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मंगलवार, 10 जनवरी 2012

जी जीनपिंग अगले साल बन सकते हैं चीन के राष्ट्रपति

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बीजिंग. चीन के शीर्ष नेतृत्व में अगले साल बड़े परिवर्तन होने की संभावना है। कयास लगाए जा रहे हैं कि उपराष्ट्रपति जी जीनपिंग राष्ट्रपति हू जिंताओ का स्थान लेंगे। कम्युनिस्ट पार्टी सीपीसी के आधिकारिक पत्र में कहा गया है कि राष्ट्रपति जिंताओ और प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ अगले साल सेवानिवृत्त हो सकते हैं। 







सीपीसी पोलित ब्यूरो के नौ में से सात सदस्यों का दूसरा कार्यकाल खत्म हो जाएगा या उनकी सेवानिवृत्ति की उम्र पूरी हो जाएगी। हू और वेन समेत उनके स्तर के नेता 2003 से अब तक दो कार्यकाल पूरा कर चुके हैं। इस साल पार्टी कांग्रेस के बाद उनके सेवानिवृत्त होने की संभावना है। इनके बाद सिर्फ उपराष्ट्रपति जी जीनपिंग और उप प्रधानमंत्री ली केकियांग ही स्थायी समिति में बने रहेंगे। 



रिपोर्ट में कहा गया है कि 18वें नेशनल पार्टी कांग्रेस में पार्टी महासचिव चुने जाने वाला नेता ही 2013 में होने वाले नेशनल पीपुल्स कांग्रेस में चुने जाने के बाद राष्ट्रपति पद पर नियुक्त होगा। गौरतलब है कि हू जिंताओ की ओर से जी को शक्तिशाली सैन्य आयोग का उपाध्यक्ष नियुक्त किए जाने के बाद से ही उनका नाम राष्ट्रपति पद के लिए प्रमुखता से लिया जा रहा है। वहीं अगले साल ही अमेरिका,रूस,फ्रांस और जर्मनी में भी चुनाव होने हैं। sabhar : bhaskar.com

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ब्रह्माण्ड और भौतिकी को समझ लिया नहीं समझ पाए महिलाओं को

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कैंब्रिज.अपने जीवन में स्टीफन हॉकिंग ने ब्रह्माण्ड और भौतिकी के कई रहस्य सुलझाए हैं लेकिन एक रहस्य उनकी समझ से बाहर है। स्टीफन ने माना है कि उन्हें महिलाएं रहस्यमय लगती हैं और उन्हें समझना नामुमकिन है।

हॉकिंग इस रविवार को अपना सत्तरवां जन्मदिवस मनाने वाले हैं। इस मौके पर ‘न्यू साइंटिस्ट’ पत्रिका को दिए एक साक्षात्कार में उन्होंने माना कि वह दिन का अधिकतर वक्त महिलाओं के बारे में सोचते हैं और वे उन्हें समझ नहीं आती। हॉकिंग ने कहा कि ‘ब्लैक होल’ में बारे में एक धारणा अब तक उनकी सबसे बड़ी गलती है।
 
हॉकिंग मानते थे कि ब्लैकहोल में सूचनाएं खत्म हो जाती हैं लेकिन बाद में उन्होंने अपना विचार बदल लिया। विज्ञान के क्षेत्र में उतरे रहे युवाओं को हॉकिंग नया क्षेत्र और विचार चुनने का सुझाव देते हैं।

एब्रीफ हिस्ट्री ऑफ हॉकिंग

जन्म 8 जनवरी 1942 स्थान ऑक्सफोर्ड (इंग्लैंड) विवाह दो बार (दोनों बार तलाक) जेन हॉकिंग (1965-1991) एलेन मैसन (1995-2006) वर्तमान पद कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के अप्लाइड मैथमेटिक्स व थ्योरिटिकल फिजिक्स विभाग में थ्योरिटिकल कॉस्मोलॉजी सेंटर के निदेशक (शोध)

हॉकिंग कहते हैं..

॥मेरा लक्ष्य सीधा है। मुझे समझना है कि ब्रह्माण्ड कैसा है, क्यों है और जैसा है वैसा क्यों है।


॥हम एक आम सितारे के चारों ओर घूमने वाले छोटे से ग्रह पर रहने वाले विकसित बंदर हैं। लेकिन हम ब्रह्माण्ड को समझ सकते हैं और यह हमें कुछ खास बनाता है।

जिनका जीना ही बना रहस्य

दुनिया के सबसे प्रसिद्ध वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग का जीवन भी उनके शोध के विषयों की तरह एक रहस्य है। जब वह 21 साल के थे तभी उन्हें पता चला था कि उन्हें ल्यू गेहरिग्स डिजीज नामक मोटर न्यूरॉन संबंधी समस्या है। इस तरह की बीमारियों से ग्रस्त अधिकतर इंसान कुछेक साल ही जी पाते हैं, हॉकिंग इस 8 तारीख को 70 साल के हो जाएंगे। इस क्षेत्र के विशेषज्ञ चिकित्सक हॉकिंग के दीर्घायु होने को करिश्मा मानते हैं। हॉकिंग उन चुनिंदा वैज्ञानिकों में से हैं जिन्हें रॉकस्टार या फिल्मी सितारों जैसी प्रसिद्धि मिली है।

1988 में अपनी पुस्तक ‘द ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ टाइम’ के बाद वह पूरी दुनिया में चर्चा में आए। ब्रह्माण्ड के स्वरूप का सरल वर्णन करने वाली उनकी इस किताब की लाखों प्रतियां बिकीं। ब्लैक होल और बिग-बैंग जैसी खगोलीय घटनाओं पर उनके शोध और विचारों ने कई अहम खोजों के लिए रास्ता बनाया है। ताज्जुब की बात है कि ये सभी महान काम हॉकिंग ने एक व्हील चेयर पर एक कंप्यूटर और वायस जेनरेटर के जरिए किए।

हॉकिंग की व्हीलचेयर पर लगे इस कंप्यूटर और वायस सिंथेसाइजर के जरिए वह अपना चेहरा हिलाकर अपनी बात रखते हैं। एक इन्फ्रारेड कैमरा उनकी भंगिमाओं के जरिए शब्द चुनता है और कंप्यूटर-जनित आवाज उसे लोगों तक पहुंचाती है। हालांकि, हॉकिंग को इस मशीन से एक शिकायत है, ‘इसमें मेरी आवाज किसी अमेरिकी जैसी लगती है।’

हॉकिंग की लोकप्रियता ने उन्हें ‘द सिंपसंस’ और स्टार ट्रेक जैसे टीवी कार्यक्रमों का भी हिस्सा बना दिया है। हालांकि, हॉकिंग खुद भी लोकप्रियता पसंद करते हैं और मजाकिया हैं। उनसे अक्सर पूछने वालों के लिए उन्होंने अपने कंप्यूटर पर एक मैसेज रिकॉर्ड कर रखा है,‘ नहीं, मैं स्टीफन हॉकिंग नहीं हूं, पर उन जैसा लगता जरूर हूं।’ इस रविवार को उनके जन्मदिन के लिए कैंब्रिज यूनिवर्सिटी ‘द स्टेट ऑफ यूनिवर्स’ विषय पर एक सेमिनार आयोजित कर रही है जिसमें हॉकिंग सहित विश्व के 27 बड़े वैज्ञानिक वक्ता होंगे। sabhar : bhaskar.com
 
 
 
 

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ऋतिक ने भी जमकर दिए किसिंग सींस, देखिए तस्वीरें

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अपना 38 वां जन्मदिन मना रहे ऋतिक रोशन अपने अब तक के फ़िल्मी करियर में कई अभिनेत्रियों के साथ नजर आए हैं|



इनमें से कुछ के साथ ऑन स्क्रीन केमिस्ट्री जबरदस्त साबित हुई है| फिल्मों में इनके संग ऋतिक ने किसिंग सीन्स भी दिए हैं| आइये देखते हैं इन हॉट एक्ट्रेसेस के साथ फिल्माए गए ऋतिक के कुछ हॉट किसिंग सीन्स:
 

अमीषा पटेल: अपनी पहली ही फिल्म 'कहो न प्यार है' में ऋतिक ने अमीषा पटेल के साथ एक किसिंग सीन दिया था| इन दोनों की जबरदस्त केम्सिट्री के चलते यह फिल्म सुपर हिट साबित हुई थी और ऋतिक रातों रात स्टार बन गए थे|
 

बारबरा मोरी: फिल्म काइट्स में ऋतिक ने हॉट मेक्सिकन अभिनेत्री के साथ जमकर हॉट और किसिंग सींस देकर सबको चौंका दिया था| किसी को उम्मीद नहीं थी कि ऋतिक किसी अभिनेत्री के साथ बड़े परदे पर इतने इंटिमेट सींस भी दे सकते हैं मगर उन्होंने ऐसा कर दिया| फिल्म के रिलीज़ होने के समय इनके अफेयर की चर्चा भी बहुत सुनने को मिली थी|
 

ऐश्वर्या राय: फिल्म धूम 2 में ऋतिक रोशन की जोड़ी पहली बार बच्चन बहू के साथ बनी| इस फिल्म में इन दोनों की जबरदस्त केमिस्ट्री की खूब तारीफ हुई| आमतौर पर ऐश बड़े परदे पर किसिंग सीन करने से बचती हैं मगर फिल्म में उन्होंने ऋतिक के साथ एक बेहद गरमा गरम किसिंग सीन देकर सबको चौंका दिया|
 

कैटरीना कैफ: बड़े परदे पर पहली बार ऋतिक और हॉट कैटरीना कैफ की जोड़ी 'जिंदगी मिलेगी न दोबारा' में नजर आई| इस फिल्म में भी कैट-ऋतिक के लिप लॉक सीन को खूब चर्चा मिली
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तस्वीरों में देखें सेक्स के बाद सुरंग से निकल मुंह छुपा भागती लड़कियां

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मुंबई। अंधेरी स्थित रत्ना पार्क बार में छापा मारकर महाराष्ट्र पुलिस ने एक बड़े सेक्स रैकेट का भांडाभोड़ किया है। यहां से आठ लड़कियों सहित कई दलालों को गिरफ्तार किया गया है। सभी को पीटा एक्ट के तहत मामला दर्ज़ कर गिरफ्तार कर लिया गया है।
जानकारी के मुताबिक, इस बार में लड़कियों को बिल्कुल सकरी जगह (सुरंग) में छुपाया गया था। बार के अंदर किचन से जुड़े एक छोटे से केबिन में लडकियो को छिपाकर रखा गया था। पुलिस रेड के दौरान इन्हें यहीं छुपा दिया जाता था।
पुलिस के मुताबिक, सेक्स रैकेट में लिप्त लडकियों को चालाकी से छुपाकर रखा जाता था। इन्हे सिंगर का कार्ड भी बनाकर दिया गया था। जबकि लडकियां सिंगर नहीं, बल्कि सेक्स रैकेट में शामिल थी। देह व्यापार का सारा कारोबार मैनेजर चलता था। मैनेजर सहित 5 लोगो को गिरफ़्तार किया गया है। sabhar : bhaskar.com




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शनिवार, 7 जनवरी 2012

सबसे ज्यादा यहां होता है यौन शोषण

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यूं तो महिलाओं के लिए कोई भी जगह सुरक्षित नहीं लेकिन अन्या जगहों की तुलना में ऑफिस को ज्यादा सुरक्षित समझा जाता है। 

लेकिन चाइना डेली के अनुसार चीन में लगभग 10 से 20 करोड महिलाएं कार्यक्षेत्र पर यौन शोषण का शिकार हुई है। वहां पर ज्यादातर महिलाओं का यौन शोषण ऑफिस में होता है।

 यौन शोषण की शिकार ये महिलाएं कोर्ट में जाने की बजाय विशेषज्ञों की सलाह लेती हैं। बहुत कम महिलाएं इन मामलों की रिपोर्ट दर्ज कराने का साहस दिखा पाती हैं।

वर्ष 2007 के बाद से यौन शोषण की 183 शिकायतें मिली हैं। केंद्र ने अब तक ऎसे 47 मामले निपटाए हैं, जिनमें से 34 फीसदी कार्यक्षेत्र से जुडे थे।  sabhar : bhaskar.com
 

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बिपाशा का टॉपलेस वीडियो लीक होने पर खूब मचा था हंगामा

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अभिनेत्री बिपाशा बसु का आज 31 वां जन्मदिन है |अपनी बोल्डनेस से सबको हैरान करने वाली बिपाशा के हॉट टॉपलेस एड ने खूब चर्चा बटोरी थी|उन्हें इस विज्ञापन की वजह से काफी आलोचना भी झेलनी पड़ी थी| बिपाशा पर फिल्माया गया यह उत्तेजक विज्ञापन पिछले साल भी सुर्ख़ियों में आया था|



पिछले साल इस वीडियो के नेट पर आ जाने के बाद बिपाशा के मैनेजर को यह सफाई देनी पड़ी थी कि यह 1999 में फिल्माया गया था जब बिप्स न्यूयॉर्क की फोर्ड मॉडलिंग एजेंसी के लिए काम करती थीं|



यह इंटरनेशनल असाइनमेंट के तौर पर फिल्माया गया था जिसका उपयोग इंटरनेशनल मार्केट के लिए किया जाना था मगर यह लीक हो गया|इस वीडियो में बिपाशा को शादी के लिए तैयार होते हुए एक राजकुमारी की तरह दिखाया गया है|इसमें विवेक ओबेरॉय भी नजर आए हैं| 
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स्टीव जॉब्स के होने और न होने का साल

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कंप्यूटर युग ने नई तकनीक और खोज के संसार में एक कद्दावर चेहरे को 2011 में 56 साल की छोटी उम्र में मरते देखा. एप्पल को जन्म देने वाले स्टीव जॉब्स की अक्टूबर में मौत तकनीकी दुनिया के लिए बहुत बड़ा सदमा रही.

 
स्टीव जॉब्स की मौत ऐसे वक्त में हुई जब एप्पल, दिग्गज तेल कंपनी एक्सॉन मोबिल को टक्कर देते हुए दुनिया की सबसे प्रभावशाली कंपनियों में शुमार हुई और उनकी कामयाबियों की तुलना अमेरिका के सर्वकालिक बड़ी खोज करने वाले थॉमस एडिसन और हैरिसन फोर्ड से की जा रही थी. जॉब्स की मौत के बाद के हफ्तों में अनगिनत बार कंप्यूटर, संगीत, डिजिटल सिनेमा, स्मार्ट फोन और टैबलेट कंप्यूटर में उनके लाए बदलावों की चर्चा होती रही. पर सोचने वाली बात यह थी कि एप्पल और तकनीक की दुनिया में स्टीव जॉब्स की दृष्टि और सोच शामिल नहीं हुई होती तो क्या होता.
जॉब्स की मौत के बाद एप्पल के शेयरों की कीमत में भारी गिरावट जरूर आई लेकिन जल्दी ही यह ऊपर चढ़ गया. निवेशकों को जल्दी ही पता चल गया कि दूरदर्शी जॉब्स ने अपने पिछले कई साल अपनी विरासत को संभालने वाले हाथों को तैयार करने में खर्च किए हैं. जॉब्स ने पहले से ही आने वाले समय के लिए एप्पल का खाका खींच रखा है. यहां तक की जॉब्स ने एक गुप्त एप्पल यूनिवर्सिटी भी बना रखी थी जो उनके टॉप एग्जिक्यूटिव्स को पढ़ाती थी. जब उन्होंने टिम कुक को अपने वारिस के रूप में नियुक्त किया तभी यह भी तय कर दिया कि जॉनी इवे की कुर्सी सुरक्षित रहे. जॉनी एप्पल के डिजाइन चीफ हैं.
जॉब्स की तैयारी कितनी तगड़ी है इसे इससे भी समझा जा सकता है कि उनकी मौत के कुछ ही दिन बाद बाजार में उतरा आईफोन 4एस रिकॉर्ड तोड़ बिक्री को हासिल कर गया वो भी तब जबकि पिछले फोन की तुलना में इसे बस कुछ मामूली सुधारों के साथ पेश किया गया. तकनीक के जानकार अब उम्मीद कर रहे हैं कि आईफोन 4एस में पेश किए गए सिरी और दूसरे वॉयस सिस्टम कंप्यूटर और लैपटॉप को नियंत्रित करने के तरीकों में जल्दी ही भारी लोकप्रियता हासिल कर लेंगे. ऐसी भी उम्मीद की जा रही है कि जल्दी ही इसके जरिए इंटरएक्टिव टीवी की भी शुरूआत हो सकेगी जिसका मनोरंजन की तकनीक को काफी लंबे समय से इंतजार है.
तकनीक के चाहने वालों के लिए एक और अच्छी खबर यह है कि इस दिशा में दिमाग लगाने वालों में जॉब्स अकेले नहीं हैं. माइक्रोसॉफ्ट ने दिसंबर की शुरुआत में एक अपडेट लॉन्च किया जो पांच करोड़ से ज्यादा लोगों के लिविंग रूप में मौजूद एक्बॉक्स 360 को आवाज से नियंत्रित होने वाले इंटरैक्टिव टीवी मॉड्यूल में बदल देगा. जॉब्स के पुराने प्रतिद्वंद्वी बिल गेट्स के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि हो सकती है लेकिन कई दूसरे कारोबारी भी जॉब्स की जगह लेने को बेचैन हैं. गूगल के सर्गे ब्रिन और लैरी पेज ने तो इंटरनेट इस्तेमाल करने वालों की जिंदगी बदल ही दी है, फेसबुक के मार्क जुकरबर्ग ने इंटरनेट के जरिए संपर्कों में क्रांतिकारी परिवर्तन ला दिया है. इन तीनों का एक ही मंत्र है और वो यह है कि कंप्यूटर क्रांति और उसमें उनकी जगह बस शुरू ही हुई है.

अब गूगल को ही देखिए उसने वेब की दुनिया में तो लगातार नई चीजों का शामिल करना जारी रखा ही है उसने वैकल्पिक ऊर्जा और परिवहन तंत्र में भी नई खोजों को शामिल करना शुरू कर दिया है. गूगल की खुद से चलने वाली कार का आने वाले समय में लोगों की आवाजाही पर क्रांतिकारी असर हो सकता है. ठीक वैसे ही जैसे कि कंप्यूटर इस्तेमाल करने वालों के लिए कोई जानकारी ढूंढने की दिशा में हुआ है.
इन लोगों ने एप्पल के लिए पहले ही चुनौतियां पेश करनी शुरू कर दी है. गूगल का एंड्रॉयड सॉफ्टवेयर अब दुनिया भर में ज्यादातर स्मार्टफोन्स के साथ काम करता है. कई लोगों का मानना है कि इस्तेमाल में यह आईफोन के जैसा ही है. इसी तरह आईपैड भी अब सिर्फ एप्पल की मिल्कियत नहीं रही. नवंबर में लॉन्च हुए अमेजन के किंडल फायर के 20 लाख टेबलेट बिक चुके हैं और उसके साथ दूसरी कंपनियों के टेबलेट की भी कतार लगी है.
आने वाले दौर में तकनीक की दुनिया पर कब्जे की होड़ क्या रंग लाएगी इस पर जानकारों की राय बंटी हुई है. एप्पल के शेयर अप्रैल में अपनी सर्वकालिक ऊंची कीमत 426 डॉलर से फिलहाल नीचे चल रहे हैं. तकनीकी बाजार के जानकार लियोनिड कानोप्का को लगता है "एप्पल का बुलबुला फूट चुका है." उनकी मानें तो शेयरों के भाव 100 डॉलर से भी नीचे आएंगे. उधर दूसरे जानकार एंडी जेकी का कहना है कि सभी ब्लू चिप कंपनियों के बीच एप्पल के शेयरों की कीमत सबसे कम लगाई गई है. आखिरकार एप्पल की सफलता उसके सामानों की ब्रैंडिंग पर निर्भर करती है.
फिलहाल तो यही लगता है कि भविष्य का ख्याल रख लिया गया है. क्रिसमस पर अमेरिकी बच्चों में कराए सर्वे में टॉप तीन इलेक्ट्रॉनिक गजट के बारे में पूछने पर 6-12 साल की उम्र के बच्चों ने सारे नाम एप्पल से जुड़े लिए. सर्वे के नतीजे बताते हैं कि 44 फीसदी बच्चे आईपैड चाहते हैं, जबकि 30 फीसदी बच्चे आईपॉड टच और 27 फीसदी बच्चों ने आईफोन के लिए चाहत दिखाई.
रिपोर्टः डीपीए/एन रंजन sabhar :www.dw-world.de
संपादनः महेश झा

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समुद्र में लौट रहे हैं मूंगे के जंगल

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बढ़ती आबादी की जरूरतों को पूरा करने के लिए समुद्री संसाधनों का भी इस्तेमाल बढ़ गया है, जिसकी वजह से समुद्र में कोराल समाप्त हो रहे हैं. एक जर्मन वैज्ञानिक से प्रेरणा लेकर अब उसे बचाने का काम चल रहा है.

 
साइनायड फिशिंग और पानी के बढ़ते तापमान के कारण इंडोनेशिया के बाली में कोरल या मूंगे कम हो रहे थे, लेकिन एक गोताखोर ने जर्मन वैज्ञानिक की किताब बायोरॉक से प्रभावित होकर एक परियोजना बनाई है, जिसे दुनिया भर में लागू किया जा रहा है. जिन 20 देशों में इस पर अमल हो रहा है उनमें दक्षिण पूर्व एशिया, कैरिबियन, हिंद महासागर और प्रशांत सागर के देश शामिल हैं.
बाली के उत्तरी तट पर पेमुतेरान के नीले पानी में इस परियोजना को 2000 में शुरू किया गया था. वहां क्रैब नाम का एक लोहे का फ्रेम है, जिसे विभिन्न प्रकार के कोरल से ढक दिया गया है, जिसमें सैकड़ों मछलियों ने अपना घर बना लिया है. मूंगे छोटे समुद्री जीव होते हैं जो लाखों की संख्या में समूह में रहते हैं और अपने इर्द गिर्द सख्त शंख बना लेते हैं जो पत्थर जैसे और अलग अलग रंगों के होते हैं. इन्हें तराश कर और चमका कर मूंगे के जेवर भी बनाए जाते हैं.
अपने प्रयासों की सफलता पर जर्मन मूल की ऑस्ट्रेलियाई नागरिक रानी मोरो वुइक को नाज है. उन्होंने पहली बार 1992 में पेमुतेरान में उसके सुंदर मूंगों को देखने के लिए गोताखोरी की थी. लेकिन 90 के दशक का अंत होते होते गर्म होते पानी के कारण कोराल रीफ लुप्त होने के कगार पर पहुंच गए. उन पर साइनायड और डायनामाइट से भी असर पर रहा था.
रानी कहती हैं कि वे बहुत दुखी हुईं. "सारा कोराल मर चुका था, वह बजरी और रेत में बदल गया था." लेकिन जब जर्मन समुद्री वैज्ञानिक वोल्फ हिलबैर्त्स ने उन्हें अपनी 1970 की खोज के बारे में बताया, गोताखोर रानी के कान खड़े हो गए. हिलबैर्त्स ने निर्माण सामग्री को समुद्र में उगाने का परीक्षण किया था. इसके लिए उन्होंने धातु का एक ढांचा समुद्र में डालकर उसे कम वोल्टेज बिजली से जोड़ दिया था. उसके बाद इलेक्ट्रोलाइसिस से चूना पत्थर बनना शुरू हुआ. जब हिलबैर्त्स ने अमेरिका के लुइजियाना में अपना परीक्षण किया तो उन्होंने पाया कि सीप और घोंघे ने सारी संरचना को ढक दिया है और चूना पत्थर पर घर बसा लिया है. और शोध करने पर यह कोरल के साथ भी संभव बना.
जमैका के समुद्र विज्ञानी थोमस गोरे कहते हैं, "कोरल दो से छह गुने तेजी से बढ़ते हैं. हम कुछ साल के अंदर रीफ को फिर से पैदा कर सकते हैं." गोरे ने 1980 के दशक में हिलबैर्त्स के साथ काम करना शुरू किया और चार साल पहले हिलबैर्त्स की मौत तक अपना सहयोग जारी रखा. जब रानी ने इस खोज को देखा तो उनके मन में विचार आया कि यह उनके समुद्र को भी बचा सकता है. अपना पैसा खर्च कर उन्होंने तमन सारी रिजॉर्ट की मदद से 22 ढांचो वाला प्रोजेक्ट बनाया.
अब पेमुतेरान खाड़ी में दो हेक्टेयर में फैले इस तरह के 60 पिंजड़े हैं और रीफ को बचा तो लिया ही गया है, वह अब और बढ़ रहा है. रानी कहती हैं, "अब हमारे पास पहले से बेहतर कोरल गार्डन है." स्थानीय मछुआरों ने भी इस परियोजना का फायदा देख लिया है. कॉलेज पास करने के बाद इ प्रोजेक्ट में शामिल होने वाली कोमांग अस्तिका कहती हैं, "शुरू में मछुआरे बायोरॉक प्रोजेक्ट नहीं चाहते थे. वे कहते थे कि यह उनका समुद्र है. अब वे मछली को वापस होते देख रहे हैं और पर्यटक भी वापस लौट रहे हैं."
रिपोर्ट: एएफपी/महेश झा
संपादन: एम गोपालकृष्णन
 
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अदृश्यता पैदा करने के करीब पहुंचे अमेरिकी वैज्ञानिक

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अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के वैज्ञानिक अदृश्य तकनीक की मदद लेते हुए एक जबरदस्त संचार सिस्टम बनाने में जुटे हैं. इसके 'टाइम क्लोक' यानी समय का आवरण कहा जा रहा है. सब कुछ आंखों के सामने होगा लेकिन किसी को भनक तक नहीं लगेगी.

 
बनाई गई मशीन प्रकाश के बहाव को ऐसे परिवर्तित कर रही है कि इंसानी आंखें इस परिवर्तन को पकड़ ही नहीं पा रही है. विज्ञान मामलों की पत्रिका नेचर में इस बारे में एक रिपोर्ट छपी है. रिपोर्ट के मुताबिक प्रकाश की कुछ खास रंग की किरणों में बदलाव करने पर इंसान की आंख को बेवकूफ बनाया जा सकता है. वैज्ञानिकों को लगता है कि इस तकनीक की मदद से इंसान के सामने बिना किसी नजर में आए काफी कुछ किया जा सकेगा.
न्यूयॉर्क की कोरनेल यूनिवर्सिटी की मोटी फ्रीडमन कहती हैं, "हमारे नतीजे दिखाते हैं कि हम अदृश्यता पैदा करने वाला उपकरण बनाने के काफी करीब पहुंच रहे हैं." प्रयोग के तहत अलग अलग आवृत्ति वाली प्रकाश की किरणों को भिन्न भिन्न रफ्तार से आगे बढ़ाया जाता है. प्रयोग के लिए कई लैंसों का इस्तेमाल किया गया. सबसे पहले हरे रंग के प्रकाश को फाइबर ऑप्टिक केबल से गुजारा गया.
फिर प्रकाश अलग अलग लेंसों से टकराया. लेंसों से टकराते ही प्रकाश किरणें दो रंगों में बदल गई. प्रकाश नीले और हरे रंग में टूर गई. नीले रंग की किरण लाल रंग से ज्यादा तेज रफ्तार से आगे बढ़ी. प्रकाश की दो किरणें बनने के दौरान अदृश्यता की स्थिति पैदा हो गई. प्रयोग के अगले चरण में टूटे हुई किरणों को फिर से एक कर दिया गया और फिर से सामान्य प्रकाश बन गया और अदृश्यता गायब हो गई.
यह सब कुछ 50 पीकोसेकेंड के भीतर हुआ. यह एक सेकेंड के 10 लाखवें हिस्से का भी पांच करोड़वां हिस्सा है. वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इस तकनीक का इस्तेमाल संचार में किया जा सकता है.  इस तकनीक के जरिए होने वाला संचार ऑप्टिकल सिग्नल तोड़ता है. किरणें टूटती हैं और अदृश्य हो जाती हैं. बाद में किरणों को फिर से एक किया जा सकता है और सब कुछ देखा जा सकता है. यानी डाटा को अदृश्य बनाकर भेजा जा सकता है और फिर एकत्रित किया जा सकता है.
रिपोर्ट: एएफपी/ओ सिंह
संपादन: एम गोपालकृष्णन
 
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गुरुवार, 5 जनवरी 2012

जब पूल पार्टी में जवान छात्र-छात्राओं ने जमकर मचाया था हुड़दंग

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पिछले साल स्कूल स्टूडेंट्स द्वारा आयोजित एक पार्टी में जब हजारों की संख्या में युवक-युवतियां पहुंच गए तो स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई। इस पूल पार्टी को कोलोरेडो स्टेट यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स के लिए आयोजित किया गया था। फेसबुक पर प्रचार के कारण इसमें हजारों की संख्या में युवक-युवतियां पहुंच गए और उन्होंने वहां जमकर हुड़दंग मचाया।
यह पूल पार्टी (स्वीमिंग पूल पार्टी) फोर्ट कोलिंस अपार्टमेंट कॉंपलेक्स में पिछले साल अगस्त महीने में आयोजित की गई थी। फेसबुक पर इस पार्टी के पेज पर लगभग 3000 लोगों ने आने के लिए रजिस्ट्रेशन करवाया था। लेकिन पार्टी में लगभग 4000 लोग पहुंच गए। दोपहर बाद पुलिस को आस-पास के लोगों ने ख़बर द्वारा ख़बर मिली कि पार्टी में शराब परोसी जा रही है और स्थिति बिगड़ सकती है।
दोपहर 3 बजे पहुंच कर पुलिस ने पार्टी को रूकवाया और 4 लोगों को गिरफ्तार किया, जिनमें से 2 यूनिवर्सिटी फुटबॉल टीम के खिलाड़ी भी हैं। पार्टी में हुड़दंग मचाने के कारण घायल 10 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। सभी गिरफ्तार युवकों को अधिक शराब पीने के मामले में गिरफ्तार किया गया।
पुलिस के अनुसार जब वे पार्टी में दबिश देने पहुंचे तो वहां का माहौल देखकर सनन रह गए। सभी लड़कियां टू-पीस बिकनी में थी और वहां जमकर हुड़दंग हो रहा था। वीडियो में देखिए किस तरह पूल पार्टी में युवक-युवतियां हुड़दंग मचा रहे थे। sabhar : bhaskar.com

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जानबूझ कर हजारों लोगों में फैलाया एड्स

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लंदन.अमेरिका में एक एचआईवी संक्रमित व्यक्ति ने जानबूझ कर असुरक्षित यौन सम्बन्ध स्थापित कर हजारों लोगों में एड्स फैला दिया है।


51 साल के डेविड डीन स्मिथ ने खुद मिसिगन पुलिस स्टेशन जा कर कबूल किया कि वह पिछले कई सालों में 3000 आदमियों और औरतों के साथ सोया है। मामले की जांच कर रहे एक जासूस ने बताया "उसका कहना है कि उसने ऐसा जानबूझ कर किया ताकि इस बीमारी से और लोग मरे।"

हालांकि अबतक यह नहीं पता चल पाया है कि स्मिथ को अपने एचआईवी संक्रमित होने का पता कब चला। उसने दावा किया है कि जब वह कई साथियों के साथ असुरक्षित यौन सम्बन्ध बना रहा था,इसका उसे इल्म था।

डेली मेल अखबार के मुताबिक उसने दावा किया है कि पीड़ितों की संख्या हजारों में हो सकती है। फिलहाल उसे मुक़दमे के लिए अदालत लाया गया हैऔर उसपर अनभिज्ञ साथी के साथ 'एड्स सेक्सुअल पेनेट्रेशन' के दो काउण्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। sabhar : bhaskar.com
 
 

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