पर चलने वाले की रही जिसमें कोरेज के लोगों को प्रमुखता दी गई. इस मामले में अब तो उन्हें एक अपराध का दोषी भी करार दिया गया है. उनके मेयर रहने के दौरान पैरिस के सिटी हॉल में कोरेज के 2000 लोग काम करते थे. जानकार बताते हैं कि उनके राष्ट्रपति रहने के दौरान एलिसी पैलेस में खास अधिकारियों की नियुक्ति की गई थी जो कोरेज से जुड़े मामले देखते थे.
1969 में तब के राष्ट्रपति जॉर्ज पोन्पीदू की सरकार के सबसे युवा सदस्य के रूप में चुने जाने के दो साल बाद शिराक ने कोरेज में सातो दी बिटी नाम का विला खरीदा था. बीमार चल रहे शिराक अब ज्यादा वक्त पैरिस में बिताते हैं लेकिन इस छोटे विला से गुजरने वाली सड़क अब भी अनिवासियों के लिए बंद है. विला के आस पास 300 मीटर के दायरे में कार रोकना अब भी गैरकानूनी है और उपग्रह से ली जाने वाली तस्वीरों में इसे धुंधला कर दिया गया है.
शिराक की केवल अपने घर की चिंता करने वाली छवि से उलट ओलांद समेत सारे समाजवादियों का जोर सर्वसम्मति वाली नीतियां अपनाने पर है. वैसे इतना तो सब जानते हैं कि ओलांद राष्ट्रपति बन गए तो भी कोरेज का बहुत भला नहीं होने वाला. इसलिए नहीं क्योंकि उनके और शिराक के बीच राजनीतिक मतभेद हैं बल्कि इसलिए क्योंकि सरकार के पास पैसा ही नहीं है.
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मंगलवार, 10 अप्रैल 2012
टीवी शो में वीना मलिक ने यूं दिखाए जलवे, देखिए तस्वीरें
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अप्रैल 10, 2012 in टीवी शो में वीना मलिक ने यूं दिखाए जलवे, देखिए तस्वीरें
पाकिस्तानी अभिनेत्री वीना मलिक हाल ही में शेखर सुमन के शो 'मूवर्स एंड शेखर्स' में नजर आईं|
इस शो में वीना ने शेखर के सभी सवालों के बेबाकी से जवाब दिए| वीना इस मौके पर काफी ग्लैमरस लुक में नजर आईं|
उन्होंने लाल रंग की ऑफ शोल्डर ड्रेस में शेखर के साथ पोज देकर खूब जलवे दिखाए| देखिए शो पर वीना के अंदाज इन तस्वीरों में: sabhar : bhsakar.com
इस शो में वीना ने शेखर के सभी सवालों के बेबाकी से जवाब दिए| वीना इस मौके पर काफी ग्लैमरस लुक में नजर आईं|
उन्होंने लाल रंग की ऑफ शोल्डर ड्रेस में शेखर के साथ पोज देकर खूब जलवे दिखाए| देखिए शो पर वीना के अंदाज इन तस्वीरों में: sabhar : bhsakar.com
कैफे में मालिक कर रहा था सेक्स, अब भुगतना पड़ेगा
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अप्रैल 10, 2012 in कैफे में मालिक कर रहा था सेक्स


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वाशिंगटन के लेनवुड में स्थित 'गर्ल्स टाउन एस्प्रैसो' को बीते शुक्रवार बंद कर दिया गया। कैफे के पिछले केबिन में वेश्यावृत्ति होने की अफवाहों के चलते उसे बंद कर दिया गया है।
इस कैफे में वीडियो कैमरे लगे हुए थे, जिनके द्वारा बिकनी में कॉफी सर्व करने वाली लड़कियों की फुटेज रिकॉर्ड की जाती थी। इस कैमरे के जरिए कैफे के पिछले केबिन में कैफे के मालिक और एक युवती के सेक्स करने की तस्वीरें सामने आई थी, जिसके कारण इसे बंद कर दिया गया है। sabhar : bhaskar.com
इस कैफे में वीडियो कैमरे लगे हुए थे, जिनके द्वारा बिकनी में कॉफी सर्व करने वाली लड़कियों की फुटेज रिकॉर्ड की जाती थी। इस कैमरे के जरिए कैफे के पिछले केबिन में कैफे के मालिक और एक युवती के सेक्स करने की तस्वीरें सामने आई थी, जिसके कारण इसे बंद कर दिया गया है। sabhar : bhaskar.com
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600 बच्चों का पिता था यह ब्रिटिश वैज्ञानिक
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अप्रैल 10, 2012 in 600 बच्चों का पिता था यह ब्रिटिश वैज्ञानिक

लंदन ब्रिटेन के एक वैज्ञानिक के बारे में माना जाता है कि 20 साल की अवधि में वह 600 संतान का जन्मदाता रहा। बटरेल्ड वेसनर नाम के इस वैज्ञानिक का निधन 1972 में हुआ। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने 1940 से 1960 के बीच अपने लंदन स्थित क्लीनिक में वीर्यदाता के तौर पर काम किया। उनके क्लीनिक के जरिए दो दशक की अवधि में करीब 1,500 महिलाओं ने गर्भ धारण किया।
‘डेली मेल’ के मुताबिक, दो ऐसे लोगों ने इस वैज्ञानिक के बारे में जानकारी दी है, जिनका जन्म इस क्लीनिक की मदद से हुआ था। एक जांच में पाया गया कि क्लीनिक के जरिए पैदा हुए करीब 1,500 लोगों में 600 से अधिक के पिता डॉक्टर वेसनर थे। इनमें कनाडा के डॉक्यूमेंटरी निर्माता बैरी स्टीवेंस और लंदन के वरिष्ठ वकील डेविड गोलांक्ज भी हैं।
लंदन ब्रिटेन के एक वैज्ञानिक के बारे में माना जाता है कि 20 साल की अवधि में वह 600 संतान का जन्मदाता रहा। बटरेल्ड वेसनर नाम के इस वैज्ञानिक का निधन 1972 में हुआ। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने 1940 से 1960 के बीच अपने लंदन स्थित क्लीनिक में वीर्यदाता के तौर पर काम किया। उनके क्लीनिक के जरिए दो दशक की अवधि में करीब 1,500 महिलाओं ने गर्भ धारण किया।
‘डेली मेल’ के मुताबिक, दो ऐसे लोगों ने इस वैज्ञानिक के बारे में जानकारी दी है, जिनका जन्म इस क्लीनिक की मदद से हुआ था। एक जांच में पाया गया कि क्लीनिक के जरिए पैदा हुए करीब 1,500 लोगों में 600 से अधिक के पिता डॉक्टर वेसनर थे। इनमें कनाडा के डॉक्यूमेंटरी निर्माता बैरी स्टीवेंस और लंदन के वरिष्ठ वकील डेविड गोलांक्ज भी हैं।
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डेढ़ साल पहले कंपनी बनाई और 50 अरब में फेसबुक को बेच दी
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अप्रैल 10, 2012 in 50 अरब में फेसबुक को बेच दी

नई दिल्ली. सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट फेसबुक ने एक अरब डॉलर यानी करीब 50 अरब रुपये में ‘इंस्टाग्राम’ नामक स्मार्टफोन ऐप्लिकेशन बनाने वाली कंपनी को खरीदने का ऐलान किया है। एक अरब डॉलर की यह राशि फेसबुक नकद और शेयर के रूप में देगी।
इंस्टाग्राम कंपनी का अधिग्रहण फेसबुक का अब तक का सबसे बड़ा सौदा बताया जा रहा है। यह अहम सौदा ऐसे समय में हुआ है जबकि फेसबुक कंपनी शेयर मार्केट में आने का अपना एक महीना पूरा कर रही है।
इंस्टाग्राम कंपनी की शुरुआत अक्टूबर 2010 में हुई थी और तस्वीरों के आदान-प्रदान करने वाला इसका सॉफ्टवेयर शुरू से ही एप्पल के आई फोन के लिए इस्तेमाल में लाया जाता रहा है।
इंस्टाग्राम कंपनी शुरू करने वाले केविन सिस्ट्रोम और माइक क्रेगर की कहानी भी बेहद दिलचस्प है। कंपनी के सीईओ केविन ने स्टैनफर्ड यूनिवर्सिटी से 2006 में मैनेजमेंट साइंस एंड इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन किया। उन्होंने इंटर्न के तौर पर ओडियो में काम किया जो बाद में ट्विटर बना। केविन ने गूगल में महज दो साल नौकरी की। उनकी दिलचस्पी सोशल नेटवर्किंग साइटों और फोटोग्राफी में रही। इसी वजह से उन्होंने खुद की कंपनी इंस्टाग्राम शुरू की।
केविन के सहयोगी माइक भी स्टैनफर्ड यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट हैं। उन्होंने माइक्रोसॉफ्ट की पावरप्वाइंट टीम में प्रोजेक्ट मैनेजर के तौर पर इंटर्नशिप किया और फॉक्समार्क्स में सॉफ्टवेयर डेवलपर के तौर पर काम किया। ग्रेजुएशन करने के बाद माइक ने मीबो कंपनी में डेढ़ साल काम किया। इसके बाद वह इंस्टाग्राम से जुड़ गए।
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नई दिल्ली. सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट फेसबुक ने एक अरब डॉलर यानी करीब 50 अरब रुपये में ‘इंस्टाग्राम’ नामक स्मार्टफोन ऐप्लिकेशन बनाने वाली कंपनी को खरीदने का ऐलान किया है। एक अरब डॉलर की यह राशि फेसबुक नकद और शेयर के रूप में देगी।
इंस्टाग्राम कंपनी का अधिग्रहण फेसबुक का अब तक का सबसे बड़ा सौदा बताया जा रहा है। यह अहम सौदा ऐसे समय में हुआ है जबकि फेसबुक कंपनी शेयर मार्केट में आने का अपना एक महीना पूरा कर रही है।
इंस्टाग्राम कंपनी की शुरुआत अक्टूबर 2010 में हुई थी और तस्वीरों के आदान-प्रदान करने वाला इसका सॉफ्टवेयर शुरू से ही एप्पल के आई फोन के लिए इस्तेमाल में लाया जाता रहा है।
इंस्टाग्राम कंपनी शुरू करने वाले केविन सिस्ट्रोम और माइक क्रेगर की कहानी भी बेहद दिलचस्प है। कंपनी के सीईओ केविन ने स्टैनफर्ड यूनिवर्सिटी से 2006 में मैनेजमेंट साइंस एंड इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन किया। उन्होंने इंटर्न के तौर पर ओडियो में काम किया जो बाद में ट्विटर बना। केविन ने गूगल में महज दो साल नौकरी की। उनकी दिलचस्पी सोशल नेटवर्किंग साइटों और फोटोग्राफी में रही। इसी वजह से उन्होंने खुद की कंपनी इंस्टाग्राम शुरू की।
केविन के सहयोगी माइक भी स्टैनफर्ड यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट हैं। उन्होंने माइक्रोसॉफ्ट की पावरप्वाइंट टीम में प्रोजेक्ट मैनेजर के तौर पर इंटर्नशिप किया और फॉक्समार्क्स में सॉफ्टवेयर डेवलपर के तौर पर काम किया। ग्रेजुएशन करने के बाद माइक ने मीबो कंपनी में डेढ़ साल काम किया। इसके बाद वह इंस्टाग्राम से जुड़ गए।
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केयू में दिखाई गई अश्लील फिल्म, शर्म से पानी-पानी हुईं छात्राएं
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अप्रैल 10, 2012 in केयू में दिखाई गई अश्लील फिल्म

चंडीगढ़.कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय द्वारा अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के नाम पर छात्र-छात्राओं को अश्लील फिल्में दिखाए जाने पर खासा हंगामा हुआ है। इंडियन नेशनल लोकदल ने इसकी कड़ी आलोचना की है।
उन्होंने कहा कि इस घटना से न सिर्फ प्रदेशवासियों का सिर शर्म से झुक गया है बल्कि इस फिल्म महोत्सव में परिवार सहित फिल्म देखने गए लोगों और विश्वविद्यालय की छात्राओं को शर्मसार होकर बीच में से ही उठकर वापस आने को मजबूर होना पड़ा।
चंडीगढ़.कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय द्वारा अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के नाम पर छात्र-छात्राओं को अश्लील फिल्में दिखाए जाने पर खासा हंगामा हुआ है। इंडियन नेशनल लोकदल ने इसकी कड़ी आलोचना की है।
इनेलो के प्रधान महासचिव डॉ. अजय सिंह चौटाला ने हुड्डा सरकार व विश्वविद्यालय प्रशासन की तीखी आलोचना की। उन्होंने कहा कि सरकार के चहेते अधिकारी प्रदेश की संस्कृति व सभ्यता को नष्ट करने और राज्य के शांतिप्रिय माहौल को बिगाड़ने का प्रयास कर रहे हैं।
छात्रों को अश्लील फिल्में दिखाना सरकार व विश्वविद्यालय प्रशासन की घटिया मानसिकता को दर्शाता है। अगर दोषी अधिकारियों को बर्खास्त कर तुरंत गिरफ्तार नहीं किया गया तो इनेलो इस मामले में कड़ा रुख अपनाएगी। पार्टी की छात्र शाखा व्यापक आंदोलन छेड़ेगी।’
विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा लड़कों की मौजूदगी में लड़कियों को ब्लू फिल्में दिखाना और अश्लील फिल्मों को दिन में दो-दो बार दिखाया जाना सरकार व विवि प्रशासन की घटिया मानसिकता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि अगर दोषी अधिकारियों को बर्खास्त कर तुरंत गिरफ्तार न किया गया तो इनेलो इस मामले में कड़ा रुख अपनाएगी व पार्टी की छात्र शाखा (इनसो) व्यापक आंदोलन छेड़ेगी।
शर्मसार हुईं छात्राएं
चौटाला ने कहा कि हुड्डा सरकार के मंत्री कहीं उल्टे झंडे लहरा रहे हैं तो कहीं सरकार के चहेते अधिकारी विश्वविद्यालय व विद्यालयों में अश्लील एवं ब्लू फिल्में दिखाकर प्रदेश के लोगों को शर्मसार कर रहे हैं।
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पति से मिला एड्स तो अवैध संबंध बना कर बांटने लगी मौत
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अप्रैल 10, 2012 in बना कर बांटने लगी मौत

नागपुर. जब इंसान को अपनों से दर्द मिले और समाज से तिरस्कार तो ऐसी हालत में या तो वह टूट जाता है या फिर बदले की भावना में कोई खौफनाक कदम उठा लेता है।
कुछ ऐसा ही वाकया शहर की दो औरतों के मामले में सामने आया है। उन्हें पति से एड्स जैसी जानलेवा बीमारी मिली, तो उन्होंने उसे अन्य लोगों से अवैध संबंध बनाकर समाज में बांटना शुरू कर दिया।
पहला मामला
कलमना निवासी सुनीता (परिवर्तित नाम) अपने पति के कारण जानलेवा बीमारी एड्स की चपेट में आ गई। सुनीता के तीन बच्चे भी एड्स से ग्रस्त हो गए। 2007 में पति की एड्स के कारण मौत हो गई। बेसहारा और कुंठित सुनीता ने अन्य लोगों से अनैतिक संबंध बनाकर जानलेवा बीमारी बांटने का काम शुरू कर दिया। सुनीता के ही एक शिकार अजय (परिवर्तित नाम) ने यह जानकारी एचआईवी पीड़ितों के लिए काम करने वाले गैर सरकारी संगठन ‘एफिकोर’ को दी।
दूसरा मामला
पारडी निवासी काजल (परिवर्तित नाम) का पति ट्रक ड्राइवर था। पति से ही काजल को एचआईवी वायरस मिले, जो उसके मासूम बेटे तक भी जा पहुंचे। पति की मौत के बाद लोगों के तानों से आजिज आकर उसने अपना घर बदल दिया और लोगों से अवैध संबंध बनाना शुरू कर दिया। काजल की जानकारी ‘एफिकोर’ को उसका इलाज करने वाले डॉक्टर से मिली। काजल ने बताया कि उसने अभी तक कुल 12 लोगों को एचआईवी पॉजिटिव बनाया है।
आर्थिक सहायता कर बदलाव की कोशिश
‘एफिकोर’ ने सुनीता व काजल को काउंसलिंग के जरिए समझाया और जीवन का मकसद बदलने में मदद की। संस्था ने दोनों महिलाओं को आर्थिक मदद देकर स्वरोजगार शुरू करने में सहायता की। अब दोनों सामान्य जीवन व्यतीत कर रही हैं। दोनों महिलाओं को अपने किए पर पछतावा है।
एड्स पीड़ितों के साथ समाज का रवैया नकारात्मक होने पर ऐसे लोग कुंठित होकर कोई भी कदम उठा सकते हैं। समय रहते उनकी जीवन की राह बदलने की कोशिश होनी चाहिए।
- हरसन के. वाई., निदेशक एफिकोर संस्था
पतियों से बीमारी मिलने के कारण महिलाओं में बेकसूर होते हुए भी मौत जैसी सजा मिलने का भाव पैदा हो जाता है। मनोविज्ञान में इसको बिहेवियरल चेंज कहते हैं। ऐसे में पीड़ित अपने जैसा समाज को बनाने की सोचता है। समय से उपचार मिलने पर पीड़ित में सुधार संभव है।
- डा. सुहाष बाघे, मेडिकल अधीक्षक, शासकीय मनोचिकित्सालय, नागपुर
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- डा. सुहाष बाघे, मेडिकल अधीक्षक, शासकीय मनोचिकित्सालय, नागपुर
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नौकरी दिलाने के नाम पर सेक्स रैकेट चलाती थी हीरोइन, पकड़ी गई
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अप्रैल 10, 2012 in सेक्स रैकेट चलाती थी हीरोइन

हैदराबाद। हैदराबाद पुलिस ने एक हाई प्रोफाइल सेक्स रैकेट का भांडाफोड़ किया है। इस रैकेट के सिलसिले में साउथ की एक फिल्म अभिनेत्री को गिरफ्तार किया गया है। अभिनेत्री का नाम तारा चौधरी बताया जा रहा है। पुलिस के मुताबिक, वह नौकरी के नाम पर लड़कियों को अपने जाल में फंसा लेती थी। फिर उनसे देह व्यापार कराती थी।
जानकारी के मुताबिक, गुप्त सूचना पर पुलिस ने हैदराबाद के पॉश इलाके बंजारा हिल्स पर छापा मार कर तारा को गिरफ्तार किया। उसे इस सेक्स रैकेट का सरगना बताया जा रहा है। उसका असली नाम राजेश्वरी है। आंध्रप्रदेश के प्रकासम जिले की रहने वाली तारा फिल्म स्टार बनना चाहती थी। पर जब उसे फिल्म की दुनिया में सफलता नहीं मिली तो वह जिस्म की मंडी में उतर गई।
बंजारा हिल्स इलाके में तेलगु फिल्म इंडस्ट्री के कई सुपर स्टार रहते हैं। पुलिस के मुताबिक, इस रैकेट का खुलासा एक पीड़ित महिला के सहयोग से किया गया। पुलिस को शक है कि तारा की डायरी से रैकेट से जुड़ी बड़ी हस्तियों के नाम उजागर हो सकते हैं।
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हैदराबाद। हैदराबाद पुलिस ने एक हाई प्रोफाइल सेक्स रैकेट का भांडाफोड़ किया है। इस रैकेट के सिलसिले में साउथ की एक फिल्म अभिनेत्री को गिरफ्तार किया गया है। अभिनेत्री का नाम तारा चौधरी बताया जा रहा है। पुलिस के मुताबिक, वह नौकरी के नाम पर लड़कियों को अपने जाल में फंसा लेती थी। फिर उनसे देह व्यापार कराती थी।
जानकारी के मुताबिक, गुप्त सूचना पर पुलिस ने हैदराबाद के पॉश इलाके बंजारा हिल्स पर छापा मार कर तारा को गिरफ्तार किया। उसे इस सेक्स रैकेट का सरगना बताया जा रहा है। उसका असली नाम राजेश्वरी है। आंध्रप्रदेश के प्रकासम जिले की रहने वाली तारा फिल्म स्टार बनना चाहती थी। पर जब उसे फिल्म की दुनिया में सफलता नहीं मिली तो वह जिस्म की मंडी में उतर गई।
बंजारा हिल्स इलाके में तेलगु फिल्म इंडस्ट्री के कई सुपर स्टार रहते हैं। पुलिस के मुताबिक, इस रैकेट का खुलासा एक पीड़ित महिला के सहयोग से किया गया। पुलिस को शक है कि तारा की डायरी से रैकेट से जुड़ी बड़ी हस्तियों के नाम उजागर हो सकते हैं।
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रविवार, 8 अप्रैल 2012
कमल हासन की छोटी बेटी बॉलीवुड को करेगी HOT, देखिए तस्वीरें
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अप्रैल 08, 2012 in कमल हासन की छोटी बेटी बॉलीवुड को करेगी HOT

इस फिल्म में बॉलीवुड पर राज कर चुकीं रति अग्निहोत्री के बेटे तनुज वीरवानी और विनोद खन्ना के भतीजे भी होंगे।
सूत्रों के अनुसार अक्षरा की मां सारिका की इस प्रोजेक्ट में कोई रुचि नहीं थी लेकिन पिता कमल हासन डायरेक्टर और प्रोड्यूसर दोनों से मिले और उन्हें स्क्रिप्ट भी बहुत पसंद आई। इसलिए उन्होंने बेटी अक्षरा को इस फिल्म के लिए हरी झंडी दे दी।
फिल्म की घोषणा मई के अंत में किए जाने की संभावना है। sabhar : bhaskar.com
कमल हासन की छोटी बेटी अक्षरा हासन बॉलीवुड में कदम रखने को तैयार हैं। सुनने में आया है कि अक्षरा को इरोज़ द्वारा साइन किया गया है जो 'पुरानी जींस' नाम का अपना पुराना प्रोजेक्ट फिर से शुरु कर रहे हैं।
इस फिल्म में बॉलीवुड पर राज कर चुकीं रति अग्निहोत्री के बेटे तनुज वीरवानी और विनोद खन्ना के भतीजे भी होंगे।
सूत्रों के अनुसार अक्षरा की मां सारिका की इस प्रोजेक्ट में कोई रुचि नहीं थी लेकिन पिता कमल हासन डायरेक्टर और प्रोड्यूसर दोनों से मिले और उन्हें स्क्रिप्ट भी बहुत पसंद आई। इसलिए उन्होंने बेटी अक्षरा को इस फिल्म के लिए हरी झंडी दे दी।
फिल्म की घोषणा मई के अंत में किए जाने की संभावना है। sabhar : bhaskar.com
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