न्यूज डेस्क.नोर्थ कोरिया के 'प्यारे नेता' किम जोंग इल के निधन ने एकाएक पूरी दुनिया का ध्यान इस द्वीप की ओर आकर्षित कर दिया है। इस देश के प्रमुख नेता की मृत्यु ने एक बार फिर नोर्थ कोरिया के उस कड़वे सच की यादें ताजा कर दी हैं।
उत्तर कोरिया अपने राजनीतिक कैदियों को अमानवीय प्रताड़ना दिए जाने की बात पर बदनाम हुआ था। 21वीं सदी की शुरुआत में नोर्थ कोरिया का यह कड़वा सच उजागर हुआ था।
नोर्थ कोरिया के उत्तर-पूर्वी छोर पर स्थित हेंगयोंग शहर में एक खुफिया कैंप चलाया जाता था, जहां राजनीतिक कैदियों को रखा जाता था। कैंप 22 नाम से मशहूर यह जेल चीन और रूस की सीमा करीब स्थित थी।
इस खतरनाक जेल से छूटे कैदियों के बयानों ने नोर्थ कोरिया में हो रहे अमानवीय आचरण का सच उजागर किया था। ब्रिटिश अखबार द गार्जियन ने अपनी एक रिपोर्ट में उत्तर कोरिया के खुफिया कैंप 22 का खुलासा किया था।
अखबार ने दावा किया था कि हर साल इस कैंप में हजारों लोग अपनी जान से हाथ धो बैठते हैं। इस कैंप में सुरक्षाकर्मी कैदियों के बच्चों की पैदा होते ही पैरों से कुचलकर मार डालते हैं।
गार्जियन के मुताबिक इन कैंपों में विद्रोहियों को गैस चैंबरों में रखकर प्रताड़ना दी जाती थी। उनके ऊपर भीषण रासायनिक प्रयोग किए जाते थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार उत्तर कोरियाई गार्ड कैदियों के पूरे परिवार को गैस चैंबर में डाल देते थे। अंदर लोग तड़पकर मरते रहते थे और बाहर खड़े वैज्ञानिक उन पर नोट्स लेते थे।
क्वोन ह्यूक नाम के एक पूर्व नोर्थ कोरियाई दूतावास के अधिकारी ने कैंप 22 में हुए अत्याचारों का खुलासा किया था। बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री में ह्यूक ने रेखाचित्रों के जरिए उन जेलों का विवरण दिया था।
ह्यूक ने कहा, "मैंने एक पूरे परिवार को गैस चैंबर के अंदर घुटने से मरते हुए देखा था। परिवार में माता-पिता, एक बेटा और एक बेटी थे। मां-बाप लगातार उल्टियां कर रहे थे और मर रहे थे। लेकिन इसी दौरान वो अपने बच्चों की बचाने का प्रयास भी कर रहे थे। लेकिन अंततः कोई जिंदा नहीं बचा।"
ह्यूक ने गैस चैंबर को दर्शाते कई रेखाचित्र भी बनाकर दिखाए थे। उसने कहा, "गैस चैंबरों को एयरटाइट सील कर दिया गया था। वो 3.5 मीटर चौड़े, 3 मीटर लंबे और 2.2 मीटर ऊंचे थे। उसके अंदर कैदियों को बंद कर दिया जाता था और जहरीली गैस छोड़ी जाती थी। लोग अंदर मरते रहते थे और वैज्ञानिक बाहर खड़े होकर उनका अध्ययन करते थे।"
ह्यूक ने बताया कि उस समय कैदियों के प्रति वो व्यवहार उन्हें सही लगता था। ह्यूक ने कहा, "अगर मैं यह कहूं कि बच्चों को ऐसी दर्दनाक मौत मरता देख मुझे उन पर दया आती थी, तो यह गलत होगा। उस समय मुझे लगता था कि वो सिर्फ हमारे दुश्मन हैं जिनके कारण हमारा देश तरक्की नहीं कर पा रहा है।"
खून की उल्टियां करते हुए मर गईं वो महिलाएं
नोर्थ कोरिया के कैंप 22 में सात साल तक कैदी रहे ओक ली ने भी एक चौंकाने वाला खुलासा किया था। ली के मुताबिक एक दिन सुरक्षाकर्मियों ने उससे 50 स्वस्थ महिला कैदियों का चयन करने के लिए कहा। इसके बाद उन्होंने ली को कुछ गीली पत्तागोभी दीं। गार्डों ने ली को उन्हें चयनित 50 महिलाओं को देने के लिए कहा। पत्तागोभी खाते ही वो लड़कियां खून की उल्टियां करने लगीं। 20 मिनट बाद उनमें से कोई जिंदा नहीं बचा था। sabhar :bhaskar.com