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शुक्रवार, 25 अप्रैल 2014

गुजरात में मिला समुद्र मंथन का पर्वत, यहीं किया था शिव ने विषपान

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गुजरात में मिला समुद्र मंथन का पर्वत, यहीं किया था शिव ने विषपान

सूरत। दक्षिण गुजरात के समुद्र में समुद्रमंथन वाला पवर्त मिला है। वैज्ञानिक परीक्षण के आधार पर इसकी पुष्टि भी की जा रही है। पिंजरत गांव के समुद्र में मिला पर्वत बिहार के भागलपुर में विराजित मूल मांधार शिखर जैसा ही है। गुजरात-बिहार का पर्वत एक जैसा ही है। दोनों ही पर्वत में घ्ग्रेनाइट– की बहुलता है। 
 
सामान्यत: समुद्र की गोद में मिलने वाले पर्वत ऐसे नहीं होते। सूरत के आॉर्कियोलॉजिस्ट मितुल त्रिवेदी ने कॉर्बन टेस्ट के परीक्षण के बाद यह निष्कर्ष निकाला है। उन्होंने दावा किया है कि यह समुद्रमंथन वाला ही पर्वत है। इसके समर्थन में अब प्रमाण भी मिलने लगे हैं।  ओशनोलॉजी ने अपनी वेबसाइट पर इस तथ्य की आधिकारिक रूप से पुष्टि भी की है।
गुजरात में मिला समुद्र मंथन का पर्वत, यहीं किया था शिव ने विषपान

द्वारकानगरी की खोज, मिला मांधार शिखर:
 
सूरत के ओलपाड से लगे पिंजरत गांव के समुद्र में 1988 में प्राचीन द्वारकानगरी के अवशेष मिले थे। डॉ. एस.आर.राव इस साइट पर शोधकार्य कर रहे थे। सूरत के मितुल त्रिवेदी भी उनके साथ थे। विशेष कैघ्सूल में डॉ. राव के साथ मितुल त्रिवेदी भी समुद्र के अंदर 800 मीटर की गहराई तक गए थे। तब समुद्र के गर्भ में एक पर्वत मिला था। इस पर्वत पर घिसाव के निशान नजर आए। ओशनोलॉजी डिपार्टमेंट ने पर्वत के बाबत गहन अध्ययन शुरू किया। पहले माना गया कि घिसाव के निशान जलतरंगों के  हो सकते हैं। विशेष कॉर्बन टेस्ट किए जाने के बाद पता चला कि यह पर्वत मांधार पर्वत है। पौराणिक काल में समुद्रमंथन के लिए इस्तेमाल हुआ पर्वत है। दो वर्ष पहले यह जानकारी सामने आई, किन्तु प्रमाण अब मिल रहे हैं।

गुजरात में मिला समुद्र मंथन का पर्वत, यहीं किया था शिव ने विषपान

अब आगे क्या:
पिंजरत के पास खोजकार्य फिलहाल बंद है। दूसरे शब्दों में सभी शोधकार्य लटके हुए हैं। सरकार ने इजाजत दी तो इन पर पुनघ् काम शुरू हो सकेगा।
 
वीडियो-आर्टिकल में भी पुष्टि:
ओशनोलॉजी डिपार्टमेंट ने वेबसाइट पर लगभग 50 मिनट का एक वीडियो जारी किया है। इसमें पिंजरत गांव के समुद्र से दक्षिण में 125 किलोमीटर दूर 800 की गहराई में समुद्रमंथन के पर्वत मिलने की बात भी कही है। वीडियो में द्वारकानगरी के अवशेष की भी जानकारी है। इसके अलावा वेबसाइट पर एशियन्ट द्वारका के आलेख में ओशनोलॉजी डिपार्टमेंट द्वारा भी इस तथ्य की पुष्टि की गई है।

गुजरात में मिला समुद्र मंथन का पर्वत, यहीं किया था शिव ने विषपान


ऐसे हुई तस्दीक, ये टेस्ट भी:
 
ऑर्कियोलॉजी डिपार्टमेंट ने सबसे पहले अलग-अलग टेस्ट किए। इनसे साफ हुआ कि पर्वत पर नजर आ रहे निशान जलतरंगों के कारण नहीं पड़े हैं। तत्पश्चात, एब्स्यूलूट मैथड,रिलेटिव मैथड, रिटन मॉर्कर्स, एईज इक्वीवेलन्ट स्ट्रेटग्राफिक मॉर्कर्स एवं  स्ट्रेटीग्राफिक रिलेशनशिघ्स मैथड तथा लिटरेचर व रेफरन्सिस का भी सहारा लिया गया।


गुजरात में मिला समुद्र मंथन का पर्वत, यहीं किया था शिव ने विषपान

विभाग ने कर दी है पुष्टि :
 
आर्कियोलॉजिस्ट मितुल त्रिवेदी के बताए अनुसार यू-ट्यूब पर ओशनोलॉजिस्ट विभाग ने 50 मिनट का एक वीडियो अपलोड किया है। इसमें विभाग ने पिंजरत के पास 125 किमी दूर समुद्र में 800 फुट नीचे द्वारका नगरी के अवशेषों के साथ मन्दराचल पर्वत की भी खोज की है। ओशनोलॉजिस्ट वेबसाइट पर आर्टिकल में विभाग द्वारा इस बात की पुष्टि कर दी गई है।

गुजरात में मिला समुद्र मंथन का पर्वत, यहीं किया था शिव ने विषपान

पुराण कथाओं के अनुसार :
 
द्वारका नगरी के पास ही देवताओं और राक्षसों ने अमृत की प्राप्ति के लिए समुद्र मंथन किया था। इस मंथन के लिए मन्दराचल पर्वत का उपयोग किया था। समुद्र मंथन के दौरान विष भी निकला था, जिसे महादेव शिव ने ग्रहण कर लिया था। 

गुजरात में मिला समुद्र मंथन का पर्वत, यहीं किया था शिव ने विषपान

मितुल त्रिवेदी 42 भाषएं और 9 लिपि जानते हैं:
 
आर्कियोलॉजिस्ट मितुल त्रिवेदी 42 भाषाएं और 8 लिपियों के जानकार हैं। वे नासा, आर्कियोलॉजिस्ट विभाग और इसरो से भी जुड़े हुए हैं। हडप्पा-मोहेंजोदडो की भाषा का उन्हीं ने अनुवाद किया था।

गुजरात में मिला समुद्र मंथन का पर्वत, यहीं किया था शिव ने विषपान


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विमान नहीं, ये है गुजरात की सबसे महंगी हाई-टेक बस, देखें तस्वीरें..

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विमान नहीं, ये है गुजरात की सबसे महंगी हाई-टेक बस, देखें तस्वीरें...

राजकोट। हरेक सीट पर 18 इंच की टच स्क्रीन के साथ डीटीएच कनेक्शन, रेफ्रीजरेटर, माइक्रोवेव, कॉफी वेंडिंग मशीन, टॉयलेट, मनोरंजन के लिए 50 फिल्में और 5000 गीतों का मजा, वाई-फाई व अन्य सुविधाएं..जैसी अद्भुत सुविधाओं से लैस यह नजारा किसी विमान का नहीं, बल्कि गुजरात की सबसे महंगी बस का है। 
 
बस में मिलने वाली सुविधाएं किसी एयरलाइंस से कम नहीं। यहां यात्रियों के आरामदायक सफर के लिए मनोरंजन से लेकर हरेक बात का ध्यान रखा गया है। बस में एयर हॉस्टेस भी यात्रियों की सेवा में हाजिर रहती है।  
 
यह बस राजकोट की निजी ट्रैवल कंपनी की है, जो राजकोट से अहमदाबाद तक चलती है। कंपनी इसके अलावा अन्य कई लग्जुरियस बसें भी चलाती है। ट्रैवल कंपनी के मालिक द्वारा बताए अनुसार इस बस की कीमत 2 करोड़ रुपए से ऊपर है।
विमान नहीं, ये है गुजरात की सबसे महंगी हाई-टेक बस, देखें तस्वीरें...

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जब रातों रात रात भूतों ने बना दिया भगवान श्री कृष्ण का मंदिर

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यह चौंकाने वाली कहानी वृंदावन की है

यह चौंकाने वाली कहानी वृंदावन की है


भूतों को भगवान से डर लगता है यह तो आपने कई बार सुना होगा लेकिन क्या कभी सुना है कि भूत खुद आकर भगवान के लिए मंदिर बनाने लग जाएं। लेकिन यह चौंकाने वाली कहानी वृंदावन की है।

मंदिर जिसे भूतों ने बनाया

वृंदावन की पवित्र भूमि जिसे भगवान श्री कृष्ण की लीलास्थली के रुप में जाना जाता है। इस भूमि में एक प्राचीन मंदिर है जिसका नाम गोविद देव जी मंदिर है। इस मंदिर के विषय में मान्यता है कि इस मंदिर का निर्माण भूतों ने करवाया है।

भूतों ने एक रात में ही कई मंजिला मंदिर का निर्माण कर दिया। लेकिन मंदिर पूरा होने से पहले ही भूतों को मंदिर निर्माण का काम छोड़कर भागना पड़ा।

इसलिए मंदिर का काम छोड़कर भाग गए भूत

इसलिए मंदिर का काम छोड़कर भाग गए भूत

इसके विषय में यह कहा जाता है कि सुबह होने वाली थी। और भूत मंदिर का निर्माण करने में लगे थे। तभी किसी ने चक्की लगाना शुरु कर दिया। चक्की की आवाज सुनकर भूत मंदिर का काम छोड़कर भाग गए। कहते हैं कि मुगलों के समय में इस मंदिर की रोशनी आगरा तक दिखती थी।

वृंदावन से जयपुर पहुंच गए गोविंद जी, यह है प्राचीन मूर्ति

इस मंदिर के विषय में कहा जाता है कि इस मंदिर में स्थापित प्राचीन मूर्ति अब इस मंदिर में नहीं है। मंदिर के पुजारी मू्र्ति की रक्षा के लिए इसे जयपुर लेकर चले गए। आज वह प्राचीन मूर्ति जयपुर के गोविंद देव जी मंदिर में विराजमान है।  sabhar :http://www.amarujala.com/

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इन तकनीकों से बदल जाएगा जीने का ढंग

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dyson award shortlisted 20 technologies

इस साल के इंजीनियरिंग के जेम्स डाइसन अवार्ड के विजेता को 29,20,000 रुपए की राशि मिलेगी। यह ब्रितानी प्रोजेक्ट है बायोवूल। यह ऊन उद्योग के अवशेषों को ऐसे पदार्थ के रूप में बदल देगा जिसे प्लास्टिव के विकल्प के रूप में इस्तेमाल किया जा सकेगा


इस साल के इंजीनियdyson award shortlisted 20 technologies

इस साल छांटी गई 20 प्रविष्टियों में से दूसरी जर्मन है। ज़ारियस हवा से बिजली उत्पन्न करता है जिससे दूसरे उपकरणों को चार्ज किया जा सकता है।


dyson award shortlisted 20 technologies

ऑस्ट्रिया का सोनो कुछ चुनिंदा आवाज़ों को बंद कर सकता है जिससे वह खिड़की के बाहर न जा सकें। इन आवाज़ों को वाई-फ़ाई से चुन सकता है

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ओल्टू फलों और सब्ज़ियों को रखने के लिए ज़्यादा जगह देता है। यह स्पेनी अविष्कार ऊर्जा के लिए फ़्रिज के पीछे पैदा होने वाली गर्मी का इस्तेमाल करता है। इसके चार अलग-अलग खानों को ठंडा, गरम, गीला या सूखा रखा जा सकता है।

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इस अमरीकी अविष्कार में साइकिल के पहियों में एलईडी चक्के लगाकर सवार को दुर्घटना से बचाने का इंतज़ाम है। इसे ऊर्जा एक बैटरी से मिलती है।



इस अमरीकी अविष्कार में dyson award shortlisted 20 technologies

कॉम्ब एक चालकरहित डंपर ट्रक है। ऑस्ट्रिया के इस प्रोजेक्ट में जीपीएस लोकेशन तककनीक के ज़रिए वाहन को चलाने का प्रस्ताव है।

dyson award shortlisted 20 technologies

स्टैक एक दुबला प्रिंटर है। यह कागज़ों के चट्टे पर रखा जाता है और उसमें से काग़ज़ लेकर प्रिंट देता रहता है। इसमें काग़ज़ को अंदर डालने की ज़रूरत नहीं रहती। इसे बनाने वाली स्विस टीम का कहना है कि छोटे घरों के लिए यह आदर्श रहेगा।

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यह उपकरण अपने आप टांके लगाने के लिए तैयार किया गया है ताकि मेडिकल कर्मचारी कुछ और काम कर सकें। इसे बनाने वाली कनाडाई टीम इसे पेट की सर्जरी के बाद उसे सिलने के लिए इसे तैयार किया है ताकि यह काम जल्दी हो सके




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टीमओ को इसलिए डिज़ाइन किया गया है कि ताकि अगर किसी को लाइफ़जैकेट के सहारे खींचा जाए तो उसका मुंह पानी से बाहर रहे। इसे बनाने वाली ब्रितानी टीम ने लहरों के थपेड़ों से बचाने के लिए गर्दन के चारों ओर एक सहारा भी दिया है।
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कोर्टेक्स एक थ्रीडी-प्रिंटिड सांचा है। इसे प्लास्टर से बनने वाले मूल सांचों से होने वाली बदबू और खुजली जैसे दिक्कतों को दूर करने के लिए बनाया गया है। न्यूज़ीलैंड के इसके आविष्कारक कहते हैं कि अवशेषों को कम करने के लिए इसे रिसाइकल्ड प्लास्टिक से बनाया गया है।

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रिन्यूवेबल वेव पावर जेनरेटर पहले ही जेम्स डाइसन प्रतियोगिता में ब्रिटेन का चक्र जीत चुका है। इसमें हल्के से जुड़े पिस्टनों को ज्वारीय पानी से ऊर्जा हासिल करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यह उन उपकरणों से आगे है जो तभी ठीक से काम कर पाते हैं जब पानी एक दिशा में चलता है।


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आइरिश आविष्करकों की टीम ने सेंसर युक्त जबड़ा मेमोरी बनाया है। यह खिलाड़ी को ज़्यादा चोट लगने पर मेडिकल कर्मचारियों को सूचित कर देता है।

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अमरीका में तैयार टाइटन आर्म ऊपरी हिस्से पर लगने वाला उपकरण है जो पहनने वाले की ताकत बढ़ाने का वादा करता है। इसे बनाने वालों का कहना है कि इसे घायल लोगों की कोशिका निर्माण के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है

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ई-हेल्थ रास्पबेरी पाइ और अरड्यूनो कंप्यूटरों के इस्तेमाल से रक्तचाप, रक्त में ऑक्सीजन और दूसरे बायोमैट्रिक आंकड़ों को मापने का एक किफ़ायती तरीका है। इसके स्पेनिश आविष्कारकों का कहना है कि इसका इस्तेमाल घर पर ही स्वास्थ्य जांच के लिए किया जा सकता है।

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अवारिंग को सुनने में कमज़ोर लोगों के लिए डिज़ाइन किया गया है। इस जापानी अविष्कार में लाइटों के ज़रिए यह बताया जाता है कि कौन बात कर रहा है और कितनी ज़ोर से बोल रहा है।

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हैंडी के टुकड़ों को थ्रीडी प्रिंटर की मदद से फिर बनाया जा सकता है। इसके जापानी आविष्कारकों का कहना है कि इससे इस प्रोस्थेटिक हाथ की देखरेख किफ़ायती हो सकती है।

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ग्लूको एक स्मार्टफ़ोन से एक ख़ास घड़ी को जोड़कर मधुमेह के स्तर की जांच करता है। इसे बनाने वाली फ्रांसीसी टीम का कहना है कि अगर मधुमेह का स्तर बहुत कम या ज़्यादा हो जाता है तो इसकी जानकारी नामित व्यक्ति को दी जा सकती है।

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हाइड्रोस लाइफ़ जैकेट निर्माण के लिए नया नज़रिया पेश करता है। इसे बनाने वाली आयरिश टीम का कहना है कि यह आरामदेह है और पारंपरिक डिज़ाइन के मुकाबले ठंड से बेहतर बचाव करता है।




ऑस्ट्रेलिया की टीम ने बच्चों के लिए रोम नाम के ऑक्सीजन सिलिंडर का अविष्कार किया है। इसमें एक नाक पर लगाने वाला मास्क भी होता है। इसे बनाने वालों का कहना है कि गंभीर दमे के अटैक के वक्त मौजूदा सिलिंडरों के मुकाबले इसे लाना-ले जाना आसान है।
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ऑस्ट्रेलिया की टीम ने बच्चों के लिए रोम नाम के ऑक्सीजन सिलिंडर का अविष्कार किया है। इसमें एक नाक पर लगाने वाला मास्क भी होता है। इसे बनाने वालों का कहना है कि गंभीर दमे के अटैक के वक्त मौजूदा सिलिंडरों के मुकाबले इसे लाना-ले जाना आसान है।

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लेनिफी एक स्ट्रेचर है जो तीन टुकड़ों में बंट जाता है। इसे बनाने वाली अमरीकी टीम का कहना है कि इससे स्वास्थ्यकर्मियों को मरीज़ को एक हिस्से से दूसरे हिस्से में खिसकाने में मदद मिलती है। पारंपरिक रूप से उठाकर रखने से मरीज़ को और नुक्सान पहुंच सकता है। प्रतियोगिता के परिणाम 7 नवंबर को घोषित होंगे।

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कोर्टेक्स एक थ्रीडी-प्रिंटिड सांचा है। इसे प्लास्टर से बनने वाले मूल सांचों से होने वाली बदबू और खुजली जैसे दिक्कतों को दूर करने के लिए बनाया गया है। न्यूज़ीलैंड के इसके आविष्कारक कहते हैं कि अवशेषों को कम करने के लिए इसे रिसाइकल्ड प्लास्टिक से बनाया गया है।

स्टैक एक दुबला प्रिंटर है। यह कागज़ों के चट्टे पर रखा जाता है और उसमें से






 काग़ज़ लेकर प्रिंट देता रहता है। इसमें काग़ज़ को अंदर डालने की ज़रूरत नहीं रहती। इसे बनाने वाली स्विस टीम का कहना है कि छोटे घरों के लिए यह आदर्श रहेगा।




साइकिल के पहियों में एलईडी चक्के लगाकर सवार को दुर्घटना से बचाने का इंतज़ाम है। इसे ऊर्जा एक बैटरी से मिलती है।









रिंग के जेम्स डाइसन अवार्ड के विजेता को 29,20,000 रुपए की राशि मिलेगी। यह ब्रितानी प्रोजेक्ट है बायोवूल। यह ऊन उद्योग के अवशेषों को ऐसे पदार्थ के रूप में बदल देगा जिसे प्लास्टिव के विकल्प के रूप में इस्तेमाल किया जा सकेगा

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गुरुवार, 24 अप्रैल 2014

पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति का कबूलनामा: एलियन्स की पसंदीदा जगह है पृथ्वी

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कहने को तो ये धरती इंसानों की है लेकिन इस इंसानी दुनिया में समय-समय पर ऐसे लोगों का विचरण या आगमन होता रहता है जिनका इस लौकिक दुनिया से कोई वास्ता नहीं है. भूत-प्रेत, आत्माओं से जुड़े किस्से और कहानियां हम अकसर सुनते आए हैं और जहां तक उम्मीद है आगे भी इसी तरह सुनते रहेंगे लेकिन दूसरे ग्रह के प्राणियों, एलियन का जिक्र जब कभी भी उठता है, उस पर विश्वास से ज्यादा संदेह करने वालों की तादात बढ़ती जाती है लेकिन जब अमेरिका जैसी महाशक्ति के राष्ट्रपति ही इस बात को कबूल कर लें कि अगर धरती पर एलियन का आवागमन होता है तो इस बात से उन्हें कोई आश्चर्य नहीं होगा क्योंकि शायद कहीं ना कहीं उन्हें भी इस बात का यकीन है कि मंगलवासियों का धरती पर विचरण होना एक सामान्य सी घटना है.

Bill Clinton With Alien


हम बात कर रहे हैं अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन की जिन्होंने हाल ही में हुए एक टॉक शो में यह कबूल किया कि जैसे ही उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति का पदभार संभाला तभी उन्होंने अपने साथियों को एरिया 51 का जिसे नेवादा टेस्ट एंड ट्रेनिंग रेंज भी कहा जाता है, का सर्वेक्षण करने को कहा ताकि वह जान सकें कि सैन्य कार्यवाहियों में काम आने वाले इस स्थान पर एलियन तो नहीं हैं.


अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन का कहना है कि हम एक ऐसे युग में रहते हैं जिस समय ब्रह्मांड का विस्तार निरंतर होता जा रहा है, ऐसे में मंगल और धरती की दूरी ज्यादा नहीं रह गई है. अब अगर एलियन अपना ग्रह छोड़कर धरती पर आते हैं तो इसमें हैरत की कोई बात नहीं है.

sabhar :http://worldfocus.jagranjunction.com/

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रहस्यः क्या सच में जहाज होते हैं यहां एलियन्स का शिकार या फिर

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वॉशिंगटन: दुनिया में बहुत सारी जगह रहस्यों से भरी पड़ी हैं और जिसके रहस्य का खुलासा कभी भी नहीं हो पाया है। ऐसा ही रहस्यों से भरा हुआ है अमेरिका के दक्षिण पूर्वी तट पर बना बरमूडा ट्राएंगल, जहां पर पुहंचा जहाज आज तक नही मिला। यहां तक की बरमूडा ट्राएंगल के रहस्य के बारे में वैज्ञानिक भी पता नहीं लगा पाएं। 

बरमूडा ट्राएंगल अमेरिका के फ्लोरिडा, प्यूर्टोरिको और बरमूडा तीनों को जोड़ने वाला एक ट्रायंगल यानी त्रिकोण है। इस ट्राएंगल में पास पह‌ुंचते ही न तो समुद्री जहाज, हवाई जहाज मिलता है और न ही उसके यात्री। इस जगह पर कई जहाज लापता हो गए, जिसमें मैरी सेलेस्टी, एलिन ऑस्टिन फ्लाईट 19, स्टार टाईगर, डगलस डीसी-3 बरमूडा ट्राएंगल में गुम होने वाले हवाई जहाजों के नाम हैं। 

बरमूडा ट्राएंगल क्षेत्र में मैरी सेलेस्टी नाम का एक व्यापारिक जहाज लापता हो गया था जो 4 दिसम्बर 1872 को अटलांटिक महासागर में मिला, लेकिन किसी यात्री या कर्मचारी का कोई भी सुराग नहीं मिला। पहले-पहले इस जहाज को समुद्री डाकुओं द्वारा लूटे जाने की आशंका जताई गई लेकिन कीमती सामानों के सुरक्षित होने से यह बात साबित नहीं हुई। इस जहाज की तरह 1881 में एलिन ऑस्टिन नामक जहाज भी यहां गायब हो गया। यह जहाज कुशल चालकों के साथ न्यूयॉर्क के लिए रवाना हुआ और इसके भी किसी यात्री के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली।

अमेरिका के लेफ्टिनेंट कमांडर जी डब्ल्यू वर्ली 309 क्रू सदस्यों के साथ यूएसएस साइक्लोप्स नाम के जहाज से सफर कर रहे थे। ठीक वैसे ही बरमूडा ट्राएंगल को पार करते ही जहाज गायब हो गया। जिस दिन यह घटना हुई मौसम बिल्कुल ठीक था और सब कुछ ठीक चलने के संदेश भी भेजे जा रहे थे, लेकिन अचानक ही सब बदला और कोई यह जान नहीं पाया कि जहाज कहां गया। sabhar :http://www.punjabkesari.in/

अमेरिका के इतिहास में इस जहाज और क्रू मेंबर का गायब होना एक बड़ा रहस्य बना हुआ है। कई शोध और अध्ययन हुए, लेकिन जहाजों के गायब होने का पता नहीं चल पाया। शुरुआती शोध के परिणाम बताते हैं कि बरमूडा ट्राएंगल के पास एक विशेष प्रकार का कोहरा छाया रहता है, जिसमें जहाज भटक जाते हैं और दूसरा कारण मीथेन गैसों का भंडार होने का बताया जाता है। इससे पानी का घनत्व कम हो जाता है और जहाज धीरे-धीरे पानी में समाने लगता है। 

इस बात की अफवाहें भी हैं कि इस क्षेत्र में एलियन्स का रिसर्च सेंटर है। एलियनों को इस क्षेत्र में बाहरी दुनिया के लोगों का आना पसंद नहीं है, इसलिए वह इस तरह की घटनाओं को अंजाम देते हैं। जहाज गायब होने के कारण अभी तक पता नहीं चल सके हैं

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हनुमान भक्त बना कुत्ता, बेहोशी से उठकर फिर करने लगा परिक्रमा

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हाथी की ईश्वर भक्ति


हाथी की ईश्वर भक्ति


अगर आप यह मानते हैं कि भक्ति करना सिर्फ हम मनुष्यों को आता है तो यह बात अपने मन से निकाल दीजिए। हम इंसानों की तरह पशुओं में भी भगवान के प्रति आस्था और श्रद्घा होती है। इसका सबसे पहला उदाहरण वह हाथी है जो भगवान विष्णु का परम भक्त था।

मगरमच्छ ने जब हाथी के पांव पकड़ लिए और हाथी के जीवन पर संकट आ गया तो भक्त हाथी की पुकार सुनकर भगवान विष्णु स्वयं प्रकट हुए और मगरमच्छ से हाथी के प्राण बचाए।

लेकिन जिस कुत्ते की भक्ति की हम बात कर रहे हैं वह किसी इतिहास पुराण की कथा नहीं है बल्कि आज के जमाने की बाद है वह भी इसी महीने की घटना है।
कुत्ते की भक्ति देख सभी हुए हैरान


कुत्ते की भक्ति देख सभी हुए हैरान

मध्यप्रदेश के मुड़ागांव में एक प्राचीन हनुमान मंदिर है स्थानीय लोग इसे बजरंगबली-श्रीजानकी मंदिर के नाम से जानते हैं। अप्रैल महीने के पहले हफ्ते की बात है, लोग मंगलवार के दिन हनुमान जी की पूजा करने मंदिर आए तो एक कुत्ते को मंदिर के चारों ओर घूमते देखा।

पहले तो लोगों ने कुत्ते की इस हरकत पर कोई ध्यान नहीं दिया। कुछ लोग कुत्ते को ऐसा करते देख हंस भी रहे थे। लेकिन कुछ समय बीतने के बाद कुत्ते पर हंसने वाले लोग भी दांतो तले उंगली दबा रहे थे। लोगों को कुत्ते की भक्ति के आगे अपनी श्रद्घा भक्ति कम लगने लगी थी।
कई दिनों तक उन हालातों में करता रहा परिक्रमा

कई दिनों तक उन हालातों में करता रहा परिक्रमा

कुत्ता लगातार बिना भोजन पानी के हनुमान मंदिर की परिक्रमा करता जा रहा था। यह सिलसिला तीन दिनों तक चलता रहा। स्थानीय लोग बताते हैं कि कुत्ता हर परिक्रमा पूरी करने के बाद हनुमान जी के समाने माथा टेकता और फिर परिक्रमा शुरु कर देता।

कुत्ते की इस भक्ति की खबर जो गांव में फैली तो लोग हैरानी से मंदिर परिसर में जमा होने लगे। लेकिन लोगों की भीड़ देखकर भी कुत्ता विचलित नहीं हुआ और निरंतर परिक्रमा करता रहा।

डॉक्टर ने लगाई सूई, कुत्ता उठकर फिर लगाने लगा परिक्रमा

कई दिनों तक परिक्रमा करते रहने के कारण कुत्ता जब थक कर बैठ गया और उसके आंखों से आंसू आने लगा तब लोगों ने हनुमान भक्त कुत्ते का ईलाज करवाया। स्थानीय पशु चिकित्सक डॉ. देवेश जोशी ने जब कुत्ते को इंजेक्शन दिया तो कुत्ता उठकर खड़ा हो गया और फिर हनुमान जी की परिक्रमा करने लगा।

इस कुत्ते के बारे में स्थानीय बड़े बुजुर्ग अब यह कहने लगे हैं कि किसी कर्म के कारण इस जन्म में इसे कुत्ता बनना पड़ा। पूर्वजन्म के शाप से मुक्ति के लिए यह हनुमान जी की परिक्रमा कर रहा होगा।

वहीं कुछ लोग इसे पूर्व जन्म का हनुमान भक्त मान रहे हैं। अब कुत्ता किसलिए हनुमान जी की परिक्रमा कर रहा था यह एक रहस्य बना हुआ है। लेकिन जो भी है यह अद्भुत एक घटना है जो यह दर्शाता है कि हम मनुष्यों को यह अभिमान नहीं करना चाहिए कि केवल हम मनुष्य की भगवान के भक्त हो सकते हैं। ईश्वर सभी के हैं और सब ईश्वर के हैं। sabhar :http://www.amarujala.com/


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बुधवार, 23 अप्रैल 2014

आध्यात्म की तलाश में आईं भारत ...और बन गईं 'आइटम गर्ल'

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B'day: आध्यात्म की तलाश में आईं भारत ...और बन गईं 'आइटम गर्ल'


मुंबईः बॉलीवुड एक्ट्रेस, मॉडल और बिजली गर्ल के नाम से मशहूर याना गुप्ता आज अपना 35वां जन्मदिन मना रही हैं। अपने हॉट अवतार और कई कॉन्ट्रोवर्सी के चलते वो हमेशा ही सुर्खियों में रहती हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 16 साल की उम्र में बतौर मॉडलिंग की थी। उन्होंने मॉडलिंग के लिए अपना घर छोड़ दिया था और जापान चली गई थीं।
 
याना का झुकाव शुरू से ही आध्यात्म की तरफ था इसी तलाश में वो भारत आ गईं। उन्होंने मेडिटेशन के लिए पुणे में ओशो आश्रम ज्वॉइन कर लिया। यहां पर उनकी मुलाकात सत्यकाम गुप्ता से हुई। दोनों में नजदीकियां बढ़ीं और 2001 में शादी रचा ली। हालांकि, शादी के महज 4 साल बाद 2005 में दोनों का तलाक हो गया। तलाक के बाद याना ने भारत में ही मॉडलिंग शुरू कर दी। उन्होंने कई बड़े ब्रान्ड्स के ऐड किए जिसमें लैक्मे भी शामिल रहा।
 
2003 में याना को बॉलीवुड में पहली बार काम करने का मौका मिला। उन्होंने फिल्म 'दम' में 'बाबूजी जरा धीरे चलो...' का आइटम नंबर किया, जो काफी पॉपुलर हुआ। इस गाने की सफलता ने उनके लिए बॉलीवुड का रास्ता खोल दिया। इसके बाद उन्होंने हिंदी के साथ साउथ फिल्मों में भी ढेर सारे आइटम नंबर किए। साल 2009 में याना ने 'How To Love Your Body And Get The Body You Love' नाम की किताब भी लिखी।
 
याना की कॉन्ट्रोवर्सी
 
मुंबई के एक चैरिटी इवेंट में याना गुप्ता अपनी ब्लैक ड्रेस के अंदर अंतःवस्त्र पहनना भूल गईं और उनके फोटो भी खींच लिए गए। चैरिटी इवेंट में पहनी गई याना की यह ड्रेस बहुत छोटी थी। इस घटना के बाद बॉलीवुड में चर्चा चल पड़ी कि याना ने यह काम इसलिए किया ‍ताकि उनकी चर्चा हो और उन्हें कुछ फिल्में मिले। इस घटना के बाद उन्हें 'नो पैंटी' गर्ल कहा जाने लगा। अपने बोल्ड अवतार के लिए याना हमेशा ही सुर्खियों में रहती हैं।

B'day: आध्यात्म की तलाश में आईं भारत ...और बन गईं 'आइटम गर्ल'

B'day: आध्यात्म की तलाश में आईं भारत ...और बन गईं 'आइटम गर्ल'

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साभार : भस्करडॉटकॉम 


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