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मंगलवार, 1 अगस्त 2023

आरपीएफ़ जवान चेतन सिंह कौन हैं, जिन पर चलती ट्रेन में है गोली चलाने का मामला

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आरपीएफ़ जवान चेतन सिंह कौन हैं, जिन पर चलती ट्रेन में है गोली चलाने का मामला 

बीते सोमवार जयपुर से मुंबई जा रही ट्रेन में आरपीएफ़ जवान की ओर से गोली चलाए जाने पर विवाद जारी है.

इस गोलीबारी में तीन यात्रियों समेत आरपीए़फ़ के एएसआई टीकाराम मीणा की मौत हो गई है.

इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें आरपीएफ़ जवान चेतन सिंह चौधरी कथित रूप से आपत्तिजनक टिप्पणियां करते हुए नज़र आ रहे हैं.

बीबीसी इस वीडियो की पुष्टि नहीं कर सका है.

चेतन सिंह चौधरी के परिवार ने बताया है कि उन्हें इस घटना की जानकारी टीवी चैनलों से ही मिली है. और ये सब सुनकर पूरा परिवार हैरान है.

अभियुक्त के भाई लोकेश चौधरी की पत्नी प्रीति ने बीबीसी से चेतन सिंह चौधरी की तबीयत को लेकर विस्तार से जानकारी दी है.

प्रीति सिंह बताती हैं, "कुछ साल पहले घर की देहरी पर फिसलने की वजह से उन्हें (चेतन सिंह) सिर में चोट आई थी. शुरुआत में तो सब ठीक था. लेकिन दो तीन साल पहले उनके सिर में तेज दर्द रहने लगा तो डॉक्टर ने बताया कि शायद सिर में सूज़न आ गई होगी. इसके बाद उनकी जांच हुई तो पता चला कि उनके सिर में खून के थक्के जम गए हैं.''

''इसके बाद उनका इलाज भी चला. वो चीज़ों को भूलने से लगे थे. सुस्त-सुस्त रहते थे तो घर में कोई कुछ नहीं कहता था. दवाई भी चल रही थी और सब कुछ ठीक सा था. लेकिन हमें क्या पता था कि कभी ऐसा कुछ हो जाएगा. किसी को भी कैसे पता चल सकता है कि कब क्या हो जाएगा."

अभियुक्त के पिता बच्चू सिंह चौधरी की साल 2007 में ड्यूटी पर ही मौत होने की वजह से चेतन सिंह को साल 2009 में रेलवे में नौकरी मिली थी.

प्रीति सिंह बताती हैं, "पहले इनके बच्चे और परिवार मध्य प्रदेश के उज्जैन में रहता था. लेकिन इनकी पोस्टिंग गुजरात में होने के बाद ये परिवार को वहां नहीं ले जा सके. परिवार को मथुरा छोड़ गए, जहां परिवार के दूसरे लोग भी रहते हैं."

चेतन सिंह के साथ ट्रेन में तैनात रहे कॉन्स्टेबल घनश्याम आचार्य ने गोली चलाने से पहले के घटनाक्रम को पुलिस के साथ साझा किया है, जिसे एनडीटीवी ने विस्तार से प्रकाशित किया है.

आचार्य ने बताया है कि वह सूरत रेलवे स्टेशन से चेतन सिंह चौधरी, एएसआई टीकाराम मीणा (58), कॉन्स्टेबल नरेंद्र परमार (58) के साथ सुबह 2:53 मिनट पर मुंबई जा रही ट्रेन में सवार हुए थे.

सिंह और मीणा की ड्यूटी एसी कोच में थी और परमार एवं आचार्य स्लीपर कोच में तैनात थे.

वह कहते हैं, "ट्रेन पर चढ़ने के आधे घंटे बाद मैं एएसआई मीणा को एक रिपोर्ट देने उनके कोच में पहुंचा. उस वक़्त चेतन सिंह और तीन टिकट इंस्पेक्टर उनके साथ थे. एएसआई मीणा ने कहा कि चेतन सिंह की तबीयत कुछ ठीक नहीं है. मैंने उन्हें छूकर देखा कि कहीं उन्हें बुखार तो नहीं आ रहा. लेकिन मुझे कुछ समझ नहीं आया. चेतन सिंह अगले स्टेशन पर उतर जाना चाहते थे. लेकिन मीणा कह रहे थे कि ड्यूटी के दो घंटे बाक़ी हैं."

आचार्य बताते हैं कि 'चेतन सिंह कुछ भी सुनने की स्थिति में नहीं थे. इसके बाद मीणा की ओर से हमारे इंस्पेक्टर को फ़ोन किया गया तो उन्होंने कहा कि मुंबई कंट्रोल रूम को सूचना दी जाए.

इसके बाद कंट्रोल रूम के अधिकारियों ने भी कहा कि चेतन को अपनी ड्यूटी पूरी करके मुंबई में इलाज कराना चाहिए. मीणा ने ये बात चेतन को समझाने की कोशिश की. लेकिन वह ये सब नहीं सुन रहे थे.'

इसके बाद मीणा ने चेतन के लिए कोल्ड ड्रिंक मंगाई लेकिन उन्होंने कोल्ड ड्रिंक नहीं पी.

अनसुलझे हैं कई सवाल

रेलवे पुलिस और उनके परिवार की ओर से जहां एक ओर चेतन सिंह चौहान की मानसिक स्थिति और बीमारी को लेकर जानकारी दी जा रही है.

लेकिन उनकी शख़्सियत को लेकर कई सवाल अब भी बने हुए हैं.

इसमें सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या रेलवे की ओर से उनकी तबीयत को ध्यान में रखते हुए क़दम उठाए गए थे या नहीं.

अगर ऐसा किया गया तो इस बारे में अब तक रेलवे की ओर से किसी तरह की जानकारी सामने क्यों नहीं आई है.

एक सवाल ये भी है कि अगर रेलवे इस बात से अवगत था कि चेतन सिंह चौहान मानसिक समस्याओं का सामना कर रहे हैं तो उनको हथियार देने का फ़ैसला किस आधार पर किया गया.

इस पूरी प्रक्रिया में एक अनसुलझा सवाल ये भी है कि अब तक बी5 कोच में क्या हुआ, उसे अपनी आंखों से देखने वाले तमाम यात्री सामने क्यों नहीं आए हैं.sabhar bbc.com 



आचार्य बताते हैं, "एएसआई मीणा ने मुझसे चेतन की रायफल लेकर उन्हें आराम कराने को कहा तो मैं चेतन को लेकर बी4 कोच गया और एक खाली सीट पर लेट जाने को कहा. मैं उनके साथ वाली सीट पर बैठ गया. लेकिन चेतन सिंह ज़्यादा देर सो नहीं सके.''

कुछ दस मिनट बाद उन्होंने ग़ुस्से में खड़े होकर अपनी रायफल मांगी. वह काफ़ी गुस्से में थे. उन्होंने मेरा गला दबाने की कोशिश की और मुझसे मेरी रायफल छीनकर चले गए.

चेतन सिंह के साथ ट्रेन में तैनात रहे कॉन्स्टेबल घनश्याम आचार्य ने गोली चलाने से पहले के घटनाक्रम को पुलिस के साथ साझा किया है, जिसे एनडीटीवी ने विस्तार से प्रकाशित किया है.

आचार्य ने बताया है कि वह सूरत रेलवे स्टेशन से चेतन सिंह चौधरी, एएसआई टीकाराम मीणा (58), कॉन्स्टेबल नरेंद्र परमार (58) के साथ सुबह 2:53 मिनट पर मुंबई जा रही ट्रेन में सवार हुए थे.

सिंह और मीणा की ड्यूटी एसी कोच में थी और परमार एवं आचार्य स्लीपर कोच में तैनात थे.

वह कहते हैं, "ट्रेन पर चढ़ने के आधे घंटे बाद मैं एएसआई मीणा को एक रिपोर्ट देने उनके कोच में पहुंचा. उस वक़्त चेतन सिंह और तीन टिकट इंस्पेक्टर उनके साथ थे. एएसआई मीणा ने कहा कि चेतन सिंह की तबीयत कुछ ठीक नहीं है. मैंने उन्हें छूकर देखा कि कहीं उन्हें बुखार तो नहीं आ रहा. लेकिन मुझे कुछ समझ नहीं आया. चेतन सिंह अगले स्टेशन पर उतर जाना चाहते थे. लेकिन मीणा कह रहे थे कि ड्यूटी के दो घंटे बाक़ी हैं."

आचार्य बताते हैं कि 'चेतन सिंह कुछ भी सुनने की स्थिति में नहीं थे. इसके बाद मीणा की ओर से हमारे इंस्पेक्टर को फ़ोन किया गया तो उन्होंने कहा कि मुंबई कंट्रोल रूम को सूचना दी जाए.

इसके बाद कंट्रोल रूम के अधिकारियों ने भी कहा कि चेतन को अपनी ड्यूटी पूरी करके मुंबई में इलाज कराना चाहिए. मीणा ने ये बात चेतन को समझाने की कोशिश की. लेकिन वह ये सब नहीं सुन रहे थे.'

इसके बाद मीणा ने चेतन के लिए कोल्ड ड्रिंक मंगाई लेकिन उन्होंने कोल्ड ड्रिंक नहीं पी.

आचार्य बताते हैं, "एएसआई मीणा ने मुझसे चेतन की रायफल लेकर उन्हें आराम कराने को कहा तो मैं चेतन को लेकर बी4 कोच गया और एक खाली सीट पर लेट जाने को कहा. मैं उनके साथ वाली सीट पर बैठ गया. लेकिन चेतन सिंह ज़्यादा देर सो नहीं सके.''

कुछ दस मिनट बाद उन्होंने ग़ुस्से में खड़े होकर अपनी रायफल मांगी. वह काफ़ी गुस्से में थे. उन्होंने मेरा गला दबाने की कोशिश की और मुझसे मेरी रायफल छीनकर चले गए."

घनश्याम आचार्य को जैसे ही इस बात का अहसास हुआ, वैसे ही उन्होंने अपने शीर्ष अधिकारियों को इस बारे में सूचित किया.

इसके बाद एएसआई मीणा और घनश्याम आचार्य चेतन सिंह चौधरी के पास पहुंचे और रायफल बदले जाने की बात बताई तो इस पर चेतन सिंह चौधरी ने आचार्य की रायफल वापस कर दी.

आचार्य बताते हैं, "चेतन सिंह का चेहरा ग़ुस्से में लाल था. एएसआई मीणा उन्हें समझाने की कोशिश कर रहे थे. लेकिन वह बहस कर रहा था. वह हमें सुन ही नहीं रहा था. ऐसे में मैं उस जगह से हट गया. लेकिन मैंने जाते-जाते उसे रायफल की सेफ़्टी ऑफ़ करते देखा, और मुझे समझ आ गया कि वह गोली चलाने की फिराक़ में है. मैंने एएसआई मीणा को इसकी जानकारी दी और उन्होंने चेतन सिंह चौधरी से शांत होने को कहा."

इसके बाद आचार्य को सुबह 5:25 मिनट पर ट्रेन के वैतरना स्टेशन पर पहुंचते ही आरपीएफ़ में काम करने वाले एक अन्य शख़्स का फ़ोन आया कि एएसआई मीणा को गोली मार दी गई है.

आचार्य कहते हैं, "एएसआई मीणा को गोली लगने की बात सुनते ही मैं कोच बी5 की ओर दौड़ा लेकिन डरे सहमे लोग कोच से भागने की कोशिश कर रहे थे. उन्होंने मुझे बताया कि चेतन सिंह ने एएसआई मीणा को गोली मार दी है. मैंने नरेंद्र परमार को फ़ोन करके उनका हालचाल लिया और कंट्रोल रूम को अलर्ट किया."



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Nitish Kumar को पटना HC से बड़ी राहत, जारी रहेगी जातीय जनगणना

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Tue. Aug 1st, 2023 08:39:57
    Nitish Kumar को पटना HC से बड़ी राहत, जारी रहेगी जातीय जनगणना

    विपक्ष को एकजुट करने की कोशिश में लगे बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) को पटना हाई कोर्ट (Patna High Court) से बड़ी राहत मिली है और कोर्ट ने जातीय गनगणना (Caste Census) पर रोक की मांग वाली अर्जी खारिज कर दी है. याचिकाकर्ताओं के वकील दीनू कुमार ने बताया कि पटना हाई कोर्ट ने जाति आधारित गणना के बिहार सरकार के फैसले के खिलाफ दायर सभी याचिकाएं खारिज कर दी हैं. इससे पहले पटना हाई कोर्ट ने 4 मई को जाति आधारित गणना के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए इस पर अस्थायी रोक लगाई थी.

    सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगे याचिकाकर्ता

    मामले में पटना हाई कोर्ट (Patna High Court) के चीफ जस्टिस के विनोद चंद्रन की अध्यक्षता वाली पीठ का फैसला आने के बाद अदालत के बाहर पत्रकारों से मुखातिब याचिकाकर्ताओं के वकील दीनू कुमार ने कहा कि वह आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट (Suprme Court) का रुख करेंगे. दीनू कुमार ने बताया, ‘पीठ ने खुली अदालत में कहा कि वह सभी याचिकाओं को खारिज कर रही है.’ उन्होंने कहा, ‘हमें अभी इस आदेश की प्रति प्राप्त नहीं हुई है. फैसला देखने के बाद ही हम कुछ और कह सकेंगे. बेशक, फैसले का तात्पर्य यह है कि राज्य सरकार सर्वेक्षण कर सकती है. हालांकि, हम इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगे.

    जातीय गनगणना के विरोध में है केंद्र सरकार

    बता दें कि नीतीश सरकार (Nitish Govt) ने जातीय जनगणना का प्रस्ताव बिहार विधानसभा और विधान परिषद में 18 फरवरी 2019 और फिर 27 फरवरी 2020 को पास कराया था. हालांकि, केंद्र सरकार जातीय गनगणना के विरोध में है और सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में हलफनामा दायर कर पहले ही साफ कर चुकी है कि जाति आधारित जनगणना नहीं कराई जाएगी.

    इसके बाद इस साल जनवरी में बिहार में जातीय जनगणना (Caste Census) के पहले चरण की शुरुआत की गई थी. जबकि, दूसरा चरण अप्रैल में शुरू हुआ. दूसरा चरण शुरू होने के बाद पटना हाई कोर्ट (Patna High Court) ने जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए जाति आधारित गणना पर अस्थायी रूप से रोक लगा दी थी.

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