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शनिवार, 5 अगस्त 2023

Yellow Foods खाने से नहीं आएगा हार्ट अटैक, जानें दिल के लिए क्यों है फायदेमंद?

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Sat. Aug 5th, 2023 13:22:42
    Yellow Foods खाने से नहीं आएगा हार्ट अटैक, जानें दिल के लिए क्यों है फायदेमंद?

    दिल हमारे शरीर का एक बेहद अहम अंग है, ये जिंदगी की शुरुआत से लेकर आखिरी सांस तक धड़कता रहता है. अगर इसका ख्याल न रखा गया तो हार्ट अटैक (Heart Attack) कोरोनरी आर्टरी डिजीज (Coronary Artery Disease) और ट्रिपल वेसल डिजीज (Triple Vessel Disease) जैसी खतरनाक और जानलेवा बीमारियों का खतरा बना रहता है. ऐसे में जरूरी है कि हम अपने डेली डाइट से ऑयली फूड्स को बाहर कर दें और सिर्फ हेल्दी चीजें ही खाएं. ग्रेटर नोएडा के GIMS अस्पताल में कार्यरत मशहूर डाइटीशियन आयुषी यादव (Ayushi Yadav) के मुताबिक कुछ पीले फल और सब्जियां खाने से दिल की सेहत को बेहतर किया जा सकता है.

    इन पीले फूड्स खाने से हार्ट अटैक से होगा बचाव

    1. आम (Mango)
    आम का नाम सुनते ही मुंह में स्वाद आ जाता है, हम गर्मी के मौसम का इसलिए इंतजार करते हैं ताकि इस मीठे और लजीज फल का लुत्फ उठा सकें, इस बात भी जान लें कि ये दिल की सेहत के लिए अच्छा है.

    2. नींबू (Lemon)
    नींबू औषधीय गुणों से भरपूर फूड है, जिसका इस्तेमाल सलाद से लेकर नींबू पानी तक में किया जाता है ये दिल की सेहत को बेहतर करने के साथ-साथ वजन कम करने में भी मदद करता है.

    3. केला (Banana)
    हम में से शायद है कोई ऐसा होगा जिसने कभी केला न खाया है, इसका सेवन जितना आसान है उसके फायदे में उतने ज्यादा है. सीमित मात्रा में केला खाने से वजन कम होता है और दिल की सेहत को फायदा मिलता है

    4. अनानास (Pineapple)
    अनानास की मिठास भला किसी अपनी तरफ आकर्षित नहीं करती, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसे खाने से हार्ट अटैक का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है. हलांकि इस हद से ज्यादा नहीं खाना चाहिए क्योंकि इससे ब्लड शुगर लेवल बढ़ने लगता है.

    5. पीली शिमला मिर्च (Bell Pepper)
    इस फूड में फाइबर, आयरन और फोलेट की भरपूर मात्रा पाई जाती है, इससे शरीर को काफी एनर्जी मिलती है और साथ ही बॉडी में ब्लड की कोई कमी नहीं रहती और दिल भी सेहतमंद रहता है.

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    शुक्रवार, 4 अगस्त 2023

    Exclusive: फूलपुर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ सकते हैं नीतीश कुमार, जेडीयू के सर्वे में हुए फर्स्ट डिवीजन पास

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     बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अभी भले ही विपक्षी पार्टियों के गठबंधन इंडिया के संयोजक न बन सके हों, लेकिन उनकी पार्टी जनता दल युनाइटेड ने उन्हें 2024 के चुनाव में पीएम फेस के तौर पर पेश करने की रणनीति पर अमल करना शुरू कर दिया है. इसके तहत पार्टी के रणनीतिकारों ने नीतीश कुमार को यूपी की उस फूलपुर सीट से लोकसभा का चुनाव लड़ाने का मन बनाया है, जहां से देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू सांसद हुआ करते थे. जेडीयू ने उनके चुनाव लड़ने के लिए फूलपुर सीट पर न सिर्फ कई स्तर पर सर्वे कराया है, बल्कि पार्टी के एक सांसद, एमएलसी और बिहार के मंत्री को यहां सियासी ज़मीन तैयार करने की ज़िम्मेदारी भी दी गई है.

    जेडीयू के सर्वे के जो नतीजे आए हैं, उससे जेडीयू खासी उत्साहित है. नीतीश की पार्टी के कई दिग्गज नेताओं ने ABP NEWS से हुई बातचीत में उनके फूलपुर से चुनाव लड़ने को लेकर हो रहे सियासी मंथन को खुले तौर पर कबूल भी किया है. नीतीश कुमार फूलपुर सीट से चुनाव लड़कर न सिर्फ खुद को विपक्ष का सबसे मजबूत चेहरा साबित कर सकेंगे, बल्कि वह पीएम मोदी को सीधी टक्कर देने की भी जुगत में रहेंगे. विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक़ इंटरनल सर्वे में यह बात सामने आई है कि नीतीश कुमार के फूलपुर से चुनाव लड़ने पर विपक्ष को दो दर्जन से ज़्यादा सीटों पर सीधा फायदा होगा, जबकि यूपी समेत उत्तर भारत की तमाम सीटों पर इसका असर देखने को मिलेगा. 



    जेडीयू ने फूलपुर सीट पर कराया सर्वे



    ऐसे में कहा जा सकता है कि अगर सब कुछ प्लान के मुताबिक़ हुआ तो नीतीश कुमार 2024 के चुनाव में बिहार की नालंदा के साथ ही यूपी की फूलपुर सीट से भी ताल ठोंकते हुए नज़र आ सकते हैं. इस सीट पर नीतीश कुमार के सजातीय कुर्मी वोटर निर्णायक भूमिका में होते हैं. यहां अब तक नौ बार कुर्मी प्रत्याशी सांसद चुने गए हैं. पूर्व प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह भी फूलपुर सीट से सांसद रह चुके हैं. सियासी जानकारों के मुताबिक़ अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी और कांग्रेस समेत दूसरे विपक्षी दलों को नीतीश को फूलपुर में समर्थन करने में कोई गुरेज भी नहीं होगा.  



    नीतीश कुमार के यूपी की फूलपुर सीट से चुनाव लड़ने की संभावनाओं को लेकर सबसे पहले ABP News चैनल ने ही पिछले साल 17 सितम्बर को Exclusive खबर दिखाई थी. नीतीश की पार्टी जनता दल युनाइटेड इस दौरान लगातार यहां इंटरनल सर्वे कर फीडबैक लेती रही है. फूलपुर में सियासी संभावनाएं तलाशने का ज़िम्मा बिहार सरकार के मंत्री श्रवण कुमार, नालंदा के सांसद कौशलेंद्र कुमार और नीतीश कुमार के बेहद करीबी एमएलसी संजय सिंह को दिया गया. जेडीयू ने मंत्री श्रवण कुमार को यूपी का प्रभारी भी बनाया हुआ है. 



    फूलपुर से चुनाव लड़े नीतीश कुमार तो होगा फायदा



    श्रवण कुमार ने अब तक यूपी के जिन जिलों में पार्टी के सम्मेलन किये हैं, उनमें से ज़्यादातर फूलपुर सीट के आसपास के ही जिले हैं. श्रवण कुमार ने एबीपी न्यूज से फोन पर की गई बातचीत में बताया कि प्रयागराज जिले में अभी उन्होंने पार्टी का कार्यकर्ता सम्मेलन नहीं किया है, लेकिन वह पिछले दिनों फूलपुर गए ज़रूर हैं. उनके मुताबिक़ फूलपुर में तमाम लोगों ने उनसे नीतीश कुमार को यहां से चुनाव लड़ाने की बात कही. श्रवण कुमार के मुताबिक इस बारे में अंतिम फैसला खुद नीतीश कुमार को ही लेना है. उन्होंने यह भी बताया कि वह जल्द ही फिर से प्रयागराज जाने वाले हैं.  



    फूलपुर में सर्वे कराने की ज़िम्मेदारी नीतीश के करीबी एमएलसी संजय सिंह को दी गई है. फोन पर बातचीत में संजय सिंह ने माना कि पार्टी तमाम संभावनाओं पर काम कर रही है. कई जगहों पर लोगों की राय ली गई है. लोग अगर चाहते हैं कि नीतीश कुमार फूलपुर से चुनाव लड़ें तो इस पर विचार ज़रूर होगा. संजय सिंह के मुताबिक़ यूपी की कई दूसरी सीटों से भी नीतीश कुमार के लिए डिमांड आई है. सांसद कौशलेन्द्र कुमार ने भी यहां के तमाम लोगों से फोन पर बातचीत कर फीडबैक लिया है. वो दिल्ली में भी यूपी की सियासत से जुड़े कई लोगों से मुलाकात कर चुके हैं. जेडीयू की युवा इकाई के राष्ट्रीय सचिव नीरज पटेल भी कई बार फूलपुर का दौरा कर लोगों का मन टटोल चुके हैं. सूत्रों के मुताबिक़ इन सभी नेताओं को फूलपुर से उम्मीद से बेहतर रिस्पांस मिला है.  



    बीजेपी के खिलाफ मोर्चेबंदी होगी आसान

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    होम राज्य उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड Exclusive: फूलपुर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ सकते हैं नीतीश कुमार, जेडीयू के सर्वे में हुए फर्स्ट डिवीजन पास

    Exclusive: फूलपुर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ सकते हैं नीतीश कुमार, जेडीयू के सर्वे में हुए फर्स्ट डिवीजन पास


    मोहम्मद मोईन

    Updated at: 02 Aug 2023 11:02 AM (IST)

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    UP Politics: जेडीयू ने नीतीश कुमार के फूलपुर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने के लिए कई स्तर पर सर्वे कराया. इस सर्वे में सामने आया है कि अगर नीतीश यहां से चुनाव लड़ते हैं तो कई सीटों पर विपक्ष को फायदा होगा.

    Exclusive: फूलपुर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ सकते हैं नीतीश कुमार, जेडीयू के सर्वे में हुए फर्स्ट डिवीजन पास


    बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ( Image Source : PTI )


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    Lok Sabha Election 2024: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अभी भले ही विपक्षी पार्टियों के गठबंधन इंडिया के संयोजक न बन सके हों, लेकिन उनकी पार्टी जनता दल युनाइटेड ने उन्हें 2024 के चुनाव में पीएम फेस के तौर पर पेश करने की रणनीति पर अमल करना शुरू कर दिया है. इसके तहत पार्टी के रणनीतिकारों ने नीतीश कुमार को यूपी की उस फूलपुर सीट से लोकसभा का चुनाव लड़ाने का मन बनाया है, जहां से देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू सांसद हुआ करते थे. जेडीयू ने उनके चुनाव लड़ने के लिए फूलपुर सीट पर न सिर्फ कई स्तर पर सर्वे कराया है, बल्कि पार्टी के एक सांसद, एमएलसी और बिहार के मंत्री को यहां सियासी ज़मीन तैयार करने की ज़िम्मेदारी भी दी गई है.




    जेडीयू के सर्वे के जो नतीजे आए हैं, उससे जेडीयू खासी उत्साहित है. नीतीश की पार्टी के कई दिग्गज नेताओं ने ABP NEWS से हुई बातचीत में उनके फूलपुर से चुनाव लड़ने को लेकर हो रहे सियासी मंथन को खुले तौर पर कबूल भी किया है. नीतीश कुमार फूलपुर सीट से चुनाव लड़कर न सिर्फ खुद को विपक्ष का सबसे मजबूत चेहरा साबित कर सकेंगे, बल्कि वह पीएम मोदी को सीधी टक्कर देने की भी जुगत में रहेंगे. विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक़ इंटरनल सर्वे में यह बात सामने आई है कि नीतीश कुमार के फूलपुर से चुनाव लड़ने पर विपक्ष को दो दर्जन से ज़्यादा सीटों पर सीधा फायदा होगा, जबकि यूपी समेत उत्तर भारत की तमाम सीटों पर इसका असर देखने को मिलेगा. 



    जेडीयू ने फूलपुर सीट पर कराया सर्वे



    ऐसे में कहा जा सकता है कि अगर सब कुछ प्लान के मुताबिक़ हुआ तो नीतीश कुमार 2024 के चुनाव में बिहार की नालंदा के साथ ही यूपी की फूलपुर सीट से भी ताल ठोंकते हुए नज़र आ सकते हैं. इस सीट पर नीतीश कुमार के सजातीय कुर्मी वोटर निर्णायक भूमिका में होते हैं. यहां अब तक नौ बार कुर्मी प्रत्याशी सांसद चुने गए हैं. पूर्व प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह भी फूलपुर सीट से सांसद रह चुके हैं. सियासी जानकारों के मुताबिक़ अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी और कांग्रेस समेत दूसरे विपक्षी दलों को नीतीश को फूलपुर में समर्थन करने में कोई गुरेज भी नहीं होगा.  



    नीतीश कुमार के यूपी की फूलपुर सीट से चुनाव लड़ने की संभावनाओं को लेकर सबसे पहले ABP News चैनल ने ही पिछले साल 17 सितम्बर को Exclusive खबर दिखाई थी. नीतीश की पार्टी जनता दल युनाइटेड इस दौरान लगातार यहां इंटरनल सर्वे कर फीडबैक लेती रही है. फूलपुर में सियासी संभावनाएं तलाशने का ज़िम्मा बिहार सरकार के मंत्री श्रवण कुमार, नालंदा के सांसद कौशलेंद्र कुमार और नीतीश कुमार के बेहद करीबी एमएलसी संजय सिंह को दिया गया. जेडीयू ने मंत्री श्रवण कुमार को यूपी का प्रभारी भी बनाया हुआ है. 



    फूलपुर से चुनाव लड़े नीतीश कुमार तो होगा फायदा



    श्रवण कुमार ने अब तक यूपी के जिन जिलों में पार्टी के सम्मेलन किये हैं, उनमें से ज़्यादातर फूलपुर सीट के आसपास के ही जिले हैं. श्रवण कुमार ने एबीपी न्यूज से फोन पर की गई बातचीत में बताया कि प्रयागराज जिले में अभी उन्होंने पार्टी का कार्यकर्ता सम्मेलन नहीं किया है, लेकिन वह पिछले दिनों फूलपुर गए ज़रूर हैं. उनके मुताबिक़ फूलपुर में तमाम लोगों ने उनसे नीतीश कुमार को यहां से चुनाव लड़ाने की बात कही. श्रवण कुमार के मुताबिक इस बारे में अंतिम फैसला खुद नीतीश कुमार को ही लेना है. उन्होंने यह भी बताया कि वह जल्द ही फिर से प्रयागराज जाने वाले हैं.  



    फूलपुर में सर्वे कराने की ज़िम्मेदारी नीतीश के करीबी एमएलसी संजय सिंह को दी गई है. फोन पर बातचीत में संजय सिंह ने माना कि पार्टी तमाम संभावनाओं पर काम कर रही है. कई जगहों पर लोगों की राय ली गई है. लोग अगर चाहते हैं कि नीतीश कुमार फूलपुर से चुनाव लड़ें तो इस पर विचार ज़रूर होगा. संजय सिंह के मुताबिक़ यूपी की कई दूसरी सीटों से भी नीतीश कुमार के लिए डिमांड आई है. सांसद कौशलेन्द्र कुमार ने भी यहां के तमाम लोगों से फोन पर बातचीत कर फीडबैक लिया है. वो दिल्ली में भी यूपी की सियासत से जुड़े कई लोगों से मुलाकात कर चुके हैं. जेडीयू की युवा इकाई के राष्ट्रीय सचिव नीरज पटेल भी कई बार फूलपुर का दौरा कर लोगों का मन टटोल चुके हैं. सूत्रों के मुताबिक़ इन सभी नेताओं को फूलपुर से उम्मीद से बेहतर रिस्पांस मिला है.  



    बीजेपी के खिलाफ मोर्चेबंदी होगी आसान



    दरअसल, फूलपुर सीट से चुनाव लड़कर नीतीश कुमार एक तीर से कई निशाने साधने की कोशिश करेंगे. यहां से चुनावी समर में कूदने का दांव नीतीश कुमार और उनकी टीम की सियासी रणनीति का वह हिस्सा है, जिसके ज़रिये वह विपक्ष को एकजुट करने के साथ ही बीजेपी को घेरने का भी काम करेंगे. नीतीश कुमार को यह अच्छे से पता है कि दिल्ली का रास्ता यूपी से होकर ही जाता है. ऐसे में अगर बीजेपी के खिलाफ यूपी में ही मोर्चेबंदी कर दी जाए तो उसे हराने की कोशिश कुछ आसान हो सकती है. कुल मिलाकर ये दांव 2024 की लड़ाई को मोदी बनाम नीतीश बनाने के प्रयासों का होगा, क्योंकि नीतीश के जिस फूलपुर सीट से किस्मत आजमाने की चर्चा हैं, वहां से पीएम नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी की दूरी सिर्फ सौ किलोमीटर है.



    राष्ट्रीय नेता बनकर उभरेंगे नीतीश कुमार



    यूपी से चुनाव लड़कर नीतीश कुमार अपने ऊपर लगे बिहार के नेता के ठप्पे से भी छुटकारा पाकर खुद को एक बार फिर से राष्ट्रीय राजनीति में स्थापित करना चाहेंगे. सूत्रों के मुताबिक नीतीश को यहां से चुनाव लड़ाने का फैसला अनायास ही नहीं, बल्कि खूब सोच-समझकर लिया गया है. दरअसल प्रयागराज को देश में सियासत के बड़े केंद्र के तौर पर जाना जाता है. पंडित जवाहर लाल नेहरू से लेकर लाल बहादुर शास्त्री और वीपी सिंह यहां से सांसद चुने जाने के बाद देश के प्रधानमंत्री बने तो पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी-चंद्रशेखर और गुलज़ारी लाल नंदा ने यहीं से सियासत की बारीकियां सीखीं.

    फूलपुर सीट का जातीय समीकरण भी पूरी तरह नीतीश के मुफीद है. यहां कुर्मी वोटर तीन लाख के करीब हैं. इसके साथ ही यादव और मुस्लिम मतदाता भी निर्णायक भूमिका में हैं. यानी फूलपुर से चुनाव लड़कर राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा सियासी संदेश दिया जा सकता है. इस जातीय गणित के सहारे ही फूलपुर सीट से अब तक नौ कुर्मी सांसद चुने गए हैं. मौजूदा समय में भी यहां से कुर्मी समुदाय की बीजेपी नेता केशरी देवी पटेल ही सांसद हैं. अकेले फूलपुर ही नहीं बल्कि आस-पास की तकरीबन दो दर्जन सीटों पर कुर्मी वोटर मजबूत स्थिति में हैं.



    नीतीश के आने से दो दर्जन सीटों पर फायदा



    अभी यहां के ज़्यादातर कुर्मी बीजेपी और केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल की पार्टी अपना दल एस गठबंधन के साथ हैं, लेकिन नीतीश के फूलपुर से चुनाव लड़ने पर सिर्फ इन दो दर्जन सीटों पर ही नहीं बल्कि समूचे यूपी में असर पड़ सकता है. फूलपुर सीट यूपी के उस पूर्वांचल हिस्से से आती है, जो बिहार से सटा हुआ है. इन सबसे अलग नीतीश की कोशिश राष्ट्रीय स्तर पर सियासी लड़ाई को काशी बनाम प्रयाग बनाने की होगी. वाराणसी से पीएम मोदी चुनाव लड़ते हैं तो नीतीश कई पूर्व प्रधानमंत्रियों के जुड़ाव वाली प्रयागराज की फूलपुर सीट से खुद को पीएम मेटेरियल के तौर पर पेश करना चाहेंगे. दरअसल पीएम फेस को लेकर विपक्ष में भले ही खींचतान हो, लेकिन तकरीबन दो तिहाई विपक्षी वोटों को एकजुट कर बीजेपी को हराने की कोशिश तमाम बड़े दल करना चाहते हैं. 



    फूलपुर में विधानसभा की पांच सीटें हैं. इनमे से सोरांव और फूलपुर में कुर्मी वोटर ही पिछड़ों में सबसे ज़्यादा हैं. फाफामऊ और इलाहाबाद पश्चिमी सीट पर भी कुर्मियों की संख्या निर्णायक है. इलाहाबाद उत्तरी में संख्या औसत है. 2022 के विधानसभा चुनाव में इन पांच विधानसभा सीटों में से चार पर बीजेपी ने जीत हासिल की थी, जबकि सोरांव सीट से सपा की गीता पासी चुनाव जीती थीं. हालांकि बाकी चारों सीटों पर सपा मजबूती से लड़ी थी. नीतीश कुमार साल 2016 में फूलपुर में किसानों का एक बड़ा कार्यक्रम कर चुके हैं. प्रयागराज में नार्थ सेंट्रल रेलवे ज़ोन का हेडक्वार्टर बनाने का श्रेय भी नीतीश कुमार को ही जाता है. नीतीश उस वक़्त रेल मंत्री हुआ करते थे. Sabhar https://www.abplive.com

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    क्या है लव बॉम्बिंग, कैसे होते हैं लोग इसका शिकार?

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      जुलाई 2023

    वे आपसे दिन में कई-कई बार टेक्स्ट मेसेज, ईमेल और फ़ोन कॉल के माध्यम से संपर्क करते हैं. आपकी तारीफ़ में चिकनी-चुपड़ी बातें करते हैं और जताते हैं कि आपसे बढ़कर और कोई नहीं है.


    भले ही आपको उनसे मिले कुछ ही दिन हुए होते हैं लेकिन वे कई घंटे आपकी ख़ुशामद और वादे करने में बिता चुके होते हैं.


    इस तरह के व्यवहार को ‘लव बॉम्बिंग’ कहा जाता है. लेकिन लव बॉम्बिंग रोमांटिक रिश्तों तक सीमित नहीं है. बहुत से लोगों को काम के क्षेत्र में भी इस तरह के व्यवहार से दो चार होना पड़ता है. कई कंपनियां भी अपने यहां ख़ाली पदों के लिए उम्मीदवार तलाशने के दौरान ऐसा व्यवहार करती हैं.

    लव बॉम्बिंग और नौकरी

    अक्सर ये शब्द डेटिंग के संबंध में इस्तेमाल किए जाते हैं जब कोई रिझाने के लिए तारीफ़ों के पुल बांधता है या फिर ऐसा कुछ करता है कि सामने वाला अहसान मानने लगे.


    बचें तो कैसे?

    कोई रिक्रूटर कैसे किसी नौकरी तलाशने वाले से पेश आता है, इसका तरीका बदल पाना तो मुश्किल है. लेकिन जब आपको पता है कि लव बॉम्बिंग जैसा व्यवहार किया जा रहा है तो सावधान हो जाना चाहिए.

    सैन फ्रैंसिस्को में करियर कोच सैमॉरन सेलिम कहती हैं, “अभ्यर्थियों को संकेतों को पकड़ना चाहिए. भर्ती करते समय अभ्यर्थी के अनुभव और प्रतिभा की तारीफ़ करना असामान्य नहीं है. वैसे भी नौकरी ऑफ़र करते समय सामने वाले को महत्व देना ज़रूरी होता है. मगर अभ्यर्थियों को तब सावधान हो जाना चाहिए जब सामने से बहुत बढ़ा-चढ़ाकर बातें की जा रही हों या फिर पारदर्शिता न अपनाई जा रही हो.”

    करियर काउंसलर परवीन मल्होत्रा के मुताबिक़, "कहा जाता है कि ख़रीददारी करते समय ख़रीददार को सावधान रहना चाहिए. यही सिद्धांत नौकरी तलाशने के मामले में भी लागू होता है."

    वह कहती हैं, “बहुत बार ऐसा होता है कि कंपनी जो वादे करती है, कर्मचारियों को उसका आधा भी नहीं मिलता. ऐसे में यह ज़िम्मेदारी अभ्यर्थियों पर आ जाती है कि वे कंपनी के बारे में जानकारी जुटाएं. पहले तो यह काम मुश्किल था मगर अब बहुत से कर्मचारी कंपनी छोड़ने पर उसके बारे में ऑनलाइन रिव्यू डालते हैं. ऐसे में यह ऑनलाइन पता किया जा सकता है कि किस कंपनी में कैसा माहौल है, उसकी नीतियां क्या हैं और वह कितने पानी में है.”

    यानी लव बॉम्बिंग और इससे होने वाले नुक़सान से बचने का एक ही तरीक़ा है- सावधानी बरतना. बॉम्बिंग और नौकरी

    अक्सर ये शब्द डेटिंग के संबंध में इस्तेमाल किए जाते हैं जब कोई रिझाने के लिए तारीफ़ों के पुल बांधता है या फिर ऐसा कुछ करता है कि सामने वाला अहसान मानने लगे.

    लेकिन लव बॉम्बिंग रोमांटिक रिश्तों तक सीमित नहीं है. बहुत से लोगों को काम के क्षेत्र में भी इस तरह के व्यवहार से दो चार होना पड़ता है. कई कंपनियां भी अपने यहां ख़ाली पदों के लिए उम्मीदवार तलाशने के दौरान ऐसा व्यवहार करती हैं

    कंपनी रिक्त पदों को भरने के लिए उम्मीदवारों के साथ ऐसा व्यवहार करती हैं जहां पद से जुड़े कामों और ज़िम्मेदारियों वगैरह के बारे में जानकारी देने की बजाय अभ्यर्थियों के अनुभव की तारीफ़ करने और कई तरह के वादे करके उन्हें लुभाने पर ज़्यादा ज़ोर देती हैं.


    बेंगलुरु में एक बिज़नेस सॉल्यूशन कंपनी में मैनेजर रोहित पराशर बताते हैं कि पिछली नौकरी में उनके साथ ऐसा ही हुआ था. वह वडोदरा में एक कंपनी में काम करते थे और वेतन न बढ़ने के कारण बदलाव चाहते थे.

    उन्होंने गुरुग्राम की एक कंपनी के लिए इंटरव्यू दिया और चुन लिए गए.


    इसी बीच पिछली कंपनी में भी रोहित का वेतन बढ़ गया लेकिन गुरुग्राम की कंपनी के एचआर विभाग से उन्हें कई दिनों तक कॉल करके ऑफ़र स्वीकार करने के लिए मनाया जाता रहा.


    रोहित बताते हैं, “मुझे बार-बार बताया गया कि कंपनी न सिर्फ़ अच्छा वेतन दे रही है बल्कि यहां और भी कई सुविधाएं हैं. काम का माहौल अच्छा है, हम कर्मचारियों का बहुत ख़्याल रखते हैं, आपको आपकी प्रोफ़ाइल के अनुरूप काम दिया जाएगा और अच्छे प्रदर्शन के आधार पर वेतनवृद्धि भी होगी.”


    लंबी ऊहापोह के बाद आख़िरकार रोहित ने ऑफ़र को स्वीकार कर लिया और वडोदरा छोड़कर गुरुग्राम चले आए.


    अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में करियर कोच सैमॉरन सेलिम कहती हैं कि ऐसा व्यवहार अक्सर तब देखने को मिलता है जब लेबर मार्केट में ख़ाली पदों के अनुरूप योग्य अभ्यर्थी उपलब्ध न हों.


    सैमॉरन कहती हैं, “ऐसी परिस्थिति में अभ्यर्थी मज़बूत स्थिति में होते हैं जबकि कंपनियों में अच्छी प्रतिभाएं तलाशने की होड़ मची होती है. ऐसे में भर्ती करने वालों की कोशिश होती है कि वे कंपनी को ज़्यादा से ज़्यादा विकल्प उपलब्ध करवाएं. जब उम्मीदवार कम होते हैं तो उन्हें लुभाने के लिए काफ़ी संघर्ष करना पड़ता है.

    सिर्फ़ अच्छा पक्ष दिखाना

    कई बार कंपनियां भी अपने लिए भर्ती करने वालों पर दबाव बनाती हैं कि वे उनकी मज़बूत और सकारात्मक छवि ही दिखाएं.


    करियर कोच सैमॉरन सेलिम कहती हैं कि यह किसी रोमांटिक रिश्ते की शुरुआती डेट्स की तरह होता है जहां भर्ती करने वाले अभ्यर्थियों को अपनी कमियों या कमज़ोरियों की बजाय अपना बेहतर पक्ष दिखाना चाहते हैं.


    भर्तियां करने वाली वैश्विक कंपनी सिएलो की ब्रिटेन की प्रबंध निदेशक सैली हंटर मानती हैं कि बहुत से भर्ती करने वालों को इस बात का अहसास नहीं होता कि वे लव बॉम्बिंग जैसा व्यवहार कर रहे हैं.


    वह कहती हैं, “भर्ती करने वाले लोग आशावादी और बेचने की कला में भी माहिर होते हैं. ऐसे में उनका यह व्यवहार अच्छी भावना के कारण होता है. वे चाहते हैं कि उम्मीदवार को नौकरी भी मिले और वह उसमें ख़ुश भी रहे.”


    लेकिन सैली चेताती हैं कि लव बॉम्बिंग जैसे व्यवहार के पीछे कई बार कुछ और कारण भी हो सकते हैं. जब भर्ती करने वाले को किसी थर्ड पार्टी (कंपनी आदि) ने अपने ख़ाली पदों को भरने के लिए नियुक्त किया होता है, तब वह अपने फ़ायदे के लिए अभ्यर्थियों से बहुत बढ़ा-चढ़ाकर बातें कर सकता है.


    वह कहती हैं, “अगर भर्ती करने वालों का वेतन कम है और वे भर्ती करने के बदले मिलने वाले कमीशन पर बहुत ज़्यादा निर्भर हैं तो उनकी कोशिश होगी कि किसी भी ख़ाली पद को भरने के लिए ज़्यादा से ज़्यादा अवसर बनाएं. इसके लिए वे अभ्यर्थियों से लव बॉम्बिंग जैसा व्यवहार कर सकते हैं.”

    नुक़सान पहुंचाने वाली ख़ुशामद

    आमतौर पर ये सब किसी दुर्भावना से नहीं किया जाता मगर कंपनियों के इरादे जो भी हों, कई बार कर्मचारियों को नुक़सान भी उठाना पड़ता है. कोई उम्मीदवार दबाव में आकर ऐसी नौकरी ले सकता है, जो उसके लिए मुफ़ीद न हो.

    ऐसा ही रोहित पराशर के साथ भी हुआ था. अच्छे भविष्य की आस में उन्होंने गुरुग्राम आकर नई कंपनी तो जॉइन कर ली लेकिन पता चला कि तस्वीर बहुत अलग है.

    वह बताते हैं, “ग़लती होने पर सीनियर का जूनियर सदस्यों पर चिल्लाना आम था. कॉर्पोरेट जगत में सभी को उनके नाम से बुलाया जाता है लेकिन मैंने देखा कि हमारे मैनेजर इस बात से चिढ़ गए जब मैंने उनके नाम के आगे ‘सर’ नहीं लगाया. टीम में कोई समस्या उभरती थी तो मैनेजर अलग जगह ले जाकर बात करने के बजाय सबके सामने फ़्लोर पर बात करते थे.”

    ये माहौल उससे अलग था, जिसका वादा नौकरी का प्रस्ताव देते समय किया गया था.

    रोहित कहते हैं कि वह इस परिवेश में ख़ुद को नहीं ढाल पाए और चौथे महीने ही उन्होंने इस्तीफ़ा दे दिया.

    इसी तरह अमेरिका की 46 वर्षीय महिला कियर्स्टन ग्रेग्स के साथ हुआ था. वह ख़ुद भी रिक्रूटर हैं यानी कंपनियों के लिए प्रतिभाओं को भर्ती करने के काम से जुड़ी हैं. वह बताती हैं कि वॉशिंगटन डीसी की एक कंपनी में निकली नौकरी को लेकर उन्हें बहुत सब्ज़बाग़ दिखाए गए थे.

    ग्रेग्स कहती हैं, “मुझसे कहा गया कि इस फ़ील्ड में आपका बहुत नाम है. मुझे तो सीधे ही नौकरी का प्रस्ताव दे दिया गया था. कहा गया था कि आप घर से काम कर सकती हैं और आपको और भी सुविधाएं मिलेंगी.”

    लेकिन भर्ती प्रक्रिया ख़त्म होते ही चीज़ें बदल गईं.

    पहले ही दिन मैनेजमेंट ने ग्रेग्स को ऑफ़िस आने को कहा. जब वह दफ़्तर पहुंचीं तो किसी ने उनका स्वागत नहीं किया, किसी ने टीम से उनका परिचय नहीं करवाया. जब उन्होंने मैनेजर से संपर्क किया तो घर से काम करने का वादा टूट गया. उन्हें बताया गया कि यह कंपनी की पॉलिसी नहीं है.

    ग्रेग्स वहां का ख़राब वर्क कल्चर देखकर भी हैरान थीं. दफ़्तर में ख़राब भाषा इस्तेमाल की जाती थी. उन्होंने देखा कि एक भर्ती के लिए विकलांग उम्मीदवार से सही व्यवहार नहीं किया जा रहा था. उन्होंने आठ दिन बाद ही नौकरी छोड़ दी.

    मनोबल पर असर

    करियर कोच सेलिम कहती हैं कि एक मसला और भी है. कुछ उम्मीदवार कोई ऑफ़र मिलने पर बहुत उत्साहित हो सकते हैं लेकिन बाद में उन्हें नौकरी नहीं दी जाती.


    वह बताती हैं, “ऐसा इसलिए होता है क्योंकि कुछ रिक्रूटर बहुत सारे उम्मीदवारों से संपर्क साधकर उन्हें भ्रम में रखे रहते हैं ताकि कंपनियों को अधिक से अधिक विकल्प उपलब्ध हो सकें. ऐसे में अगर वे किसी से कहें कि आप भर्ती प्रक्रिया में बाक़ी अभ्यर्थियों से आगे चल रहे हैं, तो इसका मतलब यह नहीं है कि आपको नौकरी मिल ही जाएगी.”


    करियर काउंसलर परवीन मल्होत्रा इसका एक और कारण भी बताती हैं.


    वह कहती हैं, “अमूमन ऐसी नौकरियां कम और अभ्यर्थी ज़्यादा होने के कारण होता है. लेकिन कई बार ऐसा भी देखने को मिलता है कि कंपनी ने पहले से ही तय किया होता है कि किस पद पर किसे रखना है. पारदर्शी दिखने के लिए वे विज्ञापन जारी कर देते हैं और भर्ती प्रक्रिया का दिखावा करते हैं..”


    लेकिन ऐसा करना न सिर्फ़ किसी उम्मीदवार का मनोबल तोड़ सकता है बल्कि उसका आर्थिक नुकसान भी हो सकता है. हो सकता है कि उसने किसी और कंपनी का जॉब ऑफ़र उस लव बॉम्बिंग करके नौकरी न देने वाली कंपनी के ऑफ़र के लिए ठुकरा दिया हो.

    बचें तो कैसे?

    कोई रिक्रूटर कैसे किसी नौकरी तलाशने वाले से पेश आता है, इसका तरीका बदल पाना तो मुश्किल है. लेकिन जब आपको पता है कि लव बॉम्बिंग जैसा व्यवहार किया जा रहा है तो सावधान हो जाना चाहिए.


    सैन फ्रैंसिस्को में करियर कोच सैमॉरन सेलिम कहती हैं, “अभ्यर्थियों को संकेतों को पकड़ना चाहिए. भर्ती करते समय अभ्यर्थी के अनुभव और प्रतिभा की तारीफ़ करना असामान्य नहीं है. वैसे भी नौकरी ऑफ़र करते समय सामने वाले को महत्व देना ज़रूरी होता है. मगर अभ्यर्थियों को तब सावधान हो जाना चाहिए जब सामने से बहुत बढ़ा-चढ़ाकर बातें की जा रही हों या फिर पारदर्शिता न अपनाई जा रही हो.”


    करियर काउंसलर परवीन मल्होत्रा के मुताबिक़, "कहा जाता है कि ख़रीददारी करते समय ख़रीददार को सावधान रहना चाहिए. यही सिद्धांत नौकरी तलाशने के मामले में भी लागू होता है."


    वह कहती हैं, “बहुत बार ऐसा होता है कि कंपनी जो वादे करती है, कर्मचारियों को उसका आधा भी नहीं मिलता. ऐसे में यह ज़िम्मेदारी अभ्यर्थियों पर आ जाती है कि वे कंपनी के बारे में जानकारी जुटाएं. पहले तो यह काम मुश्किल था मगर अब बहुत से कर्मचारी कंपनी छोड़ने पर उसके बारे में ऑनलाइन रिव्यू डालते हैं. ऐसे में यह ऑनलाइन पता किया जा सकता है कि किस कंपनी में कैसा माहौल है, उसकी नीतियां क्या हैं और वह कितने पानी में है.”


    यानी लव बॉम्बिंग और इससे होने वाले नुक़सान से बचने का एक ही तरीक़ा है- सावधानी बरतना.

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